Author: bharati

  • देशभर में लागू हुई नई ग्रामीण रोजगार व्यवस्था, 300 रुपये से कम नहीं मिलेगी मजदूरी, रोजगार गारंटी भी बढ़कर 125 दिन हुई

    देशभर में लागू हुई नई ग्रामीण रोजगार व्यवस्था, 300 रुपये से कम नहीं मिलेगी मजदूरी, रोजगार गारंटी भी बढ़कर 125 दिन हुई

    नई दिल्ली । केंद्र सरकार ने ग्रामीण रोजगार और आजीविका को मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए 1 जुलाई 2026 से VB-G RAM G एक्ट 2025 को पूरे देश में लागू कर दिया है। नई व्यवस्था के लागू होने के साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में मजदूरी दरों का संशोधन प्रभावी हो गया है। सरकार का उद्देश्य ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाना, रोजगार के अवसरों का विस्तार करना और विभिन्न राज्यों के बीच मजदूरी में मौजूद असमानता को कम करना है। इस बदलाव को ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

    नई व्यवस्था के तहत अब देश में इस योजना के अंतर्गत कार्य करने वाले किसी भी पात्र मजदूर को 300 रुपये प्रतिदिन से कम मजदूरी नहीं मिलेगी। जिन राज्यों में पहले मजदूरी दर इस स्तर से नीचे थी, वहां नई दरें लागू कर दी गई हैं। इससे विशेष रूप से उन राज्यों के श्रमिकों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है, जहां अब तक अपेक्षाकृत कम मजदूरी मिलती थी। सरकार का मानना है कि इससे ग्रामीण श्रमिकों की आमदनी में सुधार होगा और जीवन स्तर बेहतर बनेगा।

    इस कानून के तहत रोजगार गारंटी की अवधि भी बढ़ा दी गई है। पहले जहां पात्र ग्रामीण परिवारों को सीमित अवधि तक रोजगार की गारंटी मिलती थी, वहीं अब उन्हें वर्ष में 125 दिनों तक मजदूरी आधारित रोजगार उपलब्ध कराने का प्रावधान किया गया है। सरकार का कहना है कि अतिरिक्त रोजगार के अवसर मिलने से ग्रामीण परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और गांवों में रोजगार की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित की जा सकेगी।

    नई मजदूरी व्यवस्था लागू होने के बाद राष्ट्रीय स्तर पर औसत दैनिक मजदूरी में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। पहले की तुलना में औसत मजदूरी बढ़ने से लाखों श्रमिकों की मासिक आय में सकारात्मक प्रभाव पड़ने की संभावना है। सरकार का मानना है कि इससे ग्रामीण क्षेत्रों में क्रय शक्ति बढ़ेगी, स्थानीय बाजारों में आर्थिक गतिविधियां तेज होंगी और समग्र ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी।

    मजदूरी दरों के पुनर्निर्धारण में विशेष रूप से उन राज्यों को प्राथमिकता दी गई है, जहां पहले मजदूरी अपेक्षाकृत कम थी। पूर्वोत्तर राज्यों के साथ-साथ उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, असम, उत्तराखंड और त्रिपुरा जैसे राज्यों में मजदूरी दरों में उल्लेखनीय वृद्धि की गई है। वहीं जिन राज्यों में पहले से अपेक्षाकृत अधिक मजदूरी मिल रही थी, वहां भी नई दरों के अनुरूप संशोधन किया गया है ताकि सभी क्षेत्रों में संतुलित व्यवस्था बनी रहे।

    सरकार के अनुसार नई मजदूरी दरें वैज्ञानिक और पारदर्शी मानकों के आधार पर निर्धारित की गई हैं। इसमें महंगाई, वार्षिक समीक्षा, क्षेत्रीय परिस्थितियों और आर्थिक संकेतकों को ध्यान में रखते हुए मजदूरी तय की गई है। इससे श्रमिकों को न्यायसंगत भुगतान सुनिश्चित करने के साथ-साथ रोजगार व्यवस्था को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाने का प्रयास किया गया है।

    सरकार का विश्वास है कि VB-G RAM G एक्ट ग्रामीण विकास, रोजगार सृजन और आर्थिक आत्मनिर्भरता को नई दिशा देगा। बढ़ी हुई मजदूरी, विस्तारित रोजगार गारंटी और समान अवसरों की व्यवस्था से ग्रामीण परिवारों की आय में स्थायी सुधार होने की उम्मीद है। साथ ही यह कदम गांवों में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने, सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करने और समावेशी विकास के लक्ष्य को गति देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

  • जेट फ्यूल हुआ सस्ता, एयरलाइंस को राहत, आने वाले दिनों में हवाई किराए घटने की उम्मीद

    जेट फ्यूल हुआ सस्ता, एयरलाइंस को राहत, आने वाले दिनों में हवाई किराए घटने की उम्मीद


    नई दिल्ली। सरकारी तेल विपणन कंपनियों ने 1 जुलाई से एविएशन टर्बाइन फ्यूल (एटीएफ) यानी जेट फ्यूल की कीमतों में कटौती कर दी है। नई दरों के अनुसार राजधानी दिल्ली में जेट फ्यूल का दाम करीब 5 रुपये प्रति लीटर घटकर 115 रुपये से 110 रुपये प्रति लीटर रह गया है। वहीं, थोक (बल्क) दर 1.15 लाख रुपये प्रति किलोलीटर से घटाकर 1.10 लाख रुपये प्रति किलोलीटर कर दी गई है।

