Author: bharati

  • ट्रंप का मास्टरप्लान! सऊदी परमाणु समझौते के बदले इजरायल से दोस्ती की शर्त, मध्य पूर्व की राजनीति में हलचल

    ट्रंप का मास्टरप्लान! सऊदी परमाणु समझौते के बदले इजरायल से दोस्ती की शर्त, मध्य पूर्व की राजनीति में हलचल


    नई दिल्ली। अमेरिका ने एक बार फिर साफ कर दिया है कि सऊदी अरब के साथ प्रस्तावित नागरिक परमाणु समझौता केवल ऊर्जा सहयोग तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि इसके साथ इजरायल के साथ रिश्तों को सामान्य बनाने की बड़ी कूटनीतिक शर्त भी जुड़ी हुई है। व्हाइट हाउस ने संकेत दिए हैं कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मध्य पूर्व नीति का सबसे अहम उद्देश्य सऊदी अरब को अब्राहम अकॉर्ड्स में शामिल कराना और इजरायल के साथ उसके संबंधों को औपचारिक रूप से सामान्य बनाना है। इस बयान ने एक बार फिर पश्चिम एशिया की बदलती भू-राजनीतिक तस्वीर को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है।

    व्हाइट हाउस के डिप्टी चीफ ऑफ स्टाफ स्टीफन मिलर ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप ने सऊदी नेतृत्व के सामने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि इजरायल के साथ संबंध सामान्य करना उनकी प्राथमिक अपेक्षाओं में शामिल है। उन्होंने कहा कि यह केवल वर्तमान कार्यकाल की नीति नहीं बल्कि लंबे समय से ट्रंप प्रशासन की रणनीतिक सोच का हिस्सा रही है। हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि परमाणु समझौता पहले होगा या इजरायल से रिश्तों का सामान्यीकरण लेकिन इतना जरूर कहा कि दोनों मुद्दे एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं।

    मिलर ने ट्रंप की सऊदी अरब के साथ वर्षों पुरानी कूटनीतिक भागीदारी का जिक्र करते हुए कहा कि 2017 में रियाद में दिए गए ऐतिहासिक भाषण के बाद से ही अमेरिका ने सऊदी अरब को क्षेत्रीय स्थिरता का मजबूत साझेदार बनाने की दिशा में लगातार काम किया है। उनके अनुसार राष्ट्रपति ट्रंप सऊदी नेतृत्व की रणनीतिक सोच और भविष्य की योजनाओं को अच्छी तरह समझते हैं और उन्हें भरोसा है कि आने वाले समय में यह साझेदारी मध्य पूर्व में ऐतिहासिक बदलाव का कारण बनेगी।

    व्हाइट हाउस का मानना है कि यदि सऊदी अरब इजरायल के साथ औपचारिक संबंध स्थापित करता है तो इससे पूरे क्षेत्र में स्थिरता बढ़ेगी और अब्राहम अकॉर्ड्स को नई मजबूती मिलेगी। ट्रंप के पहले कार्यकाल में संयुक्त अरब अमीरात बहरीन मोरक्को और सूडान ने इजरायल के साथ संबंध सामान्य किए थे। अब अमेरिकी प्रशासन चाहता है कि सऊदी अरब भी इस पहल का हिस्सा बने क्योंकि उसे क्षेत्र का सबसे प्रभावशाली अरब देश माना जाता है।

    इस दौरान स्टीफन मिलर ने निकारागुआ की राजनीति पर भी तीखी टिप्पणी की। उन्होंने आरोप लगाया कि वहां की सरकार लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर कर रही है और समाजवादी शासन चुनावी प्रक्रिया का उपयोग सत्ता हासिल करने के बाद राजनीतिक स्वतंत्रताओं को सीमित करने के लिए करता है। उन्होंने कहा कि विदेश मंत्री मार्को रुबियो पहले ही इस मुद्दे पर अमेरिकी नीति स्पष्ट कर चुके हैं।

    मिलर ने यह भी दावा किया कि ट्रंप प्रशासन की व्यापक रणनीति पश्चिमी गोलार्ध में अमेरिका के प्रभाव को मजबूत करने और सहयोगी देशों के साथ रिश्तों को नई दिशा देने पर केंद्रित है। उनके अनुसार कई देशों की सरकारें अमेरिका की सुरक्षा और समृद्धि आधारित नीति के साथ खड़ी हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि सऊदी अरब के साथ नागरिक परमाणु समझौते और इजरायल से संबंध सामान्य करने की अमेरिकी कोशिशें आने वाले समय में मध्य पूर्व की राजनीति को नई दिशा दे सकती हैं। यदि यह पहल सफल होती है तो क्षेत्रीय कूटनीति में एक और बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।

  • मध्य पूर्व में बढ़ा तनाव ट्रंप का बड़ा दावा ईरान के पास समझौते के अलावा कोई विकल्प नहीं अमेरिका पूरी तरह तैयार

    मध्य पूर्व में बढ़ा तनाव ट्रंप का बड़ा दावा ईरान के पास समझौते के अलावा कोई विकल्प नहीं अमेरिका पूरी तरह तैयार


    नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर तनाव गहराता दिखाई दे रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ शब्दों में कहा है कि ईरान के पास समझौते के अलावा अब कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा है। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका किसी भी संभावित सैन्य कार्रवाई के लिए पूरी तरह तैयार है लेकिन उनकी पहली प्राथमिकता अब भी कूटनीतिक समाधान और बातचीत ही है। ट्रंप के इस बयान ने एक बार फिर मध्य पूर्व की सुरक्षा और वैश्विक राजनीति को लेकर नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है।

    व्हाइट हाउस में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान ट्रंप ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत जारी है और वाशिंगटन हर परिस्थिति के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि यदि जरूरत पड़ी तो मौजूदा सैन्य अभियान को और तेज किया जा सकता है लेकिन अगर ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को छोड़ने पर सहमत हो जाता है तो बातचीत के जरिए समाधान निकालना सबसे बेहतर रास्ता होगा। उनके मुताबिक अमेरिका की नीति स्पष्ट है कि ईरान को किसी भी कीमत पर परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दिए जाएंगे।

