Author: bharati

  • ब्राजील ने अमेरिकी अधिकारियों के वीजा आवेदन ठुकराए, चुनावी प्रक्रिया में संभावित दखल पर बढ़ी सख्ती

    ब्राजील ने अमेरिकी अधिकारियों के वीजा आवेदन ठुकराए, चुनावी प्रक्रिया में संभावित दखल पर बढ़ी सख्ती

    नई दिल्ली:  ब्राजील ने आगामी राष्ट्रपति चुनाव से पहले एक अहम कूटनीतिक निर्णय लेते हुए अमेरिकी विदेश विभाग के दो वरिष्ठ अधिकारियों के वीजा आवेदन अस्वीकार कर दिए हैं। सरकार को आशंका थी कि प्रस्तावित यात्रा से ऐसे समूहों को अप्रत्यक्ष समर्थन मिल सकता है जो देश की चुनावी व्यवस्था पर लगातार सवाल उठाते रहे हैं। इस फैसले ने चुनावी माहौल के बीच ब्राजील और अमेरिका के संबंधों को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है।

    वीजा आवेदन जिन अधिकारियों के अस्वीकार किए गए हैं, उनमें अमेरिकी विदेश विभाग के ब्यूरो ऑफ डेमोक्रेसी, ह्यूमन राइट्स एंड लेबर के सहायक सचिव रिले एम. बार्न्स और उपसहायक सचिव सैमुअल सैमसन शामिल हैं। दोनों अधिकारियों ने 20 जुलाई को ब्राजील यात्रा के लिए आवेदन किया था। प्रस्तावित कार्यक्रम के तहत वे कई प्रमुख राजनीतिक हस्तियों, चुनावी अधिकारियों और दक्षिणपंथी विचारधारा से जुड़े प्रतिनिधियों से मुलाकात करने वाले थे।

    जानकारी के अनुसार, दोनों अधिकारियों की यात्रा में पूर्व राष्ट्रपति जेयर बोल्सोनारो के बेटे और राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार फ्लावियो बोल्सोनारो से मुलाकात भी शामिल थी। इसके अलावा उनकी ब्राजील के सुपीरियर इलेक्टोरल कोर्ट के अधिकारियों तथा कुछ अन्य राजनीतिक समूहों से भी चर्चा की योजना थी। ब्राजील सरकार को आशंका थी कि इस तरह की मुलाकातों का असर चुनावी माहौल पर पड़ सकता है, इसलिए वीजा आवेदन स्वीकार नहीं किए गए।

    ब्राजील के विदेश मंत्रालय ने पुष्टि की कि दोनों अधिकारियों के आवेदन निर्धारित प्रक्रिया के तहत प्राप्त हुए थे और समीक्षा के बाद उन्हें अस्वीकार करने का निर्णय लिया गया। वहीं, इस पूरे घटनाक्रम पर अमेरिकी विदेश विभाग की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में दोनों देशों के बीच इस मुद्दे पर आगे क्या रुख अपनाया जाएगा, इस पर भी नजर बनी हुई है।

    ब्राजील में राष्ट्रपति चुनाव का पहला चरण 4 अक्टूबर को निर्धारित है। यदि किसी उम्मीदवार को आवश्यक बहुमत नहीं मिलता है तो दूसरे चरण का मतदान 25 अक्टूबर को कराया जाएगा। इस चुनाव में मौजूदा राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा और फ्लावियो बोल्सोनारो के बीच मुकाबले को देश की राजनीति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। चुनाव की संवेदनशीलता को देखते हुए सरकार विदेशी गतिविधियों और राजनीतिक संपर्कों पर विशेष सतर्कता बरत रही है।

    हाल के महीनों में ब्राजील और अमेरिका के संबंधों में कई मुद्दों को लेकर तनाव भी देखने को मिला है। पूर्व राष्ट्रपति जेयर बोल्सोनारो और उनके बेटे एडुआर्डो बोल्सोनारो ने मई के अंत में वॉशिंगटन का दौरा किया था, जहां उन्होंने अमेरिकी अधिकारियों और तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात की थी। इसके कुछ समय बाद अमेरिका ने ब्राजील के दो बड़े मादक पदार्थ तस्करी संगठनों को आतंकवादी संगठन घोषित किया और ब्राजील से आयात होने वाले हजारों उत्पादों पर 37.5 प्रतिशत तक अतिरिक्त शुल्क लगाने का फैसला किया।

    अमेरिका ने इन कदमों को व्यापारिक अनियमितताओं और जबरन श्रम से जुड़े आरोपों के संदर्भ में उचित बताया था। हालांकि ब्राजील सरकार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि ऐसे फैसलों का उद्देश्य देश के राजनीतिक माहौल को प्रभावित करना हो सकता है। सरकार का मानना है कि चुनाव के समय किसी भी प्रकार के बाहरी प्रभाव से लोकतांत्रिक प्रक्रिया की निष्पक्षता प्रभावित हो सकती है।

    ब्राजील में इलेक्ट्रॉनिक मतदान प्रणाली भी लंबे समय से राजनीतिक बहस का विषय रही है। पूर्व राष्ट्रपति जेयर बोल्सोनारो कई अवसरों पर इसकी विश्वसनीयता पर सवाल उठा चुके हैं, हालांकि उन्होंने अपने दावों के समर्थन में कोई ठोस प्रमाण सार्वजनिक नहीं किया। दूसरी ओर चुनावी अधिकारियों ने लगातार स्पष्ट किया है कि देश की इलेक्ट्रॉनिक मतदान प्रणाली सुरक्षित, पारदर्शी और विश्वसनीय है। ऐसे माहौल में अमेरिकी अधिकारियों के वीजा आवेदन अस्वीकार करने का फैसला चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक कदम माना जा रहा है।

  • ईरान पर अमेरिका ने रोके रात के हवाई हमले, उपराष्ट्रपति वेंस और जनरल कैन ने युद्ध के विस्तार पर जताई गंभीर चिंता

