Author: bharati

  • भारत के LPG और कच्चे तेल के टैंकरों ने पार किया होर्मुज… जल्द पहुंचेंगे बंदरगाह

    भारत के LPG और कच्चे तेल के टैंकरों ने पार किया होर्मुज… जल्द पहुंचेंगे बंदरगाह


    नई दिल्ली।
    अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी युद्ध (US-Israel and Iran War) की वजह से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) बंद होने से भारत सहित कई देशों में ईंधन आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। इस बीच अब भारत (India) के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। जानकारी के मुताबिक UAE से दो LPG कैरियर और सऊदी अरब से एक कच्चे तेल का कैरियर भारत के बंदरगाहों की ओर बढ़ रहे हैं ताकि देश में ऊर्जा आपूर्ति की कमी को पूरा किया जा सके। वहीं नौसेना प्रमुख दिनेश त्रिपाठी ने बढ़ते हुए शिपिंग संकट के चलते ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड के अपने आधिकारिक दौरे को रद्द कर दिया है।

    जानकारी के मुताबिक भारतीय झंडे वाले जहाज पाइन गैस और जग वसंत लगभग एक साथ ही चल रहे थे। दोनों जहाज सोमवार सुबह 6 बजे UAE के बंदरगाहों से भारत के लिए रवाना हुए। ईरान ने इन दोनों LPG जहाजों को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने की मंजूरी भी दे दी है। वहीं ओमान की खाड़ी में भारतीय नौसेना के युद्धपोत इन LPG जहाजों को 24 घंटे तक सुरक्षा दे रहे हैं।

    जहाज में कितना LPG?
    बंदरगाह, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के विशेष सचिव राजेश कुमार सिन्हा ने सोमवार को एक प्रेस कांफ्रेस में बताया कि दोनों जहाज पर लगभग 92,000 टन एलपीजी है। उन्होंने कहा, ”यात्रा शुरू हो चुकी है।’’ शिपिंग मंत्रालय के अनुसार जग वसंत के 26 मार्च को कांडला बंदरगाह पहुंचने की संभावना है, जबकि पाइन गैस 28 मार्च को न्यू मैंगलोर पहुंच सकता है। इन जहाजों पर क्रमशः 33 और 27 भारतीय नाविक भी सवार हैं।

    सऊदी से आ रहा तेल टैंकर
    इसके अलावा, MT Kallista नाम का एक कच्चे तेल का कैरियर सऊदी अरब के यान्बू बंदरगाह पर तेल भर रहा है और मंगलवार को जेद्दा बंदरगाह होते हुए भारत के पारादीप बंदरगाह के लिए रवाना होगा। पेट्रोलियम मंत्रालय के समन्वय से, पनामा के झंडे वाले यह जहाज भी अदन की खाड़ी से गुजरेगा और भारतीय नौसेना इसकी हिफाजत करेगी।

    भारतीय टैंकरों ने ईरान को दी फीस?
    भले ही रिपोर्ट्स में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर ईरान द्वारा मोटी फीस लिए जाने की खबरें थीं, लेकिन भारत ने अपने LPG टैंकरों को गुजरने की अनुमति देने के लिए ईरान को कोई पैसा नहीं दिया है। भारत में ईरानी दूतावास ने सोमवार को ऐसी रिपोर्टों का खंडन किया है।

    इस बीच केंद्र सरकार ने भारतीय नौसेना से कहा है कि वह भारतीय झंडे वाले जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ओमान की खाड़ी और अदन की खाड़ी के आसपास अपने कोलकाता-श्रेणी के विध्वंसक जहाजों को तैनात करे। वहीं भारतीय झंडे वाले सभी जहाज़ों के कप्तानों से लगातार संपर्क किया जा रहा है, ताकि उन्हें बताया जा सके कि भारत संकट के समय उनके साथ खड़ा है।

    कितने टैंकर फंसे?
    बता दें कि ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध कुल मिलाकर लगभग 500 टैंकर जहाज फारस की खाड़ी में फंसे हुए हैं। इनमें 108 कच्चे तेल के टैंकर, 166 तेल उत्पाद टैंकर, 104 रासायनिक/उत्पाद टैंकर, 52 रासायनिक टैंकर और 53 अन्य प्रकार के टैंकर शामिल हैं। विश्लेषकों का कहना है कि ईरान संभवत: सत्यापन के बाद चुनिंदा जहाजों को जलडमरूमध्य से जाने की अनुमति दे सकता है।

  • विदेश मंत्री जयशंकर का बड़ा बयान, बोले- बदलती परिस्थितियों में और गहरे हुए भारत-रूस के संबंध

    विदेश मंत्री जयशंकर का बड़ा बयान, बोले- बदलती परिस्थितियों में और गहरे हुए भारत-रूस के संबंध


