Author: bharati

  • सूर्य के नक्षत्र उत्तराफाल्गुनी में चंद्रमा का प्रवेश, इन 4 राशियों पर बरसेगी सफलता, सम्मान और धन की वर्षा

    सूर्य के नक्षत्र उत्तराफाल्गुनी में चंद्रमा का प्रवेश, इन 4 राशियों पर बरसेगी सफलता, सम्मान और धन की वर्षा

    नई दिल्ली। गंगा दशहरा 2026 के पावन अवसर पर एक महत्वपूर्ण ज्योतिषीय परिवर्तन देखने को मिल रहा है, जिसने ज्योतिष प्रेमियों और राशि आधारित भविष्य में रुचि रखने वाले लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित कर लिया है। 25 मई 2026 को चंद्रमा सूर्य के प्रभाव वाले उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र में प्रवेश कर चुके हैं और यह गोचर 26 मई की सुबह तक प्रभावी रहेगा। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार चंद्रमा मन, भावनाओं और निर्णय क्षमता का प्रतिनिधित्व करता है, जबकि उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र को स्थिरता, प्रतिष्ठा और सफलता से जोड़कर देखा जाता है। ऐसे में इस विशेष संयोग का असर कुछ राशियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लेकर आने वाला माना जा रहा है।

    इस नक्षत्र परिवर्तन का प्रभाव विशेष रूप से मिथुन राशि के जातकों के लिए शुभ संकेत दे रहा है। लंबे समय से नौकरी की तलाश कर रहे लोगों को अच्छे अवसर मिल सकते हैं और करियर में आगे बढ़ने के रास्ते खुल सकते हैं। व्यापार से जुड़े लोगों के लिए भी समय लाभकारी माना जा रहा है, जहां नई साझेदारी या बड़ी डील सफलता का कारण बन सकती है। आर्थिक स्थिति में सुधार और रुके हुए कार्यों के पूरे होने की संभावना से मानसिक संतुष्टि बढ़ सकती है।

    कर्क राशि के जातकों के लिए भी यह गोचर राहत और सकारात्मक ऊर्जा लेकर आने वाला माना जा रहा है। परिवार में चल रही परेशानियां कम हो सकती हैं और रिश्तों में मधुरता लौटने के संकेत मिल रहे हैं। कार्यक्षेत्र में अच्छी खबर मिलने के योग बन सकते हैं। नौकरीपेशा लोगों को पदोन्नति या वेतन वृद्धि जैसी खुशखबरी मिल सकती है। व्यापारिक गतिविधियों में भी गति बढ़ने के संकेत दिखाई दे रहे हैं, जिससे आत्मविश्वास में बढ़ोतरी हो सकती है।

    सिंह राशि के लिए यह समय विशेष रूप से प्रभावशाली माना जा रहा है। नेतृत्व क्षमता और आत्मविश्वास में वृद्धि के साथ सामाजिक पहचान मजबूत हो सकती है। करियर में नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं और आय के नए स्रोत बनने की संभावना भी जताई जा रही है। समाज में सम्मान बढ़ सकता है और लोग आपके विचारों को गंभीरता से सुन सकते हैं। यह समय नई शुरुआत और बड़े निर्णय लेने के लिए अनुकूल माना जा रहा है।

    वहीं धनु राशि के जातकों के लिए भी यह गोचर नई उम्मीदें लेकर आ सकता है। लंबे समय से अटके हुए कार्यों में गति आने की संभावना है और सफलता के नए मार्ग खुल सकते हैं। सरकारी कार्यों से जुड़े मामलों में राहत मिल सकती है और यदि कोई कानूनी प्रक्रिया चल रही है तो सकारात्मक संकेत मिल सकते हैं। मानसिक शांति और आत्मविश्वास बढ़ने से व्यक्ति अपने फैसले अधिक स्पष्टता के साथ ले पाएगा। ज्योतिषीय दृष्टि से देखा जाए तो गंगा दशहरा पर बना यह चंद्र गोचर कई लोगों के लिए नई ऊर्जा और नई संभावनाओं का संकेत बनकर सामने आ सकता है।

