Author: bharati

  • कोलकाता पोर्ट सीट पर चर्चा में प्रियदर्शिनी हकीम कौन हैं और क्यों बनीं कोलकाता में

    कोलकाता पोर्ट सीट पर चर्चा में प्रियदर्शिनी हकीम कौन हैं और क्यों बनीं कोलकाता में

    नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में कोलकाता पोर्ट विधानसभा सीट इन दिनों खास चर्चा में है और इसकी मुख्य वजह हैं Priyadarshini Hakim जो तृणमूल कांग्रेस यानी टीएमसी की उम्मीदवार के रूप में चुनावी मैदान में उतरी हैं

    प्रियदर्शिनी हकीम को मुख्यमंत्री Mamata Banerjee की करीबी और भरोसेमंद युवा नेता माना जाता है उनकी राजनीतिक सक्रियता और संगठन में बढ़ती पकड़ ने उन्हें सुर्खियों में ला दिया है खास बात यह है कि वे अपने पिता और राज्य सरकार में मंत्री तथा कोलकाता के मेयर Firhad Hakim के साथ भी लगातार प्रचार करती नजर आती हैं

    प्रियदर्शिनी हकीम की पहचान केवल एक उम्मीदवार तक सीमित नहीं है बल्कि उन्हें टीएमसी के भीतर एक उभरते हुए युवा चेहरे के रूप में देखा जा रहा है पार्टी ने उन पर भरोसा जताते हुए उन्हें एक महत्वपूर्ण सीट कोलकाता पोर्ट से चुनावी मैदान में उतारा है जो राजनीतिक दृष्टि से बेहद अहम मानी जाती है

    चुनाव प्रचार के दौरान प्रियदर्शिनी की छवि एक विनम्र और जमीन से जुड़ी नेता के रूप में उभर रही है वह लोगों से हाथ जोड़कर मिलती हैं और सीधे जनता से संवाद स्थापित करने की कोशिश करती हैं उनके प्रचार शैली में सादगी और संपर्क पर जोर दिया जा रहा है जिससे वे मतदाताओं के बीच अपनी पकड़ मजबूत कर रही हैं

    माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का इस सीट पर खास फोकस है और उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं को पूरी ताकत के साथ चुनाव प्रचार में जुटने के निर्देश दिए हैं भवानीपुर को चुनावी प्रचार का मुख्य केंद्र बनाया गया है जहां से रणनीति तैयार की जा रही है

    प्रियदर्शिनी हकीम की चर्चा का एक बड़ा कारण उनका राजनीतिक परिवार भी है क्योंकि उनके पिता फिरहाद हकीम राज्य की राजनीति में एक अनुभवी और प्रभावशाली नेता हैं इस वजह से उन्हें राजनीतिक अनुभव और मार्गदर्शन दोनों मिल रहा है जो उनके चुनावी अभियान को मजबूती देता है

    टीएमसी के भीतर उन्हें एक ऐसे चेहरे के रूप में देखा जा रहा है जो आने वाले समय में पार्टी की युवा नेतृत्व की भूमिका निभा सकती हैं उनकी सक्रियता और पार्टी के प्रति निष्ठा उन्हें एक मजबूत उम्मीदवार बनाती है

    इस प्रकार कोलकाता पोर्ट सीट न केवल एक चुनावी मुकाबला बन गई है बल्कि यह इस बात का भी संकेत है कि पश्चिम बंगाल की राजनीति में नए चेहरों का उदय हो रहा है और प्रियदर्शिनी हकीम जैसे युवा नेता भविष्य की राजनीति की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं

  • बंजर खेत में हरा भरा कमाल: बैतूल किसान ने तरबूज से कमाए 4 लाख

    बंजर खेत में हरा भरा कमाल: बैतूल किसान ने तरबूज से कमाए 4 लाख

    बैतूल । मध्य प्रदेश के बैतूल जिले के घोड़ाडोंगरी ब्लॉक के हीरापुर-2 गांव के किसान दिलीप मंडल ने बंजर और बिना सिंचाई वाली जमीन को हरा-भरा कर आर्थिक सफलता की मिसाल पेश की है। वे पिछले 5 सालों से धान की फसल निकालने के बाद यही जमीन तरबूज की खेती के लिए उपयोग कर रहे हैं। केवल चार महीने में उनकी आय 3 से 6 लाख रुपए तक पहुँच जाती है।

