Author: bharati

  • कलयुगी मां की क्रूरता: बच्चों को बस में छोड़ा, जेब में लिखी चिट्ठी और प्रेमी संग हो गई फरार

    कलयुगी मां की क्रूरता: बच्चों को बस में छोड़ा, जेब में लिखी चिट्ठी और प्रेमी संग हो गई फरार

    नई दिल्ली ।  महाराष्ट्र के बीड जिले से सामने आया यह मामला मानवता को झकझोर देने वाला है, जहां एक महिला अपने प्रेमी के साथ भागते समय अपने ही दो मासूम बच्चों को बस में लावारिस छोड़कर फरार हो गई। यह घटना समाज और परिवारिक जिम्मेदारियों पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

    जानकारी के अनुसार, महिला ने बच्चों को पंढरपुर से संभाजीनगर जा रही बस में अकेला छोड़ दिया। जाने से पहले उसने बेहद हैरान करने वाला कदम उठाते हुए दोनों बच्चों की जेब में एक चिट्ठी रख दी, जिसमें लिखा था कि उनके माता-पिता नहीं हैं और उन्हें यवतमाल पहुंचा दिया जाए। इस चिट्ठी में बच्चों के नाना का मोबाइल नंबर भी दर्ज था, ताकि किसी तरह संपर्क किया जा सके।

    बस में सफर के दौरान जब बच्चे अकेले रोते हुए दिखाई दिए, तो कंडक्टर को उन पर शक हुआ। जांच करने पर जब उसने उनकी जेब में पड़ी चिट्ठी पढ़ी, तो पूरा मामला सामने आ गया। इसके बाद तुरंत पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस ने नंबर के आधार पर बच्चों के नाना से संपर्क किया और उन्हें बुलाया गया।

    हालांकि, स्थिति तब और चौंकाने वाली हो गई जब बच्चों के नाना ने भी मासूमों को अपनाने से इनकार कर दिया। बताया गया है कि उन्होंने बच्चों की देखभाल करने के बजाय अपनी बेटी द्वारा घर से ले जाई गई स्कूटी और नकदी के बारे में सवाल किए। इससे बच्चों का भविष्य और अधिक अनिश्चित हो गया।

    बाद में प्रशासन और पुलिस की मदद से दोनों मासूमों को सुरक्षित रूप से बाल कल्याण समिति की निगरानी में बीड के एक अनाथालय में भेज दिया गया, जहां उनकी देखभाल की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार, बच्चों की सुरक्षा और भलाई सुनिश्चित करना अब प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है।

    यह घटना केवल एक आपराधिक मामला नहीं बल्कि सामाजिक संवेदनशीलता पर भी बड़ा प्रश्नचिह्न है। जब जन्म देने वाले माता-पिता और नजदीकी रिश्तेदार भी बच्चों को अपनाने से पीछे हट जाएं, तो समाज की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में मानसिक स्वास्थ्य, पारिवारिक तनाव और सामाजिक दबाव जैसे पहलुओं की भी गहन जांच जरूरी है।

    फिलहाल दोनों बच्चे सुरक्षित हैं, लेकिन उनका भविष्य अभी भी अनिश्चितता के घेरे में है। यह मामला एक बार फिर इस बात की याद दिलाता है कि बच्चों की देखभाल केवल कानूनी नहीं बल्कि मानवीय जिम्मेदारी भी है, जिसे किसी भी परिस्थिति में नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

  • मंदिर विवाद को लेकर बढ़ा तनाव: हमलावरों पर कार्रवाई की मांग को लेकर प्रदर्शन

    मंदिर विवाद को लेकर बढ़ा तनाव: हमलावरों पर कार्रवाई की मांग को लेकर प्रदर्शन


    मध्य प्रदेश। शिवपुरी जिले के करेरा स्थित बगीचा सरकार हनुमान मंदिर में पूजा को लेकर शुरू हुआ विवाद अब बड़ा रूप लेता जा रहा है। बुधवार को राष्ट्रीय गुर्जर स्वाभिमान संघर्ष समिति, संत समाज और सकल समाज के लोगों ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचकर प्रदर्शन किया और दोषियों पर निष्पक्ष कार्रवाई की मांग को लेकर ज्ञापन सौंपा। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर एकतरफा कार्रवाई करने का आरोप लगाते हुए चेतावनी दी कि यदि 10 दिनों के भीतर निष्पक्ष जांच और गिरफ्तारी नहीं हुई, तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा।

