Author: bharati

  • ‘धुरंधर 2’ पर सियासी विवाद तेज, बैन की मांग; डायरेक्टर-प्रोड्यूसर पर कार्रवाई की उठी आवाज

    ‘धुरंधर 2’ पर सियासी विवाद तेज, बैन की मांग; डायरेक्टर-प्रोड्यूसर पर कार्रवाई की उठी आवाज


    मुंबई। बॉक्स ऑफिस पर तेजी से आगे बढ़ रही फिल्म धुरंधर 2 अब राजनीतिक विवादों में घिरती नजर आ रही है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राशिद अल्वी ने फिल्म पर गंभीर आरोप लगाते हुए इसके प्रदर्शन पर रोक लगाने और निर्माताओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

    अल्वी का कहना है कि फिल्म में माफिया अतीक अहमद की सार्वजनिक हत्या को सही ठहराने का प्रयास किया गया है, जो समाज और न्याय व्यवस्था के लिए गलत संदेश देता है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या फिल्मों के जरिए इस तरह की घटनाओं को उचित ठहराना सही है।

    “ऐसी फिल्मों से माहौल खराब होता है”

    राशिद अल्वी ने आरोप लगाया कि इस तरह की फिल्मों से देश का माहौल खराब होता है। उन्होंने यह भी कहा कि संभव है ऐसी फिल्मों को सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का समर्थन या फंडिंग मिलती हो, हालांकि इस दावे के समर्थन में उन्होंने कोई ठोस प्रमाण पेश नहीं किया।

    उन्होंने तीखे शब्दों में कहा कि अगर फिल्मों के जरिए हत्याओं को जायज ठहराया जाएगा, तो क्या देश में अदालतों की जरूरत ही खत्म हो जाएगी?

    पाकिस्तान-चीन एंगल पर भी सवाल

    कांग्रेस नेता ने फिल्म की कहानी पर सवाल उठाते हुए कहा कि इसमें केवल पाकिस्तान के खिलाफ माहौल दिखाया गया है, जबकि चीन का जिक्र नहीं किया गया। उनके मुताबिक, यह एकतरफा सोच को दर्शाता है।

    नोटबंदी को लेकर भी उठे सवाल

    अल्वी ने दावा किया कि फिल्म में नोटबंदी जैसे मुद्दे को भी सही ठहराने की कोशिश की गई है। उन्होंने कहा कि इस तरह के चित्रण से उन लोगों की पीड़ा नजरअंदाज होती है, जो उस फैसले से प्रभावित हुए थे।

    बॉक्स ऑफिस पर मजबूत प्रदर्शन

    विवादों के बीच धुरंधर 2 की कमाई लगातार बढ़ रही है। फिल्म ने रिलीज के शुरुआती दो दिनों में ही 200 करोड़ रुपये से अधिक का कलेक्शन कर लिया है। इससे पहले इसके पहले भाग धुरंधर ने 1000 करोड़ रुपये से ज्यादा की कमाई की थी।

    प्रोपेगैंडा बनाम एंटरटेनमेंट की बहस

    फिल्म को लेकर देश में दो धड़े बनते दिख रहे हैं। एक पक्ष इसे प्रोपेगैंडा करार दे रहा है, जबकि दूसरा इसे मनोरंजन और देशभक्ति से जुड़ी कहानी बता रहा है।

    फिलहाल, धुरंधर 2 पर बैन को लेकर कोई आधिकारिक फैसला नहीं हुआ है, लेकिन इस विवाद ने फिल्म को लेकर राजनीतिक बहस जरूर तेज कर दी है।

  • “पत्नी नौकरानी नहीं, बराबर की साथी है” — सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी

    “पत्नी नौकरानी नहीं, बराबर की साथी है” — सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी


    नई दिल्ली। वैवाहिक विवाद से जुड़े एक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने पति को कड़ी फटकार लगाते हुए साफ कहा कि शादी किसी नौकरानी से नहीं, बल्कि जीवनसाथी से की जाती है। अदालत ने दो टूक कहा कि घर के कामों में पति को भी बराबरी से हाथ बंटाना होगा।

    कोर्ट ने टिप्पणी की कि खाना बनाना, कपड़े धोना या घर संभालना सिर्फ पत्नी की जिम्मेदारी नहीं है। समय बदल चुका है और पति-पत्नी दोनों को मिलकर जिम्मेदारियां निभानी चाहिए।

    तलाक की मांग पर कोर्ट सख्त

    मामले में पति ने ‘क्रूरता’ के आधार पर तलाक की मांग की थी। उसका आरोप था कि पत्नी घर का काम नहीं करती और उसके साथ दुर्व्यवहार करती है। इस पर कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि पत्नी घरेलू काम ठीक से नहीं करती, तो इसे क्रूरता नहीं माना जा सकता।

    अदालत ने कहा कि इस आधार पर तलाक देना उचित नहीं है और पति को अपने नजरिए में बदलाव लाना चाहिए।

    2017 में हुई थी शादी

    दोनों की शादी वर्ष 2017 में हुई थी और उनका एक आठ साल का बेटा भी है। पति का कहना था कि शादी के कुछ ही समय बाद पत्नी का व्यवहार बदल गया और वह उसके माता-पिता के प्रति भी अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करती है।

    हालांकि, कोर्ट ने इस विवाद को सुलझाने के लिए पहले मध्यस्थता (मेडिएशन) का रास्ता सुझाया था, लेकिन दोनों के बीच सहमति नहीं बन पाई। अब मामले की अगली सुनवाई तय की गई है।

    दूसरे मामले में भी दिलचस्प टिप्पणी

    इसी दिन एक अन्य मामले में सुप्रीम कोर्ट ने एक फरार जोड़े की सुरक्षा याचिका पर सुनवाई करते हुए उन्हें सीधे राहत देने से इनकार कर दिया। अदालत ने याचिकाकर्ता के वकील से कहा कि वे इसके लिए संबंधित दिल्ली उच्च न्यायालय का रुख करें।

    बताया गया कि यह जोड़ा सोशल मीडिया से प्रभावित होकर इस गलतफहमी में सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया था कि वह परिसर में शादी कर सकता है और तुरंत सुरक्षा मिल जाएगी। अदालत ने इस पर अप्रत्यक्ष रूप से नाराजगी जताते हुए उचित कानूनी प्रक्रिया अपनाने की सलाह दी।

  • अग्निपथ भर्ती में बड़ा बदलाव: नेपाली गोरखाओं की एंट्री बंद, केवल भारतीय गोरखा ही पात्र

    अग्निपथ भर्ती में बड़ा बदलाव: नेपाली गोरखाओं की एंट्री बंद, केवल भारतीय गोरखा ही पात्र

    आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन जून से शुरू होने वाली भर्ती के लिए जारी नोटिफिकेशन में ‘गोरखा’ की जगह केवल ‘भारतीय गोरखा’ का उल्लेख किया गया है। इससे स्पष्ट है कि अब सिर्फ भारत में रहने वाले गोरखा युवा ही आवेदन कर सकेंगे।

    नेपाल के रुख का असर

    इस बदलाव के पीछे नेपाल का पहले से चला आ रहा विरोध अहम माना जा रहा है। जब अग्निपथ योजना लागू की गई थी, तब नेपाल ने इसे भारत, ब्रिटेन और नेपाल के बीच हुए पुराने त्रिपक्षीय समझौते के खिलाफ बताया था।

    नेपाल के विरोध के बाद वहां स्थित भारतीय सेना के दो भर्ती केंद्र भी बंद हो गए थे, जहां से लंबे समय से गोरखा सैनिकों की भर्ती होती थी। भारत ने कई बार बातचीत के जरिए स्थिति सुलझाने की कोशिश की, लेकिन कोई सहमति नहीं बन सकी।

    सुरक्षा और अवसर भी वजह

    सूत्रों के अनुसार, नेपाल में बढ़ते भारत-विरोधी माहौल और बदलते सुरक्षा परिदृश्य को देखते हुए यह फैसला लिया गया है। इसके अलावा नेपाली गोरखाओं के पास अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निजी सुरक्षा एजेंसियों और विदेशी सेनाओं में काम करने के बेहतर अवसर भी मौजूद हैं।

    बताया जाता है कि रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान भी कई गोरखा सैनिकों को रूसी सेना में काम करने के मौके मिले। वहीं, ब्रिटेन की सेना में गोरखाओं की भर्ती पहले से जारी है।

