Author: bharati

  • भारत की आर्थिक प्रगति का नया आधार बनी डिजिटल अर्थव्यवस्था, विशेषज्ञों ने सुरक्षित और समावेशी डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम पर दिया जोर

    भारत की आर्थिक प्रगति का नया आधार बनी डिजिटल अर्थव्यवस्था, विशेषज्ञों ने सुरक्षित और समावेशी डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम पर दिया जोर

    नई दिल्ली । भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था तेजी से देश की आर्थिक और सामाजिक प्रगति की प्रमुख ताकत बनकर उभर रही है। डिजिटल भुगतान, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना और नई तकनीकों के विस्तार ने न केवल वित्तीय सेवाओं की पहुंच को व्यापक बनाया है, बल्कि आर्थिक गतिविधियों को भी अधिक पारदर्शी, तेज और प्रभावी बनाया है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में भारत की विकास यात्रा में डिजिटल इकोसिस्टम की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण होने वाली है।

    राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित डिजिटल भुगतान विषयक एक विचार-विमर्श कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों ने डिजिटल परिवर्तन के कई पहलुओं पर अपने विचार साझा किए। उनका कहना था कि डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना ने वित्तीय समावेशन को नई दिशा दी है और देश के करोड़ों नागरिकों को औपचारिक वित्तीय प्रणाली से जोड़ने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इसके माध्यम से सरकारी सेवाओं, वित्तीय लेनदेन और डिजिटल सुविधाओं तक लोगों की पहुंच पहले की तुलना में कहीं अधिक आसान हुई है।

    विशेषज्ञों ने इस बात पर भी जोर दिया कि डिजिटल अर्थव्यवस्था केवल तकनीक के विस्तार से मजबूत नहीं होगी। इसके लिए गुणवत्तापूर्ण मानव संसाधन, मजबूत संस्थागत ढांचा, अनुसंधान, नवाचार और लगातार निवेश की आवश्यकता है। उनका मानना है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसी उभरती तकनीकों का प्रभावी उपयोग करने वाले देश भविष्य की वैश्विक प्रतिस्पर्धा में अधिक मजबूत स्थिति हासिल कर सकेंगे। इसलिए नई तकनीकों को अपनाने के साथ-साथ कौशल विकास पर भी समान रूप से ध्यान देना आवश्यक है।

    डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना को लेकर विशेषज्ञों ने कहा कि इसकी सफलता का सबसे बड़ा आधार नागरिकों का भरोसा है। यदि डिजिटल सेवाओं में डेटा सुरक्षा, गोपनीयता, उपयोगकर्ता की सहमति और सभी के लिए समान पहुंच सुनिश्चित की जाती है, तभी डिजिटल परिवर्तन का वास्तविक लाभ समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंच सकेगा। उन्होंने तकनीकी विकास के साथ सामाजिक जिम्मेदारी और पारदर्शिता बनाए रखने की आवश्यकता पर भी बल दिया।

    डिजिटल भुगतान प्रणाली के भविष्य को लेकर भी कई महत्वपूर्ण सुझाव सामने आए। विशेषज्ञों का मानना है कि अब तक डिजिटल भुगतान व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य व्यापक पहुंच और इंटरऑपरेबिलिटी रहा है, लेकिन आने वाले समय में इसकी मजबूती, बैकअप सिस्टम और कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित धोखाधड़ी पहचान प्रणाली को प्राथमिकता देनी होगी। इससे लेनदेन अधिक सुरक्षित और विश्वसनीय बन सकेंगे।

    कार्यक्रम में सीमा पार डिजिटल भुगतान को आसान बनाने की आवश्यकता पर भी चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने कहा कि इसके लिए एकीकृत डिजिटल अवसंरचना, समान तकनीकी मानक और स्पष्ट कानूनी व्यवस्था विकसित करना जरूरी होगा। इससे भारत की डिजिटल भुगतान प्रणाली वैश्विक स्तर पर और अधिक प्रभावी भूमिका निभा सकेगी तथा अंतरराष्ट्रीय लेनदेन भी सरल और सुरक्षित बनेंगे।

    साइबर सुरक्षा को डिजिटल अर्थव्यवस्था की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बताया गया। विशेषज्ञों ने बढ़ते साइबर अपराध और डिजिटल धोखाधड़ी को देखते हुए मजबूत संस्थागत समन्वय, आधुनिक सुरक्षा तकनीकों और आम नागरिकों में जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया। उनका मानना है कि डिजिटल वित्तीय प्रणाली में लोगों का भरोसा बनाए रखने के लिए सुरक्षा उपायों को लगातार मजबूत करना आवश्यक है।

    विशेषज्ञों के अनुसार भारत का डिजिटल इकोसिस्टम अब केवल भुगतान प्रणाली तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आर्थिक विकास, नवाचार, रोजगार, उद्यमिता और सामाजिक समावेशन का महत्वपूर्ण माध्यम बन चुका है। यदि तकनीकी प्रगति के साथ सुरक्षा, भरोसा और समावेशिता को समान प्राथमिकता दी जाती है, तो भारत आने वाले वर्षों में वैश्विक डिजिटल अर्थव्यवस्था में और अधिक मजबूत स्थान हासिल कर सकता है।

  • फीफा वर्ल्ड कप 2026 में स्विट्जरलैंड का कमाल 1954 के बाद पहली बार क्वार्टर फाइनल में पहुंचा

    फीफा वर्ल्ड कप 2026 में स्विट्जरलैंड का कमाल 1954 के बाद पहली बार क्वार्टर फाइनल में पहुंचा


