Author: bharati

  • टी20 की हार भूलकर वनडे में पलटवार की तैयारी टीम इंडिया की कमान अब शुभमन गिल के हाथों में

    टी20 की हार भूलकर वनडे में पलटवार की तैयारी टीम इंडिया की कमान अब शुभमन गिल के हाथों में


    नई दिल्ली । टी20 सीरीज की निराशा को पीछे छोड़ अब भारतीय क्रिकेट टीम की निगाहें इंग्लैंड के खिलाफ होने वाली तीन मैचों की वनडे सीरीज पर टिक गई हैं। इस बार टीम इंडिया नए कप्तान शुभमन गिल की अगुवाई में मैदान पर उतरेगी। टी20 सीरीज में श्रेयस अय्यर ने कप्तानी संभाली थी लेकिन वनडे प्रारूप में नेतृत्व की जिम्मेदारी शुभमन गिल को सौंपी गई है। ऐसे में यह सीरीज युवा कप्तान के लिए अपनी नेतृत्व क्षमता साबित करने का सुनहरा अवसर भी होगी और भारतीय टीम के लिए सम्मान की लड़ाई भी।

    वनडे सीरीज की सबसे बड़ी खासियत टीम के अनुभवी खिलाड़ियों की वापसी है। लंबे समय बाद रोहित शर्मा विराट कोहली और जसप्रीत बुमराह एक साथ भारतीय वनडे टीम में नजर आएंगे। इन तीनों खिलाड़ियों की मौजूदगी से टीम का संतुलन और आत्मविश्वास दोनों मजबूत हुए हैं। युवा खिलाड़ियों के उत्साह और अनुभवी सितारों के अनुभव का मेल भारत को इंग्लैंड के खिलाफ मजबूत दावेदार बना रहा है।

    तीन मैचों की यह सीरीज 14 जुलाई से शुरू होगी। पहला मुकाबला बर्मिंघम के एजबेस्टन मैदान पर खेला जाएगा जिसकी शुरुआत भारतीय समयानुसार दोपहर साढ़े तीन बजे होगी। दूसरा मुकाबला 16 जुलाई को कार्डिफ के सोफिया गार्डन्स में खेला जाएगा और यह मैच शाम साढ़े पांच बजे शुरू होगा। सीरीज का तीसरा और निर्णायक मुकाबला 19 जुलाई को क्रिकेट के ऐतिहासिक मैदान लॉर्ड्स में खेला जाएगा जिसकी शुरुआत भारतीय समयानुसार दोपहर साढ़े तीन बजे होगी। यही मुकाबला तय करेगा कि सीरीज किसके नाम होगी।

    भारतीय बल्लेबाजी क्रम में कप्तान शुभमन गिल और रोहित शर्मा से तेज शुरुआत की उम्मीद रहेगी जबकि विराट कोहली मध्यक्रम की सबसे बड़ी ताकत होंगे। श्रेयस अय्यर उप कप्तान की भूमिका निभाएंगे और टीम को मजबूती देंगे। विकेटकीपिंग की जिम्मेदारी केएल राहुल और ईशान किशन संभाल सकते हैं। वहीं ऑलराउंडर के रूप में अक्षर पटेल वाशिंगटन सुंदर और शिवम दुबे टीम को अतिरिक्त संतुलन देंगे।

    गेंदबाजी विभाग में जसप्रीत बुमराह की वापसी भारतीय टीम के लिए सबसे बड़ी राहत है। उनके साथ अर्शदीप सिंह और प्रसिद्ध कृष्णा तेज गेंदबाजी आक्रमण को धार देंगे जबकि कुलदीप यादव अपनी फिरकी से इंग्लैंड के बल्लेबाजों की परीक्षा लेंगे। टीम में गुरनूर बराड़ और प्रिंस यादव जैसे युवा खिलाड़ियों को भी शामिल किया गया है जो जरूरत पड़ने पर अहम भूमिका निभा सकते हैं।

    इंग्लैंड की टीम भी अपने घरेलू मैदान पर पूरी तैयारी के साथ उतरेगी। कप्तान हैरी ब्रूक के नेतृत्व में जो रूट जोस बटलर जोफ्रा आर्चर और सैम करन जैसे अनुभवी खिलाड़ी टीम की ताकत हैं। ऐसे में भारत के लिए यह सीरीज आसान नहीं रहने वाली। इंग्लैंड की परिस्थितियों में जीत हासिल करने के लिए बल्लेबाजी गेंदबाजी और फील्डिंग तीनों विभागों में बेहतरीन प्रदर्शन करना होगा।

    शुभमन गिल के सामने सबसे बड़ी चुनौती अनुभवी खिलाड़ियों के साथ तालमेल बनाकर टीम को जीत दिलाने की होगी। यदि भारत पहला मुकाबला जीतने में सफल रहता है तो पूरी सीरीज में उसका पलड़ा भारी हो सकता है। क्रिकेट प्रेमियों की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या शुभमन गिल अपनी कप्तानी में रोहित शर्मा विराट कोहली और जसप्रीत बुमराह जैसे दिग्गज खिलाड़ियों के साथ मिलकर इंग्लैंड की धरती पर जीत का नया इतिहास लिख पाएंगे।
    टी20 सीरीज की निराशा को पीछे छोड़ अब भारतीय क्रिकेट टीम की निगाहें इंग्लैंड के खिलाफ होने वाली तीन मैचों की वनडे सीरीज पर टिक गई हैं। इस बार टीम इंडिया नए कप्तान शुभमन गिल की अगुवाई में मैदान पर उतरेगी। टी20 सीरीज में श्रेयस अय्यर ने कप्तानी संभाली थी लेकिन वनडे प्रारूप में नेतृत्व की जिम्मेदारी शुभमन गिल को सौंपी गई है। ऐसे में यह सीरीज युवा कप्तान के लिए अपनी नेतृत्व क्षमता साबित करने का सुनहरा अवसर भी होगी और भारतीय टीम के लिए सम्मान की लड़ाई भी।

