Author: bharati

  • दिल्ली छात्र प्रदर्शन पर बॉलीवुड की तीखी प्रतिक्रिया, लाठीचार्ज के बाद सोनू सूद, हुमा कुरैशी और अनुराग कश्यप समेत कई सितारों ने उठाए सवाल

    दिल्ली छात्र प्रदर्शन पर बॉलीवुड की तीखी प्रतिक्रिया, लाठीचार्ज के बाद सोनू सूद, हुमा कुरैशी और अनुराग कश्यप समेत कई सितारों ने उठाए सवाल

    नई दिल्ली । दिल्ली में छात्रों के प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई और लाठीचार्ज को लेकर बॉलीवुड के कई कलाकारों ने अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। जंतर-मंतर से संसद तक निकाले गए प्रदर्शन के दौरान हुई झड़पों के बाद अभिनेता, अभिनेत्री और फिल्म निर्माताओं ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी राय साझा करते हुए लोकतांत्रिक व्यवस्था में संवाद, संयम और शांतिपूर्ण समाधान की आवश्यकता पर बल दिया। कई कलाकारों ने कहा कि युवाओं की आवाज को गंभीरता से सुना जाना चाहिए और किसी भी विवाद का समाधान बातचीत के माध्यम से निकालना अधिक उचित है।

    प्रदर्शन के बाद अभिनेता आयुष शर्मा ने कहा कि लोकतंत्र की वास्तविक मजबूती केवल चुनावों तक सीमित नहीं होती, बल्कि नागरिकों की बात सुनने और उनकी चिंताओं को समझने में भी दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि छात्रों सहित हर नागरिक को अपनी बात रखने का अधिकार है। उनके अनुसार, यदि अंततः छात्रों की मांगों पर विचार किया जाना था तो शुरुआत से ही संवाद का रास्ता अपनाया जाना चाहिए था। उन्होंने यह भी कहा कि अपनी मांग रखने के दौरान छात्रों को आंसू गैस और लाठीचार्ज जैसी परिस्थितियों का सामना करना दुर्भाग्यपूर्ण है।

    अभिनेत्री हुमा कुरैशी ने भी इस घटना पर चिंता जताते हुए कहा कि प्रदर्शन के दौरान सामने आई तस्वीरें लंबे समय तक लोगों की स्मृति में बनी रहेंगी। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि ऐसे संवेदनशील मामलों को धैर्य, बातचीत और परस्पर विश्वास के जरिए सुलझाया जा सकता है। उन्होंने शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात रखने वाले छात्रों और नागरिकों के साहस की सराहना करते हुए कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में असहमति को सम्मानपूर्वक सुनना आवश्यक है।

    अभिनेता सोनू सूद ने भी इस घटनाक्रम पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि देश के छात्रों को कठोर कार्रवाई नहीं, बल्कि सहयोग और विश्वास की आवश्यकता है। वहीं अभिनेत्री भूमि पेडनेकर ने कहा कि किसी भी समस्या का समाधान हिंसा से नहीं निकल सकता। उन्होंने युवाओं की चिंताओं को गंभीरता से सुनने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार और संवाद की संस्कृति लोकतंत्र को मजबूत बनाती है। उनके अनुसार, किसी भी आंदोलन का उद्देश्य सकारात्मक बदलाव होना चाहिए और सभी पक्षों को संयम बनाए रखना चाहिए।

    फिल्म निर्माता अनुराग कश्यप ने भी पुलिस कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ यह भी आवश्यक है कि कार्रवाई की प्रकृति और उसके प्रभाव पर गंभीरता से विचार किया जाए। उन्होंने अपने संदेश में पुलिस की भूमिका और निर्णय प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि लोकतांत्रिक समाज में जवाबदेही और संवेदनशीलता दोनों का समान महत्व है।

    दिल्ली पुलिस के अनुसार प्रदर्शन के दौरान कई बार चेतावनी दिए जाने के बावजूद कुछ प्रदर्शनकारी बैरिकेड पार कर संसद की ओर बढ़ने लगे, जिसके बाद स्थिति को नियंत्रित करने के लिए कार्रवाई की गई। प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच कई स्थानों पर झड़पें भी हुईं। दूसरी ओर प्रदर्शन से जुड़े लोगों का कहना है कि उनकी मांगों को शांतिपूर्ण तरीके से रखने का प्रयास किया जा रहा था और बल प्रयोग से बचा जा सकता था।

    इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर लोकतांत्रिक विरोध, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और कानून-व्यवस्था के बीच संतुलन को लेकर बहस तेज कर दी है। राजनीतिक प्रतिक्रियाओं के साथ-साथ फिल्म जगत की ओर से आई टिप्पणियों ने भी इस मुद्दे को राष्ट्रीय चर्चा का विषय बना दिया है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि छात्रों की मांगों और पूरे घटनाक्रम पर आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।

  • जंतर-मंतर प्रदर्शन के बाद फिल्मी हस्तियों की प्रतिक्रिया, छात्रों की आवाज सुनने और शांतिपूर्ण समाधान की अपील तेज

    जंतर-मंतर प्रदर्शन के बाद फिल्मी हस्तियों की प्रतिक्रिया, छात्रों की आवाज सुनने और शांतिपूर्ण समाधान की अपील तेज

    नई दिल्ली । दिल्ली में छात्रों के प्रदर्शन के दौरान कथित बल प्रयोग की खबरों के बाद बॉलीवुड के कई कलाकार छात्रों के समर्थन में सामने आए हैं। अभिनेत्री पूजा भट्ट, सोनाक्षी सिन्हा, अदिति राव हैदरी और जेनेलिया देशमुख सहित कई फिल्मी हस्तियों ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी प्रतिक्रिया देते हुए छात्रों की बात सुने जाने और उनकी चिंताओं का शांतिपूर्ण समाधान निकालने की आवश्यकता पर जोर दिया। कलाकारों की इन प्रतिक्रियाओं ने इस पूरे घटनाक्रम को लेकर सार्वजनिक चर्चा को और तेज कर दिया है।

    प्रदर्शन उस समय चर्चा का विषय बन गया जब संसद की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों को रोकने के दौरान कथित तौर पर आंसू गैस और अन्य भीड़ नियंत्रण उपायों का इस्तेमाल किए जाने की खबरें सामने आईं। इसके बाद सोशल मीडिया पर कई लोगों ने इस घटनाक्रम पर अपनी राय व्यक्त की। फिल्म जगत से जुड़े कलाकारों ने भी छात्रों के पक्ष में संवेदनशीलता और संवाद की जरूरत पर बल देते हुए अपनी प्रतिक्रियाएं साझा कीं।

    अभिनेत्री पूजा भट्ट ने अपने सोशल मीडिया संदेश में कहा कि जब छात्रों के खिलाफ बल प्रयोग की घटनाएं सामने आती हैं तो यह लोकतांत्रिक मूल्यों को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती हैं। उन्होंने कहा कि विरोध की आवाज को दबाने के बजाय उसकी बात सुनना अधिक जरूरी है। उनका मानना है कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में असहमति को सम्मानपूर्वक सुना जाना चाहिए और समस्याओं का समाधान संवाद के माध्यम से तलाशा जाना चाहिए।

    अभिनेत्री सोनाक्षी सिन्हा ने भी इस पूरे घटनाक्रम पर संक्षिप्त लेकिन भावनात्मक प्रतिक्रिया दी। उन्होंने प्रदर्शन के दौरान हुई घटनाओं को लेकर चिंता व्यक्त करते हुए लिखा कि इस दिन ने केवल लोगों को शारीरिक रूप से ही नहीं बल्कि पूरे देश को भावनात्मक रूप से भी प्रभावित किया है। उनकी यह प्रतिक्रिया सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से साझा की गई और कई लोगों ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया भी दी।

    अदिति राव हैदरी ने इस विषय पर विस्तृत संदेश साझा करते हुए कहा कि राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हो सकते हैं, लेकिन सबसे पहले इंसानियत और संवेदनशीलता को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि छात्रों और अपनी बात रखने वाले प्रत्येक नागरिक के लिए सुरक्षित, सम्मानजनक और गरिमापूर्ण वातावरण सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है। उनके अनुसार संवाद और एक-दूसरे की बात सुनना ही किसी भी लोकतांत्रिक समाज की वास्तविक ताकत है तथा देश के युवाओं को सकारात्मक माहौल उपलब्ध कराना भविष्य के लिए महत्वपूर्ण है।

    जेनेलिया देशमुख ने भी छात्रों के समर्थन में अपनी बात रखते हुए कहा कि देश के युवाओं की आवाज बिना किसी भय के सुनी जानी चाहिए। उन्होंने युवाओं को लोकतंत्र की सबसे महत्वपूर्ण शक्ति बताते हुए कहा कि उनके विचार, ऊर्जा और सपने ही देश के भविष्य की दिशा तय करते हैं। उन्होंने समाज से अपील की कि युवाओं को आगे बढ़ने का अवसर दिया जाए और उनकी चिंताओं को गंभीरता से सुना जाए।

    यह पूरा विरोध प्रदर्शन मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट में कथित अनियमितताओं के आरोपों को लेकर आयोजित किया गया था। प्रदर्शनकारियों ने परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई। इसी दौरान सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक भी अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठे रहे, जिन्हें बाद में चिकित्सकीय देखरेख के लिए अस्पताल ले जाया गया। इस घटनाक्रम के बाद छात्रों के आंदोलन, परीक्षा व्यवस्था और लोकतांत्रिक विरोध के तरीकों को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर बहस तेज हो गई है, जबकि विभिन्न वर्गों की ओर से संवाद और शांतिपूर्ण समाधान की आवश्यकता लगातार रेखांकित की जा रही है।

  • एफआईएच हॉकी वर्ल्ड कप के लिए टीम इंडिया घोषित, हरमनप्रीत कप्तान; पाकिस्तान से 19 अगस्त को महामुकाबला

    एफआईएच हॉकी वर्ल्ड कप के लिए टीम इंडिया घोषित, हरमनप्रीत कप्तान; पाकिस्तान से 19 अगस्त को महामुकाबला


    नई दिल्ली । एफआईएच पुरुष हॉकी विश्व कप 2026 के लिए भारतीय टीम का ऐलान हो गया है। हॉकी इंडिया ने बेल्जियम और नीदरलैंड में 15 से 30 अगस्त तक आयोजित होने वाले इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट के लिए 20 सदस्यीय टीम की घोषणा की है। अनुभवी डिफेंडर हरमनप्रीत सिंह को एक बार फिर टीम की कप्तानी सौंपी गई है। चयनित टीम में अनुभवी खिलाड़ियों और उभरती युवा प्रतिभाओं का संतुलित मिश्रण देखने को मिलता है, जिससे भारतीय हॉकी प्रशंसकों की उम्मीदें और बढ़ गई हैं।

    मुख्य कोच क्रेग फुल्टन ने टीम चयन के बाद भरोसा जताया कि मौजूदा भारतीय टीम के पास इतिहास रचने का सुनहरा अवसर है। उन्होंने कहा कि टीम में शामिल हर खिलाड़ी ने अपनी जगह प्रदर्शन के दम पर बनाई है। उनके अनुसार यह टीम दबाव में बेहतर प्रदर्शन करने, तेज जवाबी हमला करने और अनुशासित खेल दिखाने में सक्षम है। फुल्टन ने स्पष्ट किया कि टीम का पूरा फोकस एक-एक मैच पर रहेगा और खिलाड़ी भविष्य की बजाय वर्तमान मुकाबलों पर ध्यान देंगे।

    भारतीय टीम गोलकीपिंग में मोहित एचएस और सूरज करकेरा पर भरोसा करेगी। रक्षा पंक्ति की जिम्मेदारी कप्तान हरमनप्रीत सिंह के साथ अमित रोहिदास, जरमनप्रीत सिंह, जुगराज सिंह, संजय, सुमित और यशदीप सिवाच जैसे अनुभवी खिलाड़ियों के हाथों में होगी। मिडफील्ड में मनप्रीत सिंह, हार्दिक सिंह और विवेक सागर प्रसाद टीम की रीढ़ होंगे, जबकि युवा खिलाड़ी राजिंदर सिंह, आदित्य अर्जुन लालागे और नीलाकांता शर्मा भी अपनी ऊर्जा और कौशल से टीम को मजबूती देंगे।

    आक्रमण की कमान मनदीप सिंह, दिलप्रीत सिंह, सुखजीत सिंह, अभिषेक और शिलानंद लाकड़ा संभालेंगे। इन खिलाड़ियों से तेज़ और आक्रामक हॉकी की उम्मीद की जा रही है, जो विरोधी टीमों की रक्षा पंक्ति को लगातार चुनौती दे सकते हैं।

    भारत को विश्व कप में पूल-डी में इंग्लैंड, पाकिस्तान और वेल्स जैसी मजबूत टीमों के साथ रखा गया है। भारतीय टीम अपने अभियान की शुरुआत 15 अगस्त को वेल्स के खिलाफ करेगी। इसके बाद 17 अगस्त को इंग्लैंड से भिड़ंत होगी, जबकि 19 अगस्त को चिर प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान के खिलाफ मुकाबला खेला जाएगा। भारत-पाकिस्तान मैच पर दुनियाभर के हॉकी प्रेमियों की विशेष नजर रहेगी और इसे पूल चरण का सबसे बड़ा मुकाबला माना जा रहा है।

    भारतीय हॉकी के लिए यह विश्व कप इसलिए भी खास है क्योंकि टीम पिछले पांच दशकों से विश्व कप पदक का इंतजार कर रही है। भारत ने 1971 में कांस्य, 1973 में रजत और 1975 में कुआलालंपुर में विश्व कप का स्वर्ण पदक जीता था। इसके बाद से भारतीय टीम विश्व कप में कोई पदक नहीं जीत सकी है। ऐसे में हरमनप्रीत सिंह की अगुवाई वाली यह टीम 50 साल के लंबे इंतजार को खत्म कर इतिहास रचने के इरादे से मैदान में उतरेगी।

    मुख्य कोच क्रेग फुल्टन का मानना है कि इस टीम में अनुभव, फिटनेस, अनुशासन और युवा जोश का बेहतरीन तालमेल है। यदि खिलाड़ी अपनी रणनीति के अनुसार प्रदर्शन करते हैं तो भारत एक बार फिर विश्व हॉकी में अपनी खोई हुई चमक हासिल कर सकता है।

  • स्पेन से हार के बाद भी अर्जेंटीना पर बरसा प्यार, एयरपोर्ट पर रेड कार्पेट और हजारों फैन्स का स्वागत

    स्पेन से हार के बाद भी अर्जेंटीना पर बरसा प्यार, एयरपोर्ट पर रेड कार्पेट और हजारों फैन्स का स्वागत


    नई दिल्ली । फीफा विश्व कप 2026 के फाइनल में स्पेन के हाथों 1-0 से हारकर खिताब बचाने में असफल रही अर्जेंटीना की टीम जब स्वदेश पहुंची तो नजारा किसी चैंपियन के स्वागत से कम नहीं था। न्यूयॉर्क के मेटलाइफ स्टेडियम में मिली निराशाजनक हार के बावजूद देशवासियों ने अपनी टीम का पूरे सम्मान और गर्व के साथ स्वागत किया। हालांकि इस मौके पर सबसे बड़ी कमी कप्तान लियोनेल मेसी की रही, जो टीम के साथ अर्जेंटीना नहीं लौटे।

    एजेइजा स्थित मिनिस्ट्रो पिस्टारिनी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर खिलाड़ियों के स्वागत के लिए विशेष इंतजाम किए गए थे। विमान के उतरते ही रेड कार्पेट बिछाया गया और ग्रेनेडियर रेजिमेंट के सैन्य बैंड ने लोकप्रिय धुन ‘मुचाचोस’ बजाकर खिलाड़ियों का अभिनंदन किया। एयरपोर्ट से लेकर अर्जेंटीना फुटबॉल एसोसिएशन (AFA) मुख्यालय तक हजारों प्रशंसक अपने हाथों में राष्ट्रीय ध्वज, नीले-सफेद रंग के छाते और टीम की जर्सियां लिए खिलाड़ियों की एक झलक पाने के लिए घंटों इंतजार करते रहे।

    टीम के कप्तान लियोनेल मेसी इस स्वागत समारोह का हिस्सा नहीं बने। अर्जेंटीना फुटबॉल एसोसिएशन पहले ही स्पष्ट कर चुका था कि टीम के कुछ खिलाड़ी और अधिकारी दल के साथ यात्रा नहीं करेंगे, जिनमें मेसी भी शामिल थे। माना जा रहा है कि 39 वर्षीय मेसी ने राष्ट्रीय टीम के लिए अपना आखिरी विश्व कप मुकाबला खेल लिया है, हालांकि उनके भविष्य को लेकर अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।

    कोच लियोनेल स्कालोनी के नेतृत्व में लौटे खिलाड़ियों में एमिलियानो मार्टिनेज, निकोलस ओटामेंडी, लिसांड्रो मार्टिनेज, निकोलस टैग्लियाफिको, गोंजालो मोंटिएल, लिएंड्रो परेडेस, एलेक्सिस मैक एलिस्टर, जियोवानी लो सेल्सो, थियागो अल्माडा, निकोलस गोंजालेज और अन्य खिलाड़ी शामिल रहे। सभी खिलाड़ियों का जोरदार तालियों और नारों के बीच स्वागत किया गया।

    एयरपोर्ट से टीम को कड़ी सुरक्षा के बीच खुली छत वाली बस में लियोनेल आंद्रेस मेसी ट्रेनिंग सेंटर ले जाया गया। पूरे रास्ते सड़कों के दोनों ओर बड़ी संख्या में समर्थक मौजूद रहे। कई प्रशंसक झंडे लहराते रहे तो कई ड्रम बजाकर खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ाते नजर आए। हार के बावजूद फैन्स ने यह संदेश दिया कि उनके लिए टीम की मेहनत और जज्बा किसी ट्रॉफी से कम नहीं है।

    विश्व कप फाइनल में स्पेन के खिलाफ अर्जेंटीना ने कड़ा मुकाबला किया, लेकिन एकमात्र गोल के अंतर से उसे हार का सामना करना पड़ा। इसके साथ ही लगातार दूसरी बार विश्व चैंपियन बनने का सपना अधूरा रह गया। बावजूद इसके देशवासियों ने खिलाड़ियों का मनोबल बढ़ाने में कोई कमी नहीं छोड़ी।

    अर्जेंटीना फुटबॉल एसोसिएशन के अधिकारियों और ट्रेनिंग सेंटर के कर्मचारियों ने भी खिलाड़ियों और कोचिंग स्टाफ का गर्मजोशी से स्वागत किया। टीम की स्वदेश वापसी के साथ विश्व कप अभियान भले समाप्त हो गया हो, लेकिन प्रशंसकों के समर्थन ने यह साफ कर दिया कि अर्जेंटीना में फुटबॉल केवल खेल नहीं, बल्कि लोगों की भावनाओं और गर्व का हिस्सा है।

  • हरारे में होगी कांटे की टक्कर भारत और जिम्बाब्वे टी20 सीरीज पर सिकंदर रजा का बड़ा बयान जीत हार का फैसला करेगा प्रदर्शन

    हरारे में होगी कांटे की टक्कर भारत और जिम्बाब्वे टी20 सीरीज पर सिकंदर रजा का बड़ा बयान जीत हार का फैसला करेगा प्रदर्शन


    नई दिल्ली । भारत और जिम्बाब्वे के बीच 23 जुलाई से शुरू होने वाली तीन मैचों की टी20 सीरीज को लेकर क्रिकेट प्रेमियों में उत्साह बढ़ गया है। हरारे स्पोर्ट्स क्लब में खेले जाने वाले इस मुकाबले से पहले जिम्बाब्वे के कप्तान सिकंदर रजा ने बड़ा बयान देते हुए कहा है कि इस बार सीरीज पूरी तरह संतुलित रहेगी और दोनों टीमों के पास जीत हासिल करने के बराबर अवसर होंगे। रजा का मानना है कि मौजूदा परिस्थितियों में किसी भी टीम को कमजोर या मजबूत नहीं कहा जा सकता और मैदान पर बेहतर प्रदर्शन करने वाली टीम ही बाजी मारेगी।

    सिकंदर रजा ने कहा कि जिम्बाब्वे पिछले कुछ समय से लगातार प्रतिस्पर्धी क्रिकेट खेल रहा है और टीम का आत्मविश्वास पहले से कहीं ज्यादा मजबूत है। उन्होंने विश्वास जताया कि घरेलू परिस्थितियों का फायदा उनकी टीम को मिलेगा और दर्शकों को बेहद रोमांचक मुकाबले देखने को मिलेंगे। उनके अनुसार यह सीरीज किसी भी तरह से एकतरफा नहीं होगी क्योंकि दोनों टीमें बदलाव के दौर से गुजर रही हैं और नई रणनीतियों के साथ मैदान पर उतरेंगी।

    भारतीय टीम के लिए भी यह दौरा काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आयरलैंड और इंग्लैंड के खिलाफ लगातार टी20 सीरीज गंवाने के बाद टीम इंडिया जीत की राह पर लौटना चाहेगी। कप्तान श्रेयस अय्यर के सामने यह सीरीज खुद को साबित करने का बड़ा अवसर होगी। कप्तानी संभालने के बाद अब तक उन्हें सफलता नहीं मिली है इसलिए जिम्बाब्वे के खिलाफ सीरीज जीतना उनके लिए आत्मविश्वास बढ़ाने के साथ टीम के मनोबल के लिए भी बेहद जरूरी माना जा रहा है।

    भारत और जिम्बाब्वे के बीच टी20 मुकाबलों का इतिहास देखें तो अब तक दोनों टीमों के बीच कुल दस मैच खेले गए हैं जिनमें भारत ने सात मुकाबलों में जीत दर्ज की है जबकि जिम्बाब्वे तीन बार जीत हासिल करने में सफल रहा है। आंकड़े भले ही भारत के पक्ष में हों लेकिन हाल के वर्षों में जिम्बाब्वे ने अपने प्रदर्शन में उल्लेखनीय सुधार किया है और कई बड़ी टीमों को कड़ी चुनौती दी है। यही कारण है कि इस सीरीज को हल्के में नहीं लिया जा रहा।

    हरारे की पिच आमतौर पर बल्लेबाजों और गेंदबाजों दोनों के लिए संतुलित मानी जाती है। शुरुआती ओवरों में तेज गेंदबाजों को मदद मिलती है जबकि बाद में बल्लेबाज खुलकर रन बना सकते हैं। ऐसे में दोनों टीमों की रणनीति और मैदान पर लिए गए फैसले जीत हार में अहम भूमिका निभाएंगे। भारतीय टीम जहां अपनी मजबूत बल्लेबाजी और अनुभवी खिलाड़ियों पर भरोसा करेगी वहीं जिम्बाब्वे घरेलू परिस्थितियों और टीम भावना के दम पर उलटफेर करने की कोशिश करेगा।

    भारत और जिम्बाब्वे के बीच तीन मैचों की टी20 सीरीज के मुकाबले 23 जुलाई 25 जुलाई और 26 जुलाई को हरारे स्पोर्ट्स क्लब में खेले जाएंगे। सभी मैच भारतीय समयानुसार शाम साढ़े चार बजे शुरू होंगे। क्रिकेट प्रशंसकों को उम्मीद है कि यह सीरीज रोमांच संघर्ष और बेहतरीन प्रदर्शन से भरपूर होगी तथा दोनों टीमों के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिलेगी।

  • रियलिटी शो में रणनीति वाली चिट पर विवाद, धीरज धूपर ने मांगी माफी, रितेश देशमुख बोले- दोबारा हुई गलती तो होगी कार्रवाई

    रियलिटी शो में रणनीति वाली चिट पर विवाद, धीरज धूपर ने मांगी माफी, रितेश देशमुख बोले- दोबारा हुई गलती तो होगी कार्रवाई

    नई दिल्ली । रियलिटी शो ‘लॉक अप: सच या सजा’ के हालिया एपिसोड में अभिनेता धीरज धूपर एक विवाद के कारण सुर्खियों में आ गए। शो के होस्ट रितेश देशमुख ने उन पर और उनके परिवार पर शो के नियमों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया। रितेश ने खुलासा किया कि धीरज के परिवार की ओर से कथित तौर पर गेम से जुड़ी रणनीति वाले हस्तलिखित नोट शो के अंदर भेजने की कोशिश की गई थी। इस घटना को शो के नियमों के विरुद्ध बताते हुए उन्होंने धीरज को कड़ी चेतावनी दी और भविष्य में ऐसी किसी भी घटना पर सख्त कार्रवाई की बात कही।

    हालिया एपिसोड में रितेश देशमुख ने इस मुद्दे को खुलकर उठाया और धीरज धूपर से सीधे सवाल किए। उन्होंने बताया कि शो की टीम को कई बार ऐसी जानकारी मिली कि धीरज के परिवार की ओर से छोटे-छोटे हस्तलिखित नोट्स शो के भीतर पहुंचाने का प्रयास किया गया। इन नोट्स में गेम को बेहतर ढंग से खेलने और आगे बढ़ने से जुड़ी रणनीतियां लिखी गई थीं। रितेश ने स्पष्ट किया कि इस तरह की बाहरी सहायता शो की निष्पक्षता के खिलाफ है और किसी भी प्रतियोगी के लिए स्वीकार्य नहीं हो सकती।

    रितेश देशमुख ने बातचीत के दौरान यह भी बताया कि पहले भी एक अवसर पर धीरज के बेटे को मानवीय आधार पर उनसे मिलने की अनुमति दी गई थी। उस दौरान भी कथित रूप से परिवार की ओर से एक चिट भेजने की कोशिश हुई थी। हालांकि उस समय शो की टीम ने मामले को अधिक तूल नहीं दिया, लेकिन हाल में दोबारा ऐसी कोशिश सामने आने के बाद इसे गंभीरता से लिया गया। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रतियोगी को अपने खेल के लिए बाहरी सलाह या रणनीति लेना शो के नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है।

    होस्ट ने धीरज को अंतिम चेतावनी देते हुए कहा कि सभी प्रतिभागियों को अपनी समझ, क्षमता और निर्णय के आधार पर खेलना चाहिए। यदि भविष्य में इस तरह की कोई भी घटना दोहराई जाती है तो शो के नियमों के अनुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि प्रतियोगिता की निष्पक्षता बनाए रखना शो की सबसे बड़ी प्राथमिकता है और किसी भी प्रकार का पक्षपात या बाहरी हस्तक्षेप स्वीकार नहीं किया जाएगा।

    पूरा मामला सामने आने के बाद धीरज धूपर ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्हें इस कथित घटना की कोई जानकारी नहीं थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने कभी भी अपने परिवार से किसी प्रकार की बाहरी मदद या रणनीति भेजने के लिए नहीं कहा। अभिनेता ने रितेश देशमुख से माफी मांगते हुए भरोसा दिलाया कि वह अपने दम पर खेलना चाहते हैं और प्रतियोगिता को पूरी ईमानदारी के साथ आगे बढ़ाएंगे।

    धीरज ने कैमरे के माध्यम से अपने परिवार से भी अपील की कि भविष्य में इस तरह की कोई कोशिश न करें। उन्होंने कहा कि वह अपनी क्षमता और प्रदर्शन के आधार पर शो में आगे बढ़ना चाहते हैं और उन्हें किसी बाहरी सहायता की आवश्यकता नहीं है। इस घटनाक्रम के बाद शो में नियमों के पालन और निष्पक्ष प्रतियोगिता को लेकर चर्चा तेज हो गई है। दर्शकों की नजर अब इस बात पर रहेगी कि आने वाले एपिसोड में यह विवाद किस तरह आगे बढ़ता है और धीरज धूपर अपने प्रदर्शन से इस विवाद के बाद कैसी वापसी करते हैं।

  • मध्य प्रदेश में यूसीसी कानून को मिली मंजूरी भारी हंगामे और विपक्ष के विरोध के बीच विधानसभा से पास हुआ समान नागरिक संहिता विधेयक

    मध्य प्रदेश में यूसीसी कानून को मिली मंजूरी भारी हंगामे और विपक्ष के विरोध के बीच विधानसभा से पास हुआ समान नागरिक संहिता विधेयक


    मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन समान नागरिक संहिता यानी यूनिफॉर्म सिविल कोड विधेयक को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने सामने आ गए। सदन की कार्यवाही शुरू होते ही सरकार ने यूसीसी विधेयक चर्चा के लिए पेश किया जिसके बाद कांग्रेस ने इसका जोरदार विरोध शुरू कर दिया। विपक्ष ने विधेयक को प्रवर समिति के पास भेजने की मांग उठाई लेकिन सरकार ने इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया। इसके बाद विधानसभा में तीखी बहस नारेबाजी और हंगामे का दौर शुरू हो गया। अंततः भाजपा सरकार ने अपने बहुमत के आधार पर यूसीसी विधेयक को पारित करा लिया।

    विधेयक पेश होते ही नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि इतने महत्वपूर्ण कानून पर व्यापक चर्चा और विशेषज्ञों की राय जरूरी है इसलिए इसे सेलेक्ट कमेटी के पास भेजा जाना चाहिए। कांग्रेस के कई विधायकों ने इस मांग का समर्थन किया लेकिन सरकार अपने फैसले पर अडिग रही। मांग खारिज होने के बाद कांग्रेस विधायक सदन के वेल में पहुंच गए और जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी। सदन में बढ़ते शोरगुल और अव्यवस्था को देखते हुए विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर को कार्यवाही पहले दस मिनट और फिर पंद्रह मिनट के लिए स्थगित करनी पड़ी।

    कार्यवाही दोबारा शुरू होने पर भी माहौल शांत नहीं हुआ। कांग्रेस विधायक बाला बच्चन उमंग सिंघार आतिफ अकील और आरिफ मसूद ने यूसीसी को लेकर सरकार पर कई सवाल उठाए। विपक्ष का कहना था कि यह विधेयक संवैधानिक अधिकारों विशेषकर अल्पसंख्यकों के सांस्कृतिक और शैक्षिक अधिकारों को प्रभावित कर सकता है। कांग्रेस नेताओं ने संविधान के अनुच्छेद 29 का उल्लेख करते हुए कहा कि इस विषय पर सभी पक्षों से व्यापक संवाद होना चाहिए था। हालांकि सरकार ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए विधेयक को सामाजिक समानता और महिला सशक्तीकरण की दिशा में बड़ा कदम बताया।

    मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने सदन में अपने संबोधन के दौरान कहा कि समान नागरिक संहिता किसी विशेष वर्ग के खिलाफ नहीं बल्कि सभी नागरिकों के लिए समान अधिकार और समान जिम्मेदारियों की व्यवस्था सुनिश्चित करने वाला कानून है। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश के 93 प्रतिशत लोगों ने इस विधेयक का समर्थन किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यूसीसी लागू होने के बाद विवाह का शासकीय पंजीयन अनिवार्य होगा और एक पति या एक पत्नी रहते हुए दूसरा विवाह करने की अनुमति नहीं होगी। उन्होंने इसे सामाजिक समरसता और समान न्याय की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया।

    मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर तुष्टीकरण और वोट बैंक की राजनीति करने का आरोप भी लगाया और कहा कि यदि विपक्ष वास्तव में संविधान निर्माता डॉ भीमराव आंबेडकर के विचारों का सम्मान करता है तो उसे इस कानून का समर्थन करना चाहिए। मुख्यमंत्री के भाषण के दौरान भी कांग्रेस विधायक लगातार नारेबाजी करते रहे लेकिन सरकार ने चर्चा पूरी कराकर बहुमत के आधार पर विधेयक को पारित करा लिया।

    सदन की कार्यवाही शुरू होने से पहले भी कांग्रेस ने विधानसभा परिसर में यूसीसी के विरोध में सांकेतिक नाटक का मंचन किया। पार्टी ने आरोप लगाया कि सरकार बेरोजगारी महंगाई किसानों और युवाओं से जुड़े मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए यूसीसी जैसे विषयों को आगे ला रही है। इसके बावजूद सरकार ने स्पष्ट किया कि यह कानून प्रदेश में समान अधिकार और समान न्याय की दिशा में महत्वपूर्ण पहल साबित होगा।

  • अफवाहों के बीच करणवीर बोहरा ने तोड़ी चुप्पी, बोले- निजी जीवन पर अभी नहीं करना चाहता कोई बात, काम पर है पूरा फोकस

    अफवाहों के बीच करणवीर बोहरा ने तोड़ी चुप्पी, बोले- निजी जीवन पर अभी नहीं करना चाहता कोई बात, काम पर है पूरा फोकस

    नई दिल्ली । टीवी अभिनेता करणवीर बोहरा ने पिछले कुछ समय से उनकी शादीशुदा जिंदगी को लेकर चल रही तलाक की चर्चाओं पर पहली बार प्रतिक्रिया दी है। हालांकि उन्होंने इन अफवाहों पर विस्तार से बोलने से इनकार करते हुए स्पष्ट किया कि वह फिलहाल अपनी निजी जिंदगी को सार्वजनिक चर्चा का विषय नहीं बनाना चाहते। अभिनेता ने कहा कि जब वह किसी मुद्दे पर बात नहीं करना चाहते तो सम्मानपूर्वक मना कर देते हैं और उन्हें उम्मीद है कि लोग भी उनकी निजता का सम्मान करेंगे।

    करणवीर बोहरा और उनकी पत्नी तीजय सिद्धू को लंबे समय से टेलीविजन इंडस्ट्री के चर्चित और लोकप्रिय कपल्स में गिना जाता है। पिछले कुछ महीनों से दोनों के रिश्ते को लेकर अलग-अलग तरह की अटकलें सोशल मीडिया और मनोरंजन जगत में सामने आ रही थीं। इन खबरों के बीच पहली बार करणवीर ने अपनी चुप्पी तोड़ी, लेकिन उन्होंने किसी भी अफवाह की पुष्टि या खंडन करने के बजाय अपनी निजी सीमाओं का सम्मान करने की अपील की।

    अभिनेता ने सोशल मीडिया पर होने वाली ट्रोलिंग और नकारात्मक टिप्पणियों पर भी अपनी राय साझा की। उनका कहना था कि वह किसी भी नकारात्मक बात को अपने ऊपर हावी नहीं होने देते। इंटरनेट पर लोग क्या लिखते हैं, उससे वह मानसिक रूप से प्रभावित नहीं होते। उनके अनुसार हर व्यक्ति की अपनी राय हो सकती है, लेकिन उसका असर अपने काम और जीवन पर नहीं पड़ने देना चाहिए। उन्होंने सकारात्मक सोच बनाए रखने को सबसे महत्वपूर्ण बताया।

    करणवीर ने अपने पेशेवर सफर को लेकर भी खुलकर बात की। उन्होंने बताया कि उन्होंने कुछ समय पहले अपना प्रोडक्शन हाउस शुरू किया है और अब केवल अभिनय तक सीमित रहने के बजाय निर्माण और निर्देशन के क्षेत्र में भी सक्रिय हैं। उनका मानना है कि मनोरंजन उद्योग लगातार बदल रहा है और कलाकारों को समय के साथ अपनी भूमिका का विस्तार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि केवल अभिनय के भरोसे पूरा करियर नहीं चलाया जा सकता, इसलिए नए अवसरों और नए माध्यमों को अपनाना जरूरी है।

    उन्होंने यह भी खुलासा किया कि उनके करियर के दौरान उन्हें टेलीविजन के दो बड़े और लोकप्रिय शो ऑफर हुए थे, लेकिन उस समय दूसरी परियोजनाओं में व्यस्त होने के कारण वह उनका हिस्सा नहीं बन सके। अभिनेता ने स्वीकार किया कि आज भी उन्हें इस बात का अफसोस होता है कि वह उन चर्चित धारावाहिकों में काम नहीं कर पाए। हालांकि उनका मानना है कि हर कलाकार के करियर में ऐसे अवसर आते हैं, जिन्हें परिस्थितियों के कारण छोड़ना पड़ता है।

    करणवीर बोहरा ने यह भी कहा कि रियलिटी शोज ने उनके व्यक्तित्व को दर्शकों के करीब लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनका मानना है कि इन कार्यक्रमों के जरिए लोगों ने उन्हें केवल एक अभिनेता के रूप में नहीं, बल्कि एक पिता, दोस्त और सामान्य इंसान के रूप में भी जाना। यही वजह है कि दर्शकों के साथ उनका जुड़ाव पहले से अधिक मजबूत हुआ है।

    करणवीर बोहरा और तीजय सिद्धू की प्रेम कहानी भी लंबे समय से चर्चा में रही है। दोनों की मुलाकात एक साझा मित्र के माध्यम से हुई थी, जिसके बाद दोस्ती प्यार में बदली और वर्ष 2006 में दोनों ने विवाह कर लिया। आज यह दंपति तीन बेटियों के माता-पिता हैं। हालिया अफवाहों के बीच करणवीर की प्रतिक्रिया ने इतना जरूर स्पष्ट कर दिया है कि वह फिलहाल अपने निजी जीवन से अधिक अपने काम और परिवार की गरिमा बनाए रखने पर ध्यान देना चाहते हैं।

  • बिजली कंपनी के इंजीनियर पर लोकायुक्त का बड़ा शिकंजा आय से 258 प्रतिशत अधिक संपत्ति का खुलासा करोड़ों की फैक्ट्री आलीशान बंगले और लग्जरी गाड़ियां बरामद

    बिजली कंपनी के इंजीनियर पर लोकायुक्त का बड़ा शिकंजा आय से 258 प्रतिशत अधिक संपत्ति का खुलासा करोड़ों की फैक्ट्री आलीशान बंगले और लग्जरी गाड़ियां बरामद


    मध्य प्रदेशमध्य प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही कार्रवाई के बीच लोकायुक्त ने एक बड़ी छापेमार कार्रवाई करते हुए पश्चिम क्षेत्र बिजली वितरण कंपनी के सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर फाइनेंस शिवराम सेमिल के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का बड़ा मामला उजागर किया है। मंगलवार सुबह तड़के शुरू हुई इस कार्रवाई में इंदौर धार पीथमपुर बगदून मुरैना और अन्य स्थानों सहित कुल नौ ठिकानों पर एक साथ छापे मारे गए। शुरुआती जांच में सामने आया कि अधिकारी के पास उनकी वैध आय की तुलना में लगभग 258 प्रतिशत अधिक संपत्ति मौजूद है। इस खुलासे ने सरकारी विभागों में भ्रष्टाचार को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    लोकायुक्त की टीम ने जांच के दौरान कई अहम दस्तावेजों के साथ बड़ी मात्रा में नकदी और कीमती आभूषण भी बरामद किए। अधिकारियों के अनुसार घर से करीब चार किलो चांदी तीन सौ ग्राम सोना और लगभग तीन लाख रुपए नकद मिले हैं। इसके अलावा कई बैंक खातों निवेश संबंधी दस्तावेज और अचल संपत्तियों के रिकॉर्ड भी जांच के दायरे में लिए गए हैं। टीम को कई ऐसे दस्तावेज मिले हैं जिनसे करोड़ों रुपए की संपत्तियों और निवेश का पता चला है।

    जांच में यह भी सामने आया कि अधिकारी ने केवल अपने नाम पर ही नहीं बल्कि बेटे बहू दामाद और अन्य रिश्तेदारों के नाम पर भी कई संपत्तियां खरीदी थीं। इनमें आलीशान बंगले प्लॉट व्यावसायिक भवन और औद्योगिक इकाइयां शामिल हैं। पीथमपुर क्षेत्र में करोड़ों रुपए की फैक्ट्री और अन्य निर्माण कार्य भी जांच एजेंसियों के रडार पर हैं। लोकायुक्त अब इन संपत्तियों के वास्तविक स्वामित्व और उनमें लगाए गए धन के स्रोत की गहन जांच कर रही है।

    छापेमारी के दौरान कई लग्जरी वाहन और महंगे घरेलू सामान भी जांच के दायरे में आए हैं। टीम ने संपत्तियों के मूल्यांकन के लिए विशेषज्ञों की मदद ली है ताकि वास्तविक बाजार मूल्य का आकलन किया जा सके। जांच एजेंसियों का मानना है कि आगे की पड़ताल में और भी कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं।

    लोकायुक्त पुलिस ने शिवराम सेमिल के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण संशोधन अधिनियम 2018 की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। एसपी राजेश सहाय के नेतृत्व में डीएसपी सुनील तालान आनंद चौहान दिनेश पटेल दीपक शेजवार सहित कई अधिकारी अलग अलग स्थानों पर दस्तावेजों और रिकॉर्ड की जांच में जुटे हैं। बैंक खातों लेनदेन बेनामी संपत्तियों और निवेश के हर पहलू की पड़ताल की जा रही है।

    जांच एजेंसियों का कहना है कि यदि संपत्ति के स्रोत संतोषजनक नहीं पाए गए तो संबंधित संपत्तियों की जब्ती और अन्य कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है। इस कार्रवाई को मध्य प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रहे अभियान की बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। फिलहाल जांच जारी है और आने वाले दिनों में इस मामले में कई और महत्वपूर्ण खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

  • इंजीनियर से HCLTech के शीर्ष पद तक का सफर, रिकॉर्ड 176 करोड़ के पैकेज के साथ चर्चा में आए C. विजयकुमार

    इंजीनियर से HCLTech के शीर्ष पद तक का सफर, रिकॉर्ड 176 करोड़ के पैकेज के साथ चर्चा में आए C. विजयकुमार

    नई दिल्ली । भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी उद्योग में HCLTech के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और प्रबंध निदेशक C. विजयकुमार इन दिनों अपने रिकॉर्ड वेतन पैकेज को लेकर चर्चा में हैं। वित्त वर्ष 2025-26 के लिए उन्हें लगभग 176.47 करोड़ रुपये का कुल पारिश्रमिक मिला है, जिसके साथ वह देश के आईटी क्षेत्र के सबसे अधिक वेतन पाने वाले CEO बन गए हैं। यह पैकेज पिछले वित्त वर्ष की तुलना में उल्लेखनीय रूप से अधिक है और कॉर्पोरेट जगत में नेतृत्व, प्रदर्शन और पारिश्रमिक को लेकर नई चर्चा का विषय बन गया है।

    C. विजयकुमार का पेशेवर सफर एक इंजीनियर के रूप में शुरू हुआ था। उन्होंने अपने करियर के शुरुआती वर्षों में तकनीकी और प्रबंधन से जुड़ी विभिन्न जिम्मेदारियां निभाईं और धीरे-धीरे कंपनी के नेतृत्व तक पहुंचे। लंबे समय तक संगठन में अलग-अलग भूमिकाओं में काम करने के बाद उन्हें वर्ष 2016 में HCLTech का CEO और मैनेजिंग डायरेक्टर नियुक्त किया गया। उनके नेतृत्व में कंपनी ने वैश्विक स्तर पर अपनी मौजूदगी को मजबूत किया और नई तकनीकों पर केंद्रित रणनीति अपनाई।

    पिछले कुछ वर्षों में HCLTech ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्लाउड कंप्यूटिंग, साइबर सुरक्षा, डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन और इंजीनियरिंग सेवाओं जैसे क्षेत्रों में लगातार विस्तार किया है। कंपनी ने दुनिया के कई बड़े ग्राहकों के साथ अपने कारोबारी संबंध मजबूत किए हैं और नई तकनीकों में निवेश बढ़ाया है। इसी रणनीति का असर कंपनी की व्यावसायिक वृद्धि और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में उसकी स्थिति पर भी देखने को मिला है।

    विजयकुमार के कुल पारिश्रमिक में केवल मासिक वेतन ही शामिल नहीं है। इसमें मूल वेतन, प्रदर्शन आधारित बोनस, विभिन्न भत्ते और सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा शेयर आधारित प्रोत्साहन का है। बड़ी आईटी कंपनियां वरिष्ठ अधिकारियों को लंबे समय तक संगठन से जोड़कर रखने और उनके प्रदर्शन को प्रोत्साहित करने के लिए स्टॉक आधारित इंसेंटिव देती हैं। इसी कारण उनका कुल पैकेज 176 करोड़ रुपये से अधिक पहुंचा है।

    कंपनी के निदेशक मंडल ने उनके नेतृत्व में प्राप्त व्यावसायिक उपलब्धियों और भविष्य की विकास रणनीति को ध्यान में रखते हुए पारिश्रमिक में वृद्धि को मंजूरी दी। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक तकनीकी उद्योग में प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही है और ऐसे माहौल में अनुभवी नेतृत्व को बनाए रखने के लिए कंपनियां आकर्षक वेतन और दीर्घकालिक प्रोत्साहन योजनाओं का सहारा लेती हैं। यही वजह है कि बड़े कॉर्पोरेट समूहों में CEO के वेतन पैकेज में स्टॉक इंसेंटिव का हिस्सा लगातार बढ़ रहा है।

    HCLTech आज दुनिया के 60 से अधिक देशों में अपनी सेवाएं प्रदान कर रही है और विभिन्न उद्योगों के ग्राहकों के साथ काम कर रही है। कंपनी की डिजिटल सेवाओं, क्लाउड समाधान और AI आधारित तकनीकों पर बढ़ती पकड़ ने उसे वैश्विक आईटी उद्योग में मजबूत पहचान दिलाई है। C. विजयकुमार के नेतृत्व में कंपनी ने नवाचार और तकनीकी निवेश पर विशेष जोर दिया, जिससे उसकी प्रतिस्पर्धी क्षमता और कारोबारी विस्तार को नई गति मिली। उनके रिकॉर्ड वेतन पैकेज ने एक बार फिर यह बहस तेज कर दी है कि वैश्विक स्तर पर सफल नेतृत्व, कारोबारी प्रदर्शन और शेयरधारकों के हितों के बीच संतुलन बनाते हुए शीर्ष प्रबंधन के पारिश्रमिक का निर्धारण किस प्रकार किया जाता है।