Author: bharati

  • टीईटी अनिवार्यता के आदेश का विरोध तेज, राज्य कर्मचारी संघ ने सरकार से कहा-फैसला वापस लें

    टीईटी अनिवार्यता के आदेश का विरोध तेज, राज्य कर्मचारी संघ ने सरकार से कहा-फैसला वापस लें



    भोपाल । मध्यप्रदेश में प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षकों के लिए टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट (टीईटी) पास करना अनिवार्य करने के आदेश का विरोध शुरू हो गया है। भारतीय मजदूर संघ से संबद्ध मप्र राज्य कर्मचारी संघ ने स्कूल शिक्षा विभाग के इस फैसले पर कड़ी आपत्ति जताई है और सरकार से आदेश वापस लेने की मांग की है। संगठन का कहना है कि इस निर्देश से प्रदेश के लाखों शिक्षकों में असमंजस और असंतोष की स्थिति बन गई है।

    संघ ने इस मामले को गंभीर बताते हुए प्रदेश के मुख्य सचिव को पत्र लिखा है। पत्र में मांग की गई है कि शिक्षक पात्रता परीक्षा से जुड़े आदेश को तत्काल प्रभाव से रोका जाए और इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटीशन दायर की जाए, ताकि पहले से सेवा दे रहे शिक्षकों के हितों की रक्षा की जा सके।

    सेवा में कार्यरत शिक्षकों को परीक्षा देने का निर्देश
    राज्य कर्मचारी संघ के प्रदेश महामंत्री जितेंद्र सिंह द्वारा लिखे गए पत्र में कहा गया है कि लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा जारी निर्देश में यह कहा गया है कि सेवा में कार्यरत शिक्षकों को भी टीईटी परीक्षा उत्तीर्ण करना अनिवार्य होगा। जबकि प्रदेश में बड़ी संख्या में शिक्षक कई वर्षों से नियमित रूप से सेवा दे रहे हैं।

    संघ का तर्क है कि यह आदेश शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 और राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) के प्रावधानों की गलत व्याख्या के आधार पर जारी किया गया है। यदि इसे लागू किया गया तो हजारों शिक्षकों के सामने अनावश्यक संकट खड़ा हो सकता है।

    2009 से पहले नियुक्त शिक्षकों पर नियम लागू नहीं
    पत्र में यह भी स्पष्ट किया गया है कि टीईटी परीक्षा की अनिवार्यता मूल रूप से प्राथमिक (कक्षा 1 से 5) और उच्च प्राथमिक (कक्षा 6 से 8) के लिए नए शिक्षकों की भर्ती के समय लागू की गई थी। यह नियम उन शिक्षकों के लिए बनाया गया था जो 2009 के बाद नियुक्त हुए हैं।

    संघ का कहना है कि मध्यप्रदेश में बड़ी संख्या में शिक्षक 2009 से पहले नियुक्त हुए थे और वे लंबे समय से सफलतापूर्वक शिक्षण कार्य कर रहे हैं। ऐसे में वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों को अचानक टीईटी परीक्षा देने के लिए बाध्य करना न केवल अनुचित है बल्कि उनके मनोबल को भी प्रभावित करेगा।

    तीन लाख शिक्षकों में बढ़ा असमंजस
    राज्य कर्मचारी संघ के अनुसार शिक्षा विभाग ने अपने निर्देश में सुप्रीम कोर्ट के कुछ फैसलों का हवाला दिया है, लेकिन इस संबंध में राज्य सरकार या विभागीय स्तर पर कोई स्पष्ट नीति या आदेश जारी नहीं किया गया है। इसी कारण प्रदेश के लगभग तीन लाख शिक्षकों के बीच असमंजस की स्थिति बन गई है।

    संघ ने चेतावनी दी है कि यदि इस आदेश को तुरंत वापस नहीं लिया गया तो शिक्षक वर्ग में व्यापक असंतोष फैल सकता है। संगठन ने सरकार से आग्रह किया है कि लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा जारी पत्र पर तत्काल रोक लगाई जाए और शिक्षकों के हितों को ध्यान में रखते हुए उचित निर्णय लिया जाए।

    न्यायालय जाने की भी चेतावनी
    संघ ने अपने पत्र में यह भी कहा है कि यदि सरकार इस मामले में जल्द कोई स्पष्ट फैसला नहीं लेती, तो संगठन न्यायालय में पुनर्विचार याचिका (रिव्यू पिटीशन) दायर करने पर भी विचार करेगा। उनका कहना है कि प्रदेश के शिक्षकों के अधिकारों और हितों की रक्षा के लिए हर कानूनी विकल्प अपनाया जाएगा।

  • भोपाल: सूखी सेवनिया स्टेशन पर 'ट्रेन हादसा' छत काटकर निकाले गए यात्री, NDRF और रेलवे की जॉइंट मॉक ड्रिल में दिखा रेस्क्यू का दम!

    भोपाल: सूखी सेवनिया स्टेशन पर 'ट्रेन हादसा' छत काटकर निकाले गए यात्री, NDRF और रेलवे की जॉइंट मॉक ड्रिल में दिखा रेस्क्यू का दम!


    भोपाल। राजधानी के नजदीक सूखी सेवनिया रेलवे स्टेशन पर गुरुवार सुबह ठीक 11 बजे एक बड़े रेल हादसे की ‘इमरजेंसी कॉल’ ने पूरे मंडल को अलर्ट मोड पर ला दिया। सूचना थी कि स्टेशन के पास एक ट्रेन पटरी से उतर गई है और कोच एक-दूसरे के ऊपर चढ़ गए हैं। देखते ही देखते मौके पर हूटर बजाती दुर्घटना राहत ट्रेनें (ART) और NDRF की टीमें पहुँच गईं। यह नजारा भोपाल रेल मंडल द्वारा आयोजित एक फुल स्केल मॉक ड्रिल का था, जिसका उद्देश्य आपदा के समय रिस्पांस टाइम और तालमेल को परखना था।

    रेस्क्यू ऑपरेशन: गैस कटर से काटी गई ट्रेन की छत
    मॉक ड्रिल को इतना वास्तविक रूप दिया गया था कि ड्रिल के दौरान ट्रेन के कोचों को एक-दूसरे के ऊपर चढ़ा हुआ दिखाया गया। अंदर फंसे ‘यात्रियों’ को बचाने के लिए टीमों ने निम्नलिखित कदम उठाए:

    कटर का इस्तेमाल: कोच के भीतर फंसे यात्रियों तक पहुँचने के लिए NDRF की टीम ने हाइड्रोलिक और गैस कटर का उपयोग कर खिड़कियों के शीशे तोड़े और ट्रेन की छत को काटकर रास्ता बनाया।
     बोगी के नीचे फंसे डमी यात्रियों को निकालने के लिए आधुनिक ‘हाई-प्रेशर एयरबैग्स’ का सहारा लिया गया, जिससे भारी-भरकम कोच को उठाकर रास्ता बनाया गया।बाहर निकाले गए यात्रियों को तुरंत मौके पर मौजूद रेलवे मेडिकल टीम ने प्राथमिक उपचार दिया और एम्बुलेंस के जरिए ‘अस्पताल’ रवाना किया।

    अफसरों की मौजूदगी: डीआरएम ने खुद परखा रिस्पांस टाइम
    इस पूरी ड्रिल के दौरान भोपाल रेल मंडल के प्रबंधक (DRM) पंकज त्यागी अपनी पूरी टीम के साथ मौके पर मौजूद रहे। उन्होंने बचाव कार्य की बारीकियों का निरीक्षण किया और टीमों के तालमेल को सराहा।ड्रिल में रेलवे के आरपीएफ (RPF), जीआरपी (GRP), मेडिकल विंग और NDRF के जवानों ने एक साथ काम किया।स्टेशन मास्टर से सूचना मिलने के बाद राहत ट्रेनों के पहुँचने और यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकालने तक का समय ‘गोल्डन ऑवर’ के मानकों के अनुरूप रहा।

    सुरक्षा केवल एक शब्द नहीं, बल्कि निरंतर अभ्यास है। सूखी सेवनिया में हुई यह मॉक ड्रिल इस बात का प्रमाण है कि किसी भी अप्रिय घटना की स्थिति में हमारी रेलवे और राहत टीमें कम से कम समय में जान-माल की रक्षा करने के लिए पूरी तरह मुस्तैद हैं।

  • होम ग्राउंड पर चुनौती, Royal Challengers Bengaluru के लिए M. Chinnaswamy Stadium में शुरुआती मैच मुश्किल

    होम ग्राउंड पर चुनौती, Royal Challengers Bengaluru के लिए M. Chinnaswamy Stadium में शुरुआती मैच मुश्किल


    नई दिल्ली। भारत के पूर्व क्रिकेटर Abhinav Mukund का मानना है कि मौजूदा चैंपियन Royal Challengers Bengaluru (आरसीबी) को आगामी Indian Premier League सीजन में अपने घरेलू मैदान पर कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि टीम के शुरुआती मुकाबले काफी कठिन होंगे और खिलाड़ियों के लिए हालात को जल्दी समझना जरूरी होगा।

    चिन्नास्वामी स्टेडियम में चुनौतीपूर्ण शुरुआत
    मुकुंद के अनुसार M. Chinnaswamy Stadium की परिस्थितियां आरसीबी के लिए शुरुआत में थोड़ी मुश्किल साबित हो सकती हैं। उन्होंने बताया कि पिछले साल टीम के चैंपियन बनने के बाद हुए विजय जुलूस के दौरान भगदड़ की घटना के बाद करीब आठ से नौ महीनों तक इस मैदान पर कोई प्रतिस्पर्धी क्रिकेट नहीं खेला गया। ऐसे में खिलाड़ियों को मैदान की स्थिति और पिच के व्यवहार को समझने में समय लग सकता है।

    विरोधी टीमों से कड़ी टक्कर
    मुकुंद ने JioHotstar पर बातचीत के दौरान कहा कि आरसीबी को अपने शुरुआती मैचों में मजबूत टीमों से भिड़ना है। टीम का पहला मुकाबला 28 मार्च को Sunrisers Hyderabad के खिलाफ होगा, जबकि 4 अप्रैल को उन्हें Chennai Super Kings से भिड़ना है। उन्होंने इन दोनों मुकाबलों को आरसीबी के लिए अग्नि परीक्षा जैसा बताया।

    घरेलू मैदान पर पिछला प्रदर्शन कमजोर
    पिछले सीजन में आरसीबी का प्रदर्शन अपने घरेलू मैदान की तुलना में बाहर के मैचों में बेहतर रहा था। बेंगलुरु की टीम घर पर केवल दो मैच जीत सकी थी, जबकि तीन मुकाबलों में उसे हार का सामना करना पड़ा। एक मैच बारिश के कारण रद्द हो गया था। यह आंकड़े बताते हैं कि टीम को अपने ही मैदान पर मजबूत पकड़ बनाने के लिए और मेहनत करनी होगी।

    चिन्नास्वामी में आरसीबी का रिकॉर्ड
    आरसीबी ने M. Chinnaswamy Stadium में अब तक कुल 96 आईपीएल मैच खेले हैं। इनमें टीम को 46 मुकाबलों में जीत मिली है, जबकि 47 मैचों में हार का सामना करना पड़ा है। चार मैच ऐसे भी रहे जिनका कोई नतीजा नहीं निकल सका। आंकड़े बताते हैं कि इस मैदान पर आरसीबी का रिकॉर्ड संतुलित रहा है, इसलिए नए सीजन में टीम के लिए यहां मजबूत प्रदर्शन करना बेहद अहम होगा।

  • ‘इससे बड़ा पल नहीं’ -बैक टू बैक ICC Men's T20 World Cup खिताब पर Jasprit Bumrah की प्रतिक्रिया

    ‘इससे बड़ा पल नहीं’ -बैक टू बैक ICC Men's T20 World Cup खिताब पर Jasprit Bumrah की प्रतिक्रिया


    नई दिल्ली। भारत के स्टार तेज गेंदबाज Jasprit Bumrah ने कहा है कि लगातार दो टी20 विश्व कप जीतना उनके करियर का सबसे खास और गर्व का पल है। उन्होंने कहा कि वह हमेशा चुनौतीपूर्ण काम करना चाहते थे और क्रिकेट को भी इसी सोच के साथ चुना था। जब उन्हें मैदान पर कुछ अलग और खास करने का मौका मिलता है, तो उससे उन्हें बेहद खुशी मिलती है।

    चुनौती लेना हमेशा पसंद रहा
    Board of Control for Cricket in India (बीसीसीआई) के बीसीसीआई टीवी पर साझा किए गए एक वीडियो में बुमराह ने कहा कि वह कभी भी जिम्मेदारी से पीछे नहीं हटना चाहते। उनका मानना है कि कठिन परिस्थितियों में टीम के लिए आगे आना ही असली खिलाड़ी की पहचान होती है। उन्होंने कहा कि वह हमेशा मैच के अहम मौकों पर गेंदबाजी करना पसंद करते हैं और इसी चुनौती ने उन्हें क्रिकेट की ओर आकर्षित किया।

    अहमदाबाद से शुरू हुआ सफर
    बुमराह ने बताया कि उनका क्रिकेट करियर Ahmedabad से शुरू हुआ था। उन्होंने गुजरात के लिए खेलते हुए अपने खेल को निखारा और धीरे-धीरे राष्ट्रीय टीम तक पहुंचे। अब उसी धरती पर विश्व कप खेलना और फाइनल में शानदार प्रदर्शन करना उनके लिए बेहद खास अनुभव रहा। उन्होंने कहा कि पिछली बार टीम जीत से थोड़ा पीछे रह गई थी, लेकिन इस बार भारत ने बाजी मार ली।

    परिवार की मौजूदगी ने बनाया पल खास
    बुमराह ने कहा कि इस जीत को और खास बनाने वाली बात यह थी कि उनका परिवार भी उस समय उनके साथ मौजूद था। उनका बेटा और उनकी मां स्टेडियम में मौजूद थे, जिससे यह जीत उनके लिए और भावुक पल बन गई। उन्होंने कहा कि इस तरह के पल जीवन में बहुत कम आते हैं और वह इसके लिए भगवान के बेहद आभारी हैं।

    भारत ने रचा इतिहास
    भारतीय टीम ने 8 मार्च को खेले गए ICC Men’s T20 World Cup 2026 के फाइनल में New Zealand national cricket team को 96 रन से हराकर खिताब अपने नाम किया। इसके साथ ही India national cricket team लगातार दो टी20 विश्व कप जीतने वाली पहली टीम बन गई। भारत अब तक कुल तीन टी20 विश्व कप खिताब जीत चुका है।

    फाइनल में बुमराह का शानदार प्रदर्शन
    फाइनल मुकाबले में बुमराह ने बेहतरीन गेंदबाजी करते हुए चार ओवर में केवल 15 रन देकर चार विकेट झटके। उनके इस शानदार प्रदर्शन के लिए उन्हें प्लेयर ऑफ द मैच भी चुना गया। इससे पहले सेमीफाइनल में भी उन्होंने शानदार गेंदबाजी कर टीम को जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई थी।

  • भ्रष्टाचार रोधी नियमों का उल्लंघन, International Cricket Council ने Jevon Searles समेत तीन लोगों को किया सस्पेंड

    भ्रष्टाचार रोधी नियमों का उल्लंघन, International Cricket Council ने Jevon Searles समेत तीन लोगों को किया सस्पेंड


    नई दिल्ली।अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद International Cricket Council (आईसीसी) ने भ्रष्टाचार से जुड़े आरोपों के चलते वेस्टइंडीज के तेज गेंदबाजी ऑलराउंडर Javon Searles, टाइटंस टीम के मालिक Chitranjan Rathod और टीम अधिकारी Griffith को अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई Cricket West Indies और आईसीसी के एंटी-करप्शन कोड के तहत की गई है।

    ‘बिम10’ टूर्नामेंट से जुड़े आरोप
    आईसीसी के बयान के अनुसार तीनों पर 2023-24 में खेले गए BIM10 Tournament से जुड़े भ्रष्टाचार के आरोप लगाए गए हैं, जो क्रिकेट वेस्टइंडीज एंटी-करप्शन कोड के दायरे में आते हैं। इसके अलावा टीम अधिकारी ग्रिफिथ पर अंतरराष्ट्रीय मैचों से जुड़ा एक अतिरिक्त आरोप भी है, जो सीधे आईसीसी एंटी-करप्शन कोड के तहत आता है।

    तुरंत प्रभाव से निलंबन
    आईसीसी ने बताया कि तीनों को तत्काल प्रभाव से क्रिकेट से निलंबित कर दिया गया है। हालांकि उन्हें आरोपों का जवाब देने के लिए 11 मार्च 2026 से 14 दिन का समय दिया गया है। इस दौरान वे अपने बचाव में जवाब दाखिल कर सकते हैं।

    अलग-अलग धाराओं में आरोप
    आईसीसी के अनुसार चितरंजन राठौड़ पर क्रिकेट वेस्टइंडीज कोड के तहत तीन आरोप लगाए गए हैं, जबकि सियरल्स पर चार आरोप दर्ज किए गए हैं। वहीं टीम अधिकारी ग्रिफिथ पर क्रिकेट वेस्टइंडीज कोड के तहत चार और आईसीसी कोड के तहत एक अतिरिक्त आरोप लगाया गया है।

    मैच फिक्सिंग से जुड़े आरोप
    क्रिकेट वेस्टइंडीज एंटी-करप्शन कोड के आर्टिकल 2.1.1 के तहत आरोप है कि ‘बिम10’ टूर्नामेंट 2023-24 के मैचों के नतीजे, आचरण या किसी अन्य पहलू को फिक्स करने, फिक्स करने की कोशिश करने या अनुचित तरीके से प्रभावित करने की कोशिश की गई। इसके अलावा आर्टिकल 2.1.4 के तहत खिलाड़ियों को भ्रष्ट गतिविधियों के लिए उकसाने, निर्देश देने या सुविधा उपलब्ध कराने के आरोप भी शामिल हैं।

    जांच में सहयोग न करने का आरोप
    आर्टिकल 2.4.4 के तहत आरोप है कि संभावित भ्रष्टाचार के मामलों की जांच में अधिकारियों के साथ उचित सहयोग नहीं किया गया। वहीं सियरल्स और ग्रिफिथ पर आर्टिकल 2.4.2 के उल्लंघन का भी आरोप है, जिसके तहत किसी भी संदिग्ध संपर्क या प्रस्ताव की जानकारी क्रिकेट वेस्टइंडीज को देना अनिवार्य होता है।

    ग्रिफिथ पर अतिरिक्त आरोप
    ग्रिफिथ पर आईसीसी एंटी-करप्शन कोड के आर्टिकल 2.4.7 के उल्लंघन का भी आरोप लगाया गया है। इसके तहत आरोप है कि उन्होंने एंटी-करप्शन यूनिट की जांच में बाधा डालने, जरूरी जानकारी छिपाने या सबूतों से छेड़छाड़ करने की कोशिश की।

    आईपीएल में भी खेल चुके हैं सियरल्स
    गौरतलब है कि Javon Searles वेस्टइंडीज अंडर-19 टीम के लिए खेल चुके हैं और 2018 में Kolkata Knight Riders की ओर से Indian Premier League में भी हिस्सा ले चुके हैं। फिलहाल आईसीसी की इस कार्रवाई के बाद उनके क्रिकेट करियर पर सवाल खड़े हो गए हैं।

  • पश्चिम एशिया तनाव का असर: Silver में 5,000 रुपये से ज्यादा की तेजी, कीमती धातुओं में उछाल

    पश्चिम एशिया तनाव का असर: Silver में 5,000 रुपये से ज्यादा की तेजी, कीमती धातुओं में उछाल


    नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच गुरुवार को घरेलू कमोडिटी बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में तेजी देखने को मिली। Multi Commodity Exchange of India (एमसीएक्स) पर शुरुआती कारोबार में सोने में हल्की गिरावट दिखी, लेकिन बाद में इसमें मजबूती लौट आई। वहीं चांदी ने शुरुआती कमजोरी से उबरते हुए तेज उछाल दर्ज किया। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार निचले स्तर पर मजबूत खरीदारी के कारण चांदी में यह तेजी देखने को मिली।

    सोने की कीमतों में हल्की बढ़त
    खबर लिखे जाने तक दोपहर करीब 1:36 बजे एमसीएक्स पर अप्रैल डिलीवरी वाला सोना 361 रुपये यानी 0.22 प्रतिशत की तेजी के साथ 1,62,150 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार करता नजर आया। सोने ने दिन की शुरुआत 1,62,799 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर से की थी, जो पिछले बंद भाव 1,61,789 रुपये से ज्यादा था। हालांकि बाद में वैश्विक बाजार से कमजोर संकेत मिलने के कारण इसकी कीमतों में कुछ गिरावट भी देखी गई।

    मांग क्षेत्र बना 1.56–1.57 लाख का स्तर
    विशेषज्ञों का मानना है कि 1,56,000 से 1,57,000 रुपये का स्तर सोने के लिए मजबूत मांग क्षेत्र बना हुआ है। विश्लेषकों के अनुसार यदि कीमतें इस स्तर से ऊपर बनी रहती हैं, तो मध्यम अवधि में सोने का तेजी वाला रुझान बरकरार रह सकता है। अगर सोना 1,65,000 रुपये के स्तर से ऊपर मजबूती से निकलता है, तो आगे चलकर 1,75,000 से 1,80,000 रुपये तक नई तेजी देखने को मिल सकती है।

    चांदी में 5,900 रुपये से ज्यादा का उछाल
    दूसरी ओर चांदी की कीमतों में सत्र के दौरान मजबूत तेजी दर्ज की गई। एमसीएक्स पर मई डिलीवरी वाली चांदी 5,911 रुपये यानी 2.20 प्रतिशत की बढ़त के साथ 2,74,402 रुपये प्रति किलोग्राम पर कारोबार करती नजर आई। चांदी ने 2,69,212 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर कारोबार की शुरुआत की थी, जो इसके पिछले बंद भाव 2,68,491 रुपये से थोड़ा ज्यादा था। दिन के दौरान मजबूत खरीदारी के कारण इसकी कीमतों में तेजी और बढ़ गई।

    वैश्विक बाजार में मिला-जुला रुख
    वैश्विक बाजार में हालांकि सोने की कीमतों में हल्की गिरावट देखने को मिली। स्पॉट गोल्ड लगभग 0.2 प्रतिशत गिरकर 5,165.73 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया, जबकि अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स भी करीब 0.2 प्रतिशत गिरकर 5,171.40 डॉलर प्रति औंस पर रहे। वहीं स्पॉट सिल्वर लगभग स्थिर रहकर 85.82 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार करता दिखा।

    पश्चिम एशिया तनाव का असर
    बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण वैश्विक बाजारों में अस्थिरता बढ़ गई है। ऐसे समय में निवेशक अक्सर सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख करते हैं, जिससे सोना और चांदी जैसी कीमती धातुओं की मांग बढ़ जाती है। पिछले कुछ दिनों में इसी वजह से इन धातुओं की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिला है।

    तेल और डॉलर के कारण कमजोर हुआ रुपया
    इसी बीच कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और डॉलर की मजबूती के कारण भारतीय मुद्रा Indian Rupee भी दबाव में आ गई। गुरुवार को रुपया अमेरिकी मुद्रा United States Dollar के मुकाबले करीब 0.3 प्रतिशत गिरकर 92.3575 के स्तर पर पहुंच गया, जो अब तक का रिकॉर्ड निचला स्तर है। इससे पहले इसी सप्ताह रुपया 92.3475 के स्तर तक गिरा था, जिसे गुरुवार को पार कर दिया गया।

  • International Cricket Council ने दी जानकारी, West Indies cricket team और South Africa national cricket team के बचे खिलाड़ी स्वदेश रवाना

    International Cricket Council ने दी जानकारी, West Indies cricket team और South Africa national cricket team के बचे खिलाड़ी स्वदेश रवाना


    नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद International Cricket Council (आईसीसी) ने गुरुवार को पुष्टि की कि दक्षिण अफ्रीका और वेस्टइंडीज की टीमों के बाकी खिलाड़ी भी अब अपने-अपने देशों के लिए रवाना हो गए हैं। दरअसल, ICC Men’s T20 World Cup 2026 खत्म होने के बाद दोनों टीमों के कुछ खिलाड़ी और स्टाफ सदस्य भारत में ही रुक गए थे। मिडिल ईस्ट में चल रहे भू-राजनीतिक संकट और हवाई यात्रा में आई बाधाओं के कारण उनकी वापसी में देरी हो गई थी। अब आईसीसी के समन्वय और प्रयासों के बाद सभी खिलाड़ियों की सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित की गई है।

    पिछले 24 घंटों में रवाना हुए अंतिम ट्रैवल ग्रुप
    आईसीसी के अनुसार पिछले 24 घंटों के भीतर दक्षिण अफ्रीका के बचे हुए 29 सदस्य और वेस्टइंडीज के 16 सदस्य फ्लाइट से अपने-अपने देशों के लिए रवाना हो गए। इसके साथ ही खिलाड़ियों और स्टाफ की घर वापसी से जुड़ा एक जटिल और चुनौतीपूर्ण ऑपरेशन पूरा हो गया। आईसीसी ने कहा कि मिडिल ईस्ट में जारी तनाव की वजह से अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के संचालन में कई बाधाएं आई थीं, जिससे खिलाड़ियों की यात्रा योजनाओं में लगातार बदलाव करना पड़ा।

    क्रिकेट बोर्ड और स्टाफ का जताया आभार
    आईसीसी ने इस पूरी प्रक्रिया में सहयोग के लिए Cricket South Africa और Cricket West Indies का आभार जताया। परिषद ने अपने स्टाफ की भी सराहना की, जिन्होंने खिलाड़ियों, कोचिंग स्टाफ और उनके परिवारों की सुरक्षित घर वापसी सुनिश्चित करने के लिए लगातार काम किया। आईसीसी ने कहा कि इस चुनौतीपूर्ण समय में सभी संबंधित एजेंसियों और क्रिकेट बोर्डों के बीच बेहतर तालमेल के कारण ही यह ऑपरेशन सफल हो सका।

    पहले भी कुछ खिलाड़ी लौट चुके थे
    आईसीसी ने इससे पहले बुधवार को जानकारी दी थी कि दक्षिण अफ्रीका के चार खिलाड़ी और उनके परिवार के पांच सदस्य पहले ही अपने देश के लिए रवाना हो चुके थे। वहीं बाकी 29 सदस्य अगले 24 घंटों के भीतर यात्रा करने वाले थे। इसी तरह वेस्टइंडीज टीम के नौ सदस्य पहले ही कैरिबियन के लिए रवाना हो गए थे, जबकि बाकी 16 खिलाड़ियों ने भारत से उड़ान भरने के लिए अपनी फ्लाइट बुक कर ली थी।

    मिडिल ईस्ट संकट से प्रभावित हुई हवाई यात्रा
    खिलाड़ियों की घर वापसी में देरी की मुख्य वजह खाड़ी क्षेत्र में चल रहा संकट रहा। इस स्थिति के कारण अंतरराष्ट्रीय हवाई यात्रा में बड़े पैमाने पर व्यवधान पैदा हुआ। कई देशों ने सुरक्षा कारणों से अपना एयरस्पेस अस्थायी रूप से बंद कर दिया था। इसके अलावा मिसाइल अलर्ट, उड़ानों के रूट में बदलाव, और कमर्शियल तथा चार्टर फ्लाइट्स के अचानक स्थगित होने या रीशेड्यूल होने जैसी समस्याओं के कारण भी यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।

    कई एजेंसियों के समन्वय से संभव हुआ ऑपरेशन
    आईसीसी की ऑपरेशन और लॉजिस्टिक्स टीमों ने इस चुनौतीपूर्ण स्थिति में कई एजेंसियों के साथ मिलकर काम किया। परिषद ने बताया कि सरकारों, एयरलाइंस, चार्टर सेवा प्रदाताओं, एयरपोर्ट अथॉरिटीज और सदस्य क्रिकेट बोर्डों के साथ लगातार समन्वय किया गया। हालात के अनुसार यात्रा योजनाओं में बदलाव किए गए ताकि खिलाड़ियों और स्टाफ को सुरक्षित तरीके से उनके देशों तक पहुंचाया जा सके।

    आईसीसी ने बताई सीमाएं
    आईसीसी ने यह भी स्पष्ट किया कि यात्रा से जुड़ी कई समस्याएं उसके नियंत्रण से बाहर थीं। वैश्विक स्तर पर पैदा हुई सुरक्षा और लॉजिस्टिक चुनौतियों के कारण उड़ानों के संचालन में अचानक बदलाव हो रहे थे। इसके बावजूद परिषद ने सभी संबंधित पक्षों के साथ मिलकर खिलाड़ियों की सुरक्षित वापसी को प्राथमिकता दी और अंततः सभी सदस्यों को सुरक्षित घर भेजने में सफलता हासिल की।

  • ईरान के हमलों के बीच कतर से सीमित उड़ानें शुरू, भारत के लिए भी विशेष विमान रवाना

    ईरान के हमलों के बीच कतर से सीमित उड़ानें शुरू, भारत के लिए भी विशेष विमान रवाना


    नई दिल्ली । पश्चिम एशिया में ईरान की ओर से जारी हमलों के बीच नागरिक उड़ानों पर भारी असर पड़ा है। दूसरे देशों के नागरिक इस तनावपूर्ण माहौल में फंसे हुए हैं। इसी बीच कतार वायुमार्ग ने 12 मार्च से दोहा से सीमित उड़ानों का संचालन शुरू करने की घोषणा की है। एयरलाइन ने बताया कि 12 से 17 मार्च तक दोहा के लिए और दोहा से सीमित विमान चलाए जाएंगे।

    एयरलाइन के अपडेटेड शेड्यूल के अनुसार 12 मार्च को हमाद इंटरनेशनल एयरपोर्ट से कुल 29 विमान उड़ान भरेंगे जिनमें 15 प्रस्थान और 14 आगमन होंगे। दोहा से उड़ानें मुंबई नई दिल्ली कोच्चि इस्लामाबाद न्यूयॉर्क फ्रैंकफर्ट बीजिंग लंदन काहिरा और जोहान्सबर्ग के लिए होंगी। वहीं दोहा आने वाली उड़ानों में सोल जेद्दा नई दिल्ली हांगकांग मस्कट मेलबर्न डलास और बैंकॉक शामिल हैं।

    भारत के लिए उड़ानों का विशेष शेड्यूल भी तैयार किया गया है। 13 मार्च को दोहा से कोच्चि के लिए उड़ान होगी। 14 मार्च को मुंबई 15 मार्च को नई दिल्ली और 16 मार्च को कोच्चि और मुंबई के लिए उड़ानें संचालित होंगी। वहीं कोच्चि से दोहा 14 मार्च को मुंबई से 15 मार्च और नई दिल्ली से 16 मार्च को विमान रवाना होंगे। 17 मार्च को दोहा से कोच्चि और मुंबई के लिए उड़ानें जारी रहेंगी।

    कतर एयरवेज ने कहा कि कतर नागरिक उड्डयन मंत्रालय से अस्थायी प्राधिकरण मिलने के बाद लिमिटेड ऑपरेटिंग कॉरिडोर का इस्तेमाल कर विमान संचालित किए जा रहे हैं। एयरलाइन ने स्पष्ट किया कि ये उड़ानें नियमित कमर्शियल ऑपरेशन की वापसी नहीं हैं। इन अस्थायी उड़ानों का उद्देश्य प्रभावित यात्रियों को उनके परिवार और प्रियजनों से मिलाना है। कतर एयरस्पेस की पूर्ण सुरक्षा सुनिश्चित होने के बाद ही नियमित संचालन फिर से शुरू होगा।

    कतर के प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान अल थानी ने कैबिनेट मीटिंग में कहा कि अमेरिका और इजरायल के साथ ईरान के संघर्ष के दौरान देश की तैयारियों और क्षमता को मजबूत करना आवश्यक है। उन्होंने नागरिक सुरक्षा और एयरलाइन संचालन की स्थिरता पर जोर दिया।

    इस बीच बहरीन के गृह मंत्रालय ने जानकारी दी कि ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के साथ जासूसी के आरोप में चार बहरीन नागरिकों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें उम्र 22 से 36 वर्ष के लोग शामिल हैं जबकि एक 25 वर्षीय व्यक्ति विदेश में फरार है। मंत्रालय के अनुसार आरोपियों ने हाई रिजॉल्यूशन कैमरा और एन्क्रिप्टेड सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल कर महत्वपूर्ण स्थानों की तस्वीरें ली और उन्हें IRGC को भेजा। सुरक्षा और यात्री सुविधा को ध्यान में रखते हुए कतर एयरवेज का यह कदम संकटग्रस्त क्षेत्र में फंसे यात्रियों के लिए राहत का संकेत देता है खासकर भारत समेत अन्य देशों के नागरिकों के लिए।

  • मध्य पूर्व संघर्ष में 1100 से ज्यादा बच्चे बने निशाना, यूनिसेफ ने कूटनीति और बातचीत से हल निकालने की अपील की

    मध्य पूर्व संघर्ष में 1100 से ज्यादा बच्चे बने निशाना, यूनिसेफ ने कूटनीति और बातचीत से हल निकालने की अपील की


    नई दिल्ली । मध्य पूर्व में ईरान की ओर से जारी हमलों के बीच संयुक्त राष्ट्र के बाल आपातकालीन कोष ने चिंताजनक आंकड़े साझा किए हैं। 28 फरवरी से अब तक इस क्षेत्र में 1100 से अधिक बच्चे या तो घायल हो गए हैं या उनकी मौत हो चुकी है। इसमें ईरान में 200, लेबनान में 91, इजरायल में चार और कुवैत में एक बच्चा शामिल है। यूनिसेफ ने चेताया है कि जैसे-जैसे संघर्ष बढ़ेगा, यह संख्या और बढ़ सकती है।

    यूनिसेफ ने बच्चों को निशाना बनाने और उनकी निर्भरता पर हमलों की कड़ी निंदा की। संगठन ने बताया कि पढ़ाई में बड़े पैमाने पर बाधा उत्पन्न होने के कारण लाखों बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं, जबकि लगातार बमबारी और हमलों से लाखों बच्चे बेघर हो चुके हैं। सिविलियन इंफ्रास्ट्रक्चर, जिसमें हॉस्पिटल, स्कूल और पानी जैसी बुनियादी सुविधाएं शामिल हैं, को भी गंभीर नुकसान पहुंचा है या नष्ट कर दिया गया है। बच्चों को मारना या उनके जीवन और शिक्षा के आधारभूत साधनों को नुकसान पहुंचाना अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है।

    यूनिसेफ ने कहा कि हथियारों से होने वाली लड़ाई में बच्चों के खिलाफ गंभीर उल्लंघन अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार और अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का उल्लंघन माना जा सकता है। संगठन ने सभी संघर्षरत पक्षों से अपील की है कि वे लड़ाई के तरीके और साधनों का चुनाव करते समय बच्चों और आम नागरिकों को न्यूनतम जोखिम में रखें। खासकर ऐसे विस्फोटक हथियारों का इस्तेमाल करने से बचें जिनका असर बच्चों पर अधिक होता है।

    यूनिसेफ ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव के नेतृत्व में सभी पक्षों से संघर्ष रोकने और कूटनीतिक बातचीत में शामिल होने की पुरजोर अपील की। संगठन ने चेताया कि इस इलाके के लगभग 20 करोड़ बच्चे दुनिया से तत्काल और प्रभावी कार्रवाई की उम्मीद कर रहे हैं।

    यूनिसेफ का यह बयान वैश्विक समुदाय को याद दिलाता है कि युद्ध केवल सैन्य या राजनीतिक संकट नहीं है, बल्कि इसमें सबसे संवेदनशील वर्ग बच्चे भी सबसे अधिक प्रभावित होते हैं। संगठन का कहना है कि बच्चों की सुरक्षा और उनके बुनियादी अधिकारों की रक्षा के बिना इस संकट का स्थायी समाधान संभव नहीं है।

    संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए स्कूलों, अस्पतालों और अन्य बुनियादी सेवाओं को सुरक्षित रखना अत्यंत आवश्यक है। यूनिसेफ ने सभी पक्षों से कहा कि उन्हें अंतरराष्ट्रीय नियमों और मानवता की दिशा में काम करना चाहिए, ताकि बच्चों और आम नागरिकों के जीवन को बचाया जा सके। यूनिसेफ का यह आंकड़ा और चेतावनी वैश्विक समुदाय के लिए गंभीर संदेश है कि मध्य पूर्व में जारी संघर्ष में मानवीय राहत और कूटनीतिक प्रयासों को सबसे प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

  • स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की 3 मई से गोरखपुर से शुरू होगी ‘गविष्ट यात्रा’, बनाएंगे ‘शंकराचार्य चतुरंगिणी सेना’

    स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की 3 मई से गोरखपुर से शुरू होगी ‘गविष्ट यात्रा’, बनाएंगे ‘शंकराचार्य चतुरंगिणी सेना’


    प्रयागराज। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद (Swami Avimukteshwaranand) ने घोषणा की है कि वह 3 मई से गोरखपुर से ‘गविष्ट यात्रा’ की शुरुआत करेंगे। यह अभियान 81 दिनों तक चलेगा और 23 जुलाई को गोरखपुर में ही इसका समापन होगा।
    उन्होंने कहा कि इस यात्रा के दौरान टीमें उत्तर प्रदेश के गांव-गांव जाकर लोगों को जागरूक करेंगी और सनातन धर्म व गौसंरक्षण के मुद्दों पर संवाद करेंगी।

    प्रयागराज में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने बताया कि इस यात्रा के माध्यम से राज्य के करीब 1.08 लाख गांवों तक पहुंचने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने समर्थकों से टीम बनाकर गांव-गांव जाने और प्रमाण के साथ सच बात जनता तक पहुंचाने का आह्वान किया।

    अनुमति को लेकर लगाए आरोप
    स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि कार्यक्रम को लेकर प्रशासनिक स्तर पर कई बाधाएं खड़ी की गईं। उनके अनुसार पहले काशी में कार्यक्रम रोकने की कोशिश हुई, फिर लखनऊ में प्रवेश को लेकर आपत्ति जताई गई और अंततः देर रात 16 शर्तों के साथ अनुमति दी गई, जिसके बाद 10 और शर्तें जोड़कर कुल 26 कर दी गईं।

    ‘शंकराचार्य पद सनातन धर्म का सुप्रीम कोर्ट’
    अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि शंकराचार्य पद सनातन धर्म में सर्वोच्च स्थान रखता है। उनके मुताबिक यह व्यवस्था ज्ञान और परंपरा पर आधारित है, न कि भीड़तंत्र पर। उन्होंने गौसंरक्षण और सनातन धर्म की रक्षा को समाज की जिम्मेदारी बताते हुए संत समाज से सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।

    ‘कोई राजनीतिक दल नहीं बना रहे’
    स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य कोई राजनीतिक दल बनाना नहीं है।

    उन्होंने कहा कि संत समाज जनता के बीच जाकर केवल यह संदेश देगा कि जो भी गौसंरक्षण और समाज के हित में काम करे, उसे ही समर्थन दिया जाना चाहिए।

    अखाड़ों को लिखा जाएगा पत्र
    उन्होंने कहा कि साधु समाज में आई कुछ विकृतियों पर भी चर्चा की जाएगी। इसके लिए विभिन्न अखाड़ों को पत्र लिखकर उनकी भूमिका स्पष्ट करने को कहा जाएगा। साथ ही उन्होंने ‘शंकराचार्य चतुरंगिणी सेना’ बनाने की बात भी कही, जिसमें संन्यासी, बैरागी, उदासीन और गृहस्थ शामिल होंगे।