Author: bharati

  • बाजार का झटका: पार्ट-टाइम चेयरमैन के त्यागपत्र के बाद HDFC Bank के स्टॉक्स में गिरावट

    बाजार का झटका: पार्ट-टाइम चेयरमैन के त्यागपत्र के बाद HDFC Bank के स्टॉक्स में गिरावट


    नई दिल्ली।  भारत के सबसे बड़े निजी क्षेत्र के बैंक HDFC Bank के शेयर गुरुवार को सुर्खियों में रहे, जब पार्ट-टाइम चेयरमैन और इंडिपेंडेंट डायरेक्टर Atanu Chakraborty ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। बैंक की एक्सचेंज फाइलिंग के अनुसार, चक्रवर्ती का इस्तीफा 18 मार्च से प्रभावी हो गया। इसके चलते सुबह 11:16 बजे एचडीएफसी बैंक का शेयर 802 रुपए पर था, जो 40 रुपए या 4.80 प्रतिशत की गिरावट को दर्शाता है।

    भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने बैंक के अनुरोध पर Keki Mistry को 19 मार्च से तीन महीने के लिए अंतरिम पार्ट-टाइम चेयरमैन के रूप में नियुक्त करने की मंजूरी दे दी। मिस्त्री ने निवेशकों और बाजार को आश्वस्त किया कि बैंक के भीतर कोई बड़ी समस्या नहीं है और बैंक संचालन सुचारू रूप से जारी है।

    चक्रवर्ती, जो 2021 में बैंक के बोर्ड में शामिल हुए थे, ने अपने इस्तीफे पत्र में कहा कि पिछले दो वर्षों में उन्होंने बैंक के भीतर कुछ ऐसी घटनाएं और प्रक्रियाएं देखीं जो उनके व्यक्तिगत मूल्यों और नैतिकता के अनुरूप नहीं थीं। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका निर्णय पूरी तरह से वैचारिक मतभेदों पर आधारित है और किसी भी प्रकार की अनियमितता या वित्तीय गड़बड़ी के कारण नहीं है। एनडीटीवी प्रॉफिट को दिए बयान में चक्रवर्ती ने कहा, “मैं बैंक में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी की ओर इशारा नहीं कर रहा हूं। मेरी विचारधाराएं संगठन से मेल नहीं खाती थीं, इसलिए अलग होने का समय आ गया था।”

    विश्लेषकों के अनुसार, बोर्ड स्तर पर किसी वरिष्ठ पदाधिकारी के इस्तीफे से शेयरों में अल्पकालिक अस्थिरता आम है। हालांकि, आरबीआई और बैंक प्रबंधन ने दोनों ने स्पष्ट किया है कि बैंक की वित्तीय स्थिति मजबूत है और संचालन पूरी तरह से पेशेवर ढंग से हो रहा है। मिस्त्री ने भी कहा कि उनकी नियुक्ति के पीछे प्राथमिक उद्देश्य संक्रमण काल को सुचारू रखना है, और निवेशकों को किसी प्रकार की चिंता करने की जरूरत नहीं है।

  • रिपोर्ट में खुलासा, पैकेज्ड फूड एंड बेवरेज सेक्टर में अगले चार वर्षों में बड़ी बढ़ोतरी

    रिपोर्ट में खुलासा, पैकेज्ड फूड एंड बेवरेज सेक्टर में अगले चार वर्षों में बड़ी बढ़ोतरी


    नई दिल्ली। भारत का पैकेज्ड फूड एंड बेवरिज मार्केट आने वाले वर्षों में तेजी से विस्तार करने की राह पर है। कंसल्टिंग फर्म रेडसीर स्ट्रैटेजी कंसल्टेंट्स की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, यह बाजार 2030 तक करीब 50 प्रतिशत बढ़कर 150 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है, जो वर्तमान में लगभग 100 अरब डॉलर के आसपास है। इस तेजी से बढ़ने के पीछे सबसे बड़ा हाथ क्विक कॉमर्स का माना जा रहा है, जिसने फार्मासिस्ट की खरीदारी की आदत को पूरी तरह बदल दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, अब क्विक कॉमर्स केवल ‘लास्ट मिनट’ बिजनेस तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह रोजमर्रा की खरीदारी का अहम हिस्सा बन चुका है।

    रिपोर्ट में बताया गया है कि क्विक कॉमर्स बिजनेस का सकल व्यापार मूल्य (GMV) 4 अरब डॉलर से बढ़कर 2030 तक 25 अरब डॉलर के पार जा सकता है। इसका मुख्य कारण है तेजी से डिलीवरी, सुविधा और बार-बार खरीदारी की बढ़ती प्रवृत्ति। आज के समय में 10-15 मिनट में डिलीवरी का ट्रेंड फार्मासिस्ट को आकर्षित कर रहा है, जिससे ऑन-डिमांड खपत तेजी से बढ़ रही है। देश के 250 से ज़्यादा शहरों में 5 करोड़ से ज़्यादा मासिक कमाने वालों के साथ, इस दूध की पैकेज्ड फ़ूड मार्केट में भी 2030 तक 4 प्रतिशत से बढ़कर 15-20 प्रतिशत तक पहुँचने का अनुमान है।

    बदले हुए लाइफस्टाइल और हेल्थ ट्रेंड्स से जहाँ मांग

    रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि बदले हुए लाइफस्टाइल और कंज्यूमर रहने वालों ने इस बढ़ोतरी को और गति दी है। खासकर युवा वर्ग अब प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थों और मोटापे से जूझने वालों की ओर तेज़ी से झुक रहा है। पैकेज्ड फ़ूड में ‘क्लीन लेबल’ और हेल्थ-फोकस्ड प्रोडक्ट्स की मांग बढ़ रही है। इसके अलावा, छोटे परिवार, व्यस्त लाइफस्टाइल और समय की कमी के चलते रेडी-टू-कुक और रेडी-टू-ईट दूध भी तेज़ी से लोकप्रिय हो रहे हैं।

    मृगांक गुटगुटिया ने इस ट्रेंड पर टिप्पणी करते हुए कहा कि क्विक कॉमर्स अब एक ‘संरचनात्मक शक्ति’ के रूप में उभर रहा है, जो न केवल डिस्ट्रीब्यूशन बल्कि प्रोडक्ट बढ़ाना, कैटेगरी स्ट्रेटेजी और निवेश को भी प्रभावित कर रहा है। उन्होंने संकेत दिया कि कंपनियां अब उपभोक्ता की तत्काल आमदनी और हेल्थ ट्रेंड्स को ध्यान में रखते हुए नए प्रोडक्ट लॉन्च कर रही हैं।

    स्वास्थ्य पर केंद्रित पेय पदार्थों की मांग भी तेजी से बढ़ रही है। चीजों पर प्रोटीन आधारित ड्रिंक्स और पैकेटबंद नारियल पानी जैसे विकल्पों को उपभोक्ता पसंद कर रहे हैं। कुल मिलाकर, क्विक कॉमर्स और बदले हुए उपभोक्ता आदत का मेल भारत के पैकेज्ड फूड एंड बेवरिज मार्केट को नई मजबूती तक पहुंचाने के लिए तैयार है।

  • अमेरिकी हमलों से कमजोर हुआ ईरान, लेकिन खतरा बरकरार: इंटेलिजेंस एजेंसियों की चेतावनी

    अमेरिकी हमलों से कमजोर हुआ ईरान, लेकिन खतरा बरकरार: इंटेलिजेंस एजेंसियों की चेतावनी


    वॉशिंगटन। हाल ही में हुए अमेरिकी सैन्य अभियानों के बाद ईरान की सैन्य और रणनीतिक क्षमताओं को बड़ा झटका लगा है लेकिन खतरा पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। संयुक्त राज्य अमेरिका की खुफिया एजेंसियों ने सीनेट को जानकारी देते हुए कहा है कि ईरानी शासन कमजोर जरूर हुआ है पर अब भी क्षेत्रीय स्थिरता और अमेरिकी हितों के लिए गंभीर चुनौती बना हुआ है।

    अमेरिका की नेशनल इंटेलिजेंस डायरेक्टर तुलसी गबार्ड ने सीनेट सिलेक्ट इंटेलिजेंस कमेटी को बताया कि हमलों के चलते ईरान की पारंपरिक सैन्य ताकत काफी हद तक प्रभावित हुई है। उन्होंने कहा कि ईरान की सैन्य शक्ति प्रदर्शित करने की क्षमता कमजोर पड़ी है जिससे उसके विकल्प सीमित हो गए हैं। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ईरानी सरकार अभी कायम है और समय के साथ अपनी सैन्य ताकत फिर से खड़ी करने की क्षमता रखती है।

    CIA के निदेशक जॉन रैटक्लिफ ने भी चेतावनी देते हुए कहा कि ईरान लंबे समय से अमेरिका के लिए खतरा रहा है और वर्तमान में यह खतरा और अधिक तात्कालिक हो गया है। उन्होंने ईरान की मिसाइल और स्पेस लॉन्च तकनीक को लेकर चिंता जताई और कहा कि यदि इसे बिना रोक-टोक जारी रहने दिया गया तो भविष्य में ईरान के पास पूरे अमेरिका तक मार करने वाली मिसाइल क्षमता हो सकती है।

    इंटेलिजेंस असेसमेंट के मुताबिक ईरान और उसके सहयोगी संगठन मध्य पूर्व में लगातार अमेरिकी हितों को निशाना बना रहे हैं। तुलसी गबार्ड ने बताया कि ईरान के प्रॉक्सी समूह क्षेत्र में सक्रिय हैं और समय-समय पर हमले करते रहते हैं।

    हालांकि सैन्य नुकसान के बावजूद ईरान की आंतरिक स्थिति पूरी तरह कमजोर नहीं हुई है। रिपोर्ट के अनुसार आर्थिक और राजनीतिक दबाव बढ़ने से देश के भीतर तनाव जरूर बढ़ सकता है लेकिन शासन अभी भी स्थिर बना हुआ है।

    अमेरिकी अधिकारियों ने यह भी कहा कि हाल के ऑपरेशनों जैसे ऑपरेशन एपिक फ्यूरी ने ईरान की न्यूक्लियर और मिसाइल क्षमताओं को बाधित किया है। इसके बावजूद सीनेटरों ने सवाल उठाया कि क्या ईरान से खतरा पूरी तरह खत्म हुआ है या नहीं।

    कुल मिलाकर अमेरिकी खुफिया एजेंसियों का आकलन है कि ईरान को भले ही सैन्य झटका लगा हो लेकिन वह अभी भी एक बड़ा रणनीतिक खतरा बना हुआ है और भविष्य में अपनी ताकत फिर से खड़ी कर सकता है।

  • उत्तराधिकारी की चर्चा के बीच नीतीश और सम्राट की बढ़ती नजदीकी ने बढ़ाई राजनीतिक हलचल

    उत्तराधिकारी की चर्चा के बीच नीतीश और सम्राट की बढ़ती नजदीकी ने बढ़ाई राजनीतिक हलचल

    नई दिल्ली/मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के बाद बिहार की सियासत में संभावित उत्तराधिकार को लेकर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। हाल के दिनों में मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के बीच दिखाई देने वाली नजदीकी ने इन अटकलों को और हवा दे दी है। विभिन्न मंचों पर नीतीश कुमार का सम्राट चौधरी के प्रति भरोसा और उन्हें आगे की जिम्मेदारियों के संकेत के रूप में देखे जा रहे बयानों ने राजनीतिक हलकों में कई तरह के कयासों को जन्म दिया है।

    सम्राट चौधरी को लेकर चर्चा तब और बढ़ गई जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपनी समृद्धि यात्रा के दौरान अलग अलग मंचों पर उनके साथ दिखे। जमुई में आयोजित कार्यक्रम के दौरान नीतीश कुमार ने यह संकेत दिया कि आगे की जिम्मेदारियां अब उन्हीं के नेतृत्व में आगे बढ़ेंगी। इस बयान को लेकर मीडिया और राजनीतिक विश्लेषकों ने इसे संभावित उत्तराधिकारी के रूप में पेश किए जाने का संकेत माना।

    हालांकि इस पूरे घटनाक्रम पर बिहार सरकार के वरिष्ठ मंत्री और नीतीश कुमार के करीबी विजय चौधरी ने स्थिति को स्पष्ट करने की कोशिश की है। उन्होंने इन सभी अटकलों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि इसमें कुछ भी नया नहीं है। उनके अनुसार मुख्यमंत्री का यह स्वभाव रहा है कि वह अपने सहयोगियों को प्रोत्साहित करते हैं और उन्हें भविष्य की जिम्मेदारियों के लिए प्रेरित करते हैं। विजय चौधरी ने यह भी कहा कि जिस तरह की व्याख्या की जा रही है वह मीडिया की अपनी कल्पना है और इसका वास्तविकता से कोई सीधा संबंध नहीं है।

    उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि सम्राट चौधरी उपमुख्यमंत्री के रूप में मुख्यमंत्री के साथ पूरी निष्ठा से काम कर रहे हैं और सरकार के कार्यों को आगे बढ़ाने में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण है। लेकिन साथ ही उन्होंने यह भी दोहराया कि किसी को भी उत्तराधिकारी के रूप में पेश किए जाने की बात को गलत तरीके से प्रचारित किया जा रहा है।

    राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी जोर पकड़ रही है कि नीतीश कुमार के बाद बिहार में सत्ता का स्वरूप कैसा होगा। कुछ लोग मानते हैं कि भारतीय जनता पार्टी को मुख्यमंत्री पद मिल सकता है जबकि जनता दल यूनाइटेड के हिस्से से दो उपमुख्यमंत्री बनाए जा सकते हैं। वहीं दूसरी ओर यह भी चर्चा है कि निशांत कुमार को भविष्य में एक महत्वपूर्ण भूमिका दी जा सकती है।

    इन तमाम चर्चाओं के बीच जातीय समीकरण और बिहार की राजनीति की जमीनी हकीकत को भी ध्यान में रखा जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बिहार में सत्ता का भविष्य केवल संकेतों या बयानों पर निर्भर नहीं करता बल्कि जमीनी गठजोड़ और राजनीतिक समीकरण भी उतने ही महत्वपूर्ण होते हैं।

    इस पूरे घटनाक्रम ने बिहार की राजनीति में एक नई बहस को जन्म दे दिया है और आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह अटकलें किस दिशा में जाती हैं और वास्तव में बिहार की सत्ता का अगला चेहरा कौन बनता है

  • RBI ने दिया भरोसा, HDFC Bank की फाइनेंशियल हेल्थ मजबूत, ग्राहकों को घबराने की जरूरत नहीं

    RBI ने दिया भरोसा, HDFC Bank की फाइनेंशियल हेल्थ मजबूत, ग्राहकों को घबराने की जरूरत नहीं


    नई दिल्ली। देश के सबसे बड़े निजी बैंकों में शुमार HDFC Bank को लेकर उठ रही चिंताओं के बीच Reserve Bank of India (आरबीआई) ने स्पष्ट शब्दों में भरोसा जताया है कि बैंक पूरी तरह से मजबूत स्थिति में है। गुरुवार को जारी बयान में केंद्रीय बैंक ने कहा कि एचडीएफसी बैंक एक ‘घरेलू स्तर पर प्रणालीगत रूप से महत्वपूर्ण बैंक’ (D-SIB) है, जिसका मतलब है कि यह देश की वित्तीय व्यवस्था के लिए बेहद अहम है। ऐसे में इसकी स्थिरता पर लगातार नजर रखी जाती है। आरबीआई के मुताबिक, बैंक के पास पर्याप्त पूंजी, मजबूत बैलेंस शीट और भरपूर तरलता मौजूद है, जिससे किसी भी तरह की तात्कालिक वित्तीय चिंता की गुंजाइश नहीं बनती।

    यह बयान ऐसे समय आया है जब बैंक के पार्ट-टाइम चेयरमैन Atanu Chakraborty ने ‘नैतिक मतभेद’ का हवाला देते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इस घटनाक्रम के बाद बाजार में हलचल देखी गई और बैंक के शेयरों में गिरावट भी दर्ज की गई। हालांकि, आरबीआई ने स्पष्ट किया कि उसने बैंक के हालिया घटनाक्रमों का संज्ञान लिया है और अपने नियमित मूल्यांकन में उसे बैंक के संचालन या प्रशासन में कोई गंभीर खामी नजर नहीं आई है। केंद्रीय बैंक ने यह भी कहा कि वह बैंक के बोर्ड और प्रबंधन के साथ आगे की रणनीति को लेकर लगातार संपर्क में है, जिससे पारदर्शिता और स्थिरता बनी रहे।

    अंतरिम चेयरमैन की नियुक्ति को मंजूरी, निवेशकों को दिया भरोसा

    इसी बीच आरबीआई ने बैंक के अनुरोध पर Keki Mistry को 19 मार्च से तीन महीने के लिए अंतरिम पार्ट-टाइम चेयरमैन नियुक्त करने की मंजूरी दे दी है। यह कदम संक्रमण काल को सुचारू रूप से संभालने के लिए उठाया गया है। केकी मिस्त्री, जो बैंकिंग और कॉरपोरेट जगत में एक अनुभवी नाम हैं, ने पद संभालने के बाद निवेशकों और विश्लेषकों को भरोसा दिलाया कि बैंक के अंदर कोई बड़ी समस्या नहीं है। उन्होंने साफ कहा कि अगर यह जिम्मेदारी उनके मूल्यों और सिद्धांतों के अनुरूप नहीं होती, तो वह इसे स्वीकार नहीं करते, खासकर 71 वर्ष की आयु में।

    कॉन्फ्रेंस कॉल के दौरान मिस्त्री ने यह भी संकेत दिया कि आरबीआई का तेजी से उनकी नियुक्ति को मंजूरी देना इस बात का प्रमाण है कि केंद्रीय बैंक बैंक के मौजूदा संचालन से संतुष्ट है। उन्होंने कहा कि बैंक का प्रबंधन पूरी तरह पेशेवर है और सभी प्रक्रियाएं नियामकीय मानकों के अनुरूप चल रही हैं। बाजार में आई अस्थायी गिरावट को उन्होंने सामान्य प्रतिक्रिया बताते हुए कहा कि निवेशकों को घबराने की जरूरत नहीं है। कुल मिलाकर, आरबीआई और बैंक प्रबंधन दोनों ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि एचडीएफसी बैंक की नींव मजबूत है और भविष्य को लेकर कोई बड़ा जोखिम फिलहाल नजर नहीं आता।

  • चैत्र नवरात्रि में उज्जैन का हरसिद्धि मंदिर बनता है आस्था का महापर्व स्थल जहां पूरी होती हैं मन की हर मुराद

    चैत्र नवरात्रि में उज्जैन का हरसिद्धि मंदिर बनता है आस्था का महापर्व स्थल जहां पूरी होती हैं मन की हर मुराद

    मध्य प्रदेश के धार्मिक और ऐतिहासिक नगर उज्जैन में स्थित हरसिद्धि माता मंदिर न केवल आस्था का केंद्र है बल्कि यह आध्यात्मिक ऊर्जा और विश्वास का एक अद्भुत संगम भी माना जाता है चैत्र नवरात्रि के अवसर पर यहां भक्तों की अपार भीड़ उमड़ती है और पूरा वातावरण भक्ति और श्रद्धा से भर जाता है इस मंदिर को 51 शक्तिपीठों में से एक माना जाता है और इसका संबंध सम्राट विक्रमादित्य की आस्था और भक्ति से भी जुड़ा हुआ है

    हरसिद्धि माता मंदिर विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग से कुछ ही दूरी पर स्थित है और इसकी ऐतिहासिकता हजारों वर्षों पुरानी बताई जाती है मान्यता है कि माता सती की दाहिनी कोहनी यहां गिरी थी जिसके कारण यह स्थान अत्यंत पवित्र माना जाता है और इसे मंगल चंडी शक्ति स्थल के रूप में जाना जाता है यहां माता को विशेष सिद्धि प्रदान करने वाली देवी के रूप में पूजा जाता है

    चैत्र नवरात्रि के दौरान मंदिर में विशेष पूजा अर्चना का आयोजन होता है पहले दिन प्रातःकाल मंदिर के पट खोले जाते हैं और विधिवत पूजा की शुरुआत होती है शैलपुत्री माता की आराधना के साथ घट स्थापना की जाती है और इसके बाद नौ दिनों तक क्रमशः सभी नौ देवियों की पूजा की जाती है इस दौरान मंदिर का वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो जाता है और दूर दूर से श्रद्धालु माता के दर्शन के लिए पहुंचते हैं

    हरसिद्धि मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यहां की विशाल दीपमाला है जिसे सम्राट विक्रमादित्य द्वारा स्थापित किया गया माना जाता है इस दीपमाला में लगभग 51 फीट ऊंचे दो दीप स्तंभ हैं जिनमें एक साथ 1011 दीपक प्रज्वलित किए जाते हैं दीपों की यह ज्योति न केवल दृश्य रूप से आकर्षक होती है बल्कि इसे अत्यंत शुभ और पवित्र भी माना जाता है पहले यह दीपमाला केवल नवरात्रि के दौरान ही प्रज्वलित की जाती थी लेकिन अब श्रद्धालुओं की आस्था और बुकिंग के चलते इसे नियमित रूप से जलाया जाने लगा है

    भक्तों की मान्यता है कि संध्या आरती के समय जब दीपमाला प्रज्वलित होती है और भक्त माता के सामने अपनी मनोकामना रखते हैं तो वह अवश्य पूर्ण होती है इसी विश्वास के कारण नवरात्रि के दिनों में मंदिर में भारी भीड़ रहती है और श्रद्धालु विशेष रूप से दीप जलाने के लिए पहुंचते हैं

    सम्राट विक्रमादित्य को इस मंदिर का प्रमुख भक्त और संरक्षक माना जाता है कहा जाता है कि उन्होंने यहां माता की कठोर तपस्या की और माता ने उन्हें विशेष कृपा प्रदान की जिसके बाद वे महान और न्यायप्रिय शासक बने यह कथा आज भी लोगों को प्रेरित करती है और उनकी आस्था को और भी मजबूत बनाती है

    नवरात्रि के नौ दिनों में मंदिर का हर कोना भक्ति के रंग में रंगा रहता है भजन कीर्तन और मंत्रोच्चार से वातावरण गूंजता रहता है और श्रद्धालु माता की कृपा पाने के लिए पूरे मन से पूजा अर्चना करते हैं हरसिद्धि माता का यह मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं बल्कि आस्था विश्वास और आध्यात्मिक शक्ति का प्रतीक है जहां हर भक्त अपनी मनोकामना लेकर आता है और उसे पूर्ण होने की आशा के साथ लौटता है

  • मिलावटी डेयरी मामले में जयश्री फूड्स के किशन मोदी की 11 संपत्तियां अटैच, 20 करोड़ की कार्रवाई

    मिलावटी डेयरी मामले में जयश्री फूड्स के किशन मोदी की 11 संपत्तियां अटैच, 20 करोड़ की कार्रवाई


    भोपाल। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल स्थित जयश्री गायत्री फूड प्रोडक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड के संचालक किशन मोदी की 20.59 करोड़ की संपत्ति प्रवर्तन निदेशालय ED ने अटैच कर दी है। ईडी ने “मिल्क मैजिक” ब्रांड से जुड़े मिलावटी डेयरी उत्पाद मामले में कार्रवाई करते हुए उनकी 11 अचल संपत्तियों को अटैच किया।

    न्यायिक हिरासत में किशन मोदी

    इस मामले में किशन मोदी मुख्य आरोपी हैं। पहले 13 मार्च 2026 को ईडी ने उन्हें गिरफ्तार किया था। 18 मार्च तक रिमांड पर रहने के बाद उन्हें अदालत में पेश किया गया, जहां से किशन मोदी को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।

    मामले का विवरण

    किशन मोदी पर आरोप है कि उन्होंने दूध में पाम ऑयल और हानिकारक रसायनों मिलाकर मिलावटी डेयरी उत्पाद तैयार किए और निर्यात किया। “मिल्क मैजिक” ब्रांड के तहत काम करने वाली इस कंपनी पर फर्जी लैब टेस्ट रिपोर्ट का इस्तेमाल कर बहरीन, हांगकांग, सिंगापुर, ओमान, कतर और UAE जैसे देशों में घटिया दूध और डेयरी उत्पाद भेजने का आरोप है। इस कार्रवाई से यह स्पष्ट हुआ कि प्रवर्तन निदेशालय और प्रशासन मिलावट और उपभोक्ता सुरक्षा के मामलों में कड़ी कार्रवाई कर रहा है।

  • ‘मूल्यों और सिद्धांतों के अनुरूप’-Keki Mistry ने संभाली HDFC Bank की कमान, RBI की मंजूरी

    ‘मूल्यों और सिद्धांतों के अनुरूप’-Keki Mistry ने संभाली HDFC Bank की कमान, RBI की मंजूरी


    नई दिल्ली।  देश के सबसे बड़े निजी बैंकों में शामिल HDFC Bank में अहम बदलाव देखने को मिला है। अनुभवी बैंकर केकी मिस्त्री को बैंक का अंतरिम अंतरिम डिपॉजिटरी नियुक्त किया गया है। Reserve Bank of India (RBI) ने उनकी नियुक्ति को 19 मार्च से तीन महीने की अवधि के लिए मंजूरी दे दी है। यह फैसला पूर्व डिपॉजिटरी अतनु चक्रवर्ती के इस्तीफे के बाद तेजी से लिया गया।

    ‘मूल्यों से समझौता नहीं’, मिस्त्री का स्पष्ट संदेश

    अपनी नियुक्ति के बाद केकी मिस्त्री ने कहा कि वे यह जिम्मेदारी केवल इसलिए स्वीकार करते हैं क्योंकि यह उनके व्यक्तिगत मूल्यों और सिद्धांतों के अनुरूप है। उन्होंने साफ कहा कि यदि यह भूमिका उनके सिद्धांतों के खिलाफ होती, तो वह इसे कभी स्वीकार नहीं करते। 71 वर्षीय मिस्त्री का यह बयान बैंकिंग जगत में चर्चा का विषय बना हुआ है।

    तेजी से हुए फैसले, RBI का भरोसा निरंतर

    मिस्त्री ने बताया कि अतनु चक्रवर्ती के इस्तीफे के बाद घटना काफी तेजी से आगे बढ़ी। बोर्ड की तत्काल बैठक हुई और निदेशकों ने Reserve Bank of India से बैठक की। RBI द्वारा इतनी जल्दी मंज़ूरी मिलने की बात का संकेत है कि केंद्रीय बैंक को एचडीएफसी बैंक की फ़ाइनेंशियल और एडमिनिस्ट्रेटिव स्थिति पर पूरा भरोसा है।

    RBI ने भी साफ़ किया है कि बैंक के ऑपरेशन या गवर्नेंस को लेकर कोई बड़ी चिंता नहीं है। बैंक की कैपिटल स्थिति मज़बूत है और मैनेजमेंट करने में सक्षम तरीकों से काम कर रहा है।

    बाज़ार में असर: नतीजों में गिरावट

    हालांकि इस वजह से बदलाव का असर शेयर बाज़ार पर देखने को मिला। HDFC Bank शेयर में गिरावट दर्ज की गई। खबर लिखने जाने तक NSE पर शेयर करीब 3.77% घटकर 811.50 रुपये पर ट्रेड कर रहा था, जबकि इंटर-डे में यह 8.40% से ज़्यादा गिरकर 770 रुपये तक पहुँच गया था।

    त्याग के पीछे ‘नैतिक मतभेद’

    अतनु चक्रवर्ती ने अपने त्याग में ‘व्यक्तिगत मूल्यों और नैतिक मतभेदों’ को वजह बताया था। बैंक ने भी साफ़ किया कि उनके त्याग के पीछे कोई और वजह नहीं है। बोर्ड ने उनके योगदान की तारीफ़ करते हुए उन्हें भविष्य के लिए शुभकामनाएँ दीं।

    आगे की राह: स्थिरता बनाए रखना बड़ी चुनौती

    अब केकी मिस्त्री के सामने सबसे बड़ी चुनौती बैंक की स्थिरता बनाए रखना और बैंकों का भरोसा कायम रखना होगा। तीन महीने के इस इंतज़ाम कार्यकाल में बैंक के गवर्नेंस और संचालन पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।

  • पावर सेक्टर में बड़ी उपलब्धि, भारत की क्षमता 520 GW पार; बिजली संकट हुआ कम

    पावर सेक्टर में बड़ी उपलब्धि, भारत की क्षमता 520 GW पार; बिजली संकट हुआ कम


    नई दिल्ली। भारत ने ऊर्जा क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए अपनी कुल बिजली उत्पादन क्षमता को जनवरी 2026 तक 520.51 गीगावाट तक पहुंचा दिया है। यह न सिर्फ देश की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने की दिशा में बड़ा कदम है, बल्कि आत्मनिर्भर भारत के विजन को भी मजबूत करता है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, जहां वित्त वर्ष 2014 में बिजली की कमी 4.2 प्रतिशत थी, वहीं दिसंबर 2025 तक यह घटकर महज 0.03 प्रतिशत रह गई है-जो ऊर्जा क्षेत्र में क्रांतिकारी सुधार का संकेत है।

    रिकॉर्ड बढ़ोतरी: एक साल में 52 गीगावाट से ज्यादा की छलांग

    वित्त वर्ष 2025-26 (31 जनवरी 2026 तक) के दौरान देश की ऊर्जा क्षमता में 52.53 गीगावाट की रिकॉर्ड वृद्धि दर्ज की गई, जो अब तक किसी एक वर्ष में सबसे ज्यादा है। इस बढ़ोतरी में अक्षय ऊर्जा (Renewable Energy) का सबसे बड़ा योगदान रहा। कुल बढ़ोतरी में 39.65 गीगावाट हिस्सा रिन्यूएबल सेक्टर से आया, जिसमें सोलर ऊर्जा ने 34.95 गीगावाट और पवन ऊर्जा ने 4.61 गीगावाट का योगदान दिया।

    इससे पहले 2024-25 में 34.05 गीगावाट की वृद्धि दर्ज की गई थी, यानी इस साल की रफ्तार कहीं ज्यादा तेज रही। यह साफ दर्शाता है कि भारत अब पारंपरिक ऊर्जा के साथ-साथ हरित ऊर्जा की ओर तेजी से बढ़ रहा है।

    ग्लोबल मंच पर भारत: भारत इलेक्ट्रिसिटी समिट 2026

    ऊर्जा क्षेत्र में इन उपलब्धियों को वैश्विक स्तर पर प्रस्तुत करने के लिए Bharat Electricity Summit 2026 का आयोजन नई दिल्ली के Yashobhoomi Convention Centre में 19 से 22 मार्च के बीच किया जा रहा है। यह सम्मेलन पावर और इलेक्ट्रिसिटी सेक्टर से जुड़े वैश्विक विशेषज्ञों, कंपनियों और नीति निर्माताओं को एक मंच पर लाता है।

    सिर्फ उत्पादन नहीं, ट्रांसमिशन नेटवर्क भी हुआ मजबूत

    सरकार ने केवल बिजली उत्पादन बढ़ाने पर ही नहीं, बल्कि ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम को भी मजबूत करने पर जोर दिया है। नए सबस्टेशन, अत्याधुनिक ट्रांसफार्मर और हाई-कैपेसिटी ट्रांसमिशन कॉरिडोर विकसित किए गए हैं, जिससे बिजली को उत्पादन केंद्र से उपभोक्ताओं तक तेजी और दक्षता से पहुंचाया जा सके।

    भारत का नेशनल पावर ट्रांसमिशन नेटवर्क अब 5 लाख सर्किट किलोमीटर (CKM) से ज्यादा का हो चुका है, जबकि ट्रांसफॉरमेशन क्षमता 1,407 गीगावोल्ट एम्पीयर (GVA) तक पहुंच गई है। इससे ग्रिड की स्थिरता बढ़ी है और अलग-अलग ऊर्जा स्रोतों का बेहतर एकीकरण संभव हुआ है।

    भविष्य के लिए मजबूत नींव

    ऊर्जा क्षेत्र में यह प्रगति सिर्फ वर्तमान जरूरतों को पूरा करने तक सीमित नहीं है, बल्कि भविष्य की मांग को ध्यान में रखकर की गई है। तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था, उद्योगों के विस्तार और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के बढ़ते चलन को देखते हुए यह क्षमता देश को लंबे समय तक ऊर्जा सुरक्षा प्रदान करेगी।

  • मैहर शारदा मंदिर में चैत्र नवरात्रि पर उमड़ा आस्था का सैलाब, त्रिकूट पर्वत गूंजा जय माता दी से

    मैहर शारदा मंदिर में चैत्र नवरात्रि पर उमड़ा आस्था का सैलाब, त्रिकूट पर्वत गूंजा जय माता दी से


    मैहर। मध्यप्रदेश के मैहर में चैत्र नवरात्रि के पहले दिन आस्था का रंग देखने लायक था। लगभग 600 फीट ऊंचे त्रिकूट पर्वत पर स्थित मां शारदा देवी मंदिर में देशभर से श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ा और हर ओर “जय माता दी” के जयकारे गूंज रहे थे। श्रद्धालु 1060 सीढ़ियों और रोपवे से दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं और भक्ति व उत्साह का माहौल पूरे धाम में छाया रहा।

    मंदिर का पौराणिक महत्व

    माना जाता है कि मां शारदा देवी मंदिर 51 शक्तिपीठों में से एक है। पौराणिक कथा के अनुसार माता सती का हार तांडव के दौरान यहीं गिरा था इसी कारण इस स्थान का नाम मैहर पड़ा। मंदिर के प्रधान पुजारी पवन पाण्डेय ने बताया कि मां शारदा “मैं” को हरने वाली हैं अर्थात् हमारे अंदर जो अहंकार और अज्ञान होता है उसे हरने वाली माता हैं।

    आल्हा की परंपरा और पूजा विधि

    लोककथाओं के अनुसार वीर योद्धा आल्हा आज भी ब्रह्ममुहूर्त में माता की प्रथम पूजा करते हैं। कई बार ऐसे प्रमाण मिले हैं जब सुबह मंदिर के पट खोलने पर बत्ती जलती पाई गई या आसपास कभी दिखाई न देने वाले फूल मंदिर में पाए गए। पुजारी पवन पाण्डेय ने बताया कि मां शारदा को नौ दिनों में अलग-अलग रूपों में पूजा जाता है। जो भक्त मंदिर दर्शन के लिए नहीं आ पाते वे मां शारदा के नाम का जप करें और व्रत रखें मां की कृपा बनी रहेगी।

    सुरक्षा और सुविधाएं

    नवरात्रि मेले में भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने कड़े सुरक्षा इंतजाम किए हैं। 600 से ज्यादा जवान जिनमें 40 महिला पुलिसकर्मी शामिल हैं 24 घंटे तैयार रहेंगे। इसके अलावा बम स्कॉट की टीमें सिविल ड्रेस में भी लगातार गश्त कर रही हैं। प्रशासन ने सीसीटीवी कैमरे और ड्रोन से निगरानी रखी है जबकि श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पेयजल स्वास्थ्य और भोजन की व्यवस्था भी सुनिश्चित की गई है। इस प्रकार मैहर में चैत्र नवरात्रि के पहले दिन श्रद्धालुओं ने माता शारदा देवी के दर्शन कर आस्था और भक्ति के साथ नव संवत्सर का स्वागत किया।