Author: bharati

  • सलमान विवाद के बाद अकेले पड़ गए थे विवेक ओबरॉय ऐसे वक्त में अक्षय कुमार ने बढ़ाया मदद का हाथ

    सलमान विवाद के बाद अकेले पड़ गए थे विवेक ओबरॉय ऐसे वक्त में अक्षय कुमार ने बढ़ाया मदद का हाथ


    नई दिल्ली । फिल्मी दुनिया में सफलता जितनी तेजी से मिलती है उतनी ही तेजी से कठिन दौर भी सामने आ सकता है। अभिनेता विवेक ओबरॉय की जिंदगी इसका बड़ा उदाहरण है। शानदार फिल्मों और कई पुरस्कारों के बावजूद एक समय ऐसा आया जब उन्हें काम मिलना लगभग बंद हो गया। इंडस्ट्री में उनका बहिष्कार होने लगा और लगातार बढ़ती परेशानियों के बीच वह मानसिक रूप से भी बेहद परेशान रहने लगे। ऐसे कठिन समय में अभिनेता अक्षय कुमार उनके लिए उम्मीद की किरण बनकर सामने आए और बिना किसी दिखावे के उनकी ऐसी मदद की जिसे विवेक आज भी कभी नहीं भूल पाए हैं।

    एक पुराने पॉडकास्ट में विवेक ओबरॉय ने उस दौर को याद करते हुए बताया कि वह लंबे समय तक घर पर ही रहने लगे थे और गहरे तनाव से गुजर रहे थे। तभी एक दिन अक्षय कुमार का फोन आया। उन्होंने हालचाल पूछा और कुछ ही समय बाद सीधे विवेक के घर पहुंच गए। अक्षय ने उनकी पूरी बात सुनी और उन्हें समझाया कि हर मुश्किल समय हमेशा नहीं रहता। उन्होंने कहा कि वह हर समस्या का समाधान तो नहीं कर सकते लेकिन उनका आत्मविश्वास जरूर वापस ला सकते हैं।

    विवेक के मुताबिक उस समय अक्षय कुमार कई बड़े स्टेज शो और कार्यक्रमों में व्यस्त थे। व्यस्त कार्यक्रम के कारण वह कुछ ऑफर स्वीकार नहीं कर पा रहे थे। ऐसे में उन्होंने उन कार्यक्रमों और प्रोजेक्ट्स की सिफारिश विवेक ओबरॉय के लिए कर दी। इन आयोजनों में काम मिलने से विवेक को आर्थिक राहत मिली और सबसे बड़ी बात यह रही कि वह फिर से दर्शकों के बीच पहुंचने लगे। स्टेज पर लोगों का प्यार और तालियां सुनकर उनका आत्मविश्वास लौटने लगा और मानसिक स्थिति भी पहले से बेहतर होती गई।

    विवेक ने बताया कि अक्षय कुमार ने कभी यह दावा नहीं किया कि वह उनके लिए किसी से लड़ेंगे या इंडस्ट्री की राजनीति बदल देंगे। उन्होंने केवल एक व्यावहारिक रास्ता दिखाया जिससे वह फिर से अपने पैरों पर खड़े हो सके। यही वजह है कि विवेक आज भी उस मदद को अपने जीवन का सबसे बड़ा सहारा मानते हैं।

    दरअसल विवेक ओबरॉय का करियर उस समय विवादों में आ गया था जब उन्होंने अभिनेता सलमान खान के खिलाफ प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कई गंभीर आरोप लगाए थे। यह मामला उस दौर में काफी चर्चा में रहा और इसके बाद उन्हें फिल्मों के ऑफर कम मिलने लगे। हालांकि इस कठिन दौर में भी उन्होंने हार नहीं मानी और धीरे धीरे अपने करियर को नई दिशा देने का प्रयास किया।
    दरअसल विवेक ओबरॉय का करियर उस समय विवादों में आ गया था जब उन्होंने अभिनेता सलमान खान के खिलाफ प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कई गंभीर आरोप लगाए थे। यह मामला उस दौर में काफी चर्चा में रहा और इसके बाद उन्हें फिल्मों के ऑफर कम मिलने लगे। हालांकि इस कठिन दौर में भी उन्होंने हार नहीं मानी और धीरे धीरे अपने करियर को नई दिशा देने का प्रयास किया।

    विवेक ओबरॉय की यह कहानी बताती है कि सफलता के पीछे केवल प्रतिभा ही नहीं बल्कि कठिन समय में मिलने वाला सही साथ भी बेहद मायने रखता है। अक्षय कुमार की संवेदनशीलता और व्यवहारिक मदद ने साबित किया कि सच्ची दोस्ती केवल शब्दों से नहीं बल्कि सही समय पर किए गए सहयोग से पहचानी जाती है। यही वजह है कि वर्षों बाद भी विवेक ओबरॉय खुले दिल से उस मदद को याद करते हैं और अक्षय कुमार के प्रति अपना सम्मान व्यक्त करते हैं।

  • धर्मेंद्र के निधन के महीनों बाद हेमा मालिनी का बड़ा खुलासा; बताया 'हीमैन' अपनी आखिरी सांस तक क्या चाहते थे

    धर्मेंद्र के निधन के महीनों बाद हेमा मालिनी का बड़ा खुलासा; बताया 'हीमैन' अपनी आखिरी सांस तक क्या चाहते थे


    नई दिल्ली ।
    बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता और ‘हीमैन’ के नाम से मशहूर धर्मेंद्र के निधन के महीनों बाद उनकी पत्नी और प्रसिद्ध अभिनेत्री हेमा मालिनी ने उनकी आखिरी इच्छा को लेकर कई भावुक खुलासे किए हैं। एक हालिया साक्षात्कार में हेमा मालिनी ने बताया कि धर्मेंद्र के जाने से लगा झटका ऐसा है जिससे देओल परिवार आज भी पूरी तरह उबर नहीं पाया है। उन्होंने बताया कि धर्मेंद्र अपने जीवन के अंतिम दिनों में परिवार की एकजुटता को लेकर बेहद संवेदनशील थे और उन्होंने अपनी एक ऐसी इच्छा साझा की थी जिसे पूरा करना अब पूरे परिवार की जिम्मेदारी है।