    ईरान पर अमेरिका ने रोके रात के हवाई हमले, उपराष्ट्रपति वेंस और जनरल कैन ने युद्ध के विस्तार पर जताई गंभीर चिंता

    नई दिल्ली । अमेरिका ने ईरान के खिलाफ पिछले कई दिनों से जारी रात के हवाई हमलों को फिलहाल रोक दिया है। इस फैसले के साथ ही वाशिंगटन में युद्ध के संभावित विस्तार, सैन्य संसाधनों की उपलब्धता और कूटनीतिक विकल्पों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। अमेरिकी प्रशासन के भीतर हुई उच्चस्तरीय बैठकों में सुरक्षा, रणनीति और क्षेत्रीय स्थिरता से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विचार किया गया, जिसके बाद अभियान को अस्थायी रूप से रोकने का निर्णय सामने आया।

    जानकारी के अनुसार, व्हाइट हाउस में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अध्यक्षता में हुई एक महत्वपूर्ण बैठक में उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल डैन केन तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। बैठक के दौरान ईरान के खिलाफ जारी सैन्य कार्रवाई के प्रभाव, संभावित जोखिम और आगे की रणनीति पर विस्तार से चर्चा हुई। इसी क्रम में अभियान को कुछ समय के लिए रोकने का फैसला किया गया।

    बताया गया कि अमेरिकी सेना ने लगभग दो सप्ताह तक लगातार रात के समय सैन्य अभियान चलाया था। इसके बाद रक्षा प्रतिष्ठान की ओर से संकेत मिला कि फिलहाल सभी अभियान ‘होल्ड’ पर रखे गए हैं। हालांकि प्रशासन की ओर से यह स्पष्ट नहीं किया गया कि यह निर्णय स्थायी है या परिस्थितियों के अनुसार भविष्य में इसमें बदलाव किया जा सकता है।

    बैठक के दौरान जनरल डैन केन ने विशेष रूप से सैन्य हथियारों के भंडार और लंबे समय तक अभियान जारी रहने के संभावित प्रभावों को लेकर चिंता व्यक्त की। उन्होंने उपलब्ध सैन्य विकल्पों की प्रभावशीलता पर विश्वास जताते हुए यह भी कहा कि किसी भी आगे की कार्रवाई से पहले उसके व्यापक परिणामों का गंभीरता से आकलन किया जाना आवश्यक है। माना जा रहा है कि इस मुद्दे पर विस्तृत चर्चा के बाद ही सैन्य अभियान को अस्थायी रूप से रोकने का निर्णय लिया गया।

    सूत्रों के अनुसार, हथियारों के भंडार की स्थिति बैठक में उठाए गए कई महत्वपूर्ण विषयों में से एक थी। हालांकि यह स्पष्ट नहीं किया गया कि यही कारण अंतिम निर्णय का आधार बना या फिर क्षेत्रीय तनाव बढ़ने की आशंका और अन्य रणनीतिक कारकों ने भी इसमें भूमिका निभाई। अमेरिकी प्रशासन ने इस संबंध में विस्तृत आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की है।

    व्हाइट हाउस की ओर से जारी बयान में कहा गया कि अमेरिका अब भी कूटनीतिक समाधान को प्राथमिकता देता है। प्रशासन का कहना है कि यदि ईरान क्षेत्र में तनाव बढ़ाने वाली गतिविधियां जारी रखता है या अपने सहयोगियों के माध्यम से सुरक्षा चुनौतियां उत्पन्न करता है, तो अमेरिका के पास सभी विकल्प उपलब्ध रहेंगे। साथ ही यह भी संकेत दिया गया कि प्रतिबंधों और सैन्य दबाव के बाद ईरान के लिए बातचीत का रास्ता अपनाना अधिक व्यावहारिक होगा।

    बैठक के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि अमेरिकी अधिकारी ईरान के साथ संपर्क बनाए हुए हैं और विभिन्न स्तरों पर संवाद जारी है। उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य की रणनीति परिस्थितियों पर निर्भर करेगी। यदि आवश्यक हुआ तो सैन्य अभियान दोबारा शुरू किया जा सकता है या उसकी तीव्रता भी बढ़ाई जा सकती है। उनके अनुसार, मौजूदा बातचीत में ईरान पहले की तुलना में अधिक गंभीर रुख अपनाता दिखाई दे रहा है।

    अमेरिका के इस कदम को पश्चिम एशिया की बदलती सुरक्षा स्थिति के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। फिलहाल दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि कूटनीतिक प्रयास कितने सफल होते हैं और आने वाले दिनों में दोनों देशों के बीच तनाव कम होता है या सैन्य गतिविधियां फिर से तेज होती हैं। ऐसे में क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक सुरक्षा पर इस घटनाक्रम का प्रभाव लगातार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है।

  • कुंडली के अनुसार पहनें ये शक्तिशाली रत्न पन्ना पुखराज और माणिक्य से मिल सकता है सफलता और आत्मविश्वास

    कुंडली के अनुसार पहनें ये शक्तिशाली रत्न पन्ना पुखराज और माणिक्य से मिल सकता है सफलता और आत्मविश्वास


    नई दिल्ली। रत्नशास्त्र में कई ऐसे रत्न बताए गए हैं जिनके बारे में मान्यता है कि वे ग्रहों के शुभ प्रभाव को मजबूत करने में सहायक हो सकते हैं। इनमें पन्ना पुखराज और माणिक्य को सबसे प्रभावशाली रत्नों में गिना जाता है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार यदि इन्हें सही व्यक्ति सही विधि और उचित सलाह के बाद धारण किया जाए तो इनका प्रभाव अपेक्षाकृत जल्दी दिखाई दे सकता है। हालांकि यह ध्यान रखना जरूरी है कि इन दावों का वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है और इन्हें आस्था तथा पारंपरिक मान्यताओं के संदर्भ में ही देखा जाता है।

