Author: bharati

  • बिना एथेनॉल वाला पेट्रोल सिर्फ प्रीमियम ग्रेड में, E0-E10 की वापसी पर सरकार ने दिया स्‍पष्‍ट जवाब

    बिना एथेनॉल वाला पेट्रोल सिर्फ प्रीमियम ग्रेड में, E0-E10 की वापसी पर सरकार ने दिया स्‍पष्‍ट जवाब


    नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है कि फिलहाल देश में E0 (बिना एथेनॉल) और E10 (10% एथेनॉल मिश्रित) पेट्रोल की दोबारा सप्लाई शुरू करने की कोई योजना नहीं है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकारी तेल कंपनियों द्वारा बेचे जाने वाले प्रीमियम पेट्रोल में एथेनॉल की मिलावट नहीं की जाती और फिलहाल पेट्रोल में 20 फीसदी से अधिक एथेनॉल मिश्रण बढ़ाने पर भी कोई निर्णय नहीं लिया गया है।

    लोकसभा में लिखित जवाब देते हुए पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने बताया कि इंडियन ऑयल का XP100, हिंदुस्तान पेट्रोलियम का poWer100 और भारत पेट्रोलियम का Speed100 जैसे प्रीमियम पेट्रोल पूरी तरह एथेनॉल मुक्त हैं। इनमें बेहतर प्रदर्शन के लिए विशेष एडिटिव्स का उपयोग किया जाता है। हालांकि, इनकी बिक्री देश में कुल पेट्रोल खपत का लगभग 0.5 प्रतिशत ही है।

    प्रीमियम पेट्रोल की कीमत कितनी?
    सरकार के मुताबिक, बिना एथेनॉल वाले इन प्रीमियम फ्यूल की कीमत करीब 160 रुपये प्रति लीटर है, जबकि सामान्य पेट्रोल की कीमत लगभग 102.12 रुपये प्रति लीटर है। मौजूदा समय में सामान्य पेट्रोल में अधिकतम 20 फीसदी एथेनॉल मिश्रित किया जा रहा है।

    E20 पर सरकार का भरोसा
    सरकार ने कहा कि पेट्रोल में 20 प्रतिशत से अधिक एथेनॉल मिलाने का फैसला तभी लिया जाएगा, जब विस्तृत वैज्ञानिक और तकनीकी अध्ययन पूरे होंगे। इस प्रक्रिया में वाहन निर्माता कंपनियों, तेल विपणन कंपनियों और शोध संस्थानों से भी सलाह ली जाएगी।

    सरकार ने यह भी बताया कि 1 अप्रैल 2026 से देशभर में न्यूनतम 95 रिसर्च ऑक्टेन नंबर (RON) वाले E20 पेट्रोल को अधिसूचित किया गया है और सभी सार्वजनिक एवं निजी तेल कंपनियों को इसे उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।

    इंजन पर नहीं पड़ा कोई बड़ा असर
    सरकार के अनुसार, E20 पेट्रोल के कारण इंजन खराब होने या वाहन की उम्र घटने जैसी कोई व्यापक और प्रमाणित शिकायत सामने नहीं आई है। प्रयोगशाला परीक्षणों, फील्ड ट्रायल और वास्तविक परिचालन के आंकड़ों में भी इसके नकारात्मक प्रभाव के स्पष्ट प्रमाण नहीं मिले हैं।

    मंत्री ने बताया कि वर्तमान में देश में 20 करोड़ से अधिक दोपहिया वाहन और 3 करोड़ से ज्यादा पेट्रोल कारें उच्च एथेनॉल मिश्रित ईंधन का इस्तेमाल कर रही हैं और बड़े पैमाने पर इंजन संबंधी कोई समस्या दर्ज नहीं हुई है।

    E0 और E10 दोबारा क्यों नहीं आएंगे?
    सरकार ने कहा कि E0, E10 और E20 तीनों तरह के पेट्रोल की अलग-अलग आपूर्ति व्यवस्था बनाए रखना व्यावहारिक नहीं है। देशभर के एक लाख से अधिक पेट्रोल पंपों पर अलग-अलग भंडारण, परिवहन और वितरण प्रणाली तैयार करने से लागत और संचालन संबंधी चुनौतियां काफी बढ़ जाएंगी।

    सरकार का कहना है कि उसकी प्राथमिकता स्वच्छ ईंधन को बढ़ावा देना, ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करना, पर्यावरण संरक्षण और किसानों के हितों के बीच संतुलन बनाए रखना है। इसी नीति के तहत E20 को व्यापक परीक्षणों के बाद लागू किया गया है और ऑटोमोबाइल उद्योग ने भी इसे स्वीकार किया है।

  • पेट्रोल के बाद अब खाद्य तेल ने बढ़ाई महंगाई, आयात बिल 1.75 लाख करोड़ पार होने का अनुमान, रसोई का बजट फिर बिगड़ने के आसार

    पेट्रोल के बाद अब खाद्य तेल ने बढ़ाई महंगाई, आयात बिल 1.75 लाख करोड़ पार होने का अनुमान, रसोई का बजट फिर बिगड़ने के आसार

    नई दिल्ली। पेट्रोल और अन्य आवश्यक वस्तुओं की बढ़ती कीमतों के बीच अब खाद्य तेलों की महंगाई ने आम लोगों की रसोई का बजट भी प्रभावित करना शुरू कर दिया है। सरसों, सोयाबीन, मूंगफली और अन्य खाद्य तेलों की कीमतों में हाल के दिनों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि रुपये की कमजोरी, आयात लागत में बढ़ोतरी और घरेलू उत्पादन की सीमित उपलब्धता के कारण खाद्य तेलों की कीमतों पर दबाव बना हुआ है। आगामी त्योहारी सीजन में मांग बढ़ने की संभावना के चलते कीमतों में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।

