Author: bharati

  • ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ की एंट्री से सियासत गरम, 2029 चुनाव और केजरीवाल संग गठजोड़ पर अभिजीत ने दिया बयान

    ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ की एंट्री से सियासत गरम, 2029 चुनाव और केजरीवाल संग गठजोड़ पर अभिजीत ने दिया बयान


    नई दिल्ली।
    सोशल मीडिया पर अचानक उभरी ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ इन दिनों राजनीतिक और डिजिटल दोनों मंचों पर चर्चा का विषय बनी हुई है। इस आंदोलन के पीछे 30 वर्षीय अभिजीत दीपके हैं, जिन्होंने हाल ही में बॉस्टन यूनिवर्सिटी से पब्लिक रिलेशंस में मास्टर्स किया है। उनका दावा है कि यह सिर्फ एक पार्टी नहीं, बल्कि देश के युवाओं की नाराजगी और हताशा की आवाज है।

    अभिजीत ने बताया कि कुछ दिन पहले तक वह अमेरिका में नौकरी के लिए आवेदन कर रहे थे, लेकिन चीफ जस्टिस की उस टिप्पणी ने उन्हें झकझोर दिया जिसमें सोशल मीडिया पर सक्रिय युवाओं की तुलना ‘कॉकरोच’ और ‘परजीवी’ से की गई थी। इसी के बाद उन्होंने ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ की शुरुआत की। उन्होंने कहा कि अगर यही बयान किसी राजनीतिक नेता ने दिया होता तो शायद इतना असर नहीं होता, लेकिन जब संविधान की रक्षा करने वाले पद पर बैठा व्यक्ति ऐसी टिप्पणी करे तो युवाओं को चोट पहुंचना स्वाभाविक है।

    अभिजीत के मुताबिक, पार्टी को शुरू हुए महज कुछ ही दिनों में लाखों लोग इससे जुड़ गए। इंस्टाग्राम पर पार्टी के 33 लाख से ज्यादा फॉलोअर्स हो चुके हैं, जबकि वेबसाइट पर लाखों युवाओं ने रजिस्ट्रेशन कराया है। उनका कहना है कि यह किसी प्रायोजित अभियान का नतीजा नहीं, बल्कि युवाओं के भीतर जमा गुस्से का विस्फोट है।

    अरविंद केजरीवाल और आम आदमी पार्टी से रिश्तों को लेकर भी अभिजीत ने खुलकर बात की। उन्होंने माना कि वह 2020 से 2023 के बीच आम आदमी पार्टी के कम्युनिकेशन विभाग से जुड़े थे और शिक्षा-स्वास्थ्य मॉडल से प्रभावित होकर काम किया था। हालांकि उन्होंने साफ किया कि फिलहाल उनकी नई मुहिम किसी भी पारंपरिक राजनीतिक दल से दूरी बनाए रखना चाहती है।

    केजरीवाल के समर्थन को लेकर उन्होंने कहा कि कोई भी समर्थन दे सकता है, लेकिन ‘जेन-जी’ के युवा नहीं चाहते कि इस आंदोलन पर किसी स्थापित पार्टी की छाया पड़े। 2029 के चुनाव लड़ने के सवाल पर अभिजीत ने कहा कि अभी इस पर फैसला लेना जल्दबाजी होगी। पहले युवाओं की राय ली जाएगी और उसी आधार पर आगे की रणनीति तय होगी। उनका कहना है कि मौजूदा राजनीति युवाओं की असली समस्याओं से दूर हो चुकी है और अब राजनीतिक विमर्श बदलने की जरूरत है।

    कॉकरोच जनता पार्टी ने अपनी वेबसाइट पर पांच सूत्रीय एजेंडा भी जारी किया है। इसमें न्यायपालिका और चुनाव आयोग की स्वतंत्रता, महिलाओं को 50 प्रतिशत प्रतिनिधित्व, मीडिया स्वामित्व पर सवाल और राजनीतिक जवाबदेही जैसे मुद्दे शामिल हैं। अभिजीत का कहना है कि यह एक आदर्श लोकतांत्रिक व्यवस्था की दिशा में सोच है।

    उन्होंने मौजूदा राजनीति पर निशाना साधते हुए कहा कि देश में वर्षों से हिंदू-मुस्लिम जैसे मुद्दों पर राजनीति हो रही है, जबकि युवाओं के सामने रोजगार, शिक्षा, तकनीक और भविष्य जैसे बड़े सवाल खड़े हैं। उन्होंने ‘नीट पेपर लीक’ मामले का जिक्र करते हुए कहा कि सिस्टम की विफलता ने कई युवाओं का भविष्य प्रभावित किया है।

    अभिजीत ने दावा किया कि यह आंदोलन केवल सोशल मीडिया तक सीमित नहीं रहेगा। उनका कहना है कि देश के युवा अब अपनी आवाज लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से उठाने के लिए तैयार हैं। फंडिंग और संगठनात्मक ढांचे को लेकर उन्होंने कहा कि फिलहाल टीम रणनीति तैयार कर रही है और जल्दबाजी में कोई कदम नहीं उठाया जाएगा। उनका उद्देश्य एक स्वतंत्र और लंबे समय तक चलने वाला युवा आंदोलन खड़ा करना है।

  • MP: कॉल रिकॉर्ड खोलेंगे ट्विशा शर्मा की मौत का राज? 46 मोबाइल नंबर जांच के घेरे में

    MP: कॉल रिकॉर्ड खोलेंगे ट्विशा शर्मा की मौत का राज? 46 मोबाइल नंबर जांच के घेरे में


    भोपाल।
    भोपाल की ट्विशा शर्मा (Twisha Sharma) की मौत से जुड़े मामले में बुधवार को कई अहम घटनाएं सामने आईं. एक तरफ अदालत ने दोबारा पोस्टमार्टम (Post mortem) कराने की याचिका स्वीकार करने से इनकार कर दिया, वहीं दूसरी ओर मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के मुख्यमंत्री मोहन यादव (Chief Minister Mohan Yadav) ने पीड़ित परिवार को आश्वासन दिया कि राज्य सरकार इस मामले की जांच सीबीआई को सौंपने के लिए औपचारिक पत्र भेजेगी.

    33 वर्षीय ट्विशा शर्मा मॉडलिंग और एक्टिंग से जुड़ी थीं, 12 मई को भोपाल के कटारा हिल्स इलाके में स्थित अपने ससुराल में संदिग्ध परिस्थितियों में मृत पाई गई थीं. परिजनों ने आरोप लगाया है कि विवाह के बाद से उन्हें दहेज को लेकर प्रताड़ित किया जा रहा था और मानसिक व शारीरिक रूप से परेशान किया जाता था.


    46 मोबाइल नंबरों के कॉल डिटेल सुरक्षित रखने की मांग

    इस बीच परिवार ने 46 मोबाइल नंबरों के कॉल डिटेल रिकॉर्ड, लोकेशन डाटा, व्हाट्सऐप और डिजिटल मेटाडाटा सुरक्षित रखने की भी मांग की है. इसमें परिवार, घरेलू कर्मचारी, ड्राइवर, करीबी सहयोगी और घटना से पहले व बाद में जुड़े लोगों के नंबर शामिल हैं.


    परिवार ने जांच पर उठाए सवाल

    ट्विशा के परिवार ने स्थानीय पुलिस जांच पर सवाल उठाते हुए कहा कि बिना वजह प्रशासनिक देरी से शव खराब हो सकता है और अहम फॉरेंसिक साक्ष्य नष्ट होने का खतरा है. परिवार ने आरोप लगाया कि जमानत पर बाहर मौजूद मुख्य आरोपी गिरिबाला सिंह ने न्यायिक कार्यालय परिसर का उपयोग कर मीडिया से बातचीत की और मृतका के खिलाफ बयान दिए.

    इस पर मृतका के पिता नवनीधि शर्मा ने मध्य प्रदेश के राज्यपाल मंगूभाई सी पटेल को संवैधानिक ज्ञापन सौंपकर गिरिबाला सिंह की अर्ध-न्यायिक पद पर भूमिका की समीक्षा की मांग की है.


    FIR और मेडिकल रिपोर्ट में क्या?

    परिवार ने कहा कि एफआईआर और प्रारंभिक पोस्टमार्टम रिपोर्ट में ‘एंटीमॉर्टम हैंगिंग’ के साथ शरीर के अन्य हिस्सों पर कई चोटों का भी उल्लेख है. उनका कहना है कि इन तथ्यों ने परिवार के मन में मौत की वास्तविक परिस्थितियों को लेकर गंभीर संदेह पैदा कर दिया है.


    पूर्व सैनिकों का प्रदर्शन

    इसी बीच भोपाल में 50 से अधिक पूर्व सैनिक मोटरसाइकिल रैली निकालकर ट्विशा शर्मा को न्याय दिलाने और मामले की जांच मध्य प्रदेश से बाहर कराने की मांग करते नजर आए. उल्लेखनीय है कि ट्विशा शर्मा के भाई भारतीय सेना में मेजर हैं।

  • PM मोदी आज लेंगे कैबिनेट मीटिंग, फेरबदल की अटकलों के बीच लिए जा सकते हैं बड़े फैसले

    PM मोदी आज लेंगे कैबिनेट मीटिंग, फेरबदल की अटकलों के बीच लिए जा सकते हैं बड़े फैसले


    नई दिल्ली।
    पांच देशों के दौरे से वापस आने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) गुरुवार को कैबिनेट बैठक (Cabinet Meeting) करेंगे। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, बैठक में विभिन्न मंत्रालयों के कामकाज, लिए गए प्रमुख निर्णयों और उनके नतीजों तथा भविष्य की योजनाओं सहित अन्य विषयों पर चर्चा होगी। पीएम मोदी की अध्यक्षता में होने वाली बैठक में सभी कैबिनेट मंत्री, स्वतंत्र प्रभार वाले राज्य मंत्री और अन्य राज्य मंत्रियों को शामिल होने के निर्देश दिए गए हैं। कैबिनेट में फेरबदल की अटकलों के बीच, यह इस वर्ष कैबिनेट की पहली पूर्ण बैठक होगी।

    सूत्रों ने बताया कि बैठक में विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के कामकाज, हाल के दिनों में लिए गए प्रमुख निर्णयों और उनके परिणामों, तथा भविष्य की योजनाओं पर चर्चा की जाएगी। विभिन्न सरकारी योजनाओं और कार्यक्रमों के अलग-अलग पहलुओं, उन्हें अधिकतम सफलता के लिए कैसे लागू किया जाए और अन्य विषयों की भी समीक्षा किए जाने की उम्मीद है।


    क्या होगा बैठक का एजेंडा?

    पीएम मोदी के पश्चिम एशिया में जारी संकट और उसके आर्थिक प्रभावों का जिक्र करने की संभावना है और वह मंत्रालयों तथा विभागों को निर्देश दे सकते हैं कि नागरिकों को कम से कम असुविधा हो, इसके लिए किस तरह से आगे बढ़ा जाए। सूत्रों ने बताया कि बैठक में ऊर्जा, कृषि, उर्वरक, विमानन, शिपिंग और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जा सकता है।

    पश्चिम एशिया में संघर्ष शुरू होने के कुछ ही समय बाद, मोदी ने सभी संबंधित पक्षों को निर्देश दिया था कि वे नागरिकों और इससे प्रभावित क्षेत्रों की समस्याओं को कम करने के लिए हर संभव कदम उठाएं।


    आमजन को फायदा पहुंचाने पर होगी चर्चा

    बैठक में आम लोगों के फायदे के लिए सभी क्षेत्रों में सुधार लाने की सरकार की प्राथमिकता पर भी चर्चा होने की संभावना है। प्रधानमंत्री ने इससे पहले अगले 10 वर्षों के लिए सुधार की प्राथमिकताओं की रूपरेखा पेश करते हुए कहा था कि उनकी सरकार की रिफॉर्म एक्सप्रेस ने व्यवस्थागत बदलाव लाए हैं और आम नागरिकों को काफी हद तक लाभ पहुंचाया है। यह बैठक प.बंगाल, असम और पुडुचेरी में भाजपा की जबर्दस्त जीत के बाद हो रही है।

  • ट्रंप बोले… इजराइल में मेरी लोकप्रियता की रेटिंग 99%…. दो साल बाद वहां जाकर लडूंगा PM चुनाव

    ट्रंप बोले… इजराइल में मेरी लोकप्रियता की रेटिंग 99%…. दो साल बाद वहां जाकर लडूंगा PM चुनाव


    वॉशिंगटन।
    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने मंगलवार को फिर एक ऐसा दावा किया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय जगत में हलचल पैदा हो गई है। पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने दावा किया कि इज़रायल (Israel) में उनकी लोकप्रियता 99 प्रतिशत है और मजाकिया अंदाज में कहा कि अमेरिका में राष्ट्रपति पद का कार्यकाल पूरा होने के बाद (2028 में) वह वहां प्रधानमंत्री पद का चुनाव (Prime Minister’s post, election) लड़ सकते हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि उन्हें एक ताज़ा सर्वेक्षण में बेहद ऊंची रेटिंग मिली है। उन्होंने कहा, “तो शायद यह काम पूरा करने के बाद, मैं इज़रायल जाऊंगा और प्रधानमंत्री पद का चुनाव (Prime Minister’s post, election) लड़ूंगा। आज सुबह ही एक जनमत सर्वेक्षण आया है, जिसमें मेरी रेटिंग 99% है।”

    जब पत्रकारों ने उनसे ईरान पर संभावित हमले के बारे में पूछा, तो ट्रंप ने कहा कि इस्लामिक गणराज्य के साथ किसी समझौते पर पहुंचने की उन्हें “कोई जल्दी नहीं है।” उन्होंने कहा, “हमें होर्मुज समुद्री मार्ग को खोलना होगा, वह तुरंत खुल जाएगा, इसलिए हम इसे एक मौका देंगे। मुझे कोई जल्दी नहीं है। हर कोई कह रहा है, ‘ओह, मध्यावधि चुनाव आ रहे हैं।’ आदर्श रूप से, मैं चाहूंगा कि कम से कम लोग मारे जाएं, न कि बहुत ज़्यादा।”


    नेतन्याहू बहुत अच्छे इंसान

    पत्रकार लगातार ट्रंप से पूछते रहे कि उन्होंने इज़रायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से इस हमले के बारे में क्या कहा है? इस पर रिपब्लिकन नेता ने जवाब दिया, “वह बहुत अच्छे इंसान हैं; वह वही करेंगे जो मैं उनसे करवाना चाहूंगा। और वह एक बेहतरीन व्यक्ति हैं… यह मत भूलिए कि वह युद्धकालीन प्रधानमंत्री रह चुके हैं।” उन्होंने यह दावा भी किया कि इज़रायल में नेतन्याहू के साथ “सही बर्ताव नहीं किया जाता है। ट्रंप ने कल ही ईरान को एक नई चेतावनी जारी करते हुए कहा था कि “एक और बड़ा हमला” हो सकता है, क्योंकि दोनों देश एक स्थायी शांति समझौते की शर्तों को लेकर एक गंभीर गतिरोध पर पहुंच गए हैं।


    ट्रंप और नेतन्याहू पर 58 मिलियन डॉलर का इनाम?

    इस बीच, खबरों के अनुसार ईरान, ट्रंप और नेतन्याहू पर 58 मिलियन डॉलर का इनाम रखने पर विचार-विमर्श कर रहा है। ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति समिति के अध्यक्ष इब्राहिम अज़ीज़ी ने घोषणा की है कि यह समिति “इस्लामिक गणराज्य के सैन्य और सुरक्षा बलों द्वारा जवाबी कार्रवाई” नामक एक विधेयक तैयार कर रही है। ईरान वायर और द टेलीग्राफ यूके की रिपोर्टों के अनुसार, इस विधेयक के माध्यम से किसी भी ऐसे व्यक्ति या संस्था को 50 मिलियन यूरो (लगभग 58.23 मिलियन डॉलर) की राशि का भुगतान औपचारिक रूप से सुनिश्चित किया जाएगा, जो अमेरिका और इज़रायल के इन नेताओं की हत्या करेगा। ईरानी संसद 28 फरवरी को तेहरान पर हुए हमलों के लिए,जिनमें तत्कालीन सर्वोच्च नेता अली खामेनेई मारे गए थे,ट्रंप और नेतन्याहू की हत्या के लिए इनाम देने वाले एक बिल पर मतदान करने वाली है।

  • NEET UG: री-एग्जाम से पहले अलर्ट मोड पर सरकार…. अफवाहों पर नकेल कसने की तैयारी

    NEET UG: री-एग्जाम से पहले अलर्ट मोड पर सरकार…. अफवाहों पर नकेल कसने की तैयारी


    नई दिल्ली।
    मेडिकल (Medical) की सबसे बड़ी प्रवेश परीक्षा (NEET-UG) के री-एग्जाम से पहले केंद्र सरकार (Central government) पूरी तरह से अलर्ट मोड में आ गई है। 3 मई को हुई परीक्षा में पेपर लीक (Paper leak) और ग्रेस मार्क्स जैसे विवादों के बाद, अब सरकार सोशल मीडिया पर फैलने वाली झूठी अफवाहों और पैनिक फैलाने वाले पोस्ट्स पर सख्त नकेल कसने की तैयारी में है। छात्रों का भरोसा फिर से बहाल करने के लिए शिक्षा मंत्रालय ने टेक जगत के दिग्गजों- गूगल (Google), मेटा (Meta) और टेलीग्राम (Telegram) को भी अपने साथ जोड़ लिया है, ताकि किसी भी तरह की भ्रामक जानकारी को इंटरनेट पर फैलने से पहले ही रोका जा सके। बता दें कि आज 21 जून को NEET-UG का दोबारा एग्जाम हो रहा है।


    शिक्षा मंत्री ने लिया मोर्चा, दिए ‘फोकस्ड क्रैकडाउन’ के निर्देश

    केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने बुधवार को एक हाई-लेवल मीटिंग की अध्यक्षता की। इस महत्वपूर्ण बैठक में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के प्रतिनिधियों के अलावा केंद्रीय खुफिया और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के अधिकारी भी मौजूद रहे। शिक्षा मंत्री ने सख्त हिदायत दी है कि परीक्षा से पहले ऑनलाइन एक्टिव होने वाले उन नेटवर्क्स पर सीधा और ‘फोकस्ड क्रैकडाउन’ किया जाए, जो एक सोची-समझी साजिश के तहत गलत जानकारी फैलाते हैं।


    टेलीग्राम और सीक्रेट ग्रुप्स पर खुफिया एजेंसियों की पैनी नजर

    शिक्षा मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि सबसे बड़ी चिंता टेलीग्राम चैनल्स, अनजान ग्रुप्स और बॉट्स को लेकर है, जो बड़े एग्जाम्स से ठीक पहले अचानक बहुत एक्टिव हो जाते हैं। ये ग्रुप्स व्यूज और पैसों के लालच में ‘पेपर लीक’ के झूठे दावे, क्लिकबेट मैसेज और बिना सिर-पैर की जानकारी सर्कुलेट करते हैं। इससे छात्रों और उनके अभिभावकों के बीच दहशत का माहौल बन जाता है।

    खुफिया इनपुट्स से यह भी खुलासा हुआ है कि कुछ चुनिंदा फोन नंबर्स का इस्तेमाल करके दर्जनों संदिग्ध चैनल ऑपरेट किए जा रहे हैं, जो इनकी संगठित गतिविधि की ओर इशारा करता है। इसके बाद एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स पर डिजिटल सर्विलांस और कड़ी कर दी गई है। उन ग्रुप्स पर खास नजर है जो छात्रों को एग्जाम से पहले “अंदर की जानकारी” या एडवांस में पेपर देने का दावा करते हैं।


    टेक कंपनियों ने दिया पूरा सहयोग का भरोसा

    राहत की बात यह है कि सरकार की इस सख्ती पर मेटा, गूगल और टेलीग्राम जैसी कंपनियों ने सकारात्मक रुख दिखाया है। उन्होंने भरोसा दिलाया है कि परीक्षा से जुड़ी किसी भी भ्रामक या फेक जानकारी की पहचान करके उसे तेजी से ब्लॉक और रिमूव किया जाएगा। शिक्षा मंत्री ने कंपनियों से कहा है कि वे नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) और पुलिस एजेंसियों के साथ मिलकर काम करें, ताकि प्रोपेगेंडा और खौफ फैलाने वाले चैनल्स को तुरंत बंद किया जा सके।

    अधिकारियों ने बताया कि सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों को भी परीक्षा से पहले डिजिटल सर्विलांस मजबूत करने को कहा गया है। उन एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स और तेजी से बढ़ रहे ग्रुप्स पर खास नजर रखी जा रही है, जो परीक्षार्थियों को परीक्षा से जुड़ी सामग्री एडवांस में देने या ‘इनसाइड इंफॉर्मेशन’ मुहैया कराने का दावा करते हैं।


    एग्जाम सेंटर पर कैसी होगी व्यवस्था?

    मंगलवार को री-एग्जाम की तैयारियों की समीक्षा करते हुए शिक्षा मंत्री ने साफ कर दिया था कि पिछली परीक्षा की सभी खामियों को पूरी तरह दूर किया जाना चाहिए। सभी राज्यों के जिलाधिकारियों (DM) और पुलिस अधीक्षकों (SP) के साथ को-ऑर्डिनेशन मीटिंग करने के निर्देश दिए गए हैं। इसका मकसद परीक्षा केंद्रों पर सुरक्षा और मॉनिटरिंग के प्रोटोकॉल को सख्ती से लागू करना है। इसके साथ ही, अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया गया है कि री-एग्जाम के दिन छात्रों के लिए ट्रांसपोर्टेशन (आवाजाही), पीने के पानी और अन्य जरूरी सुविधाओं का खास ख्याल रखा जाए ताकि उन्हें किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।


    क्यों हो रहा है नीट री-एग्जाम?

    आपको बता दें कि 3 मई को आयोजित की गई नीट-यूजी परीक्षा को पेपर लीक के आरोपों के बाद रद्द कर दिया गया था। इसके बाद ही री-एग्जाम की घोषणा की गई थी। इस पूरे विवाद (पेपर लीक के आरोप, ग्रेस मार्क्स विवाद और संगठित नकल) ने परीक्षा प्रणाली की सुरक्षा और विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे, जिसके बाद सरकार अब हर स्तर पर सख्ती बरत रही है।

  • US में हजारों H-1B वीजा धारक मुश्किल में…. 60 दिन में दूसरी नौकरी नहीं मिली तो छोड़ना पड़ेगा अमेरिका

    US में हजारों H-1B वीजा धारक मुश्किल में…. 60 दिन में दूसरी नौकरी नहीं मिली तो छोड़ना पड़ेगा अमेरिका


    वॉशिंगटन।
    अमेरिका (America) की दिग्गज टेक कंपनियों मेटा (Meta), अमेज़न (Amazon) और ओरेकल (Oracle) में हाल ही में बड़े पैमाने पर हुई छंटनी ने हजारों भारतीय टेक पेशेवरों (Indian Tech Professionals) को मुश्किल में डाल दिया है। नौकरी जाने के बाद अब H-1B वीज़ा धारक भारतीयों (H-1B Visa holding Indians.) के सामने केवल 60 दिनों का समय बचा है। इसी दौरान उन्हें नई नौकरी खोजनी होगी वरना उन्हें अमेरिका छोड़ना पड़ सकता है। दरअसल, अमेरिकी इमिग्रेशन नियमों के अनुसार, H-1B वीजा पर काम कर रहे किसी विदेशी कर्मचारी की नौकरी जाने के बाद उसे 60 दिनों का “ग्रेस पीरियड” मिलता है। इस दौरान अगर उसे कोई नया नियोक्ता नहीं मिलता जो उसके वीज़ा को स्पॉन्सर करे, तो उसे अमेरिका छोड़ना पड़ सकता है।

    अब इस संकट की वजह से वर्षों से अमेरिका में बसे कई भारतीय परिवारों के लिए स्थिति बेहद तनावपूर्ण हो गई है। उनके सामने अब नौकरी ढूंढ़ने से लेकर अपना घर बचाने, बच्चों की शिक्षा और अमेरिका में रहने के अधिकार पर भी खतरा मंडरा रहा है। कई भारतीयों के लिए, जिन्होंने वहाँ अपनी ज़िंदगी बनाने में सालों बिताए हैं, यह स्थिति बहुत भारी टेंशन लेकर आया है।


    अतिरिक्त कागजात की माँग

    इस बीच, कई छंटनीशुदा कर्मचारी अब कथित तौर पर अस्थायी रूप से B-2 विजिटर वीजा पर जाने की कोशिश कर रहे हैं, जिससे उन्हें अमेरिका में छह महीने तक रहने की अनुमति मिल सकती है। लेकिन इमिग्रेशन विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका में मौजूदा इमिग्रेशन माहौल को देखते हुए, यह रास्ता भी अब और ज़्यादा मुश्किल होता जा रहा है। इकॉनमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, इमिग्रेशन अधिकारी अब B-2 विजिटर वीजा ची चाहत रखने वालों से अतिरिक्त कागज़ात की माँग कर रहे हैं और छंटनीशुदा H-1B कर्मचारियों के वीज़ा आवेदन ज़्यादा संख्या में खारिज कर रहे हैं।


    भारतीयों पर सबसे बड़ा असर

    अमेरिका स्थित इमिग्रेशन वकील राजीव खन्ना के मुताबिक, हाल के महीनों में B-1/B-2 स्टेटस परिवर्तन से जुड़े मामलों में अतिरिक्त दस्तावेजों की मांग और अस्वीकृति नोटिस तेजी से बढ़े हैं। उन्होंने कहा कि उनके करियर में पहली बार इतनी बड़ी संख्या में ऐसे मामले सामने आ रहे हैं। H-1B वीजा कार्यक्रम में भारतीयों की भागीदारी सबसे अधिक है। आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025 में मंजूर की गई 4,06,348 H-1B याचिकाओं में से 2,83,772 केवल भारतीयों की थीं। 2026 में अब तक 144 टेक कंपनियों में 1,10,000 से अधिक कर्मचारी अपनी नौकरी खो चुके हैं, जिनमें बड़ी संख्या भारतीयों की है।

    मुश्किलें और बढ़ती चुनौतियां
    पारिवारिक और आर्थिक संकट: कई भारतीय पिछले एक दशक से अमेरिका में रह रहे हैं और ग्रीन कार्ड के लंबे इंतजार (backlog) में फंसे हैं। उनके बच्चे वहां पैदा हुए हैं और उनके ऊपर होम लोन जैसी बड़ी वित्तीय जिम्मेदारियां हैं।

    वीजा नियमों में सख्ती: समय बढ़ाने के लिए कई कर्मचारी अस्थायी रूप से B-2 (विजिटर) वीजा में स्विच करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन अब प्रशासन इसमें भी अधिक कागजी कार्रवाई और ‘सबूतों की मांग’ (RFE) कर रहा है।


    विकल्प की तलाश

    इमिग्रेशन विशेषज्ञों का कहना है कि अब वीजा मंजूरी मिलना पहले से कहीं अधिक कठिन हो गया है। ऐसे में अब नए विकल्पों की तलाश हो रही है। कई भारतीय अब कनाडा और यूरोप को एक विकल्प के रूप में देख रहे हैं। इसके अलावा, कुछ लोग F-1 (छात्र वीजा) या O-1 (असाधारण क्षमता वाले व्यक्तियों के लिए वीजा) जैसे अन्य मार्गों पर भी विचार कर रहे हैं। बता दें कि मेटा जैसी कंपनियां अब अपनी संरचना को ‘फ्लैट’ करने और AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) पर ध्यान केंद्रित करने के लिए छंटनी का सहारा ले रही हैं, जिससे आने वाले दिनों में टेक सेक्टर में काम करने वाले भारतीयों की चिंताएं और बढ़ सकती हैं।

  • आज बाजार में क्या रहेगा रुख? मुनाफे के मौके की तलाश में निवेशक सतर्क

    आज बाजार में क्या रहेगा रुख? मुनाफे के मौके की तलाश में निवेशक सतर्क


    नई दिल्ली ।  भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत वैश्विक संकेतों और घरेलू आर्थिक आंकड़ों पर निर्भर रहने वाली है। विशेषज्ञों के अनुसार बाजार में आज मिश्रित रुख (Mixed Trend) देखने को मिल सकता है, जहां कुछ सेक्टरों में खरीदारी रहेगी तो कुछ में मुनाफावसूली का दबाव बना रह सकता है।

    गिफ्ट निफ्टी के संकेतों से यह अनुमान लगाया जा रहा है कि बाजार की ओपनिंग फ्लैट से हल्की तेजी के साथ हो सकती है। हालांकि, निवेशक किसी भी बड़े दांव से पहले ग्लोबल मार्केट्स के ट्रेंड और डॉलर इंडेक्स की चाल पर नजर बनाए रखेंगे।

    निफ्टी-सेंसेक्स पर दबाव और सपोर्ट लेवल
    मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक निफ्टी के लिए आज का प्रमुख सपोर्ट लेवल 22,200–22,100 के आसपास रह सकता है, जबकि ऊपर की ओर 22,450–22,600 का स्तर मजबूत रेजिस्टेंस के रूप में काम कर सकता है। सेंसेक्स में भी आज सीमित दायरे में कारोबार होने की संभावना है। बैंकिंग और आईटी सेक्टर बाजार को दिशा देने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

    कौन से सेक्टर रह सकते हैं फोकस में?
    आज के ट्रेडिंग सत्र में कुछ सेक्टर निवेशकों का ध्यान खींच सकते हैं-
    बैंकिंग सेक्टर: लोन ग्रोथ और Q4 नतीजों के बाद हलचल संभव
    आईटी सेक्टर: ग्लोबल टेक संकेतों से प्रभावित
    ऑटो सेक्टर: डिमांड डेटा के चलते तेजी की उम्मीद
    फार्मा सेक्टर: सुरक्षित निवेश के रूप में खरीदारी संभव

    ग्लोबल मार्केट और FII का असर
    अमेरिकी बाजारों में मिले-जुले संकेत और एशियाई बाजारों की सुस्ती का असर भारतीय बाजार पर दिख सकता है। इसके साथ ही विदेशी निवेशकों (FII) की गतिविधियां भी बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। अगर FII लगातार खरीदारी करते हैं तो बाजार में मजबूती लौट सकती है, लेकिन बिकवाली बढ़ने पर दबाव देखने को मिल सकता है।

    निवेशकों के लिए जरूरी संकेत
    विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि आज के बाजार में निवेशक सावधानी के साथ ट्रेडिंग करें। अचानक आने वाले उतार-चढ़ाव से बचने के लिए स्टॉप लॉस का उपयोग जरूरी रहेगा। शॉर्ट टर्म ट्रेडर्स के लिए यह दिन अवसर और जोखिम दोनों लेकर आ सकता है। लॉन्ग टर्म निवेशक मजबूत फंडामेंटल वाले स्टॉक्स में धीरे-धीरे निवेश बढ़ा सकते हैं।

    21 मई का शेयर बाजार पूरी तरह से ग्लोबल संकेतों, डॉलर मूवमेंट और घरेलू निवेश भावना पर निर्भर रहेगा। बाजार में बड़ा ट्रेंड फिलहाल नहीं दिख रहा है, लेकिन सेक्टर आधारित तेजी निवेशकों को मौके दे सकती है।

  • सुबह का सही नाश्ता क्या हो? ओट्स और पोहा में जानें कौन देगा ज्यादा एनर्जी

    सुबह का सही नाश्ता क्या हो? ओट्स और पोहा में जानें कौन देगा ज्यादा एनर्जी


    नई दिल्ली । सुबह का नाश्ता हमारे पूरे दिन की एनर्जी और हेल्थ को तय करता है। आजकल फिटनेस और वजन घटाने की चाहत के बीच सबसे बड़ा सवाल यही बन गया है कि आखिर सुबह ओट्स खाना बेहतर है या पोहा। दोनों ही विकल्प भारतीय रसोई में आसानी से उपलब्ध हैं, जल्दी बन जाते हैं और हल्के भी माने जाते हैं, लेकिन इनके शरीर पर असर अलग-अलग होते हैं।

    ओट्स को अक्सर वेट लॉस डाइट का “किंग” कहा जाता है। इसकी सबसे बड़ी खासियत इसमें मौजूद घुलनशील फाइबर बीटा-ग्लूकन है, जो पाचन क्रिया को धीमा करता है और लंबे समय तक भूख नहीं लगने देता। यही कारण है कि ओट्स खाने के बाद व्यक्ति लंबे समय तक पेट भरा हुआ महसूस करता है और बार-बार स्नैकिंग की जरूरत कम हो जाती है। इसके अलावा ओट्स ब्लड शुगर को भी अचानक बढ़ने से रोकते हैं, जिससे शरीर को लगातार स्थिर ऊर्जा मिलती रहती है। हालांकि विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि फ्लेवर्ड ओट्स की जगह प्लेन ओट्स का सेवन ज्यादा फायदेमंद होता है क्योंकि इनमें अतिरिक्त चीनी नहीं होती।

    वहीं दूसरी तरफ पोहा को अक्सर हल्का और साधारण नाश्ता माना जाता है, लेकिन इसकी अपनी अलग ताकत है। चपटे चावल से बनने वाला पोहा आसानी से पच जाता है और शरीर को तुरंत ऊर्जा देता है। जब इसमें मूंगफली, हरी सब्जियां, राई और करी पत्ता मिलाया जाता है तो इसकी न्यूट्रिशन वैल्यू काफी बढ़ जाती है। मूंगफली प्रोटीन और हेल्दी फैट प्रदान करती है, जबकि नींबू आयरन के अवशोषण को बेहतर बनाता है। यही वजह है कि पोहा एक बैलेंस्ड और एनर्जी देने वाला नाश्ता माना जाता है।

    न्यूट्रिशन एक्सपर्ट्स का कहना है कि असली फर्क सिर्फ ओट्स या पोहा में नहीं बल्कि आपके पूरे डाइट पैटर्न में होता है। अगर आपका नाश्ता संतुलित है और उसमें फाइबर, प्रोटीन और हेल्दी फैट शामिल हैं, तो वह शरीर को बेहतर तरीके से सपोर्ट करता है। वजन घटाने के लिए केवल एक फूड आइटम पर निर्भर रहना सही तरीका नहीं है, बल्कि पूरे दिन की डाइट और लाइफस्टाइल ज्यादा महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

    कुछ लोग ओट्स को अपनी फिटनेस जर्नी का हिस्सा बनाते हैं क्योंकि यह लंबे समय तक पेट भरा रखता है, जबकि कुछ लोग पोहा को पसंद करते हैं क्योंकि यह स्वादिष्ट, हल्का और जल्दी पचने वाला होता है। दोनों ही विकल्प सही हैं, बस जरूरत है उन्हें सही मात्रा और सही सामग्री के साथ खाने की।

    निष्कर्ष यही है कि ओट्स और पोहा दोनों ही हेल्दी ब्रेकफास्ट हैं, लेकिन आपके लक्ष्य के अनुसार चुनाव करना सबसे महत्वपूर्ण है। वजन घटाना हो तो ओट्स बेहतर हो सकता है, जबकि तुरंत एनर्जी और हल्के नाश्ते के लिए पोहा एक शानदार विकल्प है।

  • मौसम का मिजाज बदला: कई राज्यों में आंधी-बारिश की चेतावनी जारी

    मौसम का मिजाज बदला: कई राज्यों में आंधी-बारिश की चेतावनी जारी

    मध्‍य प्रदेश 21 मई का दिन देश के अलग-अलग हिस्सों में मिले-जुले मौसम का संकेत दे रहा है। कहीं तेज धूप और उमस लोगों को परेशान कर सकती है, तो वहीं कुछ राज्यों में बादलों की आवाजाही और हल्की बारिश से मौसम सुहावना होने की संभावना है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, प्री-मानसून गतिविधियां अब धीरे-धीरे सक्रिय हो रही हैं, जिससे मौसम में लगातार बदलाव देखने को मिल रहा है। उत्तर भारत के कई राज्यों में तापमान सामान्य से अधिक बना हुआ है और दोपहर के समय लू जैसे हालात भी महसूस किए जा सकते हैं। वहीं शाम होते-होते कुछ क्षेत्रों में तेज हवाओं के साथ बादल छाने की संभावना जताई गई है।

    मध्य प्रदेश सहित इन राज्यों में गर्मी का असर जारी
    मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और हरियाणा के कई इलाकों में दिन के समय तेज धूप और गर्म हवाओं का असर रहेगा। खासकर दोपहर 12 बजे से 4 बजे के बीच तापमान चरम पर रह सकता है। मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में हल्के बादल और स्थानीय स्तर पर गरज-चमक के साथ बारिश की संभावना भी जताई गई है, जिससे तापमान में थोड़ी गिरावट आ सकती है। हालांकि पूरी तरह राहत की उम्मीद अभी कम ही है।

    दक्षिण और पूर्वी भारत में बारिश की संभावना
    दक्षिण भारत के केरल, कर्नाटक और तमिलनाडु के कुछ क्षेत्रों में प्री-मानसून बारिश का दौर जारी रह सकता है। वहीं पूर्वोत्तर राज्यों में हल्की से मध्यम बारिश होने के आसार हैं। बंगाल की खाड़ी में बने मौसमी दबाव के कारण कुछ इलाकों में तेज हवाएं और बिजली गिरने की घटनाएं भी देखने को मिल सकती हैं। मौसम विभाग ने इन क्षेत्रों में सतर्क रहने की सलाह दी है

    आंधी-तूफान और बिजली गिरने का अलर्ट
    कई राज्यों में अचानक मौसम बदलने की संभावना है। खासकर ग्रामीण इलाकों में तेज आंधी और बिजली गिरने का खतरा बना रह सकता है। किसानों और खुले क्षेत्रों में काम करने वाले लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
     IMD ने कहा है कि आने वाले कुछ दिनों तक मौसम में अस्थिरता बनी रहेगी, जिससे कभी तेज धूप तो कभी बारिश का सिलसिला जारी रह सकता है।

    दिल्ली-एनसीआर में कैसा रहेगा मौसम
    दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में दिन के समय गर्म हवाएं चल सकती हैं। शाम तक आंशिक बादल छाने की संभावना है। हालांकि बारिश की संभावना फिलहाल सीमित है, लेकिन मौसम में हल्की ठंडक महसूस हो सकती है।

    21 मई का मौसम देशभर में पूरी तरह मिश्रित रहने वाला है। कहीं गर्मी का प्रकोप तो कहीं बारिश की राहत देखने को मिलेगी। बदलते मौसम को देखते हुए लोगों को सावधानी बरतने और मौसम अपडेट पर नजर रखने की सलाह दी जाती है।
  • गुरुवार के उपाय: एक चुटकी हल्दी से बदल सकती है किस्मत और आर्थिक स्थिति

    गुरुवार के उपाय: एक चुटकी हल्दी से बदल सकती है किस्मत और आर्थिक स्थिति


    नई दिल्ली । सनातन धर्म और ज्योतिष शास्त्र में गुरुवार का दिन भगवान विष्णु और देवगुरु बृहस्पति को समर्पित माना जाता है। इस दिन व्रत और पूजा के साथ-साथ हल्दी से जुड़े उपाय करना विशेष फलदायी माना जाता है। मान्यता है कि हल्दी न केवल धार्मिक दृष्टि से शुभ है, बल्कि यह कुंडली में गुरु ग्रह की स्थिति को भी मजबूत करती है, जिससे जीवन में सुख-समृद्धि और स्थिरता आती है।

    ज्योतिष के अनुसार जिन लोगों की कुंडली में गुरु ग्रह कमजोर होता है, उन्हें गुरुवार के दिन विशेष उपाय करने की सलाह दी जाती है। गुरु ग्रह मजबूत होने से विवाह, करियर और पारिवारिक जीवन में सकारात्मक परिणाम मिलते हैं।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान विष्णु की पूजा के समय हल्दी का प्रयोग अत्यंत शुभ माना गया है। गुरुवार को भगवान विष्णु की प्रतिमा के सामने चुटकीभर हल्दी अर्पित करने से दांपत्य जीवन में मधुरता बढ़ती है और रिश्तों में मजबूती आती है।

    यदि किसी व्यक्ति को लंबे समय से आर्थिक समस्या या रुका हुआ धन परेशान कर रहा हो, तो गुरुवार के दिन चावल में हल्दी मिलाकर उसे लाल कपड़े में बांधकर पर्स या तिजोरी में रखना शुभ माना जाता है। इससे धन से जुड़ी बाधाएं दूर होने की मान्यता है।

    वहीं, करियर और बिजनेस में लगातार रुकावटों को दूर करने के लिए हल्दी की गांठ से माला बनाकर भगवान गणेश को अर्पित करना लाभकारी माना गया है। इससे कार्यों में आ रही बाधाएं कम होती हैं और सफलता के रास्ते खुलते हैं।

    इसके अलावा, काली हल्दी और केसर को पानी में मिलाकर तिजोरी पर स्वास्तिक बनाने की परंपरा भी प्रचलित है, जिसे व्यापार में वृद्धि और आर्थिक स्थिरता के लिए शुभ माना जाता है।

    कुल मिलाकर गुरुवार के दिन हल्दी से जुड़े ये सरल उपाय न केवल धार्मिक रूप से महत्वपूर्ण हैं, बल्कि इन्हें जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और आर्थिक मजबूती का प्रतीक भी माना जाता है।