Author: bharati

  • गुजरात वन विभाग की नई डिजिटल पहल, सिर्फ एक कॉल या मैसेज से मिलेंगी 453 नर्सरियों और पौधों की पूरी जानकारी

    गुजरात वन विभाग की नई डिजिटल पहल, सिर्फ एक कॉल या मैसेज से मिलेंगी 453 नर्सरियों और पौधों की पूरी जानकारी

    नई दिल्ली । गुजरात में पौधारोपण को बढ़ावा देने और नागरिकों तक वन विभाग की सेवाओं को अधिक सरल बनाने के उद्देश्य से एक नई डिजिटल सुविधा शुरू की गई है। इस पहल के तहत अब कोई भी व्यक्ति केवल एक कॉल या संदेश के माध्यम से अपने क्षेत्र की वन विभाग की नर्सरियों, पौधों की उपलब्धता और संबंधित अधिकारियों की जानकारी अपने मोबाइल पर प्राप्त कर सकता है। इस व्यवस्था का उद्देश्य लोगों को वृक्षारोपण के लिए आवश्यक जानकारी आसानी से उपलब्ध कराना और हरित अभियान में अधिक से अधिक जनभागीदारी सुनिश्चित करना है।

    नई व्यवस्था के अनुसार नागरिक निर्धारित मोबाइल नंबर पर कॉल करते हैं तो कॉल स्वतः समाप्त हो जाती है और उनके मोबाइल पर एक वेब लिंक वाला संदेश प्राप्त होता है। इस लिंक को खोलने पर संबंधित क्षेत्र की सामाजिक वनीकरण विभाग की नर्सरियों की संपर्क जानकारी, गूगल मैप पर उनका स्थान तथा संबंधित वन अधिकारियों के मोबाइल नंबर जैसी उपयोगी जानकारी उपलब्ध हो जाती है। इसी प्रकार यदि कोई व्यक्ति उसी नंबर पर ‘HI’ लिखकर एसएमएस या व्हाट्सएप संदेश भेजता है तो भी उसे यही डिजिटल सुविधा प्राप्त होती है।

    डिजिटल प्लेटफॉर्म पर केवल नर्सरियों की जानकारी ही नहीं, बल्कि रेंज फॉरेस्ट ऑफिसर, इको-टूरिज्म स्थलों और वन विभाग की अन्य सेवाओं से जुड़ी जानकारी भी उपलब्ध कराई गई है। इससे नागरिकों को विभिन्न वन सेवाओं के लिए अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर लगाने की आवश्यकता नहीं होगी और अधिकांश जानकारी एक ही प्लेटफॉर्म पर मिल सकेगी।

    राज्य सरकार का कहना है कि यह पहल व्यापक वृक्षारोपण अभियान को गति देने के उद्देश्य से शुरू की गई है। प्रधानमंत्री के ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत अधिक से अधिक लोगों को पौधे उपलब्ध कराने की दिशा में भी यह व्यवस्था महत्वपूर्ण मानी जा रही है। वन एवं पर्यावरण विभाग के अनुसार इस वर्ष सामाजिक वनीकरण कार्यक्रम के तहत करोड़ों पौधे वितरण के लिए तैयार किए गए हैं, ताकि नागरिकों को बड़े स्तर पर पौधारोपण के लिए प्रोत्साहित किया जा सके।

    वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार राज्यभर में कुल 453 नर्सरियां संचालित की जा रही हैं। यहां नागरिक पौधों के आकार के अनुसार मामूली कीमत पर गुणवत्तापूर्ण पौधे खरीद सकते हैं। कुछ श्रेणियों के पौधों का निःशुल्क वितरण भी किया जाता है। जो नागरिक रियायती दर या निःशुल्क पौधे प्राप्त करना चाहते हैं, वे अपने जिले के संबंधित वन अधिकारियों से संपर्क कर सकते हैं।

    विभाग ने शिकायतों और अतिरिक्त सहायता के लिए टोल-फ्री हेल्पलाइन की सुविधा भी उपलब्ध कराई है। इस हेल्पलाइन के माध्यम से नागरिक अपनी समस्याएं दर्ज करा सकते हैं और वन विभाग से जुड़े विभिन्न विषयों पर मार्गदर्शन प्राप्त कर सकते हैं। अधिकारियों के अनुसार डिजिटल सेवा और हेल्पलाइन दोनों को नागरिकों से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है तथा प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग इनका उपयोग कर रहे हैं।

    वन विभाग ने बताया कि पूरी डिजिटल प्रणाली विभाग द्वारा स्वयं विकसित और संचालित की जा रही है। इसका उद्देश्य बिना अतिरिक्त लागत के आधुनिक तकनीक का उपयोग करते हुए सार्वजनिक सेवाओं को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और सुलभ बनाना है। विभाग का मानना है कि इस पहल से वृक्षारोपण अभियान को नई गति मिलेगी और अधिक से अधिक लोग पर्यावरण संरक्षण की दिशा में सक्रिय भागीदारी निभा सकेंगे।

  • भारत में 10 साल में 94 हजार सरकारी स्कूल बंद, हर दिन 25 स्कूलों पर लगा ताला, छात्रों के नामांकन में गिरावट

    भारत में 10 साल में 94 हजार सरकारी स्कूल बंद, हर दिन 25 स्कूलों पर लगा ताला, छात्रों के नामांकन में गिरावट