    देश में खाद्य तेल की जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा किया जाता है। उद्योग से जुड़े संगठनों के अनुसार पिछले वर्ष भारत का खाद्य तेल आयात बिल लगभग 1.61 लाख करोड़ रुपये रहा था, जबकि मौजूदा वित्तीय वर्ष में इसके बढ़कर 1.75 लाख करोड़ रुपये से अधिक पहुंचने का अनुमान लगाया जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि आयात पर अत्यधिक निर्भरता देश के लिए आर्थिक चुनौती बनती जा रही है और इस स्थिति से निपटने के लिए घरेलू तिलहन उत्पादन को बढ़ावा देना आवश्यक है।

    बाजार में विभिन्न खाद्य तेलों की कीमतों में भी तेजी दर्ज की गई है। सरसों तेल के भाव में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जबकि सोयाबीन तेल, मूंगफली तेल और अन्य खाद्य तेलों के दाम भी ऊपर गए हैं। कारोबारियों के अनुसार सरसों की मांग बढ़ने और मंडियों में सीमित आवक के कारण कीमतों पर अतिरिक्त दबाव बना है। वहीं सोयाबीन की आवक में कमी आने से उससे जुड़े उत्पाद भी महंगे हुए हैं। इसका सीधा असर खुदरा बाजार में उपभोक्ताओं पर पड़ रहा है।

    उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि भारत को दीर्घकालिक समाधान के रूप में तिलहन उत्पादन बढ़ाने पर विशेष ध्यान देना होगा। इसके लिए बेहतर बीज, आधुनिक खेती, प्रसंस्करण क्षमता और किसानों को प्रोत्साहन देने जैसी योजनाओं को और मजबूत बनाने की आवश्यकता है। उनका मानना है कि यदि घरेलू उत्पादन बढ़ता है तो आयात पर निर्भरता कम होगी, विदेशी मुद्रा की बचत होगी और उपभोक्ताओं को कीमतों में स्थिरता का लाभ मिलेगा।

    विशेषज्ञ यह भी बताते हैं कि वैश्विक बाजार में कच्चे खाद्य तेलों की कीमतों, शिपिंग लागत और विनिमय दर में उतार-चढ़ाव का सीधा असर भारतीय बाजार पर पड़ता है। डॉलर के मुकाबले रुपये में कमजोरी आने से आयातित खाद्य तेल और महंगे हो जाते हैं। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां भी घरेलू कीमतों को प्रभावित करती हैं।

    हालांकि बाजार विश्लेषकों का कहना है कि भविष्य में कीमतों की दिशा घरेलू उत्पादन, वैश्विक आपूर्ति, मौसम और सरकार की नीतियों पर निर्भर करेगी। यदि तिलहन की अच्छी पैदावार होती है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें स्थिर रहती हैं तो खाद्य तेलों की महंगाई पर कुछ हद तक नियंत्रण संभव है। फिलहाल उपभोक्ताओं को बढ़ती कीमतों का सामना करना पड़ रहा है और आने वाले महीनों में बाजार की स्थिति पर सभी की नजर बनी रहेगी।

  • शेयर बाजार में शुक्रवार को कैसा रहेगा माहौल किन सेक्टरों पर रहेंगी निगाहें और निवेशकों के लिए क्या है रणनीति

    शेयर बाजार में शुक्रवार को कैसा रहेगा माहौल किन सेक्टरों पर रहेंगी निगाहें और निवेशकों के लिए क्या है रणनीति

    नई दिल्ली । सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार की चाल कई घरेलू और वैश्विक कारकों पर निर्भर रहने की संभावना है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि निवेशकों की नजर सबसे पहले अंतरराष्ट्रीय बाजारों के रुख पर रहेगी। यदि अमेरिका और एशियाई बाजारों से सकारात्मक संकेत मिलते हैं तो भारतीय बाजार भी मजबूती के साथ कारोबार की शुरुआत कर सकता है। वहीं यदि वैश्विक स्तर पर दबाव बना रहता है तो घरेलू बाजार में भी उतार चढ़ाव देखने को मिल सकता है।

    इस समय निवेशकों का सबसे अधिक ध्यान कंपनियों के तिमाही नतीजों पर है। जिन कंपनियों के वित्तीय परिणाम उम्मीद से बेहतर आएंगे उनके शेयरों में तेजी देखने को मिल सकती है जबकि कमजोर नतीजे देने वाली कंपनियों पर बिकवाली का दबाव बन सकता है। यही कारण है कि बाजार में सेक्टर आधारित गतिविधियां अधिक देखने को मिल सकती हैं और हर क्षेत्र का प्रदर्शन अलग अलग रह सकता है।

    विदेशी संस्थागत निवेशकों और घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीद और बिक्री भी बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। यदि विदेशी निवेशक भारतीय बाजार में लगातार निवेश जारी रखते हैं तो इससे सेंटीमेंट मजबूत होगा। दूसरी ओर यदि बड़े स्तर पर बिकवाली होती है तो बाजार में दबाव बढ़ सकता है।

    बैंकिंग सूचना प्रौद्योगिकी ऑटोमोबाइल फार्मा और एफएमसीजी सेक्टर पर निवेशकों की विशेष नजर रहने की संभावना है। बैंकिंग शेयरों में स्थिरता रहने पर प्रमुख सूचकांकों को मजबूती मिल सकती है जबकि आईटी कंपनियों पर वैश्विक मांग और डॉलर की चाल का असर दिखाई देगा। ऑटो और फार्मा सेक्टर भी अपने तिमाही प्रदर्शन और मांग के आधार पर बाजार को दिशा दे सकते हैं।

    विशेषज्ञों का कहना है कि बाजार में फिलहाल तेजी और मुनाफावसूली दोनों की संभावना बनी हुई है। ऐसे में छोटे निवेशकों को किसी भी खबर के आधार पर जल्दबाजी में निवेश करने से बचना चाहिए। मजबूत बुनियादी स्थिति वाली कंपनियों में ही लंबी अवधि के नजरिए से निवेश करना अधिक सुरक्षित माना जा रहा है। अल्पकालिक कारोबार करने वाले निवेशकों को स्टॉप लॉस का पालन करना चाहिए ताकि अचानक आने वाली गिरावट से नुकसान सीमित रखा जा सके।

    वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें अमेरिकी डॉलर की स्थिति और प्रमुख देशों के आर्थिक आंकड़े भी बाजार की दिशा प्रभावित करेंगे। यदि इन मोर्चों पर राहत भरे संकेत मिलते हैं तो निवेशकों का भरोसा बढ़ सकता है। इसके विपरीत किसी नकारात्मक अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम का असर भारतीय बाजार पर भी दिखाई दे सकता है।

    कुल मिलाकर शुक्रवार का कारोबार उतार चढ़ाव से भरा रह सकता है। हालांकि मजबूत कंपनियों में निवेश और संतुलित रणनीति अपनाने वाले निवेशकों के लिए अवसर भी मौजूद रहेंगे। विशेषज्ञों की सलाह है कि अफवाहों के बजाय आधिकारिक जानकारी और बाजार के मूलभूत संकेतों के आधार पर ही निवेश का निर्णय लें ताकि जोखिम कम हो और बेहतर रिटर्न की संभावना बनी रहे।

  • MP कांग्रेस अध्यक्ष की दतिया में अधिकारियों को धमकी, कहा- 'जीतू पटवारी कहते हैं, गड़बड़ी हुई तो देख लूंगा'

    MP कांग्रेस अध्यक्ष की दतिया में अधिकारियों को धमकी, कहा- 'जीतू पटवारी कहते हैं, गड़बड़ी हुई तो देख लूंगा'


    दतिया । मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर हो रहे उपचुनाव का प्रचार चरम पर पहुंचने के साथ ही राजनीतिक बयानबाजी तीखी होती जा रही है. बसई इलाके के ठकुरपुरा गांव में कांग्रेस प्रत्याशी कुंवर घनश्याम सिंह के समर्थन में आयोजित एक नुक्कड़ सभा में पहुंचे मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी (MPCC) के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के एक बयान ने सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है.

    सभा को संबोधित करते हुए जीतू पटवारी ने चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर जोर दिया और पुलिस व प्रशासनिक अमले को आड़े हाथों लिया. मंच से बोलते हुए उनके बोल काफी कड़े नजर आए.

    प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने अधिकारियों को सीधी चेतावनी देते हुए कहा, ”मुझे जीतू पटवारी कहते हैं, अगर चुनाव में किसी भी तरह की गड़बड़ी या पक्षपात हुआ तो समझ लेना, चुनाव के बाद में देखूंगा.”

    उन्होंने आगे कहा कि लोकतंत्र में सरकारें आती-जाती रहती हैं, लेकिन अधिकारियों और कर्मचारियों को किसी राजनीतिक दबाव में आए बिना निष्पक्ष रहकर अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए. अगर किसी भी कर्मचारी या अधिकारी ने एकतरफा कार्रवाई की, तो चुनाव के बाद उनसे हिसाब लिया जाएगा.

    बढ़ते अपराधों और स्थानीय मुद्दों पर घेरा
    अधिकारियों पर निशाना साधने के साथ-साथ जीतू पटवारी ने दतिया क्षेत्र में बिगड़ती कानून-व्यवस्था को लेकर भी शिवराज या मोहन सरकार और स्थानीय सत्ता तंत्र पर जमकर हमला बोला.

    उन्होंने क्षेत्र में लगातार बढ़ रहे अपराध, हत्या, आत्महत्या और जमीन विवाद से जुड़े मामलों का जिक्र करते हुए जनता के प्रति संवेदना जताई.उन्होंने भरोसा दिलाया कि कांग्रेस पार्टी हर सुख-दुख में दतिया की जनता के साथ मजबूती से खड़ी है.

    फिलहाल कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष के इस तीखे बयान पर जिला प्रशासन या पुलिस विभाग की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन इस बयान के बाद दतिया में चुनावी मुकाबला और ज्यादा दिलचस्प हो गया है.

  • शुक्रवार के इन आसान उपायों से बरसेगी मां लक्ष्मी की कृपा, मजबूत होगा शुक्र ग्रह और बढ़ेगी सुख समृद्धि

    शुक्रवार के इन आसान उपायों से बरसेगी मां लक्ष्मी की कृपा, मजबूत होगा शुक्र ग्रह और बढ़ेगी सुख समृद्धि


    नई दिल्ली । हिंदू धर्म में सप्ताह का प्रत्येक दिन किसी न किसी देवी देवता और ग्रह को समर्पित माना गया है। इसी क्रम में शुक्रवार का विशेष महत्व बताया गया है। यह दिन धन वैभव और ऐश्वर्य की अधिष्ठात्री मां लक्ष्मी तथा शुक्र ग्रह की उपासना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। ज्योतिष और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यदि इस दिन श्रद्धा और विधि विधान से पूजा अर्चना की जाए तथा कुछ विशेष उपाय किए जाएं तो जीवन में आर्थिक उन्नति सुख समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। साथ ही कुंडली में शुक्र ग्रह की स्थिति मजबूत होने की भी मान्यता है।

    मान्यता है कि शुक्रवार की शुरुआत पवित्रता और स्वच्छता के साथ करनी चाहिए। सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद पूरे घर में गंगाजल का छिड़काव करना शुभ माना जाता है। ऐसा करने से घर की नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और वातावरण शुद्ध एवं सकारात्मक बनता है। धार्मिक विश्वास है कि स्वच्छ और पवित्र घर में मां लक्ष्मी का स्थायी निवास होता है। इसलिए शुक्रवार के दिन विशेष रूप से घर की साफ सफाई पर ध्यान देने की सलाह दी जाती है। कहा जाता है कि जहां गंदगी रहती है वहां लक्ष्मी का नहीं बल्कि दरिद्रता का वास होता है।

