Author: bharati

  • ट्रंप के नए आयात टैरिफ पर बढ़ा विवाद, 20 से अधिक अमेरिकी राज्यों ने अदालत का दरवाजा खटखटाया

    ट्रंप के नए आयात टैरिफ पर बढ़ा विवाद, 20 से अधिक अमेरिकी राज्यों ने अदालत का दरवाजा खटखटाया

    वाशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप (Donald Trump) की नई वैश्विक आयात टैरिफ नीति को लेकर अमेरिका में बड़ा कानूनी विवाद खड़ा हो गया है। 20 से अधिक अमेरिकी राज्यों ने इस फैसले को चुनौती देते हुए अदालत का रुख किया है। राज्यों का आरोप है कि राष्ट्रपति अपने अधिकारों से आगे बढ़कर आयात शुल्क लागू कर रहे हैं, जिससे व्यापारियों और आम नागरिकों पर आर्थिक बोझ बढ़ सकता है। इस मामले की सुनवाई United States Court of International Trade, न्यूयॉर्क में होगी।
    जानकारी के अनुसार, यह मुकदमा Oregon, Arizona, California और New York सहित कई डेमोक्रेटिक शासित राज्यों के अटॉर्नी जनरल की ओर से दायर किया गया है। उनका कहना है कि ट्रंप प्रशासन कई देशों से आने वाले उत्पादों पर लगभग 15 प्रतिशत तक आयात शुल्क लगाने की योजना बना रहा है, जो कानून के दायरे से बाहर है।

    ट्रंप ने दी नीति की सफाई
    राष्ट्रपति Donald Trump का कहना है कि यह कदम अमेरिका के लंबे समय से जारी व्यापार घाटे को कम करने के लिए जरूरी है। उनके मुताबिक यह शुल्क Trade Act of 1974 की धारा 122 के तहत लगाया गया है। इस प्रावधान के अनुसार राष्ट्रपति अधिकतम 15 प्रतिशत तक आयात शुल्क लगा सकते हैं और यह व्यवस्था पांच महीने तक लागू रह सकती है। आवश्यकता पड़ने पर इसकी अवधि बढ़ाने का अधिकार कांग्रेस के पास होता है।

    राज्यों ने उठाए कानूनी सवाल
    मुकदमा दायर करने वाले राज्यों का तर्क है कि इस धारा का इस्तेमाल केवल विशेष परिस्थितियों में किया जा सकता है, न कि विभिन्न देशों से आने वाले सामान पर व्यापक रूप से टैरिफ लगाने के लिए। राज्यों का कहना है कि इससे स्थानीय कारोबार, उद्योग और उपभोक्ताओं पर महंगाई और आर्थिक दबाव बढ़ने की आशंका है।

    अदालत करेगी अंतिम फैसला
    मामले की सुनवाई न्यूयॉर्क स्थित United States Court of International Trade में होगी, जहां यह तय किया जाएगा कि ट्रंप का नया टैरिफ कानून के अनुरूप है या नहीं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब पिछले साल अदालत ने ट्रंप द्वारा आपातकालीन शक्तियों के तहत लगाए गए कुछ टैरिफ को रद्द कर दिया था। इससे संकेत मिलता है कि न्यायपालिका राष्ट्रपति के व्यापार संबंधी फैसलों की समीक्षा कर सकती है।

  • जबलपुर में दो गुटों के बीच हिंसक झड़प के बाद इलाके में भारी पुलिस बल तैनात

    जबलपुर में दो गुटों के बीच हिंसक झड़प के बाद इलाके में भारी पुलिस बल तैनात

    जबलपुर में दो गुटों के बीच हिंसक झड़प के बाद इलाके में भारी पुलिस बल तैनात
    जबलपुर। मध्य प्रदेश के जबलपुर में पुरानी रंजिश को लेकर बुधवार रात दो पक्षों के बीच अचानक हिंसक झड़प हो गई। इस घटना में करीब 20 वर्षीय युवक घायल हो गया। विवाद के बाद क्षेत्र में तनाव का माहौल बन गया, जिसे देखते हुए प्रशासन ने इलाके में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया है। घायल युवक को अस्पताल में भर्ती कराया गया है और उसकी हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है।
    मामूली कहासुनी से बढ़ा विवाद

    पुलिस के अनुसार, बुधवार रात करीब 10:30 बजे भान तलैया से छोटी ओमती मार्ग पर सोनकर समाज के दो पक्षों के बीच मामूली कहासुनी शुरू हुई थी। देखते ही देखते यह विवाद बढ़ गया और दोनों पक्षों के लोग बड़ी संख्या में मौके पर जुट गए।

