Author: bharati

  • मध्य प्रदेश में त्योहारी खरीदारी का जोर, प्रीमियम उत्पादों के साथ किफायती सामानों की भी बढ़ी मांग

    मध्य प्रदेश में त्योहारी खरीदारी का जोर, प्रीमियम उत्पादों के साथ किफायती सामानों की भी बढ़ी मांग


    भोपाल।
    अमेज़न ग्रेट इंडियन फेस्टिवल 2026 के दौरान मध्य प्रदेश में ऑनलाइन खरीदारी का रुझान तेजी से बढ़ा है। स्मार्टफोन, कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स, बड़े घरेलू उपकरण, फैशन, ब्यूटी और रोजमर्रा की जरूरतों से जुड़े उत्पादों की मांग में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। कंपनी के अनुसार, राज्य में सामान्य कारोबारी दिनों की तुलना में कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स की मांग सात गुना बढ़ी है। वहीं, प्रीमियम स्मार्टफोन की खरीदारी में 20 गुना वृद्धि दर्ज की गई। इसके साथ ही ग्राहकों ने किफायती खरीदारी के विकल्पों में भी दिलचस्पी दिखाई है।

    बड़े घरेलू उपकरणों की खरीदारी में जबलपुर सबसे आगे

    त्योहारी सीजन में रेफ्रिजरेटर, वाशिंग मशीन और एयर कंडीशनर जैसे बड़े घरेलू उपकरणों की मांग में जबरदस्त उछाल आया है। सामान्य कारोबारी दिनों की तुलना में जबलपुर में इन उत्पादों की मांग 26 गुना, ग्वालियर में 21 गुना, इंदौर में 16 गुना और भोपाल में 12 गुना बढ़ी है। लैपटॉप, मॉनिटर, टैबलेट, गेमिंग कंसोल, हेडफोन, ईयरफोन, स्मार्ट रिंग और साउंडबार जैसे इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद भी ग्राहकों की पसंद बने हुए हैं।

    फिटनेस और लाइफस्टाइल उत्पादों की बढ़ी लोकप्रियता

    मध्य प्रदेश के प्रमुख शहरों में फिटनेस और लाइफस्टाइल से जुड़े उत्पादों की खरीदारी में भी तेजी आई है। सामान्य कारोबारी दिनों की तुलना में रनिंग शूज की मांग जबलपुर में सात गुना, ग्वालियर में छह गुना और इंदौर में पांच गुना दर्ज की गई। एनालॉग घड़ियों की मांग ग्वालियर और इंदौर में पांच-पांच गुना बढ़ी है। इसके अलावा फिटनेस ट्रैकर्स, बैडमिंटन रैकेट और एक्सरसाइज बाइक जैसे उत्पादों को भी ग्राहकों ने पसंद किया।

    ब्यूटी और पर्सनल केयर उत्पादों की मांग में उछाल

    त्योहारी खरीदारी के दौरान ब्यूटी और पर्सनल केयर श्रेणी में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। भोपाल में बॉडी केयर उत्पादों की मांग सामान्य कारोबारी दिनों की तुलना में 14 गुना बढ़ी। साबुन की मांग भोपाल में 16 गुना, जबलपुर में 10 गुना और इंदौर में आठ गुना दर्ज की गई। स्कैल्प ट्रीटमेंट, फेस केयर और कैजुअल फुटवियर भी प्रमुख शहरों में ग्राहकों की पसंद में शामिल रहे।

    रोजमर्रा के सामान और बेबी केयर उत्पादों की मांग भी बढ़ी

    राज्य में दैनिक उपयोग की वस्तुओं की खरीदारी में भी मजबूती देखने को मिली। भोपाल और जबलपुर में बेबी प्रोडक्ट्स की मांग तीन गुना बढ़ी। हेल्दी ब्रेकफास्ट विकल्पों में योगाबार हाई प्रोटीन ओट्स की मांग भोपाल में आठ गुना और इंदौर में सात गुना दर्ज की गई। घरेलू सफाई और लॉन्ड्री उत्पादों की मांग भोपाल में 15 गुना, जबकि ग्वालियर और इंदौर में 11-11 गुना बढ़ी।

    बेबी केयर श्रेणी में हिमालया हैप्पी बेबी गिफ्ट पैक्स की मांग भोपाल में सामान्य कारोबारी दिनों की तुलना में 95 गुना बढ़ने का दावा किया गया है। यह आंकड़ा त्योहारी खरीदारी के दौरान बच्चों की देखभाल से जुड़े उत्पादों में बढ़ी दिलचस्पी को दर्शाता है।

    होम, किचन और आउटडोर उत्पादों की खरीदारी में भी तेजी

    घर, रसोई और आउटडोर से जुड़े उत्पादों की मांग में भी वृद्धि दर्ज की गई। सामान्य कारोबारी दिनों की तुलना में इस श्रेणी में ग्वालियर में लगभग पांच गुना, इंदौर और जबलपुर में करीब चार-चार गुना तथा भोपाल में तीन गुना से अधिक वृद्धि हुई। फिटनेस उपकरणों, सजावटी और आपातकालीन लाइटिंग, कार के रखरखाव से जुड़े उत्पादों तथा फैमिली कार्ड गेम्स की मांग ने इस वृद्धि में योगदान दिया।

    किफायती खरीदारी के विकल्पों को भी मिला बढ़ावा

    प्रीमियम उत्पादों की बढ़ती मांग के साथ ग्राहकों ने किफायती खरीदारी को भी प्राथमिकता दी। अमेज़न बाजार पर सामान्य कारोबारी दिनों की तुलना में भोपाल में छह गुना, ग्वालियर और जबलपुर में चार-चार गुना तथा इंदौर में तीन गुना वृद्धि दर्ज की गई।

    कंपनी के अनुसार, अमेज़न ग्रेट इंडियन फेस्टिवल 2026 के दौरान मध्य प्रदेश में खरीदारी के रुझान से स्पष्ट है कि ग्राहक एक ओर प्रीमियम इलेक्ट्रॉनिक्स और घरेलू उपकरणों पर खर्च कर रहे हैं, तो दूसरी ओर रोजमर्रा की जरूरतों और बजट के अनुकूल उत्पादों की खरीदारी में भी सक्रिय हैं। कंपनी ने बताया कि ग्राहक त्योहारी सीजन के दौरान जारी ऑफर्स और डील्स का लाभ उठा सकते हैं।

  • राहुल गांधी की संपत्ति मामले में CJI सूर्यकांत की वकील को फटकार, पूछा- क्या मीडिया का ध्यान खींचने के लिए दायर की याचिका?

