Author: bharati

  • केचप से लेकर ब्रेकफास्ट सीरियल तक इन पैक्ड फूड्स में छिपी होती है भरपूर चीनी जानिए कैसे बचें

    केचप से लेकर ब्रेकफास्ट सीरियल तक इन पैक्ड फूड्स में छिपी होती है भरपूर चीनी जानिए कैसे बचें


    नई दिल्ली। जब भी चीनी की बात होती है तो ज्यादातर लोगों के दिमाग में मिठाई केक चॉकलेट आइसक्रीम या सॉफ्ट ड्रिंक का ख्याल आता है। लेकिन सच यह है कि आजकल बाजार में मिलने वाले कई पैक्ड और प्रोसेस्ड फूड्स ऐसे हैं जिनका स्वाद मीठा नहीं होता फिर भी उनमें बड़ी मात्रा में ऐडेड शुगर मौजूद रहती है। यही छिपी हुई चीनी धीरे धीरे शरीर पर असर डालती है और लंबे समय में मोटापा डायबिटीज हृदय रोग और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ा सकती है। इसलिए केवल मीठी चीजों से दूरी बनाना ही पर्याप्त नहीं है बल्कि रोजाना इस्तेमाल होने वाले पैक्ड फूड्स को भी समझदारी से चुनना जरूरी है।

    विशेषज्ञों के अनुसार प्राकृतिक और ऐडेड शुगर में अंतर समझना बेहद जरूरी है। फलों दूध और दही जैसी प्राकृतिक चीजों में मौजूद शुगर के साथ फाइबर विटामिन और मिनरल भी मिलते हैं जो शरीर के लिए लाभदायक होते हैं। दूसरी ओर पैक्ड और प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों में स्वाद बढ़ाने बनावट सुधारने और लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए अलग से मिलाई गई चीनी को ऐडेड शुगर कहा जाता है। यही अतिरिक्त चीनी स्वास्थ्य के लिए सबसे अधिक चिंता का कारण बनती है।

    अक्सर लोग यह मान लेते हैं कि नमकीन चीजों में चीनी नहीं होती लेकिन यह धारणा पूरी तरह गलत है। केचप बारबेक्यू सॉस पास्ता सॉस सलाद ड्रेसिंग और कई रेडी टू ईट उत्पादों में स्वाद संतुलित करने के लिए अच्छी मात्रा में चीनी मिलाई जाती है। इसके अलावा फ्लेवर्ड योगर्ट प्रोटीन बार इंस्टेंट ओटमील ग्रेनोला ब्रेकफास्ट सीरियल और कई तरह के नट बटर में भी अतिरिक्त शुगर मौजूद हो सकती है। इसलिए किसी भी पैक्ड फूड को खरीदने से पहले उसका न्यूट्रिशन लेबल पढ़ना एक अच्छी आदत होनी चाहिए।

    न्यूट्रिशन लेबल पर टोटल शुगर और ऐडेड शुगर दोनों की जानकारी दी जाती है। यदि किसी उत्पाद में टोटल शुगर अधिक है और उसमें ऐडेड शुगर की मात्रा भी ज्यादा लिखी है तो इसका मतलब है कि उसमें अलग से काफी चीनी मिलाई गई है। साथ ही इंग्रीडिएंट्स की सूची भी ध्यान से पढ़नी चाहिए। यदि शुरुआत में ही चीनी या उससे जुड़े नाम लिखे हों तो समझना चाहिए कि उस उत्पाद में चीनी की मात्रा अधिक है।

    ध्यान देने वाली बात यह भी है कि कंपनियां हमेशा शुगर शब्द का उपयोग नहीं करतीं। कई बार केन शुगर कॉर्न सिरप हाई फ्रक्टोज कॉर्न सिरप राइस सिरप मोलासेस कैरेमल हनी अगावे ग्लूकोज फ्रक्टोज सुक्रोज डेक्सट्रोज और माल्टोज जैसे नामों से भी चीनी को लिखा जाता है। ऐसे शब्द देखकर उपभोक्ता आसानी से भ्रमित हो सकते हैं इसलिए लेबल को समझना बेहद जरूरी है।

    आजकल बाजार में शुगर फ्री और जीरो शुगर उत्पाद भी तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। इनमें सुक्रालोज एस्पार्टेम सैकरीन या स्टीविया जैसे स्वीटनर का उपयोग किया जाता है। हालांकि केवल शुगर फ्री लिखा होना किसी उत्पाद को पूरी तरह हेल्दी नहीं बनाता क्योंकि इनमें कई बार दूसरी प्रोसेस्ड सामग्री भी अधिक मात्रा में मौजूद होती है। इसलिए ऐसे उत्पादों का भी सीमित मात्रा में सेवन करना ही बेहतर माना जाता है।

    स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए सबसे अच्छा तरीका यही है कि पैक्ड और प्रोसेस्ड फूड्स की जगह ताजे फल सब्जियां साबुत अनाज और घर का बना भोजन अधिक खाया जाए। प्यास बुझाने के लिए सादा पानी बिना चीनी वाली चाय या कॉफी बेहतर विकल्प हैं। यदि कभी पैक्ड फूड खरीदना ही पड़े तो उसका लेबल जरूर पढ़ें और कम ऐडेड शुगर वाले विकल्प चुनें। छोटी सी सावधानी भविष्य में कई गंभीर बीमारियों से बचाने में बड़ी भूमिका निभा सकती है।

  • घरेलू क्रिकेट के स्टार से भारत के नए तेज गेंदबाज बने यश ठाकुर जिम्बाब्वे के खिलाफ डेब्यू कर शुरू किया अंतरराष्ट्रीय सफर

    घरेलू क्रिकेट के स्टार से भारत के नए तेज गेंदबाज बने यश ठाकुर जिम्बाब्वे के खिलाफ डेब्यू कर शुरू किया अंतरराष्ट्रीय सफर


    नई दिल्ली। भारत को जिम्बाब्वे के खिलाफ दूसरे टी20 मुकाबले में एक नया तेज गेंदबाज मिला जब विदर्भ के यश ठाकुर ने भारतीय टीम के लिए अपना अंतरराष्ट्रीय डेब्यू किया। यह पल केवल एक खिलाड़ी के करियर की नई शुरुआत नहीं था बल्कि वर्षों की मेहनत संघर्ष और लगातार बेहतरीन प्रदर्शन का परिणाम भी था। घरेलू क्रिकेट में अपनी तेज रफ्तार सटीक लाइन लेंथ और डेथ ओवरों में शानदार गेंदबाजी के दम पर पहचान बनाने वाले यश ठाकुर ने आखिरकार भारतीय टीम की नीली जर्सी पहनने का सपना पूरा कर लिया।

    28 दिसंबर 1998 को कोलकाता में जन्मे यश ठाकुर ने घरेलू क्रिकेट में विदर्भ का प्रतिनिधित्व किया और वहीं से अपने क्रिकेट करियर को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। शुरुआत से ही उन्होंने अपनी गेंदबाजी में अनुशासन बनाए रखा और हर टूर्नामेंट में लगातार विकेट लेकर चयनकर्ताओं का ध्यान अपनी ओर खींचा। रणजी ट्रॉफी विजय हजारे ट्रॉफी और सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी जैसे बड़े घरेलू टूर्नामेंटों में उनके प्रदर्शन ने उन्हें देश के उभरते तेज गेंदबाजों की सूची में शामिल कर दिया।

    यश ठाकुर की सबसे बड़ी ताकत उनकी सटीक लाइन लेंथ धीमी गेंदों का प्रभावी इस्तेमाल और डेथ ओवरों में बल्लेबाजों पर दबाव बनाने की क्षमता है। यही वजह रही कि आईपीएल में भी उन्हें अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका मिला। लखनऊ सुपर जायंट्स और पंजाब किंग्स जैसी टीमों की ओर से खेलते हुए उन्होंने कई अहम मौकों पर विकेट हासिल किए और अपनी उपयोगिता साबित की। आईपीएल में लगातार प्रभावशाली प्रदर्शन ने उनके लिए भारतीय टीम के दरवाजे खोल दिए।

    भारतीय चयनकर्ताओं ने पहले उन्हें इंडिया ए टीम में शामिल किया जहां श्रीलंका दौरे पर भी उन्होंने शानदार गेंदबाजी की। ट्राई सीरीज के तीन मुकाबलों में पांच विकेट लेने के साथ ही श्रीलंका ए के खिलाफ अनऑफिशियल टेस्ट मैचों में भी पांच विकेट हासिल कर उन्होंने साबित कर दिया कि वह बड़े स्तर पर खेलने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। इसी प्रदर्शन का इनाम उन्हें जिम्बाब्वे दौरे के लिए भारतीय टी20 टीम में चयन के रूप में मिला और दूसरे टी20 मुकाबले में उन्हें डेब्यू कैप पहनने का अवसर प्राप्त हुआ।

    यश ठाकुर का सफर केवल क्रिकेट तक सीमित नहीं रहा बल्कि यह संघर्ष और समर्पण की कहानी भी है। उनके पिता हमेशा चाहते थे कि उनका बेटा एक दिन भारत के लिए खेले और अब यश ने टीम इंडिया के लिए मैदान पर उतरकर उस सपने को साकार कर दिया। यह उपलब्धि उन सभी युवा खिलाड़ियों के लिए भी प्रेरणा है जो घरेलू क्रिकेट से अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचने का सपना देखते हैं।

    अगर उनके क्रिकेट रिकॉर्ड पर नजर डालें तो यश ठाकुर ने टी20 क्रिकेट के 74 मुकाबलों में 110 विकेट लेकर अपनी गेंदबाजी का लोहा मनवाया है। आईपीएल के 22 मैचों में उनके नाम 27 विकेट दर्ज हैं। प्रथम श्रेणी क्रिकेट में उन्होंने 32 मैचों में 93 विकेट हासिल किए हैं जबकि लिस्ट ए क्रिकेट के 57 मुकाबलों में 90 विकेट लेकर अपनी निरंतरता साबित की है। यही आंकड़े बताते हैं कि भारतीय क्रिकेट को भविष्य के लिए एक ऐसा तेज गेंदबाज मिला है जो आने वाले वर्षों में टीम की गेंदबाजी आक्रमण का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकता है।

  • पेपर लीक को लेकर सख्त कानून…. 10 साल कैद और 10 करोड़ जुर्माने का प्रावधान, कल संसद में पेश होगा बिल

    पेपर लीक को लेकर सख्त कानून…. 10 साल कैद और 10 करोड़ जुर्माने का प्रावधान, कल संसद में पेश होगा बिल


    नई दिल्ली।
    दो साल पुराने पेपर लीक रोधी कानून (Anti-paper leak law) में संशोधन करने के उद्देश्य से एक विधेयक सोमवार को लोकसभा (Lok Sabha) में पेश किया जायेगा। इस विधेयक में आरोपियों की त्वरित सुनवाई के लिए हर राज्य में त्वरित अदालतें स्थापित करने और सजा को और कड़ा करने का प्रस्ताव किया गया है। लोक परीक्षा (अनुचित साधनों का निवारण) संशोधन विधेयक, 2026 के अनुसार प्रश्नपत्र लीक मामलों की जांच दो महीने के भीतर पूरी करनी होगी।

    विधेयक को पेश किए जाने से पहले सदस्यों को वितरित की गई इसकी प्रति के अनुसार, परीक्षाओं में प्रश्नपत्र लीक या अनुचित साधनों का प्रयोग करने वाले व्यक्तियों को कम से कम पांच साल और अधिकतम 10 साल की कैद और 50 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। संगठित अपराधों के लिए विधेयक में कम से कम सात वर्ष की सजा और 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रस्ताव है।

    मौजूदा कानून में व्यक्तिगत रूप से शामिल लोगों के लिए तीन से पांच साल तक की कैद का प्रावधान है, जबकि संगठित रूप से धोखाधड़ी और प्रश्नपत्र लीक जैसे अपराधों में शामिल लोगों के लिए पांच से 10 साल तक की कैद और कम से कम एक करोड़ रुपये के जुर्माने का प्रावधान है। यह विधेयक सोमवार को लोकसभा में पेश करने, उस पर विचार करने और पारित करने के लिए सूचीबद्ध किया गया है। आमतौर पर किसी विधेयक को एक ही दिन पेश करने और पारित करने के लिए सूचीबद्ध नहीं किया जाता है।

    सरकार ने घोषणा की कि वह प्रस्तावित कानून लेकर आ रही है। यह घोषणा ऐसे समय में की गई, जब हाल के दिनों में नीट प्रश्नपत्र लीक मामले को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के नेतृत्व में हुए छात्र विरोध प्रदर्शनों ने जोर पकड़ लिया था। नीट मुद्दे को लेकर विपक्षी दलों के विरोध के कारण संसद के मानसून सत्र के पहले सप्ताह की कार्यवाही बाधित रही। नये विधेयक पर विपक्ष का रुख अभी स्पष्ट नहीं है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा है कि वह आम सहमति के आधार पर कदम उठाएंगे।

    शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान (Education Minister Dharmendra Pradhan) के इस्तीफे और सरकार द्वारा अन्य मांगों को स्वीकार किए जाने के बाद कॉजपा ने शनिवार को 36 दिनों से जारी प्रदर्शन समाप्त कर दिया। इस विधेयक में 15 अवैध कृत्यों का उल्लेख किया गया है, जिनमें प्रश्नपत्र लीक करना, ओएमआर शीट से छेड़छाड़ करना, फर्जी वेबसाइट बनाना और फर्जी प्रवेश पत्र जारी करना शामिल हैं।

  • IVF को लेकर मन में हैं सवाल? जानें कब पड़ती है जरूरत, कितनी है सफलता और क्या हैं सच-झूठ

    IVF को लेकर मन में हैं सवाल? जानें कब पड़ती है जरूरत, कितनी है सफलता और क्या हैं सच-झूठ


    नई दिल्ली। बदलती जीवनशैली, बढ़ता तनाव, देर से शादी, पीसीओएस, एंडोमेट्रियोसिस, मोटापा और पुरुषों में शुक्राणुओं की गुणवत्ता में गिरावट जैसी समस्याओं के कारण इनफर्टिलिटी के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। ऐसे में इन विट्रो फर्टिलाइजेशन यानी IVF लाखों दंपतियों के लिए माता-पिता बनने का एक भरोसेमंद विकल्प बनकर सामने आया है। हालांकि IVF जितना लोकप्रिय हुआ है, उससे जुड़े भ्रम और मिथक भी उतनी ही तेजी से फैले हैं। कई लोग मानते हैं कि IVF से पैदा होने वाले बच्चे कमजोर होते हैं या यह प्रक्रिया हर बार सफल हो जाती है। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि इन धारणाओं का वैज्ञानिक आधार नहीं है।

    IVF एक आधुनिक प्रजनन तकनीक है जिसमें महिला के अंडाणु और पुरुष के शुक्राणु को प्रयोगशाला में निषेचित कर भ्रूण तैयार किया जाता है। इसके बाद स्वस्थ भ्रूण को महिला के गर्भाशय में प्रत्यारोपित किया जाता है, जहां आगे की गर्भावस्था सामान्य तरीके से ही विकसित होती है।

    सबसे बड़ा मिथक यह है कि IVF कराने के बाद गर्भधारण तय होता है। जबकि वास्तविकता यह है कि इसकी सफलता कई कारकों पर निर्भर करती है। महिला की उम्र, अंडाणु और शुक्राणु की गुणवत्ता, भ्रूण की स्थिति, गर्भाशय का स्वास्थ्य और अन्य चिकित्सकीय परिस्थितियां सफलता की संभावना तय करती हैं। कई मामलों में पहली कोशिश सफल नहीं होती और दूसरी या तीसरी बार सफलता मिलती है।

    एक और आम धारणा यह है कि IVF से पैदा होने वाले बच्चे शारीरिक या मानसिक रूप से कमजोर होते हैं। विशेषज्ञ इस दावे को पूरी तरह गलत बताते हैं। उनका कहना है कि IVF में केवल निषेचन की प्रक्रिया प्रयोगशाला में होती है। इसके बाद भ्रूण का विकास गर्भाशय में बिल्कुल उसी तरह होता है, जैसा प्राकृतिक गर्भधारण में होता है। वैज्ञानिक शोध भी बताते हैं कि अधिकांश IVF से जन्मे बच्चे पूरी तरह स्वस्थ होते हैं और उनका शारीरिक तथा मानसिक विकास सामान्य बच्चों की तरह ही होता है। बच्चे का स्वास्थ्य माता-पिता की आनुवंशिक स्थिति, गर्भावस्था के दौरान मां के पोषण, जीवनशैली, संक्रमण और प्रसव की परिस्थितियों पर अधिक निर्भर करता है।

    कई लोगों को लगता है कि IVF से हमेशा जुड़वां या तीन बच्चे पैदा होते हैं। पहले सफलता की संभावना बढ़ाने के लिए एक से अधिक भ्रूण गर्भाशय में स्थापित किए जाते थे, इसलिए मल्टीपल प्रेग्नेंसी की संभावना अधिक रहती थी। लेकिन आधुनिक तकनीकों में डॉक्टर अधिकतर मामलों में केवल एक स्वस्थ भ्रूण ही प्रत्यारोपित करते हैं। इससे जुड़वां गर्भावस्था की संभावना कम होती है और मां तथा बच्चे दोनों के लिए जोखिम भी घट जाता है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि IVF उन दंपतियों के लिए एक प्रभावी विकल्प है जिन्हें लंबे समय तक प्राकृतिक तरीके से गर्भधारण नहीं हो पा रहा हो। हालांकि इस प्रक्रिया को अपनाने से पहले किसी अनुभवी फर्टिलिटी विशेषज्ञ से पूरी जांच और सलाह लेना जरूरी है। सही समय पर उपचार, स्वस्थ जीवनशैली और सकारात्मक मानसिक स्थिति IVF की सफलता की संभावना को बेहतर बना सकती है।

    आज की आधुनिक चिकित्सा ने लाखों परिवारों की जिंदगी में खुशियां लौटाई हैं। इसलिए IVF को लेकर फैली अफवाहों और मिथकों पर भरोसा करने के बजाय सही और वैज्ञानिक जानकारी के आधार पर निर्णय लेना ही सबसे समझदारी भरा कदम है।

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  • महंगे ब्यूटी प्रोडक्ट्स को कहें अलविदा किचन की इन प्राकृतिक चीजों से पाएं दमकती और बेदाग त्वचा

    महंगे ब्यूटी प्रोडक्ट्स को कहें अलविदा किचन की इन प्राकृतिक चीजों से पाएं दमकती और बेदाग त्वचा


    नई दिल्ली। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हर कोई स्वस्थ और चमकदार त्वचा चाहता है। बाजार में मिलने वाले महंगे स्किन केयर प्रोडक्ट्स तुरंत निखार का दावा तो करते हैं लेकिन इनमें मौजूद कई तरह के रसायन लंबे समय में त्वचा को नुकसान भी पहुंचा सकते हैं। ऐसे में आपकी अपनी रसोई यानी किचन कई ऐसे प्राकृतिक खजानों से भरी हुई है जो बिना अधिक खर्च किए त्वचा को पोषण देने के साथ उसे मुलायम चमकदार और स्वस्थ बनाए रखने में मदद कर सकते हैं। यदि इन घरेलू चीजों को सही तरीके और नियमितता के साथ इस्तेमाल किया जाए तो स्किन केयर रूटीन पूरी तरह प्राकृतिक और प्रभावी बन सकता है।

    सुबह चेहरे की सफाई से दिन की शुरुआत करें। इसके लिए कच्चे दूध या गुलाब जल का उपयोग किया जा सकता है। कच्चा दूध त्वचा से धूल और अतिरिक्त तेल हटाने में मदद करता है जबकि गुलाब जल त्वचा को ताजगी और ठंडक देता है। इसके बाद सप्ताह में दो से तीन बार बेसन और हल्दी का उबटन लगाना फायदेमंद माना जाता है। बेसन त्वचा की गहराई से सफाई करता है जबकि हल्दी में मौजूद प्राकृतिक गुण त्वचा को संक्रमण से बचाने और रंगत निखारने में मदद करते हैं।

    शहद भी किचन में मौजूद सबसे बेहतरीन प्राकृतिक मॉइस्चराइजर माना जाता है। यदि त्वचा रूखी रहती है तो चेहरे पर कुछ मिनट तक शुद्ध शहद लगाकर छोड़ दें और फिर सादे पानी से धो लें। इससे त्वचा में नमी बनी रहती है और चेहरा मुलायम महसूस होता है। वहीं दही में मौजूद लैक्टिक एसिड त्वचा की मृत कोशिकाओं को हटाकर उसे चमकदार बनाने में मदद करता है। दही में थोड़ा सा शहद मिलाकर फेस पैक तैयार किया जा सकता है जिसे सप्ताह में एक या दो बार लगाने से त्वचा को प्राकृतिक चमक मिलती है।

    खीरा और टमाटर भी स्किन केयर रूटीन का अहम हिस्सा बन सकते हैं। खीरे का रस त्वचा को ठंडक देने के साथ सूजन कम करने में मदद करता है जबकि टमाटर में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट और विटामिन सी त्वचा की रंगत सुधारने में सहायक माने जाते हैं। धूप में अधिक समय बिताने वालों के लिए खीरे का रस चेहरे पर लगाना काफी लाभदायक हो सकता है।

    एलोवेरा जेल भी लगभग हर घर में आसानी से उपलब्ध होता है। ताजा एलोवेरा जेल त्वचा को हाइड्रेट रखने के साथ छोटे दाग धब्बों को हल्का करने में मदद कर सकता है। रात में सोने से पहले एलोवेरा जेल की हल्की परत लगाने से त्वचा को ठंडक मिलती है और सुबह चेहरा अधिक ताजा दिखाई देता है। इसके अलावा नारियल तेल का सीमित मात्रा में उपयोग त्वचा को पोषण देने और रूखेपन को कम करने में सहायक हो सकता है।

