Author: bharati

  • सोने की कीमतों में दिनभर रहा उतार-चढ़ाव, वैश्विक तनाव के बीच फिर बढ़े दाम; जानिए 24 से 10 कैरेट तक का ताजा भाव और बाजार का रुख

    सोने की कीमतों में दिनभर रहा उतार-चढ़ाव, वैश्विक तनाव के बीच फिर बढ़े दाम; जानिए 24 से 10 कैरेट तक का ताजा भाव और बाजार का रुख

    नई दिल्ली । वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और निवेशकों की बदलती रणनीतियों के बीच गुरुवार को घरेलू सर्राफा बाजार और वायदा कारोबार में सोने की कीमतों में फिर उतार-चढ़ाव देखने को मिला। कारोबारी सत्र की शुरुआत में कमजोरी के संकेत मिलने के बावजूद दोपहर तक सोने के भाव में सुधार दर्ज किया गया। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम, डॉलर की मजबूती, कच्चे तेल की कीमतों में बदलाव और सुरक्षित निवेश की बढ़ती मांग आने वाले दिनों में भी सोने के दामों को प्रभावित कर सकती है।

    मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज में 24 कैरेट सोने के वायदा भाव में दोपहर तक लगभग आधा प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई। प्रति 10 ग्राम सोने का भाव बढ़कर 1.44 लाख रुपये के पार पहुंच गया, जबकि पिछले कारोबारी सत्र में यह इससे नीचे बंद हुआ था। इसी दौरान भौतिक बाजार में भी सोने की कीमतों में सुधार देखने को मिला और विभिन्न कैरेट के सोने के दामों में बढ़ोतरी दर्ज की गई। शुद्धता के आधार पर 24, 22, 20, 18, 16, 14, 12 और 10 कैरेट सोने की कीमतों में अलग-अलग स्तर पर तेजी देखने को मिली।

    देश के प्रमुख शहरों में भी सोने के दामों में मामूली अंतर बना रहा। दिल्ली, लखनऊ, जयपुर और चंडीगढ़ जैसे शहरों में 24 कैरेट सोने का भाव 1.43 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम से ऊपर रहा, जबकि मुंबई, कोलकाता, पुणे, बेंगलुरु और हैदराबाद में कीमतें इससे कुछ कम दर्ज की गईं। चेन्नई में अन्य प्रमुख शहरों की तुलना में सोने का भाव अपेक्षाकृत अधिक रहा। 22 और 18 कैरेट सोने के दामों में भी इसी प्रकार का अंतर देखने को मिला, जो स्थानीय करों और बाजार परिस्थितियों के कारण सामान्य माना जाता है।

    बाजार जानकारों के अनुसार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती अनिश्चितता ने निवेशकों की रणनीति को प्रभावित किया है। पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने और वैश्विक आर्थिक संकेतों में बदलाव के कारण निवेशक लगातार सुरक्षित निवेश विकल्पों पर नजर बनाए हुए हैं। हालांकि डॉलर में मजबूती और अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल में वृद्धि जैसे कारकों ने सोने की तेजी को सीमित करने का भी काम किया है। यही कारण है कि दिनभर बाजार में कीमतों में उतार-चढ़ाव बना रहा।

    विश्लेषकों का कहना है कि कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से महंगाई संबंधी चिंताएं बढ़ी हैं। इसका असर वैश्विक वित्तीय बाजारों के साथ-साथ कीमती धातुओं पर भी देखने को मिल रहा है। कई निवेशकों ने अल्पकालिक लाभ के लिए मुनाफावसूली की रणनीति अपनाई, जिससे सोने की कीमतों पर दबाव बना। वहीं दूसरी ओर वैश्विक अस्थिरता के कारण सुरक्षित निवेश की मांग पूरी तरह समाप्त नहीं हुई, जिससे गिरावट के बाद कीमतों में फिर सुधार देखने को मिला।

    पिछले कारोबारी सत्र में घरेलू सर्राफा बाजार में सोने की कीमतों में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई थी और वायदा बाजार में भी तेज कमजोरी देखने को मिली थी। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी हाजिर और वायदा दोनों प्रकार के सोने के भाव दबाव में रहे थे। इसके बावजूद गुरुवार को बाजार खुलने के बाद निवेशकों की नई खरीदारी और बदलते वैश्विक संकेतों ने कीमतों को फिर सहारा दिया।

    विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक घटनाक्रम, अमेरिकी आर्थिक आंकड़े, डॉलर की चाल और केंद्रीय बैंकों की नीतियां सोने की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगी। ऐसे में निवेशकों को अल्पकालिक उतार-चढ़ाव के बजाय बाजार के व्यापक संकेतों पर नजर रखते हुए निवेश संबंधी निर्णय लेने की सलाह दी जा रही है।

  • सरकारी आर्थिक दावों पर उठाई थी आवाज, अब नहीं रहे अर्थशास्त्री गाओ शानवेन; निधन के बाद फिर तेज हुई पारदर्शिता पर बहस

    सरकारी आर्थिक दावों पर उठाई थी आवाज, अब नहीं रहे अर्थशास्त्री गाओ शानवेन; निधन के बाद फिर तेज हुई पारदर्शिता पर बहस

