Author: bharati

  • इंदौर में जैन संत सुधासागर महाराज का मंगलप्रवेश, जुलूस में उमड़े हजारों समाजजन

    इंदौर में जैन संत सुधासागर महाराज का मंगलप्रवेश, जुलूस में उमड़े हजारों समाजजन


    इंदौर।
    मध्य प्रदेश के इंदौर में रविवार को राष्ट्रसंत सुधासागर महाराज का नगर प्रवेश हुआ। इस अवसर पर निकले भव्य मंगल प्रवेश जुलूस में हजारों समाजजनों ने महाराज श्री की अगवानी की।

    राजवाड़ा पर जैन समाज के परिवार पारंपरिक वेशभूषा में पहुंचे। जुलूस बड़ा गणपति चौराहे से शुरू होकर मल्हारगंज, खजूरी बाजार, राजवाड़ा, जवाहर मार्ग और राजमोहल्ला होते हुए दलालबाग पहुंचा। मार्ग में जगह-जगह मंच लगाकर जुलूस का स्वागत किया गया। महिलाएं मंगलगान गाते हुए जुलूस में शामिल हुईं।

    यात्रा मार्ग में विभिन्न स्थानों पर समाजजनों ने पुष्पवर्षा कर मुनिश्री का स्वागत किया। बड़ी संख्या में महिला, पुरुष और युवा पारंपरिक वेशभूषा में यात्रा में शामिल हुए। जुलूस में पांच जैन तीर्थों की झांकियां, उज्जैन का 101 सदस्यीय महाकाल बैंड, नासिक का महिला बैंड, 11 विंटेज कारें, दो हाथी, 24 बग्घियां, 12 अश्वारोही बालक-बालिकाएं और 60 महिला मंडल मुख्य आकर्षण रहे।

    इसके बाद दलालबाग में धर्मसभा का आयोजन हुआ। इस अवसर पर मुनिश्री ने अपने प्रवचन दिए। मंगल प्रवेश के दौरान मंत्री कैलाश विजयवर्गीय सहित अन्य जनप्रतिनिधियों ने मुनिश्री से आशीर्वाद लिया। मुनि सुधासागर महाराज को मध्य प्रदेश सरकार की ओर से राजकीय अतिथि का दर्जा प्राप्त है। जब उनका मंगल प्रवेश जुलूस राजवाड़ा पहुंचा तो जैन समाज के हजारों श्रद्धालु उनके दर्शन के लिए उमड़ पड़े।

  • झांसी पहुंचे मुख्यमंत्री मोहन यादव, कहा- प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश विकास कर रहा

    झांसी पहुंचे मुख्यमंत्री मोहन यादव, कहा- प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश विकास कर रहा


    झांसी।
    मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव रविवार को निवाड़ी में विभिन्न विकास कार्यों का भूमि-पूजन और लोकार्पण करने के बाद अपने आध्यात्मिक गुरु ऋतेश्वरमहाराज से मिलने झांसी सर्किट हाउस पहुंचे। यहां उन्होंने मीडिया से संक्षिप्त बातचीत में कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश निरंतर विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि सभी मिलकर जनकल्याण के कार्यों को आगे बढ़ाने में जुटे हैं।

    मुख्यमंत्री ने बताया कि दतिया उपचुनाव के मद्देनजर उन्होंने भाजपा पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के साथ समीक्षा बैठक की। हालांकि मीडिया द्वारा पूछे गए अन्य सवालों का जवाब दिए बिना वह वहां से रवाना हो गए।

    झांसी पहुंचने पर पुलिस लाइन से हेलीकॉप्टर से सर्किट हाउस पहुंचे मुख्यमंत्री का सदर विधायक पं. रवि शर्मा, बबीना विधायक राजीव सिंह पारीछा, भाजपा पार्षद सुनील नैनवानी सहित भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं ने फूल-मालाओं से स्वागत किया। सर्किट हाउस में उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर भी दिया गया। यहां उन्होंने भाजपा पदाधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और कार्यकर्ताओं से मुलाकात कर विभिन्न विषयों पर चर्चा की। इसके बाद वह पुलिस लाइन से हेलीकॉप्टर द्वारा मध्यप्रदेश के सागर जिले के लिए रवाना हो गए।

    इससे पहले, मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने ओरछा पहुंचकर प्रसिद्ध रामराजा मंदिर में दर्शन किए और जहांगीर महल का भ्रमण किया। इसके बाद निवाड़ी में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने 46 राजस्व स्टाफ आवास (निवाड़ी) तथा 29 राजस्व स्टाफ आवास (पृथ्वीपुर) का लोकार्पण किया। साथ ही जिला चिकित्सालय निवाड़ी के 100 बिस्तरीय भवन के उन्नयन कार्य, ग्राम जेवरा, पृथ्वीपुर और सेंधरी में नवीन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भवनों तथा संजीवनी क्लिनिक का भी लोकार्पण किया। कार्यक्रम संपन्न होने के बाद मुख्यमंत्री अपराह्न झांसी पहुंचे और निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार आगे के दौरे पर रवाना हो गए।

