Author: bharati

  • भारत के बीएफएसआई सेक्टर में निवेश को मिली नई रफ्तार, दूसरी तिमाही में डील वैल्यू 58 प्रतिशत बढ़कर 3.2 अरब डॉलर पहुंची

    भारत के बीएफएसआई सेक्टर में निवेश को मिली नई रफ्तार, दूसरी तिमाही में डील वैल्यू 58 प्रतिशत बढ़कर 3.2 अरब डॉलर पहुंची

    नई दिल्ली ।भारत के बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं और बीमा (बीएफएसआई) क्षेत्र में वित्त वर्ष 2026 की दूसरी तिमाही के दौरान निवेश गतिविधियों में उल्लेखनीय तेजी देखने को मिली है। इस अवधि में कुल 65 डील्स दर्ज की गईं, जिनकी संयुक्त वैल्यू 3.2 अरब डॉलर रही। तिमाही आधार पर यह मूल्य लगभग 58 प्रतिशत अधिक रहा, जो इस क्षेत्र में निवेशकों के बढ़ते विश्वास और रणनीतिक सौदों की सक्रियता को दर्शाता है। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बावजूद भारतीय वित्तीय सेवाओं का बाजार निवेश आकर्षित करने में सक्षम बना हुआ है।

    तिमाही समीक्षा के अनुसार इस अवधि में बीएफएसआई सेक्टर की हिस्सेदारी कुल डील वॉल्यूम का लगभग 11 प्रतिशत और कुल डील वैल्यू का 8 प्रतिशत रही। डील वैल्यू में आई उल्लेखनीय वृद्धि के पीछे एक बड़े रणनीतिक ट्रांजैक्शन की महत्वपूर्ण भूमिका रही। विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े सौदों ने पूरे सेक्टर की निवेश क्षमता को मजबूती दी और बाजार में सकारात्मक संकेत भेजे।

    अप्रैल से जून 2026 के बीच विलय एवं अधिग्रहण यानी एमएंडए गतिविधियों में भी तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई। इस दौरान 24 एमएंडए डील्स हुईं, जिनकी कुल वैल्यू 1.5 अरब डॉलर रही। तिमाही आधार पर एमएंडए डील्स की संख्या में लगभग 50 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि उनकी वैल्यू करीब पांच गुना बढ़ गई। इससे स्पष्ट होता है कि वित्तीय संस्थानों और निवेशकों ने विस्तार तथा रणनीतिक साझेदारियों पर अधिक ध्यान दिया।

    रिपोर्ट के अनुसार सार्वजनिक बाजार की गतिविधियों को अलग रखने पर बीएफएसआई क्षेत्र में 62 एमएंडए तथा प्राइवेट इक्विटी और वेंचर कैपिटल से जुड़े लेनदेन दर्ज किए गए, जिनकी कुल वैल्यू 2.8 अरब डॉलर रही। यह प्रदर्शन ऐसे समय में सामने आया है जब वैश्विक स्तर पर आर्थिक उतार-चढ़ाव और भू-राजनीतिक परिस्थितियों के कारण निवेश वातावरण पूरी तरह स्थिर नहीं माना जा रहा है। इसके बावजूद भारतीय वित्तीय क्षेत्र में निवेशकों की रुचि बनी रही।

    विशेषज्ञों का मानना है कि निवेशकों ने इस दौरान विशेष रूप से स्केलेबल, तकनीक आधारित और नियामकीय रूप से मजबूत कारोबारों को प्राथमिकता दी। पूंजी निवेश का रुख पहले की तुलना में अधिक संतुलित और सोच-समझकर किया गया। यही कारण रहा कि सीमित निवेश माहौल के बावजूद रणनीतिक डील्स ने पूरे सेक्टर के प्रदर्शन को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

    समीक्षा अवधि के दौरान प्राइवेट इक्विटी और वेंचर कैपिटल गतिविधियों में 38 सौदे दर्ज किए गए, जिनकी कुल वैल्यू 1.3 अरब डॉलर रही। दूसरी ओर, सार्वजनिक बाजार की गतिविधियां अपेक्षाकृत धीमी रहीं। इस दौरान एक प्रारंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) के माध्यम से 97 मिलियन डॉलर जुटाए गए, जबकि दो क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट के जरिए 310 मिलियन डॉलर की पूंजी हासिल की गई। इससे संकेत मिलता है कि निजी निवेश फिलहाल सार्वजनिक पूंजी बाजार की तुलना में अधिक सक्रिय बना हुआ है।

    सेगमेंट के स्तर पर फिनटेक सबसे अधिक सक्रिय क्षेत्र रहा, जहां 31 डील्स के माध्यम से 1.4 अरब डॉलर का निवेश दर्ज किया गया। वहीं वित्तीय सेवाओं और एसेट मैनेजमेंट क्षेत्र में 16 सौदों के जरिए 690 मिलियन डॉलर की डील वैल्यू सामने आई, जो पिछली तिमाही की तुलना में लगभग तीन गुना अधिक रही। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां स्थिर होने और पूंजी बाजार में सुधार आने के साथ भारत का बीएफएसआई इकोसिस्टम आने वाले समय में भी घरेलू और विदेशी निवेशकों के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र बना रह सकता है।

  • भारत में डेटा सेंटर सेक्टर बनेगा रोजगार का नया इंजन, 2030 तक 1 लाख इंजीनियरों की मांग का अनुमान, एआई और क्लाउड टेक्नोलॉजी से बढ़ेगी अवसरों की रफ्तार

    भारत में डेटा सेंटर सेक्टर बनेगा रोजगार का नया इंजन, 2030 तक 1 लाख इंजीनियरों की मांग का अनुमान, एआई और क्लाउड टेक्नोलॉजी से बढ़ेगी अवसरों की रफ्तार

    नई दिल्ली ।भारत में तेजी से बढ़ता डेटा सेंटर उद्योग आने वाले वर्षों में रोजगार सृजन का एक प्रमुख केंद्र बन सकता है। डिजिटल सेवाओं के विस्तार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित तकनीकों के बढ़ते उपयोग और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर की मांग में लगातार वृद्धि के बीच एक नई रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि वर्ष 2030 तक इस क्षेत्र में करीब एक लाख कुशल इंजीनियरों और तकनीकी पेशेवरों की आवश्यकता होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते योग्य मानव संसाधन तैयार किए गए, तो यह क्षेत्र देश की डिजिटल अर्थव्यवस्था को नई गति देने के साथ लाखों युवाओं के लिए करियर के बेहतर अवसर भी उपलब्ध कराएगा।

