Author: bharati

  • टेक्नोलॉजी की मार! HSBC में हजारों कर्मचारियों पर संकट, AI से बढ़ी चिंता

    टेक्नोलॉजी की मार! HSBC में हजारों कर्मचारियों पर संकट, AI से बढ़ी चिंता


    नई दिल्ली। दुनिया के बड़े बैंकों में शामिल HSBC अब अपने काम को तेज, सटीक और कम खर्चीला बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (उपयोग) का सहारा लेने जा रहा है। इसी रणनीति के तहत बैंक आने वाले सालों में कर्मचारियों की संख्या में बड़ी कटौती पर विचार कर रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस कदम से करीब 20,000 नौकरियां प्रभावित हो सकती हैं, जो बैंक के कुल वैश्विक वर्कफोर्स का लगभग 10 प्रतिशत है। हालांकि, अगर इस पर अंतिम फैसला नहीं लिया गया है और चर्चा शुरुआती स्तर पर है।

    कौन सी नौकरियां सबसे ज्यादा खतरे में हैं?

    जनक के अनुसार, दिशानिर्देशों का सबसे ज्यादा असर उन पदों पर पड़ेगा जो सीधे ग्राहकों से जुड़े नहीं हैं। यानी मिडिल और बैक-ऑफिस से जुड़े कार्य जैसे डेटा प्रोसेसिंग, रिपोर्टिंग और ऑपरेशनल सपोर्ट अब धीरे-धीरे मशीनों और ऑटोमेशन से बदले जा सकते हैं। बैंक यह भी विचार कर रहा है कि जिन पदों पर कर्मचारी स्वेच्छा से नौकरी छोड़ रहे हैं, क्या उन्हें दोबारा भरा जाए या नहीं।

    CEO की रणनीति: कम लागत, ज़्यादा दक्षता

    जॉर्जेस एल्हेडरी के नेतृत्व में बैंक ने 2024 से ही बड़े लक्ष्यों की शुरुआत कर दी है। इसमें पहले ही हज़ारों कर्मचारियों की तैनाती, कुछ बिज़नेस यूनिट्स का विलय या बंद करना और लागत कम करने के उपाय शामिल हैं। 2025 के अंत तक बैंक में करीब 2.10 लाख कर्मचारी थे, लेकिन अब टेक्नोलॉजी के सहारे इस संख्या को कम करने की रणनीति बनाई जा रही है।

    ग्लोबल ट्रेंड: सिर्फ़ HSBC ही नहीं, पूरी इंडस्ट्री प्रभावित

    यह बदलाव सिर्फ़ एक बैंक तक सीमित नहीं है। पूरी ग्लोबल बैंकिंग इंडस्ट्री में आधुनिकीकरण और ऑटोमेशन तेज़ी से जगह बना रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, अगले 3 से 5 सालों में वैश्विक के बैंक मिलकर करीब 2 लाख नौकरियां खत्म कर सकते हैं। तकनीकी क्षमताओं का बढ़ना है कि कुल वर्कफोर्स में औसत 3 प्रतिशत तक की कमी आ सकती है।

    इस कड़ी में बड़ी टेक कंपनी मेटा प्लेटफॉर्म भी लागत नियंत्रण और आधुनिकीकरण इंफ्रास्ट्रक्चर पर निवेश बढ़ाने के लिए बड़े स्तर पर उन्नयन की तैयारी कर रही है। रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी अपने कर्मचारियों में 20 प्रतिशत तक कटौती कर सकती है।

    कर्मचारियों के लिए चेतावनी या अवसर?

    दिशानिर्देशों के इस बढ़ते प्रभाव को केवल खतरे के रूप में नहीं देखा जा सकता। दिशानिर्देशों का असर है कि जहां कुछ पारंपरिक नौकरियां खत्म होंगी, वहीं नई तकनीकी और दिशानिर्देशों आधारित भूमिकाएं भी तेजी से पैदा होंगी। ऐसे में कर्मचारियों के लिए जरूरी है कि वे अपनी स्किल्स को बढ़ाएं और क्रमिक टेक्नोलॉजी के साथ खुद को ढालें।

  • मध्यप्रदेश में नव संवत्सर और चैत्र नवरात्रि पर सीएम डॉ. मोहन यादव ने सूर्य देवता को अर्घ्य अर्पित, प्रदेश की खुशहाली की कामना

    मध्यप्रदेश में नव संवत्सर और चैत्र नवरात्रि पर सीएम डॉ. मोहन यादव ने सूर्य देवता को अर्घ्य अर्पित, प्रदेश की खुशहाली की कामना


    भोपाल। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुरुवार को चैत्र नवरात्रि के पहले दिन सुबह सूर्य देवता को अर्घ्य अर्पित किया। इस अवसर पर उन्होंने हिंदू नववर्ष और गुड़ी पड़वा की बधाई दी तथा प्रदेशवासियों के संकल्पों की सिद्धि हर आंगन में खुशहाली और प्रदेश की उन्नति की कामना की।

    सीएम डॉ. मोहन यादव ने सोशल मीडिया पर लिखा कि आज हिंदू नव वर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा विक्रम संवत 2083 एवं गुड़ी पड़वा के शुभ अवसर पर भगवान सूर्य को अर्घ्य देकर नमन किया और दिनचर्या की शुरुआत की। इस नए वर्ष में हम सभी के संकल्पों की सिद्धि हो हर आंगन में खुशहाली आए और प्रदेश उन्नति के नए सोपान गढ़े यही मंगलकामना है।

    अपने X अकाउंट पर उन्होंने नव संवत्सर पर यह भी लिखा कि चैत्र शुक्ल प्रतिपदा हिंदू नव वर्ष की आप सभी को हार्दिक बधाई और मंगलकामनाएं! नव संवत्सर विक्रम संवत 2083 आपके जीवन में नव चेतना नव ऊर्जा और असीम समृद्धि लाए। इस पुण्यभूमि पर प्रगति परिश्रम व परोपकार की त्रिवेणी सदा बहती रहे और पूरा विश्व इससे अभिसिंचित होता रहे यही कामना है। जयतु भारतम्! सीएम ने चैत्र नवरात्रि की भी शुभकामनाएं दीं और कहा कि पहले दिन यानी शैलपुत्री मां के दिन उनकी आशीर्वाद से सभी भक्तों के कष्ट दूर हों

    हर घर में सुख-शांति संपन्नता और आनंद का वास हो। उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा ॐ जयन्ती मङ्गला काली भद्रकाली कपालिनी। दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तु ते॥ देवी मां दुर्गा जी की आराधना के महापर्व चैत्र नवरात्रि की आप सभी को हार्दिक बधाई और मंगलकामनाएं।  इस प्रकार मुख्यमंत्री ने नव संवत्सर और चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर प्रदेशवासियों के लिए खुशहाली समृद्धि और उन्नति की प्रार्थना की और सामाजिक-सांस्कृतिक आस्था को मजबूती दी।

  • ग्लोबल तनाव का असर: शेयर बाजार में भारी गिरावट, सेंसेक्स लुढ़का और निवेशकों को बड़ा झटका

    ग्लोबल तनाव का असर: शेयर बाजार में भारी गिरावट, सेंसेक्स लुढ़का और निवेशकों को बड़ा झटका


    नई दिल्ली। मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर अब सीधे भारतीय शेयर बाजार पर दिखाई देने लगा है। लगातार तीन दिनों की तेजी के बाद गुरुवार को बाजार में भारी बिकवाली देखने को मिली, जिससे भारतीयों को तगड़ा झटका लगा। कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल और वैश्विक बाजारों में कमजोरी ने घरेलू बाजार की धार कमजोर कर दी। इसके अलावा अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व द्वारा नीतिगत नीतियों में कोई बदलाव न करने से भी भारतीयों की धारणा प्रभावित हुई।

    सेंसेक्स-निफ्टी में बड़ी गिरावट, भारतीयों के डूबे लाखों करोड़

    कारोबार के अंत में बीएसई सेंसेक्स 3.26 प्रतिशत यानी 2,496.89 अंक की भारी गिरावट के साथ 74,207.24 पर बंद हुआ। वहीं एनएसई निफ्टी 50 भी 775.65 अंक यानी 3.26 प्रतिशत टूटकर 23,002.15 के स्तर पर आ गया। दिन के दौरान बाजार में जबरदस्त उतार-चढ़ाव देखने को मिला, जहां सेंसेक्स 73,950 के निचले स्तर तक फिसल गया।

    इस गिरावट का सबसे बड़ा असर इक्विटी की कैपिटल पर पड़ा। बीएसई में लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप करीब 12 लाख करोड़ रुपये रहा। 438 लाख करोड़ से गिरकर लगभग 426 लाख करोड़ रुपये रह गया। यह गिरावट इक्विटी के लिए एक बड़ा झटका साबित हुई।

    हर सेक्टर लाल निशान में, ऑटो और रियल्टी सबसे ज्यादा प्रभावित

    गुरुवार का कारोबार लगभग सभी सेक्टर के लिए नुकसानदायक रहा। निफ्टी ऑटो इंडेक्स में सबसे ज्यादा 4.25% की गिरावट दर्ज की गई। इसके अलावा रियल्टी, फाइनेंस सर्विसेज, प्राइवेट बैंक, आईटी और मेटल सेक्टर में भी 3% से ज्यादा की गिरावट देखी गई। एफएमसीजी सेक्टर भी दबाव में रहा।

    निफ्टी 50 के लगभग सभी शेयर लाल निशान में बंद हुए। सिर्फ ONGC ने 1.55% की बढ़त के साथ बाजार में बढ़त दिखाई, जिसका कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी रहा।

    क्यों आई इतनी बड़ी गिरावट? समझिए कारण

    बाजार में इस भारी गिरावट के पीछे कई बड़े कारण रहे

    मध्य पूर्व में बढ़ते संघर्ष से वैश्विक अनिश्चितता

    कच्चे तेल की हालत में तेज उछाल

    फेडरल रिजर्व की नीतिगत सख्ती की धमकी

    विदेशी इंजीनियरों की बिकवाली

    विशेषज्ञों का मानना ​​है कि जब तक वैश्विक परिस्थितियां स्थिर नहीं होते, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।

    आगे क्या? इंजीनियरों के लिए संकेत

    विशेषज्ञों के अनुसार, बाजार में सावधानी गन्ने की जरूरत है। लंबी अवधि के इंजीनियरों के लिए यह गिरावट अवसर भी बन सकती है, लेकिन शॉर्ट टर्म में अस्थिरता बनी रह सकती है। कच्चे तेल की हालत और वैश्विक घटनाओं पर नजर रखना बेहद जरूरी होगा
  • यात्रियों की सुरक्षा पर फोकस, Ashwini Vaishnaw ने बताया QR कोड से रोकी जाएंगी अनधिकृत सेवाएं

    यात्रियों की सुरक्षा पर फोकस, Ashwini Vaishnaw ने बताया QR कोड से रोकी जाएंगी अनधिकृत सेवाएं


    नई दिल्ली।  ट्रेन यात्रियों को बेहतर और सुरक्षित निर्देशिका सुविधा देने के लिए भारतीय रेलवे ने बड़ा कदम उठाया है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने संसद में बताया कि अनधिकृत वेंडिंग सेवाओं पर रोक लगाने के लिए अब QR कोड आधारित पहचान प्रणाली लागू की जा रही है। इससे यात्रियों तक केवल सत्यापित (वेरिफाइड) विक्रेताओं की सेवाएं ही पहुंच पाएंगी।

    QR कोड ID से होगी विक्रेताओं की पहचान

    रेलवे ने ट्रेनों में काम करने वाले हर अधिकृत विक्रेता, सहायक और कर्मचारियों के लिए QR कोड वाले ID कार्ड अनिवार्य कर दिए हैं। इससे यात्रियों और अधिकारियों को तुरंत यह पता चल जाएगा कि कौन विक्रेता अधिकृत है और कौन नहीं। यह कदम सामानों पर फर्जी विक्रेताओं की समस्या को खत्म करने के लिए उठाया गया है।

    डिजिटल ट्रैकिंग से सुधरेगी खाने की क्वालिटी

    अब रेलवे द्वारा परोसे जाने वाले फूड पैकेट्स को भी डिजिटल तरीके से ट्रैक किया जा रहा है। इससे यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि खाना कहां तैयार हुआ, कैसे पहुंचाया और उसकी क्वालिटी कैसी है। इससे विक्रेताओं और यात्रियों को सुरक्षित भोजन मिलेगा।

    बेस किचन में आधुनिक सुविधाएं और निगरानी

    खाने की क्वालिटी सुधारने के लिए रेलवे ने कई अहम कदम उठाए हैं

    आधुनिक बेस किचन की स्थापना

    CCTV कैमरों के ज़रिए निगरानी

    ब्रांडेड और पिज्जा कच्चे माल का इस्तेमाल

    खाद्य सुरक्षा पर्यवेक्षकों की सेवाएं

    इन उपायों से खाना बनाने की पूरी प्रक्रिया पर नज़र रखी जा रही है।

    FSSAI सर्टिफिकेशन और सख्त जांच

    रेलवे ने सभी कैटरिंग यूनिट्स के लिए Food Safety and Standards Authority of India का प्रमाणन अनिवार्य कर दिया है। इसके साथ ही नियमित रूप से फूड सैंपल की जांच की जाती है, ताकि क्वालिटी और स्वच्छता मानकों का पालन सुनिश्चित हो सके।

    थर्ड-पार्टी ऑडिट और सर्वे से निगरानी

    पेंट्री कार और बेस किचन की सफाई और क्वालिटी जांच के लिए थर्ड-पार्टी ऑडिट संचालित किया जा रहा है। इसके अलावा यात्रियों से फायदा लेने के लिए ग्राहक संतुष्टि सर्वे भी किए जा रहे हैं, जिससे सेवाओं में लगातार सुधार किया जा सके।

    कर्मचारियों को मिल रहा ट्रेनिंग

    बेहतर ग्राहक सेवा सुनिश्चित करने के लिए इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉर्पोरेशन द्वारा निर्देशिका कर्मचारियों को नियमित ट्रेनिंग दी जा रही है। इससे उनके कौशल में सुधार हो रहा है और यात्रियों को बेहतर अनुभव मिल रहा है।

    यात्रियों के लिए क्या बदलेगा?

    इन सभी पैदल चलने वालों के बाद ट्रेन में मिलने वाला खाना अब ज्यादा सुरक्षित, स्वच्छ और भरोसेमंद होगा। साथ ही फर्जी वेंडर्स की समस्या भी काफी हद तक खत्म होने की उम्मीद है।

  • कांग्रेस विधायक मुकेश मल्होत्रा को सुप्रीम कोर्ट से मिली राहत, अगली सुनवाई तक स्टे

    कांग्रेस विधायक मुकेश मल्होत्रा को सुप्रीम कोर्ट से मिली राहत, अगली सुनवाई तक स्टे


    भोपाल। मध्यप्रदेश के कांग्रेस विधायक मुकेश मल्होत्रा को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिली है। अदालत ने उन्हें अगली सुनवाई तक स्टे रोक प्रदान किया है। मामले की अगली सुनवाई 23 जुलाई को होगी। मुकेश मल्होत्रा की पैरवी वरिष्ठ वकील एवं राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा ने की।

    इससे पहले ग्वालियर हाईकोर्ट ने मुकेश मल्होत्रा के चुनाव को शून्य घोषित किया था। हाईकोर्ट ने उन्हें 15 दिन का समय दिया था, ताकि वे सुप्रीम कोर्ट में अपील कर सकें। बीते 9 मार्च को हाईकोर्ट ने उनके खिलाफ चुनावी हलफनामे में क्रिमिनल केस छुपाने के आरोपों के चलते यह आदेश दिया था।

    हालांकि सुप्रीम कोर्ट से राहत मिलने के बावजूद, मुकेश मल्होत्रा राज्यसभा चुनाव में वोट नहीं कर पाएंगे, उन्हें मानदेय भी नहीं मिलेगा। हालांकि, वे विधानसभा की कार्यवाही में शामिल हो सकेंगे। याचिका जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की बेंच में सुनी गई। इस निर्णय से यह मामला फिलहाल स्थगित हुआ है और 23 जुलाई की अगली सुनवाई तक मुकेश मल्होत्रा के खिलाफ हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगी रहेगी।

  • किसानों के खाते में बड़ी राहत, PM-Kisan Yojana की कुल राशि 4.27 लाख करोड़ के पार

    किसानों के खाते में बड़ी राहत, PM-Kisan Yojana की कुल राशि 4.27 लाख करोड़ के पार


    नई दिल्ली। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना Pradhan Mantri Kisan Samman Nidhi ने किसानों को आर्थिक मजबूती देने में नया मुकाम हासिल कर लिया
    है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक, इस योजना के तहत अब तक 4.27 लाख करोड़ रुपए से अधिक की राशि सीधे किसानों के बैंक खातों में ट्रांसफर की जा चुकी है। हाल ही में Narendra Modi द्वारा जारी 22वीं किस्त ने इस आंकड़े को और आगे बढ़ा दिया है।

    22वीं किस्त से 9 करोड़ से ज्यादा किसानों को राहत

    इस महीने जारी की गई 22वीं किस्त के तहत 18,640 करोड़ रुपए से अधिक की राशि वितरित की गई, जिससे 9.32 करोड़ से ज्यादा किसानों को सीधा लाभ मिला। इनमें करीब 2.15 करोड़ महिला किसान भी शामिल हैं, जो इस योजना की व्यापक पहुंच को दर्शाता है।

    दुनिया की सबसे बड़ी DBT योजनाओं में शामि

    पीएम-किसान आज दुनिया की सबसे बड़ी Direct Benefit Transfer आधारित योजनाओं में गिनी जाती है। आधार-आधारित सत्यापन और डिजिटल भूमि रिकॉर्ड के जरिए यह सुनिश्चित किया जाता है कि सहायता सीधे सही लाभार्थी तक पहुंचे। इससे पारदर्शिता बढ़ी है और बिचौलियों की भूमिका लगभग खत्म हो गई है।

    किसानों की आय बढ़ाने में मददगार

    NITI Aayog और International Food Policy Research Institute के आकलन के अनुसार, इस योजना ने किसानों की आय बढ़ाने और उनकी कर्ज पर निर्भरता कम करने में अहम भूमिका निभाई है। समय पर मिलने वाली सहायता से किसान बीज, खाद और अन्य कृषि जरूरतों में निवेश कर पा रहे हैं।

    जमीनी स्तर पर दिख रहा असर

    देश के अलग-अलग हिस्सों में किसानों को इसका सीधा फायदा मिल रहा है। केरल की किसान भामिनी के मुताबिक, समय पर मिलने वाली राशि से वह अपनी खेती को बेहतर बना पा रही हैं। अंडमान-निकोबार के किसान अनिल हलदार ने इस मदद से तरबूज की खेती शुरू कर फसल विविधता बढ़ाई। वहीं जम्मू-कश्मीर के किसान दीपक सिंह नेगी इस राशि से खेती के जरूरी इनपुट खरीदकर उत्पादन और गुणवत्ता दोनों सुधार रहे हैं।

    बजट में भी मिला बड़ा समर्थन

    सरकार ने किसानों की आय सुरक्षा को मजबूत करने के लिए बजट 2026-27 में इस योजना के लिए 60,000 करोड़ रुपए का प्रावधान किया है। इससे साफ है कि सरकार इस योजना को और मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है।

    क्या है पीएम-किसान योजना?

    2019 में शुरू हुई इस योजना के तहत हर पात्र किसान परिवार को सालाना 6,000 रुपए की आर्थिक सहायता दी जाती है, जो 2,000 रुपए की तीन किस्तों में सीधे बैंक खाते में भेजी जाती है।

  • ग्वालियर में तानसेन होटल तिराहा पर तेल फैलने से बाइक सवार घायल, ट्रैफिक बाधित

    ग्वालियर में तानसेन होटल तिराहा पर तेल फैलने से बाइक सवार घायल, ट्रैफिक बाधित


    ग्वालियर । ग्वालियर के तानसेन होटल तिराहा पर गुरुवार को एक अज्ञात वाहन से काला तेल फैल जाने से आधा दर्जन से अधिक बाइक सवार फिसलकर चोटिल हो गए। घटना शहर के व्यस्ततम इलाके में हुई जहां से बड़ी संख्या में दोपहिया और चारपहिया वाहन गुजरते हैं।

    घटना के समय कई लोग गिरे हुए बाइक सवारों की मदद के लिए आगे आए लेकिन उन्होंने भी फिसलकर जमीन पर गिरने से चोटें लगीं। गवाहों ने बताया कि एक के बाद एक लोग गिरते नजर आए और वहां का माहौल पूरी तरह भयभीत हो गया।

    स्थानीय लोगों ने तुरंत पहल करते हुए अन्य वाहनों को मार्ग बदलने के लिए डाइवर्ट किया। थोड़ी देर में ट्रैफिक पुलिस भी मौके पर पहुंची और बैरिकेडिंग कर तेल फैली जगह को कवर किया ताकि आगे किसी दुर्घटना की संभावना कम हो सके। घायल बाइक सवार नितिन तिवारी ने घटना की जानकारी साझा की।

  • MSME सेक्टर को बड़ा बूस्ट: FTA से वैश्विक बाजार में बढ़ेगी भारतीय उद्योगों की पकड़

    MSME सेक्टर को बड़ा बूस्ट: FTA से वैश्विक बाजार में बढ़ेगी भारतीय उद्योगों की पकड़


    नई दिल्ली। भारत के लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) सेक्टर के लिए हाल के मुक्त व्यापार समझौता (FTA) किसी बड़े अवसर से कम नहीं हैं। खगेन मुर्मू ने गुरुवार को कहा कि सरकार की एफटीए नीति और डिजिटलीकरण पर बढ़ता फोकस छोटे उद्योगों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा बना रहा है। एसोचैम द्वारा आयोजित ‘ग्लोबल एसएमई कॉन्क्लेव’ में उन्होंने इसे एमएसएमई सेक्टर के लिए “गेमचेंजर” बताया।

    एमएसएमई-ऑस्ट्रेलिया जैसे व्यवसायों से खुला निर्यात का रास्ता

    मुर्मू ने विदेशों पर संयुक्त अरब अमीरात और ऑस्ट्रेलिया के साथ हुए एफटीए और यूरोपीय संघ के साथ खोए व्यवसायों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इन व्यवसायों के जरिए भारतीय उत्पादों को शून्य या बहुत कम टैरिफ पर विदेशी बाजारों तक पहुंच मिल रही है।

    इसका सीधा फायदा वस्त्र, हस्तशिल्प और इंजीनियरिंग जैसे सेक्टर को मिल रहा है, जहां भारतीय उत्पाद अब अंतरराष्ट्रीय बाजार में ज्यादा प्रतिस्पर्धा बन रहे हैं।

    निर्यात में एमएसएमई की बड़ी गतिविधियां

    भारत के कुल निर्यात में एमएसएमई सेक्टर का योगदान लगभग 45-48 प्रतिशत है। यह आंकड़ा बताता है कि छोटे उद्योग देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। मुर्मु ने जोर देकर कहा कि अब समय आ गया है कि ये उद्यम केवल घरेलू बाजार तक सीमित न रहें, बल्कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला का हिस्सा बनें।

    डिजिटलीकरण बना विकास का नया इंजन

    विशेषज्ञों के अनुसार, MSME सेक्टर के अगले विकास चरण में डिजिटलीकरण एक्टिव भूमिका निभाएगा। पद्मा जायसवाल ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल प्लेटफॉर्म और ऑनलाइन सेवाएं भारतीय MSME के ​​लिए 500 अरब डॉलर तक के नए बाजार अवसर खोल सकती हैं।

    उन्होंने यह भी बताया कि भारत के निर्यात और GDP में डिजिटल सेवाओं का योगदान करीब 25 प्रतिशत तक पहुंच चुका है।

    GeM और डिजिटल प्लेटफॉर्म से सीधा बाजार कनेक्शन

    सरकार के गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस और उद्यम पोर्टल जैसे प्लेटफॉर्म छोटे उद्योगों को सीधे मनरेगा से जोड़ने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। इससे बिचौलियों की भूमिका कम हो रही है और छोटे उद्योगों को बेहतर कीमत और बाजार मिल रहा है।

    हालांकि, विश्लेषकों ने यह भी माना कि इन प्लेटफॉर्म के बारे में जागरूकता और कौशल विकास बढ़ाने की जरूरत है, ताकि ज्यादा से ज्यादा छोटे उद्योग इसका लाभ उठा सकें।

    वैश्विक सप्लायर बनने की दिशा में भारत

    सम्मेलन में यह स्पष्ट किया गया कि भारत का लक्ष्य अब केवल उत्पादन करना नहीं, बल्कि वैश्विक उपलब्धता चेन में मजबूत स्थान बनाना है। एफटीए और डिजिटल एकीकरण के माध्यम से एमएसएमई सेक्टर तेजी से इस दिशा में आगे बढ़ रहा है।

  • नव संवत्सर पर महाकाल मंदिर में नीम मिश्रित जल से अभिषेक, ब्रह्मध्वज से हुई परंपरा की पुनःस्थापना

    नव संवत्सर पर महाकाल मंदिर में नीम मिश्रित जल से अभिषेक, ब्रह्मध्वज से हुई परंपरा की पुनःस्थापना


    उज्जैन । उज्जैन में गुड़ी पड़वा और नव संवत्सर के अवसर पर महाकालेश्वर मंदिर में विशेष धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुए। भक्तों ने ॐ श्री महाकालेश्वराय नमः के जयघोष के साथ नूतन वर्ष का स्वागत किया। इस अवसर पर भगवान महाकाल का परंपरानुसार नीम मिश्रित जल से अभिषेक किया गया जो नववर्ष की शुरुआत में शुद्धि और आरोग्यता की कामना का प्रतीक है।

    नीम के औषधीय गुणों को ध्यान में रखते हुए यह अभिषेक न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है बल्कि स्वास्थ्य और सकारात्मक ऊर्जा का संदेश भी देता है। भक्तों ने इस मौके पर सुख शांति और निरोग जीवन की प्रार्थना की।

    इसके साथ ही महाकालेश्वर मंदिर में चैत्र शुक्ल प्रतिपदा गुड़ी पड़वा के दिन मंदिर के शिखर पर ब्राह्मध्वज का भव्य ध्वजारोहण किया गया। यह परंपरा सम्राट विक्रमादित्य के काल की लगभग 2000 साल पुरानी गौरवशाली परंपरा का पुनरुद्धार है। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में इस पहल के तहत विक्रम संवत और ध्वज परंपरा को फिर से व्यापक स्वरूप दिया गया है।

    यह आयोजन न केवल धार्मिक महत्त्व रखता है बल्कि भारतीय संस्कृति की श्रेष्ठता और प्राचीन गौरव का प्रतीक भी माना जाता है। बाबा महाकाल के दरबार में नव संवत्सर की शुरुआत विशेष पूजा अभिषेक और ब्रह्मध्वज के साथ हुई जिससे श्रद्धालुओं में उल्लास और आस्था का माहौल बना रहा।

  • चयन समिति में स्थिरता की चाह, Ajit Agarkar 2027 तक पद पर बने रहने के इच्छुक

    चयन समिति में स्थिरता की चाह, Ajit Agarkar 2027 तक पद पर बने रहने के इच्छुक


    नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट में एक बार फिर चयन समिति को लेकर हलचल तेज हो गई है। टीम इंडिया के मुख्य चयनकर्ता Ajit Agarkar ने Board of Control for Cricket in India से अपना कार्यकाल बढ़ाने की इच्छा जताई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अगरकर वनडे विश्व कप 2027 तक इस अहम पद पर बने रहना चाहते हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में बीसीसीआई का फैसला भारतीय क्रिकेट की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

    शानदार प्रदर्शन के बाद बढ़ी दावेदारी

    अगरकर का कार्यकाल जून 2023 में शुरू हुआ था और एक एक्सटेंशन के बाद यह जून 2026 तक निर्धारित है। उनके नेतृत्व में भारतीय टीम ने सीमित ओवरों के क्रिकेट में जबरदस्त सफलता हासिल की है। टीम इंडिया ने ICC T20 World Cup में दो बार खिताब जीता, साथ ही ICC Champions Trophy और एशिया कप 2023 व 2025 में भी जीत दर्ज की।

    इन उपलब्धियों के चलते अगरकर की दावेदारी मजबूत मानी जा रही है और वह इस सफलता की निरंतरता बनाए रखने के लिए 2027 तक चयन समिति का नेतृत्व करना चाहते हैं।

    📊 टेस्ट क्रिकेट में प्रदर्शन बना चिंता का विषय

    हालांकि, सीमित ओवरों में सफलता के बावजूद टेस्ट क्रिकेट में टीम का प्रदर्शन उम्मीद के अनुरूप नहीं रहा। भारत Border-Gavaskar Trophy के फाइनल में जगह बनाने से चूक गया। इसके अलावा न्यूजीलैंड और दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ घरेलू सीरीज में क्लीन स्वीप झेलना पड़ा।

    इसी दौरान टीम में बड़े बदलाव भी देखने को मिले। Rohit Sharma और Virat Kohli ने टेस्ट क्रिकेट से दूरी बनाई, जबकि Ravichandran Ashwin ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास ले लिया। इन फैसलों के पीछे चयन नीति और भविष्य की अनिश्चितता को भी एक कारण माना गया।

    बीसीसीआई के सामने बड़ा फैसला

    रिपोर्ट्स के अनुसार, बीसीसीआई फिलहाल अगरकर के प्रस्ताव पर विचार कर रहा है। वहीं, उनकी जगह लेने के लिए एक पूर्व भारतीय क्रिकेटर का नाम भी चर्चा में है, जिससे इस पद को लेकर प्रतिस्पर्धा बनी हुई है। अब सवाल यह है कि क्या बोर्ड स्थिरता और निरंतरता को प्राथमिकता देगा या फिर नए चेहरे के साथ नई रणनीति अपनाएगा।

    सीमित ओवरों में दबदबा, भविष्य की रणनीति अहम

    अगरकर के कार्यकाल में भारत ने आईसीसी और एशियाई टूर्नामेंट्स में अपना दबदबा कायम रखा है। खासकर टी20 फॉर्मेट में टीम की मजबूती साफ नजर आई है। ऐसे में 2027 वनडे विश्व कप को ध्यान में रखते हुए चयन समिति की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।