    नई दिल्ली । चीन के प्रमुख अर्थशास्त्रियों में गिने जाने वाले गाओ शानवेन का 55 वर्ष की आयु में निधन हो गया। चीन की सरकारी मीडिया के अनुसार उनका निधन बीमारी के कारण हुआ है। हालांकि उनकी मृत्यु के बाद सोशल मीडिया पर विभिन्न तरह की चर्चाएं भी सामने आई हैं। गाओ लंबे समय तक चीन की अर्थव्यवस्था, पूंजी बाजार और आर्थिक नीतियों पर अपनी स्पष्ट और स्वतंत्र राय रखने के लिए जाने जाते रहे। उन्हें देश के प्रभावशाली मैक्रो-इकोनॉमिस्ट्स में शामिल किया जाता था और उनके विचारों को वित्तीय जगत में गंभीरता से लिया जाता था।

    गाओ शानवेन सरकारी निवेश समूह एसडीआईसी सिक्योरिटीज के पूर्व मुख्य अर्थशास्त्री रहे थे। उन्होंने कई वर्षों तक चीन की आर्थिक नीतियों, विकास दर और वित्तीय बाजारों का विश्लेषण किया। उनकी पहचान ऐसे विशेषज्ञ के रूप में बनी, जो आर्थिक आंकड़ों और नीतिगत फैसलों पर खुलकर अपनी राय रखते थे। इसी स्पष्टवादिता के कारण वे घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार चर्चा में बने रहे।

    वर्ष 2024 के अंत में गाओ उस समय व्यापक सुर्खियों में आए, जब उन्होंने एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में चीन की आधिकारिक आर्थिक वृद्धि दर पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि वर्ष 2021 से 2023 के बीच चीन की वास्तविक आर्थिक वृद्धि सरकारी दावों से काफी कम रही। उन्होंने उपभोग, रोजगार और रियल एस्टेट क्षेत्र से जुड़े संकेतकों का हवाला देते हुए कहा था कि उपलब्ध आर्थिक आंकड़े आधिकारिक विकास दर से पूरी तरह मेल नहीं खाते। उनके इस बयान ने अंतरराष्ट्रीय आर्थिक जगत में भी व्यापक चर्चा को जन्म दिया।

    इन टिप्पणियों के बाद उनके खिलाफ प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई की खबरें सामने आईं। विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार सार्वजनिक मंचों पर उनकी गतिविधियां सीमित कर दी गईं। उनके कुछ लेख, वीडियो और सोशल मीडिया सामग्री भी हटाई गई। बाद में उन्हें अपने पद से हटाए जाने और निवेश सलाहकार लाइसेंस समाप्त होने की जानकारी भी सामने आई। इन घटनाओं ने चीन में आर्थिक विश्लेषण की स्वतंत्रता और आलोचनात्मक विचारों के लिए उपलब्ध स्थान को लेकर कई सवाल खड़े किए।

    करीबी सूत्रों के अनुसार गाओ शानवेन पिछले कुछ समय से कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे। बीमारी का पता चलने के बाद उन्होंने सार्वजनिक जीवन से दूरी बना ली थी। लंबे समय तक सार्वजनिक कार्यक्रमों से दूर रहने के बाद उन्होंने एक शैक्षणिक कार्यक्रम में वीडियो संदेश के माध्यम से संक्षिप्त उपस्थिति दर्ज कराई थी। इसके बाद उनकी सार्वजनिक गतिविधियां बेहद सीमित रहीं।

    गाओ शानवेन के निधन के बाद चीन के सोशल मीडिया मंचों पर बड़ी संख्या में लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। कई लोगों ने उन्हें बेबाक और स्वतंत्र सोच रखने वाला अर्थशास्त्री बताया। वहीं कुछ प्रतिक्रियाओं में आर्थिक आंकड़ों की पारदर्शिता, स्वतंत्र विश्लेषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता जैसे मुद्दों पर भी चर्चा देखने को मिली। हालांकि इन प्रतिक्रियाओं के बीच आधिकारिक स्तर पर केवल उनके निधन पर शोक व्यक्त किया गया।

    अर्थशास्त्र और वित्तीय विश्लेषण के क्षेत्र में गाओ शानवेन का योगदान लंबे समय तक याद किया जाएगा। उन्होंने आर्थिक आंकड़ों की व्याख्या और नीतिगत चर्चाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनका निधन ऐसे समय हुआ है जब वैश्विक अर्थव्यवस्था कई चुनौतियों का सामना कर रही है और आर्थिक पारदर्शिता तथा विश्वसनीय आंकड़ों की भूमिका पहले से अधिक महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

  • रेलवे में बदलती व्यवस्थाओं के खिलाफ कुलियों का बड़ा अभियान, निजीकरण पर उठे सवाल, संसद में मांगों के समर्थन में पहुंचेगा प्रतिनिधिमंडल

    रेलवे में बदलती व्यवस्थाओं के खिलाफ कुलियों का बड़ा अभियान, निजीकरण पर उठे सवाल, संसद में मांगों के समर्थन में पहुंचेगा प्रतिनिधिमंडल


