Author: bharati

  • आज का राशिफल 22 मई 2026: तुला राशि वालों को मिल सकता है आर्थिक लाभ

    आज का राशिफल 22 मई 2026: तुला राशि वालों को मिल सकता है आर्थिक लाभ


    नई दिल्ली। 22 मई 2026 का राशिफल कई राशियों के लिए शुभ संकेत लेकर आया है। खासतौर पर तुला राशि वालों को नौकरी और आय में बढ़ोतरी के संकेत मिल रहे हैं, जबकि अन्य राशियों को भी करियर, स्वास्थ्य और पारिवारिक जीवन में नए अवसर मिल सकते हैं।

    मेष राशि
    मेष राशि वालों के लिए दिन ऊर्जा से भरा रहेगा। कार्यक्षेत्र में नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं। परिवार का सहयोग मिलेगा और रुके काम पूरे होने के संकेत हैं।

    वृषभ राशि
    वृषभ राशि वालों को आर्थिक मामलों में सतर्क रहने की जरूरत है। निवेश सोच-समझकर करें। किसी पुराने मित्र से मुलाकात मन प्रसन्न करेगी।

    मिथुन राशि
    मिथुन राशि वालों के लिए दिन सकारात्मक रहेगा। नौकरी में प्रशंसा मिल सकती है। छात्रों के लिए समय अनुकूल रहेगा।

    कर्क राशि
    कर्क राशि वालों को भावनात्मक फैसले लेने से बचना होगा। परिवार के साथ समय बिताने से मानसिक शांति मिलेगी।

    सिंह राशि
    सिंह राशि वालों के लिए करियर में उन्नति के संकेत हैं। किसी महत्वपूर्ण व्यक्ति से मुलाकात भविष्य में लाभ दिला सकती है।

     कन्या राशि
    कन्या राशि वालों को कार्यक्षेत्र में मेहनत का पूरा फल मिलेगा। स्वास्थ्य का ध्यान रखें और खानपान संतुलित रखें।

     तुला राशि
    तुला राशि वालों के लिए कल का दिन बेहद शुभ रहने वाला है। नौकरीपेशा लोगों को सैलरी बढ़ने या प्रमोशन की खुशखबरी मिल सकती है। वरिष्ठ अधिकारियों का सहयोग मिलेगा और आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।

    वृश्चिक राशि
    वृश्चिक राशि वालों को जल्दबाजी में निर्णय लेने से बचना चाहिए। यात्रा के योग बन रहे हैं और परिवार में शुभ कार्य की चर्चा हो सकती है।

    धनु राशि
    धनु राशि वालों के लिए नए अवसरों का दिन रहेगा। व्यापार में लाभ के संकेत हैं और आत्मविश्वास बढ़ेगा।

     मकर राशि
    मकर राशि वालों को कार्यक्षेत्र में संयम बनाए रखना होगा। किसी पुराने विवाद का समाधान निकल सकता है।

     कुंभ राशि
    कुंभ राशि वालों को पारिवारिक मामलों में समझदारी से काम लेना होगा। नौकरी में नई जिम्मेदारी मिल सकती है।
     

    मीन राशि
    मीन राशि वालों के लिए दिन लाभकारी रहेगा। रुका हुआ धन वापस मिलने के योग हैं और मानसिक तनाव कम होगा।
  • POK में मारा गया पुलवामा हमले का मास्टरमाइंड, हमजा बुरहान की गोली मारकर हत्या

    POK में मारा गया पुलवामा हमले का मास्टरमाइंड, हमजा बुरहान की गोली मारकर हत्या



    नई दिल्ली। 2019 के चर्चित पुलवामा आतंकी हमला के मुख्य साजिशकर्ताओं में शामिल आतंकी हमजा बुरहान की पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (POK) में हत्या कर दी गई है। ‘डॉक्टर’ के नाम से पहचाने जाने वाले हमजा को मुजफ्फराबाद के पास अज्ञात बंदूकधारियों ने गोलियों से भून डाला। हमले में उसकी मौके पर ही मौत हो गई।

    रिपोर्ट्स के मुताबिक, हमजा बुरहान का असली नाम अर्जुमंद गुलजार डार था और वह जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले के रत्नीपोरा का रहने वाला था। बताया जा रहा है कि वह पिछले कई वर्षों से POK में एक स्कूल टीचर की फर्जी पहचान के साथ रह रहा था। इसी आड़ में वह आतंकी नेटवर्क, ट्रेनिंग कैंप और घुसपैठ गतिविधियों को संचालित कर रहा था।