    रिपोर्ट के अनुसार भारत की स्थापित डेटा सेंटर क्षमता वर्तमान लगभग 1.5 गीगावाट से बढ़कर दशक के अंत तक करीब 6.5 गीगावाट तक पहुंचने की संभावना है। इसी के साथ देश का डेटा सेंटर बाजार 22 अरब डॉलर से अधिक का आकार प्राप्त कर सकता है। बढ़ती डिजिटल सेवाओं, ई-कॉमर्स, वित्तीय तकनीकों, सरकारी डिजिटल परियोजनाओं और एआई आधारित अनुप्रयोगों ने डेटा प्रोसेसिंग और स्टोरेज की जरूरतों को पहले की तुलना में कहीं अधिक बढ़ा दिया है।

    रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि डेटा सेंटर क्षेत्र में अब तक 126 अरब डॉलर से अधिक के निवेश की प्रतिबद्धताएं सामने आ चुकी हैं। लगातार हो रहे निवेश के कारण यह उद्योग देश के सबसे तेजी से विकसित होने वाले इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्रों में शामिल हो गया है। नई परियोजनाओं के शुरू होने से निर्माण, संचालन, रखरखाव और तकनीकी प्रबंधन जैसे अनेक क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ने की उम्मीद है।

    हालांकि रिपोर्ट में यह भी चेतावनी दी गई है कि यदि शिक्षा संस्थानों, उद्योग जगत और नीति-निर्माताओं के बीच बेहतर समन्वय नहीं हुआ तो भविष्य में कुशल पेशेवरों की कमी इस क्षेत्र की प्रगति में बड़ी चुनौती बन सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि बदलती तकनीकों के अनुरूप प्रशिक्षण कार्यक्रम, उद्योग आधारित पाठ्यक्रम और व्यावहारिक कौशल विकास पर विशेष ध्यान देना आवश्यक होगा।

    रिपोर्ट में कहा गया है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार केवल तकनीकी निवेश नहीं, बल्कि भारत के युवाओं के लिए दीर्घकालिक रोजगार और कौशल विकास का बड़ा अवसर है। एआई इंफ्रास्ट्रक्चर, क्लाउड ऑपरेशंस, ऑटोमेशन, पावर सिस्टम और क्रिटिकल फैसिलिटी मैनेजमेंट जैसे क्षेत्रों में विशेषज्ञों की मांग लगातार बढ़ रही है। इसके साथ ही प्लेटफॉर्म इंजीनियरिंग, डेवऑप्स, एमएलऑप्स और डेटा सेंटर ऑटोमेशन जैसी आधुनिक तकनीकी भूमिकाएं भी तेजी से उभर रही हैं।

    अनुमान है कि आने वाले वर्षों में एआई आधारित वर्कलोड भारत की कुल डेटा सेंटर क्षमता का लगभग 30 प्रतिशत हिस्सा बन जाएगा। ऐसे में डेटा सेंटर उद्योग में काम करने वाले इंजीनियरों के लिए एआई इंफ्रास्ट्रक्चर, ऊर्जा दक्षता और आधुनिक कंप्यूटिंग प्रणालियों की समझ आवश्यक कौशल के रूप में विकसित होगी। इससे तकनीकी शिक्षा और उद्योग की आवश्यकताओं के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत भी बढ़ेगी।

    रिपोर्ट के अनुसार भविष्य के डेटा सेंटर केवल डिजिटल स्टोरेज तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि ऊर्जा प्रबंधन, उन्नत कूलिंग सिस्टम और अत्याधुनिक तकनीकी अवसंरचना पर आधारित होंगे। इसी कारण एआई इंफ्रास्ट्रक्चर ऑपरेशंस इंजीनियर, लिक्विड कूलिंग इंजीनियर, एनर्जी ऑप्टिमाइजेशन स्पेशलिस्ट, क्रिटिकल फैसिलिटीज इंजीनियर और पावर सिस्टम विशेषज्ञ जैसे नए पदों की मांग लगातार बढ़ने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भारत समय रहते कुशल कार्यबल तैयार करने में सफल रहता है, तो डेटा सेंटर उद्योग आने वाले वर्षों में देश की डिजिटल अर्थव्यवस्था और रोजगार परिदृश्य दोनों को नई मजबूती प्रदान करेगा।

  • पश्चिम एशिया तनाव से भारतीय शेयर बाजार पर बड़ा असर, सेंसेक्स 561 अंक टूटा, निफ्टी 24,100 के नीचे फिसला, तीन दिन की तेजी थमी

    पश्चिम एशिया तनाव से भारतीय शेयर बाजार पर बड़ा असर, सेंसेक्स 561 अंक टूटा, निफ्टी 24,100 के नीचे फिसला, तीन दिन की तेजी थमी

    नई दिल्ली । पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेतों का असर मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार पर साफ दिखाई दिया। सप्ताह के दूसरे कारोबारी दिन घरेलू बाजार गिरावट के साथ बंद हुआ और लगातार तीन सत्रों से जारी तेजी का सिलसिला टूट गया। निवेशकों ने जोखिम वाले निवेश से दूरी बनाई, जिसके चलते अधिकांश सेक्टरों में बिकवाली हावी रही। कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल और वैश्विक अनिश्चितता ने भी बाजार की धारणा को प्रभावित किया।

    कारोबार समाप्त होने पर बीएसई सेंसेक्स 561.46 अंक यानी 0.72 प्रतिशत की गिरावट के साथ 77,054.94 अंक पर बंद हुआ। वहीं, एनएसई निफ्टी 50 इंडेक्स 158.95 अंक यानी 0.66 प्रतिशत टूटकर 24,052.05 अंक पर पहुंच गया। शुरुआती कारोबार से ही बाजार पर दबाव बना रहा और दिनभर बिकवाली का माहौल देखने को मिला। निवेशकों की सतर्क रणनीति के कारण प्रमुख सूचकांक पूरे सत्र में लाल निशान में कारोबार करते रहे।

