Author: bharati

  • पुलिस बल में बढ़ोतरी की तैयारी, नए प्रधान आरक्षकों को मिली अहम भूमिका

    पुलिस बल में बढ़ोतरी की तैयारी, नए प्रधान आरक्षकों को मिली अहम भूमिका


    विदिशा । विदिशा जिले में पुलिस बल को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। शनिवार को जिले के विभिन्न थानों और इकाइयों में पदस्थ 15 आरक्षकों को पदोन्नत कर प्रधान आरक्षक बनाया गया। अधिकारियों ने सभी पदोन्नत कर्मचारियों को नई जिम्मेदारियां सौंपते हुए बेहतर पुलिसिंग और कानून व्यवस्था बनाए रखने की अपेक्षा जताई।

    पुलिस विभाग के अधिकारियों के अनुसार शासन की नई व्यवस्था के तहत प्रधान आरक्षकों की संख्या बढ़ाई जा रही है, ताकि थानों में विवेचना कार्य और प्रशासनिक जिम्मेदारियों को अधिक प्रभावी बनाया जा सके। विभाग का मानना है कि अनुभवी पुलिसकर्मियों को पदोन्नति मिलने से कामकाज की गुणवत्ता में सुधार आएगा और थानों की कार्यक्षमता बढ़ेगी।

    प्रशांत चौबे ने जानकारी देते हुए बताया कि पिछले वर्ष प्रशिक्षण के लिए भेजे गए 89 आरक्षकों का प्रशिक्षण पूरा हो चुका है। ये सभी जवान जल्द ही जिले में अपनी सेवाएं देना शुरू करेंगे। अधिकारियों के मुताबिक इन प्रशिक्षित जवानों की तैनाती से पुलिस बल की कमी काफी हद तक दूर हो सकेगी।

    इसके अलावा पुलिस भर्ती 2025 के तहत चयनित 293 नए आरक्षकों को भी जल्द प्रशिक्षण के लिए भेजा जाएगा। वर्तमान में उनके दस्तावेज सत्यापन और मेडिकल परीक्षण की प्रक्रिया अंतिम चरण में चल रही है। प्रक्रिया पूरी होते ही उन्हें प्रशिक्षण केंद्रों के लिए रवाना किया जाएगा। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद इन नवआरक्षकों को जिले के विभिन्न थानों और इकाइयों में फील्ड पोस्टिंग दी जाएगी।

    पुलिस विभाग के अनुसार जिले में अभी भी पुलिसकर्मियों की भारी कमी बनी हुई है। जिले के 25 थानों और अन्य इकाइयों में फिलहाल करीब 1000 पुलिसकर्मी कार्यरत हैं, जबकि लगभग 500 पद अब भी खाली हैं। इसका असर कई थानों की कार्यप्रणाली पर भी दिखाई दे रहा है।

    अधिकारियों ने बताया कि शहर के सबसे बड़े कोतवाली थाना में पहले 115 जवान तैनात थे, लेकिन वर्तमान में यह संख्या घटकर केवल 62 रह गई है। वहीं सिविल लाइन थाना क्षेत्र का दायरा लगातार बढ़ रहा है, लेकिन उसके अनुरूप पुलिस बल में वृद्धि नहीं हो पाई है। ऐसे में नई भर्ती और प्रशिक्षित जवानों की तैनाती से पुलिस व्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

    पुलिस विभाग का मानना है कि 15 नए प्रधान आरक्षकों की पदोन्नति, 89 प्रशिक्षित जवानों की वापसी और 293 नए आरक्षकों की भर्ती से जिले की कानून व्यवस्था को बड़ा सहारा मिलेगा। आने वाले समय में इससे अपराध नियंत्रण और आम जनता को बेहतर पुलिस सेवाएं उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।

  • जमीन कब्जे से परेशान किसान ने खाया जहर, सुसाइड नोट में पांच लोगों पर लगाए आरोप

    जमीन कब्जे से परेशान किसान ने खाया जहर, सुसाइड नोट में पांच लोगों पर लगाए आरोप


    कटनी। कटनी जिले के बड़वारा क्षेत्र में जमीन विवाद और कथित दबंगों की प्रताड़ना से परेशान एक किसान द्वारा जहर खाकर आत्महत्या का प्रयास किए जाने का मामला सामने आया है। घटना के बाद इलाके में हड़कंप मच गया। गंभीर हालत में किसान को जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें एक निजी अस्पताल रेफर किया गया है। फिलहाल उनकी स्थिति नाजुक बताई जा रही है।