    नई दिल्ली। देश में स्कूली शिक्षा को लेकर नीति आयोग की हालिया रिपोर्ट ने चिंता बढ़ा दी है। रिपोर्ट के मुताबिक पिछले 10 वर्षों में भारत में करीब 94 हजार सरकारी स्कूल बंद हो चुके हैं। इसका मतलब है कि औसतन हर दिन 25 सरकारी स्कूलों पर ताला लगा। इस दौरान सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों की संख्या में भी 2.26 करोड़ की बड़ी गिरावट दर्ज की गई है।

    नीति आयोग की रिपोर्ट ‘स्कूल एजुकेशन सिस्टम इन इंडिया: टेम्पोरल एनालिसिस एंड पॉलिसी रोडमैप फॉर क्वालिटी एनहांसमेंट’ के अनुसार, वर्ष 2014-15 में देश में सरकारी स्कूलों की संख्या 11.07 लाख थी, जो 2024-25 में घटकर 10.13 लाख रह गई। इसी अवधि में सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों की संख्या भी 83 हजार से घटकर 79 हजार हो गई। वहीं दूसरी ओर निजी स्कूलों की संख्या 2.88 लाख से बढ़कर 3.39 लाख पहुंच गई।

    छात्रों के नामांकन में भी आई बड़ी गिरावट
    रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2014-15 में देशभर के स्कूलों में कुल 26.95 करोड़ छात्रों का नामांकन था, जो 2024-25 में घटकर 24.69 करोड़ रह गया। यानी एक दशक में 2.26 करोड़ छात्रों की कमी दर्ज की गई।

    क्यों घट रही है बच्चों की संख्या?
    रिपोर्ट में इसके पीछे कई कारण बताए गए हैं। इनमें घटती प्रजनन दर के कारण स्कूल जाने योग्य बच्चों की संख्या में कमी, कम छात्र संख्या वाले स्कूलों का आपस में विलय और उच्च कक्षाओं में छात्रों को स्कूल से जुड़े रखने की चुनौती प्रमुख हैं।

    स्कूलों के विलय पर उठे सवाल
    केंद्र सरकार और नीति आयोग ने संसाधनों के बेहतर उपयोग के उद्देश्य से कम छात्र संख्या वाले स्कूलों का विलय किया है। हालांकि शिक्षा क्षेत्र से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि इस नीति का असर नामांकन पर भी पड़ा है। उनका तर्क है कि जब गांव या मोहल्ले का नजदीकी स्कूल बंद हो जाता है, तो दूरी बढ़ने के कारण कई बच्चे, खासकर लड़कियां, पढ़ाई छोड़ देती हैं।

    बड़ी कक्षाओं में बढ़ रहा ड्रॉपआउट
    रिपोर्ट में माध्यमिक स्तर पर बढ़ते ड्रॉपआउट को गंभीर चिंता का विषय बताया गया है। पहली से पांचवीं कक्षा तक स्कूल छोड़ने की दर सिर्फ 0.3 प्रतिशत है, लेकिन छठी से आठवीं तक यह बढ़कर 3.5 प्रतिशत हो जाती है। वहीं नौवीं और दसवीं कक्षा तक पहुंचते-पहुंचते ड्रॉपआउट दर 11.5 प्रतिशत हो जाती है।

    आठवीं से नौवीं कक्षा में जाने वाले छात्रों की दर भी 2014-15 के 91.58 प्रतिशत से घटकर 2024-25 में 86.6 प्रतिशत रह गई है। पुडुचेरी और केरल जैसे राज्यों में यह दर 99.6 प्रतिशत है, जबकि बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड, मध्य प्रदेश, मेघालय, मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश और नागालैंड में यह अपेक्षाकृत कम दर्ज की गई है।

    यूपी और एमपी में सबसे ज्यादा स्कूलों का विलय
    रिपोर्ट के अनुसार, पिछले एक दशक में उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में सबसे बड़े स्तर पर स्कूलों का विलय किया गया। दोनों राज्यों को मिलाकर करीब 40 हजार स्कूल बंद या मर्ज किए गए हैं।

    9वीं के छात्रों की बुनियादी पढ़ाई भी कमजोर
    नीति आयोग की रिपोर्ट में छात्रों के सीखने के स्तर को लेकर भी चिंता जताई गई है। अध्ययन में पाया गया कि कक्षा 9 के कई छात्र बीजगणित और ज्यामिति जैसे विषयों के साथ-साथ प्रतिशत, भिन्न और अनुपात जैसी बुनियादी गणितीय अवधारणाओं को समझने में भी कठिनाई महसूस कर रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, यह शुरुआती कक्षाओं में सीखने की कमियों के आगे तक बने रहने का संकेत है।

  • मार्केट ओपन से पहले बड़ी तस्वीर 10 जुलाई को सेंसेक्स निफ्टी में उतार चढ़ाव के बीच कैसी रहेगी बाजार की चाल

    मार्केट ओपन से पहले बड़ी तस्वीर 10 जुलाई को सेंसेक्स निफ्टी में उतार चढ़ाव के बीच कैसी रहेगी बाजार की चाल


    नई दिल्ली ।10 जुलाई को भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत मिलीजुली रहने की संभावना है। घरेलू और वैश्विक संकेतों के बीच निवेशकों की नजर बाजार की शुरुआती चाल पर रहेगी। पिछले कारोबारी सत्रों में बाजार में देखने को मिले उतार चढ़ाव के बाद निवेशक अब नए आर्थिक संकेतों कंपनियों के तिमाही नतीजों और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों का इंतजार कर रहे हैं। यही कारण है कि आज का कारोबार काफी हद तक खबरों और वैश्विक बाजारों के रुख पर निर्भर रह सकता है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिकी और एशियाई बाजारों का प्रदर्शन भारतीय बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है। यदि अंतरराष्ट्रीय बाजारों से सकारात्मक संकेत मिलते हैं तो सेंसेक्स और निफ्टी में अच्छी बढ़त देखने को मिल सकती है। वहीं यदि वैश्विक स्तर पर दबाव बना रहता है तो मुनाफावसूली के कारण बाजार में गिरावट भी आ सकती है।

