Author: bharati

  • MP: दतिया में आशुतोष तिवारी का प्रचार कर रहे नरोत्तम… स्वागत के दौरान कार्यकर्ताओं से बोले- माला वाला पीछे है

    MP: दतिया में आशुतोष तिवारी का प्रचार कर रहे नरोत्तम… स्वागत के दौरान कार्यकर्ताओं से बोले- माला वाला पीछे है


    दतिया।
    दतिया विधानसभा (Datia Assembly Constituency) के चुनाव प्रचार के दौरान पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा (Narottam Mishra) का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. नरोत्तम मिश्रा रात को बीजेपी प्रत्याशी आशुतोष तिवारी (BJP candidate Ashutosh Tiwari) के साथ जनसंपर्क कर रहे थे. चुनाव प्रचार के दौरान एक जगह पार्टी कार्यकर्ता स्वागत करने आए तो नरोत्तम मिश्रा ने इनकार करते हुए कहा कि प्रत्याशी आशुतोष तिवारी पीछे हैं. उनको माला पहनाओ।

    वायरल वीडियो के अनुसार, दतिया में घर-घर जाकर चुनाव प्रचार करने के दौरान भाजपा कार्यकर्ताओं और स्थानीय समर्थकों में भारी उत्साह देखा जा रहा था. जनसंपर्क के दौरान एक मोड़ पर उत्साहित भाजपा कार्यकर्ता अपने चहेते नेता नरोत्तम मिश्रा का स्वागत करने के लिए फूल-मालाएं लेकर आगे बढ़े. जैसे ही कार्यकर्ताओं ने मिश्रा के गले में माला डालनी चाही, नरोत्तम मिश्रा ने तुरंत उनका हाथ रोक दिया और माला पहनने से पूरी तरह मना कर दिया।


    ‘माला वाला पीछे आ रहा है…’ बोलकर प्रत्याशी को बढ़ाया आगे

    नरोत्तम मिश्रा ने न सिर्फ माला पहनने से मना किया, बल्कि वहां मौजूद कार्यकर्ताओं को याद दिलाया कि असली प्रत्याशी वह खुद नहीं, बल्कि उनके पीछे चल रहे आशुतोष तिवारी हैं। नरोत्तम मिश्रा ने मुस्कुराते हुए और अपने चिर-परिचित मजाकिया अंदाज में पीछे आ रहे आशुतोष तिवारी की तरफ उंगली से इशारा किया और जोर से कहा, ”माला वाला पीछे आ रहा है, उसे ही माला पहनाओ.”

    मिश्रा के इतना कहते ही वहां मौजूद सभी कार्यकर्ता और खुद प्रत्याशी आशुतोष तिवारी भी हंस पड़े. इसके बाद कार्यकर्ताओं ने आगे बढ़कर प्रत्याशी का फूल-मालाओं से जोरदार स्वागत किया।


    सोशल मीडिया पर क्यों हो रही है चर्चा?

    राजनीतिक गलियारों में नरोत्तम मिश्रा के इस कदम को बेहद सूझबूझ भरा माना जा रहा है. चुनाव के समय अक्सर बड़े नेताओं के इर्द-गिर्द भीड़ जमा हो जाती है और मुख्य प्रत्याशी उपेक्षित महसूस करने लगता है. ऐसे में नरोत्तम मिश्रा ने खुद को पीछे रखकर और आशुतोष तिवारी को ‘माला वाला प्रत्याशी’ बताकर यह संदेश दिया है कि पूरी पार्टी एकजुट होकर नए उम्मीदवार को जिताने के लिए मैदान में पसीना बहा रही है. दतिया के स्थानीय व्हाट्सएप ग्रुप्स से लेकर ट्विटर तक इस वीडियो को भाजपा के मजबूत टीमवर्क के रूप में शेयर किया जा रहा है।

  • ईरान-US संघर्ष खतरनाक मोड़ पर….. इस बार हॉर्मुज में तेल नहीं, पानी के लिए छिड़ी भीषण जंग

    ईरान-US संघर्ष खतरनाक मोड़ पर….. इस बार हॉर्मुज में तेल नहीं, पानी के लिए छिड़ी भीषण जंग


    वाशिंगटन।
    अमेरिका और ईरान (America and Iran) के बीच चल रहा सैन्य टकराव (Military confrontation) अब तेल के कुओं और सैन्य ठिकानों से आगे बढ़कर एक बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच चुका है। दोनों देशों के बीच जून में हुआ इस्लामाबाद समझौता (Islamabad Agreement) पूरी तरह से टूट चुका है और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज (Strait of Hormuz) में फिर से भीषण जंग छिड़ गई है।

    इस बार दोनों पक्षों ने एक-दूसरे को घुटनों पर लाने के लिए पानी से जुड़े बुनियादी ढांचे यानी पानी के सप्लाई सिस्टम को अपना मुख्य निशाना बनाया है। पारंपरिक हवाई हमलों के साथ-साथ अब पानी साफ करने वाले प्लांटों को नष्ट करने की होड़ मची है, जिसने सीधे तौर पर आम नागरिकों की जिंदगी को दांव पर लगा दिया है।


    पानी को क्यों बनाया जा रहा है युद्ध का नया मैदान?

