Author: bharati

  • दबाव के आगे नहीं झुका श्रीलंका अमेरिका को लैंडिंग से इनकार ईरानी जहाज को दी मानवीय मदद

    दबाव के आगे नहीं झुका श्रीलंका अमेरिका को लैंडिंग से इनकार ईरानी जहाज को दी मानवीय मदद

    नई दिल्ली:ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच श्रीलंका ने एक ऐसा फैसला लिया है जिसने हिंद महासागर क्षेत्र की कूटनीति को नया मोड़ दे दिया है। श्रीलंका ने साफ कर दिया है कि वह किसी भी सैन्य टकराव का हिस्सा नहीं बनेगा और अपनी तटस्थ नीति पर कायम रहेगा। इसी नीति के तहत उसने अमेरिका के दो लड़ाकू विमानों को अपने यहां उतरने की अनुमति देने से इनकार कर दिया।

    श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके ने संसद में खुलकर बताया कि अमेरिका ने 4 और 8 मार्च को दो बार अनुरोध किया था कि जिबूती स्थित अपने सैन्य अड्डे से उड़ान भरने वाले फाइटर जेट्स को दक्षिणपूर्व स्थित मट्टाला अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर उतरने दिया जाए। इन विमानों में एंटी शिप मिसाइलें लगी हुई थीं जिससे स्थिति और संवेदनशील हो गई थी। राष्ट्रपति ने कहा कि भारी अंतरराष्ट्रीय दबाव के बावजूद श्रीलंका ने इस मांग को खारिज कर दिया और स्पष्ट किया कि वह किसी भी सैन्य कार्रवाई का मंच नहीं बनेगा।

    यह फैसला ऐसे समय में आया है जब क्षेत्र में हालात बेहद तनावपूर्ण हैं। 4 मार्च को अमेरिका की एक पनडुब्बी ने अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में ईरानी युद्धपोत IRIS Dena पर टॉरपीडो हमला किया था। यह हमला श्रीलंका के दक्षिणी तट से करीब 80 किलोमीटर दूर हुआ जिसमें बड़ी संख्या में ईरानी नौसैनिक मारे गए। इस घटना ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया।

    हमले के तुरंत बाद श्रीलंका ने मानवीय जिम्मेदारी निभाते हुए तेजी से रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। श्रीलंकाई नौसेना और वायुसेना ने मौके पर पहुंचकर शवों को बरामद किया और घायलों को बचाया। उन्हें गाले में इलाज के लिए ले जाया गया। बाद में मृतकों के शव पूरे सम्मान के साथ ईरान भेजे गए।

    इसी बीच एक अन्य ईरानी जहाज IRIS Bushehr ने तकनीकी खराबी का हवाला देते हुए श्रीलंका से मदद मांगी। श्रीलंका ने इसे भी पूरी तरह मानवीय आधार पर सहायता दी लेकिन सुरक्षा कारणों से उसे सीधे कोलंबो में प्रवेश नहीं दिया गया। पहले उसे समुद्र में रोका गया और बाद में त्रिंकोमाली की ओर निर्देशित किया गया। इस दौरान कई ईरानी नौसैनिकों को अस्थायी रूप से श्रीलंका में शरण भी दी गई।

    राष्ट्रपति दिसानायके ने संसद में दो टूक कहा कि मध्य पूर्व में चल रहा युद्ध पूरी दुनिया के लिए चुनौती है लेकिन श्रीलंका किसी पक्ष में खड़ा होकर अपने हितों को खतरे में नहीं डालेगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनका देश स्वतंत्र विदेश नीति पर चलता रहेगा और किसी भी दबाव के आगे नहीं झुकेगा।

    यह घटनाक्रम हिंद महासागर क्षेत्र में बदलते शक्ति संतुलन को दर्शाता है जहां छोटे देश भी अब अपनी रणनीतिक स्वायत्तता को मजबूती से स्थापित कर रहे हैं। श्रीलंका का यह कदम न सिर्फ उसकी तटस्थता का संकेत है बल्कि यह भी दिखाता है कि वह मानवीय मूल्यों और राष्ट्रीय हितों के बीच संतुलन बनाए रखने की कोशिश कर रहा है।

  • नवरात्रि व्रत में नहीं होगी थकान: ये 4 सुपरफूड्स रखेंगे आपको दिनभर एनर्जेटिक

    नवरात्रि व्रत में नहीं होगी थकान: ये 4 सुपरफूड्स रखेंगे आपको दिनभर एनर्जेटिक


    नई दिल्ली । शक्ति की उपासना का पावन पर्व चैत्र नवरात्रि पूरे उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। इन नौ दिनों में कई श्रद्धालु व्रत रखते हैं कोई पहले और आखिरी दिन तो कोई पूरे नौ दिन उपवास करता है। हालांकि अक्सर गलत खान पान के कारण व्रत के दौरान कमजोरी थकान सिरदर्द और सुस्ती महसूस होने लगती है जिसका असर चेहरे पर भी साफ दिखाई देता है।