    राहुल गांधी की संपत्ति मामले में CJI सूर्यकांत की वकील को फटकार, पूछा- क्या मीडिया का ध्यान खींचने के लिए दायर की याचिका?

    नई दिल्ली ।कांग्रेस नेता राहुल गांधी से जुड़े कथित आय से अधिक संपत्ति के मामले में मंगलवार, 27 अक्टूबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने याचिकाकर्ता पक्ष के वकील को फटकार लगाई। अदालत ने मामले को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कराने की मांग पर सवाल उठाते हुए पूछा कि क्या याचिका दाखिल करने का उद्देश्य केवल मीडिया का ध्यान आकर्षित करना है। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि इस मुद्दे को उठाने के पीछे कोई स्पष्ट आधार नजर नहीं आता और दलील में पर्याप्त दम भी नहीं है।

    सुनवाई के दौरान वकील ने राहुल गांधी के एक हालिया बयान का हवाला दिया। उनका दावा था कि राहुल गांधी ने एक कार्यक्रम में कहा था कि वह प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के 200 अधिकारियों के संपर्क में हैं। इसी बयान के आधार पर वकील ने सुप्रीम कोर्ट से मामले को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने की मांग की।

    इस दलील पर मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने सवाल किया कि क्या इस मुद्दे पर किसी न्यूज चैनल से सलाह ली गई है। उन्होंने टिप्पणी की कि ऐसा प्रतीत होता है कि मामले को उठाने का उद्देश्य मीडिया का ध्यान आकर्षित करना है। अदालत की इस टिप्पणी से स्पष्ट हुआ कि वह मामले की सुनवाई की मांग के पीछे प्रस्तुत आधार की पर्याप्तता को लेकर संतुष्ट नहीं थी।

    यह विवाद राहुल गांधी की संपत्ति की जांच से संबंधित उस मामले से जुड़ा है, जिसमें इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ ने मई 2026 में सीबीआई और ईडी को जांच करने का आदेश दिया था। इसके बाद राहुल गांधी ने हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। उन्होंने इस मामले को दिल्ली हाई कोर्ट में स्थानांतरित करने की मांग भी की थी।

    अगस्त 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी थी। साथ ही अदालत ने शिकायतकर्ता, सीबीआई और ईडी से जवाब मांगा था। सुप्रीम कोर्ट ने जांच एजेंसियों को हाई कोर्ट के समक्ष कोई रिपोर्ट दाखिल नहीं करने का निर्देश भी दिया था। इस रोक के कारण हाई कोर्ट के आदेश के तहत आगे की कार्रवाई पर अंतरिम स्थिति बनी हुई है।

    मामले की शुरुआत कर्नाटक के भारतीय जनता पार्टी कार्यकर्ता विग्नेश शिशिर की शिकायत से हुई थी। उन्होंने राहुल गांधी की संपत्ति को लेकर कई आरोप लगाए थे। शिकायत में लगाए गए आरोपों और संपत्ति की जांच से संबंधित मांगों के आधार पर यह मामला न्यायिक प्रक्रिया में पहुंचा।

    राहुल गांधी ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। इसके बाद शीर्ष अदालत ने मामले में संबंधित पक्षों से जवाब मांगा और जांच के आदेश पर अंतरिम रोक लगाई। अब सुनवाई के दौरान याचिका को सूचीबद्ध कराने की मांग और उसके समर्थन में दिए गए तर्क चर्चा में रहे।

    संपत्ति से जुड़े आरोपों के मामले में अदालत की कार्यवाही और जांच एजेंसियों की भूमिका महत्वपूर्ण बनी हुई है। हालांकि, शिकायत में लगाए गए आरोप अपने आप में दोष सिद्ध होने का प्रमाण नहीं हैं। मामले में आगे की स्थिति संबंधित पक्षों के जवाब और अदालत के आगामी आदेशों पर निर्भर करेगी।

  • सिंगरौली FSTP विवाद में जांच के आश्वासन पर टिकी नजरें, निगम प्रशासन से महापौर तक जवाबदेही को लेकर चर्चा तेज

    सिंगरौली FSTP विवाद में जांच के आश्वासन पर टिकी नजरें, निगम प्रशासन से महापौर तक जवाबदेही को लेकर चर्चा तेज

    सिंगरौली । मध्यप्रदेश के सिंगरौली नगर निगम से जुड़े फीकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट यानी FSTP के संचालन और भुगतान प्रक्रिया को लेकर सवाल उठने लगे हैं। प्लांट में लगी मशीनों की स्थिति से लेकर कार्यों की निगरानी और भुगतान के आधार तक कई बिंदुओं पर स्पष्ट जानकारी मांगी जा रही है। सरकारी धन से संचालित इस परियोजना को लेकर अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि प्लांट का काम निर्धारित नियमों के अनुसार हो रहा है या नहीं और इसकी वास्तविक स्थिति की पुष्टि किस स्तर पर की जाती है। मामले में जांच का आश्वासन सामने आने के बाद अब संबंधित दस्तावेजों की पड़ताल और नगर निगम प्रशासन के आधिकारिक जवाब का इंतजार किया जा रहा है।

