Author: bharati

  • इस साल जन्माष्टमी की तिथि को लेकर असमंजस …. पंचांग में देखें सही तारीख और मुहूर्त

    इस साल जन्माष्टमी की तिथि को लेकर असमंजस …. पंचांग में देखें सही तारीख और मुहूर्त


    नई दिल्ली।
    भगवान श्रीकृष्ण (Lord Sri Krishna) का जन्म द्वापर युग में भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी (Krishna Paksha Ashtami) तिथि को रोहिणी नक्षत्र में हुआ था. इस वजह से हर साल श्रीकृष्ण जन्माष्टमी (Shri Krishna Janmashtami) इस तिथि को ही मनाते हैं और कोशिश करते हैं कि उस दिन तिथि के साथ रोहिणी नक्षत्र भी हो. लेकिन ऐसा हर बार हो, यह संभव नहीं है. इस बार श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 4 सितंबर को है या फिर 5 सितंबर को? इस पर कन्फ्यूजन दूर करने के लिए पंचांग से जानते हैं जन्माष्टमी की सही तारीख और मुहूर्त के बारे में.

    श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के लिए भाद्रपद कृष्ण अष्टमी तिथि 4 सितंबर को 2:25 एएम पर शुरू हो रही है और 5 सितंबर को 12:13 एएम तक विद्यमान रहेगी. उदयातिथि के आधार पर देखा जाए तो जन्माष्टमी की तिथि 4 सितंबर को पूरे दिन है, वहीं रोहिणी नक्षत्र में रात 11 बजकर 04 मिनट तक है।

    भगवान श्रीकृष्ण जन्म मध्य रात्रि में हुआ था, तो 4 और 5 सितंबर की रात वह समय भी प्राप्त होगा. इस आधार पर इस साल श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 4 सिंतबर शुक्रवार को मनाना उत्तम रहेगा. भाद्रपद में और भी कई व्रत-त्योहार हैं।


    वज्र योग और मृगशिरा नक्षत्र में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव

    4 सितंबर को श्रीकृष्ण जन्मोत्सव के समय मृगशिरा नक्षत्र और वज्र योग होगा. बाल गोपाल भगवान श्रीकृष्ण का जन्म उत्सव मध्य रात्रि में मनाते हैं. उस दिन हर्षण योग प्रात:काल से लेकर दोपहर 03:44 पी एम तक रहेगा. उसके बाद से वज्र योग प्रारंभ होगा, जो 5 सितंबर को दोपहर 12 बजकर 47 मिनट तक रहेगा. वहीं रोहिणी नक्षत्र प्रात:काल से लेकर रात 11:04 पी एम तक है, उसके बाद से मृगशिरा नक्षत्र प्रारंभ है।


    जन्माष्टमी मुहूर्त 2026

    इस साल जन्माष्टमी का मुहूर्त रात में 11:57 बजे से लेकर देर रात 12:43 बजे तक है. इसमें भगवान श्रीकृष्ण का जन्म होगा और उत्सव मनाया जाएगा. जन्माष्टमी का ब्रह्म मुहूर्त 04:30 ए एम से 05:15 ए एम तक रहेगा. इस समय में स्नान करके व्रत का संकल्प कर लें. अभिजीत मुहूर्त दिन में 11:55 बजे से लेकर दोपहर 12:45 बजे तक रहेगा. अमृत काल रात में 08:03 पी एम से लेकर 09:33 पी एम तक है.


    जन्माष्टमी व्रत का पारण समय

    जो लोग जन्माष्टमी का व्रत रखेंगे, वे देर रात 12:43 बजे के बाद पारण करके व्रत को पूरा करेंगे. जिनके यहां उदयाति​थि यानि सूर्योदय के बाद पारण होता है, वे 5 सितंबर को सूर्योदय बाद पारण करेंगे.

    जन्माष्टमी पर राहुकाल कब है?
    जन्माष्टमी के दिन राहुकल सुबह में 10 बजकर 45 मिनट पर प्रारंभ होगा और दोपहर में 12 बजकर 20 मिनट पर खत्म होगा. उस दिन आपको कोई शुभ काम करना है तो राहुकाल का ध्यान रखें. उसमें न करें।

  • नेपाल त्रासदी पर चीन की चुप्पी पर सवाल: सिर्फ 5 मौतों की जानकारी, तिब्बत में पीड़ितों से बात करने पर भी पाबंदी

    नेपाल त्रासदी पर चीन की चुप्पी पर सवाल: सिर्फ 5 मौतों की जानकारी, तिब्बत में पीड़ितों से बात करने पर भी पाबंदी


    नई दिल्ली। नेपाल में बुधवार को आई भीषण बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। इस आपदा में मृतकों की संख्या बढ़कर 579 हो गई है, जबकि करीब 2 हजार लोग अब भी लापता हैं। भारत के भी सैकड़ों नागरिकों से संपर्क नहीं हो पा रहा है। आपदा का असर चीन के तिब्बत क्षेत्र से भी जुड़ा है, लेकिन चीन की ओर से अब तक सिर्फ 5 लोगों की मौत की जानकारी दी गई है। इससे चीन की ओर से वास्तविक नुकसान और जनहानि की जानकारी छिपाए जाने को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

    चीन में तबाही, लेकिन जानकारी बेहद सीमित

    द गार्जियन की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन का सरकारी मीडिया भी इस आपदा को लेकर व्यापक रिपोर्टिंग नहीं कर रहा है। कुछ पत्रकार प्रभावित इलाकों में पहुंचते हैं, लेकिन वहां पीड़ितों और स्थानीय लोगों से बातचीत करने के बजाय रिपोर्टिंग मुख्य रूप से सरकारी राहत एवं बचाव प्रयासों तक सीमित रहती है। रिपोर्टों में चीन की ओर से किए जा रहे राहत कार्यों को प्रमुखता दी जाती है, जबकि आम लोगों की स्थिति सामने नहीं आ रही है।

    नेपाल में बाढ़ के प्रभाव को देखते हुए आशंका जताई जा रही है कि चीन के प्रभावित हिस्सों में भी नुकसान व्यापक हो सकता है। इसके बावजूद चीन की ओर से जनहानि और तबाही का विस्तृत आंकड़ा सार्वजनिक नहीं किया गया है।

    तिब्बत में पत्रकारों और स्थानीय लोगों पर पाबंदियों का आरोप

    चीन तिब्बत पर अपना दावा करता है, जबकि तिब्बत की स्वायत्तता और स्वतंत्रता की मांग लंबे समय से उठती रही है। रिपोर्ट के अनुसार, तिब्बत में अंतरराष्ट्रीय पत्रकारों की पहुंच पर कड़े प्रतिबंध हैं। स्थानीय लोगों के पत्रकारों से बातचीत करने पर भी कार्रवाई का खतरा रहता है।

    तिब्बत में भाषा और संस्कृति से जुड़े मुद्दों को लेकर भी चीन की नीतियों की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आलोचना होती रही है। ऐसे में मौजूदा आपदा के दौरान भी स्थानीय लोगों की आवाज और जमीनी हालात के सामने न आने पर सवाल उठ रहे हैं।