    फारस की खाड़ी दुनिया के उन चुनिंदा हिस्सों में से है, जहां प्राकृतिक रूप से पीने का पानी न के बराबर है। ऐसे में पानी का उत्पादन और उसका वितरण सिस्टम किसी भी देश के वजूद के लिए सबसे संवेदनशील नस है।

    तेल रिफाइनरी या कच्चे तेल के जहाजों पर हमला करने से वैश्विक बाजार और अर्थव्यवस्था प्रभावित होती है। लेकिन जब समंदर के खारे पानी को पीने लायक बनाने वाले डिसेलिनेशन प्लांट को तबाह किया जाता है, तो सीधे तौर पर आम जनता के सामने पीने के पानी का संकट खड़ा हो जाता है।

    ईरान ने फारस की खाड़ी में अमेरिकी ठिकानों और उसके सहयोगी देशों पर ड्रोन और मिसाइल हमले किए हैं। इनमें से एक बड़ा हमला कुवैत के मुख्य बिजली उत्पादन और डिसेलिनेशन प्लांट पर हुआ। इस हमले से बिजली की कई इकाइयां ठप हो गईं और भयंकर आग लग गई। कुवैत सरकार को आपातकालीन योजनाएं लागू करनी पड़ीं और नागरिकों से पानी व बिजली का इस्तेमाल कम करने की अपील करनी पड़ी है।

    कुवैत अपनी जरूरत का 90 फीसदी पीने का पानी समंदर के पानी को साफ करके हासिल करता है। ऐसे में इन प्लांट्स पर होने वाले हमले देश की पूरी घरेलू जल आपूर्ति को पंगु बना सकते हैं। यह हमला दिखाता है कि खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के देश कितने संवेदनशील हैं, क्योंकि उनके ज्यादातर बड़े वॉटर प्लांट समुद्र तटों पर हैं, जो ईरानी मिसाइलों की सीधी जद में आते हैं।


    अमेरिका का पलटवार: ईरान के बुंजी गांव में प्लांट तबाह

    कुवैत पर हमले के लगभग साथ ही, अमेरिकी सेना ने भी अपनी रणनीति बदलते हुए सैन्य ठिकानों के अलावा नागरिक और लॉजिस्टिक्स सुविधाओं को निशाना बनाना शुरू कर दिया है। अमेरिका ने ईरान के दक्षिण-पूर्वी होर्मोजगान प्रांत के बुंजी गांव में स्थित एक प्रमुख डिसेलिनेशन प्लांट पर हवाई हमला किया।

    होर्मोजगान वॉटर एंड वेस्टवॉटर कंपनी के मुताबिक, अमेरिकी हमले में प्लांट का पूरा फिल्ट्रेशन इक्विपमेंट (पानी छानने वाले उपकरण) और पंपिंग सिस्टम पूरी तरह तबाह हो गया है। इसके कारण भीषण गर्मी के इस मौसम में 20 से ज्यादा गांवों के लगभग 10,000 लोग बिना पीने के पानी के रहने को मजबूर हो गए हैं, जिससे इलाके में बड़ा मानवीय संकट खड़ा हो गया है।

    इससे पहले भी युद्ध के दौरान कुवैत के ‘दोहा वेस्ट’ डिसेलिनेशन प्लांट को नुकसान पहुंचा था। वहीं ईरान ने अमेरिका पर 8 मार्च को ‘केशम द्वीप’ के वॉटर प्लांट पर भी हमला करने का आरोप लगाया था, जिससे 30 गांवों की पानी सप्लाई रुकी थी। हालांकि, वाशिंगटन ने इसकी पुष्टि नहीं की थी।

    खाड़ी देश पानी के लिए डिसेलिनेशन पर इतने निर्भर क्यों हैं?
    संयुक्त राष्ट्र (UN) के मानकों के अनुसार, अगर किसी देश में प्रति व्यक्ति प्रति वर्ष 500 क्यूबिक मीटर से कम रिन्यूएबल ताजा पानी उपलब्ध है, तो उसे ‘पूर्ण जल कमी’ की श्रेणी में रखा जाता है। खाड़ी (GCC) देशों में यह आंकड़ा 100 क्यूबिक मीटर से भी कम है।

    प्राकृतिक संसाधनों की इस कमी के बावजूद, इस क्षेत्र में पिछले कुछ दशकों में तेजी से शहरीकरण, औद्योगिक विकास और आबादी बढ़ी है। इस चकाचौंध को जिंदा रखने के लिए प्राकृतिक स्रोतों के बजाय पूरी तरह आर्टिफिशयल वाटर सप्लाई का जाल बिछाया गया।

    अगर ये प्लांट काम करना बंद कर दें, तो क्या होगा?
    किसी तेल रिफाइनरी के बंद होने से केवल व्यावसायिक गतिविधियां रुकती हैं, लेकिन वॉटर प्लांट बंद होने का असर अस्पतालों, आपातकालीन सेवाओं और घरों पर हर सेकंड पड़ता है। अगर युद्ध के कारण ये प्लांट लंबे समय के लिए बंद हो जाएं, तो संकट का टाइमलाइन कुछ इस तरह बदल सकता है:

    बहरीन और कतर जैसे बहुत ज्यादा निर्भर देशों को तुरंत पानी की सख्त लिमिट लागू करनी होगी। उद्योगों और कमर्शियल इलाकों का पानी रोककर केवल घरेलू उपयोग को प्राथमिकता दी जाएगी।

    अगर हफ्ते भर में मरम्मत न हुई, तो आबादी का एक बड़ा हिस्सा बूंद-बूंद पानी को तरस जाएगा। खाड़ी की 45°C से ज्यादा की झुलसाने वाली गर्मी में पानी न मिलना बड़े पैमाने पर डिहाइड्रेशन (शरीर में पानी की कमी) और पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी को जन्म दे देगा।


    पानी की सुरक्षा और ऊर्जा का आपस में क्या कनेक्शन है?