    बाजार में बैंकिंग आईटी ऑटो फार्मा और एफएमसीजी सेक्टर के शेयर निवेशकों के फोकस में रह सकते हैं। इन सेक्टरों की बड़ी कंपनियों के तिमाही नतीजों को लेकर निवेशकों की उम्मीदें बनी हुई हैं। यदि कंपनियों के वित्तीय परिणाम अनुमान से बेहतर आते हैं तो संबंधित शेयरों में तेजी देखने को मिल सकती है। दूसरी ओर कमजोर नतीजे आने पर दबाव भी बन सकता है।

    विदेशी संस्थागत निवेशकों और घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीद और बिकवाली भी आज बाजार की दिशा तय करने वाला महत्वपूर्ण कारक रहेगी। यदि विदेशी निवेशकों की ओर से लगातार निवेश जारी रहता है तो बाजार को मजबूती मिल सकती है। वहीं बिकवाली बढ़ने पर प्रमुख सूचकांकों पर दबाव देखने को मिल सकता है।

    कच्चे तेल की कीमतों और डॉलर के मुकाबले रुपये की चाल पर भी निवेशकों की नजर बनी रहेगी। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का असर ऊर्जा और परिवहन क्षेत्र की कंपनियों पर पड़ सकता है। वहीं रुपये में मजबूती या कमजोरी का प्रभाव आयात और निर्यात से जुड़ी कंपनियों के शेयरों पर दिखाई दे सकता है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा समय में निवेशकों को जल्दबाजी में बड़े फैसले लेने से बचना चाहिए। जिन निवेशकों का नजरिया लंबी अवधि का है उनके लिए मजबूत बुनियादी आधार वाली कंपनियों में चरणबद्ध निवेश बेहतर रणनीति साबित हो सकती है। अल्पकालिक कारोबार करने वाले निवेशकों को बाजार की चाल और तकनीकी स्तरों पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी जा रही है।

    आज बाजार में उतार चढ़ाव की संभावना को देखते हुए जोखिम प्रबंधन भी बेहद जरूरी रहेगा। निवेशकों को अफवाहों के बजाय भरोसेमंद जानकारी के आधार पर निवेश करना चाहिए और अपने पोर्टफोलियो में विविधता बनाए रखनी चाहिए। बाजार में अवसर हमेशा मौजूद रहते हैं लेकिन सही समय पर सही निर्णय ही बेहतर रिटर्न दिला सकता है।

    कुल मिलाकर 10 जुलाई का कारोबारी सत्र खबरों वैश्विक संकेतों और निवेशकों की रणनीति के बीच संतुलन बनाते हुए आगे बढ़ सकता है। ऐसे में पूरे दिन बाजार की गतिविधियों पर नजर बनाए रखना निवेशकों के लिए फायदेमंद रहेगा।

  • शुक्र जल्‍द बदलेंगे नक्षत्र, इन 4 राशियों को रहना होगा सतर्क, बढ़ सकते हैं खर्च, तनाव और चुनौतियां

    शुक्र जल्‍द बदलेंगे नक्षत्र, इन 4 राशियों को रहना होगा सतर्क, बढ़ सकते हैं खर्च, तनाव और चुनौतियां


    नई दिल्ली। 16 जुलाई 2026 को सुख, वैभव और भौतिक सुख-सुविधाओं के कारक शुक्र देव अपने स्वामित्व वाले पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र में प्रवेश करेंगे। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार यह नक्षत्र परिवर्तन कई राशियों के लिए शुभ फल देने वाला माना जा रहा है, लेकिन कुछ राशियों के जातकों को इस दौरान आर्थिक, पारिवारिक, करियर और स्वास्थ्य से जुड़े मामलों में अतिरिक्त सावधानी बरतने की आवश्यकता होगी।

    वृषभ राशि
    शुक्र आपकी राशि के स्वामी हैं, लेकिन इस गोचर के दौरान खर्चों पर नियंत्रण रखना जरूरी होगा। सुख-सुविधाओं और विलासिता की वस्तुओं पर जरूरत से ज्यादा खर्च होने से आर्थिक संतुलन बिगड़ सकता है। कर्ज लेने की नौबत भी आ सकती है। परिवार में किसी बात को लेकर मतभेद या गलतफहमी की स्थिति बन सकती है। इस अवधि में किसी को बड़ी रकम उधार देने से बचना बेहतर रहेगा।

    कन्या राशि
    कन्या राशि के जातकों के लिए यह समय मानसिक दबाव और अनावश्यक खर्च बढ़ाने वाला हो सकता है। कार्यस्थल पर प्रतिस्पर्धा तेज रहेगी और कुछ लोग आपके काम में कमियां निकालने की कोशिश कर सकते हैं। ऐसे में विवादों और ऑफिस की राजनीति से दूरी बनाए रखना बेहतर रहेगा। स्वास्थ्य के लिहाज से आंखों, त्वचा और थकान से जुड़ी समस्याएं परेशान कर सकती हैं। साथ ही विरोधियों की गतिविधियों पर भी नजर रखना जरूरी होगा।