    हालांकि केवल घरेलू नुस्खों पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। त्वचा को स्वस्थ बनाए रखने के लिए भरपूर पानी पीना संतुलित भोजन करना पर्याप्त नींद लेना और धूप में निकलते समय सनस्क्रीन का उपयोग करना भी जरूरी है। साथ ही किसी भी घरेलू सामग्री को पूरे चेहरे पर लगाने से पहले त्वचा के एक छोटे हिस्से पर परीक्षण जरूर करें ताकि एलर्जी या जलन की संभावना से बचा जा सके।

    प्राकृतिक स्किन केयर का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह कम खर्चीला होने के साथ त्वचा को धीरे धीरे अंदर से स्वस्थ बनाता है। यदि नियमित रूप से सही खानपान और घरेलू देखभाल को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाया जाए तो बिना महंगे कॉस्मेटिक उत्पादों के भी त्वचा लंबे समय तक चमकदार स्वस्थ और आकर्षक बनी रह सकती है।

  • कॉमिक-कॉन के बाद इंटरनेट पर लीक हुआ 'रामायण' का ट्रेलर, भव्य विजुअल्स और यश के रावण लुक की चर्चा तेज

    कॉमिक-कॉन के बाद इंटरनेट पर लीक हुआ 'रामायण' का ट्रेलर, भव्य विजुअल्स और यश के रावण लुक की चर्चा तेज


    नई दिल्ली। रणबीर कपूर स्टारर बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘रामायण’ अपनी आधिकारिक रिलीज से पहले ही चर्चा के केंद्र में आ गई है। फिल्म का ट्रेलर अभी तक मेकर्स की ओर से सार्वजनिक नहीं किया गया था, लेकिन सोशल मीडिया पर इसका कथित लीक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। दावा किया जा रहा है कि यह वीडियो अमेरिका के सैन डिएगो कॉमिक-कॉन 2026 में दिखाए गए ट्रेलर का हिस्सा है, जिसे किसी दर्शक ने रिकॉर्ड कर इंटरनेट पर साझा कर दिया।

    दरअसल, फिल्म निर्माता नमित मल्होत्रा ने पहले घोषणा की थी कि 24 जुलाई को दुनियाभर में फिल्म का ट्रेलर जारी किया जाएगा। हालांकि अंतिम समय में इसकी रिलीज टाल दी गई, जिससे प्रशंसकों का इंतजार और बढ़ गया। इससे पहले दिल्ली में आयोजित एक विशेष लॉन्च इवेंट में चुनिंदा लोगों को ट्रेलर दिखाया गया था। उस दौरान सोशल मीडिया पर फिल्म के विजुअल्स और भव्य प्रस्तुति की जमकर तारीफ हुई थी। उसी कार्यक्रम के बाद ट्रेलर का एक छोटा हिस्सा ऑनलाइन सामने आया था, लेकिन अब कथित तौर पर लगभग पूरा ट्रेलर ही इंटरनेट पर वायरल हो गया है।

    वायरल वीडियो में सबसे ज्यादा चर्चा अभिनेता यश के रावण अवतार की हो रही है। ट्रेलर में उनका विशाल और प्रभावशाली लुक दिखाई देता है। एक युद्ध दृश्य में रावण को इंद्रदेव के ऐरावत हाथी पर शक्तिशाली वार करते हुए दिखाया गया है, जिसने दर्शकों का ध्यान खींचा है। इसके बाद भगवान राम के रूप में रणबीर कपूर की एंट्री दिखाई देती है, जिनका शांत और दिव्य स्वरूप दर्शकों को आकर्षित कर रहा है।

    ट्रेलर में माता सीता के किरदार में साई पल्लवी की भी झलक देखने को मिलती है। वहीं, स्वयंवर का दृश्य भी दिखाया गया है, जिसमें भगवान राम शिव धनुष उठाते नजर आते हैं। वीडियो के अंतिम हिस्से में शूर्पणखा के किरदार में रकुल प्रीत सिंह दिखाई देती हैं और लक्ष्मण द्वारा उनकी नाक काटे जाने वाला प्रसिद्ध प्रसंग भी शामिल है।

    हालांकि सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा वीडियो कम गुणवत्ता वाला बताया जा रहा है, इसलिए फिल्म के विजुअल इफेक्ट्स और सिनेमैटिक अनुभव का पूरा अंदाजा लगाना मुश्किल है। इसके बावजूद ट्रेलर के भव्य सेट, वीएफएक्स और किरदारों की प्रस्तुति को लेकर सोशल मीडिया पर काफी सकारात्मक प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कॉमिक-कॉन में मौजूद कई दर्शकों ने भी फिल्म के ट्रेलर की सराहना करते हुए इसे भारतीय सिनेमा के सबसे बड़े विजुअल अनुभवों में से एक बताया है।

    फिलहाल मेकर्स की ओर से ट्रेलर लीक होने पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि वायरल वीडियो वास्तविक ट्रेलर का पूर्ण संस्करण है या उसका संपादित हिस्सा। ऐसे में दर्शकों को फिल्म के आधिकारिक ट्रेलर का इंतजार है, जो बेहतर गुणवत्ता के साथ जल्द रिलीज किया जा सकता है।

    ‘रामायण’ लंबे समय से भारतीय सिनेमा की सबसे महत्वाकांक्षी फिल्मों में गिनी जा रही है। बड़े सितारों, आधुनिक विजुअल इफेक्ट्स और विशाल पैमाने पर बन रही इस फिल्म को लेकर दर्शकों की उत्सुकता लगातार बढ़ती जा रही है। ट्रेलर के कथित लीक होने के बाद यह चर्चा और तेज हो गई है कि आधिकारिक रिलीज पर फिल्म दर्शकों की उम्मीदों पर कितनी खरी उतरती है।