    पीड़ित किसान की पहचान चंद्रभान महोबिया के रूप में हुई है। उन्होंने आत्मघाती कदम उठाने से पहले एक सुसाइड नोट भी छोड़ा, जिसमें पांच लोगों को अपनी हालत के लिए जिम्मेदार ठहराया है। पुलिस ने सुसाइड नोट जब्त कर मामले की जांच शुरू कर दी है।

    सुसाइड नोट में किसान ने भानपुरा निवासी भूरा, जगमोहन, कल्लू, जग्गू और अर्जुन के नाम लिखते हुए आरोप लगाया कि ये लोग लंबे समय से उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहे थे। नोट में उन्होंने लिखा कि वह अपनी इच्छा से आत्महत्या कर रहे हैं और उनके परिवार को किसी प्रकार से परेशान न किया जाए।

    किसान के बेटे चंद्रकांत महोबिया ने आरोप लगाया कि जिन लोगों के नाम सुसाइड नोट में लिखे गए हैं, वे दबंग प्रवृत्ति के हैं और उनकी पैतृक जमीन पर जबरन कब्जा करने का प्रयास कर रहे थे। परिवार का कहना है कि इस मामले को लेकर पिछले छह महीनों से लगातार प्रशासन और पुलिस के चक्कर लगाए जा रहे थे, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

    परिजनों के मुताबिक बड़वारा तहसील, थाना और एसपी कार्यालय में कई बार लिखित शिकायतें दी गई थीं, लेकिन हर बार केवल आश्वासन मिला। आरोप है कि पुलिस और राजस्व विभाग की टालमटोल नीति के कारण आरोपी बेखौफ बने रहे और किसान पर लगातार दबाव बनाते रहे। इसी मानसिक तनाव और प्रशासनिक उदासीनता से परेशान होकर किसान ने यह कदम उठाया।

    घटना के बाद इलाके में लोगों में आक्रोश है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि समय रहते शिकायतों पर कार्रवाई की जाती तो शायद किसान को इतना बड़ा कदम उठाने के लिए मजबूर नहीं होना पड़ता।

    मामले को लेकर संतोष कुमार डेहरिया ने बताया कि शिकायत मिलने पर संबंधित थाने को पहले ही जांच के निर्देश दिए जा चुके थे। उन्होंने कहा कि सुसाइड नोट में लगाए गए आरोपों की गंभीरता से जांच की जा रही है और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

    फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है और किसान का इलाज जारी है। वहीं इस घटना ने एक बार फिर जमीन विवादों और प्रशासनिक कार्रवाई में देरी को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

  • स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ सकता है असर, संविदा कर्मचारी हड़ताल पर जाएंगे

    स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ सकता है असर, संविदा कर्मचारी हड़ताल पर जाएंगे


    कटनी  कटनी जिले में संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। शुक्रवार को कर्मचारियों ने कलेक्टर आशीष तिवारी के नाम ज्ञापन सौंपते हुए चेतावनी दी कि यदि जल्द उनकी मांगों का निराकरण नहीं किया गया, तो प्रदेशभर के 32 हजार संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी 2 जून से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे।

    यह ज्ञापन मध्य प्रदेश राज्य कर्मचारी संघ के जिला सचिव हरप्रीत लक्की सिंह के नेतृत्व में अधीक्षक भू-अभिलेख अधिकारी को सौंपा गया। इस दौरान बड़ी संख्या में संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी मौजूद रहे और अपनी मांगों को लेकर नाराजगी जताई।

    कर्मचारियों का कहना है कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन यानी NHM के तहत कार्यरत संविदा कर्मचारी वर्षों से प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। कोरोना काल से लेकर ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं तक उन्होंने लगातार जिम्मेदारी निभाई, जिसके चलते मध्य प्रदेश को कई राष्ट्रीय स्तर के सम्मान भी मिले। बावजूद इसके सरकार लगातार उनकी मांगों की अनदेखी कर रही है।

    संघ पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री की मौजूदगी में पूर्व में उनकी मांगों पर सहमति बनी थी, लेकिन एक वर्ष से ज्यादा समय बीत जाने के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इससे कर्मचारियों में भारी असंतोष है और अब वे आंदोलन के लिए मजबूर हो गए हैं।

    ज्ञापन में कर्मचारियों ने कई प्रमुख मांगें रखी हैं। इनमें सबसे अहम मांग मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुसार सभी संविदा कर्मचारियों का नियमितीकरण है। इसके अलावा सामान्य प्रशासन विभाग की 2023 की नीति के तहत कर्मचारियों को एनपीएस और स्वास्थ्य बीमा का लाभ देने की मांग भी की गई है।