    समाज के लोगों का कहना है कि 9 मई को मंदिर परिसर में हुई मारपीट और हमले की घटना में दोनों पक्ष शामिल थे, लेकिन पुलिस ने केवल एक पक्ष पर एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई की। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि दूसरे पक्ष के खिलाफ अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है, जिससे समाज में नाराजगी बढ़ रही है।

    राष्ट्रीय गुर्जर स्वाभिमान संघर्ष समिति के प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह गुर्जर ने कहा कि मंदिर में घुसकर हमला करने वालों पर कार्रवाई होना चाहिए थी, लेकिन इसके बजाय पीड़ित पक्ष को ही आरोपी बना दिया गया। उन्होंने पुलिस प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और सभी दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की।

    प्रदर्शन के दौरान समाज के लोगों ने आरोप लगाया कि राजेश दुबे उर्फ भोला पंडित करीब 200 लोगों के साथ दोबारा मंदिर पहुंचा और वहां भय और तनाव का माहौल बनाने की कोशिश की। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि ऐसे लोगों को मंदिर परिसर के आसपास आने से रोका जाए। ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि राजेश दुबे के खिलाफ पहले से कई आपराधिक मामले दर्ज हैं।

    समिति के अनुसार, 9 मई की रात करीब 10:30 बजे राजेश dubey अपने 20 से 25 साथियों के साथ बगीचा सरकार मंदिर पहुंचा था। आरोप है कि वहां मौजूद महंत और श्रद्धालुओं के साथ मारपीट की गई। हालांकि घटना के दौरान दोनों पक्षों के बीच झड़प हुई थी, लेकिन पुलिस कार्रवाई केवल एक तरफ केंद्रित रही।

    प्रदर्शनकारियों ने सीसीटीवी फुटेज का हवाला देते हुए दावा किया कि वीडियो में दोनों पक्ष एक-दूसरे पर हमला करते दिखाई दे रहे हैं। समाज के लोगों ने कहा कि फुटेज में सुधीर दुबे, प्रिंस दुबे, अंशुमान और धर्मेंद्र सहित कई लोगों की पहचान स्पष्ट रूप से हो रही है। इसके बावजूद पुलिस ने निष्पक्ष कार्रवाई नहीं की।

    गुर्जर समाज और संत समाज के प्रतिनिधियों ने कहा कि यदि प्रशासन ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया तो आने वाले दिनों में आंदोलन और उग्र हो सकता है। प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन को 10 दिनों का अल्टीमेटम देते हुए कहा कि निष्पक्ष जांच, आरोपियों की गिरफ्तारी और दोनों पक्षों पर समान कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, अन्यथा जिलेभर में आंदोलन किया जाएगा।

  • मंदसौर में सोसायटी पंजीयन निरस्तीकरण की तैयारी, प्रशासन ने जारी किया नोटिस

    मंदसौर में सोसायटी पंजीयन निरस्तीकरण की तैयारी, प्रशासन ने जारी किया नोटिस


    मध्य प्रदेश । मंदसौर में सहकारिता विभाग ने वर्षों से बंद पड़ी और निष्क्रिय सहकारी संस्थाओं के खिलाफ बड़ा अभियान शुरू कर दिया है। आयुक्त सहकारिता एवं पंजीयक सहकारी संस्थाएं भोपाल के निर्देश पर जिले में ऐसी दर्जनों सोसायटियों के पंजीयन निरस्त करने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है, जो लंबे समय से काम नहीं कर रही थीं या परिसमापन की स्थिति में थीं। इस कार्रवाई को जिले में सहकारिता व्यवस्था को व्यवस्थित करने की दिशा में अब तक की सबसे बड़ी प्रशासनिक पहल माना जा रहा है।

    सहकारिता उप आयुक्त परमानंद गोडरिया ने बताया कि वर्षों से निष्क्रिय पड़ी संस्थाओं के कारण विभागीय रिकॉर्ड प्रबंधन और सहकारिता तंत्र दोनों प्रभावित हो रहे थे। ऐसे में अब इन संस्थाओं को सहकारिता पटल से हटाने की प्रक्रिया युद्ध स्तर पर शुरू की गई है। विभाग ने मई 2026 के भीतर पूरी कार्रवाई समाप्त करने का लक्ष्य तय किया है।

    कार्रवाई की जद में जिले की कई दुग्ध उत्पादक, साख, बीज और ग्रामीण विकास से जुड़ी सहकारी संस्थाएं शामिल हैं। इनमें पीर गुराडिया, लखमाखेड़ी, फतेहपुर, टिडवास, आंत्रीखुर्द, कांचरिया चन्द्रावत, बोतलगंज, हरमाला, कचनारा, नारायणगढ़, मुवाला, भोलिया, बेलारा, उदपुरा, लामगरा, अर्निया गौड़, कवला, गांगसी, ओसरना, कुण्डला खुर्द, निपानिया, धामनिया झाली, गोपालपुरा, गरोठ, लसुडिया, श्रीनगर, पिपलखुटा, मगराना और डोराना जैसी कई सहकारी समितियां शामिल हैं। इनके अलावा सार्थक साख मंदसौर, ग्रामीण विकास साख संस्था बरखेड़ा देव डूंगरी, कंचन साख मंदसौर, प्रबल निधि साख संस्था, सांवलिया बीज धमनार, जय बालाजी बीज राणाखेड़ा और शिवकृपा बीज मकड़ावन जैसी संस्थाओं पर भी पंजीयन निरस्तीकरण की कार्रवाई प्रस्तावित है।

    विभाग की ओर से सभी संबंधित संस्था संचालकों, सदस्यों और पदाधिकारियों को नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया है। यदि किसी संस्था को कार्रवाई पर आपत्ति है या वह अपना पक्ष प्रस्तुत करना चाहती है, तो उन्हें एक सप्ताह के भीतर उपायुक्त सहकारिता कार्यालय, मित्र वत्सला रामटेकरी, मंदसौर में उपस्थित होकर आवेदन देना होगा। तय समय सीमा के बाद विभाग आगे की कानूनी कार्रवाई करेगा।

    सहकारिता विभाग का कहना है कि कई संस्थाएं वर्षों से केवल कागजों में चल रही थीं, जबकि उनका कोई वास्तविक संचालन नहीं हो रहा था। इससे न केवल सरकारी रिकॉर्ड प्रभावित हो रहे थे, बल्कि सहकारिता व्यवस्था की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर भी असर पड़ रहा था। विभाग अब सक्रिय और निष्क्रिय संस्थाओं के बीच स्पष्ट अंतर स्थापित कर व्यवस्था को मजबूत करना चाहता है।

    प्रशासनिक अधिकारियों के मुताबिक, आने वाले समय में अन्य निष्क्रिय संस्थाओं की भी समीक्षा की जाएगी। यदि कोई संस्था लंबे समय तक कार्य नहीं करती पाई गई, तो उसके खिलाफ भी इसी तरह की कार्रवाई की जाएगी। विभाग का मानना है कि इस अभियान से सहकारिता क्षेत्र में पारदर्शिता बढ़ेगी और सक्रिय संस्थाओं को बेहतर अवसर मिल सकेंगे।

  • पश्चिमी मीडिया भारत को अब भी ‘सपेरों का देश’ क्यों दिखाता है? जानिए विवादों की पूरी कहानी

    पश्चिमी मीडिया भारत को अब भी ‘सपेरों का देश’ क्यों दिखाता है? जानिए विवादों की पूरी कहानी



    नई दिल्ली। नॉर्वे के अखबार Aftenposten में प्रधानमंत्री Narendra Modi को ‘सपेरे’ के रूप में दिखाने वाले कार्टून ने एक बार फिर यह बहस छेड़ दी है कि आखिर पश्चिमी मीडिया भारत को पुराने रूढ़िवादी नजरिए से क्यों देखता है। भारत आज दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है, IT और स्टार्टअप सेक्टर में अग्रणी है, फिर भी कई पश्चिमी कार्टून और मीडिया चित्रण भारत को गरीबी, अंधविश्वास, भीड़भाड़ और सांप-सपेरों की छवि तक सीमित कर देते हैं।


    औपनिवेशिक सोच की विरासत
    विशेषज्ञ मानते हैं कि इसकी जड़ें औपनिवेशिक दौर में हैं। 19वीं और 20वीं सदी में ब्रिटिश मीडिया और पत्रिकाएं भारत को पिछड़ा, रहस्यमयी और असभ्य दिखाकर अपने शासन को “सभ्यता मिशन” साबित करने की कोशिश करती थीं। उस समय भारतीयों को अक्सर सपेरों, फकीरों या अंधविश्वासी लोगों के रूप में दिखाया जाता था। यही छवि लंबे समय तक पश्चिमी समाज की सामूहिक सोच का हिस्सा बनी रही।

    आर्थिक प्रगति के बावजूद पुरानी छवि
    भारत आज दुनिया की शीर्ष अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। भारतीय मूल के कई लोग वैश्विक कंपनियों के CEO हैं और IT सेक्टर में भारत की मजबूत पहचान है। इसके बावजूद पश्चिमी मीडिया का एक वर्ग अब भी भारत को विरोधाभासों वाले देश के रूप में पेश करता है—जहां तकनीकी विकास के साथ गरीबी और अव्यवस्था भी दिखाई जाती है। आलोचकों का कहना है कि कई बार व्यंग्य और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर नस्लीय रूढ़ियों को दोहराया जाता है।

    हाल के विवादित कार्टून
    2024 में अमेरिका के एक वेब कॉमिक ने बाल्टीमोर पुल हादसे के बाद भारतीय क्रू को नस्लवादी तरीके से चित्रित किया।

    2023 में जर्मन पत्रिका Der Spiegel ने भारत और चीन की तुलना वाले कार्टून में भारतीय ट्रेन को भीड़भाड़ और अव्यवस्थित रूप में दिखाया।

    2022 में स्पेनिश अखबार La Vanguardia ने भारतीय अर्थव्यवस्था पर रिपोर्ट में सपेरे का चित्र इस्तेमाल किया।

    2014 में The New York Times को भारत विरोधी माने गए कार्टून पर माफी मांगनी पड़ी थी।

    क्या यह सिर्फ व्यंग्य है या नस्लवाद?
    पश्चिमी देशों में राजनीतिक कार्टूनों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हिस्सा माना जाता है। लेकिन जब किसी देश या समुदाय को बार-बार एक ही रूढ़ छवि में दिखाया जाए, तो इसे सांस्कृतिक पूर्वाग्रह और नस्लवादी सोच भी माना जाता है। भारतीय आलोचकों का कहना है कि यदि इसी तरह के चित्रण किसी पश्चिमी समुदाय के लिए किए जाते, तो उन्हें तुरंत नस्लवादी माना जाता।

    बदलती वैश्विक ताकत से असहजता?
    कुछ विश्लेषकों का मानना है कि भारत के तेजी से उभरने से पश्चिमी देशों के एक वर्ग में असहजता भी दिखाई देती है। भारत अब वैश्विक राजनीति, तकनीक, अंतरिक्ष और अर्थव्यवस्था में प्रभाव बढ़ा रहा है। ऐसे में पुराने प्रतीकों के जरिए भारत को “एक्सोटिक” या “पिछड़ा” दिखाने की कोशिश कहीं न कहीं मानसिक श्रेष्ठता बनाए रखने का तरीका भी मानी जाती है।

    भारत की वास्तविक तस्वीर आज बेहद विविध और आधुनिक है। यहां अंतरिक्ष मिशन भी हैं, डिजिटल क्रांति भी और दुनिया की सबसे बड़ी युवा आबादी भी। लेकिन पश्चिमी मीडिया का एक हिस्सा अब भी पुराने औपनिवेशिक नजरिए से बाहर नहीं निकल पाया है। यही वजह है कि समय-समय पर ऐसे कार्टून और टिप्पणियां विवाद का कारण बनती रहती हैं।

  • सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख: कैंपस में आवारा कुत्तों की अनुमति जिम्मेदारी और शर्तों के साथ ही संभव

    सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख: कैंपस में आवारा कुत्तों की अनुमति जिम्मेदारी और शर्तों के साथ ही संभव


    नई दिल्ली ।  देश में आवारा कुत्तों को लेकर चल रही बहस के बीच सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए शैक्षणिक संस्थानों में उनकी उपस्थिति पर स्पष्ट और सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने कहा है कि कुछ विशेष परिस्थितियों में कॉलेज कैंपसों में आवारा कुत्तों को रखने की अनुमति दी जा सकती है, लेकिन यह सुविधा बिना जिम्मेदारी और कानूनी जवाबदेही के नहीं दी जाएगी। इस फैसले को लेकर शिक्षा और पशु कल्याण से जुड़े वर्गों में नई चर्चा शुरू हो गई है।

    सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी भी शैक्षणिक परिसर में यदि छात्र संगठन या पशु कल्याण से जुड़े समूह आवारा कुत्तों को रखने या उनकी देखभाल करने की इच्छा रखते हैं, तो उन्हें पहले संस्थान के प्रमुख के समक्ष लिखित रूप में अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करनी होगी। इस शर्त का पालन अनिवार्य होगा और इसके बिना किसी भी प्रकार की अनुमति मान्य नहीं मानी जाएगी। अदालत ने यह भी कहा कि यदि परिसर में किसी भी प्रकार की कुत्तों से जुड़ी घटना होती है, चाहे वह काटने की हो या किसी अन्य प्रकार की क्षति की, तो उसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित समूहों पर होगी।

    अदालत ने अपने विचार में यह भी स्पष्ट किया कि पशु कल्याण के प्रयासों को मानव सुरक्षा के अधिकार से ऊपर नहीं रखा जा सकता। शिक्षा संस्थानों का प्राथमिक उद्देश्य सुरक्षित और भयमुक्त वातावरण उपलब्ध कराना है, जहां छात्र बिना किसी खतरे के अध्ययन कर सकें। इसलिए किसी भी नीति या व्यवस्था में मानव जीवन की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देना अनिवार्य है।

    इस निर्णय में यह भी कहा गया कि यदि परिसर में आवारा कुत्तों को भोजन देने या उनकी देखभाल की अनुमति दी जाती है, तो यह प्रक्रिया पूरी तरह नियंत्रित और जिम्मेदारी के साथ होनी चाहिए। बिना निगरानी या अनियंत्रित तरीके से ऐसी गतिविधियाँ स्वीकार नहीं की जाएंगी। अदालत ने यह भी संकेत दिया कि सार्वजनिक स्थानों पर जानवरों के प्रबंधन को लेकर नियमों का पालन बेहद जरूरी है ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय घटनाओं को रोका जा सके।

    सुप्रीम कोर्ट ने यह रुख भी दोहराया कि देशभर में कुत्ता काटने की घटनाओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। विशेष रूप से बच्चों और महिलाओं के साथ हुई घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए अदालत ने कहा कि ऐसी स्थिति में किसी भी तरह की लापरवाही स्वीकार्य नहीं होगी। इसी कारण शैक्षणिक परिसरों में किसी भी नीति को लागू करते समय सुरक्षा मानकों को सर्वोपरि रखा जाना चाहिए।

    इस फैसले के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि कॉलेज या विश्वविद्यालय परिसर में आवारा कुत्तों की मौजूदगी अब पूरी तरह अनियंत्रित नहीं हो सकती। यदि कोई समूह या संगठन इस दिशा में काम करना चाहता है, तो उसे न केवल प्रशासनिक अनुमति लेनी होगी, बल्कि सभी कानूनी जिम्मेदारियों को भी स्वीकार करना होगा।

    कुल मिलाकर, यह निर्णय पशु कल्याण और मानव सुरक्षा के बीच संतुलन स्थापित करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें स्पष्ट संदेश दिया गया है कि संवेदनशील मुद्दों पर भावनाओं के साथ-साथ जवाबदेही भी उतनी ही जरूरी है।

  • भाजपा नेता का कथित धमकी भरा ऑडियो वायरल: टोल मैनेजर को दी चेतावनी

    भाजपा नेता का कथित धमकी भरा ऑडियो वायरल: टोल मैनेजर को दी चेतावनी


    मध्य प्रदेश । रतलाम (मध्यप्रदेश) डेस्क। रतलाम जिले में भाजपा युवा मोर्चा के एक पदाधिकारी का कथित धमकी भरा ऑडियो सामने आने के बाद राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है। मामला चिकलिया फोरलेन टोल प्लाजा का है, जहां भाजयुमो आईटी सेल प्रभारी Shubham Gurjar पर टोल मैनेजर को फोन पर धमकाने, गाली-गलौज करने और कानून व्यवस्था बिगाड़ने की चेतावनी देने के आरोप लगे हैं। टोल मैनेजर Arijit Das Gupta ने इस मामले की शिकायत रतलाम एसपी और बिलपांक थाने में की है। शिकायत के साथ कथित ऑडियो रिकॉर्डिंग भी पुलिस को सौंपी गई है। बताया जा रहा है कि यह बातचीत 18 मई की दोपहर हुई थी।

    “नेतागीरी नहीं चलेगी… उलटा टांग दूंगा”
    वायरल ऑडियो में कथित तौर पर शुभम गुर्जर टोल कर्मचारियों पर स्थानीय लोगों की गाड़ियां रोकने का आरोप लगाते हुए आक्रामक भाषा का इस्तेमाल करते सुनाई दे रहे हैं। बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि “भागते फिरोगे एसपी और टीआई के पास”, “लॉ एंड ऑर्डर बिगाड़ दूंगा” और “ज्यादा होशियारी दिखाई तो उलटा टांग दूंगा” जैसी धमकियां दीं। ऑडियो में टोल मैनेजर उन्हें शांत करने की कोशिश करते सुनाई देते हैं, लेकिन कथित तौर पर भाजपा नेता लगातार गुस्से में अपशब्द बोलते रहते हैं।

    टोल मैनेजर ने लगाए गंभीर आरोप
    शिकायत में टोल मैनेजर ने आरोप लगाया है कि शुभम गुर्जर अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर रोजाना करीब 100 बाहरी वाहनों को बिना टोल शुल्क दिए निकलवाते हैं। जब टोल कर्मचारी नियमों के अनुसार शुल्क मांगते हैं तो वाहन चालक शुभम गुर्जर से फोन पर बात करवाते हैं और इसके बाद स्टाफ पर दबाव बनाया जाता है। शिकायत में यह भी कहा गया है कि इस तरह की गतिविधियों से एमपीआरडीसी को प्रतिदिन लाखों रुपए के राजस्व का नुकसान हो रहा है।

    पहले भी विवादों में रह चुके हैं शुभम गुर्जर
    मामले ने इसलिए भी तूल पकड़ लिया है क्योंकि शुभम गुर्जर पहले भी विवादों में रह चुके हैं। शिकायत के मुताबिक, वर्ष 2024 में भी बिलपांक थाने में उनके खिलाफ टोल प्लाजा पर कर्मचारियों को पिस्टल दिखाकर धमकाने और मारपीट करने का केस दर्ज हुआ था।

    उस समय सामने आए सीसीटीवी फुटेज के बाद तत्कालीन एसपी ने कार्रवाई कर मामला दर्ज कराया था और उन्हें भाजयुमो जिला उपाध्यक्ष पद से हटा दिया गया था। बाद में कोर्ट में सरेंडर करने के बाद वे जमानत पर बाहर आए थे। करीब दो महीने पहले उन्हें फिर से भाजयुमो आईटी सेल प्रभारी की जिम्मेदारी दी गई थी।

    टोल कर्मचारियों ने मांगी सुरक्षा
    टोल प्रबंधन ने पुलिस से मांग की है कि शुभम गुर्जर के खिलाफ सरकारी काम में बाधा, धमकी, गाली-गलौज और राजस्व हानि पहुंचाने की धाराओं में केस दर्ज किया जाए। साथ ही टोल कर्मचारियों और अधिकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की भी मांग की गई है। मामले को लेकर पुलिस प्रशासन की ओर से फिलहाल विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन शिकायत और ऑडियो रिकॉर्डिंग की जांच शुरू कर दी गई है।

  • UP हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: गंभीर आपराधिक मामलों के आरोपियों को पुलिस नौकरी नहीं

    UP हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: गंभीर आपराधिक मामलों के आरोपियों को पुलिस नौकरी नहीं



    नई दिल्ली। इलाहाबाद उच्च न्यायालयकी लखनऊ पीठ ने पुलिस भर्ती से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए कहा है कि गंभीर आपराधिक मामलों में आरोपी व्यक्तियों को पुलिस सेवा में नियुक्ति नहीं दी जा सकती, चाहे उनकी दोषसिद्धि अभी तक न हुई हो। अदालत ने स्पष्ट किया कि पुलिस विभाग केवल रोजगार का माध्यम नहीं बल्कि कानून-व्यवस्था और जनता के भरोसे से जुड़ी संवेदनशील सेवा है।

    यह फैसला न्यायमूर्ति Amitabh Kumar Rai की एकल पीठ ने शेखर नामक अभ्यर्थी की याचिका खारिज करते हुए दिया। याची ने अदालत में दलील दी थी कि उसके खिलाफ दर्ज आपराधिक मामला दुर्भावनापूर्ण है और अभी अदालत ने उसे दोषी नहीं ठहराया है, इसलिए उसे पुलिस भर्ती से बाहर नहीं किया जाना चाहिए।

    हालांकि अदालत ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया। कोर्ट ने कहा कि केवल दोषसिद्धि न होना किसी उम्मीदवार को स्वतः सरकारी नौकरी पाने का अधिकार नहीं देता। विशेष रूप से पुलिस जैसे अनुशासित बल में भर्ती के लिए अभ्यर्थी का चरित्र, आचरण और सामाजिक छवि अत्यंत महत्वपूर्ण होती है।

    न्यायालय ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति के खिलाफ गंभीर प्रकृति के आपराधिक मामले लंबित हैं, तो संबंधित प्राधिकारी उसके चरित्र सत्यापन और पृष्ठभूमि का मूल्यांकन कर उसे नियुक्ति के लिए अनुपयुक्त मान सकता है। अदालत ने माना कि पुलिस बल समाज में कानून लागू करने वाली संस्था है और यदि गंभीर आरोपों से घिरा व्यक्ति इसमें शामिल होता है तो इससे विभाग की साख और जनता का विश्वास प्रभावित हो सकता है।

    अपने फैसले में अदालत ने Supreme Court of India के कई पूर्व निर्णयों का भी उल्लेख किया। कोर्ट ने कहा कि सरकारी सेवाओं, खासकर पुलिस विभाग में भर्ती के दौरान चरित्र सत्यापन एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है और राज्य सरकार को यह अधिकार प्राप्त है कि वह संदिग्ध पृष्ठभूमि वाले व्यक्तियों को सेवा में शामिल होने से रोके।

    अदालत के इस फैसले को पुलिस भर्ती और सरकारी नौकरियों में चरित्र सत्यापन के लिहाज से अहम माना जा रहा है। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यह निर्णय भविष्य में ऐसे मामलों के लिए एक महत्वपूर्ण उदाहरण बन सकता है।
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  • रतलाम में राजनीतिक हलचल: कोठारी बोले- सुनवाई नहीं हुई तो पार्टी छोड़ दूंगा

    रतलाम में राजनीतिक हलचल: कोठारी बोले- सुनवाई नहीं हुई तो पार्टी छोड़ दूंगा


    रतलाम (मध्यप्रदेश)। मध्यप्रदेश के पूर्व गृह मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता Himmat Kothari बुधवार को रतलाम एसपी ऑफिस में अचानक धरने पर बैठ गए। उन्होंने पुलिस प्रशासन पर आम जनता और जनप्रतिनिधियों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए कहा कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो वे आमरण अनशन करेंगे और जरूरत पड़ी तो पार्टी भी छोड़ देंगे।

    दरअसल मामला उनके बचपन के साथी और मीसाबंदी बसंत पुरोहित की जमीन पर कथित कब्जे से जुड़ा है। पूर्व मंत्री का आरोप है कि इस संबंध में पहले थाने में शिकायत की गई थी, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। इसके बाद उन्होंने कुछ दिन पहले स्वयं एसपी अमित कुमार से मिलकर कार्रवाई की मांग की थी, लेकिन फिर भी मामला आगे नहीं बढ़ा।

    बुधवार दोपहर हिम्मत कोठारी सीधे एसपी कार्यालय पहुंचे और एसपी के चेंबर के बाहर जमीन पर बैठकर विरोध जताने लगे। अचानक हुई इस घटना से पुलिस महकमे में हलचल मच गई। एसपी Amit Kumar तुरंत अपने चेंबर से बाहर आए और पूर्व मंत्री को अंदर चलकर बात करने के लिए कहा।

    इसके बाद डीडी नगर थाना प्रभारी को भी मौके पर बुलाया गया और पूरे प्रकरण की जानकारी ली गई। एसपी ने संबंधित अधिकारियों को कार्रवाई के निर्देश दिए और मामले में आवश्यक कदम उठाने का आश्वासन दिया।

    धरने के दौरान मीडिया से बातचीत में हिम्मत कोठारी ने प्रशासनिक व्यवस्था पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि जब एक जनप्रतिनिधि की बात नहीं सुनी जा रही है, तो आम जनता की स्थिति क्या होगी, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिले में अराजकता का माहौल बन गया है और जमीन कब्जे जैसी घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं।

    पूर्व मंत्री ने कहा, “यदि समय पर कार्रवाई नहीं हुई तो मैं पार्टी से अनुमति लेकर आमरण अनशन करूंगा। फिर भी सुनवाई नहीं हुई तो पार्टी छोड़ने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा।”

    उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान समय में जनप्रतिनिधि और नेता “गूंगे-बहरे” बन गए हैं और आम लोगों की समस्याओं को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा। उनके अनुसार, यदि ऐसे मामलों में सख्ती नहीं हुई तो भविष्य में कोई भी व्यक्ति किसी की जमीन पर कब्जा कर सकता है।

    वहीं एसपी अमित कुमार ने मामले को लेकर कहा कि पूर्व मंत्री उनसे मिलने आए थे और संबंधित व्यक्ति को दस्तावेजों के साथ बुलाया गया था, लेकिन वह पूरे कागजात नहीं ला पाए। उन्होंने कहा कि मामले की जांच की जा रही है और संबंधित थाना प्रभारी को नोटिस जारी किया जाएगा।

  • पाकिस्तान वायुसेना का ट्रेनिंग विमान क्रैश, हादसे से पहले पैराशूट से कूदे दोनों पायलट

    पाकिस्तान वायुसेना का ट्रेनिंग विमान क्रैश, हादसे से पहले पैराशूट से कूदे दोनों पायलट



    नई दिल्ली। Pakistan Air Force का एक ट्रेनिंग विमान बुधवार को बड़ा हादसे का शिकार हो गया। पाकिस्तान के मियांवाली क्षेत्र के पास एयरफोर्स का होंगडु K-8 ट्रेनिंग एयरक्राफ्ट उड़ान के दौरान क्रैश हो गया। घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई और दूर तक धुएं का गुबार दिखाई दिया।

    प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक विमान में तकनीकी खराबी आने के संकेत मिले थे। हादसे से ठीक पहले दोनों पायलटों ने इमरजेंसी इजेक्शन सिस्टम का इस्तेमाल किया और पैराशूट के जरिए सुरक्षित बाहर निकल गए। सोशल मीडिया पर सामने आए कुछ वीडियो में दोनों पायलटों को आसमान से नीचे उतरते हुए देखा गया।

    विमान जमीन पर गिरते ही उसमें जोरदार धमाका हुआ। हालांकि, अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि दुर्घटना में जमीन पर किसी प्रकार का नुकसान या हताहत हुआ है या नहीं। स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां मौके पर पहुंचकर जांच में जुट गई हैं।

    पाकिस्तान वायुसेना की ओर से फिलहाल हादसे के कारणों को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। शुरुआती आशंका तकनीकी खराबी की जताई जा रही है, लेकिन विस्तृत जांच के बाद ही दुर्घटना की असली वजह सामने आ सकेगी।

    होंगडु K-8 एक जेट ट्रेनिंग एयरक्राफ्ट है, जिसका इस्तेमाल पायलटों को प्रशिक्षण देने के लिए किया जाता है। पाकिस्तान वायुसेना लंबे समय से इस विमान का उपयोग ट्रेनिंग मिशनों में करती आ रही है।

  • राहुल गांधी के बयान से गरमाई राजनीति, पीएम मोदी और अमित शाह पर टिप्पणी के बाद BJP का जोरदार पलटवार

    राहुल गांधी के बयान से गरमाई राजनीति, पीएम मोदी और अमित शाह पर टिप्पणी के बाद BJP का जोरदार पलटवार

    नई दिल्ली /उत्तर प्रदेश के रायबरेली में एक जनसभा के दौरान दिए गए राहुल गांधी के बयान के बाद देश की राजनीति में एक बार फिर तीखी बहस छिड़ गई है। विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर गंभीर आरोप लगाते हुए तीखी टिप्पणी की, जिसके बाद राजनीतिक माहौल पूरी तरह गरमा गया है। उनके इस बयान को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच शब्दों की जंग तेज हो गई है।

    राहुल गांधी ने अपने भाषण में मौजूदा सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए महंगाई और आर्थिक स्थिति को लेकर चिंता जताई। उन्होंने दावा किया कि देश में आम जनता पर आर्थिक दबाव लगातार बढ़ रहा है और जरूरी वस्तुओं की कीमतें तेजी से ऊपर जा रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले समय में देश को आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है और आम लोगों पर इसका सीधा असर पड़ेगा।

    अपने संबोधन में उन्होंने सरकार पर बड़े उद्योगपतियों के हित में काम करने का आरोप भी लगाया और देश की आर्थिक दिशा को लेकर सवाल खड़े किए। इस दौरान उन्होंने पीएम मोदी और अमित शाह को लेकर जो टिप्पणी की, उसने राजनीतिक विवाद को और गहरा कर दिया।

    राहुल गांधी के इस बयान के तुरंत बाद भारतीय जनता पार्टी ने तीखी प्रतिक्रिया दी। पार्टी ने उनके बयान को आपत्तिजनक बताते हुए कहा कि यह न केवल प्रधानमंत्री का बल्कि देश की जनता का भी अपमान है। बीजेपी नेताओं ने राहुल गांधी की भाषा और सोच पर सवाल उठाते हुए इसे राजनीति से प्रेरित और निराशा से भरा बयान करार दिया।

    बीजेपी ने अपने जवाब में कहा कि देश के खिलाफ लड़ाई लड़ने वाले सुरक्षा और विकास के प्रयासों को गलत ठहराना उचित नहीं है। पार्टी नेताओं ने यह भी कहा कि सरकार ने आतंकवाद, नक्सलवाद और राष्ट्रीय सुरक्षा के मोर्चे पर मजबूत कदम उठाए हैं, जिन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

    इस पूरे घटनाक्रम पर राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि चुनावी माहौल या राजनीतिक तनाव के बीच ऐसे बयान अक्सर विवाद को बढ़ा देते हैं और जनता के बीच भी अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आती हैं। वहीं, बीजेपी ने इस मुद्दे को लेकर राहुल गांधी पर लगातार हमले तेज कर दिए हैं और इसे आगामी राजनीतिक लड़ाई का हिस्सा बताया है।