Author: bharati

  • कम खर्च में मनाली का सफर: स्मार्ट प्लानिंग से 7–10 हजार में बना सकते हैं परफेक्ट हिल स्टेशन ट्रिप

    कम खर्च में मनाली का सफर: स्मार्ट प्लानिंग से 7–10 हजार में बना सकते हैं परफेक्ट हिल स्टेशन ट्रिप


    नई दिल्ली।
    हिमाचल प्रदेश का खूबसूरत हिल स्टेशन मनाली देश-विदेश के ट्रैवलर्स के बीच हमेशा से लोकप्रिय रहा है। बर्फ से ढकी पहाड़ियां, बहती ब्यास नदी और शांत वातावरण इसे परफेक्ट हिल स्टेशन बनाते हैं। हालांकि, कई लोग मानते हैं कि मनाली घूमना महंगा होगा, लेकिन सही योजना और स्मार्ट बुकिंग से कम बजट में भी इस ट्रिप को यादगार बनाया जा सकता है।

    कम खर्च में यात्रा करने के लिए सबसे पहले ट्रैवल टाइम का सही चयन करना जरूरी है। ऑफ सीजन यानी जुलाई से सितंबर या जनवरी के बाद का समय बजट ट्रैवल के लिए बेहतरीन माना जाता है। इस समय होटल, बस और अन्य सेवाएं अपेक्षाकृत सस्ती होती हैं। यात्रा की शुरुआत स्मार्ट तरीके से की जाए तो खर्च और भी कम किया जा सकता है। अपने शहर से पहले दिल्ली या चंडीगढ़ तक ट्रेन से पहुंचना सबसे किफायती विकल्प है। यहां से मनाली के लिए सरकारी HRTC और प्राइवेट बसें आसानी से उपलब्ध हैं, जिनका किराया 500 से 1200 रुपये के बीच होता है। आरामदायक यात्रा के लिए Volvo बस का विकल्प भी है, हालांकि वह थोड़ा महंगा पड़ सकता है।

    रहने के लिए मनाली में बजट होटल और होमस्टे की कोई कमी नहीं है। खासकर Old Manali और आसपास के क्षेत्रों में 500 से 1200 रुपये प्रति रात में अच्छे कमरे मिल जाते हैं। ग्रुप ट्रिप करने पर रूम शेयरिंग से खर्च और भी कम किया जा सकता है। खानपान के लिए लोकल ढाबे और छोटे कैफे बहुत अच्छे विकल्प हैं, जहां 80 से 150 रुपये में भरपेट भोजन मिल जाता है। लोकल खाने का अनुभव न केवल बजट में मदद करता है बल्कि ट्रिप को और भी यादगार बनाता है।

    मनाली में घूमने के लिए कई फ्री या कम खर्च वाले विकल्प हैं। Mall Road, Hadimba Temple, Vashisht Village और नदी किनारे घूमना बजट ट्रैवलर्स के लिए परफेक्ट है। एडवेंचर स्पॉट्स जैसे Solang Valley और Rohtang Pass जाने के लिए कैब या परमिट लेना पड़ सकता है, लेकिन ग्रुप में खर्च साझा करके इसे भी कम किया जा सकता है।

    सही योजना और स्मार्ट बुकिंग के साथ 3–4 दिन की मनाली यात्रा 6000 से 12000 रुपये में पूरी की जा सकती है। इसमें ट्रैवल, होटल, खाना और लोकल घूमने की सभी सुविधाएं शामिल हैं। थोड़ी समझदारी और योजना के साथ कम बजट में भी मनाली ट्रिप यादगार और शानदार बनाई जा सकती है। यह उन लोगों के लिए बेहतरीन विकल्प है जो कम खर्च में पहाड़ों की खूबसूरती और बर्फीली वादियों का आनंद लेना चाहते हैं।

  • बुजुर्ग की जेब काटते हुए धराया आरोपी, अस्पताल में मचा हंगामा

    बुजुर्ग की जेब काटते हुए धराया आरोपी, अस्पताल में मचा हंगामा


    भागलपुर । भागलपुर के मायागंज अस्पताल में बुधवार को उस समय अफरा-तफरी मच गई जब एक्स-रे विभाग के पास एक युवक को जेबकतरी करते हुए रंगे हाथ पकड़ लिया गया। यह घटना अस्पताल परिसर में उस समय हुई जब कजरैली रजया निवासी नकुल दास अपनी जांच के लिए लाइन में खड़े थे। वे एक्स-रे कराने के लिए अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे कि तभी भीड़ में खड़े एक युवक ने उनके जेब से पैसे निकालने की कोशिश शुरू कर दी।

