Author: bharati

  • अमेरिका-ईरान में जुबानी जंग तेज, अराघची ने मार्को रुबियो पर साधा निशाना

    अमेरिका-ईरान में जुबानी जंग तेज, अराघची ने मार्को रुबियो पर साधा निशाना


    नई दिल्ली ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव के बीच मंगलवार को जुबानी जंग तेज हो गई। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिकी विदेश सचिव मार्को रुबियो के हालिया बयान पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि “ईरान से कभी कोई खतरा था ही नहीं” और अमेरिकी कार्रवाई महज एक बहाना थी। अराघची ने दोनों देशों के नागरिकों के खून-खराबे के लिए सीधे तौर पर इजरायल को जिम्मेदार ठहराया और कहा कि अमेरिका ने इजरायल की ओर से अपनी मर्जी से युद्ध लड़ा है।

    क्या कहा था रुबियो ने?
    सोमवार को मीडिया से बातचीत में मार्को रुबियो ने कहा था कि अमेरिका ने ईरान पर हमला तब किया जब उसे जानकारी मिली कि उसका सहयोगी इजरायल सैन्य कार्रवाई की तैयारी कर रहा है।

    रुबियो के मुताबिक, वॉशिंगटन को आशंका थी कि इजरायल की कार्रवाई के बाद तेहरान क्षेत्र में तैनात अमेरिकी सेना के खिलाफ जवाबी हमला कर सकता है। उन्होंने कहा,
    “हमें पता था कि इजरायल कार्रवाई करने वाला है। यदि हम पहले कदम नहीं उठाते, तो हमें ज्यादा नुकसान उठाना पड़ सकता था। रुबियो ने यह भी स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति Donald Trump के प्रशासन का मानना था कि ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई आवश्यक थी, भले ही इसका घोषित उद्देश्य ईरानी शासन का अंत नहीं था।

    अराघची का तीखा जवाब
    रुबियो के बयान के बाद अब्बास अराघची ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा,
    “मिस्टर रुबियो ने वह माना जो हम सब जानते थे। अमेरिका ने इजरायल की तरफ से अपनी मर्जी से जंग लड़ी है। ईरान से कभी कोई खतरा था ही नहीं।”

    उन्होंने आरोप लगाया कि इस पूरे घटनाक्रम में अमेरिकी और ईरानी दोनों नागरिकों का खून बहा है, जिसकी जिम्मेदारी इजरायल पर है। अराघची ने लिखा,
    “अमेरिकी लोग इससे बेहतर के हकदार हैं।”

    ईरान का यह बयान साफ संकेत देता है कि तेहरान अमेरिकी कार्रवाई को आत्मरक्षा नहीं, बल्कि पूर्व-नियोजित आक्रामक कदम मान रहा है।

    तेहरान हमले पर नया खुलासा
    इससे पहले अमेरिकी रक्षा सचिव Pete Hegseth ने कहा था कि शनिवार को तेहरान में हुआ हमला इजरायल द्वारा किया गया था। इस हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता Ali Khamenei और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के मारे जाने की खबर सामने आई थी। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, खुफिया जानकारी से संकेत मिला था कि खामेनेई उस समय एक अहम बैठक में मौजूद थे। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अब तक नहीं हुई है।

    बढ़ता कूटनीतिक टकराव
    रुबियो ने यह भी कहा कि अमेरिका “खामेनेई प्रतिष्ठान के अंत” को देखना पसंद करेगा, लेकिन मौजूदा सैन्य अभियान का घोषित लक्ष्य शासन परिवर्तन नहीं है। दूसरी ओर, ईरान इस पूरी कार्रवाई को क्षेत्रीय अस्थिरता का कारण बता रहा है और अमेरिका-इजरायल पर संयुक्त साजिश का आरोप लगा रहा है।

    मानना है कि दोनों देशों के बीच बयानबाजी का यह दौर आगे और तीखा हो सकता है। पश्चिम एशिया पहले ही अस्थिर हालात से गुजर रहा है, ऐसे में कूटनीतिक संवाद के बजाय आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा सकती है।

  • अमेरिका ने ईरान के दो महत्वपूर्ण नेवल बेस को किया तबाह, युद्ध का चौथा दिन, जानें 10 बड़ी बातें

    अमेरिका ने ईरान के दो महत्वपूर्ण नेवल बेस को किया तबाह, युद्ध का चौथा दिन, जानें 10 बड़ी बातें


    तेहरान। अमेरिका ने ईरानी नेवी के दो सबसे महत्वपूर्ण नेवल बेस बंदर अब्बास नेवल बेस और कोनार्क नेवल बेस-पर भीषण हमले किए हैं। अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद इन दोनों नेवल बेस को लेकर कई सैटेलाइट तस्वीरें सामने आई हैं। इन तस्वीरों में बंदर अब्बास नेवल बेस पर तैनात IRINS मकरान सी बेस-टाइप जहाज पर आग लगी हुई दिख रही है। बंदर अब्बास ईरान के होर्मुज स्ट्रेट को कंट्रोल करने के उद्देश्य से बनाया गया नौसेना बेस होने के साथ-साथ ईरानी नौसेना का मुख्य हेडक्वार्टर भी है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने कहा है कि ईरान की नौसेना फोर्स को खत्म करना अमेरिकी अधिकारियों का मुख्य मकसद है। अमेरिका ने अब तक 10 ईरानी जहाजों को नुकसान पहुंचाने की बात भी कही है।

    बंदर अब्बास नेवल बेस की तबाही
    प्लैनेट लैब्स की तरफ से जारी की गई सैटेलाइट तस्वीरों में रात को ली गई बंदर अब्बास नेवल बेस की स्थिति का पता चलता है। तस्वीरों में ईरानी नेवी का मुख्य हेडक्वार्टर और इसके कई सबसे काबिल जहाज और सबमरीन तैनात दिख रहे हैं। तस्वीरों में नेवल बेस के ज्यादातर हिस्सों में घना काला धुआं उठता हुआ दिखाई दे रहा है। फैसेलिटी के कई हिस्सों पर हमले का असर साफ देखा जा सकता है। तस्वीरों के आकलन से यह भी पता चलता है कि फ्लोटिंग डॉक को गंभीर नुकसान पहुंचा है, पेट्रोल बोट डैमेज हो चुके हैं और कई बिल्डिंग पूरी तरह से ध्वस्त हो चुकी हैं।

    तस्वीरों से स्पष्ट है कि IRINS मकरान जहाज पर हमला किया गया है। इसे नौसेना अड्डे के दक्षिणी छोर पर एक बर्थ पर डॉक किया गया था। यह जहाज मूल रूप से एक ऑयल टैंकर था जिसे ईरानी अधिकारियों ने “फॉरवर्ड बेस शिप” में बदल दिया था। इसके आगे का हिस्सा बड़ा खुला फ्लाइट डेक और कई अन्य खूबियों से लैस था। मकरान जहाज ने 2021 में कमीशन होने के बाद कई बार विदेश यात्राएं की हैं और यह उन कई समुद्री बेस जैसे जहाजों में से एक है जिन्हें ईरान ने हाल के सालों में सेवा में लगाया। 2 मार्च की तस्वीरों की तुलना पहले की तस्वीरों से करने पर लगता है कि एक या दो फ्रिगेट साइज के वॉरशिप पर भी हमला हुआ है। ये साफ तौर पर पोर्ट पर सबसे कीमती टारगेट में से एक थे। पोर्ट में जो एक किलो क्लास पनडुब्बी और छोटी पनडुब्बी हैं, उन्हें कोई नुकसान नहीं पहुंचा है। कुछ अन्य सैटेलाइट तस्वीरों से पता चलता है कि ईरानी नौसना के कई और मुख्य युद्धपोत शायद तबाह हो गए या उन्हें गंभीर नुकसान पहुंचा है। बंदर अब्बास पोर्ट ईरान के होर्मोज़्गन प्रांत की राजधानी बंदर अब्बास में स्थित है और हॉर्मुज जलडमरूमध्य इसके बिल्कुल पास है।

    कोनार्क पोर्ट पर भी अमेरिकी हमले
    बंदर अब्बास की तस्वीर में धुएं की वजह से यह अंदाजा लगाना मुश्किल है कि पोर्ट में कितने जहाजों को नुकसान हुआ। 2 मार्च की तस्वीर की तुलना 26 फरवरी की तस्वीर से करने पर साफ पता चलता है कि कई छोटी नावें और कुछ बड़े जहाज पोर्ट से बाहर कर दिए गए। संभव है कि कुछ जहाज डूब गए हों, लेकिन इसके कोई स्पष्ट संकेत नहीं दिख रहे हैं। फिर भी ईरानी नौसेना के कई जहाज अभी भी बचे हैं और ड्राईडॉक में कई जंगी जहाज दिखाई दे रहे हैं।

    बंदर अब्बास के बाहर भी ईरानी नौसेना के एसेट्स पर हमला हुआ। सैटेलाइट तस्वीरों से पता चलता है कि ईरान के दक्षिण-पूर्वी सिरे के पास कोनार्क में पोर्ट पर हमले हुए। कई जंगी जहाज नष्ट हो गए या उन्हें गंभीर नुकसान पहुंचा। शुरुआती अनुमान में यह अलवंद क्लास का फ्रिगेट बताया गया, लेकिन बाद में यूएस सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने इसे मौज क्लास के वॉरशिप के रूप में पहचाना, जिसे कभी-कभी जमरान क्लास भी कहा जाता है। कोनार्क पोर्ट ईरान के सिस्तान और बलूचिस्तान प्रांत में स्थित है और चाबहार बंदरगाह के ठीक बगल, ओमान की खाड़ी के पास स्थित है।

    युद्ध के चौथे दिन की 10 बड़ी बातें
    1. 28 फरवरी को युद्ध के पहले दिन ईरान के सर्वोच्च नेता Ali Khamenei की मौत हो गई।
    2. अमेरिका ने हमले को ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ और इजरायल ने ‘ऑपरेशन रोअर ऑफ द लॉयन’ नाम दिया।
    3. ईरान ने जवाबी कार्रवाई में होर्मुज स्ट्रेट को बंद करने का दावा किया, जिससे तेल की कीमतों में इजाफा हुआ।
    4. पेंटागन ने 6 अमेरिकी सैनिकों की मौत और 18 घायल होने की पुष्टि की, जबकि इजरायल में अब तक 12 लोगों की मौत हुई।
    5. खामेनेई की मौत के बाद ईरान में सरकार चलाने के लिए अंतरिम शासी परिषद का गठन किया गया।
    6. ईरान ने खाड़ी के कई देशों जैसे सऊदी अरब, कतर, बहरीन, संयुक्त अरब अमीरात और कुवैत पर हमले किए।
    7. अमेरिका के बी-2 बॉम्बर्स ने ईरान के अंडरग्राउंड परमाणु केंद्रों और मिसाइल भंडारण सुविधाओं पर हमला किया।
    8. ईरान के रेड क्रेसेंट के अनुसार मरने वालों की संख्या 600 से अधिक पहुंच गई, जिनमें सैनिक और आम नागरिक शामिल हैं।
    9. अमेरिका ने खाड़ी देशों में स्थित प्रमुख दूतावासों जैसे इराक, जॉर्डन और कुवैत से अपने अधिकारियों को तुरंत निकालने का आदेश दिया।
    10. डोनाल्ड ट्रंप और युद्ध मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा कि युद्ध 4-5 हफ्ते या उससे अधिक समय तक चल सकता है, और उन्होंने ईरान में सैनिकों को उतारने की संभावना से इनकार नहीं किया।

  • वैश्विक चुनौती बने दुर्लभ रोग…. 10 हजार से अधिक रोगों की पहचान, दुनिया भर में 30 करोड़ पीड़ित

    वैश्विक चुनौती बने दुर्लभ रोग…. 10 हजार से अधिक रोगों की पहचान, दुनिया भर में 30 करोड़ पीड़ित


    नई दिल्ली।
    दुनिया भर (All Over World) में लगभग 30 करोड़ लोग किसी न किसी दुर्लभ रोग (Rare Diseases) से पीड़ित हैं। अब तक 6,000 से 10,000 दुर्लभ रोगों की पहचान हो चुकी है, जिनमें से करीब 72 प्रतिशत रोग आनुवांशिक कारणों से होते हैं। यह दुर्लभ रोग अब एक बड़ी वैश्विक स्वास्थ्य चुनौती (Global Health Challenge) बन चुके हैं। विश्व स्वास्थ्य सभा (डब्ल्यूएचए) ने मई 2025 में एक ऐतिहासिक प्रस्ताव पारित करते हुए दुर्लभ रोगों को वैश्विक स्वास्थ्य प्राथमिकता घोषित किया। इस प्रस्ताव का उद्देश्य समय पर और सटीक जांच सुनिश्चित करना, उपचार सुविधाओं की उपलब्धता बढ़ाना, अनुसंधान को प्रोत्साहित करना और विशेष स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करना है।

    नीति स्तर पर यह स्वीकार किया गया है कि दुर्लभ रोग केवल चिकित्सा नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक चुनौती भी हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) द्वारा जारी अंतरराष्ट्रीय रोग वर्गीकरण प्रणाली आईसीडी-11 में लगभग 5,500 दुर्लभ रोगों को शामिल किया गया है।


    मरीजों तक उचित इलाज कब पहुंचेगा?

    इस मानकीकृत वर्गीकरण से डॉक्टरों और शोधकर्ताओं को रोग की पहचान, दस्तावेजीकरण और उपचार योजना बनाने में सुविधा मिलती है। आईसीडी-11 में शामिल किए जाने से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर डाटा संग्रह, शोध सहयोग और स्वास्थ्य नीतियों के निर्माण में भी सुधार हुआ है। सही और समय पर वर्गीकरण से निदान की प्रक्रिया तेज हो सकती है, जिससे मरीजों को उचित इलाज तक जल्दी पहुंच मिलती है।


    पहचान और निदान में देरी से बढ़ रहा मर्ज

    दुर्लभ रोगों के मामलों में सबसे बड़ी चुनौती समय पर बीमारी की पहचान हैं। विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी, जांच सुविधाओं का अभाव और आनुवंशिक परीक्षण की सीमित उपलब्धता समस्या को और जटिल बना देती है। इन रोगों का उपचार अक्सर महंगा होता है। इससे प्रभावित परिवारों पर आर्थिक और मानसिक दबाव बढ़ जाता है। 30 करोड़ से अधिक लोगों के सामने शारीरिक, मानसिक और आर्थिक चुनौतियां खड़ी होती हैं, जो स्वास्थ्य प्रणाली के लिए एक गंभीर संकेत हैं।


    भारत में बढ़ी दुर्लभ रोगों के प्रति जागरूकता

    भारत में दुर्लभ रोग उन बीमारियों को माना जाता है जो आबादी के बहुत छोटे हिस्से को प्रभावित करती हैं। इन रोगों के लिए विशेष जांच, उन्नत प्रयोगशाला सुविधाओं और विशेषज्ञ चिकित्सकों की आवश्यकता होती है। कई मामलों में मरीजों को सही निदान मिलने में लंबा समय लग जाता है। हालांकि, सरकार और स्वास्थ्य संस्थान अब दुर्लभ रोगों के प्रति जागरूकता बढ़ाने और नीतिगत सुधारों पर काम कर रहे हैं, ताकि जांच और उपचार की सुविधा बेहतर बनाई जा सके।

  • US के लिए लंबी और महंगी चुनौती साबित हो सकता है ईरान युद्ध… अमेरिकी रणनीतिकार नहीं लगा पाए अंदाजा

    US के लिए लंबी और महंगी चुनौती साबित हो सकता है ईरान युद्ध… अमेरिकी रणनीतिकार नहीं लगा पाए अंदाजा


    तेहरान।
    पश्चिम एशिया (West Asia) में छिड़ा संघर्ष अब ऐसे मोड़ पर पहुंच गया है, जिसकी कल्पना शायद अमेरिकी युद्ध नीतिकारों (American War Policymakers) ने नहीं की थी। ऑपरेशन एपिक फ्यूरी (Operation Epic Fury) के जरिये खामनेई के खात्मे के बाद यह युद्ध अमेरिका के लिए किसी त्वरित जीत के बजाय एक लंबी और महंगी चुनौती साबित हो सकता है। ईरान की रणनीति अमेरिका को लंबे और थका देने वाले युद्ध की ओर धकेलने की दिख रही है। अमेरिकी अड्डों पर हुए मिसाइल हमलों और कुवैत में कई लड़ाकू विमान गिराए जाने की सूचनाओं ने वाशिंगटन की वॉर गेमिंग पर सवाल खड़े किए हैं। अमेरिका सऊदी अरब के तेल क्षेत्रों और व्यापारिक केंद्रों की सुरक्षा ढाल बनने में नाकाम रहा है। यह अमेरिकी योजना के बिल्कुल विपरीत है।


    ईरान की रणनीति

    ईरान की रणनीति वॉर ऑफ एट्रिशन यानी लंबे और थकाऊ युद्ध की है। अमेरिका और इस्राइल की बेहतर एयरपावर से बचाव के लिए उसने अपने अहम हथियार भूमिगत बंकरों में सुरक्षित कर लिए हैं। उसका इरादा ड्रोन एवं मिसाइलों से अमेरिका के प्रतिष्ठित ठिकानों पर निशाना साधने का है। इससे दुश्मन के अजेय होने की छवि को नुकसान पहुंचेगा और घरेलू मोर्चे पर राजनीतिक दबाव भी बढ़ेगा।

    जमीनी हमला: विशेषज्ञों की राय में ईरान की कोशिश दुश्मन को जमीनी आक्रमण के लिए उकसाने की दिख रही है। युद्ध जमीन पर आने पर ईरान की बड़ी सेना व दुर्गम भौगोलिक परिस्थितयां अमेरिका व इस्राइल के लिए इसे अफगानिस्तान या वियतनाम जैसा अंतहीन युद्ध भी बना सकते हैं।

    अराघची का बयान: ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने बताया कि शीर्ष कमांडरों को खोने के बाद उन्हें फौरन रिप्लेस कर लिया गया है। उन्होंने दावा किया कि इस युद्ध में दूसरे पक्ष के लिए कोई विजय नहीं है। विकेंद्रीकृत कमान के कारण ईरान का मिसाइल नेटवर्क नेतृत्व की कमी के बावजूद सक्रिय है।

    इस्राइल पर प्रभाव: छोटा देश होने के नाते इस्राइल की अर्थव्यवस्था तेज और निर्णायक युद्ध के लिए बनी है, लंबे युद्ध के लिए नहीं। लाखों नागरिक (रिजर्विस्ट) दफ्तर छोड़कर मोर्चे पर तैनात हैं, जिससे हाई-टेक और उत्पादन क्षेत्र प्रभावित रहेगा। ईरान युद्ध को लंबा खींचने में कामयाब रहा तो इस्राइल की अर्थव्यवस्था पतली हो सकती है, इसलिए इस्राइल युद्ध को जल्द खत्म करने के लिए आक्रामक रुख अपनाता है।


    विशेषज्ञ की राय

    रक्षा विशेषज्ञ मेजर जनरल जीडी बख्शी ने कहा कि ट्रंप ने बहुत बड़ी गलती की है। पहली ही स्ट्राइक में ईरान का शीर्ष नेतृत्व साफ कर दिया। अब इस युद्ध पर नियंत्रण नहीं रह गया है। इससे वैश्विक मंदी आ सकती है, जिससे अमेरिका भी अछूता नहीं रहेगा। ईरान ने इनका युद्धपोत हिट किया तो 250 सैनिक मारे जाएंगे। अब यह अपना एयरक्राफ्ट कैरियर लिंकन छुपाते फिर रहे हैं। ट्रंप बुरी तरह फंसने वाले हैं। उनके खिलाफ महाभियोग भी चलाया जाए तो मुझे आश्चर्य नहीं होगा।

  • MP में आदेश निकलने से पहले ही शुरू हो गई टोल वसूली… जनता के जेब से निकाले करोड़ों

    MP में आदेश निकलने से पहले ही शुरू हो गई टोल वसूली… जनता के जेब से निकाले करोड़ों


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में टोल वसूली (Toll Collection) को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। आरोप है कि मध्य प्रदेश सड़क विकास निगम (Madhya Pradesh Road Development Corporation- MPRDC) ने कई सड़कों पर राज्यपाल की अधिसूचना जारी होने से 6 माह से लेकर एक साल पहले तक टोल वसूली शुरू कर दी थी. यानी जिस तारीख से टोल वसूली कानूनी रूप से लागू होनी थी, उससे पहले ही जनता की जेब से पैसा निकाला जाता रहा. यह खुलासा विधानसभा में PWD की ओर से जारी जवाब से हुआ है।

    कांग्रेस विधायक प्रताप ग्रेवाल ने विधानसभा में सवाल पूछा था कि प्रदेश की कौन-कौन सी सड़कों पर टोल वसूली की अधिसूचना कब-कब जारी हुई और इन पर टोल वसूली कब से शुरू हुई? इसका जवाब जब सदन में रखा गया तो हैरान करने वाली जानकारी सामने आई।

    कांग्रेस विधायक प्रताप ग्रेवाल ने आरोप लगाया कि लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह की ओर से शेयर की गई जानकारी के अनुसार कई सड़क परियोजनाओं में अधिसूचना और टोल वसूली की तारीखों में स्पष्ट अंतर दिखाई दे रहा है जो ना सिर्फ नियमों के विरुद्ध है बल्कि सीधे तौर पर कानून का उल्लंघन है।


    एक बाइक पर नौ लोगों की सवारी का वायरल वीडियो

    प्रताप ग्रेवाल का कहना है कि इंडियन टोल एक्ट के तहत शासन अपने स्तर पर किसी भी सड़क पर टोल नहीं ले सकता है. सड़क जनता की संपत्ति है , तथा शासन ट्रस्टी है. ट्रस्टी उस संपत्ति से बेजा लाभ नहीं कमा सकता है।


    अधिसूचना बाद में, वसूली पहले?

    कांग्रेस विधायक प्रताप ग्रेवाल ने सदन में पेश आंकड़ों के आधार पर आरोप लगाया कि कई सड़कों पर अधिसूचना जारी होने के पहले से टोल टैक्स वसूली शुरू कर दी गई, जिनमें के कुछ सड़कें हैं:-
    भोपाल बायपास – अधिसूचना: 8 दिसंबर 2020 | टोल वसूली शुरू: 12 दिसंबर 2019
    इंदौर–उज्जैन मार्ग – अधिसूचना: 30 दिसंबर 2022 | टोल वसूली शुरू: 21 जनवरी 2022
    सागर–दमोह मार्ग – अधिसूचना: 8 दिसंबर 2021 | टोल वसूली शुरू: 28 फरवरी 2021
    भिंड–गोपालपुरा मार्ग – अधिसूचना: 4 जनवरी 2022 | टोल वसूली शुरू: 19 मार्च 2021
    गुना–ईसागढ़ मार्ग – अधिसूचना: 10 अक्टूबर 2024 | टोल वसूली शुरू: 2 जून 2023
    महू–घाटाबिल्लौद मार्ग – अधिसूचना: 24 दिसंबर 2021 | टोल वसूली शुरू: 28 फरवरी 2021
    बीना–खिमलासा मार्ग – अधिसूचना: 8 दिसंबर 2021 | टोल वसूली शुरू: 19 मार्च 2021


    43 सड़कों से 603 करोड़ का ‘शुद्ध लाभ’?

    प्रताप ग्रेवाल का आरोप है कि प्रदेश की 43 सड़कों पर अधिसूचना जारी होने से पहले कथित अवैध टोल वसूली के जरिए एमपीआरडीसी ने दिसंबर 2025 तक 603.66 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ कमाया है जिसकी जांच होनी चाहिए।


    पूरा पैसा सरकारी खजाने में गया, कोई भ्रष्टाचार नहीं

    PWD मंत्री राकेश सिंह ने कहा कि सदन में जो जानकारी दी गई हैए उसमें स्पष्ट उल्लेख है कि टोल वसूली शासकीय खजाने में ही जमा हुई हैए इसलिए इसमें भ्रष्टाचार का कोई मामला बनता ही नहीं है. जहां तक अधिसूचना जारी होने की बात है तो वो कई बार बैकडेट में भी जारी होती है, इसलिए यह कहना गलत है कि विभाग ने अवैध रूप से टोल वसूली की है।

  • Iran-Israel War ने बढ़ाई आयातकों की टेंशन… गैस टैंकरों का किराया एक ही दिन में हुआ दोगुना

    Iran-Israel War ने बढ़ाई आयातकों की टेंशन… गैस टैंकरों का किराया एक ही दिन में हुआ दोगुना


    तेहरान
    । अटलांटिक बेसिन (Atlantic Basin) में एलएनजी टैंकरों (LNG Tankers) के किराए में जबरदस्त उछाल देखने को मिला है। मामले से वाकिफ सूत्रों के मुताबिक, जहाज मालिक और ब्रोकर (Shipowner and Broker) अब इन टैंकरों के लिए 200,000 डॉलर प्रतिदिन से अधिक की मांग कर रहे हैं, जो कि 24 घंटे से भी कम समय पहले मांगे जा रहे किराए से लगभग दोगुना है।


    कतर में उत्पादन ठप होने से बढ़ी मांग

    ब्लूमबर्ग की खबर के मुताबिक किराए में यह उछाल ईरान के साथ चल रहे संघर्ष के बढ़ने के कारण कतर द्वारा अपना एलएनजी उत्पादन बंद करने के बाद आया है। इस घटनाक्रम ने क्षेत्र में तनाव को और बढ़ा दिया है। हालांकि, जानकारों का कहना है कि इतनी ऊंची दरों पर अभी तक किसी भी सौदे के होने की पुष्टि नहीं हुई है।


    पिछले दरों के मुकाबले तीन गुना ज्यादा

    यह ऑफर की जा रही दरें शिपिंग फर्म स्पार्क कमोडिटीज द्वारा सोमवार की शुरुआत में एलएनजी टैंकर के लिए आंकलित अंतिम दर 61,500 डॉलर से कम से कम तीन गुना अधिक हैं। यह भारी उछाल बाजार में अस्थिरता और अनिश्चितता को दर्शाता है।


    विशेषज्ञों की राय में अभी संभलकर चलने की जरूरत

    प्रिसिजन एलएनजी कंसल्टिंग एलएलसी के सलाहकार रिचर्ड प्रैट का मानना है कि अगर कतर और अबू धाबी जैसी जगहों पर उत्पादन में लंबे समय तक कटौती नहीं होती है, तो टैंकरों की दरों में यह भारी उछाल वास्तविक लेन-देन में तब्दील होने की संभावना नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका से एशिया तक जहाजों को चलने के लिए आवश्यक अतिरिक्त दूरी भी किराए पर दबाव बनाने में एक भूमिका निभा सकती है।


    शिपिंग कंपनियों ने लगाया इमर्जेंसी चार्ज

    खबर यह भी है कि हमलों से बढ़े खतरे के चलते शिपिंग कंपनियों ने खाड़ी और पश्चिम एशियाई देशों को जाने वाले और वहां से आने वाले माल पर 2000 डॉलर से लेकर 4000 डॉलर प्रति कंटेनर इमर्जेंसी कॉनफ्लिक्ट चार्जेज लगा दिए हैं। यह चार्जेज 2 मार्च से ही लागू हो गए हैं। यह खबर रूरल वॉयस सरकार में उच्च पदस्थ सूत्रों के हवाले से दी है।

    रूरल वॉयस के मुताबिक शिपिंग कंपनियों ने कहा कि शिपिंग के लिए होने वाली बुकिंग पर इमर्जेंसी कॉनफ्लिक्ट चार्जेज लागू होंगे। इराक, बहरीन, कुवैत, यमन, कतर, ओमान, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), किंगडम ऑफ सऊदी अरब, जार्डन, मिस्र (पोर्ट ऑफ आइन सोखाना), दजिबुती, सूडान और इरिटिया के पोर्ट के लिए भारत से होने वाले निर्यात या इन देशों से भारत के आयात की लोडिंग पर इमर्जेंसी चार्जेज लागू होंगे।

    इमर्जेंसी चार्जेज के तहत 20 फीट के ड्राई कंटेनर पर 2000 डॉलर, 40 फीट के कंटेनर पर 3000 डॉलर और रीफर या स्पेशल इक्विपमेंट पर 4000 डॉलर प्रति कंटेनर का चार्ज फ्रेट रेट में जोड़ा जाएगा।

  • स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जहाज गुजरे तो लगा देंगे आग… ईरान ने जल मार्ग बंद कर जारी की चेतावनी

    स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जहाज गुजरे तो लगा देंगे आग… ईरान ने जल मार्ग बंद कर जारी की चेतावनी


    तेहरान।
    अमेरिका और ईरान युद्ध (America and Iran War) अपने चरम पर है। अब खबर है कि ईरान ने अहम जल मार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) या होर्मुज जल डमरू मध्य बंद कर दिया है। इतना ही नहीं, चेतावनी भी जारी की गई है कि अगर कोई जहाज यहां से गुजरा तो आग लगा दी जाएगी। खास बात है कि यह मार्ग भारत (India) के लिए भी काफी अहम है और इसके बंद होने का असर पड़ सकता है। इधर, अमेरिका दावा कर रहा है कि अब तक उसने बड़ा हमला किया नहीं है। वहीं, ईरान ने साफ कर दिया है कि वह अमेरिका से कोई बातचीत नहीं करेगा।

    रॉयटर्स ने ईरानी मीडिया की रिपोर्ट्स के हवाले से बताया, IRGC यानी ईरान रिवॉल्युशनरी गार्ड्स के एक वरिष्ठ अधिकारी ने सोमवार को बताया कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद कर दिया है। उन्होंने कहा कि गुजरने वाले किसी भी जहाज को आग के हवाले कर दिया जाएगा। शनिवार को मार्ग बंद करने के ऐलान के बाद ईरान की तरफ से दी गई यह सबसे बड़ी धमकी है।


    चेतावनी

    कमांडर इन चीफ के सलाहकार इब्राहिम जबारी ने कहा, ‘स्ट्रेट (ऑफ होर्मुज) बंद कर दिया गया है। अगर कोई भी गुजरने की कोशिश करता है, तो रिवॉल्युशनरी गार्ड्स के हीरो और नौसेना उन जहाजों को आग के हवाले कर देगी।’ खास बात है कि दुनिया की तेल खपत का करीब 20 फीसदी हिस्सा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरता है।


    क्यों अहम है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज

    होर्मुज जलडमरू मध्य फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ने वाला संकरा समुद्री रास्ता है। दुनिया के ऊर्जा व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है, इसलिए यह वैश्विक अर्थव्यवस्था की धड़कन माना जाता है। इस मार्ग से वैश्विक तेल और गैस का लगभग 20 प्रतिशत प्रवाह होता है। इसे बंद करने से वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गंभीर परिणाम होंगे, अंतर्राष्ट्रीय व्यापार बाधित होगा और तेल की कीमतें तेजी से बढ़ेंगी।

    होर्मुज के भारत और दुनिया के लिए मायने
    भारत अपनी जरूरत का 80% से अधिक कच्चा तेल आयात करता है, जिसमें बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आता है। यह तेल ज्यादातर होर्मुज से होकर गुजरता है। मार्ग बाधित होने पर भारत की ऊर्जा आपूर्ति और कीमतों पर तुरंत असर पड़ेगा। तेल महंगा होने से पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ेंगी, जिससे महंगाई और राजकोषीय दबाव बढ़ सकता है। साथ ही आयात बिल बढ़ने से चालू खाते का घाटा भी बढ़ता है।

    भारत के ईरान, सऊदी अरब और यूएई के साथ महत्वपूर्ण संबंध हैं। ऐसे में संतुलित कूटनीति और समुद्री सुरक्षा सहयोग भारत के लिए अहम है। यदि यहां तनाव बढ़ने और जहाजों पर पाबंदी लगती है, तो वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों में तुरंत उछाल आ जाएगा। इसका असर महंगाई, परिवहन लागत और वैश्विक शेयर बाजारों पर पड़ेगा।

    दुनिया के समुद्री रास्ते से होने वाले कच्चे तेल का लगभग पांचवां हिस्सा एलएनजी इसी रास्ते से गुजरती है। सऊदी अरब, इराक, कुवैत, यूएई और कतर जैसे प्रमुख ऊर्जा उत्पादक देश अपने निर्यात के लिए इस मार्ग पर निर्भर हैं।

  • बॉम्बे HC का बड़ा आदेश….हिन्दू श्मशान में दफनाए गए मुसलमान के शव को निकालने का दिया आदेश

    बॉम्बे HC का बड़ा आदेश….हिन्दू श्मशान में दफनाए गए मुसलमान के शव को निकालने का दिया आदेश


    नागपुर।
    मृत्यु के बाद भी गरिमा का संवैधानिक अधिकार (Constitutional Right After Death) बना रहता है, इस बात की पुष्टि बॉम्बे हाई कोर्ट (Bombay High Court) ने की है। हाई कोर्ट ने नागपुर (Nagpur) के एक हिंदू श्मशान घाट में गलती से दफनाए गए एक मुस्लिम व्यक्ति के शव को कब्र से निकालने का आदेश दिया। ट्रेन दुर्घटना के बाद मृतक को शुरू में अज्ञात माना गया था। हाई कोर्ट की नागपुर बेंच के न्यायमूर्ति अनिल किलोर और राज वाकोडे की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई की। याचिका मृतक के भाई जावेद खान ने दायर की थी। हाई कोर्ट ने नागपुर ग्रामीण के तहसीलदार और उप-विभागीय अधिकारी के उन आदेशों को रद्द कर दिया, जिनमें पहले शव को कब्र से निकालने की अनुमति देने से इनकार कर दिया गया था।

    अदालत ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि नागपुर नगर निगम की देखरेख में घाट रोड स्थित मोक्षधाम घाट से साजिद खान का शव निकाला जाए। शव याचिकाकर्ता को सौंप दिया जाए ताकि इस्लामी रीति-रिवाजों के अनुसार अंतिम संस्कार किया जा सके।


    25 जनवरी को नागपुर से लापता हुए थे साजिद खान

    मालेगांव निवासी साजिद खान 25 जनवरी को ताजुद्दीन बाबा के उर्स में शामिल होने के लिए दो मित्रों के साथ नागपुर गए थे। वे 26 जनवरी को लापता हो गए और बाद में बुटीबोरी के पास उनकी मृत्यु हो गई। उनकी पहचान तुरंत न हो पाने के कारण पुलिस ने शव को अज्ञात मानकर हिंदू श्मशान घाट मोक्षधाम घाट में दफना दिया।


    स्थानीय अधिकारियों ने आवेदन किया खारिज

    पुलिस से पूछताछ के बाद याचिकाकर्ता ने अधिकारियों द्वारा दिखाई गई तस्वीरों के माध्यम से शव की पहचान की। उसके बाद शव को निकालने की अनुमति मांगी ताकि मुस्लिम धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार कब्रिस्तान, बड़ा ताजबाग में अंतिम संस्कार किया जा सके। हालांकि, स्थानीय अधिकारियों ने अनुरोध को अस्वीकार कर दिया और उन्हें सक्षम न्यायालय से आदेश प्राप्त करने का निर्देश दिया।


    बॉम्बे हाई कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का दिया हवाला

    अदालत ने माना कि इस तरह के इनकार का कोई औचित्य नहीं था। हाई कोर्ट ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार की न्यायिक व्याख्या में गरिमा के अधिकार को भी शामिल किया गया है, जो मृत्यु के बाद भी लागू रहता है। न्यायालय ने आश्रय अधिकार अभियान बनाम भारत संघ मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए टिप्पणी की।

    अनुच्छेद 25 धर्म की स्वतंत्रता की गारंटी देता है, जिसमें आवश्यक धार्मिक अनुष्ठान करने का अधिकार भी शामिल है। इस न्यायालय के समक्ष ऐसा कोई वैधानिक निषेध नहीं दिखाया गया है जो कानूनी पर्यवेक्षण के तहत शव निकालने पर रोक लगाता हो।- बॉम्बे हाई कोर्ट बेंच


    बॉम्बे हाई कोर्ट अनुच्छेद 14, 21 और 25 का जिक्र

    पूर्व प्रशासनिक आदेशों को अस्पष्ट बताते हुए, न्यायालय ने फैसला सुनाया कि परिवार को शव की अभिरक्षा से वंचित करना अनुच्छेद 14, 21 और 25 के तहत संवैधानिक संरक्षणों का उल्लंघन होगा। पीठ ने नागपुर ग्रामीण के पुलिस अधीक्षक और बुटीबोरी पुलिस को शव निकालने और यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि शव मृतक के भाई को सौंप दिया जाए।

  • MP: होली पर CM ने सरकारी कर्मचारियों को दिया बड़ा तोहफा, डीए 3% बढ़ाकर केन्द्र के समान 58 प्रतिशत किया

    MP: होली पर CM ने सरकारी कर्मचारियों को दिया बड़ा तोहफा, डीए 3% बढ़ाकर केन्द्र के समान 58 प्रतिशत किया


    भोपाल।
    होली (Holi) से दो दिन पहले मुख्यमंत्री मोहन यादव (Chief Minister Mohan Yadav) ने सरकारी कर्मचारियों (Government Employees) को बड़ा तोहफा दिया है। सरकार ने कर्मचारियों के महंगाई भत्ते (डीए) में 3 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी करने का फैसला लिया है। मुख्यमंत्री के इस एलान के बाद यह बढ़कर 58 प्रतिशत हो गया है। इसका फायदा राज्य के करीब 7.30 लाख कर्मचारियों को मिलेगा।

    मोहन यादव ने होली की शुभकामनाएं देते हुए कहा ‘होली के पावन पर्व पर, मैं प्रदेश के सभी भाई-बहनों और देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं देता हूं। होली आपसी मेल-जोल को मजबूत करने, कड़वाहट मिटाने और प्रेम बढ़ाने का त्योहार है। सभी को मेरी तरफ से हार्दिक बधाई और होली की मंगलकामनाएं। इस अवसर पर राज्य सरकार ने शासकीय कर्मचारियों के महंगाई भत्ते में 3 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी करने का फैसला लिया है, जिससे यह बढ़कर 58 प्रतिशत हो गया है।’

    करीब 10 महीने बाद बढ़ा डीए
    करीब 10 महीने पहले 27 अप्रैल 2025 को कर्मचारियों का डीए 5 फीसदी बढ़ाया गया था जिससे यह तब केंद्रीय कर्मचारियों के सामान हो गया था। कर्मचारियों को एरियर की राशि का भुगतान किया गया था। इससे पहले 28 अक्तूबर 2024 को इसमें 4 फीसदी तो 14 मार्च 2024 को 4 फीसदी की बढ़ोत्तरी की गई थी। 19 जुलाई 2023 और 27 जनवरी 2023 को भी 4-4 फीसदी की बढ़ोत्तरी हुई थी। वहीं 22 अगस्त 2022 को 3 फीसदी तो 21 मार्च 2022 को 11 फीसदी की बढ़ोत्तरी की गई थी।

    आपको बता दें कि सरकार महंगाई से निपटने के लिए सरकारी कर्मचारियों को महंगाई भत्ता देती है। इसकी दरें ऑल इंडिया कंज्यूमर प्राइस इंडेंक्स के आधार पर तय की जाती हैं। कर्मचारियों के मंहगाई भत्ते में साल में दो बार (हर 6 महीने में) बढ़ोत्तरी की जाती है।

    जनजातीय बहुल बड़वानी जिले में सोमवार को मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कृषि कैबिनेट की बैठक की। बैठक के बाद उन्हें कैबिनेट के फैसलों की जानकारी दी। मध्यप्रदेश के इतिहास में पहली बार किसी जनजातीय इलाके में हुई इस बैठक में किसानों को कई सौगात देने पर मुहर लगी। मोहन यादव की पहली कृषि कैबिनेट में किसानों के लिए 27,746 करोड़ रुपये की राशि का प्रस्ताव रखा है।

  • अहान पांडे का चौंकाने वाला खुलासा: एक्सीडेंट ने शरीर को कर दिया था 'जीरो', अब अली अब्बास जफर की एक्शन फिल्म के लिए कर रहे हैं महा-ट्रांसफॉर्मेशन

    अहान पांडे का चौंकाने वाला खुलासा: एक्सीडेंट ने शरीर को कर दिया था 'जीरो', अब अली अब्बास जफर की एक्शन फिल्म के लिए कर रहे हैं महा-ट्रांसफॉर्मेशन


    नई दिल्ली :बॉलीवुड के उभरते हुए सितारे अहान पांडे के लिए साल 2025 खुशियों और चुनौतियों का एक मिला-जुला सफर रहा है। एक तरफ जहाँ मोहित सूरी द्वारा निर्देशित उनकी फिल्म “सैयारा” ने बॉक्स ऑफिस पर सफलता के नए झंडे गाड़े और उन्हें एक रोमांटिक स्टार के रूप में स्थापित किया, वहीं दूसरी तरफ पर्दे के पीछे अहान एक ऐसे दर्दनाक दौर से गुजर रहे थे, जिससे वे पूरी तरह टूट सकते थे। हाल ही में एक साक्षात्कार में अहान ने खुलासा किया कि “सैयारा” की रिलीज के ठीक बाद उन्हें कंधे की एक बेहद जटिल और दर्दनाक सर्जरी करानी पड़ी थी। यह सर्जरी एक पुराने स्नोमोबाइल एक्सीडेंट का नतीजा थी, जिसके कारण उनका कंधा ‘सब्लक्सेशन’ (आंशिक रूप से खिसक जाना) का शिकार हो गया था।

    हैरान करने वाली बात यह है कि अहान ने इस पूरी शारीरिक पीड़ा और संघर्ष को दुनिया से छिपाकर रखा। सर्जरी के बाद अभिनेता कई महीनों तक प्लास्टर में रहे और उनकी स्थिति ऐसी थी कि वे ठीक से हिल भी नहीं पा रहे थे। डॉक्टरों ने तो उन्हें यहाँ तक चेतावनी दे दी थी कि सर्जरी के बाद उनका शरीर ‘जीरो’ के स्तर पर पहुँच जाएगा और अगली फिल्म के लिए फिट बॉडी बनाना उनके लिए लगभग नामुमकिन होगा। अहान ने बताया कि रिकवरी का वह समय उनके लिए मानसिक रूप से भी कठिन था क्योंकि वे वजन उठाने तक की अनुमति नहीं रखते थे। इस दौरान सोशल मीडिया से उनकी दूरी को लेकर लोग उनकी माँ डिएन पांडे से सवाल पूछने लगे थे कि अहान का वजन इतना कम क्यों हो रहा है, लेकिन अहान खामोशी से अपनी वापसी की तैयारी कर रहे थे।

    अहान पांडे ने अपनी इस कमजोरी को ही अपनी सबसे बड़ी ताकत बनाया। उन्होंने बताया कि जहाँ अन्य कलाकार अनहेल्दी बॉडी से हेल्दी बॉडी का सफर तय करते हैं, वहीं उन्हें एक गंभीर चोट से उबरकर खुद को फिर से तैयार करना पड़ा। अब अहान पूरी तरह फिट हैं और अली अब्बास जफर की अगली अनाम एक्शन-रोमांटिक फिल्म के लिए जबरदस्त ‘फिजिकल ट्रांसफॉर्मेशन’ में जुटे हुए हैं। इस फिल्म में वे अभिनेत्री शरवरी के साथ नजर आएंगे। एक साल तक बिस्तर पर रहने और डॉक्टरों की आशंकाओं को गलत साबित करते हुए अहान अब बड़े पर्दे पर एक नए अवतार में धमाका करने को तैयार हैं।