Author: bharati

  • विदिशा में अवैध कॉलोनियों का दर्द, सुविधाओं के लिए कलेक्ट्रेट पहुंचे लोग

    विदिशा में अवैध कॉलोनियों का दर्द, सुविधाओं के लिए कलेक्ट्रेट पहुंचे लोग


    मध्य प्रदेश । विदिशा जिले में अवैध कॉलोनियों का मुद्दा एक बार फिर सामने आया है। जतरपुरा क्षेत्र स्थित गोकुलधाम फेस-1 और सूरज नगर कॉलोनी के रहवासी मंगलवार को अपनी समस्याओं को लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे। यहां उन्होंने जनसुनवाई में शिकायत दर्ज कराते हुए कॉलोनाइजर पर गंभीर आरोप लगाए।

    रहवासियों का कहना है कि प्लॉट बेचते समय उन्हें सड़क, बिजली, पानी, नाली और अन्य बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन वर्षों बीत जाने के बाद भी कॉलोनी में कोई व्यवस्था नहीं की गई है।

    बुनियादी सुविधाओं के अभाव में जीवन मुश्किल
    कॉलोनी में रहने वाले लोगों का कहना है कि वे आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। गोकुलधाम कॉलोनी के रहवासी पहले भी कई बार जनसुनवाई में पहुंचकर शिकायत दर्ज करा चुके हैं और कॉलोनाइजर के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर चुके हैं।

    पूर्व में प्रशासन द्वारा मामले की जांच भी कराई गई थी और तहसीलदार ने रहवासियों के बयान दर्ज किए थे। जांच में कॉलोनी में सुविधाओं की गंभीर कमी की पुष्टि भी हुई थी, जिसके बाद कॉलोनाइजर के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था।

    “वादे किए गए, लेकिन सुविधाएं नहीं मिलीं”
    स्थानीय निवासी पूजा वर्मा ने बताया कि प्लॉट खरीदते समय सभी सुविधाएं देने का वादा किया गया था, लेकिन आज तक सड़क, पानी और बिजली जैसी बुनियादी जरूरतें पूरी नहीं की गई हैं।

    उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि शिकायत करने पर कुछ लोगों द्वारा दबाव बनाने और धमकाने जैसी घटनाएं भी सामने आई हैं, जिससे रहवासी डर के माहौल में रहने को मजबूर हैं।

    अवैध कॉलोनियों का बढ़ता जाल, प्रशासन पर सवाल
    विदिशा शहर और आसपास के क्षेत्रों में अवैध कॉलोनियों का तेजी से विस्तार हो रहा है। आकर्षक दावों और विकास के वादों के नाम पर लोगों को प्लॉट बेच दिए जाते हैं, लेकिन बाद में उन्हें बुनियादी सुविधाओं के लिए परेशान होना पड़ता है।

    स्थानीय लोगों का आरोप है कि राजनीतिक संरक्षण और प्रशासनिक ढिलाई के कारण कॉलोनाइजर बेखौफ होकर ऐसे काम कर रहे हैं। समय पर कार्रवाई न होने से आम लोग अपनी जीवनभर की जमा पूंजी लगाकर भी परेशान हो रहे हैं।

    प्रशासनिक व्यवस्था पर उठे सवाल
    इस पूरे मामले ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब अवैध कॉलोनियों का विस्तार हो रहा था, तब संबंधित विभागों ने समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की।

    अब रहवासियों की मांग है कि कॉलोनाइजर के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो और कॉलोनियों में जल्द से जल्द सड़क, पानी और बिजली जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।

  • कटनी में मेडिकल कॉलेज निर्माण शुरू, विरोध के बीच भूमिपूजन टला

    कटनी में मेडिकल कॉलेज निर्माण शुरू, विरोध के बीच भूमिपूजन टला


    मध्य प्रदेश । कटनी जिले में पीपीपी (पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप) मॉडल पर प्रस्तावित मेडिकल कॉलेज का निर्माण कार्य सोमवार से शुरू कर दिया गया है। कछगवां क्षेत्र के पास चिह्नित लगभग 25 एकड़ भूमि पर यह परियोजना अब बिना किसी औपचारिक भूमिपूजन या वीआईपी कार्यक्रम के आगे बढ़ाई जा रही है।

    यह परियोजना मध्य प्रदेश सरकार और स्वामी विवेकानंद फाउंडेशन के बीच हुए समझौता ज्ञापन (एमओयू) के तहत विकसित की जा रही है। हालांकि, शुरुआत से ही इस योजना को लेकर स्थानीय स्तर पर विरोध और आपत्तियां सामने आती रही हैं।

    लगातार विरोध के चलते टला भूमिपूजन
    स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों को निजी हाथों में नहीं दिया जाना चाहिए। इसी मुद्दे को लेकर जिले में लंबे समय से असंतोष बना हुआ है। विरोध के कारण इस परियोजना का भूमिपूजन दो बार टालना पड़ा। पहले मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का कार्यक्रम प्रस्तावित था, लेकिन विरोध की आशंका के चलते उसे स्थगित कर दिया गया। इसके बाद केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा का कार्यक्रम भी रद्द कर दिया गया। स्थिति को देखते हुए अब प्रशासन ने बिना किसी वीआईपी आयोजन के सीधे निर्माण कार्य शुरू कराने का निर्णय लिया है।

    सरकार का तर्क: स्वास्थ्य ढांचे को मिलेगा मजबूत आधार
    सरकारी पक्ष का मानना है कि यह मेडिकल कॉलेज क्षेत्र में चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करेगा। इससे स्थानीय युवाओं को मेडिकल शिक्षा के बेहतर अवसर अपने ही जिले में मिल सकेंगे। पीपीपी मॉडल को लेकर सरकार का दावा है कि इससे परियोजना तेजी से पूरी होगी और संसाधनों का बेहतर उपयोग संभव होगा।

    जनता की चिंता: निजीकरण पर उठे सवाल
    हालांकि दूसरी ओर स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों में इस मॉडल को लेकर गहरी नाराजगी है। उनका आरोप है कि स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी सेवाओं को निजी प्रबंधन के हवाले करने से आम जनता पर आर्थिक बोझ बढ़ सकता है। लोगों का कहना है कि इलाज और मेडिकल शिक्षा महंगी हो सकती है, जिससे गरीब और मध्यम वर्ग के लिए पहुंच कठिन हो जाएगी।

    “शासकीय मेडिकल कॉलेज नहीं तो वोट नहीं” का नारा
    स्थानीय समाजसेवी विंधेश्वरी पटेल ने कड़े शब्दों में विरोध जताते हुए कहा कि वे लंबे समय से पूर्णतः शासकीय मेडिकल कॉलेज की मांग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पीपीपी मॉडल का वे विरोध नहीं कर रहे, लेकिन शासकीय नियंत्रण जरूरी है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि आने वाले समय में बड़ा जन आंदोलन चलाया जाएगा और इसका नारा होगा- “कटनी को शासकीय मेडिकल कॉलेज नहीं तो भाजपा को वोट नहीं।”

    आगे की राह पर नजर
    फिलहाल परियोजना का निर्माण कार्य प्रारंभ हो चुका है, जिसमें पहले चरण में बाउंड्री वॉल का निर्माण और भूमि की सुरक्षा शामिल है। प्रशासन का कहना है कि यह एक दीर्घकालिक विकास परियोजना है, जबकि विरोधी इसे निजीकरण की दिशा में उठाया गया कदम बता रहे हैं। अब देखना यह होगा कि यह विवाद आगे राजनीतिक रूप लेता है या सरकार और जनता के बीच कोई बीच का रास्ता निकल पाता है।

  • जातिसूचक टिप्पणी के आरोप से गरमाया मामला, प्रशासन पर दबाव

    जातिसूचक टिप्पणी के आरोप से गरमाया मामला, प्रशासन पर दबाव


    मध्य प्रदेश । कटनी जिले के कोतवाली थाने में दर्ज एक FIR को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। आरोप है कि FIR में ड्यूटी पर तैनात एक पुलिसकर्मी ने शिकायत दर्ज करते समय जातिसूचक शब्दों का प्रयोग किया। इस मामले के सामने आने के बाद सामाजिक संगठन भीम आर्मी आजाद समाज पार्टी ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है। मंगलवार को संगठन के पदाधिकारियों ने कटनी पुलिस अधीक्षक (SP) कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन सौंपा और दोषी पुलिसकर्मी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। साथ ही उन्होंने FIR से आपत्तिजनक शब्दों को हटाने की भी अपील की है।

    30 मई की घटना से शुरू हुआ मामला
    मिली जानकारी के अनुसार, यह पूरा मामला 30 मई का है। कोतवाली थाना क्षेत्र के खरहनी फाटक निवासी अशोक अहिरवार (42) ने शिकायत दर्ज कराई थी कि उनके पड़ोसियों मुरेरी चौधरी, उनकी पत्नी, अजुदन चौधरी और संजय चौधरी ने उनके साथ गाली-गलौज और मारपीट की। पीड़ित जब रिपोर्ट दर्ज कराने थाने पहुंचे, तो ड्यूटी पर मौजूद प्रधान आरक्षक नितिन जायसवाल ने उनकी शिकायत के आधार पर FIR दर्ज की। आरोप है कि इसी FIR के विवरण में मोहल्ले के नाम का उल्लेख करते समय अनुचित रूप से जातिसूचक शब्द शामिल कर दिए गए।

    सामाजिक संगठन का विरोध, कार्रवाई की मांग
    घटना सामने आने के बाद भीम आर्मी आजाद एकता मिशन ने इसे अनुसूचित जाति समाज का अपमान बताया है। संगठन के जिला उपाध्यक्ष संदीप चौधरी ने कहा कि पुलिस का कार्य निष्पक्ष रूप से पीड़ित की सहायता करना और समानता बनाए रखना है, लेकिन इस तरह के शब्दों का उपयोग गंभीर आपत्ति का विषय है। उन्होंने मांग की कि संबंधित प्रधान आरक्षक पर तत्काल कार्रवाई की जाए और FIR रिकॉर्ड को संशोधित कर आपत्तिजनक शब्द हटाए जाएं।

    पुलिस अधीक्षक का बयान, जांच के आदेश
    इस मामले पर पुलिस अधीक्षक अभिनय विश्वकर्मा ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि संभवतः FIR में वही विवरण दर्ज किया गया होगा जो शिकायतकर्ता द्वारा बताया गया था। उन्होंने यह भी कहा कि मामले की जांच की जाएगी और तथ्यों के आधार पर उचित कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

    जांच पर टिकी निगाहें
    फिलहाल यह मामला जांच के दायरे में है। एक ओर सामाजिक संगठन कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, वहीं पुलिस प्रशासन ने निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया है। आने वाले दिनों में जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।

  • भू-अधिकार की लड़ाई में सड़क पर उतरे ग्रामीण, प्रशासन से जवाब तलब

    भू-अधिकार की लड़ाई में सड़क पर उतरे ग्रामीण, प्रशासन से जवाब तलब


    मध्य प्रदेश । कटनी जिले में मंगलवार को आदिवासी समुदाय के सैकड़ों लोगों ने कलेक्ट्रेट कार्यालय के मुख्य द्वार पर धरना प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी वन विभाग द्वारा उनकी जमीनों के कथित अधिग्रहण की कार्रवाई से नाराज थे। इस दौरान उन्होंने जिला प्रशासन और वन विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और अपनी जमीनों पर अधिकार बहाल करने की मांग उठाई।

    प्रदर्शन का केंद्र रीठी तहसील के अंतर्गत आने वाला ग्राम ललितपुर रहा, जहां के कई आदिवासी परिवार वर्षों से खेती कर अपनी आजीविका चला रहे हैं। धरने में शामिल ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि उनके भू-अधिकार पट्टे वापस नहीं किए गए तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।

    1989 से काबिज जमीन पर अब विवाद, वन विभाग पर आरोप
    प्रदर्शन में शामिल ग्रामीणों ने बताया कि शासन द्वारा उन्हें वर्ष 1989 में विधिवत भू-अधिकार पट्टे दिए गए थे। इन पट्टों के आधार पर वे लगातार लगभग तीन दशकों से अधिक समय से जमीन पर काबिज हैं और खेती कर अपने परिवारों का भरण-पोषण कर रहे हैं।आदिवासी परिवारों का आरोप है कि अब वन विभाग उनकी इसी जमीन को अपना बताकर जबरन कब्जा करने की कोशिश कर रहा है, जिससे उनके सामने आजीविका का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।

    पीड़ितों का दर्द: “रोजी-रोटी छीनी जा रही है”
    प्रदर्शन में शामिल पीड़ित बृजलाल ने अपनी व्यथा व्यक्त करते हुए कहा कि वे वर्षों से इस जमीन पर मेहनत कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “हमने इस जमीन पर खून-पसीना बहाया है। शासन ने ही हमें पट्टा दिया था, अब वन विभाग इसे अपनी जमीन बता रहा है। यह हमारे साथ अन्याय है और हमारी रोजी-रोटी छीनी जा रही है।”