    कुछ ही देर में बहस झड़प में बदल गई और दोनों तरफ से मारपीट शुरू हो गई। हालात इतने बिगड़ गए कि लोगों ने एक-दूसरे पर जमकर पत्थरबाजी भी कर दी, जिससे इलाके में अफरा-तफरी मच गई।

    हमले में युवक घायल

    इस दौरान आयुष सोनकर नाम का युवक घायल हो गया, जिसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया।

    पुलिस अधिकारियों के मुताबिक उसकी हालत अब स्थिर है।

    मामले की सूचना मिलते ही बेलबाग, हनुमानताल और ओमती थाना क्षेत्र की पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को काबू में किया। Sonu Kurmi, सिटी सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस ने बताया कि इस मामले में अप्पा सोनकर समेत अन्य लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। बताया जा रहा है कि अप्पा सोनकर पहले से ही एक अन्य आपराधिक मामले में वांछित है।

    गोली चलने की अफवाह से मची भगदड़

    घटना के दौरान गोली चलने की अफवाह भी फैल गई, जिससे लोगों में डर का माहौल बन गया और कुछ समय के लिए भगदड़ जैसी स्थिति पैदा हो गई। हालांकि यह अभी स्पष्ट नहीं हो पाया है कि वास्तव में गोली चली या नहीं।

    पुलिस का कहना है कि फिलहाल स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है।

    CCTV और वायरल वीडियो से जांच

    घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया है। पुलिस ने आरोपियों की पहचान के लिए वायरल वीडियो और आसपास लगे CCTV कैमरों की फुटेज अपने कब्जे में ले ली है और उनकी जांच की जा रही है।

    अधिकारियों का कहना है कि माहौल बिगाड़ने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। आरोपियों की पहचान कर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल क्षेत्र में शांति बनाए रखने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था की गई है।

  • क्या है छत्तीसगढ़ का ‘आवा पानी झोकी’ आंदोलन, किसानों की पहल से जल संरक्षण की नई मिसाल

    क्या है छत्तीसगढ़ का ‘आवा पानी झोकी’ आंदोलन, किसानों की पहल से जल संरक्षण की नई मिसाल

    रायपुर। छत्‍तीसगढ़ (Chhattisgarh) में जल संरक्षण को लेकर किसानों ने एक अनोखी पहल शुरू की है, जिसे ‘आवा पानी झोकी’ नाम दिया गया है। इस आंदोलन के तहत किसान अपनी खेती की जमीन का करीब 5 प्रतिशत हिस्सा वर्षा जल संग्रह के लिए अलग रख रहे हैं, ताकि बारिश का पानी खेतों में ही संरक्षित किया जा सके। इस पहल का उद्देश्य प्रदेश में जल संरक्षण को बढ़ावा देना और लंबे समय में जल क्रांति की दिशा में कदम बढ़ाना है।
    खेतों में बन रहे छोटे तालाब और गड्ढे
    Ministry of Jal Shakti के मुताबिक, इस अभियान में किसान स्वेच्छा से अपनी कृषि भूमि के एक हिस्से में छोटे रिचार्ज तालाब और सीढ़ीनुमा गड्ढे बनवा रहे हैं। इन संरचनाओं में बारिश का पानी जमा होता है और धीरे-धीरे जमीन में समाकर भूजल स्तर को बढ़ाने में मदद करता है।

    इस व्यवस्था से मानसून के दौरान गिरने वाली पानी की हर बूंद को खेतों में ही रोका और पुनः उपयोग किया जा रहा है।

    इलाके में दिखने लगे सकारात्मक परिणाम

    मंत्रालय ने इस प्रयोग को उल्लेखनीय बताया है। पहले जो बारिश का पानी बहकर निकल जाता था, अब वह मिट्टी और भूजल स्रोतों का पुनर्भरण कर रहा है। इससे मिट्टी के कटाव में कमी आई है और सूखे के समय फसलों में नमी भी बनी रहती है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यह मॉडल साबित करता है कि सतत जल प्रबंधन के लिए भारी निवेश से ज्यादा सामूहिक भागीदारी जरूरी होती है।

    महिलाएं बनीं ‘नीर नायिका’, युवक ‘जल दूत’

    इस अभियान में ग्रामीण समुदाय की बड़ी भूमिका है। गांवों की महिलाएं ‘नीर नायिका’ बनकर घर-घर लोगों को जल संरक्षण के लिए प्रेरित कर रही हैं और पारंपरिक लोकगीतों के जरिए जागरूकता फैला रही हैं।

    वहीं युवाओं को ‘जल दूत’ कहा जा रहा है, जो नालियों का मानचित्रण करने, नहरों से गाद निकालने, नुक्कड़ नाटक और भित्ति चित्रों के माध्यम से लोगों को अभियान से जोड़ने का काम कर रहे हैं।

    श्रमदान से तालाबों का पुनर्जीवन

    इस आंदोलन के दौरान सामूहिक श्रमदान से 440 से अधिक पारंपरिक तालाबों का पुनरुद्धार किया गया, जो अब प्राकृतिक जल पुनर्भरण के स्रोत बन गए हैं।

    इसके अलावा Pradhan Mantri Awas Yojana के 500 से ज्यादा लाभार्थियों ने भी अपने घरों के पास जल संरक्षण के गड्ढे बनवाए हैं।

    हजारों किसानों ने अपनाया 5% मॉडल

    जानकारी के अनुसार 1,260 से अधिक किसानों ने अपनी जमीन का 5 प्रतिशत हिस्सा जल पुनर्भरण के लिए अलग रखा है और पूरे Koriya District में 2,000 से ज्यादा सोख गड्ढे बनाए गए हैं।

    एक उदाहरण में ग्रामीणों ने सामूहिक प्रयास से सिर्फ तीन घंटे में 660 सोख गड्ढे बना दिए, जो इस अभियान में लोगों की भागीदारी को दर्शाता है।

    भूजल स्तर में भी हुआ सुधार

    मंत्रालय के अनुसार इस पहल के परिणाम अब स्पष्ट दिखने लगे हैं। कई गांवों में भूजल स्तर 3 से 4 मीटर तक बढ़ गया है, जबकि 17 दूरस्थ जनजातीय बस्तियों में सूख चुके झरने फिर से बहने लगे हैं।

    मिट्टी में नमी बढ़ने से कृषि उत्पादकता में सुधार हुआ है और बेहतर आजीविका के कारण मौसमी पलायन में करीब 25 प्रतिशत की कमी आई है।

  • शवयात्रा में मचा हड़कंप: मधुमक्खियों के हमले से भागे ग्रामीण, कई लोग घायल

    शवयात्रा में मचा हड़कंप: मधुमक्खियों के हमले से भागे ग्रामीण, कई लोग घायल


    उन्नाव। उत्‍तरप्रदेश के उन्‍नाव (Unnao) जिले में अंतिम संस्कार के दौरान उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब अचानक मधुमक्खियों के झुंड ने शवयात्रा में शामिल लोगों पर हमला कर दिया। मधुमक्खियों के डंक से बचने के लिए लोग इधर-उधर भागने लगे और कुछ समय के लिए शव को वहीं छोड़ना पड़ा। इस घटना में करीब दो दर्जन ग्रामीण घायल हो गए, जिन्हें उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया।
    घटना Ahimakheda village की है, जो Ajgain police station area के अंतर्गत आता है। यहां रहने वाले 65 वर्षीय सुंदर लाल का गुरुवार सुबह निधन हो गया था। परिजन और गांव के लोग उनका अंतिम संस्कार करने के लिए शव को गांव के बाहर स्थित खेत में ले गए थे।

    बताया गया कि खेत के पास एक बाग में पेड़ पर मधुमक्खियों का बड़ा छत्ता था। जैसे ही शवयात्रा वहां पहुंची, मधुमक्खियां अचानक भड़क गईं और लोगों पर हमला कर दिया। देखते ही देखते वहां भगदड़ मच गई। करीब 50-60 लोग शवयात्रा में शामिल थे, जो अपनी जान बचाने के लिए आसपास के सरसों और गेहूं के खेतों तथा झाड़ियों में छिप गए।

    मधुमक्खियों के हमले में लगभग दो दर्जन लोगों को डंक लग गए। सूचना मिलने पर एंबुलेंस मौके पर पहुंची और घायलों को इलाज के लिए Nawabganj Community Health Center ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें इंजेक्शन और दवाइयां देकर उपचार किया।

    घटना में घायल ग्रामीणों ने बताया कि खेत के पास खिन्नी का एक पेड़ है, जिस पर मधुमक्खियों का बड़ा छत्ता लगा हुआ था। जैसे ही लोग शव लेकर वहां पहुंचे, मधुमक्खियां अचानक झुंड बनाकर हमला करने लगीं।

    ग्रामीणों के अनुसार, सुंदर लाल करीब 15-20 दिन पहले रिश्तेदारी में गए थे, जहां गिरने से उनका पैर टूट गया था। इसके बाद से उनकी तबीयत लगातार खराब चल रही थी और गुरुवार सुबह उनकी मौत हो गई।

    मधुमक्खियों के शांत होने के बाद ग्रामीण दोबारा मौके पर पहुंचे और फिर अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी की गई।