  • बेटे वरुण संग आखिरी फिल्म के बाद रिटायरमेंट की तैयारी ने फैंस को किया भावुक

    बेटे वरुण संग आखिरी फिल्म के बाद रिटायरमेंट की तैयारी ने फैंस को किया भावुक

    नई दिल्ली ।   बॉलीवुड को सालों तक अपनी कॉमेडी फिल्मों से हंसाने वाले मशहूर डायरेक्टर डेविड धवन ने एक बहुत बड़ा फैसला लिया है. वे अब फिल्में बनाना छोड़ रहे हैं, यानी वे रिटायर होने जा रहे हैं. उनकी आखिरी फिल्म बेटे वरुण धवन के साथ ‘है जवानी तो इश्क होना है’ होगी. अपनी रिटायरमेंट का ऐलान उन्होंने हाल ही में पीवीआर के एक खास इवेंट में किया. इस खबर को सुनकर इंडस्ट्री के कई लोग और उनके फैंस को झटका लगा है, क्योंकि अब डेविड धवन फिल्मों का डायरेक्शन करते हुए नजर नहीं आएंगे. उन्होंने अपने अब तक के करियर में करीब 45 फिल्मों का निर्देशन किया है. डायरेक्टर ने अपने करियर की शुरुआत साल 1989 में आई फिल्म ‘ताकतवर’ से की थी. डेविड धवन ने बॉलीवुड के सुपरस्टार सलमान खान का भी कमबैक कराया था.
    डेविड धवन क्यों हुए इमोशनल
    फेमस डायरेक्टर डेविड धवन इन दिनों अपने बेटे की फिल्म ‘है जवानी तो इश्क होना है’ को लेकर चर्चा में बने हुए हैं. इस फिल्म के ट्रेलर लॉन्च में डेविड धवन भी नजर आए थे. इस दौरान मीडिया से बात करते हुए वे इमोशनल हो गए. उन्होंने ट्रेलर इवेंट में बेटे वरुण धवन की जमकर तारीफ की. डायरेक्टर ने कहा, ‘जब मैं साल 2022 में बीमार पड़ा था, तो वह मेरे साथ अस्पताल में सोया करता था.’ पिता को इमोशनल देख एक्टर वरुण धवन ने उन्हें शांत किया. वरुण धवन की फिल्म ‘है जवानी तो इश्क होना है’ सिनेमाघरों में 5 जून को रिलीज होगी, जो डेविड धवन की आखिरी फिल्म होगी.

    डेविड धवन ने फिल्म मेकिंग से लिया संन्यास?

    बॉलीवुड के मशहूर डायरेक्टर डेविड धवन ने 23 मई 2026 को डायरेक्शन की दुनिया को अलविदा कह दिया है. उन्होंने इसका ऐलान एक इवेंट के दौरान किया. इस पार्टी में बॉलीवुड के सुपरस्टार सलमान खान, करण जौहर, पूजा हेगड़े, वरुण धवन और चंकी पांडे जैसे सितारे शामिल हुए थे. दरअसल, डायरेक्टर की रिटायरमेंट की खबर की पुष्टि करण जौहर ने की है. उन्होंने अपने इंस्टाग्राम पर एक स्टोरी शेयर की, जिसमें उन्होंने लिखा, ‘कल जब मैं डेविड जी के सेलिब्रेशन में गया, तो उन्होंने मुझे बताया कि यह ‘है जवानी तो इश्क होना है’ उनकी आखिरी फिल्म होने वाली है.’
    डेविड धवन ने बॉलीवुड को दी कई हिट कॉमेडी
    फेमस डायरेक्टर डेविड धवन को बॉलीवुड के सबसे बड़े कॉमेडी डायरेक्टर्स में गिना जाता है. उन्होंने 90 और 2000 के दशक में एक से बढ़कर एक सुपरहिट फिल्में दी हैं, जिन्होंने दर्शकों को खूब हंसाया है. उन्होंने इंडस्ट्री को राजा बाबू, जुड़वा, पार्टनर, मिस्टर एंड मिसेज खिलाड़ी, हीरो नंबर 1, हसीना मान जाएगी, मुझसे शादी करोगी, कुली नंबर 1 और मैंने प्यार किया जैसी कई फिल्में दी हैं।
    कई बड़े कलाकारों संग किया काम
    डेविड धवन को बॉलीवुड इंडस्ट्री में कॉमेडी फिल्मों के सबसे सफल निर्देशकों में माना जाता है. उन्होंने अपने लंबे फिल्मी सफर में कई बड़े सितारों संग काम किया है. इसमें अमिताभ बच्चन, गोविंदा, सलमान खान, अक्षय कुमार, तापसी पन्नू, माधुरी दीक्षित और करिश्मा कपूर जैसे कई सितारे शामिल हैं. डेविड धवन ने करीब 6 साल के ब्रेक के बाद ‘है जवानी तो इश्क होना है’ के साथ डायरेक्शन में वापसी की है. इसमें उनके बेटे वरुण धवन के अलावा मृणाल ठाकुर, पूजा हेगड़े, मौनी रॉय, राकेश बेदी, राजेश कुमार और मनीष पॉल जैसे सितारे नजर आएंगे. सिनेमाघरों में यह फिल्म 5 जून को रिलीज होगी.
  • कॉकरोज जनता पार्टी पर जनता की राय बंटी: सर्वाइवल बनाम जल्दी हार

