Author: bharati

  • गिट्टी हटाने को लेकर परिवार में बवाल, महिला पर फावड़े से हमले का आरोप

    गिट्टी हटाने को लेकर परिवार में बवाल, महिला पर फावड़े से हमले का आरोप


    राजगढ़ । राजगढ़ जिले के कांगनीखेड़ा गांव में पारिवारिक विवाद ने हिंसक रूप ले लिया। गिट्टी हटाने को लेकर शुरू हुआ मामूली विवाद इतना बढ़ गया कि एक महिला ने अपने देवर, देवरानी और सास पर मारपीट, अभद्रता और जेवर छीनने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। घटना के बाद पीड़िता अपने पति के साथ थाने पहुंची और शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

    पीड़िता सुनीता बाई बैरागी ने आरोप लगाया कि घटना दोपहर करीब एक बजे की है। वह अपने घर के सामने खड़ी थी, तभी उसका देवर राजू बैरागी वहां गिट्टी लेने पहुंचा और उसे हटने के लिए कहा। सुनीता के मुताबिक उसने कहा कि वह पहले से ही किनारे खड़ी है, लेकिन इसी बात को लेकर विवाद शुरू हो गया।

    महिला का आरोप है कि थोड़ी ही देर में देवरानी सुमित्रा बाई और उसकी सास भी मौके पर आ गईं और तीनों ने मिलकर गाली-गलौज शुरू कर दी। विरोध करने पर विवाद और बढ़ गया। पीड़िता के अनुसार देवर राजू ने पीछे से फावड़े से हमला किया, जबकि सुमित्रा ने उसका गला पकड़ लिया। बीच-बचाव करने आए उसके बेटे के साथ भी मारपीट की गई।

    सुनीता बाई ने आरोप लगाया कि हमले के दौरान आरोपियों ने उसके दो मंगलसूत्र और नाक की बाली छीन ली। महिला का कहना है कि मारपीट के दौरान उसके कपड़े भी फाड़ दिए गए। उसने आरोप लगाया कि देवर राजू ने उसके ब्लाउज के बटन तोड़ दिए, जिससे उसकी बेइज्जती हुई।

    पीड़िता ने कहा कि जिस देवर को उसने हमेशा बेटे की तरह माना, उसी ने उसके साथ ऐसा व्यवहार किया। घटना के बाद परिवार में तनाव का माहौल बना हुआ है।

    पुलिस ने शिकायत के आधार पर आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 296(बी), 115(2), 351(3) और 3(5) के तहत प्रकरण दर्ज कर लिया है। पुलिस का कहना है कि मामले की विस्तृत जांच की जा रही है और जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

  • ग्लोबल संकेतों के बीच बाजार धड़ाम, निफ्टी 1.5% गिरा और 23,500 के अहम स्तर से नीचे फिसला

    ग्लोबल संकेतों के बीच बाजार धड़ाम, निफ्टी 1.5% गिरा और 23,500 के अहम स्तर से नीचे फिसला

    नई दिल्ली ।  सप्ताह के अंतिम कारोबारी सत्र में भारतीय शेयर बाजार में भारी बिकवाली देखने को मिली, जिससे निवेशकों की संपत्ति को बड़ा नुकसान हुआ। वैश्विक बाजारों से मिले-जुले संकेतों और पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के बीच घरेलू बाजार दबाव में आ गया। कारोबार की शुरुआत भले ही सकारात्मक रही हो, लेकिन दिन के आगे बढ़ने के साथ बाजार में कमजोरी बढ़ती गई और अंतिम घंटे में तेज बिकवाली ने स्थिति को और बिगाड़ दिया।

    कारोबार के अंत में 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 1,092.06 अंक यानी 1.44 प्रतिशत की गिरावट के साथ 74,775.74 पर बंद हुआ। वहीं एनएसई का निफ्टी 50 भी 359.40 अंक यानी 1.50 प्रतिशत टूटकर 23,547.75 के स्तर पर बंद हुआ। दिनभर के कारोबार में सेंसेक्स ने 76,220.02 का ऊपरी स्तर और 74,589.11 का निचला स्तर छुआ, जबकि निफ्टी 24,002.80 के हाई से फिसलकर 23,484.75 के निचले स्तर तक पहुंच गया।

