Author: bharati

  • टेस्ट में सभी निकले नेगेटिव फिर भी हुई कार्रवाई: दो घंटे की समयसीमा चूके तो 8 क्रू पर गिरी गाज

    टेस्ट में सभी निकले नेगेटिव फिर भी हुई कार्रवाई: दो घंटे की समयसीमा चूके तो 8 क्रू पर गिरी गाज


    नई दिल्ली। एअर इंडिया एक्सप्रेस की एक इंटरनेशनल फ्लाइट के क्रू मेंबर को पोस्ट फ्लाइट ब्रेथ एनालाइजर टेस्ट में हुई महज 35 मिनट की देरी भारी पड़ गई। एयरलाइन ने दुबई से अमृतसर पहुंची फ्लाइट के चार पायलट और चार केबिन क्रू मेंबर समेत कुल आठ कर्मचारियों को तीन महीने के लिए सस्पेंड कर दिया है। खास बात यह है कि सभी आठ क्रू मेंबर की जांच रिपोर्ट नेगेटिव आई थी। इसके बावजूद तय समयसीमा का पालन नहीं होने के कारण एयरलाइन ने नियमों के तहत कड़ी कार्रवाई की।

    मामला 2 अगस्त 2026 का बताया जा रहा है। एअर इंडिया एक्सप्रेस की फ्लाइट AX-192 दुबई से उड़ान भरकर सुबह करीब 9 बजकर 50 मिनट पर अमृतसर के श्री गुरु राम दास जी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पहुंची थी। अंतरराष्ट्रीय उड़ान के बाद क्रू मेंबर के लिए पोस्ट फ्लाइट अल्कोहल टेस्ट की प्रक्रिया अनिवार्य होती है। नियम के मुताबिक भारत में विमान के लैंड करने के दो घंटे के भीतर यह प्रक्रिया पूरी करनी होती है। लेकिन इस फ्लाइट के आठ क्रू मेंबर तय समयसीमा में टेस्ट के लिए नहीं पहुंच सके। उन्होंने लैंडिंग के करीब दो घंटे 35 मिनट बाद जरूरी प्रक्रिया पूरी की। यानी निर्धारित समय से 35 मिनट की देरी हुई।

    रिपोर्ट के मुताबिक फ्लाइट के अमृतसर पहुंचने के बाद एक क्रू मेंबर की तबीयत खराब हो गई थी। इसके बाद क्रू ने पोस्ट अराइवल से जुड़ी जरूरी औपचारिकताएं पूरी कीं और अपने निर्धारित होटल चले गए। बाद में सभी सदस्य टेस्ट कराने के लिए एयरपोर्ट लौटे। जब तक वे एयरपोर्ट पहुंचे तब तक विमान के लैंड करने के दो घंटे 35 मिनट हो चुके थे। इसी वजह से अनिवार्य टेस्ट की निर्धारित समयसीमा का पालन नहीं हो सका।

    देरी के बाद एयरलाइन ने सभी आठ क्रू मेंबर का जरूरी टेस्ट कराया। जांच में सभी की रिपोर्ट नेगेटिव आई। इसका मतलब था कि जांच में किसी भी सदस्य के शराब के सेवन की पुष्टि नहीं हुई। इसके बावजूद नियमों के तहत निर्धारित समय के भीतर प्रक्रिया पूरी नहीं करने को गंभीर प्रक्रियात्मक उल्लंघन माना गया। एयर इंडिया एक्सप्रेस ने इस मामले की जानकारी नागरिक उड्डयन महानिदेशालय यानी DGCA को भी दी। इसके बाद सभी आठ क्रू मेंबर को ड्यूटी से हटा दिया गया और तीन महीने के निलंबन की कार्रवाई की गई।

    इस मामले ने विमानन क्षेत्र में सुरक्षा से जुड़ी प्रक्रियाओं के महत्व को फिर सामने ला दिया है। खासकर हाल के दिनों में फ्लाइट क्रू की साइकोएक्टिव पदार्थों से जुड़ी जांच को लेकर निगरानी बढ़ी है। एअर इंडिया की फुकेट से दिल्ली आने वाली एक फ्लाइट में उड़ान के दौरान करीब 300 फीट की अचानक ऊंचाई कम होने की घटना के बाद क्रू टेस्टिंग को लेकर भी चर्चा तेज हुई थी। इसके बाद एअर इंडिया ने अपने पूरे ग्रुप के पायलटों के लिए साइकोएक्टिव सब्सटेंस स्क्रीनिंग को अनिवार्य करने का ऐलान किया था। इसमें एअर इंडिया एक्सप्रेस भी शामिल है।

    इस पूरे घटनाक्रम से साफ है कि विमानन सुरक्षा व्यवस्था में केवल टेस्ट का नतीजा ही महत्वपूर्ण नहीं है बल्कि तय प्रक्रिया और समयसीमा का पालन भी उतना ही जरूरी माना जाता है। दुबई-अमृतसर फ्लाइट के मामले में सभी आठ क्रू मेंबर टेस्ट में नेगेटिव पाए गए लेकिन निर्धारित दो घंटे की समयसीमा से 35 मिनट की देरी के कारण उन्हें तीन महीने का निलंबन झेलना पड़ा।

  • सच बनाम सनसनी की जंग दिखाती है ये OTT सीरीज! जयदीप अहलावत और सोनाली बेंद्रे की एक्टिंग ने जीता दिल

    सच बनाम सनसनी की जंग दिखाती है ये OTT सीरीज! जयदीप अहलावत और सोनाली बेंद्रे की एक्टिंग ने जीता दिल


    नई दिल्ली। अगर आपको क्राइम सस्पेंस और थ्रिलर से भरपूर सीरीज देखना पसंद है तो ओटीटी पर मौजूद द ब्रोकन न्यूज आपके लिए एक अलग अनुभव लेकर आती है। पत्रकारिता की दुनिया को केंद्र में रखकर बनाई गई यह सीरीज न्यूज रूम के भीतर चलने वाली प्रतिस्पर्धा टीआरपी की दौड़ और सच दिखाने की कोशिश के बीच पैदा होने वाले तनाव को सामने लाती है। सीरीज को दर्शकों की ओर से अच्छा रिस्पॉन्स मिला है और इसकी IMDb रेटिंग 7.6 बताई गई है।

    द ब्रोकन न्यूज की कहानी मुंबई के दो न्यूज नेटवर्क के बीच की प्रतिस्पर्धा पर आधारित है। एक तरफ आवाज भारती नाम का न्यूज चैनल है जिसकी एडिटर अमीना कुरैशी का किरदार सोनाली बेंद्रे ने निभाया है। अमीना पत्रकारिता में सच्चाई और जिम्मेदारी को प्राथमिकता देती हैं लेकिन उनका चैनल आर्थिक परेशानियों से जूझ रहा है। दूसरी तरफ जोश 24/7 नाम का चैनल है जो टीआरपी और सनसनीखेज खबरों की दौड़ में आगे निकलना चाहता है।