    वनडे सीरीज की सबसे बड़ी खासियत टीम के अनुभवी खिलाड़ियों की वापसी है। लंबे समय बाद रोहित शर्मा विराट कोहली और जसप्रीत बुमराह एक साथ भारतीय वनडे टीम में नजर आएंगे। इन तीनों खिलाड़ियों की मौजूदगी से टीम का संतुलन और आत्मविश्वास दोनों मजबूत हुए हैं। युवा खिलाड़ियों के उत्साह और अनुभवी सितारों के अनुभव का मेल भारत को इंग्लैंड के खिलाफ मजबूत दावेदार बना रहा है।

    तीन मैचों की यह सीरीज 14 जुलाई से शुरू होगी। पहला मुकाबला बर्मिंघम के एजबेस्टन मैदान पर खेला जाएगा जिसकी शुरुआत भारतीय समयानुसार दोपहर साढ़े तीन बजे होगी। दूसरा मुकाबला 16 जुलाई को कार्डिफ के सोफिया गार्डन्स में खेला जाएगा और यह मैच शाम साढ़े पांच बजे शुरू होगा। सीरीज का तीसरा और निर्णायक मुकाबला 19 जुलाई को क्रिकेट के ऐतिहासिक मैदान लॉर्ड्स में खेला जाएगा जिसकी शुरुआत भारतीय समयानुसार दोपहर साढ़े तीन बजे होगी। यही मुकाबला तय करेगा कि सीरीज किसके नाम होगी।

    भारतीय बल्लेबाजी क्रम में कप्तान शुभमन गिल और रोहित शर्मा से तेज शुरुआत की उम्मीद रहेगी जबकि विराट कोहली मध्यक्रम की सबसे बड़ी ताकत होंगे। श्रेयस अय्यर उप कप्तान की भूमिका निभाएंगे और टीम को मजबूती देंगे। विकेटकीपिंग की जिम्मेदारी केएल राहुल और ईशान किशन संभाल सकते हैं। वहीं ऑलराउंडर के रूप में अक्षर पटेल वाशिंगटन सुंदर और शिवम दुबे टीम को अतिरिक्त संतुलन देंगे।

    गेंदबाजी विभाग में जसप्रीत बुमराह की वापसी भारतीय टीम के लिए सबसे बड़ी राहत है। उनके साथ अर्शदीप सिंह और प्रसिद्ध कृष्णा तेज गेंदबाजी आक्रमण को धार देंगे जबकि कुलदीप यादव अपनी फिरकी से इंग्लैंड के बल्लेबाजों की परीक्षा लेंगे। टीम में गुरनूर बराड़ और प्रिंस यादव जैसे युवा खिलाड़ियों को भी शामिल किया गया है जो जरूरत पड़ने पर अहम भूमिका निभा सकते हैं।

    इंग्लैंड की टीम भी अपने घरेलू मैदान पर पूरी तैयारी के साथ उतरेगी। कप्तान हैरी ब्रूक के नेतृत्व में जो रूट जोस बटलर जोफ्रा आर्चर और सैम करन जैसे अनुभवी खिलाड़ी टीम की ताकत हैं। ऐसे में भारत के लिए यह सीरीज आसान नहीं रहने वाली। इंग्लैंड की परिस्थितियों में जीत हासिल करने के लिए बल्लेबाजी गेंदबाजी और फील्डिंग तीनों विभागों में बेहतरीन प्रदर्शन करना होगा।

    शुभमन गिल के सामने सबसे बड़ी चुनौती अनुभवी खिलाड़ियों के साथ तालमेल बनाकर टीम को जीत दिलाने की होगी। यदि भारत पहला मुकाबला जीतने में सफल रहता है तो पूरी सीरीज में उसका पलड़ा भारी हो सकता है। क्रिकेट प्रेमियों की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या शुभमन गिल अपनी कप्तानी में रोहित शर्मा विराट कोहली और जसप्रीत बुमराह जैसे दिग्गज खिलाड़ियों के साथ मिलकर इंग्लैंड की धरती पर जीत का नया इतिहास लिख पाएंगे।

  • उत्तराखंड समेत पूर्वोत्तर के राज्यों में आज भारी बारिश की चेतावनी…. अन्य हिस्सों में कमजोर पड़ा मॉनसून

    उत्तराखंड समेत पूर्वोत्तर के राज्यों में आज भारी बारिश की चेतावनी…. अन्य हिस्सों में कमजोर पड़ा मॉनसून


    नई दिल्ली।
    देश के कई हिस्सों में मॉनसून (Monsoon) की गतिविधियां अभी कमजोर हैं, लेकिन उत्तराखंड, हिमाचल, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और पूर्वोत्तर राज्यों में भारी बारिश (Heavy rain) की चेतावनी है. वहीं, राजस्थान में धूल भरी तेज आंधी चलने की संभावना है. भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, उत्तराखंड (Uttarakhand) में भारी से बहुत भारी बारिश का रेड अलर्ट जारी है।

    भारतीय मौसम विभाग (IMD) के मुताबिक, अगले 2-3 दिनों में पूर्वोत्तर भारत, पश्चिम बंगाल और बिहार में कहीं-कहीं भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है. जबकि पूर्वी उत्तर प्रदेश में 4-5 दिन बाद बारिश होने की संभावना है. हालांकि, अगले 5-6 दिनों में उत्तर-पश्चिम, पश्चिम मध्य और दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में कमजोर मॉनसून और कम बारिश का अनुमान है।


    उत्तराखंड में बारिश का रेड अलर्ट

    उत्तराखंड में IMD ने भारी से बहुत भारी बारिश के लिए रेड अलर्ट जारी किया है. राज्य में बीते दिन भी बारिश के कारण कई जगहों पर भूस्खलन हुआ है. उत्तराखंड में भारी बारिश और भूस्खलन की वजह से 126 सड़कें बंद हैं, जिसमें दो नेशनल हाईवे भी शामिल हैं. यमुनोत्री राजमार्ग पर भी यातायात प्रभावित है. स्याना चट्टी में भूस्खलन के कारण ऋषिकेश-यमुनोत्री नेशनल हाईवे पर यातायात ठप हुआ है।


    राजस्थान में धूल भरी हवाएं

    मौसम विभाग (IMD) के अपने पूर्वानुमान ने बताया कि अगले 5-6 दिनों में पूर्वी राजस्थान में सूखा रहेगा. हालांकि, 13 से 15 जुलाई के बीच शेखावाटी, जयपुर और भरतपुर संभाग में हल्की बारिश हो सकती है. जबकि पश्चिमी राजस्थान में 30-40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से धूल भरी तेज हवाएं चलने और धूल भरी आंधी आने की चेतावनी है.


    पश्चिम बंगाल में भारी बारिश

    पश्चिम बंगाल में बीते दिन अच्छी बारिश दर्ज की गई है. कोचबिहार जिले के पुंडिबारी में सबसे ज्यादा 89 मिमी बारिश हुई. IMD ने 14 जुलाई तक राज्य के कई जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है. उप-हिमालयी इलाकों और दक्षिणी जिलों (बांकुरा, बर्दवान, नदिया, मुर्शिदाबाद आदि) में भारी बारिश की संभावना है।


    ओडिशा में चार दिन बारिश का अलर्ट

    ओडिशा में अगले चार दिन तक कई जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश होने की संभावना है. सोमवार को बालासोर, भद्रक, केंद्रापड़ा, सुंदरगढ़, झारसुगुड़ा, बरगढ़, संबलपुर, केवझर, मयूरभंज, कालाहांडी, कंधमाल और रायगड़ा जिलों में भारी बारिश हो सकती है. IMD ने इन जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी किया है. IMD के मुताबिक, इस मॉनसून सीजन में ओडिशा में अब तक 348.1 मिमी बारिश हो चुकी है, जो सामान्य से 8% ज्यादा है।


    दिल्ली और यूपी के मौसम की जानकारी

    राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में अधिकतम तापमान सामान्य से थोड़ा ऊपर दर्ज किया जा रहा है. मौसम विभाग (IMD) ने अगले 7 दिनों में तापमान में कोई बड़ा बदलाव नहीं होने का अनुमान लगाया है. दिल्ली में अधिकतम तापमान 35-36 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 26-28 डिग्री सेल्सियस रह सकता है।

    वहीं, उत्तर प्रदेश में अगले 3-4 दिन बारिश की संभावना नहीं है.लखनऊ में आंशिक रूप से बादल छाए रहने के साथ साफ मौसम रहने की संभावना है. मौसम विभाग के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में इस सीजन में अब तक मॉनसून सामान्य से 17% कम रहा है. 1 जून से 12 जुलाई तक 158.8 मिमी बारिश हुई, जबकि सामान्य 190.9 मिमी है।


    हिमाचल में भी हल्की से मध्यम बारिश

    हिमाचल प्रदेश में भी लगातार हल्की से मध्यम बारिश हो रही है. पिछले 24 घंटों में मंडी जिले के जोगिंदरनगर में सबसे ज्यादा 60 मिमी बारिश दर्ज की गई. वहीं, मनाली में 45 मिमी, सराहन में 38.5 मिमी, रोहड़ू में 25 मिमी और शिमला में 19 मिमी बारिश हुई है।

  • जम्मू- कश्मीर के बारामूला जिले में महसूस किए गए भूकंप के झटके…. तीव्रता 3.6 दर्ज

    जम्मू- कश्मीर के बारामूला जिले में महसूस किए गए भूकंप के झटके…. तीव्रता 3.6 दर्ज


    श्रीनगर।
    जम्मू-कश्मीर (Jammu and Kashmir) के बारामूला जिले (Baramulla district) में सोमवार तड़के भूकंप (Earthquake) के हल्के झटके महसूस किए गए. राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (NCS) के अनुसार, भूकंप की तीव्रता (Earthquake Intensity 3.6) रिक्टर स्केल (Richter scale) पर 3.6 दर्ज की गई. यह भूकंप रात करीब 2 बजे आया और इसका केंद्र जमीन से 10 किलोमीटर की गहराई में था.

    भूकंप के झटके बारामूला के अलावा कश्मीर घाटी के कई अन्य इलाकों में भी महसूस किए गए. अचानक आए झटकों से लोगों में कुछ देर के लिए दहशत फैल गई. एहतियात के तौर पर कई लोग अपने घरों और इमारतों से बाहर निकल आए. हालांकि, किसी तरह के जान-माल के नुकसान या किसी के घायल होने की सूचना नहीं मिली।

    राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर भूकंप की जानकारी दी. इसी साल फरवरी में भी बारामूला जिले में 4.6 तीव्रता का भूकंप आया था. उस समय पट्टन क्षेत्र भूकंप का केंद्र था और घाटी के कई हिस्सों में झटके महसूस किए गए थे. कश्मीर भूकंपीय दृष्टि से बेहद संवेदनशील माना जाता है. यह इलाका उच्च भूकंपीय जोन में स्थित है, जहां टेक्टोनिक प्लेटों की लगातार गतिविधियों के कारण समय-समय पर भूकंप के झटके महसूस होते रहते हैं।

    इससे पहले 9 जुलाई को सुबह-सुबह महाराष्ट्र के मराठवाड़ा क्षेत्र में भूकंप के हल्के झटके महसूस किए गए थे. नांदेड़, हिंगोली और परभणी जिलों में भूकंप के झटके महसूस किए गए. झटके हल्की तीव्रता के थे, लेकिन लोग दाहशत में अपने घरों से बाहर निकल आए.

    गत 27 जून को अफगानिस्तान के हिंदूकुश क्षेत्र में 6.2 तीव्रता का भूकंप आया था. भूकंप का केंद्र पूर्वोत्तर अफगानिस्तान में कालाफगान से करीब 81 किलोमीटर दूर, 36.442° उत्तरी अक्षांश और 70.672° पूर्वी देशांतर पर और धरती की सतह से 215 किलोमीटर की गहराई में था. भूकंप का केंद्र धरती की सतह से अत्यधिक गहराई में होने के कारण इसके झटके पाकिस्तान, भारत के उत्तरी हिस्से, चीन, ताजिकिस्तान, उज्बेकिस्तान, किर्गिस्तान और तुर्कमेनिस्तान समेत कई देशों में महसूस किए गए थे।

  • MP: खरगोन में एबी रोड पर क्रूड ऑयल के खाली टैंकर में हुआ ब्लास्ट…..दूर खड़े चरवाहे की मौत

    MP: खरगोन में एबी रोड पर क्रूड ऑयल के खाली टैंकर में हुआ ब्लास्ट…..दूर खड़े चरवाहे की मौत


    खरगोन।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के खरगोन जिले (Khargone district) में आगरा-मुंबई नेशनल हाईवे (Agra-Mumbai National Highway) पर मगरखेड़ी के पास रविवार शाम को क्रूड ऑयल (Crude oil) के खाली टैंकर में वेल्डिंग के दौरान भीषण धमाका हो गया। विस्फोट इतना तेज था कि टैंकर के टुकड़े 500 मीटर दूर तक बिखर गए। हादसे में दूर खड़े एक चरवाहे की मौत हो गई। इस विस्फोट में टैंकर चालक और वेल्डिंग मैकेनिक गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। उनको किसी बड़े अस्पताल रेफर किया गया है।

    घटना खरगोन के कसरावद इलाके के मगरखेड़ी गांव में एक वेल्डिंग वर्कशॉप में हुई। एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि यह विस्फोट तब हुआ जब मुंबई-आगरा नेशनल हाईवे के किनारे खड़े एक टैंकर के पिछले हिस्से की मरम्मत का काम चल रहा था। धमाका इतना जोरदार था कि टैंकर के टुकड़े 500 मीटर दूर तक बिखर गए। इस भीषण धमाके के कारण पूरे मगरखेड़ी गांव में अफरातफरी मच गई।


    टैंकर चालक और वेल्डिंग मिस्त्री जख्मी

    स्थानीय लोगों ने बताया कि विस्फोट के बाद उड़े धातु की टुकड़ों की चपेट में बकरियां चरा रहे भीम रोकड़े (45) आ गए। वह गंभीर रूप से घायल हो गए। विस्फोट में टैंकर चालक और वेल्डिंग मिस्त्री भी बुरी तरह जख्मी हो गए। घायलों को आनन फानन में ठीकरी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया जहां डॉक्टरों ने भीम रोकड़े को मृत घोषित कर दिया।


    ड्राइवर और वेल्डिंग मैकेनिक बड़े अस्पताल रेफर

    विस्फोट में घायल टैंकर ड्राइवर और वेल्डिंग मैकेनिक को प्राथमिक इलाज के बाद दूसरे किसी बड़े अस्पताल में रेफर कर दिया गया। धमाके की आवाज इतनी तेज थी कि आसपास खड़ी एक कार और मकानों के कांच भी टूट गए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, टैंकर में वेल्डिंग का काम चल रहा था तभी अचानक जोरदार विस्फोट हो गया। धमाके की आवाज दूर-दूर तक सुनाई दी। घटनास्थल पर अफरा-तफरी मच गई।


    घायलों की हालत नाजुक

    ब्लास्ट के बाद बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंच गए। शुरुआत में गांव के लोगों ने ही बचाव कार्य चलाया। विस्फोट में जख्मी टैंकर चालक का नाम विनोद (45) है जो भैंसाचौबे, जिला बस्ती (यूपी) का निवासी बताया जाता है। वेल्डिंग मिस्त्री नितेश (35) बिहार के रहने वाले बताए जाते हैं। दोनों की हालत गंभीर बनी हुई है। घटना की सूचना मिलते ही खलटाका पुलिस मौके पर पहुंची और घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया।


    कैसे हुआ हादसा?

    प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि तेल खाली करने के बाद टैंकर में वेल्डिंग कराई जा रही थी। वेल्डिंग के कारण बढ़े तापमान से टैंकर में गैस बन गई। इस कारण विस्फोट हो गया। यह टैंकर आंध्र प्रदेश के पूर्वी गोदावरी जिले के गढ़ी मोगा से क्रूड ऑयल लेकर झाबुआ जिले के मेघनगर पहुंचा था। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

  • देश में हेल्थ रिसर्च पर बड़े निवेश की तैयारी… गंभीर बीमारियों पर फोकस, 6 गुना बढ़ेगा खर्च

    देश में हेल्थ रिसर्च पर बड़े निवेश की तैयारी… गंभीर बीमारियों पर फोकस, 6 गुना बढ़ेगा खर्च


    नई दिल्ली।
    कैंसर, टीबी, मधुमेह, दिल की बीमारियों और मानसिक स्वास्थ्य जैसी गंभीर चुनौतियों से निपटने के लिए केंद्र सरकार (Central government) स्वास्थ्य अनुसंधान (Health Research) पर बड़ा निवेश करने की तैयारी कर रही है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य अनुसंधान नीति-2026 (National Health Research Policy-2026) (ड्राफ्ट) में 2047 तक स्वास्थ्य अनुसंधान पर खर्च को मौजूदा स्तर से करीब 6.25 गुना बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। अभी देश स्वास्थ्य अनुसंधान पर सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 0.024 फीसदी खर्च करता है, जिसे 2037 तक बढ़ाकर 0.072 फीसदी और 2047 तक 0.15 फीसदी करने की योजना है।

    नई नीति में सरकार ने कहा है कि अब सिर्फ शोध पत्र प्रकाशित करना उद्देश्य नहीं, बल्कि ऐसी रिसर्च को बढ़ावा देना है, जिससे नई दवाएं, वैक्सीन, जांच तकनीक और इलाज आम लोगों तक तेजी से पहुंच सके। ड्राफ्ट नीति के अनुसार, आने वाले कुछ वर्षों में स्वास्थ्य अनुसंधान का पूरा फोकस उन बीमारियों पर रहेगा, जिनका देश में सबसे ज्यादा बोझ है। इनमें कैंसर, टीबी, मधुमेह, हृदय रोग, मानसिक स्वास्थ्य, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, कुपोषण, एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस, संक्रामक रोग और बुजुर्गों की बीमारियां शामिल हैं। सरकार समय-समय पर राष्ट्रीय स्वास्थ्य अनुसंधान एजेंडा तैयार करेगी, ताकि जरूरत के मुताबिक प्राथमिकताएं तय की जा सकें।


    मेडिकल कॉलेज बनेंगे रिसर्च हब

    नीति के तहत देशभर के मेडिकल कॉलेजों में मल्टीडिसिप्लिनरी रिसर्च यूनिट (एमआरयू) का विस्तार किया जाएगा। साथ ही, अभी तक वायरस की जांच और रिसर्च करने वाली वायरल रिसर्च एंड डायग्नोस्टिक लैब (वीआरडीएल) को अपग्रेड कर इन्फेक्शियस डिजीज रिसर्च एंड डायग्नोस्टिक लैब (आईआरडीएल) बनाया जाएगा। इससे बैक्टीरिया, फंगस और परजीवी जनित बीमारियों पर भी व्यापक रिसर्च हो सकेगी। ड्राफ्ट नीति में भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के संस्थानों को देश के स्वास्थ्य अनुसंधान की रीढ़ बनाने की बात कही गई है। इसके लिए अत्याधुनिक लैब, नई तकनीक और राज्यों के साथ बेहतर समन्वय विकसित किया जाएगा, ताकि देशभर में एक मजबूत रिसर्च नेटवर्क तैयार हो सके।


    देश में बनेंगी नई दवाएं और वैक्सीन

    सरकार ने नीति में स्टार्टअप, उद्योग, मेडिकल कॉलेज और रिसर्च संस्थानों के सहयोग से स्वदेशी दवाओं, वैक्सीन, मेडिकल डिवाइस, डायग्नोस्टिक किट के विकास पर जोर दिया है। नई नीति में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), जीनोमिक्स, डिजिटल हेल्थ डाटा और राष्ट्रीय रोग रजिस्ट्रियों का उपयोग बढ़ाने का प्रस्ताव है।

    नई नीति का एक बड़ा बदलाव यह है कि अब शोध का मूल्यांकन केवल प्रकाशित शोध पत्रों के आधार पर नहीं होगा। यह भी देखा जाएगा कि रिसर्च से नई दवा या तकनीक विकसित हुई या नहीं, सरकारी नीतियों में बदलाव आया या नहीं और मरीजों तक उसका वास्तविक लाभ पहुंचा या नहीं। इसके लिए आईसीएमआर-आईआरआईएस नाम का नया मूल्यांकन ढांचा तैयार किया जाएगा। नीति में राज्यों से भी स्वास्थ्य अनुसंधान के लिए अलग फंड बनाने और निवेश बढ़ाने की अपील की गई है। केंद्र और राज्यों के कुल निवेश की नियमित समीक्षा की जाएगी, ताकि तय लक्ष्यों को समय पर हासिल किया जा सके।

  • मिडिल ईस्ट तनाव के बीच रूसी तेल की जमकर हो रही खरीदी… रिकॉर्ड हाई पर पहुंचा भारत का आयात

    मिडिल ईस्ट तनाव के बीच रूसी तेल की जमकर हो रही खरीदी… रिकॉर्ड हाई पर पहुंचा भारत का आयात


    नई दिल्ली।
    अमेरिका-ईरान के बीच शुरू हुए युद्ध (America-Iran War) से ग्लोबल टेंशन (Global Tension) फिर से चरम पर पहुंच गई है और होर्मुज स्ट्रेट बंद (Hormuz Strait Closure) होने के चलते दुनिया के तमाम देशों के सामने तेल-गैस का संकट गहराने लगा है. वहीं दूसरी ओर भारत की बात करें, तो मिडिल ईस्ट के देशों तनाव के बीच भारत ने अपने तेल आयात में विविधता लाने का जो कदम Plan-B के तहत उठाया, उसका फायदा मिल रहा है।

    मिडिल ईस्ट में तनाव के बीच भी भारत लगातार रूसी तेल खरीदने (India’s Russian Oil Import) में लगा है और ताजा आंकड़े देखें, तो जून महीने में भारत की रूसी तेल आयात रिकॉर्ड हाई पर पहुंच गया, इसमें 34 फीसदी का जबर्दस्त उछाल दर्ज किया गया है।


    CREA की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा

    एक रिपोर्ट में सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (CREA) के हवाले से बताया गया है कि रूस के कुल तेल निर्यात राजस्व में गिरावट के बावजूद, भारत का रूसी कच्चे तेल का आयात बीते जून में रिकॉर्ड लेवल पर पहुंच गया, जो इससे पिछले मई महीने की तुलना में 34% अधिक रहा।


    Oil-Gas Supply पर फिर मंडराया बड़ा खतरा

    डेटा पर नजर डालें, तो भारत ने जून में 4.5 अरब यूरो मूल्य का रूसी कच्चा तेल खरीदा, जो उसके कुल 5.5 अरब यूरो के रूसी जीवाश्म ईंधन आयात का 83% है. इस आंकड़े के साथ भारत चीन के बाद रूसी ईंधन का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार बना है. वहीं जून में चीन रूस का सबसे बड़ा ग्राहक बना रहा, जिसने 7.3 अरब यूरो की खरीदारी की.


    रिफाइनरियों की आपूर्ति में उछाल

    भारत के कुल कच्चे तेल आयात में महीने-दर-महीने 5.4 फीसदी की बढ़ोतरी देखने को मिली है और यह उछाल प्रमुख रिफाइनरियों को रूसी आपूर्ति में इजाफे के चलते देखने को मिली है. रिलायंस इंडस्ट्रीज की जामनगर रिफाइनरी को सप्लाई जून में मई के मुकाबले 150% बढ़ गई, जबकि इंडियन ऑयल कॉर्प (IOCL) की पारादीप रिफाइनरी में आयात 126% बढ़ा. CREA का कहना है कि BPCL की कोच्चि रिफाइनरी 82% और नायरा एनर्जी की वडीनार रिफाइनरी में 45% की वृद्धि हुई है।

    Russian Oil की खरीद, फिर एक्सपोर्ट
    न सिर्फ भारत की रूसी कच्चे तेल से तैयार ईंधन के ग्लोबल व्यापार में बड़ी भूमिका बनी हुई है. यही नहीं रूस से तेल का आयात करते भारत, तुर्की, ब्रुनेई और जॉर्जिया की रिफाइनरियों ने जून में रूस पर प्रतिबंध लगाने वाले देशों को जमकर तेल प्रोडक्ट का निर्यात भी किया. यूरोपीय संघ, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका को 814 मिलियन यूरो मूल्य के तेल उत्पादों का निर्यात किया गया।

    बात अमेरिका को निर्यात की करें, तो इसमें भारत की जामनगर रिफाइनरी, तुर्की में SOCAR के स्वामित्व वाली STAR रिफाइनरी और तुप्रास इजमित रिफाइनरी आगे है. सीआरईए के आंकड़ों के मुताबिक, बीते तीन महीनों में, तुप्रास इजमित रिफाइनरी के कच्चे तेल का 60% और जामनगर रिफाइनरी के कच्चे तेल का 27% रूस से आया था और इनके द्वारा US को निर्यात किया गया।

  • जातिगत जनगणना की बाधाएं दूर करने के लिए तैयार हो रही प्रश्नावली, आंकड़ों की शुद्धता पर जोर

    जातिगत जनगणना की बाधाएं दूर करने के लिए तैयार हो रही प्रश्नावली, आंकड़ों की शुद्धता पर जोर


    नई दिल्ली।
    जनगणना (Census) का अगला चरण (Second-phase) जाति आधारित गिनती (Caste Census) के लिहाज से खासा चुनौतीपूर्ण होने जा रहा है। जाति जनगणना के लिए ऐसी प्रश्नावली (Questionnaire) तैयार की जा रही है ताकि नतीजे ज्यादा सटीक और तार्किक आ सकें। जनगणनाकर्मियों के सामने जाति संबंधी सूचना की प्रामाणिकता को सत्यापित करने का साधन भी तलाशा जा रहा है।

    लद्दाख, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के हिमाच्छादित क्षेत्रों में जातिगत जनगणना इसी साल सितंबर में होनी है, ऐसे में जनगणना के दूसरे चरण से जुड़े सवाल अगस्त महीने में जारी कर दिए जाएंगे। जनगणना का पहला चरण अब पूरा होने को है। अगले चरण के लिए एक मार्च, 2027 के दिन को मानक मानकर लोगों की गिनती व उनकी जाति की गणना के लिए प्रश्नावली का फ्रेमवर्क बन रहा है। इसमें हर नागरिक से जनसांख्यिकीय, सामाजिक-आर्थिक, शिक्षा, प्रवास, प्रजनन आदि से संबंधित जानकारी मांगी जाएगी।

    दूसरे चरण का काम शुरू करने से भारत के महारजिस्ट्रार और जनगणना आयुक्त कार्यालय की ओर से पहले जनगणना प्रगणकों का एक पूर्वाभ्यास कराया जा रहा है। इसमें जाति पता करने में कई तरह की भ्रामक या आधी अधूरी सूचनाएं मिल रही हैं। अब समस्या है कि जातियों व उपजातियों का वर्गीकरण कैसे किया जाए। अगर किसी से केवल उसकी जाति पूछी जाए, तो एक जाति वर्ग में आने वाले लोग अलग-अलग जगह पर अलग-अलग नाम ले रहे हैं। इसीलिए जातिगत आंकड़ों की सटीकता व शुद्धता पर ज्यादा जोर है।


    अंग्रेजों के वक्त 4,147 जातियां थी, जबकि 2011 में 46 लाख जातियां

    जब 1931 में आखिरी जातिगत जनगणना हुई, तो 4,147 जातियों के नाम सामने आए। जब 2011 की जनगणना के साथ-साथ सामाजिक-आर्थिक और जाति जनगणना हुई, तो 46 लाख जातियां निकल आईं। जातियों की संख्या इसलिए बढ़ गई क्योंकि प्रश्नावली में सीधा सवाल पूछा गया कि आपकी जाति क्या है। जवाब में जातियों, उप-जातियों, गोत्र व कुल के नाम भी लोगों ने दर्ज कराए। इसीलिए केंद्र सरकार ने 2021 में सुप्रीम कोर्ट में कहा कि 2011 में जाति गणना त्रुटियों से भरी हुई है।

    शायद इसी वजह से इस कवायद का निर्रथक माना गया और इसके नतीजे सार्वजनिक नहीं हुए। अब उन्हीं व्यावहारिक कठिनाइयों को दूर करने का काम किया जा रहा है। मसलन अनाथ और बेसहारा बच्चों की सही जाति जानने का काम खासा मुश्किल होगा, वे संभवत इसे बताने की स्थिति में न हों। अब जनगणना अधिकारियों को बताया गया है कि वे जाति की वर्तनी सही तरीके से दर्ज करें। एक जैसी ध्वनि वाली जातियों को अलग-अलग जातियों में दर्ज करने से पहले उसमें अंतर की पुष्टि होनी भी जरूरी है।

  • राम मंदिर केस: घोटाले में लिप्त बैंककर्मी को बनाया चढ़ावे की रकम का गणना प्रभारी, बगैर जांच रखे कर्मचारी

    राम मंदिर केस: घोटाले में लिप्त बैंककर्मी को बनाया चढ़ावे की रकम का गणना प्रभारी, बगैर जांच रखे कर्मचारी


    लखनऊ।
    राम मंदिर चढ़ावा चोरी (Ram Mandir offerings theft) केस में जेल भेजे गए आरोपी सुभाष श्रीवास्तव (Subhash Srivastava) को लेकर एसआईटी की विस्तृत जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। सुभाष जब बैंक में था, तब उसे घोटाले के आरोप में बर्खास्त किया गया था। हालांकि बाद में वह कोर्ट से बहाली का आदेश लेकर आया था। ऐसे में सवाल उठता है कि ट्रस्ट ने बिना किसी जांच-पड़ताल के सुभाष को नौकरी पर रखा। वह भी सबसे संवेदनशील कार्य गणना का इंचार्ज बना दिया। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि ट्रस्ट ने किस कदर आंखें मूंदकर काम किया।

    मामले में अब तक कुल आठ आरोपी जेल भेजे गए हैं। इसमें गणना इंचार्ज सुभाष श्रीवास्तव भी शामिल है। गणना प्रक्रिया की देखरेख करने से लेकर नकदी आदि बैंक भिजवाने तक की जिम्मेदारी सुभाष की थी। जांच में सामने आया था कि उसकी मिलीभगत की वजह से आरोपी रकम पार करते रहे थे। वहीं, जब एसआईटी प्रकरण की विस्तृत जांच कर रही है, तो उसमें एक और चौंकाने वाला तथ्य उजागर हुआ। पता चला कि सुभाष सिंडिकेट बैंक में काम करता था। उसी दौरान गबन व घोटाले का एक मामला हुआ था। विभागीय जांच के बाद सुभाष श्रीवास्तव को बैंक से बर्खास्त कर दिया गया था। कार्रवाई के खिलाफ वह कोर्ट पहुंचा था, जहां से उसे बहाली का आदेश मिला था। बहाल होने के बाद उसने नौकरी ज्वाइन की थी। रिटायर होने के बाद वह राम मंदिर में काम करने लगा था।


    प्रमुखता से जांच में शामिल किया

    सूत्रों के अनुसार मंदिर में नौकरी पर लोगों को रखने की प्रक्रिया को एसआईटी ने बेहद अहम माना है। मनचाहे तरीके से तमाम कर्मचारियों को रखा गया था। इसी में सुभाष को भी रखने का मामला सामने आया है। सूत्रों का कहना है कि सुभाष ट्रस्ट के पदाधिकारियों के संपर्क में था। लिहाजा, जब वह रिटायर हुआ तो बिना जांच के उसे नौकरी पर रख लिया गया था। लोग बताते हैं, उसका दावा था कि वह सेवा करता है, इसलिए सैलरी नहीं लेता है। टिन्नू की शह पर सुभाष ही तय करता था कि गणना में किसकी ड्यूटी लगाई जाएगी।

  • दुनिया के नंबर वन यानिक सिनर का जलवा विम्बलडन 2026 जीतकर बनाए कई ऐतिहासिक रिकॉर्ड

    दुनिया के नंबर वन यानिक सिनर का जलवा विम्बलडन 2026 जीतकर बनाए कई ऐतिहासिक रिकॉर्ड


    नई दिल्ली । इटली के स्टार टेनिस खिलाड़ी यानिक सिनर ने एक बार फिर साबित कर दिया कि मौजूदा दौर में उनसे बेहतर खिलाड़ी बहुत कम हैं। विम्बलडन 2026 के पुरुष एकल फाइनल में विश्व नंबर एक सिनर ने जर्मनी के अलेक्जेंडर ज्वेरेव को शानदार मुकाबले में हराकर लगातार दूसरी बार खिताब अपने नाम कर लिया। करीब चार घंटे तक चले रोमांचक मुकाबले में सिनर ने पहले सेट में पिछड़ने के बाद जबरदस्त वापसी की और चार सेटों में जीत दर्ज करते हुए अपने करियर का पांचवां ग्रैंड स्लैम खिताब हासिल कर लिया। इस जीत के साथ उन्होंने अपना 30वां एटीपी खिताब भी जीत लिया और कई ऐतिहासिक रिकॉर्ड अपने नाम कर लिए।

    फाइनल मुकाबले की शुरुआत बेहद रोमांचक रही। पहले सेट में दोनों खिलाड़ियों ने अपनी सर्विस शानदार तरीके से बचाई और किसी को भी ब्रेक का मौका नहीं मिला। मुकाबला टाई ब्रेक तक पहुंचा जहां अलेक्जेंडर ज्वेरेव ने बेहतरीन खेल दिखाते हुए पहला सेट जीत लिया। यह लंबे समय बाद था जब ज्वेरेव ने सिनर के खिलाफ कोई सेट अपने नाम किया। पहले सेट की हार के बावजूद यानिक सिनर ने धैर्य नहीं खोया और दूसरे सेट में अपने खेल का स्तर और ऊंचा कर दिया।

    दूसरे सेट में सिनर ने शानदार रिटर्न गेम और बेहतरीन कोर्ट कवरेज का प्रदर्शन किया। टाई ब्रेक में उन्होंने पूरी तरह मुकाबले पर नियंत्रण बना लिया और स्कोर बराबर कर दिया। इसके बाद मैच का रुख पूरी तरह बदल गया। तीसरे सेट में दोनों खिलाड़ियों के बीच लंबी रैलियां देखने को मिलीं लेकिन निर्णायक समय पर सिनर ने अपनी आक्रामक रणनीति से ज्वेरेव की सर्विस तोड़ दी और आसानी से सेट अपने नाम कर लिया।

    चौथे सेट में ज्वेरेव ने वापसी की पूरी कोशिश की लेकिन सिनर किसी भी तरह का मौका देने के मूड में नहीं थे। बराबरी के स्कोर के बाद उन्होंने एक महत्वपूर्ण ब्रेक हासिल किया और अपनी मजबूत सर्विस के दम पर मुकाबला समाप्त कर दिया। जीत का अंक हासिल करते ही सिनर खुशी से सेंटर कोर्ट की घास पर लेट गए और दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट से उनका स्वागत किया। यह पल उनके करियर के सबसे यादगार क्षणों में शामिल हो गया।

    इस जीत के साथ 24 वर्षीय यानिक सिनर ने कई बड़े रिकॉर्ड भी अपने नाम किए। वह विश्व नंबर एक रहते हुए लगातार दो बार विम्बलडन जीतने वाले चुनिंदा खिलाड़ियों की सूची में शामिल हो गए। इसके अलावा यह उनके करियर की 100वीं ग्रैंड स्लैम मैच जीत भी रही। ज्वेरेव के खिलाफ उनकी लगातार जीत का सिलसिला भी बरकरार रहा जिससे उन्होंने अपनी मानसिक मजबूती और शानदार फॉर्म का परिचय दिया।

    फ्रेंच ओपन में मिली निराशा के बाद कई विशेषज्ञ उनकी लय को लेकर सवाल उठा रहे थे लेकिन विम्बलडन में सिनर ने अपने प्रदर्शन से सभी आलोचनाओं का जवाब दे दिया। पूरे टूर्नामेंट में उन्होंने शानदार आत्मविश्वास बेहतरीन फिटनेस और आक्रामक खेल का प्रदर्शन किया। उनकी इस ऐतिहासिक जीत ने साफ कर दिया है कि मौजूदा समय में पुरुष टेनिस में वह सबसे मजबूत दावेदार हैं। लगातार दूसरी बार विम्बलडन का ताज जीतकर यानिक सिनर ने अपने सुनहरे भविष्य की एक और शानदार कहानी लिख दी है।

  • शिवसेना यूबीटी के पूर्व सांसद विवादों में बहू ने लगाए काला जादू और मानसिक प्रताड़ना जैसे गंभीर आरोप

    शिवसेना यूबीटी के पूर्व सांसद विवादों में बहू ने लगाए काला जादू और मानसिक प्रताड़ना जैसे गंभीर आरोप


    नई दिल्ली । महाराष्ट्र की राजनीति से जुड़ा एक मामला इन दिनों सुर्खियों में है जहां शिवसेना यूबीटी के पूर्व सांसद विनायक राउत और उनके परिवार के खिलाफ उनकी बहू ने गंभीर आरोप लगाते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में शारीरिक मानसिक और आर्थिक प्रताड़ना के साथ काला जादू कराने तथा अंधविश्वास से जुड़ी कथित गतिविधियों का भी उल्लेख किया गया है। पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है जबकि पूर्व सांसद ने सभी आरोपों को निराधार बताते हुए उन्हें परिवार पर दबाव बनाने की कोशिश करार दिया है।

    पुलिस के अनुसार शिकायतकर्ता महिला ने आरोप लगाया है कि वर्ष 2017 में उसकी शादी विनायक राउत के बेटे जितेश से कराई गई जबकि परिवार को पहले से यह जानकारी थी कि वह वैवाहिक संबंध निभाने में सक्षम नहीं है। महिला का दावा है कि जब उसने इस विषय पर सवाल उठाए तो उसकी समस्याओं का समाधान करने के बजाय उसे मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ा। उसने आरोप लगाया कि उसे यह कहकर बहलाया गया कि उसके वैवाहिक जीवन में किसी बाहरी बाधा का असर है और उसे दूर करने के लिए कथित धार्मिक अनुष्ठानों का सहारा लिया गया।

    महिला का यह भी आरोप है कि इन कथित अनुष्ठानों के दौरान कुछ लोगों ने उसके साथ अशोभनीय और आपत्तिजनक व्यवहार किया। शिकायत में यह भी कहा गया है कि उसे विभिन्न देशों की यात्राओं के दौरान भी मानसिक दबाव और दुर्व्यवहार झेलना पड़ा। इसके अलावा उसने अपनी सास पर आरोप लगाया कि उसे मासिक धर्म रोकने वाली दवाएं लेने के लिए मजबूर किया गया जिससे उसकी सेहत पर प्रतिकूल असर पड़ा। महिला का यह भी कहना है कि उचित चिकित्सकीय उपचार उपलब्ध कराने के बजाय वैकल्पिक तरीकों से गर्भधारण कराने की सलाह दी गई।

    पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के साथ महाराष्ट्र मानव बलि और अन्य अमानवीय बुरी एवं अघोरी प्रथाओं तथा काला जादू निवारण कानून के तहत भी प्रकरण दर्ज किया है। अधिकारियों का कहना है कि मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    दूसरी ओर पूर्व सांसद विनायक राउत ने सभी आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है। उनका कहना है कि उनके बेटे और शिकायतकर्ता के बीच तलाक की प्रक्रिया पहले से चल रही है। उन्होंने दावा किया कि समझौते के दौरान महिला की ओर से करोड़ों रुपये की आर्थिक मांग की गई थी जिसे स्वीकार नहीं किया गया। राउत का आरोप है कि इसके बाद परिवार पर दबाव बनाने के उद्देश्य से यह शिकायत दर्ज कराई गई। उन्होंने स्पष्ट कहा कि उनका परिवार तंत्र मंत्र या काले जादू जैसी किसी भी गतिविधि में विश्वास नहीं करता और लगाए गए सभी आरोप पूरी तरह झूठे हैं।

    यह मामला अब कानूनी प्रक्रिया के अधीन है और पुलिस जांच के बाद ही आरोपों की सच्चाई स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल दोनों पक्ष अपने अपने दावे कर रहे हैं लेकिन अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।