Author: bharati

  • सलमान खान की याचिका पर हाईकोर्ट की टिप्पणी अभी सेंसर बोर्ड तक नहीं पहुंची फिल्म इसलिए नहीं लगेगी रोक

    सलमान खान की याचिका पर हाईकोर्ट की टिप्पणी अभी सेंसर बोर्ड तक नहीं पहुंची फिल्म इसलिए नहीं लगेगी रोक


    नई दिल्ली । अपनी छवि और व्यक्तित्व अधिकारों की रक्षा के लिए अभिनेता सलमान खान ने दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने फिल्म काला हिरण द बैटल फॉर लीगेसी की रिलीज पर रोक लगाने की मांग करते हुए दावा किया है कि यह फिल्म कथित तौर पर ब्लैकबक शिकार मामले पर आधारित है और इसमें उनके जैसे दिखने वाले किरदार के जरिए गलत और भ्रामक कहानी पेश की जा रही है। हालांकि अदालत ने फिलहाल किसी भी तरह की अंतरिम राहत देने से इनकार करते हुए मामले की सुनवाई छह जुलाई तक के लिए टाल दी है।

    सुनवाई के दौरान दिल्ली हाईकोर्ट की जस्टिस ज्योति सिंह की पीठ ने स्पष्ट किया कि संबंधित फिल्म अभी तक केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड के पास सर्टिफिकेशन के लिए भेजी ही नहीं गई है। अदालत ने कहा कि जब तक किसी फिल्म को सेंसर बोर्ड से प्रमाणपत्र नहीं मिलता तब तक उसकी रिलीज संभव नहीं है। ऐसे में फिलहाल तत्काल रोक लगाने का कोई औचित्य नहीं बनता। अदालत ने यह भी कहा कि अभिनेता की ओर से दाखिल जवाब अभी रिकॉर्ड पर उपलब्ध नहीं है इसलिए मामले पर विस्तार से सुनवाई अगली तारीख पर की जाएगी।

    सलमान खान की ओर से पेश वकील ने अदालत से फिल्म की रिलीज पर तत्काल रोक लगाने की मांग की थी। इसके जवाब में फिल्म निर्माताओं की ओर से आश्वासन दिया गया कि अगली सुनवाई तक फिल्म को केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड के पास सर्टिफिकेशन के लिए प्रस्तुत नहीं किया जाएगा। इस भरोसे के बाद अदालत ने अंतरिम आदेश पारित करने की आवश्यकता नहीं समझी।

    अपनी याचिका में सलमान खान ने दावा किया है कि फिल्म में दिखाया गया मुख्य किरदार उनकी शक्ल सूरत और व्यक्तित्व से काफी मिलता जुलता है। इतना ही नहीं उस किरदार के हाथ में उनकी तरह का ब्रेसलेट भी दिखाया गया है जिससे आम दर्शकों के लिए उसे सलमान खान के रूप में पहचानना आसान हो जाता है। अभिनेता का कहना है कि इससे उनकी सार्वजनिक छवि प्रभावित होती है और उनके व्यक्तित्व अधिकारों का उल्लंघन होता है।

    याचिका में यह भी कहा गया है कि फिल्म के पोस्टर और कथित कहानी के माध्यम से एक ऐसी कहानी प्रस्तुत की जा रही है जो वास्तविक तथ्यों और न्यायिक रिकॉर्ड से मेल नहीं खाती। सलमान खान का कहना है कि उन्हें शस्त्र अधिनियम से जुड़े मामले में पहले ही बरी किया जा चुका है लेकिन फिल्म के जरिए ऐसा संदेश दिया जा रहा है जिससे लोगों के बीच गलत धारणा बन सकती है। अभिनेता ने आरोप लगाया कि फिल्म निर्माता इस संवेदनशील मामले को सनसनीखेज बनाकर उनकी लोकप्रियता और पहचान का अनुचित लाभ उठाने की कोशिश कर रहे हैं।

    अब इस मामले में सभी की नजरें छह जुलाई को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं। यदि तब तक फिल्म सेंसर बोर्ड के पास भेजी जाती है या उससे जुड़ी कोई नई स्थिति सामने आती है तो अदालत इस पूरे विवाद पर आगे की कानूनी प्रक्रिया तय कर सकती है। फिलहाल फिल्म की रिलीज और उससे जुड़े विवाद पर अंतिम फैसला न्यायालय की आगामी सुनवाई के बाद ही स्पष्ट होगा।

  • आईपीएल में बरसाए रन फिर भी नहीं खुला टीम इंडिया का दरवाजा आखिर कब मिलेगा वैभव सूर्यवंशी को डेब्यू का मौका

    आईपीएल में बरसाए रन फिर भी नहीं खुला टीम इंडिया का दरवाजा आखिर कब मिलेगा वैभव सूर्यवंशी को डेब्यू का मौका


    नई दिल्ली । भारतीय क्रिकेट के सबसे चर्चित युवा बल्लेबाजों में शामिल वैभव सूर्यवंशी का अंतरराष्ट्रीय डेब्यू फिलहाल एक बार फिर टल गया है। इंग्लैंड के खिलाफ पांच मैचों की टी20 श्रृंखला के पहले मुकाबले में भी टीम प्रबंधन ने उन्हें अंतिम एकादश में जगह नहीं दी। चेस्टर ले स्ट्रीट में जैसे ही कप्तान श्रेयस अय्यर ने प्लेइंग इलेवन का एलान किया वैसे ही करोड़ों भारतीय क्रिकेट प्रशंसकों की उम्मीदों को झटका लगा क्योंकि वैभव का नाम उसमें शामिल नहीं था। लगातार दूसरी श्रृंखला में मौका नहीं मिलने के बाद अब यह सवाल और तेज हो गया है कि आखिर इस युवा बल्लेबाज को भारतीय टीम के लिए पदार्पण करने के लिए और कितना इंतजार करना पड़ेगा।