    जेट फ्यूल की कीमत में आई इस कमी से घरेलू एयरलाइंस कंपनियों को परिचालन लागत (ऑपरेटिंग कॉस्ट) में राहत मिलने की उम्मीद है। ऐसे में यदि यह राहत आगे भी बनी रहती है, तो आने वाले समय में हवाई यात्रियों को किराए में भी कुछ कमी देखने को मिल सकती है।

    जानकारों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट के बाद एटीएफ के दाम घटाए गए हैं। पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने के दौरान जेट फ्यूल की कीमत रिकॉर्ड स्तर 1.15 लाख रुपये प्रति किलोलीटर तक पहुंच गई थी। उसके बाद पहली बार इसमें कटौती की गई है।

    आमतौर पर हर महीने की पहली तारीख को अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल के औसत भाव और डॉलर के मुकाबले रुपये की विनिमय दर के आधार पर एटीएफ की कीमतों में संशोधन किया जाता है। हालांकि, किसी आपात या विशेष परिस्थिति में कीमतों में बीच महीने भी बदलाव किया जा सकता है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि एयरलाइंस की कुल परिचालन लागत में सबसे बड़ा हिस्सा जेट फ्यूल का होता है। ऐसे में एटीएफ सस्ता होने से कंपनियों का खर्च कम होगा, जिसका लाभ भविष्य में यात्रियों तक भी पहुंच सकता है।

    टीएनवी फाइनेंशियल सर्विसेज के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) तारकेश्वर नाथ वैष्णव के अनुसार, पश्चिम एशिया में तनाव कम होने और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से कच्चे तेल की आपूर्ति सामान्य होने से वैश्विक बाजार में अनिश्चितता घटी है। इसके चलते कच्चे तेल की कीमतों में लगभग 40 प्रतिशत तक गिरावट आई है और फिलहाल अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल करीब 70 से 73 डॉलर प्रति बैरल के बीच कारोबार कर रहा है।

    उन्होंने उम्मीद जताई कि यदि कच्चे तेल की कीमतों में आगे भी करीब 10 डॉलर प्रति बैरल तक की गिरावट आती है, तो जेट फ्यूल के साथ-साथ पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भी कटौती की संभावना बन सकती है।

    वैष्णव ने बताया कि निजी क्षेत्र की नायरा एनर्जी ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कमी की शुरुआत कर दी है। अब बाजार की नजर सरकारी तेल कंपनियों इंडियन ऑयल (IOC), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) पर है। यदि वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें नरम बनी रहती हैं, तो ये कंपनियां भी पेट्रोल और डीजल के दाम घटाने का फैसला ले सकती हैं।

  • प्रवासन नीति को मिली नई दिशा, 26 देशों से 28 साझेदारी समझौते कर भारत ने बढ़ाया वैश्विक सहयोग, जयशंकर ने बताया दीर्घकालिक विजन

    प्रवासन नीति को मिली नई दिशा, 26 देशों से 28 साझेदारी समझौते कर भारत ने बढ़ाया वैश्विक सहयोग, जयशंकर ने बताया दीर्घकालिक विजन


    नई दिल्ली ।
    भारत ने वैश्विक स्तर पर सुरक्षित और व्यवस्थित प्रवासन को बढ़ावा देने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए 26 देशों के साथ 28 प्रवासन एवं गतिशीलता साझेदारी समझौते किए हैं। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बताया कि इन समझौतों का उद्देश्य कानूनी और सुरक्षित आवागमन को बढ़ावा देना, कौशल आधारित वैश्विक अवसरों का विस्तार करना तथा अवैध प्रवासन और मानव तस्करी जैसी चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटना है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि कई अन्य देशों के साथ इसी प्रकार के समझौतों पर बातचीत जारी है।

    मानव संसाधन गतिशीलता से जुड़े एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विदेश मंत्री ने कहा कि बदलती वैश्विक परिस्थितियों में मानव संसाधनों की सुरक्षित और व्यवस्थित आवाजाही आर्थिक विकास का महत्वपूर्ण आधार बन चुकी है। उन्होंने कहा कि भारत अंतरराष्ट्रीय सहयोग में मानव गतिशीलता को एक महत्वपूर्ण स्तंभ मानता है और इसी सोच के अनुरूप विभिन्न देशों के साथ साझेदारी को लगातार मजबूत किया जा रहा है।

    जयशंकर ने कहा कि प्रवासन एवं गतिशीलता संबंधी समझौते केवल लोगों के आवागमन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनका उद्देश्य प्रतिभा को अवसरों से जोड़ना और देशों की आर्थिक आवश्यकताओं के अनुरूप कुशल मानव संसाधन उपलब्ध कराना भी है। उनके अनुसार यदि इन व्यवस्थाओं का प्रभावी संचालन किया जाए तो इससे मूल देश, गंतव्य देश, नियोक्ता, कामगार और स्थानीय समुदाय सभी को समान रूप से लाभ मिलता है।

    विदेश मंत्री ने सुरक्षित, नियमित और कानूनी प्रवास की आवश्यकता पर विशेष बल देते हुए कहा कि इसके लिए द्विपक्षीय सहयोग बेहद आवश्यक है। उन्होंने कहा कि प्रवासन व्यवस्था को पारदर्शी और विश्वसनीय बनाए रखने के लिए देशों के बीच समन्वय बढ़ाना समय की जरूरत है। इसी उद्देश्य से भारत विभिन्न देशों के साथ दीर्घकालिक और संतुलित साझेदारी विकसित कर रहा है।

    उन्होंने अवैध प्रवासन, धोखाधड़ी करने वाले एजेंटों, शोषणकारी तौर-तरीकों और मानव तस्करी को वैश्विक स्तर की गंभीर चुनौती बताया। उनके अनुसार इस प्रकार की गतिविधियां न केवल कानूनी प्रवासन व्यवस्था की विश्वसनीयता को प्रभावित करती हैं, बल्कि हजारों लोगों को गंभीर जोखिम में भी डाल देती हैं। उन्होंने कहा कि इन चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए सभी देशों की साझा जिम्मेदारी और समन्वित कार्रवाई आवश्यक है।

    जयशंकर ने कहा कि दुनिया इस समय बड़े सामाजिक, आर्थिक और तकनीकी बदलावों के दौर से गुजर रही है। विभिन्न क्षेत्रों में जनसंख्या संरचना बदल रही है, जबकि कृत्रिम बुद्धिमत्ता, ऑटोमेशन, डिजिटलीकरण और हरित प्रौद्योगिकी जैसी नई तकनीकें रोजगार और कौशल की मांग को तेजी से बदल रही हैं। ऐसे परिवर्तनों के बीच वैश्विक श्रम बाजार की जरूरतों के अनुरूप कुशल मानव संसाधन तैयार करना और उनकी सुरक्षित अंतरराष्ट्रीय आवाजाही सुनिश्चित करना अत्यंत महत्वपूर्ण हो गया है।

    उन्होंने यह भी कहा कि स्वास्थ्य, विनिर्माण, निर्माण, कृषि और अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों में आज भी कुशल कार्यबल की मांग बनी हुई है। ऐसे में मानव संसाधन गतिशीलता केवल रोजगार का माध्यम नहीं, बल्कि वैश्विक आर्थिक सहयोग और साझा विकास का प्रभावी साधन बन सकती है। विदेश मंत्री के अनुसार भारत की नीति प्रतिभा को वैश्विक अवसरों से जोड़ने, सुरक्षित प्रवासन को बढ़ावा देने और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करने की दिशा में लगातार आगे बढ़ रही है, जिससे आने वाले वर्षों में रोजगार, कौशल विकास और आर्थिक साझेदारी के नए अवसर विकसित होने की उम्मीद है।

  • भारत-पाक शांति पहल पर सियासत तेज, मोदी-शहबाज को लिखे खुले पत्र पर बीजेपी का पलटवार; आतंकवाद खत्म होने तक बातचीत से इनकार

    भारत-पाक शांति पहल पर सियासत तेज, मोदी-शहबाज को लिखे खुले पत्र पर बीजेपी का पलटवार; आतंकवाद खत्म होने तक बातचीत से इनकार

    नई दिल्ली । भारत और पाकिस्तान के बीच संबंधों को सामान्य बनाने की मांग को लेकर दोनों देशों के प्रमुख नागरिकों द्वारा जारी संयुक्त शांति पहल अब राजनीतिक बहस का विषय बन गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को संबोधित खुले पत्र के सार्वजनिक होने के बाद भारतीय जनता पार्टी ने इस पहल पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी का कहना है कि जब तक पाकिस्तान आतंकवाद के खिलाफ ठोस और विश्वसनीय कार्रवाई नहीं करता, तब तक किसी भी प्रकार की औपचारिक बातचीत का सवाल नहीं उठता।

    बीजेपी प्रवक्ता प्रेम शुक्ला ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भारत की नीति पहले से स्पष्ट है और इसमें किसी प्रकार का बदलाव नहीं हुआ है। उनके अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले भी स्पष्ट कर चुके हैं कि आतंकवाद और वार्ता एक साथ नहीं चल सकते। उन्होंने कहा कि जब तक पाकिस्तान अपनी धरती पर सक्रिय आतंकवादी संगठनों को संरक्षण देना बंद नहीं करता, तब तक दोनों देशों के बीच बातचीत की कोई संभावना नहीं है।

    उन्होंने यह भी कहा कि समय-समय पर कुछ समूह भारत और पाकिस्तान के बीच शांति और संवाद की पहल करते हैं, लेकिन ऐसे प्रयास तब तक व्यावहारिक नहीं हो सकते जब तक सीमा पार से आतंकवाद पूरी तरह समाप्त नहीं हो जाता। उनका कहना था कि स्थायी शांति के लिए सबसे पहले आतंकवाद के ढांचे को खत्म करना आवश्यक है।

    यह विवाद उस समय सामने आया जब सेंटर फॉर पीस एंड प्रोग्रेस की ओर से दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों को एक खुला पत्र भेजा गया। पत्र में भारत और पाकिस्तान के बीच औपचारिक राजनयिक संबंधों की पूर्ण बहाली, संवाद प्रक्रिया दोबारा शुरू करने तथा लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने की अपील की गई है। इसके साथ ही धार्मिक, सांस्कृतिक और मानवीय आदान-प्रदान को भी प्रोत्साहित करने की मांग की गई है, ताकि दोनों देशों के बीच विश्वास बहाली का माहौल तैयार हो सके।

    संयुक्त शांति प्रस्ताव पर भारत और पाकिस्तान के कुल 117 प्रमुख लोगों ने हस्ताक्षर किए हैं। भारत की ओर से विभिन्न राजनीतिक, सामाजिक और सार्वजनिक जीवन से जुड़े कई प्रमुख नाम इस पहल का हिस्सा बताए गए हैं। पत्र में दोनों सरकारों से आग्रह किया गया है कि क्षेत्रीय स्थिरता और शांति को ध्यान में रखते हुए संवाद के रास्ते फिर से खोले जाएं तथा लोगों के बीच संपर्क को आसान बनाया जाए।

    इसी बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के महासचिव दत्तात्रेय होसबाले के हालिया बयान की भी चर्चा हो रही है, जिसमें उन्होंने कहा था कि भारत को पाकिस्तान के साथ संवाद के सभी रास्ते पूरी तरह बंद नहीं करने चाहिए। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया था कि आतंकवाद के प्रति भारत की सख्त नीति में किसी प्रकार की नरमी नहीं बरती जानी चाहिए।

    भारत और पाकिस्तान के संबंध पिछले कई वर्षों से सीमा पार आतंकवाद, सुरक्षा चुनौतियों और राजनयिक तनाव के कारण प्रभावित रहे हैं। ऐसे में शांति पहल को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों और संगठनों की अलग-अलग राय सामने आ रही है। फिलहाल केंद्र सरकार की ओर से सार्वजनिक रूप से यही रुख दोहराया जा रहा है कि आतंकवाद के खिलाफ पाकिस्तान की ठोस कार्रवाई किसी भी संभावित संवाद की पहली और अनिवार्य शर्त है।

  • कैबिनेट की मेगा इंफ्रास्ट्रक्चर मंजूरी, दिल्ली में बनेगी 6 लेन द्वारका टनल, कानपुर-कबरई फोरलेन हाईवे से बुंदेलखंड को मिलेगी नई रफ्तार

    कैबिनेट की मेगा इंफ्रास्ट्रक्चर मंजूरी, दिल्ली में बनेगी 6 लेन द्वारका टनल, कानपुर-कबरई फोरलेन हाईवे से बुंदेलखंड को मिलेगी नई रफ्तार

    नई दिल्ली । केंद्र सरकार ने देश की सड़क अवसंरचना को और मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए दो महत्वपूर्ण राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं को मंजूरी दी है। केंद्रीय कैबिनेट के फैसले के तहत राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में छह लेन वाली द्वारका टनल तथा उत्तर प्रदेश के कानपुर से कबरई तक चार लेन हाईवे का निर्माण किया जाएगा। इन दोनों परियोजनाओं से यातायात व्यवस्था में सुधार, यात्रा समय में कमी और आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

    कैबिनेट के निर्णय के अनुसार दिल्ली में करीब आठ किलोमीटर लंबी छह लेन द्वारका टनल का निर्माण किया जाएगा। इस परियोजना पर लगभग 6,970 करोड़ रुपये की लागत आने का अनुमान है। प्रस्तावित टनल शिवमूर्ति क्षेत्र से शुरू होकर वसंत कुंज के रास्ते बारापुला के निकट तक विकसित की जाएगी। परियोजना को लगभग पांच वर्षों में पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

    इस टनल के निर्माण से दिल्ली के दक्षिण-पश्चिमी हिस्से में लंबे समय से बनी ट्रैफिक समस्या को काफी हद तक कम करने में मदद मिलेगी। साथ ही हवाई अड्डे, द्वारका, गुरुग्राम और दक्षिण दिल्ली के बीच यात्रा अधिक सुगम और तेज होने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे शहर के प्रमुख मार्गों पर वाहनों का दबाव कम होगा और ईंधन की बचत के साथ प्रदूषण में भी कमी आएगी।

    कैबिनेट ने दूसरी बड़ी परियोजना के रूप में उत्तर प्रदेश के कानपुर से कबरई तक लगभग 242 किलोमीटर लंबे फोरलेन राष्ट्रीय राजमार्ग को भी मंजूरी प्रदान की है। इस परियोजना की अनुमानित लागत 7,145 करोड़ रुपये होगी और इसे लगभग ढाई वर्ष में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। यह मार्ग आगे चलकर मध्य प्रदेश की दिशा में बेहतर सड़क संपर्क का महत्वपूर्ण हिस्सा बनेगा और बुंदेलखंड क्षेत्र को नई विकास संभावनाओं से जोड़ेगा।

    नई सड़क बनने के बाद कानपुर से कबरई के बीच यात्रा समय में उल्लेखनीय कमी आने का अनुमान है। वर्तमान में इस मार्ग को तय करने में लगभग साढ़े तीन घंटे का समय लगता है, जबकि परियोजना पूरी होने के बाद यही दूरी करीब डेढ़ घंटे में पूरी की जा सकेगी। इससे यात्रियों के साथ-साथ व्यावसायिक परिवहन को भी बड़ा लाभ मिलेगा।

    विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर सड़क संपर्क से औद्योगिक गतिविधियों, कृषि उत्पादों के परिवहन और क्षेत्रीय व्यापार को नई गति मिलेगी। बुंदेलखंड क्षेत्र लंबे समय से बेहतर कनेक्टिविटी की मांग करता रहा है और यह परियोजना निवेश तथा रोजगार के अवसर बढ़ाने में भी सहायक सिद्ध हो सकती है। सड़क नेटवर्क मजबूत होने से लॉजिस्टिक्स लागत में कमी आने और विभिन्न शहरों के बीच आर्थिक गतिविधियां बढ़ने की भी संभावना है।

    केंद्र सरकार का उद्देश्य आधुनिक, सुरक्षित और तेज परिवहन नेटवर्क विकसित करना है, ताकि देश के विभिन्न क्षेत्रों के बीच संपर्क और अधिक सशक्त हो सके। हाल के वर्षों में राष्ट्रीय राजमार्गों, एक्सप्रेसवे और सुरंग परियोजनाओं पर विशेष जोर दिया गया है। नई स्वीकृत दोनों परियोजनाएं इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा मानी जा रही हैं।

  • राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर ओवैसी के बयान से सियासी घमासान, एनडीए नेताओं का पलटवार; बोले- जांच को सांप्रदायिक रंग देना अनुचित

    राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर ओवैसी के बयान से सियासी घमासान, एनडीए नेताओं का पलटवार; बोले- जांच को सांप्रदायिक रंग देना अनुचित

    नई दिल्ली । राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच के बीच ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के बयान को लेकर राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। ओवैसी की टिप्पणी के बाद भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि मामले को धार्मिक दृष्टिकोण से देखने के बजाय कानून और जांच की प्रक्रिया के आधार पर परखा जाना चाहिए। नेताओं ने स्पष्ट किया कि जांच एजेंसियां अपना काम कर रही हैं और दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई होगी।

    ओवैसी ने अपने बयान में दावा किया था कि यदि ट्रस्ट में किसी मुस्लिम की भूमिका होती तो उसके साथ अलग तरह का व्यवहार किया जाता। इस टिप्पणी के सामने आने के बाद कई भाजपा नेताओं ने इसे अनावश्यक और समाज में विभाजन पैदा करने वाला बयान बताया। उनका कहना है कि जांच पूरी तरह तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर आगे बढ़ रही है तथा इसमें किसी भी प्रकार के धार्मिक भेदभाव का प्रश्न नहीं उठता।

    भाजपा सांसद सुजीत कुमार ने कहा कि पूरे मामले को हिंदू-मुस्लिम के नजरिए से जोड़ना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि चढ़ावे और श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े मामले में किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। उनके अनुसार विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित किया जा चुका है और जांच एजेंसियां पूरे घटनाक्रम की गहराई से पड़ताल कर रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि धार्मिक आस्था से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता है।

    भाजपा विधायक सुरेंद्र मैथानी ने भी ओवैसी के बयान की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि इस प्रकार की टिप्पणियां राजनीतिक उद्देश्य से की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी मामले में जांच पूरी होने से पहले उसे सांप्रदायिक रंग देना उचित नहीं है। साथ ही उन्होंने धार्मिक संस्थानों में वित्तीय पारदर्शिता और जवाबदेही को सभी समुदायों के लिए समान रूप से आवश्यक बताया।

    उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री संजय निषाद ने भी कहा कि चढ़ावा चोरी का मामला पूरी तरह कानूनी जांच का विषय है और इसे धार्मिक पहचान से जोड़ना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि किसी भी संस्था में वित्तीय अनियमितता सामने आती है तो कानून के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। उनके अनुसार जांच एजेंसियों को निष्पक्ष रूप से अपना कार्य करने दिया जाना चाहिए।

    इस बीच चढ़ावा चोरी मामले की जांच भी लगातार आगे बढ़ रही है। जांच एजेंसियों ने आरोपियों की वित्तीय गतिविधियों, बैंक खातों और संपत्तियों की विस्तृत पड़ताल शुरू कर दी है। कई बैंक खातों का रिकॉर्ड, केवाईसी दस्तावेज और लेनदेन का विवरण एकत्र किया जा रहा है ताकि कथित वित्तीय अनियमितताओं की पूरी श्रृंखला को समझा जा सके। जांच के दौरान कुछ अन्य व्यक्तियों और बैंकिंग प्रक्रिया से जुड़े पहलुओं की भी समीक्षा की जा रही है।

    मामले में पहले ही कई आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जा चुकी है और कुछ लोगों की गिरफ्तारी भी हो चुकी है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि कथित गबन और वित्तीय अनियमितता किस स्तर पर हुई, इसमें कितनी धनराशि प्रभावित हुई तथा किन-किन लोगों की भूमिका रही। वहीं राजनीतिक दलों के बीच इस मुद्दे पर आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है, जबकि प्रशासन का कहना है कि जांच निष्पक्ष ढंग से पूरी कर दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

  • डॉक्टर्स डे पर पीएम मोदी का चिकित्सा समुदाय को सलाम, वेनेजुएला में सेवा दे रहे भारतीय डॉक्टरों की समर्पण भावना को बताया देश का गौरव

    डॉक्टर्स डे पर पीएम मोदी का चिकित्सा समुदाय को सलाम, वेनेजुएला में सेवा दे रहे भारतीय डॉक्टरों की समर्पण भावना को बताया देश का गौरव

    नई दिल्ली । राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशभर के डॉक्टरों और चिकित्सा समुदाय को शुभकामनाएं देते हुए उनके समर्पण, सेवा भावना और मानवीय योगदान की सराहना की। उन्होंने विशेष रूप से वेनेजुएला में राहत एवं चिकित्सा सेवाएं दे रहे भारतीय चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों के कार्यों को देश के लिए गर्व का विषय बताया। प्रधानमंत्री ने कहा कि कठिन परिस्थितियों में भी भारतीय डॉक्टर मानवता की सेवा के लिए पूरी निष्ठा के साथ कार्य कर रहे हैं।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि भारतीय चिकित्सा समुदाय ने हर चुनौतीपूर्ण दौर में अपनी जिम्मेदारी का उत्कृष्ट निर्वहन किया है। उनका मानना है कि डॉक्टर केवल मरीजों का उपचार ही नहीं करते, बल्कि समाज में विश्वास, सुरक्षा और आशा का वातावरण भी तैयार करते हैं। उन्होंने कहा कि संकट की घड़ी में चिकित्सकों का समर्पण भारत की सेवा संस्कृति और मानवीय मूल्यों का सशक्त उदाहरण है।

    उन्होंने वेनेजुएला में संचालित राहत अभियान का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां कार्यरत भारतीय चिकित्सा दल चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में प्रभावित लोगों को आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करा रहा है। यह मिशन न केवल मानवीय सहायता का उदाहरण है, बल्कि वैश्विक स्तर पर भारत की सकारात्मक और जिम्मेदार भूमिका को भी मजबूत करता है। उनके अनुसार, भारतीय डॉक्टरों की विशेषज्ञता और सेवा भावना विश्व समुदाय में भारत की प्रतिष्ठा को नई ऊंचाई प्रदान कर रही है।

    प्रधानमंत्री ने चिकित्सकों के योगदान को भारत की स्वास्थ्य व्यवस्था की सबसे मजबूत आधारशिला बताया। उन्होंने कहा कि डॉक्टरों की मेहनत, करुणा और कर्तव्यनिष्ठा के कारण करोड़ों नागरिकों का स्वास्थ्य तंत्र पर विश्वास लगातार मजबूत हुआ है। उन्होंने सभी चिकित्सकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनका योगदान स्वस्थ और सशक्त भारत के निर्माण में अत्यंत महत्वपूर्ण है।

    उन्होंने पिछले एक दशक में स्वास्थ्य क्षेत्र में हुए विस्तार का भी उल्लेख किया। प्रधानमंत्री के अनुसार देश में मेडिकल कॉलेजों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और मेडिकल शिक्षा के लिए स्नातक तथा स्नातकोत्तर स्तर पर सीटों का व्यापक विस्तार किया गया है। इससे भविष्य के लिए अधिक प्रशिक्षित चिकित्सक तैयार हो रहे हैं और स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच देश के दूरदराज क्षेत्रों तक बढ़ाने में सहायता मिल रही है।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने में चिकित्सा समुदाय की भूमिका लगातार बढ़ेगी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि डॉक्टर निवारक स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ावा देने, चिकित्सा अनुसंधान को गति देने, आधुनिक तकनीकों को अपनाने और सस्ती एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में अग्रणी भूमिका निभाएंगे। उनके अनुसार स्वास्थ्य क्षेत्र में नवाचार और मानव संसाधन का विस्तार देश की भविष्य की आवश्यकताओं को पूरा करने में महत्वपूर्ण साबित होगा।

    वेनेजुएला में चल रहे मानवीय राहत अभियान के तहत भारत ने चिकित्सा विशेषज्ञों की टीम, पोर्टेबल अस्पताल और बड़ी मात्रा में दवाइयों तथा राहत सामग्री की आपूर्ति की है। इस पहल का उद्देश्य प्राकृतिक आपदा से प्रभावित लोगों को तत्काल चिकित्सा सहायता और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराना है। प्रधानमंत्री ने कहा कि ऐसे मानवीय प्रयास भारत की वैश्विक जिम्मेदारी और ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ की भावना को व्यवहारिक रूप में प्रस्तुत करते हैं।

    राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री का संदेश चिकित्सा समुदाय के प्रति सम्मान और विश्वास का प्रतीक माना जा रहा है। उन्होंने सभी डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों को समाज की अमूल्य धरोहर बताते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य और निरंतर सेवा भावना के लिए शुभकामनाएं दीं।

  • जून में जीएसटी कलेक्शन में 13.9% की बढ़ोतरी, राजस्व संग्रह बढ़कर 1.95 लाख करोड़ रुपये के करीब पहुंचा

    जून में जीएसटी कलेक्शन में 13.9% की बढ़ोतरी, राजस्व संग्रह बढ़कर 1.95 लाख करोड़ रुपये के करीब पहुंचा


    नई दिल्ली। देश में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) संग्रह में लगातार मजबूती देखने को मिल रही है। जून 2026 में सकल जीएसटी राजस्व संग्रह बढ़कर करीब 1.95 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया, जो पिछले वर्ष के इसी महीने की तुलना में 13.9 प्रतिशत अधिक है। इससे पहले मई में भी जीएसटी संग्रह 1.94 लाख करोड़ रुपये के स्तर को पार कर गया था।

    जीएसटी महानिदेशालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, जून महीने में कुल 1,94,812 करोड़ रुपये का सकल जीएसटी संग्रह दर्ज किया गया। पिछले वर्ष जून में यह आंकड़ा 1,71,105 करोड़ रुपये था। इस तरह एक साल में जीएसटी राजस्व में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई।

    आंकड़ों के मुताबिक, घरेलू लेनदेन से प्राप्त जीएसटी संग्रह 6.5 प्रतिशत बढ़कर लगभग 1.35 लाख करोड़ रुपये रहा। वहीं, आयात से मिलने वाला राजस्व 34.6 प्रतिशत की तेज बढ़ोतरी के साथ 60,038 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जिसने कुल संग्रह में महत्वपूर्ण योगदान दिया। जून महीने में करदाताओं को दिए गए रिफंड (प्रतिदाय) में भी वृद्धि दर्ज की गई। इस दौरान कुल रिफंड 29.1 प्रतिशत बढ़कर 32,436 करोड़ रुपये रहा।

    चालू वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) के दौरान भी जीएसटी संग्रह में मजबूत बढ़त देखने को मिली। इस अवधि में कुल 6,31,699 करोड़ रुपये का जीएसटी संग्रह हुआ, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में यह आंकड़ा 5,82,542 करोड़ रुपये था। यानी पहली तिमाही में राजस्व संग्रह में 8.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। रिफंड समायोजित करने के बाद जून में शुद्ध जीएसटी संग्रह 11.2 प्रतिशत बढ़कर 1.62 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहा।

    गौरतलब है कि देश में वस्तु एवं सेवा कर (GST) व्यवस्था लागू हुए अब नौ वर्ष पूरे हो चुके हैं। यह कर प्रणाली 1 जुलाई 2017 से पूरे देश में लागू की गई थी और तब से यह अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था का प्रमुख आधार बनी हुई है।

  • राम मंदिर और सनातन मुद्दे पर आम आदमी पार्टी का भाजपा पर तीखा प्रहार, केजरीवाल बोले— भगवान राम के नाम पर राजनीति नहीं, आस्था जरूरी

    राम मंदिर और सनातन मुद्दे पर आम आदमी पार्टी का भाजपा पर तीखा प्रहार, केजरीवाल बोले— भगवान राम के नाम पर राजनीति नहीं, आस्था जरूरी

    नई दिल्ली । आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने बुधवार को भाजपा पर भगवान राम और राम मंदिर के मुद्दे को लेकर तीखा राजनीतिक हमला बोला। उन्होंने दावा किया कि उनकी पार्टी सनातन मूल्यों के प्रति वास्तविक प्रतिबद्धता के साथ कार्य करती है, जबकि भाजपा भगवान राम के नाम का उपयोग केवल चुनावी राजनीति के लिए करती है। उनके बयान के बाद राजनीतिक माहौल एक बार फिर गरमा गया है।

    प्रेस वार्ता के दौरान केजरीवाल ने कहा कि भाजपा चुनावी सभाओं और राजनीतिक अभियानों में भगवान राम तथा राम मंदिर का उल्लेख प्रमुखता से करती है, लेकिन आस्था के अनुरूप व्यवहार नहीं करती। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी धार्मिक भावनाओं को राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल करती है। उनके अनुसार, आस्था केवल भाषणों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि उसका व्यवहार में भी प्रतिबिंब दिखाई देना चाहिए।

    उन्होंने राम मंदिर से जुड़े हालिया विवाद का उल्लेख करते हुए कहा कि इस पूरे घटनाक्रम से देशभर के श्रद्धालुओं की भावनाएं प्रभावित हुई हैं। उनका कहना था कि ऐसे मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित होना आवश्यक है, ताकि धार्मिक संस्थाओं के प्रति लोगों का विश्वास बना रहे। उन्होंने आरोप लगाया कि संबंधित मामलों में जिम्मेदारी तय करने के बजाय वास्तविक तथ्यों को सामने लाने में अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखाई गई।

    केजरीवाल ने यह भी दावा किया कि उन्होंने सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारियों का अध्ययन करने के बाद यह निष्कर्ष निकाला कि भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं की ओर से राम मंदिर में दर्शन और पूजा-अर्चना को लेकर अपेक्षित सक्रियता दिखाई नहीं दी। उन्होंने कहा कि यह विषय केवल राजनीतिक बहस का नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा हुआ है और इसी कारण लोग इस पर जवाब चाहते हैं।

    आम आदमी पार्टी के प्रमुख ने अपनी पार्टी की धार्मिक और सामाजिक पहलों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि विभिन्न राज्यों में धार्मिक आयोजनों, भजन संध्याओं, मंदिरों के विकास और श्रद्धालुओं की सुविधा से जुड़े कई कार्यक्रमों को प्राथमिकता दी गई है। उनका कहना था कि इन प्रयासों का उद्देश्य किसी राजनीतिक लाभ के बजाय समाज की धार्मिक और सांस्कृतिक आवश्यकताओं का सम्मान करना है।