    FSTP प्लांट का उद्देश्य मल-मलिन पदार्थ यानी फीकल स्लज के सुरक्षित उपचार और प्रबंधन की व्यवस्था करना है। ऐसी परियोजनाएं शहर की स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जाती हैं। इसलिए इनके संचालन में मशीनों की कार्यक्षमता नियमित निगरानी और निर्धारित मानकों का पालन जरूरी होता है। सिंगरौली में इसी व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। स्वतंत्र इंजीनियर भूपेश राणा और सत्य प्रकाश की भूमिका तथा जिम्मेदारियों को लेकर भी प्रश्न सामने आए हैं। वहीं अजय प्रताप सिंह की ओर से दिल्ली से मॉनिटरिंग किए जाने की चर्चा के बीच यह जानना जरूरी बताया जा रहा है कि प्लांट का भौतिक निरीक्षण कौन करता है और निरीक्षण रिपोर्ट किस आधार पर तैयार होती है। हालांकि इन सवालों और आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।

    मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू भुगतान प्रक्रिया है। किसी भी सरकारी परियोजना में भुगतान से पहले कार्य की स्थिति और गुणवत्ता का सत्यापन महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में यह स्पष्ट होना चाहिए कि प्लांट में मशीनों के संचालन की जांच कब और किसके द्वारा की गई। कार्यादेश की शर्तें क्या थीं और संबंधित बिलों को स्वीकृति किस आधार पर मिली। निरीक्षण रिपोर्ट और भुगतान से जुड़े दस्तावेज सामने आने पर इन सवालों के जवाब मिलने में मदद मिल सकती है। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर किसी अनियमितता को प्रमाणित नहीं माना जा सकता। वास्तविक स्थिति जानने के लिए संबंधित रिकॉर्ड और जिम्मेदार अधिकारियों का पक्ष सामने आना जरूरी है।

    इस पूरे मामले में नगर निगम के जिम्मेदार अधिकारियों के साथ निगमाध्यक्ष और महापौर की भूमिका भी चर्चा में है। सार्वजनिक धन और शहर की स्वच्छता व्यवस्था से जुड़े विषय पर नागरिकों को यह जानने की अपेक्षा रहती है कि प्रशासन ने उठे सवालों पर क्या कदम उठाए हैं। अधिकारियों या जनप्रतिनिधियों की ओर से स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने नहीं आने को लेकर सवाल किए जा रहे हैं। हालांकि चुप्पी को अपने आप में किसी गड़बड़ी का प्रमाण नहीं माना जा सकता। मामले की स्थिति स्पष्ट करने के लिए आधिकारिक जानकारी और दस्तावेजों का सार्वजनिक होना अधिक महत्वपूर्ण है।

    नगर निगम अध्यक्ष देवेश पांडेय ने इस मामले की जांच कराने और संबंधित लोगों के विरुद्ध कार्रवाई का आश्वासन दिया था। अब निगाहें इस बात पर हैं कि जांच कब शुरू होती है और उसके दायरे में किन बिंदुओं को शामिल किया जाता है। मशीनों की वास्तविक स्थिति कार्यों का भौतिक सत्यापन इंजीनियरों की निरीक्षण रिपोर्ट ठेकेदार के बिल और भुगतान स्वीकृति से जुड़े रिकॉर्ड की जांच से मामले की स्थिति स्पष्ट हो सकती है। जांच निष्पक्ष तरीके से पूरी होने और उसके निष्कर्ष सामने आने पर ही जिम्मेदारी तय करने का आधार बनेगा।

    फिलहाल सिंगरौली के FSTP प्लांट को लेकर तीन प्रमुख सवाल बने हुए हैं। मशीनें किस स्थिति में हैं। कार्यों की निगरानी और गुणवत्ता सत्यापन की जिम्मेदारी किसकी है। भुगतान निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार हुआ या नहीं। इन सवालों के जवाब अटकलों से नहीं बल्कि दस्तावेजों की पड़ताल और आधिकारिक पक्ष से मिलेंगे। अब नगर निगम प्रशासन की कार्रवाई और जांच के निष्कर्षों पर नजर रहेगी।

  • कोटा में शिवपुरी के 18 वर्षीय जेईई छात्र की मौत, छह महीने पहले गया था पढ़ाई करने..

    कोटा में शिवपुरी के 18 वर्षीय जेईई छात्र की मौत, छह महीने पहले गया था पढ़ाई करने..


    मध्य प्रदेश :
    के शिवपुरी जिले के 18 वर्षीय छात्र अजीत धाकड़ की राजस्थान के कोटा में मौत हो गई। वह जवाहर नगर क्षेत्र में एक पीजी में रहकर जेईई की तैयारी कर रहा था। रविवार रात उसका शव कमरे में फंदे पर लटका मिला। घटना की जानकारी मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और शव को अस्पताल भिजवाया। मामले में पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है।

    अजीत शिवपुरी जिले के सिरसौद थाना क्षेत्र के रातीकिरार गांव का रहने वाला था। वह छह महीने पहले ही इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा जेईई की तैयारी के लिए कोटा गया था। शिवपुरी से 12वीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद उसने आगे की तैयारी के लिए राजस्थान के कोटा में रहना शुरू किया था। घटना की खबर मिलने के बाद उसके परिवार और गांव में शोक का माहौल है।

    जानकारी के अनुसार, रविवार रात करीब 10 बजे अजीत के साथ रहने वाले छात्र उसे टहलने के लिए बुलाने पहुंचे थे। उन्होंने कमरे का दरवाजा अंदर से बंद पाया। काफी कोशिश के बाद भी दरवाजा नहीं खुला, जिसके बाद साथियों ने खिड़की से अंदर झांककर देखा। इस दौरान अजीत का शव फंदे पर लटका दिखाई दिया। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई।

    सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और आवश्यक कार्रवाई की। छात्र के शव को कोटा के एमबीएस अस्पताल ले जाया गया। पुलिस ने कमरे की जांच भी की, लेकिन वहां से कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ। सोमवार को पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। पुलिस घटना से जुड़े तथ्यों की जांच कर रही है।

    प्रारंभिक तौर पर आशंका जताई जा रही है कि पढ़ाई से जुड़े तनाव के कारण छात्र ने यह कदम उठाया हो सकता है। हालांकि, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। कमरे से कोई सुसाइड नोट नहीं मिलने के कारण घटना के पीछे की परिस्थितियों को लेकर अभी स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। पुलिस जांच के बाद ही मामले से जुड़े अन्य पहलुओं की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

    अजीत के परिवार पर पहले भी दुख का पहाड़ टूट चुका था। उसके पिता अशोक धाकड़ का करीब चार साल पहले निधन हो गया था। पिता की मौत के बाद परिवार की जिम्मेदारी बड़े भाई दिव्यांश ने संभाली थी। उन्होंने छोटे भाई की पढ़ाई का जिम्मा भी उठाया और उसे आगे बढ़ाने के लिए सहयोग किया। अजीत जेईई की तैयारी के लिए कोटा गया था, लेकिन उसकी मौत की खबर से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।

    घटना के बाद रातीकिरार गांव में शोक का माहौल है। परिवार के लिए यह क्षति बेहद कठिन है, क्योंकि अजीत अपनी पढ़ाई के जरिए भविष्य बनाने की तैयारी कर रहा था। पुलिस मामले की जांच में जुटी है और घटना के कारणों का पता लगाने की कोशिश कर रही है।

    कोटा में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों पर पढ़ाई और परीक्षा से जुड़ा दबाव अक्सर चर्चा का विषय रहता है। हालांकि, अजीत की मौत के पीछे पढ़ाई का तनाव ही कारण था, यह अभी स्थापित नहीं हुआ है। फिलहाल पुलिस की जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही घटना की परिस्थितियों के बारे में स्पष्ट जानकारी सामने आ सकेगी।

  • मध्यप्रदेश में IPS अफसरों की बड़ी सर्जरी, सागर और देवास को मिले नए SP, भोपाल पुलिस मुख्यालय में भी अहम नियुक्तियां

    मध्यप्रदेश में IPS अफसरों की बड़ी सर्जरी, सागर और देवास को मिले नए SP, भोपाल पुलिस मुख्यालय में भी अहम नियुक्तियां


    भोपाल । मध्यप्रदेश में पुलिस प्रशासन को लेकर बड़ा बदलाव किया गया है। राज्य शासन के गृह विभाग की ओर से जारी आदेश के अनुसार भारतीय पुलिस सेवा के चार अधिकारियों की पदस्थापना में फेरबदल किया गया है। इस बदलाव के तहत सागर और देवास जिलों के पुलिस अधीक्षक बदले गए हैं जबकि कुछ अधिकारियों को भोपाल स्थित पुलिस मुख्यालय में नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। प्रशासनिक स्तर पर हुए इस फेरबदल को पुलिस व्यवस्था के संचालन और विभिन्न क्षेत्रों में जिम्मेदारियों के नए निर्धारण के रूप में देखा जा रहा है। आदेश के बाद संबंधित अधिकारियों की नई पदस्थापना और कार्यभार संभालने की प्रक्रिया महत्वपूर्ण रहेगी।

    जारी जानकारी के मुताबिक 2014 बैच के आईपीएस अधिकारी अनुराग सुजानिया को सागर पुलिस अधीक्षक के पद से हटाकर भोपाल पुलिस मुख्यालय में सहायक पुलिस महानिरीक्षक यानी AIG के पद पर पदस्थ किया गया है। उनके स्थान पर 2016 बैच के आईपीएस अधिकारी संजीव कुमार सिन्हा को सागर जिले का नया पुलिस अधीक्षक बनाया गया है। संजीव कुमार सिन्हा इससे पहले ग्वालियर में 14वीं वाहिनी विशेष सशस्त्र बल के सेनानी के रूप में जिम्मेदारी संभाल रहे थे। अब उन्हें सागर जिले की पुलिस व्यवस्था का नेतृत्व करना होगा। जिले में कानून व्यवस्था बनाए रखना अपराधों पर नियंत्रण करना और पुलिस प्रशासन के कामकाज को प्रभावी बनाए रखना उनकी प्रमुख जिम्मेदारियों में शामिल रहेगा।

    इसी प्रशासनिक फेरबदल के तहत देवास जिले में भी पुलिस अधीक्षक की जिम्मेदारी बदली गई है। 2017 बैच के आईपीएस अधिकारी पुनीत गहलोत को देवास एसपी के पद से हटाकर भोपाल पुलिस मुख्यालय में सहायक पुलिस महानिरीक्षक के रूप में पदस्थ किया गया है। वहीं बालाघाट में पुलिस अधीक्षक के पद पर कार्यरत 2018 बैच के आईपीएस अधिकारी आदित्य मिश्रा को देवास जिले का नया पुलिस अधीक्षक बनाया गया है। इस बदलाव के बाद देवास की पुलिस व्यवस्था की कमान अब आदित्य मिश्रा के हाथों में होगी। जिले में कानून व्यवस्था को मजबूत बनाए रखना अपराधों की रोकथाम करना और पुलिस की कार्यप्रणाली को प्रभावी बनाए रखना उनके सामने अहम जिम्मेदारियां होंगी।

    गृह विभाग की ओर से जारी आदेश में संबंधित अधिकारियों की नई पदस्थापना का उल्लेख किया गया है। आदेश की प्रतियां संबंधित विभागों और अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के लिए भेजे जाने की जानकारी दी गई है। हालांकि किसी भी प्रशासनिक बदलाव के पीछे विशेष कारण होने का निष्कर्ष केवल उपलब्ध जानकारी के आधार पर नहीं निकाला जा सकता। इसलिए इस फेरबदल को फिलहाल अधिकारियों की नई पदस्थापना के रूप में ही देखा जाना चाहिए। नई जिम्मेदारियों के तहत अधिकारियों को अपने निर्धारित कार्यक्षेत्र में पुलिस प्रशासन का संचालन करना होगा।