    वैभव सूर्यवंशी पिछले कुछ महीनों से अपने प्रदर्शन के दम पर लगातार सुर्खियों में बने हुए हैं। आईपीएल 2026 में उन्होंने राजस्थान रॉयल्स के लिए विस्फोटक बल्लेबाजी करते हुए 16 पारियों में 776 रन बनाए और पूरे टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा रन बनाकर ऑरेंज कैप अपने नाम की। उनका स्ट्राइक रेट भी 237 से अधिक रहा जिसने क्रिकेट विशेषज्ञों को प्रभावित किया। इसके अलावा अंडर 19 विश्व कप में उन्हें प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट चुना गया जबकि हाल ही में भारत ए की ओर से खेलते हुए उन्होंने श्रीलंका में त्रिकोणीय श्रृंखला के फाइनल में केवल 29 गेंदों पर 94 रन बनाकर अपनी प्रतिभा का एक और शानदार उदाहरण पेश किया।

    इतने बेहतरीन प्रदर्शन के बावजूद टीम इंडिया की प्लेइंग इलेवन में जगह नहीं मिलना लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है। इससे पहले आयरलैंड दौरे पर भी उन्हें दोनों टी20 मुकाबलों में बाहर बैठना पड़ा था। उस श्रृंखला में भारतीय शीर्ष क्रम उम्मीदों पर खरा नहीं उतर सका और टीम को हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद माना जा रहा था कि इंग्लैंड दौरे पर वैभव को जरूर मौका मिलेगा लेकिन टीम प्रबंधन ने अनुभवी खिलाड़ियों पर भरोसा जताना बेहतर समझा।

    क्रिकेट के कई पूर्व दिग्गज पहले ही संकेत दे चुके थे कि वैभव का डेब्यू तुरंत नहीं होगा। उनका मानना था कि टीम प्रबंधन युवा बल्लेबाज को सही समय पर मौका देना चाहता है ताकि उस पर अतिरिक्त दबाव न बने। हालांकि प्रशंसकों का तर्क है कि जब कोई खिलाड़ी घरेलू क्रिकेट आईपीएल और जूनियर स्तर पर लगातार शानदार प्रदर्शन कर रहा हो तो उसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खुद को साबित करने का अवसर भी मिलना चाहिए।

    बैटिंग कोच सितांशु कोटक पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि अंतिम फैसला मुख्य कोच गौतम गंभीर और कप्तान श्रेयस अय्यर की रणनीति के अनुसार लिया जाएगा। ऐसे में यह साफ है कि वैभव को मौका कब मिलेगा इसका फैसला टीम प्रबंधन की योजनाओं पर निर्भर करेगा। फिलहाल भारतीय टीम ने पहले मुकाबले में संजू सैमसन अभिषेक शर्मा ईशान किशन श्रेयस अय्यर तिलक वर्मा शिवम दुबे अक्षर पटेल हर्षित राणा रवि बिश्नोई अर्शदीप सिंह और वरुण चक्रवर्ती के साथ मैदान में उतरने का फैसला किया।

    वैभव सूर्यवंशी के लिए यह इंतजार भले ही लंबा होता जा रहा हो लेकिन उनकी उम्र और प्रदर्शन दोनों यह संकेत देते हैं कि भविष्य पूरी तरह उनके पक्ष में है। यदि वह इसी तरह रन बनाते रहे और अपने खेल में निरंतरता बनाए रखी तो भारतीय टीम में उनका पदार्पण केवल समय की बात होगी। अब सभी की नजरें इंग्लैंड के खिलाफ अगले मुकाबलों पर रहेंगी जहां शायद भारतीय क्रिकेट को अपना नया युवा सितारा पहली बार नीली जर्सी में खेलते हुए देखने का मौका मिल जाए।

  • भारतीय सिनेमा का मेगा ब्लॉकबस्टर सीजन: साल 2026 की दूसरी छमाही में सिनेमाघरों में दिखेगा बड़े बजट की फिल्मों का महासंग्राम

    भारतीय सिनेमा का मेगा ब्लॉकबस्टर सीजन: साल 2026 की दूसरी छमाही में सिनेमाघरों में दिखेगा बड़े बजट की फिल्मों का महासंग्राम

    नई दिल्ली। भारतीय फिल्म उद्योग के लिए साल 2026 की दूसरी छमाही बॉक्स ऑफिस पर एक अभूतपूर्व और ऐतिहासिक व्यावसायिक घमासान लेकर आ रही है। चालू वर्ष की शुरुआती छमाही में हालांकि कई फिल्मों ने अच्छा कारोबार किया, लेकिन बड़े रिकॉर्ड्स के मामले में केवल एक ही फिल्म पांच सौ और हजार करोड़ के क्लब में अपनी जगह बना सकी। मगर फिल्म समीक्षकों और व्यापार विश्लेषकों का मानना है कि असली व्यावसायिक मुकाबला अब शुरू होने जा रहा है, क्योंकि जुलाई से लेकर दिसंबर तक के आगामी महीनों में बड़े बजट और महासुपरस्टार्स की कई बहुप्रतीक्षित फिल्में बड़े पर्दे पर दस्तक देने वाली हैं, जिनसे हजार करोड़ से ज्यादा की कमाई की उम्मीद है।

    इस भव्य सिनेमाई सिलसिले की शुरुआत जुलाई के महीने से हो रही है, जहां दो बिल्कुल अलग विधाओं की फिल्में दर्शकों के सामने होंगी। इसमें सबसे पहला और बड़ा नाम यशराज स्पाई यूनिवर्स की बहुचर्चित एक्शन थ्रिलर फिल्म ‘अल्फा’ का है, जो 3 जुलाई को सिनेमाघरों में प्रदर्शित होने जा रही है। शिव रावेल के निर्देशन में बनी इस फिल्म में आलिया भट्ट, शरवरी वाघ, अनिल कपूर और बॉबी देओल मुख्य भूमिकाओं में हैं, जबकि ऋतिक रोशन का एक विशेष कैमियो दर्शकों के लिए बड़ा आकर्षण होगा। इसके ठीक बाद, 10 जुलाई को निर्देशक इंद्र कुमार की मशहूर कॉमेडी फ्रेंचाइजी की अगली कड़ी ‘धमाल 4’ रिलीज होगी, जिसमें अजय देवगन, रितेश देशमुख, अरशद वारसी और जावेद जाफरी जैसे कलाकार मनोरंजन का तड़का लगाएंगे।

