Author: bharati

  • भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी को नई रफ्तार: दिल्ली में रूबियो-जयशंकर वार्ता, क्वाड बैठक से पहले बड़ा कूटनीतिक संदेश

    भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी को नई रफ्तार: दिल्ली में रूबियो-जयशंकर वार्ता, क्वाड बैठक से पहले बड़ा कूटनीतिक संदेश



    नई दिल्ली(New Delhi)।
    अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो इन दिनों चार दिवसीय भारत दौरे पर हैं, जहां उनकी यात्रा को भारत-अमेरिका संबंधों को नई दिशा देने वाला महत्वपूर्ण कूटनीतिक कदम माना जा रहा है। इस दौरे के दौरान उन्होंने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से नई दिल्ली में मुलाकात की, जिसके बाद रविवार को विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ द्विपक्षीय वार्ता की गई।

    बैठक के बाद दोनों नेताओं ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस की, जिसमें दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी, वैश्विक सहयोग और आपसी हितों पर विस्तार से चर्चा हुई। मार्को रूबियो ने भारत को अमेरिका का एक अत्यंत महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार बताया और कहा कि दोनों देश दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र हैं, जिनके हित कई वैश्विक मुद्दों पर एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं।

    रूबियो ने कहा कि भारत और अमेरिका केवल पारंपरिक साझेदार नहीं हैं, बल्कि एक व्यापक रणनीतिक सहयोग में जुड़े हुए देश हैं, जो वैश्विक चुनौतियों का मिलकर समाधान करने की क्षमता रखते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि दोनों देशों के नेतृत्व के बीच नियमित संवाद इस साझेदारी को और मजबूत बनाता है।

    वहीं विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच लगातार संपर्क और संवाद ने द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत किया है। उन्होंने बताया कि दोनों देशों के बीच रक्षा, व्यापार, तकनीक और वैश्विक सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग तेजी से बढ़ रहा है।

    रूबियो ने अपने बयान में यह भी कहा कि यह उनका भारत का पहला आधिकारिक दौरा है और वे इस संबंध को और गहराई से समझना चाहते हैं। उन्होंने भारत-अमेरिका साझेदारी को वैश्विक स्तर पर सहयोग का एक मजबूत उदाहरण बताया, जो किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है बल्कि पूरी दुनिया में प्रभाव डालता है।

    इसके बाद दोनों देशों के बीच औपचारिक द्विपक्षीय वार्ता शुरू हुई, जिसमें विभिन्न रणनीतिक और आर्थिक मुद्दों पर चर्चा जारी रही। रूबियो सोमवार को आगरा और जयपुर का दौरा करेंगे, जबकि मंगलवार को वे नई दिल्ली में होने वाली क्वाड देशों की विदेश मंत्रियों की बैठक में शामिल होंगे, जिसमें भारत, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान भाग लेंगे।

    यह दौरा भारत-अमेरिका संबंधों को नई मजबूती देने और वैश्विक कूटनीति में दोनों देशों की भूमिका को और प्रभावशाली बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

  • शेयर बाजार से हुई बड़ी कमाई पर सही निवेश रणनीति अपनाने से टैक्स बोझ काफी कम या शून्य तक किया जा सकता है।

    शेयर बाजार से हुई बड़ी कमाई पर सही निवेश रणनीति अपनाने से टैक्स बोझ काफी कम या शून्य तक किया जा सकता है।

    नई दिल्ली। शेयर बाजार में लंबी अवधि तक धैर्य और समझदारी के साथ किया गया निवेश कई लोगों को बड़ी आर्थिक सफलता दिलाता है। वर्षों तक निवेश बनाए रखने के बाद जब निवेशक अपने शेयर बेचकर करोड़ों रुपये का लाभ कमाते हैं, तब उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती टैक्स की होती है। आमतौर पर बड़ी कमाई के साथ भारी टैक्स देनदारी भी जुड़ जाती है, लेकिन आयकर नियमों में ऐसे प्रावधान मौजूद हैं जिनका सही तरीके से उपयोग करके इस टैक्स बोझ को काफी कम किया जा सकता है। यही वजह है कि अब बड़ी संख्या में निवेशक टैक्स प्लानिंग के कानूनी विकल्पों की ओर ध्यान दे रहे हैं।