    खाड़ी देशों में बिजली और पानी के प्लांट अलग-अलग नहीं, बल्कि एक-दूसरे से जुड़े हुए ‘कोग्नरेशन सिस्टम’ के तहत काम करते हैं। थर्मल डिसेलिनेशन प्लांट पानी साफ करने के लिए पास के तेल या गैस से चलने वाले बिजलीघरों से निकलने वाली गर्म भाप का इस्तेमाल करते हैं। वहीं, वे बिजलीघर अपने बॉयलरों को ठंडा रखने और सुरक्षित संचालन के लिए इसी साफ किए गए पानी पर निर्भर होते हैं।

    अगर किसी वॉटर प्लांट के इनटेक पंप या फिल्टर को निशाना बनाया जाता है, तो थर्मल डैमेज से बचने के लिए बिजलीघर को भी अपनी क्षमता कम करनी पड़ती है या उसे बंद करना पड़ता है। यानी पानी पर हमला सीधे तौर पर बिजली ग्रिड को ठप कर देता है।

    आधुनिक वॉटर प्लांट ‘रिवर्स ऑस्मोसिस’ (RO) तकनीक पर चलते हैं, जिसमें बेहद बारीक पॉलीमर मेम्ब्रेन के जरिए नमक को अलग किया जाता है। ये मेम्ब्रेन बेहद नाजुक और महंगी होती हैं। अगर युद्ध के कारण समुद्र में कच्चे तेल का रिसाव होता है और वह दूषित पानी इनटेक पॉइंट तक पहुंच जाता है, तो ये मेम्ब्रेन हमेशा के लिए खराब हो जाती हैं। इन्हें बदलने में महीनों का समय लग सकता है।


    साइबर वॉरफेयर का नया खतरा

    फिजिकल मिसाइल हमलों के अलावा अमेरिका ने चेतावनी दी है कि ईरानी साइबर हैकर्स अमेरिकी पानी और वेस्टवॉटर सिस्टम को निशाना बना रहे हैं। इसके लिए FBI, NSA और CISA ने अलर्ट जारी किया है।

    हैकर्स किसी वायरस या मालवेयर का इस्तेमाल करने के बजाय सिस्टम के प्रोग्रामेबल लॉजिक कंट्रोलर्स में सेंध लगाते हैं, जो पंपों और फिल्टरेशन को ऑटोमैटिक कंट्रोल करते हैं। हैकर्स प्रोग्रामिंग टूल्स का इस्तेमाल करके सामान्य मेंटेनेंस स्टाफ की तरह नेटवर्क में छिप जाते हैं।

    वे उन फाइलों को डिलीट कर देते हैं जो तय करती हैं कि पंप कब चालू या बंद होना है। साथ ही, वे ह्यूमन-मशीन इंटरफेस यानी ऑपरेटर की डिजिटल स्क्रीन पर झूठा डेटा दिखा देते हैं, जिससे अधिकारियों को लगता है कि सब ठीक चल रहा है, जबकि अंदर ही अंदर सिस्टम फेल हो चुका होता है। इससे पहले इजरायल के वॉटर सिस्टम पर भी ऐसा ही हमला हुआ था, जहां पानी में क्लोरीन की मात्रा को चुपके से बढ़ाने की कोशिश की गई थी।


    इंटरनेशनल कानून और CIA की पुरानी चेतावनी

    पेंटागन और अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों को सालों से इस कमजोरी का अंदाजा था। साल 2010 में CIA की एक गोपनीय रिपोर्ट में आगाह किया गया था कि खाड़ी के 90% से ज्यादा पानी का उत्पादन केवल 56 संवेदनशील प्लांट्स में केंद्रित है। इन पर किया गया कोई भी बड़ा हमला पूरे क्षेत्र में राष्ट्रीय आपातकाल ला सकता है।

    जिनेवा कन्वेंशन का उल्लंघन, अनुच्छेद 54 (पैराग्राफ 2) के तहत इंटरनेशनल मानवीय कानून साफ तौर पर कहता है कि- नागरिक आबादी के जिंदा रहने के लिए अपरिहार्य वस्तुओं, जैसे कि भोजन, कृषि क्षेत्र… और पीने के पानी के प्रतिष्ठानों और सप्लाई को नष्ट करना, हटाना या बेकार करना पूरी तरह प्रतिबंधित है।”

  • मॉनसून सत्र में अहम बिल पास कराने की तैयारी….बहुमत के लिए विपक्षी दलों से दोस्ती बढ़ा रही सरकार!

    मॉनसून सत्र में अहम बिल पास कराने की तैयारी….बहुमत के लिए विपक्षी दलों से दोस्ती बढ़ा रही सरकार!


    नई दिल्ली।
    संसद (Parliament) के मॉनसून सत्र (Monsoon Session) के पहले सरकार ने विपक्षी खेमे के कई दलों के साथ दोस्ती बढ़ा दी है। सत्र के दौरान संविधान संशोधन (Constitutional Amendment) समेत विभिन्न विधेयकों पर समर्थन की संभावना वाले इन दलों के खिलाफ भाजपा या उसके किसी घटक दल की तरफ से न तो कोई आरोप लगाया जाएगा और न ही कोई विवादित बयान दिए जाएंगे। एनडीए के सभी दलों के नेताओं को कहा गया है कि वे कांग्रेस और सपा के अलावा विपक्ष के अन्य सभी दलों के खिलाफ बयानबाजी से परहेज करें।

    सरकार को इस सत्र में महिला आरक्षण और उससे जुड़ा परिमीमन संबंधी संविधान संशोधन विधेयक लाना है। इसके लिए दो तिहाई सांसदों का समर्थन जरूरी है। सरकार ने लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों में दो तिहाई बहुमत का आंकड़ा जुटा लिया है। इसके लिए उसके नेताओं ने विपक्ष के द्रमुक और एनसीपी (एसपी) जैसे दलों के नेताओं से जरूरी आश्वासन भी लिया है। सरकार ने अपने घटक दलों के सभी प्रमुख नेताओं, जिनमें केंद्रीय मंत्री भी शामिल हैं, उन्हें निर्देश दिए हैं। उन्हें कहा है कि द्रमुक और एनसीपी (एसपी) को लेकर भी कोई बयान न दें। महिला आरक्षण विधेयक पर कांग्रेस की तरह सपा से सरकार को ज्यादा उम्मीद नहीं है। सपा को लेकर सरकार के प्रबंधक अलग रणनीति को अंजाम दे सकते हैं।