    अगस्त का महीना बॉक्स ऑफिस के लिहाज से सबसे बड़ा और कड़ा मुकाबला देखने वाला साबित होगा, जहां एक से बढ़कर एक कई बड़ी फिल्में कतार में हैं। महीने की शुरुआत 7 अगस्त को अविनाश अरुण द्वारा निर्देशित फिल्म ‘प्रहार: द अनटोल्ड स्टोरी ऑफ उज्ज्वल निकम’ से होगी, जिसमें राजकुमार राव और जयदीप अहलावत मुख्य किरदारों में हैं। इसके बाद स्वतंत्रता दिवस के ऐतिहासिक अवसर पर 14 अगस्त को तीन बड़ी फिल्मों के बीच सीधा महामुकाबला देखने को मिलेगा। इनमें इमरान हाशमी और दिशा पाटनी स्टारर कल्ट क्लासिक का सीक्वल ‘आवारापन 2’, भारत-चीन गलवान घाटी संघर्ष पर आधारित सलमान खान की मुख्य भूमिका वाली देशभक्ति फिल्म ‘मातृभूमि: मे वॉर रेस्ट इन पीस’ और सनी देओल व प्रीति जिंटा अभिनीत विभाजन की पृष्ठभूमि पर बनी ‘बंटवारा 1947’ शामिल हैं।

    इसी महीने के अंत में दर्शकों का लंबा इंतजार भी खत्म होने जा रहा है। कई बार तकनीकी कारणों से टलने के बाद, कन्नड़ सुपरस्टार यश की अत्यंत महत्वाकांक्षी फिल्म ‘टॉक्सिक’ आखिरकार 26 अगस्त को सिनेमाघरों में रिलीज होने के लिए तैयार है। गीतू मोहन दास के निर्देशन में बन रही इस फिल्म में नयनतारा, कियारा आडवाणी, हुमा कुरैशी और तारा सुतारिया जैसे कलाकारों की एक लंबी फौज नजर आएगी। इसके तुरंत बाद, 28 अगस्त को महान लावणी कलाकार विठाबाई नारायणगांवकर की जीवनी पर आधारित फिल्म ‘ईठा’ प्रदर्शित होगी, जिसमें श्रद्धा कपूर और रणदीप हुड्डा मुख्य भूमिकाओं में दिखाई देंगे, जिसका निर्देशन लक्ष्मण उतेकर ने किया है।

    सितंबर के महीने में भी सिनेमाघरों में रोमांच का यह स्तर कम नहीं होगा। ओटीटी की दुनिया में अपनी सफलता का परचम लहराने के बाद ‘मिर्जापुर’ की कहानी अब बड़े पर्दे पर तहलका मचाने आ रही है। गुरमीत सिंह के निर्देशन में बनी ‘मिर्जापुर द मूवी’ 4 सितंबर को सिनेमाघरों में रिलीज होगी, जिसमें पंकज त्रिपाठी, अली फजल और दिव्येंदु शर्मा जैसे कलाकार अपने पुराने अंदाज में लौट रहे हैं। इसके बाद 11 सितंबर को ब्रिटिश कालीन भारत की पृष्ठभूमि पर बनी विजय देवरकोंडा और रश्मिका मंदाना की फिल्म ‘रणबाली’ रिलीज होगी। इसी तारीख को निर्देशक प्रियदर्शन की सस्पेंस फिल्म ‘हैवान’ भी सिनेमाघरों में दस्तक देगी, जिसमें कई सालों के लंबे अंतराल के बाद सैफ अली खान और अक्षय कुमार की मशहूर जोड़ी एक बार फिर स्क्रीन साझा करती नजर आएगी।

  • हॉलीवुड से मिला बड़ा सम्मान फराह खान बनीं ऑस्कर एकेडमी की सदस्य अब वोटिंग प्रक्रिया में निभाएंगी अहम भूमिका

    हॉलीवुड से मिला बड़ा सम्मान फराह खान बनीं ऑस्कर एकेडमी की सदस्य अब वोटिंग प्रक्रिया में निभाएंगी अहम भूमिका


    नई दिल्ली । फिल्ममेकर और कोरियोग्राफर फराह खान के लिए वर्ष 2026 एक बेहद खास उपलब्धि लेकर आया है। भारतीय सिनेमा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक और बड़ी पहचान दिलाते हुए उन्हें एकेडमी ऑफ मोशन पिक्चर आर्ट्स एंड साइंसेज की प्रतिष्ठित सदस्यता के लिए आमंत्रित किया गया है। यही संस्था हर साल दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित ऑस्कर पुरस्कारों का आयोजन करती है। इस सम्मान के साथ फराह खान अब उन चुनिंदा फिल्मी हस्तियों की सूची में शामिल हो जाएंगी जिन्हें विश्व सिनेमा के सबसे बड़े मंच पर अपनी भागीदारी निभाने का अवसर मिलता है।

    इस गौरवपूर्ण उपलब्धि की जानकारी खुद फराह खान ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपने प्रशंसकों के साथ साझा की। उन्होंने इस सम्मान के लिए एकेडमी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रतिष्ठित समूह का हिस्सा बनना उनके लिए गर्व और खुशी दोनों का विषय है। उनके इस संदेश के सामने आते ही फिल्म जगत के कलाकारों और प्रशंसकों ने उन्हें लगातार शुभकामनाएं देना शुरू कर दिया।

    हर वर्ष एकेडमी दुनिया भर के उन कलाकारों तकनीशियनों और फिल्म विशेषज्ञों को सदस्य बनने का निमंत्रण देती है जिन्होंने अपने क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया हो। इस वर्ष कुल 529 नए सदस्यों को आमंत्रित किया गया है जिनमें फराह खान का नाम भी शामिल है। सदस्यता स्वीकार करने के बाद उन्हें ऑस्कर पुरस्कारों की नामांकन और विजेताओं के चयन की प्रक्रिया में मतदान का अधिकार मिलेगा। यह जिम्मेदारी केवल उन लोगों को मिलती है जिनके काम को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मान और विश्वसनीयता हासिल होती है।

    फराह खान पिछले कई दशकों से भारतीय फिल्म उद्योग का अहम चेहरा रही हैं। उन्होंने बतौर कोरियोग्राफर कई यादगार गीतों को अपनी रचनात्मकता से नई पहचान दी है। इसके अलावा उन्होंने निर्देशन के क्षेत्र में भी सफलता हासिल की और कई लोकप्रिय फिल्मों का निर्देशन किया। उनकी फिल्मों की भव्यता मनोरंजन और बड़े स्तर की प्रस्तुति ने उन्हें देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी अलग पहचान दिलाई है। यही वजह है कि अब उन्हें विश्व सिनेमा की सबसे प्रतिष्ठित संस्था का सदस्य बनने का अवसर मिला है।