    ट्रंप ने कहा कि फिलहाल दो रास्ते खुले हैं। पहला रास्ता सैन्य कार्रवाई का है जिसमें अमेरिका अपनी ताकत का इस्तेमाल कर सकता है जबकि दूसरा रास्ता बातचीत और समझौते का है। उन्होंने दावा किया कि ईरान पहले की तुलना में अब ज्यादा गंभीरता से वार्ता कर रहा है हालांकि उन्होंने यह भी माना कि किसी अंतिम समझौते की अभी कोई गारंटी नहीं है। उनके अनुसार हालात लगातार बदल रहे हैं और आने वाले समय में तस्वीर और साफ होगी।

    अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि यदि ईरान ने परमाणु हथियार विकसित करने की दिशा में कोई कदम बढ़ाया तो अमेरिका पहले से कहीं अधिक कड़ी कार्रवाई करेगा। उन्होंने इसे अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा और उसके सहयोगी देशों की सुरक्षा से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा बताया। ट्रंप का कहना था कि अमेरिका इस मामले में किसी भी तरह का जोखिम उठाने के लिए तैयार नहीं है।

    उन्होंने जानकारी दी कि उपराष्ट्रपति जेडी वेंस विदेश मंत्री मार्को रुबियो और प्रशासन के कई वरिष्ठ अधिकारी ईरानी प्रतिनिधियों के साथ लगातार संपर्क में हैं। ट्रंप के मुताबिक कूटनीतिक प्रयास जारी हैं और अमेरिका बातचीत के सभी विकल्प खुले रखना चाहता है। हालांकि उन्होंने यह भी दोहराया कि यदि वार्ता विफल होती है तो सैन्य विकल्प पूरी तरह तैयार रहेगा।

    अपने संबोधन में ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका की पिछली सैन्य कार्रवाइयों से ईरान की सैन्य क्षमता को बड़ा नुकसान पहुंचा है। उन्होंने कहा कि ईरान के कई अहम सैन्य और रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया गया जिससे उसकी ताकत काफी कमजोर हुई है। ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिका के दबाव अभियान ने पूरे क्षेत्र का रणनीतिक संतुलन बदल दिया है और अब ईरान पहले जैसी स्थिति में नहीं है।

    रूस और चीन की संभावित भूमिका पर पूछे गए सवाल के जवाब में ट्रंप ने कहा कि दोनों देशों ने फिलहाल किसी बड़े स्तर पर ईरान के समर्थन में हस्तक्षेप नहीं किया है। उन्होंने दावा किया कि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने उन्हें भरोसा दिलाया है कि वे इस विवाद में सीधे तौर पर शामिल नहीं होंगे। हालांकि उन्होंने स्वीकार किया कि ईरान के इन दोनों देशों के साथ लंबे समय से संबंध रहे हैं।

    ट्रंप ने अपने पिछले सैन्य अभियानों का बचाव करते हुए कहा कि इन्हीं कदमों की वजह से ईरान परमाणु हथियार हासिल करने में सफल नहीं हो पाया। उन्होंने यह भी दावा किया कि यदि अमेरिका ने समय रहते कार्रवाई नहीं की होती तो क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति कहीं अधिक गंभीर हो सकती थी। उनके अनुसार अमेरिका का उद्देश्य युद्ध नहीं बल्कि स्थायी शांति और क्षेत्रीय स्थिरता सुनिश्चित करना है।

    दूसरी ओर ईरान लगातार यह कहता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है और उसका मकसद परमाणु हथियार बनाना नहीं है। इसके बावजूद अमेरिका और कई पश्चिमी देश लंबे समय से ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर चिंता जताते रहे हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में दोनों देशों के बीच जारी बातचीत और संभावित समझौता पूरी दुनिया की नजरों का केंद्र बना रहेगा।

  • शनि देव को करना है प्रसन्न तो शनिवार को करें पीपल से जुड़े ये चमत्कारी उपाय दूर होंगी बाधाएं और बढ़ेगा सौभाग्य

    शनि देव को करना है प्रसन्न तो शनिवार को करें पीपल से जुड़े ये चमत्कारी उपाय दूर होंगी बाधाएं और बढ़ेगा सौभाग्य


    नई दिल्ली। सनातन धर्म में पीपल के पेड़ को अत्यंत पवित्र और दिव्य माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस वृक्ष में ब्रह्मा विष्णु और महेश का वास होता है इसलिए इसकी पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है। खासतौर पर शनिवार के दिन पीपल के वृक्ष की आराधना का महत्व और बढ़ जाता है क्योंकि यह दिन न्याय के देवता शनिदेव को समर्पित माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि श्रद्धा और नियमपूर्वक पीपल से जुड़े कुछ विशेष उपाय करने से शनि दोष का प्रभाव कम हो सकता है तथा जीवन में आने वाली अनेक बाधाओं से राहत मिल सकती है। हालांकि यह सभी उपाय धार्मिक आस्था और परंपराओं पर आधारित हैं।

    ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जब किसी व्यक्ति की कुंडली में शनि की स्थिति प्रतिकूल होती है या शनि की साढ़ेसाती अथवा ढैया का प्रभाव रहता है तब जीवन में संघर्ष आर्थिक परेशानियां मानसिक तनाव और कार्यों में बार बार रुकावट जैसी स्थितियां उत्पन्न हो सकती हैं। ऐसे समय में लोग पूजा पाठ दान और विशेष धार्मिक उपायों का सहारा लेते हैं। माना जाता है कि यदि शनिवार के दिन पीपल के वृक्ष की श्रद्धा से पूजा की जाए तो शनिदेव की कृपा प्राप्त हो सकती है और नकारात्मक प्रभाव धीरे धीरे कम होने लगते हैं।

