Author: bharati

  • धूप में परेशान हुए हितग्राही: सर्वर डाउन बताकर रोका गया राशन, अफसरों पर सवाल

    धूप में परेशान हुए हितग्राही: सर्वर डाउन बताकर रोका गया राशन, अफसरों पर सवाल

    बुरहानपुर (मध्यप्रदेश)। जिले के सिरपुर स्थित एक शासकीय उचित मूल्य दुकान पर बुधवार सुबह राशन वितरण में गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया। दुकान संचालक ने “सर्वर डाउन” का हवाला देकर करीब तीन घंटे तक उपभोक्ताओं को राशन नहीं दिया, जिससे बड़ी संख्या में लोग धूप में खड़े होकर परेशान होते रहे।

    सुबह से ही दुकान के बाहर लंबी कतारें लग गई थीं। कई उपभोक्ता अपने घरों से थैलियां लेकर पहुंचे थे और घंटों इंतजार के बाद भी उन्हें अनाज नहीं मिला। तेज धूप और भीड़ के कारण लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।

    SDM ने मौके पर पहुंचकर लगाई फटकार
    इसी दौरान नेपानगर एसडीएम भागीरथ वाखला सिरपुर क्षेत्र से गुजर रहे थे। उन्होंने दुकान के बाहर भारी भीड़ देखकर गाड़ी रोक दी और स्थिति का जायजा लिया। एसडीएम ने मौके पर दुकान संचालक से देरी का कारण पूछा।

    संचालक ने सफाई दी कि तकनीकी कारणों से सर्वर डाउन है, जिसके चलते राशन वितरण नहीं हो पा रहा है। इस पर एसडीएम ने कड़ी नाराजगी जताते हुए इसे लापरवाही माना और तत्काल प्रभाव से वितरण शुरू करने के निर्देश दिए। एसडीएम की सख्ती के बाद दुकान पर राशन वितरण तुरंत शुरू कर दिया गया और लोगों को अनाज मिलना प्रारंभ हो गया।

    पोर्टेबिलिटी बंद होने से बढ़ी परेशानी
    स्थानीय जानकारी के अनुसार, सिरपुर की यह शासकीय राशन दुकान आसपास के कई क्षेत्रों के उपभोक्ताओं को अनाज उपलब्ध कराती है। इस बार पोर्टेबिलिटी सुविधा बंद होने के कारण उपभोक्ताओं को केवल अपनी निर्धारित (पंजीकृत) दुकान से ही राशन लेना पड़ रहा है।

    पहले उपभोक्ता किसी भी नजदीकी उचित मूल्य दुकान से राशन प्राप्त कर सकते थे, लेकिन अब यह सुविधा बंद होने से एक ही दुकान पर दबाव बढ़ गया है। इसके चलते भीड़ और लंबी कतारों की स्थिति लगातार बन रही है।

  • बिहार में मिड-डे मील खाने से 60 से ज्यादा बच्चे बीमार, स्कूल में मची अफरा-तफरी

    बिहार में मिड-डे मील खाने से 60 से ज्यादा बच्चे बीमार, स्कूल में मची अफरा-तफरी



    नालंदा । Bihar के नालंदा जिले में मिड-डे मील खाने के बाद 60 से ज्यादा स्कूली बच्चों की तबीयत बिगड़ने से हड़कंप मच गया। यह मामला नगरनौसा प्रखंड के मध्य विद्यालय कैला का है, जहां बुधवार को बच्चों को दोपहर के भोजन में चावल और छोले परोसे गए थे। खाना खाने के कुछ ही देर बाद बच्चों को तेज पेट दर्द, उल्टी, दस्त और चक्कर आने लगे। कई बच्चे स्कूल परिसर में ही बेहोश होकर गिर पड़े, जिससे स्कूल में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

    स्थिति गंभीर होते ही स्कूल प्रशासन ने आनन-फानन में सभी बच्चों को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र नगरनौसा और चंडी रेफरल अस्पताल पहुंचाया। एक छात्रा की हालत ज्यादा खराब होने पर उसे बिहारशरीफ सदर अस्पताल रेफर किया गया। घटना की जानकारी मिलते ही बड़ी संख्या में अभिभावक अस्पताल पहुंच गए। बच्चों की हालत देखकर कई परिजन रोते-बिलखते नजर आए।

    बीमार बच्चों में अमृता कुमारी, अंकुश कुमार, अनुराधा कुमारी, तमन्ना, निशु, मुस्कान, कृति, ऋषि, आरती, सिमरन, खुशी, आदित्य, प्रियांशु, प्रिय, दीपक, प्रीति, डॉली, सौरभ और किरण समेत कई छात्र-छात्राएं शामिल हैं।

    छात्राओं ने आरोप लगाया कि मिड-डे मील में परोसी गई सब्जी में दवा जैसी संदिग्ध गोली दिखाई दी थी। बच्चों का कहना है कि रोज की तरह इस बार भोजन परोसने से पहले शिक्षकों ने टेस्टिंग भी नहीं की थी। हालांकि, बच्चों की हालत बिगड़ने के बाद एक शिक्षक अमरेश ने खुद खाना चखकर जांच करने की कोशिश की, लेकिन कुछ देर बाद उनकी भी तबीयत बिगड़ गई और उन्हें भी अस्पताल ले जाना पड़ा।

    घटना के बाद मिड-डे मील सप्लाई करने वाली संस्था Ekta Foundation पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्रामीणों और अभिभावकों ने संस्था पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि बच्चों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ किया गया है।

    स्कूल की प्रधानाध्यापिका रजनी कुमारी ने बताया कि भोजन शुरू होने के कुछ मिनट बाद ही बच्चों की तबीयत खराब होने लगी थी। हालात बिगड़ते देख तुरंत स्वास्थ्य विभाग और अधिकारियों को सूचना दी गई।

    मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला शिक्षा पदाधिकारी आनंद विजय ने जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने कहा कि बच्चों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

  • नशीली दवा बिक्री के विरोध में उबाल: बुरहानपुर में 500 मेडिकल स्टोर्स बंद

    नशीली दवा बिक्री के विरोध में उबाल: बुरहानपुर में 500 मेडिकल स्टोर्स बंद


    बुरहानपुर/मध्यप्रदेश। जिले में ऑनलाइन दवा बिक्री और कथित नशीली दवाओं की अवैध सप्लाई के विरोध में बुधवार को बड़ा आंदोलन देखने को मिला। ऑल इंडिया केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के आह्वान पर बुरहानपुर जिले में 500 से अधिक मेडिकल स्टोर पूरी तरह बंद रहे, जिससे आम जनता को दवाइयों के लिए भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।

    सुबह से ही कई क्षेत्रों में मेडिकल स्टोर बंद रहे और मरीज दवा के लिए इधर-उधर भटकते नजर आए। दोपहर होते-होते बड़ी संख्या में दवा विक्रेता बाइक रैली के रूप में एकजुट होकर एसडीएम कार्यालय पहुंचे। यहां उन्होंने एसडीएम अजमेर सिंह गौड़ को राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा।

    दवा विक्रेताओं ने आरोप लगाया कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए दवाओं की अनियंत्रित बिक्री हो रही है, जिससे न केवल छोटे व्यापारियों का व्यवसाय प्रभावित हो रहा है, बल्कि जन स्वास्थ्य पर भी गंभीर खतरा पैदा हो रहा है। एसोसिएशन के सचिव शरद जैन ने बताया कि जिले की सभी प्रमुख दवा दुकानें बंद रहीं और यह विरोध पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा।

    ज्ञापन में केमिस्टों ने केंद्र सरकार द्वारा लागू जीएसआर 817(E) और जीएसआर 220(E) नियमों का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि इनका दुरुपयोग हो रहा है। उनका कहना है कि इन प्रावधानों के चलते ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर दवाओं की निगरानी कमजोर पड़ रही है और इसी का फायदा उठाकर कुछ अवैध गतिविधियां बढ़ रही हैं।

    केमिस्टों ने यह भी गंभीर आरोप लगाया कि नशीली दवाओं की अवैध बिक्री और गर्भपात किट (अबॉर्शन किट) की अनियंत्रित सप्लाई बढ़ रही है, जिससे युवा वर्ग में नशे की लत और स्वास्थ्य जोखिम बढ़ रहे हैं। उन्होंने सरकार से मांग की कि ऑनलाइन दवा सप्लाई पर सख्त नियंत्रण लगाया जाए और मौजूदा नियमों की समीक्षा कर उन्हें वापस लिया जाए।

    इसी तरह नेपानगर क्षेत्र में भी अखिल भारतीय दवा विक्रेता संघ के आह्वान पर मेडिकल स्टोर बंद रहे। वहां के दवा विक्रेताओं ने भी एसडीएम कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन सौंपा और ऑनलाइन दवा बिक्री पर रोक लगाने की मांग की।

    नेपा केमिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रमोद चौहान ने कहा कि बिना नियंत्रण के हो रही ऑनलाइन दवा बिक्री से मरीजों को गलत या कम गुणवत्ता वाली दवाएं मिल रही हैं, जिससे इलाज पर विपरीत असर पड़ रहा है। उन्होंने इसे स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बताया।

    हालांकि, इस पूरे आंदोलन का सबसे बड़ा असर आम मरीजों पर पड़ा, जिन्हें दिनभर दवाओं के लिए परेशान होना पड़ा। ग्रामीण और जरूरतमंद मरीज सबसे ज्यादा प्रभावित नजर आए।

  • आजीविका पर संकट का आरोप: ऑनलाइन फार्मेसी के खिलाफ केमिस्टों का प्रदर्शन

    आजीविका पर संकट का आरोप: ऑनलाइन फार्मेसी के खिलाफ केमिस्टों का प्रदर्शन


    मध्यप्रदेश। देशभर में ऑनलाइन दवा बिक्री के विरोध में केमिस्ट संगठनों के आह्वान पर बुधवार को कई जिलों में मेडिकल स्टोर बंद रहे। इसका सबसे ज्यादा असर मध्यप्रदेश के झाबुआ और आलीराजपुर जिलों में देखने को मिला, जहां सुबह से ही दवा दुकानों के शटर गिरे रहे और मरीजों को इलाज के लिए इधर-उधर भटकना पड़ा।

    झाबुआ जिले के झाबुआ, थांदला और पेटलावद सहित कई क्षेत्रों में मेडिकल स्टोर बंद रहे। केमिस्टों का कहना है कि ई-फार्मेसी के बढ़ते चलन से छोटे दवा व्यापारियों का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है। उनका आरोप है कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर बिना पर्याप्त निगरानी के दवाओं की बिक्री हो रही है, जिससे न सिर्फ कारोबार प्रभावित हो रहा है बल्कि मरीजों की सुरक्षा पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

    झाबुआ में शिवम मेडिकल के संचालक महेंद्र प्रताप सिंह राठौर ने कहा कि ऑनलाइन दवा बिक्री के कारण स्थानीय दुकानदारों की आजीविका पर गंभीर संकट आ गया है। उन्होंने सरकार से इस पर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की।

    वहीं प्रशासन ने स्थिति को देखते हुए वैकल्पिक व्यवस्था की है। जिला प्रशासन ने कुछ सरकारी और निजी अस्पतालों से जुड़े मेडिकल स्टोरों को चालू रखने का निर्णय लिया, ताकि जरूरी दवाइयों की उपलब्धता बनी रहे। इनमें जिला अस्पताल परिसर स्थित जन औषधि केंद्र सहित कई निजी अस्पतालों के मेडिकल स्टोर शामिल रहे।

    इसी तरह आलीराजपुर जिले में भी मेडिकल स्टोर बंद रहे। ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स (AIOCD) के आह्वान पर हुई इस हड़ताल का असर पूरे जिले में दिखा। सुबह से ही मरीज और उनके परिजन दवाइयों के लिए परेशान नजर आए। ग्रामीण क्षेत्रों से आए लोग पर्चे लेकर बंद दुकानों के बाहर खड़े रहे, लेकिन उन्हें दवा नहीं मिल सकी।

    ग्राम बड़ा गुड़ा निवासी राजू ने बताया कि वे इलाज के लिए जिला अस्पताल पहुंचे थे, लेकिन दवा न मिलने के कारण उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ा। इसी तरह बुजुर्ग मरीजों, गर्भवती महिलाओं और बच्चों के परिजनों को भी सबसे ज्यादा कठिनाई का सामना करना पड़ा।

    दवा व्यापारियों का कहना है कि ऑनलाइन दवा बिक्री से छोटे मेडिकल स्टोर बंद होने की कगार पर पहुंच गए हैं। उनका आरोप है कि यह व्यवस्था बिना पर्याप्त नियंत्रण के चल रही है, जो आने वाले समय में स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा बन सकती है।

    हालांकि, दिनभर की स्थिति में सबसे ज्यादा परेशानी आम मरीजों और ग्रामीण परिवारों को झेलनी पड़ी। कई लोगों का कहना है कि इस तरह के विरोध प्रदर्शनों का सीधा असर जरूरतमंद मरीजों पर पड़ता है, जिन्हें समय पर दवा नहीं मिल पाती।

  • रायबरेली में राहुल गांधी का तीखा हमला, संविधान को लेकर केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप

    रायबरेली में राहुल गांधी का तीखा हमला, संविधान को लेकर केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप

    नई दिल्ली। रायबरेली के लोधवारी में आयोजित बहुजन स्वाभिमान सभा और अन्य कार्यक्रमों में Rahul Gandhi ने केंद्र सरकार, Bharatiya Janata Party और Rashtriya Swayamsevak Sangh पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने संविधान को देश की आत्मा बताते हुए आरोप लगाया कि इसे कमजोर करने की कोशिश की जा रही है और लोकतांत्रिक संस्थाओं पर दबाव बढ़ रहा है। राहुल गांधी ने संविधान की प्रति हाथ में लेकर कहा कि यह केवल किताब नहीं बल्कि देश के महान नेताओं के त्याग और बलिदान का प्रतीक है।

    राहुल गांधी ने दावा किया कि देश में आर्थिक संकट गहराने वाला है और आने वाले समय में आम जनता पर महंगाई का भारी असर पड़ेगा। उन्होंने प्रधानमंत्री और गृह मंत्री पर देश के साथ धोखा करने का आरोप लगाते हुए कहा कि नीतियों के कारण किसानों और गरीबों की स्थिति प्रभावित हो रही है। उन्होंने यह भी कहा कि संस्थाओं में राजनीतिक हस्तक्षेप बढ़ रहा है और विश्वविद्यालयों तक में प्रभाव देखा जा रहा है।

    सभा के दौरान राहुल गांधी ने सामाजिक न्याय और पिछड़ों के अधिकारों की बात करते हुए वीरा पासी जैसे ऐतिहासिक व्यक्तित्वों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि देश की ताकत संविधान है और इसे बचाना हर नागरिक की जिम्मेदारी है। अपने संबोधन में उन्होंने उद्योगपतियों का जिक्र करते हुए किसानों की समस्याओं पर सरकार की अनदेखी का आरोप लगाया।

    एक अन्य कार्यक्रम में राहुल गांधी ने कांग्रेस के दिवंगत नेता योगेंद्र मिश्र के परिजनों से मुलाकात कर शोक संवेदना व्यक्त की और पार्टी की ओर से हर संभव मदद का भरोसा दिया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस परिवार हर परिस्थिति में अपने साथियों और उनके परिवारों के साथ खड़ी है।

     राहुल गांधी ने अमेठी से अपने पुराने संबंधों को याद करते हुए कार्यकर्ताओं का आभार भी व्यक्त किया और भविष्य में फिर आने की बात कही।

  • देहरादून में दर्दनाक हादसा, पैनेसिया अस्पताल की ICU यूनिट में आग; धुएं से एक की मौत, कई मरीज प्रभावित

    देहरादून में दर्दनाक हादसा, पैनेसिया अस्पताल की ICU यूनिट में आग; धुएं से एक की मौत, कई मरीज प्रभावित

    नई दिल्ली । देहरादून से एक बेहद दर्दनाक और चिंताजनक हादसे की खबर सामने आई है, जहां शहर के एक प्रमुख अस्पताल पैनेसिया में भीषण आग लगने से हड़कंप मच गया। यह घटना अस्पताल के आईसीयू वार्ड में हुई, जहां अचानक एयर कंडीशनर में विस्फोट होने के बाद आग तेजी से फैल गई और पूरे वार्ड में घना धुआं भर गया। इस हादसे में एक मरीज की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि कई अन्य मरीजों के प्रभावित होने और घायल होने की जानकारी सामने आई है।

    घटना के बाद अस्पताल परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागते नजर आए। धुएं की वजह से आईसीयू में भर्ती मरीजों को सांस लेने में गंभीर परेशानी हुई, जिससे स्थिति और भी अधिक भयावह हो गई। सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंची और राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया गया। काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पा लिया गया, लेकिन तब तक नुकसान हो चुका था।

    हादसे के बाद अस्पताल में भर्ती सभी मरीजों को सुरक्षित स्थानों पर या अन्य अस्पतालों में स्थानांतरित किया गया ताकि उनकी देखभाल में किसी तरह की कमी न रहे। प्रशासन ने तुरंत स्थिति को नियंत्रण में लेते हुए पूरे परिसर को खाली करवा लिया और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया।

    इस घटना के बाद गढ़वाल प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, यह आग ICU में लगे एयर कंडीशनर के फटने के कारण लगी, लेकिन वास्तविक कारणों की जांच अभी जारी है। अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि अस्पताल का संचालन एक निजी ग्रुप द्वारा लीज पर किया जा रहा था, इसलिए फायर सेफ्टी मानकों और सुरक्षा व्यवस्था की विस्तृत जांच की जाएगी।

    प्रशासन ने इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए उच्च स्तरीय जांच के आदेश दे दिए हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि सुरक्षा नियमों का पालन किया गया था या नहीं और ऐसी भयावह घटना कैसे हुई। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि आपात स्थिति में अस्पताल प्रशासन की प्रतिक्रिया कितनी प्रभावी थी।

    यह हादसा न केवल अस्पताल प्रबंधन पर सवाल खड़े करता है, बल्कि स्वास्थ्य संस्थानों में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी गंभीर चिंताएं पैदा करता है। फिलहाल राहत कार्य पूरा कर लिया गया है और स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन इस घटना ने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया है।

  • झांसी में गर्मी और बिजली कटौती से बिगड़ रही लोगों की नींद, बढ़े मानसिक तनाव के मरीज

    झांसी में गर्मी और बिजली कटौती से बिगड़ रही लोगों की नींद, बढ़े मानसिक तनाव के मरीज



    झांसी । झांसी में भीषण गर्मी और लगातार हो रही बिजली कटौती लोगों के स्वास्थ्य और मानसिक स्थिति पर गहरा असर डाल रही है। रात के समय बिजली न आने और तेज गर्मी के कारण लोगों की नींद पूरी नहीं हो पा रही है, जिससे चिड़चिड़ापन, बेचैनी और तनाव जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं।

    जिला अस्पताल की मनोचिकित्सक डॉ. शिकाफा जाफरीन के अनुसार ओपीडी में आने वाले मानसिक रोगियों में हर चौथा मरीज नींद की कमी से जुड़ी समस्याओं से परेशान है। काउंसलिंग के दौरान यह सामने आया है कि अधिकतर लोग या तो गर्मी के कारण सो नहीं पा रहे हैं या फिर रात में बिजली कटौती उनकी नींद बाधित कर रही है।

    डॉक्टरों का कहना है कि पर्याप्त नींद न मिलने से मानसिक स्वास्थ्य पर सीधा असर पड़ता है। इससे मेनिया, पैनिक डिसऑर्डर और इनसोमनिया (अनिद्रा) जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं। मेनिया की स्थिति में व्यक्ति अत्यधिक उत्तेजित हो जाता है, बहुत अधिक या बहुत कम बोलता है, मूड स्विंग होता है और व्यवहार असामान्य हो जाता है।

    वहीं पैनिक डिसऑर्डर के मरीजों में बार-बार घबराहट, दिल की धड़कन तेज होना और सांस फूलने जैसी समस्याएं देखी जा रही हैं।

    इनसोमनिया के मरीज अधिक सोचने लगते हैं और छोटी-छोटी बातों पर चिड़चिड़ापन और गुस्सा दिखाने लगते हैं।

    डॉक्टरों के अनुसार नींद की कमी का असर केवल मानसिक ही नहीं बल्कि शारीरिक स्वास्थ्य पर भी पड़ रहा है, जिससे लोगों की दिनचर्या प्रभावित हो रही है। लगातार नींद न पूरी होने से मरीजों में तनाव बढ़ता जा रहा है और कई लोग सामान्य बातचीत में भी आक्रामक व्यवहार करने लगे हैं।

    फिलहाल विशेषज्ञों ने लोगों को सलाह दी है कि वे गर्मी से बचाव के उपाय अपनाएं, पर्याप्त पानी पिएं और जितना संभव हो नींद का नियमित समय बनाए रखें, ताकि मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को बेहतर रखा जा सके।

  • रेड कार्पेट पर Jacqueline ने बिखेरा जलवा, Cannes लुक की चर्चा तेज

    रेड कार्पेट पर Jacqueline ने बिखेरा जलवा, Cannes लुक की चर्चा तेज


    नई दिल्ली । कान्स फिल्म फेस्टिवल 2026 में बॉलीवुड अभिनेत्री Jacqueline Fernandez ने अपने शानदार फैशन स्टेटमेंट से सभी का ध्यान खींच लिया। प्रतिष्ठित रेड कार्पेट इवेंट में उनकी मौजूदगी ने एक बार फिर साबित कर दिया कि वह ग्लोबल फैशन आइकॉन के रूप में अपनी पहचान बनाए हुए हैं।

    ब्लैक मिनी ड्रेस में दिखा बोल्ड और एलिगेंट लुक
    इस खास मौके पर जैकलीन ने कैरोलिन कूट्योर की ब्लैक मिनी ड्रेस पहनी, जिसमें मॉडर्न एलिगेंस और हाई-फैशन का बेहतरीन मेल देखने को मिला। स्ट्रैपलेस डिजाइन और टेक्सचर्ड डिटेलिंग ने उनके पूरे लुक को और भी आकर्षक बना दिया। ड्रेस की फिटिंग और शॉर्ट हेमलाइन ने उनके लुक में बोल्ड और यूथफुल टच जोड़ा, जिससे उनका रेड कार्पेट अपीयरेंस और भी दमदार नजर आया।

    डायमं ड ज्वेलरी ने बढ़ाया ग्लैमर
    अपने आउटफिट को और खास बनाने के लिए जैकलीन ने चोपार्ड की लग्जरी डायमंड ज्वेलरी पहनी। चमकते डायमंड्स ने उनके ऑल-ब्लैक लुक को और भी ग्लैमरस और क्लासी बना दिया। उनका पूरा लुक फैशन और एलीगेंस का परफेक्ट कॉम्बिनेशन नजर आया, जिसने फोटोग्राफर्स और फैंस दोनों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।

    सोशल मीडिया पर वायरल हुई तस्वीरें
    जैसे ही उनकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर आईं, फैंस ने उन्हें खूब पसंद किया और शेयर करना शुरू कर दिया। रेड कार्पेट पर उनका कॉन्फिडेंट और ग्लैमरस अंदाज चर्चा का विषय बन गया है।

    ग्लोबल फैशन आइकॉन के रूप में पहचान
    कान्स में उनकी यह उपस्थिति एक बार फिर साबित करती है कि जैकलीन सिर्फ बॉलीवुड ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय फैशन सर्किट में भी अपनी मजबूत पहचान रखती हैं।

  • KKR vs MI Pitch Report: ईडन गार्डन्स में बल्लेबाजों को मिलेगा बड़ा फायदा

    KKR vs MI Pitch Report: ईडन गार्डन्स में बल्लेबाजों को मिलेगा बड़ा फायदा


    नई दिल्ली । कोलकाता के ऐतिहासिक ईडन गार्डन्स मैदान में आज आईपीएल 2026 का बड़ा मुकाबला खेला जाएगा, जिसमें कोलकाता नाइट राइडर्स और मुंबई इंडियंस आमने-सामने होंगे। पिच रिपोर्ट के अनुसार यह मैदान हमेशा से बल्लेबाजों के लिए अनुकूल माना जाता है। यहां गेंद बैट पर अच्छी तरह आती है, जिससे स्ट्रोक खेलना आसान हो जाता है। शुरुआत में तेज गेंदबाजों को हल्की स्विंग और मूवमेंट मिल सकती है, लेकिन जैसे-जैसे पारी आगे बढ़ती है, बल्लेबाजों का दबदबा बढ़ जाता है।

     स्पिनर्स भी निभा सकते हैं अहम भूमिका
    हालांकि ईडन गार्डन्स सिर्फ बल्लेबाजों का मैदान नहीं है। दूसरी पारी में पिच धीरे-धीरे धीमी हो जाती है, जिससे स्पिन गेंदबाजों को टर्न और ग्रिप मिलने लगता है। मिडिल ओवर्स में स्पिनर्स का रोल बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि वहीं से मैच का रुख बदल सकता है। कप्तानों के लिए यह एक रणनीतिक चुनौती भी होगी कि कब स्पिन अटैक को इस्तेमाल किया जाए।

    ओस और टॉस का बड़ा असर
    इस मैदान पर पहली पारी का औसत स्कोर करीब 190 रन माना जा रहा है। ऐसे में एक बड़ा स्कोर देखने को मिल सकता है। दूसरी पारी में ओस (Dew) का असर पड़ने की संभावना है, जिससे बल्लेबाजी और आसान हो जाएगी। यही कारण है कि टॉस जीतने वाली टीम पहले गेंदबाजी करना पसंद कर सकती है।

    फैंस को मिलेगा हाई-स्कोरिंग थ्रिलर
    दोनों टीमों के पास विस्फोटक बल्लेबाज मौजूद हैं, जिससे फैंस को चौकों और छक्कों की बारिश देखने को मिल सकती है। मुकाबला पूरी तरह रन-फेस्ट और रोमांच से भरा होने की उम्मीद है।

  • सुप्रीम कोर्ट में इंसानियत और कानून का संगम, बुजुर्ग की अपील पर CJI सूर्यकांत का भावुक लेकिन स्पष्ट जवाब

    सुप्रीम कोर्ट में इंसानियत और कानून का संगम, बुजुर्ग की अपील पर CJI सूर्यकांत का भावुक लेकिन स्पष्ट जवाब

    नई दिल्ली । सुप्रीम कोर्ट में गुरुद्वारा कमेटियों के फंड से जुड़े कथित दुरुपयोग के मामले की सुनवाई के दौरान एक बेहद भावुक और मानवीय क्षण सामने आया, जिसने पूरे माहौल को गंभीरता और संवेदनशीलता से भर दिया। सुनवाई के दौरान जब एक बुजुर्ग याचिकाकर्ता ने अपनी बात रखते हुए भावुक होकर कहा कि वह न्याय की उम्मीद में अदालत के आगे नतमस्तक हैं, तो पूरा कोर्टरूम कुछ पल के लिए शांत हो गया।

    याचिकाकर्ता ने अपनी अपील में मामले की गंभीरता को विस्तार से रखते हुए कहा कि यह मुद्दा केवल एक व्यक्तिगत विवाद नहीं, बल्कि समाज, शिक्षा और सार्वजनिक हित से जुड़ा महत्वपूर्ण प्रश्न है। उन्होंने न्यायालय से अनुरोध किया कि इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करते हुए संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया जाए और किसी भी तरह के अपरिवर्तनीय निर्णय पर रोक लगाई जाए।

    इस भावुक अपील को सुनकर मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने बेहद संतुलित और विनम्र तरीके से जवाब दिया। उन्होंने कहा कि अदालत हमेशा नागरिकों के लिए उपलब्ध है और कोई भी व्यक्ति अपनी बात रखने के लिए स्वतंत्र है, लेकिन किसी भी नीति या कानून में बदलाव का अधिकार न्यायपालिका के बजाय विधायिका के पास होता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में उचित मंच तक पहुंचना ही सही प्रक्रिया होती है।

    CJI ने आगे याचिकाकर्ता को सलाह दी कि वह संबंधित विषय को संसद की याचिका समिति के समक्ष भी रख सकते हैं, ताकि वहां से उचित प्रक्रिया के तहत विचार किया जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि न्यायपालिका हर मामले में सीमित दायरे में ही हस्तक्षेप कर सकती है, खासकर जब मामला नीतिगत या विधायी क्षेत्र से जुड़ा हो।

    इस पूरी सुनवाई के दौरान कोर्ट में भावनाओं और कानून का संतुलन स्पष्ट रूप से देखने को मिला। एक तरफ बुजुर्ग की भावुक अपील थी, तो दूसरी तरफ न्यायिक प्रक्रिया की स्पष्ट सीमाएं, जिन्हें मुख्य न्यायाधीश ने बेहद सम्मानपूर्वक और सहज भाषा में समझाया।

    यह घटना न केवल न्याय व्यवस्था की गरिमा को दर्शाती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि अदालतें भावनाओं को समझते हुए भी कानून की सीमाओं के भीतर ही निर्णय लेने के लिए बाध्य होती हैं।