  • पाकिस्तानी नागरिक सबा प्रकरण में नया मोड़: ‘नाजिया’ का वोटर कार्ड किसी और का

    पाकिस्तानी नागरिक सबा प्रकरण में नया मोड़: ‘नाजिया’ का वोटर कार्ड किसी और का


    मेरठ। उत्‍तरप्रदेश के मेरठ (Meerut) में कथित पाकिस्तानी नागरिक सबा की गिरफ्तारी और फर्जी दस्तावेजों के मामले में अब नया मोड़ सामने आया है। सबा के अधिवक्ता वीके शर्मा ने पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाते हुए दावा किया है कि जिस वोटर कार्ड को आधार बनाकर सबा को जेल भेजा गया, वह असल में किसी दूसरी महिला का है और इस पूरे मामले में बड़ी गड़बड़ी हुई है।

    वोटर कार्ड को लेकर नया खुलासा
    अधिवक्ता वीके शर्मा ने मीडिया के सामने ‘नाजिया पत्नी फरहत’ नाम से जारी वोटर कार्ड पेश करते हुए बताया कि उस पर दर्ज ईपीआईसी (EPIC) नंबर TXL0674044 वही है, जिसे शिकायत में मुख्य आधार बनाया गया था।

    उनका कहना है कि यह वोटर कार्ड मेरठ के Sathla village की रहने वाली एक महिला का है, जिसका सबा से कोई संबंध नहीं है। जानकारी के मुताबिक वह महिला अपने परिवार और प्रोफेसर पति के साथ वहीं रह रही है।

    पुलिस पर बिना जांच गिरफ्तारी का आरोप

    वकील ने आरोप लगाया कि पुलिस ने बिना ठोस जांच और भौतिक सत्यापन के केवल एक शिकायत के आधार पर सबा को गिरफ्तार कर लिया। उनका कहना है कि अगर सही तरीके से जांच होती, तो यह साफ हो जाता कि जिस वोटर कार्ड का हवाला दिया जा रहा है, वह किसी अन्य महिला का है।

    33 साल से भारत में रहने का आरोप

    दरअसल यह मामला तब सामने आया जब रुकसाना खान पत्नी अयाज खान ने जिला प्रशासन और एसएसपी से शिकायत की थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि जली कोठी क्षेत्र में रहने वाली सबा उर्फ नाजी उर्फ नाजिया पाकिस्तान की नागरिक है और वह पिछले करीब 33 वर्षों से बिना वैध नागरिकता के भारत में रह रही है।

    शिकायत में यह भी कहा गया था कि सबा का निकाह मेरठ के फरहत मसूद से हुआ था और वर्ष 1993 में उसने पाकिस्तान में बेटी को जन्म दिया था। बाद में वह पाकिस्तानी पासपोर्ट के जरिए भारत आई और यहीं बस गई। आरोप यह भी लगाया गया कि उसने फर्जी पहचान पत्रों के आधार पर भारतीय दस्तावेज तैयार कराए।

    कोर्ट में होगी कानूनी लड़ाई

    इसी शिकायत के आधार पर 16 फरवरी को Delhi Gate Police Station Meerut में मामला दर्ज किया गया था और 17 फरवरी को सबा को जेल भेज दिया गया। अब बचाव पक्ष के वकील का कहना है कि वे अदालत में इस मामले को मजबूती से उठाएंगे।

    उनका दावा है कि जिस वोटर कार्ड को सबा से जोड़ा जा रहा है, उसमें सठला गांव की महिला की फोटो है और कहीं भी सबा का उल्लेख नहीं है। ऐसे में वे गलत गिरफ्तारी और मानसिक उत्पीड़न के आरोप में पुलिस के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की तैयारी कर रहे हैं।

    इस नए खुलासे के बाद पूरे मामले में पुलिस की जांच प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो गए हैं और आगे की कानूनी कार्रवाई पर सबकी नजर टिकी है।

  • IRIS DENA पर मोदी सरकार की चुप्पी से भड़के खरगे, कहा-देश की विदेश नीति को बर्बाद कर रहे…

    IRIS DENA पर मोदी सरकार की चुप्पी से भड़के खरगे, कहा-देश की विदेश नीति को बर्बाद कर रहे…

    नई दिल्‍ली। इजरायल और अमेरिका द्वारा मिलकर ईरान पर किए गए हमले ने वैश्विक राजनीति के साथ-साथ भारत की घरेलू राजनीति को भी तेज कर दिया है। ईरानी जहाज को हिंद महासागर में अमेरिकी पनडुब्बी द्वारा डुबोए जाने पर भारत सरकार की चुप्पी को लेकर विपक्ष ने अपनी नाराजगी जाहिर की है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि हिंद महासागर में हुई इस घटना पर पीएम नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार की चुप्पी से साफ है कि देश के रणनीतिक और राष्ट्रीय हितों की घोर उपेक्षा की जा रही है। यह न सिर्फ भारत के राष्ट्रीय सिद्धांतों का अपमान है, बल्कि हमारी उस विदेश नीति का भी अपमान है, जिसे तमाम सरकारों ने बड़ी मेहनत से बनाया और अपनाया है।

    सोशल मीडिया साइट एक्स पर लिखे एक पोस्ट में खरगे ने मोदी सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा, “ईरान का जो जहाज टारपीडो की चपेट में आने से डूबा है यह जहाज बिना सैन्य साजो सामान के था और भारत में आयोजित अंतरराष्ट्रीय फ्लीट रिव्यू 2026 से लौट रहा था।

    ईरानी नौसेना का जहाज ईरिस डेना भारत का आमंत्रित अतिथि था और यह विशाखापत्तनम में 15 से 26 फरवरी तक आयोजित अंतरराष्ट्रीय फ्लीट रिव्यू 2026 में शामिल हुआ था। इस आयोजन में 70 से ज्यादा देशों की नौसेनाएं शामिल हुईं थीं।

    कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि आश्चर्य की बात यह है कि इस अतिथि के डूबने पर भारत की तरफ से कोई चिंता या संवेदना व्यक्त नहीं की गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस पर चुप हैं। पीएम मोदी पर हमला करते हुए उन्होंने कहा कि जब आप अपने ही आंगन में हो रही घटनाओं पर प्रतिक्रिया नहीं दे सकते हैं तो हमें महासागर सिद्धांतों और हिंद महासागर क्षेत्र में भारत के ‘नेट सिक्योरिटी प्रोवाइडर’ होने के सिद्धांतों पर उपदेश क्यों दे रहे हैं।
    होर्मुज की खाड़ी में फंसे 1100 भारतीय नाविक: खरगे

    कांग्रेस अध्यक्ष ने इस युद्ध की वजह से होर्मुज की खाड़ी में फंसे भारतीयों को लेकर भी अपनी चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि होर्मुज की खाड़ी में 38 भारतीय ध्वज वाले जहाज और 1100 नाविक फंसे हुए हैं।

    प्टन आशीष कुमार समेत दो भारतीय नाविकों की कथित तौर पर मौत हो गई है। समुद्री बचाव या राहत अभियान क्यों नहीं चलाया जा रहा है? पीएम मोदी कहते हैं कि कच्चे तेल और अन्य तेल का भंडार केवल 25 दिनों के लिए बचा है। तेल की बढ़ती कीमतों के बीच, हमारी ऊर्जा संबंधी इमरजेंसी योजना क्या है, खासकर भारत सरकार द्वारा रूसी तेल का आयात रोकने की मांग को लगभग स्वीकार करने के बाद। खाड़ी देशों के साथ अन्य प्रमुख वस्तुओं के व्यापार का क्या होगा।
    विदेश नीति को बर्बाद कर रहे हैं: खरगे

    कांग्रेस अध्यक्ष ने केंद्र सरकार की विदेश नीति पर भी सवाल उठाए और कहा कि विदेश मंत्रालय के 3 मार्च के बयान के अनुसार, “कुछ भारतीय नागरिकों की जान चली गई है या वे लापता हैं”। खाड़ी देशों में एक करोड़ भारतीय रहते हैं। मेडिकल छात्र मदद की गुहार लगाते हुए हताश वीडियो संदेश जारी कर रहे हैं।

    भारत सरकार उनकी सुरक्षा कैसे सुनिश्चित कर रही है? क्या प्रभावित क्षेत्रों से लोगों को निकालने की कोई योजना बनाई गई है? उन्होंने कहा कि इन सब स्थितियों के बीच “स्पष्ट रूप से, मोदी जी का आत्मसमर्पण राजनीतिक और नैतिक दोनों है। यह भारत के मूल राष्ट्रीय हितों का अपमान करता है और हमारी उस विदेश नीति को खत्म कर रहा है, जिसे वर्षों से लगातार सरकारों द्वारा सावधानीपूर्वक और मेहनत से बनाया और अपनाया गया है।”

    गौरतलब है कि इजरायल और अमेरिका द्वारा ईरान पर हमले के साथ शुरू हुई यह जंग अब पश्चिम एशिया से आगे बढ़कर हिंद महासागर में पहुंच गई है।

    भारत में फ्लीट रिव्यू कार्यक्रम के तहत आए ईरानी युद्धपोत को अमेरिकी पनडुब्बी ने श्रीलंका के करीब डुबो दिया। इस घटना में 80 से ज्यादा ईरानी नौसैनिकों के मारे जाने की आशंका है। बाकियों को श्रीलंकाई नेवी से बचाव अभियान के तहत बचाया था। फिलहाल यह सैनिक श्रीलंका में मौजूद हैं।
  • भोपाल में पालक महासंघ का हल्ला बोल: निजी स्कूलों की मनमानी फीस के खिलाफ DEO कार्यालय का घेराव

    भोपाल में पालक महासंघ का हल्ला बोल: निजी स्कूलों की मनमानी फीस के खिलाफ DEO कार्यालय का घेराव

    भोपाल ।राजधानी भोपाल में निजी स्कूलों द्वारा मनमाने ढंग से फीस और अन्य शुल्क वसूले जाने के खिलाफ अभिभावकों का गुस्सा सड़कों पर नजर आया। पालक महासंघ के नेतृत्व में बड़ी संख्या में अभिभावकों ने जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) कार्यालय के बाहर प्रदर्शन करते हुए घेराव किया और निजी स्कूल संचालकों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि निजी स्कूल फीस, बस शुल्क, किताबों और अन्य मदों में लगातार मनमानी वसूली कर रहे हैं, जिससे अभिभावकों पर आर्थिक बोझ बढ़ता जा रहा है।

    प्रदर्शन के दौरान पालक महासंघ के पदाधिकारियों ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में शिक्षा माफिया सक्रिय है और निजी स्कूल संचालकों के दबाव में प्रशासन कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर रहा। उनका आरोप है कि अभिभावक लंबे समय से शिकायतें कर रहे हैं, लेकिन जिला शिक्षा अधिकारी की ओर से स्कूलों के खिलाफ कोई सख्त कदम नहीं उठाया गया।

    प्रदर्शन के दौरान अभिभावकों ने DEO कार्यालय का घेराव करते हुए जोरदार नारेबाजी की और शिक्षा विभाग के खिलाफ नाराजगी जताई। पालक महासंघ के प्रतिनिधियों ने बताया कि वे अपनी मांगों को लेकर जिला शिक्षा अधिकारी को ज्ञापन सौंपने पहुंचे थे, लेकिन अधिकारी ने ज्ञापन लेने से इनकार कर दिया और कार्यालय छोड़कर चले गए। इस घटना से प्रदर्शनकारियों में और अधिक आक्रोश फैल गया और उन्होंने इसे अभिभावकों की समस्याओं के प्रति प्रशासन की उदासीनता बताया।

    अभिभावकों का कहना है कि निजी स्कूल हर साल फीस में मनमानी बढ़ोतरी कर देते हैं, जबकि बस शुल्क और किताबों के नाम पर भी भारी रकम वसूली जाती है। इससे खासकर गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा है। कई अभिभावकों ने कहा कि बच्चों की पढ़ाई जारी रखना भी उनके लिए मुश्किल होता जा रहा है।

    पालक महासंघ ने सरकार और शिक्षा विभाग से मांग की है कि निजी स्कूलों की फीस वृद्धि पर तुरंत रोक लगाई जाए और फीस, बस चार्ज तथा किताबों की कीमतों के लिए एक पारदर्शी और तय ढांचा बनाया जाए। इसके अलावा उन्होंने शिक्षा माफिया के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने और दोषी स्कूलों पर भारी जुर्माना लगाने की मांग भी उठाई है।

    प्रदर्शनकारियों ने यह भी मांग की कि जिला शिक्षा अधिकारी और संबंधित अधिकारियों पर किसी तरह का दबाव डालने वाले लोगों की जांच की जाए और यदि कोई दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जाए। पालक महासंघ ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आने वाले दिनों में आंदोलन और तेज किया जाएगा।

  • ट्रंप बोले- जमीनी युद्ध की जरूरत ही नहीं, ईरान की नौसेना खत्म

    ट्रंप बोले- जमीनी युद्ध की जरूरत ही नहीं, ईरान की नौसेना खत्म

    नई दिल्‍ली। इजरायल-ईरान संघर्ष सातवें दिन और तेज हो गया है। रिपोर्ट्स के अनुसार तेहरान ने अज़रबैजान और क़तर में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर नए हमले किए। ईरान ने यह भी चेतावनी दी कि भारतीय महासागर में एक ईरानी युद्धपोत को टॉरपीडो से डुबाने के लिए अमेरिका को ‘पछतावा’ होगा। इसी बीच एक धार्मिक नेता ने डोनाल्ड ट्रंप के ‘खून’ की मांग करने वाला बयान दिया।
    दूसरी ओर, इजरायली सेना ने बताया कि पिछले 24 घंटों में लेबनान में ईरान समर्थित हिज़्बुल्लाह के 80 ठिकानों पर हमला किया गया। साथ ही ईरान के अंदर भी लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल लॉन्च साइट्स समेत कई सैन्य ठिकानों को निशाना बनाते हुए हमलों की एक नई लहर चलाई गई।

    इस बीच एक बड़ी घटना में अमेरिकी पनडुब्बी द्वारा दागे गए टॉरपीडो से श्रीलंका के तट के पास एक ईरानी युद्धपोत डूब गया जिसमें कम से कम 87 लोगों की मौत हो गई।

    लगभग 32 लोगों को बचाकर श्रीलंका के दक्षिणी शहर गाले के अस्पताल में भर्ती कराया गया। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने इस हमले की पुष्टि करते हुए कहा कि वह युद्धपोत ‘शांत तरीके से डूब गया।’ इसी दौरान कुवैत के पास खाड़ी क्षेत्र में एक तेल टैंकर में भी धमाका हुआ। रिपोर्ट के मुताबिक जहाज के बाईं ओर बड़ा विस्फोट देखा गया जिसके बाद उसमें पानी भरने लगा। जहाज के कप्तान ने बताया कि धमाके के बाद एक छोटी नाव को उस इलाके से दूर जाते हुए देखा गया। यह घटना कुवैत के मुबारक अल कबीर पोर्ट से लगभग 30 नॉटिकल मील (करीब 56 किमी) दक्षिण-पूर्व में हुई
  • टी-20 विश्व कप फाइनल में भारत की एंट्री पर MP में जश्न: इंदौर के राजवाड़ा पर ढोल-ताशे, जबलपुर-उज्जैन में आतिशबाजी

    टी-20 विश्व कप फाइनल में भारत की एंट्री पर MP में जश्न: इंदौर के राजवाड़ा पर ढोल-ताशे, जबलपुर-उज्जैन में आतिशबाजी


    मध्यप्रदेश । टी 20 विश्व कप के दूसरे सेमीफाइनल मुकाबले में टीम इंडिया ने शानदार प्रदर्शन करते हुए इंग्लैंड को हराकर फाइनल में जगह बना ली। मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में खेले गए इस मुकाबले में भारतीय खिलाड़ियों ने गेंद और बल्ले दोनों से दमदार खेल दिखाया। मैच के आखिरी ओवर तक रोमांच बना रहा लेकिन भारतीय टीम ने शानदार संयम और रणनीति के साथ मुकाबला अपने नाम कर लिया। भारत की इस जीत के साथ ही देशभर में जश्न का माहौल बन गया और मध्य प्रदेश के कई शहरों में क्रिकेट प्रेमी खुशी से झूम उठे।

    इंदौर में जीत का जश्न सबसे ज्यादा ऐतिहासिक राजवाड़ा क्षेत्र में देखने को मिला। जैसे ही भारत की जीत तय हुई बड़ी संख्या में लोग हाथों में तिरंगा लेकर राजवाड़ा चौराहे पर पहुंच गए। युवाओं ने ढोल ताशों की धुन पर जमकर नाचते हुए जीत का जश्न मनाया। पूरे इलाके में भारत माता की जय और वंदे मातरम् के नारे गूंजने लगे। लोगों ने एक दूसरे को मिठाई खिलाकर बधाई दी और जमकर आतिशबाजी की। देर रात तक राजवाड़ा और आसपास के क्षेत्रों में उत्सव जैसा माहौल बना रहा।

    भारत की इस जीत के बाद क्रिकेट प्रेमियों का उत्साह चरम पर पहुंच गया है और अब सभी की नजरें फाइनल मुकाबले पर टिक गई हैं। लोगों को उम्मीद है कि टीम इंडिया फाइनल में भी शानदार प्रदर्शन करते हुए विश्व कप ट्रॉफी अपने नाम करेगी।

    वहीं जबलपुर में भी भारत की जीत के बाद क्रिकेट फैंस सड़कों पर उतर आए। शहर के मालवीय चौक पर बड़ी संख्या में लोग जमा हुए और भारत की जीत का जश्न मनाया। यहां युवाओं ने पटाखे जलाए और एक दूसरे को बधाई दी। भारत की जीत के नारे और देशभक्ति के गीतों के बीच पूरे इलाके में उत्सव जैसा माहौल बन गया।

    उज्जैन में भी टीम इंडिया की जीत की खुशी साफ नजर आई। शहर के हृदय स्थल टॉवर चौक पर युवाओं की टोलियां एकत्रित हो गईं। यहां लोगों ने तिरंगा लहराते हुए जमकर आतिशबाजी की और भारत माता की जय तथा वंदे मातरम् के नारे लगाए। युवा बुजुर्ग और बच्चे सभी इस जीत के जश्न में शामिल दिखाई दिए।

    क्रिकेट प्रेमियों ने कहा कि टीम इंडिया का प्रदर्शन पूरे टूर्नामेंट में शानदार रहा है और सेमीफाइनल में इंग्लैंड जैसी मजबूत टीम को हराना बड़ी उपलब्धि है। अब सभी को उम्मीद है कि भारतीय टीम फाइनल में भी इसी तरह का दमदार खेल दिखाकर देश को एक और विश्व कप जीत का जश्न मनाने का मौका देगी।

  • ग्लोबल एनर्जी वॉर में ईरान का मास्टरस्ट्रोक: अमेरिका और सहयोगियों के लिए हॉर्मुज पूरी तरह 'ब्लॉक', भारत-चीन के लिए खुली रहेगी तेल की सप्लाई।

    ग्लोबल एनर्जी वॉर में ईरान का मास्टरस्ट्रोक: अमेरिका और सहयोगियों के लिए हॉर्मुज पूरी तरह 'ब्लॉक', भारत-चीन के लिए खुली रहेगी तेल की सप्लाई।


    नई दिल्ली । पश्चिम एशिया में जारी युद्ध की विभीषिका के बीच ईरान के ‘इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर’IRGC ने एक ऐसी घोषणा की है, जिसने पूरी दुनिया के ऊर्जा बाजार में हलचल मचा दी है। ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि दुनिया की ऊर्जा जीवनरेखा माना जाने वाला ‘हॉर्मुज जलडमरूमध्य’Strait of Hormuz अब केवल संयुक्त राज्य अमेरिका, इजरायल, यूरोप और उनके पश्चिमी सहयोगियों के जहाजों के लिए पूरी तरह बंद कर दिया गया है। ईरानी सरकारी प्रसारक IRIB के माध्यम से दी गई यह चेतावनी सीधे तौर पर उन देशों को निशाना बनाती है जो वर्तमान संघर्ष में ईरान के खिलाफ खड़े हैं। IRGC ने दो टूक कहा है कि यदि इन प्रतिबंधित देशों का कोई भी जहाज इस जलमार्ग से गुजरने की कोशिश करेगा, तो उसे निश्चित रूप से हमला करके नष्ट कर दिया जाएगा।

    हालाँकि, इस अंतरराष्ट्रीय तनाव के बीच भारत के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर आई है। ईरान ने स्पष्ट किया है कि भारत इस सख्त नाकेबंदी के दायरे से बाहर है। बुधवार को जहाँ केवल चीनी जहाजों को अनुमति देने की बात कही गई थी, वहीं अब नए ऐलान के बाद यह साफ हो गया है कि भारतीय तेल टैंकरों और मालवाहक जहाजों के लिए यह रास्ता सुरक्षित रहेगा। तेहरान का यह रुख भारत के साथ उसके पुराने और विश्वसनीय संबंधों को दर्शाता है। भारतीय अधिकारियों और विशेषज्ञों के अनुसार, इस छूट से भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर मंडरा रहा खतरा काफी हद तक टल गया है, क्योंकि भारत अपनी तेल जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से आयात करता है।

    ईरानी अधिकारियों ने अंतरराष्ट्रीय कानूनों का हवाला देते हुए इस कार्रवाई को जायज ठहराया है। उनका कहना है कि युद्धकाल में इस्लामिक गणराज्य ईरान को अपनी सीमाओं से लगे जलमार्गों पर नियंत्रण करने का पूरा अधिकार है। यह कठोर फैसला अमेरिका और इजरायल द्वारा पिछले शनिवार को शुरू किए गए संयुक्त सैन्य अभियान के जवाब में लिया गया है। गौरतलब है कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक समुद्री तेल परिवहन का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा वहन करता है। इसकी रणनीतिक अहमियत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि फारस की खाड़ी के तमाम बंदरगाहों, जिनमें दुबई का जेबेल अली भी शामिल है, के लिए यह एकमात्र निकास मार्ग है।

    वर्तमान स्थिति की गंभीरता को समुद्री ट्रैकिंग वेबसाइटों पर साफ देखा जा सकता है। कुवैत और दुबई के तटों के पास सैकड़ों टैंकर और कमर्शियल जहाज लंगर डाले खड़े हैं, जो इस नाकेबंदी के कारण आगे बढ़ने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं। इतिहास में यह पहली बार है जब हॉर्मुज को वाणिज्यिक जहाजों के लिए इस तरह पूरी तरह बंद किया गया है। यहाँ तक कि 1980 के दशक के भीषण ईरान-इराक युद्ध के दौरान भी इस मार्ग पर यातायात पूरी तरह ठप नहीं हुआ था। विशेषज्ञों का मानना है कि इस नाकेबंदी से भले ही एशिया-यूरोप के मुख्य मार्गों पर तुरंत असर न पड़े, लेकिन खाड़ी क्षेत्र से होने वाली तेल और गैस की आपूर्ति बाधित होने से दुनिया भर में ऊर्जा संकट और बढ़ सकता है। फिलहाल, भारत के लिए हॉर्मुज का यह ‘खुला दरवाजा’ एक बड़ी कूटनीतिक जीत और आर्थिक राहत का संकेत है।