Author: bharati

  • सोनिया गांधी की किताब पर पेंगुइन ने क्यों खींचे हाथ? इन हिस्सों में बदलाव चाहता था प्रकाशक

    सोनिया गांधी की किताब पर पेंगुइन ने क्यों खींचे हाथ? इन हिस्सों में बदलाव चाहता था प्रकाशक


    नई दिल्ली। कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी की बहुप्रतीक्षित पुस्तक ‘बिलोंगिंग: ए जर्नी ऑफ लव’ के भारतीय संस्करण के प्रकाशन से पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने हाथ खींच लिए हैं। सूत्रों के मुताबिक, प्रकाशक पांडुलिपि के एक खास हिस्से में संपादकीय बदलाव के साथ कुछ अंश हटाना चाहता था। सोनिया गांधी ने बदलाव या कटौती करने से इनकार कर दिया, जिसके बाद प्रकाशन का समझौता आगे नहीं बढ़ सका।

    इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, पेंगुइन के पीछे हटने के बाद कई बड़े प्रकाशक इस पुस्तक के भारतीय संस्करण के अधिकार हासिल करने की कोशिश में हैं। मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि हार्पर कॉलिंस इंडिया किताब के प्रकाशन का समझौता अंतिम रूप देने के करीब है।

    भारत को छोड़कर दुनिया के अन्य देशों में यह किताब 10 नवंबर को जारी होगी। पुस्तक के प्रकाशन की घोषणा सबसे पहले अमेरिकी प्रकाशक अल्फ्रेड ए. नोपफ ने की थी, जो पेंगुइन रैंडम हाउस का ही एक डिवीजन है। नोपफ के मुताबिक, किताब की शुरुआती एक लाख प्रतियां प्रकाशित की जाएंगी।

    छह दशक की निजी कहानी

    सोनिया गांधी पहले भी किताबें लिख चुकी हैं, लेकिन उनके करीबियों के अनुसार ‘बिलोंगिंग’ उनके जीवन का सबसे निजी और प्रामाणिक विवरण है। इसमें 1965 में कैम्ब्रिज में राजीव गांधी से उनकी पहली मुलाकात से लेकर नेहरू-गांधी परिवार का हिस्सा बनने तक के सफर को शामिल किया गया है।

    किताब में संजय गांधी की मृत्यु और इंदिरा गांधी तथा राजीव गांधी की हत्या के दौरान झेले व्यक्तिगत दुखों का भी जिक्र है। इसके अलावा 2004 में कांग्रेस को जनादेश मिलने के बावजूद प्रधानमंत्री पद स्वीकार नहीं करने के फैसले के पीछे की परिस्थितियों और कारणों पर भी सोनिया गांधी ने अपनी बात रखी है।

    सोनिया गांधी ने पुस्तक के बारे में कहा कि उनके परिवार पर काफी कुछ लिखा गया है, लेकिन बहुत कम लेखन ऐसा है जो उनके परिवार के सदस्यों की भावनाओं, फैसलों और मानवीय कमजोरियों को वास्तविक रूप में सामने रखता है। उनके मुताबिक, यह किताब पिछले छह दशकों के सामाजिक और राजनीतिक बदलावों को भी एक अलग नजरिए से देखने का मौका देती है।

    पेंगुइन के फैसले पर फिर उठे सवाल

    पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया का किसी चर्चित पुस्तक से पीछे हटने का यह पहला मामला नहीं है। इसी साल प्रकाशक ने पूर्व थल सेना प्रमुख जनरल एम.एम. नरवणे की किताब ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ को प्रकाशित करने से इनकार किए जाने की बात कही थी। हालांकि, राहुल गांधी ने संसद में इस किताब की हार्ड कॉपी दिखाई थी।

    जून में पेंगुइन ने ग्राफिक उपन्यासकार जो सैको की मुजफ्फरनगर दंगों पर आधारित किताब ‘द वंस एंड फ्यूचर रायट’ का प्रकाशन भी रद्द कर दिया था। इसके पीछे कानूनी जांच और नक्शे में सीमाओं से जुड़े मुद्दों को वजह बताया गया था।

  • BJP के बाद अब संघ में भी पीढ़ीगत बदलाव की तैयारी, ‘कॉकरोच प्रोटेस्ट’ के बाद Gen-Z पर बढ़ेगा फोकस

    BJP के बाद अब संघ में भी पीढ़ीगत बदलाव की तैयारी, ‘कॉकरोच प्रोटेस्ट’ के बाद Gen-Z पर बढ़ेगा फोकस


    नई दिल्ली। भाजपा ने अपनी नई संगठनात्मक टीम के जरिए बदलते राजनीतिक और सामाजिक माहौल के अनुरूप पार्टी को पुराने ढांचे से नए स्वरूप में ढालने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। सबसे अहम बदलाव यह है कि नए नेतृत्व को फैसले लेने में अधिक स्वतंत्रता दी गई है। वरिष्ठ नेता अब मुख्य रूप से मार्गदर्शक की भूमिका में रहेंगे और संगठन को जरूरत पड़ने पर उनकी सलाह और सहयोग लिया जाएगा। राजनीतिक दलों में समय-समय पर होने वाले पीढ़ीगत बदलाव की इसी कड़ी का असर अब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) में भी दिखाई दे सकता है। हालांकि, संघ प्रमुख के पद में बदलाव को लेकर फिलहाल कोई चर्चा नहीं है।

    आमतौर पर किसी राजनीतिक दल के विपक्ष में रहने के दौरान संगठनात्मक प्रयोगों के लिए ज्यादा गुंजाइश होती है। सत्ता में रहते हुए बड़े बदलावों से बचने की प्रवृत्ति रहती है। इसके बावजूद भाजपा ने केंद्र में एक दशक से अधिक समय तक सत्ता में रहने के बाद भी अपने संगठन में बदलाव की शुरुआत की है। पार्टी के युवा अध्यक्ष नितिन नवीन ने अपनी नई टीम में युवा चेहरों के साथ अनुभवी नेताओं को भी जगह दी है, लेकिन निर्णय लेने की स्वतंत्रता अपने स्तर पर बनाए रखी है।

    हर दशक में बदलता रहा भाजपा का संगठन

    भाजपा के 1980 में गठन के बाद करीब-करीब हर दशक में पार्टी के संगठन में बदलाव देखने को मिले हैं। पिछली सदी के अंतिम दशक में तत्कालीन संगठन प्रमुख लालकृष्ण आडवाणी ने 1992 से 1995 के बीच बड़ी संख्या में युवाओं को पार्टी में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी थीं। उस दौर में नरेंद्र मोदी भी प्रमुख युवा चेहरों में शामिल थे। 21वीं सदी के पहले और दूसरे दशक में भी संगठन में इसी तरह बदलाव हुए। हालांकि, उस समय वरिष्ठ नेताओं की भूमिका अधिक प्रभावी थी और वे नई टीमों को नेतृत्व देने के साथ उनका मार्गदर्शन भी करते थे।

    इस बार तस्वीर कुछ अलग नजर आ रही है। पार्टी का नेतृत्व युवा है और निर्णय लेने की जिम्मेदारी भी उसी के हाथों में रखी गई है। सूत्रों के मुताबिक, संगठन को मजबूत करने में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भूमिका भी अहम बनी रहेगी। वरिष्ठ नेता नई टीम को मजबूती देने और जरूरत के मुताबिक सलाह देने की भूमिका में रहेंगे।

    अगले साल संघ में भी बड़े बदलाव की संभावना

    भाजपा के संगठनात्मक बदलाव के बाद अब उसकी वैचारिक और संगठनात्मक ताकत के प्रमुख केंद्र राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में भी अगले साल महत्वपूर्ण परिवर्तन की संभावना जताई जा रही है। ‘कॉकरोच प्रोटेस्ट’ के बाद संघ का फोकस Gen-Z पर बढ़ने की बात कही जा रही है। संघ की ओर से अपने शताब्दी वर्ष के बाद नई पीढ़ी को लेकर संकेत भी दिए गए हैं।

    इसका व्यापक असर भाजपा के संगठन पर भी दिखाई दे सकता है। जेन-Z और जेन-अल्फा को लेकर बदलते सामाजिक माहौल के बीच भाजपा और संघ अपने नेतृत्व तथा कार्यकर्ताओं में नई पीढ़ी की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दे सकते हैं।

    हालांकि, संघ प्रमुख को बदलने की कोई चर्चा नहीं है। मौजूदा सरसंघचालक मोहन भागवत 2009 से इस पद पर हैं। संघ में सरसंघचालक के चुनाव की व्यवस्था नहीं है। इस पद पर नियुक्ति आम सहमति से होती है। मौजूदा संघ प्रमुख किसी नाम का सुझाव देते हैं तो संगठन के भीतर उस नाम पर सहमति बनाई जा सकती है।

  • लिरुंग ग्लेशियर टूटने से त्रिशूली में आई प्रलयंकारी बाढ़, 35 मोटरेबल और 45 सस्पेंशन ब्रिज तबाह

    लिरुंग ग्लेशियर टूटने से त्रिशूली में आई प्रलयंकारी बाढ़, 35 मोटरेबल और 45 सस्पेंशन ब्रिज तबाह


    नई दिल्ली। नेपाल में 26 अगस्त को आई भीषण बाढ़ ने उत्तरी इलाकों में भारी तबाही मचा दी। जिन क्षेत्रों में कभी पर्यटन और आबादी की रौनक दिखाई देती थी, वहां अब बाढ़ के बाद मलबा और तबाही का मंजर नजर आ रहा है। कई घर और बस्तियां पूरी तरह बह गईं, जबकि बड़ी संख्या में मकान मलबे में तब्दील हो गए।

    तिब्बत से निकलकर नेपाल आने वाली त्रिशूली नदी में अचानक आए तेज बहाव ने इस तबाही को और भयावह बना दिया। यह नदी तेज धारा और व्हाइट वाटर राफ्टिंग के लिए जानी जाती है, लेकिन बुधवार को इसका रूप बेहद विनाशकारी हो गया। नदी में पानी के साथ भारी मात्रा में मलबा आया, जिसकी चपेट में आने से कई इलाकों में भारी नुकसान हुआ।

    बाढ़ की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 35 मोटरेबल ब्रिज, 45 सस्पेंशन ब्रिज और करीब 40 किलोमीटर सड़क बुरी तरह प्रभावित हुई है। तेज बहाव के सामने मजबूत कंक्रीट के पुल भी टिक नहीं सके। कई इलाकों का संपर्क पूरी तरह टूट गया है, जिससे राहत और बचाव कार्य में भी मुश्किलें आ रही हैं।

    1,500 से ज्यादा लोग अब भी लापता

    नेपाल में बाढ़ के बाद हुई तबाही में कई लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 1,500 से अधिक लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। इसके अलावा 290 भारतीय नागरिकों से संपर्क नहीं हो पा रहा है। उनकी तलाश लगातार की जा रही है।

    इस आपदा के बीच कई लोगों की जान भी बचाई गई है। हालांकि, बाढ़ और मलबे की तेज लहर ने जिन इलाकों को अपनी चपेट में लिया, वहां रहने वाले लोगों के लिए बच निकलना बेहद मुश्किल था।

    भूकंप और GLOF के बाद सामने आई नई वजह

    नेपाल में अचानक आई बाढ़ की वजह को लेकर शुरुआत में कई तरह की आशंकाएं सामने आई थीं। पहले इसे भूकंप से जोड़कर देखा गया और बाद में ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) की संभावना भी जताई गई।

    हालांकि, बाद में सैटेलाइट तस्वीरों और भूकंपीय आंकड़ों के विश्लेषण से एक अलग तस्वीर सामने आई। जांच के मुताबिक, नेपाल-तिब्बत सीमा के पास लिरुंग ग्लेशियर का एक हिस्सा टूटकर नीचे आ गिरा था। इसके बाद बड़ी मात्रा में मलबा और पानी नीचे की ओर तेजी से बढ़ा और त्रिशूली नदी में विनाशकारी बाढ़ की स्थिति बन गई।

    यानी जिस घटना ने शुरुआत में सिर्फ एक प्राकृतिक हलचल का रूप लिया था, उसने कुछ ही समय में नदी के बहाव को प्रलयंकारी बना दिया। अब नेपाल में राहत और पुनर्निर्माण के सामने सबसे बड़ी चुनौती उन इलाकों को फिर से जोड़ना है, जहां सड़कें, पुल और बस्तियां बाढ़ की चपेट में आकर तबाह हो गई हैं।

  • नेपाल ने भारत की रेस्क्यू टीम की पेशकश क्यों ठुकराई?

    नेपाल ने भारत की रेस्क्यू टीम की पेशकश क्यों ठुकराई?


    नई दिल्ली। नेपाल में भोटेकोशी नदी में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद हालात बेहद गंभीर बने हुए हैं। हादसे में सैकड़ों लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 1500 से अधिक लोग लापता बताए जा रहे हैं। इस बीच भारत समेत कई देशों ने नेपाल को राहत और बचाव के लिए विशेषज्ञ टीमें भेजने की पेशकश की, लेकिन नेपाल सरकार ने विदेशी रेस्क्यू टीमों को बुलाने से इनकार कर दिया है। नेपाल का कहना है कि उसके सुरक्षा बल राहत और बचाव अभियान चलाने में सक्षम हैं और फिलहाल उसे जमीनी टीमों के बजाय वित्तीय सहायता की जरूरत है।

    काठमांडू पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत, चीन, अमेरिका, ब्रिटेन, जापान, दक्षिण कोरिया, श्रीलंका और बांग्लादेश ने अपनी विशेषज्ञ आपदा प्रबंधन टीमों को नेपाल भेजने का प्रस्ताव दिया था। भारत ने भी राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) की टीम भेजने की पेशकश की थी। हालांकि, नेपाली सेना और पुलिस की सलाह के बाद सरकार ने इन प्रस्तावों को स्वीकार नहीं किया।

    2015 के भूकंप से लिया सबक

    नेपाल सरकार के इस फैसले के पीछे 2015 का विनाशकारी भूकंप भी एक बड़ी वजह माना जा रहा है। उस समय बड़ी संख्या में विदेशी राहत और बचाव दल नेपाल पहुंचे थे। इससे राहत कार्यों के समन्वय और प्रबंधन में काफी दिक्कतें सामने आई थीं। इसी अनुभव को देखते हुए नेपाल इस बार विदेशी टीमों के बजाय अपने सुरक्षा बलों के जरिए अभियान चलाना चाहता है।

    नेपाल पुलिस और विभिन्न दूतावासों के आंकड़ों के अनुसार, बाढ़ के बाद स्थिति अब भी गंभीर है। दूसरे देशों के नागरिकों को सहायता पहुंचाने और उनके परिवारों तक सही जानकारी पहुंचाने के लिए नेपाल के विदेश मंत्रालय ने एक आपातकालीन प्रतिक्रिया टीम बनाई है।

    विदेश मंत्रालय के एक उप-सचिव स्तर के अधिकारी को रसुवा के तिमुरे में ग्राउंड ऑपरेशन्स टीम के साथ भेजा गया है। यह टीम सुरक्षा बलों के साथ समन्वय कर दूसरे देशों के दूतावासों और परिजनों को लापता लोगों से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराएगी। विदेश मंत्री शिसिर खनल ने भी संबंधित विभागों को विदेशी सरकारों के लगातार संपर्क में रहने के निर्देश दिए हैं।

    भारत से 47.5 टन राहत सामग्री पहुंची

    नेपाल ने विदेशी रेस्क्यू टीमों को भले ही आने की अनुमति नहीं दी है, लेकिन मानवीय और आर्थिक सहायता लेने से इनकार नहीं किया है। भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल के अनुसार, भारत अब तक नेपाल को 47.5 टन राहत सामग्री भेज चुका है।

    भारत ने नेपाल को बेली ब्रिज और प्रीफैब ट्रस ब्रिज उपलब्ध कराने की पेशकश भी की है, ताकि बाढ़ से क्षतिग्रस्त संपर्क व्यवस्था को बहाल करने में मदद मिल सके।

    कई देशों ने आर्थिक मदद का ऐलान किया

    भारत के अलावा अमेरिका, ब्रिटेन और विश्व बैंक भी नेपाल के लिए आर्थिक सहायता की घोषणा कर चुके हैं। एशियन डेवलपमेंट बैंक (ADB) के अध्यक्ष मासातो कांडा ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह से बातचीत की और पुनर्निर्माण के साथ-साथ पूर्व चेतावनी प्रणालियों (Early Warning Systems) को मजबूत करने में सहयोग का भरोसा दिया है।

    नेपाल सरकार ने अपने दूतावासों को भी निर्देश दिया है कि किसी भी तरह की वित्तीय सहायता केवल प्रधानमंत्री राहत कोष के माध्यम से ही स्वीकार की जाए।

  • ‘सबकी जान खतरे में है…’ नेपाल हादसे के बीच भोपाल के एक परिवार की बढ़ी चिंता, 24 घंटे से चार सदस्य लापता

    ‘सबकी जान खतरे में है…’ नेपाल हादसे के बीच भोपाल के एक परिवार की बढ़ी चिंता, 24 घंटे से चार सदस्य लापता


    भोपाल। नेपाल में आई भीषण बाढ़ और फ्लैश फ्लड ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। सैकड़ों लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि बड़ी संख्या में लोग अब भी लापता हैं। इस आपदा के बीच भोपाल से भी एक चिंताजनक खबर सामने आई है। शहर की रहने वाली देविका अधिकारी के परिवार के चार सदस्य नेपाल हादसे के बाद से संपर्क से बाहर हैं। इनमें उनके बड़े भाई, छोटे भाई और दोनों भाभियां शामिल हैं।

    देविका अधिकारी ने मीडिया से बातचीत में बताया कि 24 घंटे से अधिक समय बीत जाने के बावजूद चारों से कोई संपर्क नहीं हो सका है। इस दौरान परिवार की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है।

    आखिरी बातचीत में कहा- ‘सबकी जान खतरे में है’

    देविका के मुताबिक, परिवार की आखिरी बार बड़े भाई से बातचीत हुई थी। उस समय उन्होंने बताया था कि ‘सबकी जान खतरे में है’ और वे लोग जान बचाने के लिए पहाड़ पर जाकर छिपे हुए हैं।

    परिवार के अनुसार, बातचीत के दौरान उन्होंने बच्चों का ध्यान रखने की बात भी कही थी। इसके बाद से ही चारों का फोन संपर्क नहीं हो पाया है। परिवार अब नेपाल में जारी रेस्क्यू ऑपरेशन और प्रशासन से मिलने वाली जानकारी का इंतजार कर रहा है।

    सरकार ने जारी की हेल्पलाइन

    नेपाल में लगातार बिगड़ते हालात के बीच भोपाल के नेपाली समाज और लापता लोगों के परिवारों की चिंता बढ़ती जा रही है। मध्य प्रदेश सरकार ने नेपाल में फंसे लोगों और उनके परिजनों की मदद के लिए हेल्पलाइन नंबर 011-26772005 और व्हाट्सऐप नंबर 9818963273 जारी किया है।

    परिजन इन नंबरों पर संपर्क कर नेपाल में फंसे या लापता लोगों से संबंधित जानकारी हासिल कर सकते हैं।

    392 लोगों की मौत, 1500 से ज्यादा लापता

    नेपाल में बाढ़ के बाद आई भीषण तबाही में अब तक 392 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 1500 से अधिक लोग लापता बताए जा रहे हैं। हादसे के बाद 290 भारतीय नागरिकों से भी संपर्क नहीं हो पा रहा है, जिनकी तलाश की जा रही है।

    नेपाल के रसुवा क्षेत्र में भोटेकोशी नदी में आई विनाशकारी बाढ़ ने सबसे ज्यादा तबाही मचाई है। बाढ़ के कारण सड़क और संपर्क व्यवस्था को भी भारी नुकसान पहुंचा है।

    सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, बाढ़ में 35 पुल और 45 सस्पेंशन ब्रिज बह गए हैं। इससे कई इलाकों का एक-दूसरे से संपर्क टूट गया है और राहत एवं बचाव अभियान में भी मुश्किलें सामने आ रही हैं।

    नेपाल की इस आपदा के बीच अब भोपाल समेत मध्य प्रदेश के उन परिवारों की चिंता भी बढ़ गई है, जिनके अपने लोग वहां फंसे हुए हैं या जिनसे संपर्क नहीं हो पा रहा है।

  • उत्तराखंड में 13 ग्लेशियल झीलें संवेदनशील…. नेपाल तबाही के बाद CM ने किया अलर्ट

    उत्तराखंड में 13 ग्लेशियल झीलें संवेदनशील…. नेपाल तबाही के बाद CM ने किया अलर्ट


    देहरादून।
    नेपाल (Nepal) में फ्लैश फ्लड (Flash flood) से भारी तबाही के बाद अब उत्तराखंड (Uttarakhand) में 13 ग्लेशियल झीलों (Glacial lakes) को संवेदनशील माना गया है. इन झीलों से पहाड़ी इलाकों में खतरे की आशंका को देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी (Chief Minister Pushkar Singh Dhami) ने अधिकारियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं. उन्होंने झीलों की नियमित निगरानी करने को कहा है. साथ ही सुरक्षा के इंतजाम मजबूत करने के निर्देश दिए हैं।

    मुख्यमंत्री ने राज्य आपदा प्रबंधन सचिव विनोद कुमार सुमन को जरूरी कदम उठाने को कहा है. उन्होंने संवेदनशील ग्लेशियल झीलों की वैज्ञानिक तरीके से निगरानी करने के निर्देश दिए. इन इलाकों में आधुनिक अर्ली वार्निंग सिस्टम लगाने को कहा गया है. जरूरत के हिसाब से इनकी संख्या भी बढ़ाई जाएगी।

    सीएम धामी ने संवेदनशील ग्लेशियल झीलों का व्यापक सर्वे कराने को कहा है. इन झीलों की स्थिति की नियमित जांच होगी. पानी के स्तर पर भी नजर रखी जाएगी. झीलों के आकार में होने वाले बदलाव को भी रिकॉर्ड किया जाएगा।

    इसके अलावा झीलों के आसपास के पहाड़ी इलाकों की स्थिति की भी जांच होगी. संभावित खतरे वाले क्षेत्रों की पहचान की जाएगी. इससे किसी भी आपदा की स्थिति में समय रहते लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया जा सकेगा.


    सेंसर और वार्निंग सिस्टम होंगे मजबूत

    मुख्यमंत्री ने संवेदनशील इलाकों में आधुनिक सेंसर लगाने पर जोर दिया है. पानी का स्तर मापने वाले उपकरण भी लगाए जाएंगे. संचार व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा. इन तकनीकी संसाधनों से खतरे की जानकारी समय पर मिल सकेगी.

    अधिकारियों को सुरक्षित निकासी के रास्तों की पहचान करने के निर्देश भी दिए गए हैं. स्थानीय स्तर पर चेतावनी व्यवस्था मजबूत की जाएगी. राहत और बचाव की तैयारियों को भी बेहतर किया जाएगा. आपदा की स्थिति में लोगों को जल्द सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने पर जोर रहेगा।

    नेपाल में हाल ही में आई बाढ़ के बाद उत्तराखंड में भी आपदा को लेकर सतर्कता बढ़ाई गई है. इसी को देखते हुए आपदा प्रबंधन विभाग की ओर से सभी जिलों के जिलाधिकारियों के साथ बैठक की गई.

    बैठक में आपदा से निपटने की तैयारियों की समीक्षा हुई. जिलाधिकारियों को अपने-अपने जिलों में संभावित खतरे वाले इलाकों की नियमित निगरानी करने को कहा गया. किसी भी तरह की असामान्य गतिविधि दिखने पर तुरंत वरिष्ठ अधिकारियों को जानकारी देने के निर्देश दिए गए।


    चार झीलों का सर्वे पूरा

    राज्य आपदा प्रबंधन सचिव विनोद कुमार सुमन ने बताया कि उत्तराखंड में कुल 13 ग्लेशियल झीलों को संवेदनशील चिन्हित किया गया है. इनमें से चार झीलों का सर्वे पहले ही पूरा किया जा चुका है।

    बाकी संवेदनशील झीलों का भी चरणबद्ध तरीके से सर्वे कराया जाएगा. इन झीलों की वैज्ञानिक जांच की जाएगी. चमोली जिले की सरस्वती ताल और उत्तरकाशी जिले की केदारताल के सर्वे के लिए जल्द विशेषज्ञों की टीम भेजी जाएगी।

    संवेदनशील इलाकों में रहने वाले लोगों को संभावित खतरे के बारे में जानकारी दी जाएगी. उन्हें आपदा के समय बरती जाने वाली सावधानियों के बारे में भी बताया जाएगा. लोगों को सुरक्षित स्थान और निकासी के रास्तों की जानकारी दी जाएगी।

    सरकार का जोर आपदा से पहले तैयारी मजबूत करने पर है. नियमित निगरानी और समय पर चेतावनी से बड़े खतरे को कम करने की कोशिश की जा रही है. संवेदनशील ग्लेशियल झीलों पर नजर रखने के साथ राहत और बचाव व्यवस्था को भी मजबूत किया जा रहा है।

  • मोदी आज भी विरोधियों पर भारी, पर राज्यों में हाफ रहा डबल इंजन… BJP अपने ही गढ़ में हुई कमजोर

    मोदी आज भी विरोधियों पर भारी, पर राज्यों में हाफ रहा डबल इंजन… BJP अपने ही गढ़ में हुई कमजोर


    नई दिल्ली।
    ‘डबल इंजन (‘Double Engine’)’ के जिस नारे को बीजेपी (BJP) अपनी सबसे बड़ी ढाल और जीत का पक्का फॉर्मूला मानती रही है, उसकी परतें अब उधड़ने लगी हैं. केंद्र की सत्ता में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) का चेहरा आज भी विरोधियों पर भारी पड़ता दिख रहा है, लेकिन राज्यों के धरातल पर पार्टी का दूसरा इंजन पूरी तरह हांफ रहा है. इंडिया टुडे और सी-वोटर का ताजा ‘मूड ऑफ द नेशन’ (MOTN) अगस्त 2026 सर्वे राजनीतिक विश्लेषकों की आंखें खोल देने वाले नतीजे लेकर आया है. आंकड़े चीख-चीखकर गवाही दे रहे हैं कि जिन राज्यों में 2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी का परचम फहराया था, वहां महज दो साल के भीतर पार्टी का जनाधार अप्रत्याशित रूप से खिसक चुका है।

    2024 के लोकसभा चुनाव में बहुमत से दूर रहने वाली भाजपा ने अपने आपको संभाला और फिर हरियाणा, महाराष्ट्र, बिहार और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में जबर्दस्त जीत हांसिल की. विधानसभा चुनावों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि का सहारा लेकर जिस ‘डबल इंजन’ को जनता ने समर्थन दिया, अब वही समर्थन कमजोर पड़ता दिख रहा है।

    आज देश में लोकसभा चुनाव की घोषणा हो जाए, तो सर्वे के आंकड़े एनडीए को 326 सीटें और 45.1 प्रतिशत वोट शेयर देते हैं, जबकि विपक्षी ‘इंडिया’ गठबंधन को 185 सीटें और 39.1 प्रतिशत वोट मिलने का अनुमान है. केवल बीजेपी के आंकड़े देखें तो पार्टी 261 सीटों और 39.0 प्रतिशत वोट शेयर के साथ संसद की सबसे बड़ी ताकत बनी रहेगी और 2024 के 240 सीटों के मुकाबले 21 सीटें ज्यादा हासिल करेगी. लेकिन इस तस्वीर का दूसरा पहलू बेहद चौंकाने वाला और बीजेपी के सिपहसालारों की नींद उड़ाने वाला है. इसी साल जनवरी 2026 के सर्वे में बीजेपी अपने दम पर 287 सीटें जीतती दिख रही थी, जो अगस्त 2026 में घटकर 261 पर आ गई है. यानी बीते महज छह महीनों के भीतर बीजेपी की झोली से 26 सीटें खिसक चुकी हैं, जो यह साबित करता है कि राज्यों में जनता का मिजाज बहुत तेजी से बदल रहा है और डबल इंजन का पहिया थमने लगा है।
    .

    सबसे ज्यादा आंखें खोल देने वाले आंकड़े उन राज्यों से आए हैं जिन्हें बीजेपी का अभेद्य गढ़ और जीत की गारंटी माना जाता था. मध्यप्रदेश में 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान बीजेपी ने 29 की 29 सीटें जीतकर इतिहास रचा था और विपक्ष का पूरी तरह सफाया कर दिया था. मगर अगस्त 2026 का सर्वे बताता है कि मध्यप्रदेश में बीजेपी की झोली से सीधे 8 सीटें गायब हो चुकी हैं और पार्टी महज 21 सीटों पर सिमटती नजर आ रही है. जनवरी 2026 के सर्वे में भी जहां पार्टी 26 सीटों पर थी, वहां छह महीने में ही 5 सीटें और कम हो गईं. पार्टी का वोट शेयर 2024 के 59.27 प्रतिशत से सीधा गिरकर 51.3 प्रतिशत पर आ गया है, जबकि बीते चुनाव में शून्य पर लटकी कांग्रेस अब 8 सीटें झटकती दिख रही है और उसका वोट शेयर 32.44 प्रतिशत से उछलकर 43.3 प्रतिशत तक जा पहुंचा है.

    ओडिशा का सच तो और भी ज्यादा कड़वा है. जिस ओडिशा में 2024 के चुनाव में बीजेपी ने 21 में से 20 सीटें जीतकर नवीन पटनायक के दशकों पुराने साम्राज्य को ढहा दिया था, वहीं अब बीजेपी की साख दांव पर लगी है. सर्वे के अनुसार ओडिशा में बीजेपी की सीटें घटकर सिर्फ 12 रह सकती हैं, यानी पार्टी को 8 सीटों का सीधा नुकसान झेलना पड़ रहा है. जनवरी 2026 के 17 सीटों के अनुमान से तुलना करें तो भी छह महीने में पार्टी ने 5 सीटें गंवा दी हैं और उसका वोट शेयर 45.34 प्रतिशत से घटकर 43.0 प्रतिशत पर सिमट गया है.


    हिंदी पट्टी में सुलगता असंतोष और कमजोर पड़ते राज्य

    बीजेपी की राजनीति की रीढ़ मानी जाने वाली हिंदी पट्टी के अन्य राज्यों में भी हालात बेहद चिंताजनक हैं. उत्तर प्रदेश में 2024 के चुनाव में बीजेपी 33 सीटों पर अटक गई थी. अगस्त 2026 के सर्वे में पार्टी को 34 सीटें मिलती दिख रही हैं, जो भले ही 2024 से 1 सीट ज्यादा हो, लेकिन छह महीने पहले की तस्वीर से तुलना करने पर पैरों तले जमीन खिसक जाती है. जनवरी 2026 में उत्तर प्रदेश के भीतर बीजेपी 44 सीटें जीतती दिख रही थी, जो अगस्त आते-आते सीधे 10 सीटें घटकर 34 पर आ चुकी हैं और एनडीए का वोट शेयर 43.69 प्रतिशत से गिरकर 41.7 प्रतिशत हो गया है.

    छत्तीसगढ़ की बात करें तो 2024 में 11 में से 10 सीटें हासिल करने वाली बीजेपी अब सिर्फ 7 सीटों पर सिमटती दिख रही है, यानी 3 सीटों की सीधी चपत लग रही है, जबकि कांग्रेस 1 सीट से बढ़कर 4 सीटों पर कब्जा जमाती नजर आ रही है. उत्तराखंड में सभी 5 सीटों पर काबिज बीजेपी को 1 सीट का नुकसान होकर 4 सीटें मिलने का अनुमान है. वहीं राजस्थान में बीजेपी 16 सीटों पर दिखाई दे रही है, जो 2024 की 14 सीटों से 2 ज्यादा जरूर है, लेकिन जनवरी 2026 के 18 सीटों के आंकड़े से 2 सीटें कम हो चुकी है.


    पश्चिम बंगाल की लहर का छलावा

    देश भर में खिसकती जमीन के बीच पश्चिम बंगाल ही अकेला ऐसा राज्य बनकर उभरा है जहां बीजेपी के लिए चमत्कारिक आंकड़े सामने आए हैं. 2024 के चुनाव में जहां बीजेपी बंगाल की 42 सीटों में से सिर्फ 12 सीटें जीत पाई थी, वहीं अगस्त 2026 का सर्वे अनुमान लगा रहा है कि बीजेपी राज्य में 35 सीटें जीतकर तख्तापलट कर सकती है, यानी सीधे 23 सीटों का बंपर फायदा. बंगाल में बीजेपी का वोट शेयर 38.73 प्रतिशत से बढ़कर 46.2 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान है, जबकि सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस और ‘इंडिया’ गठबंधन का आंकड़ा 30 सीटों से गिरकर महज 7 सीटों पर सिमट रहा है.

    लेकिन क्या बंगाल का यह उछाल बीजेपी को राहत दे सकता है? आंखें खोल देने वाली सचाई यह है कि केवल एक राज्य के दम पर पूरे देश की राजनीतिक गिरावट की भरपाई नहीं की जा सकती. अगर बंगाल में बीजेपी को 23 सीटों की बढ़त मिल भी जाता है, तो मध्यप्रदेश में 8 सीटें, ओडिशा में 8 सीटें, छत्तीसगढ़ में 3 सीटें और उत्तर प्रदेश में जनवरी के मुकाबले गंवाई गई 10 सीटें मिलकर उस पूरी बढ़त को डकार जाती हैं. मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और उत्तर प्रदेश जैसे राज्य पार्टी का वैचारिक और संगठनात्मक आधार हैं. बंगाल में स्थानीय विरोध या सत्ता-विरोधी लहर के कारण अस्थायी फायदा मिल सकता है, लेकिन हिंदी भाषी राज्यों में पार्टी के प्रति गहराता जनाक्रोश संगठन के बुनियादी ढांचे के लिए एक बड़ा खतरा है।

    ‘मूड ऑफ द नेशन’ सर्वे के ये आंकड़े साफ तौर पर संकेत दे रहे हैं कि देश का मतदाता अब आंख मूंदकर ‘डबल इंजन’ के झांसे में आने को तैयार नहीं है. केंद्र में नरेंद्र मोदी का व्यक्तिगत प्रभाव आज भी कायम है और लोग राष्ट्रीय मुद्दों पर उन पर भरोसा कर रहे हैं, लेकिन राज्यों की बीजेपी सरकारों की नाकामी, स्थानीय बेरोजगारी, महंगाई और प्रशासनिक सुस्ती ने जनता का मोहभंग कर दिया है. एक ताकतवर इंजन पूरी ट्रेन को खींचने की कोशिश तो कर सकता है, लेकिन अगर राज्यों का दूसरा इंजन पूरी तरह खराब हो जाए, तो गाड़ी को पटरी से उतरने में वक्त नहीं लगता।

  • साल 2026 का आखिरी चंद्र ग्रहण आज… जानिए किस राशि पर इसका क्या होगा प्रभाव?

    साल 2026 का आखिरी चंद्र ग्रहण आज… जानिए किस राशि पर इसका क्या होगा प्रभाव?


    नई दिल्ली।
    आज 28 अगस्त को साल का आखिरी व दूसरा चंद्र ग्रहण (Chandra Grahan 2026) लग चुका है. जिस चंद्र ग्रहण की हम बात कर रहे हैं, वह सामान्य या पूर्ण चंद्र ग्रहण नहीं है. यह उपच्छाया चंद्र ग्रहण (Penumbral Lunar Eclipse) है, जिसे मालिन्य चंद्र ग्रहण भी कहा जाता है. भारतीय समय के अनुसार, इसका समापन दोपहर 12 बजकर 31 मिनट पर होगा।

    ज्योतिषीय दृष्टि से यह उपछाया चंद्र ग्रहण कुंभ राशि और शतभिषा नक्षत्र में लगेगा. शतभिषा नक्षत्र के स्वामी राहु हैं, जबकि कुंभ राशि के स्वामी शनि हैं. ऐसे में ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इस ग्रहण में शनि और राहु का प्रभाव भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।


    मेष राशि

    मेष राशि वालों के लिए यह ग्रहण अनुकूल माना जा रहा है. करियर में बड़ा अवसर मिल सकता है और लंबे समय से सफलता के लिए प्रयास कर रहे लोगों को अच्छे परिणाम मिलने की संभावना है. स्थान परिवर्तन के योग भी बन सकते हैं और यह बदलाव आपके लिए लाभकारी साबित हो सकता है. हालांकि अगले 15 दिन से एक महीने के दौरान यात्राओं में सावधानी रखें. किसी भी यात्रा में लापरवाही न करें.

    उपाय: ग्रहण समाप्त होने के बाद शिव मंदिर जाकर भगवान शिव को जल अर्पित करें. ऐसा करना आपके लिए शुभ माना जाता है.


    वृषभ राशि

    वृषभ राशि के लोगों के रुके हुए काम इस दौरान पूरे होने की संभावना है. लंबे समय से चली आ रही समस्याओं का समाधान मिल सकता है. अगर कोई विवाद, झगड़ा या कानूनी मामला चल रहा है तो उसमें भी राहत मिलने की संभावना है. करियर के मामले में स्थिति सामान्य से बेहतर रह सकती है, लेकिन कोई बड़ा जोखिम लेने से बचें. अपने महत्वपूर्ण कार्यों को समय पर पूरा करने का प्रयास करें.

    उपाय: ग्रहण समाप्त होने के बाद भगवान शिव को एक लोटा जल अर्पित करें.

    मिथुन राशि
    मिथुन राशि के लोगों को अगले 15 दिन से एक महीने तक विशेष सावधानी बरतने की जरूरत हो सकती है. स्वास्थ्य का ध्यान रखें और बेवजह के विवाद या कानूनी मामलों से बचने का प्रयास करें. संतान को लेकर चिंता बढ़ सकती है. संतान के स्वास्थ्य या करियर को लेकर परेशानियां सामने आ सकती हैं. ऐसे में उनसे बातचीत करें और उनकी समस्याओं को समझने का प्रयास करें. यात्राओं में विशेष सावधानी रखें. अगर बहुत जरूरी न हो तो लंबी यात्राओं से बचना बेहतर होगा.

    उपाय: ग्रहण समाप्त होने के बाद किसी जरूरतमंद व्यक्ति को दूध का दान करें.


    कर्क राशि

    कर्क राशि के लोगों के लिए यह समय थोड़ा चुनौतीपूर्ण रह सकता है. करियर में अधिक मेहनत करनी पड़ सकती है. नौकरी और व्यापार को लेकर सतर्क रहें और किसी तरह की लापरवाही न करें. स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखें. चोट, दुर्घटना या अचानक स्वास्थ्य संबंधी परेशानी से बचने के लिए सावधानी जरूरी है. परिवार की महिलाओं, विशेष रूप से माता, पत्नी, बेटी या बहन के स्वास्थ्य पर भी ध्यान दें. अगले एक महीने तक काम का उतना ही दबाव लें, जितना आप आसानी से संभाल सकें.

    उपाय: ग्रहण समाप्त होने के बाद किसी जरूरतमंद व्यक्ति को चीनी का दान करें.


    सिंह राशि

    सिंह राशि वालों को स्वास्थ्य को लेकर सतर्क रहने की जरूरत है. पाचन और हड्डियों से संबंधित समस्याओं पर ध्यान दें. चोट या फ्रैक्चर जैसी स्थिति से बचने के लिए सावधानी रखें. करियर में किसी तरह का जोखिम न लें. नौकरीपेशा लोग विशेष रूप से अपने काम में लापरवाही से बचें. पारिवारिक और वैवाहिक जीवन में भी तनाव की स्थिति बन सकती है, इसलिए धैर्य से काम लें.

    उपाय: ग्रहण समाप्त होने के बाद किसी जरूरतमंद व्यक्ति को चावल का दान करें.


    कन्या राशि

    कन्या राशि वालों को स्वास्थ्य के मामले में सावधानी रखनी चाहिए. चोट या दुर्घटना से बचने के लिए सतर्क रहें. कान, नाक और गले से जुड़ी परेशानियों का ध्यान रखें. लिखापढ़ी, दस्तावेजों और पैसे के लेन-देन में विशेष सावधानी बरतें. किसी भी कागज पर बिना जांचे हस्ताक्षर न करें. पारिवारिक और सामाजिक रिश्तों में भी सोच-समझकर व्यवहार करें, क्योंकि छोटी गलतफहमी विवाद का कारण बन सकती है.

    उपाय: ग्रहण समाप्त होने के बाद किसी जरूरतमंद व्यक्ति को दूध का दान करें.


    तुला राशि

    तुला राशि वालों को धन के मामले में सावधान रहने की जरूरत है. अचानक खर्च या आर्थिक नुकसान की स्थिति बन सकती है. पैसों के लेन-देन में जल्दबाजी न करें. स्वास्थ्य के मामले में भी सावधान रहें. पाचन और पेट से जुड़ी समस्याएं परेशान कर सकती हैं. चोट या दुर्घटना से बचने के लिए सतर्कता जरूरी है. करियर में कोई लापरवाही न करें और नौकरीपेशा लोग अपने काम को गंभीरता से लें.

    उपाय: ग्रहण समाप्त होने के बाद किसी जरूरतमंद व्यक्ति को चीनी का दान करें.


    वृश्चिक राशि

    वृश्चिक राशि के लोगों के पारिवारिक जीवन में कुछ परेशानियां आ सकती हैं. माता-पिता, पति-पत्नी या अन्य करीबी लोगों के साथ मतभेद हो सकते हैं. बेवजह का तनाव और विवाद बढ़ने की संभावना है. धन और संपत्ति के मामले में अगले एक महीने तक सावधानी रखें. प्रॉपर्टी खरीदने, बेचने या बड़ा निवेश करने में जल्दबाजी न करें. रिश्तों और मित्रता में भी धैर्य से काम लें.

    उपाय: ग्रहण समाप्त होने के बाद किसी जरूरतमंद व्यक्ति को दूध का दान करें.


    धनु राशि

    धनु राशि वालों के लिए यह ग्रहण अनुकूल परिणाम दे सकता है. करियर में लंबे समय से चली आ रही रुकावटें दूर हो सकती हैं. रुका हुआ काम पूरा होने और करियर में सफलता मिलने की संभावना है. आर्थिक मामलों में भी सुधार देखने को मिल सकता है. फंसा हुआ या लंबे समय से रुका पैसा मिलने की संभावना है. हालांकि भाई-बहन के साथ संबंधों का ध्यान रखें और उनके स्वास्थ्य को लेकर भी सजग रहें.

    उपाय: ग्रहण समाप्त होने के बाद शिव मंदिर जाकर भगवान शिव को जल अर्पित करें.


    मकर राशि

    मकर राशि वालों को स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखना चाहिए. आंख, कान, नाक और गले से जुड़ी परेशानियों से सावधान रहें. नौकरी या व्यापार जैसा चल रहा है, उसे फिलहाल स्थिरता से चलने दें. करियर में कोई बड़ा जोखिम न लें. नई नौकरी, स्थान परिवर्तन, प्रॉपर्टी खरीदने या अन्य बड़े फैसलों में जल्दबाजी से बचें.

    उपाय: ग्रहण समाप्त होने के बाद किसी जरूरतमंद व्यक्ति को चावल का दान करें.

    कुंभ राशि

    यह ग्रहण कुंभ राशि में लग रहा है, इसलिए कुंभ राशि वालों को विशेष रूप से अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखने की जरूरत बताई जा रही है. स्वास्थ्य के मामले में लापरवाही न करें. रिश्तों और संबंधों में भी सतर्क रहें. गुस्से या विवाद की वजह से कोई करीबी रिश्ता प्रभावित न हो, इसका ध्यान रखें. महत्वपूर्ण कामों को टालने से बचें, क्योंकि देरी आपके लिए परेशानी का कारण बन सकती है.

    उपाय: ग्रहण समाप्त होने के बाद किसी जरूरतमंद व्यक्ति को दूध का दान करें.


    मीन राशि

    मीन राशि वालों के मन पर इस ग्रहण का असर पड़ने की बात कही जा रही है. मानसिक तनाव, चिंता और बेचैनी बढ़ सकती है. बेवजह की बातों को लेकर ज्यादा सोचने से बचें. स्थान परिवर्तन के योग भी बन सकते हैं. ऐसे में जीवन या करियर से जुड़े बदलाव सामने आ सकते हैं. भावनात्मक रूप से खुद को मजबूत रखें और जल्दबाजी में कोई फैसला न लें. यात्रा और दुर्घटना के मामलों में भी सावधानी बरतें.

    उपाय: ग्रहण समाप्त होने के बाद किसी जरूरतमंद व्यक्ति को चीनी का दान करें.

  • देशभर में आज रक्षाबंधन की धूम…. जानें कब तक रहेगा राखी बांधने का शुभ मुहूर्त

    देशभर में आज रक्षाबंधन की धूम…. जानें कब तक रहेगा राखी बांधने का शुभ मुहूर्त


    नई दिल्ली।
    आज देशभर में रक्षाबंधन (Raksha Bandhan 2026) का पावन पर्व मनाया जा रहा है और इसी के साथ आज साल का आखिरी चंद्र ग्रहण (Lunar Eclipse) भी लग रहा है. राहत की बात तो यह है कि यह चंद्रग्रहण भारत में दृश्यमान नहीं होगा, इसी कारण भारत में आज रक्षाबंधन का पर्व पूरी धूमधाम के साथ मनाया जा रहा है।

    रक्षाबंधन के इस खास दिन पर बहनें अपने भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधकर उनकी लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और खुशहाल जीवन की कामना करती हैं. वहीं, भाई भी अपनी बहनों की जीवनभर रक्षा करने और हर सुख-दुख में उनका साथ देने का वचन देते हैं. इस बार रक्षाबंधन पर भद्रा का साया नहीं रहेगा, ऐसे में पूरे दिन राखी बांधना शुभ माना जा रहा है. बहनें सुबह से ही अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांध सकेंगी. आइए जानते हैं कि आज राखी बांधने का शुभ मुहूर्त (Shubh Muhurat) कब से कब तक है और इस दिन कौन-कौन से शुभ संयोग बन रहे हैं।


    रक्षाबंधन 2026 की तिथि (Raksha Bandhan 2026 Date)

    पंचांग के मुताबिक, हर साल रक्षाबंधन का पर्व श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है. हिंदू पंचांग के अनुसार, इस बार सावन पूर्णिमा की तिथि 27 अगस्त यानी कल सुबह 9 बजकर 8 मिनट पर शुरू हो चुकी है और तिथि का समापन 28 अगस्त यानी आज सुबह 9 बजकर 48 मिनट पर होगा।


    रक्षाबंधन 2026 भद्रा काल का समय (Raksha Bandhan 2026 Bhadra kaal Timing)

    शास्त्रों के मुताबिक, भद्रा के दौरान राखी बांधना बहुत ही अशुभ होता है. हालांकि, इस बार रक्षाबंधन पर भद्रा का साया नहीं रहेगा. सावन पूर्णिमा पर भद्रा 27 अगस्त यानी कल सुबह 9 बजकर 8 मिनट से शुरू होकर कल रात 9 बजकर 32 मिनट पर समाप्त हो चुकी है. यानी रक्षाबंधन का मुहूर्त शुरू होने से पहले ही भद्रा काल समाप्त हो चुका है.


    रक्षाबंधन पर राखी बांधने का शुभ मुहूर्त (Raksha Bandhan 2026 Shubh muhurat)

    रक्षाबंधन पर भाई को राखी बांधने का सबसे पहला शुभ मुहूर्त आज सुबह 05 बजकर 57 मिनट से लेकर सुबह 9 बजकर 48 मिनट तक रहेगा. यानी भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधने के लिए बहनों को करीब 3 घंटे 51 मिनट का समय मिलने वाला है.

    इसके अलावा, अगर आप किसी कारणवश इस मुहूर्त में राखी बांध पाएं तो अभिजीत मुहूर्त भी रहेगा. जिसका समय आज सुबह 11 बजकर 56 मिनट से लेकर 12 बजकर 48 मिनट तक रहेगा।

    राखी बांधने के कुछ अन्य मुहूर्त भी हैं जैसे-
    शुभ चौघड़िया: दोपहर 12:28 बजे से 2:03 बजे तक
    अपराह्न काल: दोपहर 1:44 बजे से शाम 4:16 बजे तक
    चर चौघड़िया: शाम 5:13 बजे से 6:48 बजे तक

    रक्षाबंधन पर बन रहे कई शुभ योग (Raksha Bandhan 2026 Shubh Yog)
    रक्षाबंधन पर आज करीब 11 शुभ योगों का संयोग बन रहा है. शतभिषा नक्षत्र के साथ अतिगंड, शोभन, शिव और विजय जैसे योग बनने की बात कही जा रही है. इसके अलावा चंद्रादि, बुधादित्य, विमल, विपरीत राजयोग, धन, उभयचरी, शकट और सुनफा योग का भी संयोग बताया जा रहा है।

    ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार ऐसे शुभ योगों में पूजा-पाठ, दान और भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधने जैसे धार्मिक कार्यों को विशेष फलदायी माना जाता है. रक्षाबंधन के दिन ग्रहों की स्थिति भी महत्वपूर्ण बताई जा रही है. सूर्य सिंह राशि में रहेंगे, जबकि गुरु कर्क राशि में स्थित होंगे. ज्योतिष में सूर्य को आत्मबल, प्रतिष्ठा और ऊर्जा का कारक माना जाता है, वहीं गुरु को ज्ञान, शिक्षा, बुद्धि और समृद्धि से जोड़ा जाता है. चंद्रमा कुंभ राशि में रहेंगे. ऐसे में ग्रहों और नक्षत्रों का यह संयोग रक्षाबंधन को धार्मिक और ज्योतिषीय दोनों दृष्टि से खास बना रहा है।


    इस अशुभ मुहूर्त में ना बांधें राखी? (Raksha Bandhan 2026 Rahu kaal Timing)

    हिंदू पंचांग के अनुसार, रक्षाबंधन पर जिस तरह भद्रा काल का ध्यान रखा जाता है उसी तरह राहु काल का ध्यान रखना चाहिए. राहु काल कल सुबह 10 बजकर 46 मिनट से शुरू होकर दोपहर 12 बजकर 22 मिनट तक रहेगा. वहीं, यमगंड दोपहर 3 बजकर 35 मिनट से लेकर शाम 5 बजकर 11 मिनट तक रहेगा. ऐसे में, ज्योतिषविदों की सलाह है कि रक्षाबंधन पर राहु काल लगने से पहले या बाद में भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधें।


    कैसे मनाएं रक्षाबंधन? (Raksha Bandhan 2026 Rituals)

    रक्षाबंधन के दिन सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और अपने इष्टदेव का स्मरण करें. इसके बाद पूजा की थाली सजाएं, जिसमें रोली, चंदन, अक्षत, दही, राखी, मिठाई और घी का दीपक रखें. सबसे पहले भगवान की विधिवत पूजा करें. इसके बाद भाई को पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठाएं. राखी बांधते समय इस बात का ध्यान रखें कि भाई और बहन दोनों का सिर ढका होना चाहिए. बहन सिर पर चुनरी रखें और भाई साफ रुमाल या किसी स्वच्छ वस्त्र से अपना सिर ढकें।

    अब भाई के माथे पर रोली या चंदन का तिलक लगाएं और उस पर अक्षत रखें. भाई की लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य की कामना करें. इसके बाद भाई की कलाई पर राखी बांधें, आरती उतारें और मिठाई खिलाकर उसके मंगलमय जीवन की प्रार्थना करें. राखी बांधने के बाद माता-पिता और घर के बड़े-बुजुर्गों का आशीर्वाद जरूर लें. वहीं, भाई अपनी सामर्थ्य के अनुसार बहन को उपहार या आशीर्वाद दें और जीवनभर उसकी रक्षा व सहयोग का संकल्प लें।


    आखिर कहां से शुरू हुई राखी की परंपरा

    एक समय की बात है कि राजपूत मुस्लिमों के खिलाफ लड़ रहे थे. अपने पति राणा सांगा की मृत्यु के बाद मेवाड़ की कमान रानी कर्णावती के हाथों में थी. उस समय गुजरात के बहादुर शाह ने मेवाड़ पर दूसरी बार आक्रमण किया था. कर्णावती ने तब हुमायूं से मदद मांगने के लिए उसे राखी भेजी. हुमायूं उस समय एक युद्ध के बीच में था, मगर रानी के इस कदम ने उसे भीतर से छू लिया. हुमायूं ने अपनी फौज फौरन मेवाड़ के लिए भेज दी. दुर्भाग्‍यवश, उसके सैनिक समय पर नहीं पहुंच पाए और चित्‍तौड़ में राजपूत सेना की हार हुई. रानी ने अपने सम्मान की रक्षा के लिए जौहर (खुद को आग लगा ली) कर लिया. लेकिन हुमायूं की सेना ने चित्‍तौड़ से शाह को खदेड़ कर रानी के पुत्र विक्रमजीत को गद्दी सौंप दी और अपनी राखी का मान रखा।


    देवराज इंद्र और इंद्राणी की राखी

    माना जाता है कि एक बार दैत्‍य वृत्रासुर ने इंद्र का सिंहासन हासिल करने के लिए स्‍वर्ग पर चढ़ाई कर दी. वृत्रासुर बहुत ताकतवर था और उसे हराना आसान नहीं था. युद्ध में देवराज इंद्र की रक्षा के लिए उनकी बहन इंद्राणी ने अपने तपोबल से एक रक्षासूत्र तैयार किया और इंद्र की कलाई पर बांध दिया. इस रक्षासूत्र ने इंद्र की रक्षा की और वह युद्ध में विजयी हुए. तभी से बहनें अपने भाइयों की रक्षा के लिए उनकी कलाई पर राखी बांधने लगीं।

  • नेपाल में आई तबाही के बाद भोपाल के 29 लोग लापता…. गोसाईकुंडा तीर्थ गए थे घूमने

    नेपाल में आई तबाही के बाद भोपाल के 29 लोग लापता…. गोसाईकुंडा तीर्थ गए थे घूमने


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) की राजधानी भोपाल (Bhopal) का एक परिवार और उनसे जुड़े कुल 29 लोग नेपाल (Nepal) में अचानक आई भीषण बाढ़ (Devastating floods) के बाद से लापता हैं। परिवार की एक महिला ने उनके बारे में जानकारी देते हुए बताया कि ये सभी लोग जोड़े से नेपाल के रसुवा जिले में स्थित गोसाईकुंडा तीर्थ (Gosaikunda Pilgrimage) में घूमने गए थे। इसी दौरान वहां आई इस बाढ़ में फंस गए।

    महिला ने बताया कि परिवार के एक सदस्य से जो आखिरी बार बात हुई थी, उसमें उन्होंने कहा था कि हम लोग एक मकान की छत पर खड़े हुए हैं, लेकिन हमारा बचना मुश्किल है, आप लोग हमारे बच्चों को देख लेना, आप उनकी देखभाल करना।

    नेपाल में लापता हुए 29 सदस्यों की जानकारी देते हुए परिवार की महिला देवकी अधिकारी ने बताया, ‘मेरे जेठ-जेठानी, देवर-देवरानी, दीदी-जीजाजी को मिलाकर कुल 29 लोग वहां गए हैं। ये सभी लोग जोड़े से वहां एक तीर्थ की यात्रा करने गए हैं, जहां पर पूर्णिमा पर दर्शन करने जाते हैं।’


    खाना अधूरा छोड़कर भागे, सामान भी नहीं उठाया

    महिला ने बताया कि ये लोग बुधवार को जब निकले थे, तो वहां ऐसी कोई आशंका नहीं थी, कि आगे जाकर कोई खतरा हो सकता है। लेकिन आगे जाकर जब वे खाना खाने के लिए रुके थे, वहां उन्हें पता चला कि पीछे से कोई बाढ़ आ रही है, जिसमें जान का खतरा है। जिसके बाद वे जल्दबाजी में अधूरा खाना छोड़कर उठे और अपनी बस व सामान को छोड़कर वहां से भागे, और जैसे-तैसे पास में स्थिति पहाड़ पर चढ़कर वहां बने एक मकान की छत पर जाकर रूके।’


    ‘आधा घर डूब चुका है, अब हम लोग नहीं बचेंगे’

    महिला ने आगे कहा कि ‘वहां पहुंचकर उन्हें लगा था कि शायद वो बच जाएंगे। लेकिन जब ऐसा होना मुश्किल लगा तो उनमें से एक रिश्तेदार में घर पर फोन लगाकर पूरा घटनाक्रम बताया और कहा कि हमारी बस तो चली गई है और हम फिलहाल छत पर आकर रूके हैं, लेकिन अब हमारी जान को भी खतरा है। उन्होंने बताया कि ‘आधा घर डूब चुका है, और अब हम लोग नहीं बच पाएंगे। हमारे बच्चों को देख लेना’, महिला ने कहा, ‘बस उनके मुंह से इतना ही निकला था, कि फिर बगैर फोन कटे ही सामने से आवाज आना बंद हो गई।’


    बुधवार सुबह हुई बात के बाद कोई संपर्क नहीं हो पाया

    महिला ने बताया कि यह बात उनसे कल सुबह करीब साढ़े नौ बजे हुई थी और अब 24 घंटे से ज्यादा वक्त गुजरने के बाद भी वहां गए किसी भी व्यक्ति से कोई संपर्क नहीं हो पाया है। महिला ने कहा, ‘जिस बस से वो लोग गए थे उसका भी कुछ पता नहीं है और उन 29 लोगों का भी फिलहाल कुछ पता नहीं चला है। एक की भी बॉडी अबतक नहीं मिली है।’


    बच्चों का रो रोकर बुरा हाल, सरकार से मांगी मदद

    महिला के अनुसार वहां गए सभी लोग आपस में परिचित थे और सभी कहीं ना कहीं एक-दूसरे के रिश्ते में लगते थे। उधर उनके लापता होने के बाद सभी के बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल है, कोई ससुराल में है तो कोई नौकरी करने गया हुआ है और वे सभी अपने माता-पिता के लिए परेशान हो रहे हैं। महिला ने सरकार से उन लोगों का पता लगाने में मदद करने की गुहार लगाई है।