Author: bharati

  • बिस्तर विवाद में बड़ा हादसा: मां-बेटी की बहस के दौरान पिता को आया हार्ट अटैक, मौके पर मौत

    बिस्तर विवाद में बड़ा हादसा: मां-बेटी की बहस के दौरान पिता को आया हार्ट अटैक, मौके पर मौत


    ग्वालियर । ग्वालियर के चिटनिस की गोठ स्थित वैकुंठ अपार्टमेंट में एक मामूली घरेलू विवाद ने बड़ा और दुखद रूप ले लिया, जब मां-बेटी के बीच झगड़े के दौरान पिता की अचानक मौत हो गई। शुरुआती जानकारी के अनुसार यह मामला बिस्तर को लेकर हुए विवाद से शुरू हुआ, जो देखते ही देखते परिवार के लिए त्रासदी बन गया।

    जानकारी के अनुसार, मृतक की पहचान अनिल कपूर के रूप में हुई है, जो अपनी पत्नी रितु कपूर और बेटी मानसी कपूर के साथ रहते थे। मानसी हाल ही में अपनी शादी के बाद कुछ दिनों के लिए मायके आई हुई थी। इसी दौरान घर में बिस्तर पर सोने को लेकर मां-बेटी के बीच कहासुनी शुरू हो गई।

    बताया जाता है कि रात के समय रितु कपूर बेटी के बिस्तर पर सो गईं, जिससे मानसी नाराज हो गई और दोनों के बीच विवाद बढ़ गया। देखते ही देखते बात इतनी बढ़ गई कि घर में तनावपूर्ण माहौल बन गया और परिजनों के बीच जोरदार बहस शुरू हो गई।

    इसी विवाद को शांत कराने के लिए अनिल कपूर बीच-बचाव करने पहुंचे। परिजनों के अनुसार, वह दोनों को समझाने की कोशिश कर ही रहे थे कि अचानक उन्हें सीने में तेज दर्द महसूस हुआ और वह जमीन पर गिर पड़े। परिवार के लोग तुरंत उन्हें अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। प्रारंभिक तौर पर उनकी मौत का कारण हार्ट अटैक माना जा रहा है।

    घटना के बाद पूरे परिवार में मातम पसर गया। मां-बेटी दोनों सदमे में हैं और घर का माहौल पूरी तरह शोकाकुल हो गया है। मृतक की बेटी मानसी का रो-रोकर बुरा हाल है।

    परिवार के संबंधों को लेकर भी इस मामले में कई भावनात्मक पहलू सामने आए हैं। जानकारी के अनुसार अनिल कपूर की पहली पत्नी की मृत्यु 2019 में हो चुकी थी। बाद में रितु कपूर, जो पहले उनकी साली थीं, उन्होंने अनिल कपूर से विवाह किया था। पारिवारिक रिश्तों के इस जटिल स्वरूप ने भी मामले को और भावनात्मक बना दिया है।

    पुलिस ने घटना को लेकर जांच शुरू कर दी है, हालांकि शुरुआती निष्कर्ष में इसे प्राकृतिक हार्ट अटैक से हुई मौत माना जा रहा है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।

    यह घटना एक बार फिर यह संदेश देती है कि घरेलू विवादों में बढ़ता तनाव कभी-कभी गंभीर परिणामों में बदल सकता है। छोटी-छोटी बातों पर होने वाले झगड़े मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर गहरा असर डाल सकते हैं।

  • 21 दिन की पैरोल पर बाहर आया डेरा प्रमुख, सिरसा पहुंचने के साथ ही बढ़ी राजनीतिक और प्रशासनिक गतिविधियां

    21 दिन की पैरोल पर बाहर आया डेरा प्रमुख, सिरसा पहुंचने के साथ ही बढ़ी राजनीतिक और प्रशासनिक गतिविधियां

    नई दिल्ली। डेरा प्रमुख गुरमीत सिंह एक बार फिर पैरोल पर जेल से बाहर आने के बाद सुर्खियों में है। मंगलवार सुबह वह रोहतक की सुनारिया जेल से बाहर निकला और कड़े सुरक्षा इंतजामों के बीच सिरसा स्थित डेरा मुख्यालय पहुंच गया। उसके सिरसा पहुंचते ही पूरे इलाके में हलचल बढ़ गई और प्रशासनिक एजेंसियां पूरी तरह सतर्क नजर आईं। सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए पहले से ही डेरे के आसपास विशेष बंदोबस्त किए गए थे और किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए अतिरिक्त निगरानी रखी गई थी।