  • टीम इंडिया की फिर बादशाहत, जिम्बाब्वे पर जीत के साथ ICC टी20 रैंकिंग में नंबर-1 पर कब्जा

    टीम इंडिया की फिर बादशाहत, जिम्बाब्वे पर जीत के साथ ICC टी20 रैंकिंग में नंबर-1 पर कब्जा


    नई दिल्ली । भारतीय क्रिकेट टीम ने जिम्बाब्वे के खिलाफ टी20 सीरीज में शानदार प्रदर्शन करते हुए न सिर्फ सीरीज अपने नाम कर ली, बल्कि आईसीसी टी20 टीम रैंकिंग में भी एक बार फिर दुनिया की नंबर-1 टीम बनने का गौरव हासिल कर लिया। हरारे में खेले गए दूसरे टी20 मुकाबले में भारत ने मेजबान जिम्बाब्वे को 90 रन से करारी शिकस्त देकर तीन मैचों की सीरीज में 2-0 की अजेय बढ़त बना ली। इस जीत के साथ टीम इंडिया ने इंग्लैंड को पीछे छोड़ते हुए टी20 रैंकिंग का शीर्ष स्थान भी वापस हासिल कर लिया।

    आईसीसी की 25 जुलाई को जारी ताजा टीम रैंकिंग के अनुसार भारत और इंग्लैंड दोनों के 268 रेटिंग अंक हैं, लेकिन बेहतर दशमलव रेटिंग के आधार पर भारत पहले स्थान पर पहुंच गया है। इंग्लैंड अब दूसरे नंबर पर खिसक गया है। भारत ने करीब दो सप्ताह पहले इंग्लैंड के खिलाफ टी20 सीरीज गंवाने के बाद नंबर-1 की कुर्सी खो दी थी, लेकिन जिम्बाब्वे दौरे पर लगातार शानदार प्रदर्शन करते हुए उसने फिर से शीर्ष पर वापसी कर ली।

    टी20 रैंकिंग में ऑस्ट्रेलिया 260 अंकों के साथ तीसरे स्थान पर है, जबकि न्यूजीलैंड 247 अंकों के साथ चौथे नंबर पर मौजूद है। दक्षिण अफ्रीका और पाकिस्तान क्रमशः पांचवें और छठे स्थान पर हैं। जिम्बाब्वे 202 अंकों के साथ 12वें स्थान पर बना हुआ है। भारत यदि सीरीज का तीसरा और अंतिम मुकाबला भी जीत लेता है तो उसकी नंबर-1 स्थिति और मजबूत हो जाएगी।

    दूसरे टी20 मुकाबले में भारतीय बल्लेबाजों ने शुरुआत से ही आक्रामक अंदाज अपनाया। विकेटकीपर बल्लेबाज ईशान किशन ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए 44 गेंदों में 81 रन की तूफानी पारी खेली। उन्होंने अपनी पारी में नौ चौके और दो छक्के लगाए। दूसरी ओर तिलक वर्मा ने केवल 20 गेंदों में नाबाद 60 रन बनाकर जिम्बाब्वे के गेंदबाजों की जमकर धुनाई की। उनकी विस्फोटक पारी में पांच चौके और तीन छक्के शामिल रहे। कप्तान श्रेयस अय्यर ने भी 25 रन का उपयोगी योगदान दिया, जबकि युवा ओपनर वैभव सूर्यवंशी ने 20 रन बनाए। निर्धारित 20 ओवर में भारत ने पांच विकेट के नुकसान पर 219 रन का विशाल स्कोर खड़ा किया।

    220 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी जिम्बाब्वे की टीम भारतीय गेंदबाजों के सामने ज्यादा देर टिक नहीं सकी। पूरी टीम 17.5 ओवर में 129 रन पर सिमट गई। ब्रायन बेनेट ने 32 रन और तादिवानाशे मारुमानी ने 24 रन बनाए, जबकि रेयान बर्ल ने 20 रन की पारी खेली। हालांकि कोई भी बल्लेबाज बड़ी साझेदारी नहीं कर सका।

    भारत की ओर से अभिषेक शर्मा ने शानदार गेंदबाजी करते हुए तीन विकेट झटके। यश ठाकुर और प्रिंस यादव ने दो-दो विकेट लेकर जिम्बाब्वे की बल्लेबाजी की कमर तोड़ दी। ईशान किशन को उनकी बेहतरीन बल्लेबाजी के लिए ‘प्लेयर ऑफ द मैच’ चुना गया।

    टी20 प्रारूप में लगातार शानदार प्रदर्शन कर रही टीम इंडिया अब वनडे और टी20 दोनों प्रारूपों में दुनिया की नंबर-1 टीम बन चुकी है। वहीं टेस्ट रैंकिंग में ऑस्ट्रेलिया शीर्ष पर है और भारत चौथे स्थान पर मौजूद है। अब क्रिकेट प्रेमियों की नजर सीरीज के अंतिम मुकाबले पर होगी, जहां भारत क्लीन स्वीप के इरादे से मैदान में उतरेगा।

  • सूर्य देव की पूजा के अचूक नियम और व्रत विधि जानिए कैसे मिलेगी सुख समृद्धि आरोग्य और सफलता का आशीर्वाद

    सूर्य देव की पूजा के अचूक नियम और व्रत विधि जानिए कैसे मिलेगी सुख समृद्धि आरोग्य और सफलता का आशीर्वाद