    जैसे ही नकुल दास को अपनी जेब में हलचल महसूस हुई, उन्हें तुरंत शक हुआ। उन्होंने बिना देर किए युवक का हाथ पकड़ लिया और जोर-जोर से शोर मचाना शुरू कर दिया। उनकी आवाज सुनते ही आसपास मौजूद मरीज, परिजन और अन्य लोग मौके पर पहुंच गए। कुछ ही पलों में वहां भीड़ जमा हो गई और लोगों ने आरोपी युवक को घेर लिया।

    गुस्साई भीड़ ने आरोपी को पकड़कर उसकी जमकर पिटाई कर दी। अस्पताल परिसर में कुछ देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया। कई लोगों ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल भी उठाए कि आखिर इतने बड़े अस्पताल में जेबकतरे कैसे आसानी से प्रवेश कर जाते हैं।

    सूचना मिलने पर अस्पताल के सुरक्षा कर्मी तुरंत मौके पर पहुंचे और किसी तरह आरोपी को भीड़ से छुड़ाया। इसके बाद उसे मायागंज अस्पताल स्थित पुलिस कैंप में ले जाया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए बरारी थाना पुलिस को भी सूचना दी गई, जिसके बाद पुलिस मौके पर पहुंची और आरोपी को अपने साथ थाने ले गई।

    पुलिस के अनुसार पकड़े गए युवक ने अपना नाम मोहम्मद पप्पू बताया है और वह सकूरा क्षेत्र का रहने वाला बताया जा रहा है। पुलिस अब यह जांच कर रही है कि आरोपी पहले भी इस तरह की घटनाओं में शामिल रहा है या नहीं। उसके आपराधिक रिकॉर्ड की भी पड़ताल की जा रही है।

    घटना के बाद अस्पताल में मौजूद मरीजों और उनके परिजनों में दहशत और नाराजगी दोनों देखी गई। लोगों का कहना है कि अस्पताल जैसे संवेदनशील स्थान पर सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत होनी चाहिए ताकि मरीजों और उनके साथ आए परिजनों को इस तरह की घटनाओं का सामना न करना पड़े।

    पीड़ित नकुल दास ने बताया कि वह इलाज के लिए आए थे और लाइन में खड़े थे, तभी एक व्यक्ति ने उनकी जेब में हाथ डालने की कोशिश की। उन्होंने तुरंत उसे पकड़ लिया, जिससे बड़ा नुकसान होने से बच गया।

    फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है और आरोपी से पूछताछ जारी है। इस घटना ने एक बार फिर अस्पतालों की सुरक्षा व्यवस्था और भीड़भाड़ वाले स्थानों पर सतर्कता की जरूरत को उजागर कर दिया है।

  • एडमिशन विवाद: परिजनों का आरोप- अमीर बच्चों को ही मिल रहा दाखिला

    एडमिशन विवाद: परिजनों का आरोप- अमीर बच्चों को ही मिल रहा दाखिला


    भागलपुर । भागलपुर के इंटर स्तरीय पंचानन झा उच्च विद्यालय बैजानी में नामांकन प्रक्रिया को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। इस बार कई छात्रों का एडमिशन नहीं होने से अभिभावकों का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने स्कूल परिसर में पहुंचकर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। अभिभावकों का आरोप है कि पहले से पढ़ रहे बच्चों को भी इस बार नामांकन से वंचित कर दिया गया है, जिससे उनके भविष्य को लेकर गंभीर चिंता पैदा हो गई है।

    प्रदर्शन कर रहे अभिभावकों का कहना है कि बच्चों का नामांकन अचानक बदले गए नियमों के कारण अटक गया है। कई बार स्कूल आने-जाने के बावजूद उन्हें पहले आश्वासन दिया गया था कि एडमिशन होगा, लेकिन बाद में नियमों का हवाला देकर प्रवेश रोक दिया गया। अभिभावकों ने आरोप लगाया कि अब स्कूल प्रशासन केवल मेरिट और नए चयन मानकों के आधार पर एडमिशन दे रहा है, जिससे कई योग्य छात्र बाहर हो गए हैं।

    अभिभावक सुनीता देवी ने नाराजगी जताते हुए कहा कि उनके बच्चों की पढ़ाई यहीं से शुरू हुई थी, लेकिन अब उन्हें दूर-दराज के स्कूलों में भेजने की मजबूरी बन रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या अच्छे स्कूलों में सिर्फ विशेष वर्ग या आर्थिक रूप से मजबूत परिवारों के बच्चों को ही पढ़ने का अधिकार है। उन्होंने यह भी चिंता जताई कि दूर स्कूल जाने से बच्चों की सुरक्षा पर खतरा बढ़ सकता है।

