Author: bharati

  • हरारे में वैभव सूर्यवंशी का धमाका, 20 रन की तूफानी पारी से तोड़ा महेला जयवर्धने का रिकॉर्ड

    हरारे में वैभव सूर्यवंशी का धमाका, 20 रन की तूफानी पारी से तोड़ा महेला जयवर्धने का रिकॉर्ड


    नई दिल्ली।
    भारतीय युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी ने जिम्बाब्वे के खिलाफ हरारे स्पोर्ट्स क्लब में खेले गए दूसरे टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले में भले ही बड़ी पारी नहीं खेली, लेकिन अपनी विस्फोटक बल्लेबाजी से रिकॉर्ड बुक में जगह बना ली। महज 9 गेंदों में 20 रन की तेजतर्रार पारी खेलकर उन्होंने टी20 अंतरराष्ट्रीय करियर की शुरुआती पांच पारियों में सर्वाधिक स्ट्राइक रेट से रन बनाने वाले बल्लेबाजों की सूची में दूसरा स्थान हासिल कर लिया।

    9 गेंदों में 20 रन, गेंदबाजों पर बोला हमला

    वैभव ने क्रीज पर उतरते ही आक्रामक तेवर दिखाए। उन्होंने 9 गेंदों का सामना करते हुए 3 चौके और 1 छक्का लगाया तथा 222.22 की स्ट्राइक रेट से 20 रन बनाए। हालांकि, बड़ी पारी की ओर बढ़ते हुए पुल शॉट खेलने के प्रयास में वह बाउंड्री पर कैच आउट हो गए, लेकिन उनकी छोटी पारी भी रिकॉर्ड बनाने के लिए काफी साबित हुई।

    महेला जयवर्धने को छोड़ा पीछे

    इस पारी के बाद वैभव सूर्यवंशी ने टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की शुरुआती पांच पारियों में सर्वाधिक स्ट्राइक रेट के मामले में श्रीलंका के पूर्व कप्तान महेला जयवर्धने को पीछे छोड़ दिया। वैभव ने अपने पहले पांच टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में 112 रन 211.32 की स्ट्राइक रेट से बनाए हैं, जिसमें एक अर्धशतक भी शामिल है। वहीं, महेला जयवर्धने ने अपने शुरुआती पांच टी20 अंतरराष्ट्रीय मैचों में 201.82 की स्ट्राइक रेट से रन बनाए थे।

    युवराज सिंह अब भी नंबर-1

    इस खास सूची में भारत के पूर्व स्टार ऑलराउंडर युवराज सिंह अब भी शीर्ष पर बने हुए हैं। युवराज ने अपने शुरुआती पांच टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में 235.09 की शानदार स्ट्राइक रेट से बल्लेबाजी की थी। अब तक कोई भी बल्लेबाज उनके इस रिकॉर्ड को नहीं तोड़ सका है।

    सबसे अधिक स्ट्राइक रेट (पहली 5 टी20 अंतरराष्ट्रीय पारियां):

    • युवराज सिंह (भारत) – 235.09
    • वैभव सूर्यवंशी (भारत) – 211.32
    • महेला जयवर्धने (श्रीलंका) – 201.82
    • मोहम्मद अशरफुल (बांग्लादेश) – 201.67
    • रिचर्ड लेवी (दक्षिण अफ्रीका) – 200.00

    निडर बल्लेबाजी से बढ़ा भरोसा

    कम उम्र में वैभव सूर्यवंशी का बेखौफ अंदाज भारतीय क्रिकेट के लिए उम्मीद की नई किरण बनकर उभरा है। वह पहली ही गेंद से बड़े शॉट खेलने में विश्वास रखते हैं और विपक्षी गेंदबाजी आक्रमण पर दबाव बनाने की क्षमता रखते हैं। जिम्बाब्वे के खिलाफ दूसरे टी20 में उनकी पारी भले ही लंबी नहीं चली, लेकिन उनकी आक्रामक बल्लेबाजी और लगातार ऊंची स्ट्राइक रेट यह संकेत देती है कि आने वाले समय में वह भारतीय टी20 टीम के अहम मैच विजेता खिलाड़ियों में शामिल हो सकते हैं।

  • शिक्षा मंत्रालय की कमान अब प्रह्लाद जोशी के हाथ, केंद्र सरकार ने सौंपी अतिरिक्त जिम्मेदारी

    शिक्षा मंत्रालय की कमान अब प्रह्लाद जोशी के हाथ, केंद्र सरकार ने सौंपी अतिरिक्त जिम्मेदारी


    नई दिल्ली।
    केंद्र सरकार ने वरिष्ठ भाजपा नेता और केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय की अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी है। वर्तमान में उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय का कार्यभार संभाल रहे जोशी अब शिक्षा मंत्रालय का दायित्व भी निभाएंगे। लंबे राजनीतिक अनुभव और संगठनात्मक कार्यशैली के कारण उन्हें सरकार के भरोसेमंद नेताओं में गिना जाता है।