    कॉकरोज जनता पार्टी पर जनता की राय बंटी: सर्वाइवल बनाम जल्दी हार


    भोपाल। भोपाल में एक नई और अनोखी राजनीतिक बहस ने जोर पकड़ लिया है। “कॉकरोज जनता पार्टी” नाम की यह अवधारणा अब सिर्फ सोशल मीडिया तक सीमित नहीं रही, बल्कि आम लोगों की चर्चा का भी हिस्सा बन गई है। शहर में किए गए एक अनौपचारिक सर्वे में सामने आया कि करीब 80 प्रतिशत लोग मानते हैं कि यह नई तरह की डिजिटल-आधारित “जेन-जी राजनीति” लंबे समय तक टिक सकती है, जबकि 20 प्रतिशत लोगों का कहना है कि युवा वर्ग जल्दी उत्साहित होता है और उतनी ही जल्दी राजनीति से दूर भी हो जाता है।

    इस पूरे विवाद की शुरुआत 15 मई 2026 को हुई, जब सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने एक याचिका पर सुनवाई के दौरान युवाओं की भूमिका को लेकर टिप्पणी की थी। लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने युवाओं के एक वर्ग का उल्लेख करते हुए कहा था कि सोशल मीडिया और अन्य प्लेटफॉर्म्स पर सक्रिय कुछ युवा तेजी से प्रतिक्रिया देने वाले समूह के रूप में उभर रहे हैं।

    इस टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया पर एक नया ट्रेंड शुरू हुआ, जिसे युवाओं ने “कॉकरोज जनता पार्टी” का नाम दे दिया। यह नाम तेजी से वायरल हो गया और इंस्टाग्राम, एक्स (ट्विटर) जैसे प्लेटफॉर्म्स पर इस पेज ने चौंकाने वाली रफ्तार से फॉलोअर्स जुटाने शुरू कर दिए। दिलचस्प बात यह रही कि कुछ ही घंटों में इसके फॉलोअर्स की संख्या कई स्थापित राजनीतिक दलों से आगे निकल गई, जिससे यह चर्चा और तेज हो गई कि क्या यह केवल एक डिजिटल मजाक है या भविष्य की किसी नई राजनीतिक दिशा का संकेत।

    भोपाल के विभिन्न इलाकों में लोगों से बातचीत के दौरान मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिली। कई लोगों का कहना है कि यह युवाओं की नाराजगी और नई सोच का प्रतीक है, जो पारंपरिक राजनीति से अलग रास्ता तलाश रही है। वहीं दूसरी ओर कुछ लोगों का मानना है कि जेन-जी का उत्साह ज्यादा समय तक नहीं टिकता, इसलिए इस तरह के डिजिटल आंदोलन ज्यादा देर तक प्रभावी नहीं रहते।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह पूरी घटना दरअसल डिजिटल युग की राजनीति का नया उदाहरण है, जहां सोशल मीडिया किसी भी विचार या मजाक को तेजी से एक बड़े आंदोलन में बदल सकता है। हालांकि यह अभी स्पष्ट नहीं है कि “कॉकरोज जनता पार्टी” भविष्य में किसी वास्तविक राजनीतिक संरचना का रूप लेगी या यह केवल एक सोशल मीडिया ट्रेंड बनकर रह जाएगी।

    फिलहाल भोपाल सहित देश के कई हिस्सों में इस मुद्दे पर चर्चा जारी है और लोग इसे राजनीति, हास्य और डिजिटल क्रांति—तीनों के मिश्रण के रूप में देख रहे हैं।

  • मीना कुमारी के आखिरी दिनों का सबसे भावुक किस्सा, मौत के बिस्तर पर मोहम्मद रफी से सुना था अपना पसंदीदा गीत

    मीना कुमारी के आखिरी दिनों का सबसे भावुक किस्सा, मौत के बिस्तर पर मोहम्मद रफी से सुना था अपना पसंदीदा गीत