    इस बार एकेडमी की आमंत्रित सूची में कई अन्य भारतीय प्रतिभाओं को भी जगह मिली है। प्रसिद्ध फिल्म निर्देशक विशाल भारद्वाज के साथ वरिष्ठ संपादक ए श्रीकर प्रसाद और दीपा भाटिया को भी सदस्यता का निमंत्रण भेजा गया है। दीपा भाटिया चार दशकों से अधिक लंबे करियर में अनेक चर्चित फिल्मों से जुड़ी रही हैं और उनकी संपादन कला को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराहा गया है। इसके अलावा कॉस्ट्यूम डिजाइनर एका लखानी कास्टिंग डायरेक्टर दिलीप शंकर डॉक्यूमेंट्री फिल्ममेकर शालिनी कांतैया एनीमेशन क्षेत्र से अवनीत कौर प्रोडक्शन और टेक्नोलॉजी विशेषज्ञ राजेश रामचंद्रन तथा विजुअल इफेक्ट्स से जुड़े बेकी ग्राहम और जय मेहता को भी इस सूची में स्थान मिला है।

    इन सभी आमंत्रित सदस्यों के शामिल होने के बाद एकेडमी के कुल सदस्यों की संख्या लगभग 11000 से अधिक हो जाएगी। ये सदस्य आने वाले वर्षों में ऑस्कर पुरस्कारों के लिए फिल्मों कलाकारों और तकनीकी विशेषज्ञों के चयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। फराह खान को मिला यह सम्मान केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं बल्कि भारतीय सिनेमा की बढ़ती वैश्विक प्रतिष्ठा का भी मजबूत प्रमाण है। यह उपलब्धि आने वाली पीढ़ी के फिल्मकारों और कलाकारों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी और दुनिया के सबसे बड़े फिल्म मंच पर भारत की मजबूत मौजूदगी को और अधिक प्रभावशाली बनाएगी।

  • राज्यों पर पड़ेगा वित्तीय बोझ: तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय ने 'विकसित भारत गारंटी' के नियमों को बदलने की मांग उठाई

    राज्यों पर पड़ेगा वित्तीय बोझ: तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय ने 'विकसित भारत गारंटी' के नियमों को बदलने की मांग उठाई


    नई दिल्ली ।
    तमिलनाडु के मुख्यमंत्री जोसेफ विजय ने केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी और प्रस्तावित ‘विकसित भारत गारंटी’ योजना के वर्तमान स्वरूप पर गहरी असहमति जताते हुए इसका कड़ा विरोध किया है। मुख्यमंत्री ने इस संबंध में सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र प्रेषित किया है, जिसमें उन्होंने स्पष्ट किया है कि नई व्यवस्था के मौजूदा नियमों को यदि इसी तरह लागू किया गया तो राज्य सरकार के खजाने पर 5,000 करोड़ रुपये से अधिक का भारी और अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा। उन्होंने केंद्र से इस योजना के वित्तीय और प्रशासनिक दिशा-निर्देशों में तत्काल सुधार करने का आग्रह किया है।

    मध्य प्रदेश

    मुख्यमंत्री विजय ने अपने पत्र के माध्यम से नई योजना के तहत तय किए गए फंडिंग पैटर्न पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने उल्लेख किया कि ‘विकसित भारत गारंटी’ अधिनियम, 2025 के प्रावधानों के मुताबिक मजदूरी, सामग्री और प्रशासनिक खर्चों को वहन करने के लिए केंद्र और राज्यों के बीच 60:40 का अनुपात निर्धारित किया गया है। मुख्यमंत्री ने तर्क दिया कि देश में पिछले दो दशकों से ग्रामीण रोजगार योजना एक बिल्कुल अलग वित्तीय ढांचे के अंतर्गत सफलतापूर्वक संचालित हो रही थी, जहां राज्यों पर इस तरह का भार नहीं था। अचानक किए गए इस नीतिगत बदलाव से राज्यों की वित्तीय स्थिति पूरी तरह असंतुलित हो जाएगी।

    तमिलनाडु सरकार का मानना है कि इस नए वित्तीय फॉर्मूले के कारण राज्य को अपनी अन्य अत्यंत महत्वपूर्ण और जनहित से जुड़ी कल्याणकारी योजनाओं के बजट में कटौती करने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है, अथवा ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को दिए जाने वाले रोजगार के दिनों की संख्या को कम करना पड़ेगा। इस संभावित संकट से बचने के लिए मुख्यमंत्री ने सुझाव दिया है कि मजदूरी और प्रशासनिक व्यय की पूरी शत-प्रतिशत जिम्मेदारी केंद्र सरकार को खुद उठानी चाहिए, जबकि निर्माण सामग्री से जुड़े खर्चों को केंद्र और राज्यों के बीच 75:25 के तार्किक अनुपात में साझा किया जाना चाहिए।

    वित्तीय बोझ के अलावा तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ने इस योजना के प्रशासनिक केंद्रीकरण और पंचायतों के वर्गीकरण की पद्धति पर भी कड़े सवाल उठाए हैं। उन्होंने केंद्र सरकार द्वारा फंड वितरण के लिए अपनाई जा रही इस केंद्रीय व्यवस्था को एक प्रकार का ‘माइक्रोमैनेजमेंट’ करार दिया है। पत्र में कहा गया है कि पूरे विविधतापूर्ण देश के लिए एक समान फॉर्मूला लागू करना व्यावहारिक नहीं है, क्योंकि हर राज्य और क्षेत्र की सामाजिक व आर्थिक परिस्थितियां भिन्न होती हैं। इसलिए राज्यों को अपनी स्थानीय आवश्यकताओं और प्राथमिकताओं के अनुरूप फंड आवंटित करने की पूरी स्वायत्तता मिलनी चाहिए।

    मुख्यमंत्री ने कृषि क्षेत्र से जुड़े एक विशेष नियम को लेकर भी व्यावहारिक आपत्ति दर्ज कराई है, जिसके तहत खेती के पीक सीजन के दौरान ग्रामीण रोजगार के कार्यों को 60 दिनों के लिए बंद रखने का प्रावधान किया गया है। उन्होंने वैश्विक जलवायु परिवर्तन और ‘अल नीनो’ के प्रभावों का हवाला देते हुए कहा कि अब खेती का समय और चक्र पहले की तरह निश्चित नहीं रह गया है। ऐसे में किसी एक निश्चित समयावधि के लिए काम को पूरी तरह रोक देना उचित नहीं है, क्योंकि ग्रामीण मजदूरों को विपरीत मौसम और संकट के समय किसी भी वक्त रोजगार की सख्त आवश्यकता पड़ सकती है।

