Author: bharati

  • ईरान-इजराइल जंग का असर: भारत में LPG इमरजेंसी, सरकार ने रिफाइनरियों को उत्पादन बढ़ाने का आदेश

    ईरान-इजराइल जंग का असर: भारत में LPG इमरजेंसी, सरकार ने रिफाइनरियों को उत्पादन बढ़ाने का आदेश


    नई दिल्ली। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और ईरान-इजराइल के बीच जारी संघर्ष का असर अब भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर भी दिखने लगा है। संभावित गैस संकट को देखते हुए भारत सरकार ने आपात कदम उठाते हुए देश की सभी ऑयल रिफाइनरी कंपनियों को रसोई गैस (LPG) का उत्पादन बढ़ाने का निर्देश दिया है। सरकार ने इमरजेंसी पावर का इस्तेमाल करते हुए आदेश जारी किया कि अब रिफाइनरियां अपने पास मौजूद प्रोपेन और ब्यूटेन का उपयोग प्राथमिकता से LPG बनाने में करें, ताकि घरेलू उपभोक्ताओं को गैस सिलेंडर की सप्लाई में कोई कमी न आए।

    रिपोर्ट्स के मुताबिक मिडिल ईस्ट में बढ़ते संघर्ष के कारण सप्लाई चेन प्रभावित होने की आशंका है। इसी खतरे को देखते हुए सरकार ने देर रात निर्देश जारी किए। आदेश के अनुसार अब रिफाइनरी कंपनियां इन गैसों का उपयोग अन्य औद्योगिक कामों में नहीं करेंगी, बल्कि इन्हें सीधे LPG उत्पादन में लगाया जाएगा।

    सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि प्रोपेन और ब्यूटेन की सप्लाई प्राथमिकता के आधार पर सरकारी तेल कंपनियों को दी जाएगी। इसमें प्रमुख रूप से Indian Oil Corporation, Hindustan Petroleum और Bharat Petroleum शामिल हैं। इस फैसले का उद्देश्य देश के करीब 33 करोड़ से अधिक LPG उपभोक्ताओं को बिना रुकावट गैस सिलेंडर उपलब्ध कराना है।

    LPG दरअसल प्रोपेन और ब्यूटेन गैसों का मिश्रण होती है, जो कच्चे तेल की रिफाइनिंग के दौरान निकलती हैं। इन गैसों का इस्तेमाल आम तौर पर पेट्रोकेमिकल उद्योग, प्लास्टिक निर्माण और ईंधन के रूप में भी किया जाता है। लेकिन मौजूदा हालात में सरकार ने इनका उपयोग मुख्य रूप से घरेलू गैस उत्पादन में करने का निर्देश दिया है।

    सरकार के इस फैसले का असर निजी कंपनियों पर भी पड़ सकता है। खासकर Reliance Industries जैसी कंपनियों के पेट्रोकेमिकल उत्पादन और निर्यात पर इसका असर पड़ने की संभावना है। प्रोपेन और ब्यूटेन के डायवर्जन के कारण अल्काइलेट्स जैसे उत्पादों का उत्पादन कम हो सकता है, जिनका उपयोग पेट्रोल की गुणवत्ता सुधारने में किया जाता है। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि इससे कंपनियों के मुनाफे पर भी दबाव पड़ सकता है, क्योंकि पेट्रोकेमिकल उत्पाद बाजार में LPG से ज्यादा कीमत पर बिकते हैं।

    स्थिति को और गंभीर बनाने वाली खबर कतर से आई है। रिपोर्ट्स के अनुसार ईरानी ड्रोन हमलों के बाद कतर ने अपने कुछ LNG प्लांट का उत्पादन अस्थायी रूप से रोक दिया है। इससे भारत को मिलने वाली गैस सप्लाई में लगभग 40 प्रतिशत तक कटौती हो गई है। भारत अपनी कुल LNG जरूरत का बड़ा हिस्सा कतर से आयात करता है, इसलिए यह रुकावट घरेलू बाजार पर सीधा असर डाल सकती है।

    सबसे बड़ी चिंता Strait of Hormuz को लेकर है, जो कतर और यूएई जैसे देशों से तेल-गैस सप्लाई का मुख्य समुद्री मार्ग है। युद्ध के कारण इस रास्ते से गुजरने वाले जहाजों की संख्या तेजी से घट गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक जहां 28 फरवरी को इस मार्ग से 91 जहाज गुजरे थे, वहीं अब यह संख्या घटकर लगभग 26 रह गई है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से आयात करता है।

    उधर गैस की कमी को लेकर सिटी गैस कंपनियों ने भी सरकार को चेतावनी दी है कि अगर हालात जल्द नहीं सुधरे, तो CNG और PNG की कीमतें बढ़ सकती हैं। उद्योग संगठनों का कहना है कि अगर कतर से सस्ती गैस नहीं मिली तो उन्हें स्पॉट मार्केट से महंगी गैस खरीदनी पड़ेगी, जिसकी कीमत फिलहाल दोगुनी से भी ज्यादा है।

    इस पूरे संकट को देखते हुए भारत सरकार फिलहाल घरेलू गैस आपूर्ति को सुरक्षित रखने के लिए हर संभव कदम उठा रही है, ताकि आम लोगों को रसोई गैस की किल्लत का सामना न करना पड़े।

  • PNB ने ATM कैश लिमिट आधी की: 1 अप्रैल से सिर्फ 50,000 रुपये निकाल सकेंगे कुछ कार्ड्स से..