    सूत्रों के अनुसार, मुजफ्फराबाद के घने जंगल वाले इलाके में अज्ञात हमलावरों ने उसे निशाना बनाया। हमलावरों ने उस पर अंधाधुंध फायरिंग की, जिससे कई गोलियां लगने के कारण उसकी मौके पर ही मौत हो गई। फिलहाल हमलावरों की पहचान नहीं हो सकी है।

    हमजा आतंकी संगठन अल-बद्र का प्रमुख कमांडर था और वह जैश-ए-मोहम्मद जैसे आतंकी नेटवर्क के साथ भी सक्रिय रूप से जुड़ा हुआ था। भारत सरकार ने वर्ष 2022 में उसे UAPA के तहत आधिकारिक तौर पर आतंकवादी घोषित किया था। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की पुलवामा हमले से जुड़ी चार्जशीट में भी उसका नाम प्रमुख साजिशकर्ताओं में शामिल था।

    बताया जाता है कि हमजा पाकिस्तान जाकर आतंकी संगठन अल-बद्र में शामिल हुआ था और बाद में उसका कमांडर बन गया। वह पाकिस्तान से ही जम्मू-कश्मीर में आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने, युवाओं को संगठन में भर्ती करने और फंडिंग जुटाने का काम करता था।

    गृह मंत्रालय के अनुसार, हमजा युवाओं को आतंकवादी गतिविधियों के लिए उकसाने और आतंकी संगठनों के लिए आर्थिक मदद जुटाने में भी सक्रिय था। पुलवामा हमले के अलावा उसे कई अन्य आतंकी घटनाओं का भी मास्टरमाइंड माना जाता था।

    14 फरवरी 2019 को हुए पुलवामा हमले में सीआरपीएफ के 40 जवान शहीद हो गए थे। उस दिन जवानों का काफिला जम्मू से श्रीनगर जा रहा था, तभी पुलवामा के लेथपोरा इलाके में विस्फोटकों से भरी एक कार जवानों की बस से टकरा गई थी। धमाका इतना भीषण था कि बस के परखच्चे उड़ गए थे। इस आत्मघाती हमले को स्थानीय आतंकी आदिल अहमद डार ने अंजाम दिया था, जबकि इसकी जिम्मेदारी जैश-ए-मोहम्मद ने ली थी।

    एनआईए की विस्तृत जांच में मसूद अजहर, अब्दुल रऊफ असगर, उमर फारूक और हमजा बुरहान समेत कई आतंकियों को इस हमले की साजिश में शामिल पाया गया था। अब हमजा की मौत को आतंकी नेटवर्क के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।

    हालांकि, उसकी हत्या किसने और किन कारणों से की, इसे लेकर अभी तक कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। सुरक्षा एजेंसियां पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

  • ‘कुर्बानी पर रोक बर्दाश्त नहीं’: हुमायूं कबीर के बयान से गरमाई बंगाल की राजनीति..

    ‘कुर्बानी पर रोक बर्दाश्त नहीं’: हुमायूं कबीर के बयान से गरमाई बंगाल की राजनीति..

    नई दिल्ली । बकरीद से पहले पश्चिम बंगाल में कुर्बानी को लेकर राजनीतिक माहौल अचानक गरमा गया है। राज्य सरकार की ओर से पशु वध को लेकर जारी किए गए नए निर्देशों के बाद अब इस मुद्दे ने सियासी रंग पकड़ लिया है। आम जनता उन्नयन पार्टी के प्रमुख और विधायक हुमायूं कबीर के तीखे बयान ने राज्य की राजनीति में हलचल तेज कर दी है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि धार्मिक परंपराओं में हस्तक्षेप स्वीकार नहीं किया जाएगा और कुर्बानी की परंपरा पहले की तरह जारी रहेगी।

    दरअसल राज्य सरकार ने हाल ही में पशु वध नियंत्रण कानून के तहत एक सार्वजनिक नोटिस जारी किया है। इसमें बिना फिटनेस प्रमाण पत्र के गाय और भैंस के वध पर सख्त रोक लगाने की बात कही गई है। सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया कि किसी भी बैल, बछड़े, गाय या भैंस का वध निर्धारित नियमों और प्रमाण पत्र के बिना नहीं किया जा सकेगा। बकरीद से ठीक पहले जारी इस निर्देश के बाद राजनीतिक बहस तेज हो गई है।

    इसी मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए हुमायूं कबीर ने सरकार पर धार्मिक मामलों में दखल देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कुर्बानी की परंपरा सदियों पुरानी है और इसे कोई रोक नहीं सकता। उन्होंने दावा किया कि मुस्लिम समुदाय अपने धार्मिक अधिकारों के साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करेगा। उनके बयान के बाद राज्य की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। कबीर ने कहा कि सरकार प्रशासन चलाने तक सीमित रहे और धार्मिक परंपराओं में हस्तक्षेप करने से बचे।

