Author: bharati

  • 968 दिन बाद वनडे में वापसी, बुमराह ने रचा इतिहास, इंग्लैंड की धरती पर बनाए दो बड़े रिकॉर्ड

    968 दिन बाद वनडे में वापसी, बुमराह ने रचा इतिहास, इंग्लैंड की धरती पर बनाए दो बड़े रिकॉर्ड


    बर्मिंघम। लंबे इंतजार के बाद वनडे क्रिकेट में वापसी करने वाले जसप्रीत बुमराह ने अपनी वापसी को यादगार बना दिया। 2023 वनडे वर्ल्ड कप फाइनल के बाद पहली बार 50 ओवर के प्रारूप में उतरे बुमराह ने इंग्लैंड के खिलाफ बर्मिंघम में खेले गए मुकाबले में शानदार प्रदर्शन करते हुए कई रिकॉर्ड अपने नाम कर लिए।

    968 दिन बाद वनडे मैदान पर लौटे बुमराह ने न सिर्फ अपने 150 वनडे विकेट पूरे किए, बल्कि इंग्लैंड की धरती पर भारत के लिए सबसे ज्यादा वनडे विकेट लेने वाले गेंदबाज भी बन गए।

    150 वनडे विकेट पूरे, शमी और कुलदीप के खास क्लब में शामिल
    जसप्रीत बुमराह ने वनडे क्रिकेट में 150 विकेट का आंकड़ा महज 4605 गेंदों में पूरा किया। इसके साथ ही वह भारत के लिए सबसे कम गेंदों में यह उपलब्धि हासिल करने वाले तीसरे गेंदबाज बन गए।

    भारत के लिए सबसे कम गेंदों में 150 वनडे विकेट लेने वाले गेंदबाज
    मोहम्मद शमी – 4070 गेंद
    कुलदीप यादव – 4513 गेंद
    जसप्रीत बुमराह – 4605 गेंद
    अजीत आगरकर – 5027 गेंद
    इरफान पठान – 5131 गेंद

    बुमराह ने मुकाबले के 13.1वें ओवर में अपनी पहली ही गेंद पर इंग्लैंड के बल्लेबाज हैरी ब्रूक को आउट कर दिया। उन्होंने ऑफ स्टंप के बाहर शॉर्ट ऑफ लेंथ गेंद फेंकी, जिसमें अतिरिक्त उछाल और बाहर की ओर मूवमेंट देखने को मिला। ब्रूक ने गेंद को थर्ड मैन की दिशा में खेलने की कोशिश की, लेकिन बल्ले का बाहरी किनारा लग गया। पहली स्लिप पर मौजूद रोहित शर्मा ने आसान कैच पकड़कर उन्हें पवेलियन भेज दिया।

    लंबे अंतराल के बाद वापसी के बावजूद बुमराह की गेंदबाजी में वही पुरानी धार नजर आई। उनकी रफ्तार, सटीक लाइन और खतरनाक मूवमेंट ने साबित कर दिया कि वह अब भी भारतीय गेंदबाजी आक्रमण के सबसे बड़े हथियारों में शामिल हैं।

    इंग्लैंड में बुमराह का जलवा, बने नंबर-1 भारतीय गेंदबाज
    इंग्लैंड की परिस्थितियों में बुमराह का प्रदर्शन हमेशा प्रभावशाली रहा है। इस मुकाबले के बाद वह इंग्लैंड की धरती पर वनडे क्रिकेट में भारत के लिए सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज बन गए।

    इंग्लैंड में भारत के लिए सबसे ज्यादा वनडे विकेट लेने वाले गेंदबाज
    जसप्रीत बुमराह – 31 विकेट
    रवींद्र जडेजा – 30 विकेट
    भुवनेश्वर कुमार – 28 विकेट
    मदन लाल – 27 विकेट
    मोहम्मद शमी – 26 विकेट

    वापसी के साथ मिला रिकॉर्ड का तोहफा
    बुमराह के लिए यह मुकाबला केवल टीम में वापसी का मौका नहीं था, बल्कि अपनी मौजूदगी दर्ज कराने का भी अवसर था। चोट के कारण लंबे समय तक क्रिकेट से दूर रहने के बाद मैदान पर उतरते ही उन्होंने दिखा दिया कि क्यों उन्हें दुनिया के सबसे खतरनाक तेज गेंदबाजों में गिना जाता है। करीब 968 दिन का इंतजार खत्म हुआ और बुमराह ने अपनी वापसी में वही पुराना अंदाज दिखाया—सटीक गेंदबाजी, घातक रफ्तार और रिकॉर्ड बनाने की क्षमता।

  • ईरान के पड़ोसी देश से अमेरिका हटाएगा अपनी सेना, सितंबर 2026 तक पूरी होगी वापसी

    ईरान के पड़ोसी देश से अमेरिका हटाएगा अपनी सेना, सितंबर 2026 तक पूरी होगी वापसी


    नई दिल्ली। पश्चिम एशिया की राजनीति में एक अहम बदलाव होने जा रहा है। करीब 23 साल पहले इराक में सैन्य अभियान शुरू करने वाला अमेरिका अब वहां से अपनी सैन्य मौजूदगी खत्म करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इराक के प्रधानमंत्री अली अल-जैदी के साथ व्हाइट हाउस में हुई संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में घोषणा की कि 30 सितंबर 2026 तक सभी अमेरिकी सैनिक इराक से वापस लौट जाएंगे।

    ट्रंप ने कहा कि अब इराक में अमेरिकी सेना रखने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि भविष्य में दोनों देशों के संबंध सैन्य सहयोग के बजाय आर्थिक, व्यापारिक और निवेश आधारित होंगे।

    यह फैसला ऐसे समय सामने आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच हालिया संघर्ष ने पूरे पश्चिम एशिया की सुरक्षा और कूटनीतिक स्थिति को प्रभावित किया है। ईरान लंबे समय से इराक और मध्य पूर्व के अन्य हिस्सों से अमेरिकी सैनिकों की वापसी की मांग करता रहा है। पिछले कई वर्षों में ईरान समर्थित समूहों की ओर से इराक में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर रॉकेट और ड्रोन हमले किए जाते रहे हैं। हालिया संघर्ष के दौरान भी अमेरिकी ठिकाने निशाने पर रहे।

    कई विशेषज्ञ इस घटनाक्रम को ईरान के लिए रणनीतिक बढ़त के तौर पर देख रहे हैं। उनका मानना है कि अमेरिकी सैन्य उपस्थिति कम होना क्षेत्र में शक्ति संतुलन को प्रभावित कर सकता है।

    संघर्ष के बीच बदली अमेरिका की रणनीति
    हालिया युद्ध के दौरान ईरान ने इराक और खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया था। जवाब में अमेरिका ने भी ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर कार्रवाई की। लगातार बढ़ते तनाव और क्षेत्रीय अस्थिरता के बीच वॉशिंगटन अब अपनी सैन्य रणनीति में बदलाव करता दिखाई दे रहा है। इससे पहले भी अमेरिका खाड़ी क्षेत्र में अपनी कुछ सैन्य गतिविधियों को सीमित करने के संकेत दे चुका है।

    इराक छोड़ने का मतलब रिश्ते खत्म करना नहीं
    राष्ट्रपति ट्रंप ने स्पष्ट किया कि सैनिकों की वापसी का अर्थ इराक से अमेरिका का पूरी तरह अलग होना नहीं है। उन्होंने कहा कि तेल, ऊर्जा, निवेश और व्यापार जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों का सहयोग आगे भी जारी रहेगा।

    इराक के प्रधानमंत्री अली अल-जैदी ने भी कहा कि 30 सितंबर तक अमेरिकी सैनिक देश से बाहर हो जाएंगे, लेकिन अमेरिकी कंपनियां इराक के विकास में अपनी भूमिका निभाती रहेंगी। यानी अब सैन्य ताकत की जगह आर्थिक साझेदारी पर जोर दिया जाएगा।

    2003 में शुरू हुआ था अमेरिका का इराक मिशन
    अमेरिका का इराक मिशन साल 2003 में शुरू हुआ था। तत्कालीन राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू. बुश के नेतृत्व में अमेरिकी सेना ने सद्दाम हुसैन सरकार को हटाने के लिए इराक पर हमला किया था। उस समय इराक पर बड़े पैमाने पर विनाशकारी हथियार रखने का आरोप लगाया गया था, लेकिन बाद में ऐसे हथियार बरामद नहीं हुए। साल 2007 में इराक में अमेरिकी सैनिकों की संख्या बढ़कर 1.7 लाख से अधिक हो गई थी।

    ओबामा के कार्यकाल में भी हुई थी वापसी
    2011 में तत्कालीन राष्ट्रपति बराक ओबामा के प्रशासन ने अधिकांश अमेरिकी सैनिकों को इराक से वापस बुला लिया था। हालांकि 2014 में आतंकी संगठन आईएसआईएस के बढ़ते प्रभाव के बाद इराक सरकार के अनुरोध पर अमेरिकी सेना दोबारा वहां पहुंची।

    इसके बाद करीब 2,500 अमेरिकी सैनिक इराकी सेना को प्रशिक्षण देने और आतंकवाद विरोधी अभियानों में सहयोग कर रहे थे। 2024 में दोनों देशों के बीच हुए समझौते के बाद अमेरिकी सैनिकों की संख्या धीरे-धीरे कम की जा रही थी और अब पूरी वापसी की समयसीमा तय कर दी गई है।

    ईरान संघर्ष में अमेरिकी सेना को इराक में नुकसान
    ईरान के साथ हुए संघर्ष के दौरान इराक में अमेरिकी सेना को नुकसान भी उठाना पड़ा। रिपोर्टों के अनुसार, इस दौरान इराक में छह अमेरिकी सैनिकों की मौत हुई, जबकि कई अन्य घायल हुए। ईरान की ओर से किए गए बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन हमलों में इरबिल और ऐन अल-असद जैसे अमेरिकी सैन्य ठिकाने प्रभावित हुए। हमलों में सैन्य गोदाम, हैंगर, रनवे और उपकरणों को नुकसान पहुंचा।

    इसके अलावा सलाह अल-दीन प्रांत में ईरान समर्थित समूहों ने अमेरिका के MQ-9 रीपर ड्रोन को भी मार गिराने का दावा किया। रिपोर्टों में कहा गया है कि पूरे क्षेत्र में अमेरिका को करीब 2.3 से 2.8 अरब डॉलर के अत्याधुनिक सैन्य उपकरणों का नुकसान हुआ।

  • सावन में बदलेगा गुरु बृहस्पति का नक्षत्र, 5 राशियों की चमकेगी किस्मत, जाने क्‍या होगा बदलाव?

    सावन में बदलेगा गुरु बृहस्पति का नक्षत्र, 5 राशियों की चमकेगी किस्मत, जाने क्‍या होगा बदलाव?


    नई दिल्ली। सावन माह के दौरान ग्रहों के गुरु माने जाने वाले बृहस्पति एक महत्वपूर्ण नक्षत्र परिवर्तन करने जा रहे हैं। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, यह बदलाव कई राशियों के लिए शुभ परिणाम लेकर आ सकता है। द्रिक पंचांग के मुताबिक, देवगुरु बृहस्पति 18 जून को पुष्य नक्षत्र में प्रवेश कर चुके हैं और 18 अगस्त तक वहीं रहेंगे। इसके बाद 19 अगस्त 2026 को वे बुध के स्वामित्व वाले अश्लेषा नक्षत्र में गोचर करेंगे।

    ज्योतिष शास्त्र में गुरु का नक्षत्र परिवर्तन विशेष महत्व रखता है। माना जा रहा है कि गुरु के इस गोचर से कुछ राशियों के जातकों को करियर, आर्थिक स्थिति, वैवाहिक जीवन और सामाजिक प्रतिष्ठा के क्षेत्र में सकारात्मक परिणाम मिल सकते हैं।

    कर्क राशि: सुख-शांति और विवाह के प्रबल योग
    कर्क राशि के जातकों के लिए यह समय शुभ रहने की संभावना है। मानसिक तनाव और पारिवारिक विवादों में कमी आ सकती है। समाज में मान-सम्मान बढ़ेगा और जिन लोगों के विवाह में बाधाएं आ रही थीं, उनके लिए विवाह के अच्छे अवसर बन सकते हैं।

    धनु राशि: आर्थिक लाभ के संकेत
    धनु राशि के लोगों को इस अवधि में धन संबंधी मामलों में राहत मिलने के योग हैं। रुका हुआ पैसा वापस मिलने की संभावना है। नौकरी और कारोबार में नए अवसर मिल सकते हैं। भूमि, भवन या अन्य संपत्ति में निवेश के लिए भी समय अनुकूल माना जा रहा है।

    कन्या राशि: करियर में मिलेगी नई ऊंचाई
    कन्या राशि के जातकों के लिए आमदनी के नए स्रोत खुल सकते हैं। लंबे समय से अधूरे पड़े कार्य पूरे होने की संभावना है। कार्यस्थल पर प्रदर्शन बेहतर रहेगा, जिससे पदोन्नति और वेतन वृद्धि के अवसर बन सकते हैं। वरिष्ठ अधिकारियों का सहयोग भी मिल सकता है।

    वृश्चिक राशि: भाग्य देगा साथ
    वृश्चिक राशि वालों के लिए यह समय रुके हुए कार्यों को गति देने वाला माना जा रहा है। लंबे समय से अटके काम पूरे हो सकते हैं। धार्मिक या मांगलिक यात्रा के योग बन सकते हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों को भी सफलता मिलने के संकेत हैं।

    मकर राशि: व्यापार में बढ़ेगा लाभ
    मकर राशि के व्यापारियों को साझेदारी वाले कार्यों में अच्छा लाभ मिलने की संभावना है। नए व्यावसायिक संबंध बन सकते हैं और कारोबार में तेजी आ सकती है। वैवाहिक जीवन में मधुरता बढ़ेगी तथा जीवनसाथी के साथ संबंध मजबूत होंगे। इससे सामाजिक प्रतिष्ठा में भी वृद्धि हो सकती है।

    गुरु की कृपा पाने के लिए बताए गए उपाय
    केसर या हल्दी का तिलक: प्रतिदिन स्नान के बाद माथे और नाभि पर केसर या हल्दी का तिलक लगाने से ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार गुरु ग्रह मजबूत होते हैं और मान-सम्मान में वृद्धि होती है।

    विष्णु सहस्रनाम का पाठ: गुरुवार के दिन या नियमित रूप से विष्णु सहस्रनाम का पाठ अथवा श्रवण करना शुभ माना गया है। मान्यता है कि इससे आर्थिक परेशानियां कम होती हैं और समृद्धि के मार्ग खुलते हैं।

    पीली वस्तुओं का दान: गुरुवार को चने की दाल, केले, पीले वस्त्र या साबुत हल्दी का दान करने से गुरु ग्रह की कृपा प्राप्त होती है तथा घर में सुख-समृद्धि का वास होता है।

  • इलाहाबाद हाईकोर्ट की अहम टिप्पणी: पति की सैलरी का 25% गुजारा भत्ता तय नियम नहीं, मामले के आधार पर होगी राशि

    इलाहाबाद हाईकोर्ट की अहम टिप्पणी: पति की सैलरी का 25% गुजारा भत्ता तय नियम नहीं, मामले के आधार पर होगी राशि


    नई दिल्ली। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गुजारा भत्ते को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए स्पष्ट किया है कि तलाकशुदा पति की आय का 25 प्रतिशत हिस्सा पत्नी को देना कोई अनिवार्य कानूनी नियम नहीं है। अदालत ने कहा कि यह केवल एक सामान्य दिशा-निर्देश है और प्रत्येक मामले की परिस्थितियों को देखते हुए अदालतें इससे कम या अधिक गुजारा भत्ता तय कर सकती हैं।

    जस्टिस अचल सचदेव की एकल पीठ ने कानपुर देहात के एक दंपति से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान पत्नी को मिलने वाला मासिक गुजारा भत्ता 12 हजार रुपये से बढ़ाकर 20 हजार रुपये करने का आदेश दिया।

    यह मामला पिंकी उर्फ प्रीति और उनके पति श्री जय प्रकाश से संबंधित है। पति ने पत्नी के खिलाफ तलाक की याचिका दायर की थी, जिसे अदालत ने मंजूर कर लिया था। तलाक के आदेश के आधार पर पति ने फैमिली कोर्ट द्वारा तय किए गए गुजारा भत्ते को चुनौती दी, जबकि पत्नी ने भत्ते की राशि अपर्याप्त बताते हुए इसे बढ़ाने की मांग की। हाईकोर्ट ने दोनों याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई की।

    सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि केवल तलाक हो जाने से पत्नी का गुजारा भत्ता पाने का अधिकार समाप्त नहीं हो जाता। यदि पत्नी स्वयं अपना भरण-पोषण करने में सक्षम नहीं है और उसने दोबारा विवाह नहीं किया है या किसी अन्य व्यक्ति के साथ नहीं रह रही है, तो वह गुजारा भत्ते की हकदार रहेगी।

    अदालत ने यह भी कहा कि गुजारा भत्ते का उद्देश्य केवल जीवन-निर्वाह भर की राशि उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि महिला को सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अवसर देना है।

    हाईकोर्ट ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि रिवीजन कोर्ट सामान्य परिस्थितियों में निचली अदालत द्वारा तय की गई भत्ते की राशि में बदलाव नहीं करती, क्योंकि उसका दायित्व केवल आदेश की वैधानिकता की समीक्षा करना होता है। हालांकि, यदि निचली अदालत का निर्णय गलत तथ्यों पर आधारित हो या महत्वपूर्ण साक्ष्यों की अनदेखी की गई हो, तो हाईकोर्ट हस्तक्षेप कर सकता है।

    मामले की सुनवाई के दौरान यह सामने आया कि पति का मासिक वेतन 86,674 रुपये है, जबकि विभिन्न कटौतियों के बाद उसके खाते में 67,043 रुपये प्राप्त होते हैं। हाईकोर्ट ने पाया कि फैमिली कोर्ट ने सभी आवश्यक दस्तावेजों का परीक्षण किए बिना गुजारा भत्ता निर्धारित कर दिया था। साथ ही, पति ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप अपनी संपत्ति और देनदारियों का हलफनामा भी प्रस्तुत नहीं किया था।

    इन्हीं तथ्यों को आधार बनाते हुए हाईकोर्ट ने 10 जुलाई को दिए अपने फैसले में पत्नी की याचिका स्वीकार करते हुए मासिक गुजारा भत्ता 20 हजार रुपये निर्धारित किया, जो आवेदन की तारीख से प्रभावी होगा।

  • एमपी में जुलाई में बढ़ी गर्मी, 36 डिग्री के पार पहुंचा पारा, आज 21 जिलों में हल्की बारिश की संभावना

    एमपी में जुलाई में बढ़ी गर्मी, 36 डिग्री के पार पहुंचा पारा, आज 21 जिलों में हल्की बारिश की संभावना


    भोपाल। मध्य प्रदेश में बारिश की रफ्तार धीमी पड़ते ही गर्मी ने फिर से तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। कई शहरों में अधिकतम तापमान 35 से 36 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया है, जिससे जुलाई के बीच मार्च-अप्रैल जैसी गर्मी का एहसास हो रहा है। मौसम विभाग के अनुसार, अगले पांच दिनों तक प्रदेश में भारी बारिश की संभावना कम है, ऐसे में तापमान में और बढ़ोतरी हो सकती है।

    मौसम केंद्र भोपाल के मुताबिक, पिछले छह दिनों से प्रदेश में कहीं भी भारी या अति भारी बारिश दर्ज नहीं की गई है। हालांकि, कई जिलों में दिन के समय बादलों की आवाजाही बनी हुई है, लेकिन इसका बारिश पर खास असर नहीं दिखा। यही वजह है कि प्रदेश के आधे से अधिक जिलों में सामान्य से कम वर्षा रिकॉर्ड की गई है।

    आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश में अब तक 241.8 मिमी (9.5 इंच) बारिश हुई है, जबकि इस अवधि में सामान्य औसत 260 मिमी (10.2 इंच) होना चाहिए था। इस तरह प्रदेश में अब तक 7 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है।

    क्षेत्रवार स्थिति देखें तो प्रदेश के पूर्वी हिस्से जबलपुर, सागर, शहडोल और रीवा संभाग—में औसत से 21 प्रतिशत कम बारिश हुई है। वहीं पश्चिमी क्षेत्र, जिसमें भोपाल, इंदौर, उज्जैन, नर्मदापुरम और ग्वालियर-चंबल संभाग शामिल हैं, वहां औसत से 6 प्रतिशत कम वर्षा रिकॉर्ड की गई है।

    आज 21 जिलों में हल्की बारिश की संभावना
    मौसम विभाग ने बुधवार को इंदौर, उज्जैन, रतलाम, झाबुआ, धार, अलीराजपुर, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी, मंडला, बालाघाट, डिंडौरी, अनूपपुर, उमरिया, शहडोल, सतना, मैहर, रीवा, मऊगंज, सीधी और सिंगरौली जिलों में हल्की बारिश की संभावना जताई है।

    वहीं भोपाल, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, नीमच, मंदसौर, रतलाम, आगर-मालवा, शाजापुर, देवास, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, ग्वालियर, श्योपुर, मुरैना, भिंड, दतिया, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, सागर, पन्ना, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी जिलों में उमस और गर्मी का असर बना रहने की संभावना है।

  • भारत के बीएफएसआई सेक्टर में निवेश को मिली नई रफ्तार, दूसरी तिमाही में डील वैल्यू 58 प्रतिशत बढ़कर 3.2 अरब डॉलर पहुंची

    भारत के बीएफएसआई सेक्टर में निवेश को मिली नई रफ्तार, दूसरी तिमाही में डील वैल्यू 58 प्रतिशत बढ़कर 3.2 अरब डॉलर पहुंची

    नई दिल्ली ।भारत के बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं और बीमा (बीएफएसआई) क्षेत्र में वित्त वर्ष 2026 की दूसरी तिमाही के दौरान निवेश गतिविधियों में उल्लेखनीय तेजी देखने को मिली है। इस अवधि में कुल 65 डील्स दर्ज की गईं, जिनकी संयुक्त वैल्यू 3.2 अरब डॉलर रही। तिमाही आधार पर यह मूल्य लगभग 58 प्रतिशत अधिक रहा, जो इस क्षेत्र में निवेशकों के बढ़ते विश्वास और रणनीतिक सौदों की सक्रियता को दर्शाता है। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बावजूद भारतीय वित्तीय सेवाओं का बाजार निवेश आकर्षित करने में सक्षम बना हुआ है।

    तिमाही समीक्षा के अनुसार इस अवधि में बीएफएसआई सेक्टर की हिस्सेदारी कुल डील वॉल्यूम का लगभग 11 प्रतिशत और कुल डील वैल्यू का 8 प्रतिशत रही। डील वैल्यू में आई उल्लेखनीय वृद्धि के पीछे एक बड़े रणनीतिक ट्रांजैक्शन की महत्वपूर्ण भूमिका रही। विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े सौदों ने पूरे सेक्टर की निवेश क्षमता को मजबूती दी और बाजार में सकारात्मक संकेत भेजे।

    अप्रैल से जून 2026 के बीच विलय एवं अधिग्रहण यानी एमएंडए गतिविधियों में भी तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई। इस दौरान 24 एमएंडए डील्स हुईं, जिनकी कुल वैल्यू 1.5 अरब डॉलर रही। तिमाही आधार पर एमएंडए डील्स की संख्या में लगभग 50 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि उनकी वैल्यू करीब पांच गुना बढ़ गई। इससे स्पष्ट होता है कि वित्तीय संस्थानों और निवेशकों ने विस्तार तथा रणनीतिक साझेदारियों पर अधिक ध्यान दिया।

    रिपोर्ट के अनुसार सार्वजनिक बाजार की गतिविधियों को अलग रखने पर बीएफएसआई क्षेत्र में 62 एमएंडए तथा प्राइवेट इक्विटी और वेंचर कैपिटल से जुड़े लेनदेन दर्ज किए गए, जिनकी कुल वैल्यू 2.8 अरब डॉलर रही। यह प्रदर्शन ऐसे समय में सामने आया है जब वैश्विक स्तर पर आर्थिक उतार-चढ़ाव और भू-राजनीतिक परिस्थितियों के कारण निवेश वातावरण पूरी तरह स्थिर नहीं माना जा रहा है। इसके बावजूद भारतीय वित्तीय क्षेत्र में निवेशकों की रुचि बनी रही।

    विशेषज्ञों का मानना है कि निवेशकों ने इस दौरान विशेष रूप से स्केलेबल, तकनीक आधारित और नियामकीय रूप से मजबूत कारोबारों को प्राथमिकता दी। पूंजी निवेश का रुख पहले की तुलना में अधिक संतुलित और सोच-समझकर किया गया। यही कारण रहा कि सीमित निवेश माहौल के बावजूद रणनीतिक डील्स ने पूरे सेक्टर के प्रदर्शन को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

    समीक्षा अवधि के दौरान प्राइवेट इक्विटी और वेंचर कैपिटल गतिविधियों में 38 सौदे दर्ज किए गए, जिनकी कुल वैल्यू 1.3 अरब डॉलर रही। दूसरी ओर, सार्वजनिक बाजार की गतिविधियां अपेक्षाकृत धीमी रहीं। इस दौरान एक प्रारंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) के माध्यम से 97 मिलियन डॉलर जुटाए गए, जबकि दो क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट के जरिए 310 मिलियन डॉलर की पूंजी हासिल की गई। इससे संकेत मिलता है कि निजी निवेश फिलहाल सार्वजनिक पूंजी बाजार की तुलना में अधिक सक्रिय बना हुआ है।

    सेगमेंट के स्तर पर फिनटेक सबसे अधिक सक्रिय क्षेत्र रहा, जहां 31 डील्स के माध्यम से 1.4 अरब डॉलर का निवेश दर्ज किया गया। वहीं वित्तीय सेवाओं और एसेट मैनेजमेंट क्षेत्र में 16 सौदों के जरिए 690 मिलियन डॉलर की डील वैल्यू सामने आई, जो पिछली तिमाही की तुलना में लगभग तीन गुना अधिक रही। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां स्थिर होने और पूंजी बाजार में सुधार आने के साथ भारत का बीएफएसआई इकोसिस्टम आने वाले समय में भी घरेलू और विदेशी निवेशकों के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र बना रह सकता है।

  • भारत में डेटा सेंटर सेक्टर बनेगा रोजगार का नया इंजन, 2030 तक 1 लाख इंजीनियरों की मांग का अनुमान, एआई और क्लाउड टेक्नोलॉजी से बढ़ेगी अवसरों की रफ्तार

    भारत में डेटा सेंटर सेक्टर बनेगा रोजगार का नया इंजन, 2030 तक 1 लाख इंजीनियरों की मांग का अनुमान, एआई और क्लाउड टेक्नोलॉजी से बढ़ेगी अवसरों की रफ्तार

    नई दिल्ली ।भारत में तेजी से बढ़ता डेटा सेंटर उद्योग आने वाले वर्षों में रोजगार सृजन का एक प्रमुख केंद्र बन सकता है। डिजिटल सेवाओं के विस्तार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित तकनीकों के बढ़ते उपयोग और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर की मांग में लगातार वृद्धि के बीच एक नई रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि वर्ष 2030 तक इस क्षेत्र में करीब एक लाख कुशल इंजीनियरों और तकनीकी पेशेवरों की आवश्यकता होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते योग्य मानव संसाधन तैयार किए गए, तो यह क्षेत्र देश की डिजिटल अर्थव्यवस्था को नई गति देने के साथ लाखों युवाओं के लिए करियर के बेहतर अवसर भी उपलब्ध कराएगा।

    रिपोर्ट के अनुसार भारत की स्थापित डेटा सेंटर क्षमता वर्तमान लगभग 1.5 गीगावाट से बढ़कर दशक के अंत तक करीब 6.5 गीगावाट तक पहुंचने की संभावना है। इसी के साथ देश का डेटा सेंटर बाजार 22 अरब डॉलर से अधिक का आकार प्राप्त कर सकता है। बढ़ती डिजिटल सेवाओं, ई-कॉमर्स, वित्तीय तकनीकों, सरकारी डिजिटल परियोजनाओं और एआई आधारित अनुप्रयोगों ने डेटा प्रोसेसिंग और स्टोरेज की जरूरतों को पहले की तुलना में कहीं अधिक बढ़ा दिया है।

    रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि डेटा सेंटर क्षेत्र में अब तक 126 अरब डॉलर से अधिक के निवेश की प्रतिबद्धताएं सामने आ चुकी हैं। लगातार हो रहे निवेश के कारण यह उद्योग देश के सबसे तेजी से विकसित होने वाले इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्रों में शामिल हो गया है। नई परियोजनाओं के शुरू होने से निर्माण, संचालन, रखरखाव और तकनीकी प्रबंधन जैसे अनेक क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ने की उम्मीद है।

    हालांकि रिपोर्ट में यह भी चेतावनी दी गई है कि यदि शिक्षा संस्थानों, उद्योग जगत और नीति-निर्माताओं के बीच बेहतर समन्वय नहीं हुआ तो भविष्य में कुशल पेशेवरों की कमी इस क्षेत्र की प्रगति में बड़ी चुनौती बन सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि बदलती तकनीकों के अनुरूप प्रशिक्षण कार्यक्रम, उद्योग आधारित पाठ्यक्रम और व्यावहारिक कौशल विकास पर विशेष ध्यान देना आवश्यक होगा।

    रिपोर्ट में कहा गया है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार केवल तकनीकी निवेश नहीं, बल्कि भारत के युवाओं के लिए दीर्घकालिक रोजगार और कौशल विकास का बड़ा अवसर है। एआई इंफ्रास्ट्रक्चर, क्लाउड ऑपरेशंस, ऑटोमेशन, पावर सिस्टम और क्रिटिकल फैसिलिटी मैनेजमेंट जैसे क्षेत्रों में विशेषज्ञों की मांग लगातार बढ़ रही है। इसके साथ ही प्लेटफॉर्म इंजीनियरिंग, डेवऑप्स, एमएलऑप्स और डेटा सेंटर ऑटोमेशन जैसी आधुनिक तकनीकी भूमिकाएं भी तेजी से उभर रही हैं।

    अनुमान है कि आने वाले वर्षों में एआई आधारित वर्कलोड भारत की कुल डेटा सेंटर क्षमता का लगभग 30 प्रतिशत हिस्सा बन जाएगा। ऐसे में डेटा सेंटर उद्योग में काम करने वाले इंजीनियरों के लिए एआई इंफ्रास्ट्रक्चर, ऊर्जा दक्षता और आधुनिक कंप्यूटिंग प्रणालियों की समझ आवश्यक कौशल के रूप में विकसित होगी। इससे तकनीकी शिक्षा और उद्योग की आवश्यकताओं के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत भी बढ़ेगी।

    रिपोर्ट के अनुसार भविष्य के डेटा सेंटर केवल डिजिटल स्टोरेज तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि ऊर्जा प्रबंधन, उन्नत कूलिंग सिस्टम और अत्याधुनिक तकनीकी अवसंरचना पर आधारित होंगे। इसी कारण एआई इंफ्रास्ट्रक्चर ऑपरेशंस इंजीनियर, लिक्विड कूलिंग इंजीनियर, एनर्जी ऑप्टिमाइजेशन स्पेशलिस्ट, क्रिटिकल फैसिलिटीज इंजीनियर और पावर सिस्टम विशेषज्ञ जैसे नए पदों की मांग लगातार बढ़ने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भारत समय रहते कुशल कार्यबल तैयार करने में सफल रहता है, तो डेटा सेंटर उद्योग आने वाले वर्षों में देश की डिजिटल अर्थव्यवस्था और रोजगार परिदृश्य दोनों को नई मजबूती प्रदान करेगा।

  • पश्चिम एशिया तनाव से भारतीय शेयर बाजार पर बड़ा असर, सेंसेक्स 561 अंक टूटा, निफ्टी 24,100 के नीचे फिसला, तीन दिन की तेजी थमी

    पश्चिम एशिया तनाव से भारतीय शेयर बाजार पर बड़ा असर, सेंसेक्स 561 अंक टूटा, निफ्टी 24,100 के नीचे फिसला, तीन दिन की तेजी थमी

    नई दिल्ली । पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेतों का असर मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार पर साफ दिखाई दिया। सप्ताह के दूसरे कारोबारी दिन घरेलू बाजार गिरावट के साथ बंद हुआ और लगातार तीन सत्रों से जारी तेजी का सिलसिला टूट गया। निवेशकों ने जोखिम वाले निवेश से दूरी बनाई, जिसके चलते अधिकांश सेक्टरों में बिकवाली हावी रही। कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल और वैश्विक अनिश्चितता ने भी बाजार की धारणा को प्रभावित किया।

    कारोबार समाप्त होने पर बीएसई सेंसेक्स 561.46 अंक यानी 0.72 प्रतिशत की गिरावट के साथ 77,054.94 अंक पर बंद हुआ। वहीं, एनएसई निफ्टी 50 इंडेक्स 158.95 अंक यानी 0.66 प्रतिशत टूटकर 24,052.05 अंक पर पहुंच गया। शुरुआती कारोबार से ही बाजार पर दबाव बना रहा और दिनभर बिकवाली का माहौल देखने को मिला। निवेशकों की सतर्क रणनीति के कारण प्रमुख सूचकांक पूरे सत्र में लाल निशान में कारोबार करते रहे।

    बाजार की व्यापक तस्वीर भी कमजोर रही। कारोबार के दौरान लगभग 1,422 शेयरों में बढ़त दर्ज हुई, जबकि 2,632 शेयर गिरावट के साथ बंद हुए। करीब 190 शेयरों में कोई विशेष बदलाव नहीं आया। व्यापक बाजारों में भी कमजोरी देखने को मिली। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स में 0.44 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में लगभग 1 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इससे यह संकेत मिला कि केवल बड़ी कंपनियों ही नहीं, बल्कि मझोली और छोटी कंपनियों के शेयरों पर भी बिकवाली का दबाव बना रहा।

    सेक्टरवार प्रदर्शन की बात करें तो रियल्टी क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित रहा और इसमें करीब 2 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इसके अलावा पीएसयू बैंक, ऑटो, बैंकिंग और आईटी सेक्टरों में भी उल्लेखनीय कमजोरी देखने को मिली। प्राइवेट बैंक, ऑयल एंड गैस, एफएमसीजी, मीडिया और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े शेयर भी दबाव में रहे। हालांकि फार्मा और मेटल सेक्टर ने बाजार को कुछ राहत दी। फार्मा सूचकांक में लगभग 1 प्रतिशत और मेटल इंडेक्स में 0.60 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई, जिससे इन क्षेत्रों में खरीदारी का रुझान बना रहा।

    निफ्टी 50 में शामिल अधिकांश शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। एचसीएल टेक्नोलॉजीज, श्रीराम फाइनेंस, एचडीएफसी लाइफ, टाटा मोटर्स और इंटरग्लोब एविएशन के शेयर प्रमुख नुकसान वाले शेयरों में शामिल रहे। दूसरी ओर भारती एयरटेल, अपोलो हॉस्पिटल्स, सन फार्मा, टीसीएस और डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज के शेयरों में मजबूती देखने को मिली और ये दिन के प्रमुख बढ़त वाले शेयर रहे। इससे स्पष्ट हुआ कि बाजार में चुनिंदा रक्षात्मक क्षेत्रों में निवेशकों की रुचि बनी रही।

    विदेशी मुद्रा बाजार में भी दबाव देखने को मिला। भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 57 पैसे कमजोर होकर 96.25 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत 4 प्रतिशत से अधिक उछलकर करीब 87 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें भारत जैसे आयात-निर्भर देशों के लिए महंगाई और व्यापार घाटे की चिंता बढ़ा सकती हैं। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष से वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है तो आने वाले कारोबारी सत्रों में भी भारतीय शेयर बाजार पर दबाव बना रह सकता है।

  • प्रत्यक्ष कर संग्रह में मजबूत उछाल, चालू वित्त वर्ष में 7.74 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंचा कलेक्शन, अर्थव्यवस्था की मजबूती के मिले संकेत

    प्रत्यक्ष कर संग्रह में मजबूत उछाल, चालू वित्त वर्ष में 7.74 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंचा कलेक्शन, अर्थव्यवस्था की मजबूती के मिले संकेत


    नई दिल्ली ।
    चालू वित्त वर्ष में भारत के प्रत्यक्ष कर संग्रह में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे देश की आर्थिक गतिविधियों और कर संग्रह व्यवस्था की मजबूती के संकेत मिले हैं। 13 जुलाई तक के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, सकल प्रत्यक्ष कर संग्रह सालाना आधार पर 16.11 प्रतिशत बढ़कर 7.74 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। इस वृद्धि में कॉरपोरेट टैक्स, गैर-कॉरपोरेट टैक्स और सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (एसटीटी) के बेहतर प्रदर्शन की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। कर संग्रह में यह तेजी सरकार के राजस्व आधार को मजबूत करने के साथ-साथ अर्थव्यवस्था में जारी सकारात्मक गतिविधियों को भी दर्शाती है।

    आंकड़ों के अनुसार, रिफंड की राशि को समायोजित करने के बाद शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह 16.4 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 6.51 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया। इसी अवधि में करदाताओं को जारी किए गए रिफंड भी बढ़े हैं और उनका कुल मूल्य 1.22 लाख करोड़ रुपये रहा, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 14.57 प्रतिशत अधिक है। इससे यह संकेत मिलता है कि एक ओर सरकार का कर संग्रह बढ़ रहा है तो दूसरी ओर पात्र करदाताओं को समय पर रिफंड भी जारी किए जा रहे हैं।

    कॉरपोरेट कर संग्रह में भी उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है। रिफंड समायोजन के बाद कॉरपोरेट टैक्स से प्राप्त राजस्व 2.40 लाख करोड़ रुपये दर्ज किया गया, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 1.97 लाख करोड़ रुपये था। वहीं गैर-कॉरपोरेट कर संग्रह बढ़कर 3.85 लाख करोड़ रुपये हो गया, जो एक वर्ष पहले 3.44 लाख करोड़ रुपये था। इससे स्पष्ट होता है कि कंपनियों के साथ-साथ व्यक्तिगत और अन्य श्रेणी के करदाताओं का योगदान भी लगातार बढ़ रहा है।

    यदि सकल कर संग्रह की बात करें तो कॉरपोरेट टैक्स 3.35 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जबकि पिछले वर्ष समान अवधि में यह 2.90 लाख करोड़ रुपये था। इसी प्रकार गैर-कॉरपोरेट कर संग्रह भी बढ़कर 4.12 लाख करोड़ रुपये दर्ज किया गया, जो पिछले वर्ष 3.58 लाख करोड़ रुपये था। यह वृद्धि विभिन्न आर्थिक क्षेत्रों में कारोबार और आय में सुधार का संकेत मानी जा रही है।

    सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स के मोर्चे पर भी मजबूत प्रदर्शन दर्ज किया गया। रिफंड समायोजन के बाद एसटीटी का शुद्ध संग्रह 26,428.96 करोड़ रुपये रहा, जबकि पिछले वर्ष समान अवधि में यह 17,875.88 करोड़ रुपये था। शेयर बाजार में बढ़ी गतिविधियों और निवेशकों की भागीदारी को इस बढ़ोतरी का प्रमुख कारण माना जा रहा है। हालांकि अन्य करों के मद में इस अवधि के दौरान संग्रह मामूली रूप से नकारात्मक दर्ज किया गया।

    प्रत्यक्ष कर के इन आंकड़ों में कॉरपोरेट संस्थाओं के अलावा व्यक्तिगत करदाता, हिंदू अविभाजित परिवार, साझेदारी फर्म, व्यक्तियों के समूह, स्थानीय निकाय तथा अन्य कानूनी संस्थाओं द्वारा जमा किए गए कर भी शामिल हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रत्यक्ष कर संग्रह में लगातार हो रही वृद्धि से सरकार को विकास योजनाओं और सार्वजनिक निवेश के लिए अधिक संसाधन उपलब्ध होंगे। साथ ही यह भी संकेत मिलता है कि देश की आर्थिक गतिविधियां स्थिर गति से आगे बढ़ रही हैं और घरेलू मांग तथा औद्योगिक प्रदर्शन राजस्व वृद्धि को समर्थन दे रहे हैं।

  • वैश्विक अस्थिरता और सप्लाई चेन संकट का असर, भारत में प्रीमियम हाउसिंग की कीमतों में 28% तक उछाल; महानगरों में मजबूत बनी मांग

    वैश्विक अस्थिरता और सप्लाई चेन संकट का असर, भारत में प्रीमियम हाउसिंग की कीमतों में 28% तक उछाल; महानगरों में मजबूत बनी मांग


    नई दिल्ली ।
    वैश्विक स्तर पर बढ़ती आर्थिक अनिश्चितताओं, आपूर्ति श्रृंखलाओं में रुकावट और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद भारत का प्रीमियम आवास बाजार मजबूती के साथ आगे बढ़ रहा है। वर्ष 2026 की पहली छमाही में देश के प्रमुख शहरों में प्रीमियम आवासों की कीमतों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। ताजा बाजार विश्लेषण के अनुसार कई प्रमुख शहरों में प्रीमियम संपत्तियों के मूल्य में सालाना आधार पर 28 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि उच्च आय वर्ग के खरीदार अब बेहतर गुणवत्ता, विश्वसनीय डेवलपर और रणनीतिक लोकेशन वाली परियोजनाओं को प्राथमिकता दे रहे हैं।

    रिपोर्ट के अनुसार मुंबई, नोएडा, गुरुग्राम, बेंगलुरु और दिल्ली जैसे प्रमुख रियल एस्टेट बाजारों में प्रीमियम आवासों की मांग लगातार मजबूत बनी हुई है। निर्माणाधीन प्रीमियम परियोजनाओं की कीमतों में मुंबई में लगभग 10 से 15 प्रतिशत तक वृद्धि दर्ज की गई, जबकि नोएडा में यह बढ़ोतरी 4 से 28 प्रतिशत के बीच रही। गुरुग्राम में करीब 2 प्रतिशत और बेंगलुरु में 3 से 11 प्रतिशत तक की वार्षिक वृद्धि देखी गई। यह संकेत देता है कि विकसित हो रहे शहरी क्षेत्रों और बेहतर कनेक्टिविटी वाले कॉरिडोर में निवेशकों तथा खरीदारों का भरोसा कायम है।

    तैयार प्रीमियम आवासों के बाजार में भी तेजी बनी हुई है। दिल्ली में लग्जरी फ्लोर और तैयार प्रीमियम घरों की औसत कीमतों में 10 से 25 प्रतिशत तक की वृद्धि दर्ज की गई है। बेंगलुरु में यह वृद्धि 8 से 10 प्रतिशत और मुंबई में 2 से 7 प्रतिशत के बीच रही। विशेषज्ञों का मानना है कि तैयार संपत्तियों की बढ़ती मांग उन खरीदारों से आ रही है जो तुरंत रहने योग्य, आधुनिक सुविधाओं से युक्त और उच्च गुणवत्ता वाले घरों की तलाश में हैं।

    रियल एस्टेट क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि बाजार अब केवल तेज कीमत वृद्धि पर आधारित नहीं है, बल्कि दीर्घकालिक मूल्य सृजन की दिशा में आगे बढ़ रहा है। प्रीमियम परियोजनाओं में बेहतर निर्माण गुणवत्ता, आधुनिक डिजाइन, ऊर्जा दक्षता, हरित सुविधाएं और वेलनेस आधारित इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे पहलुओं को अधिक महत्व दिया जा रहा है। यही कारण है कि उच्च आय वर्ग के खरीदार अब केवल संपत्ति खरीदने के बजाय दीर्घकालिक निवेश और बेहतर जीवनशैली को ध्यान में रखकर निर्णय ले रहे हैं।

    बाजार विशेषज्ञों के अनुसार वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में व्यवधान का असर निर्माण सामग्री की लागत पर भी पड़ा है। कच्चे माल की कीमतों में वृद्धि और लॉजिस्टिक लागत बढ़ने से परियोजनाओं की कुल लागत प्रभावित हुई है, जिसका असर प्रीमियम आवासों की कीमतों में भी दिखाई दिया। इसके बावजूद मांग में कमी नहीं आई है, क्योंकि बेहतर आय, मजबूत निवेश क्षमता और गुणवत्तापूर्ण आवासों की बढ़ती आवश्यकता इस वर्ग के बाजार को समर्थन दे रही है।

    विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि खरीदार अब पहले की तुलना में अधिक जागरूक हो चुके हैं। वे परियोजना की लोकेशन, डेवलपर की विश्वसनीयता, निर्माण गुणवत्ता, भविष्य की संभावनाओं और उपलब्ध सुविधाओं का गहन मूल्यांकन करने के बाद ही निवेश का निर्णय ले रहे हैं। इस बदलते रुझान ने डेवलपर्स को भी गुणवत्ता और पारदर्शिता पर अधिक ध्यान देने के लिए प्रेरित किया है।

    रियल एस्टेट बाजार के मौजूदा संकेत बताते हैं कि भारत के प्रीमियम आवास क्षेत्र में आने वाले समय में भी स्थिर मांग बनी रह सकती है। बेहतर शहरी बुनियादी ढांचे, नई कनेक्टिविटी परियोजनाओं, बढ़ती आय और गुणवत्तापूर्ण आवासों की प्राथमिकता के कारण यह वर्ग निवेशकों और खरीदारों दोनों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आर्थिक परिस्थितियां अनुकूल रहीं तो प्रीमियम हाउसिंग बाजार आने वाले वर्षों में भी संतुलित और मजबूत वृद्धि दर्ज कर सकता है।