    जानकारी के अनुसार, डेरा प्रमुख को 21 दिन की पैरोल मिली है। सुबह तड़के ही उसके जेल से बाहर आने की प्रक्रिया शुरू हुई और कुछ समय बाद वह सुरक्षा घेरे में सिरसा के लिए रवाना हुआ। उसके साथ करीबी लोग भी मौजूद थे और वाहनों का काफिला विशेष सुरक्षा व्यवस्था के साथ आगे बढ़ा। सिरसा पहुंचने से पहले ही डेरे के आसपास बड़ी संख्या में अनुयायियों की मौजूदगी देखने को मिली। कई लोग उसके आगमन का इंतजार कर रहे थे, जिसके चलते प्रशासन ने पहले से सुरक्षा व्यवस्था मजबूत कर दी थी।

    गुरमीत सिंह पहले भी कई बार पैरोल और फरलो पर जेल से बाहर आ चुका है। इस बार की रिहाई को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं क्योंकि बीते वर्षों में उसकी पैरोल को लेकर कई तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आती रही हैं। हर बार उसके बाहर आने पर समर्थकों और विरोधियों के बीच अलग-अलग तरह की चर्चाएं शुरू हो जाती हैं। यही कारण है कि प्रशासन भी इस पूरे मामले को संवेदनशील मानते हुए अतिरिक्त सावधानी बरत रहा है।

    डेरा प्रमुख फिलहाल साध्वी यौन शोषण मामले में सजा काट रहा है। हालांकि उससे जुड़े कई अन्य मामलों में समय-समय पर कानूनी स्थिति में बदलाव देखने को मिला है। इसी वजह से उसके नाम को लेकर राजनीतिक और सामाजिक चर्चाएं भी लगातार बनी रहती हैं। उसके सिरसा आने के बाद एक बार फिर पूरे इलाके में गतिविधियां बढ़ गई हैं।

    बताया जा रहा है कि पिछली पैरोल के दौरान भी उसने डेरे से जुड़े कई कामों की समीक्षा की थी। उस समय पुराने परिसर के पुनर्निर्माण और अन्य व्यवस्थाओं को लेकर गतिविधियां तेज हुई थीं। इस बार भी माना जा रहा है कि वह डेरे से जुड़े विभिन्न कार्यों पर ध्यान दे सकता है। हालांकि अभी आधिकारिक तौर पर उसके कार्यक्रमों को लेकर ज्यादा जानकारी सामने नहीं आई है।

    पैरोल पर उसकी यह रिहाई एक बार फिर चर्चा का विषय बन गई है। लगातार मिल रही पैरोल और उससे जुड़े घटनाक्रमों को लेकर राजनीतिक गलियारों से लेकर आम लोगों के बीच बहस का दौर शुरू हो गया है। फिलहाल प्रशासन की नजर पूरे घटनाक्रम पर बनी हुई है और सुरक्षा एजेंसियां हालात पर लगातार निगरानी रख रही हैं। आने वाले दिनों में उसकी गतिविधियों और मुलाकातों पर भी सभी की नजर बनी रह सकती है।

  • ग्वालियर में बड़ा अवैध खनन घोटाला: कृषि जमीन से निकला करोड़ों का पत्थर

    ग्वालियर में बड़ा अवैध खनन घोटाला: कृषि जमीन से निकला करोड़ों का पत्थर


    ग्वालियर । ग्वालियर जिले के बिलौआ इलाके में अवैध खनन का एक बड़ा और चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसमें पर्यावरण और खनिज नियमों की खुली अनदेखी कर करोड़ों रुपये की खनिज संपदा निकाल ली गई। आरोप है कि एक क्रेशर संचालक ने निजी और कृषि भूमि पर बिना अनुमति के 200 से 250 फीट तक गहरी खुदाई कर भारी मात्रा में पत्थर का अवैध उत्खनन कर डाला।

    सबसे गंभीर बात यह है कि यह पूरा उत्खनन उस समय किया गया जब संबंधित जमीन पर माइनिंग की पर्यावरणीय स्वीकृति की प्रक्रिया भी पूरी नहीं हुई थी। इसके बावजूद महीनों तक भारी मशीनों की मदद से लगातार खुदाई चलती रही और खनिज विभाग को इसकी भनक तक नहीं लगी।

