शीतलहर का प्रभावतापमान में गिरावट
कई शहरों में न्यूनतम तापमान 10 डिग्री से कम
आगे का मौसम तीन दिन तक शीतलहर का असर
किसानों पर असर
नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह

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नाइट क्लब में आग लगने से 5 पर्यटक और 20 स्टाफ मेंबर्स मारे गए थे। गोवा पुलिस ने भाइयों समेत अन्य के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत FIR दर्ज की है, जिसमें हत्या नहीं बल्कि दुर्घटना से मौत और साजिश शामिल हैं। इस बीच, दिल्ली स्थित रिजनल पासपोर्ट ऑफिस (RPO) ने दोनों भाइयों को एक पत्र भेजा है, जिसमें लिखा है कि उन्हें पासपोर्ट एक्ट 1967 के तहत 7 दिनों के भीतर जवाब देना होगा। यह स्पष्ट करना होगा कि उनके पासपोर्ट नंबर Z7678521 (14/03/2024) को जब्त न करने का कारण क्या है।
दोनों के पासपोर्ट जब्त करने के नोटिस जारी
मंत्रालय ने गोवा पुलिस के पत्र के जवाब में बताया, ‘मामले की गंभीरता को देखते हुए RPO दिल्ली ने दोनों के पासपोर्ट जब्त करने के नोटिस जारी कर दिए हैं। पासपोर्ट एक्ट की धारा 10(3)(e) के तहत तभी कार्रवाई की जा सकती है जब अपराध संबंधित मामले की सुनवाई भारतीय अदालत में चल रही हो। इसलिए, मामले की जानकारी अदालत से प्राप्त कर RPO दिल्ली को भेजी जाए।’ गोवा पुलिस रविवार को दिल्ली में लूथरा भाइयों के घर भी गई, लेकिन वे पहले ही फरार हो चुके थे। सूत्रों की मानें तो दोनों फुकेत के एक रिसॉर्ट में ठहरे थे, लेकिन वहां से भी निकल गए जब तक अधिकारी पहुंच पाए।

मध्य प्रदेश में कुल 145 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में रबी फसलों की बुआई की जा चुकी है। गेहूं और चना जैसी फसलों में सिंचाई का काम चल रहा हैजिसके कारण यूरिया की मांग अत्यधिक बढ़ गई है। राज्य में कुल 23 लाख टन यूरिया की आवश्यकता हैलेकिन अब तक केवल 16 लाख टन यूरिया ही उपलब्ध कराया जा सका है। यह कमी अब किसानों के लिए परेशानी का सबब बन चुकी हैक्योंकि यूरिया की किल्लत से उनकी फसल की वृद्धि और उपज पर गंभीर असर पड़ सकता है।
टीकमगढ़ जिले में खाद की कमी के खिलाफ किसानों ने बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किया। खरगापुर में किसानों ने सड़क पर लेटकर चक्काजाम कियाजिससे खरगापुर-पलेरा मार्ग पर यातायात बाधित हो गया। किसानों का आरोप है कि खाद के लिए सरकार के दावों और जमीनी हकीकत में भारी अंतर है। सरकार यह दावा कर रही है कि खाद की कमी नहीं है और आवश्यकतानुसार आपूर्ति की जा रही हैलेकिन किसानों की परेशानियों को देखकर यह दावा गलत साबित हो रहा है।
रतलाम जिले में स्थिति और भी गंभीर हैजहां किसानों ने नकद वितरण केंद्र के बाहर रात नौ बजे से डेरा जमा लिया। यूरिया के लिए इन किसानों का संघर्ष सिर्फ खाद तक ही सीमित नहीं हैबल्कि यह उनके जीवन-यापन और फसलों की भविष्यवाणी से भी जुड़ा हुआ है। शादी-ब्याह के मौसम में जब पूरे परिवार की जरूरतों को पूरा करने के लिए किसान खाद के लिए लाइनों में खड़े हैंतो यह स्थिति कितनी गंभीर हो सकती हैइसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।
खाद संकट से जूझ रहे किसानों का कहना है कि यदि समय पर खाद नहीं मिलातो रबी फसलों की उपज पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। यूरिया की कमी के कारण किसान अपनी फसलों को सही तरीके से उर्वरित नहीं कर पा रहे हैंजिससे उनकी फसलें कमजोर हो सकती हैं। इससे उनकी आय पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ेगाजो पहले से ही मुश्किलों में घिरे हुए हैं।
सरकार के अधिकारी यह दावा कर रहे हैं कि खाद की आपूर्ति की कोई कमी नहीं है और इसे जल्द ही पूरा किया जाएगालेकिन वास्तविकता यह है कि खाद की आपूर्ति और मांग के बीच अंतर लगातार बढ़ता जा रहा है। इस स्थिति को देखते हुए यह सवाल उठता है कि क्या सरकार जल्द इस संकट को हल कर पाएगीया फिर किसानों को और अधिक संघर्ष करना पड़ेगा?
कुल मिलाकरमध्य प्रदेश के किसानों का खाद के लिए संघर्ष इस बात का प्रतीक है कि कृषि क्षेत्र में इन्फ्रास्ट्रक्चर की कमी और आपूर्ति व्यवस्था में सुधार की सख्त आवश्यकता है। राज्य सरकार को खाद संकट को दूर करने के लिए तुरंत कदम उठाने होंगेताकि किसानों की समस्याओं का समाधान किया जा सके और वे अपनी फसलों को सुरक्षित तरीके से उगा सकें। यदि इस संकट का समाधान नहीं किया गयातो यह न केवल किसानों के लिएबल्कि राज्य की कृषि अर्थव्यवस्था के लिए भी एक बड़ी चुनौती बन सकता है।

आजकल देश के विभिन्न हिस्सों में भू-माफिया सक्रिय हैंजो अवैध तरीके से जमीनों पर कब्ज़ा करनेबिक्री करने या फिर उन पर धोखाधड़ी करने का काम करते हैं। यह स्थिति उन लोगों के लिए और भी जटिल हो जाती है जो अपनी संपत्ति से दूर रहते हैंया जिनके पास नियमित रूप से अपनी जमीन की देखरेख करने का समय या साधन नहीं होता। यह मुद्दा केवल व्यक्तिगत अधिकारों से जुड़ा नहीं हैबल्कि देश की भूमि व्यवस्था और कानूनी सुरक्षा के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण है।
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक विशेष मामले में यह कहा कि अपीलकर्ता एक मां जो अपनी नाबालिग बेटी के नाम पर जमीन बेचना चाहती थीवह अपनी संपत्ति से दूर रहने के कारण उस जमीन की देखभाल नहीं कर सकती थी। कोर्ट ने अपीलकर्ता को जमीन बेचने की अनुमति देते हुए यह शर्त रखी कि बिक्री से प्राप्त राशि का 50 प्रतिशत नाबालिग बेटी के नाम एक राष्ट्रीयकृत बैंक में एफडी फिक्स्ड डिपॉजिट के रूप में जमा किया जाएगा। यह राशि तब तक नहीं निकाली जा सकेगी जब तक नाबालिग का वयस्क होने की उम्र नहीं हो जाती। कोर्ट ने यह कदम इसलिए उठाया ताकि नाबालिग की संपत्ति सुरक्षित रहे और उसका भविष्य सुनिश्चित किया जा सके।
इस फैसले से एक महत्वपूर्ण संदेश मिलता है कि कोर्ट सिर्फ कानूनी अधिकारों की रक्षा नहीं करताबल्कि बच्चों और नाबालिगों की संपत्ति के प्रति भी संवेदनशील है। यह फैसला इस दिशा में एक सकारात्मक कदम हैजो यह सुनिश्चित करता है कि बच्चों के अधिकारों की रक्षा की जाएसाथ ही उनके भविष्य की वित्तीय सुरक्षा भी बनी रहे।
इसके अलावाकोर्ट ने यह भी माना कि अपीलकर्ता अपनी जमीन से सैकड़ों मील दूर रहती है और उसके लिए जमीन की देखभाल करना नियमित रूप से संभव नहीं है। यह स्थिति उन लोगों के लिए सामान्य है जो रोजगार या अन्य कारणों से अपने मूल स्थान से दूर रहते हैंलेकिन ऐसे मामलों में उनके लिए अपनी संपत्ति की सुरक्षा और देखरेख करना एक बड़ी चुनौती बन जाती है। ऐसे में कोर्ट ने जमीन बेचने की अनुमति दीलेकिन साथ ही नाबालिग की वित्तीय सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उपयुक्त कदम उठाए।
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का यह निर्णय भू-माफिया की बढ़ती सक्रियता और जमीनों की सुरक्षा से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण है। यह बताता है कि कैसे कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से न केवल व्यक्तिगत अधिकारों की रक्षा की जा सकती हैबल्कि बच्चों और नाबालिगों की संपत्ति की सुरक्षा भी सुनिश्चित की जा सकती है।
अब सवाल यह उठता है कि क्या ऐसे फैसले पूरे देश में भू-माफिया के खिलाफ एक प्रभावी कदम साबित हो सकते हैं? क्या इस तरह के फैसलों से भू-माफिया की गतिविधियों पर रोक लगाना संभव होगाया फिर इसे और जटिल बनाने के बजाय इसे और अधिक बढ़ावा मिलेगा? फिलहालकोर्ट के फैसले से यह साफ है कि भू-माफिया के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई और जागरूकता आवश्यक है ताकि नागरिकों की संपत्ति को सुरक्षित रखा जा सके।
इस मामले में एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि जमीनों की बढ़ती कीमतें और अवैध कब्ज़े की बढ़ती घटनाओं के कारण आम आदमी के लिए अपनी संपत्ति की रक्षा करना और भी मुश्किल हो गया है। सरकार और न्यायपालिका को इस दिशा में और ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है ताकि नागरिकों को उनके अधिकारों की रक्षा मिल सके और भू-माफिया पर नियंत्रण पाया जा सके।

रेलवे अधिकारियों का कहना है कि फरवरी 2026 तक इस परियोजना के तहत टनल का काम पूरा कर लिया जाएगा। टनल का निर्माण इस परियोजना का एक महत्वपूर्ण और चुनौतीपूर्ण हिस्सा हैजिसके कारण पहले ही निर्माण कार्य में देरी हुई है। रेलवे के कंस्ट्रक्शन विभाग के अधिकारियों ने इस काम को प्राथमिकता दी है और इसके लिए एक टाइमलाइन तय कर काम किया जा रहा हैजिसमें हर दिन की समय सीमा निर्धारित की गई है। इसके बावजूदपरियोजना की गति को देखकर ऐसा लगता है कि ट्रेन सेवा में और कुछ समय की देरी हो सकती है।
इस रेलवे परियोजना का महत्व सिर्फ इस क्षेत्र के लिए नहींबल्कि पूरे मध्य प्रदेश के लिए बहुत बड़ा है। इंदौर और धार के बीच यात्रा के समय में बड़ी कमी आएगीजिससे व्यापारपरिवहन और पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। साथ हीआदिवासी क्षेत्रों में रेलवे सेवा का विस्तार स्थानीय निवासियों के लिए रोजगार और विकास के नए अवसरों की संभावनाएं खोलेगा। इस रेलवे परियोजना से इंदौर के साथ ही धारझाबुआऔर आसपास के क्षेत्रों में भी विकास की गति तेज हो सकती है।
हालांकिपरियोजना की सफलता इस पर निर्भर करेगी कि रेलवे निर्माण कार्य समय पर पूरा हो और किसी भी प्रकार की और देरी न हो। टनल निर्माण के अलावाट्रैकस्टेशन और अन्य आवश्यक सुविधाओं की भी समय पर व्यवस्था की जानी जरूरी हैताकि ट्रेन सेवा बिना किसी परेशानी के शुरू हो सके। इस परियोजना में देरी के कारण पहले ही लोगों को निराशा का सामना करना पड़ा हैलेकिन अगर यह समय पर पूरी होती है तो यह क्षेत्र के विकास और यात्रियों के लिए एक बड़ी उपलब्धि साबित होगी।
कुल मिलाकरइंदौर से धार के बीच ट्रेन सेवा का आरंभ इस क्षेत्र की यात्रा व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण बदलाव ला सकता है। 17 वर्षों के लंबे इंतजार के बादअगर यह परियोजना समय पर पूरी होती हैतो यह न केवल मध्य प्रदेश के लिएबल्कि देश के अन्य हिस्सों के लिए भी एक मॉडल बन सकती हैजहां लंबी देरी के बावजूद इन्फ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं को पूरा किया जा सकता है।


अब हुंगुंड विधायक ने एक बार फिर इसे तूल दिया है। कशप्पनवर चाहते हैं कि सरकार टीपू की जयंती को प्रायोजित करे, जिस पर विपक्षी भाजपा ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। भाजपा ने कहा है कि वह इसका कड़ा विरोध करेगी। कशप्पनवर ने कहा कि उन्होंने टीपू की जयंती के आयोजन को लेकर प्रस्ताव दिया है। हमें राज्य सरकार की प्रतिक्रिया का इंतजार करना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि भारतीय जनता पार्टी के कद्दावर नेता बीएस येदियुरप्पा ने खुद टीपू की तरह पोशाक धारण की और जयंती समारोह में शामिल हुए।
कांग्रेस विधायक का क्या है तर्क
कांग्रेस विधायक ने कहा, ‘जब उन्हें जरूरत थी तब उन्होंने इसे मनाया, लेकिन अब वे नहीं चाहते कि टीपू जयंती को मनाया जाए, लेकिन हम चाहते हैं कि इसका आयोजन हो।’ इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता आर अशोक ने पत्रकारों से कहा, ‘वे चाहे टीपू जयंती मनाए, ओसामा बिन लादेन का जन्मदिन और पाकिस्तान के स्वतंत्रता दिवस मनाए। यह उनकी सरकार है। जनता को पता चल जाएगा कि उनका झुकाव किसकी तरफ है।’
किस तरह की आई प्रतिक्रिया
कर्नाटक के वक्फ और आवास मंत्री बी जेड जमीर अहमद खान ने कहा कि वह टीपू जयंती का आयोजन करते रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘देश भर में टीपू अनुयायी टीपू जयंती का आयोजन करते आ रहे हैं। हमने भी पिछले महीने इसका आयोजन किया था। सिद्धारमैया इसे विधान सौध के बैंक्वेट हॉल में आयोजित किया करते थे, जिसे अब रोक दिया गया है। जब वहां इसका आयोजन बंद कर दिया गया है, क्या हमें इसे कहीं और आयोजित नहीं करना चाहिए।’

पैट कमिंस पीठ के निचले हिस्से में स्ट्रेस इंजरी की वजह से एशेज के पहले दो टेस्ट नहीं खेल पाए थे। हालांकि, उनकी गैरमौजूदगी ऑस्ट्रेलिया को ज्यादा नहीं खली, क्योंकि इंग्लैंड को ऑस्ट्रेलिया ने दोनों टेस्ट मैचों में हराया। पैट कमिंस ने इस साल जुलाई में सबीना पार्क में वेस्टइंडीज के खिलाफ तीसरे टेस्ट के बाद से कोई कॉम्पिटिटिव क्रिकेट नहीं खेला है। करीब 5 महीने के बाद वे प्रतिस्पर्धी क्रिकेट खेलते हुए नजर आएंगे। ऑस्ट्रेलिया अभी एशेज में 2-0 से आगे है, तीन टेस्ट खेले जाने बाकी हैं और वे अगले हफ्ते एडिलेड ओवल में एशेज ट्रॉफी को अपने पास रखने की कोशिश करेंगे।
तीसरे टेस्ट के लिए ऑस्ट्रेलिया टीम
पैट कमिंस (कप्तान), स्कॉट बोलैंड, एलेक्स कैरी, ब्रेंडन डॉगेट, कैमरन ग्रीन, ट्रैविस हेड, जोश इंग्लिस, उस्मान ख्वाजा, मार्नस लाबुशेन, नाथन लियोन, माइकल नेसर, स्टीव स्मिथ, मिचेल स्टार्क, जेक वेदरल्ड और ब्यू वेबस्टर
ऑस्ट्रेलिया ने बाकी बचे तीन मैचों में से एक भी मुकाबला जीत लिया तो फिर एशेज ट्रॉफी ऑस्ट्रेलिया की हो जाएगी, जबकि इंग्लैंड को सीरीज जीतने के लिए बाकी बचे तीनों मैचों में जीत दर्ज करनी होगी। अगर एक भी मैच ड्रॉ रहता है तो फिर कम से कम इंग्लैंड की टीम ये ट्रॉफी नहीं जीत पाएगी, जबकि ऑस्ट्रेलिया की टीम ट्रॉफी हारेगी नहीं। ऐसे में यहां से इस सीरीज का हर एक मैच दिलचस्प होगा। इंग्लैंड की निगाहें सबसे पहले तो सीरीज में जीवित रहने की होंगी। अगर वे एडिलेड में हार गए तो फिर उनके लिए ये सीरीज समाप्त हो जाएगी।

अक्षय खन्ना ने धुरंधर में रहमान डकैत का किरदार निभाकर कमाल कर दिया है। हाल में चर्चा में चल रही इस फिल्म में उनके किरदार को पसंद किया जा रहा है। हालांकि, इसी पार्ट में उनकी मौत भी हो जाती है। लेकिन एक्टर के विकिपीडिया के हिसाब से अक्षय, धुरंधर 2 में भी नजर आएंगे। उनके किरदार की कुछ झलक होगी या पूरा किरदार ये देखने में मजा आने वाला है।
दृश्यम 3
अगले साल 2 अक्टूबर को अजय देवगन की फिल्म दृश्यम 3 में भी अक्षय खन्ना का किरदार दमदार नजर आने वाला है। दृश्यम 2 में भी उनका किरदार पसंद किया गया था। लेकिन अगली फिल्म सस्पेंस से पर्दा हटाने वाली होगी।
इक्का
आने वाले दिनों में अक्षय खन्ना एक फिल्म में नजर आएंगे जिसका नाम इक्का बताया गया है। ये फिल्म थिएटर पर नहीं बल्कि सीधे नेटफ्लिक्स पर रिलीज होगी। खास बात ये है कि इस फिल्म में एक्टर सनी देओल के साथ नजर आएंगे। सनी देओल के साथ उन्होंने फिल्म बॉर्डर में काम किया था। ये दोनों की दूसरी फिल्म होगी।
महाकाली
अक्षय खन्ना आने वाले दिनों में अपना तेलुगू फिल्मों में भी डेब्यू करने वाले हैं। एक्टर को फिल्म महाकाली में शुक्राचार्य के किरदार में देखा जाएगा। उनके किरदार की झलक भी सामने आई थी। फिलहाल फिल्म की शूटिंग चल रही है।
सेक्शन 84
सेक्शन 84 नाम की फिल्म बन रही है। बताया जा रहा है इस फिल्म में अहम किरदार निभाने के लिए अक्षय खन्ना से बातचीत की जा ऋ है। ये एक इंटेंस रोल बताया जा रहा है। अगर कास्टिंग को लेकर बातचीत बन गई तो अक्षय खन्ना की फिल्मोग्राफी में ये फिल्म भी जुड़ने वाली है।
बेनाम फिल्म
अक्षय खन्ना की फिल्मोग्राफी में एक ऐसी फिल्म भी शामिल है जिसका नाम सामने नहीं आया है। ये एक स्पाई थ्रिलर होगी जिसमें अक्षय विलेन के किरदार में नजर आएंगे। ये उनका सबसे शानदार किरदार बताया जा रहा है।

रिपोर्ट की मानें तो इस बार खतरों के खिलाड़ी में बिग बॉस 18 के अविनाश मिश्रा, चुम दरांग, दिग्विजय राठी, श्रुतिका अर्जुन और इस बिग बॉस 19 से अभिषेक बजाज, बसीर अली, नेहल चुडासमा, फरहाना भट्ट और प्रणित मोरे जैसे सेलेब्स नजर आ सकते हैं। हालांकि, अभी तक किसी भी नाम की पुष्टि नहीं की गई है। लेकिन इन सभी सेलेब्स को एक शो में देखना मजेदार होने वाला है।
जनवरी में हो रहा है शुरू
एक साल के गैप के बाद खतरों के खिलाड़ी की वापसी, दमदार सेलेब्रिटी लाइनअप और रोहित शेट्टी की होस्टिंग, इन सबके चलते शो को अब तक का सबसे बड़ा और चर्चित सीजन माना जा रहा है।
बता दें, रोहित शेट्टी के इस शो का पिछला सीजन साल 2023 में आया था। खतरों के खिलाड़ी 14 में टाइगर श्रॉफ की बहन कृष्णा श्रॉफ, शालीन भनोट, अभिषेक कुमार, गश्मीर महाजनी, शिल्पा शिंदे और आसिम रियाज जैसे सेलेब्स नजर आए थे। वहीं करणवीर मेहरा इस सीजन के विनर बने थे। बाद में उन्होंने बिग बॉस 18 का खिताब भी जीता था। अब नए सीजन का इंतजार हो रहा है।