    बाजार की व्यापक तस्वीर भी कमजोर रही। कारोबार के दौरान लगभग 1,422 शेयरों में बढ़त दर्ज हुई, जबकि 2,632 शेयर गिरावट के साथ बंद हुए। करीब 190 शेयरों में कोई विशेष बदलाव नहीं आया। व्यापक बाजारों में भी कमजोरी देखने को मिली। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स में 0.44 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में लगभग 1 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इससे यह संकेत मिला कि केवल बड़ी कंपनियों ही नहीं, बल्कि मझोली और छोटी कंपनियों के शेयरों पर भी बिकवाली का दबाव बना रहा।

    सेक्टरवार प्रदर्शन की बात करें तो रियल्टी क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित रहा और इसमें करीब 2 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इसके अलावा पीएसयू बैंक, ऑटो, बैंकिंग और आईटी सेक्टरों में भी उल्लेखनीय कमजोरी देखने को मिली। प्राइवेट बैंक, ऑयल एंड गैस, एफएमसीजी, मीडिया और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े शेयर भी दबाव में रहे। हालांकि फार्मा और मेटल सेक्टर ने बाजार को कुछ राहत दी। फार्मा सूचकांक में लगभग 1 प्रतिशत और मेटल इंडेक्स में 0.60 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई, जिससे इन क्षेत्रों में खरीदारी का रुझान बना रहा।

    निफ्टी 50 में शामिल अधिकांश शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। एचसीएल टेक्नोलॉजीज, श्रीराम फाइनेंस, एचडीएफसी लाइफ, टाटा मोटर्स और इंटरग्लोब एविएशन के शेयर प्रमुख नुकसान वाले शेयरों में शामिल रहे। दूसरी ओर भारती एयरटेल, अपोलो हॉस्पिटल्स, सन फार्मा, टीसीएस और डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज के शेयरों में मजबूती देखने को मिली और ये दिन के प्रमुख बढ़त वाले शेयर रहे। इससे स्पष्ट हुआ कि बाजार में चुनिंदा रक्षात्मक क्षेत्रों में निवेशकों की रुचि बनी रही।

    विदेशी मुद्रा बाजार में भी दबाव देखने को मिला। भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 57 पैसे कमजोर होकर 96.25 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत 4 प्रतिशत से अधिक उछलकर करीब 87 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें भारत जैसे आयात-निर्भर देशों के लिए महंगाई और व्यापार घाटे की चिंता बढ़ा सकती हैं। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष से वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है तो आने वाले कारोबारी सत्रों में भी भारतीय शेयर बाजार पर दबाव बना रह सकता है।

  • प्रत्यक्ष कर संग्रह में मजबूत उछाल, चालू वित्त वर्ष में 7.74 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंचा कलेक्शन, अर्थव्यवस्था की मजबूती के मिले संकेत

    प्रत्यक्ष कर संग्रह में मजबूत उछाल, चालू वित्त वर्ष में 7.74 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंचा कलेक्शन, अर्थव्यवस्था की मजबूती के मिले संकेत


    नई दिल्ली ।
    चालू वित्त वर्ष में भारत के प्रत्यक्ष कर संग्रह में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे देश की आर्थिक गतिविधियों और कर संग्रह व्यवस्था की मजबूती के संकेत मिले हैं। 13 जुलाई तक के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, सकल प्रत्यक्ष कर संग्रह सालाना आधार पर 16.11 प्रतिशत बढ़कर 7.74 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। इस वृद्धि में कॉरपोरेट टैक्स, गैर-कॉरपोरेट टैक्स और सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (एसटीटी) के बेहतर प्रदर्शन की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। कर संग्रह में यह तेजी सरकार के राजस्व आधार को मजबूत करने के साथ-साथ अर्थव्यवस्था में जारी सकारात्मक गतिविधियों को भी दर्शाती है।

    आंकड़ों के अनुसार, रिफंड की राशि को समायोजित करने के बाद शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह 16.4 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 6.51 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया। इसी अवधि में करदाताओं को जारी किए गए रिफंड भी बढ़े हैं और उनका कुल मूल्य 1.22 लाख करोड़ रुपये रहा, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 14.57 प्रतिशत अधिक है। इससे यह संकेत मिलता है कि एक ओर सरकार का कर संग्रह बढ़ रहा है तो दूसरी ओर पात्र करदाताओं को समय पर रिफंड भी जारी किए जा रहे हैं।

    कॉरपोरेट कर संग्रह में भी उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है। रिफंड समायोजन के बाद कॉरपोरेट टैक्स से प्राप्त राजस्व 2.40 लाख करोड़ रुपये दर्ज किया गया, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 1.97 लाख करोड़ रुपये था। वहीं गैर-कॉरपोरेट कर संग्रह बढ़कर 3.85 लाख करोड़ रुपये हो गया, जो एक वर्ष पहले 3.44 लाख करोड़ रुपये था। इससे स्पष्ट होता है कि कंपनियों के साथ-साथ व्यक्तिगत और अन्य श्रेणी के करदाताओं का योगदान भी लगातार बढ़ रहा है।

    यदि सकल कर संग्रह की बात करें तो कॉरपोरेट टैक्स 3.35 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जबकि पिछले वर्ष समान अवधि में यह 2.90 लाख करोड़ रुपये था। इसी प्रकार गैर-कॉरपोरेट कर संग्रह भी बढ़कर 4.12 लाख करोड़ रुपये दर्ज किया गया, जो पिछले वर्ष 3.58 लाख करोड़ रुपये था। यह वृद्धि विभिन्न आर्थिक क्षेत्रों में कारोबार और आय में सुधार का संकेत मानी जा रही है।

    सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स के मोर्चे पर भी मजबूत प्रदर्शन दर्ज किया गया। रिफंड समायोजन के बाद एसटीटी का शुद्ध संग्रह 26,428.96 करोड़ रुपये रहा, जबकि पिछले वर्ष समान अवधि में यह 17,875.88 करोड़ रुपये था। शेयर बाजार में बढ़ी गतिविधियों और निवेशकों की भागीदारी को इस बढ़ोतरी का प्रमुख कारण माना जा रहा है। हालांकि अन्य करों के मद में इस अवधि के दौरान संग्रह मामूली रूप से नकारात्मक दर्ज किया गया।