  • वैश्विक मंच पर गूंजा बॉलीवुड का नाम: 'द एकेडमी' ने फराह खान सहित भारतीय फिल्म जगत की हस्तियों को वोटिंग अधिकार के लिए किया आमंत्रित

    वैश्विक मंच पर गूंजा बॉलीवुड का नाम: 'द एकेडमी' ने फराह खान सहित भारतीय फिल्म जगत की हस्तियों को वोटिंग अधिकार के लिए किया आमंत्रित

    नई दिल्ली। भारतीय फिल्म उद्योग के लिए वैश्विक स्तर पर एक अत्यंत गौरवपूर्ण क्षण सामने आया है। मशहूर फिल्ममेकर और कोरियोग्राफर फराह खान को ऑस्कर पुरस्कार प्रदान करने वाली संस्था ‘एकेडमी ऑफ मोशन पिक्चर आर्ट्स एंड साइंसेज’ ने साल 2026 की प्रतिष्ठित सदस्यता के लिए आमंत्रित किया है। इस विशेष आमंत्रण को स्वीकार करने के बाद फराह खान अब ऑस्कर अवॉर्ड्स की आधिकारिक वोटिंग प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकेंगी, जो भारतीय सिनेमा की वैश्विक पहुंच और प्रभाव को रेखांकित करता है।

    इस ऐतिहासिक उपलब्धि और अंतरराष्ट्रीय सम्मान पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए फराह खान ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी खुशी और गर्व साझा किया है। उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा कि इस बेहद सम्मानित और वैश्विक समूह का हिस्सा बनना उनके लिए एक अत्यंत सुखद और गर्व से भरा अनुभव है। वर्तमान में एक रियलिटी शो की मेजबानी कर रहीं फराह खान के लिए यह आमंत्रण उनके दशकों लंबे फिल्मी करियर और कलात्मक योगदान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिली एक बड़ी पहचान के रूप में देखा जा रहा है।

    एकेडमी हर साल सिनेमाई जगत में उत्कृष्ट योगदान देने वाले दुनिया भर के चुनिंदा कलाकारों, निर्देशकों और तकनीकी विशेषज्ञों को अपनी सदस्यता सूची में शामिल करती है। इसी परंपरा के तहत इस वर्ष वैश्विक स्तर पर कुल 529 फिल्म पेशेवरों को आमंत्रित किया गया है, जिसमें भारत से फराह खान के अलावा मनोरंजन जगत के कई अन्य प्रतिष्ठित नाम भी शामिल हैं। इस सूची में मशहूर फिल्म निर्देशक विशाल भारद्वाज का नाम भी प्रमुखता से दर्ज है, जिन्होंने ‘मकबूल’, ‘ओमकारा’ और ‘हैदर’ जैसी फिल्मों के माध्यम से भारतीय सिनेमा को एक नई वैचारिक और कलात्मक दिशा दी है।

    इस बार एकेडमी की सूची में भारतीय सिनेमा के परदे के पीछे काम करने वाले तकनीकी दिग्गजों को भी व्यापक प्रतिनिधित्व मिला है। दिग्गजों की इस फेहरिस्त में अनुभवी फिल्म एडिटर ए. श्रीकर प्रसाद और दीपा भाटिया का नाम शामिल है। दीपा भाटिया ने अपने साढ़े चार दशक से अधिक लंबे शानदार करियर में ‘आरआरआर’, ‘दिल चाहता है’, ‘तारे ज़मीन पर’, ‘माय नेम इज़ खान’ और ‘काय पो छे’ जैसी कालजयी और व्यावसायिक रूप से बेहद सफल फिल्मों में संपादन का बेहतरीन कार्य किया है। उनके इस अनुभव को अब वैश्विक स्तर पर सराहा गया है।

    इनके अतिरिक्त, भारतीय सिनेमा में अपनी वेशभूषा और कास्टिंग कला का लोहा मनवाने वाली हस्तियों को भी इस प्रतिष्ठित सूची में स्थान मिला है। इनमें कॉस्ट्यूम डिजाइनर एका लखानी, विख्यात कास्टिंग डायरेक्टर दिलीप शंकर और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय डॉक्यूमेंट्री फिल्ममेकर शालिनी कांतैया का नाम विशेष रूप से उल्लेखनीय है। यह चयन दर्शाता है कि वैश्विक स्तर पर भारतीय सिनेमा के तकनीकी और रचनात्मक दोनों ही पक्षों को समान रूप से सम्मान मिल रहा है।

    सिनेमा की आधुनिक विधाओं में भी भारतीयों की प्रतिभा को इस आमंत्रण के जरिए स्वीकार किया गया है। एनीमेशन श्रेणी में भारत की अवनीत कौर को आमंत्रित किया गया है, जबकि प्रोडक्शन और टेक्नोलॉजी क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए राजेश रामचंद्रन को सदस्यता का प्रस्ताव मिला है। वहीं, विजुअल इफेक्ट्स जैसी जटिल तकनीकी श्रेणी में बेकी ग्राहम और जय मेहता को इस प्रतिष्ठित सूची का हिस्सा बनाया गया है। इन पेशेवरों के शामिल होने से ऑस्कर के मंच पर भारतीय दृष्टिकोण और अधिक मजबूत होगा।

    इस आमंत्रण को औपचारिक रूप से स्वीकार करने के बाद, ये सभी भारतीय दिग्गज दुनिया भर के लगभग 11,000 से अधिक विशिष्ट एकेडमी सदस्यों के विशेष समूह में शामिल हो जाएंगे। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस सदस्यता के बाद इन सभी भारतीय सिनेमाई दिग्गजों को ऑस्कर अवॉर्ड्स के मुख्य नॉमिनेशन तय करने और विभिन्न श्रेणियों में विजेताओं को चुनने के लिए सीधे वोट देने का वैधानिक अधिकार प्राप्त हो जाएगा, जिससे वैश्विक सिनेमा के निर्णयों में भारत की भागीदारी बढ़ेगी।