    पन्ना को बुध ग्रह का रत्न माना जाता है। ज्योतिष के अनुसार बुध का संबंध बुद्धिमत्ता तर्क क्षमता संवाद कौशल और व्यापारिक समझ से जोड़ा जाता है। ऐसी मान्यता है कि जिन लोगों की कुंडली में बुध कमजोर होता है उन्हें विशेषज्ञ की सलाह के बाद पन्ना धारण करने की सलाह दी जाती है। माना जाता है कि इससे एकाग्रता बेहतर हो सकती है और पढ़ाई व्यापार तथा संचार से जुड़े कार्यों में आत्मविश्वास बढ़ सकता है। यही कारण है कि विद्यार्थी और व्यवसाय से जुड़े लोग इस रत्न में विशेष रुचि रखते हैं।

    पुखराज का संबंध गुरु ग्रह से माना जाता है। रत्नशास्त्र में गुरु को ज्ञान भाग्य शिक्षा और वैवाहिक सुख का कारक बताया गया है। मान्यता है कि कुंडली में गुरु की अनुकूल स्थिति मजबूत करने के लिए पुखराज धारण किया जाता है। कई लोग विश्वास करते हैं कि इससे आत्मविश्वास बढ़ता है और करियर तथा वैवाहिक जीवन में सकारात्मक अवसर मिल सकते हैं। हालांकि इसका प्रभाव व्यक्ति की कुंडली और ग्रहों की स्थिति पर निर्भर माना जाता है।

    माणिक्य जिसे रुबी भी कहा जाता है सूर्य ग्रह का रत्न माना जाता है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार सूर्य नेतृत्व क्षमता आत्मसम्मान और निर्णय लेने की शक्ति का प्रतीक है। माना जाता है कि उचित सलाह के बाद माणिक्य धारण करने से आत्मविश्वास में वृद्धि हो सकती है और व्यक्ति अपने निर्णय अधिक मजबूती से ले पाता है। प्रशासनिक सेवा प्रबंधन और नेतृत्व से जुड़े क्षेत्रों में कार्य करने वाले लोग अक्सर इस रत्न के बारे में जानकारी लेते हैं।

    रत्नशास्त्र में यह भी कहा जाता है कि पन्ना पुखराज और माणिक्य सकारात्मक सोच को बढ़ावा देने और नकारात्मकता को कम करने में सहायक हो सकते हैं। हालांकि हर व्यक्ति पर इनका प्रभाव समान नहीं माना जाता। ज्योतिषियों के अनुसार किसी भी रत्न का चयन व्यक्ति की जन्म कुंडली ग्रहों की स्थिति और दशा के आधार पर ही किया जाना चाहिए।

    विशेषज्ञों का मानना है कि बिना उचित सलाह के कोई भी रत्न धारण नहीं करना चाहिए। यदि कोई रत्न आपकी कुंडली के अनुकूल नहीं है तो पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार उसका अपेक्षित लाभ नहीं मिल सकता और प्रतिकूल प्रभाव की आशंका भी बताई जाती है। इसलिए किसी योग्य और अनुभवी ज्योतिषी से परामर्श करने के बाद ही रत्न धारण करना अधिक उचित माना जाता है।

  • नेतन्याहू की गिरफ्तारी पर कानूनी अधिकार न होने की बात मानने के बाद भी घिरे ममदानी, यहूदी समुदाय की चिंताएं बरकरार

    नेतन्याहू की गिरफ्तारी पर कानूनी अधिकार न होने की बात मानने के बाद भी घिरे ममदानी, यहूदी समुदाय की चिंताएं बरकरार

    नई दिल्ली ।न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी के हालिया बयान ने एक बार फिर इजरायल और यहूदी समुदाय से जुड़े राजनीतिक विवाद को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। ममदानी ने स्पष्ट किया है कि उनके पास इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को गिरफ्तार करने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है। हालांकि, इस स्वीकारोक्ति के बावजूद उनके पूर्व बयानों और इजरायल को लेकर उनके रुख पर उठ रहे सवाल अभी भी शांत नहीं हुए हैं।

    ममदानी ने हाल ही में जारी एक वीडियो संदेश में कहा कि न्यूयॉर्क सिटी प्रशासन के पास किसी विदेशी राष्ट्राध्यक्ष या प्रधानमंत्री की गिरफ्तारी का अधिकार नहीं है। साथ ही उन्होंने यह भी दोहराया कि उनके अनुसार नेतन्याहू को अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (आईसीसी) के वारंट के तहत जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर नई बहस शुरू हो गई।

    यह मुद्दा इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि मेयर चुनाव अभियान के दौरान ममदानी ने नेतन्याहू की संभावित गिरफ्तारी का उल्लेख किया था। उस समय कई कानूनी विशेषज्ञों ने कहा था कि न्यूयॉर्क के मेयर के पास ऐसा कोई संवैधानिक या कानूनी अधिकार नहीं है। अब स्वयं ममदानी ने भी इस सीमा को स्वीकार किया है, लेकिन उनके पहले दिए गए बयानों को लेकर विवाद समाप्त नहीं हुआ है।

    न्यूयॉर्क के यहूदी समुदाय के कई प्रतिनिधियों ने कहा है कि मौजूदा स्पष्टीकरण उनकी चिंताओं को दूर करने के लिए पर्याप्त नहीं है। उनका मानना है कि ऐसे बयान ऐसे समय में सामने आए हैं, जब यहूदी विरोधी घटनाओं और सामाजिक तनाव को लेकर पहले से ही संवेदनशील माहौल बना हुआ है। समुदाय के कुछ नेताओं ने आशंका जताई कि सार्वजनिक पद पर बैठे लोगों के बयान समाज में मतभेद और अविश्वास को बढ़ा सकते हैं।

    कई यहूदी संगठनों के प्रतिनिधियों ने हाल के वर्षों में इजरायल-हमास संघर्ष के दौरान हुए प्रदर्शनों का उल्लेख करते हुए कहा कि सार्वजनिक विमर्श में जिम्मेदारी और संतुलन बनाए रखना आवश्यक है। उनका कहना है कि राजनीतिक नेताओं के शब्दों का व्यापक प्रभाव पड़ता है और किसी भी बयान को ऐसे संदर्भ में देखा जाता है, जहां सामाजिक सौहार्द और सामुदायिक विश्वास प्रभावित हो सकता है।