    शिकायत सामने आने के बाद जब इस क्षेत्र की सैटेलाइट इमेज मंगाई गई, तो स्पष्ट रूप से यह सामने आया कि तीन अलग-अलग सर्वे नंबरों पर बड़े पैमाने पर अवैध उत्खनन किया गया है और जमीन का बड़ा हिस्सा गहरे गड्ढे में तब्दील हो चुका है। अनुमान के मुताबिक यहां करोड़ों रुपये मूल्य का पत्थर निकाला जा चुका है।

    मामले में यह भी आरोप है कि खनिज विभाग ने न तो समय रहते निरीक्षण किया और न ही अवैध उत्खनन पर कोई सख्त कार्रवाई की। नियमों के अनुसार बिना अनुमति खनन पर भारी जुर्माना और खदान सील करने का प्रावधान है, लेकिन इस मामले में न तो जुर्माना लगाया गया और न ही कोई कठोर कार्रवाई हुई।

    इसके बजाय, संबंधित फाइल को आगे बढ़ाते हुए पर्यावरणीय स्वीकृति की प्रक्रिया शुरू कर दी गई, जिससे विभाग की भूमिका पर सवाल उठने लगे हैं। शिकायतकर्ता का आरोप है कि यह पूरा मामला मिलीभगत और संरक्षण का परिणाम है, जिसमें नियमों को दरकिनार कर खनन माफिया को फायदा पहुंचाया गया।

    वहीं दूसरी ओर, विभागीय स्तर पर यह दलील दी जा रही है कि सीमांकन में त्रुटि के कारण क्रेशर संचालक ने गलती से दूसरी जमीन पर खुदाई कर दी, लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या 250 फीट गहरी खुदाई किसी “गलती” का परिणाम हो सकती है, या इसके पीछे महीनों की सुनियोजित प्रक्रिया रही है।

    स्थानीय स्तर पर 22 अप्रैल 2026 को पर्यावरण मंजूरी के लिए लोक सुनवाई भी कराई गई थी, जिसमें ग्रामीणों को रोजगार और विकास के वादे किए गए थे। लेकिन इससे पहले ही खनन पूरा कर लिया गया, जिससे इस सुनवाई की प्रक्रिया भी सवालों के घेरे में आ गई है।

    फिलहाल कलेक्टर स्तर पर शिकायत पहुंचने के बाद मामले की जांच तेज कर दी गई है। खनिज विभाग के रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं और यह पता लगाया जा रहा है कि अनुमति के बिना इतनी बड़ी खुदाई कैसे और किसकी अनुमति से हुई।  यह पूरा मामला न केवल खनिज संपदा की लूट को उजागर करता है, बल्कि प्रशासनिक निगरानी और पारदर्शिता पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।

  • ग्वालियर किले पर दर्दनाक हादसा: छत्तीसगढ़ के पर्यटक की मौत, ढलान पर ट्रक ने रौंदा; पहिया ऊपर से गुजर गया

    ग्वालियर किले पर दर्दनाक हादसा: छत्तीसगढ़ के पर्यटक की मौत, ढलान पर ट्रक ने रौंदा; पहिया ऊपर से गुजर गया


    ग्वालियर । ग्वालियर किले की ऐतिहासिक सैर उस समय एक दर्दनाक हादसे में बदल गई जब छत्तीसगढ़ से आए एक पर्यटक की सड़क दुर्घटना में मौत हो गई। यह घटना सोमवार शाम किले के मुख्य गेट के पास उस समय हुई जब परिवार के साथ आए पर्यटक किला घूम रहे थे।

    मृतक की पहचान छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले के सूरजपुर निवासी 35 वर्षीय प्रमोद देवगन के रूप में हुई है। वह अपने बहनोई और बहन के साथ ग्वालियर घूमने आए थे और घाटीगांव में अपने रिश्तेदार के घर ठहरे हुए थे। सोमवार को पूरा परिवार ग्वालियर किला देखने पहुंचा था, लेकिन यह यात्रा उनके लिए आखिरी साबित हुई।

    जानकारी के अनुसार, शाम करीब चार बजे परिवार किले के मुख्य प्रवेश द्वार के पास पहुंचा ही था कि ढलान से आ रहा एक तेज रफ्तार ट्रक अनियंत्रित हो गया। इसी दौरान ट्रक ने प्रमोद को अपनी चपेट में ले लिया। हादसा इतना भीषण था कि ट्रक का पहिया उनके सीने के ऊपर से गुजर गया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल होकर सड़क पर गिर पड़े।

    घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई और परिजन चीख-पुकार करने लगे। आसपास मौजूद लोगों ने तत्काल मदद की और दाता बंदी छोड़ गुरुद्वारे की कार के स्टाफ ने घायल को अपनी गाड़ी से तुरंत जयारोग्य अस्पताल पहुंचाया। हालांकि अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