    कर्मचारियों ने अन्य राज्यों की तर्ज पर हर वर्ष 10 प्रतिशत वेतन वृद्धि, नियमित कर्मचारियों के समान महंगाई भत्ता यानी डीए देने, सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों यानी CHO के वेतन में पीबीआई का समायोजन करने और पहले की तरह इंडिकेटर व्यवस्था लागू करने की मांग भी उठाई है।

    संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों ने स्पष्ट कहा कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तो 2 जून से प्रदेशभर में सभी ऑनलाइन और ऑफलाइन कार्यों का बहिष्कार करते हुए अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी जाएगी। कर्मचारियों का कहना है कि वे जनता को परेशान नहीं करना चाहते, लेकिन सरकार के उदासीन रवैये के कारण उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ रहा है।

    कर्मचारियों ने चेतावनी दी कि यदि हड़ताल शुरू होती है तो स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन और सरकार की होगी। फिलहाल ज्ञापन के बाद अब सभी की नजर सरकार और प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है।

  • सतना में खाद बिक्री में गड़बड़ी का आरोप, किसान से ज्यादा वसूले पैसे

    सतना में खाद बिक्री में गड़बड़ी का आरोप, किसान से ज्यादा वसूले पैसे


    सतना । सतना जिले के रामपुर बाघेलान क्षेत्र में यूरिया खाद की कालाबाजारी का मामला सामने आने के बाद हड़कंप मच गया है। रिमार गांव स्थित मां वैष्णों एसोसिएट खाद केंद्र पर किसानों से निर्धारित सरकारी दर से अधिक कीमत वसूलने के आरोप लगे हैं। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद प्रशासनिक हलकों में भी हलचल बढ़ गई है।

    जानकारी के अनुसार किसान शिवाकांत शुक्ला ने खाद वितरण में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए वीडियो साझा किया है। शिवाकांत का कहना है कि उन्होंने अपने नाम से 20 बोरी और सुनीता शुक्ला के नाम से 4 बोरी यूरिया खाद के लिए स्लॉट बुक कराया था। जब वह खाद लेने दुकान पहुंचे तो पहले उनसे ओटीपी लिया गया और बाद में प्रति बोरी 310 रुपए की मांग की गई।

    किसान का आरोप है कि यूरिया खाद की सरकारी निर्धारित कीमत 266 रुपए प्रति बोरी है, लेकिन दुकान संचालक अधिक राशि वसूल रहा था। जब उन्होंने अतिरिक्त पैसे देने से इनकार किया, तो विवाद बढ़ गया। शिवाकांत शुक्ला ने आरोप लगाया कि उन्होंने जब इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो बनाना शुरू किया तो दुकान संचालक नाराज हो गया और कथित तौर पर मारपीट की कोशिश करते हुए दबाव बनाने लगा।

    घटना के बाद किसान ने अनुविभागीय अधिकारी यानी एसडीएम को लिखित शिकायत सौंपकर मामले में कार्रवाई की मांग की है। शिकायत में खाद केंद्र संचालक पर ओवररेटिंग और किसानों को परेशान करने के आरोप लगाए गए हैं।

    इस मामले के सामने आने के बाद क्षेत्र के अन्य किसानों में भी नाराजगी बढ़ गई है। किसानों का कहना है कि खेती के सीजन में खाद की मांग बढ़ने के साथ ही कई दुकानों पर ओवररेटिंग और कालाबाजारी की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। इसके बावजूद जिम्मेदार विभागीय अधिकारी प्रभावी कार्रवाई नहीं कर रहे, जिससे किसानों को मजबूरी में महंगे दामों पर खाद खरीदना पड़ रहा है।

    किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि खाद की बिक्री पर सख्त निगरानी रखी जाए और सरकारी दर से ज्यादा कीमत वसूलने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। वहीं वीडियो वायरल होने के बाद प्रशासनिक अधिकारियों ने मामले की जांच के संकेत दिए हैं।

    फिलहाल पूरे मामले को लेकर क्षेत्र में चर्चा का माहौल बना हुआ है और किसान प्रशासन की कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित खाद केंद्र संचालक पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

  • लाइन में खड़ी महिला एजेंट बनी शिकार, पोस्ट ऑफिस में चोरों ने लगाया लाखों पर हाथ