    दूसरी ओर, इजरायली नेताओं की ओर से भी ममदानी के रुख पर प्रतिक्रिया सामने आई है। उन्होंने न्यूयॉर्क में रहने वाले यहूदी समुदाय की सुरक्षा और उनके प्रति बढ़ती चिंताओं का उल्लेख करते हुए ऐसे बयानों पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि सार्वजनिक जीवन में संवेदनशील अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर टिप्पणी करते समय सभी पक्षों के हितों और सामाजिक प्रभावों का ध्यान रखा जाना चाहिए।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद केवल एक कानूनी प्रश्न तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय राजनीति, स्थानीय नेतृत्व और सामुदायिक संबंधों से भी जुड़ गया है। ऐसे मामलों में विभिन्न पक्षों के अलग-अलग दृष्टिकोण सामने आते हैं, जिससे सार्वजनिक बहस और तेज हो जाती है। फिलहाल ममदानी के स्पष्टीकरण के बावजूद यह मुद्दा न्यूयॉर्क की राजनीति और यहूदी समुदाय के साथ उनके संबंधों को लेकर चर्चा का विषय बना हुआ है।

  • घुटने की सफल सर्जरी के बाद अस्पताल में भर्ती नंदमुरी बालकृष्ण, स्वास्थ्य जानने पहुंचे मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू

    घुटने की सफल सर्जरी के बाद अस्पताल में भर्ती नंदमुरी बालकृष्ण, स्वास्थ्य जानने पहुंचे मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू

    नई दिल्ली । अभिनेता और आंध्र प्रदेश की राजनीति के प्रमुख चेहरों में शामिल नंदमुरी बालकृष्ण इन दिनों हैदराबाद के एक अस्पताल में उपचाराधीन हैं। हाल ही में एक फिल्म की शूटिंग के दौरान उनके घुटने में गंभीर चोट लगने के बाद उनकी सर्जरी की गई। ऑपरेशन के बाद उनकी स्वास्थ्य स्थिति स्थिर बताई जा रही है। इस बीच आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू अस्पताल पहुंचे और उनसे मुलाकात कर स्वास्थ्य की जानकारी ली। उन्होंने चिकित्सकों से भी उपचार और रिकवरी की पूरी प्रक्रिया पर विस्तार से चर्चा की।

    मुख्यमंत्री का अस्पताल पहुंचना केवल औपचारिक मुलाकात नहीं रहा, बल्कि उन्होंने डॉक्टरों से सर्जरी की सफलता, वर्तमान स्वास्थ्य स्थिति और आगे की चिकित्सा योजना के बारे में भी जानकारी प्राप्त की। नंदमुरी बालकृष्ण तेलुगु देशम पार्टी के वरिष्ठ नेता होने के साथ-साथ मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू के पारिवारिक संबंधी भी हैं। अस्पताल में दोनों के बीच कुछ समय तक बातचीत हुई, जिसके बाद मुख्यमंत्री ने चिकित्सकीय टीम से विस्तार से चर्चा की।

    जानकारी के अनुसार, 21 जुलाई को राजमुंदरी में अपनी नई फिल्म की शूटिंग के दौरान एक दृश्य फिल्माते समय बालकृष्ण के घुटने में गंभीर चोट लगी थी। शुरुआती उपचार वहीं किया गया, लेकिन जांच में चोट अधिक गंभीर होने का संकेत मिलने पर अगले दिन उन्हें एयर एंबुलेंस के जरिए हैदराबाद लाया गया। यहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में उनका विस्तृत परीक्षण किया गया और आवश्यक मेडिकल जांच कराई गई।

    चिकित्सकीय जांच में सामने आया कि उनके बाएं पैर के क्वाड्रिसेप्स टेंडन को गंभीर नुकसान पहुंचा है। यह टेंडन जांघ की प्रमुख मांसपेशी को घुटने से जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य करता है और चलने-फिरने तथा पैर को सीधा करने में अहम भूमिका निभाता है। इसके अलावा घुटने के दोनों ओर मौजूद सहायक ऊतकों में भी चोट की पुष्टि हुई। डॉक्टरों ने सभी रिपोर्टों का मूल्यांकन करने के बाद सर्जरी को सबसे उपयुक्त उपचार माना।

    23 जुलाई को विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम ने उनका ऑपरेशन किया। लगभग तीन घंटे तक चली यह सर्जरी सफल रही। ऑपरेशन के बाद जारी मेडिकल जानकारी के अनुसार, बालकृष्ण की स्थिति संतोषजनक है और उन्हें पोस्ट-ऑपरेटिव ऑब्जर्वेशन में रखा गया है। चिकित्सक लगातार उनकी रिकवरी की निगरानी कर रहे हैं और आवश्यक उपचार जारी है। स्वास्थ्य में सुधार के साथ आगे पुनर्वास प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी, ताकि वह सामान्य गतिविधियों में सुरक्षित रूप से लौट सकें।

    बालकृष्ण के अस्पताल में भर्ती होने की खबर सामने आने के बाद उनके प्रशंसकों, समर्थकों और राजनीतिक सहयोगियों ने उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की। आंध्र प्रदेश सरकार में मानव संसाधन विकास, सूचना प्रौद्योगिकी और इलेक्ट्रॉनिक्स मंत्री नारा लोकेश ने भी फोन पर उनसे बातचीत कर उनका हालचाल जाना और जल्द स्वस्थ होने की शुभकामनाएं दीं। फिल्म जगत और राजनीतिक क्षेत्र से जुड़े कई लोगों ने भी उनके स्वास्थ्य लाभ की कामना व्यक्त की है।