    हुमायूं कबीर ने अपने बयान में यह भी कहा कि कुर्बानी केवल एक धार्मिक प्रक्रिया नहीं बल्कि आस्था और परंपरा का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि समाज में पहले से चली आ रही धार्मिक परंपराओं को राजनीतिक मुद्दा बनाना ठीक नहीं है। उनके अनुसार किसी भी समुदाय की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाले कदम सामाजिक तनाव को बढ़ा सकते हैं। उन्होंने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि ऐसे संवेदनशील मामलों में सावधानी बरतनी चाहिए।

    इस विवाद के बीच राज्य की राजनीति में माहौल और अधिक गर्म हो गया है। विपक्षी दल जहां सरकार के फैसले को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रिया दे रहे हैं, वहीं कई सामाजिक संगठनों ने भी इस मुद्दे पर संतुलित रवैया अपनाने की अपील की है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बकरीद से पहले उठा यह विवाद आने वाले दिनों में और बड़ा रूप ले सकता है।

    हुमायूं कबीर पहले भी कई विवादित बयानों को लेकर चर्चा में रह चुके हैं। पिछले वर्षों में भी उनके कुछ बयान राजनीतिक बहस का कारण बने थे। हालांकि इस बार उनका बयान ऐसे समय आया है जब राज्य में धार्मिक और राजनीतिक मुद्दों को लेकर पहले से ही संवेदनशील माहौल बना हुआ है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इस पूरे मामले का असर आगामी चुनावी समीकरणों पर भी देखने को मिल सकता है।

    फिलहाल राज्य में प्रशासनिक स्तर पर सुरक्षा और कानून व्यवस्था को लेकर सतर्कता बढ़ा दी गई है। सरकार की ओर से लोगों से शांति बनाए रखने और अफवाहों से दूर रहने की अपील की जा रही है। वहीं राजनीतिक बयानबाजी के बीच आम जनता की नजर अब इस बात पर टिकी है कि आने वाले दिनों में यह विवाद किस दिशा में आगे बढ़ता है।

  • डॉक्टरों के लिए बड़ी खुशखबरी, ईएसआईसी मेडिकल कॉलेजों में 118 प्रोफेसर पदों पर भर्ती शुरू, जानिए पूरी प्रक्रिया

    डॉक्टरों के लिए बड़ी खुशखबरी, ईएसआईसी मेडिकल कॉलेजों में 118 प्रोफेसर पदों पर भर्ती शुरू, जानिए पूरी प्रक्रिया

    नई दिल्ली । चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में करियर बनाने का सपना देख रहे अनुभवी डॉक्टरों और शिक्षकों के लिए एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है। कर्मचारी राज्य बीमा निगम ने देश के विभिन्न ईएसआईसी मेडिकल कॉलेजों और पीजीआईएमएसआर संस्थानों में प्रोफेसर पदों पर भर्ती के लिए बड़ा भर्ती अभियान शुरू किया है। इस भर्ती प्रक्रिया के तहत अलग-अलग मेडिकल विभागों में कुल 118 पदों पर योग्य उम्मीदवारों की नियुक्ति की जाएगी। भर्ती को लेकर जारी अधिसूचना के बाद मेडिकल शिक्षा क्षेत्र से जुड़े अभ्यर्थियों में काफी उत्साह देखने को मिल रहा है।

    भर्ती प्रक्रिया के अंतर्गत एनाटॉमी, अनेस्थीसियोलॉजी, बायोकेमिस्ट्री, सामुदायिक चिकित्सा, सामान्य चिकित्सा, सामान्य सर्जरी, माइक्रोबायोलॉजी, ऑर्थोपेडिक्स, पीडियाट्रिक्स, पैथोलॉजी, रेडियोलॉजी, मनोरोग चिकित्सा, रेस्पिरेटरी मेडिसिन और ब्लड बैंक समेत कई महत्वपूर्ण विभागों में रिक्तियां निकाली गई हैं। मेडिकल शिक्षा और अस्पताल प्रबंधन से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि यह भर्ती स्वास्थ्य शिक्षा प्रणाली को और मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।