    हाल के समय में एक ऐसी व्यवस्था चर्चा का विषय बनी हुई है जिसके तहत शेयर बाजार से हुई लंबी अवधि की कमाई पर लगने वाले टैक्स को कम करने या कुछ परिस्थितियों में शून्य तक लाने का अवसर मिल सकता है। यह व्यवस्था खास तौर पर उन निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है जिन्होंने लंबे समय तक शेयरों या इक्विटी आधारित निवेश को होल्ड करने के बाद बड़ा लाभ अर्जित किया है। हालांकि इस लाभ का फायदा सभी लोगों को स्वतः नहीं मिलता, बल्कि इसके लिए कुछ निर्धारित शर्तों का पालन करना जरूरी होता है।

    नियमों के अनुसार यदि कोई निवेशक अपनी शेयर बिक्री से प्राप्त राशि को निर्धारित समय सीमा के भीतर एक रिहायशी संपत्ति में निवेश करता है, तो उसे टैक्स में राहत मिलने की संभावना बनती है। इस व्यवस्था का उद्देश्य निवेशकों को केवल टैक्स छूट देना नहीं बल्कि पूंजी को उत्पादक और दीर्घकालिक परिसंपत्तियों की ओर बढ़ावा देना भी माना जाता है। यही कारण है कि निवेश और संपत्ति निर्माण को एक साथ जोड़कर देखने की प्रवृत्ति तेजी से बढ़ रही है।

    हालांकि यहां एक महत्वपूर्ण बात समझना भी जरूरी है कि केवल करोड़ों रुपये की कमाई होने भर से टैक्स स्वतः समाप्त नहीं हो जाता। इसके लिए निवेशक को समय सीमा, निवेश राशि और पात्रता से जुड़े नियमों का पूरी तरह पालन करना पड़ता है। यदि कोई व्यक्ति निर्धारित शर्तों को पूरा नहीं करता या प्रक्रिया में चूक करता है, तो उसे टैक्स राहत का लाभ नहीं मिल सकता। कुछ मामलों में छूट वापस भी ली जा सकती है और अतिरिक्त देनदारी का सामना करना पड़ सकता है।

    विशेषज्ञ मानते हैं कि बड़े निवेश निर्णय केवल लाभ कमाने तक सीमित नहीं होने चाहिए, बल्कि टैक्स प्रबंधन को भी निवेश रणनीति का हिस्सा बनाना चाहिए। कई निवेशक केवल रिटर्न पर ध्यान देते हैं और टैक्स प्रभावों को नजरअंदाज कर देते हैं, जिसके कारण अंतिम लाभ उम्मीद से काफी कम हो सकता है। इसलिए निवेश के साथ कानूनी और वित्तीय प्रावधानों की जानकारी रखना भी उतना ही आवश्यक माना जाता है।

    बदलते निवेश माहौल में अब केवल पैसा कमाना ही पर्याप्त नहीं रह गया है, बल्कि उसे समझदारी से संरक्षित करना भी उतना ही महत्वपूर्ण हो गया है। सही योजना, समय पर निर्णय और नियमों की स्पष्ट जानकारी के साथ निवेशक अपनी मेहनत की कमाई को अधिक सुरक्षित और प्रभावी तरीके से बढ़ा सकते हैं। यही कारण है कि अब निवेश जगत में टैक्स प्लानिंग को आर्थिक सफलता का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।

  • ढाका में US डिफेंस डील पर मंथन, ACSA और GSOMIA समझौते फिर सुर्खियों में

    ढाका में US डिफेंस डील पर मंथन, ACSA और GSOMIA समझौते फिर सुर्खियों में




    नई दिल्ली(New Delhi)।
    बांग्लादेश में अमेरिका के साथ दो अहम रक्षा समझौतों को लेकर राजनीतिक और रणनीतिक हलकों में बड़ी चर्चा तेज हो गई है। ये दोनों समझौते ACSA (Acquisition and Cross-Servicing Agreement) और GSOMIA (General Security of Military Information Agreement) कई वर्षों से लंबित हैं, जिन्हें लेकर अब एक बार फिर ढाका में गंभीर मंथन शुरू हो गया है।

    रिपोर्ट्स के अनुसार, पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की सरकार ने अमेरिका के साथ इन डिफेंस डील्स को आगे बढ़ाने से परहेज किया था। माना जाता है कि उस समय सरकार ने भारत और चीन के साथ संतुलन बनाए रखने की नीति अपनाई थी, जिसके चलते इन समझौतों पर अंतिम सहमति नहीं बन सकी। हालांकि, अब राजनीतिक बदलाव और नई परिस्थितियों के बीच इन समझौतों के फिर से सक्रिय होने की संभावना जताई जा रही है।

    ACSA समझौता के तहत अमेरिका और बांग्लादेश के बीच सैन्य लॉजिस्टिक्स सहयोग को मजबूत किया जाता है, जिसमें ईंधन आपूर्ति, उपकरणों की मरम्मत और सैन्य सहायता जैसी सुविधाएं शामिल होती हैं। वहीं GSOMIA के तहत दोनों देशों के बीच संवेदनशील सैन्य सूचनाओं के सुरक्षित आदान-प्रदान की व्यवस्था बनाई जाती है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ये दोनों समझौते लागू होते हैं, तो इससे अमेरिका की बांग्लादेश में सैन्य और रणनीतिक पहुंच और मजबूत हो सकती है। यह कदम बंगाल की खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी उपस्थिति को बढ़ाने के रूप में भी देखा जा रहा है, जिससे पूरे इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शक्ति संतुलन पर असर पड़ सकता है।

    हालांकि, यह स्पष्ट किया जा रहा है कि इन समझौतों का अर्थ किसी सैन्य बेस की स्थापना नहीं है, बल्कि यह मुख्य रूप से सहयोग, लॉजिस्टिक्स और सूचना साझाकरण तक सीमित ढांचा है। फिर भी, इस पहल को लेकर क्षेत्रीय भू-राजनीति में नई हलचल देखी जा रही है।

  • नेपाल का बड़ा दांव: भारतीय इन्फ्लुएंसर्स को बुलाकर टूरिज्म बढ़ाने की तैयारी, मोदी की अपील के बाद तेज हुई हलचल

    नेपाल का बड़ा दांव: भारतीय इन्फ्लुएंसर्स को बुलाकर टूरिज्म बढ़ाने की तैयारी, मोदी की अपील के बाद तेज हुई हलचल

    नई दिल्ली(New Delhi)।
    नेपाल की बालेन शाह सरकार ने देश के पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए एक नई और आक्रामक रणनीति शुरू की है, जिसमें भारतीय सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स को सीधे नेपाल आने का न्योता दिया गया है। यह कदम ऐसे समय पर सामने आया है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में भारतीय नागरिकों से गैर-जरूरी विदेश यात्राओं से बचने की अपील की थी। इस अपील के बाद क्षेत्रीय पर्यटन और यात्रा उद्योग में हलचल देखी जा रही है।

    नेपाल सरकार की इस नई पब्लिक डिप्लोमेसी रणनीति के तहत भारतीय यूट्यूबर्स, व्लॉगर्स, पॉडकास्ट क्रिएटर्स और डिजिटल कंटेंट निर्माताओं को नेपाल यात्रा के लिए आमंत्रित किया गया है। नेपाली दूतावास (नई दिल्ली) की ओर से 30 मई तक आवेदन मांगे गए हैं और इस पहल को भारतीय क्रिएटर्स से तेजी से प्रतिक्रिया मिल रही है।

    रिपोर्ट के अनुसार, यह पहली बार है जब नेपाल सरकार ने इस तरह सीधे भारतीय सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स को पर्यटन प्रचार के लिए शामिल किया है। काठमांडू पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, सिर्फ कुछ ही दिनों में 200 से अधिक आवेदन प्राप्त हो चुके हैं और यह संख्या लगातार बढ़ रही है। अनुमान है कि अंतिम तिथि तक यह आंकड़ा 1000 से ज्यादा पहुंच सकता है।

    नेपाल एयरलाइंस और होटल इंडस्ट्री ने भी इस अभियान को समर्थन दिया है। काठमांडू के कई फाइव स्टार होटलों ने चयनित इन्फ्लुएंसर्स के लिए विशेष पैकेज तैयार किए हैं। योजना के तहत चुने गए पांच इन्फ्लुएंसर्स को नेपाल के प्रमुख पर्यटन स्थलों जैसे काठमांडू, पोखरा और चितवन का दौरा कराया जाएगा, जहां वे देश की प्राकृतिक सुंदरता और सांस्कृतिक धरोहर का अनुभव करेंगे।

    नेपाल पर्यटन बोर्ड के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश की पर्यटन छवि को मजबूत करना है और भारतीय युवाओं तक सीधा संदेश पहुंचाना है।

  • 65 इंजेक्शन, 7 IVF असफलताएं और लंबा इंतजार: 45 की उम्र में मां बनने जा रहीं एक्ट्रेस संभावना सेठ की प्रेरक कहानी

    65 इंजेक्शन, 7 IVF असफलताएं और लंबा इंतजार: 45 की उम्र में मां बनने जा रहीं एक्ट्रेस संभावना सेठ की प्रेरक कहानी

    नई दिल्ली । मनोरंजन जगत की चर्चित अभिनेत्री और मॉडल संभावना सेठ इन दिनों अपनी निजी जिंदगी की एक बड़ी खुशखबरी को लेकर सुर्खियों में हैं। लंबे संघर्ष और भावनात्मक उतार-चढ़ाव के बाद अब वह मां बनने की राह पर हैं। हाल ही में उन्होंने अपने बेबी शावर की खूबसूरत तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा कीं, जिनमें उनकी खुशी और भावनाएं साफ झलक रही हैं। 45 वर्ष की उम्र में यह उनके जीवन का एक बेहद महत्वपूर्ण और भावुक मोड़ माना जा रहा है।

    संभावना सेठ पिछले कई वर्षों से मातृत्व की कोशिशों में लगी हुई थीं। करीब दस साल तक चले इस सफर में उन्होंने कई कठिन परिस्थितियों का सामना किया। लगातार असफलताओं के बावजूद उन्होंने उम्मीद नहीं छोड़ी और अपने सपने को पूरा करने की कोशिश जारी रखी। इस दौरान उन्होंने कई बार IVF प्रक्रिया से गुजरना पड़ा, जिसमें कई प्रयास सफल नहीं हो सके। बताया जाता है कि इस पूरे उपचार और प्रयासों के दौरान उन्हें भारी शारीरिक और मानसिक तनाव से गुजरना पड़ा, जिसमें कई इंजेक्शन और चिकित्सकीय प्रक्रियाएं शामिल थीं। इन कठिन परिस्थितियों ने उनके जीवन को बेहद चुनौतीपूर्ण बना दिया था।

    लगातार असफलताओं और एक गर्भपात के बाद संभावना और उनके पति ने अंततः सरोगेसी का सहारा लेने का निर्णय लिया। यह निर्णय उनके जीवन का एक नया मोड़ साबित हुआ, जिसने उनकी वर्षों की उम्मीदों को फिर से जीवित कर दिया। सरोगेसी के माध्यम से अब वह अपने जीवन में मातृत्व का अनुभव करने के बेहद करीब पहुंच चुकी हैं। इस पूरी यात्रा में उनके पति ने हमेशा उनका साथ दिया और किसी भी प्रकार का दबाव न बनाते हुए उन्हें भावनात्मक सहयोग प्रदान किया।

    हाल ही में उन्होंने अपनी प्रेग्नेंसी की घोषणा करते हुए कहा था कि यह उनके जीवन की सबसे खूबसूरत कहानी है, जो अब प्यार, उम्मीद और नए सफर के साथ आगे बढ़ रही है। बेबी शावर की तस्वीरों में उनकी मुस्कान और उत्साह इस बात को दर्शाता है कि लंबे इंतजार के बाद अब उनके जीवन में खुशी का नया अध्याय शुरू होने जा रहा है।

    संभावना सेठ मनोरंजन जगत में अपने अभिनय और रियलिटी शो में मजबूत उपस्थिति के लिए जानी जाती हैं। उन्होंने कई प्रोजेक्ट्स और फिल्मों में काम किया है और अपने अलग अंदाज के लिए दर्शकों के बीच पहचान बनाई है। करियर के साथ-साथ उनका यह व्यक्तिगत संघर्ष भी उन्हें एक प्रेरणादायक व्यक्तित्व बनाता है, जो कठिन परिस्थितियों में भी उम्मीद बनाए रखने का संदेश देता है।

    अब जब वह अपने जीवन के इस नए पड़ाव पर पहुंच चुकी हैं, तो उनके चाहने वाले भी इस खुशी में शामिल हो रहे हैं। लंबी और चुनौतीपूर्ण यात्रा के बाद मिली यह सफलता उनके लिए किसी नए जीवन की शुरुआत से कम नहीं है।

  • लखनऊ में बसपा बैठक: मायावती बोलीं-जनता का जीवन मुश्किल, संगठन मजबूत करने पर जोर

    लखनऊ में बसपा बैठक: मायावती बोलीं-जनता का जीवन मुश्किल, संगठन मजबूत करने पर जोर



    नई दिल्ली(New Delhi)।
    लखनऊ में मॉल एवेन्यू स्थित अपने आवास पर रविवार को बसपा सुप्रीमो मायावती ने राज्य स्तरीय बैठक की। इस बैठक में उन्होंने संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने और आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियों को लेकर कार्यकर्ताओं को अहम निर्देश दिए। बैठक में आकाश आनंद और आनंद कुमार समेत प्रदेश के सभी जिलाध्यक्ष और वरिष्ठ पदाधिकारी मौजूद रहे।

    बैठक के बाद जारी प्रेस विज्ञप्ति में मायावती ने कहा कि मौजूदा समय में जनता विरोधी नीतियों और छलावे की राजनीति के कारण आम लोगों का आत्मसम्मान के साथ जीना मुश्किल हो गया है। उन्होंने कार्यकर्ताओं को संदेश दिया कि संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत किया जाए और जनता तक पार्टी की नीतियों को प्रभावी तरीके से पहुंचाया जाए।

    मायावती ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश में बसपा के पक्ष में जनरुझान बढ़ रहा है और पार्टी का लक्ष्य प्रदेश में पांचवीं बार सरकार बनाना है। उन्होंने कहा कि कार्यकर्ताओं को “हाथी पर बटन दबाना है” के संदेश के साथ पूरी ताकत से चुनावी तैयारियों में जुटना होगा।

    उन्होंने विपक्षी दलों पर बिना नाम लिए निशाना साधते हुए कहा कि चुनाव के समय बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन बाद में जनता से किए गए वादों को भुला दिया जाता है। ऐसी राजनीति से लोगों का भला नहीं हो रहा है, इसलिए जनता को जागरूक करना जरूरी है।

    बसपा सुप्रीमो ने कहा कि बेरोजगारी, महंगाई, आर्थिक दबाव और कानून व्यवस्था की समस्याओं के कारण आम जनता का जीवन कठिन हो गया है। उन्होंने कहा कि सरकारों को रोजगार, रोटी, शांति और सामाजिक सौहार्द जैसे मूल मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए।

    मायावती ने यह भी दावा किया कि बसपा शासनकाल में सर्वजन हिताय की नीति के तहत बेहतर कानून व्यवस्था और सामाजिक संतुलन कायम रहा था। उन्होंने कहा कि ब्राह्मण समाज समेत सभी वर्गों को उस समय सम्मान और भागीदारी मिली थी।

    बैठक में संगठनात्मक समीक्षा भी की गई और बूथ स्तर तक नेटवर्क मजबूत करने की रणनीति तय की गई। साथ ही आगामी चुनावों को लेकर पार्टी कार्यकर्ताओं को सक्रिय रहने का निर्देश दिया गया।

  • कौशांबी में लूटकांड का खुलासा: पुलिस मुठभेड़ में दो बदमाश घायल, जवाबी फायरिंग में एक के पैर में लगी गोली

    कौशांबी में लूटकांड का खुलासा: पुलिस मुठभेड़ में दो बदमाश घायल, जवाबी फायरिंग में एक के पैर में लगी गोली



    नई दिल्ली(New Delhi)।
    कौशांबी जिले के कड़ाधाम थाना क्षेत्र में पुलिस ने पिछले महीने हुई मां-बेटे से लूट की घटना का खुलासा करते हुए बड़ी कार्रवाई की है। शनिवार देर रात पुलिस और बदमाशों के बीच हुई मुठभेड़ में दो शातिर लुटेरे गिरफ्तार किए गए, जिनमें से एक बदमाश पुलिस की जवाबी फायरिंग में पैर में गोली लगने से घायल हो गया। पुलिस ने दोनों को घेराबंदी कर पकड़ लिया और इलाज के लिए अस्पताल भेज दिया है।

    पुलिस के अनुसार, 27 अप्रैल 2026 की रात फतेहपुर जिले के सुल्तानपुर घोष थाना क्षेत्र निवासी संजय कुमार अपनी मां के साथ बाइक से गांव लौट रहे थे। इसी दौरान कड़ाधाम थाना क्षेत्र के नौढ़िया गांव के पास नहर पुलिया के नजदीक बाइक सवार दो अज्ञात बदमाशों ने उन्हें रोक लिया और तमंचे के बल पर मां-बेटे से लूटपाट की। वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी मौके से फरार हो गए थे।

    घटना के बाद पीड़ित की तहरीर पर मामला दर्ज कर पुलिस लगातार आरोपियों की तलाश में जुटी थी। शनिवार देर रात थाना प्रभारी विनीत सिंह अपनी टीम के साथ क्षेत्र में संदिग्ध वाहनों की चेकिंग कर रहे थे, तभी दो संदिग्ध युवक बाइक से आते दिखाई दिए। पुलिस ने उन्हें रोकने का प्रयास किया तो दोनों ने भागने के साथ ही पुलिस टीम पर फायरिंग शुरू कर दी।

    पुलिस ने भी आत्मरक्षा में जवाबी फायरिंग की, जिसमें एक बदमाश के पैर में गोली लग गई। इसके बाद पुलिस ने घेराबंदी कर दोनों आरोपियों को पकड़ लिया। गिरफ्तार बदमाशों की पहचान श्यामजीत पुत्र इंद्रमन निवासी हैबतपुर थाना सुल्तानपुर घोष और अमित पुत्र रमेश निवासी सौरई बुजुर्ग थाना कड़ाधाम के रूप में हुई है।

    पूछताछ में दोनों ने 27 अप्रैल की लूट की घटना में शामिल होने की बात स्वीकार की है। उनकी निशानदेही पर लूटे गए आधार कार्ड, पैन कार्ड, एटीएम कार्ड, मोबाइल फोन और घटना में इस्तेमाल की गई बाइक भी बरामद कर ली गई है। पुलिस ने घायल बदमाश को अस्पताल में भर्ती कराते हुए आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।

    क्षेत्राधिकारी सिराथू सत्येंद्र प्रसाद तिवारी ने बताया कि दोनों आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच आगे बढ़ाई जा रही है।

  • फिल्मी दुनिया में हलचल: ‘डॉन 3’ छोड़ने पर रणवीर सिंह पर शिकायत, फरहान अख्तर ने उठाया बड़ा कदम

    फिल्मी दुनिया में हलचल: ‘डॉन 3’ छोड़ने पर रणवीर सिंह पर शिकायत, फरहान अख्तर ने उठाया बड़ा कदम

    नई दिल्ली । बॉलीवुड में बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘डॉन 3’ को लेकर शुरू हुआ विवाद अब बड़ा रूप ले चुका है। फिल्म से रणवीर सिंह के बाहर होने के बाद निर्माता और अभिनेता के बीच तनाव बढ़ गया है। स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि मामला फिल्मी संगठनों तक पहुंच गया है और इस पर औपचारिक शिकायत दर्ज होने की खबरें सामने आई हैं। चर्चा यह भी है कि प्रोजेक्ट के दौरान हुए कथित नुकसान को लेकर करोड़ों रुपये के मुआवजे की मांग पर विचार किया जा रहा है, जिससे फिल्म इंडस्ट्री में हलचल बढ़ गई है।

    जानकारी के अनुसार रणवीर सिंह को इस बड़े प्रोजेक्ट के लिए पहले ही साइन किया गया था और फिल्म का प्रारंभिक प्रचार भी शुरू हो चुका था। लेकिन बाद में उन्होंने प्रोजेक्ट से हटने का फैसला लिया, जिससे पूरी योजना पर असर पड़ा। बताया जा रहा है कि उनकी अन्य फिल्मों की प्रतिबद्धताओं के चलते यह निर्णय लिया गया, जिसके बाद निर्माण पक्ष को आर्थिक और समय संबंधी नुकसान का सामना करना पड़ा। इसी कारण अब यह विवाद कानूनी और औपचारिक स्तर पर पहुंचता दिखाई दे रहा है।

    फिल्मी गलियारों में यह भी चर्चा है कि इस पूरे मामले को लेकर आगे की स्थिति का फैसला एक आगामी बैठक में सामने आ सकता है। उद्योग से जुड़े लोग मानते हैं कि बड़े बजट की फिल्मों में इस तरह के बदलाव का सीधा असर उत्पादन लागत और रिलीज शेड्यूल पर पड़ता है, जिससे विवाद स्वाभाविक रूप से बढ़ जाते हैं। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि आने वाले दिनों में यह मामला किस दिशा में आगे बढ़ता है और क्या दोनों पक्षों के बीच कोई समाधान निकल पाता है या नहीं।

    इसी बीच बॉलीवुड से जुड़ी एक और पुरानी लेकिन चर्चित टिप्पणी फिर से सुर्खियों में आ गई है, जिसमें एक प्रसिद्ध अभिनेता ने वर्ष 1993 में रिलीज हुई एक लोकप्रिय कॉमेडी फिल्म को अपने व्यक्तिगत दृष्टिकोण से अत्यधिक बोल्ड और कुछ दृश्यों के कारण असहज बताया था। यह फिल्म अपने समय में बड़ी व्यावसायिक सफलता हासिल करने में कामयाब रही थी और दर्शकों के बीच बेहद लोकप्रिय रही थी। हालांकि उस अभिनेता ने स्पष्ट रूप से कहा था कि उनकी व्यक्तिगत पसंद उस फिल्म से मेल नहीं खाती, लेकिन दर्शकों की स्वीकार्यता ने इसे बड़ी हिट बना दिया।

    फिल्मी दुनिया में अक्सर ऐसा देखा जाता है कि किसी फिल्म की सफलता और कलाकारों की व्यक्तिगत राय अलग-अलग हो सकती है। यही कारण है कि सिनेमा के प्रति दर्शकों का नजरिया हमेशा विविध और बहुआयामी रहता है।

  • आमिर खान का बड़ा बयान: गोविंदा-डेविड धवन की ब्लॉकबस्टर फिल्म को बताया था ‘वल्गर’, 25 करोड़ के कलेक्शन से बनी थी सुपरहिट

    आमिर खान का बड़ा बयान: गोविंदा-डेविड धवन की ब्लॉकबस्टर फिल्म को बताया था ‘वल्गर’, 25 करोड़ के कलेक्शन से बनी थी सुपरहिट


    नई दिल्ली । बॉलीवुड में कई बार ऐसी फिल्में सामने आई हैं जिन्हें दर्शकों ने भरपूर प्यार दिया, लेकिन आलोचकों और कलाकारों की राय उनसे बिल्कुल अलग रही। ऐसी ही एक चर्चा में आई थी 1993 में रिलीज हुई गोविंदा और चंकी पांडे स्टारर सुपरहिट फिल्म ‘आंखें’, जिसे लेकर बॉलीवुड के मिस्टर परफेक्शनिस्ट आमिर खान ने एक बार बेहद स्पष्ट और सख्त राय दी थी।

    आमिर खान ने एक पुराने इंटरव्यू में इस फिल्म पर बात करते हुए कहा था कि उन्हें यह फिल्म व्यक्तिगत रूप से पसंद नहीं आई। उन्होंने फिल्म के कुछ दृश्यों को लेकर टिप्पणी करते हुए इसे “वल्गर” और “अश्लीलता के करीब” बताया था। आमिर का कहना था कि फिल्म के कुछ कॉमेडी सीन उनकी समझ और पसंद से मेल नहीं खाते थे, हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि दर्शकों की पसंद अलग हो सकती है और किसी फिल्म की सफलता का पैमाना केवल व्यक्तिगत राय नहीं होता।

    ‘आंखें’ एक कॉमेडी-ड्रामा फिल्म थी, जिसका निर्देशन डेविड धवन ने किया था और कहानी अनीस बज्मी ने लिखी थी। गोविंदा इस फिल्म में डबल रोल में नजर आए थे, जिसने दर्शकों को खूब हंसाया और मनोरंजन का नया अंदाज दिया। फिल्म में चंकी पांडे, राज बब्बर, कादर खान और शक्ति कपूर जैसे कलाकारों ने भी महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाईं। अपनी रिलीज के साथ ही यह फिल्म उस समय की सबसे बड़ी हिट फिल्मों में शामिल हो गई थी।

    कम बजट में बनी इस फिल्म की सबसे बड़ी खासियत इसकी कॉमिक टाइमिंग और मनोरंजन से भरपूर कहानी थी। लगभग ढाई करोड़ रुपये के बजट में तैयार हुई इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर लगभग 25 करोड़ रुपये का शानदार कलेक्शन किया था, जो उस दौर में एक बड़ी उपलब्धि मानी जाती है। इस सफलता ने गोविंदा को कॉमेडी फिल्मों के सुपरस्टार के रूप में और मजबूत पहचान दिलाई।

    आमिर खान के बयान ने फिल्म इंडस्ट्री में चर्चा जरूर पैदा की, क्योंकि जहां एक तरफ यह फिल्म जनता के बीच बेहद लोकप्रिय रही, वहीं दूसरी तरफ एक स्थापित अभिनेता द्वारा इसे लेकर इतनी सख्त राय सामने आई। हालांकि आमिर ने यह भी स्पष्ट किया था कि उनका उद्देश्य किसी फिल्म को छोटा दिखाना नहीं था, बल्कि वह सिर्फ अपनी व्यक्तिगत प्रतिक्रिया साझा कर रहे थे।

    बाद के वर्षों में भी ‘आंखें’ को हिंदी सिनेमा की उन फिल्मों में गिना जाता है, जिन्होंने कम लागत में बड़ी कमाई कर इंडस्ट्री को चौंका दिया। इस फिल्म की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसे बाद में अन्य भाषाओं में भी रीमेक किया गया।

    आज भी जब 90 के दशक की कॉमेडी फिल्मों की चर्चा होती है, तो ‘आंखें’ का नाम प्रमुखता से लिया जाता है। आमिर खान की टिप्पणी और फिल्म की ऐतिहासिक सफलता मिलकर इसे बॉलीवुड इतिहास की उन फिल्मों में शामिल कर देती है, जो अपनी लोकप्रियता और विवाद दोनों के कारण याद की जाती हैं।

  • बुंदेलखंड राज्य की मांग पर गरमाई राजनीति: आजाद क्रांति पार्टी ने चित्रकूट से फूंका आंदोलन का बिगुल, गांव-गांव तक जाएगा अभियान

    बुंदेलखंड राज्य की मांग पर गरमाई राजनीति: आजाद क्रांति पार्टी ने चित्रकूट से फूंका आंदोलन का बिगुल, गांव-गांव तक जाएगा अभियान



    नई दिल्ली(New Delhi)।
    चित्रकूट में एक बार फिर बुंदेलखंड अलग राज्य निर्माण की मांग ने जोर पकड़ लिया है। इस बार आजाद क्रांति पार्टी ने इस मुद्दे को खुलकर उठाते हुए आंदोलन का ऐलान किया है। पार्टी ने साफ कहा है कि अब यह लड़ाई सिर्फ बयानबाजी तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसे जमीन पर उतरकर पूरे बुंदेलखंड क्षेत्र में व्यापक आंदोलन के रूप में चलाया जाएगा। इसके लिए सभी जनपदों में प्रदर्शन किए जाएंगे और इसमें महिलाओं की भागीदारी को विशेष रूप से महत्वपूर्ण बताया गया है।

    मुख्यालय कर्वी स्थित पटवारी का हाता, कुबेरगंज में पार्टी कार्यालय के शुभारंभ के मौके पर प्रदेश अध्यक्ष राजीव श्रीवास्तव (मेजर) ने कहा कि पार्टी ने अपना स्पष्ट एजेंडा तय कर लिया है और जल्द ही बुंदेलखंड राज्य निर्माण की मांग को लेकर आंदोलन की शुरुआत की जाएगी। उन्होंने आरोप लगाया कि अब तक जितनी भी सरकारें और राजनीतिक दल आए हैं, उन्होंने बुंदेलखंड के लोगों को सिर्फ आश्वासन देकर गुमराह किया है और क्षेत्र के विकास के नाम पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

    राजीव श्रीवास्तव ने कहा कि बुंदेलखंड लंबे समय से पिछड़ेपन, बेरोजगारी, पलायन और पानी की समस्या से जूझ रहा है, लेकिन राजनीतिक दलों ने इसे सिर्फ वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल किया है। उन्होंने कहा कि अब जनता को जागरूक कर एक मजबूत आंदोलन खड़ा किया जाएगा ताकि अलग राज्य की मांग को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूती से रखा जा सके।

    इस मौके पर महिला सेना की प्रदेश अध्यक्ष सीमा निगम ने भी संगठन की भूमिका को लेकर बयान दिया। उन्होंने कहा कि कोई भी आंदोलन महिलाओं की भागीदारी के बिना सफल नहीं हो सकता। बुंदेलखंड राज्य निर्माण के आंदोलन में महिलाओं की शुरू से ही अहम भूमिका रही है और आगे भी वे कंधे से कंधा मिलाकर इस लड़ाई में शामिल रहेंगी। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी पार्टी ने अपने संविधान में महिलाओं को 40 प्रतिशत आरक्षण देने का प्रावधान किया है, जो महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ा कदम है।

    जिलाध्यक्ष रश्मि सिंह ने कहा कि बुंदेलखंड राज्य निर्माण की लड़ाई को गांव-गांव तक पहुंचाया जाएगा। इसके लिए महिलाओं को जागरूक करने के अभियान चलाए जाएंगे और उन्हें आंदोलन से जोड़ा जाएगा। उन्होंने बताया कि पार्टी ने संगठन को मजबूत करने के लिए तहसील स्तर से लेकर वार्ड और बूथ स्तर तक महिलाओं को जिम्मेदारियां सौंपी हैं, ताकि आंदोलन को जमीनी स्तर पर मजबूती मिल सके।

    कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिलाएं और पार्टी कार्यकर्ता मौजूद रहे, जिनमें पुनीता खरे, सुरेंद्र सिंह खंगार, रेनू देवी, पलक सिंह, गोमती, केशकली, प्रीति देवी, काजल, संगीता देवी, रूपा त्रिपाठी, गुड्डन, शिवप्यारी, रानी देवी, मधु, ऊषा, सरोज, रन्नू, सरिता, रीता, कविता, आरती, विमला, अनुराधा सहित कई लोग शामिल रहे।

    कुल मिलाकर आजाद क्रांति पार्टी ने एक बार फिर बुंदेलखंड अलग राज्य के मुद्दे को राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर सक्रिय कर दिया है और आने वाले समय में क्षेत्र में इसको लेकर बड़े आंदोलनों की संभावना जताई जा रही है।