    शुक्रवार के दिन मां लक्ष्मी की विधिपूर्वक पूजा करना भी अत्यंत फलदायी माना गया है। पूजा के दौरान गाय के घी का दीपक जलाने की परंपरा का विशेष महत्व बताया गया है। धार्मिक मान्यता के अनुसार गाय का घी शुक्र ग्रह का प्रतीक माना जाता है। यदि एक दीपक घर के मुख्य द्वार पर और दूसरा तुलसी के पौधे के पास जलाया जाए तो मां लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त होती है। यह उपाय घर में सुख शांति और आर्थिक समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करने वाला माना जाता है।

    ज्योतिष शास्त्र में शुक्रवार को दही का भी विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि इस दिन स्नान से पहले दही से बाल धोने और उसके बाद सफेद या हल्के रंग के स्वच्छ वस्त्र पहनकर पूजा करने से शुक्र ग्रह मजबूत होता है। धार्मिक दृष्टि से बालों का संबंध शनि ग्रह से माना जाता है जबकि दही शुक्र ग्रह का कारक माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि जब शनि और शुक्र दोनों शुभ स्थिति में होते हैं तो व्यक्ति के जीवन में सुख समृद्धि और वैभव का विस्तार होता है तथा पारिवारिक जीवन भी खुशहाल रहता है।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शुक्रवार के दिन मां लक्ष्मी की पूजा करते समय सच्चे मन से धन धान्य और परिवार की खुशहाली की कामना करनी चाहिए। पूजा के बाद जरूरतमंद लोगों को सफेद वस्त्र चावल मिश्री या दूध से बनी मिठाइयों का दान करना भी शुभ माना जाता है। कहा जाता है कि दान और सेवा के कार्य मां लक्ष्मी को अत्यंत प्रिय हैं और इससे जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आने की संभावना बढ़ती है।

    हालांकि यह ध्यान रखना आवश्यक है कि ये सभी उपाय धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित हैं। इनका उद्देश्य आस्था और आध्यात्मिक परंपराओं की जानकारी देना है। किसी भी उपाय का प्रभाव व्यक्ति की श्रद्धा और विश्वास से जुड़ा माना जाता है। यदि इन उपायों के साथ ईमानदारी परिश्रम और सकारात्मक सोच को भी जीवन में अपनाया जाए तो सफलता और समृद्धि की राह और अधिक मजबूत हो सकती है।

  • मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने का सबसे आसान उपाय शुक्रवार की पूजा में रखें इन नियमों का ध्यान मिलेगा सुख समृद्धि और वैभव

    मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने का सबसे आसान उपाय शुक्रवार की पूजा में रखें इन नियमों का ध्यान मिलेगा सुख समृद्धि और वैभव


    नई दिल्ली । सनातन धर्म में शुक्रवार का दिन धन की अधिष्ठात्री देवी माता लक्ष्मी को समर्पित माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन सच्ची श्रद्धा और पूर्ण विधि विधान से माता लक्ष्मी की पूजा करने वाले भक्तों पर देवी की विशेष कृपा बनी रहती है। जिन घरों में नियमित रूप से शुक्रवार को लक्ष्मी पूजन किया जाता है वहां सुख समृद्धि वैभव और खुशहाली का वास होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार केवल पूजा करना ही पर्याप्त नहीं होता बल्कि पूजा के दौरान कुछ विशेष नियमों का पालन करना भी आवश्यक माना गया है। इन नियमों का पालन करने से माता लक्ष्मी शीघ्र प्रसन्न होती हैं और जीवन में आर्थिक उन्नति के साथ मानसिक शांति भी प्राप्त होती है।

    शुक्रवार के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद साफ और हल्के रंग के वस्त्र धारण करना शुभ माना जाता है। इसके बाद घर के मंदिर और मुख्य द्वार की अच्छी तरह सफाई करनी चाहिए क्योंकि स्वच्छता को माता लक्ष्मी का सबसे प्रिय गुण माना गया है। घर के प्रवेश द्वार पर रंगोली बनाना और दीपक जलाना भी शुभ फलदायी माना जाता है। इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है।

    पूजा के समय माता लक्ष्मी की प्रतिमा या चित्र को स्वच्छ लाल या गुलाबी वस्त्र पर स्थापित करें। देवी को कमल का फूल अर्पित करना सबसे शुभ माना गया है। इसके साथ लाल पुष्प अक्षत रोली हल्दी चंदन धूप दीप और नैवेद्य अर्पित करें। माता को खीर बताशे मिश्री सफेद मिठाई या दूध से बनी मिठाइयों का भोग लगाने की परंपरा भी प्रचलित है। पूजा के दौरान श्रीसूक्त लक्ष्मी चालीसा और कनकधारा स्तोत्र का पाठ करने से विशेष पुण्य प्राप्त होता है।

    शुक्रवार के दिन घर में किसी भी प्रकार का कलह विवाद या कटु वचन बोलने से बचना चाहिए। धार्मिक मान्यता है कि जिस घर में प्रेम शांति और सम्मान का वातावरण रहता है वहां माता लक्ष्मी स्थायी रूप से निवास करती हैं। इस दिन क्रोध अहंकार और नकारात्मक विचारों से दूर रहना भी आवश्यक माना गया है।

    यदि संभव हो तो शुक्रवार का व्रत रखें और सात्विक भोजन ग्रहण करें। लहसुन प्याज और तामसिक भोजन से परहेज करना शुभ माना जाता है। कई श्रद्धालु इस दिन सफेद रंग की वस्तुओं का दान भी करते हैं। जरूरतमंद लोगों को अन्न वस्त्र या धन का दान करने से माता लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त होती है और जीवन में आर्थिक बाधाएं धीरे धीरे समाप्त होने लगती हैं।

    शुक्रवार की शाम घर के मंदिर और मुख्य द्वार पर घी का दीपक जलाना अत्यंत शुभ माना जाता है। मान्यता है कि दीपक की पवित्र ज्योति घर से नकारात्मक ऊर्जा को दूर करती है और सुख समृद्धि का मार्ग खोलती है। पूजा के बाद पूरे परिवार के साथ माता लक्ष्मी की आरती करना और प्रसाद ग्रहण करना चाहिए। इससे परिवार में एकता प्रेम और सकारात्मक वातावरण बना रहता है।

    धार्मिक ग्रंथों में यह भी उल्लेख मिलता है कि माता लक्ष्मी केवल धन ही नहीं बल्कि सौभाग्य संतोष सफलता और खुशहाली की भी प्रतीक हैं। इसलिए उनकी पूजा केवल आर्थिक लाभ के लिए नहीं बल्कि सदाचार ईमानदारी और परिश्रम के साथ जीवन को बेहतर बनाने की भावना से करनी चाहिए। सच्ची श्रद्धा स्वच्छ मन और नियमों के साथ की गई शुक्रवार की पूजा व्यक्ति के जीवन में सुख समृद्धि और नई संभावनाओं के द्वार खोल सकती है।

  • टीबी समझकर शुरू कर दी दवा, निकली फेफड़ों की दूसरी बीमारी, डॉक्टरों ने बताई सही जांच की अहमियत

    टीबी समझकर शुरू कर दी दवा, निकली फेफड़ों की दूसरी बीमारी, डॉक्टरों ने बताई सही जांच की अहमियत


    नई दिल्ली । टीबी यानी क्षय रोग आज भी देश के सामने एक बड़ी स्वास्थ्य चुनौती बना हुआ है लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि इस बीमारी के इलाज में सबसे बड़ी गलती बिना पुष्टि के दवा शुरू कर देना है। केवल एक्स-रे में दिखाई देने वाले धब्बों या सामान्य लक्षणों के आधार पर टीबी का इलाज शुरू करना मरीज के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है। इससे न केवल वास्तविक बीमारी का इलाज देर से शुरू होता है बल्कि अनावश्यक दवाओं के दुष्प्रभाव भी झेलने पड़ सकते हैं। लखनऊ के सिविल अस्पताल में ऐसे कई मामले सामने आ रहे हैं जहां मरीजों को टीबी समझकर दवा दी गई लेकिन विस्तृत जांच में बीमारी कुछ और निकली।

    ऐसा ही एक मामला राजधानी के अहिमामऊ निवासी 46 वर्षीय प्रेमचंद का सामने आया। उन्हें लगातार खांसी सांस फूलने और वजन कम होने की शिकायत थी। एक निजी चिकित्सक ने एक्स-रे में फेफड़ों पर धब्बे देखकर टीबी की दवा शुरू कर दी। करीब एक सप्ताह तक दवा लेने के बावजूद उनकी तबीयत में कोई सुधार नहीं हुआ। बाद में सिविल अस्पताल में विस्तृत जांच कराई गई तो पता चला कि उन्हें टीबी नहीं बल्कि फेफड़ों में गांठ यानी लंग नोड्यूल की समस्या है। इसके बाद तुरंत टीबी की दवा बंद कर सही बीमारी का उपचार शुरू किया गया।

    वरिष्ठ क्षय रोग विशेषज्ञ डॉ. आशुतोष दुबे का कहना है कि एक्स-रे में दिखाई देने वाला हर धब्बा टीबी का संकेत नहीं होता। कई बार फेफड़ों का कैंसर ब्रोंकाइटिस अस्थमा या लंग नोड्यूल जैसी बीमारियां भी एक्स-रे में लगभग वैसी ही दिखाई देती हैं। उनके अनुसार लगभग 30 प्रतिशत मामलों में केवल एक्स-रे के आधार पर किया गया आकलन गलत साबित हो सकता है। इसलिए टीबी की पुष्टि के लिए बलगम जांच सीबीनॉट जीन एक्सपर्ट सीटी स्कैन और मरीज की पूरी चिकित्सीय पृष्ठभूमि का मूल्यांकन करना बेहद जरूरी होता है। सभी जांचों के बाद ही उपचार शुरू किया जाना चाहिए।

    विशेषज्ञों के मुताबिक समय पर सही जांच होने से टीबी का इलाज अब पहले की तुलना में अधिक प्रभावी हो गया है। वर्तमान में टीबी से ठीक होने की दर 90 प्रतिशत से अधिक पहुंच चुकी है। इसके बावजूद यदि मरीज बीच में दवा छोड़ देता है तो बीमारी मल्टी ड्रग रेजिस्टेंट टीबी में बदल सकती है जिसका इलाज अधिक कठिन और लंबा होता है। यदि इसका भी उपचार अधूरा छोड़ दिया जाए तो एक्सटेंसिव ड्रग रेजिस्टेंट टीबी जैसी गंभीर स्थिति विकसित हो सकती है जिसका इलाज करीब दो वर्ष तक चल सकता है।

    डॉ. दुबे बताते हैं कि टीबी का जीवाणु परिस्थितियों के अनुसार खुद को बदलने की क्षमता रखता है। दवाओं से अधिकांश सक्रिय जीवाणु नष्ट हो जाते हैं लेकिन कुछ सुप्त अवस्था में मौजूद जीवाणु शरीर की प्रतिरक्षा क्षमता कमजोर होने पर फिर सक्रिय हो सकते हैं। यही वजह है कि डॉक्टर द्वारा निर्धारित पूरी अवधि तक नियमित रूप से दवा लेना बेहद जरूरी होता है।

    टीबी का संक्रमण मरीज के खांसने या छींकने से हवा में फैलने वाली संक्रमित बूंदों के माध्यम से फैलता है। बंद अंधेरे और नम वातावरण में यह जीवाणु लंबे समय तक सक्रिय रह सकता है। बिना मास्क और पर्याप्त दूरी के लंबे समय तक संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में रहने से संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए समय पर जांच उपचार और सावधानी न केवल मरीज बल्कि पूरे समाज की सुरक्षा के लिए आवश्यक है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि धूम्रपान नशीले पदार्थों का सेवन कुपोषण मधुमेह एचआईवी कैंसर एनीमिया और कमजोर प्रतिरक्षा वाले लोगों में टीबी का खतरा अधिक रहता है। यदि किसी व्यक्ति को दो सप्ताह से अधिक समय तक लगातार खांसी बुखार वजन कम होना भूख न लगना या बलगम में खून आने जैसी शिकायत हो तो तुरंत सरकारी अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र में जाकर टीबी की जांच करानी चाहिए। सरकार टीबी मरीजों को उपचार के दौरान हर महीने पोषण सहायता भी उपलब्ध कराती है ताकि इलाज नियमित रूप से जारी रखा जा सके।