    साक्षात्कार के दौरान जब हेमा मालिनी से धर्मेंद्र की आखिरी इच्छा के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने अत्यंत भावुक होते हुए बताया कि धरम जी हमेशा कहते थे कि चाहे परिस्थितियां कैसी भी हों, बच्चों और परिवार के साथ हमेशा जुड़े रहना। उन्होंने परिवार के साथ अधिकतम समय बिताने की बात पर जोर दिया था। धर्मेंद्र का मानना था कि आज के आधुनिक दौर में जहां बच्चे अक्सर अपने करियर और अलग रास्तों पर निकल जाते हैं, वहां परिवार को एक सूत्र में पिरोकर रखना सबसे महत्वपूर्ण और चुनौतीपूर्ण कार्य है। उन्होंने स्पष्ट कहा था कि काम तो जीवनभर होता रहेगा, लेकिन परिवार हमेशा प्राथमिकता पर होना चाहिए।

    इसके साथ ही हेमा मालिनी ने धर्मेंद्र के पहली पत्नी से हुए बेटों, सनी देओल और बॉबी देओल के साथ अपने पारिवारिक संबंधों और बॉन्ड को लेकर भी पहली बार खुलकर बात की। मध्य प्रदेश सहित देशभर में उनके प्रशंसकों के बीच अक्सर देओल परिवार के आंतरिक रिश्तों को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जाती रही हैं, लेकिन हेमा मालिनी ने इन सभी अफवाहों पर विराम लगा दिया। उन्होंने कहा कि सनी और बॉबी दोनों ही बेहद प्यारे और अच्छे स्वभाव के हैं। उन्होंने साफ किया कि पूरा परिवार हमेशा एक-दूसरे के साथ खड़ा रहता है।

    हेमा मालिनी ने पारिवारिक एकजुटता पर आगे बात करते हुए कहा कि वे अपने पारिवारिक प्रेम और मुलाकातों की अनावश्यक पब्लिसिटी या सोशल मीडिया पर दिखावा करने में विश्वास नहीं रखती हैं, लेकिन अंदरूनी तौर पर पूरा देओल परिवार एक है और वे सभी एक बेहद सुखी परिवार की तरह रहते हैं। उन्होंने धर्मेंद्र को याद करते हुए उन्हें एक बेहतरीन इंसान, एक स्नेही पिता और एक बेहद प्यारा नाना व दादा बताया। उन्होंने कहा कि परिवार के छोटे बच्चे आज भी उन्हें हर पल बेहद मिस करते हैं क्योंकि उनका व्यक्तित्व ही ऐसा था जो सबको बांधकर रखता था।

    उल्लेखनीय है कि भारतीय सिनेमा के इस महान अभिनेता का निधन 24 नवंबर 2025 को अपने 90वें जन्मदिन से ठीक कुछ दिन पहले हुआ था। छह दशकों से अधिक लंबे फिल्मी करियर में धर्मेंद्र ने करोड़ों दर्शकों के दिलों पर राज किया। उनके निधन के बाद उनकी अंतिम फिल्म ‘इक्कीस’ सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी, जिसने दर्शकों के साथ-साथ पूरे फिल्म जगत को बेहद भावुक कर दिया था। वर्तमान में सनी देओल, बॉबी देओल और ईशा देओल सहित उनके सभी बच्चे सोशल मीडिया के माध्यम से अपने पिता की पुरानी यादों और तस्वीरों को प्रशंसकों के साथ साझा कर उन्हें श्रद्धांजलि देते रहते हैं।

  • कम उम्र में बंद हो रहे पीरियड्स कहीं समय से पहले मेनोपॉज का संकेत तो नहीं जानिए पूरी सच्चाई

    कम उम्र में बंद हो रहे पीरियड्स कहीं समय से पहले मेनोपॉज का संकेत तो नहीं जानिए पूरी सच्चाई


    नई दिल्ली । मेनोपॉज को लंबे समय तक केवल 45 से 50 वर्ष की उम्र के बाद होने वाली सामान्य जैविक प्रक्रिया माना जाता रहा है लेकिन अब चिकित्सा विशेषज्ञों के सामने एक नई और चिंताजनक तस्वीर उभर रही है। हाल के अध्ययनों में यह संकेत मिले हैं कि समय से पहले मेनोपॉज यानी प्रीमैच्योर ओवेरियन फेल्योर के मामले अब किशोरियों में भी सामने आने लगे हैं। कुछ मामलों में 13 वर्ष तक की लड़कियों में भी अंडाशय के समय से पहले काम करना बंद करने की समस्या दर्ज की गई है। विशेषज्ञ इसे दुर्लभ जरूर मानते हैं लेकिन चेतावनी देते हैं कि यदि समय रहते इसकी पहचान और उपचार न किया जाए तो भविष्य में प्रजनन क्षमता के साथ हड्डियों और हृदय स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।

    विशेषज्ञों के अनुसार यदि किसी किशोरी के पीरियड्स लगातार अनियमित रहें या चार महीने अथवा उससे अधिक समय तक माहवारी बंद रहे तो इसे केवल हार्मोनल बदलाव या बढ़ती उम्र का सामान्य हिस्सा मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसे मामलों में स्त्री रोग विशेषज्ञ से तुरंत परामर्श लेना जरूरी है। आवश्यकता पड़ने पर हार्मोन जांच के साथ जेनेटिक ऑटोइम्यून और अन्य चिकित्सकीय परीक्षण भी कराए जा सकते हैं ताकि बीमारी का समय रहते पता लगाया जा सके।

    यूनान की नेशनल एंड कपोडिस्ट्रियन यूनिवर्सिटी ऑफ एथेंस के विशेषज्ञों द्वारा किए गए रिव्यू अध्ययन में बताया गया है कि यदि अंडाशय समय से पहले काम करना बंद कर दें तो महिला की प्रजनन क्षमता प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा एस्ट्रोजन हार्मोन की कमी के कारण हड्डियां कमजोर होने लगती हैं और भविष्य में ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा बढ़ जाता है। साथ ही हृदय संबंधी बीमारियों का जोखिम भी सामान्य महिलाओं की तुलना में अधिक हो सकता है।