    कर्नाटक के धारवाड़ लोकसभा क्षेत्र से लगातार पांच बार सांसद चुने जा चुके प्रह्लाद जोशी भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में शामिल हैं। 27 नवंबर 1962 को कर्नाटक के विजयपुर में जन्मे जोशी वर्ष 2004 से धारवाड़ का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। उनके पिता वेंकटेश जोशी भारतीय रेलवे में कार्यरत थे और उनका परिवार मध्यमवर्गीय पृष्ठभूमि से जुड़ा रहा है। उनके परिवार में पत्नी और तीन बेटियां हैं।

    रेलवे स्कूल से विश्वविद्यालय तक की पढ़ाई

    प्रह्लाद जोशी की प्रारंभिक शिक्षा रेलवे स्कूल और न्यू इंग्लिश स्कूल, हुबली में हुई। इसके बाद उन्होंने कर्नाटक विश्वविद्यालय के केएस आर्ट्स कॉलेज, धारवाड़ से स्नातक (बीए) की डिग्री प्राप्त की। उच्च शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी शुरू कर दी।

    आरएसएस से शुरू हुआ राजनीतिक सफर

    जोशी का सार्वजनिक जीवन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़कर शुरू हुआ। बाद में उन्होंने भारतीय जनता पार्टी में सक्रिय भूमिका निभाई और संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने का काम किया। 1990 के दशक में हुबली ईदगाह मैदान पर तिरंगा फहराने के आंदोलन और ‘कश्मीर बचाओ’ अभियान के दौरान उनकी पहचान व्यापक स्तर पर बनी।

    संगठन में निभाईं कई अहम जिम्मेदारियां

    भाजपा संगठन में प्रह्लाद जोशी ने विभिन्न पदों पर कार्य किया। वर्ष 1995 से 1998 तक वे भाजपा के धारवाड़ जिला अध्यक्ष रहे। इसके बाद 1998 से 2003 तक जिला महासचिव के रूप में जिम्मेदारी संभाली। आगे चलकर वे कर्नाटक भाजपा के महासचिव बने और वर्ष 2013 से 2016-17 तक प्रदेश अध्यक्ष के रूप में पार्टी संगठन को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

    लगातार पांचवीं बार बने सांसद

    प्रह्लाद जोशी ने वर्ष 2004 में पहली बार धारवाड़ से लोकसभा चुनाव जीतकर संसद में प्रवेश किया। इसके बाद 2009, 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों में लगातार जीत दर्ज करते हुए पांचवीं बार सांसद बने। वर्ष 2019 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूसरी सरकार में उन्हें संसदीय कार्य, कोयला और खान मंत्री बनाया गया। वहीं, मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल में उन्हें उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण तथा नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी गई। अब शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार मिलने के साथ उनकी जिम्मेदारियां और बढ़ गई हैं।

  • आत्मनिर्भर भारत की बड़ी छलांग पहली हाइड्रोजन ट्रेन का सफल ट्रायल स्वच्छ रेल परिवहन की दिशा में ऐतिहासिक कदम

    आत्मनिर्भर भारत की बड़ी छलांग पहली हाइड्रोजन ट्रेन का सफल ट्रायल स्वच्छ रेल परिवहन की दिशा में ऐतिहासिक कदम


    नई दिल्ली। भारतीय रेलवे ने स्वच्छ और टिकाऊ परिवहन की दिशा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए देश की पहली स्वदेशी हाइड्रोजन ट्रेन का सफल परीक्षण पूरा कर लिया है। यह 10 कोच वाली आधुनिक ट्रेन अब तक 1200 किलोमीटर से अधिक की दूरी सफलतापूर्वक तय कर चुकी है और इस दौरान 3200 लीटर से अधिक डीजल की बचत हुई है। सबसे बड़ी बात यह है कि इस ट्रेन से संचालन के दौरान केवल जलवाष्प निकलती है जिससे यह पूरी तरह पर्यावरण अनुकूल परिवहन प्रणाली के रूप में सामने आई है।

    रेल मंत्रालय के अनुसार इस ट्रेन में बिजली पैदा करने के लिए हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के बीच रासायनिक प्रक्रिया का उपयोग किया जाता है। इस प्रक्रिया से उत्पन्न ऊर्जा ट्रेन को चलाती है और उप उत्पाद के रूप में केवल जलवाष्प निकलती है। धुआं और कार्बन उत्सर्जन नहीं होने के कारण इसे वर्तमान समय की सबसे स्वच्छ रेल प्रौद्योगिकियों में शामिल माना जा रहा है। इससे न केवल प्रदूषण कम होगा बल्कि भविष्य में हरित ऊर्जा आधारित परिवहन को भी नई गति मिलेगी।

    इस स्वदेशी हाइड्रोजन ट्रेन में दो हाइड्रोजन ड्राइविंग पावर कार लगाई गई हैं जो कुल 2400 किलोवाट की शक्ति प्रदान करती हैं। ट्रेन में लिथियम आयरन फॉस्फेट बैटरियों का भी उपयोग किया गया है जो ऊर्जा प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाती हैं। इसके साथ लगभग 3000 किलोग्राम हाइड्रोजन संग्रहित करने की क्षमता विकसित की गई है। हाइड्रोजन को उच्च दबाव पर सुरक्षित रखा जाता है और नियंत्रित तरीके से ऊर्जा उत्पादन के लिए उपयोग में लाया जाता है।

    सुरक्षा के लिहाज से भी इस ट्रेन में अत्याधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया गया है। गैस रिसाव अत्यधिक तापमान आग और धुएं का तुरंत पता लगाने वाली कई स्वतंत्र सुरक्षा प्रणालियां इसमें लगाई गई हैं। इसके अलावा ऑटोमैटिक शट ऑफ सिस्टम निरंतर वेंटिलेशन और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानकों के अनुरूप सभी आवश्यक परीक्षण भी पूरे किए गए हैं। इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य यात्रियों और परिचालन दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

    रेल मंत्रालय ने बताया कि जींद और सोनीपत के बीच सफल परीक्षण के बाद अब इस ट्रेन का ट्रायल दिल्ली मार्ग पर भी शुरू किया जाएगा। यदि आगामी परीक्षण भी सफल रहते हैं तो भविष्य में इस तकनीक का विस्तार देश के अन्य रेल मार्गों पर भी किया जा सकता है। इससे डीजल पर निर्भरता घटेगी और रेलवे के कार्बन उत्सर्जन को कम करने में महत्वपूर्ण मदद मिलेगी।

    केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस उपलब्धि को आत्मनिर्भर भारत अभियान की बड़ी सफलता बताया। उन्होंने कहा कि इस स्वदेशी हाइड्रोजन तकनीक के बौद्धिक संपदा अधिकार भारत के पास सुरक्षित हैं जिससे भविष्य में इस तकनीक का निर्यात भी किया जा सकेगा। उनके अनुसार हाइड्रोजन आने वाले समय का प्रमुख स्वच्छ ईंधन बनने जा रहा है और भारतीय रेलवे इस दिशा में लगातार नवाचार कर रहा है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि हाइड्रोजन ट्रेन केवल पर्यावरण संरक्षण का माध्यम नहीं बल्कि ऊर्जा सुरक्षा और आधुनिक परिवहन व्यवस्था की दिशा में भी बड़ा कदम है। इससे जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम होगी और स्वदेशी तकनीक को वैश्विक पहचान मिलेगी। भारत की यह उपलब्धि न केवल रेलवे के लिए बल्कि हरित ऊर्जा आधारित भविष्य की ओर बढ़ते देश के संकल्प का भी मजबूत प्रतीक बनकर उभरी है।

  • राष्ट्रीय सुरक्षा पर अमेरिका सख्त विदेशी हस्तक्षेप और सीमापार दमन रोकने के लिए नया कानून लाने की पहल

    राष्ट्रीय सुरक्षा पर अमेरिका सख्त विदेशी हस्तक्षेप और सीमापार दमन रोकने के लिए नया कानून लाने की पहल


    अमेरिका  अमेरिका में राष्ट्रीय सुरक्षा और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा को लेकर एक महत्वपूर्ण पहल सामने आई है। अमेरिकी सीनेट में रिपब्लिकन और डेमोक्रेट दोनों दलों के सांसदों ने मिलकर एक नया विधेयक पेश किया है जिसका उद्देश्य विदेशी सरकारों या उनके एजेंटों द्वारा अमेरिकी धरती पर कथित सीमापार दमन की घटनाओं पर सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करना है। स्टॉप ट्रांसनेशनल रिप्रेशन एक्ट नामक यह प्रस्ताव पहली बार ऐसे मामलों की स्पष्ट संघीय कानूनी परिभाषा तय करने और दोषियों के खिलाफ कठोर दंड का प्रावधान करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

    यह विधेयक कैलिफोर्निया के डेमोक्रेट सीनेटर एडम शिफ और यूटा के रिपब्लिकन सीनेटर जॉन कर्टिस ने संयुक्त रूप से पेश किया है। दोनों सांसदों का कहना है कि हाल के वर्षों में कई ऐसे मामले सामने आए हैं जिनमें विदेशी सरकारों पर अमेरिका में रह रहे असंतुष्टों मानवाधिकार कार्यकर्ताओं पत्रकारों और अन्य लोगों को डराने धमकाने उनकी निगरानी करने या उन पर हमले की साजिश रचने के आरोप लगे हैं। उनका मानना है कि मौजूदा कानूनी ढांचे को और मजबूत बनाने की आवश्यकता है ताकि ऐसी गतिविधियों पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।

    प्रस्तावित कानून के तहत यदि किसी व्यक्ति को सीमापार दमन से जुड़े संघीय अपराध में दोषी पाया जाता है तो उसे अधिकतम 10 वर्ष की अतिरिक्त कैद और 100000 अमेरिकी डॉलर तक के अतिरिक्त जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है। इसके साथ ही पहली बार ट्रांसनेशनल रिप्रेशन को संघीय आपराधिक कानून में स्पष्ट रूप से परिभाषित करने का प्रस्ताव रखा गया है ताकि जांच और अभियोजन की प्रक्रिया अधिक प्रभावी और एकरूप हो सके।

    विधेयक के अनुसार ऐसे मामलों में अभियोजन की निगरानी अमेरिकी न्याय विभाग के राष्ट्रीय सुरक्षा प्रभाग के अधीन होगी जबकि आपराधिक जांच की जिम्मेदारी एफबीआई को सौंपी जाएगी। इसके अलावा कांग्रेस को हर वर्ष सीमापार दमन से जुड़े मामलों पर विस्तृत रिपोर्ट और ब्रीफिंग देना अनिवार्य होगा। संघीय एजेंसियों को यह भी निर्देश दिया जाएगा कि वे मौजूदा कानूनी अधिकारों की समीक्षा करें और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के माध्यम से होने वाले संभावित सीमापार दमन से निपटने के लिए व्यापक रणनीति तैयार करें।

    सीनेटर एडम शिफ ने कहा कि अमेरिका की धरती पर किसी भी विदेशी सरकार द्वारा असंतुष्टों या आलोचकों को डराने धमकाने या चुप कराने की कोशिश स्वीकार नहीं की जा सकती। उनके अनुसार यह केवल व्यक्तिगत सुरक्षा का मामला नहीं बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा का भी प्रश्न है। वहीं सीनेटर जॉन कर्टिस ने कहा कि चाहे कोई भी विदेशी सरकार हो उसे अमेरिका की संप्रभुता और नागरिकों की स्वतंत्रता को चुनौती देने की अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने इस विधेयक को राष्ट्रीय हित और कानून के शासन को मजबूत करने वाला महत्वपूर्ण कदम बताया।

    प्रस्तावित कानून में सीमापार दमन की परिभाषा के अंतर्गत किसी विदेशी सरकार उसके एजेंट या उसके सहयोगियों द्वारा अमेरिका या अमेरिकी नागरिकों के खिलाफ की जाने वाली धमकी उत्पीड़न प्रतिशोध शारीरिक नुकसान अपहरण या हत्या जैसी गतिविधियों को शामिल किया गया है। साथ ही ऐसे प्रयास भी इस दायरे में आएंगे जिनका उद्देश्य किसी व्यक्ति को अमेरिकी संविधान द्वारा प्रदत्त अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता जैसे मौलिक अधिकारों का उपयोग करने से रोकना हो।

    हाल के वर्षों में इस तरह के मामलों को लेकर अमेरिका में चिंता बढ़ी है और कानून प्रवर्तन एजेंसियां कई कथित मामलों की जांच कर चुकी हैं। इसी पृष्ठभूमि में लाया गया यह विधेयक राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने और अमेरिका में रहने वाले लोगों के अधिकारों की रक्षा के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

  • कॉकरोच पार्टी ने NEET आंदोलन किया खत्म, कहा-प्रदर्शनकारी अब अपने घर लौट जाएं

    कॉकरोच पार्टी ने NEET आंदोलन किया खत्म, कहा-प्रदर्शनकारी अब अपने घर लौट जाएं


    नई दिल्ली। नई दिल्ली में कई दिनों से चल रहे आंदोलन को लेकर शनिवार को महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया जब कॉकरोच जनता पार्टी ने केंद्र सरकार के साथ हुई वार्ता के बाद अपना आंदोलन समाप्त करने की घोषणा कर दी। संगठन ने कहा कि सरकार के साथ कई दौर की बातचीत के बाद उनकी प्रमुख मांगों पर सकारात्मक सहमति बनी है। इसी भरोसे के आधार पर जंतर मंतर पर चल रहा प्रदर्शन समाप्त करने का फैसला लिया गया है।

    पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका ने बताया कि सरकारी प्रतिनिधिमंडल के साथ तीन चरणों में विस्तृत बातचीत हुई। उन्होंने कहा कि संगठन की तीन प्रमुख मांगें थीं जिनमें तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा प्रदर्शनकारियों और आंदोलन के आयोजकों के खिलाफ दर्ज मामलों और एफआईआर को वापस लेना तथा भविष्य में आंदोलन से जुड़े लोगों के खिलाफ किसी भी प्रकार की नई कानूनी कार्रवाई नहीं किए जाने की गारंटी शामिल थी। उनके अनुसार सरकार ने इन मांगों पर सकारात्मक रुख अपनाया है।

    संगठन ने यह भी दावा किया कि उसकी एक अन्य प्रमुख मांग उन परिवारों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने से जुड़ी थी जिन्होंने कथित रूप से नीट विवाद के दौरान अपने परिजनों को खोया। पार्टी का कहना है कि इस विषय पर भी सरकार के साथ चर्चा हुई और संबंधित मुद्दों पर विचार का आश्वासन मिला। हालांकि इस संबंध में सरकार की ओर से आधिकारिक घोषणा का इंतजार किया जा रहा है।

    कॉकरोच जनता पार्टी के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने बताया कि सरकार ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों की जानकारी साझा करने का भरोसा दिया है। उनके अनुसार दिल्ली सहित विभिन्न राज्यों में दर्ज एफआईआर की प्रतियां अगले कुछ दिनों में संगठन को उपलब्ध कराई जाएंगी। उन्होंने कहा कि सरकार ने यह भी आश्वासन दिया है कि तय प्रक्रिया के तहत इन मामलों को वापस लेने की दिशा में कार्रवाई की जाएगी।

    सौरव दास ने कहा कि संगठन सरकार की नीयत पर विश्वास जताते हुए आंदोलन समाप्त कर रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह निर्णय इस समझ के साथ लिया गया है कि सरकार निर्धारित समय सीमा के भीतर अपने आश्वासनों को पूरा करेगी। यदि तय समय में आवश्यक कार्रवाई होती है तो यह संवाद और लोकतांत्रिक प्रक्रिया की सफलता मानी जाएगी।

    उन्होंने यह भी कहा कि आंदोलन का उद्देश्य केवल अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाना था और अब जब सरकार ने बातचीत के जरिए समाधान का रास्ता अपनाया है तो संगठन भी सकारात्मक रुख अपनाते हुए धरना समाप्त कर रहा है। पार्टी के नेताओं ने उम्मीद जताई कि आने वाले दिनों में सभी लंबित मुद्दों पर औपचारिक कार्रवाई पूरी हो जाएगी और आंदोलन से जुड़े लोगों को राहत मिलेगी।

    इस पूरे घटनाक्रम के बाद जंतर मंतर पर कई दिनों से चल रहा प्रदर्शन समाप्त हो गया। संगठन के कार्यकर्ताओं ने आंदोलन वापस लेने की घोषणा का स्वागत किया और कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में बातचीत के जरिए समाधान निकलना सबसे बेहतर रास्ता है। अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि सरकार अपने दिए गए आश्वासनों पर तय समय के भीतर क्या कार्रवाई करती है।

  • भारत रोमानिया संबंधों को नई मजबूती राष्ट्रपति मुर्मु ने बुखारेस्ट में भारतीय समुदाय की सराहना की विकसित भारत 2047 में योगदान का किया आह्वान

    भारत रोमानिया संबंधों को नई मजबूती राष्ट्रपति मुर्मु ने बुखारेस्ट में भारतीय समुदाय की सराहना की विकसित भारत 2047 में योगदान का किया आह्वान


    नई दिल्ली। भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु अपने तीन देशों के विदेश दौरे के अंतिम चरण में रोमानिया की राजधानी बुखारेस्ट पहुंचीं जहां उन्होंने भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए भारत और रोमानिया के संबंधों को नई ऊर्जा देने वाला संदेश दिया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के रिश्तों की सबसे मजबूत नींव सरकारों के बीच सहयोग से अधिक लोगों के बीच आत्मीय संबंध हैं। राष्ट्रपति ने प्रवासी भारतीयों की सराहना करते हुए कहा कि वे अपनी मेहनत प्रतिभा और समर्पण से न केवल रोमानिया के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं बल्कि भारत की संस्कृति और मूल्यों को भी पूरे सम्मान के साथ आगे बढ़ा रहे हैं।

    राष्ट्रपति मुर्मु ने अपने संबोधन में कहा कि बुखारेस्ट पहुंचने पर जिस तरह भारतीय संस्कृति की झलक देखने को मिली उससे ऐसा महसूस हुआ मानो वह किसी विदेशी देश में नहीं बल्कि भारत के ही किसी सांस्कृतिक कार्यक्रम में मौजूद हों। उन्होंने विशेष रूप से उन बच्चों और युवाओं की प्रशंसा की जिन्होंने भारतीय पारंपरिक परिधान और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से अपनी जड़ों से जुड़े रहने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि यह भारतीय समुदाय की एकजुटता और सांस्कृतिक चेतना का जीवंत उदाहरण है।

    उन्होंने कहा कि आज भारतीय आईटी इंजीनियर वैज्ञानिक शोधकर्ता स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े विशेषज्ञ और विद्यार्थी बड़ी संख्या में रोमानिया में अपनी पहचान बना रहे हैं। उनका ज्ञान अनुभव और पेशेवर योगदान रोमानिया की अर्थव्यवस्था और समाज को नई दिशा देने में मदद कर रहा है। साथ ही उनकी उपलब्धियां भारत की सकारात्मक छवि को भी वैश्विक स्तर पर मजबूत कर रही हैं। राष्ट्रपति ने कहा कि विदेशों में रहने वाले भारतीय वास्तव में भारत के सांस्कृतिक और सामाजिक राजदूत हैं जो दोनों देशों के बीच विश्वास और सहयोग को और मजबूत बनाते हैं।

    राष्ट्रपति मुर्मु ने विकसित भारत 2047 के राष्ट्रीय संकल्प का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत एक समृद्ध आधुनिक आत्मनिर्भर और समावेशी राष्ट्र बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने प्रवासी भारतीयों से इस अभियान में सक्रिय भागीदारी बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि चाहे भारतीय दुनिया के किसी भी हिस्से में रहते हों उनका अनुभव नवाचार और उपलब्धियां भारत की प्रगति को नई गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि भारतीय समुदाय भविष्य में भी भारत और रोमानिया के संबंधों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में अहम योगदान देगा।

    इस अवसर पर राष्ट्रपति ने रोमानिया की सरकार और वहां की जनता का भी आभार व्यक्त किया जिन्होंने भारतीय समुदाय का खुले दिल से स्वागत किया और उन्हें सुरक्षित तथा सम्मानजनक वातावरण उपलब्ध कराया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच बढ़ता सहयोग आने वाले वर्षों में व्यापार शिक्षा विज्ञान प्रौद्योगिकी स्वास्थ्य और सांस्कृतिक आदान प्रदान जैसे अनेक क्षेत्रों में नए अवसर पैदा करेगा।

    इससे पहले बुखारेस्ट यूनिवर्सिटी ऑफ इकोनॉमिक स्टडीज ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को मानद डॉक्टरेट की उपाधि से सम्मानित किया। इस अवसर पर उन्होंने भारत और रोमानिया के शैक्षणिक संस्थानों के बीच संयुक्त शोध छात्र और शिक्षक आदान प्रदान तथा नवाचार के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आज जब दुनिया कृत्रिम बुद्धिमत्ता डिजिटल तकनीक और विज्ञान के नए युग में प्रवेश कर रही है तब शिक्षा संस्थानों की जिम्मेदारी केवल ज्ञान देना नहीं बल्कि नैतिकता संवेदनशीलता और मानवीय मूल्यों को भी आगे बढ़ाना है। उनके अनुसार शिक्षा ही एक न्यायपूर्ण समावेशी और प्रगतिशील समाज की सबसे मजबूत आधारशिला है।

  • झांसी में महिला प्रधान के बेटे की हत्‍या मामले में खुलासा, पिस्टल से हुई थी हत्या, सिर में फंसी मिली गोली

    झांसी में महिला प्रधान के बेटे की हत्‍या मामले में खुलासा, पिस्टल से हुई थी हत्या, सिर में फंसी मिली गोली

    झांसी। झांसी में महिला प्रधान के बेटे और एलएलबी छात्र संजय सिंह उर्फ संजू (33) की हत्या पिस्टल से किए जाने की पुष्टि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हुई है। शुक्रवार शाम डॉक्टरों के पैनल ने पोस्टमार्टम के दौरान संजय के सिर के भीतर फंसी गोली बरामद की। गोली सिर के पिछले हिस्से में मारी गई थी, जिससे गंभीर चोट और अत्यधिक रक्तस्राव के कारण उसकी मौत हो गई। अब तक पुलिस देशी तमंचे से हत्या की आशंका जता रही थी, लेकिन पोस्टमार्टम के बाद स्पष्ट हो गया कि हमलावर ने पिस्टल का इस्तेमाल किया था।

    रेस्टोरेंट में दोस्तों के साथ खाना खाते समय मारी गोली
    गुरुवार रात संजय अपने चार दोस्तों के साथ इलाइट चौराहे से करीब 300 मीटर दूर स्थित द मेड किचन रेस्टोरेंट में भोजन करने गया था। इसी दौरान एक युवक अंदर पहुंचा और संजय के सिर पर सटाकर गोली मार दी। वारदात के बाद आरोपी मौके से फरार हो गया। मामले में मृतक के भाई सर्वेश सिंह की शिकायत पर नवाबाद थाने में अज्ञात आरोपियों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया है।

    पेशेवर शूटर होने का शक
    पुलिस का मानना है कि वारदात को जिस तरीके से अंजाम दिया गया, उससे पेशेवर शूटर की भूमिका से इनकार नहीं किया जा सकता। प्रत्यक्षदर्शियों और सीसीटीवी फुटेज के अनुसार आरोपी सीधे संजय की टेबल तक पहुंचा, बेहद करीब से एक गोली चलाई और पिस्टल लहराते हुए बाहर निकल गया। पार्किंग में मौजूद गार्ड ने उसे पकड़ने की कोशिश की, लेकिन वह धक्का देकर बाहर खड़ी बिना नंबर की बाइक पर साथी के साथ फरार हो गया।

    महज छह मिनट में दिया वारदात को अंजाम
    सीसीटीवी फुटेज के मुताबिक आरोपी रात 9:23 बजे रेस्टोरेंट में दाखिल हुआ और 9:29 बजे हत्या कर बाहर निकल गया। पुलिस के अनुसार दोनों आरोपी बिहारी तिराहा होते हुए रक्सा टोल की दिशा में भागे। एसओजी और सर्विलांस टीम ने घटनास्थल से लेकर रक्सा टोल तक लगे 100 से अधिक सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली है और कुछ अहम सुराग हाथ लगे हैं।

    छह साल से झांसी में रह रहा था संजय
    संजय सिंह मूल रूप से गरौठा क्षेत्र के हैवतपुरा गांव का रहने वाला था। उसकी मां रामदेवी गांव की प्रधान हैं। परिवार में बड़ा भाई सर्वेश और बहन रचना हैं, जिनकी शादी हो चुकी है। संजय अविवाहित था और पिछले छह वर्षों से झांसी में रिश्तेदार के यहां रहकर अधिवक्ता दशरथ सिंह के पास मुंशी का काम करता था।

    दतिया से लौटने के बाद पहुंचे थे रेस्टोरेंट
    संजय के दोस्त शिवम ने बताया कि गुरुवार शाम वह अधिवक्ता दशरथ सिंह और अन्य साथियों के साथ दतिया स्थित पीतांबरा पीठ के दर्शन कर लौटे थे। वापस आने के बाद सभी लोग द मेड किचन रेस्टोरेंट में खाना खाने पहुंचे, जहां संजय ने अपने मित्र धर्मेंद्र को भी बुला लिया। भोजन समाप्त होने के तुरंत बाद एक युवक आया और संजय को गोली मारकर फरार हो गया।

    परिजनों ने रंजिश से किया इनकार, तीन पहलुओं पर जांच
    मृतक के भाई सर्वेश सिंह ने पुलिस को बताया कि परिवार की किसी से कोई दुश्मनी नहीं है और प्रधानी को लेकर भी कोई विवाद नहीं था। हालांकि उन्होंने बताया कि संजय जमीन के कारोबार से भी जुड़ा हुआ था।

    फिलहाल पुलिस जमीन विवाद, लव एंगल और पुरानी रंजिश समेत तीन प्रमुख बिंदुओं पर जांच कर रही है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि संजय गांव कम क्यों जाता था और क्या उसके पीछे कोई पुराना विवाद था।

  • झांसी में बड़ा सड़क हादसा, महिला को बचाने के प्रयास में ट्रक पेड़ और खंभे से टकराया

    झांसी में बड़ा सड़क हादसा, महिला को बचाने के प्रयास में ट्रक पेड़ और खंभे से टकराया

    झांसी। झांसी के प्रेमनगर थाना क्षेत्र स्थित रेलवे कॉलोनी में शुक्रवार रात एक तेज रफ्तार ट्रक अनियंत्रित होकर पहले पेड़ और फिर बिजली के खंभे से टकरा गया। हादसे में ट्रक चालक केबिन में बुरी तरह फंस गया। करीब एक घंटे तक चले रेस्क्यू अभियान के बाद पुलिस और स्थानीय लोगों ने उसे बाहर निकालकर गंभीर हालत में जिला अस्पताल पहुंचाया।

    घायल चालक की पहचान राजस्थान के धौलपुर निवासी पवन के रूप में हुई है। वह ट्रक (RJ 11 GD 5122) से आगरा से रेलवे कोच नवीनीकरण फैक्ट्री (आरसीएफ) में माल लेकर आया था। शुक्रवार सुबह माल उतारने के बाद रात में नो-एंट्री हटने पर वह हेल्पर के साथ आगरा लौट रहा था।

    प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, केंद्रीय विद्यालय नंबर-3 से सीपरी बाजार जाने वाले मार्ग पर जीआरपी रिजर्व लाइन के पास अचानक एक स्कूटी सवार महिला ट्रक के सामने आ गई। उसे बचाने के प्रयास में चालक ने ट्रक मोड़ा, जिससे वाहन का संतुलन बिगड़ गया और वह सड़क किनारे लगे पेड़ तथा बिजली के खंभे से जा टकराया।

    टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि चालक पवन स्टेयरिंग और सीट के बीच फंस गया। उसका बायां पैर केबिन और बोनट के बीच दब गया, जिससे पैर में कई जगह फ्रैक्चर हो गए। राहगीरों ने उसे निकालने की कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिली।

    सूचना मिलने पर प्रेमनगर थाना पुलिस और 108 एम्बुलेंस मौके पर पहुंची। पहले एम्बुलेंस की रस्सी से ट्रक को खींचने का प्रयास किया गया, लेकिन चालक को बाहर नहीं निकाला जा सका। इसके बाद ट्रैक्टर मंगवाकर ट्रक के अगले हिस्से को खींचा गया, जिससे केबिन में पर्याप्त जगह बनी और करीब एक घंटे की मशक्कत के बाद चालक को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।

    रेस्क्यू के दौरान चालक दर्द से तड़पता रहा और लगातार मदद की गुहार लगाता रहा। पुलिस और स्थानीय लोगों के संयुक्त प्रयास से उसे बाहर निकालकर तत्काल जिला अस्पताल भेजा गया, जहां उसका इलाज जारी है।

  • झांसी रेलवे स्टेशन के फूड प्लाजा में लगी आग, शॉर्ट सर्किट की आशंका, समय रहते टला बड़ा हादसा

    झांसी रेलवे स्टेशन के फूड प्लाजा में लगी आग, शॉर्ट सर्किट की आशंका, समय रहते टला बड़ा हादसा


    झांसी। झांसी रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर-1 स्थित फूड प्लाजा के किचन में शनिवार सुबह अचानक आग लगने से अफरा-तफरी मच गई। धुआं और आग की लपटें उठती देख कर्मचारियों ने तुरंत अग्निशमन यंत्रों से आग बुझाने का प्रयास किया, लेकिन आग पर काबू नहीं पाने के बाद फायर ब्रिगेड को सूचना दी गई।

    सूचना मिलते ही दमकल विभाग की टीम मौके पर पहुंची और काफी मशक्कत के बाद आग पर पूरी तरह नियंत्रण पा लिया। समय रहते आग बुझा दिए जाने से बड़ा हादसा टल गया। घटना के दौरान कुछ समय के लिए फूड प्लाजा और आसपास के क्षेत्र में अफरा-तफरी का माहौल रहा।

    हालांकि, इस घटना में किसी के घायल होने या जनहानि की सूचना नहीं है। अग्निशमन अधिकारी राजकिशोर राय ने बताया कि शुरुआती जांच में आग लगने की वजह शॉर्ट सर्किट प्रतीत हो रही है। वहीं, रेलवे प्रशासन भी पूरे मामले की जांच कर रहा है, ताकि आग लगने के सटीक कारणों का पता लगाया जा सके।

  • सिहोरा में सड़क की बदहाली बनी बच्चों की मुसीबत कीचड़ में फंसी स्कूल बस ढाई घंटे बाद ट्रैक्टर से निकली

    सिहोरा में सड़क की बदहाली बनी बच्चों की मुसीबत कीचड़ में फंसी स्कूल बस ढाई घंटे बाद ट्रैक्टर से निकली


    जबलपुर । जबलपुर जिले के सिहोरा की पालीवाल कॉलोनी में शनिवार सुबह सड़क की बदहाल स्थिति एक बार फिर सामने आ गई। बच्चों को लेने पहुंची मेरिडियन स्कूल की बस कीचड़ और दलदल में इस तरह फंस गई कि उसे निकालने में करीब ढाई घंटे का समय लग गया। आखिरकार ट्रैक्टर की मदद से बस को बाहर निकाला जा सका। इस घटना ने न केवल कॉलोनी की खराब सड़क व्यवस्था की पोल खोल दी बल्कि बच्चों की सुरक्षा और आवागमन को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    जानकारी के अनुसार खितौला नगर पालिका के वार्ड क्रमांक 12 स्थित पालीवाल कॉलोनी में शनिवार सुबह लगभग नौ बजे मेरिडियन स्कूल की बस बच्चों को लेने पहुंची थी। कॉलोनी में सड़क का निर्माण नहीं होने और लगातार बारिश के कारण रास्ता पूरी तरह दलदल में बदल चुका था। जैसे ही बस अंदर पहुंची उसका पहिया कीचड़ में धंस गया और वाहन वहीं फंस गया। चालक ने काफी प्रयास किया लेकिन बस बाहर नहीं निकल सकी।

    बस के फंसने की सूचना मिलते ही स्थानीय लोग मौके पर पहुंच गए और बस को निकालने की कोशिश शुरू की गई। करीब ढाई घंटे तक लगातार प्रयास करने के बाद ट्रैक्टर बुलाया गया। ट्रैक्टर से टोचन कर आखिरकार बस को सुरक्षित बाहर निकाला जा सका। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान बस अपने निर्धारित अन्य स्टॉप तक नहीं पहुंच सकी जिससे कई बच्चों को समय पर स्कूल नहीं ले जाया जा सका।

    बस के निर्धारित समय पर नहीं पहुंचने से कई अभिभावकों को अपने बच्चों को स्वयं स्कूल छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा। इससे उन्हें अतिरिक्त परेशानी का सामना करना पड़ा और सुबह का पूरा कार्यक्रम प्रभावित हो गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि सड़क की स्थिति समय रहते सुधारी गई होती तो ऐसी नौबत नहीं आती।

    रहवासियों ने बताया कि पालीवाल कॉलोनी के इस हिस्से में वर्षों से सड़क निर्माण नहीं हुआ है। हर बारिश के मौसम में कच्चा रास्ता कीचड़ और दलदल में बदल जाता है जिससे दोपहिया और चारपहिया वाहन अक्सर फंस जाते हैं। स्कूल बसों एंबुलेंस और अन्य आवश्यक वाहनों की आवाजाही भी प्रभावित होती है। इसके बावजूद अब तक समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया गया है।

    स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि हर वर्ष बारिश के दौरान यही स्थिति बनती है और जिम्मेदार विभाग को कई बार शिकायतें भी दी जा चुकी हैं। इसके बावजूद सड़क निर्माण या जल निकासी की प्रभावी व्यवस्था नहीं की गई। लोगों का कहना है कि यदि जल्द पक्की सड़क और बेहतर ड्रेनेज की व्यवस्था नहीं की गई तो भविष्य में किसी बड़े हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता।

    रहवासियों ने नगर पालिका और प्रशासन से मांग की है कि पालीवाल कॉलोनी में प्राथमिकता के आधार पर सड़क का निर्माण कराया जाए ताकि बच्चों को सुरक्षित परिवहन सुविधा मिल सके और बारिश के मौसम में लोगों को बार-बार ऐसी परेशानियों का सामना न करना पड़े। उनका कहना है कि बुनियादी सुविधाओं की कमी के कारण रोजमर्रा का जीवन प्रभावित हो रहा है और अब इस समस्या का स्थायी समाधान होना जरूरी है।