    PNB ने ATM कैश लिमिट आधी की: 1 अप्रैल से सिर्फ 50,000 रुपये निकाल सकेंगे कुछ कार्ड्स से..


    नई दिल्ली । पंजाब नेशनल बैंक (PNB) ने अपने ग्राहकों की सुरक्षा और डिजिटल बैंकिंग को बढ़ावा देने के लिए एक अहम फैसला लिया है। बैंक ने 1 अप्रैल, 2026 से चुनिंदा डेबिट कार्ड्स से ATM कैश निकालने की लिमिट आधी कर दी है। इसका मकसद फ्रॉड और हैकिंग के जोखिम को कम करना है, साथ ही ग्राहकों को कैश के बजाय सुरक्षित डिजिटल और ऑनलाइन ट्रांजैक्शन के लिए प्रोत्साहित करना है।

    नई ATM लिमिट के तहत जिन कार्ड्स की पहले डेली लिमिट 1 लाख रुपये थी, उन्हें अब 50,000 रुपये तक सीमित कर दिया गया है। वहीं प्रीमियम कार्ड्स की लिमिट 1.5 लाख से घटाकर 75,000 रुपये कर दी गई है। अन्य सभी कार्ड्स पर कैश और ऑनलाइन/पॉइंट ऑफ सेल ट्रांजैक्शन लिमिट पहले जैसी ही रहेगी।

    बैंक का मानना है कि कैश निकालने की सीमा कम होने से ग्राहकों के पैसे सुरक्षित रहेंगे और फ्रॉड या हैकिंग जैसी घटनाओं में संभावित नुकसान भी घटेगा। इसके अलावा यह कदम डिजिटल बैंकिंग को बढ़ावा देने में मदद करेगा। PNB के अधिकारी बताते हैं कि ग्राहक अब अपनी नई लिमिट के अनुसार मोबाइल ऐप, इंटरनेट बैंकिंग, वॉट्सएप बैंकिंग या IVR के माध्यम से लिमिट को बदल या रिसेट कर सकते हैं।

    मोबाइल एप के जरिए लिमिट बदलने का तरीका काफी सरल है। सबसे पहले PNBOne एप में लॉगिन करें और Services ऑप्शन चुनें। इसके बाद Debit Cards सेक्शन खोलें और Update ATM Limit पर क्लिक करें। अब अपना अकाउंट नंबर और कार्ड सिलेक्ट करें, नई लिमिट भरें और ट्रांजैक्शन पासवर्ड डालकर कन्फर्म करें। इस तरह आपकी ATM लिमिट तुरंत अपडेट हो जाएगी।

    ATM विड्रॉल लिमिट वह अधिकतम राशि होती है, जिसे आप 24 घंटे में ATM से निकाल सकते हैं। बैंक सुरक्षा कारणों से अलग-अलग कार्ड्स पर अलग-अलग लिमिट निर्धारित करता है। PNB का यह नया बदलाव विशेष रूप से उन ग्राहकों को प्रभावित करेगा जो बड़े पैमाने पर कैश ट्रांजैक्शन करते हैं। हालांकि डिजिटल भुगतान और ऑनलाइन ट्रांजैक्शन की बढ़ती स्वीकार्यता के चलते यह बदलाव समयानुकूल माना जा रहा है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि कैश लिमिट में यह कटौती केवल सुरक्षा के लिहाज से ही नहीं, बल्कि डिजिटल लेन-देन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से भी की गई है। इससे ग्राहक सुरक्षित तरीके से अपने पैसे का प्रबंधन कर सकेंगे और डिजिटल बैंकिंग के उपयोग में वृद्धि होगी। बैंक ने यह भी स्पष्ट किया है कि ग्राहक अपनी आवश्यकता के अनुसार लिमिट को बढ़ा या घटा सकते हैं, जिससे सुविधा और सुरक्षा दोनों सुनिश्चित की जा सके।

    PNB का यह कदम देश के अन्य बैंकों के लिए भी एक संकेत है कि कैश निकालने की सीमा नियंत्रित करने से न केवल फ्रॉड की घटनाओं को रोका जा सकता है बल्कि डिजिटल और सुरक्षित बैंकिंग को भी बढ़ावा मिलता है। इस बदलाव के साथ, बैंकिंग ग्राहक अधिक सतर्क और तकनीकी रूप से सशक्त बनेंगे।

  • ग्वालियर: PM आवास की पानी टंकी में मरी छिपकलियां, 1300 परिवारों में दहशत

    ग्वालियर: PM आवास की पानी टंकी में मरी छिपकलियां, 1300 परिवारों में दहशत


    ग्वालियर । ग्वालियर के मानपुर क्षेत्र में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बने फ्लैटों की पानी टंकी में मरी हुई पांच छिपकलियां मिलने से इलाके में हड़कंप मच गया। इस टंकी से लगभग 1300 फ्लैटों में रहने वाले 5 हजार लोगों को पानी की आपूर्ति होती है।