    जोश 24/7 के प्रमुख एंकर दिपांकर सान्याल का किरदार जयदीप अहलावत ने निभाया है। उनका किरदार पत्रकारिता के उस रूप को दिखाता है जहां खबर की प्रस्तुति और टीआरपी का दबाव कई बार खबर की प्राथमिकताओं पर भारी पड़ जाता है। दोनों चैनलों की अलग सोच के बीच एक युवा और प्रतिभाशाली पत्रकार की कहानी भी आगे बढ़ती है। श्रिया पिलगांवकर ने इस पत्रकार का किरदार निभाया है और कहानी में उनके सामने पत्रकारिता के दो अलग रास्ते दिखाई देते हैं।

    सीरीज की कहानी केवल दो न्यूज चैनलों की प्रतिद्वंद्विता तक सीमित नहीं रहती। जैसे जैसे कहानी आगे बढ़ती है वैसे वैसे दर्शकों को न्यूज रूम के भीतर की राजनीति दबाव फैसलों और पत्रकारिता की नैतिक चुनौतियों की झलक मिलती है। एक तरफ सच्चाई के साथ खबर दिखाने की कोशिश है तो दूसरी तरफ ज्यादा से ज्यादा दर्शकों तक पहुंचने के लिए सनसनी का सहारा लेने की होड़ है। यही टकराव सीरीज को दिलचस्प बनाता है।

    द ब्रोकन न्यूज के दो सीजन हैं। पहले सीजन में सच्चाई और सनसनी के बीच की लड़ाई को प्रमुखता से दिखाया गया है। कहानी में कई ऐसे मोड़ आते हैं जो दर्शकों की दिलचस्पी बनाए रखते हैं। दूसरे सीजन में कहानी आगे बढ़ती है और पहले सीजन के घटनाक्रम के बाद किरदारों की जिंदगी में आए बदलावों को दिखाया जाता है।

    इस सीरीज का निर्देशन विनय वायकुल ने किया है। सोनाली बेंद्रे जयदीप अहलावत और श्रिया पिलगांवकर प्रमुख भूमिकाओं में नजर आते हैं। जयदीप अहलावत ने दिपांकर सान्याल के किरदार में खास प्रभाव छोड़ा है। वहीं सोनाली बेंद्रे ने अमीना कुरैशी के किरदार को गंभीरता के साथ निभाया है। श्रिया पिलगांवकर की एक्टिंग भी कहानी के युवा पत्रकार वाले हिस्से को मजबूती देती है।

    द ब्रोकन न्यूज वर्ष 2018 की ब्रिटिश ड्रामा सीरीज प्रेस का हिंदी रूपांतरण है। अगर आप पत्रकारिता की पृष्ठभूमि वाली कहानी के साथ सस्पेंस और ड्रामा देखना चाहते हैं तो यह सीरीज एक विकल्प हो सकती है। इसे ZEE5 पर हिंदी तमिल और तेलुगु भाषाओं में देखा जा सकता है। इसकी IMDb रेटिंग 7.6 है।

  • रोजाना हैवी मेकअप से बचना है तो स्किन टिंट आजमाएं, जानिए लगाने का सही तरीका और जरूरी सावधानियां

    रोजाना हैवी मेकअप से बचना है तो स्किन टिंट आजमाएं, जानिए लगाने का सही तरीका और जरूरी सावधानियां

    नई दिल्ली । मेकअप का ट्रेंड लगातार बदलता रहता है और इन दिनों नेचुरल लुक को ज्यादा पसंद किया जा रहा है। खासतौर पर रोजाना ऑफिस, कॉलेज या दिन के समय बाहर जाने वाली महिलाएं चेहरे पर भारी मेकअप की परत लगाने के बजाय हल्का और फ्रेश लुक पसंद कर रही हैं। इसी वजह से नो मेकअप लुक का चलन बढ़ा है और फुल-कवरेज फाउंडेशन की जगह स्किन टिंट, टिंटेड सनस्क्रीन और टिंटेड मॉयश्चराइजर जैसे विकल्प लोकप्रिय हो रहे हैं।

    स्किन टिंट ऐसा मेकअप प्रोडक्ट है, जो फाउंडेशन की तुलना में कम कवरेज देता है। इसका मुख्य उद्देश्य चेहरे पर भारी परत चढ़ाने के बजाय त्वचा के रंग को थोड़ा एकसार करना और नेचुरल लुक बनाए रखना है। यह दाग-धब्बों और पिगमेंटेशन को पूरी तरह छिपाने के बजाय उनकी दिखाई देने वाली तीव्रता को कुछ कम कर सकता है। इससे त्वचा की प्राकृतिक बनावट बनी रहती है और चेहरा ज्यादा फ्रेश नजर आता है।

    आजकल बाजार में अलग-अलग स्किन टोन के अनुसार स्किन टिंट के कई शेड उपलब्ध हैं। कुछ प्रोडक्ट में मॉयश्चराइजिंग सामग्री और हयालूरोनिक एसिड जैसे तत्व भी शामिल होते हैं। हालांकि, किसी भी प्रोडक्ट का चुनाव करते समय अपनी त्वचा के प्रकार और जरूरत को ध्यान में रखना जरूरी है।

    स्किन टिंट के बढ़ते चलन की एक वजह इसका हल्का बेस भी है। लंबे समय तक चेहरे पर फुल-कवरेज फाउंडेशन लगाए रखने से कुछ लोगों को रूखापन या पैची लुक महसूस हो सकता है। इसके मुकाबले हल्का बेस रोजाना के मेकअप के लिए ज्यादा सुविधाजनक विकल्प लग सकता है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि फाउंडेशन की जरूरत खत्म हो गई है। जब ज्यादा कवरेज चाहिए हो, तब फाउंडेशन बेहतर विकल्प हो सकता है।

    स्किन टिंट लगाने के लिए सबसे पहले चेहरे को अच्छी तरह साफ करना चाहिए। इसके बाद त्वचा के अनुसार मॉयश्चराइजर लगाएं और फिर सनस्क्रीन का इस्तेमाल करें। जरूरत महसूस होने पर स्किन टाइप के मुताबिक प्राइमर भी लगाया जा सकता है। इसके बाद हाथ पर स्किन टिंट की कुछ बूंदें लें और उंगलियों की मदद से चेहरे पर हल्के हाथों से लगाएं।