    वृश्चिक राशि
    शुक्र का यह नक्षत्र परिवर्तन करियर और सामाजिक प्रतिष्ठा के क्षेत्र में उतार-चढ़ाव ला सकता है। नौकरी या कार्यस्थल पर वरिष्ठ अधिकारियों के साथ मतभेद की स्थिति बन सकती है। मेहनत के अनुरूप परिणाम नहीं मिलने से निराशा महसूस हो सकती है। प्रेम संबंधों और वैवाहिक जीवन में विश्वास बनाए रखने की जरूरत होगी। कार्यक्षेत्र में किसी भी अनैतिक या शॉर्टकट रास्ते से बचना आपके लिए लाभकारी रहेगा।

    मीन राशि
    मीन राशि के जातकों के लिए यह गोचर विरोधियों को मजबूत कर सकता है। यदि कोई कानूनी मामला चल रहा है तो उसमें चुनौतियां बढ़ सकती हैं। इस दौरान किसी भी तरह के विवाद से बचना बेहतर रहेगा। साझेदारी में कारोबार करने वालों को पैसों के लेनदेन में पूरी पारदर्शिता रखनी चाहिए। स्वास्थ्य को लेकर भी लापरवाही न करें और बाहर के भोजन से परहेज करें।

    नकारात्मक प्रभाव कम करने के उपाय
    ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार शुक्रवार के दिन चावल, दूध, चीनी या सफेद वस्त्र जैसी सफेद वस्तुओं का दान करना शुभ माना जाता है। इसके अलावा शुक्रवार को या प्रतिदिन “ॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः” मंत्र का 108 बार जाप करने की सलाह दी जाती है। महिलाओं का सम्मान करना और घर की विशेष रूप से दक्षिण-पूर्व दिशा की साफ-सफाई का ध्यान रखना भी शुभ माना गया है।

  • अंकारा NATO शिखर सम्मेलन में कई बड़े फैसले, रक्षा बजट बढ़ाने, यूक्रेन सहायता और ईरान पर सख्त रुख के बीच ट्रंप ने फिर उठाया ग्रीनलैंड का मुद्दा

    अंकारा NATO शिखर सम्मेलन में कई बड़े फैसले, रक्षा बजट बढ़ाने, यूक्रेन सहायता और ईरान पर सख्त रुख के बीच ट्रंप ने फिर उठाया ग्रीनलैंड का मुद्दा

    नई दिल्ली । तुर्किये की राजधानी अंकारा में आयोजित दो दिवसीय उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (NATO) शिखर सम्मेलन कई महत्वपूर्ण निर्णयों और राजनीतिक संदेशों के साथ संपन्न हुआ। बैठक के दौरान सदस्य देशों ने रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने, यूक्रेन को निरंतर सहायता जारी रखने और वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए सामूहिक रणनीति पर सहमति जताई। वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ईरान, ग्रीनलैंड और सहयोगी देशों को लेकर दिए गए बयानों ने भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापक चर्चा को जन्म दिया।

    सम्मेलन के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान के साथ समझौते को समाप्त मानते हुए तेहरान के नेतृत्व पर तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि ईरान को किसी भी परिस्थिति में परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दिए जा सकते। हालांकि बाद में उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें व्यापक और लंबे समय तक चलने वाले युद्ध की संभावना कम दिखाई देती है। NATO के संयुक्त घोषणापत्र में भी ईरान से अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर नौवहन की स्वतंत्रता बनाए रखने का आग्रह किया गया और परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकने की प्रतिबद्धता दोहराई गई।

    शिखर सम्मेलन में रक्षा खर्च बढ़ाने का मुद्दा भी प्रमुख एजेंडा रहा। सदस्य देशों ने अपनी सैन्य तैयारियों को मजबूत करने, आधुनिक हथियार प्रणालियों, हवाई एवं मिसाइल रक्षा, मानव रहित तकनीकों, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और खुफिया क्षमताओं के विकास पर निवेश बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की। गठबंधन का उद्देश्य बदलते सुरक्षा वातावरण के अनुरूप अपनी सामूहिक रक्षा क्षमता को और प्रभावी बनाना है। हालांकि उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार सभी सदस्य देश अभी निर्धारित रक्षा व्यय लक्ष्य तक नहीं पहुंच पाए हैं, लेकिन आने वाले वर्षों में इस दिशा में प्रयास तेज करने का भरोसा जताया गया।

    यूक्रेन को लेकर भी NATO ने अपना समर्थन दोहराया। सम्मेलन में सदस्य देशों ने सैन्य उपकरण, प्रशिक्षण और आर्थिक सहायता जारी रखने की प्रतिबद्धता दोहराते हुए आने वाले वर्षों तक सहयोग बनाए रखने का आश्वासन दिया। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने सम्मेलन के दौरान कई नेताओं से मुलाकात कर अतिरिक्त सहयोग की मांग रखी। अमेरिका ने भी यूक्रेन की रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने के लिए सहयोग बढ़ाने के संकेत दिए, जिससे संघर्ष के बीच कीव को महत्वपूर्ण समर्थन मिलने की उम्मीद है।

    सम्मेलन के दौरान ग्रीनलैंड का मुद्दा भी एक बार फिर चर्चा में रहा। अमेरिकी राष्ट्रपति ने इस क्षेत्र के सामरिक महत्व पर जोर देते हुए अपने पुराने रुख को दोहराया। दूसरी ओर डेनमार्क ने स्पष्ट किया कि ग्रीनलैंड उसके अधिकार क्षेत्र का हिस्सा है और उसके भविष्य का निर्णय स्थानीय जनता तथा डेनमार्क के संवैधानिक ढांचे के अनुसार ही होगा। यूरोपीय पक्ष ने भी इस विषय पर डेनमार्क के रुख का समर्थन किया।

    बैठक के दौरान सहयोगी देशों के बीच रक्षा सहयोग, ऊर्जा सुरक्षा और रणनीतिक साझेदारी पर भी व्यापक विचार-विमर्श हुआ। कुछ मुद्दों पर मतभेद सामने आने के बावजूद सदस्य देशों ने सामूहिक सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने की प्रतिबद्धता दोहराई। विश्लेषकों का मानना है कि इस शिखर सम्मेलन के फैसले आने वाले समय में यूरोप, मध्य पूर्व और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की सुरक्षा रणनीतियों पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकते हैं।

    अंकारा शिखर सम्मेलन ने यह स्पष्ट संकेत दिया कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में NATO अपने रक्षा ढांचे को अधिक आधुनिक और सक्षम बनाने के साथ-साथ यूक्रेन जैसे साझेदार देशों के समर्थन तथा क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए संयुक्त प्रयासों को और मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

  • क्‍या LPG गैस की होने वाली है किल्लत ? जाने 10 जुलाई के रेट, सप्लाई और बुकिंग स्थिति

    क्‍या LPG गैस की होने वाली है किल्लत ? जाने 10 जुलाई के रेट, सप्लाई और बुकिंग स्थिति


    नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और होर्मुज स्ट्रेट के आसपास फिर से बढ़ी हलचल के बीच देशभर में एलपीजी उपभोक्ताओं के मन में कई सवाल उठ रहे हैं। क्या रसोई गैस की सप्लाई प्रभावित होगी? क्या सिलेंडर के दाम बढ़ सकते हैं? और क्या बुकिंग के नियमों में कोई बदलाव होगा? फिलहाल इन सभी सवालों का जवाब राहत देने वाला है।

    होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ा तनाव
    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से संघर्ष विराम को लेकर दिए गए बयानों के बाद होर्मुज स्ट्रेट क्षेत्र में एक बार फिर गोलीबारी की घटनाएं सामने आई हैं। इससे दुनिया के सबसे व्यस्त तेल परिवहन मार्गों में शामिल इस समुद्री रास्ते की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।

    भारत की एलपीजी सप्लाई पर कितना असर?
    भारत की करीब 60 प्रतिशत एलपीजी सप्लाई होर्मुज स्ट्रेट से होकर आती है। संघर्ष के दौरान इस मार्ग पर संकट की स्थिति बनी थी, लेकिन भारत ने सप्लाई प्रबंधन और वैकल्पिक व्यवस्था के जरिए घरेलू उपभोक्ताओं तक रसोई गैस की आपूर्ति जारी रखी।

    फिलहाल किल्लत के आसार नहीं
    केप्लर के एनालिस्ट सुमित रितोलिया के मुताबिक, मौजूदा हालात का भारत के कच्चे तेल आयात पर फिलहाल बड़ा असर नहीं पड़ा है। उनका कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में भारतीय रिफाइनरियों ने अपने आयात स्रोतों में विविधता लाई है, जिससे किसी एक मार्ग पर निर्भरता कम हुई है।

    कच्चे तेल की सप्लाई बनी हुई है सामान्य
    रितोलिया के अनुसार, पिछले 100 दिनों में भारत के लिए कच्चे तेल की आपूर्ति लगभग सामान्य रही है। रूस से बड़ी मात्रा में आयात के अलावा सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात से वैकल्पिक मार्गों के जरिए भी सप्लाई जारी है। वहीं पश्चिमी अफ्रीका और लैटिन अमेरिका से आयात ने भी आपूर्ति को संतुलित बनाए रखा है।

    रूस बना सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता
    जून महीने में भारत का कच्चे तेल का आयात रिकॉर्ड 4.93 मिलियन बैरल प्रतिदिन पहुंच गया। इसमें रूस से करीब 2.7 मिलियन बैरल प्रतिदिन आयात हुआ, जो कुल आयात का आधे से अधिक हिस्सा रहा। इसके साथ ही रूस भारत का सबसे बड़ा कच्चा तेल आपूर्तिकर्ता बना हुआ है।

    शिपिंग और बीमा लागत बढ़ने की आशंका
    विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही सामान्य बनी हुई है। हालांकि, यदि क्षेत्रीय तनाव लंबे समय तक जारी रहता है तो मालभाड़ा और बीमा लागत बढ़ सकती है। वहीं अमेरिकी प्रतिबंधों और कारोबारी जोखिमों के कारण भारतीय रिफाइनरियों के ईरान से तेल आयात बढ़ाने की संभावना फिलहाल नहीं है।

    10 जुलाई को LPG रेट में कोई बदलाव नहीं
    10 जुलाई के ताजा रेट के अनुसार घरेलू और कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इंडियन ऑयल की कीमतों के मुताबिक, दिल्ली में 14.2 किलोग्राम का घरेलू सिलेंडर 942 रुपये और 19 किलोग्राम का कमर्शियल सिलेंडर 2930 रुपये में मिल रहा है। कोलकाता में घरेलू सिलेंडर 968 रुपये और कमर्शियल सिलेंडर 3081.50 रुपये का है।

    जयपुर में घरेलू सिलेंडर 945.50 रुपये और कमर्शियल सिलेंडर 2957.50 रुपये में उपलब्ध है। वहीं चेन्नई में घरेलू सिलेंडर की कीमत 957.50 रुपये और कमर्शियल सिलेंडर 3106 रुपये है।

    बुकिंग और सप्लाई पहले की तरह सामान्य
    फिलहाल एलपीजी सिलेंडर की बुकिंग प्रक्रिया में कोई बदलाव नहीं किया गया है। सरकार और ऑयल मार्केटिंग कंपनियों का कहना है कि घरेलू एलपीजी की पर्याप्त उपलब्धता है और सप्लाई पूरी तरह सामान्य बनी हुई है। ऐसे में उपभोक्ताओं को किसी तरह की किल्लत या घबराहट में खरीदारी करने की आवश्यकता नहीं है।

  • शनि देव को प्रसन्न करने का सबसे सरल तरीका शनिवार की पूजा विधि से मिलेगा सुख समृद्धि और सफलता

    शनि देव को प्रसन्न करने का सबसे सरल तरीका शनिवार की पूजा विधि से मिलेगा सुख समृद्धि और सफलता


    नई दिल्ली । सनातन परंपरा में शनिवार का दिन न्याय के देवता भगवान शनि को समर्पित माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शनि देव प्रत्येक व्यक्ति को उसके कर्मों के अनुसार फल प्रदान करते हैं। यही कारण है कि शनिवार के दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक की गई शनि पूजा का विशेष महत्व बताया गया है। माना जाता है कि विधि विधान से पूजा करने पर शनि दोष का प्रभाव कम होता है और जीवन में सुख समृद्धि शांति तथा सफलता के नए मार्ग खुलते हैं।

    शनिवार की सुबह ब्रह्म मुहूर्त या सूर्योदय के बाद स्नान करके स्वच्छ और सादे वस्त्र धारण करें। पूजा स्थान को साफ करके वहां शनि देव की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। इसके बाद सरसों के तेल का दीपक जलाएं और भगवान शनि का ध्यान करें। पूजा के दौरान काला तिल उड़द की दाल नीले या काले पुष्प तथा सरसों का तेल अर्पित करना शुभ माना जाता है। इसके साथ ही श्रद्धापूर्वक धूप और दीप अर्पित कर भगवान से सुख शांति और समृद्धि की कामना करें।

    पूजा के समय शनि मंत्र ॐ शं शनैश्चराय नमः का कम से कम 108 बार जाप करना अत्यंत शुभ माना जाता है। इसके अलावा शनि चालीसा दशरथ कृत शनि स्तोत्र या शनि स्तुति का पाठ भी किया जा सकता है। मान्यता है कि नियमित रूप से मंत्र जाप करने से मानसिक तनाव कम होता है और जीवन की बाधाएं धीरे धीरे समाप्त होने लगती हैं।

    शनिवार के दिन पीपल के वृक्ष के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाने की भी परंपरा है। श्रद्धालु पीपल की परिक्रमा करते हुए भगवान शनि का स्मरण करते हैं और परिवार की सुख समृद्धि की प्रार्थना करते हैं। कई लोग इस दिन हनुमान मंदिर जाकर हनुमान चालीसा का पाठ भी करते हैं क्योंकि धार्मिक मान्यता है कि हनुमान जी की उपासना से शनि देव प्रसन्न होते हैं और उनके अशुभ प्रभाव में कमी आती है।

    दान का भी शनिवार के दिन विशेष महत्व माना गया है। जरूरतमंद लोगों को काला तिल उड़द की दाल सरसों का तेल कंबल या भोजन का दान करना पुण्यदायी माना जाता है। इसके अलावा कौओं गाय और काले कुत्ते को भोजन कराना भी शुभ माना जाता है। धार्मिक विश्वास है कि सेवा और दान से शनि देव की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आते हैं।

    शनिवार के दिन केवल पूजा ही नहीं बल्कि अपने आचरण पर भी विशेष ध्यान देना चाहिए। किसी का अपमान करने छल कपट करने या झूठ बोलने से बचना चाहिए। क्रोध विवाद और तामसिक भोजन से दूरी बनाए रखने की सलाह दी जाती है। सत्य ईमानदारी और परिश्रम के मार्ग पर चलने वाला व्यक्ति शनि देव की विशेष कृपा का पात्र माना जाता है।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शनि पूजा केवल अनुष्ठान नहीं बल्कि अच्छे कर्मों और अनुशासित जीवन का संदेश भी देती है। श्रद्धा विश्वास और सकारात्मक सोच के साथ की गई पूजा व्यक्ति के आत्मविश्वास को बढ़ाती है और जीवन की कठिन परिस्थितियों का सामना करने की शक्ति प्रदान करती है। यही कारण है कि प्रत्येक शनिवार को लाखों श्रद्धालु भगवान शनि की आराधना कर उनके आशीर्वाद की कामना करते हैं।

  • मानसून में तुलसी की सही देखभाल से बनी रहेगी हरियाली, इन आसान उपायों से पौधा रहेगा स्वस्थ और मजबूत

    मानसून में तुलसी की सही देखभाल से बनी रहेगी हरियाली, इन आसान उपायों से पौधा रहेगा स्वस्थ और मजबूत

    नई दिल्ली । भारतीय घरों में तुलसी का पौधा धार्मिक आस्था के साथ-साथ औषधीय गुणों और पर्यावरणीय महत्व के कारण विशेष स्थान रखता है। मानसून के मौसम में लगातार बारिश, अधिक नमी और सीमित धूप के कारण इस पौधे की देखभाल सामान्य दिनों की तुलना में अधिक आवश्यक हो जाती है। यदि इस दौरान उचित सावधानी न बरती जाए तो पौधे की पत्तियां पीली पड़ने लगती हैं, जड़ों में सड़न आ सकती है और उसकी वृद्धि प्रभावित हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि कुछ सरल उपाय अपनाकर बारिश के मौसम में भी तुलसी को स्वस्थ और हरा-भरा बनाए रखा जा सकता है।

    मानसून में सबसे पहले सिंचाई पर विशेष ध्यान देना जरूरी है। लगातार वर्षा के कारण मिट्टी में पहले से ही पर्याप्त नमी रहती है, इसलिए रोजाना पानी देने की आवश्यकता नहीं होती। पौधे में पानी डालने से पहले मिट्टी की ऊपरी सतह की नमी अवश्य जांच लेनी चाहिए। यदि मिट्टी गीली महसूस हो रही है तो अतिरिक्त पानी देने से बचना चाहिए, क्योंकि अत्यधिक नमी जड़ों को नुकसान पहुंचा सकती है।

    तुलसी के पौधे के लिए अच्छी जल निकासी भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। गमले के नीचे पर्याप्त छेद होने चाहिए ताकि अतिरिक्त पानी आसानी से बाहर निकल सके। यदि गमले में लंबे समय तक पानी जमा रहता है तो जड़ों में फफूंद और सड़न की समस्या उत्पन्न हो सकती है। गमले के नीचे रखी ट्रे में जमा पानी को भी समय-समय पर खाली करना लाभदायक माना जाता है।

    बारिश के दिनों में धूप कम मिलने के बावजूद जब भी मौसम साफ हो, पौधे को कुछ घंटों के लिए प्राकृतिक सूर्य प्रकाश में रखना चाहिए। प्रतिदिन तीन से चार घंटे की हल्की धूप मिलने से पौधे की वृद्धि बेहतर होती है और नई पत्तियों का विकास तेजी से होता है। पर्याप्त रोशनी मिलने से पौधे की प्रतिरोधक क्षमता भी मजबूत बनी रहती है।

    पौधे की नियमित सफाई और छंटाई भी मानसून के दौरान आवश्यक होती है। पीली, सूखी या रोगग्रस्त पत्तियों को समय-समय पर हटाने से पौधे की ऊर्जा नई शाखाओं और स्वस्थ पत्तियों के विकास में लगती है। इसके साथ ही संक्रमण फैलने की संभावना भी काफी कम हो जाती है और पौधा अधिक समय तक स्वस्थ बना रहता है।

    अधिक नमी के कारण इस मौसम में फफूंद और छोटे कीड़ों का खतरा बढ़ जाता है। यदि पत्तियों पर सफेद धब्बे, फफूंदी या कीट दिखाई दें तो तुरंत आवश्यक उपाय करने चाहिए। जैविक विकल्प के रूप में नीम के तेल का हल्का घोल उपयोग किया जा सकता है, जो पौधे को नुकसान पहुंचाए बिना कीटों और फफूंद को नियंत्रित करने में सहायक माना जाता है।

    पौधे को आवश्यक पोषण उपलब्ध कराने के लिए समय-समय पर जैविक खाद का उपयोग भी लाभकारी होता है। महीने में एक बार सीमित मात्रा में वर्मी कम्पोस्ट या अच्छी तरह सड़ी हुई जैविक खाद डालने से पौधे की वृद्धि बेहतर होती है। हालांकि अत्यधिक खाद का प्रयोग नहीं करना चाहिए, क्योंकि इससे जड़ों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। उचित सिंचाई, पर्याप्त धूप, साफ-सफाई और संतुलित पोषण के साथ मानसून के दौरान भी तुलसी का पौधा लंबे समय तक स्वस्थ, हरा-भरा और आकर्षक बना रह सकता है।

  • एमपी में मानसून ने पकड़ी रफ्तार, बारिश ने 25% कोटा किया पूरा, पन्ना-सतना में भारी बारिश का अलर्ट

    एमपी में मानसून ने पकड़ी रफ्तार, बारिश ने 25% कोटा किया पूरा, पन्ना-सतना में भारी बारिश का अलर्ट


    भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून अब पूरी रफ्तार में है। प्रदेश में अब तक सीजन की 25 प्रतिशत यानी 9.4 इंच बारिश दर्ज की जा चुकी है। राजधानी भोपाल, इंदौर, उज्जैन सहित 32 जिलों में सामान्य से अधिक बारिश हुई है। मौसम विभाग (IMD) का अनुमान है कि पूरे जुलाई महीने बारिश का सिलसिला जारी रहेगा, जिससे वर्षा का आंकड़ा और बढ़ने की संभावना है।

    मौसम विभाग ने अगले चार दिनों तक प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में हल्की से तेज बारिश की संभावना जताई है। पन्ना और सतना जिलों के लिए भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। इन दोनों जिलों में अगले 24 घंटे के दौरान 4 इंच या उससे अधिक बारिश हो सकती है।

    इसके अलावा भोपाल, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, इंदौर, झाबुआ, अलीराजपुर, धार, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, उज्जैन, नीमच, मंदसौर, रतलाम, आगर-मालवा, शाजापुर, देवास, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, ग्वालियर, श्योपुर, मुरैना, भिंड, दतिया, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, रीवा, सीधी, सिंगरौली, मऊगंज, मैहर, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, सागर, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी में भी बारिश होने का अनुमान है।

    11 जिलों में हुई बारिश, मंडला में सबसे अधिक पानी गिरा
    गुरुवार को भी प्रदेश के कई इलाकों में बारिश का दौर जारी रहा। मंडला में करीब पौन इंच बारिश दर्ज की गई, जबकि सिंगरौली में आधा इंच से अधिक और बालाघाट में लगभग आधा इंच पानी बरसा। बैतूल, ग्वालियर, नर्मदापुरम, जबलपुर, खजुराहो, सागर, सतना और सीधी में भी अच्छी बारिश रिकॉर्ड की गई।