    प्रत्यक्ष कर के इन आंकड़ों में कॉरपोरेट संस्थाओं के अलावा व्यक्तिगत करदाता, हिंदू अविभाजित परिवार, साझेदारी फर्म, व्यक्तियों के समूह, स्थानीय निकाय तथा अन्य कानूनी संस्थाओं द्वारा जमा किए गए कर भी शामिल हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रत्यक्ष कर संग्रह में लगातार हो रही वृद्धि से सरकार को विकास योजनाओं और सार्वजनिक निवेश के लिए अधिक संसाधन उपलब्ध होंगे। साथ ही यह भी संकेत मिलता है कि देश की आर्थिक गतिविधियां स्थिर गति से आगे बढ़ रही हैं और घरेलू मांग तथा औद्योगिक प्रदर्शन राजस्व वृद्धि को समर्थन दे रहे हैं।

  • वैश्विक अस्थिरता और सप्लाई चेन संकट का असर, भारत में प्रीमियम हाउसिंग की कीमतों में 28% तक उछाल; महानगरों में मजबूत बनी मांग

    वैश्विक अस्थिरता और सप्लाई चेन संकट का असर, भारत में प्रीमियम हाउसिंग की कीमतों में 28% तक उछाल; महानगरों में मजबूत बनी मांग


    नई दिल्ली ।
    वैश्विक स्तर पर बढ़ती आर्थिक अनिश्चितताओं, आपूर्ति श्रृंखलाओं में रुकावट और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद भारत का प्रीमियम आवास बाजार मजबूती के साथ आगे बढ़ रहा है। वर्ष 2026 की पहली छमाही में देश के प्रमुख शहरों में प्रीमियम आवासों की कीमतों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। ताजा बाजार विश्लेषण के अनुसार कई प्रमुख शहरों में प्रीमियम संपत्तियों के मूल्य में सालाना आधार पर 28 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि उच्च आय वर्ग के खरीदार अब बेहतर गुणवत्ता, विश्वसनीय डेवलपर और रणनीतिक लोकेशन वाली परियोजनाओं को प्राथमिकता दे रहे हैं।

    रिपोर्ट के अनुसार मुंबई, नोएडा, गुरुग्राम, बेंगलुरु और दिल्ली जैसे प्रमुख रियल एस्टेट बाजारों में प्रीमियम आवासों की मांग लगातार मजबूत बनी हुई है। निर्माणाधीन प्रीमियम परियोजनाओं की कीमतों में मुंबई में लगभग 10 से 15 प्रतिशत तक वृद्धि दर्ज की गई, जबकि नोएडा में यह बढ़ोतरी 4 से 28 प्रतिशत के बीच रही। गुरुग्राम में करीब 2 प्रतिशत और बेंगलुरु में 3 से 11 प्रतिशत तक की वार्षिक वृद्धि देखी गई। यह संकेत देता है कि विकसित हो रहे शहरी क्षेत्रों और बेहतर कनेक्टिविटी वाले कॉरिडोर में निवेशकों तथा खरीदारों का भरोसा कायम है।

    तैयार प्रीमियम आवासों के बाजार में भी तेजी बनी हुई है। दिल्ली में लग्जरी फ्लोर और तैयार प्रीमियम घरों की औसत कीमतों में 10 से 25 प्रतिशत तक की वृद्धि दर्ज की गई है। बेंगलुरु में यह वृद्धि 8 से 10 प्रतिशत और मुंबई में 2 से 7 प्रतिशत के बीच रही। विशेषज्ञों का मानना है कि तैयार संपत्तियों की बढ़ती मांग उन खरीदारों से आ रही है जो तुरंत रहने योग्य, आधुनिक सुविधाओं से युक्त और उच्च गुणवत्ता वाले घरों की तलाश में हैं।

    रियल एस्टेट क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि बाजार अब केवल तेज कीमत वृद्धि पर आधारित नहीं है, बल्कि दीर्घकालिक मूल्य सृजन की दिशा में आगे बढ़ रहा है। प्रीमियम परियोजनाओं में बेहतर निर्माण गुणवत्ता, आधुनिक डिजाइन, ऊर्जा दक्षता, हरित सुविधाएं और वेलनेस आधारित इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे पहलुओं को अधिक महत्व दिया जा रहा है। यही कारण है कि उच्च आय वर्ग के खरीदार अब केवल संपत्ति खरीदने के बजाय दीर्घकालिक निवेश और बेहतर जीवनशैली को ध्यान में रखकर निर्णय ले रहे हैं।

    बाजार विशेषज्ञों के अनुसार वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में व्यवधान का असर निर्माण सामग्री की लागत पर भी पड़ा है। कच्चे माल की कीमतों में वृद्धि और लॉजिस्टिक लागत बढ़ने से परियोजनाओं की कुल लागत प्रभावित हुई है, जिसका असर प्रीमियम आवासों की कीमतों में भी दिखाई दिया। इसके बावजूद मांग में कमी नहीं आई है, क्योंकि बेहतर आय, मजबूत निवेश क्षमता और गुणवत्तापूर्ण आवासों की बढ़ती आवश्यकता इस वर्ग के बाजार को समर्थन दे रही है।

    विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि खरीदार अब पहले की तुलना में अधिक जागरूक हो चुके हैं। वे परियोजना की लोकेशन, डेवलपर की विश्वसनीयता, निर्माण गुणवत्ता, भविष्य की संभावनाओं और उपलब्ध सुविधाओं का गहन मूल्यांकन करने के बाद ही निवेश का निर्णय ले रहे हैं। इस बदलते रुझान ने डेवलपर्स को भी गुणवत्ता और पारदर्शिता पर अधिक ध्यान देने के लिए प्रेरित किया है।

    रियल एस्टेट बाजार के मौजूदा संकेत बताते हैं कि भारत के प्रीमियम आवास क्षेत्र में आने वाले समय में भी स्थिर मांग बनी रह सकती है। बेहतर शहरी बुनियादी ढांचे, नई कनेक्टिविटी परियोजनाओं, बढ़ती आय और गुणवत्तापूर्ण आवासों की प्राथमिकता के कारण यह वर्ग निवेशकों और खरीदारों दोनों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आर्थिक परिस्थितियां अनुकूल रहीं तो प्रीमियम हाउसिंग बाजार आने वाले वर्षों में भी संतुलित और मजबूत वृद्धि दर्ज कर सकता है।

  • 7 साल बाद बड़े पर्दे पर लौटेंगे गोविंदा, नई फिल्म 'रूपा' से करेंगे दमदार कमबैक; बोले- लोगों ने खत्म मान लिया था,

    7 साल बाद बड़े पर्दे पर लौटेंगे गोविंदा, नई फिल्म 'रूपा' से करेंगे दमदार कमबैक; बोले- लोगों ने खत्म मान लिया था,

    नई दिल्ली । हिंदी सिनेमा के लोकप्रिय अभिनेता गोविंदा ने लंबे अंतराल के बाद अपने प्रशंसकों को बड़ी खुशखबरी दी है। करीब सात वर्षों तक फिल्मों से दूर रहने के बाद उन्होंने अपनी नई फिल्म ‘रूपा’ का ऐलान कर दिया है। इस फिल्म के जरिए वह एक बार फिर बड़े पर्दे पर वापसी करेंगे। खास बात यह है कि गोविंदा इस परियोजना में केवल अभिनेता के रूप में ही नहीं, बल्कि निर्माता के तौर पर भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। फिल्म की घोषणा के दौरान उन्होंने अपने करियर, संघर्ष और भविष्य की योजनाओं को लेकर खुलकर अपनी बात रखी।

    फिल्म की घोषणा के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में गोविंदा ने कहा कि समय-समय पर लोगों ने यह मान लिया था कि अब उनकी फिल्मी यात्रा समाप्त हो चुकी है। उन्होंने स्वीकार किया कि पिछले कुछ वर्षों में उनके करियर में कई उतार-चढ़ाव आए, लेकिन उन्होंने कभी उम्मीद नहीं छोड़ी। अभिनेता ने विश्वास जताया कि ‘रूपा’ उनके करियर में एक नई शुरुआत साबित होगी और दर्शकों को एक अलग अनुभव देने में सफल रहेगी। उन्होंने कहा कि हर कलाकार के जीवन में चुनौतीपूर्ण दौर आता है, लेकिन मेहनत और आत्मविश्वास के दम पर वापसी हमेशा संभव होती है।

    गोविंदा ने बताया कि ‘रूपा’ केवल मनोरंजन तक सीमित फिल्म नहीं होगी, बल्कि इसमें ऐसा संदेश भी होगा जो विशेष रूप से युवा पीढ़ी को प्रेरित करेगा। उनके अनुसार फिल्म की कहानी सपनों, संघर्ष और आत्मविश्वास के इर्द-गिर्द बुनी गई है। उन्होंने कहा कि यदि युवा अपने लक्ष्य पर विश्वास बनाए रखें और लगातार प्रयास करें तो सफलता अवश्य मिलती है। इसी सोच को फिल्म के माध्यम से दर्शकों तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा।

    फिल्म की एक और खास बात नई अभिनेत्री रानी स्वर्णकार का बॉलीवुड में पदार्पण है। गोविंदा ने उन्हें फिल्म की मुख्य अभिनेत्री के रूप में प्रस्तुत करते हुए कहा कि नए कलाकारों को अवसर देना भी इस परियोजना का महत्वपूर्ण उद्देश्य है। उन्होंने विश्वास जताया कि रानी अपने अभिनय से दर्शकों के बीच अलग पहचान बनाने में सफल होंगी। फिल्म के जरिए एक अनुभवी अभिनेता और एक नई प्रतिभा की जोड़ी पहली बार बड़े पर्दे पर नजर आएगी।

    कार्यक्रम के दौरान गोविंदा ने अपनी जिंदगी में अंक 14 के महत्व का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि यह संख्या उनके जीवन में कई बार शुभ साबित हुई है। अभिनेता के अनुसार कम उम्र से ही उनका इस अंक पर विश्वास रहा है और करियर के कई महत्वपूर्ण पड़ाव इससे जुड़े रहे हैं। उन्होंने कहा कि जीवन में सफलता और संघर्ष दोनों का दौर आया, लेकिन हर अनुभव ने उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। अब वह नए उत्साह और सकारात्मक सोच के साथ अपने फिल्मी सफर की नई शुरुआत कर रहे हैं।

    गोविंदा ने अपने अभिनय करियर की शुरुआत वर्ष 1986 में की थी और इसके बाद उन्होंने हिंदी सिनेमा को कई यादगार फिल्में दीं। अपनी शानदार कॉमिक टाइमिंग, दमदार अभिनय और बेहतरीन डांस शैली के कारण उन्होंने लंबे समय तक दर्शकों के दिलों पर राज किया। 1990 के दशक में वह हिंदी फिल्म उद्योग के सबसे लोकप्रिय सितारों में गिने जाते थे और उनकी कई फिल्में व्यावसायिक रूप से बड़ी सफल रहीं। हालांकि, बाद के वर्षों में उनकी फिल्मों की संख्या कम होती गई और वह लंबे समय तक बड़े पर्दे से दूर रहे।

    अब ‘रूपा’ के साथ गोविंदा की वापसी को उनके प्रशंसकों के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर माना जा रहा है। अभिनेता को उम्मीद है कि यह फिल्म न केवल उनके करियर को नई दिशा देगी, बल्कि दर्शकों के बीच भी एक सकारात्मक संदेश छोड़ने में सफल होगी। लंबे अंतराल के बाद उनकी वापसी को लेकर फिल्म प्रेमियों में उत्सुकता बढ़ गई है और अब सभी की निगाहें इस नई परियोजना की रिलीज पर टिकी हैं।

  • रणबीर कपूर का पुणे में बड़ा निवेश, 16.42 करोड़ रुपये में खरीदी 25 एकड़ से अधिक जमीन, रियल एस्टेट पोर्टफोलियो को मिला नया विस्तार

    रणबीर कपूर का पुणे में बड़ा निवेश, 16.42 करोड़ रुपये में खरीदी 25 एकड़ से अधिक जमीन, रियल एस्टेट पोर्टफोलियो को मिला नया विस्तार

    नई दिल्ली ।बॉलीवुड अभिनेता रणबीर कपूर ने फिल्मों के साथ-साथ रियल एस्टेट निवेश के क्षेत्र में भी एक बड़ा कदम उठाया है। अयोध्या में जमीन खरीदने के बाद अब उन्होंने महाराष्ट्र के पुणे जिले के मुलशी तालुका में करीब 25.7 एकड़ भूमि खरीदकर अपने निवेश पोर्टफोलियो का विस्तार किया है। इस सौदे की कुल कीमत 16.42 करोड़ रुपये बताई गई है। यह निवेश ऐसे समय में सामने आया है जब देश के प्रमुख शहरों और पर्यटन क्षेत्रों के आसपास भूमि निवेश को लेकर रुचि लगातार बढ़ रही है।

    उपलब्ध पंजीकरण दस्तावेजों के अनुसार यह भूमि पुणे के मुलशी तालुका स्थित पिंपरी गांव में खरीदी गई है। इस पूरी डील का पंजीकरण 30 अप्रैल 2026 को कराया गया था। खरीदी गई संपत्ति चार अलग-अलग लेकिन आपस में जुड़े भूखंडों से मिलकर बनी है। इन सभी प्लॉटों का कुल क्षेत्रफल लगभग 1,04,000 वर्ग मीटर है, जो करीब 25.7 एकड़ के बराबर है। एक साथ जुड़े हुए इन भूखंडों को भविष्य की संभावित विकास योजनाओं के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    दस्तावेजों के अनुसार सबसे बड़ा भूखंड लगभग 43,800 वर्ग मीटर का है, जिसकी खरीद 7.07 करोड़ रुपये में की गई। दूसरा प्लॉट करीब 29,900 वर्ग मीटर का है और इसकी कीमत 4.62 करोड़ रुपये दर्ज की गई है। तीसरे भूखंड का क्षेत्रफल लगभग 21,400 वर्ग मीटर है, जिसे 3.31 करोड़ रुपये में खरीदा गया। वहीं सबसे छोटा 8,900 वर्ग मीटर का प्लॉट 1.39 करोड़ रुपये में खरीदा गया। चारों भूखंड एक-दूसरे से जुड़े होने के कारण यह सौदा एकीकृत भूमि निवेश के रूप में देखा जा रहा है।

    इस खरीद के लिए रणबीर कपूर ने 82.13 लाख रुपये का स्टाम्प शुल्क भी अदा किया है। हालांकि इस पूरे लेनदेन को लेकर अभिनेता या उनकी टीम की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया जारी नहीं की गई है। ऐसे में इस भूमि के संभावित उपयोग को लेकर किसी प्रकार की पुष्टि नहीं हुई है। फिलहाल उपलब्ध जानकारी केवल संपत्ति पंजीकरण से जुड़े आधिकारिक दस्तावेजों तक सीमित है।

    रणबीर कपूर इससे पहले भी रियल एस्टेट में निवेश कर चुके हैं। उन्होंने अयोध्या में विकसित हो रही एक प्रीमियम टाउनशिप में लगभग 3.31 करोड़ रुपये का प्लॉट खरीदा था। यह भूमि सरयू नदी के निकट विकसित की जा रही परियोजना का हिस्सा है, जहां आधुनिक आवासीय सुविधाओं और लाइफस्टाइल इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास की योजना बनाई गई है। लगातार दूसरे बड़े भूमि निवेश ने यह संकेत दिया है कि अभिनेता दीर्घकालिक संपत्ति निवेश पर विशेष ध्यान दे रहे हैं।

    वर्कफ्रंट की बात करें तो रणबीर कपूर अपनी आगामी फिल्म ‘रामायण’ को लेकर भी लगातार चर्चा में हैं। इस बहुप्रतीक्षित फिल्म में वह भगवान राम की भूमिका निभाते नजर आएंगे। फिल्म का निर्देशन नितेश तिवारी कर रहे हैं और इसमें साई पल्लवी, यश, सनी देओल तथा रवि दुबे भी महत्वपूर्ण भूमिकाओं में दिखाई देंगे। यह फिल्म दो भागों में रिलीज होगी, जिसमें पहला भाग दीपावली 2026 और दूसरा भाग दीपावली 2027 के अवसर पर सिनेमाघरों में प्रदर्शित किया जाएगा। ऐसे में एक ओर जहां उनका फिल्मी करियर नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रहा है, वहीं दूसरी ओर रियल एस्टेट क्षेत्र में उनका बढ़ता निवेश भी चर्चा का विषय बना हुआ है।

  • बीमारी पर टिप्पणी से भड़कीं हिना खान, शिल्पा शिंदे के बयानों का दिया करारा जवाब, रॉकी जायसवाल ने भी पुराने विवाद उठाकर लगाए गंभीर सवाल

    बीमारी पर टिप्पणी से भड़कीं हिना खान, शिल्पा शिंदे के बयानों का दिया करारा जवाब, रॉकी जायसवाल ने भी पुराने विवाद उठाकर लगाए गंभीर सवाल

    नई दिल्ली ।टेलीविजन जगत की दो चर्चित अभिनेत्रियों हिना खान और शिल्पा शिंदे के बीच शुरू हुआ विवाद अब खुलकर सामने आ गया है। हाल ही में शिल्पा शिंदे द्वारा हिना खान की कैंसर से जुड़ी यात्रा पर की गई टिप्पणी के बाद दोनों के बीच बयानबाजी तेज हो गई है। इस पूरे मामले में हिना खान ने सार्वजनिक रूप से अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि किसी भी व्यक्ति की गंभीर बीमारी पर सवाल उठाना या उसका मजाक बनाना संवेदनशीलता की कमी को दर्शाता है। उनके साथ पति रॉकी जायसवाल ने भी इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कई गंभीर सवाल उठाए।

    विवाद की शुरुआत उस समय हुई जब शिल्पा शिंदे ने हिना खान की कैंसर से जुड़ी सार्वजनिक जानकारी पर सवाल उठाए। उन्होंने यह टिप्पणी की कि बीमारी को लेकर जिस तरह से बातें सामने आईं, उस पर उन्हें संदेह है और उन्होंने यह भी पूछा कि इलाज इतनी जल्दी कैसे पूरा हो गया। इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर भी बहस शुरू हो गई, जिसके बाद हिना खान ने अपनी चुप्पी तोड़ते हुए स्पष्ट किया कि किसी की स्वास्थ्य संबंधी परिस्थितियों पर बिना पूरी जानकारी के टिप्पणी करना उचित नहीं है।

    हिना खान ने कहा कि कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से गुजरने वाले लोगों की मानसिक और शारीरिक स्थिति को समझना जरूरी है। उन्होंने कहा कि इस तरह के बयान केवल संबंधित व्यक्ति को ही नहीं, बल्कि उन सभी मरीजों को भी प्रभावित कर सकते हैं जो इसी तरह की चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि सार्वजनिक मंचों पर किसी की बीमारी को लेकर गैर-जिम्मेदार टिप्पणी करने से बचना चाहिए।

    इस विवाद के दौरान हिना खान और रॉकी जायसवाल ने शिल्पा शिंदे के पुराने यौन उत्पीड़न मामले का भी उल्लेख किया। उन्होंने उस प्रकरण को गंभीर बताते हुए कहा कि ऐसे मामलों में लगाए गए आरोपों का समाज पर व्यापक प्रभाव पड़ता है। हिना ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति पर गंभीर आरोप लगाए जाएं और बाद में वे गलत साबित हों, तो इससे वास्तविक पीड़ितों के लिए न्याय की प्रक्रिया और अधिक कठिन हो सकती है।

    हिना ने यह भी कहा कि यौन उत्पीड़न जैसे मामलों में अत्यधिक जिम्मेदारी और संवेदनशीलता के साथ व्यवहार किया जाना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि किसी निर्दोष व्यक्ति की प्रतिष्ठा या मानसिक स्थिति ऐसे आरोपों से प्रभावित हो जाए तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा। उनके अनुसार ऐसे मामलों में तथ्यों की पुष्टि और जिम्मेदार व्यवहार बेहद आवश्यक है।

    रॉकी जायसवाल ने भी इस पूरे विवाद में अपनी राय रखते हुए कहा कि किसी भी सार्वजनिक व्यक्ति को दूसरे की व्यक्तिगत परिस्थितियों पर टिप्पणी करने से पहले तथ्यों का सम्मान करना चाहिए। उन्होंने कहा कि सामाजिक प्रभाव रखने वाले लोगों के बयान लाखों लोगों तक पहुंचते हैं, इसलिए शब्दों का चयन सोच-समझकर किया जाना चाहिए।

    हिना खान ने यह भी हैरानी जताई कि पुराने विवादों के बावजूद संबंधित पक्षों के बीच बाद में दोबारा पेशेवर सहयोग कैसे हुआ। उनका कहना था कि यदि किसी मामले में इतने गंभीर आरोप लगाए गए थे, तो बाद की परिस्थितियां स्वाभाविक रूप से कई प्रश्न खड़े करती हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि रियलिटी शो के दौरान इस विषय का उल्लेख नहीं किया गया था, जबकि बाद में इसे सार्वजनिक रूप से सामने लाया गया।

    फिलहाल दोनों अभिनेत्रियों के बयानों के बाद यह विवाद मनोरंजन जगत में चर्चा का विषय बना हुआ है। सोशल मीडिया पर भी इस मामले को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। हालांकि अब तक इस विवाद को लेकर किसी पक्ष की ओर से कानूनी कार्रवाई की जानकारी सामने नहीं आई है, लेकिन दोनों के सार्वजनिक बयानों ने इस मुद्दे को नई बहस का विषय बना दिया है।

  • सोनम वांगचुक की बिगड़ती सेहत पर बढ़ी देशभर की चिंता, अभय देओल ने जताया समर्थन, 17वें दिन की भूख हड़ताल ने आंदोलन को फिर सुर्खियों में पहुंचाया

    सोनम वांगचुक की बिगड़ती सेहत पर बढ़ी देशभर की चिंता, अभय देओल ने जताया समर्थन, 17वें दिन की भूख हड़ताल ने आंदोलन को फिर सुर्खियों में पहुंचाया

    नई दिल्ली । सामाजिक कार्यकर्ता और पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक की अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल लगातार चर्चा का विषय बनी हुई है। 17 दिनों से जारी इस आंदोलन के बीच उनकी सेहत को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है। इसी क्रम में फिल्म अभिनेता अभय देओल ने सोशल मीडिया के माध्यम से वांगचुक के प्रति अपना समर्थन व्यक्त किया है। इससे पहले अभिनेत्री जीनत अमान भी उनकी मांगों और स्वास्थ्य को लेकर चिंता जता चुकी हैं। लगातार मिल रहे सार्वजनिक समर्थन के कारण यह आंदोलन एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का केंद्र बन गया है।

    अभय देओल ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर जंतर-मंतर स्थित प्रदर्शन स्थल से सोनम वांगचुक की एक तस्वीर साझा की। उन्होंने किसी विस्तृत टिप्पणी के बजाय टूटे हुए दिल का प्रतीक साझा कर उनकी बिगड़ती सेहत पर अपनी चिंता व्यक्त की। इसके साथ उन्होंने फिल्म 3 Idiots के चर्चित गीत का भी उल्लेख किया, जिसे कई लोगों ने सोनम वांगचुक से जुड़ी प्रेरणा की ओर संकेत के रूप में देखा। अभय देओल की यह प्रतिक्रिया सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी इस विषय पर चर्चा तेज हो गई।

    इससे पहले अभिनेत्री जीनत अमान ने भी एक विस्तृत संदेश साझा करते हुए सरकार से वांगचुक की मांगों पर संवाद शुरू करने की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण विरोध का सम्मान किया जाना चाहिए और ऐसे मामलों में बातचीत के जरिए समाधान तलाशना अधिक उचित होता है। उन्होंने यह भी कहा कि सोनम वांगचुक शिक्षा और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में लंबे समय से उल्लेखनीय कार्य करते रहे हैं और उनके योगदान को गंभीरता से देखा जाना चाहिए।

    सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल जंतर-मंतर पर जारी है। आंदोलन से जुड़े लोगों का कहना है कि लंबे अनशन के कारण उनका स्वास्थ्य लगातार कमजोर हो रहा है और वजन में भी उल्लेखनीय कमी आई है। समर्थकों का कहना है कि उनकी स्वास्थ्य स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है, वहीं विभिन्न सामाजिक संगठनों और नागरिकों द्वारा भी आंदोलन के प्रति समर्थन व्यक्त किया जा रहा है। बढ़ती चिंता के बीच उनके स्वास्थ्य को लेकर चर्चाएं लगातार तेज हो रही हैं।

    आंदोलन का नेतृत्व कर रहे संगठन ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर केंद्र सरकार से हस्तक्षेप की अपील की है। प्रदर्शनकारियों की ओर से शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर कार्रवाई, जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कदम उठाने तथा संबंधित मामलों में जवाबदेही तय करने की मांग की जा रही है। साथ ही केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और प्रभावित परिवारों को मुआवजा दिए जाने की मांग भी आंदोलन का हिस्सा बताई जा रही है। प्रदर्शनकारी इन मांगों को लेकर लगातार शांतिपूर्ण तरीके से अपना विरोध दर्ज करा रहे हैं।

    आंदोलन से जुड़े संगठन ने घोषणा की है कि संसद के मानसून सत्र के पहले दिन 20 जुलाई को जंतर-मंतर से संसद तक शांतिपूर्ण मार्च निकाला जाएगा। इस प्रस्तावित मार्च को लेकर तैयारियां भी शुरू कर दी गई हैं। सोनम वांगचुक की सेहत, उनकी भूख हड़ताल और आंदोलन की दिशा पर देशभर की निगाहें बनी हुई हैं। विभिन्न सामाजिक संगठनों, सार्वजनिक हस्तियों और आम नागरिकों की प्रतिक्रियाओं के बीच यह मुद्दा लगातार राष्ट्रीय विमर्श का हिस्सा बना हुआ है। आने वाले दिनों में सरकार और आंदोलनकारियों के बीच किसी संभावित संवाद की संभावना पर भी सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

  • अदनान शेख के बयान पर उर्फी जावेद का तीखा पलटवार, सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस …

    अदनान शेख के बयान पर उर्फी जावेद का तीखा पलटवार, सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस …


    नई दिल्ली ।
    सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर अदनान शेख की एक टिप्पणी को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। एक पॉडकास्ट के दौरान विधवा और तलाकशुदा महिलाओं पर दिए गए उनके बयान के बाद सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया। कई लोगों ने उनकी भाषा और शब्दों के चयन पर आपत्ति जताई, जबकि अभिनेत्री और सोशल मीडिया हस्ती उर्फी जावेद ने भी इस मामले में खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर की। इसके बाद यह मुद्दा इंटरनेट पर व्यापक चर्चा का विषय बन गया।

    विवाद उस समय शुरू हुआ जब एक बातचीत के दौरान अदनान शेख से इस्लाम में चार शादियों से जुड़े विषय पर सवाल पूछा गया। जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति विधवा या तलाकशुदा महिला से विवाह करना चाहता है तो समाज को इसका विरोध नहीं करना चाहिए। हालांकि अपनी बात समझाने के दौरान उन्होंने महिलाओं के लिए एक ऐसा शब्द इस्तेमाल किया, जिसे बड़ी संख्या में लोगों ने अपमानजनक और असंवेदनशील माना। बयान सामने आने के बाद उसका वीडियो तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।

    वीडियो वायरल होने के बाद अभिनेत्री उर्फी जावेद ने भी इस पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने अपने सोशल मीडिया अकाउंट के जरिए वीडियो साझा करते हुए सवाल उठाया कि इस तरह की भाषा बोलने की अनुमति ऐसे लोगों को क्यों मिलनी चाहिए। उर्फी ने महिलाओं के सम्मान और गरिमा का मुद्दा उठाते हुए बयान की आलोचना की। उनकी प्रतिक्रिया के बाद यह विवाद और अधिक चर्चा में आ गया तथा सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में लोगों ने अपनी राय व्यक्त की।

    सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कई उपयोगकर्ताओं ने भी अदनान शेख के बयान पर आपत्ति दर्ज कराई। लोगों का कहना है कि किसी भी महिला के लिए अपमानजनक शब्दों का प्रयोग स्वीकार्य नहीं हो सकता। कई प्रतिक्रियाओं में यह भी कहा गया कि यदि उनका उद्देश्य विधवा और तलाकशुदा महिलाओं के पुनर्विवाह का समर्थन करना था, तब भी अपनी बात सम्मानजनक और संवेदनशील भाषा में रखी जानी चाहिए थी। वहीं कुछ लोगों ने सार्वजनिक मंचों पर जिम्मेदारी के साथ बयान देने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

    यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब सोशल मीडिया पर सार्वजनिक व्यक्तियों के बयानों को लेकर जवाबदेही और संवेदनशीलता पर लगातार चर्चा होती रही है। किसी भी टिप्पणी का प्रभाव लाखों लोगों तक पहुंचता है, इसलिए शब्दों के चयन को लेकर अधिक सतर्क रहने की अपेक्षा की जाती है। विशेष रूप से महिलाओं से जुड़े सामाजिक मुद्दों पर दिए गए बयान व्यापक सामाजिक प्रतिक्रिया का कारण बन सकते हैं।

    फिलहाल इस पूरे मामले में अदनान शेख की ओर से विवाद को लेकर कोई विस्तृत आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है। दूसरी ओर, सोशल मीडिया पर यह बहस जारी है कि सार्वजनिक मंचों पर व्यक्त किए जाने वाले विचारों में भाषा की मर्यादा और सामाजिक संवेदनशीलता का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए। इस विवाद ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि प्रभावशाली व्यक्तियों के सार्वजनिक बयान समाज में किस तरह का संदेश छोड़ते हैं और उनकी जिम्मेदारी कितनी महत्वपूर्ण होती है।