    नई दिल्ली। सनातन धर्म में भगवान सूर्य को प्रत्यक्ष देवता माना जाता है। वे ऊर्जा प्रकाश जीवन और सकारात्मक शक्ति के प्रतीक हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नियमित रूप से सूर्य देव की पूजा और रविवार का व्रत करने से व्यक्ति के जीवन में सुख समृद्धि यश और आरोग्य का वास होता है। ज्योतिष शास्त्र में सूर्य को आत्मा पिता नेतृत्व क्षमता और मान सम्मान का कारक ग्रह माना गया है। इसलिए जिन लोगों की कुंडली में सूर्य कमजोर होता है उन्हें सूर्य उपासना करने की सलाह दी जाती है। मान्यता है कि श्रद्धा और विधि विधान से की गई पूजा व्यक्ति के आत्मविश्वास को मजबूत करती है और जीवन में आने वाली अनेक बाधाओं को दूर करने में सहायक बनती है।

    सूर्य देव की पूजा के लिए प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त या सूर्योदय से पहले उठना शुभ माना जाता है। स्नान के बाद स्वच्छ लाल या हल्के रंग के वस्त्र धारण करें। इसके बाद तांबे के पात्र में स्वच्छ जल भरें और उसमें लाल फूल रोली अक्षत तथा यदि संभव हो तो थोड़ा गुड़ या लाल चंदन डालें। पूर्व दिशा की ओर मुख करके उगते सूर्य को धीरे धीरे जल अर्पित करें। जल अर्पित करते समय सूर्य की किरणों को जलधारा के बीच से देखना शुभ माना जाता है। इसके बाद आदित्य हृदय स्तोत्र गायत्री मंत्र या ऊँ घृणि सूर्याय नमः मंत्र का श्रद्धापूर्वक जप करें। अंत में सूर्य देव से परिवार के सुख समृद्धि और उत्तम स्वास्थ्य की प्रार्थना करें।

    रविवार का व्रत भी सूर्य देव को प्रसन्न करने का एक महत्वपूर्ण उपाय माना जाता है। इस दिन प्रातः स्नान के बाद संकल्प लेकर व्रत की शुरुआत की जाती है। श्रद्धालु दिनभर सात्विक जीवनशैली अपनाते हैं और क्रोध झूठ तथा नकारात्मक विचारों से दूर रहने का प्रयास करते हैं। कई लोग एक समय भोजन करते हैं जबकि कुछ श्रद्धालु फलाहार करके व्रत रखते हैं। व्रत के दौरान नमक का सेवन न करने की भी परंपरा कई स्थानों पर प्रचलित है। शाम के समय सूर्य देव का स्मरण कर व्रत का समापन किया जाता है।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार रविवार के दिन गेहूं गुड़ तांबा लाल वस्त्र लाल फूल और लाल चंदन का दान करना भी शुभ माना जाता है। जरूरतमंद लोगों की सहायता करना और गौ सेवा करना भी सूर्य कृपा प्राप्त करने के श्रेष्ठ उपायों में गिना जाता है। मान्यता है कि दान और सेवा से पूजा का पुण्य कई गुना बढ़ जाता है और व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आते हैं।

    ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सूर्य उपासना करने से आत्मबल नेतृत्व क्षमता और निर्णय लेने की योग्यता मजबूत होती है। सरकारी कार्यों में सफलता मिलने की संभावना बढ़ती है और समाज में मान सम्मान प्राप्त होता है। धार्मिक दृष्टि से यह पूजा व्यक्ति को अनुशासित जीवन जीने की प्रेरणा भी देती है। हालांकि इन मान्यताओं का आधार धार्मिक आस्था है और इन्हें व्यक्तिगत विश्वास के रूप में देखा जाना चाहिए।

    वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी सुबह जल्दी उठकर उगते सूर्य के सामने कुछ समय बिताना लाभकारी माना जाता है। सुबह की हल्की धूप शरीर को प्राकृतिक रूप से विटामिन डी प्राप्त करने में सहायता करती है। ताजी हवा में प्रार्थना और ध्यान करने से मानसिक तनाव कम हो सकता है और दिन की शुरुआत सकारात्मक ऊर्जा के साथ होती है। यही कारण है कि सूर्य उपासना को केवल धार्मिक परंपरा ही नहीं बल्कि स्वस्थ और अनुशासित जीवनशैली का भी महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।

  • सरकार-CJP वार्ता के बाद दिखी सौहार्द की तस्वीर, JP नड्डा बोले- 'हाथ तो मिलाइए'; गर्मजोशी से हुआ हैंडशेक

    सरकार-CJP वार्ता के बाद दिखी सौहार्द की तस्वीर, JP नड्डा बोले- 'हाथ तो मिलाइए'; गर्मजोशी से हुआ हैंडशेक


    नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और केंद्र सरकार के बीच कई दौर की बातचीत के बाद आंदोलन समाप्त करने पर सहमति बनी। समझौते के बाद दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में आयोजित संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस के समापन पर एक आत्मीय दृश्य देखने को मिला, जब केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने CJP नेताओं से हाथ मिलाकर बातचीत के सकारात्मक माहौल का संदेश दिया।

    प्रेस कॉन्फ्रेंस समाप्त होने के बाद जब दोनों पक्ष उठने लगे, तभी जेपी नड्डा ने मुस्कुराते हुए CJP प्रवक्ता आशुतोष रांका से कहा, “हाथ तो मिलाइए…”। इस पर रांका भी मुस्कुरा दिए और आगे बढ़कर उन्होंने नड्डा से हाथ मिलाया। इसके बाद CJP के दूसरे प्रवक्ता सौरव दास ने भी जेपी नड्डा और केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह से हाथ मिलाया। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से साझा किया जा रहा है।

    20 जून से चल रहा था आंदोलन
    CJP के नेतृत्व में 20 जून से दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्र आंदोलन जारी था। आंदोलन में देशभर के हजारों छात्रों ने हिस्सा लिया और कई विपक्षी दलों ने भी इसका समर्थन किया। 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान हुए विवाद और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के अस्पताल पहुंचने के बाद आंदोलन ने और तूल पकड़ लिया था। इसी दिन केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा के आवास पर सरकार और CJP के बीच पहली औपचारिक वार्ता हुई थी। इसके बाद लगातार तीन दौर की बातचीत के जरिए दोनों पक्ष सहमति तक पहुंचे।

    आंदोलन समाप्त करने का ऐलान
    संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में CJP प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि सरकार की ओर से तय समयसीमा में सहमत बिंदुओं को लागू करने के आश्वासन के बाद संगठन आंदोलन वापस ले रहा है। उन्होंने बताया कि सरकार ने 3 मई के बाद जान गंवाने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा देने और आंदोलन से जुड़े मामलों को वापस लेने पर सहमति जताई है। वहीं, प्रवक्ता आशुतोष रांका ने देशभर के छात्रों और समर्थकों से शांतिपूर्वक धरना समाप्त कर अपने-अपने घर लौटने की अपील की। उनका कहना था कि संगठन की सभी प्रमुख मांगों पर सहमति बन चुकी है।

    चार सप्ताह बाद होगी समीक्षा बैठक
    केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि सरकार आंदोलन से जुड़े छात्रों को उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर की प्रतियां उपलब्ध कराएगी और भविष्य में किसी भी प्रदर्शनकारी या आयोजक के खिलाफ प्रतिशोधात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी। उन्होंने बताया कि परीक्षा प्रणाली में सुधार और पांच सूत्रीय मांगों के क्रियान्वयन की समीक्षा के लिए सरकार और CJP के प्रतिनिधियों के बीच चार सप्ताह बाद फिर बैठक आयोजित की जाएगी।

  • राम मंदिर चढ़ावा मामले में नई SIT की तैयारी, सुप्रीम कोर्ट में 3 IPS अधिकारियों का पैनल पेश करेगी यूपी सरकार

    राम मंदिर चढ़ावा मामले में नई SIT की तैयारी, सुप्रीम कोर्ट में 3 IPS अधिकारियों का पैनल पेश करेगी यूपी सरकार


    लखनऊ। अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी और गबन मामले की सुनवाई सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में होगी। इस दौरान उत्तर प्रदेश सरकार नई विशेष जांच टीम (SIT) के गठन के लिए तीन वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों के नाम अदालत के समक्ष प्रस्तुत कर सकती है।

    सूत्रों के अनुसार, प्रस्तावित एसआईटी में लखनऊ रेंज की आईजी किरण एस, अयोध्या के डीआईजी सोमेन वर्मा और अयोध्या के एसएसपी गौरव ग्रोवर को शामिल करने का प्रस्ताव है। इन नामों पर अंतिम निर्णय सुप्रीम कोर्ट करेगा।

    इससे पहले गठित एसआईटी में लखनऊ मंडल के तत्कालीन कमिश्नर विजय विश्वास पंत और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन कुमार शामिल थे। अब उनकी जगह दो आईपीएस अधिकारियों को शामिल करने की तैयारी की गई है।

    पहले भी हुई थी कार्रवाई
    राम मंदिर में चढ़ावे के आभूषणों के कथित गबन की शिकायत के बाद यूपी सरकार ने एसआईटी से जांच कराई थी। जांच के आधार पर एफआईआर दर्ज हुई और मामले में कई आरोपियों को गिरफ्तार भी किया गया। इसी विवाद के बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के तत्कालीन महासचिव चंपत राय और ट्रस्ट के एक अन्य पदाधिकारी अनिल मिश्रा ने अपने-अपने पदों से इस्तीफा दे दिया था।

    पुराने पहचान पत्रों से फिर मिलेगी एंट्री
    इस बीच मंदिर प्रशासन ने निर्माण कार्य प्रभावित न हो, इसके लिए एक अंतरिम फैसला लिया है। हाल ही में अमान्य किए गए चंपत राय के हस्ताक्षर वाले पुराने पहचान पत्र और प्रवेश पास फिलहाल दोबारा मान्य कर दिए गए हैं। नई पास व्यवस्था लागू होने तक अधिकृत कर्मचारी, इंजीनियर और तकनीकी अधिकारी इन्हीं पहचान पत्रों के आधार पर मंदिर परिसर में प्रवेश कर सकेंगे।

    निर्माण कार्य प्रभावित होने के बाद लिया गया फैसला
    ट्रस्ट के नेतृत्व में बदलाव के बाद पुराने पहचान पत्रों पर रोक लगा दी गई थी, जिससे मंदिर निर्माण से जुड़ी एजेंसियों के कर्मचारियों को परिसर में प्रवेश में दिक्कतें आने लगी थीं। एलएंडटी, टाटा, इंडिया इंजीनियर्स लिमिटेड और उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम जैसी संस्थाओं के इंजीनियरों और कर्मचारियों के काम पर भी इसका असर पड़ा। मंदिर परिसर में चारदीवारी, संग्रहालय, ट्रस्ट कार्यालय और विश्राम गृह सहित कई परियोजनाओं का कार्य बाधित होने की आशंका को देखते हुए प्रशासन ने फिलहाल पुराने पासों को अस्थायी रूप से फिर से वैध करने का निर्णय लिया है।