  • अमेरिका ने ट्रेड डील से पहले दिए सकारात्मक संकेत… 4 भारतीय कंपनियों को से हटाए बैन

    अमेरिका ने ट्रेड डील से पहले दिए सकारात्मक संकेत… 4 भारतीय कंपनियों को से हटाए बैन


    नई दिल्ली।
    भारत (India) के लिए अमेरिका (America) से अच्छी खबर आई है. रूस के साथ कथित व्यापार संबंधों को लेकर चार भारतीय कंपनियों (Indian Companies) पर लगाए गए प्रतिबंध हटा लिए गए हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, बुधवार से अमेरिका द्वारा ये बैन हटाए गए हैं और इसकी जानकारी अमेरिकी वित्त विभाग ने शेयर करते हुए कहा है कि US ने चार भारतीय कंपनियों पर उन बैन को हटाया है, जो रूस के सैन्य-औद्योगिक अड्डे का समर्थन करने के लिए लेटेस्ट टेक्नोलॉजी और उपकरण की आपूर्ति करने के आरोपों पर लगाए गए थे. अब अमेरिका की प्रतिबंध लिस्ट से अलग हो गई हैं।


    इन कंपनियों को बड़ी राहत

    एक रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी वित्त विभाग के मुताबिक हैदराबाद स्थित आरआरजी इंजीनियरिंग टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड (RRG Engineering Technologies) और लोकेश मशीन्स लिमिटेड पर से प्रतिबंध हटाए गए हैं. तो वहीं अहमदाबाद स्थित गैलेक्सी बियरिंग्स और नई दिल्ली स्थित शौर्य एरोनॉटिक्स प्राइवेट लिमिटेड को विदेशी संपत्ति नियंत्रण कार्यालय (OFC) की बैन लिस्ट से हटा दिया गया है.


    गैलेक्सी पर 2024 में लगा था बैन

    भारतीय कंपनी गैलेक्सी बियरिंग्स लिमिटेड पर अक्टूबर 2024 में प्रतिबंध लगाया गया था. अमेरिका ने उस समय कंपनी पर रोलर बियरिंग और रोलर असेंबली समेत दर्जनों हाई क्वालिटी वाले दोहरे उपयोग वाली वस्तुओं को रूसी संस्थाओं को निर्यात करने का आरोप लगाया था. अब अमेरिकी वित्त विभाग ने इन आरोपों को वापस लेते हुए कंपनी पर से हैन हटा दिए हैं.

    अन्य तीन कंपनियों में अगला नाम शौर्य एरोनॉटिक्स प्राइवेट लिमिटेड का है, जिसे बैन मुक्त कर दिया गया है. इसपर कथित तौर पर रडार उपकरण, रेडियो नेविगेशनल एंड उपकरण, रेडियो रिमोट कंट्रोल उपकरण और दूसरे इलेक्ट्रिक उपकरण रूस को भेजने के आरोप लगा गए थे.


    RRG पर इसलिए था प्रतिबंध

    अमेरिका ने भारतीय कंपनी आरआरजी इंजीनियरिंग टेक्नोलॉजीज पर रूस स्थित कंपनी आर्टेक्स लिमिटेड को माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स की 100 से अधिक खेपें भेजने का आरोप लगाया गया था. इसके बाद इसे प्रतिबंध वाली अमेरिकी लिस्ट में शामिल किया गया था.

    एक अन्य भारतीय कंपनी अमेरिका की इस प्रतिबंधों वाली लिस्ट में शामिल थी, जिसका नाम लोकेश मशीन्स है और इस पर विभिन्न रूसी मैन्युफेक्चरिंग कंपनियों को मशीन टूल्स की दर्जनों खेपों की आपूर्ति करने का आरोप लगाया गया था.


    ट्रेड डील से पहले आई खबर

    US-Iran Trade Deal पर बातचीत का दौर जारी है और दोनों ही देश टैरिफ विवाद के बाद अब अपने रिश्तों को ट्रैक पर लाने की कोशिश में लगे हुए हैं. अमेरिका की ओर से भारतीय कंपनियों पर प्रतिबंध हटाया जाना एक पॉजिटिव सिग्नल माना जा रहा है. रिपोर्ट्स में दोनों देशों के बीच डील पर बातचीत अब अंतिम चरण में बताई जा रही है।

  • Tamil Nadu: CM विजय ने पूर्व सरकार के फैसले को पलटा… हिंदू मंदिरों के पैसे से बनने वाले 46 प्रोजेक्ट्स रद्द

    Tamil Nadu: CM विजय ने पूर्व सरकार के फैसले को पलटा… हिंदू मंदिरों के पैसे से बनने वाले 46 प्रोजेक्ट्स रद्द


    चेन्नई।
    तमिलनाडु (Tamil Nadu) की सत्ता संभालते ही मुख्यमंत्री ‘थलापति’ विजय (Chief Minister ‘Thalapathy’ Vijay) ने पूर्व की डीएमके (DMK) सरकार के फैसले को पलटते हुए एक बड़ा और सख्त कदम उठाया है। सीएम विजय (CM Vijay) ने हिंदू धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्ती (HR&CE) विभाग के तहत 245.85 करोड़ रुपये की लागत वाले 46 प्रोजेक्ट्स की प्रशासनिक मंजूरी तत्काल प्रभाव से रद्द कर दी है।

    फिल्म स्टार ‘थलापति’ सी. जोसेफ विजय ने जब राजनीति में एंट्री की थी तो लोगों ने शुरुआत में उनके प्रभाव पर शक जताया था और उन्हें सिर्फ ‘किंगमेकर’ माना था। लेकिन 4 मई 2026 को आए विधानसभा चुनाव के नतीजों ने छह दशक बाद मुख्य द्रविड़ पार्टियों को सत्ता से बाहर कर दिया और जनता ने इस अभिनेता के नेतृत्व वाली पार्टी को चुना।

    10 मई को विजय ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली, लेकिन उनके प्रशासनिक अनुभव और कार्यकाल पूरा करने को लेकर संदेह बना हुआ था। हालांकि, पद संभालने के एक महीने से अधिक समय बाद, उनके कदमों से यह साबित हो रहा है कि वे सुशासन के जरिए जनता को सही संदेश दे रहे हैं।

    सोमवार को जिला कलेक्टरों और पुलिस प्रमुखों को निर्देश देते हुए विजय ने बिना किसी राजनीतिक दखल के अपराधियों पर सख्त कार्रवाई करने को कहा। उन्होंने यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि सबसे प्रभावशाली अपराधियों को भी त्वरित और निष्पक्ष न्याय का सामना करना पड़े। इसके अलावा, उन्होंने घोषणा की कि तमिलनाडु की सभी सार्वजनिक परिवहन बसें वातानुकूलित (AC) होंगी।


    सीएम के रूप में पहले दिन से ही असरदार फैसले

    सत्ता संभालने के कुछ ही घंटों के भीतर विजय ने 200 यूनिट मुफ्त बिजली का ऐलान किया, जिससे राज्य के लगभग 2.4 करोड़ घरेलू बिजली कनेक्शन धारकों को फायदा होगा। नशीले पदार्थों की तस्करी और उपयोग को रोकने के लिए हर जिले में ‘एंटी-ड्रग टास्क फोर्स’ का गठन किया गया, जिसकी निगरानी सीएम खुद करेंगे। महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराधों को रोकने के लिए ‘सिंगप्पेन (शेरनी) स्पेशल टास्क फोर्स’ बनाई गई।

    48 घंटों के भीतर, राज्य भर में धार्मिक स्थलों, शिक्षण संस्थानों और बस स्टैंडों के 500 मीटर के दायरे में चल रही 717 ‘तस्माक’ शराब की दुकानों को दो सप्ताह के भीतर बंद करने का आदेश दिया गया।


    कॉर्पोरेट CEO जैसी कार्यशैली और समय की पाबंदी

    सीएम विजय हर सुबह एकदम सही समय पर सचिवालय पहुंचते हैं। पारंपरिक सफेद वेष्टि की बजाय वे काले रंग का शानदार सूट और सफेद शर्ट पहनते हैं, जो उन्हें एक आधुनिक प्रशासक के रूप में पेश करता है। वे सोमवार से शुक्रवार तक अपनी डेस्क पर लगभग सात घंटे बिताते हैं और वरिष्ठ नौकरशाहों से भी समय की पाबंदी की सख्त उम्मीद रखते हैं। काम के दौरान राजनीतिक बैठकों की बजाय वे घर से अपना लंच लाना और शांति से खाना पसंद करते हैं।


    नीति आयोग द्वारा प्रशंसा और केंद्र से तालमेल

    नीति आयोग के उपाध्यक्ष अशोक कुमार लाहिड़ी ने 2035 तक तमिलनाडु की अर्थव्यवस्था को 1.5 ट्रिलियन डॉलर बनाने के विजय के विजन की तारीफ की है, जिसे राज्य को वैश्विक निवेश और तकनीकी डेस्टिनेशन बनाने के कदम के रूप में देखा जा रहा है। पीएम नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर विजय ने मेकेदातु बांध परियोजना के खिलाफ कानूनी कदम उठाने, श्रीलंकाई नौसेना द्वारा पकड़े गए मछुआरों की रिहाई और रक्षा निर्माण एवं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) प्रोजेक्ट्स के लिए सहयोग की मांग की।


    भ्रष्टाचार विरोधी कदम और जन कल्याण

    विजय ने हिंदू धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्ती (HR&CE) विभाग के 46 प्रोजेक्ट्स के लिए दी गई प्रशासनिक मंजूरी रद्द कर दी। इन प्रोजेक्ट्स की कुल कीमत 245.85 करोड़ रुपये थी और इनमें शादी-ब्याह के हॉल और कमर्शियल कॉम्प्लेक्स शामिल थे, जिन्हें पिछली DMK सरकार के समय मंजूरी मिली थी। सरकारी अधिकारियों ने कहा कि इस कदम का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि मंदिर के संसाधनों का इस्तेमाल कमर्शियल कामों के बजाय मंदिर से जुड़ी गतिविधियों में किया जाए। सरकार ने यह भी घोषणा की है कि रद्द किए गए प्रोजेक्ट्स से बचे फंड का इस्तेमाल मंदिरों और श्रद्धालुओं के लिए नई योजनाएं शुरू करने में किया जाएगा।

    620 अम्मा कैंटीनों को आधुनिक बनाने, बर्तन बदलने और साफ-सफाई में सुधार के निर्देश दिए गए हैं। गरीब कर्जदारों के लिए सहकारी बैंक ऋण माफी के पहले चरण की घोषणा की गई और जल जीवन मिशन के रुके हुए प्रोजेक्ट्स को फिर से शुरू किया गया। कृषि क्षेत्र के समर्थन के लिए धान की खेती को बढ़ावा देने हेतु 134.83 करोड़ रुपये का पैकेज घोषित किया गया। तमिलनाडु के वित्त पर एक श्वेत पत्र जारी कर राज्य के कर्ज के बोझ को उजागर किया गया और राजकोषीय पारदर्शिता का वादा किया गया।

  • संसद के मॉनसून सत्र से मजबूत हुआ NDA…..दल बदल से INDIA गठबंधन को भारी नुकसान

    संसद के मॉनसून सत्र से मजबूत हुआ NDA…..दल बदल से INDIA गठबंधन को भारी नुकसान


    नई दिल्ली।
    संसद (Parliament) का मॉनसून सत्र (Monsoon Session) शुरू होने वाला है। अब एक ओर जहां दलों की टूट के बाद NDA मजबूत स्थिति में नजर आ रहा है। वहीं, विपक्षी गठबंधन INDIA का संख्याबल कुछ घट गया है। हालांकि, सत्तारूढ़ एनडीए अब भी दो तिहाई बहुमत से काफी दूर है, लेकिन अगर वह लोकसभा में दो और दलों को साध लेता है, तो इसके काफी करीब पहुंच सकता है। इस नंबरगेम को विस्तार से समझते हैं।

    अगर लोकसभा में सभी 540 मौजूदा सांसद उपस्थित होते हैं और वोट देते हैं, तो दो तिहाई बहुमत के लिए 360 मतों की जरूरत होगी। जब अप्रैल में संविधान संशोधन बिल लाया गया, तब सदन में 548 लोकसभा सांसदों ने वोट डाले थे। इनमें से 298 समर्थन और 230 खिलाफ थे। जबकि, 11 सांसद अनुपस्थित थे। इसके चलते दो तिहाई बहुमत का आंकड़ा घटकर 352 पर आ गया था।