    सोमवार से शुरू होने जा रहे मॉनसून सत्र के हंगामेदार होने के आसार हैं। जहां एक ओर सरकार पूर्व सत्र में पारित न हो पाए परिसीमन संबंधित संविधान संशोधन विधेयक सहित कई महत्वपूर्ण विधेयक लाने की तैयारी कर रही है, वहीं विपक्ष पेपर लीक समेत कई मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति बना रहा है। कुछ विपक्षी दलों में टूट के कारण बने नए राजनीतिक समीकरणों के बीच संसद का नया सत्र शुरू होने जा रहा है।


    सर्वदलीय बैठक आज, तृणमूल बागी गुट को न्योता

    संसद के मॉनसून सत्र से पहले सरकार ने रविवार को सर्वदलीय बैठक बुलाई है। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने इस बैठक में शामिल होने के लिए तृणमूल कांग्रेस के बागी गुट को भी न्योता दिया है। सुदीप बंदोपाध्याय को लिखे पत्र में रिजिजू ने माना कि तृणमूल के बागी 20 सांसदों के इस समूह ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से एनसीपीआई के रूप में मान्यता देने का अनुरोध किया है।


    खरगे ने सिब्बल को विपक्ष की बैठक में आमंत्रित किया

    निर्दलीय राज्यसभा सदस्य कपिल सिब्बल ने शनिवार को नई दिल्ली में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से मुलाकात की। खरगे ने सिब्बल को सोमवार को होने वाली संसद के विपक्षी नेताओं की रणनीति बैठक में शामिल होने का न्योता दिया है।

  • NCP सांसद सुप्रिया सुले वॉयस रेस्ट पर… दो सप्ताह तक न कुछ बोलेंगी, न बैठकों में जाएंगी

    NCP सांसद सुप्रिया सुले वॉयस रेस्ट पर… दो सप्ताह तक न कुछ बोलेंगी, न बैठकों में जाएंगी


    मुम्बई।
    सोमवार से संसद (Parliament) के मॉनसून सत्र (Monsoon Session) की शुरुआत होने वाली है। इससे ठीक पहले महाराष्ट्र (Maharashtra) से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (Nationalist Congress Party- NCP) के मुखिया शरद पवार (Sharad Pawar) की बेटी और बारामती से सांसद सुप्रिया सुले (Supriya Sule) ने पूरी तरह से मीडिया से दूरी बना ली है। इस दौरान ना तो वह किसी चैनल से बात करेंगी और ना ही किसी तरह का प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगी। इस दौरान वह किसी रैली को भी संबोधित नहीं करेंगी। आपको बता दें कि सुप्रिया ने खुद इसकी जानकारी दी है।

    सुप्रिया सुले के मुताबिक, डॉक्टरों की सलाह पर उन्होंने पूरी तरह से वॉयस रेस्ट यानी कि आवाज को आराम देने का फैसला किया है। पिछले कुछ दिनों से कई राजनीतिक चर्चाओं के केंद्र में रहीं सुप्रिया सुले अगले एक से दो सप्ताह तक न तो कोई भाषण देंगी और न ही मीडिया से मुखातिब होंगी।

    शनिवार को सुप्रिया सुले ने खुद इस बात की जानकारी दी कि वे गले की समस्या से जूझ रही हैं। उन्होंने बताया, “मैंने अपने गले और आवाज की समस्या को लेकर डॉ. मिलिंद कीर्तने से मुलाकात की। उन्होंने मेरे गले में हल्की सूजन पाई है और मुझे पूरी तरह से वॉयस रेस्ट की सलाह दी है।”

    सुले ने आगे बताया कि उन्हें अगले एक-दो सप्ताह तक भाषणों, साक्षात्कारों और लंबे समय तक बोलने से बचने के लिए कहा गया है। वे इस दौरान वॉयस थेरेपी से गुजरेंगी। इसके साथ ही उन्होंने मीडिया और समर्थकों से सहयोग की अपील की है।


    INDIA गठबंधन की बैठक से भी दूरी

    इस स्वास्थ्य संबंधी समस्या के कारण सुप्रिया सुले सोमवार सुबह होने वाली विपक्षी इंडिया (INDIA) गठबंधन की अहम बैठक में भी शामिल नहीं हो सकेंगी। इस बैठक में विपक्षी दल संसद सत्र के दौरान सरकार को घेरने और महत्वपूर्ण विधेयकों पर अपनी साझा रणनीति तय करने वाले हैं।

    आपको बता दें कि सुप्रिया सुले का यह वॉयस रेस्ट ऐसे समय पर आया है जब वे राजनीतिक रूप से दो बेहद संवेदनशील मुद्दों को लेकर लगातार खबरों में बनी हुई हैं। सुप्रिया सुले ने हाल ही में महिला आरक्षण से जुड़े प्रस्तावित परिसीमन विधेयक (Delimitation Bill) को लेकर एक बड़ा बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि उनकी पार्टी इस विधेयक का बारीकी से अध्ययन करेगी। साथ ही उन्होंने संकेत दिया था कि यदि यह विधेयक सभी राज्यों के लिए लोकसभा सीटों में एक समान 50 प्रतिशत की वृद्धि की गारंटी देता है तो उनकी पार्टी इसका समर्थन कर सकती है। उनके इस रुख के बाद राजनीतिक गलियारों में नई बहस छिड़ गई थी।


    NCP के दोनों गुटों के विलय की अटकलें

    इसके अलावा सुप्रिया सुले को लगातार उन अटकलों का भी सामना करना पड़ रहा है जिसमें दावा किया जा रहा है कि भारतीय जनता पार्टी (BJP), शरद पवार के नेतृत्व वाली राकांपा (SP) और सुनेत्रा पवार के नेतृत्व वाले राकांपा गुट के बीच विलय का समर्थन कर रही है। राजनीतिक हलकों में यह चर्चा भी जोरों पर है कि यदि पवार परिवार का यह पुनर्मिलन होता है तो इस कुनबे को केंद्र सरकार में दो मंत्री पद दिए जा सकते हैं। हालांकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बहुप्रतीक्षित कैबिनेट विस्तार की तरह ही ये खबरें भी फिलहाल पूरी तरह से कयासों पर आधारित हैं।

