Author: bharati

  • चार दिवसीय फ्रांस दौरे पर रवाना हुईं निर्मला सीतारमण, द्विपक्षीय साझेदारी पर होगा फोकस

    चार दिवसीय फ्रांस दौरे पर रवाना हुईं निर्मला सीतारमण, द्विपक्षीय साझेदारी पर होगा फोकस


    नई दिल्ली। केंद्रीय वित्त एवं कॉर्पोरेट मामलों की मंत्री निर्मला सीतारमण चार दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर बुधवार को फ्रांस के लिए रवाना हो गईं। इस दौरे का उद्देश्य भारत और फ्रांस के बीच रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करना, आर्थिक सहयोग को नई गति देना तथा निवेश, प्रौद्योगिकी और नवाचार के क्षेत्र में संबंधों को और विस्तार देना है।

    यात्रा के दौरान वित्त मंत्री कई उच्चस्तरीय द्विपक्षीय बैठकों में भाग लेंगी। इस दौरे का प्रमुख आकर्षण भारत-फ्रांस आर्थिक एवं वित्तीय संवाद (Economic and Financial Dialogue-EFD) होगा, जिसकी सह-अध्यक्षता वह फ्रांस के अर्थव्यवस्था, वित्त तथा औद्योगिक एवं ऊर्जा संप्रभुता मंत्री रोलैंड लेस्क्योर के साथ ऐक्स-एन-प्रोवेंस में करेंगी। इस बैठक में दोनों देश आर्थिक सहयोग के नए अवसरों और द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने पर विचार-विमर्श करेंगे।

    निर्मला सीतारमण वैश्विक कंपनियों के प्रमुख अधिकारियों (सीईओ) के साथ अलग-अलग बैठकें भी करेंगी। इसके अलावा वह प्रमुख उद्योगपतियों के साथ आयोजित एक राउंडटेबल चर्चा में शामिल होकर भारत की मजबूत आर्थिक स्थिति, जारी संरचनात्मक सुधारों, निवेश की संभावनाओं और दीर्घकालिक विकास के अवसरों को प्रस्तुत करेंगी।

    वित्त मंत्रालय के अनुसार, वित्त मंत्री यूरोप के प्रतिष्ठित वार्षिक मंच ‘लेस रेन्कॉन्ट्रेस इकोनॉमिक्स डी’एक्स-एन-प्रोवेंस’ में “नए मध्यम वर्ग के विकास को कैसे बढ़ावा दें” विषय पर आयोजित पैनल चर्चा में भी हिस्सा लेंगी। इस सम्मेलन में दुनिया भर के नीति-निर्माता, केंद्रीय बैंक प्रमुख, उद्योग जगत के प्रतिनिधि, अर्थशास्त्री और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के विशेषज्ञ वैश्विक आर्थिक चुनौतियों पर विचार साझा करेंगे।

    अपने दौरे के दौरान सीतारमण फ्रांस के कैडाराश स्थित इंटरनेशनल थर्मोन्यूक्लियर एक्सपेरिमेंटल रिएक्टर (ITER) परियोजना का भी दौरा करेंगी। यह परमाणु संलयन (न्यूक्लियर फ्यूजन) ऊर्जा से जुड़ी दुनिया की सबसे बड़ी अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक परियोजनाओं में शामिल है, जिसमें भारत और फ्रांस सहित 30 से अधिक देशों की भागीदारी है।

    इसके अलावा वित्त मंत्री ‘कैंपस साइबर’ का भी दौरा करेंगी, जो फ्रांस में साइबर सुरक्षा, अनुसंधान, नवाचार और कौशल विकास का प्रमुख केंद्र है। इस यात्रा के जरिए दोनों देशों के बीच साइबर सुरक्षा, डिजिटल अर्थव्यवस्था और तकनीकी सहयोग को और मजबूत करने की दिशा में अनुभवों एवं सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों के आदान-प्रदान की उम्मीद है।

    यात्रा के दौरान सीतारमण प्रोवेंस-आल्प्स-कोटे डी’अजूर (PACA) क्षेत्र के अध्यक्ष रेनॉड म्यूसेलियर से भी मुलाकात करेंगी। इस बैठक में निवेश, स्वच्छ ऊर्जा, नवाचार, प्रौद्योगिकी और क्षेत्रीय आर्थिक साझेदारी जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा होगी।

    अपने चार दिवसीय दौरे के अंतिम चरण में वित्त मंत्री फ्रांस में रह रहे भारतीय समुदाय के सदस्यों के साथ आयोजित एक सामुदायिक कार्यक्रम में भी हिस्सा लेंगी।

  • प्रीमियम कोच की व्यवस्था पर सवाल, संपर्क क्रांति एक्सप्रेस में गंदगी और चूहों से परेशान यात्रियों ने रेल मंत्री तक पहुंचाई शिकायत

    प्रीमियम कोच की व्यवस्था पर सवाल, संपर्क क्रांति एक्सप्रेस में गंदगी और चूहों से परेशान यात्रियों ने रेल मंत्री तक पहुंचाई शिकायत

    नई दिल्ली । भारतीय रेलवे की प्रीमियम ट्रेनों में शामिल कर्नाटका संपर्क क्रांति एक्सप्रेस की एसी फर्स्ट क्लास में यात्रा कर रहे यात्रियों ने साफ-सफाई और ऑनबोर्ड सेवाओं को लेकर गंभीर शिकायत दर्ज कराई है। यात्रियों का आरोप है कि भोपाल से तमिलनाडु की ओर यात्रा के दौरान उनके केबिन में पूरी रात चूहे और कॉकरोच घूमते रहे। उनका कहना है कि बार-बार शिकायत करने के बावजूद यात्रा के दौरान समस्या का प्रभावी समाधान नहीं किया गया, जिससे पूरी रात उन्हें असुविधा का सामना करना पड़ा।

    यात्रियों के अनुसार एसी फर्स्ट क्लास के केबिन में चूहे और कॉकरोच लगातार दिखाई दे रहे थे। उनका कहना है कि प्रीमियम श्रेणी का टिकट लेने के बावजूद उन्हें अपेक्षित सुविधाएं नहीं मिलीं। उन्होंने ट्रेन के स्टाफ को कई बार स्थिति से अवगत कराया, लेकिन समस्या दूर करने के बजाय उन्हें संतोषजनक जवाब भी नहीं मिला। यात्रियों का आरोप है कि कुछ कर्मचारियों ने चूहों की मौजूदगी के लिए यात्रियों के भोजन को ही कारण बता दिया।

    यात्रा कर रहे अनिल तिवारी ने बताया कि उन्होंने ट्रेन स्टाफ से कई बार शिकायत की, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उनका कहना है कि यदि प्रीमियम श्रेणी के कोच की स्थिति ऐसी है तो यात्रियों का रेलवे की सेवाओं पर भरोसा प्रभावित होना स्वाभाविक है। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को टैग करते हुए मामले की जानकारी भी साझा की और कोच की स्वच्छता व्यवस्था पर सवाल उठाए।

    दूसरे यात्री शिवांश तिवारी ने दावा किया कि पूरी रात उनका परिवार आराम से सो नहीं सका। उनके अनुसार चूहे लगातार सीटों के आसपास घूमते रहे, जबकि कॉकरोच केबिन में दिखाई देते रहे। उन्होंने बताया कि रेलवे हेल्पलाइन 139 पर शिकायत दर्ज कराने के बाद भी मौके पर केवल एक रैट ट्रैप रखा गया, जिससे तत्काल राहत नहीं मिल सकी। यात्रियों का कहना है कि शिकायत दर्ज होने के बावजूद यात्रा के दौरान स्थिति में कोई उल्लेखनीय सुधार नहीं हुआ।

    सोशल मीडिया पर शिकायत सामने आने के बाद रेलवे की ओर से संबंधित अधिकारियों को मामले की जानकारी भेजने और पीएनआर विवरण उपलब्ध कराने की प्रक्रिया शुरू की गई। हालांकि यात्रियों का कहना है कि यह कार्रवाई यात्रा समाप्त होने तक उनके लिए व्यावहारिक राहत साबित नहीं हुई। उनका मानना है कि शिकायत मिलने के बाद ऑनबोर्ड टीम को तत्काल प्रभावी कदम उठाने चाहिए थे।

    मामले पर भोपाल रेल मंडल के प्रवक्ता ने कहा कि शिकायत को गंभीरता से लिया गया है और पूरे घटनाक्रम की जांच कराई जाएगी। उन्होंने आश्वासन दिया कि यदि कहीं भी साफ-सफाई या रखरखाव में कमी पाई जाती है तो आवश्यक कार्रवाई की जाएगी, ताकि भविष्य में यात्रियों को ऐसी परेशानी का सामना न करना पड़े।

    इस घटना के बाद भारतीय रेलवे की प्रीमियम श्रेणी की सेवाओं और स्वच्छता व्यवस्था को लेकर नए सवाल खड़े हो गए हैं। यात्रियों का कहना है कि प्रथम श्रेणी के कोच में उच्च स्तर की सुविधाओं की अपेक्षा की जाती है। ऐसे में यदि शिकायतों के बावजूद तत्काल समाधान नहीं मिलता है तो इससे न केवल यात्रियों का अनुभव प्रभावित होता है, बल्कि रेलवे की सेवा गुणवत्ता पर भी प्रश्नचिह्न लगते हैं। अब जांच रिपोर्ट के बाद यह स्पष्ट होगा कि कोच में स्वच्छता और रखरखाव संबंधी दावों के अनुरूप व्यवस्थाएं थीं या नहीं।

  • डेढ़ साल के बच्चे की आंखों की रोशनी पर जांच रिपोर्ट, नोजल ड्रॉप से संक्रमण की आशंका खारिज; एम्स भोपाल में होगा कॉर्निया ट्रांसप्लांट

    डेढ़ साल के बच्चे की आंखों की रोशनी पर जांच रिपोर्ट, नोजल ड्रॉप से संक्रमण की आशंका खारिज; एम्स भोपाल में होगा कॉर्निया ट्रांसप्लांट

    मध्य प्रदेश  सागर जिले के बंडा सिविल अस्पताल में इलाज के बाद डेढ़ साल के बच्चे की आंखों की रोशनी प्रभावित होने के मामले में स्वास्थ्य विभाग की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट सामने आ गई है। रिपोर्ट में यह निष्कर्ष निकाला गया है कि बच्चे की आंखों की गंभीर समस्या का कारण अस्पताल में डाली गई कथित नोजल ड्रॉप नहीं, बल्कि कुपोषण और विटामिन-ए की कमी से विकसित हुए कॉर्नियल अल्सर हैं। हालांकि, जिस नोजल ड्रॉप का उल्लेख परिजनों ने किया है, वह बच्चे तक कैसे पहुंची, इसकी जांच अभी जारी है।

    स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार बच्चे का उपचार फिलहाल भोपाल स्थित एम्स में चल रहा है, जहां उसकी आंखों की स्थिति को देखते हुए कॉर्निया ट्रांसप्लांट की तैयारी की जा रही है। चिकित्सकों का कहना है कि बच्चे के उपचार के लिए आवश्यक सभी चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी और शासन स्तर पर भी हरसंभव सहायता दी जाएगी।

    जांच रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया गया है कि जिस बैच की नोजल ड्रॉप को लेकर आरोप लगाए गए थे, वह अस्पताल के उपलब्ध स्टॉक में मौजूद ही नहीं थी। विशेषज्ञों ने बताया कि सामान्य सलाइन आधारित नोजल ड्रॉप से आंखों की स्थायी रोशनी जाना चिकित्सकीय दृष्टि से संभव नहीं माना जाता। ऐसी स्थिति में अधिकतम अस्थायी जलन या हल्की असुविधा हो सकती है, लेकिन स्थायी दृष्टि हानि का कारण नहीं बनती।

    यह मामला तब सामने आया था जब भूसा कमलपुर निवासी इंद्राज विश्वकर्मा अपने डेढ़ वर्षीय पुत्र विनय को सर्दी और आंखों में लालिमा की शिकायत के चलते बंडा सिविल अस्पताल लेकर पहुंचे थे। परिजनों का आरोप था कि चिकित्सकीय पर्चे के आधार पर आई ड्रॉप की जगह उन्हें नोजल ड्रॉप दे दी गई, जिसे आंखों में डालने के बाद बच्चे की आंखों में तेज जलन हुई और बाद में उसकी रोशनी चली गई। हालत बिगड़ने पर बच्चे को पहले सागर और फिर भोपाल एम्स रेफर किया गया।

    परिजनों का यह भी दावा रहा कि भोपाल में चिकित्सकीय परीक्षण के दौरान उन्हें इलाज में लापरवाही और संक्रमण की आशंका के बारे में बताया गया था। इसके बाद मामले ने गंभीर रूप ले लिया और परिवार ने अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ शिकायत दर्ज कर निष्पक्ष जांच तथा जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग की।

    मामले की जांच के लिए स्वास्थ्य विभाग ने तीन सदस्यीय विशेषज्ञ समिति गठित की थी। टीम ने दो दिनों तक अस्पताल के रिकॉर्ड, दवा वितरण प्रणाली, चिकित्सकीय दस्तावेज और संबंधित कर्मचारियों से पूछताछ के आधार पर प्रारंभिक रिपोर्ट तैयार की। जांच में विशेषज्ञों ने बच्चे की आंखों की समस्या को विटामिन-ए की कमी से उत्पन्न कॉर्नियल अल्सर से जुड़ा माना है, जो गंभीर कुपोषण की स्थिति में विकसित हो सकता है।

    हालांकि अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि मामले की जांच अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है। विशेष रूप से इस पहलू की पड़ताल की जा रही है कि परिजनों के पास कथित नोजल ड्रॉप कैसे पहुंची और उसका स्रोत क्या था। जांच पूरी होने के बाद यदि किसी स्तर पर लापरवाही या अनियमितता सामने आती है तो नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल बच्चे के उपचार और दृष्टि बचाने के लिए विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में चिकित्सा जारी है।

  • अडाणी ग्रीन एनर्जी ने रचा इतिहास, 20 गीगावाट क्षमता हासिल करने वाली बनी देश की पहली कंपनी

    अडाणी ग्रीन एनर्जी ने रचा इतिहास, 20 गीगावाट क्षमता हासिल करने वाली बनी देश की पहली कंपनी


    नई दिल्ली। अडाणी समूह की कंपनी अडाणी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड (AGEL) ने नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में नया कीर्तिमान स्थापित करते हुए 20 गीगावाट (GW) परिचालन क्षमता का आंकड़ा पार कर लिया है। इसके साथ ही कंपनी यह उपलब्धि हासिल करने वाली भारत की पहली कंपनी बन गई है। खास बात यह है कि इस क्षमता का अधिकांश हिस्सा नए ग्रीनफील्ड परियोजनाओं के माध्यम से विकसित किया गया है।

    कंपनी के अनुसार, वर्तमान में एजीईएल हर वर्ष 52 अरब यूनिट से अधिक स्वच्छ बिजली का उत्पादन कर रही है, जो भारत की कुल बिजली खपत का लगभग तीन प्रतिशत है। यह उत्पादन न्यूयॉर्क शहर की सालभर की बिजली जरूरत या मुंबई और नई दिल्ली की संयुक्त वार्षिक बिजली खपत के लगभग बराबर माना जा रहा है।

    बुधवार को जारी बयान में कंपनी ने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान उसने 5,051 मेगावाट नई नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता जोड़ी। कंपनी का दावा है कि चीन के बाहर किसी भी ऊर्जा कंपनी द्वारा एक वर्ष में जोड़ी गई यह सबसे बड़ी नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता है।

    इस उपलब्धि पर एजीईएल के कार्यकारी निदेशक सागर अदाणी ने कहा कि 20 गीगावाट का आंकड़ा पार करना कंपनी की दीर्घकालिक रणनीति, अनुशासित कार्यान्वयन और टीम की प्रतिबद्धता का परिणाम है। उन्होंने कहा कि कंपनी आज अपने सहयोगियों और साझेदारों के साथ मिलकर इतनी स्वच्छ बिजली उपलब्ध करा रही है, जो मुंबई और नई दिल्ली की संयुक्त वार्षिक बिजली आवश्यकता के बराबर है।

    कंपनी ने भविष्य की योजनाओं का भी खुलासा किया है। एजीईएल वित्त वर्ष 2026-27 में 10 गीगावाट-घंटा (GWh) बैटरी ऊर्जा भंडारण क्षमता जोड़ने की तैयारी कर रही है। अगले पांच वर्षों में इसे बढ़ाकर 50 गीगावाट-घंटा करने का लक्ष्य रखा गया है, जिससे वर्ष 2030 तक 50 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता हासिल करने की योजना को गति मिलेगी।

    अडाणी ग्रीन एनर्जी वर्तमान में भारत की सबसे बड़ी और दुनिया की प्रमुख नवीकरणीय ऊर्जा कंपनियों में शामिल है। कंपनी ग्रिड से जुड़ी सौर, पवन, हाइब्रिड और ऊर्जा भंडारण परियोजनाओं के विकास, स्वामित्व और संचालन के माध्यम से स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन को बढ़ावा देने पर काम कर रही है।

  • अवैध संबंधों में बना हत्या का ब्लूप्रिंट, पत्नी और प्रेमी ने रची साजिश; 77 मिनट की कॉल डिटेल से खुला पूरे मर्डर का राज

    अवैध संबंधों में बना हत्या का ब्लूप्रिंट, पत्नी और प्रेमी ने रची साजिश; 77 मिनट की कॉल डिटेल से खुला पूरे मर्डर का राज

    मध्य प्रदेश: के नरसिंहपुर जिले में युवक सपनेश पटेल की हत्या का मामला पुलिस जांच के दौरान एक सुनियोजित आपराधिक साजिश के रूप में सामने आया। शुरुआत में युवक के अचानक लापता होने और कर्ज के कारण घर छोड़ने जैसी चर्चाओं के बीच जांच आगे बढ़ी, लेकिन तकनीकी साक्ष्यों और लगातार जुटाए गए प्रमाणों ने पूरे घटनाक्रम की दिशा बदल दी। पुलिस जांच में सामने आया कि हत्या के पीछे पारिवारिक रिश्तों में आई दरार, कथित अवैध संबंध और पूर्व नियोजित षड्यंत्र प्रमुख कारण थे।

    घटना 24 जनवरी 2021 की है, जब सपनेश पटेल शाम के समय एक फोन कॉल आने के बाद घर से यह कहकर निकला कि वह दोस्त के बुलावे पर पार्टी में जा रहा है। इसके बाद वह वापस नहीं लौटा। परिवार ने उसकी गुमशुदगी दर्ज कराई, जबकि स्थानीय स्तर पर उसके कर्ज के कारण कहीं चले जाने की चर्चाएं भी होती रहीं। लगभग एक सप्ताह बाद उसका शव एक तालाब से बरामद हुआ। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गला घोंटकर हत्या किए जाने की पुष्टि होने के बाद पुलिस ने मामले की गंभीरता से जांच शुरू की।

    जांच के दौरान पुलिस ने कॉल डिटेल रिकॉर्ड, मोबाइल लोकेशन और परिजनों के बयान खंगाले। इसी क्रम में पता चला कि घटना से एक दिन पहले मृतक की पत्नी स्लेखा और रिश्तेदार सूर्यप्रकाश पटेल के बीच करीब 77 मिनट तक मोबाइल पर बातचीत हुई थी। घटना वाले दिन भी दोनों लगातार संपर्क में रहे। वहीं सूर्यप्रकाश के मोबाइल रिकॉर्ड की जांच में बृजेश यादव का नाम भी सामने आया, जिससे पुलिस का संदेह और गहरा गया।

    पूछताछ और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस को जानकारी मिली कि सूर्यप्रकाश और स्लेखा के बीच लंबे समय से कथित प्रेम संबंध थे। जांच में यह भी सामने आया कि सपनेश को इस संबंध की जानकारी हो चुकी थी और वह इसका विरोध करता था। आरोप है कि सूर्यप्रकाश ने उसे आर्थिक सहायता देकर चुप कराने का प्रयास भी किया, लेकिन बात नहीं बनी। इसके बाद सपनेश को रास्ते से हटाने की योजना बनाई गई, जिसमें बृजेश यादव को भी शामिल किया गया।

    पुलिस के अनुसार, घटना वाले दिन सपनेश को शराब पार्टी के बहाने बुलाया गया। तीनों ने एक ढाबे पर समय बिताया, जिसके बाद सुनसान स्थान पर मोबाइल चार्जिंग केबल से उसका गला घोंट दिया गया। हत्या के बाद शव को कार की डिक्की में रखकर पूरी रात इधर-उधर घुमाया गया ताकि ऐसा स्थान मिल सके, जहां सबूत आसानी से छिपाए जा सकें। बाद में शव को तालाब में फेंक दिया गया और उसके ऊपर पत्थर रख दिए गए। मृतक का मोबाइल फोन भी अलग स्थान पर फेंककर साक्ष्य मिटाने का प्रयास किया गया।

    जांच के दौरान टोल प्लाजा के सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल लोकेशन, कॉल रिकॉर्ड और अन्य डिजिटल साक्ष्यों ने पुलिस की जांच को मजबूत आधार दिया। आरोपियों के बयानों में लगातार विरोधाभास सामने आने पर पुलिस ने हत्या में प्रयुक्त चार्जिंग केबल, वाहन और अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्य बरामद कर लिए। अदालत में अभियोजन पक्ष ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट, तकनीकी प्रमाण, गवाहों के बयान और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य प्रस्तुत किए। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायालय ने मामले को पूर्व नियोजित हत्या मानते हुए तीनों आरोपियों को दोषी ठहराया और आजीवन कारावास की सजा सुनाई। यह मामला आधुनिक तकनीकी जांच और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर सुलझाए गए प्रमुख आपराधिक मामलों में शामिल माना गया।

  • शेयर बाजार में मजबूत शुरुआत, सेंसेक्स 395 अंक और निफ्टी 122 अंक चढ़ा

    शेयर बाजार में मजबूत शुरुआत, सेंसेक्स 395 अंक और निफ्टी 122 अंक चढ़ा


    नई दिल्ली। घरेलू शेयर बाजार ने बुधवार को मजबूती के साथ कारोबार की शुरुआत की। शुरुआती कारोबार में निवेशकों की खरीदारी से सेंसेक्स और निफ्टी दोनों प्रमुख सूचकांकों में अच्छी तेजी देखने को मिली। बीच-बीच में मुनाफावसूली के चलते हल्की बिकवाली जरूर हुई, लेकिन बाजार पर खरीदारी का दबदबा बना रहा।

    कारोबार के पहले घंटे के बाद सुबह 10:15 बजे बीएसई सेंसेक्स 395.44 अंक यानी 0.52 प्रतिशत की बढ़त के साथ 76,874.11 अंक पर कारोबार कर रहा था। वहीं एनएसई निफ्टी 122.15 अंक यानी 0.51 प्रतिशत चढ़कर 23,987.90 अंक के स्तर पर पहुंच गया।

    सेंसेक्स ने 66.54 अंकों की बढ़त के साथ 76,545.21 अंक पर कारोबार की शुरुआत की थी। शुरुआती खरीदारी के दम पर सूचकांक लगातार ऊपर बढ़ता गया, हालांकि बीच-बीच में मुनाफावसूली का असर भी देखने को मिला। इसके बावजूद बाजार की सकारात्मक धारणा कायम रही।

    इसी तरह निफ्टी ने 31.90 अंकों की बढ़त के साथ 23,897.65 अंक पर ओपनिंग की। कारोबार के दौरान यह करीब 10 बजे 23,996.40 अंक तक पहुंच गया और बाद में मामूली उतार-चढ़ाव के बीच मजबूती के साथ कारोबार करता रहा।

    शुरुआती कारोबार में महिंद्रा एंड महिंद्रा, मारुति सुजुकी, नेस्ले, हिंदुस्तान यूनिलीवर और अल्ट्राटेक सीमेंट के शेयरों में सबसे ज्यादा तेजी रही। इनमें करीब 2.01 प्रतिशत से 2.99 प्रतिशत तक की बढ़त दर्ज की गई।

    वहीं दूसरी ओर टेक महिंद्रा, बजाज फिनसर्व, एचसीएल टेक्नोलॉजी, डॉ. रेड्डीज लेबोरेट्रीज और हिंडाल्को इंडस्ट्रीज के शेयरों में गिरावट देखने को मिली। इन शेयरों में 0.77 प्रतिशत से 2.08 प्रतिशत तक की कमजोरी दर्ज की गई।

    बाजार की चौड़ाई भी सकारात्मक रही। शुरुआती एक घंटे में 2,732 शेयरों में कारोबार हुआ, जिनमें 1,837 शेयर बढ़त के साथ हरे निशान में रहे, जबकि 895 शेयर गिरावट के साथ लाल निशान में कारोबार कर रहे थे।

    सेंसेक्स की 30 कंपनियों में से 19 शेयर बढ़त के साथ कारोबार कर रहे थे, जबकि 11 शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। वहीं निफ्टी के 50 शेयरों में से 30 बढ़त और 20 गिरावट के साथ कारोबार करते नजर आए।

    गौरतलब है कि इससे पहले मंगलवार को बाजार गिरावट के साथ बंद हुआ था। बीएसई सेंसेक्स 249.70 अंक (0.33 प्रतिशत) टूटकर 76,478.67 अंक पर बंद हुआ था, जबकि एनएसई निफ्टी 80.50 अंक (0.34 प्रतिशत) की गिरावट के साथ 23,865.75 अंक पर बंद हुआ था।

  • एमपी में मानसून ने पकड़ी रफ्तार, सात जिलों में भारी से अति भारी बारिश का अलर्ट; सड़कों पर बही बाइकें, कई इलाकों में बाढ़ जैसे हालात

    एमपी में मानसून ने पकड़ी रफ्तार, सात जिलों में भारी से अति भारी बारिश का अलर्ट; सड़कों पर बही बाइकें, कई इलाकों में बाढ़ जैसे हालात


    मध्य प्रदेश :
    में मानसून ने रफ्तार पकड़ ली है और इसके साथ ही कई जिलों में भारी बारिश ने जनजीवन को प्रभावित करना शुरू कर दिया है। मौसम विभाग ने बालाघाट और डिंडौरी में अति भारी वर्षा तथा देवास, हरदा, बैतूल, पांढुर्णा और छिंदवाड़ा सहित कई जिलों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। लगातार हो रही वर्षा के कारण कई स्थानों पर जलभराव, तेज बहाव और यातायात बाधित होने जैसी स्थितियां सामने आई हैं।

    प्रदेश में मानसून अब जबलपुर, भोपाल, रीवा, शहडोल, नर्मदापुरम, सागर और इंदौर संभाग के अधिकांश हिस्सों तक पहुंच चुका है। मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले एक-दो दिनों में मानसून उज्जैन, ग्वालियर और चंबल संभाग के शेष क्षेत्रों को भी पूरी तरह कवर कर लेगा। इसके साथ ही प्रदेशभर में बारिश की गतिविधियां और तेज होने की संभावना जताई गई है।

    सीहोर जिले के आष्टा में मंगलवार को हुई तेज बारिश के बाद सड़कें नदी जैसी दिखाई देने लगीं। कई इलाकों में घुटनों तक पानी भर गया और तेज बहाव के कारण सड़क किनारे खड़ी मोटरसाइकिलें बहने लगीं। स्थानीय लोगों ने वाहनों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाने का प्रयास किया, जबकि कई स्थानों पर आवागमन कुछ समय के लिए प्रभावित रहा। इस घटना के वीडियो भी व्यापक रूप से सामने आए, जिनमें बारिश की तीव्रता स्पष्ट दिखाई दे रही है।

    बालाघाट में बुधवार तड़के से लगातार हो रही बारिश ने किसानों के लिए राहत लेकर आई है। लंबे इंतजार के बाद अच्छी वर्षा मिलने से अब खेतों में बोनी का कार्य तेज होने की उम्मीद है। हालांकि प्रशासन ने लोगों को आकाशीय बिजली, तेज हवाओं और भारी वर्षा के दौरान सतर्क रहने की सलाह दी है। लगातार बारिश को देखते हुए कुछ सरकारी सेवाओं के संचालन समय में भी बदलाव किया गया है।

    मौसम विभाग ने भोपाल, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, इंदौर, धार, झाबुआ, खंडवा, खरगोन, जबलपुर, सागर, रीवा, शहडोल, सतना, सिवनी, मंडला, सीधी, सिंगरौली और कई अन्य जिलों में तेज बारिश के साथ आंधी चलने की संभावना व्यक्त की है। वहीं प्रदेश के पश्चिमी हिस्सों के कुछ जिलों में हल्की से मध्यम बारिश का अनुमान लगाया गया है।

    लगातार वर्षा के कारण कई स्थानों पर जोखिम भरी घटनाएं भी सामने आई हैं। खरगोन जिले में तेज बहाव के बावजूद यात्रियों से भरी एक निजी बस को पुलिया पार कराए जाने का मामला चर्चा में रहा। दूसरी ओर प्रदेश के विभिन्न जिलों में आकाशीय बिजली गिरने और तेज बहाव की घटनाओं में जनहानि की भी सूचना मिली है। प्रशासन ने लोगों से नदी, नालों और पुल-पुलियों को पार करने में विशेष सावधानी बरतने की अपील की है।

    मौसम विभाग के अनुसार जून महीने में प्रदेश में सामान्य से कम वर्षा दर्ज की गई थी, लेकिन जुलाई में मानसून पूरी तरह सक्रिय रहने के संकेत हैं। प्रदेश की वार्षिक औसत वर्षा का बड़ा हिस्सा जुलाई में ही दर्ज होता है और इसी अवधि में खेती-किसानी के लिए सबसे महत्वपूर्ण बारिश होती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आगामी दिनों में वर्षा का यह क्रम बना रहता है तो कृषि गतिविधियों को गति मिलेगी, हालांकि अत्यधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में जलभराव और बाढ़ जैसी स्थितियों पर लगातार निगरानी बनाए रखना आवश्यक होगा।

  • तेंदुखेड़ा में नाबालिग से दुष्कर्म का मामला: बच्ची के मां बनने पर खुली पोल, आरोपी गिरफ्तार; पुलिस कराएगी DNA जांच

    तेंदुखेड़ा में नाबालिग से दुष्कर्म का मामला: बच्ची के मां बनने पर खुली पोल, आरोपी गिरफ्तार; पुलिस कराएगी DNA जांच

    मध्य प्रदेश: के नरसिंहपुर जिले के तेंदुखेड़ा क्षेत्र से नाबालिग से दुष्कर्म का एक गंभीर मामला सामने आया है। पुलिस के अनुसार एक नाबालिग लड़की को लंबे समय तक डरा-धमकाकर उसका शारीरिक शोषण किया गया। इस मामले का खुलासा तब हुआ जब किशोरी ने एक बच्चे को जन्म दिया। घटना सामने आने के बाद क्षेत्र में आक्रोश का माहौल है और पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।

    तेंदुखेड़ा थाना पुलिस के मुताबिक आरोपी राजा लोधी लंबे समय से पीड़ित किशोरी को धमकाता था और उसकी मजबूरी का फायदा उठाकर उसके साथ बार-बार शारीरिक संबंध बनाता रहा। नाबालिग होने के कारण पीड़िता भय के माहौल में रही और किसी को कुछ नहीं बता सकी। परिवार को तब संदेह हुआ जब बच्ची गर्भवती पाई गई और बाद में उसने एक नवजात को जन्म दिया।

    परिजनों द्वारा पूछताछ किए जाने पर किशोरी ने रोते हुए पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी। इसके बाद परिवार ने तुरंत पुलिस से संपर्क किया। शिकायत मिलते ही पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कार्रवाई शुरू की और आरोपी के खिलाफ विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज किया।

    पुलिस ने आरोपी राजा लोधी को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया। अधिकारियों का कहना है कि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए वैज्ञानिक साक्ष्यों को मजबूत करना आवश्यक है। इसी उद्देश्य से नवजात बच्चे और आरोपी का DNA परीक्षण कराया जाएगा। इसके लिए दोनों के नमूने एकत्र कर संबंधित प्रयोगशाला भेज दिए गए हैं।

    जांच अधिकारियों के अनुसार DNA रिपोर्ट आने के बाद मामले में महत्वपूर्ण साक्ष्य मिल सकेंगे, जो न्यायिक प्रक्रिया में अहम भूमिका निभाएंगे। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि घटना कितने समय से चल रही थी और क्या आरोपी ने किसी प्रकार का दबाव या धमकी देकर पीड़िता को चुप रहने के लिए मजबूर किया था।

    प्रशासन ने पीड़ित किशोरी और उसके परिवार को आवश्यक कानूनी तथा मनोवैज्ञानिक सहायता उपलब्ध कराने की बात कही है। बाल संरक्षण से जुड़े विभागों को भी मामले की जानकारी दे दी गई है ताकि पीड़िता को उचित परामर्श और सहायता मिल सके।

    तेंदुखेड़ा पुलिस का कहना है कि मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों ने भरोसा दिलाया है कि पीड़िता को न्याय दिलाने के लिए कानून के तहत सभी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

  • महिला कर्मचारियों वाले विभागीय ग्रुप में कथित अशोभनीय चैट से मचा विवाद, स्वास्थ्य विभाग के सुपरवाइजर को कारण बताओ नोटिस, जांच के बाद होगी कार्रवाई

    महिला कर्मचारियों वाले विभागीय ग्रुप में कथित अशोभनीय चैट से मचा विवाद, स्वास्थ्य विभाग के सुपरवाइजर को कारण बताओ नोटिस, जांच के बाद होगी कार्रवाई

    मध्य प्रदेश: के सिंगरौली जिले के चितरंगी स्वास्थ्य विभाग में विभागीय व्हाट्सएप ग्रुप में कथित अशोभनीय चैट भेजे जाने के आरोपों ने प्रशासनिक हलकों में हलचल पैदा कर दी है। महिला कर्मचारियों की शिकायत के बाद स्वास्थ्य विभाग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित सुपरवाइजर के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी है। प्रारंभिक स्तर पर कारण बताओ नोटिस जारी करने का निर्णय लिया गया है, जिसके बाद प्राप्त जवाब और जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    मामला चितरंगी विकासखंड के सेक्टर लमसरई से जुड़ा है, जहां सुपरवाइजर का दायित्व संभाल रहे दुर्गा वैश्य पर विभागीय ग्रुप में कथित रूप से अशोभनीय संदेश साझा करने का आरोप लगाया गया है। बताया गया है कि जिस ग्रुप में यह संदेश भेजे गए, उसमें विभाग के अधिकारी, कर्मचारी तथा बड़ी संख्या में महिला कर्मचारी भी शामिल हैं। आरोप सामने आने के बाद विभागीय माहौल प्रभावित हुआ और कर्मचारियों के बीच इस मुद्दे को लेकर असंतोष बढ़ गया।

    महिला कर्मचारियों का कहना है कि विभागीय संचार के लिए बनाए गए ग्रुप का उपयोग केवल प्रशासनिक कार्यों और आधिकारिक सूचनाओं के आदान-प्रदान के लिए होना चाहिए। ऐसे मंच पर कथित आपत्तिजनक संदेश साझा किए जाने से न केवल उन्हें असहज स्थिति का सामना करना पड़ा, बल्कि कार्यस्थल का वातावरण भी प्रभावित हुआ। कर्मचारियों का मानना है कि इस प्रकार की घटनाएं सरकारी कार्यालयों की गरिमा और अनुशासन पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालती हैं।

    शिकायत मिलने के बाद संबंधित अधिकारियों ने पूरे मामले की प्रारंभिक जानकारी एकत्र करना शुरू कर दिया है। विभाग का कहना है कि आरोपों की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर नियमानुसार निर्णय लिया जाएगा। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि किसी भी कर्मचारी के खिलाफ अंतिम कार्रवाई जांच पूरी होने और उसका पक्ष सुनने के बाद ही की जाएगी।

    खंड चिकित्सा अधिकारी हरिशंकर वैश्य ने बताया कि शिकायत को गंभीरता से लिया गया है। उन्होंने कहा कि संबंधित सुपरवाइजर को कारण बताओ नोटिस जारी किया जा रहा है। नोटिस का जवाब प्राप्त होने के बाद विभागीय नियमों के अनुरूप आगे की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। यदि जांच में आरोप प्रमाणित पाए जाते हैं तो सेवा नियमों के तहत आवश्यक अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

    इस घटना के सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग में कार्यस्थल पर आचरण और डिजिटल माध्यमों के जिम्मेदार उपयोग को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। विभागीय अधिकारियों का मानना है कि आधिकारिक संचार मंचों का उपयोग केवल कार्यालयीन कार्यों तक सीमित रहना चाहिए और किसी भी प्रकार की अनुचित गतिविधि को स्वीकार नहीं किया जा सकता। फिलहाल पूरे मामले की जांच जारी है और विभाग अब संबंधित पक्षों के बयान तथा उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई करेगा।

  • निलंबन और इस्तीफे के बाद भी नहीं थमा सड़क सुरक्षा अभियान, पूर्व ट्रैफिक कर्मी के वायरल वीडियो ने यातायात व्यवस्था पर उठाए सवाल

    निलंबन और इस्तीफे के बाद भी नहीं थमा सड़क सुरक्षा अभियान, पूर्व ट्रैफिक कर्मी के वायरल वीडियो ने यातायात व्यवस्था पर उठाए सवाल

    मध्य प्रदेश: के शहडोल में पूर्व ट्रैफिक हेड कांस्टेबल विवेकानंद तिवारी एक बार फिर चर्चा में हैं। पुलिस विभाग से निलंबन और बाद में स्वैच्छिक इस्तीफा देने के बावजूद उन्होंने सड़क सुरक्षा को लेकर अपना अभियान जारी रखा है। सोशल मीडिया पर लाखों फॉलोअर्स रखने वाले विवेकानंद तिवारी का नया वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें उन्होंने यातायात नियमों के उल्लंघन की कई घटनाओं को कैमरे में रिकॉर्ड कर लोगों को जागरूक करने का प्रयास किया है।

    हाल ही में साझा किए गए वीडियो में उन्होंने शहर के एक प्रमुख चौराहे पर यातायात व्यवस्था का वास्तविक दृश्य दिखाया। वीडियो में मोबाइल पर बात करते हुए वाहन चलाना, बिना हेलमेट दोपहिया चलाना, रॉन्ग साइड ड्राइविंग, एक बाइक पर तीन लोगों का सफर करना और नाबालिग के वाहन चलाने जैसी कई लापरवाहियां दिखाई गई हैं। उनका कहना है कि ऐसी छोटी दिखने वाली गलतियां ही अधिकांश सड़क दुर्घटनाओं की बड़ी वजह बनती हैं।

    वीडियो के माध्यम से उन्होंने यह संदेश देने का प्रयास किया कि सड़क सुरक्षा केवल पुलिस या प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि प्रत्येक नागरिक की भी समान जिम्मेदारी है। उनका मानना है कि यातायात नियमों का पालन करके अनेक दुर्घटनाओं को रोका जा सकता है। इसी उद्देश्य से वह लगातार लोगों को जागरूक करने वाले वीडियो तैयार कर रहे हैं।

    विवेकानंद तिवारी पहले ट्रैफिक पुलिस में कार्यरत थे और ड्यूटी के दौरान भी सड़क सुरक्षा से जुड़े उनके वीडियो सोशल मीडिया पर काफी लोकप्रिय हुए थे। उनके जागरूकता अभियान को व्यापक समर्थन मिला और बड़ी संख्या में लोगों ने उन्हें डिजिटल माध्यमों पर फॉलो करना शुरू किया। समय के साथ उनके वीडियो सड़क सुरक्षा से जुड़े जनजागरूकता अभियानों का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गए।

    हालांकि कुछ समय पहले विभाग ने उन्हें लंबे समय तक ड्यूटी से अनुपस्थित रहने और सेवा नियमों के उल्लंघन के आरोप में निलंबित कर दिया था। विभागीय जांच में यह भी उल्लेख किया गया कि अनुपस्थिति के दौरान वह सोशल मीडिया पर सक्रिय थे। इसके बाद उन्होंने अपनी ओर से स्वास्थ्य संबंधी दस्तावेज प्रस्तुत किए और बताया कि उन्होंने अपनी बीमारी की जानकारी संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाई थी।

    बाद में उन्होंने स्वेच्छा से पुलिस सेवा से इस्तीफा दे दिया। उनका कहना था कि निलंबन की कार्रवाई से उनकी सार्वजनिक छवि प्रभावित हुई है, इसलिए उन्होंने सेवा छोड़ने का निर्णय लिया। विभाग से अलग होने के बाद भी उन्होंने सड़क सुरक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता बनाए रखी और स्वतंत्र रूप से जागरूकता अभियान चलाना जारी रखा।

    वर्तमान में वह हेलमेट उपयोग, सुरक्षित वाहन संचालन और यातायात नियमों के पालन को लेकर लगातार लोगों को जागरूक कर रहे हैं। सोशल मीडिया के माध्यम से वह सड़क पर दिखाई देने वाली लापरवाहियों को सामने लाते हैं और लोगों से जिम्मेदार नागरिक बनने की अपील करते हैं। उनके हालिया वीडियो को भी बड़ी संख्या में लोग देख रहे हैं और इस पर सड़क सुरक्षा तथा यातायात व्यवस्था को लेकर व्यापक चर्चा हो रही है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि सड़क दुर्घटनाओं को कम करने के लिए कानून के साथ-साथ जनजागरूकता भी उतनी ही आवश्यक है। ऐसे अभियानों से लोगों में यातायात नियमों के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित होती है। शहडोल से सामने आया यह मामला भी इस बात की ओर संकेत करता है कि सड़क सुरक्षा का संदेश किसी पद या वर्दी का मोहताज नहीं होता, बल्कि सामाजिक सहभागिता और व्यक्तिगत पहल के माध्यम से भी प्रभावी बदलाव लाया जा सकता है।