    आवेदन प्रक्रिया ऑफलाइन माध्यम से शुरू हो चुकी है और इच्छुक उम्मीदवार निर्धारित अंतिम तिथि तक अपना आवेदन जमा कर सकते हैं। भर्ती में शामिल होने के लिए उम्मीदवारों के पास संबंधित विषय में एमडी, एमएस या समकक्ष मान्यता प्राप्त पोस्ट ग्रेजुएट डिग्री होना अनिवार्य रखा गया है। इसके साथ ही संबंधित विषय में निर्धारित वर्षों का शिक्षण अनुभव भी जरूरी होगा। इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि चयनित उम्मीदवार मेडिकल शिक्षा के क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण योगदान दे सकें।

    आयु सीमा की बात करें तो उम्मीदवारों की अधिकतम उम्र 50 वर्ष निर्धारित की गई है। हालांकि आरक्षित वर्गों से आने वाले अभ्यर्थियों को सरकारी नियमों के अनुसार आयु सीमा में विशेष छूट प्रदान की जाएगी। भर्ती प्रक्रिया में उम्मीदवारों का चयन इंटरव्यू, शॉर्टलिस्टिंग और दस्तावेज सत्यापन के आधार पर किया जाएगा। चयनित उम्मीदवारों को आकर्षक वेतनमान के साथ अन्य सरकारी सुविधाएं और भत्ते भी दिए जाएंगे। जानकारी के अनुसार चयनित प्रोफेसरों को प्रति माह एक लाख तेइस हजार रुपये से लेकर दो लाख पंद्रह हजार रुपये तक का वेतन मिल सकेगा।

    आवेदन शुल्क को लेकर भी अलग-अलग श्रेणियों के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं। सामान्य, ओबीसी, ईडब्ल्यूएस और विभागीय पुरुष उम्मीदवारों के लिए आवेदन शुल्क निर्धारित किया गया है, जबकि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, दिव्यांग, महिलाओं और पूर्व सैनिकों को शुल्क में छूट दी गई है। इससे अधिक से अधिक योग्य उम्मीदवारों को आवेदन का अवसर मिल सकेगा।

    उम्मीदवारों को आवेदन पत्र भरते समय सभी आवश्यक दस्तावेज सावधानीपूर्वक संलग्न करने होंगे। आवेदन फॉर्म जमा करने के बाद उसकी एक प्रति भविष्य के लिए सुरक्षित रखना भी जरूरी बताया गया है। मेडिकल शिक्षा क्षेत्र में स्थायी और प्रतिष्ठित सरकारी नौकरी की तलाश कर रहे उम्मीदवारों के लिए यह भर्ती एक बड़ा अवसर मानी जा रही है। आने वाले समय में इस भर्ती प्रक्रिया को लेकर प्रतियोगिता भी काफी बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।

  • कश्मीर के बहादुर आदिल शाह की याद में बड़ा कदम: सरकार ने स्कूल को दिया नया नाम

    कश्मीर के बहादुर आदिल शाह की याद में बड़ा कदम: सरकार ने स्कूल को दिया नया नाम

    नई दिल्ली । जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में पिछले वर्ष हुए आतंकी हमले के दौरान पर्यटकों की जान बचाते हुए अपनी जान गंवाने वाले आदिल हुसैन शाह को राज्य सरकार ने विशेष सम्मान दिया है। उनके साहस और बलिदान को याद रखते हुए अनंतनाग जिले के एक सरकारी हाई स्कूल का नाम बदलकर उनके नाम पर रखा गया है। इस निर्णय को उनकी वीरता और मानवता के प्रति समर्पण का प्रतीक माना जा रहा है।

    जानकारी के अनुसार, आदिल हुसैन शाह पहलगाम क्षेत्र में पोनी चलाने का कार्य करते थे और पर्यटकों की सेवा से जुड़े रहते थे। 22 अप्रैल 2025 को बैसरन घाटी में हुए आतंकी हमले के दौरान उन्होंने कई पर्यटकों की जान बचाने की कोशिश की, लेकिन इस दौरान वे स्वयं गंभीर रूप से घायल हो गए और उनकी मृत्यु हो गई। उनकी इस बहादुरी ने पूरे क्षेत्र में गहरी छाप छोड़ी थी।

    राज्य सरकार द्वारा लिए गए निर्णय के तहत अनंतनाग जिले के हापतनगर स्थित एक सरकारी हाई स्कूल का नाम बदलकर शहीद आदिल मेमोरियल हाई स्कूल कर दिया गया है। इस फैसले को सरकार की ओर से आयोजित एक विशेष समारोह में औपचारिक रूप से लागू किया गया, जिसमें शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों और स्थानीय प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