    दिलीप मंडल ने बताया कि इस खेत पर 10 साल पहले केवल कंटीली झाड़ियां थीं। जमीन असमान थी और बारिश के मौसम में ही सीमित फसल आती थी। धीरे-धीरे नदी में रेत कम होने पर लोग तरबूज की खेती खेतों में करने लगे। उन्होंने भी अपनी जमीन को समतल कर निजी तालाब बनाकर तरबूज और रबी की फसल शुरू की। इस समय 5 एकड़ में तरबूज की खेती चल रही है जो 15 मार्च के बाद बाजार में बिकने लगेगी।

    कुल निवेश करीब ढाई लाख रुपए है जिसमें बीज खाद और मेहनत शामिल हैं। प्रति एकड़ 10 से 25 टन तक फसल निकलती है और बाजार में कीमत 10 से 20 रुपए प्रति किलो मिलती है। इससे सालाना 3 से 6 लाख रुपए की आमदनी होती है और पिछले वर्ष शुद्ध मुनाफा 3.75 लाख रुपए रहा।

    किसान ने खेती के लिए खास तकनीक अपनाई है। सबसे पहले बीजों को अंकुरित किया जाता है। फिर 2 गुणा 3 इंच के गड्ढों में तीन बीज और 200 ग्राम गोबर की खाद डालकर बुवाई की जाती है। पौधों में 3-4 पत्तियां आने के बाद सिंचाई शुरू होती है और खेत में नमी बनाए रखना जरूरी है। इसके अलावा फसल के बीच में जैविक और रासायनिक खाद का संतुलित उपयोग किया जाता है।

    वर्तमान में 5 एकड़ में कलिया गोल्ड और करन वैरायटी के बीज लगाए गए हैं जिसकी कीमत 32 हजार रुपए प्रति किलो है। कुल मिलाकर 2 किलो बीज और ढाई लाख रुपए की लागत में किसान 3 से 6 लाख रुपए की कमाई कर रहा है।

    दिलीप मंडल की यह सफलता इस बात का उदाहरण है कि उचित योजना सिंचाई प्रबंधन और सही तकनीक के जरिए बंजर जमीन को भी उपजाऊ बनाया जा सकता है। उनके प्रयास से न सिर्फ उनकी आमदनी बढ़ी है बल्कि आसपास के किसानों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन गए हैं।

  • मंच पर फूट-फूट कर रो पड़े संजय निषाद, क्या छोड़ेंगे BJP का साथ? जानिए सपा में जाने को लेकर खुद ही कैसे साफ की तस्वीर

    मंच पर फूट-फूट कर रो पड़े संजय निषाद, क्या छोड़ेंगे BJP का साथ? जानिए सपा में जाने को लेकर खुद ही कैसे साफ की तस्वीर


    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश की राजनीति में उस वक्त हलचल मच गई जब संजय निषाद का गोरखपुर रैली में रोते हुए वीडियो सामने आया। गोरखपुर में आयोजित इस रैली के बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं।

    क्या सपा में वापसी करेंगे?
    वीडियो वायरल होने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा था कि क्या संजय निषाद फिर से समाजवादी पार्टी में लौटेंगे? इस पर खुद संजय निषाद ने साफ कहा कि सपा ने उनके लिए पहले ही दरवाजे बंद कर दिए थे। ऐसे में उनके वापस जाने का कोई सवाल ही नहीं है।

    BJP के साथ रहने का किया ऐलान
    संजय निषाद ने साफ तौर पर कहा कि वे भारतीय जनता पार्टी के साथ ही बने रहेंगे। उन्होंने कहा कि जब सबने उनका साथ छोड़ दिया था, तब BJP ने उनका साथ दिया और वे 2019 से लगातार पार्टी को समर्थन दे रहे हैं। इस बयान से यह साफ हो गया है कि फिलहाल वे NDA के साथ ही रहेंगे।

    आरक्षण को लेकर उठाई आवाज
    रैली के दौरान संजय निषाद ने अपने मुख्य मुद्दे यानी आरक्षण पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि निषाद समाज को SC आरक्षण मिलना चाहिए और इसके लिए वे लंबे समय से संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने BJP से भी इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार करने की मांग की।

    संजय निषाद ने समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी और कांग्रेस पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि निषाद समाज का हक इन पार्टियों ने छीना है, जबकि अब वे अपने समाज को एकजुट करने में लगे हैं। संजय निषाद के रोने वाले वीडियो ने भले ही सियासी अटकलों को हवा दी हो, लेकिन उन्होंने खुद साफ कर दिया है कि वे BJP के साथ ही रहेंगे। अब देखना होगा कि आने वाले चुनावी माहौल में उनका अगला कदम क्या होता है और इसका यूपी की राजनीति पर क्या असर पड़ता है।

  • शाहरुख-सलमान की दोस्ती पर सलीम खान का बड़ा बयान कंपीटिटर कभी दोस्त नहीं बन सकते

    शाहरुख-सलमान की दोस्ती पर सलीम खान का बड़ा बयान कंपीटिटर कभी दोस्त नहीं बन सकते


    नई दिल्ली:
    बॉलीवुड के दो सबसे बड़े सितारे Shah Rukh Khan और Salman Khan आज भले ही अच्छे दोस्त माने जाते हों लेकिन एक समय ऐसा भी था जब दोनों के बीच तनाव और अनबन की खबरें सुर्खियों में रहती थीं उनके रिश्ते को लेकर फिल्म इंडस्ट्री और आम दर्शकों के बीच भी कई तरह की चर्चाएं होती रही हैं

    इस विषय पर पहली बार खुलकर बात की थी सलमान खान के पिता और मशहूर लेखक Salim Khan ने उन्होंने एक इंटरव्यू में रिश्तों और दोस्ती की परिभाषा को अपने नजरिए से समझाया और बताया कि हर रिश्ते में मतभेद होना स्वाभाविक है लेकिन इससे प्यार कम नहीं होता

    सलीम खान ने अपने बयान में कहा कि उनके और सलमान के बीच भी कई विचारों में अंतर है लेकिन इसके बावजूद उनका प्यार मजबूत है उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि रिश्तों की असली ताकत प्यार और समझ में होती है न कि केवल समान विचारों में

    जब बात शाहरुख और सलमान के रिश्ते पर आई तो उन्होंने कहा कि दोनों ही बड़े कलाकार हैं और एक ही क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा करते हैं ऐसे में उनके बीच प्रतिद्वंद्विता होना स्वाभाविक है सलीम खान के अनुसार जब दो लोग एक ही काम के लिए प्रतिस्पर्धा करते हैं तो उनके बीच हमेशा एक दूरी बनी रहती है लेकिन यह दूरी आपसी सम्मान को खत्म नहीं करती

    उन्होंने यह भी समझाया कि कंपीटिटर के बीच सामान्य शिष्टाचार और बातचीत संभव है जैसे एक-दूसरे को शुभकामनाएं देना या काम के बारे में बातचीत करना लेकिन गहरी दोस्ती की अपेक्षा हमेशा वास्तविकता से दूर हो सकती है

    सलीम खान ने यह भी कहा कि दोस्ती और प्रतिस्पर्धा दो अलग-अलग चीजें हैं और हर रिश्ते की अपनी सीमाएं होती हैं उनके अनुसार दो प्रतिस्पर्धियों के बीच प्यार भले ही संभव हो लेकिन दोस्ती जैसा गहरा रिश्ता बन पाना मुश्किल होता है

    हालांकि समय के साथ Shah Rukh Khan और Salman Khan ने अपने रिश्तों को सुधार लिया और आज दोनों के बीच आपसी सम्मान और दोस्ती का रिश्ता देखा जाता है दोनों सितारे कई मौकों पर एक साथ नजर आते हैं और एक-दूसरे के काम की सराहना भी करते हैं यह पूरा मामला दर्शाता है कि समय के साथ रिश्तों में बदलाव आ सकता है और प्रतिस्पर्धा के बावजूद सम्मान और समझदारी से संबंधों को बेहतर बनाया जा सकता है

  • प्रशासन में जवाबदेही की नई मिसाल मोहन यादव ने कलेक्टर एसपी तक को नहीं बख्शा

    प्रशासन में जवाबदेही की नई मिसाल मोहन यादव ने कलेक्टर एसपी तक को नहीं बख्शा


    भोपाल । मध्य प्रदेश में प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर सख्त संदेश देते हुए मुख्यमंत्री मोहन यादव लगातार कड़े फैसले लेते नजर आ रहे हैं। अपने सवा दो साल के कार्यकाल में उन्होंने यह साफ कर दिया है कि लापरवाही और जिम्मेदारी से बचने की प्रवृत्ति किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। हाल ही में गुना के एसपी अंकित सोनी और सीधी के कलेक्टर स्वरोचिष सोमवंशी को हटाने की कार्रवाई इसी सख्ती का ताजा उदाहरण है।

    13 दिसंबर 2023 को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद से ही डॉ. यादव ने प्रशासन में जवाबदेही तय करने की दिशा में आक्रामक रुख अपनाया है। अब तक उनके कार्यकाल में 10 आईएएस और 8 आईपीएस अधिकारियों पर कार्रवाई की जा चुकी है। खास बात यह है कि इन कार्रवाइयों में कई कलेक्टर और एसपी स्तर के अधिकारी भी शामिल हैं जो प्रशासनिक ढांचे में बेहद अहम माने जाते हैं।

    गुना में हाल ही में सामने आए मामले में एक व्यापारी से एक करोड़ रुपये की जब्ती के बाद कथित रूप से 20 लाख रुपये लेकर छोड़ देने और उचित कार्रवाई न करने के आरोपों के चलते एसपी अंकित सोनी को हटा दिया गया। इस मामले में थाना प्रभारी समेत चार पुलिसकर्मियों को भी निलंबित किया गया है। वहीं सीधी में कलेक्टर स्वरोचिष सोमवंशी पर दफ्तर में नियमित रूप से उपस्थित न रहने और जनसुनवाई में लापरवाही के आरोप लगे जिसके बाद उन्हें पद से हटाया गया।

    इससे पहले भी कई बड़े मामलों में सरकार ने सख्त कदम उठाए हैं। इंदौर में दूषित पानी की आपूर्ति से हुई मौतों के बाद नगर निगम आयुक्त और अपर आयुक्त पर कार्रवाई की गई। हरदा में पटाखा फैक्ट्री विस्फोट और सागर में दीवार गिरने जैसी घटनाओं में भी कलेक्टर और एसपी को हटाया गया। मऊगंज हत्याकांड और सिवनी में गोवंश हत्या के मामलों में भी प्रशासनिक अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराते हुए पद से हटाया गया।

    शाजापुर में एक कलेक्टर द्वारा ड्राइवर से अपमानजनक व्यवहार का वीडियो वायरल होने के बाद भी तत्काल कार्रवाई की गई थी। वहीं कटनी में विवादों में घिरे एसपी को भी हटाकर स्पष्ट संदेश दिया गया कि व्यक्तिगत आचरण भी उतना ही महत्वपूर्ण है जितना प्रशासनिक कार्य।

    इन सभी घटनाओं से यह स्पष्ट होता है कि सरकार अब केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित नहीं रहना चाहती बल्कि जमीनी स्तर पर जवाबदेही तय करने के लिए ठोस कदम उठा रही है। मुख्यमंत्री का यह रुख प्रशासनिक मशीनरी में अनुशासन और जिम्मेदारी बढ़ाने की दिशा में अहम माना जा रहा है।

    कुल मिलाकर मध्य प्रदेश में यह एक नया प्रशासनिक ट्रेंड बनता दिख रहा है जहां लापरवाही या विवाद सामने आते ही त्वरित कार्रवाई की जा रही है। इससे एक ओर जहां अधिकारियों में सतर्कता बढ़ी है वहीं आम जनता के बीच यह संदेश भी गया है कि शासन अब गंभीर मामलों में किसी तरह की ढिलाई नहीं बरतेगा।

  • Political Kissa: शादी से पहले ही कह दिया था…एक दिन CM बनूंगा”, 30 साल बाद सच हुआ सपना; जानिए हिमंता बिस्वा सरमा का ये दिलचस्प किस्सा

    Political Kissa: शादी से पहले ही कह दिया था…एक दिन CM बनूंगा”, 30 साल बाद सच हुआ सपना; जानिए हिमंता बिस्वा सरमा का ये दिलचस्प किस्सा


    नई दिल्ली। असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की जिंदगी का एक दिलचस्प किस्सा इन दिनों चर्चा में है। करीब 30 साल पहले उन्होंने अपनी पत्नी से कहा था कि वह एक दिन मुख्यमंत्री बनेंगे। उस समय यह सिर्फ एक सपना था, लेकिन अब वह सच हो चुका है।

    पत्नी ने सुनाया खास पल
    उनकी पत्नी रिनिकी भुयान सरमा ने बताया कि 9 मई को जब हिमंता घर लौटे तो उन्होंने कहा- मुझे मुख्यमंत्री नामित किया गया है। यह सुनकर वह हैरान रह गईं और पूछा, कौन? इस पर उन्होंने जवाब दिया मैं। यह पल उनके परिवार के लिए बेहद खास था। इसके अगले दिन 10 मई को हिमंता बिस्वा सरमा ने गुवाहाटी में असम के 15वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। इस दौरान उनका पूरा परिवार मौजूद रहा।

    छात्र राजनीति से शुरू हुआ सफर
    हिमंता बिस्वा सरमा का राजनीतिक करियर छात्र जीवन से ही शुरू हो गया था। AASU से जुड़े 1994 में सक्रिय राजनीति में आए युवाओं और छात्रों के लिए कई काम किए 1996 में उन्होंने जलुकबारी से चुनाव लड़ा, लेकिन हार गए। हालांकि उन्होंने हार नहीं मानी और 2001 में पहली जीत हासिल की। इसके बाद से वह लगातार चुनाव जीतते आ रहे हैं और उनका कद राजनीति में बढ़ता गया।

    कांग्रेस से BJP तक का सफर
    हिमंता बिस्वा सरमा ने अपने करियर में बड़ा राजनीतिक बदलाव भी किया। पहले कांग्रेस में रहे 2015 में भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए इसके बाद उनका राजनीतिक ग्राफ तेजी से ऊपर गया 2021 में वह असम के मुख्यमंत्री बने। हिमंता बिस्वा सरमा की कहानी यह दिखाती है कि अगर इरादे मजबूत हों तो सपने जरूर पूरे होते हैं। एक युवा नेता का सपना आज मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंच चुका है, जो लाखों लोगों के लिए प्रेरणा बन गया है।

  • नवरात्रि व्रत में क्यों खास है कुट्टू? ब्लड प्रेशर कंट्रोल में रखने का आसान तरीका

    नवरात्रि व्रत में क्यों खास है कुट्टू? ब्लड प्रेशर कंट्रोल में रखने का आसान तरीका


    नई दिल्ली। चैत्र नवरात्रि के पावन दिनों में व्रत रखने का समय सही खान-पान बेहद जरूरी है, ताकि शरीर को ऊर्जा और पोषण दोनों मिले रहें। ऐसे में ‘कुट्टू का आटा’ फलाहार का सबसे लोकप्रिय और क्लासिक संस्करण सामने आया है। यह अनाज नहीं, बल्कि एक बीज है, जो कि स्वास्थ्य के लिए विटामिन-मुक्त होने के कारण बेहद हानिकारक माना जाता है।

    ऊर्जा से परिपूर्णता, ऊर्जा से भरपूर सक्रियता

    कुट्टू में प्रचुर मात्रा में कार्बोहाइड्रेट और प्रोटीन पाए जाते हैं, जो व्रत के दौरान तत्काल ऊर्जा आपूर्ति का काम करते हैं। इससे कमजोरी और थकान महसूस नहीं होती और आप गंभीर सक्रिय रहते हैं।

    कंपनियों का निर्माण मजबूत होता है

    कुट्टू में मौजूद कैल्शियम और मैग्नीशियम जोड़ों को मजबूत बनाने में मदद करते हैं। व्रत के दौरान जब समग्रता सीमित होती है, तब यह शरीर को आवश्यक वस्तुएं प्रदान करता है।

    दिल और खून के लिए बढ़िया

    कुट्टू में पाए जाने वाले एंटीऑक्सीडेंट दिल को स्वस्थ रखते हैं और खराब एंटीऑक्सीडेंट को कम करने में मदद करते हैं। साथ ही यह ब्लड मॉड्यूल को कंट्रोल में रखने में भी सहायक होता है।

    अचाना रिश्ता

    सबसे अच्छा कुट्टू पाचन तंत्र के लिए अत्यंत उपयोगी है। इससे कब्ज, गैस और अपच जैसी समस्याओं से राहत मिलती है और पेट पर असर पड़ता है।

    वॉल्टेज में भी सुरक्षित

    कुट्टू का ग्लाइसेमिक वैज्ञानिक कम होता है, जिससे ब्लड शुगर तेजी से नहीं बढ़ता है। इसका कारण यह है कि इसे श्रमिकों के रोगी भी सीमित मात्रा में खा सकते हैं।

    वजन नियंत्रण में सहायक

    कुट्टू खाने से लंबे समय तक पेट भरा रहता है, जिससे बार-बार भूख नहीं लगती और ज्यादा खाने से बचाव होता है। इससे वजन नियंत्रित में रहता है।

    व्रत में कैसे करें सेवन?

    कुट्टू से कई स्वादिष्ट और सब्जी व्यंजन बनाये जा सकते हैं:

    कुट्टू की पूरी और पराठा
    पकौड़ी और टुकड़े
    खेड और हलवा
    कुट्टू की कढ़ी
    व्रत में साधारण नमक की जगह सेंधा नमक का उपयोग करें, जिससे पाचन और बेहतर होता है।

    नवरात्रि के व्रत में कुट्टू का सिर्फ स्वाद नहीं मिलता, बल्कि शरीर को पूरा पोषण भी मिलता है। यह हड्डियों को मजबूत बनाता है, रक्त को नियंत्रित करता है और पाचन को मापता है—यानी व्रत के दौरान स्वास्थ्य का पूरा होना जरूरी है।

  • हर किसी के बस की बात नहीं-IPL में 800 से ज्यादा रन बनाने वाले सिर्फ 4 खिलाड़ी

    हर किसी के बस की बात नहीं-IPL में 800 से ज्यादा रन बनाने वाले सिर्फ 4 खिलाड़ी


    नई दिल्ली। इंडियन प्रीमियर लीग के इतिहास में हर सीजन में कई बल्लेबाज शानदार प्रदर्शन करते हैं, लेकिन 800 से ज्यादा रन बनाना किसी सपने से कम नहीं होता। अब तक इस लीग में सिर्फ 4 बल्लेबाज ही ऐसे कर पाए हैं, एक ही सीजन में 800+ रन बनाकर इतिहास रच दिया।

    विराट कोहली: 973 रन का ऐतिहासिक रिकॉर्ड

    आईपीएल के इतिहास में एक सीजन में सबसे ज्यादा रन बनाने का रिकॉर्ड विराट कोहली के नाम है। उन्होंने 2016 सीजन में 16 मैचों में 973 रन बनाए, जो आज तक कोई नहीं तोड़ पाया।
    इस दौरान उनकी रेटिंग में 4 शतक और 7 शतक शामिल थे। कोहली आज भी इस लीग में 900+ रन बनाने वाले इकलौते खिलाड़ी हैं।

    शुभमन गिल: यंग स्टार का धमाका

    शुभमन गिल ने आईपीएल 2023 (16वें सीजन) में शानदार प्रदर्शन करते हुए 890 रन बनाए।
    157 के स्ट्राइक रेट से प्रतिस्पर्धा करते हुए उन्होंने 3 शतक और 4 शतक जड़े और अपनी क्लास साबित की।