    बाजार में यह गिरावट व्यापक स्तर पर देखने को मिली, जहां मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स भी दबाव में रहे। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में 1.33 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स में 0.85 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। सेक्टरवार देखें तो तेल एवं गैस, मेटल और फाइनेंशियल सर्विसेज जैसे प्रमुख सेक्टरों में दो प्रतिशत से अधिक की गिरावट ने बाजार पर अतिरिक्त दबाव बनाया। वहीं ऑटो, फार्मा, हेल्थकेयर और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर भी कमजोर रहे, जबकि आईटी सेक्टर में हल्की बढ़त देखने को मिली।

    निफ्टी 50 के प्रमुख शेयरों में टेक महिंद्रा, एचसीएल टेक, विप्रो, नेस्ले इंडिया और एलएंडटी जैसे स्टॉक्स में मामूली तेजी रही, लेकिन दूसरी ओर पावरग्रिड, इंडिगो, ओएनजीसी, मैक्स हेल्थ, आयशर मोटर्स और टाटा कंज्यूमर जैसे शेयरों में भारी गिरावट दर्ज की गई। कुल मिलाकर बाजार में बिकवाली का दबाव इतना अधिक रहा कि एक ही सत्र में निवेशकों को लगभग 6 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति का नुकसान झेलना पड़ा।

    विशेषज्ञों के अनुसार बाजार में यह गिरावट मुख्य रूप से वैश्विक अनिश्चितताओं और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के कारण देखने को मिली। हालांकि कच्चे तेल की कीमतों में हालिया नरमी से कुछ राहत के संकेत मिले हैं, लेकिन मध्य पूर्व में तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े घटनाक्रम अभी भी बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। ब्रेंट क्रूड की कीमतों में गिरावट से आयात बिल और महंगाई पर कुछ सकारात्मक असर की उम्मीद जरूर जताई जा रही है, लेकिन निवेशकों का भरोसा अभी पूरी तरह स्थिर नहीं हुआ है।

    मुद्रा बाजार में रुपये ने डॉलर के मुकाबले हल्की मजबूती दिखाई है, जिससे कुछ हद तक घरेलू बाजार को सहारा मिला है। लेकिन तकनीकी विश्लेषकों का मानना है कि निफ्टी के 23,500 के नीचे फिसलने से निकट भविष्य में बाजार पर दबाव बना रह सकता है और इसमें आगे और गिरावट की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

    कुल मिलाकर, सप्ताह का अंत भारतीय शेयर बाजार के लिए कमजोर रहा और आने वाले सत्रों में वैश्विक संकेत, कच्चे तेल की चाल और भू-राजनीतिक घटनाक्रम बाजार की दिशा तय करेंगे।

  • भारतीय जिम कल्चर ने यूक्रेनी इंफ्लूएंसर को किया हैरान, बोलीं- यहां लोग सच में मदद करना चाहते हैं

    भारतीय जिम कल्चर ने यूक्रेनी इंफ्लूएंसर को किया हैरान, बोलीं- यहां लोग सच में मदद करना चाहते हैं


    नई दिल्ली । भारत की सामाजिक संस्कृति और यहां के लोगों के व्यवहार को लेकर विदेशी नागरिकों के अनुभव अक्सर चर्चा का विषय बनते रहते हैं। इसी क्रम में अब एक यूक्रेनी कंटेंट क्रिएटर का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें उन्होंने भारतीय और यूरोपीय जिम संस्कृति के बीच अंतर को लेकर अपने अनुभव साझा किए हैं। भारत में रह रही सैंड्रा नाम की इस कंटेंट क्रिएटर ने भारतीय जिम के माहौल को यूरोप की तुलना में अधिक दोस्ताना, सहयोगी और जीवंत बताया है।

    वीडियो में सैंड्रा ने कहा कि भारत के जिम में प्रवेश करते ही उन्हें ऐसा महसूस हुआ जैसे लोग वास्तव में नए सदस्यों का स्वागत करने के लिए उत्साहित रहते हैं। उनके अनुसार भारतीय जिम में लोगों का व्यवहार काफी खुला और मददगार होता है, जबकि यूरोप में अधिकांश लोग अपने वर्कआउट तक सीमित रहते हैं और दूसरों से बहुत कम संवाद करते हैं। उन्होंने कहा कि भारत में जिम केवल फिटनेस सेंटर नहीं बल्कि सामाजिक संपर्क और सकारात्मक ऊर्जा का स्थान भी प्रतीत होता है।

