Author: bharati

  • अमेरिका की नई व्यापार नीति से बढ़ी चिंता: 60 देशों पर अतिरिक्त टैरिफ का प्रस्ताव, भारत भी शामिल

    अमेरिका की नई व्यापार नीति से बढ़ी चिंता: 60 देशों पर अतिरिक्त टैरिफ का प्रस्ताव, भारत भी शामिल

    नई दिल्ली। वैश्विक व्यापार पर एक बड़ा प्रभाव डालने वाला प्रस्ताव सामने आया है, जिसमें अमेरिका ने भारत सहित लगभग 60 देशों और अर्थव्यवस्थाओं पर अतिरिक्त 12.5 प्रतिशत टैरिफ लगाने की योजना पेश की है। यह प्रस्ताव अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय (यूएसटीआर) द्वारा 1974 के ट्रेड एक्ट की धारा 301 के तहत रखा गया है, जिसका आधार इन देशों में जबरन श्रम (फोर्स्ड लेबर) से जुड़े उत्पादों के आयात को रोकने में कथित विफलता बताया गया है।

    अमेरिकी प्रशासन के अनुसार, कई देशों ने ऐसे उत्पादों की पहचान और उनके आयात पर रोक लगाने के लिए पर्याप्त और प्रभावी कदम नहीं उठाए हैं, जो जबरन श्रम से तैयार किए गए हो सकते हैं। यूएसटीआर का कहना है कि यह स्थिति वैश्विक व्यापार में असंतुलन पैदा करती है और अमेरिकी श्रमिकों को अनुचित प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ता है।

    यूएसटीआर के प्रस्ताव के अनुसार, जिन देशों ने पहले से जबरन श्रम से जुड़े उत्पादों पर प्रतिबंध लगाने या आंशिक नियंत्रण लागू करने के प्रयास किए हैं, उन पर 10 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगाया जा सकता है। वहीं, जिन देशों ने इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया है, उन पर 12.5 प्रतिशत तक का अतिरिक्त टैरिफ लागू करने का प्रस्ताव है। इस सूची में भारत भी शामिल बताया गया है।

    अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर ने इस मुद्दे पर सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि किसी भी तरह का जबरन श्रम वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने कहा कि प्रमुख व्यापारिक साझेदारों द्वारा इस दिशा में पर्याप्त कार्रवाई न करना चिंता का विषय है और इससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार व्यवस्था प्रभावित होती है।

    प्रस्ताव में यह भी कहा गया है कि कुछ देशों ने पहले से ही अमेरिकी व्यापार समझौतों जैसे यूएसएमसीए के तहत इस दिशा में कुछ प्रतिबद्धताएं जताई हैं, लेकिन यह पर्याप्त नहीं हैं। अमेरिका का मानना है कि सभी व्यापारिक साझेदारों को मिलकर यह सुनिश्चित करना होगा कि वैश्विक व्यापार किसी भी रूप में जबरन श्रम को बढ़ावा न दे।

    इसके अलावा, यूएसटीआर ने एक विशेष टेक्सटाइल मैकेनिज्म का भी प्रस्ताव दिया है, जिसके तहत कुछ देशों से आने वाले कपड़ा और परिधान उत्पादों की सीमित मात्रा को कम टैरिफ दर पर अमेरिका में प्रवेश की अनुमति दी जा सकती है। यह व्यवस्था विशेष रूप से उन देशों के लिए होगी जो आंशिक रूप से अनुपालन कर रहे हैं।

    प्रस्तावित नियमों पर आगे की प्रक्रिया के तहत 7 जुलाई 2026 को सार्वजनिक सुनवाई की जाएगी, जिसमें विभिन्न देशों और हितधारकों से सुझाव लिए जाएंगे। इसके बाद अंतिम निर्णय लिया जाएगा कि इन टैरिफ को किस तरह लागू किया जाएगा।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह प्रस्ताव लागू होता है, तो इससे वैश्विक सप्लाई चेन पर असर पड़ सकता है और कई विकासशील देशों के निर्यात पर दबाव बढ़ सकता है। खासकर उन देशों के लिए चुनौती बढ़ सकती है जो अमेरिका को बड़े पैमाने पर वस्त्र, इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य उत्पाद निर्यात करते हैं।

    इस प्रस्ताव ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार जगत में नई बहस छेड़ दी है, जहां एक ओर श्रम अधिकारों की सुरक्षा की बात हो रही है, वहीं दूसरी ओर व्यापारिक बाधाओं और आर्थिक प्रभावों को लेकर चिंता जताई जा रही है।