    स्थानीय निवासियों का कहना है कि फेस वन के ब्लॉक ई 52 की टंकी में पानी की क्वॉलिटी पर पहले से ही शक था। पानी में गंदगी और बदबू महसूस होने के बाद कुछ लोगों ने टंकी की जांच की। ढक्कन खोलने पर टंकी में मरी हुई छिपकलियां पाई गईं। रहवासियों ने इन्हें बाहर निकाला और पूरे घटना का वीडियो भी बनाया, जो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

    कॉलोनी निवासी अनिक राभास नीलकमल मुदगल ने बताया कि टंकी में मरी छिपकलियों को उन्होंने बाहर निकाला और घटना का वीडियो भी बनाया। उनका कहना है कि कॉलोनी में सफाई और रखरखाव की स्थिति बहुत खराब है। नगर निगम की ओर से पर्याप्त सफाई कर्मी नहीं हैं और महीनों से कचरा नहीं उठाया गया।

    रहवासी राजेंद्र शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत अच्छे घर बने हैं, लेकिन नगर निगम की लापरवाही के कारण उनका सही उपयोग नहीं हो पा रहा। विकास तोमर ने बताया कि पिछले महीने नगर निगम और कलेक्टर को शिकायत देने के बाद सिर्फ दो टंकियों की सफाई हुई, जबकि 45 से अधिक टैंक अभी भी गंदे पड़े हैं।

    स्थानीय लोगों का कहना है कि अधिकांश घरों में आरओ या फिल्टर सिस्टम नहीं है और सीधे टंकी का पानी पीने और खाना बनाने में इस्तेमाल हो रहा है। इस घटना के बाद कई परिवारों ने टंकी का पानी पीना बंद कर दिया और बाहर से आरओ या कैन का पानी मंगाने लगे हैं।

    फ्लैटों में रहने वालों का आरोप है कि पिछले दो साल से पानी टंकी की नियमित सफाई नहीं हुई। ढक्कन भी ठीक से बंद नहीं है, जिससे कीड़े मकोड़े या अन्य जीव अंदर गिर सकते हैं। कॉलोनी के प्रतिनिधियों ने नगर निगम अधिकारियों से मुलाकात कर समस्या बताई थी, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। नगर निगम आयुक्त संघ प्रिया ने इस घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताया और कहा कि इंदौर में हुई घटना के बाद ग्वालियर में भी टंकियों की सफाई और ढकने की व्यवस्था कराई गई थी।

  • नीरव मोदी के भाई निहाल-नीशाल को कोर्ट नोटिस, PNB घोटाले में भगोड़ा घोषित करने की प्रक्रिया शुरू

    नीरव मोदी के भाई निहाल-नीशाल को कोर्ट नोटिस, PNB घोटाले में भगोड़ा घोषित करने की प्रक्रिया शुरू

    नई दिल्ली /मुंबई की एक विशेष अदालत ने पंजाब नेशनल बैंक के ₹23,780 करोड़ के काले घोटाले में नीरव मोदी के दो भाइयों, निहाल और नीशाल मोदी, को नोटिस जारी किया है। अदालत ने पूछा है कि उन्हेंभगोड़ा आर्थिक अपराधीFugitive Economic Offender घोषित क्यों न किया जाए। नोटिस के तहत दोनों को 7 मई तक अपना जवाब पेश करना होगा।

    प्रवर्तन निदेशालयED ने अदालत में अर्जी लगाकर दोनों भाइयों को भगोड़ा घोषित करने की मांग की थी। विशेष जज एवी गुजराती ने यह नोटिस जारी किया, और न सिर्फ निहाल और नीशाल, बल्कि नीरव मोदी की कंपनी के वरिष्ठ अधिकारियों आदित्य नानावती और संदीप मिस्त्री को भी इसी प्रकार का नोटिस भेजा गया।

    PNB घोटाला भारत के बैंकिंग इतिहास के सबसे बड़े मामलों में से एक माना जाता है। हीरा कारोबारी मेहुल चोकसी और नीरव मोदी पर आरोप है कि उन्होंने बैंक अधिकारियों को रिश्वत देकर फर्जी लेटर ऑफ अंडरटेकिंगLoUs और फॉरेन लेटर्स ऑफ क्रेडिटFLCs के जरिए ₹23,780 करोड़ से अधिक की हेराफेरी की। इस मामले में नीरव मोदी फिलहाल लंदन की जेल में हैं, जबकि मेहुल चोकसी बेल्जियम में प्रत्यर्पण प्रक्रिया का सामना कर रहे हैं।

    नीरव मोदी के भाइयों पर भी गंभीर आरोप हैं। निहाल मोदी पर आरोप है कि उन्होंने फर्जी कंपनियों और विदेशी लेनदेन के जरिए करोड़ों रुपए छिपाने में भूमिका निभाई। वे अमेरिका में गिरफ्तार हैं और प्रत्यर्पण प्रक्रिया में हैं। वहीं, नीशाल मोदी दुबई स्थित फर्जी कंपनियों में डमी पार्टनर्स की नियुक्ति और 2011-2013 के दौरान कई फर्जी कंपनियों में सिग्नेटरी या लाभार्थी बने रहने में शामिल थे।