    मध्यप्रदेश में पुलिस व्यवस्था के लिए जिला स्तर पर पुलिस अधीक्षकों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। जिले में कानून व्यवस्था बनाए रखने के साथ अपराध नियंत्रण और पुलिस बल के समन्वय की जिम्मेदारी भी उन्हीं के नेतृत्व में संचालित होती है। ऐसे में सागर और देवास में नए पुलिस अधीक्षकों की नियुक्ति के बाद इन जिलों की पुलिस व्यवस्था पर नजर रहेगी। वहीं अनुराग सुजानिया और पुनीत गहलोत की भोपाल पुलिस मुख्यालय में नई पदस्थापना से उनकी प्रशासनिक जिम्मेदारियों में बदलाव होगा। अब संबंधित अधिकारी नई जिम्मेदारियां संभालकर शासन के निर्देशों के अनुसार कामकाज आगे बढ़ाएंगे।

  • आरिफ मसूद का पुलिस प्रशासन पर बड़ा हमला: समर्थक को कानूनी नोटिस मिलने से आगबबूला हुए कांग्रेस विधायक, बोले- खाकी की धौंस नहीं चलेगी, कोर्ट में भुगतना पड़ेगा

    आरिफ मसूद का पुलिस प्रशासन पर बड़ा हमला: समर्थक को कानूनी नोटिस मिलने से आगबबूला हुए कांग्रेस विधायक, बोले- खाकी की धौंस नहीं चलेगी, कोर्ट में भुगतना पड़ेगा


    भोपाल  । मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में एक बार फिर खाकी और खादी के बीच का टकराव खुलकर सामने आ गया है, जिसने शहर के सियासी पारे को अचानक सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है। पूरा मामला भोपाल मध्य विधानसभा सीट से कांग्रेस के कद्दावर विधायक आरिफ मसूद के एक बेहद करीबी समर्थक को पुलिस द्वारा कानूनी नोटिस थमाए जाने से जुड़ा हुआ है। अपने समर्थक को पुलिसिया कार्रवाई के दायरे में आता देख विधायक आरिफ मसूद का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया और उन्होंने बेहद आक्रामक रुख अख्तियार करते हुए तलैया थाना प्रभारी (TI) को खुले मंच से एक बड़ी और सीधी चुनौती दे डाली है। विधायक ने तल्ख लहजे में पुलिस प्रशासन को चेतावनी देते हुए साफ शब्दों में कहा है कि “तैयार रहना टीआई साहब, अब इस पूरी मनमानी का जवाब आपको एनजीटी यानी नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की अदालत में देना होगा।”
    इस पूरे फसाद की जड़ दरअसल भोपाल के तलैया थाना क्षेत्र में आधी रात को हुई एक प्रशासनिक कार्रवाई है, जहां नगर निगम और पुलिस की टीम एक कथित निर्माण कार्य को लेकर मुस्तैद हुई थी। पुलिस का आरोप है कि इस दौरान विधायक आरिफ मसूद के समर्थक शारिक ने मौके पर पहुंचकर न सिर्फ हंगामा किया बल्कि शासकीय कार्य में सीधे तौर पर बाधा डालने का प्रयास भी किया। इसी मामले को लेकर तलैया थाना पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए शारिक को एक कानूनी नोटिस जारी कर दिया, जिसे विधायक मसूद ने सीधे तौर पर अपने समर्थकों को प्रताड़ित करने और राजनीतिक द्वेष भावना से की गई कार्रवाई करार दिया है। नोटिस की खबर मिलते ही आरिफ मसूद ने पुलिस और नगर निगम के गठजोड़ पर तीखा हमला बोला और आधी रात को की गई इस संयुक्त कार्रवाई की वैधानिकता पर ही गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए।
    आरिफ मसूद ने सार्वजनिक रूप से इस बात पर गहरी आपत्ति जताई है कि आखिर किस हैसियत और किस कानूनी अधिकार के तहत नगर निगम का दस्ता और स्थानीय पुलिस की टीम आधी रात के सन्नाटे में वहां कार्रवाई करने के लिए पहुंची थी। उन्होंने सीधे तौर पर तलैया टीआई को लपेटे में लेते हुए कहा कि वे इस पूरी रात वाली कार्रवाई के पीछे की असल मंशा को बेनकाब करके रहेंगे। कांग्रेस विधायक ने साफ कर दिया है कि वे इस मामले को इतनी आसानी से ठंडा नहीं होने देंगे और पुलिस की इस कथित मनमानी को चुनौती देने के लिए देश की सबसे बड़ी पर्यावरण अदालत यानी नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल का दरवाजा खटखटाएंगे। मसूद के इस बेहद कड़े और आक्रामक तेवर ने साफ कर दिया है कि आने वाले दिनों में भोपाल पुलिस और नगर निगम प्रशासन की मुश्किलें अदालत के कटघरे में बढ़ सकती हैं, क्योंकि विधायक अब इस आर-पार की लड़ाई के मूड में नजर आ रहे हैं और उन्होंने साफ कह दिया है कि कानून का दुरुपयोग करने वाले अधिकारियों को इसका हर्जाना भुगतना ही पड़ेगा।

  • शिवपुरी के पटाखा कारोबारी नवाब खां की आतिशबाजी से भरा ट्रक जब्त, 10 लाख रुपये का माल बरामद

    शिवपुरी के पटाखा कारोबारी नवाब खां की आतिशबाजी से भरा ट्रक जब्त, 10 लाख रुपये का माल बरामद

    मध्य प्रदेश: के शिवपुरी जिले के बदरवास में पटाखों का कारोबार करने वाले नवाब खां से जुड़ी आतिशबाजी की खेप को पुलिस ने गुना जिले में जब्त किया है। म्याना थाना क्षेत्र में कार्रवाई के दौरान एक ट्रक से करीब 10 लाख रुपये कीमत की आतिशबाजी बरामद हुई। यह माल इंदौर से बदरवास लाया जा रहा था। पुलिस ने आतिशबाजी के परिवहन से संबंधित दस्तावेजों की जांच के बाद कारोबारी नवाब खां और ट्रक चालक पवन जोशी के खिलाफ विस्फोटक अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है।

    पुलिस के अनुसार, ट्रक में अवैध रूप से आतिशबाजी ले जाए जाने की सूचना मिलने के बाद कार्रवाई की गई। म्याना थाना प्रभारी बृजमोहन भदौरिया के नेतृत्व में पुलिस ने एबी रोड पर केवट राई होटल के सामने नाकाबंदी की। इसी दौरान संदिग्ध ट्रक को रोककर उसकी तलाशी ली गई। जांच के दौरान वाहन में बड़ी मात्रा में पटाखों के पैकेट रखे मिले।

    तलाशी में पुलिस को 16 बड़े कार्टून मिले, जिन पर नवाब खां, बदरवास लिखा हुआ था। कार्टून खोलने पर अलग-अलग प्रकार की आतिशबाजी बरामद हुई। इनमें पोगो 12 स्टार, चिकी मिकी, स्काई शॉट, अवतार फायर, अनिल चकरी, फ्लावर पॉट और गंगा-जमुना नाम के पटाखे शामिल हैं। पुलिस के मुताबिक, ट्रक से 120 से अधिक पैकेट आतिशबाजी मिली है। जब्त किए गए माल और ट्रक की कुल कार्रवाई में लगभग 10 लाख रुपये की कीमत बताई गई है।

    पुलिस ने बताया कि ट्रक चालक पवन जोशी आतिशबाजी के परिवहन से जुड़े वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका। इसके बाद बदरवास के कारोबारी नवाब खां को बुलाकर संबंधित कागजात की जांच की गई। जांच के दौरान सामने आया कि उसका आतिशबाजी कारोबार से जुड़ा लाइसेंस वर्ष 2025 के बाद नवीनीकृत नहीं हुआ था। इसी आधार पर माल के परिवहन और कारोबार की वैधता को लेकर जांच आगे बढ़ाई जा रही है।

    लाइसेंस का नवीनीकरण नहीं होने का तथ्य सामने आने के बाद पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि संबंधित आतिशबाजी की खरीद और आपूर्ति किस आधार पर की जा रही थी। साथ ही, यह भी जांचा जा रहा है कि इंदौर से बदरवास तक माल भेजने की प्रक्रिया में किन लोगों की भूमिका थी और परिवहन के लिए आवश्यक अनुमति या दस्तावेज उपलब्ध थे या नहीं।

    ट्रक इंदौर से रवाना होकर गुना जिले के म्याना थाना क्षेत्र तक पहुंच गया था। ऐसे में पुलिस परिवहन के पूरे रास्ते और माल की आपूर्ति से जुड़े नेटवर्क की जानकारी जुटा रही है। जांच में यह भी पता लगाया जाएगा कि रास्ते में वाहन की जांच हुई थी या नहीं। हालांकि, इस संबंध में अभी किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका या रास्ते में हुई जांच को लेकर कोई निष्कर्ष सामने नहीं आया है।

    पुलिस ने ट्रक और आतिशबाजी को जब्त कर लिया है। नवाब खां और चालक पवन जोशी के खिलाफ विस्फोटक अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है। अब मामले में आतिशबाजी के स्रोत, लाइसेंस की स्थिति, परिवहन संबंधी दस्तावेजों और आपूर्ति व्यवस्था की पड़ताल की जा रही है। जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

  • सेवानिवृत्ति के बाद ओमप्रकाश श्रीवास्तव को मिली नई जिम्मेदारी, राज्य आनंद संस्थान की कमान सौंपी गई

    सेवानिवृत्ति के बाद ओमप्रकाश श्रीवास्तव को मिली नई जिम्मेदारी, राज्य आनंद संस्थान की कमान सौंपी गई


    भोपाल। मध्यप्रदेश में प्रशासनिक स्तर पर एक महत्वपूर्ण नियुक्ति की गई है। सेवानिवृत्त IAS अधिकारी ओमप्रकाश श्रीवास्तव को राज्य आनंद संस्थान का मुख्य कार्यपालन अधिकारी यानी CEO बनाया गया है। इस नई जिम्मेदारी के साथ अब वे संस्थान के कामकाज और विभिन्न गतिविधियों के संचालन की जिम्मेदारी संभालेंगे। उनकी नियुक्ति को राज्य आनंद संस्थान की गतिविधियों को व्यवस्थित रूप से आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। हालांकि नियुक्ति से संबंधित विस्तृत आदेश और कार्यकाल की जानकारी उपलब्ध होने पर इस फैसले से जुड़े अन्य पहलुओं की स्थिति भी स्पष्ट होगी।

    राज्य आनंद संस्थान मध्यप्रदेश में आनंद और खुशहाली से जुड़े विचारों तथा गतिविधियों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से काम करता है। संस्थान की गतिविधियों का केंद्र लोगों के जीवन में सकारात्मकता को प्रोत्साहित करना और जीवन के प्रति संतुलित दृष्टिकोण विकसित करने के प्रयास करना है। ऐसे में संस्थान के प्रमुख पद पर नई नियुक्ति को प्रशासनिक दृष्टि से अहम माना जा रहा है। CEO की जिम्मेदारी संभालने के बाद ओमप्रकाश श्रीवास्तव संस्थान की योजनाओं और गतिविधियों के संचालन से जुड़े कार्यों को आगे बढ़ाएंगे। उनके नेतृत्व में संस्थान के कार्यक्रमों के क्रियान्वयन और व्यवस्थाओं के संचालन पर ध्यान रहेगा।

    राज्य आनंद संस्थान की अवधारणा केवल औपचारिक कार्यक्रमों तक सीमित नहीं है बल्कि इसका उद्देश्य समाज में आनंद और संतुष्टि के महत्व को समझने के लिए सकारात्मक वातावरण तैयार करना भी है। आज की व्यस्त जीवनशैली में तनाव और मानसिक दबाव जैसी चुनौतियों के बीच जीवन में संतुलन और सकारात्मक सोच को महत्व दिया जा रहा है। ऐसे में संस्थान की गतिविधियां लोगों को अपने जीवन में बेहतर दृष्टिकोण अपनाने के लिए प्रेरित करने की दिशा में भूमिका निभा सकती हैं। संस्थान की योजनाओं को प्रभावी तरीके से संचालित करने के लिए प्रशासनिक समन्वय और नियमित निगरानी भी महत्वपूर्ण होती है।

    ओमप्रकाश श्रीवास्तव भारतीय प्रशासनिक सेवा से सेवानिवृत्त अधिकारी हैं। प्रशासनिक सेवा में कार्य करने का अनुभव सरकारी व्यवस्थाओं और योजनाओं के संचालन की समझ विकसित करने में सहायक हो सकता है। राज्य आनंद संस्थान के CEO के रूप में उनकी भूमिका संस्थान के दैनिक कामकाज को संचालित करने और निर्धारित गतिविधियों को आगे बढ़ाने से जुड़ी होगी। नई जिम्मेदारी मिलने के बाद उनसे संस्थान के कार्यों को सुचारु रूप से आगे बढ़ाने की अपेक्षा रहेगी। हालांकि उनके आगामी कार्यक्रमों और प्राथमिकताओं के संबंध में विस्तृत जानकारी सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि संस्थान की गतिविधियों में किन क्षेत्रों पर विशेष जोर दिया जाएगा।

    इस नियुक्ति के बाद राज्य आनंद संस्थान के कामकाज और आगामी योजनाओं पर नजर रहेगी। संस्थान के कार्यक्रमों को प्रभावी ढंग से संचालित करना और उनके उद्देश्यों को लोगों तक पहुंचाना नई जिम्मेदारी का अहम हिस्सा होगा। ओमप्रकाश श्रीवास्तव के नेतृत्व में संस्थान की गतिविधियां किस दिशा में आगे बढ़ती हैं यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा। फिलहाल उनकी नियुक्ति मध्यप्रदेश के प्रशासनिक और संस्थागत स्तर पर एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम के रूप में देखी जा रही है।

  • अभिषेक शर्मा का बल्ला बना आग का गोला, 11 छक्कों से मचाई तबाही, भारत ने रिकॉर्डतोड़ जीत के साथ सीरीज पर जमाया कब्जा

    अभिषेक शर्मा का बल्ला बना आग का गोला, 11 छक्कों से मचाई तबाही, भारत ने रिकॉर्डतोड़ जीत के साथ सीरीज पर जमाया कब्जा


    नई दिल्ली । भारतीय क्रिकेट टीम ने न्यूजीलैंड के खिलाफ तीसरे टी20 मुकाबले में धमाकेदार प्रदर्शन करते हुए छह विकेट से शानदार जीत दर्ज की। इस जीत के साथ टीम इंडिया ने पांच मैचों की सीरीज में 3-0 की अजेय बढ़त हासिल कर ली। मुकाबले के सबसे बड़े हीरो अभिषेक शर्मा रहे जिन्होंने अपनी विस्फोटक बल्लेबाजी से न्यूजीलैंड के गेंदबाजों को पूरी तरह बेबस कर दिया। भारत ने 199 रन के लक्ष्य को महज 13.2 ओवर में चार विकेट खोकर हासिल कर लिया। भारतीय बल्लेबाजों ने शुरुआत से ही आक्रामक अंदाज अपनाया और मैदान के चारों ओर चौकों और छक्कों की बरसात करते हुए मुकाबले को एकतरफा बना दिया।

    न्यूजीलैंड ने पहले बल्लेबाजी करते हुए निर्धारित 20 ओवर में तीन विकेट के नुकसान पर 198 रन बनाए। टीम की ओर से डेरिल मिचेल ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए 88 रन की पारी खेली और भारतीय गेंदबाजों के सामने चुनौतीपूर्ण लक्ष्य रखा। हालांकि न्यूजीलैंड की टीम को उम्मीद रही होगी कि उसके गेंदबाज इस स्कोर का बचाव कर सकेंगे लेकिन भारतीय सलामी बल्लेबाजों ने मैदान पर उतरते ही मैच की तस्वीर बदल दी। लक्ष्य का पीछा करने आए अभिषेक शर्मा और वैभव सूर्यवंशी ने पहले ओवर से ही आक्रामक रुख अपनाया और न्यूजीलैंड के गेंदबाजी आक्रमण पर दबाव बना दिया।

    अभिषेक शर्मा ने केवल 38 गेंदों में 113 रन की विस्फोटक पारी खेली। उनकी इस शानदार पारी में नौ चौके और 11 छक्के शामिल रहे। उन्होंने जिस अंदाज में गेंदबाजों पर हमला बोला उससे न्यूजीलैंड की टीम को वापसी का मौका ही नहीं मिला। अभिषेक ने मैदान के चारों ओर बड़े शॉट लगाए और रन गति को लगातार ऊंचा बनाए रखा। दूसरे छोर पर वैभव सूर्यवंशी ने भी उनका बेहतरीन साथ दिया। वैभव ने महज 19 गेंदों में 45 रन बनाए जिसमें चार चौके और चार छक्के शामिल थे। दोनों बल्लेबाजों के बीच पहले विकेट के लिए 133 रन की तेज साझेदारी हुई जिसने भारतीय जीत की मजबूत नींव रख दी।

    भारतीय पारी की शुरुआत भी रिकॉर्डतोड़ रही। न्यूजीलैंड की ओर से पहला ओवर डालने आए जैकब डफी के खिलाफ भारतीय बल्लेबाजों ने 26 रन बटोरे। इसमें अतिरिक्त रन भी शामिल थे। इसके बाद भारतीय टीम ने केवल 2.2 ओवर में 50 रन पूरे कर लिए। शुरुआती छह ओवर में भारत ने बिना विकेट गंवाए 118 रन बनाकर मुकाबले पर पूरी तरह पकड़ बना ली। इस दौरान भारतीय बल्लेबाजों की आक्रामकता ने न्यूजीलैंड के गेंदबाजों को रणनीति बदलने पर मजबूर कर दिया।