    इस अवसर पर शिक्षा मंत्री ने कहा कि आदिल शाह का बलिदान केवल एक व्यक्ति की बहादुरी नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए प्रेरणा है। उन्होंने कहा कि कश्मीर के लोगों को अक्सर गलत नजरिए से देखा जाता है, लेकिन आदिल शाह ने अपने कार्य से यह साबित किया कि यहां के लोग अपने मेहमानों की सुरक्षा और सम्मान के लिए हमेशा आगे रहते हैं।

    परिवार के सदस्यों ने इस फैसले पर सरकार का आभार व्यक्त किया और इसे गर्व का क्षण बताया। उन्होंने कहा कि स्कूल का नाम उनके नाम पर रखे जाने से आने वाली पीढ़ियां भी आदिल शाह के साहस और बलिदान को याद रखेंगी। स्थानीय लोगों ने भी इस कदम का स्वागत किया और इसे एक प्रेरणादायक निर्णय बताया, जिससे क्षेत्र में शांति और मानवता का संदेश और मजबूत हुआ है।

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  • देशभर में मौसम का डबल अटैक: कहीं मूसलाधार बारिश तो कहीं लू का कहर, IMD ने जारी किया हाई अलर्ट

    देशभर में मौसम का डबल अटैक: कहीं मूसलाधार बारिश तो कहीं लू का कहर, IMD ने जारी किया हाई अलर्ट

    नई दिल्ली ।देशभर में भीषण गर्मी के बीच अब मौसम ने अचानक करवट ले ली है। 22 मई को देश के कई हिस्सों में तेज आंधी, भारी बारिश और तूफान को लेकर बड़ा अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग के अनुसार उत्तर भारत से लेकर पूर्वोत्तर और दक्षिण भारत तक कई राज्यों में मौसम बेहद खराब रहने की संभावना है। तेज हवाओं की रफ्तार 80 से 90 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है, जिससे जनजीवन प्रभावित होने का खतरा बढ़ गया है। कई इलाकों में बिजली गिरने, पेड़ उखड़ने और फसलों को नुकसान पहुंचने की आशंका भी जताई गई है। मौसम में इस अचानक बदलाव की वजह से लोगों को भीषण गर्मी से राहत जरूर मिल सकती है, लेकिन तेज तूफान और बारिश नई परेशानियां भी खड़ी कर सकते हैं।

    मौसम विभाग के मुताबिक पूर्वी उत्तर प्रदेश और आसपास के क्षेत्रों में चक्रवाती परिसंचरण सक्रिय हो गया है, जिसका असर कई राज्यों में दिखाई देगा। इसके अलावा उत्तर-पश्चिमी उत्तर प्रदेश से लेकर मणिपुर तक मौसम प्रणाली मजबूत हो रही है। इसी कारण उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, जम्मू-कश्मीर, ओडिशा, असम, तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र में बारिश और तेज आंधी की चेतावनी जारी की गई है। कई इलाकों में गरज-चमक के साथ मूसलाधार बारिश होने की संभावना जताई गई है।

    उत्तर प्रदेश के कई जिलों में तेज हवाओं और बारिश का असर देखने को मिल सकता है। गोरखपुर, वाराणसी, प्रयागराज, देवरिया, आजमगढ़ और आसपास के इलाकों में मौसम खराब रहने की संभावना है। वहीं बिहार के गया, दरभंगा, पूर्णिया, किशनगंज, सुपौल और भागलपुर जैसे जिलों में भारी बारिश और तूफान का खतरा बना हुआ है। झारखंड में भी रांची, धनबाद, बोकारो और जमशेदपुर समेत कई क्षेत्रों में तेज हवाओं के साथ बारिश होने का अनुमान लगाया गया है। पश्चिम बंगाल के उत्तरी हिस्सों में भी मौसम बिगड़ सकता है और कई जिलों में तेज आंधी चलने की चेतावनी दी गई है।

    पहाड़ी राज्यों में भी मौसम को लेकर विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है। उत्तराखंड के नैनीताल, उत्तरकाशी, पिथौरागढ़ और रुद्रप्रयाग में तेज बारिश और आंधी का अलर्ट जारी किया गया है। हिमाचल प्रदेश के शिमला, कुल्लू, मंडी और कांगड़ा में भी तेज हवाओं के साथ भारी बारिश की संभावना है। मौसम विभाग ने यात्रियों और स्थानीय लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी है क्योंकि खराब मौसम के कारण भूस्खलन और सड़क बाधित होने जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं।

