Author: bharati

  • वैश्विक तनाव और महंगे कच्चे तेल के बीच भी भारतीय शेयर बाजार का दमदार प्रदर्शन, सेंसेक्स-निफ्टी ने साप्ताहिक बढ़त के साथ दिखाया भरोसा

    वैश्विक तनाव और महंगे कच्चे तेल के बीच भी भारतीय शेयर बाजार का दमदार प्रदर्शन, सेंसेक्स-निफ्टी ने साप्ताहिक बढ़त के साथ दिखाया भरोसा

    नई दिल्ली । वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बनी अनिश्चितता के बावजूद भारतीय शेयर बाजार ने बीते सप्ताह उल्लेखनीय मजबूती का प्रदर्शन किया। मजबूत कॉर्पोरेट नतीजों, सरकार के बड़े विनिर्माण संबंधी फैसलों और निवेशकों के सकारात्मक रुख ने घरेलू बाजार को सहारा दिया। इसी का परिणाम रहा कि सप्ताह के दौरान प्रमुख सूचकांक बढ़त के साथ बंद हुए और निवेशकों का भरोसा कायम रहा।

    सप्ताह भर के कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 582.06 अंकों यानी करीब 0.8 प्रतिशत की बढ़त दर्ज करते हुए मजबूत स्थिति में रहा, जबकि एनएसई निफ्टी 50 में 127.40 अंकों यानी लगभग 0.5 प्रतिशत की वृद्धि देखने को मिली। सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिन शुक्रवार को बाजार में खरीदारी का उत्साह और अधिक बढ़ गया। सेंसेक्स 964.58 अंकों की छलांग लगाकर 78,151.45 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 261.55 अंक चढ़कर 24,334.30 के स्तर पर पहुंच गया। यह तेजी इस बात का संकेत रही कि वैश्विक चुनौतियों के बीच भी घरेलू निवेशकों का विश्वास भारतीय अर्थव्यवस्था पर बना हुआ है।

    सप्ताह के दौरान निवेशकों की नजर पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव पर बनी रही। अमेरिका और ईरान के बीच हालिया घटनाक्रम ने वैश्विक वित्तीय बाजारों में सतर्कता का माहौल पैदा किया। इसके साथ ही कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल ने भी निवेशकों की चिंता बढ़ाई। इसके बावजूद भारतीय बाजार पर इन घटनाओं का सीमित प्रभाव देखने को मिला, क्योंकि घरेलू स्तर पर कई सकारात्मक आर्थिक संकेतकों ने बाजार को संतुलित बनाए रखा।

    बाजार को सबसे बड़ा सहारा प्रमुख कंपनियों के पहली तिमाही के वित्तीय नतीजों से मिला। कई बड़ी कंपनियों ने अपेक्षा से बेहतर प्रदर्शन प्रस्तुत किया, जिससे आईटी और चुनिंदा अन्य क्षेत्रों में निवेशकों की खरीदारी बढ़ी। इसके अलावा केंद्र सरकार द्वारा लगभग 1.9 लाख करोड़ रुपये की लागत वाली दो बड़ी विनिर्माण योजनाओं को मंजूरी दिए जाने से औद्योगिक विकास और निवेश को लेकर सकारात्मक माहौल बना। इन घोषणाओं ने दीर्घकालिक आर्थिक संभावनाओं को लेकर निवेशकों का विश्वास और मजबूत किया।

    सेक्टोरल प्रदर्शन की बात करें तो आईटी क्षेत्र पूरे सप्ताह सबसे अधिक चर्चा में रहा। इस क्षेत्र में सबसे अधिक बढ़त दर्ज की गई, जिससे तकनीकी कंपनियों के शेयरों में मजबूत खरीदारी देखने को मिली। कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, मीडिया, प्राइवेट बैंक और ऑयल एंड गैस सेक्टर ने भी सकारात्मक प्रदर्शन किया। दूसरी ओर रियल्टी, मेटल, डिफेंस, एफएमसीजी और पीएसयू बैंक जैसे कुछ क्षेत्रों में हल्की गिरावट दर्ज की गई, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि निवेशकों ने चुनिंदा क्षेत्रों में ही अधिक भरोसा दिखाया।

    हालांकि प्रमुख सूचकांकों में मजबूती रही, लेकिन व्यापक बाजार अपेक्षाकृत कमजोर नजर आया। मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांकों में सप्ताह के दौरान गिरावट दर्ज की गई। वहीं बाजार की अस्थिरता दर्शाने वाला इंडिया वीआईएक्स भी बढ़ा, जो यह संकेत देता है कि वैश्विक परिस्थितियों को लेकर निवेशकों के बीच सतर्कता अभी भी बनी हुई है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में भारतीय शेयर बाजार की दिशा मुख्य रूप से कंपनियों के आगामी तिमाही नतीजों, प्रबंधन के भविष्य के संकेतों, मानसून की स्थिति, कच्चे तेल की कीमतों और पश्चिम एशिया के भू-राजनीतिक घटनाक्रम पर निर्भर करेगी। यदि वैश्विक परिस्थितियां स्थिर रहती हैं और कॉर्पोरेट प्रदर्शन मजबूत बना रहता है, तो घरेलू शेयर बाजार में सकारात्मक रुझान आगे भी जारी रहने की संभावना बनी रहेगी।