    शनिवार की सुबह सूर्योदय से पहले स्नान करके पीपल के पेड़ की जड़ में जल अर्पित करना अत्यंत शुभ माना गया है। कई लोग जल में थोड़ा गंगाजल मिलाकर भी अर्पित करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि इससे वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और जीवन की बाधाएं दूर होने लगती हैं। जल अर्पित करते समय मन को शांत रखकर ईश्वर का स्मरण करना विशेष महत्व रखता है।

    शनिवार की संध्या के समय पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाने की भी परंपरा है। दीप प्रज्ज्वलित करते हुए श्रद्धा से ॐ शं शनैश्चराय नमः मंत्र का जाप किया जाता है। मान्यता है कि यह उपाय मानसिक अशांति को कम करने और जीवन में स्थिरता तथा सकारात्मकता लाने में सहायक माना जाता है।

    पीपल के वृक्ष की सात परिक्रमा करने का भी विशेष महत्व बताया गया है। परिक्रमा करते समय ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः मंत्र का जाप करने की परंपरा है। धार्मिक विश्वास है कि इससे शनि दोष के कारण आने वाले कष्टों में कमी आती है और व्यक्ति को अपने कार्यों में सफलता मिलने लगती है।

    शनिवार के दिन पीपल के वृक्ष के नीचे काला तिल सरसों का तेल और काला वस्त्र अर्पित करने की भी मान्यता है। इसे शनिदेव को प्रसन्न करने का एक प्रभावशाली धार्मिक उपाय माना जाता है। कई श्रद्धालु इसे क्रोध में कमी आत्मविश्वास में वृद्धि और जीवन में नई संभावनाओं के खुलने से जोड़कर देखते हैं।

    इसके अलावा गुड़ और चने का भोग पीपल के नीचे अर्पित कर बाद में उसे कौओं कुत्तों या जरूरतमंद लोगों में वितरित करना भी शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार यह सेवा और दान का कार्य शनिदेव की कृपा प्राप्त करने का माध्यम बन सकता है तथा घर में सुख समृद्धि और सौभाग्य का आगमन होता है।

    धार्मिक उपायों के साथ यह भी आवश्यक माना जाता है कि व्यक्ति अपने व्यवहार में ईमानदारी अनुशासन और सेवा की भावना बनाए रखे। ज्योतिष और धर्मग्रंथों के अनुसार केवल पूजा पाठ ही नहीं बल्कि अच्छे कर्म भी शनिदेव की कृपा प्राप्त करने का सबसे प्रभावी मार्ग माने जाते हैं। इसलिए शनिवार के दिन किए गए ये उपाय यदि श्रद्धा सदाचार और सकारात्मक सोच के साथ किए जाएं तो जीवन में मानसिक संतुलन और आत्मविश्वास बढ़ाने का माध्यम बन सकते हैं।

  • ई रिक्शा चलाने वाले बिहार के लाल ने रचा इतिहास कॉमनवेल्थ गेम्स में झंडू कुमार ने दिलाया भारत को पहला मेडल

    ई रिक्शा चलाने वाले बिहार के लाल ने रचा इतिहास कॉमनवेल्थ गेम्स में झंडू कुमार ने दिलाया भारत को पहला मेडल


    नई दिल्ली। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत ने अपने अभियान की शानदार शुरुआत करते हुए पहला पदक जीत लिया है। यह ऐतिहासिक उपलब्धि बिहार के पैरा पावरलिफ्टर झंडू कुमार ने हासिल की जिन्होंने पुरुषों की हेवीवेट स्पर्धा में ब्रॉन्ज मेडल जीतकर पूरे देश को गर्व का अवसर दिया। ग्लासगो में आयोजित इस मुकाबले में झंडू कुमार ने अपने दमदार प्रदर्शन से साबित कर दिया कि कठिन परिस्थितियां कभी भी मजबूत इरादों को नहीं रोक सकतीं। उनका यह पदक केवल भारत के लिए पहला मेडल नहीं बल्कि संघर्ष और मेहनत की जीत का प्रतीक भी बन गया।

    झंडू कुमार की सफलता इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि उनका जीवन बेहद कठिन परिस्थितियों में बीता है। कभी ई रिक्शा चलाकर परिवार की जिम्मेदारियां निभाने वाले झंडू के पिता सड़क किनारे सब्जियां बेचकर घर चलाते थे। सीमित संसाधनों और आर्थिक तंगी के बावजूद उन्होंने अपने सपनों को कभी मरने नहीं दिया। लगातार अभ्यास और आत्मविश्वास के दम पर उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का तिरंगा ऊंचा कर दिखाया।

    29 वर्षीय झंडू कुमार ने प्रतियोगिता की शुरुआत पूरे आत्मविश्वास के साथ की। दूसरे प्रयास में उन्होंने 190 किलोग्राम वजन सफलतापूर्वक उठाया और खुद को पदक की दौड़ में मजबूत स्थिति में पहुंचा दिया। यह वजन उनके व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन से थोड़ा कम जरूर था लेकिन प्रतियोगिता के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण साबित हुआ। इसके बाद उन्होंने अंतिम प्रयास में 196 किलोग्राम वजन उठाकर बड़ा रिकॉर्ड बनाने की कोशिश की लेकिन मामूली अंतर से सफल नहीं हो सके। हालांकि उनका पहले का प्रदर्शन उन्हें पदक दिलाने के लिए पर्याप्त साबित हुआ।

    मुकाबले में आखिरी क्षण तक रोमांच बना रहा। नाइजीरिया के रिलुवान इदरीस ने अंतिम प्रयास में 212 किलोग्राम वजन उठाने की कोशिश की लेकिन वह इसमें असफल रहे। इसी के साथ झंडू कुमार का ब्रॉन्ज मेडल पूरी तरह पक्का हो गया। इस रोमांचक नतीजे के बाद भारतीय दल और दर्शकों में खुशी की लहर दौड़ गई।