    इस मॉनसून सत्र में सरकार जिस सबसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील विधेयक को पेश करने की तैयारी में है वह है संविधान 131वां संशोधन विधेयक, 2026। यह विधेयक लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में 33 प्रतिशत महिला आरक्षण को निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन से जोड़ता है।

  • हरिद्वार में पुलिस ने धार्मिक स्थलों से हटाए 94 लाउडस्पीकर, दोबारा उल्लंघन पर होगी कार्रवाई

    हरिद्वार में पुलिस ने धार्मिक स्थलों से हटाए 94 लाउडस्पीकर, दोबारा उल्लंघन पर होगी कार्रवाई


    देहरादून। ध्वनि प्रदूषण को लेकर हरिद्वार पुलिस ने जिलेभर में विशेष अभियान चलाते हुए धार्मिक स्थलों से 94 लाउडस्पीकर हटाए हैं। पुलिस के मुताबिक, जांच के दौरान ये लाउडस्पीकर निर्धारित ध्वनि सीमा से अधिक आवाज में संचालित पाए गए थे, जो ध्वनि प्रदूषण नियमों और सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन था।

    पुलिस की टीमों ने अभियान के तहत हरिद्वार जिले के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में अलग-अलग थाना क्षेत्रों के अंतर्गत आने वाले धार्मिक स्थलों का निरीक्षण किया। जहां भी नियमों का उल्लंघन मिला, वहां कार्रवाई करते हुए लाउडस्पीकर हटाए गए। अभियान के दौरान शहरी क्षेत्रों से 31 लाउडस्पीकर और ग्रामीण इलाकों से 63 लाउडस्पीकर हटाए गए। इस तरह पूरे जिले में कुल 94 लाउडस्पीकरों पर कार्रवाई की गई।

    नियमों की जानकारी भी दी गई
    हरिद्वार पुलिस ने बताया कि अभियान का उद्देश्य केवल कार्रवाई करना नहीं, बल्कि लोगों को ध्वनि प्रदूषण से जुड़े नियमों के प्रति जागरूक करना भी है। इस दौरान धार्मिक स्थलों के प्रबंधन और संबंधित समितियों को नियमों की जानकारी दी गई। उन्हें बताया गया कि बिना अनुमति लाउडस्पीकर का उपयोग नहीं किया जा सकता। वहीं, अनुमति मिलने के बाद भी निर्धारित ध्वनि सीमा का पालन करना अनिवार्य है।

    उल्लंघन पर होगी कानूनी कार्रवाई
    पुलिस ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में यदि कोई व्यक्ति या संस्था बिना अनुमति लाउडस्पीकर चलाती है या तय मानकों से अधिक आवाज में इसका इस्तेमाल करती है, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    आगे भी जारी रहेगा अभियान
    दरअसल, ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट और केंद्र सरकार की ओर से समय-समय पर दिशा-निर्देश जारी किए जाते रहे हैं। इन्हीं नियमों के तहत स्थानीय प्रशासन और पुलिस सार्वजनिक व धार्मिक स्थलों पर ध्वनि उपकरणों के इस्तेमाल की निगरानी करते हैं।

    हरिद्वार पुलिस के अनुसार, यह अभियान आगे भी जारी रहेगा और जहां भी नियमों का उल्लंघन सामने आएगा, वहां नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। पुलिस की ओर से जारी आधिकारिक जानकारी में बताया गया है कि कार्रवाई विभिन्न धार्मिक स्थलों पर नियमों के उल्लंघन के मामलों में की गई।

  • गुरु ने बदला नक्षत्र, इन 4 राशियों की चमकेगी किस्‍मत, खुलेंगे तरक्की-धन लाभ के नए रास्ते

    गुरु ने बदला नक्षत्र, इन 4 राशियों की चमकेगी किस्‍मत, खुलेंगे तरक्की-धन लाभ के नए रास्ते


    नई दिल्ली। आज 19 जुलाई 2026 की भोर से देवगुरु बृहस्पति ने अपना नक्षत्र परिवर्तन कर लिया है। ज्योतिष शास्त्र में गुरु का नक्षत्र गोचर बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि इसका प्रभाव व्यक्ति की आर्थिक स्थिति, करियर, शिक्षा, आत्मविश्वास और भाग्य पर पड़ता है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, यह गोचर कई लोगों के लिए नई शुरुआत और रुके हुए कार्यों में गति का संकेत माना जा रहा है।

    क्यों महत्वपूर्ण माना जाता है यह गोचर?
    ज्योतिष के अनुसार, बृहस्पति केवल शुभ फल देने वाले ग्रह ही नहीं, बल्कि ज्ञान, समृद्धि और जीवन की दिशा के कारक भी माने जाते हैं। जब गुरु नक्षत्र परिवर्तन करते हैं तो उनके प्रभाव में बदलाव आता है, जिसका असर विभिन्न राशियों पर अलग-अलग रूप में देखने को मिल सकता है। माना जा रहा है कि यह गोचर उन लोगों के लिए विशेष हो सकता है जो लंबे समय से करियर, व्यवसाय या आर्थिक मामलों में ठहराव महसूस कर रहे थे।

    इन 4 राशियों पर रह सकती है गुरु की विशेष कृपा

    मेष राशि
    ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, मेष राशि के जातक पुराने अनुभवों से सीख लेकर नई योजनाओं पर काम शुरू कर सकते हैं। निर्णय लेने की क्षमता मजबूत होगी और आर्थिक मामलों में कोई सुखद समाचार या लाभ मिलने की संभावना बन सकती है।

    कर्क राशि
    इस गोचर के प्रभाव से कर्क राशि के लोग भावनाओं की बजाय व्यावहारिक सोच के साथ आगे बढ़ सकते हैं। सामाजिक दायरा बढ़ने के साथ करियर में नए अवसर मिलने की संभावना भी बन रही है।