    चीन ने भेजी राहत टीम, शी जिनपिंग ने की बैठक

    जानकारी के मुताबिक, चीन ने प्रभावित क्षेत्र में राहत और बचाव दल भेजे हैं। हालांकि, इन टीमों ने मौके पर किस स्तर पर और क्या काम किया, इसकी विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।

    चीनी मीडिया ने बताया कि राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने राहत एवं बचाव कार्यों को लेकर एक उच्चस्तरीय बैठक की। वहीं, प्रीमियर ली कियांग ने प्रभावित क्षेत्र का दौरा भी किया।

    दो और ग्लेशियरों पर नजर

    नेपाल के मौसम विभाग के अधिकारियों ने अब दो और ग्लेशियरों पर निगरानी बढ़ाने की कोशिश शुरू की है। ये दोनों ग्लेशियर उस ग्लेशियर के आसपास स्थित हैं, जिसके टूटने के बाद बुधवार को विनाशकारी बाढ़ आई थी। इससे प्रभावित क्षेत्रों में आगे किसी और आपदा की आशंका को लेकर निगरानी महत्वपूर्ण हो गई है।

    4 हजार लोगों को सुरक्षित निकाला गया

    नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी के ताजा अपडेट के मुताबिक, राहत और बचाव अभियान के दौरान अब तक करीब 4,000 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा चुका है। हालांकि लापता लोगों की संख्या अभी भी बढ़ रही है और ताजा आंकड़े के अनुसार 1,924 लोग लापता हैं।

    बचाव अभियान को तेज करने के लिए नेपाल सेना, नेपाल पुलिस और सशस्त्र पुलिस बल के 15,000 से ज्यादा जवानों को प्रभावित इलाकों में तैनात किया गया है।

    लापता विदेशियों के आंकड़े अलग-अलग

    लापता विदेशी नागरिकों की संख्या को लेकर अलग-अलग सरकारी आंकड़े सामने आए हैं। एक सरकारी रिपोर्ट में 517 विदेशी नागरिकों और जलविद्युत परियोजनाओं में काम करने वाले कर्मचारियों के लापता होने की बात कही गई है।

    वहीं, नेपाल पुलिस के पहले जारी आंकड़ों में लापता विदेशी नागरिकों की संख्या 575 बताई गई थी। इनमें 36 देशों के नागरिक शामिल हैं। पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक लापता विदेशियों में 65 अमेरिकी, 62 यूक्रेनी और 33 ब्रिटिश नागरिक भी हैं।

    इसके अलावा प्रभावित इलाकों से 149 नेपाली पर्यटक और 1,407 स्थानीय नागरिक भी लापता बताए गए हैं। प्रशासन और सुरक्षा बल प्रभावित क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर खोज, राहत और बचाव अभियान चला रहे हैं।

  • ‘आपने 200 साल में किया, हमसे कुछ दशकों में बदलाव की उम्‍मीद क्यों?’ CJI सूर्यकांत ने विकसित देशों से पूछा सवाल

    ‘आपने 200 साल में किया, हमसे कुछ दशकों में बदलाव की उम्‍मीद क्यों?’ CJI सूर्यकांत ने विकसित देशों से पूछा सवाल


    नई दिल्ली। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने विकसित देशों से स्वच्छ ऊर्जा की ओर बढ़ने की उनकी अपेक्षाओं पर सवाल उठाते हुए जलवायु न्याय और साझा जिम्मेदारी की जरूरत बताई। लंदन स्थित कॉमनवेल्थ सचिवालय में 56 देशों के साझा मंच पर ‘जलवायु न्याय पर नीति संवाद’ को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि जिन औद्योगिक देशों को स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में बढ़ने में करीब दो सदियां लगीं, वे अब विकासशील देशों से कुछ ही दशकों में उसी बदलाव की उम्मीद कर रहे हैं।

    विकासशील देशों पर तेजी से बदलाव का दबाव

    CJI ने कहा कि जो देश अभी औद्योगीकरण के दौर से गुजर रहे हैं, उनसे तेजी से नवीकरणीय ऊर्जा अपनाने की अपेक्षा की जाती है। ऐसा न कर पाने पर उन्हें आलोचना का सामना भी करना पड़ता है। दूसरी ओर, जिन विकसित देशों की ओर से यह बदलाव जल्द करने की मांग की जा रही है, उन्होंने अपनी अर्थव्यवस्था और औद्योगिक ताकत खड़ी करने में करीब दो सदियां कोयले और तेल पर निर्भर रहकर बिताईं।

    उन्होंने कहा कि स्वच्छ ऊर्जा की ओर बढ़ने की जरूरत से इनकार नहीं किया जा सकता, लेकिन इस बदलाव की रफ्तार तय करते समय विकासशील देशों की परिस्थितियों को भी ध्यान में रखना होगा।

    कॉपर, कोबाल्ट और लिथियम से जुड़ी नई चुनौती

    CJI सूर्यकांत ने कहा कि कॉमनवेल्थ देशों के स्तर पर स्वच्छ ऊर्जा की ओर संक्रमण कॉपर, कोबाल्ट और लिथियम जैसे खनिजों पर भी निर्भर करता है। इन खनिजों के खनन का पर्यावरण और समाज दोनों पर असर पड़ता है।

    उन्होंने कहा कि विकासशील देश अपनी भौगोलिक और सामाजिक परिस्थितियों के कारण पहले से कई चुनौतियों से जूझ रहे हैं। ऐसे में उन्हें अवास्तविक गति से स्वच्छ ऊर्जा की ओर बढ़ने के लिए मजबूर करना नई समस्याएं पैदा कर सकता है। इसलिए ऊर्जा परिवर्तन की तात्कालिकता को निष्पक्षता और साझा जिम्मेदारी के साथ संतुलित करना जरूरी है।

    पर्यावरण बनाम विकास नहीं, संतुलन का रास्ता जरूरी

    मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि भारत के सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट पर्यावरण, पारिस्थितिकी और लुप्तप्राय प्रजातियों के संरक्षण से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं। उन्होंने जाम्बिया हाईकोर्ट के एक मामले का भी उदाहरण दिया, जिसमें पानी को प्रदूषित करने वाली कॉपर खनन कंपनी को जिम्मेदार ठहराया गया था।

    उनके मुताबिक, कॉमनवेल्थ के देश एक-दूसरे के अनुभवों से सीखकर स्वच्छ ऊर्जा की ओर बदलाव को बेहतर तरीके से लागू कर सकते हैं, ताकि इसकी भारी कीमत आम लोगों को न चुकानी पड़े।

    CJI ने कहा कि जलवायु से जुड़े मामलों में हर देश की अदालत को नए सिरे से अलग कानूनी शब्दावली गढ़ने की जरूरत नहीं है। अदालतें कॉमनवेल्थ के दूसरे देशों में प्रभावी रहे विचारों और समाधानों से सीख सकती हैं। हालांकि, इन्हें अपने देश के संवैधानिक, सामाजिक और पर्यावरणीय हालात के मुताबिक ढालना होगा।

    घायल जवानों के लिए सड़क चौड़ीकरण का दिया उदाहरण

    CJI सूर्यकांत ने सुप्रीम कोर्ट के सामने आए एक मामले का जिक्र करते हुए बताया कि घायल अर्धसैनिक बलों के जवानों को सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल तक पहुंचाने के लिए सड़क चौड़ी करने के दौरान बड़ी संख्या में पेड़ काटे जाने का मामला सामने आया था।

    उन्होंने कहा कि अदालत के सामने दुविधा यह थी कि न तो पेड़ काटने वाले अधिकारियों को पुरस्कृत किया जा सकता था और न ही घायल जवानों के लिए एंबुलेंस के रास्ते को रोका जा सकता था।

    ऐसे में सुप्रीम कोर्ट ने सड़क चौड़ीकरण पर रोक लगाने के बजाय बड़े पैमाने पर क्षतिपूरक वनीकरण का आदेश दिया। CJI ने बताया कि इस वनीकरण की निगरानी अब भी की जा रही है।

    ‘कई बार तीसरा रास्ता तलाशना पड़ता है’

    CJI ने कहा कि विकास और पर्यावरण संरक्षण को हमेशा एक-दूसरे के विरोधी पक्ष के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। कई परिस्थितियों में अदालतों को ऐसा समाधान तलाशना होता है, जिससे पर्यावरण की सुरक्षा के साथ विकास की जायज जरूरतें भी पूरी हो सकें।

    उनके मुताबिक, न्यायिक रचनात्मकता का उद्देश्य कई बार ऐसा तीसरा रास्ता तलाशना होता है, जिसमें पर्यावरण संरक्षण और विकास दोनों को आगे बढ़ाने की गुंजाइश हो।

  • बाढ़ के बाद नेपाल पर मंडराया नया संकट, काठमांडो में खाने-पीने से ईंधन तक की सप्लाई पर असर

    बाढ़ के बाद नेपाल पर मंडराया नया संकट, काठमांडो में खाने-पीने से ईंधन तक की सप्लाई पर असर


    काठमांडो। नेपाल में बुधवार को भोटेकोशी नदी तंत्र में आई अचानक बाढ़ ने भारी तबाही मचाने के बाद अब राजधानी काठमांडो की आपूर्ति व्यवस्था के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। देश के प्रमुख सप्लाई रूट पृथ्वी हाईवे के बंद होने से काठमांडो घाटी में खाद्य सामग्री, ईंधन और अन्य जरूरी सामान की आवाजाही प्रभावित हुई है। हाईवे को पूरी तरह कब तक खोला जा सकेगा, इसकी अभी कोई निश्चित समयसीमा नहीं बताई गई है। ऐसे में सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती राजधानी में जरूरी वस्तुओं की नियमित आपूर्ति बनाए रखना है।

    पृथ्वी हाईवे बंद होने से काठमांडो की सप्लाई क्यों प्रभावित?

    काठमांडो के लिए नागढुंगा से भरतपुर तक पृथ्वी हाईवे का करीब 180 किलोमीटर हिस्सा बेहद महत्वपूर्ण है। इसी मार्ग के जरिए राजधानी में बड़ी मात्रा में खाद्य पदार्थ, पेट्रोलियम उत्पाद और रोजमर्रा की जरूरी वस्तुएं पहुंचती हैं।

    बुधवार की बाढ़ में कम से कम 19 पुल क्षतिग्रस्त हुए हैं। वहीं त्रिशूली कॉरिडोर और आसपास के राजमार्गों पर करीब 40 किलोमीटर सड़क बह गई। काठमांडो घाटी ट्रैफिक पुलिस कार्यालय के प्रवक्ता पुलिस अधीक्षक नरेश राज सुबेदी ने बताया कि अधिकारी रास्ता बहाल करने के लिए पूरी क्षमता से काम कर रहे हैं, लेकिन शुक्रवार तक हाईवे खुलने की गारंटी नहीं दी जा सकती।

    वैकल्पिक रास्तों से पहुंच रहा सामान

    सड़क विभाग के इंजीनियर राजीव मानंधर के मुताबिक शुक्रवार शाम तक गल्छी वाले हिस्से में बारी-बारी से एकतरफा यातायात शुरू कर दिया गया था। वहीं गलौंडी-घाटबेसी-जारेखेत हिस्से में दोनों दिशाओं से वाहनों की आवाजाही शुरू हो गई थी।

    हालांकि बारिश होने पर इन रास्तों को दोबारा बंद करना पड़ सकता है। भूस्खलन के बाद सड़कों पर जमा मलबा हटाने का काम लगातार चल रहा है और शाम पांच बजे तक अर्थमूवर मशीनों की मदद ली जा रही है। इसके अलावा कुछ वैकल्पिक मार्गों के जरिए भी काठमांडो में जरूरी सामान पहुंचाया जा रहा है।

    कालिमाटी बाजार में सब्जियों की आवक घटी

    पृथ्वी हाईवे बंद होने का असर काठमांडो के प्रमुख कालिमाटी फल एवं सब्जी बाजार में भी दिखाई दिया है। मंगलवार को यहां 775 टन सब्जियां, फल और मछली पहुंची थी। बुधवार को आवक 771 टन रही, लेकिन गुरुवार को यह घटकर सिर्फ 477 टन रह गई।

    बाजार विकास बोर्ड के सूचना अधिकारी बिनय श्रेष्ठ के अनुसार पृथ्वी हाईवे से आने वाला सामान रास्ते में फंसा हुआ है। इस मार्ग से सब्जियों की आपूर्ति पूरी तरह रुक गई है, हालांकि अन्य रास्तों से कुछ सामान बाजार तक पहुंच रहा है।

    चार-पांच दिन का ईंधन स्टॉक

    हाईवे बंद होने के कारण पेट्रोल और अन्य पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति को लेकर भी चिंता बढ़ी है। हालांकि नेपाल ऑयल कॉरपोरेशन ने फिलहाल लोगों को राहत दी है। निगम के मुताबिक थानकोट डिपो में मौजूद पेट्रोलियम उत्पाद चार से पांच दिन तक चलने के लिए पर्याप्त हैं।

    निगम के उप निदेशक मनोज कुमार ठाकुर ने कहा कि इस अवधि के भीतर पृथ्वी हाईवे के खुलने की उम्मीद है। इसलिए लोगों को ईंधन की उपलब्धता को लेकर घबराने की जरूरत नहीं है। सरकार भी जरूरी वस्तुओं और पेट्रोलियम उत्पादों की स्थिति पर नजर बनाए हुए है।

    कालाबाजारी पर सरकार की नजर

    आपदा के बीच सरकार को इस बात की भी चिंता है कि कहीं कारोबारी कृत्रिम कमी पैदा कर सामान महंगा न कर दें। वाणिज्य, आपूर्ति और उपभोक्ता संरक्षण विभाग ने लोगों से बाजार में कालाबाजारी या कृत्रिम कमी से जुड़ी शिकायतें दर्ज कराने की अपील की है।