    उन्होंने यह भी कहा कि उनकी पार्टी ने शासन के दौरान धार्मिक यात्राओं को सुविधाजनक बनाने और विभिन्न आस्था स्थलों से जुड़े कार्यक्रमों को बढ़ावा देने की दिशा में कई कदम उठाए। उनके अनुसार, सनातन परंपराओं के संरक्षण और धार्मिक मूल्यों के सम्मान को उनकी पार्टी सामाजिक जिम्मेदारी के रूप में देखती है।

    केजरीवाल के बयान के बाद राजनीतिक हलकों में इस मुद्दे पर नई बहस शुरू हो गई है। एक ओर आम आदमी पार्टी इसे आस्था और जवाबदेही का विषय बता रही है, वहीं दूसरी ओर यह बयान आगामी राजनीतिक विमर्श में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। धार्मिक मुद्दों पर राजनीतिक दलों के बीच बढ़ती बयानबाजी के बीच यह स्पष्ट है कि आने वाले समय में राम मंदिर और सनातन से जुड़े विषय सार्वजनिक और राजनीतिक चर्चा के केंद्र में बने रह सकते हैं।

  • शिप्रा आरती में विवाद ने लिया हिंसक रूप, पूजन सामग्री बेचने को लेकर पुजारियों और महिलाओं के बीच हाथापाई, वायरल वीडियो जांच के दायरे में

    शिप्रा आरती में विवाद ने लिया हिंसक रूप, पूजन सामग्री बेचने को लेकर पुजारियों और महिलाओं के बीच हाथापाई, वायरल वीडियो जांच के दायरे में

    मध्य प्रदेश: के उज्जैन स्थित रामघाट पर होने वाली प्रसिद्ध शिप्रा आरती के दौरान पूजन सामग्री बेचने को लेकर महिलाओं और पुजारियों के बीच विवाद हिंसक झड़प में बदल गया। घटना में दोनों पक्षों के कई लोगों को चोटें आई हैं। मारपीट का वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने दोनों पक्षों की शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। वायरल वीडियो को भी साक्ष्य के रूप में जांच में शामिल किया गया है।

    जानकारी के अनुसार घटना रविवार शाम उस समय हुई जब रामघाट पर प्रतिदिन की तरह शिप्रा आरती संपन्न हो रही थी। आरती समाप्त होने के बाद दीपक और अन्य पूजन सामग्री बेचने को लेकर महिलाओं और पुजारियों के बीच कहासुनी शुरू हुई। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक कुछ ही देर में विवाद बढ़ गया और दोनों पक्षों के बीच हाथापाई होने लगी। घटनास्थल पर मौजूद श्रद्धालुओं में भी अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

    महिला पक्ष का आरोप है कि आरती के दौरान उन्हें पूजन सामग्री बेचने से रोका गया, जिसके बाद विवाद शुरू हुआ। शिकायत में कहा गया है कि बहस के दौरान कथित रूप से गाली-गलौज की गई और विरोध करने पर पीतल की आरती से हमला किया गया। बीच-बचाव करने पहुंची अन्य महिलाओं के साथ भी मारपीट किए जाने का आरोप लगाया गया है। घटना में कुछ महिलाओं को सिर और चेहरे पर चोटें आईं, जिनका उपचार कराया गया।

    दूसरी ओर पुजारी पक्ष ने भी महिलाओं पर मारपीट करने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि आरती के दौरान व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से महिलाओं को पूजन सामग्री बेचने से रोका गया था। इसी बात पर विवाद बढ़ गया और महिलाओं ने कथित रूप से उनके साथ धक्का-मुक्की तथा मारपीट की। पुजारियों का दावा है कि धक्का-मुक्की के दौरान उनके हाथ में मौजूद जलती हुई आरती उन्हीं पर गिर गई, जिससे उन्हें चोटें आईं।

    पुलिस के अनुसार इस झड़प में दोनों पक्षों के तीन से चार लोग घायल हुए हैं। सभी घायलों को उपचार के लिए अस्पताल भेजा गया, जहां प्राथमिक इलाज के बाद उन्हें छुट्टी दे दी गई। किसी भी घायल की स्थिति गंभीर नहीं बताई गई है। घटना के बाद क्षेत्र में कुछ समय के लिए तनाव का माहौल रहा, हालांकि स्थिति अब सामान्य है।

    सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में दोनों पक्षों के बीच हाथापाई होती दिखाई दे रही है। वीडियो में कुछ लोग पीतल की आरती और अन्य सामान फेंकते हुए भी नजर आ रहे हैं। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि वायरल वीडियो की सत्यता और उसमें दिखाई दे रहे घटनाक्रम का मिलान अन्य उपलब्ध साक्ष्यों से किया जा रहा है, ताकि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जा सके।

    महाकाल थाना पुलिस ने दोनों पक्षों की शिकायत पर प्रकरण दर्ज कर लिया है। अधिकारियों का कहना है कि प्रत्यक्षदर्शियों के बयान, वायरल वीडियो और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर पूरे घटनाक्रम की विस्तृत जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद तथ्यों के अनुरूप आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन ने धार्मिक स्थलों पर व्यवस्था बनाए रखने और किसी भी प्रकार के विवाद से बचने की अपील भी की है।