    लाइन में खड़ी महिला एजेंट बनी शिकार, पोस्ट ऑफिस में चोरों ने लगाया लाखों पर हाथ


    सतना । सतना के मुख्य डाकघर में शुक्रवार दोपहर दिनदहाड़े चोरी की बड़ी वारदात सामने आई। भीड़भाड़ के बीच अज्ञात चोरों ने एक महिला डाक अभिकर्ता के बैग को ब्लेड से काटकर उसमें रखे 77 हजार रुपए पार कर दिए। घटना के बाद डाकघर परिसर में हड़कंप मच गया और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

    पीड़ित महिला कंचन अग्रवाल ने इस संबंध में सिटी कोतवाली पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। कंचन अग्रवाल डालीबाबा पंजाबी मोहल्ला की रहने वाली हैं और डाक अभिकर्ता के रूप में कार्य करती हैं।

    जानकारी के अनुसार शुक्रवार दोपहर करीब 1 बजे कंचन अग्रवाल Bank of India से 86 हजार रुपए निकालकर जयस्तंभ चौक स्थित मुख्य डाकघर पहुंचीं थीं। उनके बैग में पूरी रकम रखी हुई थी। डाकघर में वह 7 हजार रुपए जमा करने के लिए लाइन में खड़ी थीं। इसी दौरान भीड़ का फायदा उठाकर किसी अज्ञात व्यक्ति ने उनके बैग में ब्लेड से चीरा लगा दिया और उसमें से 77 हजार रुपए निकाल लिए।

    कुछ देर बाद जब कंचन अग्रवाल ने अपना बैग देखा तो उसमें रखी नकदी गायब थी। बैग कटा हुआ देखकर उनके होश उड़ गए। घटना की जानकारी मिलते ही डाकघर कर्मचारियों और अधिकारियों में अफरा-तफरी मच गई। तुरंत परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की जांच शुरू की गई।

    प्रारंभिक जांच में दो महिलाओं की गतिविधियां संदिग्ध नजर आई हैं। पुलिस को आशंका है कि चोरी की वारदात में इन महिलाओं का हाथ हो सकता है। हालांकि अब तक उनकी पहचान आधिकारिक रूप से नहीं हो सकी है। पुलिस सीसीटीवी फुटेज के आधार पर संदिग्धों की तलाश में जुटी हुई है।

    स्थानीय लोगों का कहना है कि मुख्य डाकघर परिसर में इस तरह की घटनाएं पहले भी सामने आ चुकी हैं। बावजूद इसके सुरक्षा व्यवस्था मजबूत नहीं की गई। भीड़भाड़ वाले स्थानों पर सक्रिय गिरोह महिलाओं और बुजुर्गों को निशाना बना रहे हैं। घटना के बाद लोगों ने डाकघर परिसर में सुरक्षा बढ़ाने और संदिग्ध गतिविधियों पर निगरानी रखने की मांग की है।

    फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है और सीसीटीवी फुटेज के जरिए आरोपियों तक पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही संदिग्ध महिलाओं की पहचान कर कार्रवाई की जाएगी।

  • डीजल में आइसोब्यूटेनॉल मिश्रण जल्द हो सकता है अनिवार्य, ऊर्जा सुरक्षा और हरित ईंधन की दिशा में बड़ा कदम

    डीजल में आइसोब्यूटेनॉल मिश्रण जल्द हो सकता है अनिवार्य, ऊर्जा सुरक्षा और हरित ईंधन की दिशा में बड़ा कदम

    नई दिल्ली । देश की ऊर्जा नीति और परिवहन क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव जल्द देखने को मिल सकता है। सरकार इस साल के भीतर डीजल में आइसोब्यूटेनॉल ब्लेंडिंग यानी मिश्रण को अनिवार्य बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार इस पहल का उद्देश्य ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना और परिवहन क्षेत्र को धीरे-धीरे कार्बन उत्सर्जन से मुक्त करना है।

    एक उद्योग सम्मेलन में बोलते हुए सड़क परिवहन एवं राजमार्ग सचिव वी. उमाशंकर ने संकेत दिया कि डीजल ब्लेंडिंग को लेकर गंभीरता से काम चल रहा है और इसके नतीजे उत्साहजनक पाए गए हैं। उन्होंने बताया कि भारत पेट्रोलियम जैसे संस्थान इस तकनीक पर रणनीतिक शोध कर रहे हैं और शुरुआती परीक्षणों में सकारात्मक परिणाम मिले हैं। संभावना जताई जा रही है कि वर्ष के अंत तक इस नीति को अनिवार्य रूप से लागू किया जा सकता है।