  • भारत के निजी स्पेस सेक्टर ने रचा इतिहास, विक्रम-1 की सफलता पर गौतम अदाणी ने युवा शक्ति और आत्मनिर्भर भारत की सराहना की

    भारत के निजी स्पेस सेक्टर ने रचा इतिहास, विक्रम-1 की सफलता पर गौतम अदाणी ने युवा शक्ति और आत्मनिर्भर भारत की सराहना की

    नई दिल्ली । भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र ने विक्रम-1 की सफल ऑर्बिटल लॉन्चिंग के साथ एक नया इतिहास रच दिया है। इस उपलब्धि पर अदाणी समूह के चेयरमैन गौतम अदाणी ने इसे ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान का सशक्त प्रमाण बताते हुए स्काईरूट एयरोस्पेस, इसरो और आईएन-स्पेस की पूरी टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह सफलता केवल एक तकनीकी उपलब्धि नहीं, बल्कि भारत की नवाचार क्षमता, युवा प्रतिभा और निजी अंतरिक्ष उद्योग की बढ़ती ताकत का प्रतीक है।

    गौतम अदाणी ने अपने संदेश में कहा कि विक्रम-1 की पहली ऑर्बिटल उड़ान ने मिशन के सभी निर्धारित उद्देश्यों को सफलतापूर्वक पूरा किया है। उनके अनुसार यह उपलब्धि भारत के तेजी से विकसित हो रहे निजी स्पेस इकोसिस्टम के लिए एक नए युग की शुरुआत है। उन्होंने स्काईरूट एयरोस्पेस के सह-संस्थापक पवन चंदाना, भारत डाका और पूरी टीम के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि इस मिशन की सफलता सामूहिक वैज्ञानिक और तकनीकी क्षमता का परिणाम है।

    उन्होंने इस उपलब्धि को देश की आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताते हुए कहा कि भारत अब उन चुनिंदा देशों की श्रेणी में शामिल हो गया है, जहां निजी कंपनियां सफलतापूर्वक ऑर्बिटल लॉन्च करने की क्षमता प्रदर्शित कर चुकी हैं। उनके अनुसार यह उपलब्धि वैश्विक अंतरिक्ष उद्योग में भारत की मजबूत होती उपस्थिति और तकनीकी आत्मविश्वास को भी दर्शाती है।

    गौतम अदाणी ने विशेष रूप से मिशन से जुड़ी युवा टीम का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी औसत आयु लगभग 28 वर्ष है। उन्होंने कहा कि इतनी युवा टीम द्वारा हासिल की गई यह सफलता पूरी दुनिया के सामने भारत की नई पीढ़ी की क्षमता और नवाचार की शक्ति का उदाहरण प्रस्तुत करती है। उनका मानना है कि देश के युवाओं की प्रतिभा और वैज्ञानिक सोच भारत को भविष्य की वैश्विक तकनीकी प्रतिस्पर्धा में नई पहचान दिला सकती है।

    हैदराबाद स्थित स्काईरूट एयरोस्पेस ने ‘मिशन आगमन’ के तहत विक्रम-1 का सफल प्रक्षेपण किया। यह चार चरणों वाला प्रक्षेपण यान छोटे उपग्रहों को पृथ्वी की निचली कक्षा में पहुंचाने के उद्देश्य से विकसित किया गया है। मिशन का उद्देश्य वैश्विक स्तर पर तेज, लचीली और मांग आधारित लॉन्च सेवाएं उपलब्ध कराना है, जिससे भारत की वाणिज्यिक अंतरिक्ष सेवाओं को नई गति मिल सके।

    विक्रम-1 का नाम भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक डॉ. विक्रम साराभाई के सम्मान में रखा गया है। यह प्रक्षेपण यान छोटे उपग्रह मिशनों की बढ़ती वैश्विक मांग को ध्यान में रखते हुए विकसित किया गया है। सफल परीक्षण के बाद भारत की निजी अंतरिक्ष कंपनियों के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में नई संभावनाएं खुलने की उम्मीद जताई जा रही है।

    करीब सात मंजिला ऊंचाई वाले इस रॉकेट को पृथ्वी की निचली कक्षा में लगभग 450 किलोमीटर की ऊंचाई तक पहुंचाने के उद्देश्य से प्रक्षेपित किया गया। इस मिशन की सफलता ने यह संकेत दिया है कि भारत का निजी अंतरिक्ष क्षेत्र अब वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने के लिए तैयार है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी उपलब्धियां देश को अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी, उपग्रह प्रक्षेपण सेवाओं और वैश्विक वाणिज्यिक स्पेस मार्केट में मजबूत स्थान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।

  • CM योगी ने दी 574 करोड़ की 57 परियोजनाओं की सौगात, बोले- 'अब न कर्फ्यू, न दंगा, बुलंदशहर चंगा'

    CM योगी ने दी 574 करोड़ की 57 परियोजनाओं की सौगात, बोले- 'अब न कर्फ्यू, न दंगा, बुलंदशहर चंगा'


    बुलंदशहर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को बुलंदशहर दौरे के दौरान जिले को 574 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं की सौगात दी। उन्होंने नुमाइश ग्राउंड में आयोजित जनसभा में बुलंदशहर और सिकंदराबाद विधानसभा क्षेत्रों की 57 विकास परियोजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने प्रदेश में कानून-व्यवस्था और विकास कार्यों को लेकर सरकार की उपलब्धियां भी गिनाईं।

    सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था की स्थिति खराब थी, जबकि अब प्रदेश विकास और सुशासन की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा, “आज न कर्फ्यू है, न दंगा है, अब बुलंदशहर चंगा है।”

    किसानों के लिए मुआवजा बढ़ाने और रिंग रोड की घोषणा
    मुख्यमंत्री ने गंगा एक्सप्रेसवे और जेवर एयरपोर्ट को जोड़ने वाले लिंक एक्सप्रेसवे के लिए अधिग्रहित किसानों की भूमि का मुआवजा बढ़ाने की घोषणा की। इसके साथ ही बुलंदशहर नगर में रिंग रोड निर्माण को भी मंजूरी देने का ऐलान किया।

    रज्जू भैया सैनिक विद्या मंदिर पहुंचे मुख्यमंत्री
    जनसभा से पहले मुख्यमंत्री शिकारपुर स्थित रज्जू भैया सैनिक विद्या मंदिर पहुंचे। यहां उन्होंने कहा कि अयोध्या में श्रीराम मंदिर और काशी विश्वनाथ कॉरिडोर का निर्माण प्रदेश की जनता के विश्वास और समर्थन का परिणाम है। विद्यालय में छात्राओं के प्रवेश की सराहना करते हुए मुख्यमंत्री ने उनके लिए प्रदेश सरकार की ओर से छात्रावास बनवाने की घोषणा की। साथ ही उन्होंने रज्जू भैया की माताजी के नाम पर छात्रों के लिए भी छात्रावास बनाने की बात कही।

    2047 तक विकसित भारत का लिया संकल्प
    मुख्यमंत्री ने वर्ष 2047 तक भारत को विकसित और समृद्ध राष्ट्र बनाने का संकल्प दोहराया। उन्होंने कहा कि देशवासियों को अपनी सांस्कृतिक विरासत और महापुरुषों पर गर्व होना चाहिए। सामाजिक समरसता पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि छुआछूत, जाति, क्षेत्र और भाषा जैसे भेदभाव से ऊपर उठकर कार्य करने से ही राष्ट्र का समग्र विकास संभव है।

    अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) को दुनिया का सबसे बड़ा सामाजिक संगठन बताया और रज्जू भैया के योगदान को याद करते हुए कहा कि शिक्षा, संस्कार और सामाजिक एकता राष्ट्र निर्माण की मजबूत नींव हैं, जिन पर प्रदेश सरकार निरंतर कार्य कर रही है।

  • पश्चिम बंगाल में अभिषेक बनर्जी के पांच मंजिला कार्यालय पर प्रशासन की कार्रवाई, सुरक्षा के बीच चला बुलडोजर

    पश्चिम बंगाल में अभिषेक बनर्जी के पांच मंजिला कार्यालय पर प्रशासन की कार्रवाई, सुरक्षा के बीच चला बुलडोजर

    नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल की राजनीति में शनिवार को उस समय हलचल मच गई जब दक्षिण 24 परगना जिले के अमताला-बारुईपुर रोड स्थित तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और डायमंड हार्बर से सांसद अभिषेक बनर्जी के कथित अवैध रूप से निर्मित सांसद कार्यालय पर प्रशासन ने ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू कर दी। पांच मंजिला इमारत को गिराने के लिए प्रशासन ने भारी मशीनरी और तीन बुलडोजर तैनात किए। कार्रवाई के दौरान पूरे क्षेत्र में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए और बड़ी संख्या में पुलिस बल की मौजूदगी रही ताकि किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति से बचा जा सके।

    जिला प्रशासन के अधिकारियों के अनुसार संबंधित भवन को अवैध निर्माण की श्रेणी में पाया गया था। प्रशासन का कहना है कि भवन स्वामी और संबंधित पक्ष को पहले नोटिस जारी कर निर्माण से जुड़े वैध दस्तावेज प्रस्तुत करने का अवसर दिया गया था। अधिकारियों के मुताबिक निर्धारित समय सीमा के भीतर आवश्यक दस्तावेज या संतोषजनक जवाब उपलब्ध नहीं कराया गया, जिसके बाद नियमानुसार ध्वस्तीकरण की कार्रवाई का निर्णय लिया गया। प्रशासन का दावा है कि पूरी प्रक्रिया कानूनी प्रावधानों के तहत की जा रही है।

    शनिवार सुबह जैसे ही बुलडोजर कार्यालय परिसर पहुंचे, बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौके पर एकत्र होने लगे। कुछ ही देर में तृणमूल कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता भी घटनास्थल पर पहुंच गए, जिससे इलाके में तनाव का माहौल बन गया। स्थिति को नियंत्रित रखने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया और आसपास के क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी बढ़ा दी गई। अधिकारियों ने लोगों से शांति बनाए रखने और प्रशासनिक कार्रवाई में सहयोग करने की अपील की।

    जानकारी के अनुसार यह कार्यालय पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के परिणाम आने के बाद से बंद पड़ा था। इससे पहले डायमंड हार्बर संसदीय क्षेत्र से जुड़े कई संगठनात्मक कार्यक्रम, बैठकों और राजनीतिक गतिविधियों का संचालन इसी कार्यालय से किया जाता था। स्थानीय स्तर पर यह भवन तृणमूल कांग्रेस की महत्वपूर्ण राजनीतिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र माना जाता रहा है।