    नंदमुरी बालकृष्ण लंबे समय से तेलुगु सिनेमा और सार्वजनिक जीवन में सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं। ऐसे में उनके स्वास्थ्य को लेकर प्रशंसकों के बीच लगातार उत्सुकता बनी हुई है। चिकित्सकों का कहना है कि फिलहाल उनकी हालत स्थिर है और रिकवरी की प्रक्रिया संतोषजनक ढंग से आगे बढ़ रही है। आने वाले दिनों में उनकी सेहत में सुधार के आधार पर आगे की चिकित्सकीय योजना तय की जाएगी।

  • अभिनेता से अंतरराष्ट्रीय रग्बी खिलाड़ी और समाजसेवी तक, राहुल बोस का बहुआयामी जीवन प्रेरणा का उदाहरण

    अभिनेता से अंतरराष्ट्रीय रग्बी खिलाड़ी और समाजसेवी तक, राहुल बोस का बहुआयामी जीवन प्रेरणा का उदाहरण

    नई दिल्ली । भारतीय सिनेमा में अपनी गंभीर और प्रभावशाली अभिनय शैली के लिए पहचाने जाने वाले राहुल बोस का व्यक्तित्व केवल फिल्मों तक सीमित नहीं है। अभिनेता, फिल्म निर्माता, अंतरराष्ट्रीय रग्बी खिलाड़ी और समाजसेवी के रूप में उन्होंने अलग-अलग क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देकर एक बहुआयामी पहचान बनाई है। 27 जुलाई 1967 को कोलकाता में जन्मे राहुल बोस ने अपने जीवन की दिशा केवल मनोरंजन जगत तक सीमित नहीं रखी, बल्कि खेल और सामाजिक सरोकारों को भी बराबर महत्व दिया।

    राहुल बोस की शुरुआती शिक्षा कोलकाता के प्रतिष्ठित स्कूल में हुई, जिसके बाद उन्होंने मुंबई के सिडेनहैम कॉलेज से उच्च शिक्षा प्राप्त की। बचपन में उनकी मां ने उन्हें बॉक्सिंग और रग्बी जैसे खेलों से परिचित कराया। इसी दौरान उन्होंने क्रिकेट का प्रशिक्षण भी लिया और बॉक्सिंग प्रतियोगिता में रजत पदक हासिल किया। हालांकि आगे चलकर रग्बी उनका सबसे बड़ा जुनून बन गया और उन्होंने इसी खेल में देश का प्रतिनिधित्व करने का निर्णय लिया।

    वर्ष 1998 से 2009 तक राहुल बोस भारतीय राष्ट्रीय रग्बी टीम का हिस्सा रहे और लगभग 11 वर्षों तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व किया। अभिनय के व्यस्त कार्यक्रम के बावजूद उन्होंने अपने फिल्मी काम और खेल के बीच संतुलन बनाए रखा। बताया जाता है कि इस दौरान उन्होंने अपनी फिल्मों की शूटिंग भी रग्बी प्रतियोगिताओं और प्रशिक्षण कार्यक्रमों के अनुसार तय की, जिससे दोनों क्षेत्रों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता स्पष्ट होती है।

    रग्बी से उनका जुड़ाव खिलाड़ी के रूप में ही समाप्त नहीं हुआ। बाद के वर्षों में उन्होंने खेल के विकास के लिए प्रशासनिक जिम्मेदारी भी संभाली। भारतीय महिला रग्बी टीम की उपलब्धियों और देश में खेल को नई पहचान मिलने के दौर में उन्होंने रग्बी इंडिया के अध्यक्ष के रूप में भी जिम्मेदारी निभाई। इस भूमिका में उन्होंने खेल के विस्तार और युवा खिलाड़ियों को बेहतर अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में सक्रिय योगदान दिया।

    अभिनय की दुनिया में राहुल बोस ने बचपन में स्कूल के एक नाटक से शुरुआत की थी। बाद में विज्ञापन क्षेत्र में कॉपीराइटर के रूप में कार्य करते हुए उन्होंने फिल्मों की ओर कदम बढ़ाया। पहली ही प्रमुख फिल्म की सफलता के बाद उन्होंने अभिनय को पूर्णकालिक पेशा बना लिया। उन्होंने हमेशा ऐसी फिल्मों को प्राथमिकता दी जिनमें मजबूत कहानी, सामाजिक संदेश और सशक्त अभिनय की गुंजाइश हो। यही कारण रहा कि उन्होंने समानांतर सिनेमा में अपनी अलग पहचान बनाई और कई चर्चित फिल्मों में अपने अभिनय से दर्शकों और समीक्षकों की सराहना हासिल की।

    राहुल बोस ने निर्देशन के क्षेत्र में भी अपनी प्रतिभा दिखाई। उनकी पहली निर्देशित फिल्म को सीमित संसाधनों के बावजूद पूरा किया गया और बाद में उन्होंने एक ऐसी प्रेरणादायक जीवनी पर आधारित फिल्म बनाई, जिसमें कम उम्र में माउंट एवरेस्ट फतह करने वाली भारतीय बालिका की उपलब्धि को पर्दे पर प्रस्तुत किया गया। उनके निर्देशन में भी सामाजिक संवेदनशीलता और प्रेरक विषयों की स्पष्ट झलक दिखाई देती है।

    सिनेमा और खेल के साथ-साथ समाज सेवा राहुल बोस के जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा रही है। वर्ष 2004 की सुनामी के दौरान राहत कार्यों में भाग लेने के बाद उन्होंने समाज के वंचित वर्गों के लिए स्थायी रूप से काम करने का संकल्प लिया। इसी उद्देश्य से उन्होंने एक सामाजिक संस्था की स्थापना की, जिसके माध्यम से दूरदराज और संसाधनों से वंचित क्षेत्रों के प्रतिभाशाली बच्चों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है। साथ ही बाल यौन शोषण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए हजारों शिक्षकों, अभिभावकों और विद्यार्थियों को प्रशिक्षित करने जैसे अभियान भी संचालित किए गए हैं। अभिनय, खेल और सामाजिक जिम्मेदारी के बीच संतुलन बनाकर राहुल बोस ने यह साबित किया है कि सफलता केवल उपलब्धियों से नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने से भी मापी जाती है।

