फाल्टा विधानसभा सीट इस बार शुरुआत से ही चर्चा का केंद्र बनी रही। पहले चरण के मतदान के दौरान कई मतदान केंद्रों पर ईवीएम मशीनों को लेकर शिकायतें सामने आई थीं। विपक्षी दलों ने चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए निष्पक्ष मतदान की मांग की थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए चुनाव आयोग ने 285 मतदान केंद्रों पर पुनर्मतदान कराने का फैसला लिया। पुनर्मतदान के दौरान सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी रखी गई और पूरे क्षेत्र में शांतिपूर्ण तरीके से मतदान संपन्न हुआ। किसी भी प्रकार की हिंसा या बड़ी गड़बड़ी की खबर सामने नहीं आई, जिससे प्रशासन ने राहत की सांस ली।
चुनाव अधिकारियों के अनुसार पुनर्मतदान में मतदाताओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। भारी संख्या में लोगों के मतदान केंद्रों तक पहुंचने से यह साफ संकेत मिला कि जनता इस चुनाव को लेकर बेहद गंभीर थी। मतदान प्रतिशत भी काफी ऊंचा दर्ज किया गया, जिसने राजनीतिक दलों की चिंता और उत्सुकता दोनों को बढ़ा दिया। यही वजह है कि मतगणना शुरू होते ही सभी दलों की नजरें फाल्टा सीट पर टिक गईं।
इस चुनाव में भाजपा उम्मीदवार देबांग्शु पांडा, कांग्रेस के अब्दुर रज्जाक मोल्ला और सीपीआई(एम) के शंभू नाथ कुर्मी के बीच मुख्य मुकाबला माना जा रहा था। इसके अलावा कुछ निर्दलीय उम्मीदवार भी मैदान में मौजूद हैं। हालांकि चुनावी मुकाबले को सबसे बड़ा मोड़ तब मिला जब तृणमूल कांग्रेस उम्मीदवार जहांगीर खान ने मतगणना से पहले खुद को चुनावी दौड़ से अलग करने की घोषणा कर दी। उनके इस फैसले के बाद राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल गए और भाजपा को मनोवैज्ञानिक बढ़त मिलती दिखाई दी।
चौथे राउंड की मतगणना समाप्त होने तक भाजपा उम्मीदवार देबांग्शु पांडा को 25 हजार से अधिक वोट मिल चुके हैं। लगातार मिल रही बढ़त ने भाजपा खेमे का आत्मविश्वास बढ़ा दिया है। पार्टी कार्यकर्ताओं का मानना है कि अगर यही रुझान आगे भी कायम रहता है तो फाल्टा सीट भाजपा के खाते में जा सकती है। दूसरी ओर विपक्षी दल अभी अंतिम परिणाम आने तक उम्मीद बनाए हुए हैं और उनका कहना है कि आगे के राउंड में तस्वीर बदल सकती है।
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक फाल्टा सीट का परिणाम केवल एक विधानसभा क्षेत्र तक सीमित नहीं रहने वाला है। यह नतीजा राज्य की भविष्य की राजनीति और दलों की रणनीति पर भी असर डाल सकता है। भाजपा इस सीट को अपनी राजनीतिक मजबूती के प्रतीक के रूप में देख रही है, जबकि विपक्ष इसे अपनी साख से जोड़कर देख रहा है। अब सभी की नजरें अंतिम परिणाम पर टिकी हुई हैं, जो आने वाले समय में पश्चिम बंगाल की राजनीति की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है।