    टिंट को पूरे चेहरे पर समान रूप से फैलाने के बाद इसे अच्छी तरह ब्लेंड करना जरूरी है। इसके लिए उंगलियों या गीले मेकअप स्पंज का इस्तेमाल किया जा सकता है। ब्लेंडिंग सही तरीके से करने पर बेस ज्यादा प्राकृतिक दिखाई देता है। इसके बाद जरूरत के अनुसार हल्का ब्लश लगाकर रोजाना का मेकअप पूरा किया जा सकता है।

    स्किन टिंट खरीदते समय केवल ट्रेंड को देखकर प्रोडक्ट नहीं चुनना चाहिए। अपनी स्किन टोन और स्किन टाइप के अनुसार सही शेड और फॉर्मूला चुनना जरूरी है। संवेदनशील त्वचा वाले लोगों को किसी नए मेकअप प्रोडक्ट का इस्तेमाल करने से पहले पैच टेस्ट करना चाहिए। इससे किसी संभावित एलर्जी या त्वचा संबंधी प्रतिक्रिया का पता लगाने में मदद मिल सकती है।

    नो मेकअप लुक का उद्देश्य चेहरे को पूरी तरह बदलने के बजाय उसकी प्राकृतिक बनावट को बनाए रखते हुए हल्का और फ्रेश लुक देना है। ऐसे में स्किन टिंट उन लोगों के लिए एक विकल्प हो सकता है, जिन्हें रोजाना भारी बेस पसंद नहीं है। वहीं ज्यादा कवरेज या दाग-धब्बों को पूरी तरह छिपाने की जरूरत होने पर फाउंडेशन अधिक उपयुक्त रह सकता है।

  • वैभव सूर्यवंशी को अभी करना होगा इंतजार! गौतम गंभीर ने साफ किया प्लान बोले मौका आएगा तो लंबे समय के लिए मिलेगा

    वैभव सूर्यवंशी को अभी करना होगा इंतजार! गौतम गंभीर ने साफ किया प्लान बोले मौका आएगा तो लंबे समय के लिए मिलेगा


    नई दिल्ली। वैभव सूर्यवंशी ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कदम रखने के बाद अपनी बल्लेबाजी से सभी का ध्यान खींचा है। महज कम उम्र में टी20 इंटरनेशनल क्रिकेट में जगह बनाने वाले इस युवा बल्लेबाज के नाम छह मुकाबलों में दो अर्धशतक भी दर्ज हो चुके हैं। इसके बावजूद अफगानिस्तान के खिलाफ तीन मैचों की टी20 सीरीज में उन्हें प्लेइंग इलेवन में जगह नहीं मिल सकी। अब भारतीय टीम के हेड कोच गौतम गंभीर ने वैभव की स्थिति को लेकर तस्वीर साफ कर दी है। गंभीर के मुताबिक वैभव को फिलहाल अपनी बारी का इंतजार करना होगा।

    अफगानिस्तान के खिलाफ पूरी सीरीज में भारत ने अभिषेक शर्मा और संजू सैमसन को ओपनिंग की जिम्मेदारी दी। दोनों बल्लेबाजों ने इस मौके का फायदा उठाते हुए शानदार प्रदर्शन किया। खासकर तीसरे टी20 मुकाबले में अभिषेक शर्मा ने तूफानी बल्लेबाजी करते हुए सिर्फ 37 गेंदों में शतक जड़ दिया। उनके इस प्रदर्शन के दम पर भारत ने अफगानिस्तान को 127 रन से हराया और तीन मैचों की सीरीज में 3-0 से क्लीन स्वीप किया।

    सीरीज के बाद गौतम गंभीर ने वैभव सूर्यवंशी को लेकर टीम मैनेजमेंट का रुख स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि वैभव के साथ इस विषय पर बातचीत बिल्कुल साफ है। उन्हें अपनी बारी का इंतजार करना होगा। टीम मैनेजमेंट उनकी प्रतिभा से पूरी तरह वाकिफ है और जानता है कि वह क्या कर सकते हैं लेकिन अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अनुभव और लगातार प्रदर्शन की भी अपनी अहमियत होती है।

    गंभीर के मुताबिक जो खिलाड़ी पिछले दो तीन साल से लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रहा है वह उस खिलाड़ी से आगे रहेगा जिसने अभी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कदम रखा है। ऐसे में फिलहाल अभिषेक शर्मा और संजू सैमसन को हटाकर वैभव को मौका देने की जल्दबाजी नहीं है। इसका मतलब यह नहीं है कि टीम मैनेजमेंट वैभव को नजरअंदाज कर रहा है बल्कि उन्हें सही समय पर मौका देने की योजना है।

    गंभीर ने यह भी संकेत दिया कि जब वैभव को प्लेइंग इलेवन में जगह मिलेगी तो उन्हें सिर्फ एक या दो मैचों का मौका नहीं दिया जाएगा। टीम मैनेजमेंट उन्हें खुद को साबित करने के लिए पर्याप्त अवसर देगा। यानी युवा बल्लेबाज को एक लंबी अवधि के मौके के लिए तैयार रहना होगा।

    गंभीर ने उम्र को लेकर भी अपनी बात रखी। उनका कहना है कि क्रिकेट में इंतजार की स्थिति खिलाड़ी की उम्र देखकर नहीं बदलती। खिलाड़ी 15 साल का हो या 30 साल का उसे अगर अपनी बारी का इंतजार करना है तो करना होगा। टीम में प्रतिस्पर्धा और प्रतिभा होना जरूरी है लेकिन हर खिलाड़ी को अपने मौके के लिए इंतजार करना पड़ता है।

    अभिषेक और संजू को लगातार मौका देने के पीछे एक और वजह भी है। गंभीर के मुताबिक टीम मैनेजमेंट अफगानिस्तान सीरीज में उस ओपनिंग कॉम्बिनेशन को दोबारा आजमाना चाहता था जिसने टी20 वर्ल्ड कप में भारत के लिए अच्छा प्रदर्शन किया था। सिर्फ तीन चार मैचों के खराब प्रदर्शन के आधार पर किसी खिलाड़ी को बाहर करना उचित नहीं माना गया। दोनों बल्लेबाजों ने अफगानिस्तान के खिलाफ फिर साबित किया कि उन्हें लगातार मौके क्यों दिए जा रहे हैं।

    वैभव ने जुलाई में इंग्लैंड के खिलाफ टी20 इंटरनेशनल डेब्यू किया था। इसके बाद छह मुकाबलों में दो अर्धशतक लगाकर उन्होंने अपनी क्षमता दिखाई है। गंभीर के संदेश से इतना स्पष्ट है कि टीम मैनेजमेंट युवा बल्लेबाज की प्रतिभा पर भरोसा करता है। फिलहाल वैभव को इंतजार करना होगा और जब उनकी बारी आएगी तो उन्हें खुद को साबित करने के लिए पर्याप्त मौके दिए जाएंगे।

  • पैन इंडिया टैग पर नानी की दो टूक: पठान-जवान दूसरी भाषाओं में चलीं फिर भी हिंदी फिल्में ही रहीं तो साउथ फिल्मों के साथ ऐसा क्यों?

    पैन इंडिया टैग पर नानी की दो टूक: पठान-जवान दूसरी भाषाओं में चलीं फिर भी हिंदी फिल्में ही रहीं तो साउथ फिल्मों के साथ ऐसा क्यों?


    नई दिल्ली। साउथ सिनेमा के चर्चित अभिनेता नानी अपनी बहुप्रतीक्षित एक्शन थ्रिलर फिल्म द पैराडाइज को लेकर सुर्खियों में हैं। फिल्म 24 सितंबर 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होने जा रही है। खास बात यह है कि फिल्म बिना किसी थिएट्रिकल ट्रेलर के दर्शकों के बीच पहुंचेगी। रिलीज से पहले आयोजित एक प्रेस मीट में नानी ने फिल्मों के साथ इस्तेमाल होने वाले पैन इंडिया टैग को लेकर खुलकर अपनी बात रखी और इस शब्द के इस्तेमाल पर सवाल उठाया।

    नानी का कहना है कि जब कोई हिंदी फिल्म देश के अलग अलग हिस्सों में अच्छा प्रदर्शन करती है तो उसे हिंदी फिल्म ही कहा जाता है। लेकिन जब कोई दक्षिण भारतीय फिल्म कई भाषाओं के दर्शकों के बीच लोकप्रिय होती है तो उसके साथ पैन इंडिया फिल्म का टैग जोड़ दिया जाता है। नानी ने कहा कि वह अपनी फिल्मों के साथ इस तरह का कोई ठप्पा नहीं चाहते।

    प्रेस मीट में जब नानी से पैन इंडिया टैग और फिल्म को अलग अलग भाषाओं में रिलीज करने को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने अपनी बात साफ तौर पर रखी। उन्होंने कहा कि जब कोई हिंदी फिल्म अच्छा प्रदर्शन करती है तो उसे हिंदी फिल्म कहा जाता है लेकिन साउथ की फिल्म के सफल होने पर उसे पैन इंडिया फिल्म कहा जाने लगता है। नानी के मुताबिक वह अपनी फिल्मों को पैन इंडिया फिल्म कहना पसंद नहीं करते।

    अपनी बात को समझाने के लिए नानी ने शाहरुख खान की फिल्मों पठान और जवान का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि अगर जवान या पठान जैसी हिंदी फिल्में तमिल तेलुगु या दूसरी भाषाओं में बेहतरीन प्रदर्शन करती हैं तब भी उन्हें पैन इंडिया फिल्म नहीं कहा जाता। वे हिंदी फिल्में ही कहलाती हैं। ऐसे में नानी ने सवाल उठाया कि यही नियम दक्षिण भारतीय फिल्मों के लिए क्यों नहीं अपनाया जाता।

    नानी ने कहा कि उन्हें समझ नहीं आता कि पैन इंडिया शब्द खासतौर पर साउथ की फिल्मों के साथ ही क्यों जोड़ा जाता है। उनके इस बयान को फिल्म इंडस्ट्री में भाषा और क्षेत्र के आधार पर फिल्मों की पहचान को लेकर चल रही बहस से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि नानी ने यह भी स्पष्ट किया कि वह अपनी फिल्मों को अलग अलग भाषाओं के दर्शकों तक पहुंचाने के खिलाफ नहीं हैं।

    अभिनेता ने कहा कि उनकी इच्छा है कि उनकी फिल्में तमिल हिंदी मलयालम और कन्नड़ समेत अलग अलग भाषाओं के दर्शकों तक पहुंचें। उनके अनुसार यह सामान्य प्रक्रिया है और किसी फिल्म के ज्यादा भाषाओं में रिलीज होने में उन्हें कोई परेशानी नहीं है। उनकी आपत्ति सिर्फ पैन इंडिया टैग को लेकर है।

    नानी ने यह भी कहा कि वह किसी को अपनी फिल्मों के लिए इस शब्द का इस्तेमाल करने से रोक नहीं सकते। एक कलाकार के तौर पर वह केवल अपनी बात रख सकते हैं और लोगों से अनुरोध कर सकते हैं कि उनकी फिल्मों को इस टैग से अलग रखा जाए। उन्होंने साफ किया कि दर्शकों तक ज्यादा से ज्यादा भाषाओं में पहुंचना उनका मकसद है लेकिन इसके लिए किसी विशेष लेबल की जरूरत नहीं है।

    द पैराडाइज को लेकर नानी और निर्देशक श्रीकांत ओडेला की जोड़ी एक बार फिर साथ नजर आएगी। दोनों इससे पहले दशहरा जैसी फिल्म में काम कर चुके हैं। अब द पैराडाइज की रिलीज से पहले नानी का पैन इंडिया सिनेमा पर यह बयान फिल्म की चर्चा को और बढ़ा रहा है।

  • राधा अष्टमी पर भूलकर भी न करें ये गलती पूजा से पारण तक जानिए राधारानी के व्रत की पूरी विधि

    राधा अष्टमी पर भूलकर भी न करें ये गलती पूजा से पारण तक जानिए राधारानी के व्रत की पूरी विधि


    नई दिल्ली। राधा अष्टमी का पर्व भगवान श्रीकृष्ण की प्रिय राधारानी के प्राकट्य दिवस के रूप में मनाया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन राधा कृष्ण की विशेष पूजा करने के साथ व्रत भजन कीर्तन और राधारानी का श्रृंगार किया जाता है। वर्ष 2026 में राधा अष्टमी का पर्व 19 सितंबर शनिवार को मनाया जाएगा। जो लोग पहली बार राधा अष्टमी का व्रत रखने जा रहे हैं उनके लिए पूजा की तैयारी से लेकर भोग और पारण तक की परंपरा को समझना जरूरी है।
    पंचांग के अनुसार नई दिल्ली के समय के आधार पर अष्टमी तिथि 18 सितंबर को दोपहर करीब 1 बजे शुरू होगी और 19 सितंबर को दोपहर लगभग 3 बजकर 26 मिनट तक रहेगी। राधारानी की पूजा के लिए मध्याह्न काल को विशेष महत्व दिया जाता है। 19 सितंबर को पूजा का समय सुबह लगभग 11 बजकर 1 मिनट से दोपहर 1 बजकर 28 मिनट तक बताया गया है। अलग अलग शहरों में सूर्योदय और स्थानीय पंचांग के अनुसार मुहूर्त में थोड़ा अंतर हो सकता है इसलिए अपने क्षेत्र के पंचांग से समय की पुष्टि करना उचित रहेगा।

    राधा अष्टमी के दिन व्रती को सुबह स्नान करने के बाद स्वच्छ वस्त्र पहनकर पूजा स्थल की सफाई करनी चाहिए। इसके बाद चौकी पर लाल पीला या गुलाबी कपड़ा बिछाकर राधा कृष्ण की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित की जा सकती है। अगर घर में राधारानी की अलग प्रतिमा उपलब्ध नहीं है तो राधा कृष्ण की तस्वीर के सामने भी श्रद्धापूर्वक पूजा की जा सकती है। पूजा शुरू करने से पहले हाथ में जल फूल और अक्षत लेकर व्रत और पूजा का संकल्प लेने की परंपरा है।

    इसके बाद कलश स्थापित कर राधा कृष्ण को जल चंदन रोली अक्षत और फूल अर्पित किए जाते हैं। प्रतिमा उपलब्ध होने पर परंपरा के अनुसार जल या पंचामृत से अभिषेक किया जा सकता है। अगर तस्वीर के सामने पूजा कर रहे हैं तो उस पर जल चढ़ाने के बजाय फूल चंदन और अन्य पूजन सामग्री अर्पित करना उचित माना जाता है। भगवान श्रीकृष्ण को तुलसी दल चढ़ाने की परंपरा भी है। इसके बाद राधारानी का श्रृंगार कर धूप और दीप जलाएं। मध्याह्न काल में राधा अष्टमी की कथा का पाठ करें और राधा कृष्ण के मंत्रों का जाप करते हुए अंत में आरती करें।

    भोग की बात करें तो राधा अष्टमी पर सात्विक और ताजा भोजन भगवान को अर्पित करने की परंपरा है। घर पर खीर मालपुआ रबड़ी माखन मिश्री फल पंचामृत या दूध से बनी मिठाई तैयार की जा सकती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार भोग सात्विक होना चाहिए। पूजा के बाद भोग को प्रसाद के रूप में परिवार के सदस्यों में बांटा जा सकता है।

    व्रत रखने वाले लोग अपनी क्षमता और स्वास्थ्य के अनुसार निर्जल व्रत फलाहार या एक समय सात्विक भोजन का संकल्प ले सकते हैं। धार्मिक व्रत में स्वास्थ्य को नजरअंदाज करना उचित नहीं है। बीमारी गर्भावस्था अधिक उम्र या नियमित दवा लेने की स्थिति में निर्जल व्रत रखने से पहले चिकित्सकीय सलाह लेना बेहतर है। व्रत के दौरान क्रोध निंदा और कटु वचन से बचने तथा राधे राधे या ॐ राधिकायै नमः जैसे मंत्रों का जाप करने की परंपरा है।

    राधा अष्टमी के पारण की परंपरा अलग अलग परिवारों और संप्रदायों में अलग हो सकती है। कुछ लोग पूजा के बाद प्रसाद ग्रहण करके व्रत खोलते हैं जबकि कुछ परंपराओं में अगले दिन पारण किया जाता है। इसलिए अपने परिवार की परंपरा और स्थानीय पंचांग के अनुसार पारण का समय तय करना उचित रहेगा।

  • पाकिस्तान का अमेरिकी ड्रोन कंपनी से समझौता, ट्रंप के बेटों से भी जुड़ा है कंपनी का कनेक्शन

    पाकिस्तान का अमेरिकी ड्रोन कंपनी से समझौता, ट्रंप के बेटों से भी जुड़ा है कंपनी का कनेक्शन

    इस्लामाबाद। ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान अपनी ड्रोन युद्ध क्षमता को मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ता नजर आ रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक पाकिस्तानी सेना ने अमेरिकी ड्रोन निर्माता कंपनी ‘पावरस’ के साथ एक समझौता किया है। इस समझौते के तहत फिलहाल ड्रोन की खरीद शामिल है, जबकि आगे चलकर तकनीक हस्तांतरण और संयुक्त रूप से ड्रोन निर्माण की संभावनाओं पर भी काम किया जा सकता है। इस कंपनी का एक महत्वपूर्ण कारोबारी कनेक्शन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बेटों डोनाल्ड ट्रंप जूनियर और एरिक ट्रंप से भी बताया जा रहा है।

    ड्रोन आयात के साथ घरेलू निर्माण पर जोर

    न्यूज18 की रिपोर्ट के अनुसार, ऑपरेशन सिंदूर के अनुभवों के बाद पाकिस्तानी सेना ड्रोन युद्धक क्षमता बढ़ाने पर जोर दे रही है। उसकी रणनीति केवल विदेशों से ड्रोन खरीदने तक सीमित रहने के बजाय भविष्य में घरेलू स्तर पर इनके निर्माण की क्षमता विकसित करने की बताई जा रही है।

    रिपोर्ट के मुताबिक इस समझौते में दोनों देशों की सरकारों की भी भूमिका हो सकती है। अमेरिका के लिए यह समझौता पाकिस्तान में बढ़ती चीनी रक्षा तकनीक के प्रभाव को संतुलित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वहीं पाकिस्तान भी रक्षा जरूरतों के लिए किसी एक देश पर निर्भरता कम करने की कोशिश कर रहा है। अमेरिकी सहयोग बढ़ने से चीन और तुर्किए पर उसकी रक्षा संबंधी निर्भरता कम करने की संभावना जताई गई है।

    ट्रंप के बेटों से क्या है कंपनी का संबंध?

    पाकिस्तानी सेना ने जिस ड्रोन निर्माता कंपनी पावरस के साथ समझौते की बात सामने आई है, उसका जल्द ही ऑरियस ग्रीनवे होल्डिंग्स के साथ सार्वजनिक विलय होने की जानकारी दी गई है। ऑरियस ग्रीनवे को डोनाल्ड ट्रंप जूनियर और एरिक ट्रंप का समर्थन हासिल है और दोनों ने इस कंपनी में निवेश किया है।

    रिपोर्ट के अनुसार अक्टूबर में प्रस्तावित विलय पूरा होने के बाद ट्रंप के दोनों बेटों की हिस्सेदारी अप्रत्यक्ष रूप से पावरस में भी हो सकती है। इसी वजह से पाकिस्तान के साथ हुए इस संभावित रक्षा समझौते को अमेरिकी राष्ट्रपति के परिवार से जुड़े कारोबारी हितों के संदर्भ में भी देखा जा रहा है।

    पाकिस्तानी सेना ने एमओयू पर नहीं दी जानकारी

    पाकिस्तानी सेना ने ड्रोन कंपनी के साथ किसी एमओयू पर हस्ताक्षर किए जाने की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। हालांकि, बुधवार को जारी बयान में सेना ने कहा कि पावरस कंपनी के एक प्रतिनिधिमंडल ने फील्ड मार्शल आसिम मुनीर से मुलाकात की है।

    सेना के मुताबिक बैठक में रक्षा, उत्पादन और दीर्घकालिक साझेदारी विकसित करने से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। हालांकि, आधिकारिक बयान में समझौते पर हस्ताक्षर किए जाने का उल्लेख नहीं किया गया है।

    ऑपरेशन सिंदूर के बाद बदली रणनीति का दावा

    रिपोर्ट्स के मुताबिक भारतीय खुफिया एजेंसियां पाकिस्तान की युद्ध रणनीति में आए बदलाव को ऑपरेशन सिंदूर के अनुभव से जोड़कर देख रही हैं। भारत और पाकिस्तान के बीच हुए संघर्ष के दौरान भारतीय सुरक्षा बलों ने पाकिस्तान के नूर खान, मुरीदके और बहावलपुर स्थित एयरफील्ड्स को निशाना बनाया था। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पाकिस्तान का एयर डिफेंस इन हमलों को रोकने में प्रभावी नहीं रहा।

    इसी पृष्ठभूमि में पाकिस्तान अपनी ड्रोन क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ तकनीकी और उत्पादन क्षमता विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ने की कोशिश कर रहा है।

    अमेरिका-पाकिस्तान संबंधों में भी बढ़ी सक्रियता

    इस संभावित समझौते को अमेरिका और पाकिस्तान के बीच रक्षा एवं आर्थिक संबंधों में बढ़ती सक्रियता के संदर्भ में भी देखा जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप सार्वजनिक रूप से पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर की प्रशंसा कर चुके हैं। दूसरी ओर पाकिस्तान की ओर से भी अमेरिका के साथ आर्थिक और रक्षा सहयोग बढ़ाने की बात लगातार कही जाती रही है।

    भारत के साथ पाकिस्तान के संबंधों में तनाव के बीच अमेरिका और पाकिस्तान के बीच बढ़ता संपर्क क्षेत्रीय रणनीतिक समीकरणों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, पावरस के साथ एमओयू की आधिकारिक पुष्टि अभी पाकिस्तानी सेना की ओर से नहीं की गई है।

  • रूस पर 100% टैरिफ की तैयारी, फिर भी यूरेनियम खरीद का रास्ता खुला रखेगा अमेरिका

    रूस पर 100% टैरिफ की तैयारी, फिर भी यूरेनियम खरीद का रास्ता खुला रखेगा अमेरिका

    वाशिंगटन। रूस से तेल और प्राकृतिक गैस खरीदने वाले देशों पर 100 फीसदी तक टैरिफ लगाने की तैयारी कर रहा अमेरिका अपने परमाणु ईंधन हितों को लेकर रूस के साथ कुछ लेनदेन का रास्ता खुला रख रहा है। प्रस्तावित प्रावधानों के तहत भारत और चीन जैसे रूस से बड़े पैमाने पर ऊर्जा खरीदने वाले देश अमेरिकी टैरिफ के दायरे में आ सकते हैं। वहीं रूस से जुड़े कुछ नागरिक परमाणु सहयोग और यूरेनियम आयात को प्रतिबंधों से बाहर रखने का प्रावधान किया गया है।

    यह स्थिति अमेरिका की रूस नीति में ऊर्जा और परमाणु क्षेत्र को लेकर अलग-अलग रुख को सामने लाती है। एक ओर रूस की तेल-गैस आय से जुड़े देशों पर आर्थिक दबाव बढ़ाने की तैयारी है, तो दूसरी ओर अमेरिकी परमाणु ईंधन की जरूरतों को देखते हुए कुछ रूसी परमाणु आपूर्ति के लिए अपवाद रखा गया है।

    100 फीसदी तक टैरिफ लगाने का अधिकार

    अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने बुधवार को ‘लिंडसे ओ. ग्राहम रूस और ईरान पर प्रतिबंध लगाने वाला अधिनियम 2026’ पारित किया। इसके तहत राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को रूस से कच्चा तेल या प्राकृतिक गैस खरीदने वाले देशों पर 100 फीसदी तक टैरिफ लगाने का अधिकार मिलेगा।

    यह विधेयक रूस और ईरान के खिलाफ व्यापक प्रतिबंध पैकेज का हिस्सा है। इसका उद्देश्य रूस से जुड़ी आर्थिक गतिविधियों पर दबाव बढ़ाना है। हालांकि, इसी कानून में परमाणु क्षेत्र से जुड़ी कुछ गतिविधियों के लिए अपवाद भी शामिल किए गए हैं।

    रूस से यूरेनियम पर पूरी तरह प्रतिबंध नहीं

    कानून के सेक्शन 111 में राष्ट्रपति को रूस से यूरेनियम आयात को नियंत्रित करने वाले मौजूदा अमेरिकी कानून की आवश्यकताओं को लागू करने का निर्देश दिया गया है। इसमें विशेष रूप से रूस की सरकारी परमाणु कंपनी रोसाटॉम और उसकी सहायक या उत्तराधिकारी इकाइयों से आने वाले यूरेनियम का उल्लेख है।

    हालांकि, कानून के सेक्शन 114 में कुछ गतिविधियों को प्रतिबंधों से बाहर रखा गया है। इसका मतलब है कि रूस से जुड़े सभी परमाणु ईंधन लेनदेन पर एक साथ और पूरी तरह रोक लगाने का प्रावधान नहीं है।

    सेक्शन 114 में दो अहम अपवाद

    कानून के सेक्शन 114 में दो प्रमुख अपवाद बताए गए हैं। पहला, अमेरिका और रूस के बीच नागरिक परमाणु सहयोग समझौतों के तहत होने वाली गतिविधियों पर संबंधित प्रतिबंध लागू नहीं होंगे। ये समझौते अमेरिकी परमाणु ऊर्जा अधिनियम की धारा 123 के तहत किए जाते हैं।

    दूसरा अपवाद कुछ कम-संवर्धित यूरेनियम (LEU) के आयात से जुड़ा है। ऐसे यूरेनियम का इस्तेमाल परमाणु रिएक्टरों में ईंधन के तौर पर किया जाता है और कुछ आयात मौजूदा अमेरिकी कानून के दायरे में आते हैं। इसके अलावा कुछ मेडिकल आइसोटोप के आयात को भी छूट दी गई है, यदि उनके लिए पहले से अनुमति या छूट जारी की गई हो।

    परमाणु ईंधन में रूस पर अमेरिका की निर्भरता

    रूस से जुड़े परमाणु ईंधन के लिए अपवाद का एक प्रमुख कारण अमेरिका की अपनी ऊर्जा जरूरतें हैं। रूस लंबे समय से यूरेनियम संवर्धन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है। अमेरिका ने व्यापक आर्थिक क्षेत्रों में रूस पर अपनी निर्भरता कम करने की कोशिश की है, लेकिन परमाणु ईंधन के क्षेत्र में बदलाव अपेक्षाकृत जटिल रहा है।

    उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक अमेरिकी नागरिक परमाणु संयंत्रों ने 2025 में कुल 12.71 मिलियन सेपरेटिव वर्क यूनिट्स (SWU) की एनरिचमेंट सर्विसेज हासिल कीं। इनमें रूस की हिस्सेदारी 3.284 मिलियन SWU रही, जो कुल का करीब 26 फीसदी है।

    अमेरिका के साथ फ्रांस, ब्रिटेन और नीदरलैंड्स भी आपूर्तिकर्ता

    अमेरिका में घरेलू स्तर पर होने वाली यूरेनियम एनरिचमेंट की हिस्सेदारी करीब 23 फीसदी रही। इसके अलावा फ्रांस, ब्रिटेन और नीदरलैंड्स भी अमेरिकी परमाणु उद्योग को एनरिचमेंट सर्विसेज उपलब्ध कराते हैं।

    इन आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि परमाणु ईंधन आपूर्ति श्रृंखला में अमेरिका के लिए रूस की भूमिका अब भी महत्वपूर्ण है। ऐसे में रूस पर व्यापक आर्थिक दबाव बढ़ाने के बावजूद अमेरिकी कानून में परमाणु क्षेत्र से जुड़ी कुछ गतिविधियों के लिए अपवाद रखे जाने को उसकी घरेलू परमाणु ईंधन जरूरतों के संदर्भ में देखा जा रहा है।

  • ईरान को ट्रंप का सख्त संदेश…., बोले- अमेरिका की उम्मीदों के मुताबिक होगा समझौता…!

    ईरान को ट्रंप का सख्त संदेश…., बोले- अमेरिका की उम्मीदों के मुताबिक होगा समझौता…!


    वाशिंगटन।
    अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने कहा कि ईरान (Iran) वाशिंगटन (Washington) के साथ समझौता करना चाहता है। लेकिन उनकी राय में ईरान अभी इसके लिए तैयार नहीं है। ट्रंप ने संकेत दिया कि कोई भी समझौता अमेरिका की उम्मीदों के मुताबिक होना चाहिए। यह बयान ऐसे समय आया है, जब अगले हफ्ते न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान ट्रंप की खाड़ी सहयोग परिषद यानी जीसीसी (Gulf Cooperation Council- GCC) के सदस्य देशों के नेताओं और विदेश मंत्रियों से मुलाकात होने की उम्मीद है।


    राष्ट्रपति ट्रंप ने क्या कहा?

    ट्रंप ने ‘एबीसी 11’ से बातचीत में कहा, ईरान समझौता करना चाहता है। मेरी राय में, वे तैयार नहीं हैं। हम या तो ऐसा समझौता करेंगे जो अच्छा हो या फिर कोई समझौता नहीं करेंगे। ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है, जब उनका प्रशासन ईरान के साथ जारी संघर्ष के अगले चरण का आकलन कर रहा है। प्रशासन युद्ध के बाद की रणनीति भी तैयार कर रहा है।

    एक्सिओस ने तीन सूत्रों के हवाले से बताा कि ट्रंप की छह जीसीसी देशों के प्रतिनिधियों से मुलाकात होने की उम्मीद है। इन छह देशों में सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), कतर, बहरीन, कुवैत और ओमान शामिल हैं। प्रस्तावित बैठक में युद्ध के बाद की रणनीति को लेकर वाशिंगटन के विचारों पर चर्चा हो सकती है। संघर्ष में अगले कदमों पर भी बात हो सकती है।

    अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने बुधवार को शुरुआती निमंत्रण भेजे थे। इस बैठक में दूसरे अरब और इस्लामी देशों के नेताओं को भी शामिल किया जा सकता है। ट्रंप ने बुधवार को कहा था कि उन्हें उम्मीद है कि वाशिंगटन ‘युद्ध के अंत की ओर’ बढ़ रहा है। उन्होंने यह भी दावा किया था कि अमेरिका को ईरान की ओर से सीधे संदेश मिला है कि तेहरान समझौता करना चाहता है।

    खाड़ी देशों में अमेरिका के कई सैन्य अड्डे हैं। संघर्ष के दौरान इन देशों पर ईरान की ओर से हमले हुए हैं। तेल और प्राकृतिक गैस के निर्यात में रुकावटों का असर क्षेत्र की अर्थव्यवस्थाओं पर भी पड़ा है।


    ट्रंप ने किन सरकारी आदेशों पर हस्ताक्षर किए?

    ट्रंप ने गुरुवार शाम (स्थानीय समय) व्हाइट हाउस में 100 से ज्यादा शिकार करने वालों, मछली पकड़ने वालों और बाहरी गतिविधियों से जुड़े उद्योग (आउटडोर) के प्रतिनिधियों की मेजबानी की। इस दौरान उन्होंने कार्यकारी आदेशों पर हस्ताक्षर किए। इन आदेशों का मकसद शिकार और मछली पकड़ने के अवसरों को बढ़ाना है। कुछ संघीय नियमों में बदलाव करना भी इसका हिस्सा है।

    मछली पकड़ने के नियमों पर बात करते हुए ट्रंप ने राष्ट्रपति के अधिकारों के दायरे का जिक्र किया। ट्रंप ने कहा, इस पद की ताकत बहुत ज्यादा है। मैं मछली पकड़ने पर प्रतिबंध लगा सकता था और जॉनी का कारोबार पूरी तरह बंद कर सकता था। मुझे लगता है कि मैं ऐसा सिर्फ एक या दो दिन के लिए करने जा रहा हूं। जब तक वह मुझे फोन करके नहीं कहता- राष्ट्रपति जी, आप मेरा कारोबार बंद कर रहे हैं।

    ट्रंप ने यह भी कहा कि उन्होंने एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किया है। इसके तहत लाखों एकड़ संघीय जमीन शिकारियों और मछली पकड़ने वालों के लिए खोली जाएगी। उन्होंने एक और आदेश पर भी हस्ताक्षर किए। इसका उद्देश्य समुद्री मछली पकड़ने वालों, नाव चलाने वालों, चार्टर कैप्टनों और तटीय समुदायों पर लागू संघीय नियमों को कम करना है।


    ट्रंप की शक्ति सीमित करने वाला प्रस्ताव

    इस बीच, अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने मंगलवार को एक प्रस्ताव पर मतदान किया। प्रस्ताव के पक्ष में 220 और विरोध में 204 वोट पड़े। इस प्रस्ताव का उद्देश्य ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान जारी रखने के ट्रंप के अधिकार को सीमित करना है। यह प्रस्ताव डेमोक्रेटिक पार्टी के सांसद सेठ मौल्टन ने पेश किया था। इसमें प्रशासन से कहा गया है कि वह ईरान के साथ संघर्ष से अमेरिकी सैनिकों को वापस बुलाए। हालांकि, इसमें कुछ खास रक्षात्मक परिस्थितियों को अपवाद रखा गया है। प्रस्ताव के समर्थन में सात रिपब्लिकन सांसदों ने डेमोक्रेट सांसदों के साथ वोट किया।

    अलग से, प्रतिनिधि सभा ने 2026 का लिंडसे ओ. ग्राहम रूस और ईरान पर प्रतिबंध कानून भी पारित कर दिया। इस कानून के तहत राष्ट्रपति को कुछ शर्तों के आधार पर उन देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार मिल सकता है, जो रूस से तेल और गैस खरीदना जारी रखते हैं।

  • फर्जी पासपोर्ट रैकेट में 5वीं गिरफ्तारी: एजेंट नसीम धराया, कच्छ-नागपुर के मठों के पते पर भोपाल से बने 30 तक पासपोर्ट

    फर्जी पासपोर्ट रैकेट में 5वीं गिरफ्तारी: एजेंट नसीम धराया, कच्छ-नागपुर के मठों के पते पर भोपाल से बने 30 तक पासपोर्ट


    भोपाल। भोपाल और ग्वालियर से जुड़े फर्जी पासपोर्ट मामले की जांच में अब एजेंट नेटवर्क की कड़ियां सामने आने लगी हैं। बांग्लादेशी नागरिकों के कथित तौर पर फर्जी भारतीय दस्तावेज तैयार कर पासपोर्ट हासिल करने के मामले में एसटीएफ ने पांचवीं गिरफ्तारी की है। भोपाल से पासपोर्ट एजेंट नसीम अख्तर को पकड़ा गया है। पूछताछ में सामने आया है कि वह 20 से ज्यादा पासपोर्ट बनवाने की प्रक्रिया में शामिल रहा। जांच के दौरान कच्छ और नागपुर के मठों के पतों का इस्तेमाल कर भोपाल से करीब 25 से 30 पासपोर्ट बनवाए जाने की जानकारी भी सामने आई है।

    एसटीएफ के मुताबिक इस नेटवर्क में पासपोर्ट बनवाने के लिए लोगों से करीब 20 हजार रुपए तक लिए जाते थे। पुलिस वेरिफिकेशन को छोड़कर आवेदन से लेकर पासपोर्ट तैयार होने तक की ज्यादातर प्रक्रिया एजेंट संभालता था। इसी कड़ी में नसीम अख्तर की भूमिका सामने आने के बाद उसे गिरफ्तार किया गया। अब जांच एजेंसी उन सभी पासपोर्ट और उनमें इस्तेमाल किए गए दस्तावेजों की पड़ताल कर रही है जिनमें नसीम की भूमिका बताई गई है।

    पूछताछ में नसीम ने बताया कि वह वर्ष 2016 से भोपाल के एमपी नगर इलाके में टूर एंड ट्रैवल्स का काम करता था। इसी कारोबार के दौरान वह पासपोर्ट संबंधी काम से जुड़ गया और बाद में पासपोर्ट एजेंट के तौर पर काम करने लगा। इसी दौरान भोपाल पासपोर्ट कार्यालय के बाहर उसकी मुलाकात मित्यानंद भिक्षु उर्फ रेयाल चौधरी भिक्षु से हुई। इसके बाद दोनों के बीच संपर्क बढ़ा और कथित तौर पर पासपोर्ट बनवाने का काम शुरू हुआ।

    जांच के अनुसार मित्यानंद भिक्षु नसीम को पासपोर्ट बनवाने वाले लोगों के नाम और दस्तावेज उपलब्ध कराता था। नसीम उन्हीं दस्तावेजों के आधार पर ऑनलाइन आवेदन करता था। एसटीएफ अब यह पता लगाने में जुटी है कि इन दस्तावेजों की उत्पत्ति कहां से हुई और आवेदन में दर्ज पहचान तथा वास्तविक पहचान के बीच कितना अंतर था।

    नसीम के खिलाफ नागपुर में पहले से एक आपराधिक मामला दर्ज होने की जानकारी भी जांच में सामने आई है। एसटीएफ इस पुराने मामले और वर्तमान नेटवर्क के बीच किसी संभावित कड़ी की भी पड़ताल कर रही है।

    एसटीएफ एसपी राजेश सिंह भदौरिया के मुताबिक इस मामले में नसीम से पहले प्रियान चौधरी जय चौधरी रियाल चौधरी और विप्लव अधिकारी की गिरफ्तारी हो चुकी है। अब नसीम पांचवां गिरफ्तार आरोपी है। जांच के लिए एसटीएफ की छह टीमें कई राज्यों में दबिश और पूछताछ कर रही हैं। करीब 25 लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है जबकि अब तक 150 से ज्यादा लोगों से पूछताछ की जा चुकी है।

    जांच में यह भी सामने आया है कि रियाल करीब 10 साल पहले भारत आया था। आरोप है कि उसने 2021-22 के आसपास बौद्ध भिक्षुओं के नाम पर नेटवर्क तैयार करना शुरू किया। इसके बाद साथियों के भारतीय नाम से दस्तावेज तैयार कराए गए और उन्हीं के आधार पर पासपोर्ट बनवाए गए।

    मामले की जांच में कई ऐसे पासपोर्ट धारकों की जानकारी सामने आई है जिनके वास्तविक नाम और पासपोर्ट में दर्ज नाम अलग पाए गए हैं। यानी दस्तावेजों के जरिए कथित तौर पर पहचान बदलकर पासपोर्ट हासिल किए गए। एसटीएफ अब इन पासपोर्ट धारकों के विदेश यात्रा रिकॉर्ड और दस्तावेजों की भी जांच कर रही है। जांच आगे बढ़ने के साथ इस नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों और फर्जी दस्तावेज तैयार करने की पूरी प्रक्रिया का खुलासा होने की संभावना है।