    इसी बीच आधुनिक चिकित्सा तकनीक भी टीबी और फेफड़ों की अन्य बीमारियों की सटीक पहचान में मददगार साबित हो रही है। एंडोब्रोंकियल अल्ट्रासाउंड तकनीक के जरिए बिना किसी बड़ी सर्जरी के फेफड़ों के अंदर की जांच संभव हो गई है जिससे टीबी फेफड़ों के कैंसर और लिम्फ नोड्स से जुड़ी बीमारियों का शुरुआती चरण में ही सही पता लगाया जा सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि सही जांच समय पर इलाज और जागरूकता ही टीबी मुक्त भारत की दिशा में सबसे प्रभावी कदम साबित होंगे।

  • सऊदी टैंकरों पर हमले के बाद पाकिस्तान की सिर्फ बयानबाजी, रक्षा समझौते के बावजूद किया किनारा

    सऊदी टैंकरों पर हमले के बाद पाकिस्तान की सिर्फ बयानबाजी, रक्षा समझौते के बावजूद किया किनारा


    नई दिल्‍ली । पाकिस्तान (Pakistan) के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ (PM Shehbaz Sharif) के सामने जब सऊदी अरब (Saudi Arabia) को दिया वादा निभाने की जिम्मेदारी आई तो उन्होंने अपना असली रंग दिखा दिया. लाल सागर में जब हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के तेल टैंकर पर हमला किया तो पाकिस्तान ने जी भरकर इसकी आलोचना की. शहबाज शरीफ ने सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस (Crown Prince) को फोन लगाकर उनके साथ सॉलिडरिटी जताई, सऊदी को बिरादर मुल्क बताया, हूतियों की निंदा की. लेकिन असल एक्शन के नाम पर पाकिस्तान के पास जुबानी जमा खर्च करने के अलावा कुछ नहीं था.

    सवाल है कि शहबाज शरीफ ने सऊदी अरब के साथ कौन सा कमिटमेंट किया है. बताना चाहेंगे कि सऊदी अरब और पाकिस्तान ने डिफेंस डील किया है. इसके तहत दोनों देशों ने कहा है कि एक के ऊपर हमला दूसरे पर भी अटैक माना जाएगा और दोनों देश मिलकर इस हमले का जवाब देंगे.

    यमन के ईरान-समर्थित हूती विद्रोहियों ने गुरुवार तड़के लाल सागर में सऊदी अरब के दो तेल टैंकरों पर हमला किया. सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच हुए समझौते के मुताबिक पाकिस्तान को ऐसे किसी सिचुएशन में सऊदी अरब की तरफ से हूती विद्रोहियों को जवाब देकर अपना सिक्योरिटी कमिटमेंट पूरा करना चाहिए था.

    कहां गया सऊदी-पाकिस्तान का डिफेंस डील
    लेकिन इस दौरान पाकिस्तान खामोश रहा. यहां अहम यह है कि पाकिस्तान ईरान का भी हितैषी होने का गेम खेल रहा है. ईरान के गृह मंत्री ने हाल ही में पाकिस्तान का दौरा खत्म किया है. इस दौरान ईरान-पाकिस्तान ने दोस्ती को नई ऊंचाई पर ले जाने का वादा किया.

    पाकिस्तान के सामने समस्या यह है कि हूती विद्रोही ईरान के इशारे पर ही चलते हैं. अगर पाकिस्तान हूतियों के खिलाफ कुछ करता है तो वह ईरान की दुश्मनी मोल लेगा. जिसके साथ उसकी लंबी सीमा है. लेकिन अगर पाकिस्तान लाल सागर में सऊदी अरब के टैंकरों पर हमला कर रहे हूती विद्रोहियों पर कोई एक्शन नहीं लेता है तो इससे सऊदी अरब को उसकी असलियत समझ आ जाएगी.

    ऐसी हरकतें मंज़ूर नहीं
    फिलहाल इस बार जब हूती विद्रोहियों ने लाल सागर में सऊदी अरब के दो टैंकरों को ब्लास्ट कर आग के हवाले कर दिया तो पाकिस्तान ने क्राउन प्रिंस सलमान को फोन कर एक बार फिर से बड़े बड़े वादे किए.

    पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि उन्होंने लाल सागर में सऊदी टैंकरों पर हूतियों के हमले की निंदा की है और उन्हें चेतावनी दी है. शहबाज ने एक्स पर लिखा, “आज सुबह मैंने सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस और प्रधानमंत्री, महामहिम प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान बिन अब्दुलअज़ीज़ अल सऊद से टेलीफ़ोन पर बातचीत की. मैंने लाल सागर में सऊदी तेल टैंकरों पर हूतियों के हमलों की कड़े से कड़े शब्दों में निंदा की. ऐसी हरकतें मंज़ूर नहीं हैं; ये अंतरराष्ट्रीय क़ानून का उल्लंघन करती हैं, समुद्री आवाजाही की आज़ादी के लिए खतरा हैं और क्षेत्रीय शांति व सुरक्षा को कमज़ोर करती हैं.”

    पाक विदेश मंत्रालय की चेतावनी
    बाद में पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने हूती विद्रोहियों को चेतावनी देकर जरूर भड़ास निकाली. हालांकि पाकिस्तान की ये चेतावनी उसके जहाजों पर हमलों की आशंका को लेकर थी. पाकिस्तान ने कहा कि लाल सागर में उसके झंडे वाले जहाजों या समुद्री हितों के खिलाफ किसी भी हमले का तुरंत जवाब दिया जाएगा. उसने चेतावनी दी कि ऐसी हरकतों को उसकी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए “गंभीर खतरा” माना जाएगा.

    विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने कहा कि पाकिस्तानी झंडे वाले जहाजों या उसके कमर्शियल जहाजों पर किसी भी हमले को “पाकिस्तान पर हमला माना जाएगा और उसका तुरंत जवाब दिया जाएगा.”

    हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी की घोषणा की है. उन्होंने कहा था कि वे बाब अल-मंदेब स्ट्रेट में सऊदी जहाजों को रोकेंगे. यह कदम उन्होंने यमन में बंदरगाहों और हवाई अड्डों की रियाद द्वारा की गई नाकेबंदी के जवाब में उठाया है.

  • ग्लासगो में खेलों का महासंग्राम शुरू, मीराबाई-लवलीना बनीं भारत की शान, कॉमनवेल्थ गेम्स का शानदार शुभारंभ

    ग्लासगो में खेलों का महासंग्राम शुरू, मीराबाई-लवलीना बनीं भारत की शान, कॉमनवेल्थ गेम्स का शानदार शुभारंभ


    नई दिल्ली । स्कॉटलैंड के ऐतिहासिक शहर ग्लासगो में कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 का शानदार आगाज हो गया। रंगों रोशनी संगीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से सजी भव्य उद्घाटन समारोह ने दुनिया भर से पहुंचे खिलाड़ियों और खेल प्रेमियों का दिल जीत लिया। ओवीओ हाइड्रो एरिना में आयोजित इस समारोह में स्कॉटलैंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और आधुनिक खेल भावना का अद्भुत संगम देखने को मिला। इसी के साथ अगले 11 दिनों तक चलने वाले खेलों के इस महाकुंभ का औपचारिक शुभारंभ हुआ जहां दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी पदकों के लिए अपनी दावेदारी पेश करेंगे।

    कॉमनवेल्थ की परंपरा के अनुरूप ब्रिटेन के सम्राट किंग चार्ल्स तृतीय ने आधिकारिक रूप से खेलों का उद्घाटन किया। वर्ष 2014 के बाद एक बार फिर ग्लासगो को इन प्रतिष्ठित खेलों की मेजबानी का अवसर मिला है। उद्घाटन समारोह में स्कॉटलैंड की संस्कृति लोक परंपराओं और आधुनिक कला का अनूठा प्रदर्शन हुआ। प्रसिद्ध कलाकारों केटी टुनस्टॉल नाथन इवांस और सेंट फीनिक्स की शानदार प्रस्तुतियों ने समारोह को और भी यादगार बना दिया। संगीत नृत्य और रोशनी के शानदार संयोजन ने पूरे माहौल को उत्साह से भर दिया।

    भारत के लिए उद्घाटन समारोह बेहद गर्व का क्षण साबित हुआ जब ओलंपिक पदक विजेता मीराबाई चानू और लवलीना बोरगोहेन ने भारतीय दल का नेतृत्व करते हुए परेड ऑफ नेशंस में तिरंगा थामा। जैसे ही भारतीय दल एरिना में पहुंचा पूरा स्टेडियम तालियों और उत्साह से गूंज उठा। टोक्यो ओलंपिक की रजत पदक विजेता मीराबाई चानू ने राष्ट्रीय ध्वज को गर्व के साथ थामा जबकि टोक्यो ओलंपिक की कांस्य पदक विजेता मुक्केबाज लवलीना बोरगोहेन ने कॉमनवेल्थ बैटन के साथ भारत की उम्मीदों का प्रतिनिधित्व किया। दोनों खिलाड़ियों की मौजूदगी ने भारतीय दल का उत्साह कई गुना बढ़ा दिया।

    इस बार भारत ने 125 सदस्यीय मजबूत दल ग्लासगो भेजा है जो पैरा खेलों सहित 13 विभिन्न खेलों में अपनी चुनौती पेश करेगा। हालांकि इस संस्करण में प्रतियोगिताओं की संख्या पिछले संस्करणों की तुलना में कम रखी गई है लेकिन भारतीय दल में कई ओलंपिक और विश्व स्तरीय पदक विजेता खिलाड़ियों की मौजूदगी देश की पदक उम्मीदों को मजबूत बनाती है। भारत का लक्ष्य एक बार फिर कॉमनवेल्थ खेलों में अपनी खेल शक्ति का दम दिखाना और पदक तालिका में मजबूत स्थान हासिल करना है।

    दिलचस्प बात यह रही कि उद्घाटन समारोह से पहले ही भारत का अभियान शुरू हो चुका था। भारतीय लॉन बॉल्स टीम सबसे पहले मैदान पर उतरी और उससे बर्मिंघम 2022 जैसे ऐतिहासिक प्रदर्शन को दोहराने की उम्मीद की जा रही है। पिछली बार लॉन बॉल्स में भारत ने ऐतिहासिक सफलता हासिल कर पूरे देश को गौरवान्वित किया था और इस बार भी खिलाड़ियों से वैसी ही उम्मीदें हैं।

    कॉमनवेल्थ गेम्स के 23वें संस्करण में 74 देशों और क्षेत्रों के हजारों खिलाड़ी हिस्सा ले रहे हैं। प्रतियोगिताएं 10 खेलों में आयोजित की जाएंगी जिनके मुकाबले स्कॉटिश इवेंट कैंपस स्कॉटस्टाउन स्टेडियम टोलक्रॉस इंटरनेशनल स्विमिंग सेंटर और ग्लासगो एरिना जैसे विश्वस्तरीय मैदानों पर खेले जाएंगे। आयोजन का दायरा भले ही पहले की तुलना में थोड़ा छोटा हो लेकिन प्रतियोगिता का स्तर पहले की तरह बेहद रोमांचक और चुनौतीपूर्ण रहने की उम्मीद है।

    भारत की नजरें इस बार कई बड़े सितारों पर टिकी होंगी। ओलंपिक चैंपियन नीरज चोपड़ा एथलेटिक्स में देश की सबसे बड़ी उम्मीद होंगे जबकि मीराबाई चानू वेटलिफ्टिंग में और लवलीना बोरगोहेन बॉक्सिंग में स्वर्ण पदक की मजबूत दावेदार मानी जा रही हैं। इसके अलावा भारतीय मुक्केबाजी दल भी शानदार प्रदर्शन करने की क्षमता रखता है। उद्घाटन समारोह के साथ अब नजरें मैदान पर होने वाली कड़ी प्रतिस्पर्धा पर टिक गई हैं जहां पदकों रिकॉर्ड और नए इतिहास का इंतजार पूरी दुनिया को रहेगा।

  • वैभव की विस्फोटक फिफ्टी और गेंदबाजों का कमाल, भारत ने जिम्बाब्वे को 7 विकेट से हराकर रचा नया रिकॉर्ड

    वैभव की विस्फोटक फिफ्टी और गेंदबाजों का कमाल, भारत ने जिम्बाब्वे को 7 विकेट से हराकर रचा नया रिकॉर्ड


    नई दिल्ली । जिम्बाब्वे के खिलाफ तीन मैचों की टी20 अंतरराष्ट्रीय सीरीज की शुरुआत टीम इंडिया ने बेहद शानदार अंदाज में की। हरारे स्पोर्ट्स क्लब में खेले गए पहले मुकाबले में भारत ने मेजबान टीम को 7 विकेट से करारी शिकस्त देते हुए सीरीज में 1-0 की बढ़त हासिल कर ली। इस जीत की सबसे बड़ी खासियत 15 वर्षीय युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी की विस्फोटक बल्लेबाजी रही जिन्होंने अपनी तूफानी पारी से मैच का रुख पूरी तरह भारत के पक्ष में मोड़ दिया। भारत ने 126 रन के लक्ष्य को सिर्फ 13.2 ओवर में हासिल कर लिया और 40 गेंद शेष रहते मुकाबला समाप्त कर टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 120 से अधिक रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए गेंदों के लिहाज से अपनी चौथी सबसे बड़ी जीत दर्ज की।

    इस मुकाबले में पहले गेंदबाजों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए जिम्बाब्वे की बल्लेबाजी को पूरी तरह दबाव में रखा। टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी मेजबान टीम की शुरुआत बेहद खराब रही और पहली ही गेंद पर ब्रायन बेनेट बिना खाता खोले पवेलियन लौट गए। इसके बाद भी विकेटों का पतन लगातार जारी रहा और 32 रन तक जिम्बाब्वे अपने चार प्रमुख बल्लेबाज गंवा चुका था। भारतीय गेंदबाजों ने नई गेंद से सटीक लाइन और लेंथ के साथ मेजबान बल्लेबाजों को खुलकर खेलने का मौका नहीं दिया।

    मुश्किल परिस्थिति में रेयान बर्ल और वेस्ली मधेवेरे ने पारी को संभालने का प्रयास किया। दोनों ने पांचवें विकेट के लिए महत्वपूर्ण साझेदारी कर टीम को कुछ हद तक संकट से बाहर निकाला। मधेवेरे ने बाद में तादिवानाशे मारुमानी के साथ भी उपयोगी रन जोड़े जिससे जिम्बाब्वे का स्कोर सम्मानजनक स्थिति तक पहुंच सका। मधेवेरे ने 39 रन बनाए जबकि मारुमानी 27 रन बनाकर नाबाद लौटे। रेयान बर्ल ने 26 रन का योगदान दिया और जिम्बाब्वे ने निर्धारित 20 ओवर में 7 विकेट पर 125 रन बनाए।

    भारत की ओर से युवा तेज गेंदबाज मयंक यादव और प्रिंस यादव ने शानदार गेंदबाजी करते हुए दो-दो विकेट अपने नाम किए। शिवम दुबे और रवि बिश्नोई ने भी एक-एक विकेट लेकर जिम्बाब्वे की बल्लेबाजी को कभी खुलकर खेलने का मौका नहीं दिया। अनुशासित गेंदबाजी के दम पर भारतीय टीम ने लक्ष्य को सीमित रखने में अहम भूमिका निभाई।

    126 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम की शुरुआत भले ही अभिषेक शर्मा के जल्दी आउट होने से हुई लेकिन इसके बाद वैभव सूर्यवंशी ने अपने आक्रामक तेवर से मैच का रंग बदल दिया। उन्होंने ईशान किशन के साथ तेज साझेदारी करते हुए जिम्बाब्वे के गेंदबाजों पर लगातार दबाव बनाए रखा। वैभव ने सिर्फ 19 गेंदों में 50 रन की विस्फोटक पारी खेली जिसमें चार चौके और चार शानदार छक्के शामिल रहे। इस अर्धशतक के साथ उन्होंने इतिहास रचते हुए 15 साल 118 दिन की उम्र में टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अर्धशतक लगाने वाले दुनिया के सबसे युवा पुरुष बल्लेबाज बनने का गौरव हासिल किया।

    वैभव के आउट होने के बाद ईशान किशन ने 35 रन की उपयोगी पारी खेली जबकि कप्तान श्रेयस अय्यर ने नाबाद 28 रन बनाकर जीत की औपचारिकता पूरी की। अंत में तिलक वर्मा ने भी नाबाद रहकर टीम को आसान जीत तक पहुंचाया। जिम्बाब्वे की ओर से ब्लेसिंग मुजरबानी ने दो विकेट लिए जबकि रिचर्ड नगारवा को एक सफलता मिली।

    यह मुकाबला कप्तान श्रेयस अय्यर के लिए भी खास रहा क्योंकि बतौर कप्तान उन्हें लगातार निराशाओं के बाद पहली टी20 अंतरराष्ट्रीय जीत मिली। इससे पहले आयरलैंड और इंग्लैंड के खिलाफ सीरीज में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। अब भारत की नजरें शेष दो मुकाबलों में जीत दर्ज कर सीरीज अपने नाम करने पर होंगी। 25 और 26 जुलाई को इसी मैदान पर खेले जाने वाले अगले दोनों मैचों में भारतीय टीम अपने शानदार प्रदर्शन को बरकरार रखने के इरादे से उतरेगी जबकि जिम्बाब्वे वापसी की कोशिश करेगा।