    भारत में डीजल की खपत पेट्रोल की तुलना में लगभग दोगुनी है, ऐसे में इस बदलाव को ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि डीजल में जैव-ईंधन आधारित मिश्रण को बढ़ावा दिया जाता है तो इससे न केवल आयात पर निर्भरता कम होगी बल्कि पर्यावरणीय प्रदूषण में भी कमी आएगी।

    सरकार केवल ईंधन मिश्रण तक सीमित नहीं है, बल्कि परिवहन व्यवस्था को पूरी तरह आधुनिक और कम उत्सर्जन वाली बनाने की दिशा में भी काम कर रही है। इसी क्रम में इलेक्ट्रिक भारी वाहनों के लिए बैटरी स्वैपिंग और चार्जिंग नेटवर्क विकसित करने की योजना पर तेजी से काम चल रहा है। मंत्रालय जल्द ही ट्रक-ट्रेलर से जुड़ा एक नया ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी कर सकता है, जिससे लॉजिस्टिक्स सेक्टर को अधिक कुशल बनाया जा सकेगा।

    अधिकारियों के अनुसार लंबे समय तक ट्रकों को चार्जिंग के लिए रोकना व्यावहारिक नहीं है, इसलिए बैटरी स्वैपिंग और वैकल्पिक मॉडल पर जोर दिया जा रहा है। इसके साथ ही ट्रैक्टर-ट्रेलर इंटरचेंज मॉडल पर भी विचार किया जा रहा है, जिसमें ट्रक का अगला हिस्सा बदला जा सकेगा जबकि कंटेनर और ट्रेलर अलग रहेंगे।

    हाइड्रोजन आधारित परिवहन व्यवस्था पर भी सरकार पायलट प्रोजेक्ट के जरिए प्रयोग कर रही है। दिल्ली में शुरू की गई हाइड्रोजन बसें इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही हैं। इन बसों की क्षमता एक बार ईंधन भरने पर लगभग 450 किलोमीटर तक चलने की बताई गई है। अधिकारियों का कहना है कि भविष्य में प्रमुख राष्ट्रीय कॉरिडोर पर सीमित संख्या में हाइड्रोजन रिफ्यूलिंग स्टेशन स्थापित कर बड़े स्तर पर संचालन संभव हो सकता है।

    इसके अलावा मंत्रालय मल्टी-लेन फ्री फ्लो टोलिंग सिस्टम को भी तेजी से आगे बढ़ा रहा है, जिससे टोल प्लाजा पर रुकने की आवश्यकता समाप्त हो जाएगी। यह प्रणाली अगले वर्ष तक देशभर के बड़े टोल प्लाजा पर लागू किए जाने की योजना में है। साथ ही दिल्ली-एनसीआर के लिए एडवांस ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम को भी मंजूरी मिल चुकी है, जिससे यातायात को अधिक सुचारू और तेज बनाया जा सकेगा।

    इन सभी पहलों से स्पष्ट है कि सरकार परिवहन और ऊर्जा क्षेत्र में एक व्यापक बदलाव की दिशा में आगे बढ़ रही है, जिसका असर आने वाले वर्षों में देश की अर्थव्यवस्था, प्रदूषण नियंत्रण और लॉजिस्टिक्स दक्षता पर दिखाई देगा।

  • चेहरे पर अचानक निकलने वाले पिंपल्स हो सकते हैं हार्मोनल बदलाव का संकेत

    चेहरे पर अचानक निकलने वाले पिंपल्स हो सकते हैं हार्मोनल बदलाव का संकेत


    नई दिल्ली । पीरियड्स शुरू होने से कुछ दिन पहले चेहरे पर अचानक पिंपल्स निकल आना कई महिलाओं के लिए आम समस्या बन चुका है। खासतौर पर ठुड्डी, जॉलाइन और गालों के आसपास दर्द वाले दाने दिखाई देने लगते हैं। अक्सर लोग इसकी वजह गलत खानपान, धूल-मिट्टी या स्किन केयर प्रोडक्ट्स को मानते हैं, लेकिन असल कारण शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलाव होते हैं। एक्सपर्ट्स के मुताबिक यह केवल ब्यूटी प्रॉब्लम नहीं बल्कि शरीर की ओर से मिलने वाला एक अहम संकेत भी हो सकता है।