    राजधानी दिल्ली में भी 22 मई की शाम मौसम अचानक बदल सकता है। यहां तेज धूलभरी आंधी चलने की संभावना जताई गई है। हवा की रफ्तार 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। हालांकि तापमान अभी भी काफी ऊंचा बना रहेगा और अधिकतम तापमान 43 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। राजस्थान और मध्य प्रदेश के कई हिस्सों में अभी भी भीषण गर्मी और लू का असर जारी रहेगा। जयपुर, ग्वालियर, उज्जैन और इंदौर जैसे शहरों में गर्म हवाएं लोगों की मुश्किलें बढ़ा सकती हैं।

    दक्षिण भारत के राज्यों में भी मौसम सक्रिय हो गया है। तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में कई स्थानों पर तेज बारिश और गरज-चमक की संभावना जताई गई है। वहीं अंडमान-निकोबार क्षेत्र में भी मौसम खराब रह सकता है। मौसम विभाग का कहना है कि अगले कुछ दिनों में दक्षिण-पश्चिम मानसून आगे बढ़ सकता है, जिसके कारण बारिश की गतिविधियां और तेज हो सकती हैं।

    मौसम विशेषज्ञों ने किसानों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है क्योंकि तेज आंधी और बारिश से खड़ी फसलों को नुकसान पहुंच सकता है। लोगों को खराब मौसम के दौरान खुले स्थानों पर जाने से बचने और सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी गई है।

  • लखनऊ में पिता ने ही रची अपनी मासूम बेटी के कत्ल की खौफनाक साजिश, सिरविहीन टुकड़ों में मिला किशोरी का शव

    लखनऊ में पिता ने ही रची अपनी मासूम बेटी के कत्ल की खौफनाक साजिश, सिरविहीन टुकड़ों में मिला किशोरी का शव


    नई दिल्ली।
    उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में रिश्तों को तार-तार कर देने वाली एक ऐसी खौफनाक वारदात सामने आई है, जिसने ऑनर किलिंग के काले सच को एक बार फिर समाज के सामने लाकर खड़ा कर दिया है। गोमतीनगर रेलवे स्टेशन पर खड़ी छपरा-गोमती एक्सप्रेस के स्लीपर कोच की एक सीट के नीचे लावारिस हालत में रखे बक्से से जब पुलिस ने एक किशोरी का सिरविहीन शव बरामद किया, तो पूरे इलाके में हड़कंप मच गया। बक्से को खोलने पर सुरक्षाकर्मियों के होश उड़ गए क्योंकि उसके भीतर मासूम बच्ची के शरीर को छह अलग-अलग टुकड़ों में काटकर बेरहमी से छुपाया गया था। इस दिल दहला देने वाले हत्याकांड का खुलासा करने के लिए प्रशासन ने तुरंत सक्रियता दिखाते हुए कई विशेष जांच टीमों का गठन किया और सुरागों की तलाश तेज कर दी।

    जांचकर्ताओं ने जब रेलवे स्टेशनों के सीसीटीवी फुटेज को खंगालना शुरू किया, तो कुशीनगर जिले के तमकुही रेलवे स्टेशन के कैमरों से एक बेहद महत्वपूर्ण और संदिग्ध सुराग हाथ लगा। इस सुराग के जरिए जब कड़ियों से कड़ियां जोड़ी गईं, तो हत्या के पीछे किसी बाहरी का नहीं बल्कि मृतिका के सगे पिता, उसकी सगी बुआ और फूफा का हाथ होने की बात सामने आई। कानून के हाथ जैसे ही इन आरोपियों तक पहुंचे, इस खौफनाक साजिश का पूरा सच खुलकर सामने आ गया। गिरफ्त में आए आरोपियों की पहचान मृतिका शब्बा के पिता विग्गन अंसारी, बुआ नूरजहां और फूफा मोजीबुल्ला अंसारी के रूप में हुई है, जिन्हें पुलिस ने कुशीनगर जिले से घेराबंदी करके दबोच लिया।

    इस दर्दनाक वारदात के पीछे की मुख्य वजह पारिवारिक प्रतिष्ठा और रूढ़िवादी सोच से उपजा आक्रोश बताया जा रहा है। जांच अधिकारियों के अनुसार आरोपी पिता अपनी दो बड़ी बेटियों द्वारा परिवार की मर्जी के खिलाफ जाकर अपनी पसंद से शादी करने के फैसले से लंबे समय से बेहद परेशान और समाज में अपमानित महसूस कर रहा था। इसी बीच जब उसे पता चला कि उसकी सोलह वर्षीय सबसे छोटी बेटी भी किसी से फोन पर बातचीत करती है और उसका प्रेम प्रसंग चल रहा है, तो उसका गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। घर में इस बात को लेकर आए दिन विवाद, तनाव और कलह का माहौल रहने लगा था।

    अपनी दो बड़ी बेटियों के कदम से आहत पिता किसी भी कीमत पर अपनी तीसरी बेटी को अपनी मर्जी के खिलाफ जाते नहीं देखना चाहता था। इसी जिद और सनक के कारण उसने अपनी बहन और बहनोई के साथ मिलकर अपनी ही नाबालिग बेटी को हमेशा के लिए खामोश करने की योजना बना डाली। आरोपियों ने मिलकर पहले किशोरी को मौत के घाट उतारा और फिर पकड़े जाने के डर से शव को बेरहमी से काटकर टुकड़ों में बांट दिया। फिलहाल इस पूरे मामले में आरोपियों को जेल भेज दिया गया है, जबकि मृतिका के गायब सिर को ढूंढने के लिए बिहार सीमा और कुशीनगर के आसपास के इलाकों में बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान चलाया जा रहा है।

  • बढ़ सकती हैं जरूरी दवाओं की कीमतें: फार्मा कंपनियों की तैयारी, आम लोगों पर पड़ सकता है असर

    बढ़ सकती हैं जरूरी दवाओं की कीमतें: फार्मा कंपनियों की तैयारी, आम लोगों पर पड़ सकता है असर


    नई दिल्ली । पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और युद्ध जैसे हालातों का असर अब वैश्विक सप्लाई चेन पर साफ दिखाई देने लगा है। पेट्रोकेमिकल आधारित कच्चे माल की आपूर्ति प्रभावित होने से दवा निर्माण की लागत में बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। इसी कारण देश में 384 जरूरी दवाओं की कीमतें बढ़ने की संभावना जताई जा रही है, जिससे फार्मा सेक्टर में हलचल तेज हो गई है।

    सूत्रों के अनुसार, केंद्र सरकार और दवा मूल्य निर्धारण से जुड़ी संस्थाओं के बीच इस मुद्दे पर गंभीर चर्चा चल रही है। उद्योग जगत की ओर से यह प्रस्ताव दिया गया है कि बढ़ती उत्पादन लागत को देखते हुए आवश्यक दवाओं की कीमतों में संशोधन किया जाए। फिलहाल सरकार इस प्रस्ताव की समीक्षा कर रही है और अंतिम निर्णय परिस्थितियों को देखते हुए लिया जा सकता है।

    बताया जा रहा है कि जिन दवाओं की कीमतों में बदलाव की चर्चा हो रही है, उनमें कई जीवन रक्षक दवाएं शामिल हैं। इनमें एंटीबायोटिक, हृदय रोगों की दवाएं, बुखार और दर्द निवारक दवाएं, सूजन कम करने वाली दवाएं तथा विटामिन सप्लीमेंट जैसी आवश्यक दवाएं भी शामिल हैं। इन दवाओं का उपयोग सामान्य संक्रमण से लेकर गंभीर बीमारियों के इलाज तक में किया जाता है, जिससे इनकी मांग हमेशा बनी रहती है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और पेट्रोकेमिकल उत्पादों की कीमतों में उतार-चढ़ाव का सीधा असर दवा निर्माण पर पड़ता है। कई जरूरी फार्मा सामग्री आयात पर निर्भर होती है, ऐसे में सप्लाई बाधित होने पर उत्पादन लागत बढ़ जाती है। इसी वजह से कंपनियां कीमतों में संशोधन की मांग कर रही हैं।

    हालांकि यह भी संभावना जताई जा रही है कि यदि वैश्विक हालात सामान्य होते हैं और सप्लाई चेन फिर से स्थिर हो जाती है, तो इन दवाओं की कीमतों में कमी भी संभव है। फिलहाल स्थिति पर नजर रखी जा रही है और अंतिम निर्णय नियामक संस्थाओं की समीक्षा के बाद ही सामने आएगा।

    इस संभावित बदलाव को लेकर आम लोगों में चिंता भी बढ़ सकती है, क्योंकि जरूरी दवाओं की कीमतों में वृद्धि सीधे स्वास्थ्य खर्च पर असर डालती है। विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार को इस दौरान संतुलन बनाए रखना होगा ताकि मरीजों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ न पड़े और दवा उद्योग भी स्थिर बना रहे।

  • पन्ना में दर्दनाक मामला: छत पर फंदा लगाने की कोशिश, समय रहते बची जान

    पन्ना में दर्दनाक मामला: छत पर फंदा लगाने की कोशिश, समय रहते बची जान


    मध्यप्रदेश । मध्यप्रदेश के पन्ना जिला अस्पताल परिसर में बुधवार को उस समय अफरा-तफरी मच गई जब एक युवक ने बच्चा वार्ड की छत पर चढ़कर फांसी लगाने की कोशिश की। यह घटना देखते ही देखते पूरे अस्पताल में तनाव और हड़कंप का कारण बन गई।