    नई दिल्ली ।  हिंदी सिनेमा में अपने अभिनय और खूबसूरती से छाप छोड़ने वाली मीना कुमारी का आखिरी वक्त बुरा गुजरा। एक्ट्रेस लीवर सिरोसिस से पीड़ित थीं। और लंबे इलाज के बाद भी उन्हें बचाया नहीं जा सका। लेकिन जब वो बीमार, बिस्तर पर पड़ी थीं तो अक्सर एक गाना सुना करती थीं। उन्हें हमेशा से लगता था कि ये गाना उनकी निजी जिंदगी से जुड़ा हुआ है।
    वो एक ऐसा गीत था जो तकलीफ भरे दिनों में मीना कुमारी को राहत की सांस देता था। मीना जब-जब इस गीत को गुनगुनाया करतीं तो अपने आधे ग़मों को भूल जाया करती थीं। मीना कुमारी का इस गाने से इतना गहरा जुड़ाव था कि जब मोहम्मद रफी उनसे मिलने आए तो एक्ट्रेस ने उनसे ये गाना गाने की रिक्वेस्ट की थी।
    बुरे दिनों में मीना कुमारी का साथी था ये गाना
    1961 में मीना कुमारी की एक रिलीज हुई थी जिसका नाम था प्यार का सागर। इस फिल्म में मीना के साथ एक्टर राजेंद्र कुमार लीड रोल में थे। इस फिल्म में वैसे कई खूबसूरत गाने थे लेकिन ‘मुझे प्यार की जिंदगी देने वाले, कभी गम न देना खुशी देने वाले’। इस गाने को मोहम्मद रफी और आशा भोसले ने गाया था। ये गाना मीना कुमारी के दर्द की दवा बन गया था। अपना अकेलापन, दर्द भूलने के लिए अक्सर एक्ट्रेस इसी गाने को गुनगुनाया करती थीं।
    ये वो समय था जब मीना बहुत बीमार पड़ चुकी थीं, मौत से लड़ रही थीं। उन्हें फिल्मों के सेट पर नहीं बल्कि घर के एक कमरे में पड़े बिस्तर पर बीमार हालत में देखा जाता था। उनके आखिरी समय में फिल्मी जगत के कई कलाकार उनसे मिलने पहुंचा करते थे। एक दिन सिंगर मोहम्मद रफी भी पहुंचे। और मौत के बिस्तर पर मीना ने मोहम्मद रफी से वो गाना गाने की रिक्वेस्ट कर दी जो उनके दिल के बहुत करीब था।

    आत्मा में उतर चुका था मोहम्मद रफी का ये गीत
    बीमार, मौत से लड़ रही मीना कुमारी की इस इच्छा को मोहम्मद रफी ने टाला नहीं। वो उनके सिरहाने बैठे थे। उन्होंने उसी दर्द, और फीलिंग्स के साथ मीना के सामने गाया ‘मुझे प्यार की जिंदगी देने वाले, कभी गम न देना खुशी देने वाले’। ये गाना मीना की आत्मा में उतर चुका था।
    ऐसे बना था ये गाना

    इस गाने को बनाने की भी एक अलग कहानी है। फिल्म प्यार का सागर में कुल 8 गाने थे। इन सभी गानों को रवि और प्रेम धवन ने कंपोज़ किया था। असद भोपाली ने गीत लिखे थे। इन गानों को आशा भोसले। शमशाद बेगम, मोहम्मद रफी और मुकेश ने गाए थे। फिल्म का गाना ‘ ‘मुझे प्यार की जिंदगी देने वाले, कभी गम न देना खुशी देने वाले’ गाने को अगले दिन फिल्माया जाना था,
    लेकिन उस वक़्त तक रिकॉर्डिंग नहीं हुई थी।
    प्रेम धवन ने गाने को लिखा था और सिंगर मोहम्मद रफी को गाना रिकॉर्डिंग के लिए उसी दिन बुला लिया गया। लेकिन फीमेल सिंगर के लिए आशा भोसले और लता मंगेशकर से संपर्क नहीं हो पा रहा था। ऐसे में कंपोजर रवि ने सुमन कल्यानपुर से बात की गई। उन्होंने आने का वादा किया लेकिन वो स्टूडियो पहुंची नहीं। बहुत इंतजार के बाद अंत में एक बार फिर आशा भोसले से संपर्क किया गया और उनसे इस गाने को लेकर बात पक्की हो गई। आशा भोसले और मोहम्मद रफी ने मिलकर इस गाने को गया। अगले दिन गाने की शूटिंग को गई। मीना कुमारी और राजेंद्र इस गाने में नजर आए थे।
  • बकरीद से पहले यूपी सरकार सख्त, खुले में नहीं होगी कुर्बानी, सड़क पर नमाज पर रोक

    बकरीद से पहले यूपी सरकार सख्त, खुले में नहीं होगी कुर्बानी, सड़क पर नमाज पर रोक

    लखनऊ। बकरीद और अन्य आगामी त्योहारों को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने कानून-व्यवस्था को लेकर सख्त रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि किसी भी हालत में सड़क जाम कर नमाज पढ़ने की अनुमति न दी जाए। सभी धार्मिक कार्यक्रम केवल तय और परंपरागत स्थलों पर ही आयोजित किए जाएं।

    बकरीद को लेकर प्रशासन अलर्ट
    मुख्यमंत्री ने संवेदनशील इलाकों में विशेष निगरानी रखने और त्योहारों के दौरान शांति एवं सौहार्द बनाए रखने के निर्देश दिए हैं। सरकार ने साफ किया है कि सार्वजनिक स्थानों पर कुर्बानी की अनुमति नहीं होगी और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। सरकार ने प्रतिबंधित पशुओं की कुर्बानी को लेकर ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति अपनाने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों से कहा गया है कि ऐसे मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

    अवैध स्लॉटर हाउस पर कार्रवाई
    राज्य में अवैध स्लॉटर हाउस और खुले में मांस बेचने वालों के खिलाफ भी सख्त अभियान चलाने के निर्देश जारी किए गए हैं। प्रशासन को तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया है।

    हर ब्लॉक में लगेगी साप्ताहिक चौपाल
    जनता की समस्याओं के समाधान के लिए सरकार अब विकास खंड स्तर पर साप्ताहिक चौपाल आयोजित करेगी। मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार, इन चौपालों में स्थानीय स्तर पर ही शिकायतों का निस्तारण किया जाएगा, ताकि लोगों को दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें।

    शिकायतों में लापरवाही पर होगी कार्रवाई
    आईजीआरएस और सीएम हेल्पलाइन पर दर्ज शिकायतों के निस्तारण में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर भी सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। सरकार ने समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण समाधान सुनिश्चित करने पर जोर दिया है।

    भू-माफियाओं और अवैध खनन पर विशेष अभियान
    मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को अवैध खनन और भू-माफियाओं के खिलाफ अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। सरकार का कहना है कि अवैध कब्जों और गैरकानूनी गतिविधियों पर पूरी तरह लगाम लगाने के लिए सख्त कदम उठाए जाएंगे।

  • नौतपा की शुरुआत के साथ MP में भीषण गर्मी का दौर जारी, 44 जिलों में आज हीटवेव और 5 में रेड अलर्ट

    नौतपा की शुरुआत के साथ MP में भीषण गर्मी का दौर जारी, 44 जिलों में आज हीटवेव और 5 में रेड अलर्ट

    भोपाल। मध्य प्रदेश में नौतपा की शुरुआत 25 मई से हो गई है और यह 2 जून तक प्रभावी रहेगा। मौसम विभाग के अनुसार, 25 से 28 मई तक प्रदेशभर में भीषण गर्मी और हीटवेव का असर बना रहेगा। नौतपा के शुरुआती चार दिन लोगों को तेज लू और झुलसाने वाली गर्मी का सामना करना पड़ेगा। सोमवार को प्रदेश के 44 जिलों में हीटवेव की चेतावनी जारी की गई है। इनमें निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना और सतना में तीव्र लू को लेकर रेड अलर्ट घोषित किया गया है।

    मौसम विभाग का कहना है कि नौतपा की शुरुआत के साथ भोपाल, ग्वालियर और उज्जैन सहित कई शहरों में तापमान 44 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है।

    नौतपा शुरू होने से पहले ही प्रदेश में गर्मी ने अपने तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। रविवार को खजुराहो और नौगांव सबसे गर्म शहर रहे, जहां अधिकतम तापमान 45.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। इसके अलावा दतिया में तापमान 45 डिग्री तक पहुंचा, जबकि टीकमगढ़ और शाजापुर में 44 डिग्री दर्ज किया गया। दमोह, सागर और सतना में 44.2 डिग्री सेल्सियस तापमान रहा। वहीं गुना, मुरैना, राजगढ़ और श्योपुर में भी पारा 44 डिग्री तक पहुंच गया।

    प्रदेश के बड़े शहरों की बात करें तो ग्वालियर सबसे गर्म रहा, जहां तापमान 44.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। भोपाल में 42.7 डिग्री, जबलपुर में 43.3 डिग्री, उज्जैन में 41.5 डिग्री और इंदौर में 40.9 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकॉर्ड किया गया।

    मौसम विभाग ने निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना और सतना में रेड अलर्ट जारी किया है। वहीं भिंड, दतिया, आगर-मालवा, राजगढ़, सागर, नरसिंहपुर, दमोह, जबलपुर, मंडला, बालाघाट, कटनी, उमरिया, शहडोल, मैहर, रीवा, मऊगंज, सीधी और सिंगरौली सहित 18 जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है।

    इसके अलावा भोपाल, ग्वालियर, उज्जैन, रायसेन, विदिशा, शिवपुरी, मुरैना समेत 21 जिलों में येलो अलर्ट घोषित किया गया है। वहीं इंदौर, देवास, हरदा, बैतूल, छिंदवाड़ा, धार और झाबुआ सहित 11 जिलों में तेज गर्मी का असर बना रहेगा।

    मौसम विभाग के मुताबिक, 31 मई तक प्रदेश में गर्मी अपने चरम पर रह सकती है। अगले चार दिनों तक पूरे प्रदेश में भीषण गर्मी और लू का दौर जारी रहने की संभावना जताई गई है, जिससे लोगों को फिलहाल राहत मिलने के आसार नहीं हैं।

  • TMC में बढ़ी अंदरूनी नाराजगी, सांसद काकोली घोष ने जिलाध्यक्ष पद छोड़ा, उठाए सवाल

    TMC में बढ़ी अंदरूनी नाराजगी, सांसद काकोली घोष ने जिलाध्यक्ष पद छोड़ा, उठाए सवाल

    कोलकाता। पश्चिम बंगाल की सियासत में तृणमूल कांग्रेस के भीतर असंतोष खुलकर सामने आने लगा है। पार्टी सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने बारासात जिला अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने का ऐलान किया है। उन्होंने चुनावी हार की जिम्मेदारी लेते हुए संगठन की कार्यप्रणाली और चुनावी रणनीति पर सवाल उठाए हैं।

    काकोली घोष दस्तीदार ने चुनाव के दौरान IPAC की भूमिका को लेकर भी नाराजगी जाहिर की। उनका कहना है कि चुनावी प्रक्रिया के समय IPAC टीम की ओर से अनावश्यक दबाव बनाया गया, जिससे पार्टी के कामकाज पर असर पड़ा।

    उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान जिस तरह दबाव बनाने की कोशिश की गई, वह सही तरीका नहीं था। दस्तीदार ने कहा कि उनके क्षेत्र की सभी सीटों पर पार्टी को हार मिली है, इसलिए वह नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए पद छोड़ रही हैं। उनके इस बयान के बाद TMC के भीतर नई राजनीतिक बहस शुरू हो गई है।

    अपने इस्तीफे में उन्होंने कहा कि बारासात जिले में पार्टी के खराब प्रदर्शन की पूरी जिम्मेदारी वह स्वीकार करती हैं। उन्होंने माना कि हाल के दिनों में भ्रष्टाचार और अपराध से जुड़ी घटनाओं ने जनता के बीच पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचाया है।

    सांसद ने यह भी कहा कि लोकतंत्र को मजबूत बनाए रखने के लिए पार्टी को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और ईमानदार बनने की जरूरत है। उन्होंने पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी से अपील की कि संगठन को मजबूत करने के लिए पुराने और अनुभवी नेताओं को साथ लेकर आगे बढ़ना चाहिए।

    दस्तीदार ने परोक्ष रूप से नई एजेंसियों और खास तौर पर IPAC की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि उन्हें इस तरह की रणनीतिक एजेंसियों की भूमिका पर पूरा भरोसा नहीं है।

    यह इस्तीफा ऐसे समय आया है जब पश्चिम बंगाल में चुनावी नतीजों के बाद तृणमूल कांग्रेस को कई राजनीतिक झटकों का सामना करना पड़ रहा है। कई सीटों पर हार के बाद पार्टी की रणनीति और नेतृत्व को लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं। वहीं पार्टी नेतृत्व लगातार चुनावी अनियमितताओं और EVM गड़बड़ी जैसे मुद्दे उठा रहा है।

    राजनीतिक जानकार काकोली घोष दस्तीदार के इस्तीफे को सिर्फ संगठनात्मक बदलाव नहीं, बल्कि TMC के भीतर बढ़ती नाराजगी और असंतोष के संकेत के तौर पर देख रहे हैं। आने वाले दिनों में यह मामला राज्य की राजनीति में और हलचल बढ़ा सकता है।

  • पर्सनल लोन एक नज़र में: तुरंत पैसे पाने का आसान तरीका, लेकिन समझदारी जरूरी

    पर्सनल लोन एक नज़र में: तुरंत पैसे पाने का आसान तरीका, लेकिन समझदारी जरूरी


    नई दिल्ली । आज के समय में पर्सनल लोन लोगों की वित्तीय जरूरतों को पूरा करने का एक आसान और तेजी से उपलब्ध होने वाला विकल्प बन चुका है। चाहे मेडिकल इमरजेंसी हो, शादी का खर्च, ट्रैवल प्लान या किसी अन्य व्यक्तिगत आवश्यकता—पर्सनल लोन बिना किसी गारंटी के बैंक और वित्तीय संस्थानों द्वारा दिया जाता है।

    पर्सनल लोन का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसमें किसी भी प्रकार की सिक्योरिटी या संपत्ति गिरवी रखने की जरूरत नहीं होती। यह पूरी तरह आपकी आय, क्रेडिट स्कोर और रीपेमेंट क्षमता पर आधारित होता है। आवेदन प्रक्रिया भी काफी सरल होती है और कई बार कुछ ही घंटों में लोन अप्रूव हो जाता है।

    योग्यता यानी एलिजिबिलिटी की बात करें तो इसके लिए आवेदक का वेतनभोगी या स्व-नियोजित होना जरूरी है। आमतौर पर 21 से 60 वर्ष की आयु सीमा में आने वाले व्यक्ति इस लोन के लिए पात्र होते हैं। साथ ही अच्छा क्रेडिट स्कोर (आमतौर पर 700 या उससे अधिक) होने पर लोन मिलने की संभावना बढ़ जाती है। बैंक आपकी मासिक आय और नौकरी की स्थिरता को भी ध्यान में रखते हैं।

    ब्याज दर (Interest Rate) की बात करें तो यह अलग-अलग बैंकों और NBFCs में भिन्न हो सकती है। आमतौर पर पर्सनल लोन पर ब्याज दर 10% से लेकर 24% सालाना तक हो सकती है। यह दर आपके क्रेडिट स्कोर, आय और बैंक पॉलिसी पर निर्भर करती है। बेहतर क्रेडिट स्कोर होने पर आपको कम ब्याज दर पर लोन मिल सकता है।

    पर्सनल लोन की एक खासियत यह भी है कि इसकी रीपेमेंट अवधि 1 साल से लेकर 5-7 साल तक हो सकती है, जिससे ईएमआई को अपने बजट के अनुसार मैनेज करना आसान हो जाता है।

    हालांकि, विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि पर्सनल लोन केवल जरूरी परिस्थितियों में ही लिया जाए, क्योंकि इसकी ब्याज दर अन्य लोन की तुलना में थोड़ी अधिक होती है। समय पर ईएमआई न चुकाने पर क्रेडिट स्कोर पर भी नकारात्मक असर पड़ सकता है।

    कुल मिलाकर पर्सनल लोन एक उपयोगी वित्तीय साधन है, जो सही योजना और समझदारी के साथ लिया जाए तो आर्थिक जरूरतों को आसानी से पूरा कर सकता है।

  • TTH प्रोपेगेंडा केस में बड़ा खुलासा, PAK गैंगस्टर शहजाद भट्टी और ISI नेटवर्क की भूमिका आई सामने

    TTH प्रोपेगेंडा केस में बड़ा खुलासा, PAK गैंगस्टर शहजाद भट्टी और ISI नेटवर्क की भूमिका आई सामने

    नई दिल्ली। तहरीके तालिबान हिंदुस्तान (TTH) नामक संगठन से जुड़े प्रोपेगेंडा मामले में जांच एजेंसियों ने बड़ा खुलासा किया है। दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल की जांच में सामने आया है कि इस पूरे नेटवर्क के पीछे पाकिस्तानी गैंगस्टर से आतंकी बने शहजाद भट्टी का नाम जुड़ा हुआ है। जांच एजेंसियों के अनुसार शहजाद भट्टी पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI और अपने सहयोगियों आबिद जट्ट और अजमल गुज्जर के साथ मिलकर इस संगठन का प्रोपेगेंडा फैलाने में सक्रिय भूमिका निभा रहा था।

    कुछ दिन पहले दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल ने दिल्ली से सोहेल नाम के एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया था। पूछताछ में खुलासा हुआ कि उसे शहजाद भट्टी की ओर से दिल्ली और फरीदाबाद में TTH नाम की ग्राफिटी बनाने का टास्क दिया गया था। निर्देश के तहत उसे दीवारों और सार्वजनिक स्थानों पर TTH लिखने और उसके नीचे छोटा “S” जोड़ने को कहा गया था, ताकि इसे शहजाद भट्टी से जोड़कर देखा जा सके।

    पुलिस के मुताबिक सोहेल का आपराधिक रिकॉर्ड भी रहा है और उसे इस काम के बदले पैसे दिए गए थे। मामले की आगे जांच जारी है। जांच एजेंसियों ने यह भी दावा किया है कि शहजाद भट्टी और उसके सहयोगियों पर पुलिसकर्मियों की टारगेट किलिंग की साजिश रचने के आरोप भी सामने आए हैं। इसी सिलसिले में हाल ही में दिल्ली पुलिस ने तीन युवकों को गिरफ्तार किया था, जो कथित तौर पर इस नेटवर्क से जुड़े हुए थे।

    दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल ने बाद में सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। एजेंसियों का कहना है कि इस पूरे मामले से संकेत मिलता है कि TTH नाम के प्रोपेगेंडा नेटवर्क के पीछे संगठित अंतरराष्ट्रीय साजिश हो सकती है। फिलहाल पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोग कौन हैं और भारत में इसके जरिए किस तरह से दुष्प्रचार और आपराधिक गतिविधियों को अंजाम देने की कोशिश की जा रही थी।

  • ज्वालामुखी की दहशत भी बेअसर: 2000 साल पुराना बाली का पुरा बेसाकिह मंदिर आज भी खड़ा है रहस्यमयी मजबूती के साथ

    ज्वालामुखी की दहशत भी बेअसर: 2000 साल पुराना बाली का पुरा बेसाकिह मंदिर आज भी खड़ा है रहस्यमयी मजबूती के साथ



    नई दिल्ली(New Delhi)।
    इंडोनेशिया के बाली द्वीप में स्थित पुरा बेसाकिह मंदिर को वहां का सबसे बड़ा और सबसे पवित्र हिंदू मंदिर माना जाता है। इसे ‘मदर टेंपल’ यानी मातृ मंदिर भी कहा जाता है। करीब 2000 साल पुराने इस मंदिर को बाली की संस्कृति, आस्था और इतिहास का प्रतीक माना जाता है।

    पर्वतों और बादलों के बीच स्थित यह मंदिर अपनी भव्यता और आध्यात्मिक वातावरण के कारण हर साल हजारों श्रद्धालुओं और पर्यटकों को आकर्षित करता है। यहां सिर्फ एक मंदिर नहीं, बल्कि दर्जनों छोटे-बड़े मंदिरों का विशाल परिसर मौजूद है।

    ज्वालामुखी के बीच भी सुरक्षित रहने का रहस्य
    यह मंदिर सक्रिय ज्वालामुखी माउंट अगुंग की तलहटी में स्थित है, जो कई बार विस्फोट कर चुका है। इसके बावजूद मंदिर को बड़े नुकसान से बचा रहना स्थानीय लोगों के लिए आज भी रहस्य और आस्था का विषय है।

    सबसे बड़ा उदाहरण 1963 के ज्वालामुखी विस्फोट का है, जब लावा मंदिर के बेहद करीब तक पहुंच गया था, लेकिन मुख्य मंदिर सुरक्षित बच गया। इसी कारण स्थानीय लोग इसे देवताओं की कृपा और चमत्कार मानते हैं।

    वास्तुकला और धार्मिक महत्व
    पुरा बेसाकिह की वास्तुकला बेहद आकर्षक है, जिसमें ऊंची सीढ़ियां, पत्थरों के विशाल द्वार और पारंपरिक बाली शैली की संरचनाएं देखने को मिलती हैं। यहां समय-समय पर धार्मिक अनुष्ठान और बड़े उत्सव आयोजित होते हैं, जिसमें हजारों श्रद्धालु शामिल होते हैं।मंत्रों की गूंज और धार्मिक वातावरण इस स्थान को और भी आध्यात्मिक बना देता है।

    पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र
    आज यह मंदिर सिर्फ धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि बाली की पहचान और प्रमुख पर्यटन केंद्र भी बन चुका है। यहां आने वाले पर्यटक प्रकृति, संस्कृति और आध्यात्मिकता का अनोखा संगम महसूस करते हैं।स्थानीय मान्यता के अनुसार, सच्चे मन से यहां आने वाले भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं, यही कारण है कि सदियों बाद भी इस मंदिर की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है।