    नई दिल्ली ।
    रेलवे में निजीकरण और बदलती परिचालन व्यवस्थाओं को लेकर राष्ट्रीय कुली मोर्चा ने अपनी चिंता सार्वजनिक रूप से व्यक्त की है। संगठन ने घोषणा की है कि संसद के आगामी मानसून सत्र के दौरान देशभर के कुली प्रतिनिधियों का एक प्रतिनिधिमंडल नई दिल्ली पहुंचकर केंद्र सरकार और विभिन्न सांसदों से मुलाकात करेगा। इस दौरान संगठन अपनी प्रमुख मांगों से संबंधित ज्ञापन सौंपेगा और कुलियों के रोजगार, सामाजिक सुरक्षा तथा रेलवे व्यवस्था में उनकी भूमिका को लेकर ठोस कदम उठाने की मांग करेगा।

    राष्ट्रीय कुली मोर्चा के अनुसार हाल ही में आयोजित वर्चुअल बैठक में यह निर्णय सर्वसम्मति से लिया गया। बैठक में विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया और रेलवे स्टेशनों पर बदलती व्यवस्थाओं के कारण कुलियों की आजीविका पर पड़ रहे प्रभाव को लेकर चिंता व्यक्त की। संगठन का कहना है कि रेलवे परिसरों में सामान ढुलाई से जुड़ी कई सेवाएं अब निजी एजेंसियों और नई व्यवस्थाओं के माध्यम से संचालित की जा रही हैं, जिससे पारंपरिक रूप से कार्यरत अधिकृत कुलियों के सामने रोजगार का संकट उत्पन्न हो रहा है।

    मोर्चा का कहना है कि रेलवे स्टेशनों पर बैटरी कार, ट्रॉली व्यवस्था और डिजिटल प्लेटफॉर्म आधारित सेवाओं के विस्तार से कुलियों के काम के अवसर लगातार प्रभावित हो रहे हैं। संगठन ने मांग की है कि ऐसी सेवाओं के संचालन में कुलियों की सहकारी समितियों को प्राथमिकता दी जाए, ताकि रोजगार के अवसर सुरक्षित रह सकें और पारंपरिक श्रमिकों की आय प्रभावित न हो। उनका तर्क है कि यदि इन व्यवस्थाओं का संचालन कुलियों के माध्यम से किया जाए तो आधुनिक सुविधाओं और रोजगार सुरक्षा के बीच संतुलन बनाया जा सकता है।

    संगठन ने यह भी मांग उठाई है कि रेलवे में कार्यरत अधिकृत कुलियों के लिए स्थायी सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था विकसित की जाए। इसके अंतर्गत आर्थिक सुरक्षा, कल्याणकारी योजनाओं का लाभ और भविष्य की रोजगार संबंधी स्पष्ट नीति तैयार करने की आवश्यकता बताई गई है। प्रतिनिधियों का कहना है कि वर्षों से रेलवे यात्रियों की सेवा करने वाले कुलियों के हितों की रक्षा के लिए दीर्घकालिक नीति बनाई जानी चाहिए।

    बैठक में यह मुद्दा भी उठाया गया कि कुलियों की जीवन परिस्थितियों और सरकारी नीतियों के प्रभाव का अध्ययन करने के लिए पूर्व में कराई गई जांच रिपोर्ट अब तक सार्वजनिक नहीं की गई है। संगठन ने मांग की है कि इस रिपोर्ट को संसद के मानसून सत्र के दौरान सदन के पटल पर रखा जाए, ताकि उसके निष्कर्षों के आधार पर आवश्यक नीतिगत निर्णय लिए जा सकें और कुलियों से जुड़े मुद्दों पर पारदर्शी चर्चा हो सके।

    राष्ट्रीय कुली मोर्चा ने अपने एक पदाधिकारी के खिलाफ कथित शिकायत के आधार पर हुई कार्रवाई पर भी आपत्ति जताई है। संगठन का कहना है कि इस विषय को भी रेल मंत्रालय के समक्ष उठाया जाएगा और निष्पक्ष जांच की मांग की जाएगी। मोर्चा का कहना है कि प्रतिनिधिमंडल सरकार के साथ संवाद के माध्यम से सभी मुद्दों का समाधान चाहता है।

    अब सभी की नजर संसद के मानसून सत्र पर रहेगी, जहां कुली प्रतिनिधिमंडल अपनी मांगों को सरकार और जनप्रतिनिधियों के समक्ष विस्तार से रखेगा। दूसरी ओर, इन मांगों पर सरकार की प्रतिक्रिया और संभावित नीतिगत निर्णयों का इंतजार किया जा रहा है।

  • बच्चों के स्वास्थ्य को प्राथमिकता, दिल्ली हाईकोर्ट ने स्कूलों के आसपास सिगरेट, गुटखा और पान मसाला बिक्री पर लगाई रोक

    बच्चों के स्वास्थ्य को प्राथमिकता, दिल्ली हाईकोर्ट ने स्कूलों के आसपास सिगरेट, गुटखा और पान मसाला बिक्री पर लगाई रोक


    नई दिल्ली ।
    राजधानी दिल्ली में स्कूली बच्चों के स्वास्थ्य और सुरक्षित वातावरण को ध्यान में रखते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने स्पष्ट किया है कि स्कूलों के आसपास सिगरेट, गुटखा, पान मसाला और अन्य किसी भी प्रकार के तंबाकू उत्पादों की बिक्री की अनुमति नहीं दी जाएगी। न्यायालय ने कहा कि बच्चों की आसान पहुंच से तंबाकू उत्पादों को दूर रखना सार्वजनिक स्वास्थ्य की दृष्टि से आवश्यक है और इस दिशा में सभी संबंधित एजेंसियों को प्रभावी कदम उठाने होंगे।

    यह आदेश एक वेंडर द्वारा दायर याचिका की सुनवाई के दौरान दिया गया। याचिकाकर्ता ने दावा किया था कि वैध वेंडिंग प्रमाणपत्र होने के बावजूद उसे बार-बार कारोबार करने से रोका जा रहा है। मामले की सुनवाई के दौरान नगर निगम ने अदालत को बताया कि संबंधित वेंडर स्कूल के निकट तंबाकू उत्पादों की बिक्री कर रहा था, जो बच्चों के हितों के विपरीत है। साथ ही निगम ने यह भी कहा कि वेंडिंग स्थल पर स्वच्छता संबंधी नियमों का भी पूरी तरह पालन नहीं किया जा रहा था।

    दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी भी स्कूल के आसपास तंबाकू, पान मसाला, गुटखा और सिगरेट जैसे उत्पादों की बिक्री स्वीकार नहीं की जा सकती। अदालत ने कहा कि स्कूल ऐसे स्थान हैं जहां बड़ी संख्या में बच्चे प्रतिदिन आते-जाते हैं और उनके आसपास इस प्रकार के उत्पादों की उपलब्धता उनके स्वास्थ्य और भविष्य के लिए गंभीर चिंता का विषय है। इसलिए ऐसे मामलों में बच्चों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी।

    अदालत ने नगर निगम को निर्देश दिया कि संबंधित वेंडर को निर्धारित नियमों के अनुसार तीन दिन के भीतर वैकल्पिक वेंडिंग स्थल उपलब्ध कराया जाए। साथ ही यह भी कहा गया कि जब तक नया स्थान उपलब्ध नहीं कराया जाता, तब तक वेंडर को न्यायालय द्वारा तय की गई शर्तों का पालन करते हुए अपना कारोबार करने दिया जा सकता है। हालांकि यह स्पष्ट कर दिया गया कि किसी भी स्थिति में स्कूलों के आसपास तंबाकू उत्पादों की बिक्री नहीं होगी।

    हाईकोर्ट ने अपने पूर्व के निर्देशों का भी उल्लेख करते हुए कहा कि स्कूलों के प्रवेश और निकास द्वार के आसपास अवरोध पैदा करने वाली गतिविधियों से बचना आवश्यक है। अदालत पहले भी स्पष्ट कर चुकी है कि स्कूल परिसरों के आसपास तंबाकू उत्पादों की बिक्री पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी। इसके साथ ही वेंडरों को केवल निर्धारित स्थान पर ही कारोबार करने, अतिरिक्त सार्वजनिक स्थान पर कब्जा न करने और फुटपाथों पर अतिक्रमण से बचने के निर्देश दिए गए हैं।

    न्यायालय ने यह भी दोहराया कि वेंडिंग स्थलों पर स्वच्छता बनाए रखना सभी विक्रेताओं की जिम्मेदारी है। डस्टबिन की व्यवस्था, साफ-सफाई और सार्वजनिक स्थानों का उचित उपयोग सुनिश्चित करना आवश्यक होगा ताकि स्कूलों के आसपास का वातावरण सुरक्षित और स्वच्छ बना रहे। यदि नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई करने का अधिकार रहेगा।

    यह फैसला बच्चों को तंबाकू उत्पादों की आसान उपलब्धता से दूर रखने और स्कूलों के आसपास स्वस्थ वातावरण सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। साथ ही अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि वैध वेंडरों के आजीविका के अधिकार और बच्चों के स्वास्थ्य के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए वैकल्पिक वेंडिंग स्थल उपलब्ध कराना भी प्रशासन की जिम्मेदारी है।

  • OTT से हटने के बाद गुरुद्वारों तक पहुंची दिलजीत दोसांझ की ‘सतलुज’, पांच राज्यों में कम्युनिटी स्क्रीनिंग की तैयारी, जसवंत सिंह खालरा की कहानी फिर बनेगी चर्चा का केंद्र

    OTT से हटने के बाद गुरुद्वारों तक पहुंची दिलजीत दोसांझ की ‘सतलुज’, पांच राज्यों में कम्युनिटी स्क्रीनिंग की तैयारी, जसवंत सिंह खालरा की कहानी फिर बनेगी चर्चा का केंद्र

    नई दिल्ली । दिलजीत दोसांझ अभिनीत फिल्म ‘सतलुज’ एक बार फिर चर्चा में है। डिजिटल प्लेटफॉर्म से हटाए जाने के बाद अब इस फिल्म को देश के विभिन्न गुरुद्वारों में सामुदायिक स्क्रीनिंग के माध्यम से दर्शकों तक पहुंचाने की तैयारी शुरू हो गई है। सिख धार्मिक संस्थाओं की इस पहल का उद्देश्य मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालरा के जीवन और उनके संघर्ष को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाना बताया जा रहा है। इसके तहत पंजाब के साथ हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली और जम्मू में भी विशेष स्क्रीनिंग आयोजित करने की योजना बनाई गई है।