    इस कार्रवाई के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। प्रशासन जहां इसे अवैध निर्माण के विरुद्ध सामान्य कानूनी कार्रवाई बता रहा है, वहीं राजनीतिक गलियारों में इसे लेकर आरोप-प्रत्यारोप तेज होने की संभावना जताई जा रही है। मामले को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाओं पर भी नजर बनी हुई है। फिलहाल प्रशासन की निगरानी में भवन को ध्वस्त करने का कार्य जारी है और पूरे क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था सख्त रखी गई है। संबंधित पक्ष की ओर से इस कार्रवाई पर आधिकारिक विस्तृत प्रतिक्रिया का इंतजार है।

  • सिंगरौली में 2 हजार रुपये की रिश्वत लेते वन विभाग का बीट गार्ड रंगे हाथ गिरफ्तार, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज

    सिंगरौली में 2 हजार रुपये की रिश्वत लेते वन विभाग का बीट गार्ड रंगे हाथ गिरफ्तार, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज

    मध्य प्रदेश। सिंगरौली जिले में भ्रष्टाचार के खिलाफ लोकायुक्त पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए वन विभाग के एक बीट गार्ड को दो हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई बरगवां रेंज के ओबरी जंगल चौकी क्षेत्र में की गई। शिकायत के सत्यापन के बाद लोकायुक्त टीम ने योजनाबद्ध तरीके से ट्रैप कार्रवाई को अंजाम दिया और आरोपी कर्मचारी को रिश्वत की रकम स्वीकार करते समय मौके पर ही पकड़ लिया। घटना के बाद वन विभाग के स्थानीय कार्यालयों में हलचल का माहौल बन गया।

    जानकारी के अनुसार, ओबरी बीट में पदस्थ बीट गार्ड अखिलेश शुक्ला पर क्षेत्र के निवासी रामलोचन प्रजापति से एक शासकीय कार्य के बदले रिश्वत मांगने का आरोप लगा था। शिकायतकर्ता ने कथित रूप से बार-बार रिश्वत की मांग से परेशान होकर लोकायुक्त पुलिस से संपर्क किया और पूरे मामले की लिखित शिकायत दर्ज कराई। शिकायत मिलने के बाद लोकायुक्त अधिकारियों ने प्रारंभिक जांच और तथ्यों का सत्यापन किया, जिसमें शिकायत प्रथम दृष्टया सही पाई गई।

    सत्यापन के बाद लोकायुक्त टीम ने आरोपी को रंगे हाथ पकड़ने के लिए विशेष योजना बनाई। निर्धारित समय पर शिकायतकर्ता को रासायनिक पदार्थ लगे दो हजार रुपये के नोट दिए गए और उसे आरोपी के पास भेजा गया। जैसे ही बीट गार्ड ने शिकायतकर्ता से रिश्वत की राशि स्वीकार की, पहले से निगरानी कर रही लोकायुक्त टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए उसे मौके पर ही पकड़ लिया।

    कार्रवाई के दौरान निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार आरोपी के हाथ धुलवाए गए। परीक्षण में हाथों का रंग गुलाबी होने से रासायनिक पदार्थ के संपर्क की पुष्टि हुई, जिसे ट्रैप कार्रवाई का महत्वपूर्ण साक्ष्य माना जाता है। इसके बाद टीम ने रिश्वत की राशि बरामद कर आवश्यक दस्तावेजी कार्रवाई शुरू की।

    लोकायुक्त अधिकारियों ने बताया कि शिकायतकर्ता की सूचना और उसके सत्यापन के आधार पर यह कार्रवाई की गई है। आरोपी कर्मचारी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के प्रावधानों के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। साथ ही मामले से जुड़े अन्य आवश्यक साक्ष्य एकत्र किए जा रहे हैं ताकि आगे की वैधानिक प्रक्रिया नियमानुसार पूरी की जा सके।

    कार्रवाई के बाद आरोपी बीट गार्ड को बरगवां स्थित सर्किट हाउस ले जाया गया, जहां पूछताछ, दस्तावेजी औपचारिकताओं और अन्य कानूनी प्रक्रियाओं को पूरा किया गया। अधिकारियों ने बताया कि जांच के दौरान प्राप्त तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। मामले में यदि अतिरिक्त साक्ष्य सामने आते हैं तो उन्हें भी जांच का हिस्सा बनाया जाएगा।

    इस कार्रवाई के बाद वन विभाग के कर्मचारियों और अधिकारियों के बीच चर्चा का माहौल है। लोकायुक्त की इस ट्रैप कार्रवाई को सरकारी कार्यालयों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि भ्रष्टाचार संबंधी शिकायतों पर नियमानुसार जांच की जाती है और शिकायत सही पाए जाने पर कानून के तहत सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाती है। ऐसे मामलों में नागरिकों से भी अपील की जाती है कि यदि किसी सरकारी कार्य के बदले अवैध धनराशि की मांग की जाए तो उसकी सूचना संबंधित जांच एजेंसियों को दें, ताकि निष्पक्ष कार्रवाई की जा सके।

  • सोनम वांगचुक को अस्पताल ले जाने के बाद जंतर-मंतर पर नया विवाद, अभिजीत दीपके पर स्याही फेंके जाने से बढ़ा राजनीतिक तनाव

    सोनम वांगचुक को अस्पताल ले जाने के बाद जंतर-मंतर पर नया विवाद, अभिजीत दीपके पर स्याही फेंके जाने से बढ़ा राजनीतिक तनाव

    नई दिल्ली । राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर पिछले 21 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को शनिवार सुबह स्वास्थ्य संबंधी गंभीर चिंताओं के बीच पुलिस ने सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया। इस कार्रवाई के बाद प्रदर्शन स्थल पर नया घटनाक्रम सामने आया, जब कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने वांगचुक के समर्थन में भूख हड़ताल शुरू की और इसी दौरान एक महिला ने उन पर स्याही फेंक दी। इस घटना के बाद प्रदर्शन स्थल पर कुछ समय के लिए तनावपूर्ण स्थिति बन गई।

    जानकारी के अनुसार शनिवार सुबह पुलिस की एक टीम सिविल ड्रेस में जंतर-मंतर पहुंची। चिकित्सकीय सलाह और बिगड़ती सेहत को देखते हुए सोनम वांगचुक को एंबुलेंस के माध्यम से सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया। इस दौरान वहां मौजूद समर्थकों और प्रदर्शनकारियों ने पुलिस की कार्रवाई का विरोध किया। मौके पर कुछ देर तक बहस और नारेबाजी भी हुई, हालांकि बाद में पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित कर लिया।

    अस्पताल में भर्ती सोनम वांगचुक की हालत पर डॉक्टर लगातार निगरानी बनाए हुए हैं। प्रारंभिक चिकित्सकीय जांच में उनके शरीर में डिहाइड्रेशन, पोटैशियम की कमी और कीटोन का स्तर बढ़ा हुआ पाया गया है। विशेषज्ञों के अनुसार लंबे समय तक भोजन नहीं लेने की स्थिति में शरीर में कीटोन बढ़ना सामान्य हो सकता है, लेकिन यदि इसके साथ गंभीर डिहाइड्रेशन भी हो तो किडनी और शरीर की चयापचय प्रणाली पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका बढ़ जाती है। इसी कारण चिकित्सकों ने तत्काल उपचार की आवश्यकता पर जोर दिया है।

    अस्पताल प्रशासन ने वांगचुक के परिजनों से भी उपचार शुरू करने की अनुमति देने का आग्रह किया है। डॉक्टरों का कहना है कि समय पर चिकित्सा हस्तक्षेप से संभावित जटिलताओं को रोका जा सकता है। अस्पताल में उनकी स्वास्थ्य स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और आवश्यक परीक्षण किए जा रहे हैं।

    इस बीच जंतर-मंतर पर वांगचुक के समर्थन में कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके भूख हड़ताल पर बैठ गए। प्रदर्शन के दौरान एक महिला अचानक उनके पास पहुंची और उन पर स्याही फेंक दी। घटना के बाद वहां मौजूद लोगों ने तुरंत स्थिति संभाली। इस घटनाक्रम का वीडियो कुछ ही समय में सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से साझा किया जाने लगा।

    घटना के बाद अभिजीत दीपके ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर स्याही से रंगे कपड़ों की तस्वीर और वीडियो साझा करते हुए लिखा, “नीला मेरा रंग है… जय भीम।” उनके इस संदेश पर सोशल मीडिया पर विभिन्न प्रकार की प्रतिक्रियाएं सामने आईं। समर्थकों ने घटना की आलोचना की, जबकि अन्य लोगों ने पूरे घटनाक्रम पर अलग-अलग राजनीतिक टिप्पणियां कीं।

    पूरे घटनाक्रम ने जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन को एक बार फिर राष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में ला दिया है। एक ओर सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य को लेकर चिंता बनी हुई है, वहीं दूसरी ओर प्रदर्शन स्थल पर हुई स्याही फेंकने की घटना ने सुरक्षा व्यवस्था और विरोध प्रदर्शन के स्वरूप को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। फिलहाल अस्पताल में चिकित्सकीय निगरानी जारी है और प्रदर्शन से जुड़े घटनाक्रम पर प्रशासन की नजर बनी हुई है।

  • जंतर-मंतर से सोनम वांगचुक को अस्पताल ले जाने पर बढ़ा सियासी विवाद, CJP ने पीएम मोदी के इस्तीफे की उठाई मांग

    जंतर-मंतर से सोनम वांगचुक को अस्पताल ले जाने पर बढ़ा सियासी विवाद, CJP ने पीएम मोदी के इस्तीफे की उठाई मांग

    नई दिल्ली । राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर 21 दिनों से जारी अनशन के बीच शनिवार को उस समय नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया, जब पुलिस ने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को धरनास्थल से हटाकर इलाज के लिए अस्पताल पहुंचा दिया। लंबे समय से भोजन नहीं करने के कारण उनकी सेहत लगातार कमजोर हो रही थी। पुलिस की इस कार्रवाई के बाद आंदोलन से जुड़े संगठनों और समर्थकों ने विरोध जताया, जबकि कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने इसे लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस्तीफे की मांग कर दी।

    सोनम वांगचुक 28 जून से जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल पर बैठे थे। उनका अनशन देश में पेपर लीक की घटनाओं के खिलाफ शुरू हुए आंदोलन के समर्थन में चल रहा था। प्रदर्शनकारी परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित करने, दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग कर रहे थे। आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग भी उठाई थी।

    शनिवार सुबह पुलिस ने स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं को देखते हुए वांगचुक को धरनास्थल से हटाकर अस्पताल पहुंचाया। अधिकारियों के अनुसार, लंबे समय तक अनशन के कारण उनकी शारीरिक स्थिति कमजोर हो रही थी और चिकित्सकीय निगरानी आवश्यक थी। इससे पहले न्यायालय की ओर से भी उनके स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखने की आवश्यकता पर टिप्पणी की गई थी। पुलिस का कहना है कि यह कदम उनकी सुरक्षा और उपचार सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया।

    वांगचुक को अस्पताल ले जाने के बाद आंदोलन से जुड़े लोगों ने इस कार्रवाई का विरोध किया। कॉकरोच जनता पार्टी ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस्तीफे की मांग की। पार्टी ने आरोप लगाया कि लोकतांत्रिक तरीके से चल रहे आंदोलन के साथ उचित व्यवहार नहीं किया गया। इस बयान के बाद राजनीतिक बहस और तेज हो गई।

    इसी बीच CJP के संस्थापक अभिजी दीपके ने घोषणा की कि वह स्वयं भूख हड़ताल पर बैठेंगे। उन्होंने पुलिस कार्रवाई को लोकतांत्रिक अधिकारों के खिलाफ बताते हुए इसकी आलोचना की। दीपके ने एक वीडियो संदेश जारी कर आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान छात्रों के साथ बल प्रयोग किया गया और उनके साथ भी मारपीट हुई। उन्होंने इन आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए लोगों से शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से विरोध जारी रखने की अपील की।

    घटना के बाद जंतर-मंतर और आसपास के क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था भी बढ़ा दी गई। प्रशासन की ओर से स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है ताकि कानून-व्यवस्था प्रभावित न हो। दूसरी ओर, आंदोलन से जुड़े लोग अपनी मांगों पर कायम हैं और उनका कहना है कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार तथा परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता बहाल करने के लिए ठोस कदम उठाए जाने चाहिए।

    इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर शांतिपूर्ण विरोध, प्रदर्शनकारियों की सुरक्षा और प्रशासन की जिम्मेदारी को लेकर बहस को तेज कर दिया है। जहां एक ओर पुलिस का कहना है कि स्वास्थ्य कारणों से यह कदम उठाना आवश्यक था, वहीं आंदोलन से जुड़े संगठन इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर हस्तक्षेप बता रहे हैं। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर प्रतिक्रियाएं जारी रहने की संभावना है, जबकि सभी की नजर सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य और आंदोलन की आगामी दिशा पर बनी हुई है।

  • छतरपुर मामले पर समाजवादी पार्टी का सरकार पर तीखा हमला, भूमाफिया संरक्षण और निष्पक्ष जांच की उठाई मांग

    छतरपुर मामले पर समाजवादी पार्टी का सरकार पर तीखा हमला, भूमाफिया संरक्षण और निष्पक्ष जांच की उठाई मांग

    मध्य प्रदेश: के छतरपुर जिले में हाल के घटनाक्रम को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी ने भोपाल में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान राज्य सरकार और प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया कि जिले में कथित रूप से भूमाफिया से जुड़ा एक संगठित नेटवर्क सक्रिय है, जिसे सत्ता और प्रशासन का संरक्षण प्राप्त है। पार्टी ने पूरे मामले की निष्पक्ष और स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने की मांग भी उठाई है।

    समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता यश भारतीय ने आरोप लगाया कि छतरपुर में कानून व्यवस्था और प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि धर्म की आड़ में अवैध गतिविधियों को बढ़ावा देने का प्रयास किया जा रहा है और इससे आम लोगों का भरोसा प्रभावित हो रहा है। उनके अनुसार, पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लाई जानी चाहिए ताकि किसी भी प्रकार की आशंका समाप्त हो सके।

    प्रेस वार्ता के दौरान यश भारतीय ने धीरेंद्र शास्त्री और उनके छोटे भाई शालिग्राम का नाम लेते हुए कई गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि क्षेत्र में कथित भूमाफिया गतिविधियों से जुड़े मामलों की स्वतंत्र जांच आवश्यक है। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि हाल में हुई गिरफ्तारी और उससे जुड़े घटनाक्रम कई महत्वपूर्ण सवाल खड़े करते हैं, जिनकी निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए।

    समाजवादी पार्टी ने यह भी आरोप लगाया कि शालिग्राम पर पहले से विभिन्न गंभीर आरोप लगते रहे हैं और हाल की घटनाओं में भी उनका नाम सामने आया है। पार्टी का कहना है कि यदि किसी भी व्यक्ति पर गंभीर आरोप हैं, तो मामले की जांच बिना किसी दबाव या राजनीतिक हस्तक्षेप के होनी चाहिए। उन्होंने संबंधित मामलों में गवाहों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की भी मांग की।

    पार्टी ने जेल प्रशासन पर भी सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि संबंधित आरोपी को कथित रूप से विशेष सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। समाजवादी पार्टी ने मांग की कि यदि इस संबंध में लगाए गए आरोपों में कोई तथ्य पाया जाता है तो जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध भी नियमानुसार कार्रवाई की जाए। साथ ही पूरे प्रकरण की निगरानी किसी स्वतंत्र जांच एजेंसी को सौंपने की मांग दोहराई गई।

    प्रवक्ता ने कहा कि कानून सभी नागरिकों के लिए समान होना चाहिए और किसी भी व्यक्ति को उसके सामाजिक, धार्मिक या राजनीतिक प्रभाव के आधार पर विशेष संरक्षण नहीं मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि किसी पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं तो उनकी निष्पक्ष जांच होना लोकतांत्रिक व्यवस्था और न्यायिक प्रक्रिया के हित में आवश्यक है।

    फिलहाल समाजवादी पार्टी द्वारा लगाए गए ये आरोप राजनीतिक बयान के रूप में सामने आए हैं। संबंधित आरोपों पर इस समाचार के प्रकाशित होने तक राज्य सरकार, प्रशासन अथवा आरोपित पक्ष की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सार्वजनिक नहीं आई है। ऐसे मामलों में आरोपों की पुष्टि सक्षम जांच एजेंसियों की जांच और आधिकारिक निष्कर्षों के बाद ही हो सकेगी। राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच अब सभी की नजर इस बात पर है कि जांच प्रक्रिया किस दिशा में आगे बढ़ती है और संबंधित एजेंसियां इस मामले में क्या कदम उठाती हैं।

  • भोपाल में कांग्रेस विचार विभाग की बैठक, केप्टन डाबर बोले- नेहरू ने आधुनिक भारत बनाया, भाजपा ने अफवाह तंत्र खड़ा किया

    भोपाल में कांग्रेस विचार विभाग की बैठक, केप्टन डाबर बोले- नेहरू ने आधुनिक भारत बनाया, भाजपा ने अफवाह तंत्र खड़ा किया

    मध्यप्रदेश: की राजधानी भोपाल में आयोजित कांग्रेस विचार विभाग की प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक में पार्टी नेताओं ने भारतीय जनता पार्टी, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और केंद्र सरकार पर कई राजनीतिक एवं वैचारिक मुद्दों को लेकर तीखे आरोप लगाए। कांग्रेस विचार विभाग के राष्ट्रीय अध्यक्ष केप्टन प्रवीण डाबर ने कहा कि देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने आधुनिक भारत की नींव रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, जबकि भाजपा ने देश में अफवाहों का तंत्र खड़ा किया है। उन्होंने कहा कि नेहरू की सोच वैज्ञानिक दृष्टिकोण, लोकतांत्रिक संस्थाओं और आधुनिक विकास पर आधारित थी, जिसे आज भी देश की प्रगति का आधार माना जाता है।

    बैठक के दौरान केप्टन डाबर ने अयोध्या स्थित राम मंदिर के चढ़ावे और उसके प्रबंधन को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि प्रभु श्रीराम करोड़ों भारतीयों की आस्था, सांस्कृतिक चेतना और नैतिक मूल्यों के प्रतीक हैं। मंदिर में चढ़ावे से जुड़ी कथित अनियमितताओं और प्रबंधन को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े हुए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इस पूरे मामले में सरकार की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। हालांकि इन आरोपों पर संबंधित पक्ष की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई।

    डाबर ने राम मंदिर के लिए नए मुख्य कार्यपालन अधिकारी की नियुक्ति प्रक्रिया पर भी आपत्ति जताई। उनका कहना था कि यदि नियुक्ति के लिए केवल “राम भक्त” होने की शर्त रखी जाती है तो यह अन्य देवी-देवताओं के श्रद्धालुओं के साथ भेदभाव जैसा प्रतीत होता है। उन्होंने सवाल किया कि भगवान को अलग-अलग वर्गों में बांटने की आवश्यकता क्यों महसूस की जा रही है और धार्मिक संस्थानों में समान भाव की भावना बनाए रखना अधिक आवश्यक है।

    प्रदेश कांग्रेस विचार विभाग के अध्यक्ष भूपेन्द्र गुप्ता ने अपने संबोधन में राष्ट्रीय हितों और देश की संप्रभुता से जुड़े मुद्दों पर सतर्क रहने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार के ऐसे समझौतों से बचना चाहिए जो देश के हितों को प्रभावित कर सकते हों। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से वैचारिक रूप से सक्रिय रहने और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए जनता के बीच संवाद बढ़ाने का आह्वान किया।

    बैठक में शामिल पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने भी भाजपा और आरएसएस पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि मंदिरों के संचालन और धार्मिक संस्थाओं में संघ के प्रचारकों की भूमिका बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मंदिरों का संचालन संतों और धार्मिक परंपराओं से जुड़े लोगों के हाथों में रहना चाहिए। दिग्विजय सिंह ने यह भी कहा कि धर्म का मूल आधार इंसानियत और मानवता है तथा कांग्रेस सभी धर्मों के सम्मान और समानता में विश्वास करती है। उन्होंने मंदिरों के संचालन में शंकराचार्यों की भूमिका सुनिश्चित किए जाने की भी मांग रखी।