    अभिषेक के आउट होने के बाद भी भारतीय टीम की रन गति पर ज्यादा असर नहीं पड़ा। वैभव सूर्यवंशी के आउट होने के बाद संजू सैमसन ने 18 रन बनाए जबकि कप्तान श्रेयस अय्यर पांच रन बनाकर पवेलियन लौट गए। इसके बावजूद भारतीय बल्लेबाजों ने लक्ष्य का पीछा तेजी से जारी रखा और 13.2 ओवर में ही जीत हासिल कर ली।

    इस जीत के साथ भारत ने सीरीज में 3-0 की अजेय बढ़त बनाकर अपना दबदबा साबित किया। अभिषेक शर्मा का तूफानी शतक और वैभव सूर्यवंशी की आक्रामक बल्लेबाजी मुकाबले की सबसे बड़ी खासियत रही। भारतीय टीम ने जिस अंदाज में 199 रन का लक्ष्य हासिल किया उससे उसकी बल्लेबाजी की ताकत साफ नजर आई। अब टीम इंडिया की नजर सीरीज के बाकी मुकाबलों में भी इसी लय को बरकरार रखने पर होगी।

  • मध्यप्रदेश कैबिनेट के बड़े फैसले, सूखे से प्रभावित किसानों को मिलेगी मदद, भ्रष्टाचार के मामलों में कार्रवाई के निर्देश

    मध्यप्रदेश कैबिनेट के बड़े फैसले, सूखे से प्रभावित किसानों को मिलेगी मदद, भ्रष्टाचार के मामलों में कार्रवाई के निर्देश


    भोपाल । मध्यप्रदेश में कम बारिश के कारण किसानों की मुश्किलें बढ़ने की आशंका है। प्रदेश के 12 जिलों में बारिश की स्थिति की समीक्षा के बाद सरकार ने प्रभावित किसानों को विशेष सहायता देने की तैयारी शुरू कर दी है। मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में किसानों के हितों के साथ सिंचाई परियोजनाओं और सरकारी विभागों से जुड़े कई अहम प्रस्तावों पर चर्चा हुई। मंत्री चैतन्य कश्यप ने बैठक में लिए गए फैसलों और आगामी कार्यक्रमों की जानकारी देते हुए बताया कि कम बारिश से प्रभावित क्षेत्रों में किसानों को राहत देने और पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इन जिलों को सूखाग्रस्त घोषित करने के संबंध में भी विचार किया जा सकता है।

    बारिश की कमी से प्रभावित जिलों में अलीराजपुर की स्थिति विशेष रूप से चिंताजनक बताई गई है। यहां सामान्य से करीब 52 प्रतिशत कम बारिश दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। इसके अलावा इंदौर उज्जैन बैतूल हरदा नर्मदापुरम रतलाम झाबुआ धार शाजापुर और पांढुर्ना सहित अन्य क्षेत्रों में भी बारिश के आंकड़ों के आधार पर स्थिति का आकलन किया जा रहा है। कम वर्षा का असर खेती और जल उपलब्धता पर पड़ सकता है। ऐसे में किसानों को राहत देने के लिए सरकार की ओर से आवश्यक कदम उठाने की तैयारी की जा रही है। हालांकि प्रभावित जिलों के किसानों को किस तरह की सहायता मिलेगी और किन क्षेत्रों को आधिकारिक रूप से सूखाग्रस्त घोषित किया जाएगा इसका अंतिम फैसला संबंधित आकलन के बाद स्पष्ट होगा।

    कैबिनेट बैठक में आर्थिक अपराध अन्वेषण प्रकोष्ठ यानी EOW के लिए 345 करोड़ रुपये की स्वीकृति की जानकारी भी दी गई। इसके साथ ही कैंपा फंड के तहत 2050 करोड़ रुपये के प्लान को मंजूरी दी गई है। नर्मदा घाटी विकास विभाग की वर्ष 2019-20 से संचालित चार योजनाओं को जारी रखने का निर्णय लिया गया। इन योजनाओं के अंतर्गत कुल 3378 करोड़ रुपये की परियोजनाओं को स्वीकृति मिली है। ये परियोजनाएं छिंदवाड़ा मुरैना सिवनी और सागर जिलों से संबंधित हैं। सिंचाई परियोजनाओं को आगे बढ़ाने से कृषि क्षेत्र को पानी की उपलब्धता बेहतर बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

    सामाजिक न्याय विभाग की सात योजनाओं के लिए भी 351 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। बैठक में नगरीय निकायों में भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों पर भी चर्चा हुई। जानकारी के अनुसार 201 प्रकरणों में 392 अधिकारी और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए कि सरकारी व्यवस्थाओं में किसी भी तरह की गड़बड़ी सामने आने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएं। मंत्रियों को अपने अपने क्षेत्रों में व्यवस्थाओं की निगरानी करने के लिए भी कहा गया है।

    मध्यप्रदेश स्थापना दिवस को लेकर भी कैबिनेट में तैयारियों पर चर्चा हुई। एक नवंबर से तीन दिनों तक विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे और मंत्रियों को कार्यक्रमों की जिम्मेदारी सौंपी गई है। दीपावली के अवसर पर मिट्टी से बने उत्पादों और माटी कला को प्रोत्साहित करने पर भी जोर दिया गया है। सरकार ने सेवा संकल्प अभियान के तहत किए गए कार्यों और किसान कल्याण वर्ष की गतिविधियों की समीक्षा भी की। अब किसानों की नजर इस बात पर रहेगी कि कम बारिश से प्रभावित क्षेत्रों में राहत की घोषणा कब होती है और सहायता का लाभ किस तरह पहुंचाया जाता है।