Author: bharati

  • इजरायल चुनाव में नेतन्याहू और गादी आइजनकोट के बीच मुकाबला, बहुमत के लिए 61 सीटों का आंकड़ा अहम

    इजरायल चुनाव में नेतन्याहू और गादी आइजनकोट के बीच मुकाबला, बहुमत के लिए 61 सीटों का आंकड़ा अहम

    नई दिल्ली । इजरायल में 27 अक्टूबर 2026 को संसदीय चुनाव के लिए मतदान हो रहा है। इस चुनाव में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के सामने पूर्व सेना प्रमुख गादी आइजनकोट की चुनौती है। चुनाव से पहले सामने आए ओपिनियन पोल में दोनों पक्षों के बीच कड़े मुकाबले के संकेत मिले हैं। कुछ सर्वेक्षणों में आइजनकोट की यशार पार्टी को सबसे बड़ी पार्टी बनने की स्थिति में दिखाया गया है, लेकिन किसी भी गठबंधन को स्पष्ट बहुमत मिलने का अनुमान नहीं है। ऐसे में चुनाव के बाद सरकार बनाने के लिए छोटे दलों का समर्थन महत्वपूर्ण हो सकता है।

    इजरायल की संसद में 120 सीटें, बहुमत के लिए 61 जरूरी

    इजरायल की संसद को नेसेट कहा जाता है, जिसमें कुल 120 सीटें हैं। सरकार बनाने के लिए किसी गठबंधन को कम से कम 61 सांसदों का समर्थन हासिल करना जरूरी है। देश की चुनाव व्यवस्था में मतदाता सीधे प्रधानमंत्री का चुनाव नहीं करते, बल्कि राजनीतिक दलों को वोट देते हैं। पार्टियों को मिले वोटों के अनुपात के आधार पर संसद में सीटें आवंटित होती हैं।

    नेतन्याहू की लिकुड पार्टी और उसके सहयोगी दलों का मुकाबला विपक्षी खेमे से है। विपक्ष में गादी आइजनकोट की यशार पार्टी के साथ नफ्ताली बेनेट और यायर लैपिड के नेतृत्व वाला टुगेदर गठबंधन तथा अन्य दल भी शामिल हैं। चुनाव के बाद सरकार बनाने के लिए इन दलों के बीच समर्थन जुटाने और गठबंधन तैयार करने की प्रक्रिया अहम होगी।

    ओपिनियन पोल में क्या संकेत मिले?

    चुनाव से पहले जारी सर्वेक्षणों में अलग-अलग दलों और गठबंधनों की स्थिति को लेकर अंतर दिखाई दिया है। 23 अक्टूबर तक के एक सर्वे औसत में नेतन्याहू के गठबंधन को लगभग 52 सीटें और उनके विरोधी जियोनिस्ट दलों को करीब 50 सीटें मिलने का अनुमान था। दूसरी ओर, कुछ अन्य सर्वेक्षणों में आइजनकोट की पार्टी को सबसे बड़ी पार्टी बनने की स्थिति में दिखाया गया।

    हालांकि, किसी पार्टी को सबसे ज्यादा सीटें मिलना और उसके गठबंधन को सरकार बनाने के लिए जरूरी बहुमत मिलना अलग-अलग बातें हैं। चुनाव के बाद छोटे दलों का समर्थन और राजनीतिक गठबंधन की बातचीत निर्णायक हो सकती है। इसलिए केवल ओपिनियन पोल के आधार पर नेतन्याहू की विदाई या आइजनकोट के प्रधानमंत्री बनने को तय नहीं माना जा सकता।

    चुनाव के चार प्रमुख मुद्दे

    पहला मुद्दा 7 अक्टूबर 2023 को हमास के हमले से जुड़ी सुरक्षा चूक है। उस हमले के बाद इजरायल की सुरक्षा व्यवस्था और खुफिया एजेंसियों की तैयारियों पर सवाल उठे थे। विपक्षी नेताओं ने सरकार से जवाबदेही की मांग की है। इस चुनाव में मतदाताओं के लिए यह अहम सवाल है कि भविष्य में ऐसे हमलों को रोकने के लिए किस तरह की सुरक्षा नीति अपनाई जाएगी।

    दूसरा बड़ा मुद्दा अति-रूढ़िवादी यहूदी समुदाय के लोगों को सैन्य सेवा से मिलने वाली छूट है। इजरायल में अधिकांश यहूदी नागरिकों के लिए सैन्य सेवा अनिवार्य है, लेकिन धार्मिक अध्ययन करने वाले हरेदी समुदाय के कई लोगों को इससे छूट मिलती रही है। इस व्यवस्था को लेकर देश में विवाद है। आइजनकोट सहित विपक्ष के कई नेता सैन्य सेवा की जिम्मेदारी अधिक व्यापक रूप से लागू करने के पक्ष में हैं, जबकि नेतन्याहू के गठबंधन को हरेदी दलों का समर्थन मिलता रहा है।

    तीसरा मुद्दा सुप्रीम कोर्ट की शक्तियों और न्यायपालिका में सुधार का है। नेतन्याहू सरकार के न्यायिक बदलावों के प्रस्तावों के विरोध में देश में बड़े प्रदर्शन हुए थे। विरोधियों ने न्यायपालिका की स्वतंत्रता को लेकर चिंता जताई, जबकि सरकार के समर्थकों ने बदलावों को सुधार की जरूरत से जोड़ा।

    चौथा प्रमुख विषय युद्ध, राष्ट्रीय सुरक्षा और क्षेत्रीय संघर्षों का भविष्य है। मतदाताओं के सामने सुरक्षा सुनिश्चित करने, लंबे संघर्ष की कीमत और भविष्य की सैन्य रणनीति से जुड़े सवाल हैं। नेतन्याहू ने सुरक्षा को प्राथमिकता दी है, जबकि विपक्ष ने सरकार के फैसलों और युद्ध प्रबंधन पर सवाल उठाए हैं।

    नेतन्याहू और आइजनकोट की सैन्य पृष्ठभूमि

    बेंजामिन नेतन्याहू ने इजरायली सेना की विशेष इकाई सायरेट मटकल में सेवा दी थी। उनके बड़े भाई योनातन नेतन्याहू की 1976 में युगांडा के एंटेबे में बंधकों को छुड़ाने के अभियान के दौरान मौत हो गई थी।

    गादी आइजनकोट ने 1978 में गोलानी ब्रिगेड में सैनिक के रूप में अपना सैन्य करियर शुरू किया। करीब चार दशक की सेवा के बाद वह 2015 में इजरायली सेना के प्रमुख बने और 2019 तक इस पद पर रहे। दिसंबर 2023 में गाजा में युद्ध के दौरान उनके बेटे गैल की मौत हो गई थी। अगले दिन उनके भतीजे माओर कोहेन आइजनकोट भी दक्षिणी गाजा में लड़ाई के दौरान मारे गए थे।

    चुनाव के बाद सरकार बनाने की चुनौती

    मतदान के बाद तस्वीर इस बात से स्पष्ट होगी कि कौन-से दल कितनी सीटें हासिल करते हैं और कौन बहुमत के लिए जरूरी समर्थन जुटा पाता है। यदि कोई गठबंधन 61 सीटों का समर्थन हासिल नहीं कर पाता, तो सरकार गठन की प्रक्रिया कठिन हो सकती है। छोटे दलों और अरब समुदाय का प्रतिनिधित्व करने वाली पार्टियों की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो सकती है, हालांकि अलग-अलग दलों के बीच राजनीतिक मतभेद गठबंधन की राह में बाधा बन सकते हैं।

    इसलिए इजरायल के चुनाव का परिणाम केवल सबसे बड़ी पार्टी तय नहीं करेगा। सरकार किसकी बनेगी, यह संसद में बहुमत जुटाने और चुनाव के बाद होने वाली राजनीतिक बातचीत पर निर्भर करेगा।

  • छत्तीसगढ़ में कारोबारी नितिन डागा और गुलशन बघेल के ठिकानों पर ईडी की छापेमारी, दस्तावेजों की जांच जारी

    छत्तीसगढ़ में कारोबारी नितिन डागा और गुलशन बघेल के ठिकानों पर ईडी की छापेमारी, दस्तावेजों की जांच जारी

    नई दिल्ली । छत्तीसगढ़ में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की टीम ने रायपुर और दुर्ग में कारोबारी नितिन डागा तथा बघेल्स कॉर्पोरेट प्राइवेट लिमिटेड के संस्थापक गुलशन बघेल के ठिकानों पर छापेमारी की। अधिकारियों ने दोनों स्थानों पर पहुंचकर दस्तावेजों की जांच शुरू की। रायपुर में नितिन डागा के आवास पर सुबह करीब चार बजे टीम पहुंची, जबकि दुर्ग की ऋषभ कॉलोनी में गुलशन बघेल के घर भी कार्रवाई की गई। फिलहाल, जांच एजेंसी की ओर से छापेमारी के कारण और संबंधित मामले को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।

    रायपुर में नितिन डागा के आवास पर जांच

    जानकारी के अनुसार, ईडी की टीम रायपुर के पंडरी क्षेत्र स्थित रवि नगर के सुशील विला में कारोबारी नितिन डागा के घर पहुंची। अधिकारियों के दो गाड़ियों से वहां आने की जानकारी सामने आई है। टीम ने आवास के भीतर दस्तावेजों की पड़ताल शुरू की। नितिन डागा का कारोबार ज्वेलरी और जमीन से जुड़ा बताया जाता है।

    हालांकि, उनके आवास पर की गई कार्रवाई किस मामले से संबंधित है, इसका आधिकारिक खुलासा नहीं हुआ है। जांच एजेंसी की ओर से छापेमारी के उद्देश्य, किसी संभावित अनियमितता या जांच के दायरे को लेकर फिलहाल विस्तृत जानकारी नहीं दी गई है। ऐसे में कार्रवाई के पीछे की वजह की पुष्टि आधिकारिक बयान आने के बाद ही हो सकेगी।

    दुर्ग में गुलशन बघेल के घर भी पहुंची टीम

    दुर्ग की ऋषभ कॉलोनी में बघेल्स कॉर्पोरेट प्राइवेट लिमिटेड के संस्थापक गुलशन बघेल के आवास पर भी ईडी की टीम ने जांच की। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, दो गाड़ियों से पहुंचे दल में 10 से अधिक अधिकारी शामिल थे। अधिकारियों ने यहां भी दस्तावेजों की पड़ताल की।

    इस कार्रवाई को भारतमाला परियोजना से जुड़े मामले से संबंधित होने की आशंका जताई जा रही है, लेकिन जांच एजेंसी ने इसकी पुष्टि नहीं की है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि दोनों स्थानों पर की गई कार्रवाई एक ही मामले से जुड़ी है या अलग-अलग जांच के तहत की गई है। किसी संभावित वित्तीय अनियमितता या अन्य आरोप के संबंध में भी आधिकारिक विवरण सामने नहीं आया है।

    कौन हैं गुलशन बघेल?

    गुलशन बघेल बघेल्स कॉर्पोरेट प्राइवेट लिमिटेड के संस्थापक बताए जाते हैं। कंपनी भवन निर्माण, सड़क निर्माण, अर्थवर्क, निर्माण सामग्री की ढुलाई और परिवहन सेवाओं से जुड़े कार्य करती है। कंपनी सरकारी और निजी क्षेत्र की निर्माण परियोजनाओं में भी काम करती है। उनके आवास पर ईडी की कार्रवाई के संबंध में विस्तृत जानकारी सामने आने के बाद ही जांच के दायरे को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

    पहले भी ठगी के आरोपों को लेकर आए थे चर्चा में

    उपलब्ध जानकारी के अनुसार, करीब छह साल पहले गुलशन बघेल पर खुद को छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का भतीजा बताकर सरकारी नौकरी दिलाने का दावा करने और एक महिला से ठगी करने के आरोप लगे थे। उस मामले में पुलिस ने उन्हें पकड़ा था। हालांकि, उस पुराने प्रकरण और मौजूदा ईडी कार्रवाई के बीच किसी संबंध की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

    फिलहाल, रायपुर और दुर्ग में जारी जांच के संबंध में कई अहम सवालों के जवाब सामने आना बाकी है। ईडी की ओर से कार्रवाई के कारण, जांच के विषय और दस्तावेजों की पड़ताल से जुड़े निष्कर्षों की आधिकारिक जानकारी मिलने के बाद ही मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

  • मुरैना में चौथी मंजिल से कूदी महिला, पति की समझाइश और बच्चे की पुकार भी नहीं रोक सकी, गंभीर हालत में दिल्ली रेफर

    मुरैना में चौथी मंजिल से कूदी महिला, पति की समझाइश और बच्चे की पुकार भी नहीं रोक सकी, गंभीर हालत में दिल्ली रेफर

    मध्य प्रदेश: के मुरैना शहर में सोमवार तड़के एक महिला द्वारा चौथी मंजिल से छलांग लगाने का मामला सामने आया है। घटना कोतवाली थाना क्षेत्र के नैनागढ़ रोड स्थित एक मकान में सुबह करीब चार बजे हुई। महिला को रोकने के लिए उसके पति, बच्चे और परिवार के अन्य सदस्यों ने काफी कोशिश की, लेकिन वे उसे समझाने में सफल नहीं हो सके। चौथी मंजिल से गिरने के कारण महिला गंभीर रूप से घायल हो गई। परिजन उसे तत्काल जिला अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां प्राथमिक उपचार के बाद हालत नाजुक होने पर दिल्ली रेफर कर दिया गया। फिलहाल महिला की हालत गंभीर बताई जा रही है।

    छत पर पहुंचकर रेलिंग के पास खड़ी हुई महिला

    जानकारी के अनुसार, सोमवार तड़के महिला मकान की चौथी मंजिल पर पहुंच गई और रेलिंग के पास से नीचे कूदने की कोशिश करने लगी। यह देखकर नीचे मौजूद परिजनों ने उसे रोकने का प्रयास किया। पति लगातार उसे समझाकर नीचे उतरने के लिए कहता रहा। परिवार के अन्य सदस्यों ने भी उसे शांत करने और ऐसा कदम नहीं उठाने की अपील की।

    इस दौरान महिला का बच्चा उसे लगातार ‘मम्मी-मम्मी’ कहकर पुकारता रहा। बच्चे की आवाज और पति की समझाइश के बावजूद महिला ने छलांग लगा दी। घटना के दौरान वहां मौजूद लोगों ने उसे रोकने की कोशिश की, लेकिन वे उसे बचा नहीं सके।

    मोहल्ले के लोगों ने भी समझाने की कोशिश की

    महिला के छत पर होने और परिजनों की आवाज सुनकर आसपास के लोग भी मौके पर पहुंच गए। उन्होंने भी महिला को समझाने और नीचे आने के लिए मनाने का प्रयास किया। काफी कोशिशों के बाद भी महिला नहीं मानी और चौथी मंजिल से नीचे कूद गई। घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई।

    महिला के गिरने से गंभीर रूप से घायल होने के बाद परिजन उसे तत्काल कार से जिला अस्पताल लेकर पहुंचे। वहां डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार किया। महिला की हालत गंभीर होने के कारण उसे बेहतर इलाज के लिए दिल्ली रेफर कर दिया गया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, दिल्ली में उसका उपचार जारी है और उसकी स्थिति नाजुक बनी हुई है।

    घटना का वीडियो आया सामने

    इस घटना के दौरान का एक वीडियो भी सामने आया है। वीडियो में महिला को रोकने के लिए की जा रही कोशिशों और बच्चे की आवाज सुनाई देने की बात सामने आई है। घटना से जुड़े वीडियो के सामने आने के बाद मामले को लेकर लोगों का ध्यान आकर्षित हुआ है। हालांकि, वीडियो से महिला के इस कदम के पीछे की वजह स्पष्ट नहीं होती।

    महिला ने ऐसा कदम क्यों उठाया, इसकी वजह फिलहाल सामने नहीं आई है। किन परिस्थितियों में वह चौथी मंजिल पर पहुंची और छलांग लगाने का फैसला किया, यह अभी स्पष्ट नहीं है। घटना के कारणों का पता जांच के बाद ही चल सकेगा। फिलहाल सबसे अहम बात महिला की गंभीर हालत और उसका इलाज है। उपलब्ध जानकारी में महिला की पहचान, उसकी उम्र और घटना के पीछे की परिस्थितियों से जुड़ा विस्तृत विवरण सामने नहीं आया है।

  • खरगोन के नर्मदा घाट पर मिले सैकड़ों वोटर कार्ड, कांग्रेस का बड़ा आरोप, FIR नहीं हुई तो थाने के घेराव की चेतावनी

    खरगोन के नर्मदा घाट पर मिले सैकड़ों वोटर कार्ड, कांग्रेस का बड़ा आरोप, FIR नहीं हुई तो थाने के घेराव की चेतावनी


    खरगोन । मध्य प्रदेश के खरगोन जिले के मंडलेश्वर में नर्मदा नदी के किनारे 343 मतदाता पहचान पत्र मिलने के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गईNarmada Voter ID Cards, Khargone News, Madhya Pradesh Politics, Congress Protest, Election Investigation है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक ये पहचान पत्र इंदौर जिले की राऊ विधानसभा क्षेत्र के मतदाताओं से जुड़े बताए जा रहे हैं। एक ही स्थान पर इतनी बड़ी संख्या में वोटर कार्ड मिलने से निर्वाचन व्यवस्था और दस्तावेजों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे हैं। मामले को लेकर कांग्रेस ने पुलिस से शिकायत कर जांच कराने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। हालांकि अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि ये पहचान पत्र नर्मदा घाट तक कैसे पहुंचे और इन्हें वहां किसने छोड़ा।

    जानकारी के अनुसार रविवार को मंडलेश्वर के नर्मदा घाट पर सफाई अभियान चलाया जा रहा था। इसी दौरान सफाई कार्य में जुटे स्वयंसेवकों की नजर पानी में तैरते और नदी किनारे पड़े मतदाता पहचान पत्रों पर पड़ी। जब बड़ी संख्या में कार्ड मिलने की जानकारी सामने आई तो मामले ने गंभीर रूप ले लिया। बताया जा रहा है कि इन पहचान पत्रों पर इंदौर के तिलक नगर आस्था पैलेस और आसपास के क्षेत्रों के पते दर्ज हैं। इसके बाद संबंधित अधिकारियों को सूचना दी गई और दस्तावेजों की जांच की प्रक्रिया शुरू की गई।

    घटना की जानकारी मिलने पर राजस्व विभाग की टीम मौके पर पहुंची। अधिकारियों ने वहां मिले मतदाता पहचान पत्रों को अपने कब्जे में लिया और पंचनामा तैयार किया। अब इन दस्तावेजों की प्रामाणिकता उनकी संख्या और उनके नर्मदा घाट तक पहुंचने के कारणों की जांच की जा रही है। जांच में यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि कार्ड वास्तविक हैं या नहीं और यदि वे वास्तविक हैं तो एक साथ इतनी बड़ी संख्या में एक स्थान पर कैसे पहुंचे। फिलहाल इस मामले में किसी व्यक्ति की जिम्मेदारी तय होने की जानकारी सामने नहीं आई है।

    वोटर कार्ड मिलने के बाद जिला कांग्रेस अध्यक्ष रवि नाईक पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ मंडलेश्वर थाने पहुंचे। कांग्रेस नेताओं ने इस मामले को गंभीर बताते हुए मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। पार्टी ने सवाल उठाया कि इंदौर के मतदाताओं से जुड़े इतने सारे पहचान पत्र खरगोन जिले के नर्मदा घाट पर कैसे मिले। कांग्रेस का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि दस्तावेजों के स्रोत और उनके यहां पहुंचने की पूरी जानकारी सामने आ सके।

    कांग्रेस नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांग पर कार्रवाई नहीं की गई तो पार्टी कार्यकर्ता थाने का घेराव करेंगे। इसके साथ ही नदी में और भी मतदाता पहचान पत्र होने की आशंका जताते हुए व्यापक तलाशी कराने की मांग की गई है। पार्टी ने इस घटना को कथित वोट चोरी से जोड़कर सवाल उठाए हैं। हालांकि इन आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।

    वहीं पुलिस के अनुसार कांग्रेस की शिकायत प्राप्त हुई है और थाना प्रभारी को मामले की जांच के निर्देश दिए गए हैं। फिलहाल पूरे घटनाक्रम को लेकर कई सवाल बने हुए हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि मतदाता पहचान पत्र नदी किनारे कैसे पहुंचे और इन्हें वहां छोड़ने के पीछे क्या कारण था। जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो पाएगी। तब तक इस घटना को लेकर लगाए जा रहे आरोपों को जांच के आधार पर ही परखा जाना जरूरी है।

  • रीवा में आधी रात जल सत्याग्रह पर प्रशासन की कार्रवाई, तालाब से बाहर निकाले गए प्रदर्शनकारी, न्यूक्लियर प्लांट के विरोध में आंदोलन जारी

    रीवा में आधी रात जल सत्याग्रह पर प्रशासन की कार्रवाई, तालाब से बाहर निकाले गए प्रदर्शनकारी, न्यूक्लियर प्लांट के विरोध में आंदोलन जारी


    रीवा । मध्य प्रदेश के रीवा जिले के रोझौही में प्रस्तावित टाटा न्यूक्लियर पावर प्लांट को लेकर विरोध लगातार तेज होता जा रहा है। परियोजना के खिलाफ जल सत्याग्रह कर रहे आप नेता प्रमोद शर्मा और आदिवासी प्रदर्शनकारियों को मंगलवार रात करीब एक बजे प्रशासनिक टीम ने तालाब से बाहर निकलवाया। इस दौरान मौके पर लालगांव पुलिस भी मौजूद रही। लगातार आंदोलन और अनशन के कारण कुछ प्रदर्शनकारियों की तबीयत बिगड़ने के बाद प्रमोद शर्मा समेत चार लोगों को एंबुलेंस से संजय गांधी अस्पताल भेजा गया। हालांकि प्रदर्शनकारियों को तालाब से बाहर निकालने के बावजूद आंदोलन खत्म होने के संकेत नहीं मिले हैं। ग्रामीण अब भी परियोजना को रद्द करने की मांग पर अड़े हुए हैं।

    प्रशासन की ओर से प्रदर्शनकारियों को मौखिक आश्वासन दिया गया है कि अगले 10 दिनों तक रोझौही में प्रस्तावित परियोजना से जुड़ी कोई गतिविधि नहीं होगी। हालांकि इस आश्वासन के संबंध में लिखित आदेश जारी नहीं किया गया है। इसी बात को लेकर ग्रामीणों की चिंता बनी हुई है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि केवल मौखिक भरोसे से उनकी समस्याओं का समाधान नहीं होगा। जब तक परियोजना को लेकर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता और उनकी मांगों पर स्पष्ट जवाब नहीं मिलता तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

    जल सत्याग्रह में शामिल आप नेता प्रमोद शर्मा के साथ संदीप कोल रावेन्द्र कोल और बबली कोल की तबीयत बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल पहुंचाया गया। इससे पहले मदरी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के सीएचओ रविकांत साकेत ने प्रमोद शर्मा की स्वास्थ्य जांच की थी। जांच के दौरान उनका ब्लड प्रेशर और शुगर बढ़ा हुआ पाया गया। लगातार अनशन और पानी में बैठकर विरोध करने के कारण उनकी सेहत को लेकर चिंता जताई गई थी। इसके बाद उन्हें इलाज के लिए अस्पताल भेजने का निर्णय लिया गया।

    इस पूरे मामले में आदिवासी महिला विमला कोल की मौत के बाद ग्रामीणों का आक्रोश और बढ़ गया है। बताया गया है कि परियोजना के विरोध में जल सत्याग्रह कर रही विमला कोल की तबीयत बिगड़ गई थी और इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। इस घटना के बाद ग्रामीणों ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। प्रदर्शनकारियों ने मामले की निष्पक्ष जांच कराने और उनकी मांगों को गंभीरता से सुनने की अपील की है। ग्रामीणों का आरोप है कि उनकी चिंताओं का समय रहते समाधान नहीं किया गया।

    मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार भी इस आंदोलन के बीच रोझौही पहुंचे थे। उन्होंने आंदोलनकारी आदिवासियों और विमला कोल के परिजनों से मुलाकात की तथा परिवार को एक लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी। सिंघार ने प्रस्तावित परियोजना को लेकर ग्रामसभा की सहमति और अनापत्ति प्रमाणपत्र की प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उन्होंने विमला कोल की मौत की जांच की मांग भी की और प्रभावित ग्रामीणों की चिंताओं पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत बताई।

    ग्रामीणों को आशंका है कि प्रस्तावित न्यूक्लियर पावर प्लांट से खेती की जमीन जलस्रोत जंगल और पर्यावरण प्रभावित हो सकते हैं। उनका कहना है कि परियोजना के संभावित असर और भविष्य में स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों को लेकर स्पष्ट जानकारी दी जानी चाहिए। इससे पहले बोरिंग मशीन पहुंचने पर भी ग्रामीणों ने विरोध जताया था। रोझौही के अलावा सरई कला महुआ टोला मदरी और आसपास के गांवों के लोग भी परियोजना के खिलाफ आवाज उठा चुके हैं। फिलहाल प्रशासन के 10 दिन के मौखिक आश्वासन के बावजूद स्थिति पूरी तरह शांत नहीं हुई है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि प्रशासन ग्रामीणों की मांगों पर क्या कदम उठाता है और परियोजना को लेकर आगे क्या निर्णय लिया जाता है।

  • रीवा में इकलौते बेटे की मौत के बाद अस्पताल में हंगामा, परिजनों ने डॉक्टरों पर ओवरडोज दवा देने का लगाया आरोप

    रीवा में इकलौते बेटे की मौत के बाद अस्पताल में हंगामा, परिजनों ने डॉक्टरों पर ओवरडोज दवा देने का लगाया आरोप

    मध्य प्रदेश: के रीवा में एक युवक की मौत के बाद अस्पताल में परिजनों ने हंगामा किया। मृतक परिवार का इकलौता बेटा बताया जा रहा है। घटना के बाद परिजनों ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए डॉक्टरों पर अधिक मात्रा में दवा देने की बात कही। बेटे की मौत से परिवार में शोक का माहौल है। अस्पताल में हुए हंगामे के दौरान परिजनों ने इलाज के तरीके पर सवाल उठाए और मामले की जांच की मांग की।

    परिजनों ने डॉक्टरों पर लगाए गंभीर आरोप

    परिजनों का आरोप है कि इलाज के दौरान मरीज को दवा की अधिक मात्रा दी गई, जिसके बाद उसकी हालत बिगड़ गई। उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम को लेकर अस्पताल में नाराजगी जताई। परिवार का कहना है कि बेटे की मौत से उन्हें गहरा सदमा पहुंचा है। हालांकि, दवा की मात्रा, मरीज की स्थिति और मौत के वास्तविक कारणों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी के आधार पर नहीं की जा सकती।

    अस्पताल में हंगामे के बाद मामले को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। यह स्पष्ट होना जरूरी है कि मरीज को किस बीमारी के कारण भर्ती कराया गया था, उसका इलाज किस तरह किया जा रहा था और उसकी हालत में गिरावट कब आई। इन तथ्यों की जानकारी और मेडिकल रिकॉर्ड की जांच के बाद ही उपचार में किसी तरह की लापरवाही के आरोपों की पुष्टि हो सकती है।

    मौत के कारणों की जांच जरूरी

    इस तरह के मामले में मरीज के इलाज से जुड़े दस्तावेज, दी गई दवाओं की मात्रा, चिकित्सकीय निगरानी और मौत से संबंधित मेडिकल रिपोर्ट महत्वपूर्ण होती हैं। परिजनों की ओर से लगाए गए आरोपों की जांच के लिए संबंधित रिकॉर्ड की समीक्षा जरूरी होगी। केवल आरोपों के आधार पर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि मरीज की मौत ओवरडोज के कारण हुई।

    फिलहाल उपलब्ध जानकारी में मृतक की उम्र, अस्पताल का नाम, भर्ती होने की तारीख, इलाज करने वाले डॉक्टरों का पक्ष और पुलिस की कार्रवाई का विवरण सामने नहीं आया है। इन जानकारियों के बिना घटना के पूरे क्रम और जिम्मेदारी से जुड़े पहलुओं पर निश्चित रूप से कुछ कहना संभव नहीं है।

    मामले में अस्पताल प्रबंधन का पक्ष और संबंधित अधिकारियों की प्रतिक्रिया भी महत्वपूर्ण होगी। जांच में यह सामने आ सकेगा कि मरीज को कौन-सी दवाएं दी गई थीं और उपचार के दौरान निर्धारित चिकित्सकीय प्रक्रिया का पालन किया गया या नहीं। परिजनों के आरोपों की पुष्टि या खंडन जांच के निष्कर्षों के आधार पर ही किया जा सकेगा।

  • ना बाप बड़ा ना भैया सबसे बड़ा रुपैया, सीएम मोहन यादव के बयान ने खींचा ध्यान, शहडोल में लाखों हितग्राहियों को मिली सौगात

    ना बाप बड़ा ना भैया सबसे बड़ा रुपैया, सीएम मोहन यादव के बयान ने खींचा ध्यान, शहडोल में लाखों हितग्राहियों को मिली सौगात

    मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का शहडोल में दिया गया बयान चर्चा का विषय बन गया है। तेंदूपत्ता संग्राहकों को बोनस वितरण कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि ना बाप बड़ा ना भैया सबसे बड़ा रुपैया। उनके इस कथन ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया। हालांकि मुख्यमंत्री ने इस बात को लोगों को उनका अधिकार और सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने के संदर्भ में रखा। शहडोल के बाणगंगा मेला मैदान में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने तेंदूपत्ता संग्राहकों के खातों में करोड़ों रुपये की बोनस राशि अंतरित की। इसके साथ ही क्षेत्र में विकास कार्यों की सौगात और विभिन्न योजनाओं से जुड़े विषयों पर भी चर्चा की।

    मुख्यमंत्री ने सिंगल क्लिक के माध्यम से तेंदूपत्ता संग्रहण से जुड़े हितग्राहियों के खातों में बोनस की राशि भेजी। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार छह वन मंडलों और पांच जिलों के 8.66 लाख से अधिक हितग्राहियों को करीब 22.85 करोड़ रुपये की राशि वितरित की गई। कुछ रिपोर्टों में यह राशि 22.89 करोड़ रुपये से अधिक बताई गई है। इस सहायता का उद्देश्य तेंदूपत्ता संग्रहण से जुड़े परिवारों को आर्थिक लाभ पहुंचाना है। वन उपज पर निर्भर रहने वाले अनेक परिवारों के लिए तेंदूपत्ता संग्रहण आय का महत्वपूर्ण साधन है। ऐसे में बोनस की राशि उनके घरेलू खर्च और आर्थिक जरूरतों को पूरा करने में मददगार हो सकती है।

    कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का प्रयास है कि प्रत्येक पात्र व्यक्ति तक उसका हक पहुंचे। इसी संदर्भ में उन्होंने अपने बयान के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की कि सरकारी योजनाओं का लाभ वास्तविक हितग्राहियों तक पहुंचना चाहिए। उनके संबोधन में जनकल्याण और विकास से जुड़े मुद्दे प्रमुख रहे। उन्होंने प्रदेश में विकास कार्यों को गति देने और जनता के हित में योजनाओं को लागू करने की सरकार की प्रतिबद्धता भी दोहराई। बयान का एक हिस्सा राजनीतिक चर्चा का विषय बना लेकिन कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य तेंदूपत्ता संग्राहकों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना और क्षेत्र में विकास गतिविधियों को आगे बढ़ाना था।

    शहडोल दौरे के दौरान मुख्यमंत्री ने विकास कार्यों से जुड़ी कई गतिविधियों में भी हिस्सा लिया। रिपोर्टों के मुताबिक उन्होंने क्षेत्र में 134 विकास कार्यों के लोकार्पण और भूमिपूजन से संबंधित कार्यक्रम में भाग लिया। इन कार्यों की कुल लागत को लेकर अलग-अलग रिपोर्टों में आंकड़ों में अंतर है। एक रिपोर्ट में करीब 461.83 करोड़ रुपये के कार्यों का उल्लेख किया गया है। इसके अलावा क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा देने और रोजगार के अवसर तैयार करने से जुड़े प्रस्तावों पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने शहडोल में इस्पात फैक्ट्री स्थापित करने की घोषणा की और कहा कि इससे रोजगार के अवसर बढ़ने की उम्मीद है। प्रस्तावित परियोजना की समयसीमा और अन्य विस्तृत जानकारी सामने आने के बाद इसकी प्रगति का आकलन किया जा सकेगा।

    मुख्यमंत्री ने शिक्षा और जनकल्याण से जुड़े मुद्दों पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कांग्रेस के शासनकाल की व्यवस्थाओं पर सवाल उठाते हुए वर्तमान सरकार की योजनाओं का उल्लेख किया। अपने संबोधन में उन्होंने विद्यार्थियों को लैपटॉप और स्कूटी उपलब्ध कराने जैसे कदमों का जिक्र किया। राजनीतिक टिप्पणी के साथ उन्होंने सरकार की प्राथमिकताओं को जनता तक पहुंचाने की बात कही। कार्यक्रम में मौजूद जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के बीच बोनस वितरण तथा विकास योजनाओं से जुड़े विषय भी चर्चा में रहे।

    शहडोल का यह कार्यक्रम तेंदूपत्ता संग्राहकों को आर्थिक सहायता देने के साथ क्षेत्रीय विकास की योजनाओं को सामने रखने का अवसर बना। मुख्यमंत्री का बयान सुर्खियों में जरूर आया लेकिन हितग्राहियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण पहलू उनके खातों में पहुंची बोनस राशि है। अब इन योजनाओं और घोषित परियोजनाओं का लाभ जमीन पर किस तरह पहुंचता है और प्रस्तावित विकास कार्य कितनी तेजी से आगे बढ़ते हैं इस पर लोगों की नजर रहेगी।

  • मध्यप्रदेश शासन का नया आदेश जारी, 5 IAS अधिकारियों की पदस्थापना बदली, मंत्रालय से लेकर जिलों तक नई जिम्मेदारियां

    मध्यप्रदेश शासन का नया आदेश जारी, 5 IAS अधिकारियों की पदस्थापना बदली, मंत्रालय से लेकर जिलों तक नई जिम्मेदारियां


    मध्यप्रदेश । मध्यप्रदेश में प्रशासनिक स्तर पर महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है। राज्य शासन के सामान्य प्रशासन विभाग ने 27 अक्टूबर 2026 को आदेश जारी कर भारतीय प्रशासनिक सेवा के पांच अधिकारियों की नई पदस्थापना की है। इस आदेश के तहत सागर देवास और सिवनी जिलों के कलेक्टरों की जिम्मेदारियों में बदलाव किया गया है। इसके साथ ही मध्यप्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम और मंत्रालय के सामान्य प्रशासन विभाग में भी अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। शासन की ओर से जारी आदेश में इन पदस्थापनाओं को आगामी आदेश तक अस्थायी रूप से प्रभावी बताया गया है। इस फेरबदल के बाद संबंधित अधिकारियों को अपनी नई जिम्मेदारियों के अनुसार कार्यभार संभालना होगा।

    आदेश के अनुसार वर्ष 2012 बैच की आईएएस अधिकारी प्रतिमा पाल को सागर कलेक्टर के पद से स्थानांतरित कर मध्यप्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम भोपाल का प्रबंध संचालक नियुक्त किया गया है। उनके स्थान पर वर्ष 2014 बैच के अधिकारी दिलीप कुमार यादव को सागर जिले का नया कलेक्टर बनाया गया है। दिलीप कुमार यादव इससे पहले मध्यप्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम में प्रबंध संचालक की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। अब उन्हें सागर जिले का प्रशासनिक नेतृत्व सौंपा गया है। जिले में सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन राजस्व संबंधी कार्यों और प्रशासनिक व्यवस्थाओं के संचालन की जिम्मेदारी उनके कार्यक्षेत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा होगी।

    इसी फेरबदल में देवास जिले की प्रशासनिक कमान भी बदली गई है। वर्ष 2014 बैच की आईएएस अधिकारी नेहा मीना को सिवनी कलेक्टर के पद से स्थानांतरित कर देवास जिले का कलेक्टर नियुक्त किया गया है। नेहा मीना के सामने अब देवास जिले में प्रशासनिक व्यवस्थाओं को सुचारु बनाए रखने और शासन की योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू कराने की जिम्मेदारी होगी। वहीं देवास में कलेक्टर के पद पर कार्यरत वर्ष 2015 बैच के अधिकारी ऋतुराज को मंत्रालय भोपाल में सामान्य प्रशासन विभाग का उप सचिव बनाया गया है। जिला प्रशासन से मंत्रालय में नई जिम्मेदारी मिलने के बाद उनके कार्यक्षेत्र में बदलाव होगा।

    सिवनी जिले में भी नए कलेक्टर की नियुक्ति की गई है। वर्ष 2017 बैच की आईएएस अधिकारी अंजू अरुण कुमार को पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग में उप सचिव के पद से स्थानांतरित कर सिवनी जिले का कलेक्टर बनाया गया है। अब वे जिले की प्रशासनिक व्यवस्था का संचालन करेंगी। उनके सामने ग्रामीण विकास से जुड़ी योजनाओं के क्रियान्वयन और सरकारी सेवाओं को आम नागरिकों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने जैसी जिम्मेदारियां रहेंगी। इस बदलाव के बाद सिवनी जिले में प्रशासनिक नेतृत्व की नई व्यवस्था लागू होगी।

    सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से जारी आदेश पर मध्यप्रदेश शासन के मुख्य सचिव अशोक वर्णवाल के हस्ताक्षर हैं। आदेश की प्रतिलिपि भारत सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग सहित राज्य के संबंधित विभागों और अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के लिए भेजी गई है। इस प्रशासनिक फेरबदल में तीन जिलों के कलेक्टरों की जिम्मेदारियां बदली गई हैं जबकि दो अधिकारियों को मंत्रालय और पर्यटन विकास निगम में नई पदस्थापना दी गई है। अब संबंधित अधिकारियों के कार्यभार ग्रहण करने और अपने नए कार्यक्षेत्र में प्रशासनिक प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने पर नजर रहेगी।

  • खाद्य सुरक्षा पर सवाल, देश में 1.85 लाख नमूने फेल, राजस्थान में सिर्फ 31 मामलों में दोषियों को सजा

    खाद्य सुरक्षा पर सवाल, देश में 1.85 लाख नमूने फेल, राजस्थान में सिर्फ 31 मामलों में दोषियों को सजा

    नई दिल्ली ।देश में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और मिलावट रोकने के लिए की जा रही कार्रवाई के आंकड़े खाद्य सुरक्षा व्यवस्था के सामने बड़ी चुनौती दिखाते हैं। वर्ष 2025-26 में देशभर में 2,23,808 खाद्य नमूनों की जांच की गई। इनमें 40,023 नमूने तय मानकों पर खरे नहीं उतरे। इसके बावजूद दोषियों को सजा मिलने वाले मामलों की संख्या 1,918 रही। यानी जांच में खामियां सामने आने के मुकाबले सजा तक पहुंचने वाले मामले काफी कम हैं।

    पिछले पांच वर्षों के आंकड़े भी इसी स्थिति की ओर इशारा करते हैं। वर्ष 2021-22 से 2025-26 के बीच देशभर में 8.86 लाख खाद्य नमूनों की जांच हुई। इनमें 1,85,780 नमूने फेल पाए गए। इन मामलों में 1,39,507 का निपटारा जुर्माना लगाकर किया गया, जबकि केवल 6,203 मामलों में दोषियों को सजा सुनाई गई। इससे स्पष्ट होता है कि खाद्य सुरक्षा नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई के अलग-अलग परिणाम सामने आए हैं।

    सजा की दर में पिछले वर्षों के दौरान कुछ सुधार जरूर हुआ है, लेकिन यह अब भी पांच प्रतिशत से कम है। वर्ष 2021-22 में 32,935 नमूने फेल हुए और 671 मामलों में सजा हुई। अगले वर्ष 44,626 नमूनों के फेल होने पर 1,188 मामलों में दोषियों को सजा मिली। वर्ष 2023-24 में सजा की दर 3.4 प्रतिशत और 2024-25 में 3.7 प्रतिशत रही। वर्ष 2025-26 में यह बढ़कर 4.8 प्रतिशत हो गई।

    राजस्थान के आंकड़े विशेष रूप से ध्यान खींचते हैं। वर्ष 2025-26 में राज्य में 17,325 खाद्य नमूनों की जांच की गई, जिनमें 4,594 नमूने फेल पाए गए। यह कुल जांचे गए नमूनों का 26.5 प्रतिशत है। फेल नमूनों की संख्या के मामले में राजस्थान देश में दूसरे स्थान पर रहा। हालांकि, राज्य में केवल 31 मामलों में दोषियों को सजा मिली। फेल नमूनों की संख्या के मुकाबले यह दर एक प्रतिशत से भी कम है।

    मध्य प्रदेश में भी स्थिति में सुधार की जरूरत दिखाई देती है। वर्ष 2025-26 के दौरान राज्य में फेल हुए खाद्य नमूनों के करीब चार प्रतिशत मामलों में ही सजा हुई। यह राष्ट्रीय औसत 4.8 प्रतिशत से कम है। ऐसे में राज्य में खाद्य सुरक्षा से जुड़े मामलों की जांच, कानूनी प्रक्रिया और दोषियों को सजा दिलाने की व्यवस्था पर ध्यान देना महत्वपूर्ण है।

    छत्तीसगढ़ में इसी अवधि के दौरान 2,065 खाद्य नमूनों की जांच हुई। इनमें 214 नमूने फेल पाए गए, जो कुल नमूनों का लगभग 10.4 प्रतिशत है। हालांकि, नमूनों के फेल होने की दर अपेक्षाकृत कम होने के बावजूद खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए नियमित निगरानी आवश्यक बनी रहती है।

    दूसरी ओर, उत्तर प्रदेश में खाद्य नमूनों के फेल होने का आंकड़ा काफी अधिक रहा। वर्ष 2025-26 में वहां 39,519 नमूनों की जांच की गई, जिनमें 20,427 फेल मिले। यह कुल नमूनों का 51.7 प्रतिशत है। इसके बावजूद राज्य में 342 मामलों में ही सजा हुई। हरियाणा में 31 प्रतिशत और झारखंड में 27.8 प्रतिशत नमूने फेल हुए। महाराष्ट्र में यह आंकड़ा 17.4 प्रतिशत और पंजाब में 13.2 प्रतिशत रहा।

    कुछ राज्यों में दोषियों को सजा मिलने की दर बेहतर दर्ज की गई। तमिलनाडु में 3,984 फेल नमूनों के मुकाबले 857 मामलों में सजा हुई, जबकि केरल में 1,863 फेल नमूनों के मुकाबले 330 मामलों में दोषियों को सजा मिली। इसके विपरीत, पश्चिम बंगाल, तेलंगाना, झारखंड, गोवा, असम, बिहार और पुडुचेरी में दिए गए आंकड़ों के अनुसार किसी मामले में सजा दर्ज नहीं हुई।

    दूध और डेयरी उत्पादों की जांच भी चिंता का विषय है। वर्ष 2025-26 में इनके 39,351 नमूनों की जांच की गई, जिनमें 14,668 फेल मिले। यानी लगभग 37.3 प्रतिशत नमूने तय मानकों पर खरे नहीं उतरे। दूध रोजमर्रा के इस्तेमाल की वस्तु है, इसलिए इसकी गुणवत्ता सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है।

    खाद्य सुरक्षा कानून, 2006 के तहत नियमों का उल्लंघन करने पर जुर्माने और जेल का प्रावधान है। असुरक्षित खाद्य पदार्थ से गंभीर नुकसान होने पर छह साल तक की कैद और पांच लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। यदि असुरक्षित भोजन से किसी की मौत होती है, तो उम्रकैद और कम से कम 10 लाख रुपये के जुर्माने का प्रावधान है।

    हालांकि, हर फेल नमूना मिलावट का मामला नहीं होता। इसमें असुरक्षित खाद्य पदार्थ, निर्धारित गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरने वाले उत्पाद और गलत लेबल वाले सामान भी शामिल हो सकते हैं। सरकार के मुताबिक, करीब 98 प्रतिशत खाद्य कारोबारी राज्य सरकारों के अधिकार क्षेत्र में आते हैं।

    खाद्य पदार्थों की निगरानी के लिए वर्ष 2025-26 में देशभर में 5,20,566 निरीक्षण किए गए। वर्ष 2024-25 में 4,01,391 और 2023-24 में 3,57,072 निरीक्षण हुए थे। पिछले पांच वर्षों में 4,461 लाइसेंस निलंबित और 11,493 लाइसेंस रद्द किए गए। इन आंकड़ों के बीच सबसे अहम चुनौती यह है कि जांच में खामी मिलने के बाद मामलों का प्रभावी निपटारा हो और नियम तोड़ने वालों के खिलाफ समय पर कानूनी कार्रवाई हो।

  • ट्विशा शर्मा मौत मामले में पूर्व जज गिरिबाला सिंह की जमानत पर हाईकोर्ट का फैसला सुरक्षित, सीबीआई ने उठाए साक्ष्यों से जुड़े सवाल

    ट्विशा शर्मा मौत मामले में पूर्व जज गिरिबाला सिंह की जमानत पर हाईकोर्ट का फैसला सुरक्षित, सीबीआई ने उठाए साक्ष्यों से जुड़े सवाल

    मध्य प्रदेश: हाईकोर्ट में ट्विशा शर्मा की मौत के मामले में आरोपी पूर्व जिला एवं सत्र न्यायाधीश गिरिबाला सिंह की जमानत याचिका पर सुनवाई हुई। सीबीआई और राज्य सरकार ने उनकी जमानत का विरोध करते हुए जांच में सहयोग नहीं करने और साक्ष्यों को प्रभावित किए जाने की आशंका जताई। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट की एकलपीठ ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। फिलहाल गिरिबाला सिंह को जमानत मिलेगी या नहीं, इस पर अदालत का अंतिम निर्णय आना बाकी है।

    सुनवाई के दौरान सरकारी पक्ष ने दलील दी कि जांच के दौरान गिरिबाला सिंह ने अपेक्षित सहयोग नहीं किया। यह आरोप भी लगाया गया कि साक्ष्यों को प्रभावित करने की कोशिश की गई थी। सीबीआई और राज्य सरकार ने आशंका जताई कि यदि उन्हें जमानत मिलती है, तो मामले के गवाहों और साक्ष्यों पर असर पड़ सकता है। इसी आधार पर सरकारी पक्ष ने याचिका खारिज करने की मांग की।

    सीबीआई की ओर से अदालत को बताया गया कि जांच के दौरान जब्त किए गए लैपटॉप, सीसीटीवी रिकॉर्डिंग और अन्य तकनीकी साक्ष्यों से संबंधित रिपोर्ट अभी प्राप्त नहीं हुई हैं। सरकारी पक्ष के अनुसार, इन रिपोर्टों से जांच को आगे बढ़ाने और मामले से जुड़े तथ्यों का आकलन करने में मदद मिल सकती है। रिपोर्ट लंबित होने का मुद्दा भी जमानत का विरोध करते समय उठाया गया।

    वहीं, गिरिबाला सिंह की ओर से पेश बचाव पक्ष ने जमानत दिए जाने की मांग की। उनके वकील ने दलील दी कि आरोपी के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य उपलब्ध नहीं हैं। बचाव पक्ष ने उनकी उम्र, बीमारियों और करीब पांच महीने से न्यायिक हिरासत में रहने का हवाला भी दिया। इसके अलावा यह तर्क रखा गया कि सीबीआई ने उनके खिलाफ दहेज अधिनियम की धाराओं में चालान पेश नहीं किया है। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया।

    यह मामला भोपाल की पूर्व जिला एवं सत्र न्यायाधीश गिरिबाला सिंह की बहू और मॉडल ट्विशा शर्मा की मौत से जुड़ा है। ट्विशा ने 12 मई को फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। इसके बाद पुलिस ने गिरिबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ सिंह के खिलाफ दहेज हत्या तथा दहेज अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया था। घटना के बाद मामले की जांच और जमानत को लेकर कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ी।

    गिरिबाला सिंह को 15 मई को भोपाल की जिला एवं सत्र अदालत से अग्रिम जमानत मिली थी। इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी। मामले में दोबारा पोस्टमार्टम कराने की मांग भी उठी। इसके बाद हाईकोर्ट ने दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान की टीम से दोबारा पोस्टमार्टम कराने के निर्देश दिए थे। 27 मई को हाईकोर्ट ने गिरिबाला सिंह को मिली अग्रिम जमानत निरस्त कर दी थी। इसके बाद राज्य सरकार ने मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी।

    मामले में ट्विशा शर्मा के पिता नवनिधि शर्मा ने सुनवाई मध्य प्रदेश से बाहर कराने की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। इस याचिका में सीबीआई, गिरिबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ सिंह को प्रतिवादी बनाया गया था। उपलब्ध विवरण के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने गिरिबाला सिंह की जमानत याचिका पर दो सप्ताह के भीतर सुनवाई करने के निर्देश दिए थे।

    अब हाईकोर्ट के फैसले पर निगाहें टिकी हैं। जमानत के पक्ष में बचाव पक्ष ने स्वास्थ्य, उम्र और हिरासत की अवधि से जुड़े तर्क रखे हैं, जबकि सीबीआई और राज्य सरकार ने जांच की स्थिति तथा साक्ष्यों को प्रभावित किए जाने की आशंका के आधार पर विरोध किया है। अदालत का अंतिम आदेश आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि गिरिबाला सिंह को जमानत मिलती है या उन्हें न्यायिक हिरासत में रहना होगा।