    वहीं दूसरी ओर स्कूल प्रशासन ने साफ किया है कि यह स्कूल अब मॉडल स्कूल के रूप में विकसित किया जा रहा है, इसलिए नामांकन प्रक्रिया में सख्त नियम लागू किए गए हैं। प्रिंसिपल मनीष कुमार सिंह ने बताया कि कक्षा 9 में कुल 180 सीटें निर्धारित हैं और सीमित सीटों के कारण सभी छात्रों को प्रवेश देना संभव नहीं है।

    उन्होंने बताया कि शुरुआत में NMMS परीक्षा पास करने वाले छात्रों को प्राथमिकता देने का प्रावधान था, लेकिन बाद में नई SOP के तहत मेरिट और परीक्षा परिणाम के आधार पर ही प्रवेश प्रक्रिया तय की गई। इसके तहत दो बार टेस्ट और मार्कशीट के आधार पर चयन प्रक्रिया पूरी की गई है।

    प्रशासन का कहना है कि इस बार प्राइवेट स्कूलों के छात्रों को भी सीमित रूप से ही शामिल किया गया है और नियमों के अनुसार ही एडमिशन दिया जा रहा है। स्कूल प्रबंधन का यह भी कहना है कि संसाधनों की सीमा को देखते हुए अधिक छात्रों का नामांकन करना संभव नहीं है, क्योंकि इससे शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है।

    स्थिति को देखते हुए स्कूल परिसर में तनाव का माहौल बना हुआ है। अभिभावक लगातार सीट बढ़ाने और सभी योग्य छात्रों को प्रवेश देने की मांग कर रहे हैं, जबकि स्कूल प्रशासन नियमों का हवाला देकर अपनी स्थिति स्पष्ट कर रहा है। अब इस मामले में प्रशासनिक हस्तक्षेप की संभावना जताई जा रही है।

  • अभिनेता आर. माधवन ने वेलनेस ब्रांड की मनमानी पर जताई नाराजगी, कहा- 'कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी'

    अभिनेता आर. माधवन ने वेलनेस ब्रांड की मनमानी पर जताई नाराजगी, कहा- 'कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी'

    नई दिल्ली। बॉलीवुड अभिनेता आर. माधवन इस समय एक वेलनेस ब्रांड के खिलाफ अपनी नाराजगी को लेकर चर्चा में हैं। अभिनेता ने सोशल मीडिया पर खुलकर उस कंपनी की आलोचना की, जिसने कथित तौर पर उनके इंटरव्यू की क्लिप का इस्तेमाल अपने प्रचार के लिए किया। माधवन का कहना है कि ब्रांड ने बिना उनकी अनुमति और जानकारी के वीडियो का हिस्सा लिया, जिससे ऐसा लग सकता है कि वह प्रोडक्ट का समर्थन कर रहे हैं। अभिनेता ने इसे गलत बताते हुए कानूनी कार्रवाई की चेतावनी भी दी है।

    बुधवार को माधवन ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर उस ब्रांड की वीडियो पोस्ट का स्क्रीनशॉट साझा किया। वीडियो में उनके इंटरव्यू का हिस्सा ऐसा दिखाया गया था कि आम लोग समझ सकते थे कि माधवन स्वयं उस प्रोडक्ट की तारीफ कर रहे हैं। अभिनेता ने इसे गलत ठहराया और कहा कि इस तरह के कदम जनता का भरोसा तोड़ते हैं। उन्होंने कहा, “इस वीडियो को इस तरह बनाया गया जैसे मैं खुद प्रोडक्ट का प्रचार कर रहा हूं। इसमें मेरी किसी भी तरह की अनुमति नहीं ली गई। यह शर्मनाक है और लोगों को सही और गलत में फर्क समझने में मुश्किल होती है।”

    माधवन ने पोस्ट में लंबा कैप्शन लिखते हुए कहा कि यह बेहद दुखद और शर्म की बात है कि कुछ कंपनियां सोचती हैं कि किसी कलाकार के इंटरव्यू या वीडियो को बिना अनुमति प्रचार सामग्री के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि इस मामले में कानूनी नोटिस भी भेज दिया गया है। अभिनेता ने लोगों को सलाह दी कि वे ऐसे पेशेवर और कंपनियों से सतर्क रहें।

    आर. माधवन के इस कदम के बाद सोशल मीडिया पर उनके समर्थन में कई लोग सामने आए। लोग उनकी नाराजगी और चेतावनी को सही मानते हुए ब्रांड की मनमानी पर सवाल उठा रहे हैं। मामला न केवल मीडिया में बल्कि जनता के बीच भी चर्चा का विषय बन गया है, और विशेषज्ञ इस तरह की मनमानी को कलाकारों और आम जनता दोनों के लिए गंभीर चेतावनी मान रहे हैं।