    जुलाई के नौ दिनों में बदली तस्वीर
    जून महीने में आंधी और बारिश का सिलसिला जारी रहने के बावजूद प्रदेश में सामान्य से 30 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज हुई थी। हालांकि जुलाई के शुरुआती नौ दिनों में हुई तेज बारिश ने यह कमी पूरी कर दी। अब प्रदेश में सामान्य से 10 प्रतिशत अधिक बारिश रिकॉर्ड की जा चुकी है।

    आंकड़ों के अनुसार, मध्य प्रदेश में अब तक कुल 234.4 मिमी (9.4 इंच) बारिश हुई है, जबकि सामान्य औसत 212.3 मिमी (8.3 इंच) है। पूर्वी मध्य प्रदेश में सामान्य से 9 प्रतिशत कम बारिश हुई है, जबकि पश्चिमी हिस्से में औसत से 29 प्रतिशत अधिक वर्षा दर्ज की गई है।

  • तेलंगाना में Premier Energies का बड़ा विस्तार, 11.1 GW मॉड्यूल क्षमता के साथ क्लीन एनर्जी सेक्टर में मजबूत होगी पकड़

    तेलंगाना में Premier Energies का बड़ा विस्तार, 11.1 GW मॉड्यूल क्षमता के साथ क्लीन एनर्जी सेक्टर में मजबूत होगी पकड़

    नई दिल्ली । देश के सौर ऊर्जा क्षेत्र में अग्रणी कंपनियों में शामिल Premier Energies ने तेलंगाना के रंगारेड्डी जिले के सीतारामपुर में अत्याधुनिक सोलर मॉड्यूल निर्माण संयंत्र का संचालन शुरू कर अपनी उत्पादन क्षमता में बड़ा विस्तार किया है। नई 5.6 गीगावॉट क्षमता वाली इस इकाई के शुरू होने के साथ कंपनी की कुल सोलर मॉड्यूल निर्माण क्षमता बढ़कर 11.1 गीगावॉट हो गई है। कंपनी का कहना है कि यह विस्तार घरेलू और वैश्विक दोनों बाजारों में बढ़ती मांग को पूरा करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।

    नई निर्माण इकाई आधुनिक तकनीक से लैस है और पूरी तरह स्वचालित उत्पादन प्रणाली पर आधारित है। इस संयंत्र की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां हर चार सेकेंड में एक सोलर मॉड्यूल तैयार किया जा सकेगा। उत्पादन प्रक्रिया में ऑटोमेटेड मैटेरियल मूवमेंट, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित गुणवत्ता परीक्षण प्रणाली और अत्याधुनिक निर्माण तकनीकों का उपयोग किया गया है, जिससे उत्पादों की गुणवत्ता और उत्पादन दक्षता दोनों में सुधार होगा।

    कंपनी ने इस विस्तार के साथ 6 गीगावॉट-घंटे क्षमता वाले बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम और 18 हजार मीट्रिक टन क्षमता के एल्युमीनियम फ्रेम निर्माण संयंत्र की आधारशिला भी रखी है। इन परियोजनाओं का उद्देश्य सौर ऊर्जा से जुड़ी पूरी वैल्यू चेन में कंपनी की मौजूदगी को मजबूत करना है। इससे ऊर्जा भंडारण और सौर उपकरण निर्माण के क्षेत्र में भी कंपनी की क्षमता बढ़ेगी।

    करीब 75 एकड़ में फैला सीतारामपुर मैन्युफैक्चरिंग कैंपस कंपनी का प्रमुख उत्पादन केंद्र बनकर उभर रहा है। परियोजना पूरी तरह संचालित होने के बाद यहां तीन हजार से अधिक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियों को भी नई गति मिलेगी और स्थानीय अर्थव्यवस्था को लाभ होगा।

    कंपनी ने हाल ही में चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही के दौरान 3,011 करोड़ रुपये के नए ऑर्डर मिलने की जानकारी भी दी है। इन ऑर्डरों के तहत 1,846 मेगावॉट सोलर सेल और मॉड्यूल की आपूर्ति की जाएगी, जिसकी डिलीवरी वित्त वर्ष 2028 तक पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है। मजबूत ऑर्डर बुक कंपनी के भविष्य के कारोबार और उत्पादन विस्तार को भी समर्थन प्रदान करेगी।

    Premier Energies ने यह भी संकेत दिया है कि सितंबर 2026 तक उसकी सोलर सेल निर्माण क्षमता 3.6 गीगावॉट से बढ़कर 10.6 गीगावॉट तक पहुंच सकती है। इससे कंपनी सौर ऊर्जा उपकरण निर्माण के क्षेत्र में अपनी प्रतिस्पर्धी स्थिति और मजबूत करेगी। भारत में नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने की सरकारी नीतियों के बीच इस तरह का निवेश उद्योग के लिए भी सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

    कंपनी के विस्तार और मजबूत कारोबारी संभावनाओं का असर शेयर बाजार में भी दिखाई दिया। कारोबार के दौरान निवेशकों की खरीदारी बढ़ने से कंपनी का शेयर मजबूती के साथ बंद हुआ। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि उत्पादन क्षमता में वृद्धि, आधुनिक तकनीक का उपयोग और लगातार मिल रहे नए ऑर्डर आने वाले समय में कंपनी की विकास संभावनाओं को और मजबूत कर सकते हैं। Premier Energies का यह विस्तार भारत के स्वच्छ ऊर्जा मिशन और घरेलू विनिर्माण क्षमता को बढ़ाने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।