  • एयर इंडिया की चेक-इन सुविधा अब नई दिल्ली और शिवाजी स्टेडियम मेट्रो स्टेशनों पर भी उपल्बध

    एयर इंडिया की चेक-इन सुविधा अब नई दिल्ली और शिवाजी स्टेडियम मेट्रो स्टेशनों पर भी उपल्बध


    नई दिल्ली।
    टाटा समूह की अगुवाई वाली एयर इंडिया ने दिल्ली मेट्रो चेक-इन सर्विस के साथ अब नई दिल्ली और शिवाजी स्टेडियम मेट्रो स्टेशनों पर अपनी चेक-इन सर्विस की शुरुआत की है।

    एयर इंडिया ने रविवार को ‘एक्स’ पर जारी एक पोस्ट में कहा कि शहर से आसमान तक, हम हर सफर को आसान बनाते हैं। कंपनी ने कहा कि हमारी दिल्ली मेट्रो चेक-इन सर्विस के साथ अब आप नई दिल्ली और शिवाजी स्टेडियम मेट्रो स्टेशनों पर अपनी चेक-इन की प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं।

    एयरलाइन ने कहा कि घरेलू और इंटरनेशनल दोनों तरह की फ़्लाइट्स के लिए पहले से चेक-इन की सुविधा उपलब्ध है। कंपनी ने कहा कि मेट्रो से सीधे एयरपोर्ट तक सुरक्षित सामान का ट्रांसफर। ये सर्विस रोजाना सुबह 07:00 बजे से रात 09:00 बजे तक यात्री के लिए उपलब्ध है।

    एयर इंडिया ने कहा कि ट्रैफिक की वजह से होने वाली देरी से बचने और समय बचाने का एक सुविधाजनक तरीका है। यह हमारे मेहमानों के सफर के अनुभव को बेहतर बनाने की दिशा में एक और कदम है, ताकि शहर से आसमान तक उन्हें आराम, सुविधा और सुकून मिल सके।

  • मारुति सुजुकी का चालू वित्त वर्ष में 9 लाख सीएनजी वाहन बेचने का लक्ष्य

    मारुति सुजुकी का चालू वित्त वर्ष में 9 लाख सीएनजी वाहन बेचने का लक्ष्य


    नई दिल्ली।
    देश की सबसे बड़ी कार विनिर्माता कंपनी मारुति सुजुकी इंडिया (एमएसआई) ने चालू वित्त वर्ष 2026-27 में करीब 9 लाख सीएनजी वाहन बेचने का लक्ष्य रखा है। यह पिछले वित्त वर्ष में बेची गई 7 लाख से अधिक इकाइयों की तुलना में लगभग 30 फीसदी की वृद्धि होगी।

    मारुति सुज़ुकी इंडिया के वरिष्ठ कार्यकारी अधिकारी (विपणन एवं बिक्री) पार्थो बनर्जी ने रविवार को जारी बयान में कहा कि चालू वित्त वर्ष 2026-27 की (अप्रैल-जून) पहली तिमाही में कंपनी ने विभिन्न मॉडल श्रेणियों में 2.2 लाख सीएनजी वाहन बेचे हैं, जो पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि की तुलना में 58 फीसदी अधिक है।

    पार्थो बनर्जी ने कहा कि पश्चिम एशिया युद्ध के बाद ईंधन के दाम बढ़ने से सीएनजी वाहनों की मांग बढ़ी है। उन्होंने बताया कि कंपनी का मानना है कि पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के बाद ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी से सीएनजी वाहनों की मांग तेजी से बढ़ी है। कंपनी को मांग में पहले ही तीव्र वृद्धि देखने को मिल रही है।

    चालू वित्त वर्ष 2026-27 के लिए सीएनजी वाहन बिक्री लक्ष्य के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि पहली तिमाही के आंकड़े को देखते हुए हम लगभग नौ लाख इकाई की बिक्री की उम्मीद कर रहे हैं। बनर्जी ने कहा कि पिछले वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी ने सात लाख से ज्यादा सीएनजी वाहन बेचे थे। उन्होंने कहा कि पहले सीएनजी वाहनों की मांग मुख्य रूप से छोटी कारों, वैन और अर्टिगा तक सीमित थी लेकिन अब कंपनी की एसयूवी श्रेणी में भी इनकी मांग तेजी से बढ़ रही है।