    इस घटना से यह साफ हो गया है कि बिना अनुमति किसी की व्यक्तिगत या पेशेवर सामग्री का इस्तेमाल करना गंभीर अनुचित है, और कलाकार इस तरह की हरकतों के खिलाफ सख्त कदम उठा सकते हैं। माधवन ने न केवल कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी है बल्कि लोगों को जागरूक करने की भी कोशिश की है, जिससे भविष्य में इस तरह की मनमानी पर रोक लगे।

  • तेलंगाना ने केंद्र से मांगी 5,000 करोड़ की विशेष वित्तीय सहायता, यंग इंडिया स्कूल परियोजना के लिए दी मांग

    तेलंगाना ने केंद्र से मांगी 5,000 करोड़ की विशेष वित्तीय सहायता, यंग इंडिया स्कूल परियोजना के लिए दी मांग


    नई दिल्ली।
    तेलंगाना सरकार ने केंद्र से विशेष सहायता योजना (एसएएससीआई) के तहत अतिरिक्त 5,000 करोड़ रुपए की मांग की है, ताकि राज्य में पूंजीगत निवेश और विकास परियोजनाओं को गति दी जा सके। उपमुख्यमंत्री मल्लू भट्टी विक्रमार्क ने इस संबंध में केंद्रीय वित्त मंत्री से नई दिल्ली में मुलाकात की और राज्य की आर्थिक, शैक्षणिक और मानव संसाधन विकास संबंधी जरूरतों पर विस्तार से चर्चा की। इस बैठक में वित्तीय सहायता की आवश्यकता, विशेष रूप से शिक्षा, स्वास्थ्य और ग्रामीण बुनियादी ढांचे के क्षेत्रों में किए जा रहे बड़े निवेशों की व्याख्या की गई।

    उपमुख्यमंत्री ने केंद्रीय वित्त मंत्री को बताया कि तेलंगाना में शिक्षा के क्षेत्र में किए जा रहे निवेश, विशेषकर यंग इंडिया इंटीग्रेटेड रेजिडेंशियल स्कूल्स (वाईआईआईआरएस) परियोजना, राज्य की सामाजिक और शैक्षणिक संरचना में क्रांतिकारी बदलाव लाएंगे। इस परियोजना का कुल बजट 30,000 करोड़ रुपए है और यह लाखों बच्चों के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और पोषण संबंधी सुविधाएं सुनिश्चित करेगी। उन्होंने आर्थिक मामलों के विभाग से इस परियोजना को एफआरबीएम सीमा से छूट देने की अपील भी की, ताकि दीर्घकालिक मानव पूंजी निवेश पर वित्तीय प्रतिबंध न आए।

    विक्रमार्क ने कहा कि इस पहल से राज्य के वंचित और पिछड़े वर्गों के बच्चों को उच्च गुणवत्ता की शिक्षा और पौष्टिक भोजन मिलेगा, जो उन्हें सशक्त बनाएगा और राज्य की जनसांख्यिकीय क्षमता को मजबूत करेगा। प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय वित्त मंत्री को ज्ञापन सौंपकर एसएएससीआई योजना के तहत अतिरिक्त वित्तीय सहायता की आवश्यकता और इसके महत्व को स्पष्ट रूप से रेखांकित किया। उन्होंने यह भी बताया कि तेलंगाना की आबादी में पिछड़ा वर्ग, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लोग बहुसंख्यक हैं, और उनके सशक्तिकरण के लिए यह योजना निर्णायक साबित होगी।

    केंद्रीय वित्त मंत्री के साथ हुई इस बैठक में राज्य के कृषि और मानव संसाधन विकास से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई। कृषि मंत्री तुम्माला नागेश्वर राव और अन्य प्रतिनिधियों ने राज्य में कृषि, ग्रामीण विकास और शिक्षा से जुड़े बड़े निवेशों के महत्व को रेखांकित करते हुए वित्तीय जिम्मेदारी और बजट प्रबंधन अधिनियम के तहत छूट की मांग की। उन्होंने कहा कि इस अतिरिक्त वित्तीय सहायता के बिना राज्य की दीर्घकालिक विकास योजनाएं प्रभावित हो सकती हैं और मानव पूंजी में निवेश की गति धीमी पड़ सकती है।

    पिछले वर्ष भी इसी प्रकार की बैठक में मल्लू भट्टी विक्रमार्क ने यंग इंडिया प्रोजेक्ट के लिए विशेष वित्तीय सहायता और एफआरबीएम छूट की मांग की थी, और अब इस मांग को दोबारा केंद्र के समक्ष रखा गया है। अधिकारियों का मानना है कि इस योजना के कार्यान्वयन से तेलंगाना के पिछड़े और वंचित वर्गों को शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक विकास के क्षेत्र में स्थायी लाभ मिलेगा। इसके साथ ही राज्य की आर्थिक क्षमता बढ़ेगी और दीर्घकालिक मानव संसाधन विकास में महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा।