    अमेरिका के कई प्रमुख चिकित्सा संस्थानों में किए गए शोध में 13 से 21 वर्ष की आयु की लड़कियों में ऐसे मामलों का विश्लेषण किया गया। शोधकर्ताओं ने पाया कि कई मरीजों में बीमारी की पहचान इसलिए देर से हुई क्योंकि शुरुआती लक्षणों को सामान्य हार्मोनल असंतुलन समझ लिया गया। यही कारण है कि विशेषज्ञ अब माता पिता और किशोरियों दोनों को मासिक धर्म में होने वाले असामान्य बदलावों के प्रति सतर्क रहने की सलाह दे रहे हैं।

    अध्ययनों में यह भी सामने आया है कि जिन महिलाओं में 40 वर्ष की आयु से पहले मेनोपॉज हो जाता है उनमें भविष्य में हार्ट अटैक स्ट्रोक और अन्य हृदय रोगों का खतरा काफी बढ़ जाता है। शोध के अनुसार 40 वर्ष से पहले मेनोपॉज होने पर पहली बार हृदय रोग होने का जोखिम सामान्य महिलाओं की तुलना में लगभग 55 प्रतिशत अधिक पाया गया। वहीं 40 से 44 वर्ष की उम्र के बीच मेनोपॉज होने पर यह खतरा 30 प्रतिशत और 45 से 49 वर्ष के बीच होने पर 12 प्रतिशत अधिक दर्ज किया गया।

    विशेषज्ञ यह भी बताते हैं कि महिलाओं के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य का भी मेनोपॉज से गहरा संबंध है। हिंसा मानसिक तनाव और लंबे समय तक चलने वाली भावनात्मक परेशानियां भी समय से पहले मेनोपॉज का जोखिम बढ़ा सकती हैं। इसलिए संतुलित आहार नियमित व्यायाम पर्याप्त नींद तनाव नियंत्रण और समय पर चिकित्सकीय जांच महिलाओं के संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए बेहद जरूरी हैं। यदि पीरियड्स लंबे समय तक बंद रहें या लगातार अनियमित हों तो बिना देरी किए विशेषज्ञ डॉक्टर से सलाह लेना ही सबसे सुरक्षित और प्रभावी कदम माना जाता है।

  • मल्टीप्लेक्सों में लागू हुआ एयरलाइंस और होटलों वाला 'डायनैमिक प्राइसिंग मॉडल'; अब मांग बढ़ने के साथ ही महंगे होंगे मूवी टिकट

    मल्टीप्लेक्सों में लागू हुआ एयरलाइंस और होटलों वाला 'डायनैमिक प्राइसिंग मॉडल'; अब मांग बढ़ने के साथ ही महंगे होंगे मूवी टिकट

    नई दिल्ली । देश के सिनेमाघरों और मल्टीप्लेक्सों में फिल्म देखने के शौकीन दर्शकों को पिछले कुछ समय से एक अजीब और खर्चीले अनुभव से गुजरना पड़ रहा है। कई लोग ऑनलाइन टिकट बुकिंग प्लेटफॉर्म्स के अतिरिक्त चार्ज से बचने के लिए सीधे मल्टीप्लेक्स के काउंटर पर जाकर टिकट खरीदते हैं, ताकि उन्हें कुछ राहत मिल सके। इसके बावजूद, अब काउंटर पर भी अचानक टिकटों के दाम काफी बढ़े हुए मिल रहे हैं। यह कोई इत्तेफाक या तकनीकी खराबी नहीं है, बल्कि इसके पीछे सिनेमाघर मालिकों की एक सोची-समझी और नई व्यावसायिक रणनीति काम कर रही है, जिसने दर्शकों की जेब पर सीधा असर डालना शुरू कर दिया है।

    मल्टीप्लेक्स उद्योग में तेजी से पैर पसार रही इस नई तरकीब को ‘डायनैमिक प्राइसिंग मॉडल’ कहा जाता है। यह एक ऐसा डिजिटल और रणनीतिक रेवेन्यू मॉडल है, जिसका उपयोग लंबे समय से विमानन कंपनियां और होटल उद्योग अपनी बुकिंग के लिए करते आ रहे हैं। अब इसी तकनीक को पीवीआर आयनॉक्स जैसी बड़ी सिनेमाई शृंखलाओं ने भी अपने थिएटरों में पूरी तरह लागू कर दिया है। इस व्यवस्था के अंतर्गत जैसे-जैसे किसी विशेष शो या ऑडिटोरियम की सीटें भरती जाती हैं, वैसे-वैसे बची हुई सीटों की मांग के आधार पर उनके दामों में स्वचालित रूप से बढ़ोतरी कर दी जाती है। मध्य प्रदेश सहित पूरे देश के सिनेमा प्रेमियों को अब इस नई व्यवस्था के तहत पसंदीदा शो देखने के लिए अधिक कीमत चुकानी पड़ रही है।

    इस नई मूल्य निर्धारण नीति के संबंध में पीवीआर आयनॉक्स के बिजनेस प्लानिंग और स्ट्रैटजी चीफ कमल ज्ञानचंदानी ने एक आधिकारिक बातचीत में स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने बताया कि डायनैमिक प्राइसिंग वैश्विक स्तर पर स्वीकार की जा चुकी एक बेहद प्रभावी रेवेन्यू मैनेजमेंट प्रक्रिया है। इसे फ्लाइटों, होटलों, खेल आयोजनों और लाइव एंटरटेनमेंट जैसे विभिन्न प्रमुख क्षेत्रों में सफलता के साथ अपनाया जा रहा है। इसी तर्ज पर मल्टीप्लेक्सों में भी कुछ समय पहले इस मॉडल को अपनी आंतरिक राजस्व रणनीति के तहत लागू किया गया था, ताकि दर्शकों को कीमतों के विभिन्न विकल्प देते हुए सिनेमाघरों में सीटों की कुल ऑक्यूपेंसी को बेहतर और संतुलित किया जा सके।

