Author: bharati

  • क्रिकेट जगत में भेदभाव का आरोप! वेस्टइंडीज और साउथ अफ्रीका भारत में फंसे, माइकल वॉन और डी कॉक ने ICC की 'पावर पॉलिटिक्स' को घेरा।

    क्रिकेट जगत में भेदभाव का आरोप! वेस्टइंडीज और साउथ अफ्रीका भारत में फंसे, माइकल वॉन और डी कॉक ने ICC की 'पावर पॉलिटिक्स' को घेरा।


    नई दिल्ली :टी20 वर्ल्ड कप 2026 के फाइनल का उत्साह उस समय विवादों के घेरे में आ गया, जब दक्षिण अफ्रीकी दिग्गज क्विंटन डी कॉक ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) की कार्यप्रणाली पर तीखे सवाल खड़े कर दिए। दरअसल, पश्चिम एशिया में जारी सैन्य संघर्ष (Military Conflict) के कारण अंतरराष्ट्रीय हवाई यात्राएं बुरी तरह प्रभावित हुई हैं, जिसका खामियाजा टूर्नामेंट से बाहर हो चुकी टीमों को भुगतना पड़ रहा है। मामला तब गरमाया जब यह सामने आया कि 1 मार्च को बाहर हुई वेस्टइंडीज और 4 मार्च को सेमीफाइनल हारने वाली साउथ अफ्रीका की टीमें अभी भी कोलकाता के होटलों में फंसी हैं, जबकि महज एक दिन पहले (5 मार्च को) बाहर होने वाली इंग्लैंड की टीम को घर भेजने के लिए विशेष इंतजाम कर दिए गए।

    इस स्पष्ट “भेदभाव” को देखकर क्विंटन डी कॉक का धैर्य जवाब दे गया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए इसे आईसीसी का “मजाक” करार दिया। डी कॉक ने तंज कसते हुए लिखा कि यह देखना वाकई हैरान करने वाला है कि वेस्टइंडीज और साउथ अफ्रीका जैसी टीमें अभी भी पूरी तरह अंधेरे में हैं और उन्हें कोई जानकारी नहीं दी जा रही, वहीं इंग्लैंड की टीम रातों-रात उड़ान भरने की तैयारी में है। उन्होंने इशारों-इशारों में आईसीसी के भीतर “पावर गेम” की ओर इशारा करते हुए कहा कि ऐसा लगता है जैसे कुछ खास टीमों का असर दूसरों की तुलना में कहीं अधिक है।

    विवाद केवल खिलाड़ियों तक सीमित नहीं रहा; इंग्लैंड के पूर्व कप्तान माइकल वॉन ने भी इस मुद्दे पर आईसीसी को आड़े हाथों लिया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर दोटूक शब्दों में कहा कि यह स्थिति दर्शाती है कि क्रिकेट जगत में सत्ता का संतुलन कितना बिगड़ा हुआ है। वॉन ने सवाल उठाया कि जब सभी टीमें एक ही टूर्नामेंट का हिस्सा हैं, तो उनके साथ व्यवहार अलग-अलग क्यों? सिर्फ इसलिए कि कोई टीम आईसीसी की टेबल पर अधिक शक्तिशाली है, उसे प्राथमिकता मिलना खेल भावना के विपरीत है। वॉन का यह बयान डी कॉक के गुस्से को और अधिक वजन देता नजर आया।

    लॉजिस्टिक संकट की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि वेस्टइंडीज के खिलाड़ी पिछले कई दिनों से सोशल मीडिया के जरिए मदद की गुहार लगा रहे हैं। जानकारी के अनुसार, इंग्लैंड की टीम शनिवार को मुंबई के रास्ते लंदन के लिए रवाना हो सकती है, जबकि दक्षिण अफ्रीका और वेस्टइंडीज की टीमों को रविवार तक का इंतजार करना पड़ सकता है। बताया जा रहा है कि इन दोनों टीमों को एक साथ चार्टर प्लेन से पहले जोहान्सबर्ग ले जाया जाएगा, जिसके बाद कैरेबियाई खिलाड़ी एंटीगुआ के लिए उड़ान भरेंगे। फाइनल जैसे बड़े मुकाबले से ठीक पहले इस तरह के विवाद ने आईसीसी के प्रबंधन और निष्पक्षता पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है।

  • Sheetla Ashtami 2026: आरोग्यता की देवी माँ शीतला को क्यों प्रिय है 'ठंडा प्रसाद'? जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और परंपराएं।

    Sheetla Ashtami 2026: आरोग्यता की देवी माँ शीतला को क्यों प्रिय है 'ठंडा प्रसाद'? जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और परंपराएं।


    नई दिल्ली :सनातन परंपरा में चैत्र मास केवल एक कैलेंडर का महीना नहीं, बल्कि यह नई ऊर्जा, नववर्ष के उल्लास और प्रकृति के श्रृंगार का समय है। इसी पावन माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को ‘बसोड़ा’ या ‘शीतला अष्टमी’ का पर्व पूरी श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। यह त्योहार मुख्य रूप से “आरोग्यता” और “स्वच्छता” की अधिष्ठात्री देवी “माँ शीतला” को समर्पित है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माँ शीतला का स्वरूप अत्यंत शीतल है और वे अपने भक्तों को चेचक, खसरा और ज्वर जैसी बीमारियों से मुक्त रखती हैं।

    वर्ष 2026 में बसोड़ा का पर्व 11 मार्च को मनाया जाएगा। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, अष्टमी तिथि 11 मार्च की मध्य रात्रि 01:54 बजे से प्रारंभ होकर 12 मार्च की सुबह 04:19 बजे तक रहेगी। उदया तिथि की महत्ता के कारण 11 मार्च को ही मुख्य पूजन संपन्न होगा। इस दिन भक्तों के लिए पूजन का “शुभ मुहूर्त” सुबह 06:35 से शाम 06:27 तक रहेगा, जो साधना और संकल्प के लिए अत्यंत श्रेयस्कर है।