    प्रतियोगिता में नाइजीरिया के रिलुवान इदरीस ने 208 किलोग्राम की सफल लिफ्ट के साथ स्वर्ण पदक अपने नाम किया जबकि इंग्लैंड के मैथ्यू हार्डिंग ने 199 किलोग्राम वजन उठाकर रजत पदक हासिल किया। झंडू कुमार ने 190 किलोग्राम की सफल लिफ्ट और 130.9 अंक के साथ तीसरा स्थान प्राप्त करते हुए भारत की झोली में पहला पदक डाल दिया।

    इस उपलब्धि का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि दिन की शुरुआत भारत के लिए निराशाजनक रही थी। पुरुषों की लाइटवेट स्पर्धा में भारतीय खिलाड़ी पदक से चूक गया था लेकिन झंडू कुमार ने शानदार प्रदर्शन कर पूरे भारतीय दल का मनोबल बढ़ा दिया। उनकी जीत ने यह संदेश दिया कि भारतीय खिलाड़ी हर चुनौती का सामना करने के लिए तैयार हैं।

    झंडू कुमार की कहानी लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा है। उन्होंने यह साबित किया कि सफलता पाने के लिए महंगे संसाधनों से ज्यादा जरूरी मजबूत इरादे और लगातार मेहनत होती है। बिहार के एक साधारण परिवार से निकलकर कॉमनवेल्थ गेम्स के मंच पर देश के लिए पदक जीतना उनके संघर्ष और समर्पण का सबसे बड़ा प्रमाण है। अब पूरे देश को उम्मीद है कि इस पहले पदक के बाद भारतीय खिलाड़ी आने वाले मुकाबलों में भी शानदार प्रदर्शन करते हुए पदकों की संख्या लगातार बढ़ाएंगे।

  • एलन मस्क की बड़ी कामयाबी स्टारशिप की सफल उड़ान से नासा के चंद्र मिशन और मंगल अभियान को मिली नई रफ्तार

    एलन मस्क की बड़ी कामयाबी स्टारशिप की सफल उड़ान से नासा के चंद्र मिशन और मंगल अभियान को मिली नई रफ्तार


    नई दिल्ली। स्पेसएक्स ने एक बार फिर अंतरिक्ष विज्ञान की दुनिया में बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए दुनिया के सबसे बड़े और सबसे शक्तिशाली रॉकेट स्टारशिप की 13वीं परीक्षण उड़ान को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। इस मिशन की सबसे खास बात यह रही कि पहली बार स्टारशिप के जरिए कंपनी ने अपने 20 सबसे उन्नत स्टारलिंक इंटरनेट उपग्रहों को अंतरिक्ष में सफलतापूर्वक तैनात किया। इस सफलता को केवल स्पेसएक्स ही नहीं बल्कि वैश्विक अंतरिक्ष उद्योग और नासा के भविष्य के चंद्र अभियानों के लिए भी बेहद अहम माना जा रहा है। अब यह मिशन इस बात का संकेत दे रहा है कि इंसानों को दोबारा चंद्रमा पर भेजने और भविष्य में मंगल ग्रह तक पहुंचाने का सपना तेजी से वास्तविकता के करीब पहुंच रहा है।

    करीब 407 फीट ऊंचे विशालकाय स्टारशिप रॉकेट ने टेक्सास स्थित स्पेसएक्स के स्टारबेस लॉन्च साइट से उड़ान भरी। इससे पहले इंजन में तकनीकी खराबी और खराब मौसम के कारण मिशन को दो बार स्थगित करना पड़ा था लेकिन इस बार मौसम और तकनीकी व्यवस्था दोनों ने साथ दिया और रॉकेट ने सफल उड़ान भरी। लॉन्च के शुरुआती चरण में सभी इंजन पूरी तरह सामान्य तरीके से संचालित हुए जिससे मिशन ने मजबूती के साथ अपनी शुरुआत की।

    हालांकि उड़ान के दौरान पहले चरण यानी बूस्टर की वापसी पूरी तरह योजना के मुताबिक नहीं हो सकी। वापसी के समय सभी इंजन दोबारा सक्रिय नहीं हो पाए जिसके कारण बूस्टर नियंत्रित लैंडिंग करने के बजाय मैक्सिको की खाड़ी में गिर गया। इसके बावजूद मिशन का मुख्य उद्देश्य पूरी तरह सफल रहा क्योंकि बूस्टर से अलग होने के बाद स्टारशिप निर्धारित ऊंचाई तक पहुंचा और लगभग 200 किलोमीटर की ऊंचाई पर एक के बाद एक सभी 20 अत्याधुनिक स्टारलिंक उपग्रहों को सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में स्थापित कर दिया।

    करीब एक घंटे की उड़ान पूरी करने के बाद स्टारशिप भारतीय महासागर में सुरक्षित स्प्लैशडाउन करने में भी सफल रहा। खास बात यह रही कि पानी में उतरने के बाद अंतरिक्ष यान कुछ समय तक सतह पर तैरता रहा जिससे इंजीनियरों को कई महत्वपूर्ण तकनीकी जानकारियां जुटाने का अवसर मिला। इस सफलता के बाद स्पेसएक्स के वैज्ञानिकों और इंजीनियरों ने इसे कंपनी के लिए बड़ी तकनीकी उपलब्धि बताया।

    इस मिशन में भेजे गए नए स्टारलिंक उपग्रहों ने अंतरिक्ष में पहले से मौजूद उपग्रहों के साथ लेजर तकनीक के जरिए सफल संपर्क स्थापित किया। इससे भविष्य में इंटरनेट सेवा की गति और गुणवत्ता को और बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। वर्तमान में स्पेसएक्स के दस हजार से अधिक स्टारलिंक उपग्रह दुनिया के कई देशों में हाई स्पीड इंटरनेट सेवा उपलब्ध करा रहे हैं और यह दुनिया का सबसे बड़ा सैटेलाइट नेटवर्क बन चुका है।