    कलेक्टर के नाम सौंपा ज्ञापन, उच्च स्तरीय जांच की मांग
    धरना प्रदर्शन के दौरान आदिवासी प्रतिनिधियों ने कलेक्टर के नाम एक ज्ञापन भी सौंपा, जिसे डिप्टी कलेक्टर को दिया गया। ज्ञापन में वन विभाग की कार्रवाई को पूरी तरह से अन्यायपूर्ण बताते हुए पूरे मामले की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग की गई है। साथ ही प्रदर्शनकारियों ने अपने भू-अधिकार पट्टों को यथावत रखने और वन विभाग के हस्तक्षेप पर तत्काल रोक लगाने की मांग की। ग्रामीणों ने प्रशासन से अपील की कि उन्हें उनकी जमीन पर शांतिपूर्वक खेती करने का अधिकार फिर से सुनिश्चित किया जाए।

    प्रशासन पर निगाहें, आंदोलन की चेतावनी
    प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं की गई, तो वे आंदोलन को और व्यापक रूप देंगे। फिलहाल इस पूरे मामले को लेकर प्रशासन की प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है।

  • सिंहस्थ 2028 की तैयारी में जुटी मंदसौर पुलिस: भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा को लेकर विशेष प्रशिक्षण शुरू

    सिंहस्थ 2028 की तैयारी में जुटी मंदसौर पुलिस: भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा को लेकर विशेष प्रशिक्षण शुरू

    मध्य प्रदेश । उज्जैन में वर्ष 2028 में आयोजित होने वाले विश्व प्रसिद्ध सिंहस्थ महाकुंभ को लेकर मध्यप्रदेश पुलिस ने अभी से व्यापक तैयारियां शुरू कर दी हैं। इसी कड़ी में मंदसौर पुलिस द्वारा विशेष प्रशिक्षण कार्यशाला का शुभारंभ किया गया है, जिसमें पुलिस अधिकारियों और जवानों को आने वाले महाकुंभ के दौरान सुरक्षा व्यवस्था, भीड़ नियंत्रण, यातायात प्रबंधन और श्रद्धालुओं से बेहतर संवाद के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है।
    इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ रतलाम रेंज के डीआईजी निमिष अग्रवाल ने किया। इस दौरान उन्होंने पुलिस अधिकारियों और जवानों से संवाद कर तैयारियों की समीक्षा की और प्रशिक्षण की रूपरेखा पर विस्तार से चर्चा की। कार्यक्रम में एसपी विनोद कुमार मीना, एडिशनल एसपी टी.एस. बघेल, सीएसपी जितेंद्र भास्कर सहित जिले के सभी थाना प्रभारी और बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी उपस्थित रहे।

    छह दिवसीय प्रशिक्षण से शुरू हुआ अभियान, आगे बनेगा बड़ा नेटवर्क
    डीआईजी निमिष अग्रवाल ने जानकारी दी कि पुलिस मुख्यालय के निर्देश पर यह विशेष प्रशिक्षण अभियान शुरू किया गया है। फिलहाल छह दिवसीय प्रशिक्षण वर्ग चलाया जा रहा है, लेकिन इसे चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाते हुए अगले छह माह से एक वर्ष तक सभी पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को प्रशिक्षित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सिंहस्थ जैसे विशाल धार्मिक आयोजन में सामान्य पुलिस ड्यूटी से कहीं अधिक जटिल परिस्थितियां उत्पन्न होती हैं, जिनसे निपटने के लिए पूर्व तैयारी अत्यंत आवश्यक है। इसी उद्देश्य से यह प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया गया है।

    मास्टर ट्रेनर्स तैयार होंगे, पूरे जिले में फैलाएंगे प्रशिक्षण
    कार्यशाला के अंतर्गत मास्टर ट्रेनर्स तैयार किए जा रहे हैं, जो आगे चलकर जिले के अन्य पुलिसकर्मियों को प्रशिक्षण देंगे। इन प्रशिक्षकों को भीड़ प्रबंधन, आपात स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया, यातायात नियंत्रण और सुरक्षा व्यवस्था को संभालने की विशेष तकनीकें सिखाई जा रही हैं।इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सिंहस्थ 2028 के दौरान किसी भी स्थिति में पुलिस बल पूरी तरह सक्षम और प्रशिक्षित रहे।