    नई दिल्ली । फीफा वर्ल्ड कप 2026 में स्विट्जरलैंड ने शानदार प्रदर्शन करते हुए इतिहास रच दिया। टीम ने राउंड ऑफ 16 के बेहद रोमांचक मुकाबले में कोलंबिया को पेनल्टी शूटआउट में 4-3 से हराकर क्वार्टर फाइनल का टिकट हासिल कर लिया। इस जीत के साथ स्विट्जरलैंड ने 1954 के बाद पहली बार विश्व कप के अंतिम आठ में जगह बनाई है। अब क्वार्टर फाइनल में उसका मुकाबला मजबूत अर्जेंटीना से होगा।

    वैंकूवर में खेले गए इस मुकाबले में दोनों टीमों ने शुरुआत से ही सावधानी के साथ खेल दिखाया। निर्धारित 90 मिनट और अतिरिक्त समय तक कोई भी टीम गोल नहीं कर सकी। दोनों ओर से कई अच्छे आक्रमण हुए लेकिन मजबूत रक्षापंक्ति और शानदार गोलकीपिंग के कारण स्कोर गोलरहित बना रहा। आखिरकार मुकाबले का फैसला पेनल्टी शूटआउट से हुआ जहां स्विट्जरलैंड ने दबाव में बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए जीत अपने नाम कर ली।

    स्विट्जरलैंड की जीत के सबसे बड़े नायक रूबेन वर्गास रहे जिन्होंने निर्णायक पेनल्टी को गोल में बदलकर टीम को ऐतिहासिक जीत दिलाई। मुकाबले के बाद उन्होंने कहा कि उन्हें मैच खेलने को लेकर भी संशय था लेकिन टीम के लिए जीत दिलाना उनके करियर का सबसे यादगार पल बन गया। उन्होंने बताया कि पेनल्टी लेने के समय वह पूरी तरह आत्मविश्वास से भरे हुए थे और खुश हैं कि टीम की उम्मीदों पर खरे उतर सके।

    मैच शुरू होने से पहले स्विट्जरलैंड को बड़ा झटका तब लगा जब टीम के प्रमुख खिलाड़ी जोहान मंजांबी घुटने की चोट के कारण मुकाबले से बाहर हो गए। उनके नहीं खेलने से पहले हाफ में टीम के आक्रमण की धार कुछ कमजोर दिखाई दी। दूसरी ओर कोलंबिया ने गेंद पर अधिक नियंत्रण रखा लेकिन वह इसे गोल में नहीं बदल सकी।

    कोलंबिया की ओर से गुस्तावो पुएर्ता ने शानदार प्रयास किया लेकिन स्विट्जरलैंड के गोलकीपर ग्रेगर कोबेल ने बेहतरीन बचाव कर टीम को बढ़त लेने से रोक दिया। दूसरे हाफ में लुइस सुआरेज को भी गोल करने का अवसर मिला लेकिन उनका शॉट लक्ष्य से बाहर निकल गया। वहीं स्विट्जरलैंड के फैबियन रीडर की दमदार वॉली को कोलंबिया के गोलकीपर कैमिलो वर्गास ने शानदार तरीके से रोक दिया।

    अतिरिक्त समय में मुकाबला और भी रोमांचक हो गया। कोलंबिया के जॉन लुकुमी का हेडर क्रॉसबार से टकराकर बाहर चला गया जबकि स्विट्जरलैंड के जेकी अमदौनी के प्रयास को भी गोलकीपर ने विफल कर दिया। इसके बाद पेनल्टी शूटआउट में ग्रेगर कोबेल ने अहम बचाव किया और रूबेन वर्गास की निर्णायक किक ने स्विट्जरलैंड को सात दशक बाद विश्व कप के क्वार्टर फाइनल में पहुंचाकर नया इतिहास रच दिया।

    अब फुटबॉल प्रेमियों की नजरें क्वार्टर फाइनल पर होंगी जहां स्विट्जरलैंड की चुनौती मौजूदा दावेदार अर्जेंटीना के सामने होगी। यह मुकाबला विश्व कप के सबसे रोमांचक मैचों में से एक माना जा रहा है।

  • सौरव गांगुली के जन्मदिन पर आया बड़ा सरप्राइज राजकुमार राव की फिल्म दादा का पहला पोस्टर रिलीज

    सौरव गांगुली के जन्मदिन पर आया बड़ा सरप्राइज राजकुमार राव की फिल्म दादा का पहला पोस्टर रिलीज


    नई दिल्ली । भारतीय क्रिकेट के सबसे सफल कप्तानों में शामिल सौरव गांगुली के 54वें जन्मदिन पर उनके प्रशंसकों को खास तोहफा मिला। अभिनेता राजकुमार राव ने बहुप्रतीक्षित बायोपिक दादा द सौरव गांगुली स्टोरी का पहला पोस्टर जारी कर फिल्म की पहली झलक साझा की। पोस्टर सामने आते ही सोशल मीडिया पर क्रिकेट और सिनेमा प्रेमियों के बीच जबरदस्त उत्साह देखने को मिला।

    पोस्टर में राजकुमार राव बिल्कुल सौरव गांगुली के अंदाज में नजर आ रहे हैं। उन्होंने लॉर्ड्स क्रिकेट ग्राउंड की बालकनी में शर्ट लहराते हुए 2002 की नेटवेस्ट ट्रॉफी जीत के बाद के ऐतिहासिक जश्न को फिर से जीवंत कर दिया है। उनके पीछे लहराता विशाल तिरंगा पोस्टर को और अधिक भावनात्मक और प्रेरणादायक बनाता है। फिल्म के पोस्टर पर लिखी टैगलाइन यह संदेश देती है कि उन्होंने केवल क्रिकेट नहीं खेला बल्कि भारतीय क्रिकेट की सोच और पहचान को बदल दिया।