    कन्या राशि
    कन्या राशि के लिए यह समय महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस दौरान शुरू किए गए कार्य भविष्य में अच्छे परिणाम दे सकते हैं। धन लाभ के साथ मान-सम्मान और प्रतिष्ठा में भी वृद्धि के संकेत हैं।

    मकर राशि
    मकर राशि के जातकों को पुराने आर्थिक दबाव और चिंताओं से राहत मिलने की संभावना जताई जा रही है। करियर में पदोन्नति या नई जिम्मेदारी मिलने के योग बन सकते हैं। सफलता के लिए लक्ष्य पर फोकस बनाए रखना जरूरी होगा।

    गुरु को प्रसन्न करने के लिए करें ये उपाय
    ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, गुरु गोचर के दौरान केवल पूजा-पाठ ही नहीं, बल्कि अच्छे आचरण का भी विशेष महत्व होता है।

    – नई विद्या या किसी नई स्किल को सीखने की शुरुआत करें।
    – घर के बुजुर्गों और शिक्षकों का सम्मान कर उनका आशीर्वाद लें।
    – अगले कुछ दिनों तक सात्विक भोजन और संयमित दिनचर्या अपनाने का प्रयास करें, जिसे सकारात्मक ऊर्जा के लिए शुभ माना जाता है।

    नोट: यह जानकारी ज्योतिषीय मान्यताओं और पारंपरिक विश्वासों पर आधारित है। इसका उद्देश्य केवल धार्मिक एवं सांस्कृतिक जानकारी देना है।

  • तेहरान में ट्रंप परिवार को लेकर विवादित होर्डिंग, ताबूतों में दिखाया, लिखा- 'खून का बदला खून'

    तेहरान में ट्रंप परिवार को लेकर विवादित होर्डिंग, ताबूतों में दिखाया, लिखा- 'खून का बदला खून'


    नई दिल्‍ली । अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच तेहरान में एक ऐसा सरकारी समर्थित होर्डिंग लगाया गया है, जिसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई बहस छेड़ दी है. राजधानी तेहरान के फिलिस्तीन स्क्वायर में लगाए गए इस विशाल होर्डिंग में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, उनकी पत्नी मेलानिया ट्रंप और उनके बच्चों को अमेरिकी झंडे से ढके ताबूतों के ऊपर दिखाया गया है. इसके साथ बड़े अक्षरों में लिखा है- ‘खून का बदला खून’

    रिपोर्ट के मुताबिक यह होर्डिंग अमेरिका और इजरायल के उन हमलों के जवाब के रूप में देखा जा रहा है, जिनमें ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई और उनके परिवार के कई सदस्य मारे गए थे. होर्डिंग में व्हाइट हाउस की पृष्ठभूमि का इस्तेमाल करते हुए ट्रंप परिवार को सीधे निशाने पर दिखाया गया है.

    अंतरराष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति और उनके पूरे परिवार को सीधे जान से मारने और बदला लेने की यह ईरान की ओर से अब तक की सबसे सीधी और आक्रामक चेतावनी है.

    तेहरान में बढ़ रहे आक्रामक संदेश

    यह अकेला पोस्टर नहीं है. हाल के दिनों में तेहरान के अलग-अलग हिस्सों में कई ऐसे पोस्टर और भित्तिचित्र बनाए गए हैं, जिनमें अमेरिका के खिलाफ तीखे संदेश दिए गए हैं. एक अन्य पोस्टर में ट्रंप को खुले काले ताबूत में लेटा हुआ दिखाया गया है, जिसके ऊपर अंग्रेजी और फारसी भाषा में “हम ट्रंप को मार डालेंगे” लिखा गया है.

    ताबूत पर नीचे सफेद रंग से लिखा है ‘मिनाब के बच्चों की याद में’, जो उस ईरानी शहर का संदर्भ है जहां अमेरिकी हमले में एक प्राइमरी स्कूल की चपेट में आने से कई बच्चों की मौत हो गई थी.

    वहीं, कुछ अन्य पोस्टरों में ट्रंप के चेहरे को बंदूक की क्रॉसहेयर (निशाने) में दिखाया गया है. इसके साथ ही, हाल ही में 71 वर्ष की आयु में दम तोड़ने वाले वरिष्ठ अमेरिकी रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम के नाम के नीचे लिखा गया है- “अगला कौन?”

    फिलिस्तीन स्क्वायर स्थित जिस इमारत पर यह पोस्टर लगाया गया है, उसका इस्तेमाल लंबे समय से अमेरिका और इजरायल के खिलाफ सरकारी संदेशों के प्रदर्शन के लिए किया जाता रहा है. यहां अक्सर ईरान समर्थक समूह फिलिस्तीनी और हिज़्बुल्लाह के झंडों के साथ प्रदर्शन भी करते हैं.

    पहले भी मिल चुकी हैं धमकियां
    डोनाल्ड ट्रंप पहले ही कह चुके हैं कि यदि ईरान उनकी हत्या की किसी भी कोशिश में शामिल पाया गया, तो अमेरिका की प्रतिक्रिया “बेहद विनाशकारी” होगी. दूसरी ओर, खामेनेई की मौत के बाद ईरानी नेताओं और सरकारी समर्थक मीडिया की ओर से लगातार “बदले” की बात कही जा रही है. उनके उत्तराधिकारी आयतुल्ला मोजतबा खामेनेई ने भी कहा है कि जिम्मेदार लोग “अपने बिस्तर पर भी शांतिपूर्वक नहीं मरेंगे.”

    हालांकि, इस पोस्टर को लेकर ईरानी सरकार की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है. वहीं, अमेरिका की तरफ से भी इस पर तत्काल प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.

  • सावन 2026 में पड़ेंगे दो ग्रहण, क्या रुकेगी शिव पूजा? जानिए सूतक, पूजा और जरूरी सावधानियां

    सावन 2026 में पड़ेंगे दो ग्रहण, क्या रुकेगी शिव पूजा? जानिए सूतक, पूजा और जरूरी सावधानियां


    नई दिल्ली। भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे पवित्र माने जाने वाले श्रावण मास में इस बार एक विशेष ज्योतिषीय संयोग बन रहा है। वर्ष 2026 के सावन में एक सूर्य ग्रहण और एक चंद्र ग्रहण पड़ने वाले हैं। ऐसे में कई श्रद्धालुओं के मन में सवाल है कि क्या ग्रहण के कारण पूजा-पाठ प्रभावित होगा, सूतक काल मान्य रहेगा और क्या सावन के सोमवार की पूजा में कोई बाधा आएगी। आइए जानते हैं क्या कहते हैं पंचांग और धार्मिक मान्यताएं।

    कब लगेंगे सावन में ग्रहण?

    12 अगस्त 2026 – सूर्य ग्रहण
    पंचांग के अनुसार, वर्ष 2026 का दूसरा और अंतिम सूर्य ग्रहण 12 अगस्त को लगेगा। यह खग्रास सूर्य ग्रहण होगा, जो आर्कटिक, ग्रीनलैंड, आइसलैंड, स्पेन और पुर्तगाल सहित कुछ देशों में दिखाई देगा।

    28 अगस्त 2026 – चंद्र ग्रहण
    साल का अंतिम आंशिक चंद्र ग्रहण 28 अगस्त को रक्षाबंधन के दिन लगेगा। यह ग्रहण अमेरिका, यूरोप और अफ्रीका के कई हिस्सों में दिखाई देगा।

    क्या भारत में रहेगा सूतक काल?
    धार्मिक मान्यता के अनुसार, सूतक काल तभी प्रभावी माना जाता है जब ग्रहण संबंधित क्षेत्र में दिखाई दे। चूंकि वर्ष 2026 के ये दोनों ग्रहण भारत में दृश्य नहीं होंगे, इसलिए भारत में इनका सूतक काल मान्य नहीं होगा। ऐसे में श्रद्धालुओं को अपनी नियमित पूजा-पाठ या धार्मिक अनुष्ठानों में किसी प्रकार का बदलाव करने की आवश्यकता नहीं है।

    क्या पूजा-पाठ पर पड़ेगा कोई असर?
    ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देने के कारण मंदिरों के कपाट बंद करने या पूजा-अर्चना पर रोक लगाने का कोई नियम लागू नहीं होगा। श्रद्धालु सावन के सोमवार सहित अन्य शुभ तिथियों पर भगवान शिव का जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और नियमित पूजा-अर्चना पहले की तरह कर सकते हैं।

    इन बातों का रखें विशेष ध्यान
    हालांकि भारत में सूतक काल प्रभावी नहीं रहेगा, फिर भी धार्मिक परंपराओं और ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार कुछ सावधानियां बरतना शुभ माना गया है।

    – सावन के पवित्र महीने में मन में नकारात्मक विचारों को स्थान न दें और सकारात्मक सोच बनाए रखें।
    – भगवान शिव के प्रति श्रद्धा और विश्वास बनाए रखते हुए मंत्र जाप एवं नियमित पूजा करें।
    – ग्रहण को लेकर सोशल मीडिया पर फैलने वाली अफवाहों या भ्रामक जानकारियों पर विश्वास न करें।
    – सावन में दान-पुण्य का विशेष महत्व माना गया है। ग्रहण वाले दिन भी अपनी श्रद्धा के अनुसार जरूरतमंदों की सहायता और सात्विक दान किया जा सकता है।

  • एमपी में बदला मौसम का मिजाज, छतरपुर-पन्ना में भारी बारिश का अलर्ट, 34 जिलों में हल्की बारिश के आसार

    एमपी में बदला मौसम का मिजाज, छतरपुर-पन्ना में भारी बारिश का अलर्ट, 34 जिलों में हल्की बारिश के आसार


    भोपाल। मध्य प्रदेश में रविवार को भी मौसम का मिजाज बदला रहेगा। मौसम विभाग ने अगले 24 घंटे के लिए छतरपुर और पन्ना जिलों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। वहीं, जबलपुर, ग्वालियर सहित 34 जिलों में हल्की बारिश या बूंदाबांदी होने की संभावना जताई गई है। दूसरी ओर, भोपाल, इंदौर और उज्जैन समेत कई जिलों में मौसम साफ रहने का अनुमान है।

    मौसम विभाग के मुताबिक, प्रदेश के आसपास सक्रिय चार साइक्लोनिक सर्कुलेशन (चक्रवाती परिसंचरण) और एक टर्फ के प्रभाव से प्रदेश में बारिश की गतिविधियां बनी हुई हैं। इसी सिस्टम के कारण शनिवार को भोपाल, नर्मदापुरम सहित कई जिलों में कहीं तेज तो कहीं हल्की बारिश दर्ज की गई। रविवार को भी इसी तरह का मौसम बने रहने की संभावना है।

    विभाग के अनुसार, छतरपुर और पन्ना में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। वहीं रायसेन, विदिशा, नर्मदापुरम, बैतूल, ग्वालियर, श्योपुर, मुरैना, भिंड, दतिया, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, मऊगंज, मैहर, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, सागर, दमोह, टीकमगढ़ और निवाड़ी में बूंदाबांदी या हल्की बारिश हो सकती है।

    इसके विपरीत भोपाल, राजगढ़, सीहोर, हरदा, इंदौर, झाबुआ, अलीराजपुर, धार, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, उज्जैन, नीमच, मंदसौर, रतलाम, आगर-मालवा, शाजापुर और देवास में मौसम सामान्य और साफ रहने का पूर्वानुमान है।