    इस बैठक में केंद्रीय वित्त मंत्री को यह स्पष्ट किया गया कि तेलंगाना की अधिकांश आबादी सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों से आती है। इस आंकड़े के अनुसार, राज्य की आबादी का 56.33 प्रतिशत पिछड़ा वर्ग, 17.43 प्रतिशत अनुसूचित जाति और 10.45 प्रतिशत अनुसूचित जनजाति से संबंधित है। इस सामाजिक संरचना को ध्यान में रखते हुए, राज्य सरकार ने एसएएससीआई योजना के तहत अतिरिक्त 5,000 करोड़ रुपए की मांग की है, ताकि शैक्षणिक और सामाजिक सुधारों को समय पर लागू किया जा सके और राज्य में समग्र विकास को बढ़ावा दिया जा सके।

  • झांसी में दर्दनाक हादसा: खाना खाने के बाद युवक ने लगाई फांसी, पत्नी ने देखा शव

    झांसी में दर्दनाक हादसा: खाना खाने के बाद युवक ने लगाई फांसी, पत्नी ने देखा शव



    झांसी । झांसी में एक दर्दनाक घटना सामने आई है, जहां एक 40 वर्षीय युवक ने अपने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। घटना कोतवाली थाना क्षेत्र के दतिया गेट बाहर नकटा चौपड़ा मोहल्ले की है, जिससे पूरे इलाके में सनसनी फैल गई।

    जानकारी के अनुसार मृतक खेमचंद कुशवाहा पुत्र देवीप्रसाद कुशवाहा थे, जो ऑटो किराए पर चलवाने का काम करते थे। परिजनों के मुताबिक मंगलवार रात उन्होंने सामान्य रूप से परिवार के साथ खाना खाया और इसके बाद अपने ऊपर वाले कमरे में सोने चले गए। सब कुछ सामान्य लग रहा था, लेकिन कुछ ही घंटे बाद यह दुखद घटना सामने आ गई।

    रात करीब 11 बजे जब उनकी पत्नी प्रीति कमरे में पहुंची तो उन्होंने देखा कि खेमचंद फंदे से लटके हुए हैं। यह दृश्य देखकर वह चीख पड़ीं, जिसके बाद शोर सुनकर आसपास के लोग मौके पर पहुंच गए। तुरंत परिजनों ने पुलिस को सूचना दी।

    सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। फिलहाल आत्महत्या के कारणों का पता नहीं चल सका है और पुलिस पूरे मामले की जांच में जुट गई है।

    परिजनों के अनुसार मृतक खेमचंद का 6 साल का एक बेटा देवांश है। घटना के बाद परिवार में कोहराम मचा हुआ है और पत्नी प्रीति का रो-रोकर बुरा हाल है। अचानक हुई इस घटना से पूरा परिवार सदमे में है और गांव-मोहल्ले में भी शोक का माहौल है।

  • डिजिटल-प्रथम पहल: भारत टेक्स 2026 ऐप से अंतरराष्ट्रीय खरीदारों और व्यापारियों को मिलेगा सहज मार्गदर्शन

    डिजिटल-प्रथम पहल: भारत टेक्स 2026 ऐप से अंतरराष्ट्रीय खरीदारों और व्यापारियों को मिलेगा सहज मार्गदर्शन

    नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने वस्त्र मंत्रालय के नेतृत्व में भारत टेक्स 2026 के लिए एक नया डिजिटल ऐप लॉन्च किया है, जिसका उद्देश्य वैश्विक वस्त्र आयोजन में भाग लेने वाले सभी प्रतिभागियों का अनुभव सहज और प्रभावशाली बनाना है। सचिव नीलम शमी राव ने बुधवार को इस आधिकारिक ऐप का लोकार्पण किया और बताया कि यह एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म खरीदारों, प्रदर्शकों, सोर्सिंग सलाहकारों, वक्ताओं और आगंतुकों के लिए ‘डिजिटल-प्रथम’ सोच को प्रदर्शित करता है।

    इस ऐप के माध्यम से प्रतिभागी आयोजन संबंधी सभी महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। प्रदर्शकों की खोज, बैठकें निर्धारित करना, मार्गदर्शन प्राप्त करना, लीड कैप्चर करना और ज्ञान सत्रों में भाग लेना अब सभी डिजिटल रूप से संभव होगा। इसके अलावा, ऐप वास्तविक समय में अपडेट प्रदान करेगा, जिससे प्रतिभागियों को आयोजन से जुड़ी हर गतिविधि की जानकारी तुरंत मिल सकेगी।