  • इंस्टाग्राम कॉल और सीक्रेट चैट से चलाता था गैंग, लाखों का माल बरामद

    इंस्टाग्राम कॉल और सीक्रेट चैट से चलाता था गैंग, लाखों का माल बरामद


    ग्वालियर । ग्वालियर पुलिस ने शहर में सक्रिय एक हाईटेक चोरी गिरोह का पर्दाफाश कर बड़ी सफलता हासिल की है। इंदरगंज थाना पुलिस ने दो और आरोपियों को गिरफ्तार करते हुए करीब 94 लाख 25 हजार रुपए मूल्य का चोरी का माल बरामद किया है। बरामदगी में सोना, चांदी, नकदी और चोरी के पैसों से खरीदी गई एक कार शामिल है। पुलिस इसे वर्ष 2026 की सबसे बड़ी रिकवरी मान रही है।

    इस मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि गिरोह का मास्टरमाइंड विवेक प्रजापति कंप्यूटर इंजीनियरिंग का छात्र रहा है। पुलिस के अनुसार, जल्दी और अधिक पैसा कमाने की चाह में उसने अपराध का रास्ता चुना और तकनीक का इस्तेमाल करते हुए एक संगठित गिरोह तैयार कर लिया। गिरोह के सदस्य बेहद सुनियोजित तरीके से सूने मकानों को निशाना बनाते थे और पुलिस की निगरानी से बचने के लिए आधुनिक तकनीकों का सहारा लेते थे।

    मामले की शुरुआत 5 मई 2026 को हुई थी, जब इंदरगंज क्षेत्र निवासी अजय शंकर मित्तल के घर में चोरी की बड़ी वारदात हुई। मकान सूना होने का फायदा उठाकर चोरों ने ताला तोड़ा और लाखों रुपए के जेवरात तथा अन्य कीमती सामान लेकर फरार हो गए। शिकायत के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों तक पहुंचने में सफलता हासिल की।

    जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि गिरोह का सरगना विवेक प्रजापति अपने साथियों और परिजनों से संपर्क करने के लिए सामान्य फोन कॉल या मैसेजिंग एप का इस्तेमाल नहीं करता था। वह इंस्टाग्राम कॉल और सीक्रेट चैट फीचर का उपयोग करता था, ताकि उसकी बातचीत को ट्रैक करना मुश्किल हो सके। गिरफ्तारी के बाद भी उसने करीब 48 घंटे तक पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की, लेकिन उसके साथी फरहान खान से मिली जानकारी ने पूरे नेटवर्क की परतें खोल दीं।

    आरोपियों की निशानदेही पर पुलिस पनिहार टोल प्लाजा के आगे बीहड़ क्षेत्र में पहुंची, जहां चोरी का माल जमीन में गाड़कर और पत्थरों के नीचे छिपाकर रखा गया था। यहां से बड़ी मात्रा में सोना और चांदी बरामद की गई। पुलिस ने चोरी के गहने खरीदने के आरोप में एक सराफा कारोबारी विवेक सोनी को भी गिरफ्तार किया है।

    सीएसपी रोबिन जैन के मुताबिक अब तक गिरोह के कई सदस्य पुलिस गिरफ्त में आ चुके हैं। इनमें मास्टरमाइंड विवेक प्रजापति, फरहान खान, आकाश माहौर, मयूर राठौर, एक नाबालिग आरोपी और चोरी का माल खरीदने वाला सुनार शामिल हैं। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से लगभग 300 ग्राम सोना, साढ़े 14 किलो चांदी तथा चोरी की रकम से खरीदी गई आई-20 कार जब्त की है।

    पुलिस अब गिरोह से जुड़े अन्य संभावित अपराधों और नेटवर्क की जांच कर रही है। माना जा रहा है कि आरोपियों ने शहर और आसपास के क्षेत्रों में कई अन्य वारदातों को भी अंजाम दिया हो सकता है।

  • देवास में दर्दनाक हादसा, टूटे बिजली तार की चपेट में आने से युवक की मौत

    देवास में दर्दनाक हादसा, टूटे बिजली तार की चपेट में आने से युवक की मौत


    देवास । देवास जिले के विजयागंज मंडी क्षेत्र स्थित बरखेड़ा गांव में बिजली विभाग की कथित लापरवाही एक युवक की जान पर भारी पड़ गई। खेत में चरी काटने गए 22 वर्षीय युवक की टूटे हुए बिजली तार की चपेट में आने से दर्दनाक मौत हो गई। घटना के बाद गांव में शोक का माहौल है, वहीं परिजनों ने बिजली कंपनी के अधिकारियों पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं।

    मृतक की पहचान अरुण मालवीय (22) के रूप में हुई है। परिजनों के अनुसार मंगलवार शाम अरुण अपने खेत पर चरी काटने गया था। इसी दौरान खेत के ऊपर से गुजर रही विद्युत लाइन का तार अचानक टूटकर नीचे आ गिरा और वह उसकी चपेट में आ गया। करंट लगने से अरुण की मौके पर ही मौत हो गई।