    प्रबंधन के अनुसार, इस तरकीब का मुख्य उद्देश्य पूरे थिएटर नेटवर्क में दर्शकों की मांग को संतुलित करना और ग्राहकों को टिकट बुकिंग में अधिक लचीलापन प्रदान करना है। इस मॉडल के लागू होने से जहां एक तरफ भारी मांग में चल रही फिल्मों के शोज को पूरी तरह हाउसफुल होने से रोकने में मदद मिलती है, वहीं उन दर्शकों को पसंदीदा सीट मिल जाती है जो उसके लिए अधिक प्रीमियम मूल्य चुकाने के लिए तैयार होते हैं। इसके विपरीत, इस रणनीति का एक दूसरा पहलू यह भी है कि जिन शोज की टिकटें सामान्यतः नहीं बिक पाती हैं या जिनकी मांग बेहद कम होती है, उन्हें बहुत कम और सस्ते दामों पर उपलब्ध कराया जाता है ताकि सिनेमाघर पूरी तरह खाली न रहें।

    इस पूरी व्यवस्था में मल्टीप्लेक्स मालिकों को होने वाला वित्तीय लाभ बिल्कुल स्पष्ट दिखाई देता है, क्योंकि वे कम शोज चलाकर भी लोकप्रिय फिल्मों से अधिकतम राजस्व वसूलने में सफल हो रहे हैं। दर्शकों के लिए यह मॉडल तब तक ही फायदेमंद है जब तक वे कार्यदिवसों में या कम लोकप्रिय समय पर फिल्में देखने की योजना बनाते हैं। वीकेंड और प्राइम टाइम के शोज के लिए अब दर्शकों को काउंटर पर जाकर भी बढ़ी हुई कीमतें ही चुकानी होंगी। भविष्य में जब भी आप किसी थिएटर काउंटर पर जाएं और आपको टिकट अप्रत्याशित रूप से महंगा मिले, तो समझ जाइए कि आप मल्टीप्लेक्सों की इसी नई एल्गोरिदम आधारित तकनीक का सामना कर रहे हैं।

  • ज्योतिषीय गणनाओं में पंचांक योग लेकर आ रहा अप्रत्याशित चुनौतियां; इन राशि के जातकों को वित्तीय और स्वास्थ्य मामलों में बरतनी होगी विशेष सावधानी

    ज्योतिषीय गणनाओं में पंचांक योग लेकर आ रहा अप्रत्याशित चुनौतियां; इन राशि के जातकों को वित्तीय और स्वास्थ्य मामलों में बरतनी होगी विशेष सावधानी

    नई दिल्ली । ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों के गोचर, उनके मध्य बनने वाले विशिष्ट कोणों और दृष्टियों को मानवीय जीवन के लिए बेहद प्रभावशाली माना गया है। इसी कड़ी में आगामी 22 जुलाई 2026 को अंतरिक्ष में एक अत्यंत महत्वपूर्ण और संवेदनशील खगोलीय घटना घटने जा रही है। साहस, ऊर्जा और क्रोध के कारक माने जाने वाले मंगल ग्रह तथा अध्यात्म, कल्पना और रहस्य के अधिपति वरुण यानी नेप्च्यून ग्रह एक-दूसरे से 72 डिग्री के एक विशेष कोण पर आने वाले हैं। इस विशिष्ट ज्योतिषीय और खगोलीय स्थिति के कारण गणनाओं में एक विशेष पंचांक योग का निर्माण हो रहा है, जिसे पारंपरिक ज्योतिष में काफी संवेदनशील और कुछ राशियों के लिए प्रतिकूल माना जाता है।

    इस विशिष्ट योग के प्रभाव के चलते मंगल की उग्रता और वरुण की संवेदनशीलता का एक अनोखा मेल देखने को मिलेगा, जो कुछ विशेष राशियों के जातकों के लिए मानसिक तनाव, असमंजस, भ्रम की स्थिति और अचानक बड़े अप्रत्याशित खर्चे लेकर आ सकता है। ज्योतिषविदों के अनुसार, देश के मध्य भाग में स्थित मध्य प्रदेश सहित सभी क्षेत्रों के जातकों पर इसका मिलाजुला प्रभाव देखा जा सकेगा, लेकिन चार विशेष राशियों को इस अवधि के दौरान बेहद संभलकर रहने की सख्त सलाह दी जाती है। इस कालखंड में लिए गए जल्दबाजी के फैसले और वित्तीय निवेश भारी नुकसान का कारण बन सकते हैं।

    मिथुन राशि के जातकों के लिए यह समय आर्थिक और व्यावसायिक दृष्टिकोण से काफी उतार-चढ़ाव भरा साबित हो सकता है। पंचांक योग के प्रभाव के कारण इस राशि के लोगों को किसी भी तरह के सट्टेबाजी, लॉटरी या उच्च जोखिम वाले निवेशों से पूरी तरह दूर रहने की आवश्यकता है, अन्यथा धन हानि के प्रबल योग दिखाई दे रहे हैं। इसके साथ ही वरुण ग्रह द्वारा उत्पन्न भ्रम की स्थिति के कारण जीवनसाथी या व्यावसायिक साझेदार के साथ अविश्वास और गलतफहमी पनप सकती है, जिससे बचने के लिए आपसी बातचीत में पूरी पारदर्शिता बनाए रखना बेहद जरूरी होगा।

    कन्या राशि के जातकों को इस अवधि में अपने स्वास्थ्य और कार्यस्थल पर गुप्त शत्रुओं को लेकर अत्यधिक सतर्क रहने की आवश्यकता है। काम के अत्यधिक बोझ के कारण इस राशि के लोगों को शारीरिक और मानसिक थकान का सामना करना पड़ सकता है, इसलिए खान-पान और दिनचर्या का विशेष ध्यान रखना होगा। इसके अतिरिक्त, वाहन चलाते समय अतिरिक्त सावधानी बरतने और ऑफिस में अपने विरोधियों की गतिविधियों पर नजर रखने की सलाह दी जाती है, क्योंकि वे आपके कार्यों का श्रेय लेने का प्रयास कर सकते हैं। अपनी गोपनीय योजनाओं को इस समय किसी के साथ भी साझा न करें।

