Author: bharati

  • 27 जुलाई से वक्री होंगे शनि देव, 11 दिसंबर तक इन 4 राशियों को रहना होगा बेहद सावधान

    27 जुलाई से वक्री होंगे शनि देव, 11 दिसंबर तक इन 4 राशियों को रहना होगा बेहद सावधान


    नई दिल्ली। वैदिक ज्योतिष में शनि ग्रह की चाल को बेहद प्रभावशाली माना जाता है। न्याय के देवता और कर्मफलदाता शनि देव 27 जुलाई 2026 से वक्री होने जा रहे हैं। शनि की यह उल्टी चाल 11 दिसंबर 2026 तक यानी करीब 137 दिनों तक रहेगी। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, इस दौरान सभी 12 राशियों पर प्रभाव पड़ेगा, लेकिन चार राशियों के जातकों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

    ज्योतिषीय गणनाओं के मुताबिक, जब शनि जैसे धीमी गति वाले ग्रह वक्री होते हैं तो उनका प्रभाव अधिक तीव्र माना जाता है। ऐसे में कुछ राशियों के लोगों को आर्थिक, पारिवारिक, मानसिक और स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।

    मेष राशि
    मेष राशि के जातकों के लिए यह अवधि करियर और आर्थिक मामलों में चुनौतीपूर्ण रह सकती है। नौकरीपेशा लोगों पर काम का दबाव बढ़ सकता है और वरिष्ठ अधिकारियों से मतभेद होने की आशंका है। नए निवेश या नया कारोबार शुरू करने से बचने की सलाह दी गई है, क्योंकि धन फंसने की संभावना बन सकती है। अनावश्यक विवादों से दूरी बनाए रखें।

    कर्क राशि
    कर्क राशि के जातकों पर पहले से शनि की ढैय्या का प्रभाव है। ऐसे में शनि के वक्री होने से परेशानियां बढ़ सकती हैं। अचानक बड़े खर्च सामने आ सकते हैं, जिससे आर्थिक संतुलन बिगड़ सकता है। पारिवारिक मतभेद की स्थिति भी बन सकती है। स्वास्थ्य को लेकर सतर्क रहें और वाहन चलाते समय विशेष सावधानी बरतें।

    मकर राशि
    मकर राशि पर शनि की साढ़ेसाती का अंतिम चरण चल रहा है। इस दौरान व्यापार में बनने वाले सौदे अटक सकते हैं और साझेदारी के कार्यों में धोखा मिलने की आशंका जताई गई है। बचत पर असर पड़ सकता है। इस अवधि में किसी को उधार देने से बचें और अपनी वाणी पर नियंत्रण रखें।

    मीन राशि
    मीन राशि के जातक इस समय शनि की साढ़ेसाती के दूसरे चरण से गुजर रहे हैं, जिसे सबसे चुनौतीपूर्ण माना जाता है। शनि की वक्री चाल के दौरान कार्यों में देरी, रुकावट और मानसिक तनाव बढ़ सकता है। अनिद्रा और अनजाने भय जैसी स्थितियां भी बन सकती हैं। कोर्ट-कचहरी के मामलों से दूरी बनाए रखें और फिलहाल किसी भी प्रकार का निवेश करने से बचें।

    वक्री शनि के दौरान बताए गए उपाय
    शनिवार को दीपदान करें: प्रत्येक शनिवार शाम पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाकर ‘ॐ शं शनैश्चराय नमः’ मंत्र का 108 बार जाप करें।
    हनुमान चालीसा का पाठ करें: नियमित रूप से या कम से कम मंगलवार और शनिवार को हनुमान चालीसा अथवा बजरंग बाण का पाठ करें।
    दान-पुण्य करें: शनिवार के दिन काले तिल, काली उड़द, छाता, जूते या काले वस्त्र किसी जरूरतमंद व्यक्ति को दान करें।
    अच्छे कर्म अपनाएं: असहाय लोगों, सफाई कर्मचारियों और मजदूरों का सम्मान करें। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, न्यायप्रिय शनि देव कर्मों के आधार पर ही फल प्रदान करते हैं।

  • MP Weather: मप्र में 16 जुलाई से फिर बदलेगा मौसम, फिलहाल 22 जिलों में आज हल्की बारिश के आसार

    MP Weather: मप्र में 16 जुलाई से फिर बदलेगा मौसम, फिलहाल 22 जिलों में आज हल्की बारिश के आसार


    भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून की रफ्तार फिलहाल धीमी पड़ गई है। प्रदेश के करीब 60 प्रतिशत हिस्से से मानसूनी बादल छंट चुके हैं, जिसके चलते अगले पांच दिनों तक कहीं भी भारी या अति भारी बारिश की संभावना नहीं है। मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, 16 जुलाई से एक नया मौसम तंत्र सक्रिय हो सकता है, जिससे प्रदेश में फिर तेज बारिश का दौर शुरू होने के संकेत हैं।

    फिलहाल प्रदेश में हल्की बारिश और बूंदाबांदी का सिलसिला जारी रहेगा। सोमवार को सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, मैहर, उमरिया, शहडोल, अनूपपुर, डिंडौरी, मंडला, बालाघाट, सिवनी, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, बैतूल, खंडवा, बुरहानपुर, खरगोन, बड़वानी, धार और अलीराजपुर जिलों में बादल छाने के साथ हल्की बारिश होने की संभावना है।

    वहीं, नीमच, मंदसौर, रतलाम, झाबुआ, आगर-मालवा, इंदौर, उज्जैन, राजगढ़, शाजापुर, देवास, विदिशा, भोपाल, सीहोर, हरदा, नर्मदापुरम, रायसेन, नरसिंहपुर, जबलपुर, कटनी, दमोह, पन्ना, सागर, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, गुना, अशोकनगर, शिवपुरी, श्योपुर, मुरैना, भिंड, दतिया और ग्वालियर में मौसम सामान्य रहने के साथ धूप निकलने के आसार हैं।

    फिलहाल रिमझिम बारिश, भारी बरसात के संकेत नहीं
    मौसम विभाग के मुताबिक, दक्षिण-पश्चिम मानसून की सक्रियता फिलहाल कमजोर बनी हुई है। इसी वजह से पिछले चार-पांच दिनों से प्रदेश में कहीं भी भारी या अति भारी बारिश दर्ज नहीं की गई है। आने वाले कुछ दिनों तक केवल हल्की बारिश या रिमझिम फुहारें पड़ने की संभावना है, जबकि 16 जुलाई के बाद मौसम में बदलाव देखने को मिल सकता है।

    मानसून की रफ्तार क्यों हुई धीमी?
    मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, मानसून को सक्रिय बनाए रखने वाली प्रमुख मौसम प्रणालियां कमजोर पड़ गई हैं या उनका प्रभाव मध्य प्रदेश से दूर हो गया है। इसी कारण अधिकांश इलाकों में केवल बादल छाए रहने और हल्की बारिश जैसी स्थिति बनी हुई है।

    बंगाल की खाड़ी से नए सिस्टम का इंतजार
    मौसम विभाग का अनुमान है कि 13 से 19 जुलाई के बीच उत्तर बंगाल की खाड़ी में एक नया ऊपरी वायु चक्रवाती परिसंचरण (साइक्लोनिक सर्कुलेशन) बनने की संभावना है। यदि यह आगे चलकर निम्न दाब क्षेत्र में परिवर्तित होता है तो मध्य प्रदेश में एक बार फिर तेज बारिश का दौर शुरू हो सकता है। इसके अलावा प्रशांत महासागर में तीन नए मौसम तंत्र विकसित होने की संभावना जताई गई है। इनमें से यदि कोई एक बंगाल की खाड़ी तक पहुंचता है, तो मानसून दोबारा सक्रिय होकर प्रदेश में अच्छी बारिश करा सकता है।

    सामान्य से सिर्फ 1 प्रतिशत अधिक बारिश
    पिछले पांच दिनों से भारी बारिश नहीं होने के कारण प्रदेश में वर्षा का अतिरिक्त आंकड़ा लगातार घटा है। पहले यह सामान्य से करीब 30 प्रतिशत अधिक था, जो अब घटकर सिर्फ 1 प्रतिशत रह गया है। मौसम विभाग के अनुसार, प्रदेश में अब तक 241.8 मिमी (9.5 इंच) बारिश दर्ज की गई है, जबकि सामान्य औसत 239.8 मिमी (9.4 इंच) है। यानी अब तक सामान्य से केवल 1 प्रतिशत अधिक वर्षा हुई है, जो पूरे मानसून कोटे का लगभग 25 प्रतिशत है।

  • 13 जुलाई का राशिफल सिंह राशि को रुका धन मिलने के संकेत तुला को सतर्क रहने की सलाह

    13 जुलाई का राशिफल सिंह राशि को रुका धन मिलने के संकेत तुला को सतर्क रहने की सलाह


    नई दिल्ली ।
    13 जुलाई 2026 सोमवार का दिन कई राशियों के लिए नई उम्मीद और सफलता के संकेत लेकर आया है। कुछ लोगों को करियर और कारोबार में नई उपलब्धियां मिल सकती हैं तो कुछ को आर्थिक मामलों में सावधानी बरतने की जरूरत रहेगी। ग्रहों की स्थिति के अनुसार सिंह राशि वालों के लिए रुका हुआ धन मिलने के प्रबल योग बन रहे हैं जबकि तुला राशि के जातकों को जोखिम उठाने से बचने की सलाह दी गई है। आइए जानते हैं मेष से मीन तक सभी 12 राशियों का विस्तृत राशिफल।

    मेष राशि
    आज का दिन आत्मविश्वास और उपलब्धियों में वृद्धि कराने वाला रहेगा। कार्यक्षेत्र में आपकी मेहनत और जिम्मेदारी की सराहना होगी। परिवार का सहयोग मिलेगा और सामाजिक प्रतिष्ठा बढ़ेगी। महत्वपूर्ण कार्य समय पर पूरे होंगे।
    शुभ रंग: चमकदार लाल
    शुभ अंक: 1 2 3 9

    वृष राशि
    व्यापार और नौकरी दोनों में अनुकूल परिणाम मिलने के संकेत हैं। मित्रों और परिवार का सहयोग मिलेगा। यात्रा के अवसर बन सकते हैं। आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और महत्वपूर्ण लक्ष्य पूरे हो सकते हैं।
    शुभ रंग: सफेद
    शुभ अंक: 2 3 6

    मिथुन राशि
    आर्थिक मामलों में संयम बरतने की जरूरत है। खर्च बढ़ सकते हैं इसलिए बजट पर ध्यान दें। कार्यक्षेत्र में जिम्मेदारियां बढ़ेंगी और अतिरिक्त मेहनत के बाद सफलता मिलेगी।
    शुभ रंग: आसमानी
    शुभ अंक: 1 2 3 5

    कर्क राशि
    करियर और कारोबार में नई सफलता मिलने के योग हैं। सम्मान और पुरस्कार मिल सकते हैं। आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और आत्मविश्वास के साथ किए गए कार्य सफल रहेंगे।
    शुभ रंग: गुलाबी
    शुभ अंक: 1 2 3

    सिंह राशि
    आज का दिन आर्थिक राहत लेकर आ सकता है। लंबे समय से रुका हुआ धन मिलने की संभावना है। सरकारी कार्यों में सफलता मिलेगी और अधिकारियों का सहयोग प्राप्त होगा। व्यवसाय में विस्तार और पद प्रतिष्ठा में वृद्धि के योग हैं।
    शुभ रंग: गहरा गुलाबी
    शुभ अंक: 1 2 3

    कन्या राशि
    भाग्य का पूरा साथ मिलेगा। करियर में नए अवसर सामने आएंगे। धार्मिक कार्यों में रुचि बढ़ेगी और उच्च शिक्षा से जुड़े प्रयास सफल होंगे। सामाजिक सम्मान में वृद्धि होगी।
    शुभ रंग: पिस्ता
    शुभ अंक: 1 2 3 5

    तुला राशि
    आज सावधानी से काम लेने की जरूरत है। जोखिम भरे फैसलों से बचें। स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखें और किसी अनजान व्यक्ति पर आंख बंद कर भरोसा न करें।
    शुभ रंग: क्रीम
    शुभ अंक: 2 3 6

    वृश्चिक राशि
    साझेदारी और टीमवर्क में सफलता मिलेगी। व्यवसाय में लाभ होगा और दांपत्य जीवन सुखद रहेगा। मित्रों और सहयोगियों का पूरा साथ मिलेगा।
    शुभ रंग: गहरा लाल
    शुभ अंक: 1 2 3 9

    धनु राशि
    मेहनत ही सफलता की कुंजी रहेगी। खर्चों पर नियंत्रण रखें और उधार के लेनदेन से बचें। अनुशासन और धैर्य के साथ किए गए कार्य अच्छे परिणाम देंगे।
    शुभ रंग: स्वर्णिम
    शुभ अंक: 1 2 3

    मकर राशि
    परिवार और मित्रों का सहयोग मिलेगा। रचनात्मक कार्यों में सफलता प्राप्त होगी। प्रेम संबंध मजबूत होंगे और यात्रा के भी योग बन सकते हैं।
    शुभ रंग: बैंगनी
    शुभ अंक: 2 5 8

    कुंभ राशि
    पारिवारिक मामलों में धैर्य बनाए रखें। भावनाओं में बहकर कोई निर्णय न लें। वरिष्ठ लोगों की सलाह लाभदायक साबित होगी और विवादों से दूरी रखना बेहतर रहेगा।
    शुभ रंग: गेहूंआ
    शुभ अंक: 1 2 3 8

    मीन राशि
    सामाजिक और व्यावसायिक गतिविधियों में सफलता मिलेगी। नए संपर्क भविष्य में लाभ देंगे। परिवार और मित्रों का सहयोग मिलेगा तथा संवाद कौशल से महत्वपूर्ण कार्य पूरे होंगे।
    शुभ रंग: गौ घृत समान
    शुभ अंक: 1 2 3

  • मानसून में त्वचा की सही देखभाल नहीं की तो बढ़ सकती हैं कई समस्याएं अपनाएं ये आसान उपाय

    मानसून में त्वचा की सही देखभाल नहीं की तो बढ़ सकती हैं कई समस्याएं अपनाएं ये आसान उपाय


    नई दिल्ली । बरसात का मौसम जहां गर्मी से राहत देता है वहीं यह त्वचा के लिए कई नई चुनौतियां भी लेकर आता है। हवा में बढ़ी नमी पसीना धूल और बैक्टीरिया त्वचा पर तेजी से असर डालते हैं जिससे मुंहासे एलर्जी फंगल इंफेक्शन ऑयली स्किन और खुजली जैसी परेशानियां बढ़ सकती हैं। ऐसे में यदि समय रहते सही देखभाल की जाए तो त्वचा को इन समस्याओं से बचाकर प्राकृतिक चमक बरकरार रखी जा सकती है।

    मानसून में सबसे जरूरी बात है कि चेहरे को दिन में दो से तीन बार हल्के फेसवॉश से साफ किया जाए। इससे त्वचा पर जमा अतिरिक्त तेल गंदगी और बैक्टीरिया हट जाते हैं। चेहरे को बार बार साबुन से धोने की बजाय स्किन टाइप के अनुसार फेसवॉश का इस्तेमाल करना बेहतर माना जाता है। इससे त्वचा का प्राकृतिक संतुलन भी बना रहता है।

    अक्सर लोग बारिश के मौसम में मॉइश्चराइजर लगाना छोड़ देते हैं जबकि यह सबसे बड़ी गलती होती है। मौसम चाहे कोई भी हो त्वचा को नमी की जरूरत रहती है। ऑयली स्किन वाले लोग जेल बेस्ड मॉइश्चराइजर और ड्राई स्किन वाले हल्के क्रीम बेस्ड मॉइश्चराइजर का उपयोग कर सकते हैं। इससे त्वचा मुलायम बनी रहती है और रूखापन नहीं आता।

    बरसात के दिनों में सनस्क्रीन को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। बादलों के बीच भी सूर्य की पराबैंगनी किरणें त्वचा को नुकसान पहुंचा सकती हैं। घर से बाहर निकलने से पहले अच्छी गुणवत्ता वाला सनस्क्रीन लगाना त्वचा की सुरक्षा के लिए जरूरी माना जाता है।

    इस मौसम में पर्याप्त मात्रा में पानी पीना भी बेहद आवश्यक है। कई लोग बारिश के कारण प्यास कम लगने पर पानी पीना घटा देते हैं लेकिन शरीर में पानी की कमी का असर सबसे पहले त्वचा पर दिखाई देता है। पर्याप्त पानी पीने से त्वचा हाइड्रेट रहती है और चेहरे की चमक बनी रहती है।

    खानपान का भी त्वचा पर सीधा प्रभाव पड़ता है। ताजे फल हरी सब्जियां सलाद नारियल पानी और विटामिन सी से भरपूर खाद्य पदार्थ त्वचा को अंदर से पोषण देते हैं। वहीं तली भुनी और अत्यधिक मसालेदार चीजों का अधिक सेवन करने से मुंहासों और ऑयली स्किन की समस्या बढ़ सकती है।

    बरसात के मौसम में मेकअप कम करना भी बेहतर माना जाता है क्योंकि अधिक मेकअप त्वचा के रोमछिद्रों को बंद कर सकता है। यदि मेकअप करना जरूरी हो तो घर लौटने के बाद उसे अच्छी तरह साफ जरूर करें ताकि त्वचा खुलकर सांस ले सके।

    यदि त्वचा पर लगातार खुजली लाल चकत्ते फंगल इंफेक्शन या गंभीर एलर्जी दिखाई दे तो घरेलू उपायों पर निर्भर रहने की बजाय त्वचा विशेषज्ञ से सलाह लेना ही सबसे सुरक्षित विकल्प होता है।

    सही दिनचर्या संतुलित आहार पर्याप्त पानी और नियमित सफाई अपनाकर मानसून के पूरे मौसम में त्वचा को स्वस्थ सुंदर और चमकदार बनाए रखा जा सकता है। थोड़ी सी सावधानी आपकी त्वचा को कई परेशानियों से बचा सकती है और चेहरे की प्राकृतिक खूबसूरती लंबे समय तक बरकरार रख सकती है।

  • प्रेग्नेंसी में क्यों बढ़ जाती है चेहरे की प्राकृतिक चमक? जानिए हार्मोन, रक्त प्रवाह और त्वचा में होने वाले बदलावों का वैज्ञानिक कारण

    प्रेग्नेंसी में क्यों बढ़ जाती है चेहरे की प्राकृतिक चमक? जानिए हार्मोन, रक्त प्रवाह और त्वचा में होने वाले बदलावों का वैज्ञानिक कारण

    नई दिल्ली । गर्भावस्था महिला के जीवन का ऐसा चरण है, जिसमें शरीर के भीतर अनेक प्राकृतिक और जैविक परिवर्तन होते हैं। इन बदलावों का प्रभाव केवल शिशु के विकास तक सीमित नहीं रहता, बल्कि त्वचा, बाल, मानसिक स्थिति और संपूर्ण स्वास्थ्य पर भी दिखाई देता है। इन्हीं परिवर्तनों के कारण कई महिलाओं के चेहरे पर एक विशेष प्रकार की प्राकृतिक चमक दिखाई देती है, जिसे सामान्य भाषा में ‘प्रेग्नेंसी ग्लो’ कहा जाता है। हालांकि यह जरूरी नहीं कि हर महिला को इसका अनुभव एक जैसा हो, क्योंकि प्रत्येक शरीर की प्रतिक्रिया अलग होती है।

    चिकित्सकों के अनुसार, गर्भावस्था के दौरान एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन जैसे हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है। इन हार्मोनल बदलावों का असर त्वचा पर भी पड़ता है। हार्मोन त्वचा की कोशिकाओं की सक्रियता बढ़ाने के साथ रक्त संचार को बेहतर बनाने में मदद करते हैं, जिससे चेहरा अधिक ताजा, स्वस्थ और चमकदार दिखाई दे सकता है। यही कारण है कि कई महिलाओं के चेहरे पर बिना किसी अतिरिक्त सौंदर्य प्रसाधन के भी प्राकृतिक निखार नजर आता है।

    गर्भावस्था में शरीर में रक्त की मात्रा भी सामान्य से काफी अधिक हो जाती है ताकि मां और गर्भ में पल रहे शिशु दोनों की आवश्यकताओं को पूरा किया जा सके। रक्त प्रवाह बढ़ने से चेहरे की महीन रक्त वाहिकाओं तक अधिक ऑक्सीजन और पोषक तत्व पहुंचते हैं। इसके परिणामस्वरूप गालों पर हल्की गुलाबी आभा और त्वचा पर प्राकृतिक चमक दिखाई दे सकती है। विशेषज्ञ इसे प्रेग्नेंसी ग्लो का एक प्रमुख कारण मानते हैं।

    इस दौरान त्वचा की तेल ग्रंथियां भी अधिक सक्रिय हो सकती हैं। इससे त्वचा मुलायम और चमकदार दिखाई देती है, लेकिन जिन महिलाओं की त्वचा पहले से तैलीय होती है, उनमें मुंहासे या पिंपल्स की समस्या भी बढ़ सकती है। इसलिए चेहरे पर मुंहासे होना भी गर्भावस्था के दौरान होने वाला सामान्य परिवर्तन माना जाता है और इसे किसी गंभीर समस्या का संकेत नहीं माना जाता, जब तक चिकित्सक अलग सलाह न दें।

    जैसे-जैसे गर्भावस्था आगे बढ़ती है, शरीर का तापमान और त्वचा में रक्त प्रवाह भी बढ़ सकता है। कई महिलाओं को इस दौरान सामान्य से अधिक गर्मी महसूस होती है। इसका प्रभाव चेहरे पर हल्की लालिमा और ताजगी के रूप में दिखाई देता है। यह भी उन प्राकृतिक कारणों में शामिल है, जिनकी वजह से गर्भावस्था के दौरान त्वचा अधिक दमकती हुई नजर आती है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि संतुलित आहार और पर्याप्त पानी का सेवन भी त्वचा के स्वास्थ्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ताजे फल, हरी सब्जियां, साबुत अनाज, दालें, दूध, दही, अंडे और प्रोटीन से भरपूर भोजन शरीर को आवश्यक विटामिन और खनिज उपलब्ध कराते हैं। पर्याप्त जल सेवन से शरीर हाइड्रेट रहता है, जिससे त्वचा स्वस्थ और चमकदार बनी रह सकती है।

    हालांकि डॉक्टर यह भी स्पष्ट करते हैं कि हर गर्भवती महिला में प्रेग्नेंसी ग्लो दिखाई दे, यह आवश्यक नहीं है। कुछ महिलाओं को त्वचा पर पिग्मेंटेशन, रूखापन, मुंहासे या अन्य परिवर्तन भी हो सकते हैं। इसलिए किसी भी बदलाव को सामान्य शारीरिक प्रक्रिया के रूप में समझना चाहिए और त्वचा या स्वास्थ्य से जुड़ी किसी भी गंभीर परेशानी होने पर स्वयं उपचार करने के बजाय विशेषज्ञ चिकित्सक से सलाह लेना सबसे सुरक्षित विकल्प माना जाता है।

  • भारत की सबसे बड़ी कंपनियों का मिला-जुला प्रदर्शन, चार दिग्गजों की बाजार वैल्यू बढ़ी, छह कंपनियों के मार्केटकैप में आई गिरावट

    भारत की सबसे बड़ी कंपनियों का मिला-जुला प्रदर्शन, चार दिग्गजों की बाजार वैल्यू बढ़ी, छह कंपनियों के मार्केटकैप में आई गिरावट


    नई दिल्ली ।
    भारतीय शेयर बाजार में बीते सप्ताह उतार-चढ़ाव के बीच देश की शीर्ष 10 सूचीबद्ध कंपनियों का प्रदर्शन मिश्रित रहा। इस दौरान चार प्रमुख कंपनियों के बाजार पूंजीकरण में कुल 92,995.48 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जबकि छह कंपनियों के मार्केटकैप में गिरावट देखने को मिली। सबसे अधिक लाभ एचडीएफसी बैंक और भारती एयरटेल को हुआ, जिन्होंने निवेशकों की मजबूत रुचि के चलते अपने बाजार मूल्य में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की।

    समीक्षा अवधि के दौरान एचडीएफसी बैंक सबसे अधिक लाभ हासिल करने वाली कंपनी रही। बैंक के बाजार पूंजीकरण में 35,808.09 करोड़ रुपये की वृद्धि हुई, जिससे उसका कुल बाजार मूल्य बढ़कर 12.69 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया। इसके बाद भारती एयरटेल का स्थान रहा, जिसके बाजार पूंजीकरण में 34,896.92 करोड़ रुपये का इजाफा हुआ और कंपनी का कुल मूल्य लगभग 11.99 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया।

    रिलायंस इंडस्ट्रीज और भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) ने भी सकारात्मक प्रदर्शन किया। रिलायंस इंडस्ट्रीज के बाजार पूंजीकरण में 6,224.97 करोड़ रुपये की वृद्धि दर्ज की गई, जिससे कंपनी का कुल मूल्य बढ़कर 17.71 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया। वहीं एलआईसी के मार्केटकैप में 16,065.50 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई और उसका कुल बाजार मूल्य 5.60 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच गया।

    दूसरी ओर, शीर्ष 10 कंपनियों में शामिल छह कंपनियों के बाजार पूंजीकरण में गिरावट दर्ज की गई। सबसे अधिक नुकसान हिंदुस्तान यूनिलीवर को हुआ, जिसके बाजार मूल्य में 12,088.65 करोड़ रुपये की कमी आई। इसके अलावा लार्सन एंड टुब्रो, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, बजाज फाइनेंस, आईसीआईसीआई बैंक और भारतीय स्टेट बैंक के मार्केटकैप में भी गिरावट दर्ज की गई। हालांकि इन कंपनियों की बाजार स्थिति मजबूत बनी हुई है, लेकिन सप्ताह के दौरान निवेशकों की धारणा और बाजार की चाल का असर इनके मूल्यांकन पर दिखाई दिया।

    विश्लेषकों के अनुसार, वैश्विक आर्थिक संकेतकों, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों, ब्याज दरों की संभावनाओं और कॉर्पोरेट प्रदर्शन से जुड़ी उम्मीदों का असर बड़ी कंपनियों के शेयरों पर लगातार बना हुआ है। इसी कारण अलग-अलग क्षेत्रों की कंपनियों में निवेशकों का रुझान भी अलग-अलग देखने को मिल रहा है। बैंकिंग और दूरसंचार क्षेत्र की कुछ कंपनियों ने बेहतर प्रदर्शन किया, जबकि उपभोक्ता, आईटी और वित्तीय क्षेत्र की कुछ कंपनियों पर दबाव बना रहा।

    मिश्रित प्रदर्शन के बावजूद बाजार पूंजीकरण के आधार पर रिलायंस इंडस्ट्रीज देश की सबसे मूल्यवान सूचीबद्ध कंपनी बनी रही। इसके बाद एचडीएफसी बैंक, भारती एयरटेल, आईसीआईसीआई बैंक, भारतीय स्टेट बैंक, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, बजाज फाइनेंस, भारतीय जीवन बीमा निगम, लार्सन एंड टुब्रो और हिंदुस्तान यूनिलीवर का स्थान रहा।

    विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले सप्ताहों में कंपनियों के तिमाही नतीजे, वैश्विक बाजारों की दिशा और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां भारतीय शेयर बाजार की चाल तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। ऐसे में निवेशकों की नजर प्रमुख कंपनियों के वित्तीय प्रदर्शन और व्यापक आर्थिक संकेतकों पर बनी रहेगी, जो आगे बाजार पूंजीकरण में बदलाव का प्रमुख आधार बन सकते हैं।

  • होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ईरान में बढ़े मतभेद, सैन्य नेतृत्व और सरकार के अलग-अलग रुख से पश्चिम एशिया में तनाव गहराने के संकेत

    होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ईरान में बढ़े मतभेद, सैन्य नेतृत्व और सरकार के अलग-अलग रुख से पश्चिम एशिया में तनाव गहराने के संकेत

    नई दिल्ली । पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ईरान के भीतर नीतिगत मतभेदों की चर्चाओं ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान अपनी ओर खींचा है। विश्लेषकों का मानना है कि एक ओर ईरान के सैन्य प्रतिष्ठान का रुख अधिक सख्त दिखाई दे रहा है, जबकि दूसरी ओर राजनीतिक नेतृत्व कूटनीतिक प्रयासों के जरिए तनाव कम करने की दिशा में आगे बढ़ने की वकालत कर रहा है। इन अलग-अलग संकेतों के कारण क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।

    होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्गों में गिना जाता है। खाड़ी क्षेत्र से निकलने वाले कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से होकर अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचता है। ऐसे में इस जलमार्ग से जुड़ी किसी भी संभावित बाधा का प्रभाव केवल क्षेत्रीय देशों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि एशिया, यूरोप और अन्य प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं पर भी पड़ सकता है।

    राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार ईरान के भीतर सुरक्षा और विदेश नीति को लेकर अलग-अलग दृष्टिकोण देखने को मिल रहे हैं। एक पक्ष का मानना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य पर रणनीतिक नियंत्रण बनाए रखना देश की सुरक्षा और क्षेत्रीय प्रभाव के लिए महत्वपूर्ण है। वहीं दूसरा पक्ष क्षेत्रीय तनाव को कम करने, संवाद को प्राथमिकता देने और कूटनीतिक समाधान तलाशने की आवश्यकता पर जोर देता है ताकि व्यापक संघर्ष की आशंका को टाला जा सके।

    विशेषज्ञों का कहना है कि यदि क्षेत्र में तनाव और बढ़ता है तथा समुद्री व्यापार प्रभावित होता है, तो वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बढ़ सकती है। कच्चे तेल की आपूर्ति बाधित होने की स्थिति में अंतरराष्ट्रीय कीमतों में तेजी आने की संभावना रहती है। इसका असर ऊर्जा आयात पर निर्भर देशों की अर्थव्यवस्था, परिवहन लागत और महंगाई पर भी पड़ सकता है।

    अमेरिका पहले भी स्पष्ट कर चुका है कि होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक समुद्री व्यापार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मार्ग है और इसके निर्बाध संचालन को बनाए रखना आवश्यक माना जाता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अधिकांश देश इस समुद्री मार्ग में किसी प्रकार की बाधा से बचने और क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने की आवश्यकता पर बल देते रहे हैं।

    भारत जैसे देशों के लिए भी यह जलमार्ग विशेष महत्व रखता है क्योंकि देश अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं का बड़ा हिस्सा आयात के माध्यम से पूरा करता है। पश्चिम एशिया से आने वाला पर्याप्त मात्रा में कच्चा तेल और गैस इसी समुद्री मार्ग से भारत सहित अन्य एशियाई देशों तक पहुंचता है। ऐसे में यदि किसी कारण से आपूर्ति प्रभावित होती है तो इसका असर घरेलू ईंधन कीमतों, उद्योगों और आर्थिक गतिविधियों पर भी देखने को मिल सकता है।

    अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों का मानना है कि मौजूदा परिस्थितियों में सभी पक्षों के लिए संवाद और कूटनीतिक प्रयास सबसे प्रभावी विकल्प हो सकते हैं। यदि बातचीत के जरिए तनाव कम करने की दिशा में प्रगति होती है तो क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने में मदद मिल सकती है। वहीं किसी भी प्रकार का सैन्य टकराव या समुद्री मार्ग में व्यवधान वैश्विक व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा के लिए नई चुनौतियां खड़ी कर सकता है।

  • आंध्र प्रदेश में कोविड-19 से दो मौतों के बाद स्वास्थ्य विभाग अलर्ट, कडप्पा में बढ़े मामलों के बीच सरकार ने मास्क और निगरानी व्यवस्था की सख्ती बढ़ाई

    आंध्र प्रदेश में कोविड-19 से दो मौतों के बाद स्वास्थ्य विभाग अलर्ट, कडप्पा में बढ़े मामलों के बीच सरकार ने मास्क और निगरानी व्यवस्था की सख्ती बढ़ाई

    नई दिल्ली । आंध्र प्रदेश के कडप्पा जिले में कोविड-19 संक्रमण से दो मरीजों की मौत और आठ सक्रिय मामलों की पुष्टि के बाद राज्य सरकार ने पूरे प्रदेश में स्वास्थ्य सतर्कता बढ़ा दी है। प्रशासन ने संक्रमण की स्थिति पर लगातार निगरानी रखने, अस्पतालों को तैयार रखने और सार्वजनिक स्थानों पर एहतियाती उपायों को सख्ती से लागू करने के निर्देश जारी किए हैं। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि फिलहाल स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और संक्रमण को नियंत्रित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।

    स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार हाल के दिनों में कडप्पा जिले में सामने आए मामलों ने प्रशासन की चिंता बढ़ाई है। अधिकारियों ने बताया कि एक 52 वर्षीय व्यक्ति को तेज बुखार और खांसी की शिकायत के बाद कोविड-19 संक्रमित पाया गया था। इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। वहीं 43 वर्षीय एक अन्य मरीज, जो पहले से अन्य स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे थे, कोविड संक्रमण की पुष्टि के बाद अस्पताल में उपचार के दौरान नहीं बच सके। अधिकारियों के अनुसार दोनों मामलों की विस्तृत चिकित्सीय समीक्षा भी की जा रही है।

    संक्रमण का असर स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े लोगों तक भी पहुंचा है। कडप्पा मेडिकल कॉलेज के एक मेडिकल छात्र के संक्रमित मिलने के बाद उसे होम आइसोलेशन में रखा गया है। स्वास्थ्य विभाग ने कहा है कि ऐसे मामलों की लगातार निगरानी की जा रही है और निर्धारित स्वास्थ्य प्रोटोकॉल का पालन कराया जा रहा है ताकि संक्रमण के प्रसार को सीमित रखा जा सके।

    मामलों में वृद्धि के बाद प्रभावित क्षेत्रों में विशेष रैपिड रिस्पॉन्स टीमों को तैनात किया गया है। संक्रमित व्यक्तियों के संपर्क में आए लोगों की पहचान कर उनके नमूने जांच के लिए लिए जा रहे हैं। कई लोगों की रिपोर्ट निगेटिव आ चुकी है, जबकि शेष नमूनों की जांच जारी है। प्रशासन का कहना है कि संपर्क में आए सभी लोगों पर नजर रखी जा रही है और आवश्यकता पड़ने पर उन्हें आइसोलेशन में रखा जाएगा।

    संक्रमण के स्वरूप की जानकारी प्राप्त करने के लिए मरीजों के नमूने जीनोम सीक्वेंसिंग हेतु राष्ट्रीय प्रयोगशाला, पुणे भेजे गए हैं। स्वास्थ्य विभाग का उद्देश्य यह पता लगाना है कि संक्रमण किस वेरिएंट से जुड़ा है और उसकी प्रकृति क्या है। विशेषज्ञों का मानना है कि जीनोम सीक्वेंसिंग के परिणाम आगे की रणनीति तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

    स्थिति को देखते हुए राज्य सरकार ने अस्पतालों, बस स्टैंडों और भीड़-भाड़ वाले सार्वजनिक स्थानों पर मास्क पहनने की अनिवार्यता लागू करने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही बुखार, खांसी और सांस लेने में कठिनाई जैसे लक्षण वाले लोगों की शीघ्र पहचान, आवश्यक होने पर आइसोलेशन, संक्रमितों के संपर्क में आए लोगों की जांच तथा प्रभावित क्षेत्रों में सफाई और सैनिटाइजेशन अभियान तेज करने को कहा गया है। सरकारी और निजी अस्पतालों को पर्याप्त बेड, आइसोलेशन वार्ड, ऑक्सीजन, दवाओं और अन्य आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

    स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे घबराने के बजाय सतर्क रहें और कोविड से बचाव के सामान्य उपायों का पालन करें। विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि भीड़-भाड़ वाले स्थानों पर सावधानी बरती जाए, हाथों की स्वच्छता बनाए रखी जाए और यदि बुखार, खांसी या सांस लेने में परेशानी जैसे लक्षण दिखाई दें तो बिना देरी किए चिकित्सकीय परामर्श लिया जाए। अधिकारियों का कहना है कि समय पर जांच, निगरानी और एहतियाती उपाय संक्रमण की रोकथाम में सबसे प्रभावी साधन हैं।

  • 13 जुलाई को उत्तर भारत में गर्मी और उमस का डबल अटैक, दिल्ली-एनसीआर समेत कई राज्यों में तेज धूप के आसार, पूर्वी क्षेत्रों में भारी बारिश की चेतावनी

    13 जुलाई को उत्तर भारत में गर्मी और उमस का डबल अटैक, दिल्ली-एनसीआर समेत कई राज्यों में तेज धूप के आसार, पूर्वी क्षेत्रों में भारी बारिश की चेतावनी

    नई दिल्ली । 13 जुलाई को देश के मौसम में क्षेत्रवार बड़ा अंतर देखने को मिल सकता है। उत्तर-पश्चिम भारत के कई हिस्सों में मानसूनी गतिविधियां अपेक्षाकृत कमजोर रहने के कारण लोगों को तेज धूप, बढ़ते तापमान और उमस का सामना करना पड़ सकता है। वहीं पूर्वी भारत के कुछ राज्यों में मानसून सक्रिय रहने से भारी बारिश की संभावना बनी हुई है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार अगले कुछ दिनों तक देश के अलग-अलग हिस्सों में मौसम का स्वरूप अलग-अलग रहेगा।

    दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा, पंजाब और राजस्थान के अधिकांश मैदानी क्षेत्रों में सोमवार को तेज धूप निकलने की संभावना है। हवा की गति कम रहने और वातावरण में नमी अधिक होने से उमस का असर काफी बढ़ सकता है। दोपहर के समय तापमान सामान्य से अधिक महसूस होगा और लोगों को लंबे समय तक खुले में रहने से बचने की सलाह दी गई है। नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम, फरीदाबाद, चंडीगढ़ और जयपुर जैसे शहरों में भी गर्म और उमस भरा मौसम बने रहने का अनुमान है।

    उत्तर प्रदेश में मौसम दो अलग-अलग तस्वीरें पेश कर सकता है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में धूप और उमस का प्रभाव अधिक रहेगा, जबकि पूर्वी जिलों में गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम बारिश और कुछ स्थानों पर भारी वर्षा होने की संभावना है। लखनऊ और नोएडा में दिनभर गर्मी और उमस बनी रह सकती है, जबकि गोरखपुर और आसपास के क्षेत्रों में बारिश से तापमान में कुछ राहत मिलने की उम्मीद है।

    बिहार में मानसून पूरी तरह सक्रिय बना हुआ है। राज्य के कई जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना जताई गई है। पटना, भागलपुर, पूर्णिया और आसपास के क्षेत्रों में तेज बारिश के साथ जलभराव जैसी परिस्थितियां बन सकती हैं। लोगों को आवश्यक होने पर ही घर से बाहर निकलने और मौसम से जुड़ी स्थानीय चेतावनियों का पालन करने की सलाह दी गई है।

    पश्चिम बंगाल के उप-हिमालयी क्षेत्रों, विशेषकर दार्जिलिंग और सिलीगुड़ी में भारी वर्षा का अनुमान है। वहीं कोलकाता और दक्षिणी जिलों में हल्की बारिश के साथ उमस बनी रह सकती है। लगातार नमी के कारण लोगों को गर्मी का अधिक अहसास होगा, जबकि पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन और जलभराव जैसी स्थितियों पर भी प्रशासन नजर रख सकता है।

    मध्य प्रदेश में मौसम मिला-जुला रहने की संभावना है। भोपाल और इंदौर में दिन के समय उमस अधिक रह सकती है, जबकि शाम के समय कुछ स्थानों पर हल्की बारिश या बूंदाबांदी से राहत मिल सकती है। ग्वालियर में तेज धूप और बढ़ते तापमान का असर देखने को मिल सकता है, जबकि जबलपुर के आसपास हल्की वर्षा की संभावना बनी हुई है।

    उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के मैदानी इलाकों में भी उमस का असर बना रह सकता है, हालांकि ऊंचाई वाले क्षेत्रों में मौसम अपेक्षाकृत सुहावना रहेगा। देहरादून और हरिद्वार में हल्की बारिश के बावजूद उमस महसूस हो सकती है, जबकि शिमला, मनाली और मसूरी जैसे पर्वतीय क्षेत्रों में ठंडी हवाओं और हल्के बादलों के कारण मौसम आरामदायक रहने का अनुमान है।

    कुल मिलाकर 13 जुलाई को देश में मौसम का प्रभाव क्षेत्र के अनुसार अलग-अलग रहेगा। जहां उत्तर-पश्चिम भारत के कई हिस्सों में लोगों को तेज धूप और उमस का सामना करना पड़ सकता है, वहीं पूर्वी राज्यों में भारी बारिश जनजीवन को प्रभावित कर सकती है। ऐसे में मौसम के बदलते हालात को देखते हुए लोगों को स्थानीय प्रशासन और मौसम विभाग की सलाह के अनुसार आवश्यक सावधानी बरतने की आवश्यकता होगी।

  • मीरवाइज को दिल्ली बुलाने के फैसले पर कायम रहे उमर अब्दुल्ला, राज्य का दर्जा बहाली की मांग से ध्यान भटकाने का लगाया आरोप

    मीरवाइज को दिल्ली बुलाने के फैसले पर कायम रहे उमर अब्दुल्ला, राज्य का दर्जा बहाली की मांग से ध्यान भटकाने का लगाया आरोप

    नई दिल्ली । जम्मू-कश्मीर में राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग को लेकर सियासी गतिविधियां तेज हो गई हैं। इसी बीच मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने नेशनल कॉन्फ्रेंस की प्रस्तावित दिल्ली रैली के लिए मीरवाइज उमर फारूक को भेजे गए निमंत्रण का खुलकर बचाव किया है। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को अनावश्यक रूप से विवाद का रूप देकर राज्य का दर्जा बहाल करने की उनकी पार्टी की मांग से लोगों का ध्यान हटाने की कोशिश की जा रही है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि रैली का मुख्य उद्देश्य जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने की मांग को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूती से उठाना है।

    जम्मू में आयोजित ‘दिल्ली चलो’ रैली को संबोधित करते हुए उमर अब्दुल्ला ने कहा कि नेशनल कॉन्फ्रेंस ने दिल्ली में होने वाले प्रदर्शन के लिए 50 से अधिक लोगों को आमंत्रण भेजा था, लेकिन केवल एक नाम को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा किया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि जब इतने लोगों को निमंत्रण भेजा गया, तब केवल मीरवाइज उमर फारूक के नाम को ही प्रमुखता से क्यों उठाया गया। उनके अनुसार यह पूरी बहस वास्तविक राजनीतिक मुद्दे से ध्यान भटकाने का प्रयास है।

    मुख्यमंत्री ने भाजपा और मीडिया के एक वर्ग पर निशाना साधते हुए कहा कि कुछ मंचों पर इस निमंत्रण को इस तरह प्रस्तुत किया गया, मानो पार्टी ने किसी अलगाववादी एजेंडे को बढ़ावा देने का प्रयास किया हो। उन्होंने कहा कि यह व्याख्या तथ्यों के अनुरूप नहीं है और इससे केवल भ्रम पैदा किया जा रहा है। उनके अनुसार राज्य का दर्जा बहाल करने जैसे महत्वपूर्ण विषय पर चर्चा होने के बजाय राजनीतिक विमर्श को दूसरे मुद्दों की ओर मोड़ा जा रहा है।

    उमर अब्दुल्ला ने अपने संबोधन में केंद्र सरकार के उन दावों का भी उल्लेख किया, जिनमें कहा गया है कि जम्मू-कश्मीर में अलगाववादी गतिविधियां अब समाप्त हो चुकी हैं। उन्होंने कहा कि यदि यह दावा सही है, तो फिर उसी आधार पर किसी व्यक्ति को अलगाववादी बताकर विवाद खड़ा करना विरोधाभासी प्रतीत होता है। उनका कहना था कि दोनों बातें एक साथ सही नहीं हो सकतीं और इस विषय पर स्पष्टता आवश्यक है।

    मुख्यमंत्री ने दोहराया कि उनकी पार्टी का प्रमुख लक्ष्य जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाना है। उन्होंने कहा कि इसी उद्देश्य से दिल्ली में प्रस्तावित प्रदर्शन आयोजित किया जा रहा है, ताकि इस मांग को लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीके से राष्ट्रीय स्तर पर उठाया जा सके। उनके अनुसार यह अभियान किसी व्यक्ति विशेष के समर्थन या विरोध का नहीं, बल्कि जम्मू-कश्मीर के संवैधानिक अधिकारों और लोकतांत्रिक अपेक्षाओं से जुड़ा हुआ है।

    उन्होंने यह भी कहा कि जम्मू में आयोजित रैली में बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी इस बात का संकेत है कि राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग को व्यापक जनसमर्थन प्राप्त है। उनके अनुसार जनता इस मुद्दे को लेकर गंभीर है और राजनीतिक दलों को भी इसी विषय पर सार्थक चर्चा करनी चाहिए। उन्होंने विश्वास जताया कि लोकतांत्रिक माध्यमों से उठाई जा रही यह मांग आगे भी मजबूती के साथ जारी रहेगी।

    दिल्ली में प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले इस निमंत्रण को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। एक ओर नेशनल कॉन्फ्रेंस इसे राज्य का दर्जा बहाल करने के अभियान का हिस्सा बता रही है, वहीं विपक्षी दल इस फैसले पर सवाल उठा रहे हैं। आने वाले दिनों में यह मुद्दा जम्मू-कश्मीर की राजनीति के साथ-साथ राष्ट्रीय राजनीतिक विमर्श में भी महत्वपूर्ण बना रह सकता है।