    मिशन के दौरान वैज्ञानिकों ने स्टारशिप की हीट शील्ड का भी महत्वपूर्ण परीक्षण किया। कुछ उपग्रहों पर लगाए गए कैमरों ने पृथ्वी के वायुमंडल में दोबारा प्रवेश के दौरान हीट शील्ड की तस्वीरें भेजीं जबकि सेंसरों के जरिए अत्यधिक तापमान और दबाव से जुड़े आंकड़े जुटाए गए। इन जानकारियों का उपयोग भविष्य के मानव मिशनों को और अधिक सुरक्षित बनाने में किया जाएगा।

    यह मिशन नासा के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि आने वाले आर्टेमिस तृतीय अभियान में इसी स्टारशिप का उपयोग अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा की सतह तक पहुंचाने के लिए किया जाना है। दूसरी ओर एलन मस्क का सबसे बड़ा सपना स्टारशिप के जरिए इंसानों को मंगल ग्रह तक पहुंचाना और वहां भविष्य में मानव बस्ती बसाना है। ऐसे में स्टारशिप की यह सफल परीक्षण उड़ान अंतरिक्ष अन्वेषण के नए युग की दिशा में एक और मजबूत कदम मानी जा रही है।

  • सोशल मीडिया पर शाहरुख खान के नाम से फैलाई गई भ्रामक पोस्ट वायरल दावा निकला पूरी तरह फर्जी

    सोशल मीडिया पर शाहरुख खान के नाम से फैलाई गई भ्रामक पोस्ट वायरल दावा निकला पूरी तरह फर्जी


    नई दिल्ली। दिल्ली के जंतर मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलन के बीच सोशल मीडिया पर बॉलीवुड अभिनेता शाहरुख खान के नाम से एक पोस्ट तेजी से वायरल होने लगी। इस पोस्ट में दावा किया गया कि शाहरुख खान ने छात्रों से आंदोलन जारी रखने और किसी भी कीमत पर पीछे नहीं हटने की अपील की है। इतना ही नहीं इस वायरल पोस्ट को सलमान खान के हालिया बयान से जोड़ते हुए यह भी कहा गया कि शाहरुख ने अप्रत्यक्ष रूप से सलमान की अपील का जवाब दिया है। देखते ही देखते यह पोस्ट सोशल मीडिया के कई प्लेटफॉर्म पर लाखों लोगों तक पहुंच गई और इसे सच मानकर बड़ी संख्या में साझा भी किया जाने लगा।

    वायरल पोस्ट में लिखा गया था कि जब लड़ाई अधिकारों की हो तब चुप रहना समझदारी नहीं बल्कि शांति से डटे रहना ही सही रास्ता है। साथ ही यह भी कहा गया कि जब तक भरोसा दोबारा कायम न हो जाए तब तक आंदोलन जारी रहना चाहिए क्योंकि यह लड़ाई केवल वर्तमान की नहीं बल्कि भविष्य को सुरक्षित बनाने की है। पोस्ट की भाषा और प्रस्तुति ऐसी थी कि पहली नजर में यह किसी आधिकारिक बयान जैसी दिखाई दे रही थी।

    हालांकि जब इस दावे की जांच की गई तो सच्चाई बिल्कुल अलग निकली। शाहरुख खान के आधिकारिक एक्स अकाउंट पर इस तरह का कोई भी पोस्ट मौजूद नहीं मिला। इसके बाद यह स्पष्ट हो गया कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रही पोस्ट अभिनेता की नहीं थी। जांच में सामने आया कि यह पोस्ट एक फैन पेज से साझा की गई थी जिसने शाहरुख खान जैसी प्रोफाइल फोटो और लगभग मिलता जुलता यूजरनेम इस्तेमाल किया था। इसी वजह से कई लोग भ्रमित हो गए और उसे अभिनेता का आधिकारिक अकाउंट समझ बैठे।

    सोशल मीडिया पर इस तरह की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं जहां किसी मशहूर व्यक्ति के नाम और तस्वीर का इस्तेमाल कर फर्जी पोस्ट वायरल कर दी जाती हैं। कई बार ऐसे पोस्ट लोगों की भावनाओं को प्रभावित करते हैं और बिना पुष्टि के तेजी से फैल जाते हैं। यही कारण है कि किसी भी वायरल दावे पर विश्वास करने से पहले संबंधित व्यक्ति के आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट या विश्वसनीय स्रोत से उसकी पुष्टि करना बेहद जरूरी होता है।

    छात्र आंदोलन और उससे जुड़े मुद्दों पर कई सार्वजनिक हस्तियों ने अपनी राय जरूर रखी है लेकिन शाहरुख खान की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। ऐसे में उनके नाम से वायरल हो रहा यह संदेश पूरी तरह भ्रामक साबित हुआ। यह घटना एक बार फिर याद दिलाती है कि डिजिटल दौर में फर्जी खबरें और नकली सोशल मीडिया अकाउंट कितनी तेजी से लोगों को भ्रमित कर सकते हैं।

    विशेषज्ञ भी सलाह देते हैं कि किसी भी वायरल पोस्ट को साझा करने से पहले उसकी सत्यता की जांच जरूर करें। केवल प्रोफाइल फोटो या नाम देखकर किसी अकाउंट को असली मान लेना सही नहीं है क्योंकि फर्जी अकाउंट बनाने वालों का उद्देश्य अक्सर भ्रम फैलाना और वायरलिटी हासिल करना होता है। सोशल मीडिया का जिम्मेदारी से उपयोग करना और तथ्य आधारित जानकारी साझा करना आज पहले से कहीं अधिक जरूरी हो गया है।

  • हरारे में फिर होगा वैभव का धमाका टीम इंडिया की नजर सीरीज पर जिम्बाब्वे के लिए करो या मरो का मुकाबला

    हरारे में फिर होगा वैभव का धमाका टीम इंडिया की नजर सीरीज पर जिम्बाब्वे के लिए करो या मरो का मुकाबला


    नई दिल्ली। भारत और जिम्बाब्वे के बीच तीन मैचों की टी20 सीरीज का दूसरा मुकाबला हरारे स्पोर्ट्स क्लब में खेला जाएगा जहां टीम इंडिया की नजरें जीत के साथ सीरीज अपने नाम करने पर होंगी। पहले मुकाबले में शानदार प्रदर्शन करते हुए भारतीय टीम ने सात विकेट से जीत दर्ज की थी और अब उसके पास अजेय बढ़त हासिल करने का सुनहरा मौका है। दूसरी ओर मेजबान जिम्बाब्वे के लिए यह मुकाबला करो या मरो जैसा होगा क्योंकि हार के साथ सीरीज भी हाथ से निकल जाएगी। ऐसे में क्रिकेट प्रेमियों को एक बार फिर रोमांच से भरपूर मुकाबले की उम्मीद है।

    पहले मैच के सबसे बड़े हीरो युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी रहे जिन्होंने अपनी बेखौफ बल्लेबाजी से सभी का दिल जीत लिया। महज 19 गेंदों में अर्धशतक पूरा कर उन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपनी प्रतिभा का दमदार परिचय दिया। उनकी आक्रामक बल्लेबाजी ने जिम्बाब्वे के गेंदबाजों की पूरी रणनीति को ध्वस्त कर दिया था। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या वैभव दूसरे मुकाबले में भी उसी अंदाज में बल्लेबाजी करते हुए विपक्षी गेंदबाजों पर कहर बरपा पाएंगे। अगर उनका बल्ला एक बार फिर चल पड़ा तो जिम्बाब्वे की मुश्किलें कई गुना बढ़ सकती हैं।

    टीम इंडिया के लिए सिर्फ वैभव ही नहीं बल्कि सलामी बल्लेबाज अभिषेक शर्मा भी बेहद अहम खिलाड़ी होंगे। टी20 क्रिकेट में उनकी तेज शुरुआत किसी भी मैच का रुख बदलने की क्षमता रखती है। यदि अभिषेक और वैभव शुरुआती ओवरों में आक्रामक बल्लेबाजी करते हैं तो भारत एक बार फिर बड़ा स्कोर खड़ा कर सकता है। मध्यक्रम में मौजूद बल्लेबाज भी अच्छी लय में दिखाई दे रहे हैं जिससे भारतीय बल्लेबाजी पहले से अधिक मजबूत नजर आ रही है।

    गेंदबाजी विभाग में तेज रफ्तार के लिए मशहूर मयंक यादव पर भी सभी की नजरें रहेंगी। पहले मुकाबले में उन्होंने अपनी रफ्तार और सटीक लाइन लेंथ से जिम्बाब्वे के बल्लेबाजों को खूब परेशान किया था। दो महत्वपूर्ण विकेट लेने के साथ उन्हें प्लेयर ऑफ द मैच भी चुना गया था। उनकी 150 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक की रफ्तार विपक्षी बल्लेबाजों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन सकती है। अगर मयंक एक बार फिर नई गेंद से शुरुआती झटके दिलाते हैं तो भारत की जीत की राह और आसान हो जाएगी।

    भारतीय टीम पहले मुकाबले की तरह बल्लेबाजी गेंदबाजी और फील्डिंग तीनों विभागों में शानदार प्रदर्शन दोहराना चाहेगी। कप्तान की कोशिश होगी कि टीम शुरुआती बढ़त का पूरा फायदा उठाए और सीरीज पर कब्जा जमाए। वहीं जिम्बाब्वे अपनी घरेलू परिस्थितियों का लाभ उठाकर वापसी करने की पूरी कोशिश करेगा। मेजबान टीम जानती है कि इस मुकाबले में हार का मतलब सीरीज गंवाना होगा इसलिए वह पूरी ताकत के साथ मैदान पर उतरेगी।

    हरारे में होने वाला यह मुकाबला युवा खिलाड़ियों के लिए खुद को साबित करने का बड़ा अवसर भी माना जा रहा है। वैभव सूर्यवंशी के प्रदर्शन पर पूरे क्रिकेट जगत की नजरें टिकी होंगी क्योंकि उन्होंने कम उम्र में जिस आत्मविश्वास और आक्रामक अंदाज का परिचय दिया है उसने उन्हें भारतीय क्रिकेट का नया सितारा बना दिया है। यदि वह दूसरी बार भी धमाकेदार पारी खेलते हैं तो यह सीरीज उनके करियर का एक और यादगार अध्याय बन सकती है।

  • PAK: आतंकियों ने विस्फोटक से भरी गाड़ी सुरक्षा चौकी से टकराई, 12 सैनिकों समेत 15 की मौत

    PAK: आतंकियों ने विस्फोटक से भरी गाड़ी सुरक्षा चौकी से टकराई, 12 सैनिकों समेत 15 की मौत


    इस्लामाबाद ।
    पाकिस्तानी सेना (Pakistan Army) ने शुक्रवार (24 जुलाई) को बताया कि उत्तर-पश्चिमी पाकिस्तान (North-western Pakistan) में इस्लामी आतंकवादियों (Islamic Terrorists) ने विस्फोटकों से भरी एक गाड़ी को सुरक्षा चौकी से टकरा दिया. इस हमले में 12 सैनिकों समेत 15 लोगों की मौत हो गई. रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, सेना ने बताया कि जवाबी कार्रवाई में 12 आतंकवादी भी मारे गए।

    सेना और पुलिस की ओर से ज्वाइंट रूप से संचालित इस चौकी पर हमला गुरुवार और शुक्रवार की दरमियानी रात अफगानिस्तान की सीमा के पास टैंक जिले में हुआ. यह इलाका लंबे समय से इस्लामी आतंकवादियों का गढ़ रहा है।

    आतंकवाद के गढ़ के तौर पर जाने जाने वाले पाकिस्तान के उत्तर-पश्चिमी हिस्से में हाल के महीनों में आतंकी गतिविधियों के मामले काफी बढ़े हैं. सेना की ओर से जारी बयान में बताया गया कि सुरक्षाबलों ने आतंकवादियों का मुकाबला किया. जब आतंकवादी चौकी की सुरक्षा को भेदने में नाकाम रहे तो उन्होंने विस्फोटकों से भरी गाड़ी को चौकी की बाहरी दीवार से टकरा दिया।

    स्थानीय तालिबान आतंकवादियों यानी तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान ने हमले की जिम्मेदारी ली है. संगठन ने एक बयान जारी कर दावा किया कि हमले में चार आत्मघाती हमलावर शामिल थे. TTP लंबे समय से पाकिस्तानी सरकार के खिलाफ लड़ाई लड़ रहा है.

    अफगानिस्तान पर लगाता रहा है आरोप
    पाकिस्तान लंबे समय से आरोप लगाता रहा है कि आतंकवादी अफगानिस्तान में मौजूद सुरक्षित ठिकानों का इस्तेमाल ट्रेनिंग लेने और पाकिस्तान में हमलों की योजना बनाने के लिए करते हैं. दूसरी तरफ अफगानिस्तान इन आरोपों से इनकार करता रहा है. अफगानिस्तान का कहना है कि आतंकवाद पाकिस्तान की घरेलू समस्या है. तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान 2007 से पाकिस्तानी सरकार के खिलाफ विद्रोह कर रहा है. संगठन का उद्देश्य सरकार को उखाड़ फेंकना और इस्लामी कानून लागू करना है.

  • गुजरात में रिकॉर्ड तोड़ बारिश…..बलसाड़ में एक दिन में गिरा 906 मिमी पानी, इतना दिल्ली में सालभर में भी नहीं गिरता

    गुजरात में रिकॉर्ड तोड़ बारिश…..बलसाड़ में एक दिन में गिरा 906 मिमी पानी, इतना दिल्ली में सालभर में भी नहीं गिरता


    अहमदाबाद।
    गुजरात (Gujarat) में इस बार मॉनसून (Monsoon) ने रिकॉर्ड तोड़ बारिश (Record-Breaking Rainfall) की है. 22 जुलाई सुबह 6 बजे से 23 जुलाई सुबह 6 बजे के बीच वलसाड जिले (Valsad district) के उंबरगांव में 906 मिमी बारिश दर्ज की गई. यह दिल्ली में पूरे साल होने वाली औसत 700 से 800 मिमी बारिश से भी ज्यादा है. यानी उंबरगांव में सिर्फ 24 घंटे में उतनी बारिश हो गई, जितनी दिल्ली में पूरे साल होती है।

    इतनी ज्यादा बारिश के कारण दक्षिण गुजरात के कई इलाकों में बाढ़ जैसे हालात बन गए. सड़कें, घर, दुकानें और रेलवे ट्रैक पानी में डूब गए. कई जगहों पर लोगों के घरों में पानी घुस गया और रोजमर्रा की जिंदगी पूरी तरह रुक गई. प्रशासन ने राहत और बचाव अभियान चलाकर करीब 1,200 लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाया।

    मौसम विभाग (IMD) का कहना है कि अरब सागर से लगातार आ रही नमी वाली हवाएं और मजबूत दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की वजह से इतनी ज्यादा बारिश हुई. बारिश का असर सिर्फ उंबरगांव तक सीमित नहीं रहा. वलसाड और आसपास के कई इलाकों में लगातार कई घंटों तक तेज बारिश होती रही। इससे नदियों और नालों का जलस्तर तेजी से बढ़ गया. कई जगहों पर पानी सड़कों पर आ गया, जिससे लोगों का आना-जाना मुश्किल हो गया. कुछ इलाकों में वाहन बीच रास्ते में ही फंस गए. रेलवे ट्रैक पर पानी भरने से ट्रेनों की आवाजाही भी प्रभावित हुई।

    प्रशासन, NDRF और दूसरी बचाव टीमों ने लगातार राहत का काम किया और लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाया. स्टेट इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर (SEOC) के मुताबिक, उंबरगांव में सबसे ज्यादा 906 मिमी बारिश दर्ज की गई। इसके अलावा कपराडा में 731 मिमी, नानापोंधा में 643 मिमी, धरमपुर में 499 मिमी, पारडी में 448 मिमी, वांसदा में 435 मिमी, वापी में 413 मिमी और वलसाड शहर में 403 मिमी बारिश हुई. तापी जिले के डोलवन में 378 मिमी और डांग जिले के वघई में 369 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई।

    इन आंकड़ों से साफ है कि दक्षिण गुजरात के कई हिस्सों में एक ही दिन में बहुत ज्यादा बारिश हुई. IMD के मुताबिक, इस समय दक्षिण-पश्चिम मॉनसून गुजरात के ऊपर काफी मजबूत बना हुआ है. अरब सागर से लगातार नमी से भरी हवाएं गुजरात की तरफ आ रही हैं। इसके साथ पश्चिम भारत के ऊपर बना मौसम का सिस्टम भी लंबे समय तक एक ही इलाके में बना रहा. इसी वजह से बादल लगातार उसी इलाके में बरसते रहे और कुछ ही घंटों में बहुत ज्यादा बारिश हो गई।

    जब कम समय में इतनी ज्यादा बारिश होती है, तो नदियां और नाले जल्दी भर जाते हैं. शहरों में पानी निकालने की व्यवस्था भी इतना पानी एक साथ नहीं संभाल पाती. इसी कारण सड़कों पर तेजी से पानी भर जाता है. अचानक बाढ़ जैसी स्थिति बन जाती है. दक्षिण गुजरात में भी यही हुआ।

    मौसम विभाग के मुताबिक, अगर 24 घंटे में 204.5 मिमी या उससे ज्यादा बारिश हो, तो उसे “अत्यधिक भारी बारिश” माना जाता है. लेकिन गुजरात के कई इलाकों में इससे दो, तीन और कुछ जगहों पर चार गुना तक ज्यादा बारिश हुई. सबसे ज्यादा 906 मिमी बारिश उंबरगांव में दर्ज की गई, जो सामान्य सीमा से कई गुना ज्यादा है।

    IMD ने अगले कुछ दिनों तक गुजरात के कई इलाकों में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना जताई है. हालांकि सबसे तेज बारिश का दौर धीरे-धीरे कम हो सकता है. लेकिन जिन इलाकों में पहले से पानी भरा हुआ है, वहां थोड़ी और बारिश भी परेशानी बढ़ा सकती है। इसलिए लोगों से कहा गया है कि पानी भरे रास्तों से बचें, नदियों और नालों के पास न जाएं और मौसम विभाग व स्थानीय प्रशासन की सलाह का पालन करें।

    इस बार गुजरात में मॉनसून ने दिखा दिया कि कुछ घंटों की बारिश भी कितनी बड़ी मुसीबत बन सकती है. एक दिन में हुई रिकॉर्ड बारिश ने बाढ़ जैसे हालात पैदा कर दिए। मौसम विभाग का कहना है कि अगले कुछ दिनों तक लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है, क्योंकि पहले से पानी से भरे इलाकों में थोड़ी और बारिश भी हालात बिगाड़ सकती है।

  • भारत की दो टूक…. जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में भारतीय क्षेत्रों पर चीन ने कर रखा है अवैध कब्जा

    भारत की दो टूक…. जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में भारतीय क्षेत्रों पर चीन ने कर रखा है अवैध कब्जा


    नई दिल्ली।
    भारत (India) ने दो टूक शब्दों में कहा है कि उसने कभी भी चीन (China) की संप्रभुता का उल्लंघन नहीं किया है, उलटा चीन जम्मू और कश्मीर (Jammu and Kashmir) तथा लद्दाख (Ladakh) में भारतीय क्षेत्र पर अवैध कब्जा किए हुए है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल (Randhir Jaiswal) से शुक्रवार को मीडिया ब्रीफिंग में यह सवाल पूछा गया कि हाल ही में मनीला में भारत और चीन के विदेश मंत्रियों की वार्ता के बाद चीन ने कहा है कि भारतीय विदेश मंत्री ने वार्ता के दौरान कहा कि ताइवान को लेकर भारत के रुख में बदलाव नहीं आया है और वह चीन की संप्रभुता का सम्मान करता है।

    प्रवक्ता जायसवाल ने स्पष्ट किया कि विदेश मंत्री ने साथ ही यह भी कहा कि भारत किसी भी प्रकार से चीन की संप्रभुता का उल्लंघन नहीं करता है और वह चीन से भी इसी तरह के सम्मान की अपेक्षा करता है लेकिन चीन ने 1963 से भारतीय क्षेत्रों पर अवैध कब्जा कर रखा है।

    प्रवक्ता ने आगे कहा , “विदेश मंत्री ने कहा कि जब संप्रभुता के मुद्दों की बात आती है, तो वास्तव में भारत को ही उन्हें उठाना चाहिए और भारत उन्हें उठाता भी है। भारत किसी भी प्रकार से चीन की संप्रभुता का उल्लंघन नहीं करता और इस मामले में लगातार एक समान रुख पर कायम रहा है। लेकिन चीन 1963 से जम्मू और कश्मीर तथा लद्दाख में भारतीय क्षेत्र पर अवैध कब्ज़ा किए हुए है, जहां भारत का अधिकार स्वयं चीन द्वारा भी आधिकारिक रूप से स्वीकार किया गया है। इसके अतिरिक्त, जम्मू कश्मीर के उन क्षेत्रों में, जो भारत के हैं, चीन की परियोजनाएं चल रही हैं, और हम इसका विरोध करते हैं।” उल्लेखनीय है कि जयशंकर और चीन के विदेश मंत्री के बीच मनीला में आसियान क्षेत्रीय मंच की बैठक से इतर द्विपक्षीय वार्ता हुई थी।


    ‘भारत जानबूझकर नहीं छोड़ रहा पानी’

    वहीं, भारत ने पाकिस्तान के मीडिया में आ रही इन रिपोर्टों को पूरी तरह से निराधार बताया है जिनमें, आरोप लगाया गया है कि भारत जानबूझकर पानी छोड़ कर पाकिस्तान में बाढ की स्थिति उत्पन्न कर रहा है। भारत का कहना है कि चेनाब नदी में पानी की वृद्धि जम्मू और आसपास के क्षेत्रों में भारी मॉनसूनी बारिश का नतीजा है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शुक्रवार को यहां मीडिया ब्रीफिंग में कहा कि पाकिस्तानी मीडिया का यह आरोप कि भारत जानबूझकर पानी छोड़ कर बाढ़ की स्थिति उत्पन्न कर रहा है , पूरी तरह से निराधार है। उन्होंने कहा कि 20 से 23 जुलाई के दौरान चेनाब नदी के बहाव में हाल ही में हुई वृद्धि, जम्मू और उसके आसपास केक्षेत्रों में हुई भारी मानसूनी बारिश का सीधा नतीजा है।

    बाढ़ पर विदेश मंत्रालय ने क्या कहा?
    प्रवक्ता ने कहा कि गौर करने वाली बात यह है कि पाकिस्तान के लाहौर स्थित बाढ़ पूर्वानुमान विभाग ने 22 जुलाई को जारी अपनी बाढ़ चेतावनी में, चेनाब नदी में बाढ़ के ऊंचे स्तर का कारण ऊपरी जल क्षेत्र में हुई भारी बारिश को ही बताया था। इसमें यह भी कहा गया था कि मराला में पानी का तेज बहाव बना रहेगा और बारिश कम होने पर यह धीरे-धीरे घटेगा। जायसवाल ने कहा कि इसलिए, नदी के बहाव में यह वृद्धि भारी मानसूनी बारिश की एक प्राकृतिक प्रतिक्रिया है न कि भारत द्वारा जानबूझकर उठाए गए कदम का नतीजा। मौसम की वजह से आई बाढ़ की इस घटना को ऊपरी क्षेत्र से की गई छेड़छाड़ के रूप में पेश करने की कोशिशें गलत और तकनीकी रूप से आधारहीन हैं। उन्होंने कहा कि यह पाकिस्तान की अपनी आधिकारिक बाढ़ चेतावनियों के भी विपरीत है।