    परिवार के लिए यह हादसा किसी सदमे से कम नहीं था। बहनों और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। कुछ ही पलों में पर्यटन का आनंद मातम में बदल गया और पूरा परिवार गहरे सदमे में है।

    घटना के बाद ट्रक चालक वाहन सहित मौके से फरार हो गया। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू की और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया। शुरुआती जांच में सामने आया कि हादसा ढलान और तेज रफ्तार के कारण हुआ, जिससे ट्रक चालक वाहन पर नियंत्रण नहीं रख सका।

    बहोड़ापुर थाना पुलिस के अनुसार, आसपास कोई सीसीटीवी कैमरा न होने के कारण सीधे फुटेज उपलब्ध नहीं हो सका है। हालांकि पुलिस अब आसपास के अन्य मार्गों और कैमरों की मदद से ट्रक और चालक की पहचान करने में जुटी है।

    पुलिस ने ट्रक चालक के खिलाफ लापरवाही से वाहन चलाने और गैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज कर लिया है। थाना प्रभारी के अनुसार, जल्द ही आरोपी की पहचान कर उसे गिरफ्तार किया जाएगा।

    यह हादसा न केवल एक परिवार के लिए गहरा दुख लेकर आया है, बल्कि ग्वालियर जैसे पर्यटन स्थल पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े कर गया है।

  • मुरैना में फायरिंग का रहस्य खुला: स्कूटर पर लोडिंग के दौरान चली गोली

    मुरैना में फायरिंग का रहस्य खुला: स्कूटर पर लोडिंग के दौरान चली गोली


    मुरैना। मुरैना में मंगलवार सुबह हुई गोलीकांड की घटना ने शुरुआत में जहां हमले का शक पैदा किया था, वहीं पुलिस जांच में इसका एक चौंकाने वाला सच सामने आया है। अब साफ हो गया है कि यह कोई सुनियोजित हमला नहीं था, बल्कि युवकों की लापरवाही के चलते हुआ एक गंभीर हादसा था।

    गर्ल्स स्कूल रोड पर स्कूटर से जा रहे दो छात्रों पर फायरिंग की खबर मिलते ही इलाके में हड़कंप मच गया था। शुरुआती सूचना में इसे बदमाशों द्वारा किया गया हमला माना जा रहा था, लेकिन पुलिस जांच में तस्वीर पूरी तरह बदल गई।

    डीएसपी विजय भदौरिया के अनुसार, घायल छात्रों की पहचान राहुल सिकरवार (22) और निखिल तिवारी (22) के रूप में हुई है। दोनों छात्र एक ही स्कूटर पर सवार थे और रास्ते में पीछे बैठे युवक ने पिस्टल निकाल ली। बताया जा रहा है कि वह पिस्टल को लोड कर रहा था, तभी अचानक ट्रिगर दब गया और फायरिंग शुरू हो गई।

    इस दौरान एक के बाद एक गोलियां चलीं, जिससे दोनों छात्र गंभीर रूप से घायल हो गए। मेडिकल रिपोर्ट के अनुसार, दोनों को तीन-तीन गोलियां लगी हैं। घायलों को पहले जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें ग्वालियर रेफर कर दिया गया।

    पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत जांच शुरू की। शुरुआती बयानों और घटनास्थल की स्थिति में विरोधाभास सामने आने के बाद सीसीटीवी फुटेज खंगाले गए। फुटेज देखने पर साफ हुआ कि किसी बाहरी व्यक्ति ने हमला नहीं किया था, बल्कि गोली स्कूटर पर ही गलती से चली थी।

    इस खुलासे के बाद पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि छात्रों के पास पिस्टल कहां से आई और वे उसे लेकर किस उद्देश्य से यात्रा कर रहे थे। हथियार के लाइसेंस और स्रोत को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

    घटना के बाद स्कूटर पर खून के निशान और मौके की स्थिति ने शुरुआत में इसे क्राइम केस बना दिया था, लेकिन सीसीटीवी ने पूरी सच्चाई सामने ला दी। पुलिस ने दोनों घायलों के बयान भी दर्ज कर लिए हैं और मामले की जांच आगे बढ़ा दी है।

    फिलहाल दोनों छात्र ग्वालियर में इलाजरत हैं और उनकी हालत पर डॉक्टरों की टीम नजर बनाए हुए है। यह घटना लापरवाही और अवैध हथियारों के उपयोग को लेकर एक बड़ा सवाल छोड़ गई है, जिसकी जांच पुलिस द्वारा जारी है।

  • नौतपा की शुरुआत से पहले इंदौर तपने लगा: उमस और गर्म हवाओं ने बढ़ाई बेचैनी, तापमान में हल्का उछाल

    नौतपा की शुरुआत से पहले इंदौर तपने लगा: उमस और गर्म हवाओं ने बढ़ाई बेचैनी, तापमान में हल्का उछाल


    नई दिल्ली । इंदौर में नौतपा की शुरुआत के साथ ही मौसम ने अपना मिजाज जरूर दिखाया, लेकिन इस बार भीषण गर्मी की बजाय उमस और गर्म हवाओं ने लोगों को ज्यादा परेशान किया। नौतपा के पहले ही दिन शहर में तापमान में मामूली बढ़ोतरी दर्ज की गई, लेकिन यह बढ़ोतरी अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच सकी।

    सोमवार को इंदौर का अधिकतम तापमान 41.6 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया, जो पिछले दिन की तुलना में लगभग एक डिग्री अधिक रहा। वहीं रात के तापमान में हल्की गिरावट देखने को मिली और यह 27.0 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। हालांकि रात में तापमान थोड़ा कम होने के बावजूद उमस ने लोगों को राहत नहीं दी और वातावरण में बेचैनी बनी रही।

    मौसम विशेषज्ञों के अनुसार फिलहाल पश्चिमी विक्षोभ (वेस्टर्न डिस्टर्बेंस) सक्रिय नहीं है, जिसके कारण मौसम में किसी बड़े बदलाव की संभावना कम है। इसी वजह से तापमान में हल्का उतार-चढ़ाव जारी है, लेकिन तेज गर्मी या हीटवेव जैसे हालात फिलहाल बनने की संभावना कम बताई जा रही है।

    मौसम विभाग का अनुमान है कि आने वाले दिनों में तापमान 43 से 44 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने की संभावना फिलहाल कम है, लेकिन उमस और गर्म हवाओं का असर लगातार बना रहेगा। धूप निकलते ही दोपहर के समय गर्मी का प्रभाव और ज्यादा महसूस किया जा रहा है।

    विशेषज्ञों ने लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी है। मौसम वैज्ञानिक एचएस पांडे के अनुसार दोपहर 12 बजे से 3 बजे के बीच सबसे ज्यादा गर्मी का असर रहता है, इसलिए इस समय अनावश्यक रूप से बाहर निकलने से बचना चाहिए। उन्होंने कहा कि शरीर को हाइड्रेट रखना बेहद जरूरी है और पर्याप्त मात्रा में पानी पीना चाहिए।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों का भी कहना है कि हल्के रंग के सूती कपड़े पहनना और बच्चों व बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखना इस मौसम में जरूरी है। लगातार बढ़ती उमस के कारण डिहाइड्रेशन और थकान जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं।

    पिछले कुछ वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो इंदौर में मई के महीने में कई बार तापमान 44 से 46 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका है। वर्ष 1994 में 46.6 डिग्री सेल्सियस का रिकॉर्ड तापमान दर्ज किया गया था, जो अब तक का सबसे अधिक माना जाता है।

    हालांकि इस बार मौसम का रुख थोड़ा अलग दिखाई दे रहा है। दिन के तापमान में उतार-चढ़ाव के बावजूद भीषण लू जैसे हालात फिलहाल नजर नहीं आ रहे हैं, लेकिन उमस लोगों की परेशानी बढ़ा रही है। मौसम विभाग का कहना है कि आने वाले दिनों में स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।

  • हॉस्टल में बवाल के बाद सख्ती: उत्पात मचाने वाले छात्रों के पैरेंट्स तलब, एफिडेविट लिया जा रहा, डांस-तोड़फोड़ पर एक्शन

    हॉस्टल में बवाल के बाद सख्ती: उत्पात मचाने वाले छात्रों के पैरेंट्स तलब, एफिडेविट लिया जा रहा, डांस-तोड़फोड़ पर एक्शन


    इंदौर । इंदौर स्थित देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के IET विभाग का हॉस्टल एक बार फिर सुर्खियों में है, जहां कुछ दिन पहले फाइनल ईयर के छात्रों द्वारा की गई अनुशासनहीनता का मामला अब सख्त कार्रवाई तक पहुंच गया है। हॉस्टल में अर्धनग्न होकर डांस करने और तोड़फोड़ करने वाले छात्रों के खिलाफ विश्वविद्यालय प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है।

    घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद प्रशासन हरकत में आया और जांच के आधार पर 17 छात्रों की पहचान की गई। इसके बाद संबंधित छात्रों को नोटिस जारी कर उनके पेरेंट्स को डिपार्टमेंट में बुलाया जा रहा है। अब तक चार छात्रों के पेरेंट्स यूनिट में पहुंच चुके हैं, जहां प्रशासन के साथ उनकी विस्तृत चर्चा हुई है।

    मौके पर पहुंचे पेरेंट्स ने अपने बच्चों की हरकत पर शर्मिंदगी जताई और कई लोग स्थिति को लेकर कुछ भी स्पष्ट रूप से कहने से बचते नजर आए। प्रशासन के अनुसार यह मामला केवल अनुशासन का उल्लंघन नहीं, बल्कि संस्थान की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाला है।

    IET के डायरेक्टर डॉ. प्रतोष बंसल ने जानकारी दी कि छात्रों और उनके पेरेंट्स से एक लिखित एफिडेविट लिया जा रहा है, जिसमें कई शर्तें शामिल हैं। एफिडेविट में यह भी उल्लेख है कि छात्र भविष्य में ऐसा कोई कार्य नहीं करेंगे जिससे संस्थान की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचे। साथ ही उनसे यह भी अपेक्षा की गई है कि वे समाजहित में कार्य करेंगे और एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में व्यवहार करेंगे।

    इसके अलावा प्रत्येक छात्र पर ₹25,000 की आर्थिक पेनाल्टी भी लगाई गई है। प्रशासन ने साफ किया है कि जब तक यह पेनाल्टी जमा नहीं की जाएगी, तब तक संबंधित छात्रों का रिजल्ट जारी नहीं किया जाएगा। साथ ही उन्हें पहले ही परीक्षा देने से रोका जा चुका है, और जांच पूरी होने के बाद ही शेष परीक्षाओं की अनुमति दी जाएगी।

    यह पूरा मामला तब सामने आया जब हॉस्टल परिसर में छात्रों द्वारा अर्धनग्न होकर “दारू बदनाम कर दी” गाने पर डांस किया गया और साथ ही जमकर तोड़फोड़ की गई। इस दौरान टेबल-कुर्सियां, पानी की टंकी और खिड़कियों के कांच भी तोड़ दिए गए। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही विश्वविद्यालय प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई शुरू कर दी थी।

    घटना के बाद छात्रों ने माफी मांगते हुए वीडियो भी जारी किया था, लेकिन प्रशासन ने इसे गंभीर अनुशासनहीनता मानते हुए कड़ी कार्रवाई का फैसला लिया। विश्वविद्यालय का कहना है कि इस तरह की घटनाओं को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और भविष्य में भी ऐसे मामलों में सख्त कदम उठाए जाएंगे।

    फिलहाल सभी 17 छात्रों पर निगरानी रखी जा रही है और उनके पेरेंट्स के साथ लगातार संवाद किया जा रहा है। यह मामला अब पूरे कैंपस में चर्चा का विषय बना हुआ है।

  • इंदौर में आज बड़ा प्रदर्शन: कांग्रेस का राजबाड़ा पर हल्ला बोल, महापौर के इस्तीफे की मांग के साथ विरोध तेज

    इंदौर में आज बड़ा प्रदर्शन: कांग्रेस का राजबाड़ा पर हल्ला बोल, महापौर के इस्तीफे की मांग के साथ विरोध तेज


    इंदौर। इंदौर शहर में लगातार बढ़ रही पानी की समस्या को लेकर अब राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। शहर की कई कॉलोनियों और बस्तियों में पानी की किल्लत से लोग परेशान हैं, और टैंकरों के जरिए भी पर्याप्त आपूर्ति नहीं हो पा रही है। इस मुद्दे को लेकर अब कांग्रेस ने नगर निगम प्रशासन और महापौर के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

    कांग्रेस ने मंगलवार को राजबाड़ा पर बड़े पैमाने पर धरना-प्रदर्शन का ऐलान किया है। यह प्रदर्शन शाम 5 बजे से शुरू होगा, जिसमें कांग्रेस के नेता, कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में समर्थक शामिल होंगे। इस प्रदर्शन में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और नगर निगम नेता प्रतिपक्ष चिंटू चौकसे के साथ-साथ पीसीसी चीफ जीतू पटवारी भी मौजूद रहेंगे।

    कांग्रेस का आरोप है कि शहर में जल संकट लगातार गहराता जा रहा है, लेकिन नगर निगम और महापौर की ओर से इस समस्या का कोई ठोस समाधान नहीं किया गया है। इसी कारण जनता को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए पानी के लिए भटकना पड़ रहा है। कई इलाकों में हालात इतने खराब हैं कि लोगों को दूर-दूर से पानी लाना पड़ रहा है।

    प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस महापौर के इस्तीफे की मांग करेगी। चिंटू चौकसे ने आरोप लगाया है कि वर्तमान महापौर शहर की समस्याओं को लेकर गंभीर नहीं हैं और प्रशासन पूरी तरह निष्क्रिय नजर आ रहा है। उन्होंने कहा कि शहर की जनता “त्राहिमाम” कर रही है, लेकिन समाधान के नाम पर केवल आश्वासन मिल रहे हैं।

    प्रदर्शन की रूपरेखा के अनुसार कांग्रेस कार्यकर्ता राजबाड़ा पर धरना देंगे, नारेबाजी करेंगे और सरकार के खिलाफ विरोध जताएंगे। इसके बाद यह प्रदर्शन नगर निगम कार्यालय की ओर बढ़ेगा, जहां प्रतीकात्मक रूप से खाली मटके फोड़े जाएंगे। यह कदम पानी संकट और प्रशासन की कथित लापरवाही के खिलाफ विरोध का प्रतीक माना जा रहा है।

    कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यह प्रदर्शन केवल शुरुआत है और यदि जल समस्या का समाधान नहीं किया गया तो आंदोलन और भी व्यापक किया जाएगा। उनका आरोप है कि शहर में बढ़ती आबादी के अनुरूप जल प्रबंधन व्यवस्था मजबूत नहीं की गई, जिसके कारण यह संकट लगातार गहराता जा रहा है।

    इधर, प्रशासन का पक्ष अभी सामने नहीं आया है, लेकिन शहर में पानी की आपूर्ति को लेकर शिकायतों में वृद्धि को देखते हुए यह मुद्दा पहले से ही चर्चा में है। ऐसे में राजबाड़ा पर होने वाला यह प्रदर्शन राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कुल मिलाकर इंदौर में पानी संकट अब सिर्फ जनसमस्या नहीं बल्कि राजनीतिक संघर्ष का बड़ा मुद्दा बन गया है, जिस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

  • इंदौर में खूनी विवाद: युवकों के बीच चाकू चले, दो घायल; पुरानी रंजिश बनी हमले की वजह

    इंदौर में खूनी विवाद: युवकों के बीच चाकू चले, दो घायल; पुरानी रंजिश बनी हमले की वजह


    इंदौर। इंदौर शहर में एक बार फिर चाकूबाजी की घटनाओं ने कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। तिलक नगर इलाके में देर रात पुरानी रंजिश और नशे की हालत में हुए विवाद ने हिंसक रूप ले लिया, जिसमें दो युवक गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना के बाद इलाके में तनाव का माहौल बन गया।

    जानकारी के अनुसार, विशाल सोलंकी निवासी श्रृंदा कॉलोनी ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में पवन (संविद नगर), आयुष वर्मा, छोटू और उनके साथियों पर चाकू और पत्थर से हमला करने का आरोप लगाया गया है। घटना सोमवार देर रात उस समय हुई जब विशाल की मुलाकात आयुष वर्मा से हुई, जो उस समय नशे की हालत में था।

    बताया जा रहा है कि मुलाकात के दौरान आयुष ने अचानक गाली-गलौज शुरू कर दी, जिससे विवाद बढ़ गया। इसी दौरान पवन भी मौके पर पहुंच गया और स्थिति और बिगड़ गई। आरोप है कि आयुष ने चाकू से विशाल के पैर पर वार किया, जबकि पवन ने भी हमला किया जो पैर में लगा। इसी दौरान छोटू ने पत्थर से मारपीट की। बीच-बचाव करने आए निखिल के साथ भी आरोपियों ने मारपीट की और बाद में मौके से फरार हो गए।

    घटना के बाद घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका मेडिकल परीक्षण कराया गया। पुलिस ने शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और आरोपियों की तलाश की जा रही है।

    इसी बीच शहर के आजाद नगर इलाके से भी चाकूबाजी की एक और घटना सामने आई है, जिसने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ा दी है। यहां पिता और कुछ युवकों के बीच हुई कहासुनी के बाद विवाद ने हिंसक रूप ले लिया और बेटे पर चाकू से हमला कर दिया गया।

    अजय बछानिया की शिकायत पर पुलिस ने अनुराग (पालदा चौक), शिवा और विजय के खिलाफ मामला दर्ज किया है। जानकारी के मुताबिक, सोमवार रात अजय के पिता रमेश से आरोपियों की कहासुनी हुई थी, जिसके बाद विवाद बढ़ता गया और फिर बेटे पर हमला कर दिया गया।

    पुलिस ने दोनों मामलों में गंभीर धाराओं के तहत केस दर्ज कर लिया है और जांच शुरू कर दी है। लगातार हो रही ऐसी घटनाओं ने स्थानीय लोगों में दहशत का माहौल पैदा कर दिया है। पुलिस का कहना है कि आरोपियों को जल्द गिरफ्तार कर लिया जाएगा और क्षेत्र में निगरानी बढ़ाई जा रही है ताकि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

  • पोस्टमार्टम रिपोर्ट से सनसनी: गला घोंटकर हत्या के बाद आत्महत्या की पुष्टि

    पोस्टमार्टम रिपोर्ट से सनसनी: गला घोंटकर हत्या के बाद आत्महत्या की पुष्टि


    इंदौर। इंदौर के मेघदूत नगर में हुए दंपती की संदिग्ध मौत के मामले में अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने पूरे घटनाक्रम से पर्दा हटा दिया है। पुलिस को सोमवार को मिली रिपोर्ट में यह स्पष्ट हुआ है कि पहले पत्नी रोशनी की गला दबाकर हत्या की गई और उसके बाद उसके पति हल्केवीर सिंह ने आत्महत्या कर ली। इस खुलासे के बाद मामले ने नया मोड़ ले लिया है और पुलिस जांच और तेज कर दी गई है।

    हीरानगर थाना प्रभारी सुशील पटेल के अनुसार, दोनों के पोस्टमार्टम में हत्या और आत्महत्या की पुष्टि हुई है। रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि रोशनी के शरीर पर मारपीट के निशान भी पाए गए हैं, जिससे यह संकेत मिलता है कि घटना से पहले दोनों के बीच संघर्ष हुआ था। हालांकि, पुलिस अभी तक दोनों परिवारों के बयान दर्ज नहीं कर सकी है, जिन्हें जल्द ही रिकॉर्ड किया जाएगा ताकि पूरे घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ी जा सकें।

    घटना के बाद हल्केवीर के परिवार ने भी हैरानी जताई है और वे लगातार आसपास के लोगों और किरायेदारों से जानकारी जुटा रहे हैं। परिजन यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि आखिर किन परिस्थितियों में यह दर्दनाक घटना हुई।

    इस पूरे मामले में एक और व्यक्ति सतीश सांवले का नाम भी सामने आया है, जिसने जांच को और पेचीदा बना दिया है। बताया जा रहा है कि सतीश को दंपती की मौत की जानकारी फोन पर मिली, जिसके बाद उसने अपने मोबाइल को बंद कर दिया। इसके बाद उसने नई सिम लेने की कोशिश की और दुकानदार से यह भी पूछा कि क्या नई सिम लेने पर लोकेशन ट्रेस की जा सकती है। दुकानदार द्वारा जवाब मिलने पर वह घबरा गया और उसने जहर खरीदकर खा लिया, जिससे उसकी मौत हो गई।

    पुलिस के अनुसार सतीश पिछले करीब 15 वर्षों से पीथमपुर में काम कर रहा था और उसका परिवार भी वहीं रहता है। उसकी अचानक मौत ने जांच को और जटिल बना दिया है। पुलिस अब इस पूरे घटनाक्रम के हर एंगल की जांच कर रही है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि इन मौतों के पीछे असल वजह क्या थी और क्या किसी तरह का मानसिक दबाव या विवाद इसके पीछे था।

    इधर, पुलिस को एक सुसाइड नोट भी मिला है, जिसे हल्केवीर ने कथित तौर पर छोड़ा था। हालांकि, इसकी भी फोरेंसिक जांच की जा रही है। शुरुआती जांच में पुलिस सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए आगे बढ़ रही है, जिसमें पारिवारिक विवाद, व्यक्तिगत संबंध और मानसिक तनाव जैसे बिंदु शामिल हैं।

    फिलहाल पुलिस ने दोनों परिवारों के बयान दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। बयान और फोरेंसिक रिपोर्ट के बाद ही इस केस की पूरी सच्चाई सामने आने की उम्मीद है। इस दर्दनाक घटना ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है और लोग अभी भी यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि आखिर एक साथ इतने दर्दनाक घटनाक्रम कैसे सामने आए।