    अगर अदालत 7 मई तक उनके संतोषजनक जवाब नहीं पाती है, तो दोनों भाइयों को भगोड़ा घोषित किया जाएगा। भगोड़ा घोषित होने के बाद भारत सरकार उनकी देश और विदेश में मौजूद संपत्तियों को कुर्क या जब्त कर सकेगी।

    नीरव मोदी को 2019 में भगोड़ा घोषित किया जा चुका है। मेहुल चोकसी के खिलाफ कार्रवाई अभी लंबित है। इस नए नोटिस के साथ मोदी परिवार के लिए कानूनी जाल और सख्त हो गया है। कोर्ट के इस कदम से न केवल संपत्ति जब्ती की प्रक्रिया तेज होगी, बल्कि उनकी अंतरराष्ट्रीय संपत्तियों पर भी कड़ी नजर रखी जा सकेगी।

    विशेषज्ञों के अनुसार, यह फैसला भारत में बड़े वित्तीय घोटालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का उदाहरण है। इसके साथ ही यह संकेत देता है कि प्रवर्तन एजेंसियां भगोड़ा घोषित करने और अपराधियों की संपत्ति कुर्क करने में तेजी ला रही हैं।

    नीरव मोदी और उनके परिवार के खिलाफ यह मामला अब कानूनी रूप से निर्णायक मोड़ पर पहुँच चुका है, और आगामी महीनों में इस घोटाले के विभिन्न पहलुओं पर नई कार्रवाई देखने को मिल सकती है।

  • ग्वालियर में ऊर्जा मंत्री और AAP नेता आमने-सामने: भू-माफिया संरक्षण के आरोप पर बंगले के बाहर गरमाया माहौल

    ग्वालियर में ऊर्जा मंत्री और AAP नेता आमने-सामने: भू-माफिया संरक्षण के आरोप पर बंगले के बाहर गरमाया माहौल


    ग्वालियर। ग्वालियर में गुरुवार को प्रदेश के ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर और आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता रोहित गुप्ता के बीच तीखी नोकझोंक हो गई। मामला मंत्री के रेस कोर्स रोड स्थित बंगले के बाहर उस समय गरमा गया जब AAP नेता ने मंत्री पर भू-माफियाओं को संरक्षण देने का आरोप लगाया। दोनों के बीच हुई बहस का वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

    जानकारी के अनुसार AAP नेता रोहित गुप्ता एडवोकेट गुरुवार दोपहर ओबीसी महासभा के संस्थापक और राष्ट्रीय अध्यक्ष विजय कुमार के साथ ऊर्जा मंत्री के बंगले पर पहुंचे थे। उनका आरोप था कि गांधीनगर क्षेत्र में मंत्री के करीबी गुड्डू उर्फ गौरव बाजपेयी ने पानी की टंकी के पास स्थित विजय कुमार के फ्लैट पर अवैध कब्जा कर रखा है। पीड़ित का कहना है कि इस मामले में कई बार शिकायत करने के बावजूद अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।

    बताया गया कि जब रोहित गुप्ता ने मंत्री से इस मुद्दे पर सवाल उठाए तो दोनों के बीच तीखी बहस शुरू हो गई। इस दौरान मंत्री कथित तौर पर नाराज हो गए और कहा, “तुम्हारी औकात क्या है, बकवास मत करो। मुझे शिकायत करने क्यों आए हो, मैं कोई कार्रवाई नहीं करवाऊंगा।” घटना के दौरान मौजूद लोगों ने पूरी बातचीत का वीडियो बना लिया, जो अब सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है।

    पीड़ित विजय कुमार का कहना है कि उन्होंने इस मामले को लेकर पुलिस थाना, कलेक्टर, आईजी और डीआईजी सहित कई प्रशासनिक अधिकारियों को लिखित शिकायत दी थी। इसके अलावा उन्होंने ऊर्जा मंत्री को भी कई बार आवेदन देकर मदद की मांग की, लेकिन अब तक फ्लैट खाली नहीं कराया गया। उनका आरोप है कि आरोपी मंत्री के नाम का डर दिखाकर उन्हें लगातार धमका रहा है।

    घटना के बाद आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं में नाराजगी देखी जा रही है। पार्टी नेताओं का कहना है कि जब तक ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर पीड़ित से माफी नहीं मांगते और फ्लैट को कब्जे से मुक्त नहीं कराया जाता, तब तक उनका विरोध जारी रहेगा।

    इस पूरे घटनाक्रम ने ग्वालियर की राजनीति में हलचल पैदा कर दी है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के बाद मामले को लेकर सियासी बयानबाजी भी तेज हो सकती है। फिलहाल प्रशासन की ओर से इस विवाद पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

  • एजेंट अर्थव्यवस्था का भविष्य: भारत में एआई और क्रिप्टो का सामंजस्य और नीति की भूमिका