  • प्रह्लाद जोशी ने संभाली शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी, पहले दिन वरिष्ठ अधिकारियों संग शिक्षा सुधारों पर मंथन

    प्रह्लाद जोशी ने संभाली शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी, पहले दिन वरिष्ठ अधिकारियों संग शिक्षा सुधारों पर मंथन

    नई दिल्ली । केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने रविवार को केंद्रीय शिक्षा मंत्री के रूप में कार्यभार संभाल लिया। मंत्रालय की जिम्मेदारी ग्रहण करने के तुरंत बाद उन्होंने शिक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय बैठक कर विभाग की मौजूदा स्थिति, प्राथमिकताओं और आगे की कार्ययोजना पर विस्तृत चर्चा की। ऐसे समय में उन्हें यह अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी गई है, जब देश में शिक्षा व्यवस्था, प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता और राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर व्यापक विमर्श जारी है।

    पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा स्वीकार किए जाने के बाद प्रधानमंत्री की सलाह पर प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार दिया गया। कार्यभार संभालने के बाद उन्होंने मंत्रालय के शीर्ष अधिकारियों से विभिन्न योजनाओं, लंबित मामलों और आगामी कार्यक्रमों की जानकारी ली। मंत्रालय के लिए यह शुरुआती बैठक आगे की नीतिगत दिशा तय करने की दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

    देश की शिक्षा व्यवस्था में हाल के वर्षों में कई बड़े बदलाव हुए हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के विभिन्न प्रावधानों को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है। ऐसे में नए शिक्षा मंत्री के सामने इन सुधारों को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाने, राज्यों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करने और शिक्षा से जुड़े कार्यक्रमों की गति बनाए रखने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होगी। विद्यालयी शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा और अनुसंधान तक अनेक क्षेत्रों में नीतिगत निर्णयों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

    प्रह्लाद जोशी केंद्र सरकार के अनुभवी मंत्रियों में शामिल हैं। वह पहले से ही उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण तथा नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय की जिम्मेदारियां निभा रहे हैं। इसके अतिरिक्त वह संसदीय कार्य, कोयला और खान मंत्रालय जैसे महत्वपूर्ण विभागों का नेतृत्व भी कर चुके हैं। लंबे प्रशासनिक अनुभव और संसदीय कार्यप्रणाली की गहरी समझ के कारण उन्हें सरकार में लगातार महत्वपूर्ण दायित्व सौंपे जाते रहे हैं।

    कर्नाटक की धारवाड़ लोकसभा सीट से लगातार पांच बार सांसद चुने जा चुके प्रह्लाद जोशी को संगठनात्मक क्षमता और प्रभावी प्रशासनिक शैली के लिए भी जाना जाता है। शिक्षा मंत्रालय की नई जिम्मेदारी के साथ अब उनसे ऐसी नीतियों को आगे बढ़ाने की अपेक्षा की जा रही है, जो विद्यार्थियों, शिक्षकों और शैक्षणिक संस्थानों के लिए अधिक प्रभावी और परिणामकारी साबित हों।

    मंत्रालय के सामने सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता को और मजबूत करना, परीक्षा प्रक्रिया में भरोसा कायम रखना तथा तकनीक आधारित मूल्यांकन प्रणाली को अधिक प्रभावी बनाना शामिल माना जा रहा है। इसके साथ ही उच्च शिक्षा संस्थानों में अनुसंधान को प्रोत्साहन, डिजिटल शिक्षा का विस्तार, कौशल आधारित शिक्षा को बढ़ावा और विद्यालयी शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार भी आगामी कार्ययोजना का अहम हिस्सा रह सकते हैं।

    कार्यभार संभालने के साथ ही मंत्रालय में प्रारंभिक समीक्षा बैठकों का दौर शुरू हो गया है। माना जा रहा है कि आने वाले समय में शिक्षा मंत्रालय परीक्षा सुधार, विश्वविद्यालयों के विकास, अनुसंधान को बढ़ावा देने और विद्यार्थियों से जुड़े लंबित विषयों पर तेजी से निर्णय लेने की दिशा में आगे बढ़ेगा। शिक्षा क्षेत्र से जुड़े सभी पक्षों की निगाह अब इस बात पर रहेगी कि नए शिक्षा मंत्री अपने अनुभव के आधार पर शिक्षा प्रणाली में सुधारों को किस गति और प्रभावशीलता के साथ आगे बढ़ाते हैं।

  • कारगिल विजय दिवस पर देश ने याद किया वीरों का शौर्य, जयशंकर और राजनाथ सिंह ने बलिदान को दी भावपूर्ण श्रद्धांजलि

    कारगिल विजय दिवस पर देश ने याद किया वीरों का शौर्य, जयशंकर और राजनाथ सिंह ने बलिदान को दी भावपूर्ण श्रद्धांजलि

    नई दिल्ली । देश ने रविवार को 27वां कारगिल विजय दिवस पूरे सम्मान और गर्व के साथ मनाया। इस अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह सहित कई वरिष्ठ नेताओं ने कारगिल युद्ध के वीर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने भी देश की रक्षा में सर्वोच्च बलिदान देने वाले सैनिकों के अदम्य साहस और समर्पण को नमन करते हुए कहा कि उनका शौर्य आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा।

    विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने कारगिल विजय दिवस के अवसर पर अपने संदेश में कहा कि यह दिन उन बहादुर सैनिकों के साहस, कर्तव्यनिष्ठा और राष्ट्रभक्ति को याद करने का अवसर है, जिन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी देश की सीमाओं की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया। उन्होंने कहा कि भारतीय सैनिकों की सेवा और त्याग को देश हमेशा सम्मान और गर्व के साथ याद रखेगा। उनके अनुसार कारगिल के वीरों की गाथा केवल सैन्य इतिहास का हिस्सा नहीं, बल्कि राष्ट्रीय संकल्प और आत्मविश्वास की पहचान भी है।