    जानकारी के अनुसार, युवक ने छत पर पहुंचकर तौलिया से फंदा बनाया और उसे गले में डालकर लटक गया। नीचे मौजूद लोगों ने जैसे ही उसे हवा में झूलते देखा, तुरंत शोर मचाया और मदद के लिए दौड़ पड़े। आवाज सुनकर अस्पताल में तैनात सुरक्षा गार्ड और स्थानीय लोग तुरंत छत की ओर पहुंचे।

    समय रहते गार्डों और नागरिकों ने तत्परता दिखाते हुए फंदा काट दिया और युवक को नीचे सुरक्षित उतार लिया। इस त्वरित कार्रवाई के कारण एक बड़ी अनहोनी टल गई और युवक की जान बच गई।

    अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. आलोक गुप्ता ने बताया कि युवक को तत्काल ट्रॉमा वार्ड में भर्ती कराया गया, जहां उसकी हालत फिलहाल स्थिर बनी हुई है। डॉक्टरों की टीम उसकी लगातार निगरानी कर रही है।

    होश में आने के बाद युवक की पहचान छोटी महोड़ निवासी देवीदीन दुबे के रूप में हुई। पूछताछ में उसने बताया कि वह लंबे समय से बेरोजगार है और नौकरी न मिलने के कारण गहरे मानसिक तनाव और डिप्रेशन में चला गया था। इसी हताशा में उसने यह आत्मघाती कदम उठाने का निर्णय लिया।

    अस्पताल प्रशासन ने मामले की सूचना पुलिस को दे दी है। पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण कर जांच शुरू कर दी है। साथ ही युवक को मानसिक स्वास्थ्य सहायता देने के लिए काउंसलिंग भी शुरू कर दी गई है।

  • सीबीआई जांच नहीं होती तो हो जाता एनकाउंटर: रिहा हुए बलिया के राज सिंह का सनसनीखेज दावा

    सीबीआई जांच नहीं होती तो हो जाता एनकाउंटर: रिहा हुए बलिया के राज सिंह का सनसनीखेज दावा

    बलिया। पश्चिम बंगाल सीएम के पीए चंद्रनाथ रथ हत्याकांड मामले में गलत पहचान के चलते गिरफ्तार किए गए बलिया के राज सिंह ने रिहाई के बाद बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि अगर इस मामले की सीबीआई जांच नहीं होती तो उनका एनकाउंटर तक हो सकता था।

    राज सिंह ने आरोप लगाया कि उन्हें एसओजी टीम ने बिना ठोस सबूत के अयोध्या से उठाया था और जबरन दबाव बनाया गया कि वह अपराध स्वीकार करें। उनके मुताबिक, पूछताछ के दौरान उन पर लगातार दबाव बनाया गया और धमकियां दी गईं कि “सच नहीं बताया तो एनकाउंटर कर दिया जाएगा।”

    उन्होंने बताया कि उनकी गिरफ्तारी के बाद परिवार ने लगातार उनके निर्दोष होने के सबूत पेश किए, जिनमें घर के सीसीटीवी फुटेज भी शामिल थे, जिससे यह साबित हुआ कि घटना के समय वह अपने घर पर मौजूद थे। इसके बाद मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई और जांच में सामने आया कि असली आरोपी कोई और है।

    सीबीआई जांच में खुलासा होने के बाद राज सिंह को रिहा कर दिया गया, जबकि असली आरोपी राजकुमार सिंह उर्फ राज को बाद में मुजफ्फरनगर से गिरफ्तार किया गया।

    रिहाई के बाद मीडिया से बातचीत में राज सिंह ने कहा कि अगर जांच एजेंसी बदलकर सीबीआई को नहीं सौंपी जाती, तो शायद सच सामने नहीं आ पाता और वह आज जिंदा नहीं होते। उन्होंने सीबीआई अधिकारियों का आभार जताया कि उन्होंने निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लाई।

    राज सिंह बलिया के आनंद नगर मोहल्ले के रहने वाले हैं और स्थानीय स्तर पर सक्रिय राजनीतिक और सामाजिक गतिविधियों से भी जुड़े बताए जाते हैं। इससे पहले उन पर एक अंडा व्यवसायी की हत्या के मामले में भी आरोप लग चुका है, जिसमें वे फिलहाल जमानत पर बाहर हैं।

    इस पूरे मामले ने पुलिस की शुरुआती जांच और एसओजी की कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।