    सैंड्रा सबसे अधिक भारतीय जिम में मौजूद स्टाफ व्यवस्था को देखकर प्रभावित हुईं। उन्होंने बताया कि यहां सफाई, मेंटेनेंस और सहायता के लिए अलग-अलग लोग मौजूद रहते हैं, जो लगातार इस बात का ध्यान रखते हैं कि जिम में आने वाले लोगों को किसी प्रकार की परेशानी न हो। उनके अनुसार यूरोप में इस तरह की सक्रिय सहायता व्यवस्था कम देखने को मिलती है।

    उन्होंने भारतीय ट्रेनर्स के व्यवहार को भी काफी अलग और बेहतर अनुभव बताया। सैंड्रा के मुताबिक भारत में ट्रेनर खुद आगे बढ़कर एक्सरसाइज की तकनीक सुधारने और सही तरीके समझाने की कोशिश करते हैं। अगर कोई सदस्य किसी मशीन या एक्सरसाइज को गलत तरीके से कर रहा हो तो ट्रेनर तुरंत मदद के लिए पहुंच जाते हैं। उन्होंने कहा कि यूरोप में इस तरह की व्यक्तिगत सहायता अक्सर अतिरिक्त शुल्क या पर्सनल ट्रेनिंग पैकेज के तहत मिलती है, जबकि भारत में कई जगह यह सामान्य व्यवहार का हिस्सा दिखाई देता है।

    हालांकि उन्होंने यह भी माना कि यूरोपीय जिम कुछ मामलों में अधिक संतुलित नजर आते हैं। विशेष रूप से महिलाओं और पुरुषों की भागीदारी को लेकर उन्होंने कहा कि यूरोप में दोनों की संख्या लगभग बराबर होती है, जबकि भारत के कई जिम में पुरुषों की संख्या अधिक दिखाई देती है। उन्होंने स्वीकार किया कि शुरुआत में एक विदेशी महिला होने के कारण उन्हें थोड़ा असहज महसूस हुआ, लेकिन समय के साथ उन्होंने भारतीय माहौल को सहज और सकारात्मक पाया।

    सैंड्रा का यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से लोकप्रिय हो रहा है और बड़ी संख्या में लोग इस पर अपनी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। कई भारतीय यूजर्स ने उनके अनुभव से सहमति जताते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति में लोगों की मदद करना और मिलनसार व्यवहार करना सामान्य बात है। वहीं कुछ लोगों ने यह भी कहा कि हर देश और हर जिम का अनुभव अलग हो सकता है।

    फिटनेस संस्कृति के तेजी से विस्तार के बीच यह वीडियो इस बात को भी उजागर करता है कि भारतीय जिम अब केवल शारीरिक फिटनेस तक सीमित नहीं रहे, बल्कि सामाजिक जुड़ाव और सामूहिक ऊर्जा का भी हिस्सा बनते जा रहे हैं।

  • नई रेलवे लाइन पर ड्यूटी के दौरान ट्रक की टक्कर से मचा हड़कंप

    नई रेलवे लाइन पर ड्यूटी के दौरान ट्रक की टक्कर से मचा हड़कंप


    राजगढ़ । राजगढ़ में नई रेलवे लाइन पर गश्त कर रहे रेलवे सुरक्षा बल (RPF) के दो जवान गुरुवार देर रात सड़क हादसे का शिकार हो गए। जालपा माता मंदिर की पहाड़ी के पास एक तेज रफ्तार अज्ञात ट्रक ने उनकी बाइक को पीछे से जोरदार टक्कर मार दी। हादसे में दोनों जवान गंभीर रूप से घायल हो गए, जिन्हें प्राथमिक उपचार के बाद राजस्थान के झालावाड़ रेफर किया गया है। वहां उनका इलाज जारी है।

    घायल जवानों की पहचान पवन उपाध्याय और ओमवीर सिंह जाट के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि पवन उपाध्याय झालावाड़ रेलवे स्टेशन पर जबकि ओमवीर सिंह जाट रामगंजमंडी रेलवे स्टेशन पर पदस्थ हैं। राजगढ़ क्षेत्र में नई रेलवे लाइन शुरू होने के बाद दोनों जवानों की ड्यूटी रेलवे ट्रैक की पेट्रोलिंग और सुरक्षा निगरानी के लिए लगाई गई थी।