    दल टूटने के बाद नंबर कहां पहुंचे

    तृणमूल कांग्रेस के 20 सांसदों ने नेशनल सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया के साथ विलय कर लिया था। ये दल एनडीए को समर्थन दे रहा है और सदन में अलग बैठने का अनुरोध किया है। वहीं, शिवसेना यूबीटी के 6 सांसदों ने NDA में शामिल शिवसेना के साथ हाथ मिला लिया है। इसके चलते गठबंधन 319 पर पहुंच गया है। हालांकि, अब तक 360 बहुमत का आंकड़ा दूर है।


    विपक्ष की ताकत समझें

    लोकसभा चुनाव 2024 के बाद 225 पर पहुंचे INDIA गठबंधन को हाल में हुईं पार्टियों में टूट से बड़ा झटका लगा है। 26 सांसदों के जाने के बाद विपक्ष का लोकसभा में आंकड़ा घटकर 199 पर आ गया है। वहीं, 22 सांसदों वाली द्रविड़ मुन्नेत्र कझगम ने भी खुद को इस गठबंधन से दूर कर लिया है। दरअसल, तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के बाद कांग्रेस और डीएमके में दूरी बढ़ गई है।

    INDIA अलायंस में सबसे बड़ा दल 98 सांसदों के साथ कांग्रेस है। वहीं, इसके बाद 37 सांसदों वाली समाजवादी पार्टी है। इस लिस्ट में टूट से पहले टीएमसी तीसरे नंबर पर थी। वहीं, शिवसेना यूबीटी चौथे स्थान पर थी, लेकिन अब आंकड़ा बदल गया है।


    कैसे आंकड़ा पा सकता है एनडीए

    इस मुहिम में 5 निर्दलीय सांसदों की भूमिका अहम हो जाती है। दरअसल, अमृतपाल सिंह और शेख अब्दुल रशीद जेल में हैं। अब अगर एनडीए 4 सांसदों वाली YSRCP का समर्थन हासिल करता है। वहीं, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी एसपी और डीएमके से कुछ बात बनती है, तो एनडीए को फायदा हो सकता है।

    आसान भाषा में समझें, तो शरद पवार गुट के पास 8 सांसद हैं और डीएमके के पास 22 सदस्य हैं। अगर ये दोनों दल वोटिंग से दूर रहते हैं, तो बहुमत का आंकड़ा 330 पर आ जाएगा। वहीं, निर्दलीय और जगन मोहन रेड्डी की पार्टी की मदद से एनडी 9 वोट और जुटा लेगा, लेकिन इसके बाद भी 2 मतों की और दरकार होगी।

  • उत्तराखंड में मदरसा बोर्ड खत्म.. CM धामी ने की राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण की शुरुआत

    उत्तराखंड में मदरसा बोर्ड खत्म.. CM धामी ने की राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण की शुरुआत


    देहरादून।
    उत्तराखंड (Uttarakhand) में बुधवार से मदरसा बोर्ड खत्म (Madrasa Board Abolished) हो गया। अब इसकी जगह राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण (State Minority Education Authority) ने ले ली है। इसके तहत मुस्लिम समेत सभी 5 अधिसूचित अल्पसंख्यक समुदायों के शिक्षण संस्थान आएंगे। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी (Chief Minister Pushkar Singh Dhami) ने देहरादून में आयोजित एक कार्यक्रम में राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण की शुरुआत की। उन्होंने कहा कि पूरे विश्व को अपनी ज्ञानधारा से सिंचित करने वाले उत्तराखंड की यह जिम्मेदारी है कि वह शिक्षा एवं संस्कार के मामले में एक आदर्श स्थापित करे।

    मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि हमारी सरकार ने समाज के सभी वर्गों को अच्छी, संस्कार युक्त और आधुनिक शिक्षा देने के लिए पहली जुलाई से उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण की स्थापना करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है। इसके साथ मदरसा बोर्ड को भंग कर दिया गया है। उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण केवल उत्तराखंड ही नहीं वरन पूरे देश की शिक्षा व्यवस्था के इतिहास में मील का पत्थर साबित होगा।

    मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि समान नागरिक संहिता यानी यूसीसी के रूप में ‘वन नेशन वन लॉ’ की तरह अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के रूप में ‘वन नेशन वन एजुकेशन’ की शुरुआत भी उतराखंड से हो रही है। उत्तराखंड सरकार का संकल्प है कि राज्य में हर वर्ग, क्षेत्र और समुदाय के बच्चे को अच्छे संस्कार और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले।


    सपनों को मिलेगी नई उड़ान

    सीएम धामी ने कहा कि जब एक बच्चे को अच्छी शिक्षा मिलती है तो वह न केवल अपने भविष्य को बेहतर बनाता है वरन अपने परिवार, समाज और देश को बेहतर बनाने में अपना अमूल्य योगदान देता है। आज हम मात्र एक संस्था की शुरूआत नहीं कर रहे हैं वरन ऐसे भविष्य की मजबूत नींव रख रहे हैं जिसके जरिए राज्य के हर बच्चे के सपनों को एक नई उड़ान मिलेगी।


    आस्था और आधुनिकता के बीच संतुलन बनाना है मकसद

    मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने साफ किया कि अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण की स्थापना किसी भी समुदाय की धार्मिक पहचान, परंपरा या अधिकारों को प्रभावित करने के लिए नहीं वरन समाज के सभी वर्गों को बेहतर शैक्षणिक अवसर उपलब्ध कराने के लिए की गई है। हमारा मकसद आस्था और आधुनिकता के बीच संतुलन बनाना है। हम चाहते हैं कि अल्पसंख्यक समुदाय का हर बच्चा अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ा रहे और विज्ञान, गणित, कम्प्यूटर, भाषा, और आधुनिक तकनीकों में भी दक्ष बने।


    आएगा सकारात्मक बदलाव

    सीएम धामी ने कहा कि अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण केवल मान्यता देने वाली संस्था नहीं वरन गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, शिक्षक प्रशिक्षण, पारदर्शी व्यवस्था और राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन का मजबूत माध्यम बनेगा। सीएम धामी ने उम्मीद जताई कि प्राधिकरण आने वाले समय में हजारों बच्चों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाएगा। यह गुणवत्तापूर्ण एवं समावेशी शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनाएगा।