Author: bharati

  • संसद मार्च के दौरान प्रदर्शन पर बवाल, लाठीचार्ज के बाद सरकार पर बरसे शशि थरूर, विपक्ष ने संसद में चर्चा की उठाई मांग

    संसद मार्च के दौरान प्रदर्शन पर बवाल, लाठीचार्ज के बाद सरकार पर बरसे शशि थरूर, विपक्ष ने संसद में चर्चा की उठाई मांग


    नई दिल्ली ।
    संसद के मानसून सत्र के पहले दिन राजधानी में हुए प्रदर्शन और उसके दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर राजनीतिक माहौल गर्म हो गया। जंतर-मंतर से संसद की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों को रोकने के दौरान हुई झड़प और पुलिस द्वारा भीड़ को नियंत्रित करने के लिए बल प्रयोग किए जाने के बाद विपक्ष ने केंद्र सरकार पर तीखे सवाल उठाए। इस घटनाक्रम को लेकर संसद के भीतर और बाहर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है।

    प्रदर्शनकारियों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर संसद की ओर मार्च करने का प्रयास किया। सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए पुलिस ने उन्हें आगे बढ़ने से रोका। इस दौरान स्थिति तनावपूर्ण हो गई और भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज तथा आंसू गैस का इस्तेमाल किया। घटना के बाद कई प्रदर्शनकारी मौके से हट गए, जबकि पूरे घटनाक्रम को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का सिलसिला शुरू हो गया।

    कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने इस कार्रवाई पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में विरोध प्रदर्शन करने वालों की बात सुनी जानी चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि सरकार के पास पर्याप्त बहुमत है तो फिर चर्चा से परहेज क्यों किया जा रहा है। थरूर ने कहा कि संसद का उद्देश्य जनहित के मुद्दों पर विचार-विमर्श करना है और लोकतांत्रिक संस्थाओं का महत्व संवाद से ही मजबूत होता है। उन्होंने प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए शांतिपूर्ण तरीके से समाधान निकालने की आवश्यकता पर बल दिया।

    कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी इस घटनाक्रम पर सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि छात्रों और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर सरकार को अधिक संवेदनशील रवैया अपनाना चाहिए। उनका कहना था कि यदि परीक्षा व्यवस्था और उससे जुड़े मामलों में लगातार विवाद सामने आ रहे हैं तो सरकार को इसकी जिम्मेदारी स्वीकार करनी चाहिए। उन्होंने प्रदर्शनकारियों पर हुई कार्रवाई को लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत बताते हुए इस पूरे मामले पर जवाबदेही तय करने की मांग की।

    इधर, संसद के मानसून सत्र के दौरान भी विपक्ष ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया। विपक्षी दलों ने शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा संबंधी विवादों और युवाओं से जुड़े विषयों पर विस्तृत चर्चा कराने की मांग दोहराई। उनका कहना है कि ऐसे विषय सीधे लाखों छात्रों और उनके भविष्य से जुड़े हैं, इसलिए सरकार को इन पर स्पष्ट जवाब देना चाहिए।

    इस बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की। मुलाकात को लेकर विभिन्न तरह की राजनीतिक चर्चाएं शुरू हुईं, हालांकि आधिकारिक तौर पर बैठक के एजेंडे या किसी संभावित निर्णय की जानकारी सामने नहीं आई। वहीं, प्रदर्शन से जुड़े कुछ प्रमुख प्रतिनिधियों ने अपने आंदोलन की आगामी रणनीति पर भी विचार किया। आंदोलन से जुड़े अभिजीत दीपके ने अपनी भूख हड़ताल समाप्त करने की घोषणा की, जबकि पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने भी अपनी ओर से आंदोलन को लेकर आगे की रूपरेखा साझा की और सरकार के सामने रखी गई मांगों का उल्लेख किया।

    संसद सत्र के साथ ही यह मुद्दा अब राजनीतिक बहस का प्रमुख विषय बन गया है। आने वाले दिनों में संसद के भीतर इस पर तीखी चर्चा होने की संभावना जताई जा रही है। विपक्ष सरकार से इस पूरे घटनाक्रम पर विस्तृत जवाब और संबंधित मुद्दों पर चर्चा की मांग कर रहा है, जबकि सरकार की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है।

  • नशे के खिलाफ इंदौर का विश्व रिकॉर्ड: 8,534 लोगों की मानव श्रृंखला, पुलिस ने तोड़ा अपना ही रिकॉर्ड

    नशे के खिलाफ इंदौर का विश्व रिकॉर्ड: 8,534 लोगों की मानव श्रृंखला, पुलिस ने तोड़ा अपना ही रिकॉर्ड


    इंदौर । नशे के खिलाफ जनजागरण की दिशा में इंदौर ने एक बार फिर देश के सामने मिसाल पेश की है। इंदौर पुलिस कमिश्नरेट के ‘नशे से दूरी है जरूरी 2.0’ अभियान के तहत सोमवार को शहर में 8,534 लोगों ने एक साथ मानव श्रृंखला बनाकर नया विश्व रिकॉर्ड स्थापित किया। इस उपलब्धि के साथ इंदौर पुलिस ने अपना ही पुराना रिकॉर्ड भी पीछे छोड़ दिया। इससे पहले नशे के खिलाफ 7,100 लोगों की मानव श्रृंखला का विश्व रिकॉर्ड भी इंदौर पुलिस के नाम दर्ज था। इस बार बड़ी संख्या में नागरिकों की भागीदारी ने न केवल रिकॉर्ड बनाया, बल्कि समाज को नशामुक्त बनाने का सशक्त संदेश भी दिया।

    इस ऐतिहासिक आयोजन में स्कूल और कॉलेजों के विद्यार्थी, खिलाड़ी, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि, नगर सुरक्षा समिति के सदस्य, पुलिस अधिकारी-कर्मचारी और शहर के हजारों नागरिक शामिल हुए। सभी ने हाथों में हाथ डालकर लंबी मानव श्रृंखला बनाई और नशे के खिलाफ एकजुटता का संदेश दिया। कार्यक्रम का उद्देश्य केवल रिकॉर्ड बनाना नहीं, बल्कि युवाओं और समाज को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करना था।

    कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पुलिस कमिश्नर संतोष कुमार सिंह ने कहा कि नशे के खिलाफ लड़ाई सिर्फ पुलिस की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि पूरे समाज की साझी जिम्मेदारी है। उन्होंने मौजूद सभी लोगों को नशे से दूर रहने और दूसरों को भी इसके खिलाफ जागरूक करने की शपथ दिलाई। इस दौरान सभी प्रतिभागियों ने नशामुक्त इंदौर और नशामुक्त भारत के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का संकल्प लिया।

    इंदौर पुलिस के अनुसार इस आयोजन में केवल मानव श्रृंखला का रिकॉर्ड ही नहीं बनाया गया, बल्कि एक साथ इतने बड़े समूह को पुलिस कमिश्नर द्वारा नशामुक्ति की शपथ दिलाने के आधार पर भी दूसरे विश्व रिकॉर्ड का दावा किया गया है। यानी एक ही कार्यक्रम के माध्यम से दो अलग-अलग विश्व रिकॉर्ड दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। संबंधित एजेंसी को सभी आवश्यक दस्तावेज और प्रमाण भेजे जा रहे हैं।

    ‘नशे से दूरी है जरूरी 2.0’ अभियान पिछले कुछ समय से शहरभर में लगातार चलाया जा रहा है। इसके तहत पुलिस स्कूलों, कॉलेजों, कोचिंग संस्थानों, बस्तियों और विभिन्न सामाजिक संगठनों तक पहुंचकर युवाओं और आम नागरिकों को नशे के दुष्प्रभावों के बारे में जागरूक कर रही है। अभियान के दौरान संवाद कार्यक्रम, शपथ समारोह, रैलियां और जनजागरूकता गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं ताकि समाज के हर वर्ग तक यह संदेश पहुंचे कि नशा केवल व्यक्ति ही नहीं, बल्कि पूरे परिवार और समाज को प्रभावित करता है।

    इंदौर पहले भी स्वच्छता, जनभागीदारी और सामाजिक अभियानों में अपनी अलग पहचान बना चुका है। अब नशामुक्त समाज के संकल्प के साथ शहर ने एक और उपलब्धि अपने नाम कर ली है। बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी यह दर्शाती है कि यदि प्रशासन और समाज मिलकर किसी उद्देश्य के लिए काम करें तो सकारात्मक बदलाव संभव है।

    पुलिस का कहना है कि अभियान भविष्य में भी इसी तरह जारी रहेगा और शहर के अधिक से अधिक युवाओं को इससे जोड़ा जाएगा। प्रशासन का लक्ष्य केवल रिकॉर्ड बनाना नहीं, बल्कि नशे के खिलाफ ऐसी सामाजिक चेतना विकसित करना है, जिससे आने वाली पीढ़ियां सुरक्षित और स्वस्थ वातावरण में आगे बढ़ सकें। इंदौर का यह प्रयास देश के अन्य शहरों के लिए भी प्रेरणा बन सकता है।

  • पोस्टल असिस्टेंट हत्याकांड: पति के शव पर सस्पेंस बरकरार, DNA रिपोर्ट करेगी सबसे बड़े राज का खुलासा

    पोस्टल असिस्टेंट हत्याकांड: पति के शव पर सस्पेंस बरकरार, DNA रिपोर्ट करेगी सबसे बड़े राज का खुलासा


    इंदौर । इंदौर की पोस्टल असिस्टेंट उर्मिला सैनी हत्याकांड में एक नया और बेहद रहस्यमयी मोड़ सामने आया है। आरोपी पति अखिलेश सैनी के कथित सिरकटे शव की पहचान को लेकर अब भी सस्पेंस बरकरार है। एक ओर पिता और भाई ने शव को अखिलेश का बताते हुए उसकी पहचान कर ली है, वहीं दूसरी ओर उसकी 15 वर्षीय बेटी प्रेक्षा ने बिना सिर के शव को अपने पिता का मानने से साफ इनकार कर दिया है। ऐसे में पुलिस अब किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने के बजाय वैज्ञानिक जांच का इंतजार कर रही है। पूरे मामले की सच्चाई अब DNA रिपोर्ट पर टिकी हुई है, जिसके आने में करीब 10 दिन लग सकते हैं।

    मामला 11 जुलाई को हुई पोस्टल असिस्टेंट उर्मिला सैनी की हत्या से जुड़ा है। पत्नी की हत्या के बाद से ही अखिलेश सैनी फरार था। शनिवार रात गंजबासौदा-पवई रेलवे स्टेशन के बीच रेलवे ट्रैक पर एक सिरकटा शव मिला। शव की पैंट की जेब से अखिलेश के आधार कार्ड सहित अन्य दस्तावेज और तीन कथित सुसाइड नोट बरामद हुए। इसके बाद पुलिस ने परिजनों को बुलाकर पहचान कराई।

    सोमवार सुबह अखिलेश के पिता सीताराम सैनी और भाई चित्रेश सैनी ने शव की पहचान अखिलेश के रूप में की। पिता ने बताया कि बेटे की नाभि में बीमारी के कारण सूजन थी और शरीर पर सफेद दाग थे, जिनके आधार पर उन्होंने उसकी पहचान की। पोस्टमार्टम के बाद शव उन्हें सौंप दिया गया और अंतिम संस्कार भोपाल के टीला जमालपुरा में किए जाने की तैयारी की गई।

    हालांकि कहानी में नया मोड़ तब आया जब अखिलेश की बेटी प्रेक्षा ने शव को पहचानने से इनकार कर दिया। उसका कहना था कि सिर नहीं होने की स्थिति में वह यह नहीं मान सकती कि यह उसके पिता का शव है। पुलिस ने उसे आधार कार्ड और अन्य दस्तावेजों की जानकारी भी दी, लेकिन उसने केवल धड़ देखकर पहचान स्वीकार नहीं की। गौरतलब है कि मां की हत्या के बाद से प्रेक्षा लगातार अपने पिता की गिरफ्तारी और कड़ी सजा की मांग करती रही थी।

    फोरेंसिक विशेषज्ञों का कहना है कि DNA जांच से शव की पहचान तो स्पष्ट हो जाएगी, लेकिन मौत किन परिस्थितियों में हुई, इसका सही निष्कर्ष तभी निकलेगा जब शव के सभी महत्वपूर्ण अंगों की जांच संभव हो। सिर नहीं मिलने से यह पता लगाना कठिन होगा कि मौत आत्महत्या, दुर्घटना या किसी अन्य कारण से हुई।

    जांच के दौरान शव के पास से मिले तीन कथित सुसाइड नोट भी पुलिस के लिए अहम सबूत बने हुए हैं। एक नोट पिता के नाम लिखा गया है, जिसमें बच्चों का ध्यान रखने और बेटे प्रायु से मुखाग्नि दिलाने की इच्छा जताई गई है। दूसरा नोट बेटे के नाम और तीसरा पुलिस के नाम बताया जा रहा है, जिसमें वैवाहिक विवाद और कुछ लोगों पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। पुलिस इन नोटों की सत्यता और उनमें किए गए दावों की भी जांच कर रही है।

    पुलिस के सामने कई सवाल अब भी अनुत्तरित हैं। आखिर पत्नी की हत्या के बाद अखिलेश आठ दिन तक कहां रहा? रेलवे ट्रैक पर मिला शव वास्तव में उसी का है या नहीं? उसकी मौत आत्महत्या है, हादसा है या किसी साजिश का हिस्सा? यही नहीं, पत्नी की हत्या के बाद उसका सामान्य व्यवहार, मोबाइल, एटीएम और स्कूटी छोड़कर गायब होना भी जांच के दायरे में है।

    फिलहाल इस हाई-प्रोफाइल हत्याकांड की सबसे अहम कड़ी DNA रिपोर्ट बन गई है। पुलिस का कहना है कि वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर ही अंतिम निष्कर्ष निकाला जाएगा। रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि रेलवे ट्रैक पर मिला सिरकटा शव वास्तव में अखिलेश सैनी का है या इस पूरे मामले में अभी कोई और बड़ा रहस्य सामने आना बाकी है।

  • भोपाल में दर्दनाक हादसा, स्कॉर्पियो की चपेट में आने से 3 साल की मासूम की मौत; CCTV में कैद घटना

    भोपाल में दर्दनाक हादसा, स्कॉर्पियो की चपेट में आने से 3 साल की मासूम की मौत; CCTV में कैद घटना


    भोपाल । राजधानी भोपाल के बैरसिया क्षेत्र से एक बेहद दर्दनाक सड़क हादसा सामने आया है, जिसने हर किसी को झकझोर कर रख दिया। यहां तीन वर्षीय मासूम बच्ची स्कॉर्पियो वाहन की चपेट में आ गई और गंभीर रूप से घायल होने के बाद उसकी मौत हो गई। हादसे की पूरी घटना आसपास लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हुई है। पुलिस ने वाहन चालक के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

    पुलिस के अनुसार यह हादसा रविवार दोपहर बैरसिया थाना क्षेत्र के ललरिया गांव में हुआ। मृत बच्ची की पहचान जूना खान (3) के रूप में हुई है। उसके पिता सोहेल खान सरकारी स्कूल में शिक्षक हैं, जबकि मां भी सरकारी स्कूल में शिक्षिका हैं। रविवार की छुट्टी होने के कारण पूरा परिवार बच्ची के ननिहाल आया हुआ था।

    जानकारी के मुताबिक दोपहर करीब ढाई बजे बच्ची के नाना उसे और परिवार की दो अन्य बच्चियों को पास की दुकान से चॉकलेट और बिस्किट दिलाने लेकर गए थे। दुकान पर खरीदारी के दौरान जूना अचानक बाहर सड़क की ओर निकल गई। इसी दौरान उसका संतुलन बिगड़ गया और वह सड़क पर गिर पड़ी।

    इसी समय कुछ दूरी पर खड़ी स्कॉर्पियो का चालक वाहन स्टार्ट कर आगे बढ़ा। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि चालक को सड़क पर गिरी बच्ची दिखाई नहीं दी। स्कॉर्पियो का अगला पहिया बच्ची के ऊपर से गुजर गया और वह वाहन के नीचे फंस गई। प्रत्यक्षदर्शियों और सीसीटीवी फुटेज के अनुसार बच्ची करीब 20 फीट तक वाहन के साथ घिसटती रही। इसके बाद वाहन का पिछला पहिया भी उसके ऊपर से गुजर गया। घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई और स्थानीय लोग तत्काल बच्ची की मदद के लिए दौड़े।

    हादसे की सूचना मिलते ही बैरसिया थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने बच्ची को अस्पताल पहुंचाने की प्रक्रिया पूरी कराई, लेकिन गंभीर चोटों के कारण उसकी जान नहीं बचाई जा सकी। पोस्टमॉर्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। पूरे गांव में इस हादसे के बाद शोक का माहौल है।

    डॉक्टरों के अनुसार हादसे में बच्ची के लिवर में गंभीर अंदरूनी रक्तस्राव (इंटरनल ब्लीडिंग) हुआ था। सिर पर गंभीर चोट लगी थी, जबकि हाथ और पैर में फ्रैक्चर के साथ शरीर के कई अंदरूनी अंग भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए थे। चोटें इतनी गंभीर थीं कि उसे बचाया नहीं जा सका।

    पुलिस ने स्कॉर्पियो चालक की पहचान ललरिया गांव निवासी जाकिर के रूप में की है। उसके खिलाफ संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस सीसीटीवी फुटेज और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान के आधार पर दुर्घटना के सभी पहलुओं की जांच कर रही है।

    यह दर्दनाक हादसा एक बार फिर सड़क सुरक्षा और वाहन चलाते समय अतिरिक्त सतर्कता की जरूरत को रेखांकित करता है। वहीं छोटे बच्चों पर हर समय निगरानी रखना भी बेहद जरूरी है, क्योंकि कुछ ही सेकंड की चूक किसी परिवार की पूरी दुनिया उजाड़ सकती है।

  • मोबाइल स्क्रॉल करते-करते बढ़ रही कब्ज की गंभीर बीमारी, अब युवा और बच्चे भी चपेट में

    मोबाइल स्क्रॉल करते-करते बढ़ रही कब्ज की गंभीर बीमारी, अब युवा और बच्चे भी चपेट में


    भोपाल । स्मार्टफोन आज हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है, लेकिन इसकी एक छोटी-सी आदत स्वास्थ्य पर भारी पड़ सकती है। खासकर टॉयलेट में बैठकर लंबे समय तक मोबाइल स्क्रॉल करना अब सिर्फ समय बिताने की आदत नहीं, बल्कि गंभीर बीमारियों की वजह बनता जा रहा है। भोपाल के गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. प्रणव रघुवंशी के अनुसार लगातार लंबे समय तक टॉयलेट सीट पर बैठे रहने और बार-बार जोर लगाने से ऑब्स्ट्रक्टेड डिफिकेशन सिंड्रोम (ODS) जैसी गंभीर समस्या विकसित हो सकती है। यही वजह है कि अब कब्ज के साथ-साथ पाइल्स, फिशर और रेक्टल प्रोलैप्स जैसी बीमारियों के मामले भी बढ़ रहे हैं।

    डॉ. रघुवंशी बताते हैं कि हाल ही में उनके पास 70 वर्षीय एक बुजुर्ग मरीज पहुंचे, जो करीब 35 वर्षों से कब्ज की समस्या से परेशान थे। लगभग 20 साल तक उनका इलाज आईबीएस-सी (IBS-C) मानकर किया जाता रहा, लेकिन राहत नहीं मिली। जब विशेष जांच और एनोरेक्टल मैनोमेट्री की गई तो पता चला कि असली समस्या ऑब्स्ट्रक्टेड डिफिकेशन सिंड्रोम थी। बायोफीडबैक थेरेपी के आठ सत्रों के बाद मरीज की हालत में उल्लेखनीय सुधार हुआ। पहले जहां उन्हें शौचालय में लगभग एक घंटा लग जाता था, वहीं अब यह समय घटकर करीब पांच मिनट रह गया और कब्ज की दवाओं की आवश्यकता भी लगभग समाप्त हो गई।

    ऐसा ही एक अन्य मामला 40 वर्षीय महिला का सामने आया, जो दस वर्षों से कब्ज से जूझ रही थीं। लगातार जोर लगाने की आदत के कारण उनके मलाशय का हिस्सा बाहर आने लगा। जांच में पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियों की कमजोरी और ODS की पुष्टि हुई। समय पर बायोफीडबैक थेरेपी मिलने से बिना सर्जरी ही उनकी स्थिति में 90 से 95 प्रतिशत तक सुधार दर्ज किया गया।

    विशेषज्ञों का कहना है कि समस्या मोबाइल फोन नहीं, बल्कि मोबाइल देखते हुए लंबे समय तक टॉयलेट सीट पर बैठे रहने की आदत है। पहले लोग शौचालय में अखबार पढ़ते थे, अब उसकी जगह मोबाइल ने ले ली है। जब व्यक्ति स्क्रीन पर पूरी तरह ध्यान केंद्रित कर लेता है तो मस्तिष्क और आंत के बीच का प्राकृतिक समन्वय प्रभावित होने लगता है। इससे मलत्याग का सामान्य रिफ्लेक्स कमजोर पड़ता है और धीरे-धीरे कब्ज की समस्या बढ़ने लगती है।

    डॉ. रघुवंशी के अनुसार पहले कब्ज को मुख्य रूप से 40 से 50 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों की बीमारी माना जाता था, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में स्थिति तेजी से बदली है। अब स्कूल जाने वाले बच्चे, किशोर और 20 से 40 वर्ष आयु वर्ग के युवा भी बड़ी संख्या में कब्ज की शिकायत लेकर क्लीनिक पहुंच रहे हैं। उनके क्लीनिकल अनुभव के मुताबिक पिछले दस वर्षों में कब्ज के मरीजों की संख्या में 10 से 15 प्रतिशत तक वृद्धि हुई है। वहीं कब्ज के हर दस मरीजों में से तीन से चार ऐसे मिलते हैं, जो टॉयलेट में मोबाइल इस्तेमाल करने की आदत स्वीकार करते हैं। हालांकि डॉक्टर स्पष्ट करते हैं कि यह उनके चिकित्सकीय अनुभव पर आधारित है और इस विषय पर व्यापक भारतीय वैज्ञानिक अध्ययन अभी उपलब्ध नहीं हैं।

    विशेषज्ञ स्वस्थ पाचन तंत्र के लिए कुछ सरल आदतें अपनाने की सलाह देते हैं। भोजन में पर्याप्त मात्रा में फाइबर, हरी सब्जियां, मौसमी फल और सलाद शामिल करें। दिनभर पर्याप्त पानी पिएं, नियमित व्यायाम करें, 7 से 8 घंटे की नींद लें और रोज सुबह एक निश्चित समय पर शौच जाने की आदत विकसित करें। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि टॉयलेट में अनावश्यक समय बिताने और मोबाइल फोन का इस्तेमाल करने से बचें। छोटी-सी यह सावधानी भविष्य में कई गंभीर बीमारियों से बचाने में मददगार साबित हो सकती है।

  • कल की चिंता नहीं करता' लेकर भोपाल आ रहे स्टैंड-अप स्टार रवि गुप्ता, टिकट बुकिंग शुरू

    कल की चिंता नहीं करता' लेकर भोपाल आ रहे स्टैंड-अप स्टार रवि गुप्ता, टिकट बुकिंग शुरू


    भोपाल । भोपाल के लोगों के लिए जुलाई का आखिरी सप्ताह हंसी और मनोरंजन से भरपूर होने वाला है। देश के लोकप्रिय स्टैंड-अप कॉमेडियन रवि गुप्ता अपने चर्चित इंडिया टूर ‘कल की चिंता नहीं करता’ के तहत 26 जुलाई को राजधानी भोपाल पहुंच रहे हैं। उनका लाइव कॉमेडी शो शहर के प्रतिष्ठित रविंद्र भवन में आयोजित किया जाएगा, जहां वे अपने खास ऑब्जर्वेशनल ह्यूमर और दमदार कॉमिक अंदाज से दर्शकों को ठहाके लगाने पर मजबूर करेंगे। शो को लेकर कॉमेडी प्रेमियों में उत्साह देखने को मिल रहा है और टिकटों की ऑनलाइन बुकिंग भी शुरू हो चुकी है।

    पिछले कुछ वर्षों में रवि गुप्ता ने भारतीय स्टैंड-अप कॉमेडी की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई है। उनकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि वे रोजमर्रा की जिंदगी में होने वाली छोटी-छोटी घटनाओं, पारिवारिक रिश्तों, छोटे शहरों की संस्कृति, कॉर्पोरेट लाइफ, सामाजिक व्यवहार और आम आदमी की परेशानियों को बेहद सहज और मजेदार अंदाज में मंच पर पेश करते हैं। उनकी कॉमेडी में न तो बनावटीपन होता है और न ही अनावश्यक शोर, बल्कि साधारण बातों को असाधारण तरीके से प्रस्तुत करने की उनकी कला ही उन्हें दर्शकों का पसंदीदा बनाती है।

    सोशल मीडिया पर भी रवि गुप्ता की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है। उनके स्टैंड-अप वीडियो करोड़ों बार देखे जा चुके हैं और यूट्यूब सहित विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उन्हें लाखों लोग फॉलो करते हैं। यही वजह है कि देश के अलग-अलग शहरों में आयोजित उनके लाइव शो अक्सर हाउसफुल रहते हैं। अब भोपाल के दर्शकों को भी उन्हें मंच पर लाइव देखने का मौका मिलेगा।

    ‘कल की चिंता नहीं करता’ शो में रवि गुप्ता अपनी नई और चर्चित कॉमेडी प्रस्तुत करेंगे। उनकी शानदार टाइमिंग, सहज संवाद शैली और दर्शकों से जुड़ने का अंदाज हर उम्र के लोगों को पसंद आता है। युवा वर्ग के साथ-साथ परिवार भी उनकी कॉमेडी का भरपूर आनंद लेते हैं। यही कारण है कि उनके शो में हर आयु वर्ग के दर्शकों की अच्छी-खासी मौजूदगी देखने को मिलती है।

    आयोजकों के अनुसार कार्यक्रम 26 जुलाई को रविंद्र भवन में आयोजित किया जाएगा। इस आयोजन के मुख्य प्रायोजक मानसरोवर ग्लोबल यूनिवर्सिटी हैं, जबकि सेज ग्रुप और ओरिएंटल ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूट पावर्ड बाय पार्टनर के रूप में जुड़े हुए हैं। शो का आर्टिस्ट मैनेजमेंट ओरियल एंटरटेनमेंट द्वारा किया जा रहा है।

    शो के लिए टिकटों की बुकिंग ऑनलाइन प्लेटफॉर्म बुक माय शो पर शुरू हो चुकी है। आयोजकों का कहना है कि सीटों की संख्या सीमित है और रवि गुप्ता के बढ़ते क्रेज को देखते हुए टिकटें तेजी से बुक हो रही हैं। ऐसे में जो लोग इस लाइव कॉमेडी अनुभव का हिस्सा बनना चाहते हैं, उन्हें समय रहते अपनी सीट सुनिश्चित कर लेनी चाहिए।

    अगर आप भी रोजमर्रा की भागदौड़ और तनाव से कुछ देर की राहत चाहते हैं, तो 26 जुलाई की शाम रविंद्र भवन में आयोजित यह स्टैंड-अप कॉमेडी शो आपके लिए यादगार अनुभव साबित हो सकता है। हंसी, मनोरंजन और बेहतरीन कॉमिक अंदाज से भरपूर यह शाम भोपाल के दर्शकों के चेहरे पर मुस्कान बिखेरने के लिए तैयार है।

  • मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का किसानों से सीधा संवाद, प्राकृतिक खेती, आधुनिक तकनीक और सिंचाई योजनाओं पर दिया विकास का नया रोड

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का किसानों से सीधा संवाद, प्राकृतिक खेती, आधुनिक तकनीक और सिंचाई योजनाओं पर दिया विकास का नया रोड

    मध्य प्रदेश। झाबुआ में आयोजित बलराम कृषि महोत्सव के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेशभर के किसानों से ऑनलाइन संवाद करते हुए कृषि को अधिक लाभकारी, टिकाऊ और आधुनिक बनाने की दिशा में सरकार की विभिन्न योजनाओं और प्राथमिकताओं की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार किसानों की आय बढ़ाने, प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने, आधुनिक तकनीकों के विस्तार और कृषि आधारित रोजगार के नए अवसर विकसित करने के लिए लगातार काम कर रही है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में “कृषक कल्याण वर्ष” के अंतर्गत बलराम कृषि महोत्सव-2026 का आयोजन किया जा रहा है। इसकी शुरुआत इंदौर से हुई थी और आगामी दिनों में आलीराजपुर, बड़वानी, खरगौन, बुरहानपुर तथा खंडवा सहित कई जिलों में भी महोत्सव आयोजित किए जाएंगे। उन्होंने इसे किसानों को नई तकनीकों, सरकारी योजनाओं और विशेषज्ञों की सलाह से जोड़ने का महत्वपूर्ण अभियान बताया।

    डॉ. यादव ने मौसम विभाग द्वारा इस वर्ष सामान्य से कम वर्षा की संभावना जताए जाने का उल्लेख करते हुए प्रशासन को किसानों की हरसंभव सहायता के लिए तैयार रहने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि किसानों को तीन लाख रुपये तक का कृषि ऋण शून्य प्रतिशत ब्याज पर उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके अलावा मात्र पांच रुपये में बिजली कनेक्शन देने और डेयरी विकास योजनाओं में 40 लाख रुपये तक की परियोजनाओं पर 33 प्रतिशत अनुदान की व्यवस्था भी की गई है।

    मुख्यमंत्री ने किसानों से आधुनिक कृषि तकनीकों, वैज्ञानिक सलाह, प्राकृतिक खेती और जल संरक्षण के उपाय अपनाने का आग्रह किया। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री के प्राकृतिक खेती अभियान के तहत झाबुआ जिले में 50 कृषि सखियों का चयन किया गया है। वर्तमान में जिले में तीन हजार एकड़ से अधिक क्षेत्र में प्राकृतिक खेती की जा रही है और किसानों की फसलों का प्रमाणीकरण भी कराया जा रहा है, जिससे उन्हें बाजार में बेहतर अवसर मिल सकें।

    उन्होंने कहा कि “एक जिला-एक उत्पाद” योजना के तहत झाबुआ के कड़कनाथ को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने के प्रयास जारी हैं। वर्ष 2025 के दौरान कड़कनाथ पालन से एक हजार से अधिक नए हितग्राहियों को जोड़ा गया। साथ ही पशुपालन, बकरी पालन, डेयरी और मुर्गी पालन जैसी गतिविधियों को बढ़ावा देकर किसानों की नियमित आय सुनिश्चित करने पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है।

    मुख्यमंत्री ने बताया कि जिले में मत्स्य पालन को भी प्रोत्साहन दिया जा रहा है। 760 से अधिक तालाबों में लगभग तीन हजार हेक्टेयर क्षेत्र में मत्स्य उत्पादन किया जा रहा है। वहीं खरीफ-2026 सीजन में कपास की बुवाई पिछले वर्ष की तुलना में उल्लेखनीय रूप से बढ़ी है। उन्होंने कहा कि धार जिले के बदनावर स्थित पीएम मित्रा पार्क के विकसित होने से झाबुआ के कपास उत्पादकों को खेत से उद्योग तक बेहतर बाजार और मूल्य संवर्धन का लाभ मिलेगा।

    झाबुआ के टमाटर उत्पादन का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जिले में हजारों हेक्टेयर क्षेत्र में टमाटर की खेती हो रही है। यहां स्थापित प्रसंस्करण इकाई में टमाटर सॉस, केचअप और डिहाइड्रेटेड उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं, जिनकी आपूर्ति देश के कई राज्यों में की जा रही है। इससे किसानों को बेहतर बाजार और अतिरिक्त आय के अवसर प्राप्त हो रहे हैं।

    उन्होंने कहा कि नर्मदा-झाबुआ-पेटलावद-थांदला माइक्रो उद्वहन सिंचाई परियोजना पूरी होने पर लगभग 32 हजार हेक्टेयर भूमि सिंचित होगी और करीब 50 हजार किसानों को सीधा लाभ मिलेगा। इससे जल संरक्षण के साथ कृषि उत्पादन में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

    मुख्यमंत्री ने बताया कि बलराम कृषि महोत्सव केवल एक कार्यक्रम नहीं बल्कि किसानों की आय बढ़ाने, कृषि तकनीक, प्रसंस्करण, विपणन और कृषि उद्यमिता को बढ़ावा देने का व्यापक अभियान है। प्रदेश के सभी जिलों में 13 नवंबर तक विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से किसानों को आधुनिक खेती, डिजिटल कृषि सेवाओं, स्मार्ट सिंचाई, ड्रोन तकनीक, मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन और जलवायु अनुकूल कृषि पद्धतियों की जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी। इसके साथ ही उत्कृष्ट किसानों का सम्मान, हितग्राहियों को लाभ वितरण और विभिन्न विभागों की प्रदर्शनी के माध्यम से खेती को अधिक समृद्ध और आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास किया जाएगा।

  • ई-बस से मंत्री परिषद बैठक के लिए रवाना हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, सादगी, मितव्ययिता और सुशासन का दिया व्यवहारिक संदेश

    ई-बस से मंत्री परिषद बैठक के लिए रवाना हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, सादगी, मितव्ययिता और सुशासन का दिया व्यवहारिक संदेश


    मध्य प्रदेश।
    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोमवार को मंत्री परिषद की बैठक के लिए एक अलग और संदेशात्मक पहल करते हुए मंत्रियों तथा वरिष्ठ अधिकारियों के साथ इलेक्ट्रिक बस से जगदीशपुर की यात्रा की। इस दौरान उन्होंने अपना शासकीय वाहन और सुरक्षा काफिला मुख्यमंत्री निवास पर ही छोड़ दिया। मुख्यमंत्री के साथ मंत्रिपरिषद के सदस्य भी अपने व्यक्तिगत वाहनों का उपयोग किए बिना सामूहिक रूप से ई-बसों में बैठक स्थल पहुंचे। इस पहल को शासन में सादगी, मितव्ययिता और संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

    मुख्यमंत्री निवास से सुबह निर्धारित समय पर तीन इलेक्ट्रिक बसों के माध्यम से मुख्यमंत्री, सभी मंत्री और उनका स्टाफ बैठक के लिए रवाना हुए। यात्रा के दौरान किसी भी मंत्री के व्यक्तिगत वाहन, पायलट वाहन या फॉलो वाहन का उपयोग नहीं किया गया। सरकार का उद्देश्य यह संदेश देना था कि शासकीय कार्यों में आवश्यकता के अनुरूप संसाधनों का उपयोग किया जाए और अनावश्यक खर्च से बचा जाए।

    मंत्री परिषद की बैठक में शामिल होने वाले वरिष्ठ अधिकारियों ने भी इस पहल में भागीदारी निभाई। अधिकारियों ने अपने वाहनों को कुशाभाऊ ठाकरे परिसर में ही पार्क किया और वहां से इलेक्ट्रिक बसों के जरिए सामूहिक रूप से जगदीशपुर पहुंचे। शासन स्तर पर इस सामूहिक व्यवस्था को प्रशासनिक सादगी और बेहतर समन्वय का उदाहरण माना जा रहा है।

    मुख्यमंत्री की इस यात्रा के दौरान राजधानी के विभिन्न क्षेत्रों में लोगों ने उत्साह के साथ उनका स्वागत किया। पातरा पुल, लांबाखेड़ा और जगदीशपुर सहित कई स्थानों पर ई-बसों पर पुष्पवर्षा की गई। स्थानीय नागरिकों ने इस पहल को पर्यावरण संरक्षण और सार्वजनिक संसाधनों के बेहतर उपयोग से जोड़ते हुए सकारात्मक प्रतिक्रिया व्यक्त की। जगदीशपुर पहुंचने पर मुख्यमंत्री का पारंपरिक तरीके से स्वागत किया गया और जनप्रतिनिधियों ने उनका अभिनंदन किया।

    बैठक स्थल पहुंचने के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जगदीशपुर दुर्ग में आयोजित धरोहर प्रदर्शनी का शुभारंभ किया। उन्होंने प्रदर्शनी का अवलोकन करते हुए जनजातीय कलाकारों से संवाद किया और उनके कार्यों की सराहना की। प्रदर्शनी में प्रदेश के जनजातीय नायकों, राष्ट्रभक्तों, ऐतिहासिक शासकों तथा सुशासन और शौर्य से जुड़े महत्वपूर्ण व्यक्तित्वों के चित्र और विरासत को प्रदर्शित किया गया था। इसका उद्देश्य प्रदेश की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर से लोगों को जोड़ना बताया गया।

    राज्य सरकार का मानना है कि प्रशासनिक कार्यों में पर्यावरण अनुकूल साधनों को बढ़ावा देना समय की आवश्यकता है। इलेक्ट्रिक वाहनों का उपयोग न केवल ईंधन की बचत में सहायक है, बल्कि कार्बन उत्सर्जन कम करने और स्वच्छ वातावरण बनाने की दिशा में भी प्रभावी कदम माना जाता है। मुख्यमंत्री की यह पहल इसी व्यापक सोच का हिस्सा है, जिसमें शासन व्यवस्था को अधिक जिम्मेदार, पारदर्शी और संसाधन-संवेदनशील बनाने पर जोर दिया जा रहा है।

    मंत्री परिषद की बैठक के लिए अपनाई गई यह व्यवस्था केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं बल्कि शासन की कार्यशैली का सार्वजनिक संदेश भी मानी जा रही है। सरकार ने संकेत दिया है कि यदि शासकीय स्तर पर सादगी, सामूहिकता और संसाधनों के संतुलित उपयोग की संस्कृति विकसित होती है, तो इसका सकारात्मक प्रभाव प्रशासनिक व्यवस्था के साथ-साथ समाज में भी देखने को मिल सकता है।

  • राजधानी भोपाल को मिली ग्रीन ट्रांसपोर्ट की सौगात, 3 रूट पर शुरू हुआ ई-बसों का ट्रायल

    राजधानी भोपाल को मिली ग्रीन ट्रांसपोर्ट की सौगात, 3 रूट पर शुरू हुआ ई-बसों का ट्रायल


    भोपाल । भोपाल शहर में स्वच्छ और आधुनिक सार्वजनिक परिवहन की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया गया है। सोमवार से राजधानी की सड़कों पर इलेक्ट्रिक बसों का ट्रायल रन शुरू हो गया। बैरागढ़ स्थित डिपो से निकलीं ई-बसें शहर के तीन प्रमुख रूटों पर दौड़ती नजर आईं। फिलहाल यह पांच दिनों का ड्राय रन है, जिसमें यात्रियों को सफर करने की अनुमति नहीं होगी। यदि सभी तकनीकी और संचालन संबंधी परीक्षण सफल रहते हैं तो अगस्त से ये बसें आम लोगों के लिए नियमित रूप से संचालित की जाएंगी।

    रविवार को जगदीशपुर में आयोजित प्रदेश कैबिनेट बैठक के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों ने इन्हीं इलेक्ट्रिक बसों में सफर कर नई व्यवस्था का अनुभव लिया था। इसके बाद सोमवार से ट्रायल रन की औपचारिक शुरुआत कर दी गई।

    ड्राय रन के दौरान बसों के संचालन, चार्जिंग सिस्टम, रूट की व्यवहारिकता, यातायात की स्थिति और तकनीकी प्रदर्शन का बारीकी से परीक्षण किया जा रहा है। अधिकारियों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि नियमित संचालन शुरू होने पर यात्रियों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। इस दौरान बसों का संचालन दो शिफ्टों में किया जा रहा है। पहली शिफ्ट सुबह 8 बजे से दोपहर 12 बजे तक और दूसरी शिफ्ट दोपहर 2 बजे से शाम 6 बजे तक निर्धारित की गई है।

    ई-बसों का संचालन बैरागढ़ डिपो से शुरू होकर पुराने भोपाल, बोर्ड ऑफिस, भोपाल रेलवे स्टेशन प्लेटफॉर्म नंबर-1 और कोलार के बैरागढ़-चीचली मार्ग तक किया जा रहा है। इन रूटों पर ट्रैफिक दबाव, बसों की आवाजाही और चार्जिंग क्षमता का आकलन किया जाएगा। ट्रायल के दौरान कुछ जनप्रतिनिधियों और पार्षदों को भी बसों में बैठाकर फीडबैक लिया जाएगा, ताकि नियमित सेवा शुरू होने से पहले आवश्यक सुधार किए जा सकें।

    भोपाल नगर निगम और परिवहन विभाग के अधिकारियों के अनुसार अब तक शहर में 21 इलेक्ट्रिक बसें पहुंच चुकी हैं। अगले 10 से 12 दिनों में 20 और नई बसें आने की उम्मीद है। इसके बाद राजधानी में इलेक्ट्रिक बसों का बेड़ा और मजबूत होगा तथा सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को नई गति मिलेगी।

    बसों के संचालन को ध्यान में रखते हुए बैरागढ़ डिपो में आधुनिक चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर भी तैयार कर लिया गया है। यहां 11 चार्जिंग प्वाइंट स्थापित किए गए हैं, ताकि बसों की नियमित चार्जिंग बिना किसी बाधा के हो सके। भविष्य में बसों की संख्या बढ़ने पर चार्जिंग सुविधाओं का भी विस्तार किया जाएगा।

    इलेक्ट्रिक बसों के संचालन से शहर में प्रदूषण कम करने, ईंधन की बचत करने और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। साथ ही यात्रियों को आधुनिक, आरामदायक और कम शोर वाली परिवहन सुविधा मिलेगी। यदि ट्रायल पूरी तरह सफल रहता है तो अगस्त से भोपालवासियों को राजधानी की सड़कों पर नई और पर्यावरण अनुकूल ई-बसों में सफर करने का अवसर मिलेगा।

  • विधानसभा पहुंचे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, मॉनसून सत्र के पहले दिन कार्य मंत्रणा समिति से विधायक दल की बैठक तक व्यस्त रहेगा पूरा कार्यक्रम

    विधानसभा पहुंचे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, मॉनसून सत्र के पहले दिन कार्य मंत्रणा समिति से विधायक दल की बैठक तक व्यस्त रहेगा पूरा कार्यक्रम

    मध्य प्रदेश विधानसभा का मॉनसून सत्र सोमवार से शुरू हो गया, जिसके साथ ही राज्य की राजनीति एक बार फिर गर्मा गई है। सत्र के पहले दिन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का कार्यक्रम पूरी तरह विधानसभा और उससे जुड़ी बैठकों पर केंद्रित रहा। सरकार की ओर से कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की तैयारी है, वहीं विपक्ष भी विभिन्न जनहित और प्रशासनिक मामलों को लेकर सरकार को घेरने की रणनीति के साथ सदन में उतरा है।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार सुबह विधानसभा पहुंचे। इसके बाद कार्य मंत्रणा समिति की बैठक आयोजित हुई, जिसमें सत्र के दौरान सदन की कार्यवाही, विभिन्न विधायी कार्यों और चर्चा के एजेंडे पर विचार किया गया। इसके उपरांत मुख्यमंत्री विधानसभा की कार्यवाही में शामिल हुए, जहां पहले दिन की गतिविधियों पर सभी की नजर बनी रही।

    इस मॉनसून सत्र की सबसे महत्वपूर्ण चर्चाओं में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) से संबंधित विधेयक को माना जा रहा है। मंत्रिपरिषद से मंजूरी मिलने के बाद सरकार इसे सदन में प्रस्तुत करने की तैयारी कर चुकी है। यदि विधेयक पेश होता है तो इस पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच व्यापक चर्चा होने की संभावना है। सरकार इसे महत्वपूर्ण विधायी पहल के रूप में देख रही है, जबकि विपक्ष इसके विभिन्न पहलुओं पर सवाल उठाने की तैयारी में है।

    मुख्यमंत्री के दिनभर के कार्यक्रम में दोपहर के समय जनप्रतिनिधियों और अन्य लोगों से मुलाकात का समय भी निर्धारित रहा। इसके बाद समिति कक्ष में गुरु पूर्णिमा महोत्सव से संबंधित बैठक आयोजित की गई, जिसमें आयोजन और अन्य व्यवस्थाओं पर चर्चा की गई। आधिकारिक बैठकों के बाद मुख्यमंत्री के निवास लौटने का कार्यक्रम तय रहा। शाम को समत्व भवन में विधायक दल की बैठक भी आयोजित की गई, जिसमें आगामी सदन की रणनीति और विभिन्न विधायी विषयों पर विचार-विमर्श किया जाना प्रस्तावित है।

    विधानसभा का यह मॉनसून सत्र 24 जुलाई तक चलेगा। इस दौरान कई महत्वपूर्ण विधेयकों के साथ-साथ विभिन्न विभागों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। सरकार विकास योजनाओं, प्रशासनिक निर्णयों और नई नीतियों को सदन के माध्यम से आगे बढ़ाने की तैयारी में है, जबकि विपक्ष राज्य से जुड़े अनेक मामलों को लेकर सरकार से जवाब मांगने की रणनीति बना चुका है।

    सत्र के दौरान केन-बेतवा परियोजना से प्रभावित विस्थापितों के मुआवजे, उज्जैन में भूमि खरीद से जुड़े मामलों, नीट यूजी परीक्षा से संबंधित विवाद, सीबीएसई परीक्षा में कथित अनियमितताओं सहित कई अन्य विषयों के सदन में उठने की संभावना है। विपक्ष इन मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी में है, जबकि सत्ता पक्ष अपने फैसलों और योजनाओं का पक्ष मजबूती से रखने का प्रयास करेगा।

    राजनीतिक दृष्टि से यह सत्र काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इसमें राज्य सरकार की कई नीतियों और निर्णयों की परीक्षा भी होगी। सत्ता पक्ष जहां अपने विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाने का प्रयास करेगा, वहीं विपक्ष जनहित से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाकर सरकार की जवाबदेही तय करने की कोशिश करेगा। ऐसे में आने वाले दिनों में विधानसभा की कार्यवाही पर प्रदेश की राजनीतिक और प्रशासनिक गतिविधियों की नजर बनी रहेगी।