    जुलाई में सामान्य से 15 फीसदी कम बारिश
    प्रदेश में पिछले नौ दिनों के दौरान किसी भी जिले में भारी या अति भारी बारिश दर्ज नहीं की गई है। इसका असर मानसूनी आंकड़ों पर भी दिखाई दे रहा है। शनिवार तक मध्य प्रदेश में सामान्य से 15 प्रतिशत कम बारिश रिकॉर्ड की गई है।

    अब तक प्रदेश में 247 मिमी वर्षा दर्ज की गई है, जबकि इस अवधि में सामान्य औसत 291 मिमी बारिश होती है। पूर्वी मध्य प्रदेश में सामान्य से 26 प्रतिशत कम और पश्चिमी हिस्से में 5 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है।

    बारिश के आंकड़ों पर नजर डालें तो देवास प्रदेश का सबसे अधिक वर्षा वाला जिला बना हुआ है, जहां सामान्य से 102 प्रतिशत अधिक बारिश हो चुकी है। यहां अब तक करीब 18 इंच वर्षा दर्ज की गई है। इसके अलावा हरदा में 15 इंच, इंदौर और सीहोर में करीब 14 इंच, जबकि भोपाल में अब तक 13.1 इंच बारिश रिकॉर्ड की गई है।

  • रविवार का राशिफल: करियर, कारोबार और पारिवारिक जीवन में कई राशियों को मिलेगी खुशखबरी, जानें कैसा रहेगा आपका दिन

    रविवार का राशिफल: करियर, कारोबार और पारिवारिक जीवन में कई राशियों को मिलेगी खुशखबरी, जानें कैसा रहेगा आपका दिन

    नई दिल्ली । वैदिक ज्योतिष के अनुसार 19 जुलाई 2026, रविवार का दिन ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति के कारण सभी 12 राशियों के लिए अलग-अलग प्रभाव लेकर आ सकता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार रविवार का दिन भगवान सूर्य की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। इस दिन सूर्य देव की पूजा करने से आत्मविश्वास, पद-प्रतिष्ठा और ऊर्जा में वृद्धि होने की मान्यता है। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार कुछ राशि के जातकों को करियर, व्यापार और आर्थिक मामलों में लाभ मिलने के संकेत हैं, जबकि कुछ लोगों को स्वास्थ्य, खर्च और रिश्तों से जुड़े मामलों में सावधानी बरतने की आवश्यकता हो सकती है।

    मेष राशि के जातकों को वैवाहिक जीवन में संतुलन बनाए रखने की सलाह दी गई है। व्यापार में लाभ के अवसर मिल सकते हैं, लेकिन अनावश्यक खर्चों पर नियंत्रण रखना बेहतर रहेगा। कार्यस्थल पर सहकर्मियों के साथ व्यवहार में संयम रखने से लाभ होगा। वृषभ राशि के लोगों के लिए स्वास्थ्य अनुकूल रह सकता है, हालांकि आर्थिक मामलों में सोच-समझकर निर्णय लेने की जरूरत रहेगी। पारिवारिक सहयोग मिलने के साथ व्यापार विस्तार की संभावना भी बन सकती है।

    मिथुन राशि के जातकों के लिए करियर और आय के लिहाज से दिन सकारात्मक रह सकता है। नौकरी में उन्नति और नए अवसर मिलने के संकेत हैं। कर्क राशि के लोगों का आत्मविश्वास बढ़ सकता है और शिक्षा, प्रतियोगिता तथा संपत्ति से जुड़े मामलों में सफलता मिलने की संभावना है। मित्रों का सहयोग भी लाभदायक साबित हो सकता है।

    सिंह राशि के जातकों को प्रभावशाली लोगों से संपर्क का लाभ मिल सकता है। संतान पक्ष से शुभ समाचार मिलने के योग हैं। कन्या राशि के लोगों को स्वास्थ्य संबंधी पुरानी परेशानियों से राहत मिलने की संभावना है। आर्थिक स्थिति मजबूत रह सकती है और मित्रों के साथ अच्छा समय बिताने का अवसर मिल सकता है।

    तुला राशि के जातकों को कार्यस्थल पर व्यस्तता अधिक रह सकती है। आर्थिक मामलों और प्रेम संबंधों में धैर्य रखने की सलाह दी गई है। वृश्चिक राशि के लोगों के लिए स्वास्थ्य सामान्य रहने के संकेत हैं, लेकिन परिवार के वरिष्ठ सदस्यों की सेहत पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता हो सकती है। विवादों से दूरी बनाए रखना हितकर रहेगा।

    धनु राशि के जातकों को स्वास्थ्य और खर्च दोनों पर नियंत्रण रखने की सलाह दी गई है। किसी महत्वपूर्ण व्यक्ति से मुलाकात लाभदायक हो सकती है और व्यापार में सकारात्मक परिणाम मिलने की संभावना है। मकर राशि के लोगों को भावनात्मक निर्णय लेने से बचना चाहिए। आर्थिक और स्वास्थ्य संबंधी मामलों में अतिरिक्त सतर्कता आवश्यक रहेगी, हालांकि कार्यस्थल पर कोई सुखद समाचार मिल सकता है।

    कुंभ राशि के जातकों के नए विचार उन्हें कार्यक्षेत्र में पहचान दिला सकते हैं। निवेश से जुड़े फैसले भविष्य में लाभदायक साबित हो सकते हैं, लेकिन सहकर्मियों के साथ सतर्क रहना उचित रहेगा। मीन राशि के लोगों के लिए दिन आर्थिक दृष्टि से अनुकूल रह सकता है। परिवार में सुखद वातावरण बना रहेगा और नए व्यापार या नई शुरुआत के अवसर प्राप्त हो सकते हैं।

    ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार यह राशिफल ग्रह-नक्षत्रों की वर्तमान स्थिति पर आधारित सामान्य अनुमान है। किसी भी महत्वपूर्ण निर्णय से पहले व्यक्तिगत परिस्थितियों और विशेषज्ञ की सलाह को प्राथमिकता देना उचित माना जाता है।