    कारगिल विजय दिवस भारत की उस ऐतिहासिक जीत की याद दिलाता है, जब वर्ष 1999 में भारतीय सेना ने दुर्गम पर्वतीय क्षेत्रों में कठिन परिस्थितियों का सामना करते हुए दुश्मन के कब्जे से रणनीतिक चोटियों को दोबारा अपने नियंत्रण में लिया था। बर्फ से ढकी ऊंची पहाड़ियों, प्रतिकूल मौसम और लगातार हो रही गोलाबारी के बीच भारतीय जवानों ने अद्वितीय साहस, धैर्य और दृढ़ संकल्प का परिचय दिया। 26 जुलाई को मिली इस विजय ने भारतीय सेना की क्षमता और राष्ट्र की एकजुटता का संदेश पूरी दुनिया तक पहुंचाया।

    कारगिल विजय दिवस के अवसर पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कारगिल युद्ध स्मारक पहुंचकर वीर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने ध्वजारोहण समारोह में भाग लिया और शौर्य विजय यात्रा के समापन कार्यक्रम में भी शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने भारतीय सेना के जवानों को संबोधित करते हुए कहा कि कारगिल युद्ध स्मारक पर लहराता तिरंगा उन वीर सैनिकों के अद्वितीय बलिदान का प्रतीक है, जिन्होंने राष्ट्र की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए।

    रक्षा मंत्री ने कहा कि वर्ष 1999 में भारतीय सीमा पर हुई घुसपैठ का भारतीय सेना ने अदम्य साहस और रणनीतिक कौशल के साथ जवाब दिया। उन्होंने कहा कि दुश्मन ने कठिन भौगोलिक परिस्थितियों का लाभ उठाने की कोशिश की थी, लेकिन भारतीय सैनिकों ने असाधारण वीरता का परिचय देते हुए सभी चुनौतियों को परास्त कर दिया। उन्होंने कहा कि कारगिल के योद्धाओं ने केवल ऊंची चोटियां ही नहीं जीतीं, बल्कि पूरे देश का विश्वास और सम्मान भी मजबूत किया।

    राजनाथ सिंह ने कैप्टन विक्रम बत्रा, कैप्टन मनोज पांडे सहित अनेक वीर सैनिकों के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी वीरगाथाएं आज भी देश के युवाओं को राष्ट्रसेवा, कर्तव्य और त्याग का संदेश देती हैं। उन्होंने कहा कि कारगिल विजय दिवस केवल एक सैन्य जीत का स्मरण नहीं है, बल्कि यह हर नागरिक को देश के प्रति अपने दायित्वों का एहसास कराने वाला अवसर भी है। उनके अनुसार सेवा, समर्पण और बलिदान जैसे मूल्य ही किसी भी मजबूत राष्ट्र की आधारशिला होते हैं।

    उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय सशस्त्र बल लगातार देश की सुरक्षा के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रहे हैं और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े हर मोर्चे पर सजग हैं। कारगिल विजय दिवस के अवसर पर पूरे देश ने वीर शहीदों के अद्वितीय योगदान को स्मरण करते हुए उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त की। यह दिवस एक बार फिर देशवासियों को राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने और वीर सैनिकों के बलिदान से प्रेरणा लेने का संदेश देता है।

  • नरसिंहपुर हाईवे कांड का सनसनीखेज खुलासा, अवैध रेत कारोबार की दुश्मनी में हाईवा से कुचलकर ली गई पांच जानें

    नरसिंहपुर हाईवे कांड का सनसनीखेज खुलासा, अवैध रेत कारोबार की दुश्मनी में हाईवा से कुचलकर ली गई पांच जानें


    नरसिंहपुर मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर जिले में 19 जुलाई को जबलपुर भोपाल नेशनल हाईवे पर हुए भीषण सड़क हादसे की गुत्थी पुलिस ने सुलझा ली है। शुरुआती जांच में जिसे सामान्य सड़क दुर्घटना माना जा रहा था वह दरअसल अवैध रेत कारोबार की खूनी रंजिश का नतीजा निकला। छह दिन तक चली गहन जांच के बाद पुलिस ने खुलासा किया कि यह हादसा नहीं बल्कि सुनियोजित सामूहिक हत्या थी जिसे दुर्घटना का रूप देने की पूरी तैयारी पहले से कर ली गई थी। इस सनसनीखेज मामले में मुख्य आरोपी शहपुरा जनपद पंचायत सदस्य आनंद पटेल समेत आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया है जबकि तीन अन्य आरोपी अभी भी फरार हैं जिनकी तलाश जारी है।

    पुलिस के मुताबिक अवैध रेत खनन और परिवहन के कारोबार में वर्चस्व स्थापित करने के लिए कारोबारी राजेंद्र लोधी को रास्ते से हटाने की साजिश रची गई थी। वारदात वाले दिन आरोपियों ने राजेंद्र लोधी की हर गतिविधि पर नजर रखी। उसकी लोकेशन लगातार मुख्य आरोपी तक पहुंचाई जाती रही। जैसे ही राजेंद्र अपने साथियों के साथ तय स्थान पर पहुंचा वैसे ही पहले से हाईवे के दोनों ओर खड़े हाईवा वाहनों ने उनकी गाड़ी को घेर लिया और कुचल दिया। इस हमले में राजेंद्र लोधी सहित पांच लोगों की मौके पर ही मौत हो गई जबकि एक युवक गंभीर रूप से घायल हो गया जिसका इलाज जारी है।

    जांच के दौरान पुलिस को घटनास्थल से एक वाहन का टूटा हुआ अंग्रेजी अक्षर ए मिला जिसने पूरे मामले की दिशा बदल दी। इसके बाद सीसीटीवी फुटेज खंगाले गए और हत्या में इस्तेमाल हाईवा को हीरापुर बंदरोहा के जंगल से बरामद कर लिया गया। पूछताछ में आरोपी राजा पटेल ने पूरी साजिश का खुलासा कर दिया जिसके बाद एक के बाद एक आरोपियों की गिरफ्तारी होती चली गई।

    पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि जबलपुर स्थित एक निजी अस्पताल के संचालक डॉ अमित खरे भी इस साजिश का हिस्सा थे। आरोप है कि उन्होंने हत्या को सड़क हादसा दिखाने और सबूत मिटाने के तरीके बताए। वारदात के बाद आरोपियों के बीच हुई बातचीत में मौत की पुष्टि होने पर खुशी जताने जैसी बातें भी सामने आई हैं जो इस साजिश की गंभीरता को दर्शाती हैं।

    पुलिस ने हत्या में इस्तेमाल हाईवा के अलावा थार और फॉर्च्यूनर वाहन भी जब्त कर लिए हैं। शुरुआती जांच के अनुसार राजेंद्र लोधी और मुख्य आरोपी आनंद पटेल के बीच लंबे समय से अवैध रेत कारोबार और आर्थिक हितों को लेकर विवाद चल रहा था। इसी रंजिश ने खूनी रूप ले लिया और पांच लोगों की जान चली गई।

    पुलिस का कहना है कि फरार आरोपियों की तलाश तेज कर दी गई है और पूरे नेटवर्क की जांच जारी है। इस खुलासे के बाद अवैध रेत कारोबार से जुड़े आपराधिक गठजोड़ पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।

  • 'मन की बात' के 136वें एपिसोड की एनडीए नेताओं ने की सराहना, बोले- समाज के सकारात्मक प्रयासों को मिलती है राष्ट्रीय पहचान

    'मन की बात' के 136वें एपिसोड की एनडीए नेताओं ने की सराहना, बोले- समाज के सकारात्मक प्रयासों को मिलती है राष्ट्रीय पहचान

    नई दिल्ली ।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 136वें एपिसोड को लेकर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के कई नेताओं ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्री और भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने इस कार्यक्रम को जनभागीदारी, सामाजिक जागरूकता और राष्ट्र निर्माण को प्रोत्साहित करने वाला प्रभावी मंच बताया। नेताओं का कहना है कि यह कार्यक्रम राजनीति से अलग समाज के सकारात्मक प्रयासों, नवाचारों और प्रेरणादायी कहानियों को राष्ट्रीय पहचान देने का कार्य करता है।

    भाजपा नेताओं ने कहा कि ‘मन की बात’ के माध्यम से देश के अलग-अलग हिस्सों में हो रहे उल्लेखनीय कार्यों को व्यापक स्तर पर सामने लाया जाता है। उनका मानना है कि इस कार्यक्रम से आम नागरिकों, सामाजिक संगठनों और स्थानीय स्तर पर काम कर रहे लोगों के प्रयासों को सम्मान मिलता है, जिससे अन्य लोगों को भी प्रेरणा मिलती है। उन्होंने इसे समाज में सकारात्मक सोच विकसित करने का माध्यम बताया।

    छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कार्यक्रम में राज्य से जुड़े विभिन्न प्रयासों का उल्लेख किए जाने पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि हाल के महीनों में बस्तर ओलंपिक्स, बस्तर पांडुम, मल्हार से जुड़े ऐतिहासिक संदर्भ और इस बार जल संरक्षण अभियान के तहत कोरबा की पहल का जिक्र राज्य के लिए गौरव का विषय है। उन्होंने स्थानीय मिट्टी से बनी गणेश प्रतिमाओं और स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने की अपील को भी महत्वपूर्ण बताया।

    त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा ने कहा कि ‘मन की बात’ की सबसे बड़ी विशेषता इसकी सकारात्मक सोच और जनता से लगातार संवाद बनाए रखना है। उनके अनुसार, कार्यक्रम में त्रिपुरा में स्वदेशी रूप से तैयार किए गए पहले संगीत वाद्ययंत्र का उल्लेख होने से राज्य के कारीगरों और कलाकारों का उत्साह बढ़ा है। उन्होंने इसे स्थानीय प्रतिभाओं को राष्ट्रीय पहचान दिलाने वाला प्रयास बताया।

    केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कार्यक्रम में कारगिल विजय दिवस के अवसर पर वीर सैनिकों को दी गई श्रद्धांजलि, पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के योगदान के स्मरण और राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के संदर्भ को विशेष रूप से महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि भारतीय हस्तशिल्प, हथकरघा और स्वदेशी उत्पादों को प्रोत्साहित करने का संदेश देश के कारीगरों के लिए उत्साहवर्धक है।

    केंद्रीय मंत्री हर्ष मल्होत्रा ने कहा कि कार्यक्रम में राजनीतिक विषयों के बजाय समाज के विभिन्न वर्गों द्वारा किए जा रहे प्रेरक कार्यों को प्रमुखता दी जाती है। उन्होंने जल संरक्षण, वृक्षारोपण, स्थानीय उत्पादों और पारंपरिक हस्तशिल्प जैसे विषयों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलने को इस कार्यक्रम की विशेषता बताया। वहीं भाजपा सांसद राधामोहन दास अग्रवाल ने कहा कि कार्यक्रम नागरिकों के योगदान को महत्व देता है और वर्षों से देशभर की प्रेरक कहानियों को लोगों तक पहुंचा रहा है।

    उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने ‘मन की बात’ को दुनिया के लोकप्रिय मासिक कार्यक्रमों में से एक बताते हुए कहा कि इसके माध्यम से ऐसे लोगों की प्रेरक कहानियां सामने आती हैं, जिनकी मेहनत और उपलब्धियां सामान्यतः चर्चा में नहीं आ पातीं। वहीं बिहार सरकार के मंत्री दिलीप जायसवाल ने इसे देश के विभिन्न क्षेत्रों और समुदायों को जोड़ने वाला मंच बताया। पूर्व मंत्री राजेंद्र प्रताप सिंह ने कारगिल विजय दिवस पर वीर सैनिकों के साहस और बलिदान को याद करने को नई पीढ़ी के लिए प्रेरणादायी संदेश बताया।