    फिल्म के प्रदर्शन को लेकर कई गुरुद्वारा प्रबंधन समितियां एकजुट होकर कार्यक्रम तैयार कर रही हैं। जम्मू में 10 से 13 जुलाई के बीच अलग-अलग गुरुद्वारों में स्क्रीनिंग का कार्यक्रम प्रस्तावित है, जबकि जयपुर में भी विशेष आयोजन की तैयारी की गई है। दिल्ली में भी सिख समुदाय से जुड़े संगठन इस पहल का समर्थन कर रहे हैं और फिल्म को फिर से सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराने की मांग उठा रहे हैं। उनका कहना है कि यदि फिल्म डिजिटल माध्यम पर उपलब्ध नहीं है तो सामुदायिक स्तर पर लोगों को इसे देखने का अवसर मिलना चाहिए।

    सामुदायिक संगठनों का मानना है कि जसवंत सिंह खालरा के जीवन पर आधारित यह कहानी केवल एक फिल्म नहीं बल्कि इतिहास और मानवाधिकार से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों को सामने लाने का माध्यम है। उनका कहना है कि किसी भी कारण से यदि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर इसकी पहुंच सीमित हो जाती है तो समाज के स्तर पर ऐसे प्रयास किए जाने चाहिए, ताकि यह कहानी लोगों तक पहुंचती रहे। इसी सोच के साथ विभिन्न धार्मिक और सामाजिक संस्थाएं स्क्रीनिंग की तैयारियों में जुटी हैं।

    फिल्म का सफर भी काफी लंबा और चुनौतीपूर्ण रहा है। निर्माण पूरा होने के बाद इसे प्रमाणन प्रक्रिया के दौरान कई स्तरों पर बदलाव और कटौती के सुझावों का सामना करना पड़ा। शुरुआती चरण में फिल्म का शीर्षक बदला गया और कई संशोधनों की बात सामने आई। बाद में समीक्षा प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में अतिरिक्त बदलाव सुझाए गए, जिनमें प्रमुख पात्र से जुड़े परिवर्तन भी शामिल थे। फिल्म निर्माताओं ने इन संशोधनों को स्वीकार नहीं किया, जिसके चलते इसकी रिलीज लंबे समय तक टलती रही।

    इसके बाद फिल्म का संस्करण डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराया गया, लेकिन रिलीज के कुछ ही समय बाद इसे हटा दिया गया। इस फैसले के बाद कई सामाजिक, धार्मिक और राजनीतिक संगठनों ने अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की। फिल्म को लेकर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, ऐतिहासिक विषयों की प्रस्तुति और सार्वजनिक पहुंच जैसे मुद्दों पर भी चर्चा तेज हो गई। इस बीच अब गुरुद्वारों में होने वाली सामुदायिक स्क्रीनिंग ने फिल्म को एक नया मंच प्रदान कर दिया है।

    हनी त्रेहान के निर्देशन में बनी इस फिल्म में दिलजीत दोसांझ के साथ अर्जुन रामपाल, सुविंदर विक्की और गीतिका विद्या ओल्यान प्रमुख भूमिकाओं में नजर आए हैं। सामुदायिक स्क्रीनिंग की इस पहल से फिल्म एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गई है और आने वाले दिनों में इसके जरिए बड़ी संख्या में दर्शकों तक इसकी कहानी पहुंचने की संभावना जताई जा रही है।

  • Lock Upp 2 में आकांक्षा चौधरी और श्रेया कालरा के बीच बढ़ा विवाद, तीखी बहस और आपत्तिजनक टिप्पणियों के बाद सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

    Lock Upp 2 में आकांक्षा चौधरी और श्रेया कालरा के बीच बढ़ा विवाद, तीखी बहस और आपत्तिजनक टिप्पणियों के बाद सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

    नई दिल्ली । रियलिटी शो Lock Upp 2 में प्रतियोगियों के बीच बढ़ते विवादों का सिलसिला लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है। हालिया एपिसोड में आकांक्षा चौधरी और श्रेया कालरा के बीच हुआ विवाद दर्शकों का ध्यान अपनी ओर खींचने में सफल रहा। एक सामान्य बहस से शुरू हुआ मामला देखते ही देखते तीखी नोकझोंक में बदल गया, जिसके दौरान दोनों के बीच तनावपूर्ण माहौल देखने को मिला। एपिसोड के प्रसारण के बाद इस घटना पर सोशल मीडिया पर भी व्यापक प्रतिक्रिया सामने आई।

    शो में यह विवाद खाने के प्रबंधन से जुड़े एक टास्क के दौरान शुरू हुआ। श्रेया कालरा उस समय घर के सदस्यों के लिए भोजन की व्यवस्था की जिम्मेदारी निभा रही थीं। बातचीत के दौरान उन्होंने आकांक्षा से पुराने व्यवहार को लेकर माफी मांगने की बात कही। हालांकि दोनों के बीच सहमति नहीं बन सकी और माहौल धीरे-धीरे तनावपूर्ण हो गया। बाद में श्रेया ने आकांक्षा के लिए भोजन मंगवाया, लेकिन आकांक्षा ने उसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया।

    इसी दौरान दोनों के बीच हुई बहस में हल्की धक्का-मुक्की की स्थिति भी बनी। शो में दिखाए गए घटनाक्रम के अनुसार, इस दौरान श्रेया का हाथ आकांक्षा के माथे से लग गया। श्रेया ने इसे अनजाने में हुई घटना बताते हुए माफी भी मांगी, लेकिन इसके बावजूद विवाद शांत नहीं हुआ। इसके बाद आकांक्षा ने गुस्से में कई तीखी बातें कहीं, जिनकी चर्चा सोशल मीडिया पर भी होने लगी।