    धनु राशि के जातकों के लिए यह योग बेवजह का मानसिक तनाव और असमंजस की स्थिति उत्पन्न कर सकता है। इस दौरान कोई भी बड़ा या नीतिगत फैसला जल्दबाजी अथवा भावुकता में आकर लेने से बचना चाहिए। कार्यस्थल पर सहकर्मियों और परिवार में करीबियों के साथ वैचारिक मतभेद या बहस होने की आशंका बनी रहेगी, जिससे बचने के लिए वाणी और क्रोध पर नियंत्रण रखना अनिवार्य होगा। वहीं, कुंभ राशि के जातकों के लिए सुख-सुविधाओं या अनियोजित चीजों पर अचानक बड़ा खर्च सामने आ सकता है, जिससे वित्तीय बजट पूरी तरह बिगड़ सकता है। मानसिक शांति बनाए रखने के लिए इस राशि के लोगों को योग और ध्यान का सहारा लेना चाहिए तथा 22 जुलाई के आसपास किसी भी नए बड़े प्रोजेक्ट की शुरुआत या बड़े वित्तीय लेनदेन से पूरी तरह बचना चाहिए।

  • युवाओं को सोशल मीडिया की लत का आरोप मेटा पर 1.4 खरब डॉलर जुर्माने की मांग से बढ़ीं मुश्किलें

    युवाओं को सोशल मीडिया की लत का आरोप मेटा पर 1.4 खरब डॉलर जुर्माने की मांग से बढ़ीं मुश्किलें


    नई दिल्ली । अमेरिका में सोशल मीडिया कंपनी मेटा एक बार फिर कानूनी विवादों के केंद्र में आ गई है। फेसबुक और इंस्टाग्राम की पैरेंट कंपनी पर आरोप लगाया गया है कि उसने अपने प्लेटफॉर्म को इस तरह डिजाइन किया जिससे किशोरों और युवा यूजर्स में सोशल मीडिया की लत बढ़ी और कंपनी ने सुरक्षा से जुड़े संभावित खतरों के बारे में लोगों को पूरी और सही जानकारी नहीं दी। इन गंभीर आरोपों के आधार पर अमेरिका के चार राज्यों ने मेटा पर लगभग 1.4 खरब डॉलर के जुर्माने की मांग की है। यदि यह मांग अदालत में स्वीकार होती है तो यह तकनीकी कंपनियों के खिलाफ प्रस्तावित सबसे बड़े आर्थिक दंडों में से एक माना जाएगा।

    कैलिफोर्निया कोलोराडो केंटकी और न्यू जर्सी की ओर से दायर मामलों में कहा गया है कि मेटा ने अपने प्लेटफॉर्म को इस तरह विकसित किया जिससे युवा उपयोगकर्ता लंबे समय तक स्क्रीन पर बने रहें। आरोप है कि कंपनी ने एल्गोरिद्म और अन्य फीचर्स के जरिए उपयोगकर्ताओं की निर्भरता बढ़ाई और मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों को लेकर पर्याप्त पारदर्शिता नहीं बरती। राज्यों का कहना है कि इस वजह से बड़ी संख्या में किशोर प्रभावित हुए हैं और इसी आधार पर भारी जुर्माने की मांग की गई है।

    मेटा ने अदालत में दायर अपने जवाब में इन सभी आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है। कंपनी का कहना है कि प्रस्तावित जुर्माना तथ्यों और कानूनी आधार से परे है। मेटा के अनुसार उपभोक्ता संरक्षण से जुड़े मामलों में इतनी बड़ी राशि के दंड का कोई उदाहरण नहीं है। कंपनी का यह भी दावा है कि फेसबुक और इंस्टाग्राम को युवाओं की सुरक्षा को ध्यान में रखकर लगातार नए सुरक्षा फीचर्स के साथ अपडेट किया जाता रहा है और सोशल मीडिया की लत संबंधी आरोपों का कोई ठोस आधार नहीं है।

    इस मामले में सिर्फ चार राज्य ही नहीं बल्कि अमेरिका के कई अन्य राज्यों ने भी मेटा के खिलाफ अलग-अलग कानूनी कार्रवाई शुरू कर रखी है। कुल 29 राज्यों ने संघीय अदालत में कंपनी पर बच्चों और किशोरों के डेटा संग्रह तथा ऑनलाइन गोपनीयता कानूनों के उल्लंघन के आरोप लगाए हैं। इन मामलों में यह भी कहा गया है कि कंपनी ने अभिभावकों की उचित सहमति के बिना नाबालिगों से संबंधित जानकारी एकत्र की जो संघीय कानूनों का उल्लंघन हो सकता है।

    कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला केवल मेटा तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि भविष्य में सभी बड़ी सोशल मीडिया कंपनियों की कार्यप्रणाली और उनकी जवाबदेही तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है। यदि अदालत राज्यों के पक्ष में फैसला देती है तो डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बच्चों और किशोरों की सुरक्षा को लेकर दुनिया भर में नए और कड़े नियम लागू होने का रास्ता खुल सकता है।

    अब इस बहुचर्चित मामले की अगली महत्वपूर्ण सुनवाई अगस्त में अमेरिकी संघीय अदालत में होगी। इस दौरान अदालत यह तय करेगी कि मेटा पर लगाए गए आरोपों में कितनी कानूनी मजबूती है और क्या कंपनी पर भारी आर्थिक दंड लगाया जाना उचित होगा। दुनिया भर की टेक कंपनियों और डिजिटल उद्योग की नजरें अब इस फैसले पर टिकी हुई हैं क्योंकि इसका असर वैश्विक सोशल मीडिया उद्योग पर भी पड़ सकता है।

  • चलते समय घुटनों से आती है कट-कट की आवाज? जानिए कहीं जोड़ों की चिकनाई तो नहीं हो रही कम

    चलते समय घुटनों से आती है कट-कट की आवाज? जानिए कहीं जोड़ों की चिकनाई तो नहीं हो रही कम


    नई दिल्ली । घुटनों में दर्द चलने में तकलीफ सुबह उठते समय अकड़न या चलते समय कट कट की आवाज आना आजकल केवल बढ़ती उम्र की समस्या नहीं रह गई है। बदलती जीवनशैली बढ़ता वजन लंबे समय तक बैठे रहने की आदत और शारीरिक गतिविधियों की कमी के कारण कम उम्र के लोग भी जोड़ों की परेशानियों का सामना कर रहे हैं। यदि आपको भी लंबे समय से घुटनों में दर्द या जकड़न महसूस हो रही है तो इसे सामान्य समझकर नजरअंदाज न करें क्योंकि यह जोड़ों की चिकनाई कम होने का संकेत हो सकता है।

    विशेषज्ञों के अनुसार हमारे शरीर के प्रत्येक जोड़ के बीच एक विशेष प्रकार का द्रव मौजूद होता है जिसे सिनोवियल फ्लूइड कहा जाता है। यह द्रव जोड़ों को आसानी से हिलने डुलने में मदद करता है और हड्डियों को आपस में रगड़ खाने से बचाता है। जब किसी कारण से इस द्रव की मात्रा कम होने लगती है या जोड़ों की कार्टिलेज घिसने लगती है तब घुटनों में दर्द अकड़न और सूजन जैसी समस्याएं शुरू हो जाती हैं। यही स्थिति आम भाषा में घुटनों की ग्रीस कम होना कहलाती है।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं कि बढ़ती उम्र मोटापा ऑस्टियोआर्थराइटिस पुरानी चोट शारीरिक निष्क्रियता और लंबे समय तक भारी वजन उठाने की आदत इस समस्या के प्रमुख कारण हो सकते हैं। इसके अलावा महिलाओं में रजोनिवृत्ति के बाद हार्मोनल बदलाव के कारण भी जोड़ों की समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है। डायबिटीज विटामिन डी की कमी और गठिया जैसी बीमारियां भी घुटनों की सेहत को प्रभावित कर सकती हैं।

    यदि सुबह उठते समय घुटनों में जकड़न महसूस हो बैठने के बाद उठने में दर्द हो सीढ़ियां चढ़ने उतरने में कठिनाई आए या चलते समय घुटनों से आवाज आने लगे तो तुरंत डॉक्टर से जांच करानी चाहिए। कई बार समय पर इलाज नहीं मिलने से समस्या बढ़ सकती है और चलने फिरने में भी परेशानी होने लगती है।

    जोड़ों को स्वस्थ रखने के लिए संतुलित आहार बेहद जरूरी है। ओमेगा थ्री फैटी एसिड से भरपूर अखरोट अलसी के बीज और फैटी फिश का सेवन लाभदायक माना जाता है। हरी पत्तेदार सब्जियां दूध दही और पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन लेने से हड्डियां और मांसपेशियां मजबूत रहती हैं। विटामिन डी और कैल्शियम भी जोड़ों और हड्डियों की मजबूती के लिए आवश्यक पोषक तत्व हैं। ऑलिव ऑयल का सीमित उपयोग शरीर में सूजन कम करने में मदद कर सकता है।

    इसके साथ ही कुछ आदतों में बदलाव भी जरूरी है। तला भुना भोजन जंक फूड और अधिक चीनी वाले खाद्य पदार्थ शरीर में सूजन बढ़ा सकते हैं इसलिए इनका सेवन कम करना चाहिए। यदि वजन अधिक है तो उसे नियंत्रित करना जरूरी है क्योंकि अतिरिक्त वजन का सीधा दबाव घुटनों पर पड़ता है। रोजाना तेज चाल से चलना तैराकी साइकिल चलाना और योग जैसी लो इम्पैक्ट एक्सरसाइज जोड़ों को सक्रिय और मजबूत बनाए रखने में मदद करती हैं।

    विशेषज्ञों का कहना है कि घुटनों की ग्रीस कम होने की समस्या का समय रहते पता चल जाए तो दवाओं फिजियोथेरेपी सही खानपान और नियमित व्यायाम की मदद से इसे काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। इसलिए यदि लंबे समय से घुटनों में दर्द या अकड़न बनी हुई है तो घरेलू उपायों पर निर्भर रहने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेकर सही जांच और उपचार जरूर कराएं।

  • डायबिटीज चुपचाप छीन सकती है आंखों की रोशनी जानिए किन लक्षणों पर तुरंत डॉक्टर से मिलना है जरूरी

    डायबिटीज चुपचाप छीन सकती है आंखों की रोशनी जानिए किन लक्षणों पर तुरंत डॉक्टर से मिलना है जरूरी


    नई दिल्ली । डायबिटीज आज दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली गंभीर बीमारियों में शामिल है। अधिकांश लोग इसे केवल ब्लड शुगर बढ़ने तक सीमित मानते हैं लेकिन इसका असर शरीर के कई महत्वपूर्ण अंगों पर पड़ता है। इनमें आंखें सबसे अधिक संवेदनशील होती हैं। लंबे समय तक ब्लड शुगर का स्तर अनियंत्रित रहने पर आंखों की बेहद महीन रक्त वाहिकाएं क्षतिग्रस्त होने लगती हैं जिससे धीरे धीरे नजर कमजोर होने लगती है और समय पर इलाज न मिलने पर अंधेपन तक का खतरा पैदा हो सकता है।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार डायबिटीज के कारण होने वाली आंखों की बीमारी को डायबिटिक रेटिनोपैथी कहा जाता है। यह स्थिति तब विकसित होती है जब लगातार बढ़ा हुआ ब्लड शुगर रेटिना की रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचाता है। शुरुआत में इस बीमारी के कोई स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते इसलिए अधिकांश मरीज तब तक अनजान रहते हैं जब तक आंखों की रोशनी प्रभावित नहीं होने लगती। यही वजह है कि डायबिटीज के मरीजों के लिए नियमित आंखों की जांच बेहद जरूरी मानी जाती है।

    यदि आपको धुंधला दिखाई देने लगा है आंखों के सामने काले धब्बे या फ्लोटर्स नजर आते हैं रात में देखने में परेशानी होती है या रंगों की पहचान करने में दिक्कत महसूस होती है तो इसे सामान्य समस्या समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसे लक्षण डायबिटिक रेटिनोपैथी या आंखों से जुड़ी किसी अन्य गंभीर बीमारी का संकेत हो सकते हैं। समय रहते नेत्र विशेषज्ञ से जांच कराने पर इन समस्याओं का उपचार संभव है और आंखों की रोशनी को बचाया जा सकता है।

    डॉक्टरों का कहना है कि डायबिटीज केवल रेटिना तक ही सीमित नहीं रहती बल्कि इससे मोतियाबिंद और ग्लूकोमा जैसी आंखों की बीमारियों का खतरा भी कई गुना बढ़ जाता है। इसलिए केवल ब्लड शुगर की दवा लेना ही पर्याप्त नहीं है बल्कि संपूर्ण स्वास्थ्य पर ध्यान देना भी जरूरी है। ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखना आंखों की रक्त वाहिकाओं पर अतिरिक्त दबाव को कम करता है और जटिलताओं का जोखिम घटाता है।

    विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि टाइप टू डायबिटीज से पीड़ित हर व्यक्ति को साल में कम से कम एक बार आंखों की विस्तृत जांच जरूर करानी चाहिए। साथ ही नियमित रूप से HbA1c जांच कराकर ब्लड शुगर की स्थिति पर नजर रखनी चाहिए। संतुलित आहार नियमित व्यायाम पर्याप्त नींद और तनाव से दूरी भी आंखों को स्वस्थ रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

    धूम्रपान करने वाले लोगों में डायबिटीज के कारण आंखों की जटिलताओं का खतरा और अधिक बढ़ जाता है इसलिए धूम्रपान छोड़ना भी बेहद जरूरी है। डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवाओं का नियमित सेवन करना और किसी भी तरह की दृष्टि संबंधी समस्या होने पर तुरंत जांच कराना भविष्य में गंभीर नुकसान से बचा सकता है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि डायबिटिक रेटिनोपैथी का समय रहते पता चल जाए और सही उपचार शुरू कर दिया जाए तो अधिकांश मामलों में आंखों की रोशनी को सुरक्षित रखा जा सकता है। इसलिए डायबिटीज के मरीजों को अपनी आंखों की नियमित जांच को उतनी ही प्राथमिकता देनी चाहिए जितनी वे ब्लड शुगर की जांच को देते हैं।

  • एशिया कप 2027 की मेजबानी की रेस में बांग्लादेश सबसे आगे, वनडे फॉर्मेट में जून-जुलाई के दौरान खेला जा सकता है टूर्नामेंट

    एशिया कप 2027 की मेजबानी की रेस में बांग्लादेश सबसे आगे, वनडे फॉर्मेट में जून-जुलाई के दौरान खेला जा सकता है टूर्नामेंट

    नई दिल्ली । एशियन क्रिकेट काउंसिल आगामी एशिया कप 2027 के आयोजन को लेकर अपनी तैयारियों और रणनीतियों को अंतिम रूप देने में जुट गया है। इस प्रतिष्ठित क्रिकेट टूर्नामेंट की मेजबानी की दौड़ में बांग्लादेश सबसे आगे नजर आ रहा है। बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड ने महाद्वीपीय टूर्नामेंट की सफल मेजबानी के लिए अपने देश के तीन प्रमुख शहरों मीरपुर, सिलहट और चटगांव को संभावित आयोजन स्थलों के रूप में प्रस्तावित किया है। एशियन क्रिकेट काउंसिल ने इस प्रस्ताव पर आगे कदम बढ़ाते हुए बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड से इन तीनों मैदानों की मौजूदा सुविधाओं, तकनीकी व्यवस्थाओं और अन्य प्रशासनिक तैयारियों की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है, जिसके बाद जल्द ही मेजबानी पर आधिकारिक मुहर लगाई जा सकती है।

    मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, आगामी एशिया कप 2027 का आयोजन एक दिवसीय यानी वनडे फॉर्मेट में किया जाएगा। इस महत्वपूर्ण टूर्नामेंट की संभावित तारीखें भी सामने आ गई हैं, जिसके तहत प्रतियोगिता की शुरुआत 18 जून 2027 से हो सकती है, जबकि इसका खिताबी मुकाबला 4 जुलाई 2027 को खेला जाएगा। हालांकि, काउंसिल की ओर से अभी तक इस कार्यक्रम की कोई आधिकारिक या अंतिम घोषणा नहीं की गई है, लेकिन माना जा रहा है कि प्रारूप को लेकर सभी सदस्य देश पूरी तरह सहमत हैं। मध्य प्रदेश सहित पूरे भारतीय उपमहाद्वीप के क्रिकेट प्रेमियों के लिए यह खबर बेहद रोमांचक है क्योंकि वनडे फॉर्मेट में होने वाले इस टूर्नामेंट में एक बार फिर पारंपरिक प्रतिद्वंद्विता देखने को मिलेगी।

    इस पूरे घटनाक्रम पर बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड की सुरक्षा समिति के अध्यक्ष सईद इब्राहिम अहमद ने मीडिया से औपचारिक बातचीत में पुष्टि की है कि बोर्ड ने देश के तीन नियमित और उच्च स्तरीय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैदानों को ही इस बड़े टूर्नामेंट के लिए शॉर्टलिस्ट किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मीरपुर, चट्टोग्राम और सिलहट में पहले से ही अंतरराष्ट्रीय स्तर का बुनियादी ढांचा मौजूद है, इसलिए इन्हें प्राथमिकता दी जा रही है। बोर्ड के शीर्ष अधिकारियों का मानना है कि यदि आगामी वर्ष में एशिया कप का सफल आयोजन बांग्लादेश की धरती पर होता है, तो इससे वहां के दर्शकों को अपनी घरेलू परिस्थितियों में शीर्ष एशियाई टीमों के बीच होने वाले कड़े मुकाबले को करीब से देखने का बेहतरीन अवसर मिलेगा।

    काउंसिल द्वारा मांगी गई विस्तृत जानकारी के संबंध में बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड के पदाधिकारियों ने उम्मीद जताई है कि अगले कुछ दिनों में दोनों संस्थाओं के बीच होने वाली उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक के बाद इस मामले पर अंतिम फैसला ले लिया जाएगा। मेजबानी मिलने की प्रबल संभावनाओं को देखते हुए बांग्लादेश का क्रिकेट बोर्ड इस भव्य आयोजन को सफल बनाने के लिए अभी से हरसंभव प्रयास और आंतरिक व्यवस्थाओं को मजबूत करने में व्यस्त है। क्रिकेट विश्लेषकों के अनुसार, यदि बांग्लादेश को इस बार काउंसिल से हरी झंडी मिल जाती है, तो पूरे 11 साल के लंबे अंतराल के बाद देश को एक बार फिर से एशिया कप की प्रतिष्ठित मेजबानी का गौरव हासिल होगा।

  • फीफा वर्ल्ड कप 2026 में अर्जेंटीना की चमत्कारिक वापसी, पेनल्टी चूकने के बाद लियोनेल मेसी के जादू से इजिप्ट को 3-2 से दी शिकस्त

    फीफा वर्ल्ड कप 2026 में अर्जेंटीना की चमत्कारिक वापसी, पेनल्टी चूकने के बाद लियोनेल मेसी के जादू से इजिप्ट को 3-2 से दी शिकस्त

    नई दिल्ली । फुटबॉल विश्व कप 2026 के प्री-क्वार्टर फाइनल मुकाबले में गत चैंपियन अर्जेंटीना ने टूर्नामेंट के इतिहास की सबसे रोमांचक और यादगार वापसी दर्ज की है। अटलांटा के मर्सिडीज-बेंज स्टेडियम में खेले गए इस बेहद हाई-वोल्टेज मुकाबले में अर्जेंटीना ने इजिप्ट को 3-2 से पराजित कर क्वार्टर फाइनल में अपनी जगह सुरक्षित कर ली। एक समय इस नॉकआउट मुकाबले में डिफेंडिंग चैंपियन टीम 0-2 के बड़े अंतर से पिछड़ रही थी और उस पर टूर्नामेंट से बाहर होने का गहरा संकट मंडरा रहा था, लेकिन कप्तान लियोनेल मेसी की जादुई अगुआई में टीम ने खेल के अंतिम दस मिनटों में पासा पलट दिया।

    इस महामुकाबले की शुरुआत अर्जेंटीना के लिए किसी बुरे सपने जैसी रही। मैच के शुरुआती पंद्रहवें मिनट में ही इजिप्ट के यासिर इब्राहिम ने एक बेहतरीन मैदानी गोल दागकर अपनी टीम को 1-0 की महत्वपूर्ण बढ़त दिला दी। इस अप्रत्याशित गोल के बाद अर्जेंटीना ने वापसी के लिए चौतरफा हमले तेज कर दिए। इस बीच टीम को बराबरी हासिल करने का एक स्वर्णिम अवसर पेनल्टी के रूप में मिला, लेकिन लियोनेल मेसी इस पर सटीक गोल करने से चूक गए। मध्य प्रदेश समेत दुनियाभर के फुटबॉल प्रशंसकों को स्तब्ध करते हुए इजिप्ट के मजबूत डिफेंस ने पहले हाफ की समाप्ति तक अपनी बढ़त को पूरी तरह बरकरार रखा।

    दूसरे हाफ में भी खेल का रुख काफी समय तक इजिप्ट के पक्ष में नजर आया। मैच के सड़सठवें मिनट में मोस्तफा जीको ने अर्जेंटीना के डिफेंस की कमियों का फायदा उठाते हुए एक और शानदार गोल कर इजिप्ट की बढ़त को 2-0 कर दिया। जब ऐसा प्रतीत होने लगा था कि विश्व कप में अब तक का सबसे बड़ा उलटफेर होने जा रहा है और इजिप्ट इतिहास रचने से महज दस मिनट की दूरी पर था, तभी लियोनेल मेसी का जादुई कौशल देखने को मिला। मेसी ने अपने जादुई बाएं पैर के शक्तिशाली प्रहार से इजिप्ट के गोलकीपर को छकाते हुए अर्जेंटीना का पहला गोल दागा और टीम की उम्मीदों को जीवित कर दिया। इसके ठीक बाद निर्धारित नब्बे मिनट का खेल समाप्त होने तक स्कोर 2-2 की बराबरी पर पहुंच गया।

    इस शानदार गोल के साथ ही महान फुटबॉलर लियोनेल मेसी मौजूदा विश्व कप में सर्वाधिक आठ गोल दागकर गोल्डन बूट की दौड़ में फ्रांस के किलियन एम्बाप्पे और नॉर्वे के एर्लिंग हालैंड से एक बार फिर आगे निकल गए हैं। निर्धारित समय खत्म होने के बाद मिले बेहद तनावपूर्ण स्टॉपेज टाइम में अर्जेंटीना ने अपना आक्रमण और आक्रामक कर दिया। मैच के अंतिम क्षणों में एंजो फर्नांडीज ने एक बेहतरीन हेडर के जरिए गेंद को गोलपोस्ट में डालकर अर्जेंटीना को 3-2 की अकल्पनीय और ऐतिहासिक जीत दिला दी। इस खिताबी जीत के साथ ही अर्जेंटीना ने विश्व कप इतिहास में लगातार 11वीं जीत का अपना अजेय सिलसिला भी कायम रखा है।

    मौजूदा फीफा विश्व कप में अर्जेंटीना अब 5-0-0 के अजेय रिकॉर्ड के साथ आगे बढ़ रहा है। टीम की नजरें अब इटली और ब्राजील के बाद फुटबॉल इतिहास में लगातार दो बार विश्व कप खिताब जीतने वाला तीसरा देश बनने पर टिकी हैं। लियोनेल मेसी के करियर के दौरान अर्जेंटीना लगातार छठी बार विश्व कप के अंतिम आठ में जगह बनाने में सफल रहा है। राउंड ऑफ 16 की इस ऐतिहासिक बाधा को पार करने के बाद अब अर्जेंटीना की टीम 11 जुलाई को कैनसस सिटी के एरोहेड स्टेडियम में होने वाले क्वार्टर फाइनल मुकाबले में कोलंबिया और स्विट्जरलैंड के बीच होने वाले मैच के विजेता से लोहा लेगी।