    बनर्जी के अनुसार कंपनी की विक्टोरिस एसयूवी की कुल बिक्री में 50 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी गाड़ी के नीचे लगे सीएनजी टैंक (अंडरबॉडी) संस्करण की है। इसी रुझान को देखते हुए कंपनी ने नई ब्रेज़ा एस-सीएनजी में भी अंडरबॉडी सीएनजी टैंक की सुविधा दी है। उन्होंने कहा कि मारुति सुज़ुकी फिलहाल घरेलू बाजार में 15 सीएनजी मॉडल, जिनमें हल्के वाणिज्यिक वाहन भी शामिल हैं, बेच रही है। पिछले महीने कंपनी की कुल बिक्री में सीएनजी वाहनों की हिस्सेदारी 42 प्रतिशत रही, जो इस श्रेणी की बढ़ती लोकप्रियता को दर्शाता है।

  • टी20 में नंबर-1 बनी टीम इंडिया, जिम्बाब्वे का किया क्लीन स्वीप, तीसरा मुकाबला 35 रन से जीता

    टी20 में नंबर-1 बनी टीम इंडिया, जिम्बाब्वे का किया क्लीन स्वीप, तीसरा मुकाबला 35 रन से जीता


    हरारे।
    भारतीय क्रिकेट टीम ने तीसरे और अंतिम टी20 मुकाबले में जिम्बाब्वे को 35 रन से हराकर तीन मैचों की श्रृंखला 3-0 से अपने नाम कर ली। हाल ही में आईसीसी टी20 रैंकिंग में दोबारा शीर्ष स्थान हासिल करने वाली टीम इंडिया ने इस जीत के साथ अपने शानदार फॉर्म को भी बरकरार रखा।

    टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करते हुए भारत ने निर्धारित 20 ओवर में 192 रन बनाए। जवाब में जिम्बाब्वे की टीम 20 ओवर में 157 रन ही बना सकी और भारत ने मुकाबला 35 रन से जीत लिया।

    भारत की जीत के नायक युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी रहे। उन्होंने 49 गेंदों में 81 रन की शानदार पारी खेली और टीम को मजबूत स्कोर तक पहुंचाया। उनके सलामी जोड़ीदार अभिषेक शर्मा मात्र 02 रन बनाकर आउट हो गए। इसके बाद ईशान किशन ने 29 रन और कप्तान श्रेयस अय्यर ने 27 रन का योगदान दिया। अंतिम ओवरों में रिंकू सिंह ने 14 गेंदों पर 25 रनों की तेज पारी खेलकर टीम का स्कोर 192 तक पहुंचाया।

    लक्ष्य का पीछा करने उतरी जिम्बाब्वे की शुरुआत खराब रही। तेज गेंदबाज मयंक यादव ने पहले मैच की तरह इस बार भी पारी की पहली ही गेंद पर ब्रायन बेनेट को आउट कर भारत को शानदार शुरुआत दिलाई। मयंक ने अपनी तेज और सटीक गेंदबाजी से तीन विकेट झटके और विपक्षी बल्लेबाजों पर लगातार दबाव बनाए रखा।

    डेब्यू कर रहे अशोक शर्मा ने भी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपना पहला विकेट हासिल किया। हालांकि, उनके स्पेल के दौरान एक आसान कैच छूट गया था, लेकिन बाद में उन्होंने तदिवानाशे मरुमानी को क्लीन बोल्ड कर अपने करियर का पहला अंतरराष्ट्रीय विकेट दर्ज किया।

    हालांकि भारतीय टीम की फील्डिंग उम्मीद के अनुरूप नहीं रही और खिलाड़ियों ने कई आसान कैच छोड़े, फिर भी गेंदबाजों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए जिम्बाब्वे को लक्ष्य तक नहीं पहुंचने दिया।

    यह सीरीज जीत भारत के लिए इसलिए भी खास रही क्योंकि हाल ही में टीम ने आईसीसी टी20 रैंकिंग में फिर से दुनिया की नंबर-1 टीम का स्थान हासिल किया है। आयरलैंड और इंग्लैंड के खिलाफ सीरीज हारने के बाद भारत शीर्ष स्थान से नीचे खिसक गया था, लेकिन जिम्बाब्वे के खिलाफ लगातार तीन जीत के दम पर उसने एक बार फिर शीर्ष स्थान पर कब्जा मजबूत कर लिया।

    इस शानदार जीत के साथ टीम इंडिया ने न केवल श्रृंखला में क्लीन स्वीप किया, बल्कि आगामी अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों के लिए भी अपना आत्मविश्वास और मनोबल मजबूत किया।

  • शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के बाद सियासी संग्राम तेज, विपक्ष में श्रेय की होड़

    शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के बाद सियासी संग्राम तेज, विपक्ष में श्रेय की होड़


    नई दिल्ली।
    नीट पेपर लीक विवाद और छात्रों के आंदोलन के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद राजनीतिक हलकों में नई बहस छिड़ गई है। आंदोलन समाप्त होने के साथ ही कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और आम आदमी पार्टी के बीच इस घटनाक्रम का राजनीतिक श्रेय लेने की प्रतिस्पर्धा तेज होती दिखाई दे रही है। विपक्षी दल इसे युवाओं के मुद्दे पर अपनी राजनीतिक बढ़त के रूप में पेश करने में जुटे हैं।

    उत्तर प्रदेश और पंजाब की आगामी राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए विपक्षी दल छात्र आंदोलन को चुनावी मुद्दे के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश में कांग्रेस नेता राहुल गांधी और समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव युवाओं और रोजगार के मुद्दों को प्रमुखता दे रहे हैं, जबकि पंजाब में आम आदमी पार्टी भी परीक्षा प्रणाली और पेपर लीक के मुद्दे को राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बना रही है।

    उत्तर प्रदेश और पंजाब पर विपक्ष की नजर

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उत्तर प्रदेश में युवा मतदाताओं की बड़ी संख्या को देखते हुए कांग्रेस और समाजवादी पार्टी इस मुद्दे को आगामी चुनावों तक जीवित रखना चाहती हैं। वहीं पंजाब में भी युवाओं से जुड़े सवालों को लेकर राजनीतिक दल सक्रिय नजर आ रहे हैं।

    राहुल गांधी और अखिलेश यादव की हालिया मुलाकात को भी इसी रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। दोनों दल परीक्षा प्रणाली, पेपर लीक और युवाओं के भविष्य जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरने का प्रयास कर रहे हैं।

    प्रधानमंत्री ने परीक्षा सुधारों का किया ऐलान

    इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि पेपर लीक रोकने के लिए कठोर कानूनी प्रावधान किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि परीक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से प्रौद्योगिकी विशेषज्ञ नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता में एक हाई-पावर टास्क फोर्स गठित की गई है।

    प्रधानमंत्री के अनुसार, यह समिति परीक्षा सुधारों, तकनीकी सुरक्षा और पारदर्शी व्यवस्था विकसित करने के लिए सुझाव देगी, ताकि भविष्य में राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं की विश्वसनीयता सुनिश्चित की जा सके।

    आंदोलन के बाद श्रेय की राजनीति

    शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के बाद कांग्रेस ने आंदोलन की सफलता का श्रेय राहुल गांधी के नेतृत्व को दिया। दिल्ली में राहुल गांधी के समर्थन में पोस्टर भी लगाए गए। वहीं कांग्रेस नेताओं ने छात्र आंदोलन और पुलिस कार्रवाई को लेकर केंद्र सरकार पर लगातार हमला बोला।

    राहुल गांधी ने संसद के भीतर और बाहर पेपर लीक तथा परीक्षा प्रणाली के मुद्दे को उठाया, जबकि प्रियंका गांधी ने भी प्रदर्शन कर सरकार को घेरा। दूसरी ओर समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने भी छात्रों के समर्थन में विरोध दर्ज कराया।

    राजनीतिक जानकारों का मानना है कि छात्र आंदोलन अब केवल परीक्षा सुधार का विषय नहीं रह गया है, बल्कि यह उत्तर प्रदेश और पंजाब जैसे राज्यों की आगामी चुनावी राजनीति में भी महत्वपूर्ण मुद्दा बनता जा रहा है। विपक्षी दल इसे युवाओं के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने के अवसर के रूप में देख रहे हैं, जबकि केंद्र सरकार परीक्षा सुधारों और नई कानूनी व्यवस्था के जरिए भरोसा बहाल करने की कोशिश में जुटी है।

  • पेपर लीक पर केंद्र का बड़ा दांव: नंदन नीलेकणि की अगुआई में 6 सदस्यीय हाई-पावर टास्क फोर्स, पूर्व ISRO प्रमुख और पूर्व IB निदेशक भी शामिल

    पेपर लीक पर केंद्र का बड़ा दांव: नंदन नीलेकणि की अगुआई में 6 सदस्यीय हाई-पावर टास्क फोर्स, पूर्व ISRO प्रमुख और पूर्व IB निदेशक भी शामिल


    नई दिल्ली।
    देशभर में प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर उठे सवालों के बीच केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय परीक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने टेक्नोलॉजी विशेषज्ञ नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता में छह सदस्यीय हाई-पावर टास्क फोर्स का गठन किया है। इस समिति का उद्देश्य नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) समेत देश की परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और तकनीकी रूप से मजबूत बनाना है।

    समिति में अंतरिक्ष, साइबर सुरक्षा, खुफिया तंत्र, शिक्षा प्रशासन और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों के अनुभवी विशेषज्ञों को शामिल किया गया है। सरकार का लक्ष्य प्रश्नपत्रों की तैयारी, परिवहन, परीक्षा संचालन और मूल्यांकन प्रक्रिया में सुरक्षा की बहुस्तरीय व्यवस्था विकसित करना है।

    समिति में शामिल प्रमुख सदस्य

    नंदन नीलेकणि (अध्यक्ष)

    आधार परियोजना के प्रमुख वास्तुकार और प्रौद्योगिकी विशेषज्ञ नंदन नीलेकणि समिति का नेतृत्व करेंगे। वे डिजिटल ढांचे को अधिक सुरक्षित और आधुनिक बनाने की रणनीति तैयार करेंगे।

    एस. सोमनाथ (पूर्व अध्यक्ष, इसरो)

    चंद्रयान-3 मिशन के नेतृत्व के लिए चर्चित रहे पूर्व इसरो प्रमुख एस. सोमनाथ परीक्षा प्रणाली को वैज्ञानिक और त्रुटिरहित बनाने के लिए तकनीकी सुझाव देंगे। उनका फोकस प्रक्रियाओं को अधिक विश्वसनीय और जोखिम-मुक्त बनाने पर रहेगा।

    तपन डेका (पूर्व निदेशक, इंटेलिजेंस ब्यूरो)

    आंतरिक सुरक्षा और खुफिया मामलों के विशेषज्ञ तपन डेका प्रश्नपत्रों की सुरक्षा, परीक्षा केंद्रों की निगरानी और संगठित पेपर लीक नेटवर्क की पहचान एवं रोकथाम से जुड़े सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने में योगदान देंगे।

    प्रो. वी. कामाकोटी (निदेशक, IIT मद्रास)

    साइबर सुरक्षा और स्वदेशी प्रोसेसर तकनीक के विशेषज्ञ प्रो. कामाकोटी परीक्षा से जुड़े डिजिटल प्लेटफॉर्म, सॉफ्टवेयर और डाटा सुरक्षा को मजबूत करने के उपाय सुझाएंगे। साथ ही कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित सुरक्षा तंत्र विकसित करने पर भी उनका ध्यान रहेगा।

    अनीता करवाल (पूर्व केंद्रीय शिक्षा सचिव)

    पूर्व केंद्रीय शिक्षा सचिव और सीबीएसई की पूर्व अध्यक्ष अनीता करवाल प्रशासनिक सुधार, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए परीक्षा संचालन से जुड़े नियमों और प्रक्रियाओं की समीक्षा करेंगी।

    अमृत लाल मीणा (लॉजिस्टिक्स विशेषज्ञ)

    वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी अमृत लाल मीणा प्रश्नपत्रों की छपाई, सुरक्षित परिवहन और वितरण प्रणाली को आधुनिक तकनीक के माध्यम से अधिक सुरक्षित बनाने की रणनीति तैयार करेंगे। जीपीएस ट्रैकिंग और डिजिटल सुरक्षा उपायों को भी इस प्रक्रिया में शामिल किया जा सकता है।

    परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार पर फोकस

    सरकार का मानना है कि यह टास्क फोर्स परीक्षा प्रणाली के प्रत्येक चरण की समीक्षा कर सुरक्षा, पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए ठोस सिफारिशें देगी। समिति की रिपोर्ट के आधार पर एनटीए और अन्य राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसियों के कामकाज में संरचनात्मक बदलाव किए जाने की संभावना है, ताकि भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।

  • कॉन्स्टिट्यूशन क्लब की दो बैठकों ने बदली संवाद की तस्वीर, छात्र आंदोलन के बाद सरकार की रणनीति में दिखा बदलाव

    कॉन्स्टिट्यूशन क्लब की दो बैठकों ने बदली संवाद की तस्वीर, छात्र आंदोलन के बाद सरकार की रणनीति में दिखा बदलाव

    नई दिल्ली । राष्ट्रीय राजधानी में शिक्षा से जुड़े मुद्दों को लेकर हुए छात्र आंदोलन के बाद सरकार और प्रदर्शनकारी प्रतिनिधियों के बीच हुई दो बैठकों ने राजनीतिक हलकों में नई चर्चा को जन्म दिया है। कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में आयोजित इन बैठकों की तस्वीरों और उनके माहौल को लेकर यह माना जा रहा है कि संवाद की शैली और प्रस्तुति में स्पष्ट बदलाव देखने को मिला। पहली बैठक और बाद की बैठक के दृश्य सोशल मीडिया तथा राजनीतिक विश्लेषण का विषय बने रहे, जहां दोनों पक्षों के बीच बातचीत के तौर-तरीकों में अंतर महसूस किया गया।

    पहली बैठक उस समय हुई थी जब छात्र आंदोलन अपने शुरुआती चरण में था। बैठक की तस्वीरों में सरकारी प्रतिनिधि और प्रदर्शनकारी अलग-अलग प्रकार की बैठकों की व्यवस्था में नजर आए, जिसे लेकर कई तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आईं। इसके बाद आंदोलन लगातार जारी रहा और प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से दबाव बनाए रखा। समय के साथ सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच एक और दौर की बातचीत हुई, जिसमें बैठक की व्यवस्था और दोनों पक्षों के व्यवहार को लेकर अलग तस्वीर सामने आई।

    दूसरी बैठक में प्रतिनिधियों के बीच बातचीत अपेक्षाकृत अधिक सहज वातावरण में होती दिखाई दी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि संवाद के इस बदले हुए स्वरूप ने यह संकेत दिया कि लंबे समय तक चले आंदोलन और सार्वजनिक दबाव के बाद वार्ता की प्रक्रिया अधिक संतुलित दिखाई देने लगी। हालांकि सरकार की ओर से इस बदलाव को लेकर कोई औपचारिक टिप्पणी नहीं की गई, लेकिन बैठक की तस्वीरों और माहौल को लेकर व्यापक चर्चा होती रही।

    इस पूरे घटनाक्रम के दौरान छात्र आंदोलन लगातार अपने मूल मुद्दों पर केंद्रित रहा। प्रदर्शनकारियों ने परीक्षा व्यवस्था, जवाबदेही और शिक्षा प्रणाली से जुड़े विषयों को प्रमुखता से उठाया। आंदोलन से जुड़े प्रतिनिधियों का कहना था कि उनका उद्देश्य केवल निर्धारित मांगों पर समाधान प्राप्त करना है। दूसरी ओर, सरकार की ओर से भी समय-समय पर वार्ता के माध्यम से स्थिति को सामान्य बनाने का प्रयास किया गया।

    इस आंदोलन की एक विशेषता यह भी रही कि सोशल मीडिया ने इसकी पहुंच को काफी व्यापक बनाया। विभिन्न डिजिटल मंचों पर आंदोलन से जुड़े वीडियो, तस्वीरें और संदेश बड़ी संख्या में साझा किए गए। इससे बड़ी संख्या में युवाओं और छात्रों तक आंदोलन की जानकारी पहुंची। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि डिजिटल माध्यमों ने इस बार जनसमर्थन जुटाने और मुद्दों को व्यापक स्तर पर पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

    राजनीतिक दलों की सक्रियता भी इस दौरान बढ़ती दिखाई दी। कई विपक्षी नेताओं ने छात्रों की मांगों का समर्थन किया, जबकि सरकार ने संवाद और प्रशासनिक कदमों के जरिए स्थिति संभालने का प्रयास किया। इस घटनाक्रम ने यह भी संकेत दिया कि शिक्षा और रोजगार जैसे विषय युवाओं के बीच महत्वपूर्ण मुद्दे बने हुए हैं और इनसे जुड़े आंदोलनों का प्रभाव राजनीतिक विमर्श पर भी पड़ सकता है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में संवाद, परामर्श और शांतिपूर्ण बातचीत किसी भी विवाद के समाधान का महत्वपूर्ण माध्यम होते हैं। कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में हुई दोनों बैठकों ने यह दिखाया कि किसी भी लंबे आंदोलन के दौरान वार्ता की प्रक्रिया समय के साथ बदल सकती है। आने वाले समय में शिक्षा, परीक्षा व्यवस्था और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर सरकार तथा संबंधित पक्षों के बीच होने वाले संवाद पर भी सभी की नजर बनी रहेगी।

  • अनिल अग्रवाल की वेदांता डीमर्जर योजना ने पार किया अहम पड़ाव, ऑयल एंड गैस बिजनेस ट्रांसफर को मिली सरकारी मंजूरी

    अनिल अग्रवाल की वेदांता डीमर्जर योजना ने पार किया अहम पड़ाव, ऑयल एंड गैस बिजनेस ट्रांसफर को मिली सरकारी मंजूरी

    नई दिल्ली । अनिल अग्रवाल के नेतृत्व वाली वेदांता लिमिटेड की बहुप्रतीक्षित डीमर्जर योजना को एक महत्वपूर्ण सफलता मिली है। कंपनी के ऑयल एंड गैस कारोबार को अलग इकाई में स्थानांतरित करने की प्रक्रिया में भारत सरकार के पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने अनापत्ति प्रमाणपत्र जारी कर दिया है। इस मंजूरी के साथ कंपनी के पुनर्गठन कार्यक्रम ने एक अहम चरण पार कर लिया है और आगे की कानूनी एवं प्रशासनिक प्रक्रियाओं का रास्ता भी साफ हो गया है।

    सरकारी स्वीकृति के तहत वेदांता ऑयल एंड गैस लिमिटेड को तेल एवं गैस ब्लॉकों में पार्टिसिपेटिंग इंटरेस्ट और ऑपरेटरशिप के हस्तांतरण की अनुमति दी गई है। यह नई इकाई पहले माल्को एनर्जी लिमिटेड के नाम से जानी जाती थी। कंपनी की पुनर्गठन योजना के अनुसार अब ऑयल एंड गैस कारोबार को अलग कॉर्पोरेट पहचान के साथ संचालित किया जाएगा, जिससे इस व्यवसाय के संचालन और विस्तार पर स्वतंत्र रूप से ध्यान केंद्रित किया जा सकेगा।

    कंपनी ने शेयर बाजार को दी गई जानकारी में बताया कि यह मंजूरी एक मई 2026 से प्रभावी डीमर्जर योजना के अनुरूप प्रदान की गई है। इसके तहत वेदांता लिमिटेड से ऑयल एंड गैस कारोबार का हस्तांतरण नई इकाई को किया जाएगा। इस कदम का उद्देश्य विभिन्न व्यवसायों को अलग-अलग संस्थाओं के रूप में विकसित करना और प्रत्येक क्षेत्र को स्वतंत्र रणनीतिक दिशा प्रदान करना है।

    मंजूरी के साथ कुछ महत्वपूर्ण शर्तें भी निर्धारित की गई हैं। नई इकाई को तेल एवं गैस परियोजनाओं से जुड़े सभी मौजूदा अनुबंधों के तहत लंबित दायित्वों का निर्वहन करना होगा। इसके अलावा संबंधित परियोजनाओं के लिए आवश्यक नई बैंक गारंटी जमा करनी होगी तथा यह सुनिश्चित करना होगा कि सरकार के प्रति किसी प्रकार का वित्तीय बकाया शेष न रहे। इन शर्तों का पालन डीमर्जर प्रक्रिया को अंतिम रूप देने के लिए आवश्यक माना गया है।

    सरकारी दस्तावेजों में एक विशेष ब्लॉक से जुड़े कानूनी पहलुओं का भी उल्लेख किया गया है। संबंधित परियोजना से जुड़े न्यायिक निर्णयों और नियामकीय प्रावधानों को ध्यान में रखते हुए कंपनी को सभी निर्धारित नियमों का पालन करना होगा। इससे स्पष्ट है कि पुनर्गठन प्रक्रिया केवल कॉर्पोरेट निर्णय नहीं, बल्कि नियामकीय और कानूनी शर्तों के अनुरूप चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाई जा रही है।

    डीमर्जर के बाद वेदांता के ऑयल एंड गैस कारोबार को स्वतंत्र पहचान मिलने की उम्मीद है। इससे इस क्षेत्र में निवेश, परिचालन निर्णय और व्यवसाय विस्तार की प्रक्रिया अधिक केंद्रित और प्रभावी हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि अलग इकाई बनने से कारोबार के प्रदर्शन का स्वतंत्र मूल्यांकन आसान होगा और निवेशकों को भी प्रत्येक व्यवसाय की वास्तविक क्षमता समझने का बेहतर अवसर मिलेगा।

    अब कंपनी को निर्धारित समयसीमा के भीतर सभी आवश्यक कानूनी औपचारिकताएं पूरी करनी होंगी। इसमें कंपनी के नाम परिवर्तन, डीमर्जर से जुड़े दस्तावेजों का पंजीकरण और अन्य नियामकीय प्रक्रियाएं शामिल हैं। इन चरणों के पूरा होने के बाद नई संरचना के तहत ऑयल एंड गैस कारोबार स्वतंत्र रूप से संचालित किया जा सकेगा।

    वेदांता की व्यापक डीमर्जर योजना का उद्देश्य समूह के विभिन्न कारोबारों को अलग-अलग इकाइयों के रूप में विकसित करना है, ताकि प्रत्येक व्यवसाय अपनी रणनीति, पूंजी प्रबंधन और विकास योजनाओं पर स्वतंत्र रूप से काम कर सके। सरकार की ओर से मिली यह मंजूरी उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है। इससे न केवल पुनर्गठन प्रक्रिया को गति मिलेगी, बल्कि कंपनी के भविष्य के विस्तार और निवेश संबंधी योजनाओं को भी नई मजबूती मिलने की संभावना जताई जा रही है।