    एपिसोड में आगे दोनों के बीच फिर से बहस हुई, जिसमें व्यक्तिगत टिप्पणियां भी सुनने को मिलीं। प्रसारित दृश्य में आकांक्षा ने श्रेया की निजी जिंदगी को लेकर भी टिप्पणी की, जिसे लेकर दर्शकों के बीच अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आईं। रिपोर्ट्स के अनुसार विवाद के दौरान दोनों के बीच आक्रामक व्यवहार भी देखने को मिला और घर के सामान को लेकर भी तनाव की स्थिति बनी। हालांकि शो के प्रसारित एपिसोड में जो घटनाएं दिखाई गईं, उन्हीं के आधार पर दर्शकों ने अपनी राय व्यक्त की।

    घटना के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बड़ी संख्या में दर्शकों ने अपनी प्रतिक्रिया साझा की। कई यूजर्स ने आकांक्षा चौधरी के व्यवहार की आलोचना करते हुए कहा कि विवाद को अनावश्यक रूप से बढ़ाया गया। कुछ लोगों का मानना था कि श्रेया से हुई टक्कर जानबूझकर नहीं थी, जबकि कुछ दर्शकों ने पूरे घटनाक्रम को रियलिटी शो के दबाव और प्रतिस्पर्धा का परिणाम बताया। वहीं कुछ यूजर्स ने दोनों पक्षों की जिम्मेदारी पर भी सवाल उठाए।

    रियलिटी शो में प्रतिस्पर्धा के दौरान ऐसे विवाद अक्सर चर्चा का विषय बनते हैं और दर्शकों की राय भी अलग-अलग होती है। Lock Upp 2 का यह एपिसोड भी इसी कारण सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ। फिलहाल शो में आगे दोनों प्रतियोगियों के बीच संबंध किस दिशा में बढ़ते हैं और अन्य प्रतिभागी इस विवाद पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं, इस पर दर्शकों की नजर बनी हुई है। आने वाले एपिसोड में इस पूरे घटनाक्रम का असर घर के माहौल और प्रतियोगिता की रणनीतियों पर भी देखने को मिल सकता है।

  • घर में फंदे पर मिला 56 वर्षीय हलवाई का शव, आत्महत्या के कारणों की जांच में जुटी पुलिस

    घर में फंदे पर मिला 56 वर्षीय हलवाई का शव, आत्महत्या के कारणों की जांच में जुटी पुलिस


    देवास । देवास के त्रिलोक नगर क्षेत्र में गुरुवार को एक 56 वर्षीय हलवाई का शव उसके घर में फंदे से लटका मिला। घटना की सूचना मिलते ही इलाके में सनसनी फैल गई। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेज दिया और मामले की जांच शुरू कर दी है।

    मृतक की पहचान अनिल ठाकुर पिता रामाश्रय ठाकुर के रूप में हुई है। वह पेशे से हलवाई थे और त्रिलोक नगर स्थित अपने घर में अकेले रहते थे। प्रारंभिक जांच में आत्महत्या के कारणों का खुलासा नहीं हो सका है।

    जानकारी के अनुसार, अनिल ठाकुर की पत्नी और बच्चे पिछले करीब एक वर्ष से कालानी बाग क्षेत्र में अलग रह रहे थे। घटना के समय घर में कोई अन्य व्यक्ति मौजूद नहीं था। जब मकान मालिक को काफी देर तक कोई हलचल नहीं दिखाई दी तो उन्होंने घर की स्थिति देखी। अंदर अनिल ठाकुर का शव फंदे से लटका मिला। इसके बाद उन्होंने तुरंत परिजनों को सूचना दी।

    सूचना मिलते ही परिजन मौके पर पहुंचे। पुलिस भी घटनास्थल पर पहुंची और आवश्यक कार्रवाई करते हुए शव को पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया।

    पुलिस ने इस मामले में मर्ग कायम कर लिया है। अधिकारियों का कहना है कि आत्महत्या के पीछे की वजह जानने के लिए परिजनों से पूछताछ की जा रही है। साथ ही अन्य सभी पहलुओं की भी जांच की जा रही है। फिलहाल किसी तरह का सुसाइड नोट मिलने की जानकारी सामने नहीं आई है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

  • टीवी होस्ट मनीष पॉल की मां उर्मिल पॉल का निधन, भावुक श्रद्धांजलि से छलका दर्द, फिल्म और टीवी जगत ने जताई संवेदना

    टीवी होस्ट मनीष पॉल की मां उर्मिल पॉल का निधन, भावुक श्रद्धांजलि से छलका दर्द, फिल्म और टीवी जगत ने जताई संवेदना

    नई दिल्ली । अभिनेता और लोकप्रिय टीवी होस्ट मनीष पॉल की मां उर्मिल पॉल का 77 वर्ष की आयु में निधन हो गया। इस दुखद समाचार की जानकारी स्वयं मनीष पॉल ने सोशल मीडिया पर एक भावुक संदेश साझा कर दी। उन्होंने अपनी मां को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके साथ बिताए जीवन के अनमोल पलों को याद किया और उनके जाने को अपनी जिंदगी की सबसे बड़ी व्यक्तिगत क्षति बताया। इस खबर के सामने आने के बाद फिल्म और टेलीविजन जगत से जुड़े कई कलाकारों ने उनके प्रति संवेदना व्यक्त की।

    मनीष पॉल ने अपने संदेश में लिखा कि उनकी मां केवल परिवार की सदस्य नहीं थीं, बल्कि उनकी सबसे बड़ी ताकत, प्रेरणा और जीवन का सबसे सुरक्षित सहारा थीं। उन्होंने कहा कि मां के जाने के बाद जीवन में ऐसा खालीपन आ गया है, जिसे शब्दों में व्यक्त करना संभव नहीं है। उन्होंने यह भी लिखा कि अब उनके पास मां की सीख, स्नेह, साहस और संस्कार ही ऐसी अमूल्य विरासत हैं, जो हमेशा उनके जीवन का मार्गदर्शन करती रहेंगी।

    अपने भावुक संदेश में मनीष ने मां के प्रति आभार भी व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि जिस निस्वार्थ प्रेम और अपनापन उन्हें अपनी मां से मिला, उसके लिए वह जीवनभर कृतज्ञ रहेंगे। उन्होंने उनकी आत्मा की शांति की कामना करते हुए विश्वास जताया कि एक दिन फिर उनसे मुलाकात होगी। इस भावनात्मक संदेश ने उनके प्रशंसकों और शुभचिंतकों को भी भावुक कर दिया।

    मां के निधन की खबर सामने आने के बाद मनोरंजन जगत की कई जानी-मानी हस्तियों ने सोशल मीडिया के माध्यम से मनीष पॉल और उनके परिवार के प्रति संवेदनाएं प्रकट कीं। कई कलाकारों ने उन्हें इस कठिन समय में मजबूत बने रहने की शुभकामनाएं दीं और दिवंगत आत्मा को श्रद्धांजलि अर्पित की। साथ ही अनेक प्रशंसकों ने भी शोक संदेश साझा करते हुए परिवार के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं।

    मनीष पॉल लंबे समय से भारतीय टेलीविजन और मनोरंजन उद्योग का चर्चित चेहरा रहे हैं। अपने सहज अंदाज, हास्य शैली और प्रभावशाली मंच संचालन के कारण उन्होंने दर्शकों के बीच विशेष पहचान बनाई है। ऐसे समय में उनके निजी जीवन में आई इस अपूरणीय क्षति पर उनके प्रशंसकों ने भी गहरा दुख व्यक्त किया है।

    परिवार के लिए किसी प्रिय सदस्य का निधन अत्यंत कठिन और भावनात्मक क्षण होता है। ऐसे समय में मिलने वाला सामाजिक सहयोग और संवेदनाएं परिवार को मानसिक संबल प्रदान करती हैं। मनीष पॉल के संदेश में भी मां के प्रति सम्मान, प्रेम और कृतज्ञता स्पष्ट रूप से दिखाई देती है, जिसने अनेक लोगों को भावुक कर दिया।

    उर्मिल पॉल के निधन के बाद उनके परिवार में शोक का माहौल है। अंतिम संस्कार और अन्य पारिवारिक कार्यक्रमों से संबंधित विस्तृत जानकारी सार्वजनिक रूप से साझा नहीं की गई है। फिलहाल मनोरंजन जगत, मित्रों और प्रशंसकों की ओर से लगातार शोक संदेश सामने आ रहे हैं। सभी ने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करते हुए मनीष पॉल और उनके परिवार को इस कठिन समय में धैर्य और शक्ति मिलने की कामना की है।

  • तिरुपति बालाजी की तर्ज पर होगा महोत्सव, वेंकटेश मंदिर में सात दिन तक होंगे धार्मिक आयोजन

    तिरुपति बालाजी की तर्ज पर होगा महोत्सव, वेंकटेश मंदिर में सात दिन तक होंगे धार्मिक आयोजन


    इंदौर । इंदौर के छत्रीबाग स्थित श्रीलक्ष्मी वेंकटेश देवस्थान में 10 से 16 जुलाई तक श्रीब्रह्मोत्सव एवं रथयात्रा महोत्सव का भव्य आयोजन किया जाएगा। सात दिनों तक चलने वाले इस धार्मिक महोत्सव में भगवान वेंकटेश के विशेष पूजन, महाभिषेक, उत्सव और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन होगा। महोत्सव का मुख्य आकर्षण 16 जुलाई को निकलने वाली भगवान वेंकटेश की गौरवशाली रजत रथयात्रा रहेगी, जो नगर भ्रमण करते हुए श्रद्धालुओं को दर्शन देगी।

    इस वर्ष महोत्सव का आयोजन तिरुपति बालाजी मंदिर की परंपरा और वैभव की तर्ज पर किया जा रहा है। मंदिर परिसर को आकर्षक रोशनी से सजाया जाएगा, जहां शंख, चक्र और तिलक की भव्य सजावट श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बनेगी। आयोजन की शुरुआत 9 जुलाई की शाम विश्वकसेन पूजन और सुंदरकांड पाठ से होगी। दोपहर में श्री वेंकटेश महिला मंडल की ओर से सुंदरकांड का आयोजन भी किया जाएगा।

    10 जुलाई को ध्वजारोहण के साथ श्रीब्रह्मोत्सव का विधिवत शुभारंभ होगा। यह अनुष्ठान अनंतश्रीविभूषित श्रीमद् जगद्गुरु रामानुजाचार्य श्री नागोरिया पीठाधीश्वर स्वामी विष्णुप्रपन्नाचार्य महाराज के सान्निध्य में संपन्न होगा। इसके बाद प्रतिदिन अलग-अलग धार्मिक आयोजन किए जाएंगे।

    11 जुलाई को भगवती श्रीमहालक्ष्मी का महाभिषेक होगा और 500 दंपति सामूहिक कुमकुम अर्चना में भाग लेंगे। 12 जुलाई को भगवान श्री वेंकटेश का 108 रजत कलशों से महाभिषेक किया जाएगा तथा रात्रि में छत्रीबाग क्षेत्र में छोटी रथयात्रा निकाली जाएगी।

    13 जुलाई को वसंतोत्सव और तिरुपावड़ा उत्सव का आयोजन होगा। 14 जुलाई को भगवान वेंकटेश का कल्याण उत्सव और विवाहोत्सव मनाया जाएगा। इस अवसर पर बारात निकलेगी तथा विवाह की सभी पारंपरिक रस्में निभाई जाएंगी। रात्रि में परकाल स्वामी की लीला पर आधारित नाटिका का मंचन भी होगा।

    15 जुलाई को भगवान के पुष्प बंगला दर्शन होंगे। वृंदावन और इंदौर के कलाकार सुगंधित फूलों और विशेष सजावटी सामग्री से मनोहारी पुष्प बंगला तैयार करेंगे, जिसमें भगवान वेंकटेश के विशेष दर्शन श्रद्धालुओं को प्राप्त होंगे।

    महोत्सव का समापन 16 जुलाई को भव्य रथयात्रा के साथ होगा। भगवान वेंकटेश वर्ष में एक बार निकलने वाले रजत रथ पर विराजमान होकर नगर भ्रमण करेंगे। रथयात्रा में दक्षिण भारतीय संस्कृति की झलक, पारंपरिक वाद्य यंत्र, धार्मिक झांकियां और भक्ति संगीत श्रद्धालुओं को आकर्षित करेंगे।

    पूरे महोत्सव के दौरान भगवान का प्रतिदिन विशेष श्रृंगार किया जाएगा। भजन संध्या, धार्मिक प्रवचन और संतों का सान्निध्य भी श्रद्धालुओं को मिलेगा। आयोजन में स्वामी विष्णुप्रपन्नाचार्य महाराज, स्वामी विद्याभास्कर महाराज, स्वामी रंगनाथाचार्य महाराज, स्वामी अनंताचार्यजी महाराज, स्वामी वेंकटेशप्रपन्नाचार्य महाराज, स्वामी दामोदराचार्यजी महाराज, संत इन्द्रेश महाराज, युवराज स्वामी माधवप्रपन्नाचार्य महाराज, गोवत्स राधाकृष्ण महाराज और पुण्डरीकाक्षाचार्य महाराज सहित अनेक संत शामिल होंगे।

  • तेज रफ्तार बाइक की टक्कर से बच्चा बेहोश, CCTV फुटेज से आरोपियों की पहचान में जुटी पुलिस

    तेज रफ्तार बाइक की टक्कर से बच्चा बेहोश, CCTV फुटेज से आरोपियों की पहचान में जुटी पुलिस


    इंदौर  इंदौर के एरोड्रम थाना क्षेत्र में तेज रफ्तार बाइक की टक्कर से 13 वर्षीय एक बच्चा गंभीर रूप से घायल हो गया। हादसा बुधवार दोपहर नगीन नगर इलाके में हुआ, जब बच्चा अपनी साइकिल से सड़क पार कर रहा था। टक्कर इतनी तेज थी कि वह सड़क पर गिरकर बेहोश हो गया। स्थानीय लोगों की मदद से उसे तुरंत निजी अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उसका इलाज जारी है।

    पुलिस के अनुसार घायल बच्चे की पहचान हर्ष नामदेव के रूप में हुई है। घटना बुधवार दोपहर करीब 12:30 बजे की है। हादसे के बाद बाइक सवार दोनों युवक मौके से फरार नहीं हुए, बल्कि वहीं रुक गए। आसपास मौजूद लोगों ने तत्काल घायल बच्चे को अस्पताल पहुंचाने में मदद की और पुलिस को सूचना दी।

    एरोड्रम थाना प्रभारी वीरेंद्र सिंह कुशवाह ने बताया कि पुलिस ने घायल बच्चे और उसके पिता कुंदन नामदेव के बयान दर्ज कर लिए हैं। मामले की जांच के दौरान घटनास्थल के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी सामने आई है, जिसमें हादसा स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है।

    पुलिस का कहना है कि सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्यों के आधार पर बाइक चला रहे दोनों युवकों की भूमिका की जांच की जा रही है। प्राथमिक जांच पूरी होने के बाद उनके खिलाफ संबंधित धाराओं में एफआईआर दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    पुलिस अधिकारियों के मुताबिक सड़क हादसे के कारणों की भी पड़ताल की जा रही है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि दुर्घटना तेज रफ्तार, लापरवाही या यातायात नियमों के उल्लंघन की वजह से हुई। जांच पूरी होने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।