    विभाग और स्थानीय प्रशासन बाजारों की निगरानी कर रहे हैं। वहीं उद्योग, वाणिज्य और आपूर्ति मंत्रालय ने त्योहारों के मौसम तथा आपदा प्रबंधन की स्थिति पर नजर रखने के लिए एक समन्वय इकाई बनाई है। संबंधित सरकारी एजेंसियों को भी इसी तरह की इकाइयां गठित करने के निर्देश दिए गए हैं।

    रसुवा से धादिंग तक भारी तबाही

    बुधवार सुबह भोटेकोशी नदी तंत्र में अचानक आई बाढ़ ने रसुवा, नुवाकोट और धादिंग जिलों में भारी नुकसान पहुंचाया। बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई है, जबकि सैकड़ों लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। लापता और प्रभावित लोगों में सुरक्षा बलों के जवानों के साथ विदेशी पर्यटक भी शामिल हैं।

    बाढ़ से सरकारी और निजी संपत्तियों को भी भारी नुकसान हुआ है। इसे हाल के वर्षों की बड़ी प्राकृतिक आपदाओं में से एक माना जा रहा है। सड़कों और पुलों के क्षतिग्रस्त होने से राहत अभियान के साथ-साथ राजधानी की आपूर्ति व्यवस्था भी प्रभावित हुई है।

    उपभोक्ता संगठनों ने मांगी सख्ती

    उपभोक्ता अधिकार कार्यकर्ताओं ने सरकार से वैकल्पिक मार्गों के जरिए जरूरी सामान की आपूर्ति बनाए रखने और संकट का फायदा उठाकर मुनाफाखोरी करने वालों पर कार्रवाई की मांग की है।

    उपभोक्ता अधिकार संरक्षण-नेपाल मंच के महासचिव विष्णु प्रसाद तिमिल्सिना ने कहा कि कालाबाजारी, कृत्रिम कमी और मनमाने तरीके से कीमत बढ़ाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। उनका कहना है कि संकट के समय लोगों को यह भरोसा मिलना जरूरी है कि सरकार उनके साथ है और जरूरी वस्तुओं की कमी नहीं होने दी जाएगी

  • एक खिलाड़ी को खास ट्रीटमेंट क्यों? अश्विन ने पंत के रवैये पर उठाए सवाल, ‘जेनरेशन के खिलाड़ी’ का टैग भी नकारा

    एक खिलाड़ी को खास ट्रीटमेंट क्यों? अश्विन ने पंत के रवैये पर उठाए सवाल, ‘जेनरेशन के खिलाड़ी’ का टैग भी नकारा


    नई दिल्ली। पूर्व भारतीय ऑफ स्पिनर रविचंद्रन अश्विन ने विकेटकीपर-बल्लेबाज ऋषभ पंत के हालिया प्रदर्शन और उनकी शॉट सिलेक्शन को लेकर सवाल उठाए हैं। अश्विन के मुताबिक पंत ने अभी तक उन उम्मीदों को पूरी तरह पूरा नहीं किया है, जो उनसे की जाती हैं। श्रीलंका के खिलाफ हालिया दो टेस्ट की सीरीज में पंत ने 168 रन बनाए, जिसमें दो अर्धशतक शामिल रहे। हालांकि, उनके आक्रामक अंदाज और कुछ शॉट्स के चयन को लेकर बहस जारी है।

    ‘पंत से मेरी उम्मीदें अभी तक पूरी नहीं हुईं’

    अपने यूट्यूब चैनल ‘एश की बात’ पर अश्विन ने कहा कि पंत से उनकी उम्मीदें अब तक पूरी नहीं हुई हैं। उनका कहना है कि टेस्ट क्रिकेट में किसी बल्लेबाज के स्वाभाविक अंदाज को ही हर परिस्थिति में सही नहीं माना जा सकता। खिलाड़ी को यह भी देखना चाहिए कि उस वक्त टीम की जरूरत क्या है।

    अश्विन ने कहा, ‘ऋषभ पंत से मेरी उम्मीदें अब तक पूरी नहीं हुई हैं। जब खेल आपके हाथ में हो, तब ये कहना कि ऋषभ इसी तरह खेलता है सही नहीं है। सवाल यह है कि उस समय आपकी टीम को क्या चाहिए।’

    एक गलती पूरे टेस्ट का रुख बदल सकती है

    अश्विन ने पंत के आक्रामक क्रिकेट के समर्थन में दिए जाने वाले तर्कों पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि टेस्ट मैच जीतने के लिए पूरी टीम के 11 खिलाड़ियों का योगदान जरूरी होता है, लेकिन एक गलत फैसला हार की वजह बन सकता है।

    उन्होंने सिडनी और ब्रिस्बेन में पंत की पारियों की तारीफ की, लेकिन साथ ही वॉशिंगटन सुंदर और शार्दुल ठाकुर जैसे खिलाड़ियों के योगदान को भी अहम बताया।

    अश्विन के मुताबिक, ‘एक टेस्ट मैच बनाने और आखिरी सेशन में जीतने के लिए 11 क्रिकेटरों की जरूरत होती है, लेकिन टेस्ट हारने के लिए सिर्फ एक पल की मूर्खतापूर्ण गलती काफी होती है।’

    सहवाग-गिलक्रिस्ट से तुलना भी मंजूर नहीं

    अश्विन ने पंत की तुलना वीरेंद्र सहवाग और ऑस्ट्रेलिया के पूर्व विकेटकीपर एडम गिलक्रिस्ट से किए जाने पर भी असहमति जताई। उन्होंने कहा कि दोनों खिलाड़ी बेहद आक्रामक क्रिकेट खेलते थे, लेकिन मैच की परिस्थितियों को पूरी तरह नजरअंदाज करके जोखिम नहीं लेते थे।

    उनका कहना है कि टेस्ट क्रिकेट में बल्लेबाज को यह समझना जरूरी है कि कब आक्रमण करना है और कब स्थिति के मुताबिक संयम बरतना है। अश्विन ने साफ किया कि वह पंत को बतौर खिलाड़ी पसंद करते हैं, लेकिन परिस्थितियों के हिसाब से फैसले लेने की क्षमता में अभी सुधार की जरूरत है।

    ‘किसी एक खिलाड़ी को विशेष ट्रीटमेंट मत दीजिए’

    अश्विन ने पंत को ‘एक पीढ़ी में आने वाला खिलाड़ी’ बताकर उन्हें अतिरिक्त समर्थन देने की दलील को भी खारिज किया। उन्होंने कहा कि अगर पंत जैसे खिलाड़ी को विशेष समर्थन दिया जाता है तो यशस्वी जायसवाल जैसे युवा खिलाड़ियों को भी वैसा ही भरोसा मिलना चाहिए।

    उन्होंने कहा, ‘किसी एक खिलाड़ी को विशेष ट्रीटमेंट मत दीजिए। अगर एक पीढ़ी में आने वाले खिलाड़ी को इतना समर्थन देना है, तो यह समर्थन सभी को मिलना चाहिए। यशस्वी जायसवाल भी ऐसा ही खिलाड़ी है।’

    50 से ज्यादा टेस्ट खेल चुके हैं, अब जिम्मेदारी जरूरी

    अश्विन ने पंत के अनुभव का हवाला देते हुए कहा कि अब उन्हें युवा या अनुभवहीन खिलाड़ी नहीं माना जा सकता। वह 50 से ज्यादा टेस्ट खेल चुके हैं और इसलिए उनसे जिम्मेदारी के साथ खेलने की उम्मीद की जाती है।

    अश्विन ने कहा, ‘ऋषभ अनुभवी हैं। वह 50 टेस्ट खेल चुके हैं। अब उन्हें जिम्मेदारी लेनी होगी। एक पीढ़ी में आने वाला खिलाड़ी वाली दलील मत दीजिए। उनकी निर्णय लेने की क्षमता की वजह से ही वह बाकी दो फॉर्मेट नहीं खेल रहे हैं।’

    हालांकि, अश्विन ने यह भी कहा कि अगर पंत को उनकी गलतियों के बारे में सही तरीके से बताया जाए और वह अपनी निर्णय लेने की क्षमता पर काम करें, तो वह भविष्य में भारत के लिए तीनों फॉर्मेट में खेलने वाले खिलाड़ी बन सकते हैं।

    प्रतिभा पर नहीं, फैसलों पर सवाल

    अश्विन ने स्पष्ट किया कि पंत की प्रतिभा पर उन्हें कोई संदेह नहीं है। उनकी आपत्ति मुख्य रूप से टेस्ट क्रिकेट में जोखिम लेने के तरीके और समय को लेकर है। पंत को अपने स्वाभाविक आक्रामक अंदाज और टीम की जरूरत के बीच बेहतर तालमेल बैठाना होगा।

    अश्विन ने कहा, ‘मुझे ऋषभ पंत खिलाड़ी के तौर पर बहुत पसंद हैं।’ साथ ही उन्होंने जोर दिया कि बेहतर निर्णय लेने की क्षमता ही पंत को टेस्ट क्रिकेट में और प्रभावी बना सकती है।

  • वेनेजुएला के 65 अरब बैरल तेल पर अमेरिका की नजर, ट्रंप बोले- यह दुनिया की सबसे बड़ी ऑयल डील

    वेनेजुएला के 65 अरब बैरल तेल पर अमेरिका की नजर, ट्रंप बोले- यह दुनिया की सबसे बड़ी ऑयल डील


    नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को बड़ा दावा करते हुए कहा कि अमेरिका ने वेनेजुएला के साथ एक ऐसा समझौता किया है, जिसके तहत करीब 65 अरब बैरल तेल भंडार पर अमेरिका का नियंत्रण होगा। ट्रंप ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए इस समझौते की जानकारी दी और इसे दुनिया की सबसे बड़ी तेल डील बताया।

    ट्रंप के अनुसार, यह समझौता अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो, रक्षा मंत्री हेगसेथ और वेनेजुएला की अंतरिम राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिग्ज के बीच हुई बातचीत के बाद हुआ। उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा, “संयुक्त राज्य अमेरिका ने अभी-अभी वेनेजुएला देश के साथ एक समझौता किया है- जो दुनिया के इतिहास की सबसे बड़ी तेल डील है!”

    मादुरो की गिरफ्तारी के बीच हुआ ऐलान

    अमेरिकी राष्ट्रपति का यह बयान ऐसे समय आया है, जब ट्रंप के आदेश पर अमेरिकी सेना ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को गिरफ्तार कर अमेरिका लाने का ऑपरेशन चलाया था। इसके बाद मादुरो पर नार्को-टेररिज्म और ड्रग तस्करी से जुड़े संघीय आरोप लगाए जाने की बात कही गई थी।

    इस बीच अमेरिका में गैस की बढ़ती कीमतों को लेकर ट्रंप प्रशासन पर दबाव भी बढ़ रहा है। ईरान में करीब छह महीने से युद्ध जारी है और फिलहाल इसके खत्म होने के संकेत नहीं हैं। ऐसे हालात में अमेरिका ने अपने रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार का इस्तेमाल किया है। अगस्त की शुरुआत तक इस भंडार में 30 करोड़ बैरल से भी कम तेल बचा था।

    मादुरो को हटाने के बाद वेनेजुएला पर बढ़ा फोकस

    जनवरी में निकोलस मादुरो को सत्ता से हटाने के बाद ट्रंप ने अमेरिकी तेल कंपनियों को दोबारा वेनेजुएला भेजने और वहां मौजूद तेल भंडार का इस्तेमाल करने की बात कही थी।

    ट्रंप का आरोप रहा है कि वेनेजुएला ने अमेरिका का तेल चुराया था। उनका तर्क था कि वेनेजुएला के पूर्व राष्ट्रपति ह्यूगो शावेज ने दशकों पहले सैकड़ों विदेशी संपत्तियों का राष्ट्रीयकरण किया था, जिनमें अमेरिकी तेल कंपनियों की संपत्तियां भी शामिल थीं।

    303 अरब बैरल का भंडार, फिर भी उत्पादन सिर्फ 1%

    वेनेजुएला के पास दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडारों में से एक है। अनुमान के मुताबिक देश की जमीन के नीचे करीब 303 अरब बैरल कच्चे तेल का भंडार मौजूद है। अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन के मुताबिक यह दुनिया के कुल तेल भंडार का करीब 17% है।

    विशेषज्ञों के मुताबिक, दुनिया के कई हिस्सों में बिना इस्तेमाल हुए तेल की खोज अभी भी जारी रहती है, जबकि वेनेजुएला के भूमिगत तेल भंडार का बड़ा हिस्सा पहले ही चिन्हित किया जा चुका है और उसके बारे में जानकारी उपलब्ध है।

    हालांकि, कमजोर बुनियादी ढांचे और अन्य समस्याओं के कारण इतना बड़ा भंडार होने के बावजूद वेनेजुएला दुनिया के कुल तेल उत्पादन का सिर्फ 1% ही उत्पादन कर पाता है।

  • नेपाल में मौत के मुंह से बचा 8 साल का मासूम, पेड़ों पर चढ़कर बचाई जान, बाढ़ के बाद मां से हुआ मिलन

    नेपाल में मौत के मुंह से बचा 8 साल का मासूम, पेड़ों पर चढ़कर बचाई जान, बाढ़ के बाद मां से हुआ मिलन


    नई दिल्ली। नेपाल में आई भीषण बाढ़ के बीच जंगल की ओर भागकर पेड़ों पर चढ़ने वाले 8 साल के जोयल घाले को आखिरकार शुक्रवार को उसकी मां से मिला दिया गया। हादसे के बाद उसकी मां को आशंका थी कि उनके दोनों बेटे स्कूल में ही बाढ़ की चपेट में आ गए होंगे।

    एक दिन पहले जोयल को उत्तरी जिले रसुवा से अकेले एयरलिफ्ट कर अस्पताल पहुंचाया गया था। उसके पैर में फ्रैक्चर और चेहरे पर चोट के निशान बताए गए हैं। वहीं, 28 वर्षीय उसकी मां तमांग अपने दोनों लापता बेटों की तलाश में परेशान थीं।

    तेज आवाज सुनकर स्कूल की ओर दौड़ी मां

    बुधवार सुबह दोनों बच्चे स्कूल की गाड़ी से स्कूल गए थे। उस समय तमांग घर पर बुनाई का काम कर रही थीं। इसी दौरान उन्हें भूकंप जैसी तेज आवाज सुनाई दी। वह तुरंत बेटों के स्कूल की ओर निकल पड़ीं।

    स्कूल उनके घर से सामान्य तौर पर 15 से 20 मिनट की ड्राइव की दूरी पर था, लेकिन वहां पहुंचने पर पूरा इलाका बदला हुआ नजर आया। स्कूल की इमारत तबाह हो चुकी थी और आसपास का मंजर पहचानना मुश्किल था।

    पेड़ों पर चढ़कर बचाई जान

    बाढ़ और मलबे के बीच जोयल किसी तरह जंगल की तरफ भाग गया और पेड़ों पर चढ़कर अपनी जान बचाई। बाद में उसे अकेले एयरलिफ्ट कर अस्पताल पहुंचाया गया। इलाज के दौरान शुक्रवार को उसकी मां से फोन पर बात कराई गई। रॉयटर्स के मुताबिक, मां ने फोन पर अपने बेटे से रोते हुए बात की।

    जोयल और उसकी मां उन खुशकिस्मत लोगों में शामिल हैं, जो इस भीषण आपदा के बीच एक-दूसरे से दोबारा मिल सके।

    587 लोगों की मौत, 1900 से ज्यादा लापता

    नेपाल में बाढ़ के बाद हुई भारी तबाही में अब तक 587 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 1900 से अधिक लोग लापता बताए जा रहे हैं। इस आपदा के बाद 290 भारतीय नागरिकों से भी संपर्क नहीं हो पा रहा है और उनकी तलाश जारी है।

  • ‘दिमागी नक्सल’ पर BJP का सोशल मीडिया वार, राज्यों के हैंडल्स ने मिलकर शुरू किया मीम कैंपेन

    ‘दिमागी नक्सल’ पर BJP का सोशल मीडिया वार, राज्यों के हैंडल्स ने मिलकर शुरू किया मीम कैंपेन


    नई दिल्ली। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की नई टीम के सक्रिय होने के साथ पार्टी का सोशल मीडिया तंत्र भी नए अंदाज में काम करता नजर आ रहा है। भाजपा सोशल मीडिया कन्वीनर दीपक म्हस्के की टीम ने पिछले तीन दिनों में अलग-अलग राज्यों के पार्टी हैंडल्स को आपस में जोड़कर एक साथ राजनीतिक संदेश देने की रणनीति शुरू की है। इसके तहत मीम्स, बॉलीवुड-हॉलीवुड फिल्मों के चर्चित सीन और क्रिएटिव वीडियो का इस्तेमाल किया जा रहा है।

    इस अभियान में राज्यों के भाजपा हैंडल्स एक-दूसरे की पोस्ट को कोट और रिट्वीट करने के साथ टैग और कोलैबोरेशन कर रहे हैं। इसका मकसद कंटेंट की पहुंच बढ़ाने के साथ राजनीतिक व्यंग्य के जरिए विपक्ष पर निशाना साधना भी है।

    जम्मू-कश्मीर BJP के पोस्ट से शुरू हुआ सिलसिला

    इस नए सोशल मीडिया प्रयोग की शुरुआत जम्मू-कश्मीर भाजपा के X हैंडल से हुई। हैंडल ने सलमान खान, संजय दत्त और जैकी श्रॉफ का एक वीडियो पोस्ट किया, जिसमें तीनों अभिनेता एक साथ रियलिटी शो के मंच पर दिखाई दे रहे हैं।

    भाजपा ने इस वीडियो को राजनीतिक रंग देते हुए संजय दत्त को कर्नाटक भाजपा, सलमान खान को जम्मू-कश्मीर भाजपा और जैकी श्रॉफ को गोवा भाजपा के रूप में पेश किया। पोस्ट में लिखा गया—“तीन भाई, तीनों तबाही ?? The worst nightmare for the Dimagi Naxal ecosystem!”

    पोस्ट के ट्रेंड करने के बाद भाजपा IT सेल और सोशल मीडिया टीम ने इसे आगे बढ़ाया। इसके बाद दूसरे राज्यों के भाजपा हैंडल्स भी इस अभियान से जुड़ते चले गए।

    MP BJP ने जोड़े ‘तीन’ में ‘चार भाई’

    जम्मू-कश्मीर भाजपा की पोस्ट को मध्य प्रदेश भाजपा ने कोट करते हुए लिखा—“Hold up… Madhya Pradesh is entering the chat?? तीन भाई? Make it चार, अब तबाही होगी आर-पार!”

    इसके बाद यह सिलसिला और आगे बढ़ा। दिल्ली भाजपा ने अभिनेता पंकज त्रिपाठी के एक वीडियो के साथ पोस्ट किया—“भूल तो नहीं गए हमें?” इसके बाद अलग-अलग राज्यों के भाजपा हैंडल्स ने इसी अंदाज में मीम्स और वीडियो पोस्ट करना शुरू कर दिया।

    दो-तीन राज्यों तक पहुंचाने की रणनीति

    भाजपा IT सेल के एक अधिकारी के मुताबिक, जम्मू-कश्मीर भाजपा के वीडियो के बाद यह रणनीति बनाई गई कि देशभर के भाजपा राज्यों के सोशल मीडिया हैंडल्स को एक साथ जोड़ा जाए। इसके तहत हैंडल्स एक-दूसरे की पोस्ट को कोट, टैग और जरूरत के अनुसार कोलैबोरेट करेंगे।

    अधिकारी का कहना है कि अलग-अलग राज्यों के पार्टी हैंडल्स के फॉलोअर्स काफी ज्यादा हैं। ऐसे में एक राज्य का हैंडल जब दूसरे राज्य के हैंडल को कोट या टैग करता है तो पोस्ट की पहुंच कई गुना बढ़ जाती है।

    पार्टी के मुताबिक, दिल्ली भाजपा की एक पोस्ट के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की गई कि जिस तरह दिल्ली की जनता ने आम आदमी पार्टी को सत्ता से बाहर किया, उसी तरह पंजाब में भी AAP को सबक मिल सकता है।

    भाजपा का दावा है कि इस रणनीति से राजनीतिक कंटेंट केवल एक राज्य तक सीमित नहीं रहता, बल्कि दूसरे राज्यों में भी पहुंचता है। पार्टी अब ऐसे कंटेंट पर जोर दे रही है, जिसका असर एक साथ दो-तीन राज्यों की राजनीति पर पड़े।

    ‘दिमागी नक्सल’ के मुद्दे को बनाया सोशल मीडिया हथियार

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से “दिमागी नक्सल” शब्द इस्तेमाल किए जाने के बाद इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस तेज हुई है। अब भाजपा के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इसी कथित “दिमागी नक्सल” मानसिकता को निशाना बनाते हुए मीम्स और फनी वीडियो तैयार किए जा रहे हैं।

    इसके लिए बॉलीवुड और हॉलीवुड फिल्मों के लोकप्रिय दृश्यों को एडिट किया जा रहा है। इनके जरिए राजनीतिक संदेश के साथ विपक्ष पर व्यंग्य भी किया जा रहा है।

    भाजपा के एक नेता का कहना है कि अभी यह सिर्फ “करवट” है। उनके मुताबिक, तीन दिनों में सोशल मीडिया पर जिस तरह का नैरेटिव तैयार हुआ है, उससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि पूरी ताकत से अभियान चलने पर इसका असर कितना बड़ा हो सकता है।

    Twitter के बाद Instagram पर भी तैयारी

    भाजपा नेता का आरोप है कि कांग्रेस का नैरेटिव झूठ पर आधारित है और पार्टी को “झूठ की राजनीति” का जवाब देना जरूरी है। इसी रणनीति के तहत अब Twitter के बाद Instagram पर भी क्रिएटिव वीडियो और तस्वीरों के जरिए अभियान चलाने की तैयारी है।

    भाजपा सूत्रों के मुताबिक, Twitter पर राजनीतिक मुद्दों में रुचि रखने वाले लोगों की संख्या अधिक है, इसलिए वहां अभियान शुरू किया गया है। अब इसी रणनीति को Instagram पर भी लागू किया जाएगा।

    आने वाले दिनों में अलग-अलग राज्यों के भाजपा हैंडल्स से मीम्स, फनी वीडियो और क्रिएटिव पोस्ट लगातार सामने आने की संभावना है। पार्टी ने अपने Instagram और Twitter अकाउंट पर टीजर के तौर पर “Shall we begin” संदेश भी पोस्ट किया है और देशभर के अलग-अलग राज्यों के भाजपा हैंडल्स को टैग किया है।

    यानी भाजपा की नई सोशल मीडिया टीम ने साफ संकेत दे दिया है कि मौजूदा अभियान महज शुरुआत है। आने वाले दिनों में सोशल मीडिया पर पार्टी का राजनीतिक कैंपेन और ज्यादा आक्रामक और क्रिएटिव नजर आ सकता है।

  • न्यूयॉर्क में आज मोहन भागवत देंगे संबोधन, भारत से अमेरिका तक सियासत तेज, अखिलेश ने पूछे RSS से 21 सवाल

    न्यूयॉर्क में आज मोहन भागवत देंगे संबोधन, भारत से अमेरिका तक सियासत तेज, अखिलेश ने पूछे RSS से 21 सवाल


    नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत अमेरिका दौरे पर हैं और शुक्रवार, 29 अगस्त को न्यूयॉर्क के प्रतिष्ठित मैडिसन स्क्वायर गार्डन में बड़ा कार्यक्रम होने जा रहा है। संघ के 100 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित इस ‘ग्लोबल आउटरीच प्रोग्राम’ में करीब 5,000 लोगों के शामिल होने की उम्मीद है। कार्यक्रम की थीम ‘वैश्विक सौहार्द और सार्वभौमिक एकता का उत्सव’ रखी गई है।

    भागवत के संबोधन से पहले ही इस कार्यक्रम को लेकर अमेरिका से लेकर भारत तक राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तेज हो गई हैं। सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की है कि भागवत अपने संबोधन में किन मुद्दों पर बात करेंगे और अमेरिका में संघ की भूमिका को किस तरह पेश करेंगे।

    संतों और प्रमुख हस्तियों ने किया समर्थन

    भागवत के न्यूयॉर्क कार्यक्रम को जूना अखाड़ा के महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरी समेत कई हस्तियों का समर्थन मिला है। दूसरी ओर समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने उनके अमेरिकी दौरे और कार्यक्रम को लेकर सवाल खड़े किए हैं।

    X अकाउंट सस्पेंड होने पर अखिलेश का तंज

    कार्यक्रम के आयोजक ‘अहेड फोरम’ का X अकाउंट कुछ समय के लिए सस्पेंड होने के बाद अखिलेश यादव ने इस पर तंज किया। उन्होंने कहा, ‘विदेशों में जब Unregistered-Underground लोग उभरकर आएंगे तो उनके एक्स अकाउंट तो सस्पेंड किए ही जाएंगे।’

    इसके बाद अखिलेश ने RSS से 21 सवाल पूछे। उन्होंने स्वदेशी का नारा देने वाले संगठन के प्रमुख के विदेश दौरे पर सवाल उठाते हुए पूछा कि क्या भागवत वहां सांप्रदायिक माहौल बिगाड़ने गए हैं या फिर भविष्य में राजनीतिक प्रश्रय तलाशने की कोशिश की जा रही है।

    हालांकि, कुछ समय बाद ‘अहेड फोरम’ का X अकाउंट बहाल हो गया। संस्था ने दावा किया कि विरोधियों के बॉट अटैक के कारण एल्गोरिदम प्रभावित हुआ था और इसी वजह से हैंडल अस्थायी रूप से ब्लॉक हो गया था।

    कर्नाटक में RSS मार्च पर दो सरकारी शिक्षक सस्पेंड

    इधर कर्नाटक में RSS के मार्च में शामिल होने को लेकर भी विवाद सामने आया है। राज्य में दो सरकारी शिक्षकों अन्ना साहेब देशमुख और गुरुराज जोशी को मार्च में शामिल होने पर सस्पेंड किया गया है।

    कर्नाटक के मंत्री प्रियांक खरगे ने कहा कि किसी गैर-रजिस्टर्ड संगठन के कार्यक्रम में सरकारी कर्मचारियों की भागीदारी नियमों के खिलाफ है। वहीं विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष सी. नारायणस्वामी ने सरकार की कार्रवाई को बदले की भावना से प्रेरित बताया। उनका कहना था कि RSS कोई राजनीतिक पार्टी नहीं है और देश का कोई भी देशभक्त किसी देशभक्त संगठन से जुड़ सकता है।

    न्यूयॉर्क के मेयर ने भी जताया विरोध

    मोहन भागवत के कार्यक्रम को लेकर न्यूयॉर्क में भी विरोध की आवाज उठी है। न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी ने मंगलवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि वह मैडिसन स्क्वायर गार्डन में होने वाले कार्यक्रम का समर्थन नहीं करते।

    हालांकि, प्रदर्शन या कार्यक्रम रद्द किए जाने से जुड़े सवाल पर ममदानी ने कहा कि यह एक निजी कार्यक्रम है। इसलिए इसे रद्द करने का अधिकार या क्षेत्राधिकार संभवतः सिटी अथॉरिटी के पास नहीं है।

    अब निगाहें भागवत के संबोधन पर

    एक तरफ कार्यक्रम को वैश्विक सौहार्द और सार्वभौमिक एकता से जोड़कर पेश किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर इसे लेकर भारत और अमेरिका दोनों जगह राजनीतिक बहस शुरू हो चुकी है। ऐसे में अब सबसे ज्यादा नजर इस बात पर है कि मैडिसन स्क्वायर गार्डन से मोहन भागवत अपने संबोधन में संघ, भारत और वैश्विक समाज को लेकर क्या संदेश देते हैं।

  • ‘हनुमान अंश’ ने तीसरे हफ्ते में मचाया धमाल, कमाए 12 करोड़, प्रेमानंद की सलाह मानी, 8 भंडारों से किया प्रमोशन

    ‘हनुमान अंश’ ने तीसरे हफ्ते में मचाया धमाल, कमाए 12 करोड़, प्रेमानंद की सलाह मानी, 8 भंडारों से किया प्रमोशन


    नई दिल्ली। बड़े बजट और चर्चित सितारों वाली फिल्मों के बीच महज करीब 2 करोड़ रुपये में बनी ‘हनुमान अंश’ ने बॉक्स ऑफिस पर चौंकाने वाला प्रदर्शन किया है। 31 जुलाई को रिलीज हुई इस फिल्म ने शुरुआती दो हफ्तों में करीब 1.5 करोड़ रुपये ही कमाए थे, लेकिन तीसरे हफ्ते में इसकी कमाई ने अचानक रफ्तार पकड़ ली। फिल्म ने अकेले तीसरे हफ्ते में 10.5 करोड़ रुपये का कलेक्शन किया। इसके साथ ही फिल्म की कुल कमाई करीब 12 करोड़ रुपये पहुंच गई है।

    रिपोर्ट्स के अनुसार, फिल्म का निर्माण करीब 1.8 से 2 करोड़ रुपये के बजट में हुआ है। इस लिहाज से फिल्म ने अपने बताए गए प्रोडक्शन बजट की तुलना में 500 फीसदी से ज्यादा का मुनाफा कमाया है। सोशल मीडिया पर भी फिल्म को दर्शकों से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है।

    10 लाख की ओपनिंग, फिर तीसरे हफ्ते में बदली तस्वीर

    ट्रेड रिपोर्ट्स के मुताबिक, ‘हनुमान अंश’ ने पहले दिन सिर्फ 10 लाख रुपये कमाए थे। पहले हफ्ते में फिल्म का कलेक्शन 1.08 करोड़ रुपये रहा। दूसरे सप्ताह में कमाई घटकर करीब 40 लाख रुपये रह गई। इस तरह दो हफ्तों के बाद फिल्म करीब 1.5 करोड़ रुपये ही जुटा सकी थी।

    तीसरे सप्ताह में फिल्म की कमाई में अचानक बड़ा उछाल आया। इस दौरान 10.5 करोड़ रुपये का कलेक्शन हुआ, जिसने फिल्म को कम बजट की सरप्राइज हिट के तौर पर चर्चा में ला दिया।

    रिलीज से पहले प्रेमानंद जी महाराज से ली थी सलाह

    फिल्म की कमाई के साथ उसकी रिलीज से पहले की कहानी भी सुर्खियों में है। डायरेक्टर और राइटर विशाल चतुर्वेदी ने आज तक से बातचीत में बताया कि शूटिंग पूरी होने के बाद फिल्म के एक प्रोड्यूसर प्रेमानंद जी महाराज के पास सलाह लेने पहुंचे थे।

    विशाल के मुताबिक, महाराज जी ने फिल्म के मुख्य किरदार को लाइफस्टाइल को लेकर सावधानी बरतने और शाकाहारी भोजन करने की सलाह दी थी। मेकर्स ने इस सलाह को गंभीरता से लिया और मुख्य कलाकार को भी इन बातों का ध्यान रखने के लिए कहा गया।

    शूटिंग सेट पर भी लागू किए गए नियम

    मेकर्स ने शूटिंग के दौरान भी कई नियम तय किए थे। सेट पर गाली-गलौज, लड़ाई या बहस की मनाही थी। सभी के लिए केवल शाकाहारी भोजन रखा जाता था और फिल्म से जुड़े किसी भी व्यक्ति को शराब पीने की अनुमति नहीं थी।

    शूटिंग की शुरुआत हनुमान चालीसा के पाठ से होती थी और दिन का समापन भी इसी के साथ किया जाता था। नीम करोली बाबा का किरदार निभाने वाले अभिनेता शोभिनाव सत्य ने भी सेट के अनुभव साझा किए। उनके मुताबिक, शूटिंग में परेशानी आने पर पूरी टीम हनुमान चालीसा का पाठ करती थी।

    कैमरा रुकता तो टीम करती थी हनुमान चालीसा

    विशाल चतुर्वेदी ने बताया कि कई बार शूटिंग सुबह 7 बजे शुरू होनी होती थी, लेकिन तकनीकी या अन्य कारणों से कैमरा 10 बजे तक शुरू नहीं हो पाता था। ऐसे में वह टीम से हनुमान चालीसा पढ़ने के लिए कहते थे।

    उनका कहना था कि खाली बैठने से बेहतर है कि इस समय कुछ सकारात्मक किया जाए। डायरेक्टर के अनुसार, कई मौकों पर हनुमान चालीसा पूरी होने तक शूटिंग में आई समस्या का समाधान भी निकल आया।

    प्रमोशन का बजट नहीं था, 8 भंडारों को बनाया कैंपेन

    फिल्म के प्रमोशन के लिए भी मेकर्स ने पारंपरिक तरीके से अलग रास्ता अपनाया। विशाल चतुर्वेदी के मुताबिक, प्रमोशनल कैंपेन शुरू करते समय उनके पास पर्याप्त पैसे नहीं थे। ऐसे में उन्होंने तय किया कि प्रचार के जरिए नीम करोली बाबा का संदेश लोगों तक पहुंचाया जाएगा।

    मेकर्स ने इसके लिए 8 भंडारों का आयोजन किया। इन्हीं भंडारों को फिल्म के प्रमोशन का माध्यम बनाया गया। विशाल ने यह भी बताया कि तमाम चुनौतियों के बावजूद CBFC ने फिल्म को बिना किसी परेशानी के U सर्टिफिकेट दे दिया।

    आध्यात्मिक फिल्मों के लिए बढ़ती उम्मीद

    ‘हनुमान अंश’ का प्रदर्शन ऐसे समय में सामने आया है, जब कम बजट और आध्यात्मिक विषयों पर बनी फिल्मों को दर्शकों का अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है। फिल्म के मेकर्स में रागिनी एस, नम्रता जी सिंह, अनुप्रिया ए नगर और विशाल चतुर्वेदी शामिल हैं।

    बिना बड़े सितारों और भारी-भरकम बजट के दर्शकों तक पहुंच बनाने वाली फिल्मों में अब ‘हनुमान अंश’ का नाम भी जुड़ गया है। पिछले करीब छह महीनों में ‘लालो’ और ‘देऊल बंद 2’ जैसी फिल्मों ने भी आध्यात्मिक विषयों के जरिए दर्शकों का ध्यान खींचा है।

    ऐसे में ‘हनुमान अंश’ की तीसरे सप्ताह की कमाई यह संकेत देती है कि कम बजट, आध्यात्मिक कहानी और बिना बड़े स्टार्स के भी कोई फिल्म दर्शकों के बीच मजबूत पकड़ बना सकती है।