  • रिलायंस से SBI तक बाजार पूंजीकरण में भारी गिरावट, एक सप्ताह में 2.74 लाख करोड़ रुपये घटे

    रिलायंस से SBI तक बाजार पूंजीकरण में भारी गिरावट, एक सप्ताह में 2.74 लाख करोड़ रुपये घटे


    नई दिल्ली ।
    वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और निवेशकों की सतर्कता का असर बीते कारोबारी सप्ताह भारतीय शेयर बाजार पर स्पष्ट रूप से दिखाई दिया। व्यापक बिकवाली के चलते देश की शीर्ष 10 सूचीबद्ध कंपनियों में से नौ के बाजार पूंजीकरण में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। इस दौरान इन कंपनियों का संयुक्त मार्केटकैप लगभग 2.74 लाख करोड़ रुपये घट गया। बाजार में कमजोरी का असर बैंकिंग, आईटी, दूरसंचार, वित्तीय सेवाओं और ऊर्जा क्षेत्र की प्रमुख कंपनियों पर देखने को मिला, जबकि केवल एक कंपनी इस दबाव के बीच बढ़त दर्ज करने में सफल रही।

    20 से 24 जुलाई के कारोबारी सप्ताह के दौरान सेंसेक्स 2,091.68 अंक यानी 2.68 प्रतिशत फिसलकर 76,059.77 अंक पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी 566.85 अंक या 2.33 प्रतिशत की गिरावट के साथ 23,767.45 अंक पर आ गया। वैश्विक बाजारों में अस्थिरता, निवेशकों की मुनाफावसूली और जोखिम से बचने की रणनीति का असर घरेलू शेयर बाजार पर भी पड़ा, जिससे बड़े शेयरों में लगातार दबाव बना रहा।

    सबसे अधिक नुकसान देश के सबसे बड़े निजी बैंक एचडीएफसी बैंक को हुआ। सप्ताह भर में कंपनी का बाजार पूंजीकरण 1.18 लाख करोड़ रुपये से अधिक घट गया। इसके बाद रिलायंस इंडस्ट्रीज को भी बड़ा झटका लगा, जिसका मार्केटकैप 65 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा कम हो गया। भारतीय शेयर बाजार की सबसे मूल्यवान कंपनी होने के बावजूद रिलायंस अपनी शीर्ष स्थिति बनाए रखने में सफल रही।

    स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, बजाज फाइनेंस, आईसीआईसीआई बैंक, भारती एयरटेल, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, लाइफ इंश्योरेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया और लार्सन एंड टुब्रो जैसी कंपनियों के बाजार पूंजीकरण में भी उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई। इन सभी कंपनियों के शेयरों पर बिकवाली का दबाव बना रहा, जिससे उनके कुल मूल्यांकन में कमी आई।

    इस पूरे सप्ताह के दौरान केवल हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड ने सकारात्मक प्रदर्शन किया। कंपनी का बाजार पूंजीकरण मामूली बढ़त के साथ ऊपर गया और वह शीर्ष 10 कंपनियों में अकेली ऐसी कंपनी रही, जिसने निवेशकों को राहत दी। उपभोक्ता उत्पाद क्षेत्र की इस कंपनी में अपेक्षाकृत स्थिर निवेश के कारण उसका मूल्यांकन बढ़ने में सफलता मिली।

    हालांकि बाजार में कमजोरी के बावजूद कंपनियों की रैंकिंग में कोई बड़ा बदलाव नहीं आया। रिलायंस इंडस्ट्रीज देश की सबसे अधिक बाजार पूंजीकरण वाली सूचीबद्ध कंपनी बनी रही। इसके बाद भारती एयरटेल, एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, बजाज फाइनेंस, एलआईसी, लार्सन एंड टुब्रो और हिंदुस्तान यूनिलीवर का स्थान रहा।

    विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक आर्थिक घटनाक्रम, विदेशी निवेशकों की गतिविधियां और अंतरराष्ट्रीय बाजारों का रुख निकट भविष्य में भी भारतीय शेयर बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। यदि वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता कम होती है और निवेशकों का भरोसा लौटता है तो बाजार में सुधार की संभावना बन सकती है। फिलहाल निवेशक आगामी आर्थिक आंकड़ों, कंपनियों के वित्तीय परिणामों और वैश्विक संकेतों पर नजर बनाए हुए हैं, क्योंकि इन्हीं के आधार पर बाजार की अगली चाल तय होगी।