    जानकारी के अनुसार सामान्य तौर पर महिलाओं का पीरियड साइकिल लगभग 28 दिनों का होता है और इस दौरान शरीर में अलग-अलग हार्मोन्स का स्तर लगातार बदलता रहता है। शुरुआती दिनों में एस्ट्रोजन का स्तर बढ़ता है, जबकि बाद में प्रोजेस्टेरोन अधिक सक्रिय हो जाता है। जैसे-जैसे पीरियड्स नजदीक आते हैं, इन दोनों हार्मोन्स का स्तर कम होने लगता है, लेकिन टेस्टोस्टेरोन अपेक्षाकृत ज्यादा सक्रिय हो जाता है। यही बदलाव त्वचा पर असर डालता है और पिंपल्स की समस्या शुरू हो जाती है।

    विशेषज्ञों के अनुसार पीरियड्स से पहले बढ़ा हुआ प्रोजेस्टेरोन त्वचा की ऑयल ग्लैंड्स को ज्यादा सक्रिय कर देता है। इससे सीबम यानी त्वचा का नेचुरल ऑयल अधिक मात्रा में बनने लगता है। इसके कारण रोमछिद्र बंद होने लगते हैं और त्वचा में सूजन बढ़ जाती है। जब अतिरिक्त तेल धूल, डेड स्किन और बैक्टीरिया के साथ मिल जाता है, तो ब्लैकहेड्स, व्हाइटहेड्स और दर्द वाले पिंपल्स बनने लगते हैं।

    हार्मोनल एक्ने का सबसे ज्यादा असर ठुड्डी और जॉलाइन के हिस्से पर दिखाई देता है। कई बार यह समस्या इतनी बढ़ जाती है कि त्वचा के अंदर गांठ जैसी सूजन और दर्द भरे सिस्ट बनने लगते हैं। ऐसे पिंपल्स सामान्य एक्ने की तुलना में ज्यादा दर्दनाक और लंबे समय तक रहने वाले हो सकते हैं।

    हालांकि कुछ आसान आदतों को अपनाकर इस समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। चेहरे को नियमित रूप से साफ रखना, बार-बार चेहरे को हाथ न लगाना, मोबाइल स्क्रीन की सफाई करना और धूम्रपान से दूरी बनाना फायदेमंद माना जाता है। इसके अलावा संतुलित वजन बनाए रखना भी जरूरी है, क्योंकि मोटापा हार्मोनल असंतुलन को बढ़ा सकता है।

    एक्सपर्ट्स जिंक, ओमेगा-3 फैटी एसिड और विटामिन ए, सी, डी और ई से भरपूर आहार लेने की सलाह देते हैं। पनीर, पालक, नट्स, सीफूड और पौष्टिक भोजन त्वचा को स्वस्थ रखने में मदद कर सकते हैं। हालांकि केवल सप्लीमेंट्स पर निर्भर रहने के बजाय संतुलित डाइट और सही स्किन केयर रूटीन अपनाना ज्यादा जरूरी माना जाता है।

    अगर पिंपल्स हर महीने गंभीर रूप लेने लगें, दर्द बढ़ जाए या बार-बार चेहरे पर सूजन और दाग बनने लगें, तो त्वचा रोग विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है। कुछ मामलों में डॉक्टर हार्मोनल ट्रीटमेंट या दवाओं की सलाह भी दे सकते हैं। इसलिए पीरियड्स से पहले होने वाले पिंपल्स को नजरअंदाज करना सही नहीं माना जाता।

  • हाईवे पर मिली लाश ने बढ़ाई दहशत, हत्या के बाद शव फेंकने की आशंका

    हाईवे पर मिली लाश ने बढ़ाई दहशत, हत्या के बाद शव फेंकने की आशंका


    सागर । सागर जिले के राहतगढ़ थाना क्षेत्र में हाईवे किनारे महिला का शव मिलने से इलाके में सनसनी फैल गई। ग्राम बेरखेड़ी के पास सड़क किनारे पड़ा शव चादर में लिपटा हुआ था। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण कर शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल भेज दिया। प्रारंभिक जांच में मामला हत्या का प्रतीत हो रहा है।

    जानकारी के अनुसार गुरुवार शाम राहगीरों ने हाईवे किनारे संदिग्ध हालत में शव पड़े होने की सूचना पुलिस को दी थी। मौके पर पहुंची पुलिस ने देखा कि महिला का शव चादर में लिपटा हुआ था और उसकी हालत बेहद खराब हो चुकी थी। पुलिस के मुताबिक शव करीब तीन दिन पुराना बताया जा रहा है, जिसके कारण मृतका की पहचान नहीं हो सकी है। महिला की उम्र लगभग 30 से 35 वर्ष के बीच बताई जा रही है।