    श्रद्धालुओं से व्यवहार पर विशेष जोर
    प्रशिक्षण में पुलिसकर्मियों को यह भी सिखाया जा रहा है कि महाकुंभ के दौरान उनका व्यवहार केवल सुरक्षा तक सीमित न रहे, बल्कि श्रद्धालुओं की सहायता और मार्गदर्शन भी उनकी जिम्मेदारी हो। डीआईजी ने विशेष रूप से निर्देश दिए कि पुलिसकर्मी श्रद्धालुओं के साथ विनम्र और सेवा भाव से पेश आएं। यदि किसी को मार्गदर्शन, सहायता या जानकारी की आवश्यकता हो तो उसे तुरंत और सकारात्मक तरीके से मदद उपलब्ध कराई जाए।

    नगर सुरक्षा समिति को भी मिलेगा प्रशिक्षण
    जानकारी के अनुसार, सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के तहत नगर सुरक्षा समिति के सदस्यों को भी विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। इससे पुलिस और स्थानीय नागरिकों के बीच समन्वय मजबूत होगा और बड़े आयोजन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था और अधिक प्रभावी बन सकेगी।

    विश्वस्तरीय आयोजन को लेकर पहले से तैयारी
    एसपी विनोद कुमार मीना ने कहा कि सिंहस्थ महाकुंभ दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में से एक है, जहां करोड़ों श्रद्धालुओं की उपस्थिति रहती है। ऐसे आयोजन में भीड़ नियंत्रण, यातायात व्यवस्था, सुरक्षा और आपदा प्रबंधन बड़ी चुनौती होती है।

    इन्हीं चुनौतियों से निपटने के लिए मंदसौर पुलिस ने अभी से प्रशिक्षण अभियान शुरू किया है, ताकि 2028 के सिंहस्थ के दौरान पूरी पुलिस व्यवस्था मुस्तैद और सक्षम नजर आए।

  • दवा स्टॉक में गड़बड़ी की आशंका, औचक निरीक्षण में रिकॉर्ड खंगाले गए

    दवा स्टॉक में गड़बड़ी की आशंका, औचक निरीक्षण में रिकॉर्ड खंगाले गए


    मध्य प्रदेश । मंदसौर जिले में दवाओं के सुरक्षित, पारदर्शी और नियमानुसार विक्रय को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से औषधि विभाग ने अपनी निगरानी और कार्रवाई को तेज कर दिया है। इसी क्रम में मंगलवार को बीपीएल चौराहा क्षेत्र स्थित कई मेडिकल संस्थानों पर औचक निरीक्षण किया गया, जिससे दवा कारोबारियों में हड़कंप मच गया।

    निरीक्षण के दौरान टीम ने दुकानों में मौजूद दवाओं के स्टॉक, उनकी एक्सपायरी डेट, तथा नशे के रूप में दुरुपयोग होने वाली दवाओं के क्रय-विक्रय रिकॉर्ड की गहन जांच की। अधिकारियों ने यह भी देखा कि शेड्यूल-एच1 श्रेणी की दवाओं का रिकॉर्ड नियमों के अनुसार संधारित किया जा रहा है या नहीं।

    मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. गोविंद सिंह चौहान ने जानकारी देते हुए बताया कि निरीक्षण का उद्देश्य केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि दवा वितरण प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

    दवाओं के नमूने जांच के लिए भेजे गए, रिकॉर्ड प्रस्तुत करने के निर्देश
    निरीक्षण के दौरान बीपीएल चौराहा स्थित श्रीजी मेडिकल से दवाओं के नमूने जांच हेतु लिए गए हैं। इसके साथ ही सिटी मेडिकल और वीर फार्मा को निर्देश दिया गया है कि वे शेड्यूल-एच1 दवाओं के क्रय-विक्रय से जुड़े सभी रिकॉर्ड दो दिनों के भीतर विभाग के समक्ष प्रस्तुत करें। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि निर्धारित समय सीमा में दस्तावेज प्रस्तुत न करने पर संबंधित संस्थानों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। टीम ने मौके पर मौजूद सभी मेडिकल संचालकों को स्टॉक रजिस्टर नियमित रूप से अद्यतन रखने के निर्देश भी दिए।

    सीतामऊ में पहले मिली थीं अनियमितताएं, दो मेडिकल फर्मों को नोटिस
    सीएमएचओ डॉ. चौहान ने बताया कि इससे पहले सीतामऊ तहसील में किए गए निरीक्षण के दौरान कुछ अनियमितताएं सामने आई थीं। जांच के आधार पर पूजा मेडिकोज और मां आशापुरा मेडिकल को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। इनसे प्राप्त जवाबों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

    नशे के रूप में दवाओं के दुरुपयोग पर सख्ती
    औषधि विभाग द्वारा सीतामऊ तहसील के सभी मेडिकल संचालकों की एक बैठक भी आयोजित की गई। बैठक में स्पष्ट निर्देश दिए गए कि नशे के रूप में दुरुपयोग होने वाली दवाओं का रिकॉर्ड व्यवस्थित तरीके से रखा जाए और बिना चिकित्सकीय परामर्श किसी भी दवा का वितरण न किया जाए। अधिकारियों ने चेतावनी दी कि यदि किसी भी मेडिकल स्टोर पर नियमों का उल्लंघन पाया गया, तो उसके खिलाफ लाइसेंस निरस्तीकरण सहित कठोर कार्रवाई की जा सकती है।

    निगरानी और निरीक्षण आगे भी जारी रहेगा
    सीएमएचओ ने कहा कि विभाग का मुख्य उद्देश्य अवैध दवा कारोबार और दवाओं के दुरुपयोग पर रोक लगाना है। साथ ही दवा वितरण प्रणाली को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाना भी प्राथमिकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिलेभर में इस तरह के औचक निरीक्षण और निगरानी अभियान आगे भी लगातार जारी रहेंगे।

  • झाबुआ में स्वास्थ्य सेवाएं चरमराईं, एनएचएम कर्मचारियों की हड़ताल शुरू

    झाबुआ में स्वास्थ्य सेवाएं चरमराईं, एनएचएम कर्मचारियों की हड़ताल शुरू


    मध्य प्रदेश । झाबुआ जिले में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत कार्यरत संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है। प्रदेशभर के करीब 32 हजार संविदा कर्मचारियों के कार्य बहिष्कार के बाद स्वास्थ्य सेवाओं पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

    संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के जिलाध्यक्ष डॉ. वासुदेव पाटीदार ने बताया कि एनएचएम कर्मचारी वर्षों से प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ रहे हैं, लेकिन उनकी मांगों पर लगातार अनदेखी की जा रही है।

    मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई का आरोप
    कर्मचारियों का आरोप है कि पिछले वर्ष मुख्यमंत्री की उपस्थिति में उनकी मांगों पर सहमति बनी थी, लेकिन एक वर्ष बीत जाने के बाद भी उस पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया। कर्मचारियों ने कहा कि वे लंबे समय से नियमितीकरण की मांग कर रहे हैं, लेकिन समाधान नहीं हुआ।

    कर्मचारियों की प्रमुख मांगें
    हड़ताल पर गए कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में शामिल हैं-
    30 जनवरी 2026 की मुख्यमंत्री घोषणा के अनुसार नियमितीकरण
    एनपीएस और स्वास्थ्य बीमा का लाभ (2023 सामान्य प्रशासन विभाग नीति के तहत)
    अन्य राज्यों की तरह 10% वार्षिक वेतन वृद्धि
    नियमित कर्मचारियों के समान महंगाई भत्ता
    वेतन विसंगति का निराकरण
    समान कार्य के लिए समान वेतन
    नियमित कर्मचारियों के समान अवकाश
    इसके अलावा कर्मचारियों ने “सार्थक ऐप” के उपयोग को बंद करने का भी निर्णय लिया है।

    चरणबद्ध आंदोलन के बाद अब अनिश्चितकालीन हड़ताल
    कर्मचारी इससे पहले काली पट्टी बांधकर विरोध प्रदर्शन कर चुके हैं और प्रशासनिक अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों को ज्ञापन भी सौंप चुके हैं। अब अनिश्चितकालीन हड़ताल के बाद आंदोलन को आगे बढ़ाते हुए 8 जून को प्रदेशभर के कर्मचारी भोपाल में मुख्यमंत्री निवास का घेराव करने की योजना बना रहे हैं।

    स्वास्थ्य सेवाओं पर असर की आशंक
    हड़ताल के चलते जिला अस्पतालों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और अन्य स्वास्थ्य सेवाओं के प्रभावित होने की संभावना जताई जा रही है, जिससे आम मरीजों को परेशानी हो सकती है।

  • श्योपुर में जनसुनवाई के दौरान व्यापारी का अनोखा विरोध: कनक दंडवत कर कलेक्ट्रेट पहुंचे, आत्मदाह की चेतावनी

    श्योपुर में जनसुनवाई के दौरान व्यापारी का अनोखा विरोध: कनक दंडवत कर कलेक्ट्रेट पहुंचे, आत्मदाह की चेतावनी


    मध्य प्रदेश । श्योपुर जिले के कलेक्टर कार्यालय में मंगलवार को आयोजित जनसुनवाई के दौरान एक व्यापारी ने अनोखे तरीके से विरोध दर्ज कराया। शहर निवासी जगदीश प्रसाद अग्रवाल कलेक्ट्रेट परिसर में कनक दंडवत करते हुए पहुंचे और अपनी लंबित राजस्व समस्या के समाधान की मांग की।

    उन्होंने अधिकारियों के सामने अपनी शिकायत रखते हुए कहा कि यदि उनकी समस्या का जल्द समाधान नहीं हुआ तो वे दो दिन बाद आत्मदाह करने को मजबूर होंगे। इस बयान से जनसुनवाई में मौजूद अधिकारी भी गंभीर हो गए।

    15 साल से लंबित नामांतरण, राजस्व विभाग पर आरोप
    व्यापारी जगदीश प्रसाद अग्रवाल ने आरोप लगाया कि उनकी पत्नी रानी अग्रवाल के नाम पर वर्ष 2009 में खरीदी गई भूमि का विधिवत विक्रय पत्र होने के बावजूद 15 वर्षों से अधिक समय बीत जाने के बाद भी नामांतरण नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि सभी आवश्यक दस्तावेज और कब्जा होने के बावजूद राजस्व न्यायालय में उनकी फाइल को अनावश्यक रूप से लंबित रखा जा रहा है, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान हो रहा है और वे भूमि का आगे विक्रय भी नहीं कर पा रहे हैं।

    रिश्वत लेकर अन्य मामलों में नामांतरण का आरोप
    अग्रवाल ने यह भी गंभीर आरोप लगाया कि उसी सर्वे नंबर से जुड़े अन्य मामलों में कथित रूप से रिश्वत लेकर नामांतरण कर दिया गया है, जबकि उनके मामले में जानबूझकर बाधाएं उत्पन्न की जा रही हैं।

    उन्होंने एक अन्य भूमि रिकॉर्ड में त्रुटिपूर्ण प्रविष्टि किए जाने का भी आरोप लगाया और कहा कि पटवारी से कई बार शिकायत करने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं किया गया।

    प्रशासन से तत्काल समाधान की मां
    जनसुनवाई के दौरान व्यापारी ने अधिकारियों से मांग की कि उनकी समस्या का शीघ्र निराकरण किया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कार्रवाई नहीं होती है तो वे इसके लिए प्रशासन को जिम्मेदार मानेंगे। प्रशासनिक अधिकारियों ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित विभाग से रिपोर्ट तलब करने की बात कही है।

  • जबलपुर में अफसरों पर गिरी गाज, समय पर काम न करने पर जुर्माना

    जबलपुर में अफसरों पर गिरी गाज, समय पर काम न करने पर जुर्माना


    मध्य प्रदेश । जबलपुर में लोक सेवा गारंटी अधिनियम के तहत निर्धारित समय-सीमा में सेवाएं उपलब्ध नहीं कराने पर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने समीक्षा बैठक के दौरान लापरवाही बरतने वाले 22 राजस्व अधिकारियों पर जुर्माना लगाया है, जिनमें एसडीएम और तहसीलदार स्तर के अधिकारी भी शामिल हैं जुर्माने की राशि 250 रुपये से लेकर 5 हजार रुपये तक तय की गई है और कुल मिलाकर लगभग 34 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया गया है।

    समय पर सेवाएं देना अनिवार्य, फिर भी हुई लापरवाही
    लोक सेवा गारंटी अधिनियम के तहत नागरिकों को निर्धारित समय-सीमा में सरकारी सेवाएं उपलब्ध कराना अनिवार्य है। लेकिन जबलपुर में कई अधिकारियों द्वारा आवेदनों का समय पर निराकरण नहीं किया गया, जिससे आम नागरिकों को परेशानी का सामना करना पड़ा। कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि जिन अधिकारियों के पास लंबित आवेदन अधिक पाए गए, उन पर अधिक जुर्माना लगाया गया है।

    सीएम हेल्पलाइन की शिकायतों पर भी सख्ती
    कलेक्टर ने सीएम हेल्पलाइन की लंबित शिकायतों को भी गंभीरता से लेते हुए कहा कि इनका समय पर निराकरण भी अनिवार्य है। उन्होंने चेतावनी दी कि लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों को चिन्हित कर आगे भी कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा, कुछ बैंकों द्वारा शिकायतों को गंभीरता से न लेने और मामलों को समय पर न देखने पर भी नाराजगी जताई गई है। ऐसे संस्थानों के खिलाफ भी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की जा रही है।

    प्रशासन का सख्त संदेश
    कलेक्टर ने कहा कि लोक सेवा गारंटी और जनशिकायत निवारण शासन की प्राथमिकता है और इसमें किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अधिकारियों को समयबद्ध और जवाबदेह कार्यप्रणाली अपनाने के निर्देश दिए गए हैं।

  • गर्भवती दुष्कर्म पीड़िता को गर्भपात की अनुमति से हाईकोर्ट का इनकार: 31 सप्ताह के गर्भ को देखते हुए दिया फैसला

    गर्भवती दुष्कर्म पीड़िता को गर्भपात की अनुमति से हाईकोर्ट का इनकार: 31 सप्ताह के गर्भ को देखते हुए दिया फैसला


    मध्य प्रदेश । जबलपुर स्थित मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण मामले में दुष्कर्म से गर्भवती हुई 16 वर्षीय नाबालिग को गर्भपात की अनुमति देने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि 31 सप्ताह की गर्भावस्था में भ्रूण का विकास ऐसे स्तर पर पहुंच चुका है कि गर्भपात को शिशु के जीवन को समाप्त करने के समान माना जाएगा। जस्टिस विवेक जैन की वेकेशन बेंच ने यह आदेश देते हुए याचिका खारिज कर दी और राज्य सरकार को पीड़िता के उपचार, प्रसव और नवजात शिशु की देखभाल सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

    शादी का झांसा देकर दुष्कर्म का आरोप
    मामला मंडला जिले के घुघरी थाना क्षेत्र का है। आरोप है कि ग्राम बहरा निवासी एक युवक ने 16 वर्षीय किशोरी को शादी का झांसा देकर 15 अक्टूबर 2025 से कई बार दुष्कर्म किया, जिसके चलते वह गर्भवती हो गई। गर्भावस्था 24 सप्ताह से अधिक होने के कारण मामला कानूनी रूप से हाईकोर्ट में पहुंचा।

    मेडिकल रिपोर्ट में गंभीर एनीमिया का खुलासा
    सुनवाई के दौरान अदालत के सामने जिला अस्पताल मंडला की विशेषज्ञ चिकित्सकीय रिपोर्ट पेश की गई। रिपोर्ट में बताया गया कि पीड़िता 31 सप्ताह की गर्भवती है और उसका हीमोग्लोबिन स्तर 7.5 ग्राम है, जो गंभीर एनीमिया की स्थिति को दर्शाता है। हालांकि रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि गर्भस्थ शिशु जीवित और सामान्य रूप से विकसित हो रहा है, और इस अवस्था में गर्भपात कराना पीड़िता के लिए भी अत्यधिक जोखिमपूर्ण हो सकता है।

    सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला
    हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के ‘X बनाम यूनियन ऑफ इंडिया’ मामले का हवाला दिया। अदालत ने कहा कि 24 सप्ताह से अधिक की गर्भावस्था को केवल असाधारण परिस्थितियों में ही समाप्त किया जा सकता है, जैसे मां के जीवन को गंभीर खतरा या भ्रूण में गंभीर विकृति। इस मामले में ऐसी कोई चिकित्सकीय या कानूनी परिस्थिति नहीं पाई गई, जिसके आधार पर गर्भपात की अनुमति दी जा सके।

    राज्य सरकार को सौंपी जिम्मेदारी
    अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि पीड़िता को अस्पताल में उचित चिकित्सा सुविधा, निगरानी और देखभाल उपलब्ध कराई जाए। साथ ही, जन्म के बाद बच्चे की सुरक्षा और पालन-पोषण की जिम्मेदारी भी राज्य सरकार निभाएगी। कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि पीड़िता या उसके परिजन बच्चे का पालन नहीं करना चाहते, तो वे कानूनी प्रक्रिया के तहत गोद देने की प्रक्रिया अपना सकते हैं।