    एक प्रमुख विशेषता इस ऐप का एआई स्मार्ट असिस्टेंट है, जो 24×7 संवादात्मक मार्गदर्शक के रूप में कार्य करेगा। प्रतिभागी सरल भाषा में प्रश्न पूछ सकेंगे और उन्हें कार्यक्रम-सारणी, दिशा-निर्देश और आयोजन स्थल की महत्वपूर्ण जानकारी तुरंत प्राप्त होगी। यह सुविधा न केवल भारतीय, बल्कि अंतरराष्ट्रीय प्रतिभागियों के लिए भी सहज और उपयोगकर्ता-अनुकूल डिज़ाइन की गई है।

    भारत मंडपम में आयोजित होने वाले भारत टेक्स 2026 में ऐप प्रतिभागियों को उन्नत नेविगेशन और दिशा-निर्देश भी उपलब्ध कराएगा। उपयोगकर्ता फ्लोर प्लान देख सकेंगे, बूथ खोज सकेंगे और कंपनियों का पता लगा सकेंगे। आयोजन स्थल के भीतर स्टॉल-स्तरीय मार्गदर्शन से खरीदार और प्रदर्शक आसानी से अपने लक्षित संपर्क तक पहुँच सकेंगे।

    प्रदर्शक खोज मॉड्यूल वैश्विक खरीदारों और व्यापारिक आगंतुकों के लिए डिजाइन किया गया है। इसमें कंपनियों को नाम, उत्पाद श्रेणी और प्रदर्शक प्रकार के आधार पर खोज और फिल्टर किया जा सकेगा। इससे वस्त्र मूल्य श्रृंखला में लक्षित सोर्सिंग और केंद्रित व्यावसायिक बातचीत संभव हो सकेगी।

    भारत टेक्स 2026 का आयोजन 14 से 17 जुलाई 2026 तक नई दिल्ली के भारत मंडपम में किया जाएगा। इस महाआयोजन में वैश्विक वस्त्र उद्योग के 7,000 से अधिक अंतरराष्ट्रीय खरीदार और 1,30,000 से अधिक व्यापारिक आगंतुक शामिल होने की उम्मीद है। इसका आयोजन भारत टेक्स ट्रेड फेडरेशन द्वारा किया जा रहा है, जो 11 वस्त्र निर्यात संवर्धन परिषदों और उद्योग निकायों का संघ है। केंद्र सरकार के वस्त्र मंत्रालय का सहयोग इस आयोजन को और प्रभावशाली बनाएगा।

    इस डिजिटल पहल के माध्यम से केंद्र सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि भारत टेक्स 2026 में भाग लेने वाले सभी प्रतिभागियों को डिजिटल इंटरफेस के जरिए बेहतर मार्गदर्शन, सहज बातचीत और व्यापारिक अवसरों की जानकारी मिल सके। इसके परिणामस्वरूप, भारत के वैश्विक वस्त्र उद्योग को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और अधिक प्रतिस्पर्धी और आकर्षक बनाने में मदद मिलेगी।

  • पेट्रोल-डीजल पर समान कर और आर्थिक राहत के लिए सांसद पात्रा ने जीएसटी परिषद में चरणबद्ध योजना की मांग की

    पेट्रोल-डीजल पर समान कर और आर्थिक राहत के लिए सांसद पात्रा ने जीएसटी परिषद में चरणबद्ध योजना की मांग की

    नई दिल्ली।पेट्रोल और डीजल को वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के दायरे में लाने की मांग राजनीतिक और आर्थिक दोनों स्तरों पर तेज हो रही है। राज्यसभा सांसद डॉ. सस्मित पात्रा ने इस संबंध में केंद्रीय वित्त मंत्री से मुलाकात कर विस्तृत प्रस्ताव सौंपा और इस मुद्दे पर राष्ट्रीय स्तर पर संरचित और व्यापक चर्चा शुरू करने की अपील की। उनके अनुसार, पेट्रोलियम उत्पादों को जीएसटी में शामिल करना केवल कर सुधार का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह आम जनता, उद्योग और परिवहन क्षेत्र में आर्थिक संतुलन स्थापित करने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।

    डॉ. पात्रा ने अपने प्रस्ताव में संविधान के अनुच्छेद 279ए(5) का हवाला देते हुए कहा कि पेट्रोलियम उत्पादों को भविष्य में जीएसटी के दायरे में लाने का प्रावधान पहले से मौजूद है। हालांकि, उन्होंने यह स्वीकार किया कि पहले भी इस विषय पर जीएसटी परिषद में चर्चा हुई थी, लेकिन मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों और महंगाई की चुनौतियों को देखते हुए अब इस पर नए सिरे से व्यावहारिक और संतुलित विचार करना आवश्यक है।

    सांसद ने कहा कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों का सीधा असर महंगाई, परिवहन लागत, लॉजिस्टिक्स खर्च, कृषि उत्पादन लागत, एमएसएमई सेक्टर के संचालन और आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ता है। वर्तमान में अलग-अलग राज्यों में वैट की अलग-अलग दरें होने के कारण जीएसटी का उद्देश्य—एक समान कर और एकीकृत बाजार—पूरी तरह पूरा नहीं हो पा रहा है। उनके अनुसार, यदि पेट्रोल-डीजल को चरणबद्ध तरीके से जीएसटी में शामिल किया जाता है तो माल ढुलाई और सप्लाई चेन की लागत में कमी आएगी, जिससे उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ेगी और आम लोगों, किसानों तथा ट्रांसपोर्ट ऑपरेटरों को राहत मिलेगी।

    ओडिशा को उदाहरण के रूप में लेते हुए सांसद पात्रा ने बताया कि यह राज्य खनन, उद्योग और लॉजिस्टिक्स गतिविधियों का बड़ा केंद्र है। यदि यहां के उद्योग और व्यवसाय जीएसटी के तहत समान कर व्यवस्था का लाभ उठाएं, तो न केवल राज्य बल्कि राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को भी स्थिरता और पारदर्शिता मिलेगी। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि राज्यों को मिलने वाले राजस्व पर ध्यान रखते हुए पेट्रोलियम उत्पादों को तुरंत जीएसटी में शामिल करने की बजाय चरणबद्ध और संतुलित मॉडल अपनाया जाए।

    डॉ. पात्रा ने जीएसटी परिषद को सुझाव दिया कि इसके लिए अलग जीएसटी स्लैब, राज्यों के लिए ट्रांजिशनल मुआवजा, सीमित अवधि का उपकर (सेस) और वित्तीय स्थिरता के लिए तय फॉर्मूला तैयार करने पर विचार किया जाए। उन्होंने वित्त मंत्री से आग्रह किया कि इस मुद्दे पर सभी राज्यों के साथ व्यापक चर्चा कराई जाए और एक तकनीकी व वित्तीय विशेषज्ञ समूह का गठन किया जाए, जो चरणबद्ध तरीके से पेट्रोल और डीजल को जीएसटी में शामिल करने का मॉडल तैयार कर सके और राष्ट्रीय सहमति बनाने में मदद करे।

    डॉ. सस्मित पात्रा ने कहा कि पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के तहत लाना केवल कर सुधार नहीं होगा, बल्कि यह देश में आर्थिक संतुलन, उद्योगों की प्रतिस्पर्धा बढ़ाने और आम लोगों को महंगाई से राहत देने की दिशा में बड़ा कदम साबित होगा। उनका मानना है कि इससे पारदर्शिता बढ़ेगी, आपूर्ति श्रृंखला की लागत कम होगी और भारत का एकीकृत बाजार अधिक प्रभावी तरीके से काम करेगा।

  • हाई-प्रोफाइल नीट पेपर लीक केस: शुभम खैरनार CBI हिरासत में, बाकी आरोपियों की न्यायिक हिरासत 2 जून तक

    हाई-प्रोफाइल नीट पेपर लीक केस: शुभम खैरनार CBI हिरासत में, बाकी आरोपियों की न्यायिक हिरासत 2 जून तक


    नई दिल्ली। नीट यूजी 2026 पेपर लीक मामला देशभर में सुर्खियों में बना हुआ है। इस हाई-प्रोफाइल जांच में सीबीआई लगातार सक्रिय है और मुख्य आरोपी शुभम खैरनार की कस्टडी को पांच दिन के लिए बढ़ा दिया गया है। अदालत ने मामले में गिरफ्तार बाकी पांच आरोपियों को 2 जून तक न्यायिक हिरासत में भेजा है। इस मामले की जांच दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट में चल रही है।

    इस घटना के बाद, कुल छह आरोपियों को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया गया। ये आरोपियों महाराष्ट्र, राजस्थान और हरियाणा से जुड़े हुए हैं। मुख्य आरोपी नासिक निवासी शुभम खैरनार के अलावा जयपुर के मांगीलाल बिवाल, विकास बिवाल और दिनेश बिवाल, गुरुग्राम के यश यादव और महाराष्ट्र के अहिल्या नगर निवासी धनंजय लोखंडे शामिल हैं।

    सीबीआई ने अदालत से शुभम खैरनार की कस्टडी बढ़ाने की मांग की। एजेंसी ने यह बताया कि अन्य गिरफ्तार आरोपियों के साथ उसका सामना कराना जरूरी है और इलेक्ट्रॉनिक सबूतों के आधार पर उससे आगे भी पूछताछ होनी है। साथ ही जांच एजेंसी ने कहा कि मामले में और रिकवरी की आवश्यकता है और शुभम खैरनार को महाराष्ट्र लेकर जांच के सिलसिले में ले जाना पड़ेगा।

    अदालत ने बाकी पांच आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया। मांगीलाल बिवाल, विकास बिवाल, दिनेश बिवाल, यश यादव और धनंजय लोखंडे अब 2 जून तक हिरासत में रहेंगे। इस दौरान सीबीआई उनके खिलाफ चल रही जांच को आगे बढ़ा सकेगी और नेटवर्क की पूरी जानकारी जुटा सकेगी।

    वहीं, शुभम खैरनार के वकील ने सीबीआई की कस्टडी बढ़ाने की मांग का विरोध किया। बचाव पक्ष ने अदालत को बताया कि सात दिन की पूछताछ के दौरान एजेंसी को क्या जानकारी मिली, उसे स्पष्ट करना चाहिए। इसके बावजूद अदालत ने सीबीआई की मांग को स्वीकार कर उनके रिमांड को बढ़ा दिया।

    नीट UG 2026 पेपर लीक मामले में लगातार हुई गिरफ्तारियों और पूछताछ के बीच यह स्पष्ट हो गया है कि जांच एजेंसियां पूरे नेटवर्क और इससे जुड़े अन्य लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रही हैं। देशभर में यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है, और आगे की जांच की दिशा पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

  • झांसी के गुरसराय CHC में मरीजों की भीड़, वायरल फीवर और डायरिया के मामलों में तेजी

    झांसी के गुरसराय CHC में मरीजों की भीड़, वायरल फीवर और डायरिया के मामलों में तेजी


    झांसी। झांसी के गुरसराय स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में इन दिनों मरीजों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। अस्पताल में रोजाना बड़ी संख्या में लोग इलाज के लिए पहुंच रहे हैं, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं पर अतिरिक्त दबाव देखा जा रहा है। खासकर वायरल फीवर, उल्टी-दस्त और अन्य मौसमी बीमारियों के मरीजों की संख्या में तेजी आई है।

    अस्पताल के पर्चा काउंटर पर कार्यरत नमन और मनोज कुमार के अनुसार, प्रतिदिन लगभग 300 मरीजों के पर्चे बनाए जा रहे हैं। वहीं ओपीडी में आने वाले मरीजों की संख्या भी 300 से अधिक पहुंच रही है, जिससे पूरे केंद्र में भीड़ की स्थिति बनी रहती है।

    CHC के चिकित्सक डॉ. रवि अनुरागी ने जानकारी दी कि वर्तमान में प्रतिदिन 400 से अधिक मरीज उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। इनमें सबसे ज्यादा मामले वायरल फीवर के हैं। इसके अलावा उल्टी, दस्त, टाइफाइड, खुजली, घुटनों में दर्द और दमा (अस्थमा) जैसी समस्याओं से पीड़ित मरीज भी बड़ी संख्या में इलाज के लिए आ रहे हैं।

    डॉ. अनुरागी ने बताया कि मौसमी बदलाव और संक्रमण के कारण ऐसे मामले बढ़ रहे हैं और लोगों को विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत है। उन्होंने सलाह दी कि लोग पानी को उबालकर या फिल्टर करके ही पिएं और आसपास साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें ताकि मच्छरों और संक्रमण से बचाव हो सके।

    उन्होंने यह भी कहा कि खांसते या छींकते समय मुंह और नाक को टिश्यू या रूमाल से ढकना चाहिए और इस्तेमाल के बाद टिश्यू को तुरंत नष्ट कर देना चाहिए। यदि टिश्यू उपलब्ध न हो तो कोहनी का इस्तेमाल करना बेहतर विकल्प है। साथ ही हाथों को नियमित रूप से साबुन से अच्छी तरह धोने की सलाह दी गई है।

    चिकित्सक ने यह भी अपील की कि लोग अपने तौलिये, बर्तन और अन्य व्यक्तिगत वस्तुएं साझा न करें, क्योंकि इससे संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ जाता है। घर और कार्यस्थल पर दरवाजों के हैंडल, मोबाइल फोन और अन्य बार-बार छुई जाने वाली सतहों को नियमित रूप से साफ और कीटाणुरहित करना भी जरूरी है।

    स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे लक्षण दिखाई देने पर देरी न करें और तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर जाकर जांच और उपचार कराएं, ताकि बीमारी को समय रहते नियंत्रित किया जा सके।