Author: bharati

  • सोहेल खान ने बयां किया बचपन में हुए यौन उत्पीड़न का भयानक दर्द, सालों बाद पिता के सामने खोला जिंदगी का सबसे बड़ा राज

    सोहेल खान ने बयां किया बचपन में हुए यौन उत्पीड़न का भयानक दर्द, सालों बाद पिता के सामने खोला जिंदगी का सबसे बड़ा राज

    नई दिल्ली । भारतीय मनोरंजन उद्योग के जाने-माने अभिनेता और फिल्म निर्माता सोहेल खान ने अपने जीवन के एक बेहद संवेदनशील और दर्दनाक अनुभव को साझा करते हुए बड़ा खुलासा किया है। एक चर्चित रियलिटी शो के मंच पर उन्होंने स्वीकार किया कि बचपन के दिनों में वे लंबे समय तक यौन उत्पीड़न (सेक्सुअल हैरेसमेंट) का शिकार रहे थे। उन्होंने इस बेहद खौफनाक और तकलीफदेह राज को कई वर्षों तक अपने दिल में दबाए रखा था और किसी से भी इसका जिक्र नहीं किया था। जब वे बड़े हुए और इस मानसिक आघात को समझने में सक्षम हुए, तब जाकर उन्होंने अपने पिता और फिल्म जगत के दिग्गज लेखक सलीम खान के सामने इस सत्य को उजागर किया था।

    टेलीविजन स्क्रीन पर प्रसारित हो रहे इस रियलिटी शो के हालिया एपिसोड के दौरान जब घर के सभी प्रतिभागी रैगिंग और बदमाशी (बुलींग) जैसे गंभीर सामाजिक मुद्दों पर चर्चा कर रहे थे, तब सोहेल खान ने अपनी जीवन यात्रा के इस स्याह पन्ने को सबके सामने रखा। उन्होंने बेहद भावुक होते हुए कहा कि जब वे बहुत छोटे थे, तब कुछ असामाजिक तत्वों ने उनके साथ बार-बार इस घिनौनी हरकत को अंजाम दिया था। लोक-लाज और सामाजिक संकोच के कारण वे बचपन में किसी के भी सामने अपना दर्द बयां नहीं कर सके थे, जिसके कारण वे लंबे समय तक मानसिक तनाव से गुजरते रहे।

    अपने पिता के साथ हुए उस भावनात्मक संवाद को याद करते हुए सोहेल खान ने बताया कि वयस्क होने के बाद उन्होंने हिम्मत जुटाकर अपने पिता से कहा था कि बचपन में उनके साथ ऐसा दुर्व्यवहार हुआ था। यह सुनकर उनके पिता भी स्तब्ध रह गए थे और उन्होंने बेहद दुख के साथ पूछा था कि उन्होंने यह बात इतने सालों तक क्यों छुपा कर रखी। इस पर सोहेल ने अपने पिता से माफी मांगते हुए कहा था कि भले ही इसमें उनकी कोई गलती नहीं थी, लेकिन उस उम्र में वे इस विषय पर बात करने को लेकर बेहद शर्मिंदगी और डर महसूस कर रहे थे। उन्होंने कहा कि अक्सर ऐसे मामलों में पीड़ित बच्चा खुद को ही दोषी मानने लगता है, जो कि पूरी तरह गलत है।

    इस गहरे व्यक्तिगत अनुभव से सीख लेते हुए सोहेल खान ने बताया कि वे अपने दोनों बेटों, निर्वान और योहान की परवरिश को लेकर बेहद सतर्क रहते हैं। वे लगातार अपने बच्चों से संवाद करते हैं और उन्हें यह हिदायत देते हैं कि यदि स्कूल, कॉलेज या समाज में कोई भी व्यक्ति उन्हें किसी भी तरह से परेशान या प्रताड़ित करने की कोशिश करे, तो वे बिना किसी हिचकिचाहट या डर के तुरंत अपने माता-पिता को बताएं। उन्होंने जोर देकर कहा कि किसी भी बच्चे को कभी भी किसी भी अत्याचार को चुपचाप सहन नहीं करना चाहिए, क्योंकि चुप्पी अपराधियों के हौसले और ज्यादा बुलंद करती है।

    इस बेहद संवेदनशील और साहसी खुलासे के बाद रियलिटी शो के सह-प्रतियोगियों ने सोहेल खान के साहस और ईमानदारी की जमकर सराहना की। शो के अन्य सदस्यों ने उन्हें गले लगाकर ढांढस बंधाया और समाज के सामने इस विषय पर खुलकर बोलने के लिए उनकी बहादुरी को सलाम किया। वर्तमान में इस चर्चित रियलिटी शो की कमान अभिनेता कुणाल खेमू के हाथों में है, जो इसे होस्ट कर रहे हैं। हाल के दिनों में इस शो की लोकप्रियता में काफी इजाफा हुआ है, जिसमें सोहेल खान के साथ-साथ उनकी पूर्व पत्नी सीमा सजदेह और टीवी अभिनेता अली गोनी जैसे कई मशहूर चेहरे एक प्रतियोगी के रूप में गेम खेल रहे हैं।

  • आगामी 24 जुलाई को बॉक्स ऑफिस पर देखने को मिलेगा महामुकाबला, विक्रांत मैसी और केके मेनन की चर्चित सीरीज समेत चार बड़े प्रोजेक्ट्स होंगे रिलीज

    आगामी 24 जुलाई को बॉक्स ऑफिस पर देखने को मिलेगा महामुकाबला, विक्रांत मैसी और केके मेनन की चर्चित सीरीज समेत चार बड़े प्रोजेक्ट्स होंगे रिलीज

    नई दिल्ली । भारतीय सिनेमा प्रेमियों के लिए आने वाले कुछ महीने मनोरंजन से भरपूर होने वाले हैं। वैश्विक फिल्म डेटाबेस प्लेटफॉर्म आईएमडीबी द्वारा जारी की गई सर्वाधिक प्रतीक्षित भारतीय फिल्मों और वेब सीरीज की ताजा रियल-टाइम व्यूज सूची में बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। इस सूची में सुपरस्टार यश की बहुचर्चित एक्शन क्राइम ड्रामा फिल्म ‘टॉक्सिक’ ने शीर्ष स्थान हासिल किया है। दर्शकों की बढ़ती उत्सुकता और डिजिटल सर्च के आधार पर तैयार की गई इस सूची में देश के विभिन्न हिस्सों से आने वाले 10 बड़े सिनेमाई प्रोजेक्ट्स को शामिल किया गया है, जो आगामी महीनों में बड़े पर्दे और विभिन्न ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर दर्शकों का मनोरंजन करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

    इस सूची में शीर्ष पर काबिज कन्नड़ सुपरस्टार यश की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘टॉक्सिक’ आगामी 26 अगस्त को सिनेमाघरों में दस्तक देने जा रही है। एक एक्शन क्राइम ड्रामा के रूप में तैयार की गई इस फिल्म की निर्माण प्रक्रिया और रिलीज की तारीखों में पूर्व में कई बार बदलाव किए जा चुके हैं। फिल्म के शुरुआती टीज़र के आने के बाद से ही इसे लेकर दर्शकों में गहरा कौतूहल बना हुआ है। सूची में दूसरे स्थान पर तमिलनाडु के नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री और लोकप्रिय अभिनेता सी. जोसेफ विजय की अंतिम फिल्म ‘जन नायगन’ बनी हुई है। सेंसरशिप की जटिलताओं के कारण लंबे समय तक अटकी रहने के बाद आखिरकार इस फिल्म को 23 जुलाई की रिलीज डेट मिल गई है, जिसे लेकर दक्षिण भारतीय सिनेमा प्रेमियों में जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है।

    इसके अलावा, आर. माधवन और कृष्णकुमार रामकुमार की मुख्य भूमिकाओं से सजी बायोग्राफिकल ड्रामा फिल्म ‘जीडीएन’ 17 जुलाई को सिनेमाघरों में प्रदर्शित होने जा रही है। बॉलीवुड के बहुमुखी अभिनेता इमरान हाशमी की बहुचर्चित रोमांटिक ड्रामा थ्रिलर फ्रेंचाइजी ‘आवारापन 2’ भी इस सूची में चौथे स्थान पर मजबूती से बनी हुई है, जो आगामी 14 अगस्त को दर्शकों के सामने आएगी। वहीं, डार्क रोमांटिक ड्रामा जॉनर की फिल्म ‘डीसी’ को भी दर्शकों की तरफ से जबरदस्त सर्च मिल रही है, जिसे निर्माताओं ने 7 अगस्त को हिंदी सहित कई प्रमुख भाषाओं में सीधे सिनेमाघरों में रिलीज करने का फैसला लिया है।

    आगामी 24 जुलाई का दिन भारतीय मनोरंजन उद्योग के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित होने वाला है, क्योंकि इस एक ही दिन चार बड़े और बहुप्रतीक्षित प्रोजेक्ट्स एक साथ मनोरंजन बाजार में उतर रहे हैं। इस दिन डिजिटल प्लेटफॉर्म प्राइम वीडियो पर दिग्गज अभिनेता केके मेनन और अभिनेत्री अर्चना पूरन सिंह अभिनीत बहुचर्चित ड्रामा सीरीज ‘आदर्श बाल विद्यालय’ का प्रीमियर होने जा रहा है। इसी तारीख को अन्नु कपूर, नितिन अरोड़ा, पवन मल्होत्रा और सुमित गुलाटी जैसे मंझे हुए कलाकारों की शानदार जुगलबंदी वाली सामाजिक कॉमेडी फिल्म ‘उत्तर दा पुत्तर’ बड़े पर्दे पर रिलीज होने के लिए तैयार है।

    इसी दिन सिनेमाघरों में रहस्य और रोमांच से भरपूर मिस्ट्री थ्रिलर फिल्म ‘इंद्रजाल’ भी रिलीज होगी, जिसमें मुख्य भूमिकाएं महेश निकम और शनाया त्रिपाठी ने निभाई हैं। 24 जुलाई को ही नेटफ्लिक्स पर विक्रांत मैसी की बेहद अनूठी रोमांटिक सीरीज ‘मुसाफिर कैफे’ भी रिलीज होने जा रही है। इस सूची में 7 अगस्त को प्रदर्शित होने वाली जिम्मी शेरगिल और अभय वर्मा की ऐतिहासिक सीरीज ‘ऑपरेशन सफेद सागर: द अनटोल्ड स्टोरी ऑफ कारगिल वॉर’ भी शामिल है, जो सिनेमाघरों के माध्यम से कारगिल युद्ध के अनसुने पहलुओं को दर्शकों के सामने पेश करेगी। इन सभी बड़ी रिलीज के कारण आगामी हफ्तों में भारतीय बॉक्स ऑफिस और डिजिटल स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स पर दर्शकों की भारी भीड़ जुटने की पूरी संभावना है।

  • बयान को तोड़-मरोड़कर पेश करने का सिंगर ने लगाया आरोप, कहा- देश की शिक्षा व्यवस्था और भविष्य को लेकर चिंतित होना हर नागरिक का अधिकार

    बयान को तोड़-मरोड़कर पेश करने का सिंगर ने लगाया आरोप, कहा- देश की शिक्षा व्यवस्था और भविष्य को लेकर चिंतित होना हर नागरिक का अधिकार

    नई दिल्ली । देश की जानी-मानी भजन गायिका अनुराधा पौडवाल ने हाल ही में एक पॉडकास्ट के दौरान अयोध्या राम मंदिर में कथित चोरी और देश की वर्तमान शिक्षा व्यवस्था को लेकर दिए गए अपने बयान पर मचे भारी राजनीतिक व सामाजिक बवाल के बाद अपनी चुप्पी तोड़ी है। सोशल मीडिया पर लगातार हो रही आलोचनाओं और विवादों के बीच, गायिका ने अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक लंबा और विस्तृत स्पष्टीकरण पत्र साझा किया है। इस पोस्ट के जरिए उन्होंने अपने बयान के पीछे की वास्तविक मंशा को साफ करते हुए आलोचकों और वीडियो को तोड़-मरोड़कर पेश करने वाले सोशल मीडिया क्रिएटर्स को करारा जवाब दिया है।

    अनुराधा पौडवाल ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट की शुरुआत देश की जनता, अपने प्रशंसकों, मित्रों और शुभचिंतकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए की। उन्होंने लिखा कि एक सार्वजनिक हस्ती होने के नाते वह समाज में अपने प्रभाव और जिम्मेदारी को अच्छी तरह समझती हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि किसी भी राष्ट्र और व्यक्ति के समग्र विकास तथा सुनहरे भविष्य की असली नींव सिर्फ और सिर्फ मजबूत शिक्षा व्यवस्था ही होती है। वह हमेशा से देश में बेहतर शिक्षा और साक्षरता की पक्षधर रही हैं और भविष्य में भी इस विचार पर पूरी दृढ़ता से कायम रहेंगी।

    विवाद के मुख्य बिंदु पर स्पष्टीकरण देते हुए सिंगर ने उन हालिया रिपोर्ट्स का हवाला दिया जिनमें देश भर में 94,000 से अधिक सरकारी या प्राथमिक स्कूलों के बंद होने की बात कही गई थी। उन्होंने कहा कि हर दिन औसतन 24 स्कूलों का बंद होना एक भारतीय नागरिक के तौर पर उनके लिए बेहद चौंकाने वाला और गंभीर रूप से चिंताजनक था। इसके साथ ही उन्होंने अयोध्या में श्री राम लल्ला मंदिर परिसर में हुई कथित चोरी की घटना पर भी गहरा दुख और व्यक्तिगत पीड़ा व्यक्त की थी। उनके अनुसार, देश के सांस्कृतिक और शैक्षणिक प्रतीकों के साथ जुड़ी ऐसी खबरें किसी भी संवेदनशील नागरिक को आहत कर सकती हैं।

    गायिका ने अपने पत्र में लोकतांत्रिक मूल्यों की वकालत करते हुए लिखा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा और जीवंत लोकतंत्र है, जहां प्रत्येक नागरिक को देश के हित में सम्मानपूर्वक अपनी राय रखने का पूरा संवैधानिक अधिकार है। रचनात्मक संवाद और अलग-अलग दृष्टिकोण ही हमारे समाज और लोकतंत्र को आंतरिक रूप से मजबूत बनाते हैं। उन्होंने देश के वर्तमान नेतृत्व और प्रशासनिक व्यवस्था के प्रति अपना पूर्ण सम्मान व्यक्त करते हुए स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाना या राजनीतिक एजेंडा चलाना बिल्कुल नहीं था।

    पोस्ट के अंतिम हिस्से में अनुराधा पौडवाल ने कुछ डिजिटल क्रिएटर्स और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर अपना तीव्र असंतोष और निराशा जाहिर की। उन्होंने आरोप लगाया कि शुभांकर मिश्रा के पॉडकास्ट में कही गई उनकी बातों को कुछ तत्वों द्वारा जानबूझकर आधा-अधूरा काटा गया और वीडियो को गुमराह करने वाले संदर्भों के साथ इंटरनेट पर प्रसारित कर सनसनी फैलाने की कोशिश की गई। उन्होंने आम जनता से अपील की कि वे ऐसे संकीर्ण सोच वाले और सिर्फ व्यूज के लिए बयानों को तोड़-मरोड़कर पेश करने वाले कंटेंट क्रिएटर्स को बढ़ावा न दें।

  • नीलाद्रि बीजे की अद्भुत और पावन परंपरा, जब रूठी पत्नी माता लक्ष्मी को मनाने के लिए भगवान जगन्नाथ ने खिलाया रसगुल्ला

    नीलाद्रि बीजे की अद्भुत और पावन परंपरा, जब रूठी पत्नी माता लक्ष्मी को मनाने के लिए भगवान जगन्नाथ ने खिलाया रसगुल्ला

    नई दिल्ली । ओडिशा के पुरी में आयोजित होने वाली विश्वप्रसिद्ध रथ यात्रा का आधिकारिक समापन एक बेहद ही खूबसूरत, अनूठी और पारिवारिक ताने-बाने से जुड़ी पावन परंपरा के साथ होता है। नौ दिनों तक अपनी मौसी के घर यानी गुंडिचा मंदिर में विश्राम करने के बाद जब भगवान जगन्नाथ, अपने बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ वापस अपने मुख्य मंदिर लौटते हैं, तो इस भव्य घर वापसी को ‘नीलाद्रि बीजे’ कहा जाता है। इस पावन अवसर पर पुरी में न केवल भगवान के गर्भगृह में पुनरागमन का उल्लास होता है, बल्कि सदियों पुरानी पति-पत्नी के प्रेमपूर्ण संवाद और मीठे मिलन की एक अद्भुत अलौकिक कथा भी जीवंत हो उठती है।

    धार्मिक और शाब्दिक दृष्टिकोण से समझा जाए तो नीलाद्रि का तात्पर्य उस पवित्र नीले पर्वत से है, जिस पर महाप्रभु जगन्नाथ का भव्य मुख्य मंदिर स्थापित है। वहीं बीजे शब्द का सीधा अर्थ दोबारा प्रवेश करना या अपने मूल स्थान पर विराजमान होना होता है। रथ यात्रा के प्रारंभ से लेकर इस अंतिम दिन तक जगन्नाथ संस्कृति में कई जटिल और महत्वपूर्ण अनुष्ठान किए जाते हैं। जब तीनों देवी-देवता अपने रथों से उतरकर मुख्य मंदिर के भीतर रत्न सिंहासन पर दोबारा स्थापित हो जाते हैं, तब जाकर इस महाउत्सव की पूर्णता मानी जाती है।

    इस विशेष दिन के साथ एक अत्यंत रोचक और मानवीय भावनाओं से ओतप्रोत पौराणिक कथा जुड़ी हुई है। मान्यता है कि जब भगवान जगन्नाथ अपने भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ रथ यात्रा पर निकले थे, तब वे अपनी पत्नी माता लक्ष्मी को मंदिर में ही छोड़ गए थे। इस उपेक्षा से नाराज होकर माता लक्ष्मी अत्यंत क्रोधित हो गईं। नौ दिनों के बाद जब महाप्रभु वापस सिंहद्वार पहुंचे, तो देवी लक्ष्मी ने रोष स्वरूप मंदिर के मुख्य कपाट अंदर से बंद कर लिए और भगवान को भीतर आने की अनुमति देने से साफ इनकार कर दिया।

    द्वार बंद होने के बाद ब्रह्मांड के संचालक महाप्रभु को भी अपनी रूठी हुई पत्नी को मनाने के लिए जतन करने पड़े। माता लक्ष्मी के क्रोध को शांत करने के लिए भगवान जगन्नाथ ने एक मीठा और आत्मीय मार्ग चुना। उन्होंने देवी लक्ष्मी को मनाने के लिए विशेष रूप से तैयार की गई ओडिशा की पारंपरिक और सुप्रसिद्ध मिठाई ‘रसगुल्ला’ भेंट स्वरूप अर्पित की। महाप्रभु के इस अनन्य प्रेम और रसगुल्ले की अद्भुत मिठास के सम्मुख माता लक्ष्मी का मान-मर्दन हो गया और उन्होंने मुस्कुराते हुए मंदिर के विशाल कपाट खोल दिए। यही कारण है कि सदियों से चली आ रही इस रस्म में आज भी भगवान को रसगुल्ले का महाप्रसाद चढ़ाया जाता है।

    नीलाद्रि बीजे के पावन दिन पुरी के सिंहद्वार और मुख्य मंदिर परिसर में भोर से ही देश-विदेश से आए लाखों श्रद्धालुओं का तांता लग जाता है। सेवादारों और पुजारियों द्वारा मंत्रोच्चार के बीच तीनों विग्रहों को बड़े ही आदर के साथ रथों से उतारकर पहंडी बाजे के साथ मंदिर के भीतर ले जाया जाता है। इस दौरान मंदिर के मुख्य द्वार पर भगवान जगन्नाथ और माता लक्ष्मी के बीच होने वाले इस पारंपरिक संवाद और मीठे झगड़े को एक जीवंत नाटक के रूप में प्रदर्शित किया जाता है, जिसे देखने के लिए भक्त लालायित रहते हैं। अंत में भगवान को भारी मात्रा में रसगुल्लों का भोग लगाने के बाद महाआरती के साथ इस अद्भुत रथ यात्रा उत्सव का समापन होता है।

  • वैज्ञानिकों के इस्तीफे से गगनयान पर नहीं पड़ेगा कोई असर, केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने निजीकरण और ब्रेन-ड्रेन की अटकलों को किया खारिज

    वैज्ञानिकों के इस्तीफे से गगनयान पर नहीं पड़ेगा कोई असर, केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने निजीकरण और ब्रेन-ड्रेन की अटकलों को किया खारिज

    नई दिल्ली । भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) से वरिष्ठ वैज्ञानिकों के लगातार हो रहे इस्तीफों और कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र में कथित डेटा लीक की खबरों पर केंद्र सरकार ने अपनी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट कर दी है। केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने देश के महत्वाकांक्षी अंतरिक्ष कार्यक्रमों, विशेषकर गगनयान मिशन के भविष्य को लेकर उठ रहे सभी सवालों और चिंताओं को सिरे से खारिज किया है। उन्होंने साफ किया है कि किसी भी शीर्ष वैज्ञानिक या प्रशासनिक बदलाव का असर इसरो की कार्यप्रणाली और देश के अंतरिक्ष अभियानों की निरंतरता पर बिल्कुल नहीं पड़ेगा।

    अंतरिक्ष विभाग द्वारा हाल ही में जारी एक कड़े निर्देश के बाद यह विवाद सामने आया था, जिसमें गगनयान और अन्य संवेदनशील राष्ट्रीय मिशनों से जुड़े ‘ग्रुप ए’ के वैज्ञानिकों के स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (वीआरएस) और इस्तीफे के नियमों को पहले से अधिक सख्त कर दिया गया है। इस प्रशासनिक सख्ती के बीच यह रिपोर्ट आई थी कि लॉन्च व्हीकल मार्क-3 (एलवीएम-3) के प्रोजेक्ट डायरेक्टर विक्टर जोसेफ और चंद्रयान-3 मिशन से जुड़े वरिष्ठ वैज्ञानिक आदित्य रल्लापल्ली सहित विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर और यूआर राव सैटेलाइट सेंटर के कई वैज्ञानिकों ने निजी क्षेत्र का रुख करने के लिए अपने इस्तीफे सौंपे हैं।

    केंद्रीय मंत्री ने दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान इन अटकलों को शांत करते हुए इसरो प्रमुख वी. नारायणन के आधिकारिक बयान का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष एजेंसी की संरचना ऐसी है कि जितने पेशेवर बाहर जाएंगे, उतने ही नए प्रतिभावान लोग प्रणाली के भीतर शामिल होंगे। उन्होंने उदाहरण देते हुए समझाया कि पूर्व इसरो अध्यक्ष डॉ. एस. सोमनाथ ने जनवरी 2025 में अपना कार्यकाल पूरा करने के बाद चेन्नई के एक निजी स्पेस स्टार्टअप में ऑब्जर्वर की भूमिका स्वीकार कर ली है, लेकिन उनके जाने से गगनयान परियोजना की रफ्तार धीमी नहीं हुई है। केंद्र सरकार द्वारा साल 2023 में अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी कंपनियों के लिए खोलने के बाद से वैज्ञानिकों के लिए निजी क्षेत्र में बेहतर अवसर और वेतन की राहें खुली हैं।

    देश से होने वाले प्रतिभा पलायन (ब्रेन-ड्रेन) के विषय पर बात करते हुए उन्होंने स्वीकार किया कि बेहतर सामाजिक सुरक्षा, शोध के नए अवसर, करों में राहत और सुलभ प्रवास नीतियों के कारण विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और चिकित्सा क्षेत्रों के विशेषज्ञ दूसरे देशों या निजी उद्योगों की ओर आकर्षित होते हैं। इसके बावजूद इसरो की अपनी एक अनूठी और सुदृढ़ कार्य संस्कृति है, जहां सेवानिवृत्त हो चुके वैज्ञानिक भी मार्गदर्शक और सलाहकार के रूप में देश की महत्वपूर्ण परियोजनाओं के साथ लगातार जुड़े रहते हैं। गगनयान के तहत मानव को सुरक्षित अंतरिक्ष में भेजने और वापस लाने के लिए आवश्यक क्रू मॉड्यूल की तकनीक पूरी तरह से तैयार की जा चुकी है।

    इसके साथ ही, तमिलनाडु स्थित कुडनकुलम न्यूक्लियर पावर प्रोजेक्ट (केकेएनपीपी) में संवेदनशील डेटा की चोरी से जुड़ी रिपोर्ट्स पर भी सरकार ने स्थिति साफ की है। केंद्रीय मंत्री ने न्यूक्लियर पावर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (एनपीसीआईएल) के बयानों की पुष्टि करते हुए कहा कि संयंत्र की किसी भी सामरिक या रणनीतिक डेटा प्रणाली में कोई सेंधमारी नहीं हुई है। उन्होंने इस विषय पर अनावश्यक विवाद पैदा करने की कोशिशों की निंदा की। वर्तमान में इस मामले की तकनीकी जांच एनपीसीआईएल और भारतीय कंप्यूटर आपातकालीन प्रतिक्रिया दल (सर्ट-इन) द्वारा संयुक्त रूप से की जा रही है, ताकि सुरक्षा मानकों को और अभेद्य बनाया जा सके।

  • सुंदरबन के दलदली इलाकों में पहली बार फेंसिंग की तैयारी, घुसपैठ और तस्करी रोकने के लिए बीएसएफ ने बनाया 90 किलोमीटर का मास्टर प्लान

    सुंदरबन के दलदली इलाकों में पहली बार फेंसिंग की तैयारी, घुसपैठ और तस्करी रोकने के लिए बीएसएफ ने बनाया 90 किलोमीटर का मास्टर प्लान

    नई दिल्ली । भारत-बांग्लादेश सीमा पर घुसपैठ, अवैध घुसपैठ और सीमा पार तस्करी की गतिविधियों पर पूरी तरह से लगाम लगाने के लिए सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) ने एक अभूतपूर्व और ऐतिहासिक कदम उठाया है। राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने के लिए पश्चिम बंगाल के सुंदरबन क्षेत्र में पहली बार लगभग 90 किलोमीटर लंबी फेंसिंग (बाड़बंदी) करने की विस्तृत रूपरेखा तैयार कर ली गई है। घने जंगलों, ज्वारीय दलदलों, मिट्टी के तटबंधों और दर्जनों नदी-नालों के नेटवर्क से घिरा यह इलाका भौगोलिक दृष्टि से देश के सबसे कठिन और चुनौतीपूर्ण सीमावर्ती क्षेत्रों में से एक माना जाता है, जहां अब तक कोई स्थायी बाड़ नहीं थी।

    केंद्रीय गृह मंत्रालय के सीधे निर्देशों और प्राथमिकताओं के बाद बीएसएफ ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए प्रारंभिक व्यवहार्यता (फीजिबिलिटी) रिपोर्ट तैयार करने और तकनीकी व्यवहार्यता का गहराई से अध्ययन करने का काम युद्ध स्तर पर शुरू कर दिया है। वर्तमान परिस्थितियों में सुंदरबन के इस विस्तृत और दुर्गम नदी क्षेत्र में फेंसिंग न होने के कारण सुरक्षा बल मुख्य रूप से फ्लोटिंग बॉर्डर आउटपोस्ट (एफबीओपी) यानी तैरती हुई सीमा चौकियों और विशेष नौकाओं के माध्यम से गश्त करते हैं। नए मास्टर प्लान के तहत अब समुद्री गश्त को और अधिक आक्रामक बनाने के साथ-साथ पूरे इलाके को आधुनिक तकनीकी निगरानी व्यवस्था से लैस किया जाएगा।

    इस वृहद सुरक्षा योजना को गति देने के उद्देश्य से बीएसएफ के महानिदेशक प्रवीण कुमार ने स्वयं सुंदरबन के संवेदनशील सीमावर्ती क्षेत्रों का चार दिवसीय दौरा कर सुरक्षा तैयारियों की जमीनी समीक्षा की है। इस उच्च स्तरीय दौरे में सीमा सुरक्षा व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने के साथ-साथ प्रस्तावित फेंसिंग कार्य को एक निश्चित समय सीमा के भीतर पूरा करने पर रणनीतिक चर्चा की गई। बैठक में नदी क्षेत्रों में रात्रि गश्त बढ़ाने, अतिरिक्त सर्चलाइटें लगाने और अत्याधुनिक नाइट-विज़न सीसीटीवी कैमरे स्थापित करने का निर्णय लिया गया है। इस सीमा रेखा का लगभग 71 किलोमीटर लंबा हिस्सा सुंदरबन वन्यजीव अभयारण्य के संरक्षित क्षेत्र से होकर गुजरता है, जिसके कारण निर्माण कार्य के दौरान पर्यावरणीय नियमों का पूरी तरह पालन किया जाएगा।

    सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार, हाल के दिनों में प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर आए बदलावों के बाद इस लंबित परियोजना की गति में उल्लेखनीय तेजी देखने को मिली है। पहले संयुक्त भूमि सर्वेक्षण के लिए आवश्यक अनुमतियां न मिलने के कारण यह परियोजना काफी समय तक अधर में लटकी हुई थी। हालांकि सुंदरबन को घुसपैठ का पारंपरिक या मुख्य मार्ग नहीं माना जाता है, लेकिन इसकी भौगोलिक बनावट का फायदा उठाकर तस्कर और अंतरराष्ट्रीय अपराधी अक्सर इसका उपयोग प्रतिबंधित सामानों की तस्करी और अन्य आपराधिक गतिविधियों के लिए करते रहे हैं, जिसे रोकना बेहद अनिवार्य हो गया था।

    इस बीच, फेंसिंग योजना को लेकर स्थानीय आबादी और व्यापारिक संगठनों के बीच भूमि अधिग्रहण को लेकर कुछ चिंताएं और आशंकाएं भी उभर कर सामने आई हैं। सीमा से सटे क्षेत्रों में रह रहे कई स्थानीय परिवारों और वहां पर्यटन व्यवसाय से जुड़े मध्यम आकार के होटल एवं लॉज संचालकों ने संभावित विस्थापन को लेकर अपनी चिंताएं व्यक्त की हैं। स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा बलों ने जनसंवाद के माध्यम से उन्हें आश्वस्त किया है कि सभी प्रभावित लोगों को नियमों के अनुसार उचित मुआवजा और बेहतर पुनर्वास की व्यवस्था प्रदान की जाएगी। सीमा सुरक्षा बल और राज्य के सिंचाई विभाग की एक संयुक्त टीम जल्द ही इस पूरी भूमि का विस्तृत सर्वेक्षण कार्य शुरू करने जा रही है।

  • जबलपुर हाईकोर्ट का बेहद भावुक और ऐतिहासिक फैसला, 52 वर्ष की उम्र में महिला को मिली आईवीएफ के जरिए मां बनने की इजाजत

    जबलपुर हाईकोर्ट का बेहद भावुक और ऐतिहासिक फैसला, 52 वर्ष की उम्र में महिला को मिली आईवीएफ के जरिए मां बनने की इजाजत

    मध्यप्रदेश: उच्च न्यायालय ने मातृत्व की इच्छा रखने वाली एक अधेड़ उम्र की महिला के पक्ष में बेहद संवेदनशील और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने एक 52 वर्षीय महिला को ‘इन विट्रो फर्टिलाइजेशन’ यानी आईवीएफ तकनीक के जरिए गर्भधारण करने की कानूनी मंजूरी दे दी है। न्यायालय ने अपने महत्वपूर्ण आदेश में स्पष्ट किया कि यदि कोई महिला शारीरिक और चिकित्सकीय रूप से पूरी तरह स्वस्थ है, तो उसे महज कानून में निर्धारित आयु सीमा पार कर लेने के आधार पर मां बनने के नैसर्गिक अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता।

    जस्टिस विशाल मिश्रा की एकल पीठ ने जबलपुर में याचिकाकर्ता दंपत्ति की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया। यह याचिका एक ऐसे दंपत्ति द्वारा दायर की गई थी, जिनके इकलौते 21 वर्षीय बेटे की पीलिया की बीमारी के कारण असामयिक मृत्यु हो गई थी। इस गहरे सदमे से उबरने और अपने जीवन में दोबारा खुशियां लाने के उद्देश्य से इस दंपत्ति ने फिर से संतान प्राप्ति का प्रयास शुरू किया था। हालांकि, बढ़ती उम्र और शारीरिक जटिलताओं के कारण महिला के लिए प्राकृतिक रूप से गर्भधारण करना संभव नहीं हो पा रहा था।

    स्वाभाविक रूप से गर्भधारण करने में असफल रहने के बाद इस पीड़ित दंपत्ति ने चिकित्सा विज्ञान की आधुनिक तकनीक आईवीएफ का सहारा लेने का निर्णय लिया। इसके लिए उन्होंने एक विशेषज्ञ अस्पताल से संपर्क किया, जहां शुरुआती चिकित्सकीय परीक्षणों में दोनों को शारीरिक रूप से इस प्रक्रिया के अनुकूल और पूरी तरह स्वस्थ पाया गया। इसके बावजूद अस्पताल प्रबंधन ने सहायक प्रजनन प्रौद्योगिकी (विनियमन) अधिनियम, 2021 के कड़े कानूनी प्रावधानों का हवाला देते हुए इस दंपत्ति का आईवीएफ उपचार करने से साफ इनकार कर दिया था।

    मौजूदा कानून के तहत भारत में आईवीएफ कराने वाली महिला की आयु सीमा न्यूनतम 21 वर्ष और अधिकतम 50 वर्ष तय की गई है, जबकि पुरुष के लिए यह सीमा 21 से 55 वर्ष के बीच निर्धारित है। चूंकि महिला की आयु 52 वर्ष हो चुकी थी, इसलिए तकनीकी रूप से वह इस कानून के दायरे से बाहर हो रही थीं। इस कानूनी बाधा के खिलाफ दंपत्ति ने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया और दलील दी कि कानून की बहुत ज्यादा कठोर व्याख्या करके उनसे माता-पिता बनने का आखिरी मौका नहीं छीना जाना चाहिए।

    न्यायालय में सुनवाई के दौरान दंपत्ति ने अपनी मजबूत इच्छाशक्ति का परिचय देते हुए एक औपचारिक हलफनामा भी प्रस्तुत किया। इस हलफनामे में उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि वे इस उम्र में आईवीएफ प्रक्रिया से जुड़े सभी संभावित चिकित्सकीय जोखिमों और उनके परिणामों को अपनी व्यक्तिगत जिम्मेदारी पर उठाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। इस भावुक और तार्किक पक्ष को देखने के बाद अदालत ने माना कि मातृत्व की राह में केवल तकनीकी नियम आड़े नहीं आने चाहिए।

    उच्च न्यायालय ने याचिका को स्वीकार करते हुए अपने निर्णय में रेखांकित किया कि संबंधित कानून में दंपत्ति के लिए कोई संयुक्त आयु सीमा निर्धारित नहीं की गई है। अदालत ने निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता दंपत्ति किसी भी मान्यता प्राप्त चिकित्सा संस्थान में जाकर अपनी आईवीएफ प्रक्रिया को आगे बढ़ा सकते हैं। हालांकि, कोर्ट ने इस मामले में डॉक्टरों की विशेषज्ञता का सम्मान करते हुए अस्पताल को यह स्वतंत्रता भी दी है कि वे महिला की तात्कालिक चिकित्सकीय स्थिति का आकलन करने के बाद ही उपचार का अंतिम निर्णय लें।

  • ओरिजिनल कॉन्सेप्ट का क्रेडिट न मिलने पर भड़का परेश रावल का गुस्सा, 'ओएमजी 2' के पीछे की कहानी का किया सनसनीखेज खुलासा

    ओरिजिनल कॉन्सेप्ट का क्रेडिट न मिलने पर भड़का परेश रावल का गुस्सा, 'ओएमजी 2' के पीछे की कहानी का किया सनसनीखेज खुलासा

    नई दिल्ली । हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता परेश रावल ने फिल्म ‘ओएमजी 2’ की स्क्रिप्टिंग और इसके ओरिजिनल कॉन्सेप्ट को लेकर एक बड़ा और चौंकाने वाला दावा किया है। उन्होंने सार्वजनिक मंच पर अपना दर्द बयां करते हुए कहा है कि इस फिल्म का मूल विचार उनका था, जिसे उन्होंने निर्देशक अमित राय के साथ मिलकर तैयार किया था। अभिनेता का आरोप है कि बाद में जब इस प्रोजेक्ट में बदलाव किए गए तो उन्हें इस बात का क्रेडिट तक नहीं दिया गया। इस पूरे घटनाक्रम और रचनात्मक मतभेदों के बाद ही उन्होंने खुद को इस बेहद सफल फ्रेंचाइजी के दूसरे हिस्से से पूरी तरह अलग कर लिया था।

    एक विशेष बातचीत के दौरान परेश रावल ने स्पष्ट किया कि उनकी मूल कहानी मुख्य रूप से पिता और पुत्र के संवेदनशील रिश्ते के इर्द-गिर्द बुने गए एक सामाजिक ड्रामा पर आधारित थी। इस ड्रामा में स्कूली शिक्षा, सेक्स एजुकेशन, सामाजिक बदनामी और अपने बच्चे के न्याय के लिए माता-पिता द्वारा लड़ी जाने वाली कानूनी व मानसिक लड़ाई को केंद्र में रखा गया था। उन्होंने बताया कि इस कहानी के शुरुआती प्रारूप में किसी भी प्रकार के दैवीय या भगवान के किरदार का कोई स्थान नहीं था। इसे कभी भी साल 2012 में आई सुपरहिट फिल्म ‘ओएमजी’ के सीधे सीक्वल या आध्यात्मिक उत्तराधिकारी के रूप में नहीं देखा गया था।

    अभिनेता ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि उनके लिए सबसे अधिक पीड़ादायक बात यह रही कि उनके इस मूल विचार को फिल्म की क्रेडिट लाइन में कोई स्थान नहीं मिला। पूरी फिल्म की टीम और इंडस्ट्री में उनका नाम तक कहीं नहीं लिया गया, जबकि फिल्म के मुख्य पहलुओं की नींव उन्होंने ही रखी थी। उनके अनुसार फिल्म जगत के कई प्रभावशाली लोग और निर्माता-निर्देशक इस सच से भलीभांति वाकिफ हैं कि इस कहानी का मुख्य विचार कहां से उत्पन्न हुआ था। उन्होंने दावा किया कि अमित राय और अक्षय कुमार के अलावा अजय देवगन, करण जौहर और सलमान खान जैसे बड़े सितारे भी जानते थे कि यह उनका विचार था।

    कहानी की पृष्ठभूमि को साझा करते हुए परेश रावल ने बताया कि उन्होंने फिल्म ‘रोड टू संगम’ के निर्देशक अमित राय के काम से प्रभावित होकर उनसे संपर्क किया था। उन्होंने अमित को एक ऐसे स्कूली छात्र की कहानी पर काम करने का सुझाव दिया था, जिसकी एक निजी हरकत का वीडियो इंटरनेट पर वायरल हो जाता है। इसके बाद समाज और स्कूल प्रशासन उस बच्चे का बहिष्कार कर देते हैं। इस विषम परिस्थिति में बच्चे का पिता पूरी ताकत के साथ उसके सम्मान की रक्षा करने और समाज की संकीर्ण मानसिकता को अदालत में चुनौती देने के लिए खड़ा होता है।

    बाद में जब इस प्रोजेक्ट में अक्षय कुमार की एंट्री हुई, तो पूरी कहानी का ढांचा बदल दिया गया। परेश रावल के अनुसार अक्षय कुमार ने खुद उन्हें इस फिल्म में मुख्य भूमिका निभाने के लिए आमंत्रित किया था। हालांकि, स्क्रिप्ट में हुए बड़े बदलावों और मूल भावना के खत्म हो जाने के कारण उन्होंने इस प्रस्ताव को बेहद शालीनता से ठुकरा दिया। अभिनेता ने अक्षय कुमार को साफ कह दिया था कि यह वह फिल्म नहीं है जिसकी उन्होंने कल्पना की थी। अंततः फिल्म में परेश रावल की जगह पंकज त्रिपाठी को लिया गया और अक्षय कुमार ने फिल्म में भगवान शिव के दूत की भूमिका निभाई।

  • UN में भारत की मेंबरशिप की बात पर क्या बोला चीन, 4 ताकतवर देश पहले से ही साथ

    UN में भारत की मेंबरशिप की बात पर क्या बोला चीन, 4 ताकतवर देश पहले से ही साथ

    नई दिल्‍ली। भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की अस्थायी सदस्यता के लिए प्रचार अभियान की शुरुआत कर चुके हैं। अब भारत की इस दावेदारी पर चीन ने भी प्रतिक्रिया दे दी है। खास बात है कि चीन वीटो अधिकार प्राप्त सदस्य है।

    UNSC यानी संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की अस्थायी सदस्यता के दावे पर अब चीन ने भी प्रतिक्रिया दे दी है। पड़ोसी मुल्क ने कहा है कि वह इस तरह की खबरों पर गौर कर रहा है। खास बात है कि पहले ही कई बड़े देश भारत का साथ दे रहे हैं।

    चीन की तरफ से यह बयान ऐसे समय पर आया है, जब भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर प्रचार अभियान की शुरुआत कर चुके हैं।
    क्या बोला चीन

    चीन ने गुरुवार को कहा कि उसने 2028-29 की अवधि के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की अस्थायी सदस्यता हासिल करने की भारत की दावेदारी से जुड़ी खबरों पर गौर किया है। सुरक्षा परिषद की अस्थायी सदस्यता के लिए चुनाव लड़ने की भारत की घोषणा पर चीन के रुख के बारे में पूछे जाने पर चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘चीन ने इससे जुड़ी खबरों पर गौर किया है।’
    क्या बोले जयशंकर

    विदेश मंत्री जयशंकर ने सोमवार को संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में आयोजित एक कार्यक्रम में सुरक्षा परिषद की अस्थायी सदस्यता के लिए भारत के आधिकारिक प्रचार अभियान की शुरुआत की। इस कार्यक्रम में विभिन्न देशों के राजदूत, राजनयिक और अधिकारी शामिल हुए थे।

    जयशंकर ने अपने संबोधन में कहा था कि संयुक्त राष्ट्र के प्रति भारत का दृष्टिकोण ‘शांति अर्थात मानदंडों, विश्वास और सत्यनिष्ठा के जरिये समग्र प्रगति सुनिश्चित करने’ पर आधारित है।

    उन्होंने सुरक्षा परिषद में भारत के संभावित कार्यकाल की प्राथमिकताओं का भी विस्तार से उल्लेख किया था।
    चीन नहीं करता भारत का समर्थन

    चीन सुरक्षा परिषद के वीटो अधिकार प्राप्त पांच स्थायी सदस्यों में शामिल है लेकिन उसने अभी तक भारत की दावेदारी का समर्थन नहीं किया है। इसके विपरीत, पांच स्थायी सदस्यों में शामिल अन्य चार देश-अमेरिका, ब्रिटेन, रूस और फ्रांस-सुधार के बाद गठित होने वाली संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता का स्पष्ट रूप से समर्थन कर चुके हैं।
    किस देश से है मुकाबला

    सुरक्षा परिषद में 2028-29 के कार्यकाल के लिए चुनाव अगले साल जून में होंगे। इसमें एशिया-प्रशांत समूह की एकमात्र सीट के लिए भारत और ताजिकिस्तान के बीच मुकाबला होगा।

    भारत पिछली बार 2021-22 में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का अस्थायी सदस्य बना था।

    यह संयुक्त राष्ट्र के 15 सदस्यीय इस शक्तिशाली निकाय में भारत का आठवां कार्यकाल था। इससे पहले भारत 1950-1951, 1967-1968, 1972-1973, 1977-1978, 1984-1985, 1991-1992 और 2011-2012 में सुरक्षा परिषद का सदस्य रह चुका है।
    सुरक्षा परिषद में नहीं हुआ खास सुधार

    भारत का कहना है कि UNSC का 80 साल पुराना ढांचा मौजूदा चुनौतियों से निपटने के लिहाज से उपयुक्त नहीं है। और इसी वजह से यह वैश्विक संस्था दुनिया भर में जारी संघर्षों से हो रही मानवीय पीड़ा को खत्म करने में प्रभावी साबित नहीं हुई।

    भारत ने यह भी कहा कि विकासशील देशों की प्राथमिकताओं को बेहतर ढंग से पूरा करने के लिए वैश्विक वित्तीय ढांचे में भी बदलाव होना चाहिए।

    स्थायी प्रतिनिधि राजदूत हरीश पर्वतनेनी ने मंगलवार को कहा, ‘हाल के वर्षों में संयुक्त राष्ट्र को लेकर लोगों की धारणा नकारात्मक हुई है। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि दुनिया के विभिन्न हिस्सों में जारी संघर्षों में सुरक्षा परिषद प्रभावी ढंग से हस्तक्षेप नहीं कर पाई है।’

  • चीन पर निर्भरता होगी कम: 51 अरब डॉलर के उत्पाद देश में बनाने की तैयारी, क्या है सरकार का प्लान?

    चीन पर निर्भरता होगी कम: 51 अरब डॉलर के उत्पाद देश में बनाने की तैयारी, क्या है सरकार का प्लान?


    नई दिल्ली। सरकार ने घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने और चीन पर आयात निर्भरता घटाने के लिए 51 अरब डॉलर मूल्य के ऐसे प्रमुख आयातित उत्पादों की पहचान की है, जिनका उत्पादन देश में किया जा सकता है। मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत अभियान को गति देने के लिए आयातित वस्तुओं का व्यापक आकलन किया गया।

    मार्च, 2026 को समाप्त वित्त वर्ष में भारत ने 775 अरब डॉलर का आयात किया। इसमें करीब 398 अरब डॉलर के उत्पाद देश में बनाए जा सकते थे। सत्रों के मुताबिक, उत्पादों का चयन आर्थिक मजबूती, आपूर्ति शृंखला और चीन जैसे देशों पर निर्भरता कम करने को ध्यान में रखकर किया गया है।
    विनिर्माण के लिए किन उत्पादों की हुई पहचान?
    विनिर्माण क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण जिन उत्पादों की पहचान की गई है, उनमें कपड़े, जूते-चप्पल, इलेक्ट्रिक वाहन, सौर पैनल और अन्य औद्योगिक क्षेत्रों में उपयोग वाले कच्चे माल एवं कलपुर्जे शामिल हैं। इस सूची में शामिल करीब 100 उत्पादों पर तत्काल कार्रवाई होगी। इनका घरेलू उत्पादन बढ़ाने, निवेश आकर्षित करने और प्रोत्साहन योजनाओं के जरिये विनिर्माण क्षमता विकसित करने की रणनीति बनाई जा रही है।

    सिरदर्द बन रहा चीन से होने वाला आयात?
    भारत का 2025-26 में चीन से आयात 132 अरब डॉलर था। यह अन्य देशों के मुकाबले सबसे अधिक है। इसमें फैक्टरियों के लिए जरूरी इनपुट और मशीनरी भी शामिल हैं। सरकार ने पाया, पिछले साल आयातित 48.3 करोड़ डॉलर के जूतों का सोल भारत में बनने में दो हफ्ते लगते हैं, जबकि चीन में तीन से पांच दिन लगते हैं।

    केंद्र का मकसद ताइवान, दक्षिण कोरिया, जर्मनी और इटली की फर्मों संग संयुक्त उद्यम बनाकर इस अंतर को पाटना है। अक्षय ऊर्जा क्षेत्र में भी ऐसे ही हालात हैं। चीनी सोलर फोटोवोल्टिक सेल घरेलू निर्माताओं पर भारी पड़ रहे हैं।