    भारतीय सेना में पहले से बड़ी मौजूदगी

    फिलहाल भारतीय सेना की गोरखा राइफल्स में करीब 30 हजार से अधिक नेपाली गोरखा सैनिक सेवा दे रहे हैं। इसके अलावा नेपाल में बड़ी संख्या में पूर्व गोरखा सैनिक भी हैं, जिन्हें भारत सरकार हर साल लगभग 500–600 करोड़ रुपये पेंशन के रूप में देती है।

    भारतीय गोरखा युवाओं को फायदा

    इस फैसले से भारत में रह रहे गोरखा युवाओं के लिए सेना में भर्ती के अवसर बढ़ने की संभावना है। अब वे सीमित प्रतिस्पर्धा के बीच ज्यादा मौके हासिल कर सकेंगे।

    कुल मिलाकर, अग्निपथ योजना के तहत यह बदलाव भारत-नेपाल सैन्य सहयोग के लंबे इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है।

  • गाजियाबाद में ISI जासूसी नेटवर्क का भंडाफोड़, 5 नाबालिग समेत 9 और गिरफ्तार; 15 तक पहुंची संख्या

    गाजियाबाद में ISI जासूसी नेटवर्क का भंडाफोड़, 5 नाबालिग समेत 9 और गिरफ्तार; 15 तक पहुंची संख्या


    गाजियाबाद। उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में एक बड़े जासूसी नेटवर्क का खुलासा करते हुए पुलिस ने शुक्रवार को 9 और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें 5 नाबालिग भी शामिल हैं। इसके साथ ही इस मामले में अब तक कुल 15 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। नाबालिग आरोपियों को बाल संप्रेक्षण गृह भेज दिया गया है।

    पुलिस के मुताबिक, यह गिरोह आईएसआई के इशारे पर देश के सैन्य ठिकानों और संवेदनशील स्थानों की जानकारी पाकिस्तान भेज रहा था। इतना ही नहीं, आरोपियों ने देश के बड़े उद्योगपतियों जैसे गौतम अडानी और मुकेश अंबानी के घरों की लोकेशन और वीडियो भी साझा किए थे।

    नाबालिग भी साजिश में शामिल

    गिरफ्तार नाबालिगों की उम्र 15 से 17 वर्ष के बीच बताई जा रही है।

    इनमें एक 9वीं कक्षा का छात्र भी शामिल है, जो संवेदनशील जगहों की रेकी और कैमरे लगाने के काम में लगा था। पुलिस ने आरोपियों के पास से 9 मोबाइल फोन और 10 सिम कार्ड बरामद किए हैं।

    जांच में सामने आया है कि आरोपी पाकिस्तानी नंबरों के अलावा मलेशिया और यूके के वर्चुअल नंबर के जरिए अपने हैंडलर्स से संपर्क में थे।

    कई राज्यों से जुड़े साजिश के तार

    पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों में मेरठ, कौशांबी और नवी मुंबई से जुड़े लोग शामिल हैं। वहीं, गिरोह के मुख्य आरोपी अभी फरार हैं, जिनकी तलाश जारी है। शुरुआती जांच में इस नेटवर्क के तार बिहार और अन्य राज्यों से भी जुड़े पाए गए हैं।

    बड़े आतंकी हमले की थी साजिश

    जांच एजेंसियों का मानना है कि यह नेटवर्क देश के कई राज्यों—जम्मू-कश्मीर, दिल्ली, मुंबई, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश—में सिलसिलेवार हमलों की साजिश रच रहा था। यह साजिश करीब दो साल से चल रही थी और दूसरे चरण में ही आरोपियों को पकड़ लिया गया।

    सूत्रों के मुताबिक, साजिश के तहत 50 से ज्यादा जगहों पर सौर ऊर्जा से चलने वाले कैमरे लगाने की योजना थी, ताकि संवेदनशील गतिविधियों की निगरानी की जा सके।

    समुद्री रास्तों की भी रेकी

    एक आरोपी ने मुंबई पोर्ट की रेकी कर वहां की फोटो और वीडियो पाकिस्तान भेजे थे। जांच एजेंसियां इसे बेहद गंभीर मान रही हैं, क्योंकि पहले भी 26/11 जैसे आतंकी हमलों में समुद्री रास्ते का इस्तेमाल किया जा चुका है।

    अगला निशाना जालंधर था

    पूछताछ में सामने आया है कि दिल्ली के बाद जालंधर को निशाना बनाने की तैयारी थी। हालांकि, एक आरोपी निजी कारणों से तय समय पर वहां नहीं पहुंच सका, जिससे संभावित बड़ा हमला टल गया।

    फिलहाल, पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही हैं और आरोपियों पर कड़े कानूनों के तहत कार्रवाई की तैयारी है।

  • 'सच दिखाया तो हो रही तकलीफ', 'धुरंधर 2' के विरोध पर पूर्व DGP एस.पी. वैद का पलटवार

    'सच दिखाया तो हो रही तकलीफ', 'धुरंधर 2' के विरोध पर पूर्व DGP एस.पी. वैद का पलटवार

    नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर के पूर्व पुलिस महानिदेशक एस.पी. वैद ने फिल्म धुरंधर 2 का खुलकर समर्थन किया है और इसके आलोचकों पर तीखा निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि फिल्म में अतीक अहमद और दाऊद इब्राहिम जैसे गैंगस्टरों को लेकर जो दिखाया गया है, वह कड़वी लेकिन वास्तविक सच्चाई है।

    वैद ने कहा कि अतीक अहमद के पाकिस्तान से संबंध और अवैध हथियारों की तस्करी से जुड़े मामले किसी से छिपे नहीं हैं। उनके मुताबिक, “अतीक अहमद भले ही सांसद रहा हो, लेकिन वह एक कुख्यात गैंगस्टर था। उसके पास अवैध हथियार कैसे पहुंचते थे और पाकिस्तान से उसके क्या रिश्ते थे, यह जगजाहिर है। फिल्म इसी हकीकत को सामने लाती है।”

    पूर्व डीजीपी ने यह भी आरोप लगाया कि देश में कुछ नेता जाली नोटों के रैकेट में शामिल रहे हैं और पाकिस्तान तक मशीनें पहुंचाने में उनकी भूमिका रही। उन्होंने कहा कि ऐसे हालातों के चलते ही नोटबंदी जैसा कड़ा कदम उठाना पड़ा था।

    विपक्षी दलों द्वारा फिल्म को “सरकारी प्रोपेगेंडा” बताए जाने पर वैद ने पलटवार करते हुए कहा, “जब तक दाऊद इब्राहिम के पैसे से फिल्में बनती थीं, तब तक किसी को समस्या नहीं थी। अब जब सच्चाई दिखाई जा रही है, तो लोगों को मिर्ची लग रही है।” उन्होंने साफ किया कि इस फिल्म में किसी सरकारी फंड का इस्तेमाल नहीं हुआ है और यह वास्तविक घटनाओं से प्रेरित एक साहसिक प्रयास है।

    फिल्म को लेकर देश में मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। जहां एक तरफ इसे समर्थन मिल रहा है, वहीं कुछ राजनीतिक दल इसे प्रोपेगेंडा करार देकर सवाल उठा रहे हैं। हालांकि, एस.पी. वैद का मानना है कि फिल्म की कहानी वास्तविक तथ्यों के काफी करीब है और इसे उसी नजरिए से देखा जाना चाहिए।

  • MP में बदला मौसम, 72 घंटे से बारिश-ओले का कहर, 42 जिलों में असर, आज 14 जिलों में फिर अलर्ट

    MP में बदला मौसम, 72 घंटे से बारिश-ओले का कहर, 42 जिलों में असर, आज 14 जिलों में फिर अलर्ट


    भोपाल। मध्यप्रदेश में बीते 72 घंटों से मौसम लगातार बिगड़ा हुआ है। साइक्लोनिक सर्कुलेशन और ट्रफ सिस्टम के एक्टिव रहने से भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर और उज्जैन समेत 42 से अधिक जिलों में बारिश, ओले और तेज आंधी का असर देखने को मिला है।

    शनिवार को भी यह सिस्टम खासतौर पर पूर्वी हिस्से में सक्रिय रहेगा। रीवा और सिंगरौली सहित 14 जिलों में बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। तेज हवाएं (करीब 74 किमी प्रति घंटा) और ओलावृष्टि के कारण कई इलाकों में गेहूं, केला, पपीता और संतरे की फसलों को भारी नुकसान हुआ है।

    मौसम विभाग के अनुसार, 18 मार्च से प्रदेश में मजबूत वेदर सिस्टम सक्रिय है। मौसम विभाग के मुताबिक, तीन ट्रफ और एक साइक्लोनिक सर्कुलेशन की वजह से शुक्रवार को भी मौसम अस्थिर रहा। शनिवार को यह सिस्टम आगे बढ़ेगा और पूर्वी जिलों में असर दिखाएगा।

    पिछले 24 घंटों में 42 जिलों के करीब 112 शहरों और कस्बों में बारिश दर्ज की गई। इनमें इंदौर, धार, खरगोन, बड़वानी, आलीराजपुर, झाबुआ, बुरहानपुर, खंडवा, भोपाल, विदिशा, रायसेन, सीहोर, नर्मदापुरम, बैतूल, ग्वालियर, मुरैना, उज्जैन, सागर, छतरपुर, जबलपुर, छिंदवाड़ा और सिवनी सहित कई जिले शामिल हैं। धार के बदनावर और बैतूल के घोड़ा डोंगरी में सबसे ज्यादा करीब पौन इंच बारिश हुई। वहीं, कई जगहों पर आधा इंच या उससे अधिक वर्षा दर्ज की गई।

    ओलावृष्टि की बात करें तो आलीराजपुर, बड़वानी, विदिशा, बैतूल, झाबुआ, खंडवा, आगर-मालवा, छिंदवाड़ा, जबलपुर, दमोह और सिवनी समेत कई जिलों में ओले गिरे, जिससे खेतों में खड़ी फसलों को भारी नुकसान पहुंचा।

    बारिश और बादलों के कारण प्रदेशभर में तापमान में गिरावट दर्ज की गई। ग्वालियर में अधिकतम तापमान 23.9 डिग्री सेल्सियस रहा, जो एक दिन में 10.6 डिग्री तक गिर गया। यहां दिन और रात के तापमान में सिर्फ 4.7 डिग्री का अंतर रहा, जबकि न्यूनतम तापमान 19.2 डिग्री दर्ज किया गया।

    खजुराहो में सबसे ज्यादा 10.9 डिग्री की गिरावट दर्ज की गई, जहां तापमान 38.3 से घटकर 27.4 डिग्री पर पहुंच गया। सतना और ग्वालियर में भी तापमान करीब 10 डिग्री तक गिरा। ग्वालियर, दतिया, सतना, रीवा, खजुराहो, पचमढ़ी, श्योपुर, उमरिया, भोपाल, सीधी और जबलपुर जैसे शहरों में अधिकतम तापमान 30 डिग्री से नीचे दर्ज किया गया।

    मौसम विभाग के मुताबिक, मौजूदा सिस्टम 21 मार्च तक सक्रिय रहेगा। इसके बाद 22 मार्च से एक नया वेस्टर्न डिस्टर्बेंस उत्तर-पश्चिम भारत में असर दिखा सकता है, हालांकि इसका प्रभाव कमजोर रहने की संभावना है। वहीं, 26 मार्च को एक और नया सिस्टम सक्रिय हो सकता है, जिससे प्रदेश में फिर बारिश की स्थिति बन सकती है।

  • बिहार में सत्ता बदलाव के संकेत: BJP को CM पद, JDU के हिस्से दो डिप्टी CM की चर्चा तेज

    बिहार में सत्ता बदलाव के संकेत: BJP को CM पद, JDU के हिस्से दो डिप्टी CM की चर्चा तेज

    नई दिल्ली। बिहार की सियासत में बड़े बदलाव की आहट सुनाई दे रही है। सूत्रों के मुताबिक, भारतीय जनता पार्टी (BJP) और जनता दल (यूनाइटेड) (JDU) के बीच नई सत्ता व्यवस्था को लेकर सहमति बनती दिख रही है, जिसमें दोनों दलों की भूमिकाएं बदल सकती हैं।

    अब तक नीतीश कुमार के नेतृत्व में चल रही सरकार में BJP ‘बड़े भाई’ की भूमिका में आ सकती है और मुख्यमंत्री पद उसके खाते में जाने की चर्चा है। वहीं, JDU को दो उपमुख्यमंत्री पद मिलने की संभावना जताई जा रही है।

    जल्‍द हो सकता है सत्ता परिवर्तन
    सूत्रों के अनुसार, इस सत्ता परिवर्तन की प्रक्रिया जल्द शुरू हो सकती है, जिससे राज्य की राजनीतिक संरचना में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। बताया जा रहा है कि नीतीश कुमार 10 अप्रैल से राज्यसभा सदस्य के रूप में अपना नया कार्यकाल शुरू करेंगे। इससे पहले वे मुख्यमंत्री पद और विधान परिषद की सदस्यता छोड़ सकते हैं। JDU सूत्रों का कहना है कि वे केंद्र सरकार में शामिल होने के बजाय राज्यसभा में सक्रिय भूमिका निभाएंगे।

    नई व्यवस्था के तहत मंत्रालयों का बंटवारा भी तय माना जा रहा है। BJP के पास मुख्यमंत्री पद के साथ 15 मंत्री पद होंगे, जबकि JDU को दो डिप्टी CM समेत 16 मंत्री पद मिल सकते हैं। गृह मंत्रालय और विधानसभा अध्यक्ष का पद BJP के पास रहेगा, जबकि विधान परिषद के सभापति का पद JDU को दिए जाने की संभावना है।

    निशांत कुमार की एंट्री
    इस राजनीतिक बदलाव में निशांत कुमार की एंट्री भी अहम मानी जा रही है। सूत्रों के अनुसार, उन्हें उपमुख्यमंत्री बनाया जा सकता है, जबकि दूसरे डिप्टी CM के रूप में JDU के किसी वरिष्ठ नेता को जिम्मेदारी दी जाएगी।

    बताया जा रहा है कि नीतीश कुमार सरकार को मार्गदर्शन देते रहेंगे और पार्टी संगठन को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत करने पर फोकस करेंगे। सहयोगी दलों के लिए भी पुराना फॉर्मूला जारी रहने की संभावना है, जिसमें लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) को दो मंत्री पद, जबकि अन्य सहयोगियों को एक-एक पद मिल सकता है।

    नीतीश का सम्राट चौधरी की ओर इशारा
    इसी बीच, हाल ही में जमुई और सहारसा में आयोजित कार्यक्रमों के दौरान नीतीश कुमार ने सम्राट चौधरी की ओर इशारा करते हुए कहा कि वे बिहार को आगे बढ़ाएंगे। इसके बाद राजनीतिक हलकों में अटकलें तेज हो गईं कि सम्राट चौधरी को भविष्य के मुख्यमंत्री के तौर पर देखा जा रहा है।

    हालांकि, JDU की ओर से इन अटकलों को खारिज किया गया है। पार्टी के वरिष्ठ नेता विजय चौधरी ने साफ कहा कि नीतीश कुमार ने किसी को अपना उत्तराधिकारी घोषित नहीं किया है। इसके बावजूद बिहार की राजनीति में संभावित बदलाव को लेकर चर्चाएं लगातार तेज बनी हुई हैं।

  • ईरान ने ब्रिटेन को चेताया: अमेरिकी ठिकानों का इस्तेमाल उसके नागरिकों के लिए बन सकता है खतरा

    ईरान ने ब्रिटेन को चेताया: अमेरिकी ठिकानों का इस्तेमाल उसके नागरिकों के लिए बन सकता है खतरा


    तेहरान। ईरान ने ब्रिटेन द्वारा अपने सैन्य ठिकानों को अमेरिकी हमलों के लिए इस्तेमाल की अनुमति देने पर कड़ी नाराजगी जताई है। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने शनिवार को कहा कि ब्रिटेन की जनता ज्यादातर इस्राइल-अमेरिका के युद्ध में शामिल नहीं होना चाहती। अराघची ने चेतावनी दी कि ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर द्वारा अपने नागरिकों की सुरक्षा की अनदेखी करते हुए यह अनुमति देना ब्रिटिश नागरिकों की जान को खतरे में डालता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान अपनी आत्मरक्षा के अधिकार का पूरी तरह इस्तेमाल करेगा।

    अमेरिका को ब्रिटेन ने दी ठिकानों का इस्तेमाल

    अराघची के बयान के बाद पश्चिम एशिया में संघर्ष के ब्रिटेन तक फैलने की आशंका बढ़ गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ब्रिटेन ने अमेरिकी फौज को होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरानी ठिकानों पर हमले के लिए अपने ठिकानों का इस्तेमाल करने की अनुमति दे दी है। एक रिपोर्ट के अनुसार, ब्रिटेन के मंत्रियों ने शुक्रवार को अमेरिकी अभियानों के दायरे को बढ़ाने पर सहमति जताई। इनमें ईरानी मिसाइल ठिकानों को निष्क्रिय करने के लिए रक्षात्मक अभियान शामिल हैं, जो होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों पर हमला रोकने के उद्देश्य से किए जाएंगे।

    अमेरिकी दबाव या रणनीतिक यू-टर्न?

    पहले ब्रिटेन ने यह अनुमति सिर्फ उन्हीं अभियानों तक सीमित रखी थी, जो ब्रिटिश नागरिकों या हितों को सीधे खतरे में डालने वाले हमलों को रोकने के लिए थीं। लेकिन इस कदम को लेकर विपक्षी दलों में विरोध भी देखा गया। ब्रिटेन की कंजर्वेटिव पार्टी की नेता केमी बैडेनोच ने सोशल मीडिया पर इसे “सबसे बड़ा यू-टर्न” करार दिया।

    ईरान का स्पष्ट संदेश

    अब्बास अराघची ने कहा कि ब्रिटेन द्वारा अपने ठिकानों तक अमेरिकी पहुंच की अनुमति को ईरान आक्रामकता में भागीदारी के रूप में देखेगा। उनका मानना है कि यह कदम क्षेत्रीय तनाव को बढ़ाएगा और पश्चिम एशिया में सुरक्षा स्थिति को जटिल बना सकता है।

  • अपना पैसा और समय बर्बाद न करें: एक्ट्रेस राम्या ने 'धुरंधर 2' को बताया बोरिंग और प्रोपेगेंडा, आदित्य धर के निर्देशन पर उठाए गंभीर सवाल!

    अपना पैसा और समय बर्बाद न करें: एक्ट्रेस राम्या ने 'धुरंधर 2' को बताया बोरिंग और प्रोपेगेंडा, आदित्य धर के निर्देशन पर उठाए गंभीर सवाल!


    नई दिल्ली: बॉक्स ऑफिस पर सफलता के नए कीर्तिमान स्थापित कर रही रणवीर सिंह की फिल्म धुरंधर 2 जहाँ एक ओर दर्शकों की वाहवाही बटोर रही है, वहीं दूसरी ओर आलोचनाओं के घेरे में भी आ गई है। 19 मार्च को सिनेमाघरों में रिलीज हुई इस फिल्म ने पहले ही दिन 100 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर सनसनी मचा दी थी, लेकिन अब पूर्व लोकसभा सांसद और मशहूर एक्ट्रेस राम्या (दिव्या स्पंदना) ने फिल्म के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। राम्या ने न केवल फिल्म को सिरे से खारिज किया है, बल्कि प्रशंसकों को अपना कीमती समय और पैसा बचाते हुए इसे थिएटर में न देखने की नसीहत तक दे डाली है।

    राम्या ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) पर एक लंबा-चौड़ा पोस्ट साझा करते हुए फिल्म के प्रति अपनी घोर निराशा व्यक्त की। उन्होंने “धुरंधर 2” को एक ‘बोरिंग सब्जेक्ट’ बताते हुए कहा कि यह किसी ऐसे उबाऊ विषय की टेक्स्टबुक पढ़ने जैसा है जिसके चैप्टर कभी खत्म ही नहीं होते। राम्या के मुताबिक, फिल्म देखते समय एक वक्त ऐसा आता है जब दर्शक का दिमाग हार मान लेता है और स्क्रीन पर घट रही ‘भयावहता’ को देखकर निराशा के कारण हंसी आने लगती है। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि यह कंटेंट सिनेमाघरों के लिए नहीं, बल्कि स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स के लिए है, जहाँ एक क्लिक में इसे बंद किया जा सके।

    फिल्म के तकनीकी पहलुओं पर हमला बोलते हुए राम्या ने निर्देशन, डायलॉग्स, एडिटिंग और बैकग्राउंड स्कोर को बेहद घटिया करार दिया। उन्होंने यहाँ तक कह दिया कि फिल्म को देखकर ऐसा लगता है मानो टीम को रिलीज की डेडलाइन का अंदाजा ही नहीं था और आनन-फानन में जो मिला, वही दर्शकों के सामने परोस दिया गया। पहले भाग से तुलना करते हुए उन्होंने लिखा कि जहाँ ‘धुरंधर पार्ट 1’ में सिनेमा हॉल तालियों और सीटियों से गूँज रहे थे, वहीं इस पार्ट में दर्शकों की निराशा हॉल की हवा में साफ महसूस की जा सकती है।

    रणवीर सिंह के अभिनय पर तंज कसते हुए राम्या ने कहा कि लोग कह रहे हैं कि रणवीर ने फिल्म को अपने कंधों पर उठाया है, जबकि उन्हें फिल्म में रणवीर से ज्यादा उनके ‘बाल’ नजर आए। उनके अनुसार, पहले पार्ट में रणवीर के लुक और किरदार में एक जान थी, लेकिन इस बार वह पूरी तरह प्रभावहीन दिखे। सबसे अधिक नाराजगी उन्होंने फिल्म में दिखाई गई ‘क्रिएटिव हिंसा’ पर जताई। राम्या ने इसे हिंसा की एक ऐसी हैंडबुक बताया जिसकी समाज में कोई जरूरत नहीं है। फिल्म के अंत में उन्होंने निर्देशक आदित्य धर पर सीधा निशाना साधते हुए कहा, रणवीर तुम इससे कहीं बेहतर हो और आदित्य धर, अब प्रोपेगेंडा का दौर चला गया है, उससे बाहर निकलिए।
  • एलपीजी संकट: गुजरात के सूरत में प्रवासी मजदूर गांव लौटे, पलायन से कामगारों की बढ़ी कमी

    एलपीजी संकट: गुजरात के सूरत में प्रवासी मजदूर गांव लौटे, पलायन से कामगारों की बढ़ी कमी

    सूरत। गुजरात के सूरत में पश्चिम एशिया तनाव के असर से रसोई गैस (एलपीजी) की भारी किल्लत उत्पन्न हो गई है। इसके चलते बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूर अपने गांव लौटने को मजबूर हैं। उधना रेलवे स्टेशन से घर जाने की तैयारी कर रहे मजदूरों ने बताया कि काम होने के बावजूद गैस की कमी ने जीवन बेहद मुश्किल बना दिया है। कई दिनों से खाना बनाने के लिए गैस उपलब्ध नहीं होने के कारण उन्हें भूखे रहने तक की स्थिति का सामना करना पड़ा।

    गैस की कीमत 500 रुपये प्रति किलो तक

    मजदूरों का आरोप है कि गैस की कीमत अब लगभग 500 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है, जो उनकी पहुंच से बाहर है। एक मजदूर सचिन ने कहा कि पैसों की कमी और गैस न मिलने के कारण वे गांव लौटने को मजबूर हैं। वहीं, एक महिला मजदूर ने बताया कि गैस खत्म हुए एक सप्ताह हो गया है और लगातार प्रयास करने के बावजूद सिलिंडर नहीं मिल रहा। आर्थिक तंगी के चलते वह अपनी बेटी के साथ गांव जा रही हैं, जबकि परिवार के अन्य सदस्य सूरत में ही रहेंगे। मजदूरों ने स्पष्ट किया कि गैस आपूर्ति सामान्य होने पर वे काम पर लौटेंगे, लेकिन फिलहाल हालात ने उन्हें पलायन के लिए मजबूर कर दिया है।

    उद्योगों में श्रमिकों की कमी

    सूरत के टेक्सटाइल उद्योगों में मजदूरों के पलायन से कामगारों की कमी बढ़ गई है। मजदूर कमल पाल ने बताया कि मकान मालिकों ने लकड़ी से खाना बनाने पर भी रोक लगा दी है, जिससे हालात और कठिन हो गए हैं। मजदूरों का कहना है कि जैसे ही एलपीजी की आपूर्ति सामान्य होगी, वे वापस लौटेंगे। फिलहाल यह संकट उद्योगों और मजदूरों दोनों के लिए चुनौती बन चुका है।