    डेविड वार्नर: विस्फोटक ओपनर की ताकत

    इस खास लिस्ट में डेविड वॉर्नर भी शामिल हैं। उन्होंने 2016 में 848 रन बनाए और अपनी टीम को जगह दी।
    वॉर्नर आईपीएल इतिहास के सबसे सफल विदेशी खिलाड़ी हैं और लगातार रन बनाने के लिए जाते हैं।

    जोस बटलर: आक्रामक नाव का नमूना

    इंग्लैंड के शुरुआती-बैलेबाज जोस बटलर ने 2022 सीज़न में 863 रन बनाए इस सूची में जगह बनाई गई है। उन्होंने पूरे सीज़न में नाटकीय नाटकीयता और कई मैचों में अकेले दम पर टीम को जीत दिलाई।

    800+ रन का पात्र इतना खास क्यों है?

    एक आईपीएल सीजन में 800 रन बनाना मुश्किल होता है क्योंकि:
    सिर्फ 14-17 मैच ही मिलते हैं
    हर मैच में निरंतर प्रदर्शन आवश्यक होता है
    रिज्यूमे रणनीतिक रणनीति स्थिर रहती है

  • सेहत से खिलवाड़ नहीं होगा बर्दाश्त इंदौर में खाद्य विभाग की बड़ी कार्रवाई कई डेयरियों पर छापा

    सेहत से खिलवाड़ नहीं होगा बर्दाश्त इंदौर में खाद्य विभाग की बड़ी कार्रवाई कई डेयरियों पर छापा


    इंदौर । मध्य प्रदेश के इंदौर में मिलावटी दूध के खिलाफ प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए बड़ा अभियान शुरू कर दिया है। लोगों की सेहत से जुड़े इस गंभीर मुद्दे पर अब लगातार कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में कलेक्टर शिवम वर्मा के निर्देश पर खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने सोमवार को कनाडिया क्षेत्र में छापेमारी कर कई डेयरियों की जांच की।

    खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने कनाडिया रोड और आसपास के इलाकों में सघन अभियान चलाते हुए जोशी दूध दही भंडार ओसवाल डेरी गणेश दूध दही भंडार और पूजा डेयरी सहित कई प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया। इस दौरान टीम ने अलग अलग डेयरियों से दूध और दुग्ध उत्पादों के नमूने एकत्र किए ताकि उनकी गुणवत्ता की जांच की जा सके।

    कार्रवाई के दौरान जोशी दूध दही भंडार से 4 ओसवाल डेरी से 3 गणेश दूध दही भंडार से 3 और पूजा डेयरी से दूध व मावा के 2 नमूने लिए गए। इस तरह कुल 12 सैंपल जब्त किए गए हैं जिन्हें जांच के लिए भेजा जा रहा है। अधिकारियों ने मौके पर ही डेयरी संचालकों को साफ सफाई बनाए रखने और मिलावट से दूर रहने के सख्त निर्देश दिए।

    निरीक्षण के दौरान टीम ने यह भी स्पष्ट किया कि खाद्य पदार्थों में किसी भी तरह की मिलावट बर्दाश्त नहीं की जाएगी। आम लोगों की सेहत के साथ खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन ने डेयरी संचालकों को चेतावनी दी कि अगर नियमों का उल्लंघन पाया गया तो कानूनी कार्रवाई तय है।

    खाद्य विभाग के अनुसार सभी नमूनों को जांच के लिए भोपाल स्थित राज्य खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला भेजा जा रहा है। रिपोर्ट आने के बाद खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 के तहत दोषी पाए जाने वालों पर सख्त कदम उठाए जाएंगे जिसमें जुर्माना से लेकर लाइसेंस रद्द करने तक की कार्रवाई शामिल हो सकती है।

    प्रशासन का कहना है कि यह अभियान केवल एक दिन की कार्रवाई नहीं है बल्कि इसे लगातार जारी रखा जाएगा। शहर के अन्य इलाकों में भी इसी तरह की छापेमारी कर मिलावटी दूध और नकली दुग्ध उत्पाद बेचने वालों पर शिकंजा कसा जाएगा।

    कुल मिलाकर इंदौर प्रशासन का यह कदम साफ संकेत देता है कि अब खाद्य सुरक्षा को लेकर किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और लोगों की सेहत से समझौता करने वालों के खिलाफ सख्ती लगातार बढ़ती रहेगी।

  • ग्लोबल टेंशन से सहमा बाजार! भारतीय शेयर मार्केट की कमजोर शुरुआत

    ग्लोबल टेंशन से सहमा बाजार! भारतीय शेयर मार्केट की कमजोर शुरुआत


    नई दिल्ली। मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर सोमवार को भारतीय शेयर बाजार पर साफ तौर पर देखने को मिला। व्यापारिक प्रतिष्ठानों की शुरुआत ही भारी गिरावट के साथ हुई, जिससे व्यापारियों की चिंता और बढ़ गई। सुबह 9:28 बजे बीएसई सेंसेक्स 1,309 प्रतिशत की गिरावट के साथ 1.78 प्रतिशत शेयर 73,223 पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी 50 408 अंक 1.77 प्रतिशत की गिरावट के साथ 22,705 पर कारोबार हुआ।

    हर सेक्टर में बिकवाली,अजनबी में डर का माहौल

    शुरुआती कारोबार में बाजार में चौतरफा बिकवाली देखने को मिली। मेटल, पीएससीयू बैंक और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर सबसे ज्यादा प्रभावित रहे। इसके अलावा रियल्टी, डिफेंस, आईटी, स्कॉर्पियो, एनर्जी और आर्किटेक्चर जैसे लगभग सभी सेक्टर लाल निशान में बिजनेस कर रहे थे। लार्जकैप स्टॉकहोम के साथ-साथ मिडकैप और स्मॉलकैप शेयर बाजार में भी नजर आए। निफ्टी मिडकैप 100 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 में भी तेजी से गिरावट दर्ज की गई, जिससे यह साफ हो गया कि बाजार में व्यापक स्तर पर कमजोरी बनी हुई है।

    वैश्विक हस्ताक्षर भी फ़्राईड, एशियाई अख़्तियार में भी गिरावट

    भारतीय बाज़ार की इस गिरावट के पीछे अंतर्राष्ट्रीय संकेत भी बड़ी वजह बने। टोक्यो, शंघाई, हांगकांग, बैंकॉक और सियोल जैसे एशियाई सामानों की भी भारी बिक्री आंकी गई है। वहीं, अमेरिकी बाजार में भी पिछले सत्र में गिरावट के साथ गिरावट आई थी, जिससे उपभोक्ताओं का भरोसा टूट गया है।

    तेल के कारखाने और मध्य पूर्व संकट बना सबसे बड़ा कारण

    वैज्ञानिकों के अनुसार, इस गिरावट का सबसे बड़ा कारण मध्य पूर्व में भारी तनाव है, विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भारी असमानता। इस क्षेत्र में वैश्विक तेल आपूर्ति का अहम मार्ग है, और यहां किसी भी तरह के संकटग्रस्त कच्चे तेल की आपूर्ति को तेजी से बढ़ाया जा सकता है। तेल की पेट्रोलियम कंपनी भारत जैसे तीर्थ-निर्भर देश के लिए चिंता का विषय हैं, क्योंकि इसी वजह से तेल की पेट्रोलियम कंपनी की कीमत में भी बढ़ोतरी होती है।

    विदेशी ग्राहकों की लगातार बिकवाली

    बाजार पर दबाव बढ़ाने वाला एक और बड़ा कारण विदेशी निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली है। पिछले फेस्टिवल सत्र में एफओआई ने 5,518 करोड़ रुपये की बड़ी बिक्री की, जिससे बाजार का सेंटीमेंट और गिरावट आई। हालाँकि, घरेलू एंटरप्राइज़ कॉमर्स (डीआईआई) ने कुछ हद तक खरीदारी कर बाजार को सहारा देने की कोशिश की।

    आगे क्या? विद्यार्थी के लिए संकेत

    विशेषज्ञ का मानना ​​है कि जब तक मध्य पूर्व में तनाव कम नहीं हुआ और तेल की कीमतें स्थिर नहीं हुईं, तब तक बाजार में मिश्रण बना रह सकता है। आवेदकों को अनुमति और लंबी अवधि की रणनीति पर ध्यान देने की सलाह दी जा रही है।