    एजेंट अर्थव्यवस्था का भविष्य: भारत में एआई और क्रिप्टो का सामंजस्य और नीति की भूमिका

    नई दिल्ली । जैसे-जैसे डिजिटल अर्थव्यवस्था का दायरा बढ़ रहा है, भारत में एआई और क्रिप्टो का संगम एक नई तकनीकी संरचना को जन्म दे रहा है। शुरुआती दौर में जब जनरेटिव एआई ने वैश्विक स्तर पर ध्यान आकर्षित किया, तब क्रिप्टो क्षेत्र में प्रतिक्रियाएं सतही और ट्रेंड आधारित थीं। “एआई टोकन” तेजी से फैल रहे थे, लेकिन उनका वास्तविक उपयोग सीमित नजर आता था। 2026 की शुरुआत तक यह दौर धीरे-धीरे कमजोर पड़ने लगा और अब एक अधिक गंभीर दिशा उभर रही है।

    मूल सवाल केवल बड़े भाषा मॉडलों को ब्लॉकचेन पर रखने का नहीं है। असली चुनौती यह है कि ब्लॉकचेन नेटवर्क को भरोसेमंद आधारभूत ढांचे के रूप में इस्तेमाल किया जाए-ऐसा ढांचा जो एआई आधारित गतिविधियों को प्रमाणित कर सके, प्रोत्साहनों को संतुलित करे, डिजिटल संसाधनों का मूल्य तय कर सके और उन प्रतिभागियों के बीच ऑडिट योग्य रिकॉर्ड बनाए रख सके, जो एक-दूसरे पर भरोसा नहीं करते।

    एआई और ब्लॉकचेन अलग-अलग समस्याओं के समाधान के लिए बनाए गए हैं। एआई स्वचालन, सामग्री निर्माण और बड़े पैमाने पर निर्णय लेने की क्षमता देता है, लेकिन पारदर्शिता और जवाबदेही की चुनौतियों को नहीं हल करता। इसके विपरीत, सार्वजनिक ब्लॉकचेन धीमे और सीमित होते हुए भी सत्यापन, नियमों का अनुपालन और अविश्वास की स्थिति में साझा डेटा की विश्वसनीयता बनाए रखते हैं। इस कारण, दोनों तकनीकों का संयोजन व्यावहारिक जरूरत बनकर सामने आ रहा है-एआई बुद्धिमत्ता और क्रिप्टो भरोसे का आधार प्रदान करता है।

    वैश्विक उदाहरण इस दिशा को दर्शाते हैं। बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट्स का प्रोजेक्ट एटलस यूरोपीय केंद्रीय बैंकों के सहयोग से क्रिप्टो प्रवाह का विश्लेषण करता है और नियामकीय निगरानी को अधिक स्पष्ट बनाता है। सिंगापुर में TokenAIse जैसे जनरेटिव एआई उपकरण क्रिप्टो टोकनाइजेशन को समझने और अपनाने में मदद कर रहे हैं। वियतनाम और दक्षिण कोरिया जैसी परियोजनाएं ब्लॉकचेन का उपयोग औद्योगिक अनुपालन, डिजिटल सत्यापन और उत्पाद जीवनचक्र की पारदर्शिता के लिए कर रही हैं।

    भारत के लिए यह महत्वपूर्ण नीतिगत मोड़ है। इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 और फ्रंटियर एआई एजेंडा ने साफ संदेश दिया कि एआई उपयोगी, समावेशी और जवाबदेह होना चाहिए। वहीं क्रिप्टो नीति अभी भी अनुपालन-केंद्रित है-कड़े एंटी-मनी लॉन्ड्रिंग नियम और रिपोर्टिंग बाध्यताएं हैं। इस स्थिति में अवसर है कि क्रिप्टो को केवल ट्रेडिंग गतिविधि के बजाय एआई शासन और भरोसेमंद डिजिटल ढांचे के लिए इस्तेमाल किया जाए।

    क्यों जरूरी है? क्योंकि डीपफेक, स्वचालित फ़िशिंग और बॉट आधारित ठगी जैसी धोखाधड़ी तेजी से फैल रही है। पारदर्शी लेजर लेनदेन, ऑन-चेन निगरानी और गोपनीयता-संवेदनशील पहचान प्रणालियां इस चुनौती का समाधान दे सकती हैं। एफएटीएफ का ध्यान स्थिर मुद्राओं और ट्रैवल रूल अनुपालन पर भी इसी दिशा में संकेत देता है।

    भारत में एआई और क्रिप्टो का भविष्य केवल नए टोकनों या विकेंद्रीकरण से तय नहीं होगा। यह इस बात पर निर्भर करेगा कि डिजिटल प्रणालियों पर कितना भरोसा किया जा सकता है। एक जिम्मेदार एजेंट अर्थव्यवस्था के निर्माण के लिए ब्लॉकचेन भरोसे की परत बन सकता है और एआई को सुरक्षित, उत्तरदायी और ऑडिट योग्य ढांचे में जोड़ सकता है। यही भारत को नई तकनीकी संरचना में नेतृत्व देने का वास्तविक अवसर है।