    नई दिल्ली।
    विदेश मंत्री एस जयशंकर (External Affairs Minister S Jaishankar) ने भारत और रूस के संबंधों (India-Russia relations) को लेकर सोमवार को बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा, ‘आज की बदलती परिस्थितियों में हमारी भागीदारी और गहरी होती जा रही है।’ जयशंकर ने कहा कि 2030 तक दोनों देशों के बीच वार्षिक व्यापार को 100 अरब अमेरिकी डॉलर तक बढ़ाने के लिए गैर-टैरिफ बाधाओं को दूर करने की जरूरत है। उन्होंने रूस के साथ दीर्घकालिक साझेदारी को मजबूत करने के लिए भारत की अटूट प्रतिबद्धता की पुष्टि की। विदेश मंत्री ‘भारत और रूस: एक नए द्विपक्षीय एजेंडे की ओर’ शीर्षक वाले ऑनलाइन सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे।

    वहीं, रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने भारत की स्वतंत्र विदेश नीति की सराहना की। उन्होंने कहा कि रूस इस वर्ष प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरे का स्वागत करने के लिए उत्सुक है। एस जयशंकर ने कहा कि विकसित हो रही बहुध्रुवीय व्यवस्था के लिए भारत और रूस के बीच अधिक सहयोग की आवश्यकता है, जिसमें ब्रिक्स, शंघाई सहयोग संगठन (SCO), जी20 और संयुक्त राष्ट्र के माध्यम से सहयोग शामिल है। उन्होंने कहा कि भारत, रूस के साथ मिलकर साझा चुनौतियों का संतुलित और समावेशी तरीके से समाधान करने के लिए तत्पर है।


    भारत-रूस के मजबूत होते रिश्ते

    जयशंकर ने कहा, ‘भारत और रूस के बीच विश्वास और आपसी सम्मान पर आधारित एक विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी है। दशकों से हमारे पारस्परिक रूप से लाभकारी सहयोग ने क्षेत्रीय और वैश्विक शांति, स्थिरता और प्रगति को आगे बढ़ाया है।’ विदेश मंत्री ने पिछले वर्ष दिसंबर में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की नई दिल्ली यात्रा से निकले नतीजों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, ‘दोनों पक्ष वर्तमान वार्षिक व्यापार को 68.7 अरब अमेरिकी डॉलर से बढ़ाकर 2030 तक 100 अरब अमेरिकी डॉलर तक संतुलित और सतत तरीके से पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।’

    विदेश मंत्री ने कहा, ‘हमें भारत-यूरेशियन आर्थिक संघ मुक्त व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने और गैर-टैरिफ बाधाओं व विनियामक अड़चनों को दूर करने की जरूरत है। साथ ही, कुशल भारतीय कार्यबल का उपयोग करने के प्रयासों को जारी रखना चाहिए।’ पश्चिम एशिया में जारी संकट के मद्देनजर विदेश मंत्री की ये टिप्पणियां अहम हैं। दिसंबर में पीएम मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच हुई वार्ता के बाद भारत और रूस ने कई उपायों की घोषणा की, जिनमें एक मजबूत आर्थिक साझेदारी बनाने व 2030 तक वार्षिक व्यापार को 100 अरब अमेरिकी डॉलर तक बढ़ाने के लिए 5 वर्षीय खाका शामिल है।


    रूस की ओर से क्या कहा गया

    जयशंकर ने रूस को नागरिक परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में भारत का सर्वोत्तम भागीदार बताया। उन्होंने कहा, ‘चूंकि भारत का लक्ष्य 2047 तक अपनी परमाणु ऊर्जा उत्पादन क्षमता को 100 गीगावॉट तक बढ़ाना है, मुझे विश्वास है कि परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग के लिए रूस में उसे एक विश्वसनीय भागीदार मिलेगा।’ लावरोव ने कहा कि रूस-भारत की समय-परीक्षित मित्रता आपसी विश्वास और सम्मान पर आधारित अंतरदेशीय संबंधों का आदर्श उदाहरण है। उन्होंने कहा, ‘रणनीतिक स्वायत्तता की दिशा में अपनी राह के तहत स्वतंत्र विदेश नीति अपनाने और राष्ट्रीय हितों को लगातार प्राथमिकता देने के लिए भारत अत्यंत सम्मान का पात्र है। रूस और भारत की सदियों पुरानी मित्रता इस बात का आदर्श उदाहरण है कि समानता, आपसी विश्वास, सम्मान और एक-दूसरे के हितों का ध्यान रखते हुए अंतरराज्यीय संबंध कैसे बनाए जा सकते हैं और बनाए जाने चाहिए।’

  • Inter-Religious विवाह में महिलाओं की धार्मिक पहचान के मामले में SC कर रहा सुनवाई

    Inter-Religious विवाह में महिलाओं की धार्मिक पहचान के मामले में SC कर रहा सुनवाई


    नई दिल्ली।
    क्या अंतर-धार्मिक विवाह (Inter-Religious Marriage) करने पर महिलाओं को उनकी धार्मिक पहचान से वंचित किया जा सकता है? सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) इस मामले पर सुनवाई कर रहा है। ताजा केस पारसी समुदाय से जुड़ा है, जहां याचिकाकर्ता दीना बुढ़राजा ने नागपुर पारसी पंचायत के नियम 5(2) को चुनौती दी है। इस नियम के अनुसार, अगर कोई पारसी महिला गैर-पारसी से विवाह करती है तो उसकी धार्मिक पहचान समाप्त कर दी जाती है और उसे अगियारी जैसे धार्मिक स्थलों में प्रवेश से वंचित कर दिया जाता है। वहीं, पारसी पुरुषों पर ऐसा कोई प्रतिबंध नहीं है।

    याचिका में दावा किया गया कि यह नियम लिंग आधारित भेदभावपूर्ण है। साथ ही, भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 (कानून के समक्ष समानता), 21 (जीवन और गरिमा का अधिकार) तथा 25 (धर्म की स्वतंत्रता) का उल्लंघन करता है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने सोमवार को इस याचिका पर सुनवाई की। इसने केंद्र सरकार, नागपुर पारसी पंचायत, अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय, महाराष्ट्र सरकार और चैरिटी कमिश्नर को नोटिस जारी किया। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दिवान ने तर्क दिया कि यह नियम असंवैधानिक है क्योंकि यह केवल महिलाओं को लक्षित करता है और समुदाय की परंपराओं के नाम पर लैंगिक असमानता को बढ़ावा देता है।


    कोर्ट ने अपने फैसले में क्या कहा

    अदालत ने माना कि यह मामला महत्वपूर्ण कानूनी सवाल उठाता है और पारसी समुदाय में ऐसे मुद्दे पहले भी बार-बार अदालत में आए हैं। यह नियम नागपुर अगियारी के प्रबंधन से संबंधित है, जो पारसी धार्मिक स्थल है। यह मामला पारसी व्यक्तिगत कानूनों से जुड़ा है, जहां समुदाय की परंपराएं विवाह और धार्मिक पहचान को नियंत्रित करती हैं। याचिकाकर्ता का कहना है कि अंतर-धार्मिक विवाह करने वाली महिला को उसकी जन्मजात धार्मिक पहचान से अलग नहीं किया जा सकता, क्योंकि यह व्यक्तिगत स्वतंत्रता और गरिमा के खिलाफ है।

    विशेष विवाह अधिनियम जैसे कानून अंतर-धार्मिक विवाह की इजाजत देते हैं, जहां दोनों पक्ष अपनी धार्मिक पहचान बनाए रख सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने पहले भी ऐसे मामलों में कहा है कि विवाह से महिला की धार्मिक पहचान स्वतः पति की धर्म में विलय नहीं होती, जब तक वह स्वेच्छा से परिवर्तन न करे। इस मामले में भी समान सिद्धांत लागू हो सकता है। वर्तमान में मामला प्रारंभिक चरण में है, जहां नोटिस जारी होने के बाद संबंधित पक्षों से जवाब मांगा गया है। सुप्रीम कोर्ट का अंतिम फैसला न केवल पारसी समुदाय बल्कि पूरे देश में अंतर-धार्मिक विवाहों और लैंगिक समानता के मुद्दे पर प्रभाव डालेगा।

  • कम उम्र में सफेद बाल? पित्त दोष हो सकता है वजह, जानें आयुर्वेदिक कारण और असरदार उपाय

    कम उम्र में सफेद बाल? पित्त दोष हो सकता है वजह, जानें आयुर्वेदिक कारण और असरदार उपाय


    नई दिल्ली:आज के समय में कम उम्र में ही बालों का सफेद होना एक आम समस्या बनती जा रही है। पहले जहां सफेद बालों को बढ़ती उम्र की निशानी माना जाता था, वहीं अब यह युवाओं में भी तेजी से देखने को मिल रहा है। आयुर्वेद के अनुसार इसका एक बड़ा कारण पित्त दोष का असंतुलन है, जो शरीर में कई तरह की समस्याओं को जन्म देता है।

    आयुर्वेद में बताया गया है कि जब पित्त दोष बढ़ जाता है, तो इसका सीधा असर बालों के रंगद्रव्य यानी मेलानिन पर पड़ता है। इससे बाल समय से पहले सफेद होने लगते हैं। इसके अलावा गलत खान-पान, अत्यधिक तनाव, अनियमित दिनचर्या और नींद की कमी भी इस समस्या को बढ़ावा देते हैं। यही कारण है कि आज की भागदौड़ भरी जीवनशैली में यह परेशानी तेजी से बढ़ रही है।

    विशेषज्ञों के अनुसार, सफेद बालों की समस्या को नियंत्रित करने के लिए सबसे पहले पित्त को संतुलित करना जरूरी है। इसके लिए खान-पान में सुधार करना बेहद अहम भूमिका निभाता है। ज्यादा मसालेदार, तैलीय और खट्टे भोजन से दूरी बनानी चाहिए। चाय, कॉफी और अधिक नमक वाले खाद्य पदार्थ भी पित्त को बढ़ाते हैं, इसलिए इनका सेवन सीमित मात्रा में करना चाहिए।

    इसके साथ ही आहार में पोषक तत्वों को शामिल करना भी जरूरी है। आयुर्वेद में आंवला, चुकंदर, घी, काली मुनक्का, शतावरी और त्रिफला जैसे तत्वों को बेहद फायदेमंद माना गया है। ये न केवल शरीर को अंदर से पोषण देते हैं, बल्कि बालों की जड़ों को भी मजबूत बनाते हैं।

    बाहरी देखभाल भी उतनी ही जरूरी है। बालों में नियमित रूप से तेल लगाना बहुत लाभकारी होता है। खासतौर पर नारियल तेल और भृंगराज तेल से हफ्ते में दो बार मालिश करने से बालों को पोषण मिलता है और सफेद बालों की गति को धीमा किया जा सकता है। यह उपाय बालों को मजबूत और चमकदार बनाने में भी मदद करता है।

    मानसिक तनाव भी इस समस्या का एक बड़ा कारण है। आजकल की व्यस्त जीवनशैली में लोग पर्याप्त नींद नहीं ले पाते, जिससे शरीर और दिमाग दोनों पर नकारात्मक असर पड़ता है। गुस्सा, चिड़चिड़ापन और लगातार तनाव बालों की सेहत को खराब कर देते हैं। इसलिए जरूरी है कि आप अपनी दिनचर्या में सुधार करें, समय पर सोएं और खुद को मानसिक रूप से शांत रखने की कोशिश करें।

    योग, ध्यान और प्रकृति के बीच समय बिताना भी इस दिशा में काफी मददगार साबित हो सकता है। खुली हवा में टहलना और सकारात्मक सोच अपनाना न केवल मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाता है, बल्कि बालों की सेहत पर भी अच्छा असर डालता है।

    सफेद बालों की समस्या को रोकने के लिए केवल बाहरी उपाय ही नहीं, बल्कि अंदर से संतुलन बनाए रखना जरूरी है। सही खान-पान, संतुलित जीवनशैली और आयुर्वेदिक उपाय अपनाकर आप इस समस्या को काफी हद तक नियंत्रित कर सकते हैं।
  • पाकिस्तानी जासूसी नेटवर्क का खुलासा, दिल्‍ली-हरियाणा रेलवे स्टेशनों पर लगाए थे कैमरे, अब तक 22 आरोपी गिरफ्तार

    पाकिस्तानी जासूसी नेटवर्क का खुलासा, दिल्‍ली-हरियाणा रेलवे स्टेशनों पर लगाए थे कैमरे, अब तक 22 आरोपी गिरफ्तार


    नई दिल्ली। पाकिस्तान से जुड़े जासूसी नेटवर्क के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए पुलिस ने एक और अहम खुलासा किया है। गाजियाबाद पुलिस ने फरीदाबाद से नौशाद अली उर्फ लालू को गिरफ्तार किया है, जो पेट्रोल पंप पर पंचर की दुकान चलाने की आड़ में जासूसी गतिविधियों को अंजाम दे रहा था।

    पुलिस के अनुसार, इस मामले में गिरोह के सरगना सुहेल समेत अब तक कुल 22 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। नौशाद के अलावा मथुरा की एक महिला और एक नाबालिग को भी हिरासत में लिया गया है। पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि उन्हें इस नेटवर्क से सुहेल ने जोड़ा था। जांच में सामने आया है कि यह गिरोह रेलवे स्टेशनों और सुरक्षा बलों के ठिकानों की तस्वीरें और वीडियो बनाकर WhatsApp ग्रुप के जरिए पाकिस्तान भेजता था। इसके बदले उन्हें हर फोटो के लिए 4 से 6 हजार रुपये तक मिलते थे।

    सबसे चौंकाने वाली जानकारी यह सामने आई कि गिरोह ने दिल्ली और हरियाणा के कई रेलवे स्टेशनों पर गुप्त कैमरे लगा रखे थे। इन कैमरों की लाइव स्ट्रीमिंग का एक्सेस पाकिस्तान में बैठे लोगों को दिया गया था, जिससे वे सीधे संवेदनशील स्थानों की निगरानी कर रहे थे।

    50 सोलर कैमरे लगाने की थी साजिश

    पुलिस ने बताया कि यह नेटवर्क देशभर में करीब 50 सोलर कैमरे लगाने की योजना बना रहा था। कुछ स्थानों पर कैमरे पहले ही लगाए जा चुके थे। दिल्ली और सोनीपत में लगाए गए कैमरों को बरामद कर फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है।

    जांच में यह भी पता चला कि नौशाद मूल रूप से बिहार के मुजफ्फरपुर का रहने वाला है और उसे कोलकाता से बुलाकर फरीदाबाद में दुकान खुलवाई गई थी। फिलहाल पुलिस इस जासूसी नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश जारी है कि इसके तार देश और विदेश में किन-किन जगहों से जुड़े हैं।

  • मार्च-अप्रैल में ट्रिप का प्लान? इन जगहों से दूरी ही बेहतर, वरना खराब हो सकता है पूरा मजा!

    मार्च-अप्रैल में ट्रिप का प्लान? इन जगहों से दूरी ही बेहतर, वरना खराब हो सकता है पूरा मजा!


    नई दिल्ली:मार्च और अप्रैल का महीना भारत में घूमने-फिरने के लिहाज से काफी लोकप्रिय माना जाता है। स्कूल-कॉलेज की परीक्षाएं खत्म होने लगती हैं और छुट्टियों का माहौल बन जाता है, ऐसे में ज्यादातर परिवार ट्रिप प्लान करने लगते हैं। लेकिन हर जगह इस मौसम में घूमने के लिए सही नहीं होती। कई डेस्टिनेशन ऐसे हैं जहां इस दौरान या तो भीषण गर्मी पड़ती है या फिर इतनी ज्यादा भीड़ हो जाती है कि आपका पूरा ट्रैवल एक्सपीरियंस खराब हो सकता है।

    सबसे पहले बात करें राजस्थान के रेगिस्तानी इलाकों की, खासकर जैसलमेर, बीकानेर और बाड़मेर जैसे शहरों की। मार्च की शुरुआत से ही यहां तापमान तेजी से बढ़ने लगता है और दिन में पारा 35 डिग्री से ऊपर पहुंच जाता है। तेज धूप और गर्म हवाएं बाहर घूमना मुश्किल बना देती हैं। ऐसे में अगर आप आरामदायक ट्रिप चाहते हैं तो इन जगहों को इस समय टालना ही बेहतर रहेगा।

    दूसरा नाम आता है मसूरी का, जिसे ‘क्वीन ऑफ हिल्स’ कहा जाता है। आमतौर पर यह एक बेहतरीन हिल स्टेशन है, लेकिन मार्च-अप्रैल में यहां टूरिस्ट सीजन पीक पर होता है। स्कूल की छुट्टियों के कारण यहां भारी भीड़ उमड़ती है। मॉल रोड पर चलना भी मुश्किल हो जाता है, होटल महंगे हो जाते हैं और ट्रैफिक जाम आम बात बन जाती है। अगर आप शांति और सुकून की तलाश में हैं, तो इस समय मसूरी जाना निराश कर सकता है।

    तीसरी जगह है आगरा, जो अपने ऐतिहासिक महत्व और ताजमहल के लिए दुनियाभर में मशहूर है। लेकिन मार्च और अप्रैल में यहां की गर्मी परेशान कर सकती है। धूप इतनी तेज होती है कि दिन में घूमना मुश्किल हो जाता है, खासकर अगर आप लंबे समय तक बाहर रहना चाहते हैं। भीड़ और गर्म मौसम का कॉम्बिनेशन ट्रिप का मजा कम कर सकता है।

    इन सबके अलावा एक और बात ध्यान रखने वाली है कि इन महीनों में कई जगहों पर होटल और ट्रांसपोर्ट की कीमतें भी बढ़ जाती हैं, जिससे आपका बजट भी बिगड़ सकता है। इसलिए ट्रिप प्लान करते समय सिर्फ जगह की खूबसूरती नहीं, बल्कि मौसम, भीड़ और सुविधा को भी ध्यान में रखना जरूरी है।

    अगर आप सच में इस समय एक अच्छा ट्रैवल अनुभव चाहते हैं, तो ऐसी जगहों का चुनाव करें जहां मौसम सुहावना हो, भीड़ कम हो और आप आराम से घूम सकें। सही प्लानिंग और सही डेस्टिनेशन का चुनाव ही आपकी छुट्टियों को यादगार बना सकता है।

  • परमाणु हथियारों पर उत्तर कोरिया का अमेरिका को कड़ा संदेश, जाने क्‍या बोले किम जोंग उन ?

    परमाणु हथियारों पर उत्तर कोरिया का अमेरिका को कड़ा संदेश, जाने क्‍या बोले किम जोंग उन ?


    प्योंगयांग। उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन ने संसद सुप्रीम पीपुल्स असेंबली में अपने संबोधन के दौरान देश की सुरक्षा और आर्थिक नीतियों को लेकर बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने साफ कर दिया कि उत्तर कोरिया अब परमाणु हथियार संपन्न राष्ट्र के रूप में स्थायी और अपरिवर्तनीय स्थिति में है और इस दिशा में उसकी नीति और सख्त की जाएगी।

    किम ने अमेरिका और पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन को सीधी चुनौती देते हुए कहा कि उनका देश अपने परमाणु बल को लगातार मजबूत करता रहेगा। उन्होंने दक्षिण कोरिया को उत्तर कोरिया का सबसे बड़ा दुश्मन बताते हुए रक्षा खर्च को वर्ष 2026 के बजट में बढ़ाकर कुल व्यय का 15.8% कर दिया है। राज्य मीडिया केसीएनए के मुताबिक, सोमवार को संसद को संबोधित करते हुए किम ने कहा कि परमाणु शक्ति बनाए रखते हुए विकास करना ही देश की सबसे सही रणनीति है।

    परमाणु हथियारों पर कोई समझौता नहीं

    किम जोंग उन ने परमाणु निरस्त्रीकरण के बदले आर्थिक सहायता या सुरक्षा गारंटी के प्रस्तावों को पूरी तरह खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि परमाणु हथियारों की मौजूदगी ने युद्ध को रोका है और इससे देश को आर्थिक विकास, निर्माण कार्य और लोगों के जीवन स्तर को सुधारने पर ध्यान केंद्रित करने का अवसर मिला है। उन्होंने अमेरिका और उसके सहयोगियों पर कोरियाई प्रायद्वीप के आसपास सामरिक परमाणु संसाधन तैनात कर क्षेत्र में तनाव बढ़ाने का आरोप लगाया। हालांकि किम ने दावा किया कि अब उत्तर कोरिया खुद को सुरक्षित महसूस करता है और जरूरत पड़ने पर जवाब देने में सक्षम है।

    दक्षिण कोरिया को बताया मुख्य दुश्मन

    किम ने दशकों पुरानी शांतिपूर्ण पुनर्मिलन की नीति से हटते हुए दक्षिण कोरिया को अपना सबसे बड़ा शत्रु घोषित किया। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि देश की संप्रभुता से छेड़छाड़ की गई तो बिना किसी हिचकिचाहट के कड़ा जवाब दिया जाएगा। विशेषज्ञों के अनुसार, यह रुख अब उत्तर कोरिया के कानून का हिस्सा बन चुका है, जिससे दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ सकता है।

    आर्थिक विकास के लिए नई योजना

    सुरक्षा के साथ-साथ किम ने नई पंचवर्षीय विकास योजना भी पेश की, जिसमें उद्योगों के आधुनिकीकरण, बिजली और कोयला उत्पादन बढ़ाने तथा देशभर में आवास निर्माण पर जोर दिया गया है। बजट में परमाणु युद्ध क्षमता को और मजबूत करने के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं। इसी दौरान रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का संदेश भी पढ़ा गया, जिसमें दोनों देशों के बीच रणनीतिक सहयोग को और मजबूत करने की बात कही गई। केसीएनए के अनुसार, इस सत्र में संविधान संशोधन को मंजूरी दी गई और नई आर्थिक योजना को लागू करने के लिए कानून पारित किया गया।

    आर्थिक चुनौतियां बरकरार

    अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स के मुताबिक, उत्तर कोरिया अभी भी दुनिया के सबसे गरीब देशों में शामिल है। भारी प्रतिबंधों और संसाधनों की कमी के कारण वहां की बड़ी आबादी सरकारी राशन और अनौपचारिक बाजारों पर निर्भर है।

  • एमपी में मौसम ने ली करवट, उत्तर में छाए बादल, तापमान में गिरावट, 26-29 मार्च को सक्रिय होंगे दो नए सिस्टम

    एमपी में मौसम ने ली करवट, उत्तर में छाए बादल, तापमान में गिरावट, 26-29 मार्च को सक्रिय होंगे दो नए सिस्टम


    भोपाल। मध्य प्रदेश में मौसम लगातार करवट बदल रहा है। सोमवार को प्रदेश के उत्तरी हिस्सों उज्जैन, सागर और ग्वालियर-चंबल संभाग में साइक्लोनिक सर्कुलेशन के कारण बादल छाए रहे, जिससे तापमान में गिरावट दर्ज की गई। ग्वालियर में दिन का पारा 30 डिग्री सेल्सियस से नीचे पहुंच गया, जबकि बाकी क्षेत्रों में गर्मी का असर बना रहा।

    26-29 मार्च के बीच फिर बदलेगा मौसम

    मौसम विभाग के अनुसार, मंगलवार को गर्मी का असर रहेगा, लेकिन 26 और 27 मार्च को प्रदेश में आंधी और बारिश का दौर शुरू हो सकता है। 26 मार्च को उत्तर-पश्चिम भारत में एक नया वेस्टर्न डिस्टरबेंस सक्रिय हो रहा है, जिसका असर ग्वालियर, चंबल, सागर और रीवा संभाग में दो दिन तक दिखाई देगा। इसके बाद 29 मार्च को एक और सिस्टम एक्टिव होने की संभावना है, जिससे अप्रैल की शुरुआत भी आंधी-बारिश के साथ हो सकती है।

    बारिश थमी, अब बढ़ने लगी गर्मी
    पिछले दिनों प्रदेश में लगातार चार दिन तक आंधी, बारिश और ओलावृष्टि हुई। इसके थमते ही तापमान में तेजी आने लगी है। सोमवार को रायसेन सबसे गर्म रहा, जहां तापमान 38 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया।

    इन जिलों में दर्ज हुआ ज्यादा तापमान

    नर्मदापुरम में 37.4 डिग्री, रतलाम में 36.4 डिग्री, गुना और खरगोन में 36.2 डिग्री, खजुराहो में 36 डिग्री, नरसिंहपुर में 35.4 डिग्री, धार में 35.3 डिग्री, खंडवा में 35.1 डिग्री और उमरिया में 35 डिग्री तापमान रिकॉर्ड किया गया।

    बड़े शहरों का हाल

    पांच प्रमुख शहरों में उज्जैन सबसे गर्म रहा, जहां पारा 35 डिग्री दर्ज किया गया। भोपाल में 34.4 डिग्री, इंदौर में 34.9 डिग्री, जबलपुर में 34.2 डिग्री और ग्वालियर में 29.2 डिग्री सेल्सियस तापमान रहा। बता दें कि हाल ही में सक्रिय मजबूत सिस्टम के कारण प्रदेश के 45 जिलों में आंधी-बारिश हुई, जिनमें 17 जिलों में ओले भी गिरे। तेज आंधी से केला, पपीता और गेहूं की फसलों को नुकसान पहुंचा है। धार और खरगोन समेत कई जिलों में ज्यादा असर देखने को मिला।

  • तरबूज खरीदने का सीक्रेट फॉर्मूला हर बार मिलेगा लाल मीठा और पानी से भरपूर फल

    तरबूज खरीदने का सीक्रेट फॉर्मूला हर बार मिलेगा लाल मीठा और पानी से भरपूर फल


    नई दिल्ली । गर्मियों का मौसम आते ही बाजार में तरबूज की भरमार दिखाई देने लगती है और यह फल हर घर की पहली पसंद बन जाता है क्योंकि इसमें भरपूर पानी होता है जो शरीर को ठंडक और ताजगी देता है लेकिन अक्सर लोगों के साथ एक बड़ी समस्या होती है कि बाहर से हरा और अच्छा दिखने वाला तरबूज अंदर से फीका या कच्चा निकल जाता है जिससे पैसे और उम्मीद दोनों खराब हो जाते हैं

    अक्सर लोग दुकान पर तरबूज को कटवाकर चेक करते हैं लेकिन यह तरीका सही नहीं माना जाता क्योंकि इससे फल जल्दी खराब हो सकता है और साफ सफाई की दृष्टि से भी यह सुरक्षित नहीं होता ऐसे में जरूरी है कि आप बिना काटे ही अच्छे तरबूज की पहचान करना सीखें ताकि हर बार मीठा और लाल फल ही घर लाएं

    तरबूज खरीदते समय सबसे पहले उसके नीचे बने पीले धब्बे पर ध्यान देना चाहिए जिसे फील्ड स्पॉट कहा जाता है यह धब्बा इस बात का संकेत होता है कि फल कितने समय तक जमीन पर पड़ा रहा और कितनी अच्छी तरह पका अगर यह धब्बा गहरा पीला या नारंगी रंग का है तो समझ लीजिए कि तरबूज पूरी तरह पका हुआ है और स्वाद में मीठा होगा वहीं अगर यह धब्बा हल्का हरा या सफेद है तो इसका मतलब है कि फल समय से पहले तोड़ा गया है और अंदर से कच्चा निकल सकता है

    इसके अलावा तरबूज को हल्के हाथ से थपथपाकर उसकी आवाज जरूर सुनें अगर उसमें से गूंजदार और खोखली आवाज आती है तो यह संकेत है कि फल अंदर से रसीला और पका हुआ है लेकिन अगर आवाज भारी या दबाव वाली लगे तो वह तरबूज कच्चा हो सकता है यह एक बहुत ही आसान और असरदार तरीका है जिसे अनुभवी लोग हमेशा अपनाते हैं

    वजन भी तरबूज की गुणवत्ता पहचानने का एक अहम तरीका है अगर आप एक जैसे आकार के दो तरबूज उठाते हैं और उनमें से एक ज्यादा भारी लगता है तो वही बेहतर होता है क्योंकि ज्यादा वजन का मतलब है उसमें पानी और रस की मात्रा अधिक है जो उसे मीठा और ताजा बनाता है

    तरबूज के बाहरी रंग और बनावट पर भी ध्यान देना चाहिए हमेशा गहरे हरे रंग और हल्के मैट फिनिश वाले तरबूज ही चुनें बहुत ज्यादा चमकदार तरबूज अक्सर कच्चे होते हैं इसके अलावा अगर तरबूज की सतह पर हल्की भूरी जाली जैसी रेखाएं दिखती हैं तो यह संकेत है कि परागण अच्छे से हुआ है और फल का स्वाद ज्यादा मीठा होगा

    अंत में तरबूज के डंठल को जरूर देखें अगर डंठल सूखा और भूरा है तो इसका मतलब है कि फल बेल पर पूरी तरह पक चुका है लेकिन अगर डंठल हरा है तो समझ लें कि उसे जल्दी तोड़ लिया गया है और उसका स्वाद उतना अच्छा नहीं होगा इन आसान लेकिन बेहद कारगर तरीकों को अपनाकर आप हर बार बाजार से सही तरबूज चुन सकते हैं और गर्मियों में ठंडक और मिठास का पूरा आनंद ले सकते हैं

  • छुट्टियों का असर, Ajmer बना पर्यटकों की पहली पसंद, हर जगह दिखा उत्साह..

    छुट्टियों का असर, Ajmer बना पर्यटकों की पहली पसंद, हर जगह दिखा उत्साह..


    नई दिल्ली:ईद के बाद वीकेंड आते ही Ajmer एक बार फिर पर्यटकों की चहल-पहल से गुलजार नजर आने लगा है, शहर के प्रमुख पर्यटन स्थलों पर न केवल स्थानीय लोग बल्कि आसपास के जिलों से भी बड़ी संख्या में लोग परिवार और दोस्तों के साथ घूमने पहुंच रहे हैं, छुट्टियों के इस अनुकूल माहौल ने लोगों को घरों से बाहर निकलने के लिए प्रेरित किया है जिससे पूरे शहर में एक अलग ही उत्साह देखने को मिल रहा है

    सुबह से ही शहर के पर्यटन स्थलों पर लोगों की आवाजाही शुरू हो जाती है जो देर शाम तक बनी रहती है, खासतौर पर Ana Sagar Lake और Subhash Udyan इन दिनों पर्यटकों की पहली पसंद बने हुए हैं, झील के किनारे बैठकर लोग सुकून के पल बिता रहे हैं तो वहीं बच्चे खेलकूद और मस्ती में व्यस्त नजर आते हैं, शाम के समय इन स्थानों का दृश्य और भी आकर्षक हो जाता है जो हर किसी को अपनी ओर खींच लेता है

    पर्यटकों की बढ़ती संख्या का सकारात्मक असर स्थानीय कारोबार पर भी साफ दिखाई दे रहा है, झील और उद्यान के आसपास लगे खाने-पीने के स्टॉल, खिलौनों की दुकानें और छोटे व्यापारियों के यहां अच्छी खासी भीड़ देखने को मिल रही है, व्यापारियों का कहना है कि ईद के बाद आई इस भीड़ ने उनके कारोबार को नई गति दी है, जिससे लंबे समय बाद बाजारों में रौनक लौटती नजर आ रही है

    इसके साथ ही शहर के होटल और अन्य पर्यटन सेवाओं में भी हलचल बढ़ी है, बाहर से आने वाले पर्यटक यहां रुककर शहर की खूबसूरती और ऐतिहासिक महत्व का आनंद ले रहे हैं, इससे पूरे पर्यटन तंत्र को मजबूती मिल रही है और रोजगार के अवसर भी बढ़ रहे हैं

    स्थानीय लोगों का कहना है कि शहर के बीच स्थित ये पर्यटन स्थल हमेशा से आकर्षण का केंद्र रहे हैं, लेकिन त्योहारों और छुट्टियों के बाद यहां की रौनक कुछ अलग ही होती है, खास बात यह भी है कि Ajmer Sharif Dargah पर जियारत के लिए आने वाले जायरीन भी इन स्थलों का रुख करते हैं, जिससे पर्यटकों की संख्या और बढ़ जाती है

    रमजान के दौरान जहां पर्यटकों की आवाजाही में थोड़ी कमी आई थी, वहीं अब ईद के बाद यह सिलसिला फिर से तेज हो गया है, शहर में हर ओर खुशहाल और जीवंत माहौल नजर आ रहा है, लोग अपने परिवार के साथ समय बिताने के साथ-साथ प्राकृतिक सौंदर्य का भी आनंद ले रहे हैं
     

    अजमेर में पर्यटन गतिविधियों की यह वापसी न केवल शहर की रौनक को बढ़ा रही है बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती दे रही है, आने वाले दिनों में भी यदि ऐसा ही माहौल बना रहा तो पर्यटन क्षेत्र और अधिक गति पकड़ सकता है