    राजकुमार राव ने पोस्टर साझा करते हुए सौरव गांगुली को जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं। इस पोस्ट के बाद फिल्म को लेकर चर्चा और तेज हो गई है। क्रिकेट प्रशंसकों का मानना है कि यह फिल्म भारतीय क्रिकेट के एक सुनहरे दौर की कहानी बड़े पर्दे पर दिखाएगी।

    फिल्म का निर्देशन विक्रमादित्य मोटवानी कर रहे हैं जबकि निर्माण लव रंजन और अंकुर गर्ग ने लव फिल्म्स के बैनर तले किया है। फिल्म में राजकुमार राव सौरव गांगुली की भूमिका निभाएंगे जबकि तान्या मानिकतला उनकी पत्नी डोना गांगुली का किरदार निभाती नजर आएंगी। यह फिल्म 14 मई 2027 को सिनेमाघरों में रिलीज होगी।

    सौरव गांगुली भारतीय क्रिकेट के उन कप्तानों में गिने जाते हैं जिन्होंने टीम इंडिया को नई आक्रामक पहचान दी। उनकी कप्तानी में भारत ने 2002 आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी का संयुक्त खिताब जीता और 2003 क्रिकेट विश्व कप के फाइनल तक का शानदार सफर तय किया। इसके अलावा टीम ने कई ऐतिहासिक विदेशी जीत भी दर्ज कीं।

    साल 2002 में इंग्लैंड के खिलाफ लॉर्ड्स में खेले गए नेटवेस्ट ट्रॉफी फाइनल की जीत भारतीय क्रिकेट के इतिहास के सबसे यादगार पलों में शामिल है। 326 रन के कठिन लक्ष्य का पीछा करते हुए भारत ने रोमांचक जीत हासिल की थी। जीत के बाद लॉर्ड्स की बालकनी में सौरव गांगुली द्वारा शर्ट लहराने का दृश्य आज भी भारतीय क्रिकेट का सबसे चर्चित जश्न माना जाता है और फिल्म के पहले पोस्टर में उसी पल को दोबारा जीवंत किया गया है।

    अपने अंतरराष्ट्रीय करियर में सौरव गांगुली ने एकदिवसीय क्रिकेट में 11363 रन बनाए और भारतीय क्रिकेट को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। वर्ष 2004 में उन्हें पद्मश्री सम्मान से भी सम्मानित किया गया। अब उनकी प्रेरणादायक यात्रा बड़े पर्दे पर दर्शकों के सामने आने के लिए तैयार है।

  • हथकरघा क्षेत्र में नवाचार को नई उड़ान, सरकार ने लॉन्च किया ‘हैंडलूम हैकाथॉन 2026’, युवाओं और बुनकरों को मिलेगा साझा मंच

    हथकरघा क्षेत्र में नवाचार को नई उड़ान, सरकार ने लॉन्च किया ‘हैंडलूम हैकाथॉन 2026’, युवाओं और बुनकरों को मिलेगा साझा मंच

    नई दिल्ली । भारत के पारंपरिक हथकरघा क्षेत्र को आधुनिक तकनीक और नवाचार से जोड़ने की दिशा में केंद्र सरकार ने ‘हैंडलूम हैकाथॉन 2026’ की शुरुआत की है। इस राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता का उद्देश्य तकनीक, डिजाइन, उद्यमिता और टिकाऊ समाधानों के माध्यम से हथकरघा उद्योग को नई गति देना है। सरकार का मानना है कि देश की समृद्ध बुनाई परंपरा को आधुनिक सोच और नवाचार के साथ जोड़कर इस क्षेत्र को अधिक प्रतिस्पर्धी और आत्मनिर्भर बनाया जा सकता है।

    यह पहल राष्ट्रीय हथकरघा दिवस 2026 के अवसर पर आयोजित की जा रही है। प्रतियोगिता का ग्रैंड फिनाले 1 अगस्त को आयोजित होगा, जहां चयनित प्रतिभागी अपने नवाचारी विचार और समाधान विशेषज्ञों के समक्ष प्रस्तुत करेंगे। शिक्षा, उद्योग, डिजाइन, प्रौद्योगिकी और हथकरघा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञ इन प्रस्तावों का मूल्यांकन करेंगे और सबसे प्रभावी समाधानों का चयन करेंगे।

    हैकाथॉन का मुख्य उद्देश्य युवाओं की रचनात्मक सोच को देश की पारंपरिक बुनाई कला से जोड़ना है। सरकार चाहती है कि आधुनिक तकनीकी ज्ञान और पारंपरिक शिल्प कौशल के मेल से ऐसे समाधान विकसित हों, जो हथकरघा क्षेत्र की मौजूदा चुनौतियों का व्यावहारिक समाधान प्रस्तुत कर सकें। इससे उत्पादन क्षमता बढ़ाने, उत्पादों की गुणवत्ता सुधारने और वैश्विक बाजार में भारतीय हथकरघा उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मकता मजबूत करने में मदद मिल सकती है।

    इस प्रतियोगिता में वस्त्र, फैशन, डिजाइन, इंजीनियरिंग, प्रबंधन और प्रौद्योगिकी जैसे विभिन्न विषयों के विद्यार्थी भाग ले सकेंगे। इसके अलावा हथकरघा बुनकर, कारीगर, शोधकर्ता, स्टार्टअप, उद्यमी, नवाचारकर्ता और विभिन्न क्षेत्रों के पेशेवर भी इसमें अपने विचार प्रस्तुत कर सकते हैं। इस तरह यह मंच पारंपरिक अनुभव और आधुनिक तकनीकी दृष्टिकोण को एक साथ लाने का अवसर प्रदान करेगा।

    प्रतियोगिता के लिए कई महत्वपूर्ण विषय निर्धारित किए गए हैं। इनमें उत्पाद एवं डिजाइन नवाचार, टिकाऊ विकास, सर्कुलर इकोनॉमी, डिजिटल तकनीक का उपयोग, बाजार तक पहुंच, ब्रांडिंग, आपूर्ति श्रृंखला की दक्षता, उत्पादकता में वृद्धि, व्यवसाय विकास और सामाजिक प्रभाव जैसे क्षेत्र शामिल हैं। सरकार को उम्मीद है कि इन विषयों पर प्रस्तुत होने वाले नए विचार हथकरघा उद्योग के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

    ऑनलाइन पंजीकरण की प्रक्रिया निर्धारित अवधि तक खुली रहेगी, जिसके दौरान इच्छुक प्रतिभागी अपने विचार और परियोजनाएं प्रस्तुत कर सकेंगे। चयनित प्रस्तावों को आगे बढ़ाने के लिए विशेषज्ञों की ओर से मार्गदर्शन, मेंटरशिप और आवश्यकता पड़ने पर इनक्यूबेशन जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जा सकती हैं। इससे नवाचारों को व्यावसायिक रूप देने और उन्हें व्यवहार में लागू करने का मार्ग आसान होगा।

    विशेषज्ञों का मानना है कि भारत का हथकरघा क्षेत्र न केवल लाखों लोगों की आजीविका का आधार है, बल्कि देश की सांस्कृतिक विरासत का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे में यदि इस क्षेत्र को आधुनिक तकनीक, डिजिटल समाधान और नवाचार से जोड़ा जाता है तो इससे रोजगार, निर्यात और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई मजबूती मिल सकती है।

    सरकार की यह पहल पारंपरिक शिल्प और आधुनिक नवाचार के बीच मजबूत साझेदारी स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। इससे हथकरघा उद्योग को नई पहचान मिलने के साथ-साथ देश के नवाचार और स्टार्टअप इकोसिस्टम को भी पारंपरिक उद्योगों के साथ जुड़कर नए अवसर प्राप्त होने की उम्मीद है।

  • सेबी का बड़ा फैसला, विदेशी निवेशकों की पंजीकरण फीस अब डॉलर नहीं बल्कि रुपये में होगी, छह महीने बाद लागू होंगे नए नियम

    सेबी का बड़ा फैसला, विदेशी निवेशकों की पंजीकरण फीस अब डॉलर नहीं बल्कि रुपये में होगी, छह महीने बाद लागू होंगे नए नियम

    नई दिल्ली । भारतीय पूंजी बाजार के नियामक भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) और विदेशी वेंचर कैपिटल निवेशकों (एफवीसीआई) के लिए पंजीकरण शुल्क व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव किया है। नए नियमों के तहत अब इन निवेशकों की पंजीकरण फीस अमेरिकी डॉलर के बजाय भारतीय रुपये में निर्धारित की जाएगी। यह बदलाव करीब छह महीने बाद लागू होगा, ताकि सभी संबंधित संस्थाओं और निवेशकों को नई व्यवस्था के अनुरूप अपनी प्रक्रियाएं व्यवस्थित करने के लिए पर्याप्त समय मिल सके।

    नए शुल्क ढांचे के अनुसार अब पहले लागू 1,000 अमेरिकी डॉलर की पंजीकरण फीस के स्थान पर 90,000 रुपये का भुगतान करना होगा। इसी प्रकार कैटेगरी-1 एफपीआई और एफवीसीआई के लिए पहले निर्धारित 2,500 अमेरिकी डॉलर की फीस को बदलकर 2.30 लाख रुपये कर दिया गया है। इसके साथ ही विलंब शुल्क और पंजीकरण जारी रखने से संबंधित शुल्कों में भी संशोधन किया गया है, जिससे पूरी शुल्क प्रणाली भारतीय मुद्रा पर आधारित हो जाएगी।

    सेबी का मानना है कि रुपये में शुल्क निर्धारित करने से विदेशी मुद्रा आधारित भुगतान व्यवस्था से जुड़ी कई व्यावहारिक चुनौतियां समाप्त होंगी। अब तक डॉलर आधारित शुल्क प्रणाली के कारण लेखांकन, बिलिंग, भुगतान मिलान और वित्तीय रिपोर्टिंग जैसी प्रक्रियाओं में अतिरिक्त समय और संसाधनों की आवश्यकता पड़ती थी। नई व्यवस्था लागू होने के बाद इन प्रक्रियाओं को अधिक सरल, पारदर्शी और प्रभावी बनाया जा सकेगा।

    संशोधित नियमों के तहत डिपॉजिटरी संस्थानों की जिम्मेदारी भी तय की गई है। अब उन्हें एफपीआई और एफवीसीआई से प्राप्त शुल्क पंजीकरण स्वीकृत होने के पांच कार्य दिवसों के भीतर सेबी के पास जमा कराना होगा। इससे शुल्क संग्रह और नियामकीय प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित होने की उम्मीद है। नियामक का उद्देश्य पूरी प्रणाली को समयबद्ध और डिजिटल प्रक्रियाओं के अनुरूप बनाना है।

    सेबी ने पंजीकरण प्रक्रिया को भी पहले की तुलना में अधिक सरल बनाने की दिशा में कदम उठाया है। अब सामान्य आवेदन पत्र में व्यक्तिगत निवेशकों के लिए जन्मतिथि तथा संस्थागत आवेदकों के लिए कंपनी की स्थापना तिथि जैसी आवश्यक जानकारियों को शामिल किया गया है। इससे आवेदन प्रक्रिया अधिक सुव्यवस्थित होगी और अन्य नियामकीय औपचारिकताओं को पूरा करना भी आसान हो जाएगा।

    यह बदलाव कर संबंधी प्रक्रियाओं को सरल बनाने की व्यापक पहल के अनुरूप भी माना जा रहा है। विशेष रूप से स्थायी खाता संख्या (पैन) के आवेदन और उससे जुड़ी औपचारिकताओं को आसान बनाने के उद्देश्य से विभिन्न संस्थाओं के बीच समन्वय बढ़ाया गया है। इससे विदेशी निवेशकों के लिए भारतीय पूंजी बाजार में प्रवेश और अनुपालन की प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक सहज हो सकती है।

    इसके अतिरिक्त सेबी ने कस्टोडियन संस्थानों के शुल्क भुगतान के तरीके में भी संशोधन किया है। पहले जहां उन्हें वार्षिक आधार पर शुल्क जमा करना पड़ता था, वहीं अब मासिक भुगतान व्यवस्था लागू की गई है। इससे भुगतान प्रक्रिया अधिक नियमित और प्रबंधन के लिहाज से सुविधाजनक बनने की उम्मीद है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय रुपये में शुल्क निर्धारण से प्रशासनिक दक्षता बढ़ेगी, विनिमय दर के उतार-चढ़ाव का प्रभाव कम होगा और विदेशी निवेशकों के लिए अनुपालन प्रक्रिया अधिक स्पष्ट बनेगी। यह कदम भारतीय पूंजी बाजार को और अधिक पारदर्शी, आधुनिक और निवेशक-अनुकूल बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

  • बिना बैंड बाजा और बिना दिखावे की शादी पर्यावरण संरक्षण का देगा खास संदेश

    बिना बैंड बाजा और बिना दिखावे की शादी पर्यावरण संरक्षण का देगा खास संदेश

     
    इंदौर । शादियों में बढ़ते दिखावे और फिजूलखर्ची के दौर में इंदौर का एक परिवार समाज के सामने नई मिसाल पेश करने जा रहा है। शहर के व्यवसायी और समाजसेवी अक्षय जैन ने अपने पुत्र पार्थ जैन के 12 जुलाई को होने वाले विवाह समारोह को केवल पारिवारिक आयोजन तक सीमित रखने का फैसला किया है। इस विवाह की सबसे बड़ी खासियत यह होगी कि इसमें न बैंड बाजा होगा और न ही भव्य सजावट व दिखावे पर खर्च किया जाएगा। इसके बजाय पूरा आयोजन सादगी संस्कार और पर्यावरण संरक्षण के संदेश के साथ संपन्न होगा।

    जैन परिवार ने विवाह में शामिल होने वाले सभी मेहमानों से विशेष आग्रह किया है कि वे किसी भी प्रकार का उपहार लिफाफा या भेंट लेकर न आएं। परिवार का कहना है कि नवदंपती के लिए सबसे बड़ा उपहार बड़ों का आशीर्वाद और अपने लोगों का स्नेह ही है। इसलिए किसी भी तरह की भौतिक भेंट की आवश्यकता नहीं है।

    इसके साथ ही परिवार ने एक अनूठी अपील भी की है। सभी मेहमानों से कहा गया है कि वे नवदंपती को आशीर्वाद देने के लिए अपने घर आंगन खेत या आसपास किसी भी उपयुक्त स्थान पर कम से कम एक पौधा अवश्य लगाएं और उसकी नियमित देखभाल का संकल्प भी लें। उनका मानना है कि यदि हर शुभ अवसर को प्रकृति से जोड़ दिया जाए तो समाज में पर्यावरण संरक्षण को लेकर नई जागरूकता पैदा होगी और आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ तथा हराभरा वातावरण मिल सकेगा।

    अक्षय जैन का कहना है कि इस निर्णय के पीछे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा समय समय पर दिए गए सादगी मितव्ययता और पर्यावरण संरक्षण के संदेशों से प्रेरणा मिली है। उनका मानना है कि विवाह जैसे सामाजिक आयोजनों में अनावश्यक खर्च के बजाय समाज और प्रकृति के हित में सकारात्मक पहल की जानी चाहिए ताकि ऐसे आयोजन दूसरों के लिए भी प्रेरणा बन सकें।

    विवाह समारोह पूरी तरह जैन परंपराओं के अनुसार आयोजित किया जाएगा। सभी धार्मिक अनुष्ठान नवकार महामंत्र और मंगलाचरण के बीच संपन्न होंगे। जैन धर्म की परंपरा का पालन करते हुए किसी भी प्रकार का रात्रिकालीन कार्यक्रम नहीं रखा गया है। विवाह से जुड़ी सभी रस्में दिन के समय पूरी की जाएंगी। मेहमानों के लिए जमीकंद रहित सात्विक भोजन की व्यवस्था भी की गई है।

    सामाजिक संगठनों और शहर के कई लोगों ने इस पहल की सराहना की है। उनका कहना है कि आज जब शादियां अक्सर दिखावे और प्रतिस्पर्धा का माध्यम बनती जा रही हैं तब इस तरह का आयोजन समाज को सकारात्मक दिशा देने वाला प्रयास है। यदि अधिक से अधिक परिवार इस सोच को अपनाएं तो विवाह समारोह केवल खुशियों का अवसर ही नहीं बल्कि पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक जिम्मेदारी निभाने का माध्यम भी बन सकते हैं। इंदौर का यह विवाह सादगी संस्कार और हरियाली का संदेश देकर समाज के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण बनने जा रहा है।

  • मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच सोना-चांदी पर दबाव, एमसीएक्स में दोनों कीमती धातुओं के दाम गिरे, कच्चा तेल हुआ महंगा

    मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच सोना-चांदी पर दबाव, एमसीएक्स में दोनों कीमती धातुओं के दाम गिरे, कच्चा तेल हुआ महंगा

    नई दिल्ली । मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर वैश्विक कमोडिटी बाजार पर स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। बुधवार को घरेलू वायदा बाजार में सोना और चांदी दोनों गिरावट के साथ कारोबार करते नजर आए। निवेशकों की ओर से मुनाफावसूली और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच बदले निवेश रुझान के कारण कीमती धातुओं पर दबाव बना रहा। दूसरी ओर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया, जिससे वैश्विक आर्थिक चिंताएं और बढ़ गई हैं।

    मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर सोने के अगस्त डिलीवरी अनुबंध की शुरुआत पिछले कारोबारी सत्र की तुलना में गिरावट के साथ हुई। शुरुआती कारोबार में सोने की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिला और कारोबार के दौरान यह अपने शुरुआती स्तर से भी नीचे फिसल गया। इससे संकेत मिला कि निवेशक फिलहाल सतर्क रणनीति अपनाते हुए बड़े निवेश से बच रहे हैं।

    चांदी के वायदा अनुबंध में भी कमजोरी का रुख देखने को मिला। कारोबार की शुरुआत गिरावट के साथ होने के बाद इसकी कीमत दो लाख तीस हजार रुपये प्रति किलोग्राम के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे पहुंच गई। कारोबार के दौरान चांदी में बिकवाली का दबाव बना रहा, जिससे इसकी कीमतों में और नरमी दर्ज की गई। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक अनिश्चितताओं और निवेशकों की बदलती रणनीति का असर चांदी की कीमतों पर भी पड़ा है।

    अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी सोना और चांदी दोनों पर दबाव बना रहा। वैश्विक निवेशकों ने जोखिम से जुड़े परिसंपत्तियों के साथ-साथ कीमती धातुओं में भी सतर्क रुख अपनाया। बाजार विश्लेषकों का कहना है कि मौजूदा हालात में निवेशकों की प्राथमिकता लगातार बदल रही है, जिससे कमोडिटी बाजार में अस्थिरता बढ़ गई है। ऐसे समय में विभिन्न वैश्विक घटनाक्रम निवेश निर्णयों को सीधे प्रभावित कर रहे हैं।

    बाजार पर सबसे बड़ा प्रभाव मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव का माना जा रहा है। क्षेत्र में हालिया घटनाओं के बाद ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं, जिसका सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर दिखाई दिया। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट और डब्ल्यूटीआई क्रूड दोनों की कीमतों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई। ऊर्जा कीमतों में यह तेजी वैश्विक महंगाई और उत्पादन लागत को प्रभावित कर सकती है, जिससे वित्तीय बाजारों में अस्थिरता बनी रहने की संभावना है।

    विशेषज्ञों के अनुसार, भू-राजनीतिक घटनाओं के दौरान कमोडिटी बाजार में तेज उतार-चढ़ाव सामान्य माना जाता है। निवेशक लगातार बदलती परिस्थितियों के अनुसार अपनी निवेश रणनीति में बदलाव करते हैं। यही कारण है कि एक ओर ऊर्जा बाजार में तेजी देखने को मिल रही है, जबकि दूसरी ओर कीमती धातुओं में मुनाफावसूली और बिकवाली का दबाव बना हुआ है।

    आने वाले दिनों में सोना, चांदी और कच्चे तेल की कीमतों की दिशा काफी हद तक अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम पर निर्भर करेगी। यदि मध्य पूर्व में तनाव और बढ़ता है तो वैश्विक बाजारों में अस्थिरता जारी रह सकती है। वहीं स्थिति सामान्य होने पर कमोडिटी बाजार में भी स्थिरता लौटने की संभावना है। फिलहाल निवेशकों की नजर वैश्विक आर्थिक संकेतों, ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक घटनाओं पर बनी हुई है, जो आने वाले कारोबारी सत्रों की दिशा तय करेंगे।

  • NEET और भर्ती घोटालों के खिलाफ छात्रों का अनोखा आंदोलन, डिलीवरी बॉय से ड्राइवर तक कर रहे सहयोग

    NEET और भर्ती घोटालों के खिलाफ छात्रों का अनोखा आंदोलन, डिलीवरी बॉय से ड्राइवर तक कर रहे सहयोग


    इंदौर । इंदौर के टंट्याभील चौराहे पर 23 सूत्रीय मांगों को लेकर छात्रों का आंदोलन लगातार आठवें दिन भी जारी रहा। इस आंदोलन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे किसी राजनीतिक दल या बड़े संगठन के बजाय आम लोगों का सहयोग मिल रहा है। धरना स्थल पर टेंट, गद्दे, भोजन, पेयजल और अन्य जरूरी व्यवस्थाएं समाज के लोगों और छात्रों के सहयोग से संचालित की जा रही हैं। कई युवा अपनी रोज की कमाई का हिस्सा भी आंदोलन के लिए दे रहे हैं ताकि प्रदर्शन बिना किसी बाधा के जारी रह सके।

    प्रदर्शन कर रहे छात्रों का कहना है कि जब उन्होंने आंदोलन शुरू किया था तब उनके पास बैठने और बारिश से बचने तक की व्यवस्था नहीं थी। शुरुआती दिनों में बारिश से बचने के लिए उन्हें अपने बैठने वाले गद्दों को ही ओढ़ना पड़ा। इस दौरान का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ तो कई सामाजिक संगठन और स्थानीय नागरिक उनकी मदद के लिए आगे आए। इसके बाद धरना स्थल पर टेंट, गद्दे और अन्य आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था की गई।

    छात्रों की मांग है कि नीट पेपर लीक मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, रिक्त और बैकलॉग पदों पर जल्द भर्ती प्रक्रिया शुरू हो तथा शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए। उनका कहना है कि जब तक उनकी 23 सूत्रीय मांगों पर सरकार की ओर से ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

    धरना स्थल पर मौजूद पवन अहिरवार और अरुण बड़ोले ने बताया कि रोजाना टेंट और अन्य व्यवस्थाओं पर करीब 1500 रुपये खर्च होते हैं। यह राशि आम नागरिकों के स्वैच्छिक सहयोग से जुटाई जा रही है। इसके लिए धरना स्थल पर सहयोग पेटी भी रखी गई है, जिसमें लोग अपनी इच्छा से आर्थिक सहायता दे रहे हैं। कई छात्र स्वयं लोगों से संपर्क कर आंदोलन के लिए सहयोग की अपील भी कर रहे हैं।

    इस आंदोलन में आम लोगों की भागीदारी भी देखने को मिल रही है। पेशे से ड्राइवर दिनेश वास्कले ने बताया कि उनके छोटे बच्चे हैं और वे नहीं चाहते कि भविष्य में उन्हें भी भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं का सामना करना पड़े। उन्होंने अपना जन्मदिन भी धरना स्थल पर मनाया और उस दिन सभी छात्रों के भोजन की व्यवस्था की। वहीं डिलीवरी बॉय चंदन मोवेल ने कहा कि वह अपनी कमाई का एक हिस्सा आंदोलन के लिए नियमित रूप से दे रहे हैं। इसी तरह कई अन्य युवाओं ने भी छात्रों के समर्थन में आर्थिक सहयोग दिया है।

    धरने में शामिल छात्रों के अनुसार रात के समय भी 15 से 20 छात्र लगातार धरना स्थल पर मौजूद रहते हैं, जबकि सुबह और शाम करीब 100 छात्र आंदोलन में शामिल होते हैं। उनका आरोप है कि अब तक प्रशासन का कोई जिम्मेदार अधिकारी उनकी मांगों पर चर्चा करने नहीं पहुंचा है।

    एलएलएम के छात्र अनिल विद्याराणा ने बताया कि विभिन्न छात्र संगठनों का भी आंदोलन को समर्थन मिल रहा है। कई संगठन धरना स्थल पर पहुंचकर छात्रों का मनोबल बढ़ा रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को प्रदेश स्तर तक विस्तारित किया जाएगा।

  • अमेरिका-ईरान तनाव का भारतीय बाजार पर असर, सेंसेक्स 78 हजार से नीचे फिसला, बढ़ते कच्चे तेल ने बढ़ाई निवेशकों की चिंता

    अमेरिका-ईरान तनाव का भारतीय बाजार पर असर, सेंसेक्स 78 हजार से नीचे फिसला, बढ़ते कच्चे तेल ने बढ़ाई निवेशकों की चिंता


    नई दिल्ली ।
    अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर बढ़े सैन्य तनाव का असर वैश्विक वित्तीय बाजारों के साथ भारतीय शेयर बाजार पर भी देखने को मिला। बुधवार को कारोबार की शुरुआत गिरावट के साथ हुई और शुरुआती सत्र में निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया। सेंसेक्स 78 हजार के स्तर से नीचे फिसल गया, जबकि निफ्टी में भी उल्लेखनीय कमजोरी दर्ज की गई। वैश्विक अनिश्चितता और ऊर्जा बाजार में बढ़ती अस्थिरता ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी।

    शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 400 अंकों से अधिक टूटकर 77 हजार के स्तर के आसपास पहुंच गया। वहीं निफ्टी भी 24,300 के नीचे कारोबार करता दिखाई दिया। बाजार में बिकवाली केवल बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं रही, बल्कि मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों पर भी दबाव देखने को मिला। इससे यह संकेत मिला कि निवेशकों ने व्यापक स्तर पर जोखिम कम करने की रणनीति अपनाई।

    क्षेत्रवार प्रदर्शन पर नजर डालें तो ऑयल एवं गैस, ऑटो, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक, इंफ्रास्ट्रक्चर, मीडिया, कमोडिटी और एफएमसीजी कंपनियों के शेयरों में कमजोरी देखने को मिली। दूसरी ओर फार्मा, हेल्थकेयर, सूचना प्रौद्योगिकी और रक्षा क्षेत्र से जुड़े कुछ शेयरों में अपेक्षाकृत मजबूती बनी रही। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अनिश्चित वैश्विक परिस्थितियों में निवेशक ऐसे क्षेत्रों की ओर रुख करते हैं जिन्हें अपेक्षाकृत सुरक्षित माना जाता है।

    वैश्विक बाजारों में भी मिश्रित संकेत देखने को मिले। एशिया के कुछ प्रमुख बाजारों में गिरावट दर्ज की गई, जबकि कुछ सूचकांक सीमित बढ़त के साथ कारोबार करते रहे। अमेरिकी बाजार भी पिछले कारोबारी सत्र में दबाव के साथ बंद हुए थे। अंतरराष्ट्रीय निवेशकों की निगाहें अब पश्चिम एशिया की स्थिति और उससे जुड़े अगले घटनाक्रम पर टिकी हुई हैं।

    विश्लेषकों के अनुसार बाजार पर सबसे बड़ा असर कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी का पड़ा है। पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट और डब्ल्यूटीआई क्रूड दोनों की कीमतों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात के माध्यम से पूरा करता है, इसलिए कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का असर महंगाई, आयात बिल और कॉरपोरेट लागत पर पड़ सकता है। यही कारण है कि ऊर्जा कीमतों में उछाल का प्रभाव शेयर बाजार पर भी दिखाई दिया।

    निवेशक फिलहाल वैश्विक घटनाक्रम पर करीबी नजर बनाए हुए हैं। यदि पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ता है या ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित होती है, तो वित्तीय बाजारों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। दूसरी ओर यदि स्थिति सामान्य होती है तो निवेशकों का भरोसा दोबारा मजबूत होने की संभावना भी बनी रहेगी।

    बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा परिस्थितियों में निवेशकों को जल्दबाजी में निर्णय लेने के बजाय दीर्घकालिक रणनीति पर ध्यान देना चाहिए। वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाएं अक्सर अल्पकालिक अस्थिरता पैदा करती हैं, लेकिन मजबूत आर्थिक आधार वाली कंपनियां लंबे समय में बेहतर प्रदर्शन कर सकती हैं। आने वाले कारोबारी सत्रों में अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम, कच्चे तेल की कीमतें और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां भारतीय शेयर बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।

  • फेसबुक एक्स इंस्टाग्राम पर जरा सी लापरवाही पड़ सकती है भारी सरकारी कर्मचारियों के लिए नई आचार संहिता लागू

    फेसबुक एक्स इंस्टाग्राम पर जरा सी लापरवाही पड़ सकती है भारी सरकारी कर्मचारियों के लिए नई आचार संहिता लागू


    मध्यप्रदेश। मध्यप्रदेश सरकार ने सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों के सोशल मीडिया उपयोग को लेकर बड़ा और सख्त फैसला लिया है। सामान्य प्रशासन विभाग ने नई आचार संहिता जारी करते हुए स्पष्ट कर दिया है कि अब सोशल मीडिया पर किसी भी प्रकार की गैर जिम्मेदाराना गतिविधि बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सरकार का उद्देश्य शासकीय सेवकों की निष्पक्षता बनाए रखना और सामाजिक सौहार्द को सुरक्षित रखना है। नई व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई है तथा सभी विभागों को इसका कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

    नई गाइडलाइन के अनुसार कोई भी सरकारी कर्मचारी फेसबुक एक्स इंस्टाग्राम व्हाट्सएप यूट्यूब या किसी भी अन्य सोशल मीडिया मंच पर ऐसी पोस्ट टिप्पणी फोटो वीडियो या अन्य सामग्री साझा नहीं करेगा जिससे जातीय धार्मिक सामाजिक या राजनीतिक वैमनस्य फैलने की आशंका हो। सरकार का मानना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर साझा की गई सामग्री का व्यापक प्रभाव पड़ता है और इससे समाज में तनाव की स्थिति भी उत्पन्न हो सकती है। इसलिए प्रत्येक शासकीय सेवक को सोशल मीडिया पर संयम और जिम्मेदारी के साथ व्यवहार करना होगा।

    सरकार ने केवल पोस्ट करने पर ही नहीं बल्कि विवादित सामग्री को लाइक शेयर या फॉरवर्ड करने पर भी रोक लगा दी है। यदि कोई कर्मचारी किसी भड़काऊ या विवादित पोस्ट को आगे बढ़ाता है तो उसे भी नियमों का उल्लंघन माना जाएगा। यानी अब केवल स्वयं सामग्री लिखना ही नहीं बल्कि आपत्तिजनक सामग्री के प्रसार में सहयोग करना भी अनुशासनहीनता की श्रेणी में आएगा।

    राजनीतिक गतिविधियों को लेकर भी सरकार ने स्पष्ट और सख्त रुख अपनाया है। आदेश के अनुसार कोई भी सरकारी कर्मचारी सोशल मीडिया के माध्यम से किसी राजनीतिक दल के समर्थन या विरोध में प्रचार नहीं करेगा। किसी राजनीतिक अभियान पर सार्वजनिक टिप्पणी करना या किसी दल के पक्ष अथवा विपक्ष में सक्रियता दिखाना मध्यप्रदेश सिविल सेवा आचरण नियमों का उल्लंघन माना जाएगा। सरकार का कहना है कि शासकीय सेवकों की निष्पक्षता लोकतांत्रिक व्यवस्था की आधारशिला है और उसे हर परिस्थिति में बनाए रखना आवश्यक है।

    नई आचार संहिता में कर्मचारियों को सोशल मीडिया पर होने वाली बहस विवाद और क्रॉस कमेंट से भी दूर रहने की सलाह दी गई है। शासन का मानना है कि सरकारी कर्मचारियों द्वारा की गई सार्वजनिक टिप्पणी को आम लोग सरकार की आधिकारिक सोच से जोड़कर देखते हैं। इसलिए डिजिटल माध्यम पर किसी भी प्रतिक्रिया से पहले पूरी सावधानी बरतना आवश्यक है।

    सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि नियमों का उल्लंघन करने वाले कर्मचारियों के खिलाफ केवल विभागीय कार्रवाई ही नहीं बल्कि आवश्यक होने पर भारतीय न्याय संहिता 2023 तथा अन्य लागू कानूनी प्रावधानों के तहत वैधानिक कार्रवाई भी की जा सकती है। विभागाध्यक्षों को निर्देश दिए गए हैं कि सभी कर्मचारियों को इन नियमों की जानकारी दें और पालन सुनिश्चित करें।

    डिजिटल युग में सोशल मीडिया सरकारी कर्मचारियों के लिए संवाद का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन चुका है लेकिन इसके साथ जिम्मेदारी भी बढ़ गई है। नई आचार संहिता का उद्देश्य अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर रोक लगाना नहीं बल्कि सरकारी सेवा की गरिमा निष्पक्षता और सामाजिक सद्भाव बनाए रखना है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नई व्यवस्था का पालन किस प्रकार सुनिश्चित किया जाता है और इससे सरकारी कार्यप्रणाली में किस तरह का सकारात्मक बदलाव देखने को मिलता है।