  • भारत को वैश्विक कृषि प्रतिस्पर्धा में लाने की तैयारी : पीएम मोदी ने निर्यात, तकनीक और फसल विविधीकरण पर जोर दिया

    भारत को वैश्विक कृषि प्रतिस्पर्धा में लाने की तैयारी : पीएम मोदी ने निर्यात, तकनीक और फसल विविधीकरण पर जोर दिया


    नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को कहा कि अब समय आ गया है कि भारत में निर्यात आधारित कृषि उत्पादन को बढ़ाया जाए और इसे वैश्विक सप्लाई चेन से जोड़ा जाए। इससे न केवल नए रोजगार पैदा होंगे बल्कि किसानों को सशक्त बनाने में भी मदद मिलेगी। प्रधानमंत्री ने यह बात ‘कृषि और ग्रामीण परिवर्तन’ विषय पर आयोजित पोस्ट-बजट वेबिनार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से संबोधित करते हुए कही।

    प्रधानमंत्री ने जोर दिया कि कृषि हमारी अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार और रणनीतिक स्तंभ है। उन्होंने कहा कि 21वीं सदी की दूसरी तिमाही की शुरुआत हो चुकी है और कृषि क्षेत्र में नई ऊर्जा का संचार करना समय की मांग है। वैश्विक बाजार में मांग तेजी से बदल रही है और इसलिए अब चर्चा निर्यात आधारित खेती, फसल विविधीकरण और नई तकनीकों के इस्तेमाल पर केंद्रित होनी चाहिए।

    पीएम मोदी ने केंद्रीय बजट 2026-27 में किसानों की उत्पादकता और आय बढ़ाने के लिए कई अहम सुधारों का जिक्र किया। उन्होंने कृषि विशेषज्ञों, उद्योग जगत और किसानों से मिलकर काम करने की अपील की ताकि उच्च मूल्य वाली खेती को बढ़ावा दिया जा सके और भारत को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाया जा सके। इसके साथ ही उन्होंने गुणवत्ता और ब्रांडिंग मानकों को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

    प्रधानमंत्री ने जैविक और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की भी बात कही। उनका कहना था कि इससे समग्र स्वास्थ्य को भी बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने मत्स्य पालन को भविष्य का बड़ा निर्यात आधारित क्षेत्र बताते हुए कहा कि इसमें नए बिजनेस मॉडल और उद्यमियों की भागीदारी बढ़ानी होगी।

    पीएम मोदी ने उच्च मूल्य वाली फसलों जैसे काजू, नारियल, चंदन, अगरवुड, बादाम, अखरोट और पाइन नट्स की संभावनाओं पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने पशुपालन और तटीय मत्स्य क्षेत्र में निजी निवेश और उद्यमियों की भूमिका बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया। साथ ही महिला स्वयं सहायता समूहों द्वारा बनाए गए उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने के लिए एसएचई-मार्ट जैसे प्लेटफॉर्म का विस्तार करने की भी बात कही।

    प्रधानमंत्री ने डिजिटल कृषि के क्षेत्र में किए गए प्रयासों का जिक्र करते हुए बताया कि भारत में अब तक 7.63 करोड़ से अधिक किसान आईडी बनाई जा चुकी हैं और डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन के तहत 23.5 करोड़ फसल प्लॉट का सर्वे किया गया है।

    केंद्रीय बजट 2026-27 में उच्च मूल्य वाली खेती, तकनीक आधारित खेती और कृषि से जुड़े क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया गया। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने किसानों की आय बढ़ाने, रोजगार सृजन और कृषि के आधुनिकीकरण के लिए कई लक्षित कदमों की घोषणा की। बजट में कृषि क्षेत्र के लिए 1,62,671 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है, जो पिछले वर्ष के संशोधित अनुमान से लगभग 7 प्रतिशत अधिक है।

    प्रधानमंत्री ने बताया कि तटीय क्षेत्रों में नारियल, चंदन, कोको और काजू जैसी उच्च मूल्य वाली फसलों को बढ़ावा दिया जाएगा। वहीं पूर्वोत्तर और पहाड़ी क्षेत्रों में अगरवुड, बादाम, अखरोट और पाइन नट्स की खेती को समर्थन मिलेगा। इन कदमों से किसानों की आय बढ़ेगी, रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और भारत की कृषि को वैश्विक स्तर पर मजबूती मिलेगी।

  • डिजिटल भुगतान का बढ़ता दबदबा, सरकारी बैंकों ने दिखाया निजी बैंकों से आगे निकलने का दम

    डिजिटल भुगतान का बढ़ता दबदबा, सरकारी बैंकों ने दिखाया निजी बैंकों से आगे निकलने का दम

    नई दिल्ली में जारी रिपोर्ट के अनुसार जनवरी 2026 में ऑनलाइन क्रेडिट कार्ड लेनदेन में सरकारी बैंकों ने निजी बैंकों को पीछे छोड़ दिया है। कुल ऑनलाइन लेनदेन में सालाना आधार पर 7.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जिसमें सरकारी बैंकों का आंकड़ा 31.5 प्रतिशत तक पहुंच गया, जबकि निजी बैंकों की वृद्धि केवल 2.7 प्रतिशत रही।

    केयरएज की रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि जनवरी में क्रेडिट कार्ड खर्च सालाना आधार पर 8.1 प्रतिशत बढ़कर 2.05 लाख करोड़ रुपए तक पहुँच गया। इसी अवधि में सरकारी बैंकों ने बकाया कार्डों में 7.1 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की, जो निजी बैंकों की तुलना में काफी अधिक है।

    डिजिटल भुगतान में तेजी का सबसे बड़ा योगदान ई-कॉमर्स का रहा है, जो कुल लेनदेन का 61 प्रतिशत से अधिक हिस्सा बना। इस बीच, एसबीआई ग्रुप का कार्ड बेस भी मजबूत हुआ और सालाना आधार पर 7 प्रतिशत बढ़कर 2.19 करोड़ कार्ड धारकों तक पहुँच गया।

    इसके विपरीत विदेशी बैंकों द्वारा जारी क्रेडिट कार्ड में सालाना आधार पर 6 प्रतिशत की गिरावट देखी गई। रिपोर्ट में इसका कारण उनकी प्रीमियम ग्राहक रणनीतियों से जोड़ा गया है।

    हालांकि, विवेकाधीन खरीदारी में साल के अंत में बढ़ोतरी देखने को मिली, जिससे समग्र वृद्धि में कुछ नरमी के संकेत मिले। महीने-दर-महीने आधार पर खर्च में 2.3 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जो पिछले वर्ष जनवरी में 13.8 प्रतिशत की वृद्धि के उच्च आधार प्रभाव के कारण कम रही।

    कुल बकाया क्रेडिट कार्डों की संख्या जनवरी 2025 में 10.9 करोड़ से बढ़कर जनवरी 2026 में 11.7 करोड़ हो गई। यह सालाना आधार पर 7.1 प्रतिशत और पिछले महीने की तुलना में 0.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाती है। इस दौरान कुल बकाया क्रेडिट कार्ड बैलेंस 2.95 लाख करोड़ रुपए रहा।

    निजी क्षेत्र के बैंकों ने कार्ड जारी करने में अग्रणी भूमिका निभाई और सालाना आधार पर 7.6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की। इसका श्रेय उनके मजबूत वितरण नेटवर्क और ई-कॉमर्स तथा फिनटेक प्लेटफॉर्म के साथ सह-ब्रांडेड साझेदारियों को दिया गया है।

    वित्त वर्ष 2026 के अब तक के आंकड़ों पर नजर डालें तो क्रेडिट कार्ड पर खर्च में लगभग 13 प्रतिशत की सालाना वृद्धि हुई और कुल खर्च 19.7 लाख करोड़ रुपए तक पहुँच गया। यह संकेत देता है कि डिजिटल भुगतान और ऑनलाइन शॉपिंग की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है और सरकारी बैंकों ने इस क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत की है।
  • भोपाल में 'दोस्ती' की खूनी सजा: सेल्समैन का अपहरण कर बेल्ट-डंडों से पीटा, अधमरा कर अस्पताल में फेंका

    भोपाल में 'दोस्ती' की खूनी सजा: सेल्समैन का अपहरण कर बेल्ट-डंडों से पीटा, अधमरा कर अस्पताल में फेंका


    भोपाल। राजधानी के कोलार क्षेत्र में आपसी रंजिश और गैंगवार जैसी मानसिकता ने एक 22 वर्षीय युवक की जान जोखिम में डाल दी। गारमेंट्स शॉप में काम करने वाले दिनेश अहिरवार को सिर्फ इसलिए अगवा कर बेरहमी से पीटा गया क्योंकि वह बदमाशों के दुश्मन का दोस्त था। आरोपियों ने न केवल उसे मरणासन्न स्थिति में पहुंचाया, बल्कि पकड़े जाने के डर से ‘एक्सीडेंट’ की झूठी कहानी रचकर उसे अस्पताल छोड़ दिया।
    बांसखेड़ी पुलिया से ‘किडनैपिंग’ और 2 घंटे का टॉर्चर घटना 4 मार्च 2026 की दोपहर की है। दिनेश जब बांसखेड़ी पुलिया के पास से गुजर रहा था, तभी निक्की शुक्ला, आकाश प्रजापति और उनके 5-6 साथियों ने उसे घेर लिया।बदमाशों ने चिल्लाकर कहा, तू विशु शर्मा के साथ क्यों घूमता है? उससे हमारी पुरानी रंजिश है, अब उसकी दोस्ती का खामियाजा तुझे भुगतना होगा। बर्बरता: आरोपी उसे जबरन कार में डालकर सोम्या ग्रीन सिटी के पास एक सुनसान इलाके में ले गए।
    वहां करीब दो घंटे तक उसे लाठी, डंडों और बेल्ट से तब तक पीटा गया जब तक वह बेहोश नहीं हो गया। मारपीट इतनी भीषण थी कि दिनेश की उंगलियां फ्रैक्चर हो गई और पूरा शरीर नीली चोटों से भर गया। शातिर दिमाग: पिटाई के बाद रचा ‘एक्सीडेंट’ का ड्रामा जब दिनेश बेहोश हो गया, तो आरोपी घबरा गए। खुद को बचाने के लिए उन्होंने एक शातिर चाल चली वे दिनेश को कोलार रोड स्थित सीएचसी अस्पताल ले गए। दिनेश के ही मोबाइल से उसकी बहन शिवानी को फोन किया और झूठ बोला कि तुम्हारे भाई का एक्सीडेंट हो गया है, जल्दी अस्पताल पहुंचो।
    परिवार जब अस्पताल पहुंचा तो वहां दिनेश लहूलुहान हालत में मिला, जिसके बाद सच्चाई सामने आई। पुलिसिया कार्रवाई: पुराने बदमाशों पर शिकंजा कोलार थाना प्रभारी संजय सोनी के अनुसार, दिनेश के बयानों के आधार पर निक्की शुक्ला, आकाश, तिलक, दिव्यांशु, नन्नू, अजय और अमन प्रजापति के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज कर ली गई है। आपराधिक रिकॉर्ड: पुलिस ने बताया कि इन आरोपियों का पहले भी आपराधिक रिकॉर्ड रहा है। तलाश जारी: आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की टीमें अलग-अलग ठिकानों पर दबिश दे रही हैं। “यह घटना भोपाल में बढ़ते ‘स्ट्रीट क्राइम’ और बेखौफ बदमाशों की बानगी है, जहां किसी से दोस्ती रखना भी अब जानलेवा साबित हो सकता है। पुलिस के लिए इन आदतन अपराधियों को सलाखों के पीछे भेजना एक बड़ी चुनौती है।”
  • उज्जैन में सड़क चौड़ीकरण पर BJP विधायक का विरोध, बोले- जनता के साथ कंधे से कंधा मिलाकर लड़ूंगा

    उज्जैन में सड़क चौड़ीकरण पर BJP विधायक का विरोध, बोले- जनता के साथ कंधे से कंधा मिलाकर लड़ूंगा


    उज्जैन । मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले में सड़क चौड़ीकरण को लेकर तनाव बढ़ता जा रहा है। उज्जैन उत्तर से भाजपा विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा ने पिपलीनाका क्षेत्र में सड़क चौड़ी करने के सरकारी फैसले का विरोध करते हुए चेतावनी दी है कि यदि सड़क 24 मीटर से अधिक चौड़ी की गई तो वह खुद जन आंदोलन का नेतृत्व करेंगे।

    विधायक का कहना है कि सड़क चौड़ीकरण से कई परिवारों की रोजी रोटी प्रभावित होगी लेकिन अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को गलत जानकारी दी है। अनिल जैन ने जनता से वादा किया कि उनकी मांग पूरी नहीं हुई तो वह सड़क पर जनता के साथ खड़े रहेंगे। जानकारी के अनुसार भैरवगढ़ रोड के किनारे लगभग 410 घर हैं। इनमें से कई बच्चों के बोर्ड एग्जाम भी चल रहे हैं। नगर निगम ने 7 दिन में घर खाली करने का नोटिस जारी किया है। नोटिस के मुताबिक कई घरों का हिस्सा 10 फीट से 20 फीट तक ही बचेगा जबकि बाकी को बुलडोजर से तोड़ने की तैयारी है।

    नोटिस मिलने के बाद स्थानीय लोग आक्रोशित हो गए। उन्होंने विधायक के कार्यालय का घेराव किया और सरकार व विधायक के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। विधायक ने कहा कि यदि सड़क 24 मीटर से अधिक चौड़ी हुई तो वह खुद सड़क पर उतरकर जनता का समर्थन करेंगे। स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क चौड़ीकरण 150 फीट की योजना से शुरू हुई थी जिसे बाद में घटाकर 100 फीट कर दिया गया। वहीं निवासी 80 फीट चौड़ी सड़क की मांग कर रहे हैं ताकि कई घरों के टूटने से बचा जा सके।

    अनिल जैन ने कहा कि जनता की भावना का सम्मान करना उनका फर्ज है। उन्होंने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष से कहा कि प्रशासन और अधिकारी कभी कभी मुख्यमंत्री को गलत जानकारी दे देते हैं जिससे जनता को परेशानी होती है। यह कोई पहली बार नहीं है जब विधायक सरकार के खिलाफ मुखर हुए हैं। पहले वे लैंड पूलिंग एक्ट के विरोध में भी सामने आ चुके हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री को चिट्ठी लिखकर चेतावनी दी थी कि यदि एक्ट वापस नहीं लिया गया तो वे किसानों के विरोध में शामिल होंगे।

    विधायक ने बताया कि सिंहस्थ के दौरान उन्होंने सरकार की लैंड पूलिंग स्कीम का समर्थन किया था। लेकिन बाद में उन्हें पता चला कि यह स्कीम अभी भी लागू है जिसके चलते उन्होंने किसानों के हित और सम्मान में विरोध जारी रखने का निर्णय लिया। स्थानीय प्रशासन जल्द ही साइट पर सड़क चौड़ीकरण का काम शुरू करने की तैयारी कर रहा है जबकि विधायक और जनता की मांगों के बीच स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है।