    पुलिस जांच में सामने आया है कि महिला के हाथ और पैरों में चांदी जैसे आभूषण पहने हुए थे। शव मिलने की स्थिति को देखते हुए आशंका जताई जा रही है कि महिला की हत्या कहीं और की गई और बाद में शव को चादर में लपेटकर हाईवे किनारे फेंक दिया गया। घटना के बाद इलाके में दहशत का माहौल बना हुआ है और लोग तरह-तरह की चर्चाएं कर रहे हैं।

    पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल भेजा, जहां शुक्रवार को डॉक्टरों के पैनल द्वारा पोस्टमार्टम किया गया। अधिकारियों का कहना है कि पीएम रिपोर्ट आने के बाद मौत के कारणों का स्पष्ट खुलासा हो सकेगा। फिलहाल पुलिस हत्या समेत सभी संभावित पहलुओं को ध्यान में रखते हुए जांच कर रही है।

    मुकेश सिंह ने बताया कि मृतका की पहचान के लिए आसपास के थानों से गुमशुदगी की जानकारी जुटाई जा रही है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि महिला कहां की रहने वाली थी और किन परिस्थितियों में उसकी मौत हुई। साथ ही हाईवे और आसपास के इलाकों में लगे सीसीटीवी कैमरों की भी जांच की जा रही है ताकि शव यहां लाने वालों का सुराग मिल सके।

    फिलहाल पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच के बाद ही पूरे मामले का खुलासा हो सकेगा। वहीं हाईवे किनारे महिला का शव मिलने से स्थानीय लोगों में भय और चिंता का माहौल बना हुआ है।

  • सागर में सड़क किनारे मिला युवक का शव, नाक-मुंह से खून बहने पर हत्या की आशंका

    सागर में सड़क किनारे मिला युवक का शव, नाक-मुंह से खून बहने पर हत्या की आशंका


    सागर । सागर जिले के बहेरिया थाना क्षेत्र में शुक्रवार सुबह उस समय सनसनी फैल गई, जब सड़क किनारे झाड़ियों के बीच एक युवक का शव संदिग्ध परिस्थितियों में पड़ा मिला। मृतक की पहचान बरारू गांव निवासी 31 वर्षीय अमित पटेल के रूप में हुई है। युवक के नाक और मुंह से खून बहता देख परिजनों ने हत्या की आशंका जताई है। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।

    जानकारी के अनुसार अमित गुरुवार रात करीब 8 बजे घर से निकला था। परिजनों के मुताबिक उसने यह नहीं बताया था कि वह कहां जा रहा है और किसके साथ है। देर रात तक घर वापस नहीं लौटने पर परिवार के लोग चिंतित हो गए थे। शुक्रवार सुबह अचानक सूचना मिली कि मुनमुन ढाबे के सामने सड़क किनारे झाड़ियों में उसका शव पड़ा हुआ है। खबर मिलते ही परिवार में मातम छा गया और परिजन तुरंत मौके पर पहुंचे।

    घटनास्थल पर पहुंचे परिजनों ने देखा कि अमित के नाक और मुंह से खून बह रहा था। मृतक के चाचा बैजनाथ पटेल ने आशंका जताई कि अमित का किसी से विवाद हुआ होगा और उसके बाद उसकी हत्या कर शव सड़क किनारे फेंक दिया गया। परिजनों का कहना है कि युवक के शरीर पर चोट के निशान और खून बहने की स्थिति सामान्य हादसे जैसी नहीं लग रही। उन्होंने पुलिस से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों को जल्द गिरफ्तार करने की मांग की है।

    घटना के बाद इलाके में लोगों की भीड़ जमा हो गई। सड़क किनारे युवक का शव मिलने से आसपास के क्षेत्र में दहशत और चर्चा का माहौल बना रहा। पुलिस ने मौके का निरीक्षण कर आसपास के लोगों से पूछताछ शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में पुलिस हर पहलू को ध्यान में रखकर मामले की पड़ताल कर रही है।

    पुलिस का कहना है कि मौत की असली वजह पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया है। मामले में आगे की जानकारी लेने के लिए बहेरिया थाने का प्रभार संभाल रहे एसआई विद्यानंद यादव से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।

    फिलहाल पुलिस हादसा, विवाद और हत्या समेत सभी संभावित पहलुओं को ध्यान में रखते हुए जांच कर रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही यह साफ हो सकेगा कि युवक की मौत दुर्घटना से हुई या उसके पीछे कोई आपराधिक साजिश है।