    दरअसल व्रत का असली लाभ तभी मिलता है जब आपका आहार संतुलित सात्विक और पोषण से भरपूर हो। अगर सही चीजों का चुनाव किया जाए तो न केवल शरीर ऊर्जावान बना रहता है बल्कि मन भी शांत और एकाग्र रहता है। ऐसे में आइए जानते हैं 4 ऐसे सुपरफूड्स के बारे में जिन्हें व्रत की थाली में शामिल कर आप पूरे दिन एनर्जी से भरपूर रह सकते हैं।

    सबसे पहले बात करते हैं मखाना की जिसे व्रत का सबसे हेल्दी और गिल्ट फ्री स्नैक माना जाता है। इसमें कैलोरी कम और प्रोटीन अधिक होता है। साथ ही यह फाइबर मैग्नीशियम और पोटैशियम का अच्छा स्रोत है। मखाना खाने से लंबे समय तक भूख नहीं लगती और यह ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने में भी मदद करता है। आप इसे हल्के घी में भूनकर या खीर बनाकर खा सकते हैं।

    दूसरा सुपरफूड है साबूदाना। जब शरीर को तुरंत ऊर्जा की जरूरत होती है तब यह सबसे बेहतर विकल्प बन जाता है। कार्बोहाइड्रेट से भरपूर और ग्लूटेन फ्री साबूदाना जल्दी पचता है और शरीर को तुरंत ऊर्जा देता है। हालांकि इसमें प्रोटीन कम होता है इसलिए इसे दही या मूंगफली के साथ खाना ज्यादा फायदेमंद होता है। साबूदाने की खिचड़ी या वड़ा स्वाद और सेहत दोनों का बेहतरीन संयोजन है।

    तीसरा महत्वपूर्ण आहार है कुट्टू का आटा । यह पोषण का खजाना माना जाता है जिसमें मैग्नीशियम आयरन जिंक और एंटीऑक्सीडेंट्स भरपूर मात्रा में होते हैं। इसके कॉम्प्लेक्स कार्ब्स शरीर को धीरे धीरे ऊर्जा देते हैं जिससे दिनभर कमजोरी महसूस नहीं होती। कुट्टू से बनी पूरी चीला या कढ़ी न केवल स्वादिष्ट होती है बल्कि हृदय स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी मानी जाती है।

    चौथा और सबसे जरूरी हिस्सा है फल। व्रत के दौरान शरीर को हाइड्रेटेड रखना बेहद जरूरी होता है। सेब केला संतरा और अनार जैसे फल विटामिन और मिनरल्स से भरपूर होते हैं। केला तुरंत ऊर्जा देता है जबकि संतरा और अनार शरीर में पानी की कमी पूरी कर ठंडक प्रदान करते हैं। फलों का सेवन शरीर को डिटॉक्स करने और इम्युनिटी मजबूत बनाने में भी मदद करता है।

    नवरात्रि का व्रत केवल भूखा रहने का नाम नहीं बल्कि यह अनुशासन और संतुलित जीवनशैली अपनाने का अवसर है। अगर आप सही और पौष्टिक आहार लेते हैं तो न केवल आपका शरीर स्वस्थ रहेगा बल्कि आपकी पूजा और साधना में भी मन एकाग्र रहेगा। इस नवरात्रि इन 4 सुपरफूड्स को अपनी व्रत की थाली में जरूर शामिल करें और भक्ति के साथ साथ अपनी सेहत का भी पूरा ध्यान रखें।

  • ईंधन की कीमतें स्थिर, LPG की आपूर्ति बनाए रखने के लिए सरकार के सभी प्रयास जारी

    ईंधन की कीमतें स्थिर, LPG की आपूर्ति बनाए रखने के लिए सरकार के सभी प्रयास जारी


    नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने शुक्रवार को साफ किया कि आम आदमी के लिए इस्तेमाल होने वाले आम पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी नहीं की गई है। सिर्फ प्रीमियम पेट्रोल के दाम बढ़ाए गए हैं, जो कुल बिक्री का सिर्फ 3-4 परसेंट हिस्सा बनता है।

    सरकार की ब्रीफिंग

    पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने डेली ब्रीफिंग में बताया कि पेट्रोल और डीजल की कीमतें कंट्रोल फ्री (डीरेगुलेटेड) हैं और इन्हें तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) द्वारा तय किया जाता है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण कंपनियों ने प्रीमियम पेट्रोल के दाम 2 रुपये प्रति लीटर से ज्यादा बढ़ा दिए हैं।

    एलपीजी सप्लाई बनी रहेगी

    सुश्री शर्मा ने कहा कि देश में एलपीजी की सप्लाई पूरी तरह सामान्य है और कहीं भी गैस खत्म होने की स्थिति नहीं है। उत्पादन बढ़ाया गया है ताकि सप्लाई बेकार बनी रहे। हालांकि, उन्होंने माना कि भारत पूरी तरह ऊर्जा आत्मनिर्भर नहीं है और अभी भी आयात पर निर्भर है।

    स्थिति संभालने के लिए 13,700 से ज़्यादा पन्नों के कनेक्शन दिए गए हैं, ताकि एलपीजी पर दबाव कम हो सके। पिछले एक हफ़्ते में 11,300 टन कोयले की सप्लाई एलपीजी की सप्लाई की गई है। इसके अलावा, करीब 7,500 कंज्यूमर एलपीजी से पन्नों की ओर शिफ्ट हो चुके हैं।

    उन्होंने बताया कि घबराहट में गैस बुकिंग में कमी आई है और एक दिन में लगभग 55 लाख रीफिल बुकिंग हुई हैं। सरकार लगातार सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए नए सोर्स तलाश रही है और राज्यों से सख्त निगरानी और डिस्ट्रीब्यूशन में बाधा न आने की अपील की गई है।

    ईरान से तेल खरीद और समुद्री सुरक्षा

    सुश्री शर्मा ने ईरान से तेल खरीदने के सवाल पर कहा कि इस पर इंतज़ार कुछ भी कहना मुश्किल है। वहीं, पट्टन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के विशेष सचिव राजेश कुमार सिन्हा ने बताया कि पिछले 24 घंटे में कोई समुद्री घटना नहीं हुई है। स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज के आसपास मौजूद 22 भारतीय जहाज और सभी नाविक सुरक्षित हैं।

    अंतरराष्ट्रीय तनाव और घरेलू स्थिति

    पश्चिम एशिया में तनाव और अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच सरकार ने यह संदेश दिया है कि साधारण पेट्रोल और डीजल की कीमतें स्थिर रखीं। वहीं, प्रीमियम पेट्रोल पर हुई मामूली बढ़ोतरी केवल उच्च ऑक्टेन वाले महंगाई पर असर डाल सकती है। सरकार के प्रयास यह सुनिश्चित करने के लिए हैं कि ऊर्जा आपूर्ति लगातार बनी रहे और घरेलू बाजार में किसी भी प्रकार की बढ़ोतरी न आए।

  • मिजोरम की खूबसूरती और सांस्कृतिक रंग, लुंगलेई ट्रैकिंग ट्रिप के लिए परफेक्ट

    मिजोरम की खूबसूरती और सांस्कृतिक रंग, लुंगलेई ट्रैकिंग ट्रिप के लिए परफेक्ट


    नई दिल्ली।  गर्मियों की शुरुआत के साथ ही पर्यटकों में छुट्टियों की योजना बनाना आम हो जाता है। अगर आप प्रकृति, ट्रैकिंग और मिजोरम की संस्कृति का अनूठा अनुभव चाहते हैं, तो मिजोरम के लुंगलेई शहर की यात्रा आपके लिए बेस्ट विकल्प है।

    प्रकृति के अद्भुत नजारे

    लुंगलेई अपने नाम की तरह अनोखा है। इसका अर्थ है “चट्टानों का पुल”, और यह 1222 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। आइजोल से 169 किलोमीटर दूर यह शहर पहाड़ों, नदियों और हरे-भरे जंगलों के खूबसूरत संगम का प्रतीक है। यहां की नदियों का पानी इतना साफ होता है कि आप तल में बैठे कंकड़ों को आसानी से देख सकते हैं। गर्मियों में यह जगह विशेष रूप से पर्यटकों को आकर्षित करती है।

    खावंगलुंग वन्यजीव अभयारण्य

    प्रकृति प्रेमियों और वन्यजीव प्रेमियों के लिए खावंगलुंग वन्यजीव अभयारण्य सबसे पसंदीदा जगह है। यहां पर्यटक तेंदुआ, सांभर, बार्किंग डियर और हूलॉक गिब्बन जैसे वन्यजीवों को देख सकते हैं। अभयारण्य में सफारी का अनुभव भी लिया जा सकता है। मार्च से अक्टूबर का समय घूमने के लिए सबसे अच्छा माना जाता है।

    फुननाउमा की चट्टान और ट्रैकिंग का रोमांच

    लुंगपुई शहर से 100 किलोमीटर दूर लुंगपुई त्लांग या फुननाउमा की चट्टान स्थित है। यह लुंगपुई की सबसे पुरानी और बड़ी चट्टान है। यहां तक पहुंचने के लिए पर्यटकों को कठिन ट्रैकिंग करनी पड़ती है, लेकिन ऊपर पहुंचकर शहर का दृश्य देखने का अनुभव अद्भुत होता है।

    फुननाउमा की चट्टान को लेकर कई लोककथाएं प्रचलित हैं। माना जाता है कि यहां परियां शिकार के लिए आती थीं और इस जगह की खोज फुननाउमा नाम के शख्स ने की थी। यही कारण है कि यह चट्टान फुननाउमा की चट्टान के नाम से जानी जाती है।

    मिजोरम की संस्कृति का अनुभव

    लुंगलेई के हरे-भरे ऊंचे पहाड़ न केवल प्रकृति प्रेमियों को आकर्षित करते हैं, बल्कि यहां का मौसम भी सुहावना रहता है। इसके अलावा, लुंगलेई में मिजोरम की संस्कृति और कल्चर की झलक भी देखने को मिलती है। गांव के लोग आज भी अपनी पारंपरिक पहचान बनाए हुए हैं। यहां ऑथेंटिक मिजोरम व्यंजन का स्वाद लेना भी पर्यटकों के लिए खास अनुभव होता है।

    ट्रैकिंग और एडवेंचर के लिए उपयुक्त

    लुंगलेई न केवल प्रकृति प्रेमियों, बल्कि ट्रैकिंग और एडवेंचर के शौकीनों के लिए भी बेस्ट डेस्टिनेशन है। फुननाउमा की चट्टान और खावंगलुंग अभयारण्य जैसी जगहें इसे ट्रैवल लवर्स के लिए एक परफेक्ट हाइकिंग और फोटोग्राफी स्पॉट बनाती हैं।

  • इच्छामृत्यु से अंगदान तक हरीश राणा की जिंदगी की कहानी अब फिल्म बनेगी.

    इच्छामृत्यु से अंगदान तक हरीश राणा की जिंदगी की कहानी अब फिल्म बनेगी.


    नई दिल्ली:कभी-कभी जिंदगी ऐसी कहानी लिखती है, जिसे सुनकर हर कोई भीतर तक हिल जाता है. हरीश राणा की कहानी भी ऐसी ही एक दर्दभरी लेकिन साहस से भरी दास्तान है, जिसमें 13 साल का लंबा इंतजार, परिवार का अटूट साथ और अंत में इंसानियत की मिसाल देखने को मिलती है. अब यही कहानी बड़े पर्दे पर आने की तैयारी में है, जिसने पहले ही लोगों के दिलों को छूना शुरू कर दिया है.

    करीब 13 साल पहले एक हादसे ने हरीश राणा की पूरी जिंदगी बदल दी. वह एक होनहार छात्र थे और सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे थे, लेकिन रक्षाबंधन के दिन हुए एक हादसे में वह चौथी मंजिल से गिर गए. इस हादसे के बाद डॉक्टरों ने बताया कि वह क्वाड्रिप्लेजिया से जूझ रहे हैं, जिसमें शरीर के चारों अंग काम करना बंद कर देते हैं. एक पल में उनका सक्रिय जीवन पूरी तरह बिस्तर तक सिमट गया.

    इसके बाद शुरू हुआ दर्द, संघर्ष और उम्मीद का लंबा सफर. परिवार ने कभी हिम्मत नहीं हारी और हर हाल में हरीश के साथ खड़ा रहा. इलाज, देखभाल और उम्मीद के बीच साल दर साल बीतते गए, लेकिन हालत में कोई बड़ा सुधार नहीं आया. आखिरकार परिवार ने कानूनी रास्ता अपनाया और इस मामले को अदालत तक लेकर गए.

    लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद सुप्रीम कोर्ट ने 11 मार्च 2026 को हरीश राणा को पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दे दी. यह फैसला जितना संवेदनशील था, उतना ही भावनात्मक भी. इसके बाद उन्हें एम्स दिल्ली के पैलिएटिव केयर वार्ड में शिफ्ट किया गया, जहां उनकी तकलीफ को कम करने के लिए विशेष चिकित्सा प्रक्रिया अपनाई जा रही है.

     ताकि उन्हें कम से कम दर्द महसूस हो. मेडिकल बोर्ड की निगरानी में हर कदम बेहद सावधानी से उठाया जा रहा है.

    इस पूरी कहानी का सबसे भावुक पहलू है परिवार का साहस और उनका बड़ा फैसला. हरीश के पिता अशोक राणा ने अपने बेटे के अंगदान का निर्णय लिया है. यह फैसला न सिर्फ उनके बेटे की पीड़ा को एक अर्थ देता है, बल्कि समाज के लिए भी एक प्रेरणा बनता है. इतने सालों तक बेटे को इस हालत में देखना किसी भी माता-पिता के लिए असहनीय होता है, लेकिन उन्होंने हर पल धैर्य और हिम्मत दिखाई.

    अब इस सच्ची घटना पर फिल्म बनाने की योजना भी सामने आई है. एक राइटर प्रोड्यूसर ने इस कहानी को बड़े पर्दे पर लाने की इच्छा जताई है और इसके लिए बातचीत भी शुरू हो चुकी है. हालांकि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए फिलहाल जल्दबाजी नहीं की जा रही है.

    हरीश राणा की कहानी सिर्फ दर्द और अंत की कहानी नहीं है, बल्कि यह प्यार, त्याग और इंसानियत की गहराई को भी दर्शाती है. जब यह कहानी बड़े पर्दे पर आएगी, तो शायद हर दर्शक के दिल में कई सवाल और भावनाएं छोड़ जाएगी. यह कहानी हमें यह भी सिखाती है कि मुश्किल हालात में भी इंसानियत और संवेदनशीलता सबसे बड़ी ताकत होती है.

  • चैत्र नवरात्र: पालकी पर आगमन, हाथी पर प्रस्थान, जानें क्या संकेत दे रहा है समय

    चैत्र नवरात्र: पालकी पर आगमन, हाथी पर प्रस्थान, जानें क्या संकेत दे रहा है समय


    नई दिल्ली। देशभर में चैत्र नवरात्रि का शुभारंभ 19 मार्च से हो चुका है और श्रद्धालु माँ भवानी के नौ रूपों की आराधना में जुटे हैं। नवरात्रि न केवल हिंदू नववर्ष का प्रतीक है, बल्कि देवी के आगमन और प्रस्थान की सवारी भविष्य के शुभ-अशुभ संकेतों का मार्गदर्शन भी करती है।

    इस वर्ष मां जगदंबा का आगमन गुरुवार को पालकी पर हुआ, जबकि प्रस्थान शुक्रवार को हाथी पर होगा। शास्त्रों के अनुसार, पालकी पर आगमन सामान्यतः शुभ नहीं माना जाता। यह प्राकृतिक आपदाओं, सामाजिक उपद्रव, दंगे या आर्थिक चुनौतियों का संकेत दे सकता है। गुरुवार को आगमन से जुड़े संकेतों को सावधानी और वित्तीय सतर्कता से जोड़ा जा रहा है।

    वहीं, प्रस्थान का समय और सवारी विशेष महत्व रखते हैं। शुक्रवार को मां का हाथी पर प्रस्थान शुभ माना गया है। हाथी स्थिरता, सुख-संपत्ति और सकारात्मक बदलाव का प्रतीक है। इसका अर्थ है कि आने वाला समय अप्रिय घटनाओं के साथ-साथ जीवन में स्थिरता और अवसर भी लाएगा। शास्त्रों के अनुसार वार दिन और सवारी का तालमेल भविष्य की संभावनाओं को दर्शाता है। उदाहरण के लिए:

    रविवार और सोमवार को प्रस्थान – भैंसे की सवारी- रोग, शोक, अशुभता।

    मंगलवार और शनिवार को प्रस्थान – मुर्गा की सवारी – महामारी और जनहानि।

    बुधवार और शुक्रवार को प्रस्थान – हाथी की सवारी – सुख, समृद्धि और स्थिरता।

    गुरुवार को प्रस्थान – मानव पर सवार – भक्त पर विशेष कृपा और जीवन में संतुलन।

    इस साल आगमन पालकी पर और प्रस्थान हाथी पर होने से मिश्रित संकेत मिलते हैं। आगमन से सावधानी और चुनौतियों की चेतावनी मिलती है, जबकि प्रस्थान सुख-समृद्धि और स्थिरता की संभावना दर्शाता है। ऐसे में यह समय जीवन में सतर्क रहकर अवसरों का लाभ उठाने का प्रतीक है।

    पिछले वर्ष शारदीय नवरात्रि में मां का आगमन हाथी पर हुआ था और प्रस्थान भक्तों के कंधे पर हुआ था। यह दोनों ही शुभ संकेतों का प्रतीक थे। इस वर्ष के संकेत कुछ मिश्रित हैं, लेकिन शास्त्रों के अनुसार सावधानी के साथ श्रद्धा और कर्म से जीवन में संतुलन बनाए रखा जा सकता है।

  • जोमैटो यूज़र्स के लिए अपडेट, प्रति ऑर्डर शुल्क हुआ बढ़कर लगभग 15 रुपए

    जोमैटो यूज़र्स के लिए अपडेट, प्रति ऑर्डर शुल्क हुआ बढ़कर लगभग 15 रुपए


    नई दिल्ली। ऑनलाइन फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म जोमैटो ने अपने प्लेटफॉर्म फीस में 19.2 प्रतिशत यानी 2.40 रुपये प्रति ऑर्डर की बढ़ोतरी कर दी है। ऐप के लेटेस्ट बिलिंग डेटा के अनुसार, अब प्लेटफॉर्म फीस 14.90 रुपये प्रति ऑर्डर होगी, जो पहले 12.50 रुपये थी।

    फीस बढ़ोतरी के पीछे कारण

    प्लेटफॉर्म फीस में यह बदलाव ऐसे समय पर हुआ है जब एलपीजी की प्लेटफॉर्म में पहुंचा हुआ है, जिससे रेस्टोरेंट और फूड डिलीवरी कंपनियों की लागत बढ़ेगी है। जोमैटो ने यह कदम यूनिट इकोनॉमिक्स और मार्जिन सुधार के उद्देश्य से उठाया है, ताकि बढ़ती परिचालन लागतों के बीच संचालन को स्थिर रखा जा सके।

    फीस बढ़ोतरी का इतिहास

    जोमैटो ने प्लेटफॉर्म फीस में आखिरी बार सितंबर 2025 में बदलाव किया था। इससे पहले, फरवरी 2025 में त्योहारी सीजन के दौरान यह फीस 6 रुपये प्रति ऑर्डर से बढ़कर 10 रुपये कर दिया गया था। अगस्त 2023 में कंपनी ने प्रति ऑर्डर 2 रुपये का प्लेटफॉर्म फीस लागू किया था, जिसे बाद में प्रमुख बाजारों में धीरे-धीरे बढ़ाया गया।

    प्रतिस्पर्धी कंपनियों की तुलना

    प्रतिद्वंद्वी कंपनी स्विगी वर्तमान में कर सहित 14.99 रुपए प्रति ऑर्डर प्लेटफॉर्म फीस ले रही है। इसका मतलब है कि जोमैटो और स्विगी की प्लेटफॉर्म फीस अब लगभग बराबर हो गई है।

    शेयर बाजार में असर

    जोमैटो की पेरेंट कंपनी इटरनल के शेयर शुक्रवार को 1.55 प्रतिशत यानी 3.55 रुपए की तेजी के साथ 232.29 रुपए पर बंद हुए। दिन के दौरान शेयर ने 236.70 रुपए का सर्वोच्च स्तर और 230.10 रुपए का न्यूनतम स्तर जारी किया।

    वित्तीय प्रदर्शन

    दिसंबर तिमाही के बढ़ोतरी में कंपनी का कंसोलिडेटेड प्रेशर इंडेक्स आधार पर 72.88 प्रतिशत बढ़कर 102 करोड़ रुपए हो गया, जो पिछले साल समान अवधि में 59 करोड़ रुपए था। इसी दौरान कंपनी का ऑपरेशनल रेवेन्यू करीब तीन गुना बढ़कर 16,315 करोड़ रुपए हो गया, जो कि एक साल पहले समान अवधि में 5,405 करोड़ रुपए था।

    ब्रांडिंग और भविष्य की योजना

    मार्च 2025 में जोमैटो ने अपने आपको इटरनल के नाम से रीब्रांड किया था। प्लेटफॉर्म फीस में यह बढ़ोतरी कंपनी की लॉन्ग-टर्म बढ़ोतरी और स्टेबिलिटी सुनिश्चित करने की स्ट्रैटेजी का हिस्सा है। बढ़ती ऑपरेटिंग कॉस्ट और कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव को देखते हुए, फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म भविष्य में भी अपनी प्राइस स्ट्रक्चर और फीस मॉडल में बदलाव कर सकते हैं।

  • रणवीर सिंह की धुरंधर 2 को मिला साउथ का सपोर्ट महेश बाबू और जूनियर एनटीआर ने कही बड़ी बात

    रणवीर सिंह की धुरंधर 2 को मिला साउथ का सपोर्ट महेश बाबू और जूनियर एनटीआर ने कही बड़ी बात

    नई दिल्ली:फिल्म धुरंधर 2 द रिवेंज इन दिनों बॉक्स ऑफिस पर धूम मचा रही है और रिलीज के साथ ही चर्चा का बड़ा विषय बन गई है. जहां एक तरफ फिल्म ने शानदार कमाई करते हुए भारत में 139 करोड़ से ज्यादा का आंकड़ा पार कर लिया है, वहीं वर्ल्डवाइड कलेक्शन भी तेजी से बढ़ रहा है. हालांकि फिल्म को दर्शकों से मिले-जुले रिव्यू मिल रहे हैं, लेकिन साउथ फिल्म इंडस्ट्री के बड़े सितारों ने इसे लेकर खुलकर तारीफ की है.

    सुपरस्टार महेश बाबू ने सोशल मीडिया पर फिल्म की सराहना करते हुए इसे एक शानदार सिनेमैटिक अनुभव बताया. उन्होंने खासतौर पर रणवीर सिंह की परफॉर्मेंस की तारीफ की और कहा कि यह उनका अब तक का सबसे बेहतरीन अवतार है. इसके साथ ही उन्होंने फिल्म के निर्देशक आदित्य धर की भी जमकर तारीफ की और कहा कि उन्होंने हर फ्रेम को परफेक्शन के साथ पेश किया है. महेश बाबू ने फिल्म के म्यूजिक और बैकग्राउंड स्कोर को भी खास बताया, जिससे फिल्म का इमोशनल और एक्शन प्रभाव और मजबूत हुआ.

    वहीं दूसरी ओर जूनियर एनटीआर ने भी फिल्म को लेकर लंबा चौड़ा रिएक्शन शेयर किया. उन्होंने पूरी टीम की तारीफ करते हुए कहा कि यह फिल्म भारतीय सिनेमा के लिए एक दमदार पेशकश है. जूनियर एनटीआर ने रणवीर सिंह की एक्टिंग को शानदार बताया और कहा कि उन्होंने स्क्रीन पर एक अलग ही स्तर की परफॉर्मेंस दी है.

    उन्होंने आगे आर माधवन, संजय दत्त और अर्जुन रामपाल के अभिनय की भी सराहना की और कहा कि सभी कलाकारों ने अपने किरदारों को पूरी गहराई और मजबूती के साथ निभाया है. खासतौर पर फिल्म के म्यूजिक डायरेक्टर शाश्वत सचदेव के काम को उन्होंने अलग ही स्तर का बताया, जिसने हर सीन को और ज्यादा प्रभावी बना दिया.

    जूनियर एनटीआर ने एक अलग पोस्ट में अक्षय खन्ना का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने इस फ्रेंचाइजी की मजबूत नींव रखी थी. पार्ट 1 में उनका शांत लेकिन खतरनाक अंदाज आज भी यादगार है और उनकी परफॉर्मेंस ने फिल्म को एक अलग पहचान दी थी.

    फिल्म को लेकर सोशल मीडिया पर भी जबरदस्त चर्चा हो रही है. जहां एक तरफ फैंस अपने पसंदीदा सितारों की तारीफ कर रहे हैं, वहीं कुछ लोग यह सवाल भी उठा रहे हैं कि रिलीज के पहले ही दिन दोनों साउथ सुपरस्टार्स ने फिल्म कैसे देख ली. इस पर तरह तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं, जिसमें कुछ लोग मजाक कर रहे हैं तो कुछ इसे प्रमोशन का हिस्सा बता रहे हैं.

    धुरंधर 2 द रिवेंज ने रिलीज के साथ ही एक बड़ा माहौल बना दिया है. फिल्म की कमाई, स्टार पावर और बड़े सितारों की तारीफ ने इसे और भी चर्चा में ला दिया है. आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर कितनी दूर तक जाती है और दर्शकों के दिलों में कितनी गहरी छाप छोड़ पाती है.

  • Chaitra Navratri 2026: उज्जैन के महाकाल वन क्षेत्र में मां हरसिद्धि मंदिर माता सती की कोहनी से लेकर 51 शक्तिपीठों की महिमा तक

    Chaitra Navratri 2026: उज्जैन के महाकाल वन क्षेत्र में मां हरसिद्धि मंदिर माता सती की कोहनी से लेकर 51 शक्तिपीठों की महिमा तक


    उज्जैन। सप्तपुरियों में स्थित प्राचीन धर्म नगरी उज्जैन में मां हरसिद्धि मंदिर देश के 51 शक्तिपीठों में से एक है। कहा जाता है कि इसी स्थल पर देवी सती का दाहिना हाथ  कोहनी का अंश गिरा था, जिससे यह स्थान अत्यंत पवित्र माना जाता है।

    मंदिर का स्थान और विशेषताएँ

    स्थान: महाकाल वन क्षेत्र, रुद्रसागर के किनारे मुख्य आकर्षण: 51 फीट ऊँचे दो दीप स्तंभ, जिन पर प्रतिदिन संध्या समय दीप प्रज्वलित होते हैं धार्मिक महत्व: यह स्थल तंत्र साधना और महालक्ष्मी-महासरस्वती के संयुक्त स्वरूप के लिए प्रसिद्ध है

    सम्राट विक्रमादित्य और माता हरसिद्धि सम्राट विक्रमादित्य माता हरसिद्धि के अनन्य भक्त थे। उन्होंने अपनी कृपा प्राप्त करने हेतु 11 बार अपने मस्तक की बलि दी, जो हर बार पुनः जुड़ गया। 12वीं बार जब सिर नहीं जुड़ा, माना गया कि उनका शासन सम्पूर्ण हुआ। इस स्थान को परमार वंशीय राजाओं की कुलदेवी का स्थान भी कहा जाता है। मंदिर के पीछे सिरसिन्दूर चढ़े हुए रखे हैं, जिन्हें विक्रमादित्य के सिर के रूप में जाना जाता है।

    देवी हरसिद्धि का नामकरण और दैत्य वध

    कीवदंति अनुसार, उज्जैन की रक्षा के लिए कई देवीयाँ तैनात हैं, जिनमें हरसिद्धि देवी प्रमुख हैं।  पुराणों में वर्णित कथा के अनुसार, दैत्य चण्ड और मुण्ड कैलाश पर कब्जा करने आए। शिवजी के आदेश पर देवी चंडी ने उनका वध किया। शंकरजी ने प्रसन्न होकर कहा कि आपने दुष्टों का वध किया, इसलिए आपका नाम हरसिद्धि से प्रसिद्ध होगा।

    शक्तिपीठ का महत्व

    उज्जैन स्थित माता हरसिद्धि शक्तिपीठ में माता सती की दाहिनी कोहनी गिरने के कारण यह स्थान प्रमुख माना जाता है।यह शक्तिपीठ भगवान विष्णु के सुदर्शन चक्र से खंडित सती से संबंधित है और श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत पवित्र है।

  • गर्मियों में सूरज की तीखी धूप से जलती त्वचा? अपनाएं ये आसान और असरदार उपाय

    गर्मियों में सूरज की तीखी धूप से जलती त्वचा? अपनाएं ये आसान और असरदार उपाय


    नई दिल्ली। गर्मी में महिलाओं को अक्सर कई प्रकार की समस्याओं से जूझना पड़ता है उसमें से एक है स्क्रीन। आप कितना भी स्क्रीन केयर कर लें लेकिन गर्मी में इसमें कई बदलाव देखने को मिलते हैं। कई लोगों को बाहर निकलते ही त्वचा में जलन, लालपन और टैनिंग की समस्या होने लगती है।तो चलिए इसके लिए कुछ उपाय जानते हैं।

    इस प्रकार गर्मी में स्क्रीन का ध्यान
    गर्मी शुरू होते ही स्क्रीन पर काफी प्रभाव पड़ता है जिसके कारण आपकी त्वचा से निखार दूर जाने लगता है। ऐसे में ये जरूरी है कि, गर्मियों में अपनी त्वचा की खास देखभाल की जाए। कुछ आसान और रोजाना अपनाए जाने वाले स्किन केयर टिप्स आपकी त्वचा को हेल्दी और ग्लोइंग बनाए रख सकते हैं।

    सनस्क्रीन लगाना हमेशा रखें याद
    गर्मी में घर से बाहर निकलने से पहले सनस्क्रीन लगाना बहुत जरूरी होता है। तेज धूप में मौजूद यूवी किरणें त्वचा को नुकसान पहुंचा सकती हैं। इसलिए बाहर जाने से करीब 20 मिनट पहले एसपीएफ 30 या उससे ज्यादा वाली सनस्क्रीन जरूर लगाएं।

    त्वचा को रखें हाइड्रेटेड
    गर्मी में शरीर के साथ-साथ त्वचा को भी हाइड्रेशन की जरूरत होती है। दिनभर में पर्याप्त मात्रा में पानी पीना चाहिए। इससे शरीर के टॉक्सिन बाहर निकलते हैं और त्वचा भी फ्रेश और ग्लोइंग नजर आती है। अगर यह आप बरकरार रखती हैं तो आपकी त्वचा में हमेशा निखार और ग्लो बना रहेगा।

    दिन में दो-तीन बार धोने फेस
    बाहर कई प्रकार की धूल,मिट्टी गर्म हवाएं और पसीना आपके चेहरे को खराब कर देती है।इसलिए सुबह और रात को चेहरे को अच्छे फेसवॉश से साफ करना चाहिए। इससे स्किन साफ रहती है और पिंपल्स की समस्या भी कम होती है।

    धूप से बचाव करें
    तेज धूप में बाहर निकलते समय छाता, टोपी या स्कार्फ का इस्तेमाल करना चाहिए। इससे त्वचा सीधे धूप के संपर्क में आने से बच जाती है और टैनिंग की समस्या भी कम होती है।