    बैठक के दौरान कांग्रेस नेताओं ने सामाजिक सौहार्द, धार्मिक सद्भाव और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा को पार्टी की प्राथमिकता बताया। वहीं भाजपा और सरकार पर लगाए गए आरोपों को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। इन बयानों के बाद संबंधित पक्ष की प्रतिक्रिया का भी इंतजार किया जा रहा है, क्योंकि इस तरह के मुद्दे प्रदेश की राजनीति में आगे भी बहस का विषय बने रह सकते हैं।

  • बलराम कृषि महोत्सव में किसानों को मिला आधुनिक खेती का संदेश, प्राकृतिक कृषि, सोलर पंप और नवाचार से समृद्ध मध्यप्रदेश बनाने का आह्वान

    बलराम कृषि महोत्सव में किसानों को मिला आधुनिक खेती का संदेश, प्राकृतिक कृषि, सोलर पंप और नवाचार से समृद्ध मध्यप्रदेश बनाने का आह्वान

     प्रदेश में कृषि को अधिक लाभकारी, आधुनिक और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने किसानों को नई तकनीकों और प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि बदलते समय में खेती को केवल पारंपरिक तरीकों तक सीमित रखने के बजाय वैज्ञानिक तकनीकों, प्राकृतिक कृषि पद्धतियों और कृषि उत्पादों के मूल्य संवर्धन को अपनाना आवश्यक है। इससे किसानों की आय में स्थायी वृद्धि होगी और प्रदेश की कृषि अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी। उन्होंने कहा कि समृद्ध और आत्मनिर्भर कृषि ही विकसित मध्यप्रदेश की मजबूत नींव है।

    मुख्यमंत्री ने धार जिले में आयोजित बलराम कृषि महोत्सव को वर्चुअल माध्यम से संबोधित करते हुए कृषक कल्याण वर्ष-2026 के तहत किसानों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार कृषि क्षेत्र में नवाचार, आधुनिक तकनीकों और शासकीय योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष ध्यान दे रही है। किसानों को इन योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाकर अपनी उत्पादन क्षमता और आय दोनों में वृद्धि करनी चाहिए।

    उन्होंने प्राकृतिक खेती को भविष्य की आवश्यकता बताते हुए कहा कि इससे खेती की लागत कम होती है, मिट्टी की गुणवत्ता बेहतर बनी रहती है और पर्यावरण संरक्षण को भी बल मिलता है। साथ ही कृषि उत्पादों के मूल्य संवर्धन के माध्यम से किसान अपनी उपज का बेहतर मूल्य प्राप्त कर सकते हैं। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री कुसुम-बी योजना के अंतर्गत सोलर पंपों की स्थापना को भी किसानों के लिए लाभकारी बताते हुए ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में इसे महत्वपूर्ण कदम बताया।

    कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने समान नागरिक संहिता को लेकर भी सरकार की मंशा स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि प्रदेश में इस विषय पर व्यापक जनसंवाद किया गया है तथा विभिन्न राजनीतिक दलों, धार्मिक और सामाजिक समुदायों के प्रतिनिधियों से विचार-विमर्श के बाद आगामी विधानसभा के वर्षाकालीन सत्र में आवश्यक विधायी प्रक्रिया पूरी करने की दिशा में कदम बढ़ाया जाएगा। उनका कहना था कि सभी नागरिकों के लिए समान अधिकार और समान कानून लोकतांत्रिक व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाएंगे।

    बलराम कृषि महोत्सव का उद्देश्य किसानों तक आधुनिक कृषि तकनीकों, कृषि यंत्रीकरण, प्राकृतिक खेती, मूल्य संवर्धन और विभिन्न शासकीय योजनाओं की जानकारी पहुंचाना रहा। महोत्सव में कृषि आधारित और देशभक्ति की भावना से ओतप्रोत सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी आयोजित की गईं। इसके साथ ही नशा मुक्ति अभियान के तहत किसानों और नागरिकों को नशामुक्त समाज के निर्माण का संदेश दिया गया।

    महोत्सव में कृषि विभाग, कृषि विज्ञान केन्द्र, प्राकृतिक खेती, बलराम तालाब, सूक्ष्म सिंचाई, जल संरक्षण, श्रीअन्न, पशुपालन विभाग, मत्स्य विभाग, इफको, कृभको तथा अन्य कृषि सहयोगी संस्थाओं द्वारा प्रदर्शनी लगाई गई। किसानों ने इन प्रदर्शनों का अवलोकन कर नई तकनीकों, उन्नत कृषि पद्धतियों और सरकारी योजनाओं की विस्तृत जानकारी प्राप्त की। इससे उन्हें खेती को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनाने के नए विकल्पों की जानकारी मिली।

    जिलेभर से लगभग दो हजार किसानों ने इस महोत्सव में भाग लिया। किसान उत्पादक संगठनों, कृषि संगठनों के प्रतिनिधियों, कृषि आदान विक्रेताओं तथा कृषि एवं संबद्ध विभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही। आयोजन किसानों के लिए वैज्ञानिक कृषि, आधुनिक नवाचार, प्राकृतिक खेती और सरकारी योजनाओं की जानकारी प्राप्त करने का प्रभावी मंच साबित हुआ। इस अवसर पर जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी कार्यक्रम में भाग लेकर किसानों से संवाद किया और कृषि विकास से जुड़े विभिन्न प्रयासों की जानकारी साझा की।