  • 2035 तक 150 अरब डॉलर के सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम का लक्ष्य, भारत ने वैश्विक टेक दौड़ में बढ़ाया बड़ा कदम

    2035 तक 150 अरब डॉलर के सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम का लक्ष्य, भारत ने वैश्विक टेक दौड़ में बढ़ाया बड़ा कदम

    नई दिल्ली । भारत ने वैश्विक तकनीकी प्रतिस्पर्धा में अपनी स्थिति मजबूत करने की दिशा में एक और बड़ा कदम बढ़ाया है। देश को आने वाले वर्षों में वैश्विक सेमीकंडक्टर हब बनाने के उद्देश्य से नीति आयोग के फ्रंटियर टेक हब ने 10 साल का व्यापक रोडमैप जारी किया है। इस रणनीतिक दस्तावेज का लक्ष्य भारत को केवल इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण का बाजार नहीं बल्कि वैश्विक सेमीकंडक्टर वैल्यू चेन का महत्वपूर्ण केंद्र बनाना है।

    “फ्यूचर ऑफ इंडिया’स सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री” नाम से जारी इस रोडमैप में 2035 तक देश में 120 से 150 अरब डॉलर का मजबूत सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। इसमें डिजाइन, एडवांस पैकेजिंग, कंपाउंड सेमीकंडक्टर और अन्य उभरती तकनीकों में भारत की संभावनाओं को विस्तार से रेखांकित किया गया है।

    इस रोडमैप को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव की मौजूदगी में लॉन्च किया गया। नीति आयोग ने इसे भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता और दीर्घकालिक रणनीतिक क्षमता निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया है। आयोग के अनुसार फ्रंटियर टेक्नोलॉजी में वैश्विक नेतृत्व केवल अल्पकालिक निवेश से हासिल नहीं किया जा सकता, बल्कि इसके लिए निरंतर क्षमता निर्माण, दूरदर्शी नीति और समय रहते रणनीतिक निवेश जरूरी होता है।

    नीति आयोग के उपाध्यक्ष अशोक कुमार लाहिड़ी ने कहा कि भारत ने अपेक्षा से अधिक तेजी से सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम विकसित करने की दिशा में प्रगति की है, लेकिन विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए तकनीकी संप्रभुता अत्यंत आवश्यक होगी। उन्होंने चेतावनी दी कि ‘ब्लैक बॉक्स टेक्नोलॉजी’ पर अत्यधिक आयात निर्भरता भविष्य में भारत के लिए रणनीतिक जोखिम बन सकती है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि आज के दौर में सेमीकंडक्टर केवल इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का हिस्सा नहीं बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रक्षा, ऑटोमोबाइल, दूरसंचार, ऊर्जा, डिजिटल सेवाओं और आधुनिक विनिर्माण जैसे क्षेत्रों की बुनियादी जरूरत बन चुके हैं। ऐसे में वैश्विक सप्लाई चेन में मजबूत उपस्थिति किसी भी देश की आर्थिक और रणनीतिक शक्ति को सीधे प्रभावित करती है।

    रोडमैप में यह भी स्वीकार किया गया है कि भारत एक साथ पूरी वैश्विक सेमीकंडक्टर वैल्यू चेन में प्रतिस्पर्धा नहीं कर सकता। इसलिए उन क्षेत्रों पर फोकस करने की रणनीति बनाई गई है जहां भारत तेजी से वैश्विक बढ़त हासिल कर सकता है। डिजाइन, एडवांस पैकेजिंग और कंपाउंड सेमीकंडक्टर को ऐसे ही प्रमुख क्षेत्रों के रूप में चिन्हित किया गया है।

    भारत पहले ही सेमीकंडक्टर मिशन, शुरुआती निवेश और अमेरिका, जापान तथा यूरोपीय देशों के साथ बढ़ती तकनीकी साझेदारी के जरिए मजबूत आधार तैयार कर चुका है। अब आने वाला दशक इस गति को स्थायी औद्योगिक और तकनीकी क्षमता में बदलने के लिए निर्णायक माना जा रहा है।

    विशेषज्ञों के अनुसार यदि यह रोडमैप प्रभावी तरीके से लागू होता है तो भारत न केवल घरेलू जरूरतों को पूरा करने में सक्षम होगा बल्कि वैश्विक सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन में भी बड़ी भूमिका निभा सकेगा। इससे रोजगार, निवेश, तकनीकी अनुसंधान और विनिर्माण क्षेत्र को व्यापक गति मिलने की उम्मीद है।