    जानकारी के अनुसार दोनों जवान बाइक से रेलवे ट्रैक क्षेत्र की निगरानी करते हुए जालपा माता मंदिर मार्ग से गुजर रहे थे। इसी दौरान पीछे से आए तेज रफ्तार अज्ञात ट्रक ने उनकी बाइक को टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जोरदार थी कि दोनों जवान सड़क पर दूर जा गिरे और गंभीर रूप से घायल हो गए।

    हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोगों ने तुरंत घायलों को संभाला और उन्हें राजगढ़ जिला अस्पताल पहुंचाया। डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार के बाद दोनों की गंभीर हालत को देखते हुए उन्हें बेहतर इलाज के लिए झालावाड़ रेफर कर दिया।

    घटना की सूचना मिलते ही रेलवे सुरक्षा बल के अधिकारी अस्पताल पहुंचे और घायल जवानों का हालचाल जाना। पुलिस ने अज्ञात ट्रक चालक के खिलाफ मामला दर्ज कर उसकी तलाश शुरू कर दी है। आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है, ताकि आरोपी वाहन और चालक की पहचान की जा सके।

    इस हादसे के बाद नई रेलवे लाइन क्षेत्र में सुरक्षा ड्यूटी के दौरान जवानों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों ने तेज रफ्तार वाहनों पर कार्रवाई और मार्ग पर सुरक्षा इंतजाम बढ़ाने की मांग की है।

  • वेतन न मिलने से भड़के स्वास्थ्य कर्मचारी, कलेक्ट्रेट पर किया प्रदर्शन

    वेतन न मिलने से भड़के स्वास्थ्य कर्मचारी, कलेक्ट्रेट पर किया प्रदर्शन


    राजगढ़ । राजगढ़ में तीन महीने से वेतन नहीं मिलने से नाराज स्वास्थ्य कर्मचारियों का गुस्सा शुक्रवार को सड़कों पर दिखाई दिया। जिलेभर के स्वास्थ्य कर्मियों ने कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर प्रशासन के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया और नारेबाजी करते हुए जल्द भुगतान की मांग उठाई। कर्मचारियों ने साफ चेतावनी दी कि यदि सोमवार तक लंबित वेतन जारी नहीं किया गया तो मंगलवार से जिलेभर में अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी जाएगी, जिससे स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं।

    सुबह 10 बजे से ही जिले के अलग-अलग स्वास्थ्य संस्थानों से कर्मचारी कलेक्ट्रेट पहुंचने लगे थे। प्रदर्शन में नियमित, संविदा और आउटसोर्स कर्मचारियों के साथ आशा कार्यकर्ता, आशा सुपरवाइजर और उषा कार्यकर्ताओं ने भी बड़ी संख्या में हिस्सा लिया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि वे लगातार अस्पतालों और गांवों में स्वास्थ्य सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें समय पर वेतन नहीं मिल रहा, जिससे परिवारों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।

    कर्मचारियों ने बताया कि तीन महीने से वेतन नहीं मिलने के कारण बच्चों की स्कूल फीस जमा नहीं हो पा रही है। बैंक की किस्तें रुक गई हैं और घर का खर्च चलाने के लिए उधार लेना पड़ रहा है। प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों का आरोप था कि विभागीय प्रक्रियाओं और फाइलों में उलझे भुगतान का खामियाजा उन्हें और उनके परिवारों को भुगतना पड़ रहा है।

    सुरेश पटेल ने कहा कि स्वास्थ्य कर्मचारी हर परिस्थिति में अपनी जिम्मेदारियां निभा रहे हैं, लेकिन प्रशासन उनकी समस्याओं को गंभीरता से नहीं ले रहा। उन्होंने कहा कि यदि जल्द समाधान नहीं निकाला गया तो जिलेभर की स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित होंगी, जिसकी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।

    प्रदर्शन के बाद कर्मचारियों ने डॉ. गिरीश कुमार मिश्रा को ज्ञापन सौंपा। कलेक्टर ने कर्मचारियों की समस्याओं को गंभीरता से सुनते हुए सोमवार तक समाधान निकालने का आश्वासन दिया है।

    प्रदर्शन में भारतीय मजदूर संघ के पदाधिकारी, स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के कार्यकारी अध्यक्ष चेतन साहू, सीएमएचओ कार्यालय के अधिकारी-कर्मचारी, आरबीएसके डॉक्टर, सीएचओ, बीसीएम, बीपीएम, आउटसोर्स कर्मचारी, आशा और उषा कार्यकर्ता बड़ी संख्या में मौजूद रहे।

    स्वास्थ्य कर्मचारियों की चेतावनी के बाद अब जिले में स्वास्थ्य सेवाओं पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है। यदि समय पर वेतन भुगतान नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में अस्पतालों और ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं पर बड़ा संकट खड़ा हो सकता है।

  • राजगढ़ में खरीदी केंद्रों पर बढ़ेगी निगरानी, ई-केवाईसी में तेजी लाने के आदेश

    राजगढ़ में खरीदी केंद्रों पर बढ़ेगी निगरानी, ई-केवाईसी में तेजी लाने के आदेश


    विदिशा। राजगढ़ जिले में गेहूं उपार्जन के दौरान किसानों को भुगतान में हो रही देरी और तकनीकी समस्याओं को लेकर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। शुक्रवार को आयोजित जिला उपार्जन समिति की बैठक में कलेक्टर डॉ. गिरीश कुमार मिश्रा ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि किसानों के भुगतान में किसी भी तरह की लापरवाही या अनावश्यक देरी स्वीकार नहीं की जाएगी।

    बैठक के दौरान कलेक्टर ने उन मामलों की समीक्षा की, जिनमें तकनीकी कारणों से भुगतान अटक गया है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि ऐसे किसानों की तुरंत ई-केवाईसी कराई जाए और आवश्यकता पड़ने पर बैंक खाते में सुधार या खाता परिवर्तन की प्रक्रिया भी प्राथमिकता के आधार पर पूरी की जाए, ताकि किसानों को जल्द से जल्द भुगतान मिल सके।

    कलेक्टर मिश्रा ने कहा कि गेहूं उपार्जन केवल सरकारी प्रक्रिया नहीं, बल्कि किसानों की मेहनत और आजीविका से जुड़ा संवेदनशील विषय है। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि किसानों को परेशान करने वाली किसी भी लापरवाही को गंभीरता से लिया जाएगा। साथ ही सभी खरीदी केंद्रों की लगातार निगरानी करने और लंबित मामलों का तत्काल निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

    बैठक में खरीदी केंद्रों पर रखे गेहूं के परिवहन और भंडारण व्यवस्था की भी विस्तृत समीक्षा की गई। कई केंद्रों पर अब तक गेहूं का उठाव पूरा नहीं होने पर कलेक्टर ने नाराजगी जताई। उन्होंने परिवहन एजेंसियों और संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय बनाकर परिवहन कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए, ताकि खरीदी केंद्रों पर भंडारण का दबाव कम हो सके और व्यवस्था सुचारु बनी रहे।

    बैठक के दौरान जिला उपार्जन समिति के सदस्यों और विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने उपार्जन कार्यों की प्रगति, किसानों को किए गए भुगतान और परिवहन व्यवस्था की वर्तमान स्थिति पर चर्चा की। प्रशासन का कहना है कि किसानों की समस्याओं का जल्द समाधान कर उपार्जन प्रक्रिया को पारदर्शी और व्यवस्थित बनाया जाएगा।

  • भाजपा कार्यकर्ताओं को कांग्रेस की शरण में जाने को मजबूर किया जा रहा : पाले राम का पीएम मोदी को पत्र

    भाजपा कार्यकर्ताओं को कांग्रेस की शरण में जाने को मजबूर किया जा रहा : पाले राम का पीएम मोदी को पत्र

    नई दिल्ली । हरियाणा की राजनीतिक सरगर्मियों के बीच भारतीय जनता पार्टी के भीतर झज्जर जिले से जुड़े विवाद ने नया मोड़ ले लिया है। भाजपा नेता पाले राम ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर संगठन के भीतर गंभीर असंतोष और गुटबाजी के आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया है कि जिले में पार्टी कार्यकर्ताओं और स्थानीय नेताओं को ऐसी परिस्थितियों में धकेला जा रहा है, जहां उन्हें मजबूरी में अन्य राजनीतिक दलों के नेताओं के संपर्क में जाना पड़ रहा है। इस बयान के बाद स्थानीय राजनीति में हलचल और तेज हो गई है।

    पाले राम ने अपने पत्र में आरोप लगाया है कि झज्जर जिले में कुछ स्थानीय नेताओं और प्रशासनिक स्तर पर मौजूद प्रभावशाली तत्वों की वजह से भाजपा संगठन कमजोर हुआ है। उनका कहना है कि वर्षों से पार्टी के लिए काम करने वाले कई कार्यकर्ताओं को किनारे कर दिया गया, जिससे संगठन की जमीनी पकड़ प्रभावित हुई है। उन्होंने यह भी दावा किया कि इस स्थिति के कारण कई कार्यकर्ता राजनीतिक रूप से असहज होकर अन्य राजनीतिक विकल्पों की ओर देखने लगे हैं।

    पत्र में बहादुरगढ़ नगर परिषद से जुड़े मामलों का भी उल्लेख किया गया है। आरोप लगाया गया है कि नगर परिषद की चेयरपर्सन सरोज राठी को पद से हटाने के लिए एक सुनियोजित प्रयास किया जा रहा है, जिसमें कुछ स्थानीय नेता और प्रशासनिक तंत्र की भूमिका बताई गई है। पाले राम के अनुसार, यदि ऐसा होता है तो नगर परिषद के कामकाज पर सीधे तौर पर अफसरशाही का नियंत्रण बढ़ सकता है, जिससे विकास कार्यों और टेंडर प्रक्रिया पर असर पड़ने की आशंका है।

    उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि शहर में चल रहे कई विकास कार्यों से जुड़े टेंडरों को बिना स्पष्ट कारण के रोका गया है, जिससे परियोजनाओं की प्रगति बाधित हो रही है। उनके अनुसार, इस पूरे मामले के पीछे राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर एक तरह की खींचतान चल रही है, जिसका सीधा असर आम जनता से जुड़े कामों पर पड़ सकता है।

    पाले राम ने पत्र में यह भी कहा कि कुछ मामलों में पार्टी के भीतर समर्थन की कमी के कारण स्थिति ऐसी बन गई कि संबंधित चेयरपर्सन और उनके परिवार को राजनीतिक संरक्षण के लिए अन्य दलों के नेताओं के संपर्क में जाना पड़ा। उन्होंने इसे पार्टी संगठन के लिए चिंता का विषय बताया और सवाल उठाया कि ऐसे हालात बनने के बावजूद संगठन की निगरानी व्यवस्था सक्रिय क्यों नहीं है।

    उन्होंने संगठन की आंतरिक खुफिया और निगरानी इकाइयों की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि इस पूरे घटनाक्रम पर समय रहते ध्यान नहीं दिया गया, जिससे स्थिति और अधिक जटिल हो गई है।

    इस पूरे घटनाक्रम ने झज्जर जिले की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। स्थानीय स्तर पर इसे पार्टी के भीतर नेतृत्व और संगठनात्मक नियंत्रण की चुनौती के रूप में देखा जा रहा है। वहीं, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ऐसे आरोप किसी भी संगठन के लिए आंतरिक सुधार और पुनर्गठन की आवश्यकता को दर्शाते हैं।

  • विदिशा में हादसे से मातम, परिजनों की आंखों के सामने बुझ गई जिंदगी

    विदिशा में हादसे से मातम, परिजनों की आंखों के सामने बुझ गई जिंदगी


    विदिशा। विदिशा जिले के नटेरन थाना क्षेत्र में एक दर्दनाक हादसे में 13 वर्षीय किशोर की पानी की टंकी में डूबने से मौत हो गई। घटना के बाद परिवार में मातम छा गया। बताया जा रहा है कि किशोर घर के बाथरूम में नहाने गया था, लेकिन काफी देर तक बाहर नहीं आने पर परिजनों ने तलाश शुरू की, जहां वह पानी की टंकी में डूबा मिला।

    जानकारी के अनुसार मृतक की पहचान महेंद्र रघुवंशी के रूप में हुई है। गुरुवार दोपहर महेंद्र घर के बाथरूम में नहाने के लिए गया था। उस समय परिवार के अन्य सदस्य भी घर में मौजूद थे। काफी देर बीत जाने के बाद जब वह बाहर नहीं आया, तो परिजनों को चिंता हुई।

    परिवार के सदस्य और उसकी बहन उसे देखने के लिए बाथरूम पहुंचे। वहां उन्होंने देखा कि महेंद्र पानी की बड़ी टंकी में डूबा हुआ है। यह दृश्य देखकर घर में चीख-पुकार मच गई। परिजनों ने तुरंत उसे बाहर निकाला और इलाज के लिए नटेरन अस्पताल पहुंचाया। वहां से प्राथमिक उपचार के बाद उसे गंभीर हालत में विदिशा मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया, लेकिन डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया।

    मृतक के परिजन मुकुट रघुवंशी ने बताया कि दोपहर के समय घर के सभी सदस्य मौजूद थे और किसी को अंदाजा नहीं था कि इतना बड़ा हादसा हो जाएगा। उन्होंने बताया कि महेंद्र किसी तरह पानी की टंकी में फंस गया और बाहर नहीं निकल सका।

    घटना के बाद पूरे इलाके में शोक का माहौल है। शुक्रवार को पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराकर परिजनों को सौंप दिया। पुलिस ने इस मामले में मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि हादसे के कारणों की जांच की जा रही है।

    इस दुखद घटना ने एक बार फिर घरों में बने खुले पानी के टैंक और सुरक्षा व्यवस्थाओं को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसे हादसों से बचने के लिए पानी की टंकियों को सुरक्षित ढंग से ढंककर रखना बेहद जरूरी है।

  • पुलिस बल में बढ़ोतरी की तैयारी, नए प्रधान आरक्षकों को मिली अहम भूमिका

    पुलिस बल में बढ़ोतरी की तैयारी, नए प्रधान आरक्षकों को मिली अहम भूमिका


    विदिशा । विदिशा जिले में पुलिस बल को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। शनिवार को जिले के विभिन्न थानों और इकाइयों में पदस्थ 15 आरक्षकों को पदोन्नत कर प्रधान आरक्षक बनाया गया। अधिकारियों ने सभी पदोन्नत कर्मचारियों को नई जिम्मेदारियां सौंपते हुए बेहतर पुलिसिंग और कानून व्यवस्था बनाए रखने की अपेक्षा जताई।

    पुलिस विभाग के अधिकारियों के अनुसार शासन की नई व्यवस्था के तहत प्रधान आरक्षकों की संख्या बढ़ाई जा रही है, ताकि थानों में विवेचना कार्य और प्रशासनिक जिम्मेदारियों को अधिक प्रभावी बनाया जा सके। विभाग का मानना है कि अनुभवी पुलिसकर्मियों को पदोन्नति मिलने से कामकाज की गुणवत्ता में सुधार आएगा और थानों की कार्यक्षमता बढ़ेगी।

    प्रशांत चौबे ने जानकारी देते हुए बताया कि पिछले वर्ष प्रशिक्षण के लिए भेजे गए 89 आरक्षकों का प्रशिक्षण पूरा हो चुका है। ये सभी जवान जल्द ही जिले में अपनी सेवाएं देना शुरू करेंगे। अधिकारियों के मुताबिक इन प्रशिक्षित जवानों की तैनाती से पुलिस बल की कमी काफी हद तक दूर हो सकेगी।

    इसके अलावा पुलिस भर्ती 2025 के तहत चयनित 293 नए आरक्षकों को भी जल्द प्रशिक्षण के लिए भेजा जाएगा। वर्तमान में उनके दस्तावेज सत्यापन और मेडिकल परीक्षण की प्रक्रिया अंतिम चरण में चल रही है। प्रक्रिया पूरी होते ही उन्हें प्रशिक्षण केंद्रों के लिए रवाना किया जाएगा। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद इन नवआरक्षकों को जिले के विभिन्न थानों और इकाइयों में फील्ड पोस्टिंग दी जाएगी।

    पुलिस विभाग के अनुसार जिले में अभी भी पुलिसकर्मियों की भारी कमी बनी हुई है। जिले के 25 थानों और अन्य इकाइयों में फिलहाल करीब 1000 पुलिसकर्मी कार्यरत हैं, जबकि लगभग 500 पद अब भी खाली हैं। इसका असर कई थानों की कार्यप्रणाली पर भी दिखाई दे रहा है।

    अधिकारियों ने बताया कि शहर के सबसे बड़े कोतवाली थाना में पहले 115 जवान तैनात थे, लेकिन वर्तमान में यह संख्या घटकर केवल 62 रह गई है। वहीं सिविल लाइन थाना क्षेत्र का दायरा लगातार बढ़ रहा है, लेकिन उसके अनुरूप पुलिस बल में वृद्धि नहीं हो पाई है। ऐसे में नई भर्ती और प्रशिक्षित जवानों की तैनाती से पुलिस व्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

    पुलिस विभाग का मानना है कि 15 नए प्रधान आरक्षकों की पदोन्नति, 89 प्रशिक्षित जवानों की वापसी और 293 नए आरक्षकों की भर्ती से जिले की कानून व्यवस्था को बड़ा सहारा मिलेगा। आने वाले समय में इससे अपराध नियंत्रण और आम जनता को बेहतर पुलिस सेवाएं उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।

  • जमीन कब्जे से परेशान किसान ने खाया जहर, सुसाइड नोट में पांच लोगों पर लगाए आरोप

    जमीन कब्जे से परेशान किसान ने खाया जहर, सुसाइड नोट में पांच लोगों पर लगाए आरोप


    कटनी। कटनी जिले के बड़वारा क्षेत्र में जमीन विवाद और कथित दबंगों की प्रताड़ना से परेशान एक किसान द्वारा जहर खाकर आत्महत्या का प्रयास किए जाने का मामला सामने आया है। घटना के बाद इलाके में हड़कंप मच गया। गंभीर हालत में किसान को जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें एक निजी अस्पताल रेफर किया गया है। फिलहाल उनकी स्थिति नाजुक बताई जा रही है।

    पीड़ित किसान की पहचान चंद्रभान महोबिया के रूप में हुई है। उन्होंने आत्मघाती कदम उठाने से पहले एक सुसाइड नोट भी छोड़ा, जिसमें पांच लोगों को अपनी हालत के लिए जिम्मेदार ठहराया है। पुलिस ने सुसाइड नोट जब्त कर मामले की जांच शुरू कर दी है।

    सुसाइड नोट में किसान ने भानपुरा निवासी भूरा, जगमोहन, कल्लू, जग्गू और अर्जुन के नाम लिखते हुए आरोप लगाया कि ये लोग लंबे समय से उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहे थे। नोट में उन्होंने लिखा कि वह अपनी इच्छा से आत्महत्या कर रहे हैं और उनके परिवार को किसी प्रकार से परेशान न किया जाए।

    किसान के बेटे चंद्रकांत महोबिया ने आरोप लगाया कि जिन लोगों के नाम सुसाइड नोट में लिखे गए हैं, वे दबंग प्रवृत्ति के हैं और उनकी पैतृक जमीन पर जबरन कब्जा करने का प्रयास कर रहे थे। परिवार का कहना है कि इस मामले को लेकर पिछले छह महीनों से लगातार प्रशासन और पुलिस के चक्कर लगाए जा रहे थे, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

    परिजनों के मुताबिक बड़वारा तहसील, थाना और एसपी कार्यालय में कई बार लिखित शिकायतें दी गई थीं, लेकिन हर बार केवल आश्वासन मिला। आरोप है कि पुलिस और राजस्व विभाग की टालमटोल नीति के कारण आरोपी बेखौफ बने रहे और किसान पर लगातार दबाव बनाते रहे। इसी मानसिक तनाव और प्रशासनिक उदासीनता से परेशान होकर किसान ने यह कदम उठाया।

    घटना के बाद इलाके में लोगों में आक्रोश है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि समय रहते शिकायतों पर कार्रवाई की जाती तो शायद किसान को इतना बड़ा कदम उठाने के लिए मजबूर नहीं होना पड़ता।

    मामले को लेकर संतोष कुमार डेहरिया ने बताया कि शिकायत मिलने पर संबंधित थाने को पहले ही जांच के निर्देश दिए जा चुके थे। उन्होंने कहा कि सुसाइड नोट में लगाए गए आरोपों की गंभीरता से जांच की जा रही है और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

    फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है और किसान का इलाज जारी है। वहीं इस घटना ने एक बार फिर जमीन विवादों और प्रशासनिक कार्रवाई में देरी को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।