    बसोड़ा की सबसे विशिष्ट और अनूठी परंपरा है “बासी भोजन” का भोग। इस पर्व के नाम ‘बसोड़ा’ का अर्थ ही ‘बासी’ से जुड़ा है। लोक परंपरा के अनुसार, इस दिन घर में चूल्हा जलाना पूरी तरह वर्जित माना गया है। अग्नि को “ताप” और “उष्णता” का प्रतीक माना जाता है, जो शीतलता की देवी माँ शीतला के स्वभाव के विपरीत है। इसलिए, अष्टमी से एक दिन पहले यानी “सप्तमी” की शाम को ही विशेष पकवान जैसे मीठे चावल (ओलिया), राबड़ी, दही, पुए, और परांठे तैयार कर लिए जाते हैं। अष्टमी की सुबह ब्रह्म मुहूर्त में स्नान के बाद, इन्हीं ठंडे पकवानों का भोग माता को लगाया जाता है और परिवार के सभी सदस्य इसी ‘ठंडे प्रसाद’ को ग्रहण करते हैं।

    इस परंपरा के पीछे गहरा “वैज्ञानिक तर्क” भी छिपा है। चैत्र मास वह समय होता है जब सर्दियाँ विदा हो रही होती हैं और गर्मियों का आगमन होता है। ऋतु परिवर्तन के इस संधिकाल में शरीर में पित्त और गर्मी बढ़ने की आशंका रहती है। आयुर्वेद और लोक मान्यताओं के अनुसार, शीतल भोजन ग्रहण करना शरीर को आने वाली भीषण गर्मी के लिए तैयार करने और पाचन तंत्र को संतुलित रखने का एक माध्यम है। यह इस बात का भी प्रतीक है कि अब से ताजे और ठंडे भोजन को प्राथमिकता देनी चाहिए।

    पूजा की विधि भी उतनी ही सरल और भावपूर्ण है। भक्त सुबह स्वच्छ वस्त्र धारण कर हाथ में जल लेकर परिवार की “सुख-शांति” और रोगों से मुक्ति का संकल्प लेते हैं। माता की प्रतिमा को हल्दी, रोली और अक्षत अर्पित किए जाते हैं। पूजन के बाद माता के चरणों में अर्पित किए गए जल को अत्यंत पवित्र माना जाता है। इस जल को पूरे घर में छिड़कने की परंपरा है, जिससे घर की “नकारात्मक ऊर्जा” नष्ट होती है और वातावरण शुद्ध होता है। संक्षेप में, बसोड़ा का यह पर्व हमें अनुशासन, स्वच्छता और प्रकृति के साथ तालमेल बिठाकर स्वस्थ जीवन जीने की प्रेरणा देता है।

  • किराये के घर में शिफ्ट होने से पहले अपनाएं ये वास्तु उपाय, बनी रहेगी सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा

    किराये के घर में शिफ्ट होने से पहले अपनाएं ये वास्तु उपाय, बनी रहेगी सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा


    नई दिल्ली। आज के समय में बढ़ती आबादी और शहरीकरण के कारण बड़ी संख्या में लोग किराये के घरों में रहते हैं। हालांकि अक्सर लोग अपना घर खरीदने के बाद ही वास्तु शास्त्र पर ध्यान देते हैं लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार किराये के घर में रहने वाले लोगों के लिए भी वास्तु के नियम उतने ही महत्वपूर्ण होते हैं। यदि किराये के घर में प्रवेश करते समय कुछ जरूरी वास्तु उपायों का ध्यान रखा जाए तो जीवन में सुख शांति समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा बनाए रखने में मदद मिल सकती है।

    वास्तु शास्त्र के अनुसार जब भी कोई व्यक्ति नए घर में प्रवेश करता है चाहे वह अपना घर हो या किराये का तो शुभ समय और शुभ मुहूर्त में ही प्रवेश करना बेहतर माना जाता है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार उस समय ग्रहों की स्थिति भी महत्वपूर्ण होती है विशेष रूप से शुक्र ग्रह की स्थिति का विचार करना लाभकारी माना जाता है। हालांकि किराये के घर में प्रवेश करते समय खरमास जैसी स्थितियों को लेकर अधिक चिंता करने की आवश्यकता नहीं होती।

    विशेषज्ञों के अनुसार घर में प्रवेश के दिन नवग्रह पूजा और हवन करवाना अत्यंत शुभ माना जाता है। ऐसा करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और नकारात्मक शक्तियों का प्रभाव कम होता है। इसके साथ ही घर के मुख्य द्वार पर आम के पत्तों का तोरण लगाना भी शुभ माना जाता है क्योंकि यह समृद्धि और शुभता का प्रतीक होता है।

    ज्योतिषाचार्य पंडित मनोत्पल झा के अनुसार किराये के मकान में प्रवेश करते समय कुछ सरल नियमों का पालन करने से घर में सुख समृद्धि और खुशहाली बनी रहती है। उनका कहना है कि नए घर में प्रवेश के शुरुआती दिनों में मांस और मदिरा का सेवन नहीं करना चाहिए क्योंकि इससे घर की सकारात्मक ऊर्जा प्रभावित हो सकती है।

    किराये के घर में भी पूजा के लिए उत्तर पूर्व दिशा यानी ईशान कोण को सबसे शुभ माना जाता है। इसलिए घर में पूजा स्थान इसी दिशा में बनाना चाहिए और उस स्थान को साफ सुथरा तथा व्यवस्थित रखना चाहिए। इसके अलावा घर में कहीं भी पानी के नल या पाइप से लगातार पानी टपकता नहीं रहना चाहिए क्योंकि वास्तु के अनुसार यह धन हानि का संकेत माना जाता है।