    परिजनों का कहना है कि खेत के ऊपर से गुजरने वाली बिजली लाइन के तार लंबे समय से नीचे झूल रहे थे और किसी भी समय बड़े हादसे की आशंका बनी हुई थी। इस संबंध में कई बार बिजली कंपनी और संबंधित अधिकारियों को शिकायत भी की गई थी, लेकिन डेढ़ से दो वर्षों के दौरान समस्या का समाधान नहीं किया गया। परिवार का आरोप है कि यदि समय रहते तारों की मरम्मत कर दी जाती तो यह हादसा टाला जा सकता था।

    घटना का पता तब चला जब काफी देर तक अरुण का मोबाइल फोन नहीं उठा। चिंतित परिजन और ग्रामीण उसे तलाशते हुए खेत पहुंचे, जहां वह बिजली तार की चपेट में आने के बाद जमीन पर पड़ा मिला। इसके बाद उसे तत्काल जिला अस्पताल ले जाया गया, लेकिन चिकित्सकों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया।

    युवक की असामयिक मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। गांव के लोगों में भी बिजली विभाग के प्रति नाराजगी देखी जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि जर्जर और झूलते बिजली तारों की समस्या लंबे समय से बनी हुई है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी इस ओर गंभीरता नहीं दिखा रहे हैं।

    पुलिस ने मामले में मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। शव को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल की शवगृह में रखवाया गया था। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया जाएगा। जांच के दौरान पुलिस हादसे के सभी पहलुओं की पड़ताल करेगी।

    यह घटना एक बार फिर बिजली लाइनों के रखरखाव और सुरक्षा मानकों पर सवाल खड़े करती है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जाए तथा क्षेत्र में झूल रहे बिजली तारों को तत्काल दुरुस्त कराया जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

  • देवास में युवक ने फांसी लगाकर दी जान, सुबह पत्नी ने देखा तो मचा हड़कंप

    देवास में युवक ने फांसी लगाकर दी जान, सुबह पत्नी ने देखा तो मचा हड़कंप


    देवास । देवास शहर के जवाहर नगर क्षेत्र में बुधवार सुबह एक दर्दनाक घटना सामने आई, जहां 26 वर्षीय युवक ने कथित रूप से फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। युवक का शव घर में फंदे पर लटका मिला। घटना का पता उस समय चला जब सुबह उसकी पत्नी की नींद खुली और उसने पति को फांसी के फंदे पर झूलते देखा। यह दृश्य देखकर वह घबरा गई और तुरंत परिजनों को सूचना दी।

    मृतक की पहचान अजय जाटव (26) के रूप में हुई है। वह जवाहर नगर क्षेत्र में अपने परिवार के साथ रह रहा था और मूल रूप से उत्तर प्रदेश का निवासी था। परिजनों के अनुसार अजय पिछले तीन वर्षों से एक निजी कंपनी में हेल्पर के रूप में कार्यरत था। उसके परिवार में पत्नी और एक छोटा बेटा है।

    घटना की जानकारी मिलते ही परिजन मौके पर पहुंचे और अजय को तत्काल जिला अस्पताल लेकर गए। हालांकि अस्पताल पहुंचने पर चिकित्सकों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। युवक की अचानक मौत से परिवार में मातम का माहौल है और परिजन गहरे सदमे में हैं।

    प्रारंभिक जानकारी के अनुसार अजय ने अपनी पत्नी की साड़ी से फंदा बनाकर यह कदम उठाया। हालांकि उसने आत्महत्या जैसा कठोर फैसला क्यों लिया, इसका कारण अभी स्पष्ट नहीं हो सका है। घटनास्थल से कोई सुसाइड नोट भी बरामद नहीं होने की जानकारी सामने आई है।

    सूचना मिलने पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। शव का पोस्टमॉर्टम कराकर परिजनों को सौंप दिया गया है। पुलिस परिजनों, परिचितों और आसपास के लोगों से पूछताछ कर रही है, ताकि आत्महत्या के पीछे की वजह का पता लगाया जा सके।

    फिलहाल पुलिस सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए जांच कर रही है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि युवक ने यह कदम किन परिस्थितियों में उठाया।

  • होर्मुज संकट के बीच भारत की बड़ी कूटनीतिक चाल, वेनेजुएला से तेल डील की संभावनाएं तेज, ऊर्जा सुरक्षा को मिलेगा नया आधार

    होर्मुज संकट के बीच भारत की बड़ी कूटनीतिक चाल, वेनेजुएला से तेल डील की संभावनाएं तेज, ऊर्जा सुरक्षा को मिलेगा नया आधार

    नई दिल्ली । वैश्विक ऊर्जा बाजार में जारी अनिश्चितताओं और होर्मुज स्ट्रेट को लेकर बने तनावपूर्ण हालात के बीच भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक कदम उठाता नजर आ रहा है। इसी क्रम में वेनेजुएला की अंतरिम राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज का 3 से 7 जून तक भारत दौरा प्रस्तावित है, जिसे ऊर्जा सहयोग और निवेश साझेदारी के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।
    इस दौरे के दौरान भारत और वेनेजुएला के बीच कच्चे तेल की आपूर्ति, निवेश विस्तार और दीर्घकालिक ऊर्जा समझौतों पर व्यापक चर्चा होने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह समझौते आगे बढ़ते हैं तो भारत की तेल आयात निर्भरता रूस और खाड़ी देशों पर कम हो सकती है और ऊर्जा आपूर्ति में विविधता आएगी।

    वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में मध्य पूर्व में चल रहे तनाव और होर्मुज स्ट्रेट से जुड़ी अनिश्चितताओं ने कच्चे तेल की आपूर्ति श्रृंखला को प्रभावित किया है। ऐसे में भारत लगातार वैकल्पिक स्रोतों की तलाश में है ताकि किसी एक क्षेत्र पर अत्यधिक निर्भरता से बचा जा सके। वेनेजुएला, जिसके पास दुनिया के सबसे बड़े प्रमाणित तेल भंडारों में से एक माना जाता है, भारत के लिए एक रणनीतिक विकल्प के रूप में उभर रहा है। हाल के आंकड़ों के अनुसार भारत पहले ही वेनेजुएला से तेल आयात में उल्लेखनीय वृद्धि कर चुका है और यह देश भारत के प्रमुख आपूर्तिकर्ताओं में शामिल हो गया है।

    वेनेजुएला की अंतरिम राष्ट्रपति के साथ इस यात्रा में ऊर्जा, व्यापार, स्वास्थ्य, फार्मास्यूटिकल्स और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर विशेष जोर दिया जाएगा। विदेश मंत्रालय के अनुसार इस प्रतिनिधिमंडल में कई वरिष्ठ मंत्री भी शामिल हैं, जो द्विपक्षीय सहयोग के विभिन्न पहलुओं पर भारत के साथ चर्चा करेंगे। यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब वैश्विक तेल बाजार अस्थिर है और कई देशों की अर्थव्यवस्था ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव से प्रभावित हो रही है।

    विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि यदि भारत वेनेजुएला के साथ दीर्घकालिक ऊर्जा समझौते करता है तो यह न केवल आपूर्ति सुरक्षा को मजबूत करेगा बल्कि कीमतों में स्थिरता लाने में भी मदद करेगा। साथ ही, अमेरिका और अन्य प्रतिबंधों के बावजूद वेनेजुएला से तेल आपूर्ति भारत के लिए एक वैकल्पिक मार्ग प्रदान कर सकती है, जिससे किसी एक क्षेत्रीय संकट का प्रभाव सीमित हो जाएगा।

  • लोकायुक्त के भीतर कथित रिश्वतखोरी का खुलासा, सिस्टम की पारदर्शिता पर बहस तेज

    लोकायुक्त के भीतर कथित रिश्वतखोरी का खुलासा, सिस्टम की पारदर्शिता पर बहस तेज


    जबलपुर। मध्य प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई करने वाली लोकायुक्त संस्था खुद गंभीर सवालों के घेरे में आ गई है। एक स्टिंग ऑपरेशन में लोकायुक्त संगठन के कुछ कर्मचारियों पर रिश्वत लेकर ट्रैप मामलों को कमजोर करने और आरोपियों को राहत पहुंचाने की कथित डील करते हुए सामने आने का दावा किया गया है। इस खुलासे ने उस व्यवस्था की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है, जिसका काम भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाना है।

    स्टिंग ऑपरेशन के दौरान रिपोर्टर ने रिश्वत लेते पकड़े गए सरकारी कर्मचारियों के रिश्तेदार बनकर लोकायुक्त के कर्मचारियों से संपर्क किया। बातचीत में कुछ कर्मचारियों ने कथित तौर पर ऐसे तरीके बताए, जिनके जरिए ट्रैप मामलों की जांच को प्रभावित किया जा सकता है। इनमें वॉयस सैंपल की प्रक्रिया को प्रभावित करना, जांच को वर्षों तक लंबित रखना और गवाहों को मैनेज करने जैसे दावे शामिल हैं।

    भोपाल लोकायुक्त में पदस्थ टेक्नीशियन अमित विश्वकर्मा के साथ हुई मुलाकात में कथित तौर पर यह दावा किया गया कि जांच को आरोपी की सेवानिवृत्ति तक लंबा खींचा जा सकता है, जिससे पेंशन और अन्य सेवा लाभों पर तत्काल प्रभाव न पड़े। बातचीत के दौरान वॉयस सैंपल को प्रभावित करने और जांच प्रक्रिया को धीमा करने के लिए लाखों रुपये की मांग किए जाने का भी दावा किया गया।

    स्टिंग में यह भी सामने आया कि कुछ मामलों में आरोपी को पहले से यह बताया जा सकता है कि उसे वॉयस सैंपल के दौरान क्या बोलना है और क्या नहीं। कथित तौर पर गवाहों को भी प्रभावित करने की बात कही गई, ताकि जांच की दिशा बदली जा सके। इस पूरी प्रक्रिया के लिए 3 लाख से 5 लाख रुपये तक की डील की चर्चा सामने आई।

    सागर में पदस्थ हेड कॉन्स्टेबल यशवंत सिंह के साथ हुई बातचीत में भी जांच को प्रभावित करने, भाषा और बोलने के तरीके में बदलाव कर वॉयस सैंपल को कमजोर करने तथा फॉरेंसिक रिपोर्ट पर असर डालने जैसे दावे किए गए। उन्होंने कथित तौर पर जांच को कई महीनों तक टालने और दस्तावेजों को मैनेज कराने की बात भी कही।

    वहीं, लोकायुक्त के अन्य कर्मचारियों के नाम भी सामने आए, जिन पर कथित तौर पर आरोपियों और अधिकारियों के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाने के आरोप लगे हैं। एक अन्य कर्मचारी ने तो कथित रूप से 3 लाख रुपये में पूरा मामला “मैनेज” करने का दावा करते हुए पहले किस्त के रूप में रकम देने की बात कही।

    यह खुलासा इसलिए भी गंभीर माना जा रहा है क्योंकि लोकायुक्त जैसी संस्था पर आम लोगों का भरोसा भ्रष्टाचार के खिलाफ निष्पक्ष कार्रवाई के लिए टिका होता है। यदि जांच एजेंसियों के भीतर ही ऐसे नेटवर्क सक्रिय हैं, तो इससे न्यायिक प्रक्रिया और भ्रष्टाचार विरोधी अभियान दोनों प्रभावित हो सकते हैं।

    अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि इन आरोपों और स्टिंग में सामने आए तथ्यों पर क्या कार्रवाई होती है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह मामला केवल कुछ कर्मचारियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे तंत्र की जवाबदेही और पारदर्शिता पर व्यापक बहस खड़ी कर सकता है।

  • डीके शिवकुमार का शपथ ग्रहण आज, बीजेपी नेता येदियुरप्पा से मुलाकात के बाद सियासी संदेशों पर तेज हुई बहस

    डीके शिवकुमार का शपथ ग्रहण आज, बीजेपी नेता येदियुरप्पा से मुलाकात के बाद सियासी संदेशों पर तेज हुई बहस

    नई दिल्ली । कर्नाटक की राजनीति में आज एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है, जहां डीके शिवकुमार राज्य के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने जा रहे हैं। बेंगलुरु स्थित लोक भवन के ग्लास हाउस में शाम 4 बजकर 5 मिनट पर होने वाले इस शपथ ग्रहण समारोह को लेकर पूरे राज्य में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। राज्यपाल थावरचंद गहलोत उन्हें पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाएंगे, जबकि उनके साथ नई कैबिनेट के 10 से 12 मंत्रियों के भी शपथ लेने की संभावना है। समारोह में कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व के साथ-साथ कई वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी भी अपेक्षित है, जिससे यह कार्यक्रम राजनीतिक रूप से और अधिक महत्वपूर्ण बन गया है।

    शपथ ग्रहण से पहले डीके शिवकुमार की लगातार हो रही मुलाकातों ने सियासी हलचल को और बढ़ा दिया है। उन्होंने पहले पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया से मुलाकात की और उसके बाद भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री बी.एस. येदियुरप्पा से भी भेंट की। इस मुलाकात को राजनीतिक दृष्टि से बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि इसे केवल औपचारिक मुलाकात के बजाय एक बड़े सियासी संदेश के रूप में देखा जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम राज्य में संतुलन और संवाद की नीति को दर्शाने का प्रयास हो सकता है, हालांकि इसकी आधिकारिक व्याख्या सामने नहीं आई है।

    शपथ ग्रहण समारोह की तैयारियां पूरे जोर-शोर से चल रही हैं और बेंगलुरु शहर को विशेष रूप से सजाया गया है। कार्यक्रम में समाज के विभिन्न वर्गों को आमंत्रित किया गया है, जिसमें दिहाड़ी मजदूर, किसान प्रतिनिधि, दलित संगठन, महिला समूह, युवा नेता और विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हैं। इसके साथ ही मीडिया, फिल्म, खेल, न्यायपालिका, उद्योग और कला जगत से जुड़े लोगों की भी उपस्थिति तय मानी जा रही है, जिससे यह आयोजन व्यापक सामाजिक प्रतिनिधित्व का प्रतीक बनता दिखाई दे रहा है।

    नई कैबिनेट को लेकर अभी आधिकारिक रूप से पूरी सूची जारी नहीं की गई है, लेकिन संकेत हैं कि पुराने और नए चेहरों का मिश्रण देखने को मिल सकता है। पार्टी के भीतर संतुलन साधने और विभिन्न गुटों को प्रतिनिधित्व देने की रणनीति पर काम चल रहा है। इस बीच डिप्टी सीएम और अन्य प्रमुख मंत्रालयों को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं, हालांकि अंतिम फैसला शपथ ग्रहण के बाद ही स्पष्ट होगा।

    डीके शिवकुमार ने पहले ही संकेत दिए हैं कि उनके नेतृत्व में कर्नाटक में एक नए युग की शुरुआत होगी, विशेष रूप से युवाओं के लिए अवसरों को बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा। हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया है कि जिम्मेदारियां आसान नहीं होंगी और सरकार के सामने कई चुनौतियां रहेंगी। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में नई सरकार की नीतियां और कैबिनेट संरचना राज्य की दिशा तय करेगी।

    इस बीच शपथ ग्रहण से पहले उनके आवास पर सुरक्षा व्यवस्था को भी सख्त कर दिया गया है। समर्थकों में उत्साह का माहौल है और पूरे राज्य में राजनीतिक चर्चाओं का दौर जारी है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि नई सरकार अपने पहले फैसलों के साथ किस दिशा में आगे बढ़ती है और राज्य की राजनीति में क्या नया संतुलन स्थापित होता है।

  • 31 खदानों का 16 करोड़ का ठेका, बीच में रेत माफिया सक्रिय होने के आरोप

    31 खदानों का 16 करोड़ का ठेका, बीच में रेत माफिया सक्रिय होने के आरोप


    जबलपुर। जबलपुर जिले में पिछले सात महीनों से रेत खदानों की नीलामी नहीं होने का खामियाजा सरकार और आम जनता दोनों को भुगतना पड़ रहा है। नवंबर 2025 से जिले की वैध रेत खदानें बंद पड़ी हैं, जिसके चलते सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है। दूसरी ओर इस स्थिति का सबसे अधिक फायदा अवैध खनन माफियाओं को मिल रहा है, जिन्होंने नर्मदा समेत अन्य नदियों में रेत उत्खनन का समानांतर कारोबार खड़ा कर लिया है।

    जिले में नर्मदा, हिरण और गौर नदी क्षेत्र में करीब 42 रेत खदानें स्थित हैं, जिनमें से 31 खदानों को राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) की स्वीकृति प्राप्त है। राज्य सरकार ने इन खदानों के लिए लगभग पांच लाख घनमीटर रेत उत्खनन का टेंडर जारी किया था। इसके बदले करीब 16.5 करोड़ रुपये की लीज राशि निर्धारित की गई थी, लेकिन ऊंची प्रीमियम दर और अधिक उत्खनन लक्ष्य के कारण किसी भी ठेकेदार ने रुचि नहीं दिखाई। लगातार तीन बार टेंडर प्रक्रिया दोहराने के बावजूद खदानों का आवंटन नहीं हो सका।

    खनिज कारोबार से जुड़े जानकारों का कहना है कि वर्तमान बाजार परिस्थितियों में इतनी बड़ी राशि और निर्धारित शर्तों के साथ खदानों का संचालन आर्थिक रूप से लाभकारी नहीं है। यही कारण है कि ठेकेदारों ने दूरी बनाए रखी। अब खनिज विभाग नई रणनीति पर काम कर रहा है। विभाग खदानों की संख्या, उत्खनन की मात्रा और प्रीमियम दरों में कमी कर टेंडर को व्यावहारिक बनाने की तैयारी कर रहा है। जानकारी के अनुसार पांच लाख घनमीटर की सीमा घटाकर करीब साढ़े तीन लाख घनमीटर करने पर विचार किया जा रहा है।

    उधर वैध खदानों के बंद होने से अवैध खनन का नेटवर्क लगातार मजबूत हुआ है। रात के अंधेरे में पोकलेन, जेसीबी और हाईवा जैसे भारी वाहनों की मदद से नर्मदा और उसकी सहायक नदियों से बड़े पैमाने पर रेत निकाली जा रही है। कई स्थानों पर नदी की धाराओं को प्रभावित कर अस्थायी रास्ते और पुल तक बनाए जा रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि रातभर ट्रैक्टर और हाईवा के जरिए अवैध परिवहन खुलेआम चलता है, लेकिन प्रभावी रोक नहीं लग पा रही।

    इसका असर रेत बाजार पर भी साफ दिखाई दे रहा है। वैध आपूर्ति ठप होने से रेत की उपलब्धता कम हो गई है और कीमतों में भारी उछाल आया है। वर्तमान में जबलपुर में एक हाईवा रेत 28 से 30 हजार रुपये तक बिक रही है, जबकि पड़ोसी कटनी जिले में इसकी कीमत 50 हजार रुपये प्रति हाईवा तक पहुंच गई है। बढ़ती कीमतों का असर निर्माण कार्यों और रियल एस्टेट गतिविधियों पर भी पड़ रहा है।

    हालांकि प्रशासन अब सक्रिय नजर आ रहा है। जिला खनिज विभाग, पुलिस और राजस्व विभाग की संयुक्त टीमें बेलखाड़ू, बरगी, सिहोरा और चरगवां क्षेत्रों में लगातार कार्रवाई कर रही हैं। अवैध रूप से भंडारित रेत को जब्त कर नष्ट किया जा रहा है। वहीं भोपाल स्थित खनिज मुख्यालय ने भी जबलपुर की खदानों से संबंधित दस्तावेजों की समीक्षा शुरू कर दी है। इसके बावजूद सवाल यही है कि जब तक वैध खदानों का संचालन शुरू नहीं होगा, तब तक अवैध खनन पर पूरी तरह लगाम लगाना बड़ी चुनौती बना रहेगा।

  • एक ही सीढ़ी, धुएं से भरा होटल और मौत का मंजर: दिल्ली आग हादसे में 21 की मौत, रेस्क्यू पर उठे सवाल

    एक ही सीढ़ी, धुएं से भरा होटल और मौत का मंजर: दिल्ली आग हादसे में 21 की मौत, रेस्क्यू पर उठे सवाल

    नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली के मालवीय नगर इलाके में एक दर्दनाक हादसे ने पूरे शहर को झकझोर दिया है, जहां एक होटल में लगी भीषण आग में अब तक 21 लोगों की मौत हो चुकी है। इस हादसे में दर्जनों लोग घायल हुए हैं, जबकि बचाव दल ने कई लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला है। घटना के बाद स्थानीय प्रशासन और दमकल विभाग की कार्रवाई तेज कर दी गई है, लेकिन शुरुआती जांच में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर लापरवाही के संकेत सामने आए हैं।

    यह आग मालवीय नगर स्थित एक बहुमंजिला इमारत के ‘लेमन ग्रीन रेस्टोरेंट’ में सुबह करीब 8.50 से 9 बजे के बीच लगी। देखते ही देखते आग ने पूरी इमारत को अपनी चपेट में ले लिया और ऊपरी मंजिलों तक धुआं फैल गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, इमारत में केवल एक ही सीढ़ी होने के कारण लोग फंस गए और बाहर निकलने का कोई सुरक्षित रास्ता नहीं बचा।

    हादसे के दौरान कई लोगों ने अपनी जान बचाने के लिए खतरनाक कदम उठाए और तीसरी मंजिल से नीचे बिछाए गए गद्दों पर छलांग लगा दी। स्थानीय लोगों ने तुरंत राहत कार्य शुरू किया और गली में गद्दे बिछाकर फंसे हुए लोगों को बचाने की कोशिश की। कई लोग इस दौरान गंभीर रूप से घायल भी हो गए, जिनमें कुछ के पैर टूटने की भी जानकारी सामने आई है।

    स्थानीय नागरिकों और चश्मदीदों के अनुसार, आग लगने के बाद पूरी इमारत धुएं से भर गई थी, जिससे लोगों को सांस लेने और बाहर निकलने में भारी दिक्कत हुई। कई लोग बेसमेंट में भी फंस गए थे, जिन्हें स्थानीय लोगों ने शटर तोड़कर बाहर निकाला। प्रत्यक्षदर्शियों ने यह भी बताया कि इमारत में सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया गया था और एक ही एग्जिट होने के कारण हालात और बिगड़ गए।

    घटना पर बयान देते हुए स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने कहा कि शुरुआती जानकारी के अनुसार होटल में सुरक्षा व्यवस्थाएं बेहद कमजोर थीं। वहीं, प्रशासनिक अधिकारियों ने बताया कि आग लगने के कारणों की जांच की जा रही है, लेकिन प्रारंभिक आशंका है कि आग रेस्टोरेंट के किचन या इलेक्ट्रिक उपकरण से शुरू हुई हो सकती है।

    दमकल विभाग के अधिकारियों के अनुसार, उन्हें सुबह 8.50 बजे सूचना मिली जिसके बाद सात फायर टेंडर तुरंत मौके पर भेजे गए। राहत और बचाव अभियान में कुल 37 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। इमारत में बेसमेंट सहित कुल छह मंजिलें थीं, जहां बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे।

    अधिकारियों ने यह भी बताया कि इमारत में कई विदेशी नागरिक भी ठहरे हुए थे, जो पास के अस्पताल में इलाज के लिए आए थे। हादसे के बाद बिजली आपूर्ति तुरंत काट दी गई और बचाव कार्य तेजी से पूरा किया गया।

    इस दुखद घटना पर प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री ने शोक व्यक्त किया है और मृतकों के परिजनों को आर्थिक सहायता की घोषणा की गई है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि घटना की विस्तृत जांच कर जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

    दिल्ली का यह अग्निकांड एक बार फिर शहरी भवन सुरक्षा मानकों और आपातकालीन निकास व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय पर सुरक्षित निकास और पर्याप्त सीढ़ियों की व्यवस्था होती, तो कई जानें बचाई जा सकती थीं।

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    14 साल बाद मांगी गई ₹3.33 लाख की वसूली, ट्रिब्यूनल ने मांगा जवाब


    जबलपुर। जबलपुर की 91 वर्षीय श्यामा देवी झा को केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT) से बड़ी राहत मिली है। अधिकरण ने उनकी पारिवारिक पेंशन से की जा रही 3.33 लाख रुपए की वसूली पर अंतरिम रोक लगा दी है। आयुध निर्माणी विभाग ने कथित अधिक पेंशन भुगतान का हवाला देते हुए यह राशि वापस लेने का आदेश जारी किया था, लेकिन बुजुर्ग महिला ने इसे न्यायिक चुनौती देते हुए अधिकरण का दरवाजा खटखटाया। प्रारंभिक सुनवाई में अधिकरण ने मामले को गंभीर मानते हुए विभाग को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

    श्यामा देवी झा के पति शंभू दयाल झा आयुध निर्माणी में कार्यरत थे। सेवानिवृत्ति के बाद वे नियमित पेंशन प्राप्त कर रहे थे। वर्ष 2012 में उनके निधन के बाद पारिवारिक पेंशन का लाभ उनकी पत्नी श्यामा देवी को मिलने लगा। पिछले 14 वर्षों से उन्हें निर्धारित प्रक्रिया के तहत पेंशन मिल रही थी, लेकिन हाल ही में विभाग ने आदेश जारी कर दावा किया कि उन्हें अधिक भुगतान किया गया है और करीब 3 लाख 33 हजार रुपए की राशि की वसूली की जाएगी।

    विभाग के इस फैसले ने बुजुर्ग महिला के सामने आर्थिक संकट खड़ा कर दिया। याचिका में कहा गया कि 91 वर्ष की उम्र में पेंशन ही उनका एकमात्र सहारा है और इसी राशि से उनका जीवन-यापन चलता है। साथ ही यह भी तर्क दिया गया कि यदि किसी प्रकार का अधिक भुगतान हुआ भी है तो उसमें उनका कोई दोष नहीं है। उन्होंने न तो कोई गलत जानकारी दी और न ही किसी प्रकार की तथ्यात्मक जानकारी छिपाई। ऐसे में 14 साल बाद वसूली की कार्रवाई न केवल अनुचित है बल्कि मानवीय दृष्टि से भी न्यायसंगत नहीं मानी जा सकती।

    मामले में श्यामा देवी की ओर से अधिवक्ता आकाश सिंघई ने पक्ष रखा। उन्होंने अधिकरण के समक्ष दलील दी कि विभागीय त्रुटि का भार एक वृद्ध पेंशनभोगी पर नहीं डाला जा सकता। सुनवाई के दौरान अधिकरण ने प्रथम दृष्टया इन तर्कों को उचित माना और वसूली आदेश के क्रियान्वयन पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी।

    CAT के आदेश के बाद फिलहाल श्यामा देवी की पारिवारिक पेंशन से किसी प्रकार की कटौती नहीं की जाएगी। अधिकरण ने संबंधित विभाग को नोटिस जारी कर विस्तृत जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। अब अगली सुनवाई में विभाग का पक्ष सामने आने के बाद मामले में आगे की कार्रवाई तय होगी।

    यह मामला उन हजारों पेंशनभोगियों के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जिनके खिलाफ वर्षों बाद अधिक भुगतान के नाम पर रिकवरी की कार्रवाई की जाती है। फिलहाल बुजुर्ग महिला को राहत मिलने से उनके परिवार ने संतोष जताया है और न्यायिक प्रक्रिया पर भरोसा व्यक्त किया है।