    वास्तु शास्त्र यह भी सुझाव देता है कि घर के अंदर बहुत गहरे रंग जैसे काला या गहरा लाल अधिक मात्रा में इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। इन रंगों का अधिक प्रयोग नकारात्मक ऊर्जा को बढ़ा सकता है। इसके बजाय हल्के और सकारात्मक रंगों का उपयोग घर के वातावरण को शांत और सुखद बनाता है।

    घर में सात्विकता और सकारात्मक माहौल बनाए रखने के लिए कुछ लोग हनुमान जी की प्रतिमा स्थापित करने की भी सलाह देते हैं। सुबह और शाम उनकी पूजा करने से घर में सुरक्षा और सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है। इसके साथ ही उत्तर पश्चिम दिशा में सुगंधित अगरबत्ती जलाने से वातावरण पवित्र और शांत रहता है।

    वास्तु विशेषज्ञों का मानना है कि चाहे घर किराये का हो या अपना यदि उसमें रहने वाले लोग साफ सफाई सकारात्मक सोच और धार्मिक परंपराओं का पालन करें तो घर में सुख शांति और समृद्धि बनी रहती है।

  • Iran-US-Israel युद्ध का नौवां दिन…..गंभीर हुए मिडिल ईस्ट के हालात, ओस्लो में US एंबेसी के पास जोरदार धमाका

    Iran-US-Israel युद्ध का नौवां दिन…..गंभीर हुए मिडिल ईस्ट के हालात, ओस्लो में US एंबेसी के पास जोरदार धमाका


    तेहरान।
    ईरान (Iran), अमेरिका (America) और इजरायल (Israel) के बीच चल रहे युद्ध का आज 9वां दिन है. इस युद्ध के आगे बढ़ने के साथ दिनो ब दिन मिडिल ईस्ट (पश्चिमी एशिया) (Middle East- (Western Asia) में हालात लगातार गंभीर होते जा रहे हैं. वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) अपनी बात पर ही अड़े हुए हैं कि ईरान के साथ कोई भी बातचीत या समझौता नहीं होगा उन्हें सिर्फ ईरान का बिना किसी शर्त के सरेंडर चाहिए. ट्रंप ने शनिवार को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ पर लिखा, ‘ईरान के साथ कोई डील नहीं होगी, सिर्फ अनकंडीशनल सरेंडर.’ ट्रंप ने कहा कि ईरान के सरेंडर के बाद वहां पर एक नया नेतृत्व चुना जाएगा. अमेरिका अपने सहयोगी देशों के साथ मिलकर ईरान को फिर से विकसित करने में उसकी मदद करेगा।

    इधर, नॉर्वे की राजधानी ओस्लो में रविवार तड़के उस समय अफरा-तफरी मच गई जब United States Embassy in Oslo के पास एक तेज धमाके की आवाज सुनी गई. धमाके की सूचना मिलते ही इलाके में सुरक्षा एजेंसियां और पुलिस तुरंत सक्रिय हो गईं और पूरे क्षेत्र को घेरकर जांच शुरू कर दी गई. धमाका इतना तेज था कि आसपास के लोगों में घबराहट फैल गई. इस घटना में अब तक किसी के घायल या हताहत होने की सूचना नहीं मिली है।


    इराक का कोई भी सैनिक ईरान में नहीं घुसाः हैदर अल-खर्की

    इराकी ब्रिगेडियर जनरल हैदर अल-खर्की का कहना है कि देश पर US-इजरायल युद्ध शुरू होने के बाद से न तो इराकी सुरक्षा बल और न ही क्षेत्रीय कुर्द पेशमर्गा सेना के सदस्य ईरान में घुसे हैं. अल-खर्की ने बात करते हुए कहा कि इराकी सुरक्षा सैनिकों को ऑटोनॉमस क्षेत्र की सरकार के साथ मिलकर ईरान के साथ सीमा पर नियंत्रण और मजबूत करने के लिए इराक के सुलेमानियाह के कुर्द क्षेत्र में तैनात किया गया है. अल-खर्की का यह बयान ईरान-इराक सीमा पर बढ़ते तनाव और उन रिपोर्टों के बीच आया है कि US तेहरान में सरकार के खिलाफ विद्रोह भड़काने के लिए कुर्दों की भर्ती कर रहा है. लेकिन ट्रंप ने कुछ घंटे पहले रिपोर्टरों से करते हुए कहा था कि US नहीं चाहता कि कुर्द समूह इस युद्ध में हिस्सा लें, क्योंकि ‘हम युद्ध को पहले से भी ज़्यादा जटिल नहीं बनाना चाहते हैं’।


    लापता सैनिक की खोज का इजरायली सेना का विशेष ऑपरेशन

    ईरान के साथ चल रही लड़ाई के बीच इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने बताया कि उनके सैनिक शुक्रवार की रात को एक विशेष अभियान पर रवाना हुए. यह अभियान 40 साल पहले लापता हुए एक सैनिक की खोज से जुड़ा हुआ है।


    कुर्दिश सेना ने इराक के सुलेमानिया में ड्रोन मार गिराया

    न्यूज आउटलेट रुडॉ के मुताबिक, कुर्दिश पेशमर्गा सेना ने उत्तरी इराक के सुलेमानिया के कुर्द इलाके के ऊपर एक ड्रोन मार गिराया है. इस इलाके पर कई हवाई हमले हो रहे हैं. रुडॉ ने X पर जो फुटेज पोस्ट की है, उसमें कुर्दिश सेना के आसमान में किसी चीज पर गोली चलाने के बाद आग और धुआं दिख रहा है।


    बेरूत में भीषण हमले कर रहा इजरायल

    ईरान में इजरायल के लगातार हमले जारी, बेरूत में भीषण हमले कर रहा इजरायल, मिसाइल प्रोडक्शन यूनिट को टारेगट किया. इसके पहले तेहरान के तेल डिपो में एयरस्ट्राइक के बाद जोरदार धमाका हुआ।


    अमेरिकी सैनिकों के अंतिम संस्कार में शामिल हुए ट्रंप

    ईरान के जवाबी हमले में मारे गए 6 अमेरिकी सैनिकों के अंतिम संस्कार में शामिल हुए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप. ये सैनिक कुवैत में ईरानी सैनिकों पर हमला कर रहे थे जिसकी जवाबी कार्रवाई में ये अमेरिकी सैनिक मारे गए थे. ईरान पर इजरायल और अमेरिकी हमले के बाद ये पहला ऐसा अंतिम संस्कार समारोह हुआ है जिसमें युद्ध में मारे गए अमेरिकी सैनिकों को श्रद्धांजलि दी गई।


    सुलेमानिया में फोर्स ने ड्रोन पर फायरिंग कर मार गिराया

    सुलेमानिया में सेकंड रीजन के हेडक्वार्टर में कई पेशमर्गा फोर्स ने एक ड्रोन पर फायरिंग की और उसे मार गिराया. यह आज रात प्रांत को टारगेट करके किए गए हमलों की एक सीरीज का हिस्सा था. ईरानी मीडिया ने बताया कि साउथ तेहरान में एक तेल डिपो पर हमला हुआ. फारस न्यूज एजेंसी ने बताया कि इजरायली डिफेंस फोर्स शहर को निशाना बनाकर नए हमले कर रही है. इन ताजा हमलों की वजह से पूरे इलाके में तबाही मच गई है.

  • Nepal: बालेन शाह ने किया बड़ा उलटफेर….., चार बार PM रह चुके केपी ओली को हराया

    Nepal: बालेन शाह ने किया बड़ा उलटफेर….., चार बार PM रह चुके केपी ओली को हराया


    काठमांडू।
    नेपाल (Nepal) के झापा-5 निर्वाचन क्षेत्र (Jhapa-5 Constituency) में आरएसपी नेता और रैपर से नेता बने बालेन शाह (Balen Shah) ने चार बार प्रधानमंत्री (Prime Minister) रह चुके के.पी. शर्मा ओली (K.P. Sharma Oli) को लगभग 50,000 मतों के भारी अंतर से हराया। निर्वाचन आयोग ने यहां यह जानकारी दी। राष्ट्रीय स्वतंत्रता पार्टी (आरएसपी) के नेता और काठमांडू के पूर्व महापौर, जिन्हें लोकप्रिय रूप से केवल बालेन के नाम से जाना जाता है, अपनी पार्टी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार हैं।

    निर्वाचन आयोग (ईसी) ने बताया कि 35 वर्षीय बालेन को 68,348 मत मिले, जबकि 74 वर्षीय ओली को 18,734 मत मिले। नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (एकीकृत मार्क्सवादी-लेनिनवादी) – (सीपीएन-यूएमएल) ने ओली को पार्टी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में पेश किया था। नेपाल में पिछले साल हुए हिंसक ‘जेन जेड’ विरोध प्रदर्शनों के बाद बृहस्पतिवार को पहला आम चुनाव हुआ, जिसमें हिमालयी देश में राजनीति में पीढ़ीगत बदलाव और भ्रष्टाचार मुक्त शासन की मांग की गई थी।

    बालेन शाह की राष्ट्रीय स्वतंत्रता पार्टी (आरएसपी) बड़ा बहुमत हासिल कर नेपाल की सत्ता पर काबिज़ होने जा रही है। शाह ने झापा-5 सीट पर ओली को चुनौती दी और अपने फैसले को सही साबित कर दिखाया। इस सीट पर कुल 1,06,372 वोट डाले गए। पूरे देश में आरएसपी के पक्ष में चल रही तेज लहर के बावजूद पूर्व प्रधानमंत्री दहल 10,240 मतों के साथ रुकुम पूर्व-1 सीट जीतने में सफल रहे हैं।

    नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, आरएसपी ने 60 से अधिक सीटों पर जीत हासिल कर ली है। दूसरी ओर, नेपाली कांग्रेस ने जहां सिर्फ नौ पर जीत हासिल की है। ओली की पार्टी नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (यूएमएल) 3, नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी 2 सीटें जीत चुकी हैं। इन आंकड़ों के आने के बाद शाह का प्रधानमंत्री बनना लगभग तय माना जा रहा है।

    जेनरेशन-जेड के आंदोलन से पहले नेपाल की सत्ता पर काबिज़ रही पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को मौजूदा आम चुनाव में करारी शिकस्त मिली है। पार्टी के उपाध्यक्ष बिष्णु पौडेल, गोकर्ण बिस्टा, महासचिव शंकर पोखरेल, सचिव महेश बसनेत, भानुभक्त ढकाल और राजन भट्टराई को हार का सामना करना पड़ा है। नेपाल की संसद (प्रतिनिधि सभा) की कुल 275 सीटों के लिए पांच मार्च को मतदान संपन्न हुआ था। इनमें से 165 सीटों पर प्रत्यक्ष मतदान के जरिए और शेष 110 सीटों पर आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के माध्यम से चुनाव कराए गए। निर्वाचन आयोग के अनुसार, इस बार लगभग 60 प्रतिशत मतदान हुआ है।

    उल्लेखनीय है कि सितंबर 2025 में हुए व्यापक भ्रष्टाचार विरोधी छात्र आंदोलनों के बाद ओली सरकार गिर गई थी और संसद भंग कर दी गई थी। इसके बाद गठित अंतरिम सरकार की देखरेख में ये चुनाव संपन्न हुए। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नेपाल के युवा मतदाताओं ने पारंपरिक नेतृत्व को नकारते हुए एक नए और आधुनिक राजनीतिक दृष्टिकोण को चुना है। शाह अगर सत्ता संभालते हैं तो न केवल नेपाल की आंतरिक राजनीति बल्कि भारत के साथ उसके द्विपक्षीय संबंधों के लिए भी एक नए युग की शुरुआत हो सकती है।

  • Iran-US War: ट्रंप की धमकी के बाद और तेज हुए ईरान के हमले….. दुबई की इमारतें हुईं धुआं-धुआं

    Iran-US War: ट्रंप की धमकी के बाद और तेज हुए ईरान के हमले….. दुबई की इमारतें हुईं धुआं-धुआं


    दुबई।
    ईरान और अमेरिका (Iran and America) के बीच छिड़ा युद्ध पूरी दुनिया को संकट में डालने वाला साबित हो रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने शनिवार को भी धमकी देते हुए कहा कि उनका हमला अब और तेज होगा। वहीं जानकारों का कहना है कि अगर एक सप्ताह युद्ध और चलता रहा तो कई देशों में मंदी जैसे हालात हो जाएंगे। उन्होंने सोशल मीडिया अकाउंट पर पोस्ट करते हुए कहा कि ईरान पर बहुत तगड़ा हमला होने वाला है। ईरान (Iran) के व्यवहार की वजह से उसे बड़ी तबाही झेलनी होगी।

    इससे पहले ईरानी राष्ट्रपति पजेश्कियां (Iranian President Pajeshkian) ने कहा था ईरान समर्पण करने वाला नहीं है। उन्होंने डोनाल्ड ट्रंप के बिना शर्त सरेंडर करने की मांग को ठुकरा दिया था। उन्होंने कहा था कि ईरानियों के आत्मसमर्पण करने का विचार डोनाल्ड ट्रंप को कहीं दफना देना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा था कि वह तब तक पड़ोसी खाड़ी देशों पर हमला नहीं करेंगे जब तक कि उधर से हमला नहीं होता है।

    बता दें कि ईरान पड़ोसी देशों में अमेरिका बेसों पर लगातार हमले कर रहा था। इसके अलावा ईरान ने यूएई के दुबई में खूब हमले किए। वह 28 फरवरी को हुए हवाई हमले के बाद युद्ध शुरू होने और ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद से ईरान की देखरेख करने वाली त्रिपक्षीय नेतृत्व परिषद के एक सदस्य हैं। उन्होंने यह संदेश इस संघर्ष के पूरे क्षेत्र में फैलने के ठीक एक सप्ताह बाद दिया। इस संघर्ष से वैश्विक बाजार और हवाई यात्रा प्रभावित हुई तथा ईरान का अपना नेतृत्व सैकड़ों इजराइली और अमेरिकी हवाई हमलों से काफी कमजोर हो गया है।


    रेवोल्यूशनरी गार्ड ने पैदा कर दिया भ्रम

    ईरान के सशस्त्र बलों के प्रवक्ता जनरल अबोलफजल शेखरची ने पेजेशकियान के बयान के बाद यह कहकर और भ्रम पैदा कर दिया कि तेहरान ने उन देशों पर हमला नहीं किया है जिन्होंने ‘अमेरिका को हमारे देश पर आक्रमण करने के लिए जगह नहीं दी।’ अमेरिकी हमले खाड़ी अरब देशों से नहीं हो रहे हैं, जिन पर अब हमला हो रहा है। संभवतः मौजूदा राजनीतिक उथल-पुथल के जवाब में, शनिवार को ईरान के एक प्रमुख धर्मगुरु, अयातुल्ला नासिर मकारम शिराजी ने देश की विशेषज्ञ सभा से नये सर्वोच्च नेता का नाम जल्द से जल्द तय करने का आग्रह किया। युद्ध में 88 धर्मगुरुओं की समिति से जुड़े भवनों पर हवाई हमले हुए हैं, जिससे समूह की किसी भी बैठक में देरी होने की संभावना है।


    और भीषण बमबारी होगी

    अमेरिका का कहना है कि आगे और भी भीषण बमबारी होगी। संघर्ष खत्म होने की कोई उम्मीद नहीं दिख रही। ट्रंप प्रशासन ने इजराइल को 15.1 करोड़ अमेरिकी डॉलर के नये हथियार बिक्री की मंजूरी दे दी। वहीं ट्रंप ने कहा है कि ईरान के “बिना शर्त आत्मसमर्पण” के बिना वे उससे बातचीत नहीं करेंगे। अमेरिकी अधिकारियों ने आगामी बमबारी अभियान की चेतावनी दी।


    संयुक्त राष्ट्र में क्या बोले ईरान के राजदूत

    संयुक्त राष्ट्र में ईरान के राजदूत ने कहा कि देश अपनी रक्षा के लिए ‘सभी आवश्यक उपाय’ करेगा। एसोसिएटेड प्रेस के वीडियो में पश्चिमी तेहरान के ऊपर धमाका और धुआं उठता हुआ दिखाई दिया। इजराइल ने कहा कि उसने व्यापक स्तर पर हमले शुरू कर दिए हैं। अमेरिका और इज़राइल ने ईरान पर लगातार हमले किए हैं, जिनमें उसकी सैन्य क्षमताओं, नेतृत्व और परमाणु कार्यक्रम को निशाना बनाया गया है।

    देशों के अधिकारियों के अनुसार, इस लड़ाई में ईरान में कम से कम 1,230 लोग, लेबनान में 200 से अधिक और इजराइल में 11 लोग मारे गए हैं। छह अमेरिकी सैनिक भी मारे गए हैं। शनिवार सुबह, ईरान से मिसाइल दागे जाने के कारण पूरे इजराइल में लोग बचने के लिए आश्रयों की ओर भागे। इस बीच यरुशलम में जोरदार धमाके सुनाई दिए। इजराइल की आपातकालीन सेवाओं ने तत्काल किसी के हताहत होने की सूचना नहीं दी। संघर्ष बढ़ने के साथ ही ईरान ने खाड़ी देशों पर हमले किए। दुबई में शनिवार सुबह कई धमाकों की आवाज सुनी गई और सरकार ने हवाई सुरक्षा प्रणाली सक्रिय कर दी। अलर्ट बजने के बाद दुबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उड़ानों का इंतजार कर रहे यात्रियों को विशाल हवाई अड्डे की सुरंगों में ले जाया गया।

  • ईरान युद्ध से भारतीय मार्केट भी प्रभावित…., मंगलोर रिफाइनरी को करना पड़ रहा बंद

    ईरान युद्ध से भारतीय मार्केट भी प्रभावित…., मंगलोर रिफाइनरी को करना पड़ रहा बंद


    तेहरान।
    ईरान और अमेरिका-इजराइल (Iran and the US-Israel War) के बीच छिड़ी जंग ने भारतीय मार्केट (Indian Market) को भी प्रभावित किया है। शेयर बाजार से लेकर तेल कारोबार तक में हलचल है। मीडिया में तो ये खबरें भी चल रही थीं कि मंगलोर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड (एमआरपीएल) (Mangalore Refinery and Petrochemicals Limited (MRPL) की रिफाइनरी को बंद किया जा रहा है। अब सोशल मीडिया पर चल रही उन खबरों का कंपनी ने आधिकारिक तौर पर खंडन किया है।


    क्या कहा कंपनी ने?

    कंपनी ने स्पष्ट किया है कि कच्चे तेल की कमी की अटकलों के बावजूद उसका संचालन पूरी तरह से सुचारू रूप से जारी है। सरकारी नियंत्रण वाली इस रिफाइनरी ने शनिवार को ऑयलप्राइस डॉट कॉम द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट किए जाने के बाद औपचारिक स्पष्टीकरण जारी किया। वायरल पोस्ट में कहा गया था कि 300,000 बैरल प्रतिदिन (बीपीडी) की क्षमता वाली रिफाइनरी अपनी इकाइयों को बंद कर रही है क्योंकि क्षेत्रीय तनाव के कारण मध्य पूर्वी कच्चे तेल की आपूर्ति खाड़ी देशों में फंसी हुई है।

    एमआरपीएल ने इन दावों को तथ्यात्मक रूप से गलत बताया है और कहा है कि रिफाइनरी निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार चल रही है और उसने निकट भविष्य के लिए अपनी आपूर्ति श्रृंखला सुरक्षित कर ली है। एक आधिकारिक बयान में कंपनी ने कहा- हम स्पष्ट करते हैं कि यह तथ्यात्मक रूप से गलत है। एमआरपीएल सामान्य रूप से काम कर रहा है और उसने संचालन जारी रखने के लिए पर्याप्त मात्रा में कच्चे तेल का इंतजाम कर लिया है। रिफाइनरी बिना किसी यूनिट के बंद हुए अपनी सामान्य क्षमता पर काम कर रही है। कच्चे तेल की कमी की अफवाहों के विपरीत, कंपनी ने पर्याप्त मात्रा में कच्चे तेल का स्टॉक कर लिया है।


    पेट्रोल-डीजल को लेकर अफवाह

    इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन और बीपीसीएल जैसी कंपनियों को भी इसी तरह की अफवाहों का सामना करना पड़ा। अफवाह है कि पेट्रोल और डीजल की किल्लत आने वाली है। इसी को लेकर इंडियन ऑयल ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया- भारत में पर्याप्त ईंधन भंडार है और आपूर्ति एवं वितरण नेटवर्क सामान्य रूप से काम कर रहे हैं। इंडियन ऑयल पूरे देश में निर्बाध ईंधन आपूर्ति बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। नागरिकों से अनुरोध है कि वे घबराएं नहीं और पेट्रोल पंपों पर भीड़ न लगाएं तथा सटीक जानकारी के लिए केवल आधिकारिक स्रोतों पर ही भरोसा करें। इससे पहले, पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी ने कहा कि भारत में ऊर्जा की कोई कमी नहीं है और ऊर्जा उपभोक्ताओं को चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है।

  • Warning: महामंदी की तरफ बढ़ रही दुनिया…. 7 दिन और चला ईरान युद्ध तो हालात होंगे भयावह!

    Warning: महामंदी की तरफ बढ़ रही दुनिया…. 7 दिन और चला ईरान युद्ध तो हालात होंगे भयावह!


    तेहरान।
    स्कॉटलैंड की संस्था (Scottish Organization) वुड मैकेंजी (Wood Mackenzie) ने मध्य-पूर्व जंग से उपजे संकट को लेकर नई चेतावनी दी है। इसमें दावा किया कि अगर ईरान-इजराइल युद्ध (Iran-Israel War) अगले सात दिन तक और चलता है तो वैश्विक अर्थव्यवस्था 1929 की महा मंदी ‘ग्रेट डिप्रेशन’ के दौर में प्रवेश कर सकती है। इसमें यह भी कहा कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य में गतिरोध बने रहने से दुनिया की अर्थव्यवस्था पर इसके परिणाम 1970 के दशक के तेल संकट से भी बड़े होने की संभावना है।


    क्या है महामंदी

    यह 1929 में अमेरिका से शुरू हुई आधुनिक इतिहास की सबसे भयंकर वैश्विक आर्थिक गिरावट थी, जो 1939-40 तक चली। अक्तूबर, 1929 के वॉल स्ट्रीट शेयर बाजार के पतन से शुरू होकर बैंकों के ठप होने, उत्पादन में भारी कमी और रिकॉर्ड तोड़ बेरोजगारी के साथ पूरी दुनिया में फैल गई। सिर्फ अमेरिका में ही 1933 तक 1.5 करोड़ लोग बेरोजगार हो गए थे।

    इसके पीछे 1929 का स्टॉक मार्केट क्रैश, बैंकों का विफल होना, गलत मौद्रिक नीतियां और अंतरराष्ट्रीय व्यापार में कमी जैसे अनेक मिश्रित कारण थे। यह एक दशक तक चलने वाला (1929-1939) आर्थिक संकट था। आर्थिक मंदी द्वितीय विश्व युद्ध (1939) के शुरू होने के साथ समाप्त हुई, जिसने उत्पादन को बढ़ावा दिया और रोजगार के अवसर पैदा किए।


    इस आधार पर आशंका

    वुड मैकेंजी के मुख्य अर्थशास्त्री पीटर मार्टिन के अनुसार, कच्चे तेल के दाम 90 डॉलर प्रति बैरल के पास हैं। हॉर्मुज से गुजरने वाले 1.2 से 1.4 करोड़ बैरल कच्चे तेल की आपूर्ति रुकने से कीमतें 125-150 डॉलर प्रति बैरेल तक जा सकती हैं। तेल 200 डॉलर प्रति बैरल को पार करता है तो यह 1970 के दशक जैसा झटका होगा।

    मध्य-पूर्व में जारी युद्ध शनिवार को आठवें दिन में प्रवेश कर गया। 28 फरवरी को इजरायल और अमेरिका ने संयुक्त रूप से ईरान पर हमला कर दिया। पिछले एक हफ्ते से जारी लड़ाई में कुल 16 देश प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तौर पर प्रभावित हैं, जिससे लाखों लोगों के जीवन और आजीविका को खतरा पैदा हो गया है। हिंसा मध्य एशिया से लेकर यूरोप के छोर तक फैलती जा रही है। अगर ये जंग बढ़ती है तो हालात और भयावह होंगे।

    रिपोर्ट में गैस संकट को लेकर भी चिंता जताई गई है। दुनिया का 20 फीसदी एलएनजी हॉर्मुज से गुजरता है। इसकी रुकावट 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान हुई गैस कटौती से कहीं अधिक गंभीर होगी। इससे यूरोप और एशिया में गैस की कीमतें 130 फीसदी तक बढ़ सकती हैं।

    वुड मैकेंजी का अनुमान है कि तेल की कीमतें 150 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर रहने से वैश्विक जीडीपी विकास दर 2 फीसदी से नीचे गिर जाएगी। मुख्य अर्थशास्त्री पीटर मार्टिन ने कहा कि यह आधिकारिक तौर पर मंदी और फिर डिप्रेशन जैसे हालात को बढ़ावा देगा। उनके मुताबिक, बेरोजगारी और मुद्रास्फीति के कारण 1930 जैसी लंबी मंदी पैदा हो सकती है।


    ईरान युद्ध के बड़े अपडेट्स

    >>ईरानी रेड क्रिसेंट सोसाइटी के अनुसार, एक सप्ताह पहले बमबारी शुरू होने के बाद से अमेरिका और इजरायल के हमलों में ईरान में 1,230 लोग मारे गए हैं, जबकि पांच हजार से अधिक घायल हैं।
    >>लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने हमलों में 217 की मौत और 798 के घायल हुए, जबकि एक लाख विस्थापित हुए।
    >>इजरायल में 12 नागरिकों की मौत, 1,600 से अधिक घायल हैं
    >>अमेरिका के 6 सैन्य कर्मियों की मौत की पुष्टि हुई और 20 घायल हैं।
    >>कुवैत में चार, यूएई तीन, बहरीन दो और ओमान में एक मौत हुई
    >>युद्ध के पहले 5 दिनों में वैश्विक शेयर बाजारों से लगभग 3.2 ट्रिलियन डॉलर (लगभग 265 लाख करोड़ रुपये) का नुकसान होने का अनुमान है। इसमें डॉव जोन्स और एशियाई बाजारों में 2 मार्च को गिरावट दर्ज की गई।
    >>हॉर्मुज जलडमरूमध्य बंद रहने से वैश्विक मुद्रास्फीति में 1 फीसदी तक की वृद्धि का अनुमान है।
    >>ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें शनिवार को 92 डॉलर प्रति बैरल को पार कर गई। संघर्ष लंबा चलने पर 100-130 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकता है, जिससे पूरी दुनिया में माल ढुलाई 20 फीसदी महंगी हो जाएगी।
    >>हॉर्मुज के रास्ते 20 फीसदी तेल और एलएनजी की सप्लाई रुकने से चीन, भारत, जापान जैसे देशों की ऊर्जा सुरक्षा खतरे में है।
    >>पिछले एक हफ्ते में दुनियाभर में 21,300 से अधिक उड़ानें रद्द की गई
    >>दुनिया भर के हवाई अड्डों पर 6 लाख से अधिक यात्री फंसे हुए।
    >>एयर इंडिया, इंडिगो, एमिरेट्स और कतर एयरवेज ने अपनी सेवाओं को निलंबित कर दिया है या रूट बदल दिए, जिससे प्रति उड़ान लागत 60,000 डॉलर तक बढ़ गई
    >>भारत से यूरोप जाने वाली उड़ानों को अब लंबा चक्कर काटकर जाना पड़ रहा है, जिससे कीमतें बढ़ गई हैं।

  • बिहार में होने जा रहा है बड़ा बदलाव…. निशांत कुमार आज जदयू में होंगे शामिल

    बिहार में होने जा रहा है बड़ा बदलाव…. निशांत कुमार आज जदयू में होंगे शामिल


    पटना।
    मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Chief Minister Nitish Kumar) के राज्यसभा (Rajya Sabha) में जाने के फैसले के बाद बिहार (Bihar) में कई मोर्चों पर जल्द ही बड़ा बदलाव नजर आएगा। मुख्यमंत्री कौन होगा, यह तय होना अभी बाकी है। इस बीच सम्राट चौधरी को केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने बागडोगरा बुलाया है। उधर, निशांत कुमार जदयू में सक्रिय हो गये हैं। वे रविवार को पार्टी दफ्तर में आयोजित समारोह में विधिवत दल की सदस्यता लेंगे। निशांत अपनी सियासी यात्रा चम्पारण से शुरू करेंगे।

    याद रहे नीतीश कुमार ने भी अपनी सभी यात्राएं यहीं से शुरू की हैं। आने वाले दिनों में जदयू के सांगठनिक मोर्चे पर निशांत की बड़ी भूमिका होगी। सरकार में वे उपमुख्यमंत्री होंगे। हालांकि, अभी इसकी आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। वर्तमान में सम्राट चौधरी और विजय सिन्हा राज्य के उपमुख्यमंत्री हैं।शनिवार को जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा के आवास पर निशांत कुमार ने पहले पार्टी के करीब डेढ़ दर्जन युवा विधायकों संग बैठक की। इसमें कई वरीय नेता भी शामिल हुए। फिर जिलाध्यक्षों के साथ उन्होंने लम्बी मंत्रणा की।

    पार्टी में शामिल होने के पूर्व ही वे पूरी तरह एक्टिव मोड में दिखे। निशांत ने पार्टी नेताओं से कहा कि वे अपने पिता नीतीश कुमार के कार्यों को आगे बढ़ाएंगे। बिहार के लिए उन्होंने जो कुछ किया है, उसे हर हाल में आगे बढ़ाएंगे। वे पार्टी संगठन को और मजबूत करेंगे और जो भी जिम्मेवारी पार्टी उन्हें सौंपेगी, उसे पूरा करेंगे। उन्होंने बेहद सामान्य माहौल में विधायकों व नेताओं से बातचीत की।


    महावीर मंदिर में पूजा के बाद जाएंगे पार्टी दफ्तर

    शुक्रवार को नीतीश कुमार की अध्यक्षता में पार्टी सांसदों, विधायकों व विधान पार्षदों की बैठक में निशांत के जदयू में शामिल होने के प्रस्ताव पर मुहर लगी। संजय झा ने बैठक में उनके जदयू में शामिल होने का प्रस्ताव रखा, जिसे सबने हाथ उठाकर समर्थन दिया। अब उन्हें रविवार को श्री झा समेत तमाम वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में पार्टी की सदस्यता दिलाई जाएगी। इसके साथ ही निशांत का सक्रिय राजनीति में प्रवेश होगा। इसके पहले वे महावीर मंदिर जाकर पूजा-अर्चना करेंगे।

  • शीतला अष्टमी 2026: कब है बासोड़ा पूजा? जानिए तारीख, शुभ मुहूर्त और धार्मिक महत्व

    शीतला अष्टमी 2026: कब है बासोड़ा पूजा? जानिए तारीख, शुभ मुहूर्त और धार्मिक महत्व


    नई दिल्ली। हिंदू धर्म में शीतला अष्टमी का पर्व विशेष धार्मिक महत्व रखता है। इस दिन शीतला माता की पूजा-अर्चना कर परिवार के स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना की जाती है। शीतला अष्टमी को कई जगहों पर बासोड़ा या बासोड़ा पूजा के नाम से भी जाना जाता है। यह व्रत हर वर्ष चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रखा जाता है। इस दिन माता शीतला को ठंडे या बासी भोजन का भोग लगाया जाता है और घरों में चूल्हा नहीं जलाया जाता।

    वर्ष 2026 में शीतला अष्टमी का पर्व 11 मार्च बुधवार को मनाया जाएगा। हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र कृष्ण अष्टमी तिथि की शुरुआत 11 मार्च को रात 1 बजकर 54 मिनट से हो रही है और यह तिथि 12 मार्च को सुबह 4 बजकर 19 मिनट तक रहेगी। उदयातिथि के आधार पर शीतला अष्टमी का व्रत 11 मार्च को रखा जाएगा। इस दिन श्रद्धालुओं को पूजा के लिए लगभग 12 घंटे का शुभ समय प्राप्त होगा।

    शीतला अष्टमी के दिन पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 6 बजकर 36 मिनट से प्रारंभ होकर शाम 6 बजकर 27 मिनट तक रहेगा। वहीं इस दिन ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 58 मिनट से 5 बजकर 47 मिनट तक रहेगा जिसे स्नान और ध्यान के लिए उत्तम समय माना जाता है। हालांकि इस दिन अभिजीत मुहूर्त नहीं है। वहीं राहुकाल दोपहर 12 बजकर 31 मिनट से 2 बजे तक रहेगा इसलिए इस समय में पूजा या शुभ कार्य करने से बचना चाहिए।

    इस वर्ष शीतला अष्टमी पर वज्र योग सिद्धि योग और ज्येष्ठा नक्षत्र का विशेष संयोग बन रहा है। वज्र योग सुबह से लेकर 9 बजकर 12 मिनट तक रहेगा जिसके बाद सिद्धि योग प्रारंभ होगा। धार्मिक मान्यता के अनुसार वज्र योग को अधिक शुभ नहीं माना जाता इसलिए शीतला माता की पूजा सिद्धि योग में करना अधिक फलदायी माना जाता है। इस योग में की गई पूजा से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और देवी की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

    शीतला अष्टमी का पर्व स्वास्थ्य और रोगों से सुरक्षा से जुड़ा हुआ माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धापूर्वक व्रत और पूजा करने से चेचक जैसे संक्रामक रोगों से रक्षा होती है और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है। शीतला माता को ठंडा भोजन प्रिय माना जाता है इसलिए इस दिन घर में नया भोजन नहीं बनाया जाता।

    परंपरा के अनुसार शीतला सप्तमी यानी  एक दिन पहले भोजन बनाकर रखा जाता है और अगले दिन वही ठंडा भोजन माता शीतला को भोग के रूप में अर्पित किया जाता है। इसके बाद परिवार के लोग भी उसी भोजन को प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं। माना जाता है कि ऐसा करने से माता शीतला प्रसन्न होती हैं और अपने भक्तों को स्वास्थ्य सुख और समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं।