Author: bharati

  • बजट के बाद वेबिनार में पीएम का विजन: ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ की रफ्तार और तेज करने का आह्वान

    बजट के बाद वेबिनार में पीएम का विजन: ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ की रफ्तार और तेज करने का आह्वान

    नई दिल्ली। केंद्रीय बजट के बाद आयोजित वेबिनार में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने “विकसित भारत के लिए प्रौद्योगिकी, सुधार और वित्त” विषय पर देश को स्पष्ट संदेश दिया-बजट कोई तात्कालिक लाभ का दस्तावेज नहीं, बल्कि दीर्घकालिक राष्ट्रीय रोडमैप है। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए संबोधन में उन्होंने कहा कि बजट के बाद वेबिनार की परंपरा अब मजबूत हो चुकी है और इससे योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में गति मिलती है।

    शॉर्ट टर्म नहीं, लॉन्ग टर्म विजन का दस्तावेज
    प्रधानमंत्री ने कहा कि बजट को शेयर बाजार की चाल या आयकर प्रस्तावों के चश्मे से देखना अधूरा आकलन है। असल मायने में बजट इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार, क्रेडिट की सुगमता, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस, पारदर्शिता और जीवन को आसान बनाने वाली नीतियों का समग्र खाका होता है। उन्होंने 2047 तक ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को दोहराते हुए कहा कि हर बजट उसी लंबी यात्रा का एक चरण है।

    टेक्नोलॉजी आधारित गवर्नेंस पर जोर
    पीएम ने कहा कि बीते दशक में भारत ने जो लचीलापन दिखाया है, वह सुधारों का परिणाम है। प्रक्रियाओं का सरलीकरण, टेक्नोलॉजी आधारित शासन और संस्थागत मजबूती ने अर्थव्यवस्था को नई दिशा दी है। उन्होंने एआई, ब्लॉकचेन और डेटा एनालिटिक्स के उपयोग से पारदर्शिता, जवाबदेही और गति बढ़ाने की बात कही। साथ ही शिकायत निवारण तंत्र को मजबूत कर जमीनी असर सुनिश्चित करने पर जोर दिया।

    इंफ्रास्ट्रक्चर में रिकॉर्ड निवेश, निजी क्षेत्र को संकेत
    प्रधानमंत्री ने बताया कि 11 वर्ष पहले सार्वजनिक पूंजीगत व्यय लगभग 2 लाख करोड़ रुपये था, जो अब बढ़कर 12 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। उन्होंने कहा कि यह विशाल निवेश निजी क्षेत्र के लिए स्पष्ट संकेत है कि वह भी नई ऊर्जा के साथ आगे आए। परियोजना स्वीकृति, लागत-लाभ विश्लेषण और लाइफ साइकल कॉस्टिंग को मजबूत कर देरी और अपव्यय रोकने की आवश्यकता बताई।

    बॉन्ड मार्केट और विदेशी निवेश को बढ़ावा
    उन्होंने कहा कि दीर्घकालिक वित्त को मजबूत करने के लिए बॉन्ड बाजार को अधिक सक्रिय और तरल बनाना जरूरी है। बॉन्ड की खरीद-बिक्री प्रक्रिया को सरल किया जा रहा है और निवेशक-अनुकूल ढांचा तैयार किया जा रहा है। वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं को अपनाकर वित्तीय तंत्र को अधिक पूर्वानुमेय बनाने पर भी बल दिया गया।

    ‘रिफॉर्म पार्टनरशिप चार्टर’ का प्रस्ताव
    प्रधानमंत्री ने सरकार, उद्योग, वित्तीय संस्थानों और अकादमिक जगत के बीच एक स्पष्ट ‘रिफॉर्म पार्टनरशिप चार्टर’ बनाने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि नीति की सफलता घोषणाओं से नहीं, बल्कि उत्कृष्ट क्रियान्वयन से तय होती है। अब चर्चा का समय नहीं, बल्कि बजट को जमीन पर तेजी से लागू करने का समय है।

  • OTT पर दबकर रह गई सिराई, जय भीम जैसा टॉर्चर और इंसाफ की लड़ाई हिला देगी अंदर तक

    OTT पर दबकर रह गई सिराई, जय भीम जैसा टॉर्चर और इंसाफ की लड़ाई हिला देगी अंदर तक


    नई दिल्ली । ओटीटी की भीड़ में कई बार बेहतरीन फिल्में चुपचाप आकर निकल जाती हैं। साल 2026 में ZEE5 पर रिलीज हुई तमिल फिल्म सिराई भी कुछ ऐसी ही फिल्म है जो बड़े स्टार्स की फिल्मों के शोर में दब गई। कहा जा रहा है कि धुरंधर की चर्चा के बीच इस फिल्म पर कम लोगों की नजर पड़ी लेकिन कंटेंट के मामले में यह किसी से कम नहीं। IMDb पर 8.2 की दमदार रेटिंग के साथ सिराई उन फिल्मों में गिनी जा रही है जो सिस्टम की सच्चाई को बेधड़क सामने रखती हैं।

    फिल्म में लीड रोल निभाया है विक्रम प्रभु ने। उनके साथ कई अनुभवी तमिल कलाकार नजर आते हैं जो कहानी को मजबूत आधार देते हैं। यह फिल्म तमिल में बनी है लेकिन अच्छी बात यह है कि ओटीटी पर यह हिंदी में भी उपलब्ध है इसलिए भाषा दर्शकों के लिए रुकावट नहीं बनती।

    सिराई का अर्थ है जेल या कैद और फिल्म का मूल भी इसी विचार के इर्द-गिर्द घूमता है। कहानी एक ईमानदार पुलिस अधिकारी की है जिसे एक हाई-प्रोफाइल कैदी को एक जेल से दूसरी जेल में ट्रांसफर करने की जिम्मेदारी मिलती है। शुरुआत में यह एक सामान्य ड्यूटी लगती है लेकिन सफर के दौरान उसे पता चलता है कि जिस कैदी को वह ले जा रहा है वह असल में निर्दोष है। उसे कुछ ताकतवर लोगों ने अपने फायदे के लिए फंसाया है।

    यहीं से कहानी में असली संघर्ष शुरू होता है। एक तरफ सिस्टम का दबाव और वर्दी की जिम्मेदारी दूसरी तरफ इंसानियत और अंतरात्मा की आवाज। क्या वह आदेश का पालन करेगा या सच का साथ देगा? फिल्म इसी नैतिक दुविधा को बेहद सधे हुए अंदाज में पेश करती है।

    इस फिल्म की खास बात यह है कि इसमें मसाला एंटरटेनमेंट वाला ओवर-द-टॉप एक्शन नहीं है। यहां सब कुछ रियलिस्टिक है पुलिसिया पूछताछ मानसिक दबाव सत्ता का खेल और कानून की खामियां। यही यथार्थवाद फिल्म को असरदार बनाता है।

    अगर आपको जय भीम और विसरानई जैसी फिल्में पसंद आई थीं तो सिराई भी आपको जरूर प्रभावित करेगी। यह सिर्फ पुलिस और कैदी की कहानी नहीं है बल्कि यह न्याय व्यवस्था की परतें खोलती है और सवाल पूछती है कि सच की कीमत आखिर कितनी भारी होती है।

    विक्रम प्रभु ने अपने किरदार में गजब की गंभीरता दिखाई है। उनके चेहरे के भाव आंखों की बेचैनी और भीतर चल रहे द्वंद्व को उन्होंने बारीकी से निभाया है। फिल्म आपको अंत तक बांधे रखती है और सोचने पर मजबूर करती है। 

  • जलन, लालच और शक की आग में बुझ गया सितारा: लैला खान हत्याकांड का पूरा सच

    जलन, लालच और शक की आग में बुझ गया सितारा: लैला खान हत्याकांड का पूरा सच


    नई दिल्ली । मायानगरी मुंबई की चकाचौंध के बीच साल 2011 में एक ऐसी घटना घटी, जिसने फिल्म इंडस्ट्री ही नहीं बल्कि पूरे देश को स्तब्ध कर दिया। यह मामला था बॉलीवुड अभिनेत्री लैला खान और उनके परिवार की रहस्यमयी गुमशुदगी का। लैला ने सुपरस्टार राजेश खन्ना के साथ फिल्म वफा में काम किया था और अपनी खूबसूरती व अदाकारी के कारण चर्चा में रहती थीं। लेकिन अचानक उनका और उनके परिवार के पांच अन्य सदस्यों का यूं गायब हो जाना एक बड़े रहस्य में बदल गया।

    मुंबई के एक पॉश इलाके से लैला, उनकी मां सेलिना, तीन भाई बहन और एक चचेरी बहन के लापता होने की खबर ने सनसनी फैला दी। करीब एक साल तक कोई ठोस सुराग नहीं मिला। पुलिस की जांच जारी रही, लेकिन परिवार का कोई अता पता नहीं था। मामला तब और पेचीदा हो गया जब शक की सुई लैला के सौतेले पिता की ओर घूमी।

    पूछताछ के दौरान जो सच सामने आया, उसने सबको झकझोर दिया। सौतेले पिता ने कबूल किया कि उसने ही इगतपुरी नासिक के पास स्थित अपने फार्महाउस पर परिवार के सभी छह सदस्यों की हत्या कर दी और शवों को वहीं दफना दिया। हत्या की वजह थी शक, जलन और संपत्ति को लेकर डर। उसे संदेह था कि लैला की मां का किसी और से संबंध है और वह बच्चों के साथ दुबई बसने की योजना बना रही है। उसे भय था कि परिवार उससे अलग होकर उसे संपत्ति से बेदखल कर देगा।

    बताया गया कि फार्महाउस पर किसी बात को लेकर तीखी बहस हुई। गुस्से में आरोपी ने पहले सेलिना पर हमला किया और फिर एक एक कर सभी को मौत के घाट उतार दिया। अपने अपराध को छिपाने के लिए उसने फार्महाउस के अहाते में गड्ढा खोदकर सभी शवों को दफना दिया और ऊपर से आग लगाकर सबूत मिटाने की कोशिश की। यह वारदात इतनी निर्मम थी कि जिसने भी इसके बारे में सुना, सन्न रह गया।

    मामला वर्षों तक अदालत में चलता रहा। पुलिस ने सबूत जुटाए, गवाह पेश हुए और लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद आखिरकार 2024 में अदालत ने आरोपी सौतेले पिता को दोषी करार देते हुए फांसी की सजा सुनाई। करीब 13 साल बाद न्याय मिला, लेकिन तब तक एक उभरती अभिनेत्री और उसका पूरा परिवार इस दुनिया से जा चुका था।

    लैला खान हत्याकांड ने यह साबित कर दिया कि शक और लालच जब रिश्तों पर हावी हो जाते हैं, तो अंजाम बेहद खौफनाक होता है। ग्लैमर की दुनिया की एक चमकती जिंदगी, पारिवारिक साजिश और निर्ममता की भेंट चढ़ गई। यह मामला आज भी याद दिलाता है कि अपराध चाहे जितना छिपाया जाए, सच एक दिन सामने जरूर आता है।

  • केरल अब केरलम: जानिए नाम बदलने पीछे किसका था आइडिया, ये है पूरी कहानी

    केरल अब केरलम: जानिए नाम बदलने पीछे किसका था आइडिया, ये है पूरी कहानी


    नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने हाल ही में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए केरल राज्य का नाम बदलकर आधिकारिक तौर पर केरलम करने की मंजूरी दे दी है। इस फैसले के साथ ही अब सरकारी दस्तावेजों रिपोर्टों और आम बोलचाल में राज्य को उसके पारंपरिक और भाषाई रूप में पहचान मिलेगी।

    नाम बदलने का आइडिया और सूत्रधार
    इस बदलाव के सबसे बड़े सूत्रधार के रूप में पूर्व केंद्रीय मंत्री और केरल भाजपा अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर का नाम सामने आया है। सूत्रों के अनुसार चंद्रशेखर ने कुछ महीने पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर राज्य का नाम बदलकर केरलम करने का आग्रह किया था। कैबिनेट की हरी झंडी मिलने के बाद उन्होंने न केवल खुद इस नए नाम का इस्तेमाल शुरू कर दिया है बल्कि दूसरों को भी केरल की जगह केरलम कहने के लिए टोकते और सही करते हैं। चंद्रशेखर का तर्क है कि केरलम शब्द राज्य की मलयाली पहचान संस्कृति और इतिहास को अधिक सटीक रूप से दर्शाता है। उनका कहना है कि यह केवल नाम का बदलाव नहीं है बल्कि क्षेत्रीय गौरव को सम्मान देने का प्रयास है।

    रेल मंत्री के कार्यक्रम में केरलम का जश्न

    कैबिनेट के इस फैसले का असर दिल्ली के गलियारों में भी दिखा। गुरुवार को रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने रेलवे सुधारों पर प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की लेकिन वहां का सबका ध्यान केरलम लंच ने खींचा। अधिकारियों और मीडियाकर्मियों के लिए केरलम की पारंपरिक रसोई सजाई गई थी। दोपहर के भोजन में अप्पम इडियप्पम वेजिटेबल स्टू और लाल चावल के साथ केरल शैली का वरथु अर्चा सांभर और रसम परोसा गया। इसके अलावा मेन्यू में थोर्न एरीसेरी पापड़म दही और तीन तरह के अचार भी शामिल थे।

    क्यों बदला गया नाम
    राज्य का नाम बदलने की मांग लंबे समय से लंबित थी। मलयालम भाषा में राज्य को हमेशा से केरलम कहा जाता रहा है जबकि अंग्रेजी और हिंदी में इसे केरल के रूप में जाना जाता था। संविधान की पहली अनुसूची में बदलाव के जरिए अब इसे हर भाषा में केरलम के रूप में स्थापित किया जा रहा है। नाम बदलने की इस प्रक्रिया को सांस्कृतिक पुनरुद्धार के रूप में देखा जा रहा है। राजीव चंद्रशेखर जैसे नेताओं का मानना है कि यह कदम मलयाली गौरव को राष्ट्रीय स्तर पर एक नई पहचान देगा। अब केंद्र की मंजूरी मिलने के बाद आने वाले समय में सभी आधिकारिक संचार और महत्वपूर्ण मील के पत्थरों पर यह बदलाव नजर आएगा।

  • दुश्मन की पनडुब्बियों का शिकारी ‘अंजदीप’ नौसेना में शामिल, बढ़ी समुद्री ताकत

    दुश्मन की पनडुब्बियों का शिकारी ‘अंजदीप’ नौसेना में शामिल, बढ़ी समुद्री ताकत

    नई दिल्ली। भारतीय नौसेना की ताकत में शुक्रवार को बड़ा इजाफा हुआ जब स्वदेशी रूप से निर्मित पनडुब्बी रोधी उथले जल का युद्धपोत ‘अंजदीप’ औपचारिक रूप से बेड़े में शामिल किया गया। चेन्नई के ऐतिहासिक कोरोमंडल तट पर आयोजित समारोह में नौसेना प्रमुख दिनेश के त्रिपाठी ने इसे गौरव का क्षण बताया। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक पोत का शामिल होना नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर भारत की समुद्री शक्ति का प्रतीक है।

    ‘डॉल्फिन हंटर’ की खासियत: पनडुब्बी ढूंढे, पीछा करे और करे निष्क्रिय
    ‘अंजदीप’ को खास तौर पर दुश्मन की पनडुब्बियों का पता लगाने और उन्हें नाकाम करने के लिए डिजाइन किया गया है। इसे ‘डॉल्फिन हंटर’ की भूमिका के लिए तैयार किया गया है। इसमें अत्याधुनिक स्वदेशी पनडुब्बी रोधी हथियार और सेंसर पैकेज लगे हैं। पोत में हल माउंटेड सोनार ‘अभय’ भी लगाया गया है, जो समुद्र की गहराइयों में छिपे खतरों को पहचानने में सक्षम है। इसके अलावा यह हल्के टॉरपीडो और पनडुब्बी रोधी रॉकेटों से लैस है।

    77 मीटर लंबा यह युद्धपोत उच्च गति वाली वाटर-जेट प्रोपल्शन प्रणाली से सुसज्जित है, जो इसे 25 समुद्री मील की अधिकतम गति प्रदान करती है। तेज प्रतिक्रिया और तटीय इलाकों में फुर्तीले संचालन के लिए इसे खास तौर पर तैयार किया गया है। पनडुब्बी रोधी भूमिका के अलावा यह तटीय निगरानी, कम तीव्रता वाले समुद्री अभियान तथा खोज एवं बचाव कार्यों में भी सक्षम है।

    2026 तक 15 और पोत, 2035 तक 200+ का लक्ष्य
    नौसेना प्रमुख ने बताया कि वर्ष 2026 तक लगभग 15 और युद्धपोत शामिल किए जाने की योजना है, जो अब तक की सर्वाधिक सम्मिलन दर होगी। वर्ष 2035 तक भारतीय नौसेना को 200 से अधिक पोतों वाली ताकत बनाना लक्ष्य है। वर्तमान में 50 से अधिक पोत भारतीय शिपयार्डों में निर्माणाधीन हैं। 2047 तक पूर्णतः आत्मनिर्भर नौसैनिक शक्ति बनने का विजन रखा गया है।

    ऐतिहासिक विरासत और रणनीतिक संदेश
    ‘अंजदीप’ का नाम उस द्वीप पर रखा गया है जिसने 1961 में गोवा मुक्ति अभियान के दौरान निर्णायक भूमिका निभाई थी। यह अपने पूर्ववर्ती पेट्या श्रेणी के युद्धपोत का उत्तराधिकारी है, जिसने 1972 से 2003 तक राष्ट्र की सेवा की। उल्लेखनीय है कि दिनेश के त्रिपाठी स्वयं 1986-87 में इसी श्रेणी के पोत पर सब-लेफ्टिनेंट के रूप में तैनात रह चुके हैं।

    नौसेना प्रमुख ने हिंद महासागर क्षेत्र के महत्व को रेखांकित करते हुए बताया कि प्रतिवर्ष लगभग 1.2 लाख जहाज यहां से गुजरते हैं, जो विश्व के दो-तिहाई तेल परिवहन और आधे कंटेनर यातायात का वहन करते हैं। लाल सागर और हॉर्मुज जलडमरूमध्य में हालिया तनाव ने समुद्री मार्गों की संवेदनशीलता को उजागर किया है। अक्टूबर 2023 से लाल सागर में भारतीय नौसेना की तैनाती ने करीब 400 व्यापारी जहाजों को सुरक्षित पारगमन सुनिश्चित किया, जिनमें 16.5 मिलियन मीट्रिक टन से अधिक तेल और अन्य माल शामिल था।

  • ट्रंप ने यूक्रेन और ईरान वार्ता की कमान अपने दामाद और दोस्त के हाथों में सौंपी

    ट्रंप ने यूक्रेन और ईरान वार्ता की कमान अपने दामाद और दोस्त के हाथों में सौंपी


    वाशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने दामाद जेरेड कुश्नर और पुराने मित्र स्टीव विटकॉफ को दुनिया के दो सबसे बड़े संकटों यूक्रेन युद्ध और ईरान के तनाव को संभालने की जिम्मेदारी दी है। गुरुवार को दोनों ने स्विट्जरलैंड के जिनेवा में अलग-अलग बैठकों में इन मुद्दों पर चर्चा की।

    जिनेवा में व्यस्त कूटनीतिक दौरा
    कुश्नर और विटकॉफ ने अपने जिनेवा दौरे की शुरुआत ओमान के राजदूत के आवास से की जहां उन्होंने ईरानी अधिकारियों से मुलाकात की। इसका उद्देश्य तेहरान के परमाणु कार्यक्रम पर एक समझौते पर मुहर लगाना और अमेरिका तथा इजरायल द्वारा संभावित हमलों को रोकना था। इसके कुछ ही घंटों बाद दोनों ने इंटरकॉन्टिनेंटल होटल में यूक्रेनी अधिकारियों से बैठक की। रूसी आक्रमण अब अपने पांचवें वर्ष में है इसलिए यह वार्ता बेहद अहम मानी जा रही थी। इसके बाद फोर सीजन्स होटल में रूस और यूक्रेन के प्रतिनिधियों से अलग-अलग मंजिलों पर मुलाकात की गई। शाम तक दोनों फिर से ओमान के राजदूत के आवास लौटे और गुरुवार देर रात अमेरिका के लिए रवाना हुए।

    गाजा शांति समझौते में भूमिका

    कुश्नर और विटकॉफ की जिम्मेदारी केवल यूरोप या ईरान तक सीमित नहीं है। एक सप्ताह से भी कम समय पहले उन्होंने ‘बोर्ड ऑफ पीस’ की उद्घाटन बैठक में हिस्सा लिया था। यह संस्था गाजा पट्टी में हमास और इजरायल के बीच युद्धविराम सुनिश्चित करने के लिए बनाई गई है।

    ट्रंप की कूटनीतिक रणनीति
    ट्रंप की यह कवायद उनकी कूटनीतिक रणनीति को साफ दर्शाती है। वे अमेरिकी सरकार के पारंपरिक तंत्र पर भरोसा करने की बजाय अपनी सबसे अहम प्राथमिकताओं के लिए भरोसेमंद सहयोगियों दामाद और मित्र पर निर्भर हैं।

    विशेषज्ञों की चिंता और वाइट हाउस का बचाव

    कई विशेषज्ञों ने कहा है कि तीन बड़े और जटिल मुद्दों को केवल दो लोग संभालना चुनौतीपूर्ण है। ‘कार्नेगी एंडोमेंट फॉर इंटरनेशनल पीस’ के वरिष्ठ फेलो आरोन डेविड मिलर ने कहा कि हर वार्ता स्वयं में कई जटिल विवरणों का महासागर है। वहीं वाइट हाउस के एक अधिकारी ने इनका बचाव करते हुए कहा कि कुश्नर और विटकॉफ का सफलता का ट्रैक रिकॉर्ड और समय प्रबंधन उन्हें इन जिम्मेदारियों के लिए सक्षम बनाता है। दोनों को नियमित रूप से खुफिया ब्रीफिंग भी दी जाती है।

    व्यावसायिक हितों पर उठ रहे सवाल

    दोनों के बड़े व्यावसायिक हितों के कारण उनकी भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। जेरेड कुश्नर की निवेश फर्म ‘एफिनिटी पार्टनर्स’ अरबों डॉलर का प्रबंधन करती है जिसमें कतर के सॉवरेन वेल्थ फंड का पैसा शामिल है। स्टीव विटकॉफ की क्रिप्टो फर्म ‘वर्ल्ड लिबर्टी फाइनेंशियल’ में हिस्सेदारी है जो अबू धाबी सरकार से जुड़े फंड्स के साथ मध्य पूर्व में सौदे कर रही है। इसके अलावा विटकॉफ और रूस के वार्ताकार किरिल दिमित्रीव ने युद्ध के बाद आर्थिक समझौतों पर चर्चा की। रिपब्लिकन सीनेटर थॉम टिलिस ने कहा कि ये अच्छे व्यापारी हो सकते हैं लेकिन सीनेट की मंजूरी या सरकारी निगरानी के अधीन नहीं हैं।

    यूक्रेन का नजरिया

    यूक्रेन ने कुश्नर और विटकॉफ की भागीदारी का स्वागत किया है। मार्च की शुरुआत में रूसी अधिकारियों के साथ अगली त्रिपक्षीय चर्चा की उम्मीद है जिससे राष्ट्रपति वलोडिमिर जेलेंस्की और व्लादिमीर पुतिन की बैठक का रास्ता साफ हो सके। अमेरिका में यूक्रेन की राजदूत ओल्गा स्टेफनिशिना ने कहा कि सीधे राष्ट्रपति ट्रंप से संपर्क होने की वजह से वे दोनों उनके लिए उपयोगी हैं। हालांकि ट्रंप के पहले कार्यकाल में यूक्रेन वार्ता के विशेष दूत रहे कर्ट वोल्कर ने माना कि सीधा संपर्क सकारात्मक है लेकिन कुश्नर और विटकॉफ को इन मुद्दों की पूरी गहन समझ नहीं है।

  • डायरेक्टर अनीश के किडनैपिंग और मारपीट मामले में कन्नड़ एक्ट्रेस ऐश्वर्या समेत 11 लोग गिरफ्तार

    डायरेक्टर अनीश के किडनैपिंग और मारपीट मामले में कन्नड़ एक्ट्रेस ऐश्वर्या समेत 11 लोग गिरफ्तार

    नई दिल्ली। कन्नड़ फिल्म डायरेक्टर के साथ हुई किडनैपिंग और मारपीट की घटना में कन्नड़ एक्ट्रेस ऐश्वर्या समेत 11 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। अदुगोडी पुलिस स्टेशन में किडनैपिंग, हमला, जबरन वसूली जैसी धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था। इसी मामले में पुलिस ने यह कार्रवाई की है।
    कौन हैं अनीश
    इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, मारपीट और किडनैपिंग का शिकार हुए डायरेक्टर का नाम अनीश है और वह मॉडलिंग व कास्टिंग एजेंसी भी चलाते हैं।

    क्या हुआ अनीश के साथ
    अनीश, जीवनदा भाषा फिल्म डायरेक्ट कर रहे थे और 9 फरवरी को बेंगलुरु में थे। इसी दौरान उनसे बताया गया कि एक व्यक्ति उनकी कार को खरीदना चाहता है। इसके बाद उन्हें इस बहाने से शहर से दूर ले जाया गया। यहां पर अचानक कुछ लोगों ने उन पर हमला कर दिया और फाइनेंस मामले से जुड़ी उनकी पहले की शिकायत को वापस लेने के लिए दबाव डालने लग गए। विवाद एक फिल्म में इन्वेस्टमेंट को लेकर था।

    आरोपियों ने कथित तौर पर डायरेक्टर के सोने के गहने भी लूट लिए और कई बार हमला किया। इसके बाद एटीएम से जबरदस्ती पैसे निकलवाए गए और फिर अस्पताल में एडमिट करवाया गया।

    पुराना है मामला
    पुलिस को जांच के दौरान यह शक था कि किसी जान पहचान वाले ने ही इन्हें बुलाया था। पुलिस ने सभी 11 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। शिकायत में बताया गया है कि साल 2024 में अनीश की पहचान आशी उर्फ आशीर्वाद से हुई। आशीर्वाद ने उससे ढाई लाख रुपये उधार लिए हुए थे। जब अनीश ने अपने पैसों की डिमांड की तो उसने मना कर दिया और धमकी दी। यह मामला पुलिस थाने तक पहुंचा।

    ऐश्वर्या कैसे इन्वॉल्व हुईं
    इसी दौरान, अनीश अपनी कार को बेचना चाहते थे। ऐश्वर्या से इस बारे में जब संपर्क हुआ तो उसने एक दोस्त शाहिद को खरीदार बताते हुए उससे मिलवाया। फिर 8 फरवरी को अनीश बेंगलुरु पहुंचे और जहां वह अन्य लोगों से मिले। अनीश को बताया गया कि वह डेढ़ लाख रुपये शाहिद के भाई के घर से रिसीव कर लें। जब वह उस जगह पर पहुंचे तो घर अंदर से बंद कर लिया और फिर उन पर हमला किया गया।
  • युवराज का दांव सफल! अभिषेक ने बल्ले से दिया करारा जवाब

    युवराज का दांव सफल! अभिषेक ने बल्ले से दिया करारा जवाब

    नई दिल्ली। टी20 विश्व कप 2026 के सुपर-8 चरण में भारतीय टीम ने जिम्बाब्वे के खिलाफ दमदार जीत दर्ज की, लेकिन इस मुकाबले की सबसे बड़ी कहानी रहे युवा सलामी बल्लेबाज अभिषेक शर्मा। टूर्नामेंट में लगातार खराब फॉर्म से जूझ रहे अभिषेक ने ठीक उसी वक्त शानदार अर्धशतक जड़कर आलोचकों को जवाब दिया, जब उन पर सवाल उठने लगे थे। उनकी इस पारी के बाद पूर्व दिग्गज ऑलराउंडर और मेंटर माने जाने वाले युवराज सिंह ने खास अंदाज में उनकी हौसला अफजाई की। युवराज ने इंस्टाग्राम पर लिखा, “सबसे अच्छी बातचीत तब होती है जब आप बल्ले को ही सारी बातें करने देते हैं। अच्छी पारी, सर अभिषेक, कोशिश करते रहो।”

    खराब फॉर्म से शानदार वापसी तक का सफर
    अभिषेक के लिए यह विश्व कप अब तक आसान नहीं रहा था। ग्रुप स्टेज के तीन मुकाबलों में वह लगातार शून्य पर आउट हुए थे। सुपर-8 के पहले मैच में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ भी वह महज 15 रन ही बना सके। उनकी खराब फॉर्म के चलते टीम इंडिया को हर मैच में कमजोर शुरुआत मिल रही थी और प्लेइंग इलेवन से बाहर किए जाने की चर्चाएं तेज हो गई थीं।

    हालांकि टीम मैनेजमेंट ने धैर्य दिखाया और उन पर भरोसा कायम रखा। जिम्बाब्वे के खिलाफ मौका मिलने पर अभिषेक ने इस विश्वास को सही साबित किया। संजू सैमसन के साथ पारी की शुरुआत करते हुए उन्होंने शुरुआत में संयम बरता और फिर लय मिलते ही आक्रामक अंदाज अपनाया।

    30 गेंदों में बदली मैच की तस्वीर
    बाएं हाथ के इस बल्लेबाज ने सिर्फ 30 गेंदों में 55 रन ठोक दिए, जिसमें 4 चौके और 4 गगनचुंबी छक्के शामिल रहे। उनकी तेज पारी की बदौलत भारत ने 4 विकेट पर 256 रन का विशाल स्कोर खड़ा किया। जवाब में जिम्बाब्वे की टीम 184 रन पर सिमट गई और भारत ने 72 रन से मुकाबला अपने नाम किया।

    यह अर्धशतक सिर्फ आंकड़ा नहीं था, बल्कि आत्मविश्वास की वापसी का प्रतीक था। लंबे समय बाद अभिषेक अपने स्वाभाविक खेल में नजर आए और टीम को वह शुरुआत दिलाई, जिसकी जरूरत थी।

    वेस्टइंडीज मुकाबले से पहले राहत
    जिम्बाब्वे के खिलाफ इस प्रदर्शन से टीम इंडिया को सुपर-8 के आखिरी मुकाबले से पहले बड़ी राहत मिली है। अब सबकी नजरें इस बात पर होंगी कि क्या अभिषेक अपनी इस लय को बरकरार रख पाते हैं। युवराज की सीख साफ है-बल्ला बोलेगा, तो जवाब अपने आप मिल जाएगा।

  • बगैर SIM के नहीं चलेगा WhatsApp… 1 मार्च से लागू होगा सरकार का ये नया नियम

    बगैर SIM के नहीं चलेगा WhatsApp… 1 मार्च से लागू होगा सरकार का ये नया नियम


    नई दिल्ली।
    अगर आप वाट्सएप (WhatsApp) यूजर हैं, तो यह खबर आपके काम की है। दरअसल केंद्र सरकार ने एक बार फिर साफ कर दिया है कि SIM-Binding नियम में कोई बदलाव या ढील नहीं दी जाएगी। यह नियम WhatsApp, Telegram, Signal मैसेजिंग ऐप्स लागू होते हैं, और इसका लक्ष्य डिजिटल सुरक्षा को मजबूत बनाना है। यानी 1 मार्च से यह नियम लागू रहेगा और कंपनियों को इसे मानना ही होगा। सरकार के अनुसार, इन ऐप्स को एक्टिव SIM कार्ड से लगातार जुड़े रहना होगा, जिससे यह कन्फर्म किया जा सके कि व्हाट्सऐप उपयोग होने वाला नंबर असली और एक्टिव है। अगर SIM हटाई जाती है या इनएक्टिव होती है, तो ऐप की सेवाएं उस डिवाइस पर काम नहीं करेंगी।


    SIM-Binding क्या है?

    जिस मोबाइल नंबर से आपने WhatsApp अकाउंट बनाया है, वही SIM आपके फोन में एक्टिव रहनी चाहिए। अगर वह SIM आपके फोन में नहीं है या बंद हो गई है, तो WhatsApp ठीक से काम नहीं करेगा। अब तक मैसेजिंग ऐप्स में 6-डिजिट OTP डालकर एक बार लॉगिन होने के बाद SIM की मौजूदगी लगातार नहीं चेक होती थी। नया नियम यह बदलने वाला है अब हर समय SIM को एक्टिव और फोन में मौजूद होना जरूरी होगा। सरकार ने यह बदलाव इसलिए किया है क्योंकि वह डिजिटल धोखाधड़ी, फर्जी नंबरों का दुरुपयोग और साइबर अपराध को रोकने पर जोर दे रही है। जब हर अकाउंट एक वेरिफाइड SIM से जुड़ा होगा, तो फ्रॉड और फेक अकाउंट्स को पहचानना आसान हो जाएगा।


    1 मार्च 2026 के बाद कोई ढील नहीं

    डिपार्टमेंट ऑफ़ टेलीकम्यूनिकेशंस (DoT) ने SIM-Binding नियम को 28 नवंबर 2025 को जारी किया था और कंपनियों को इसे पूरा करने के लिए 90 दिन का समय दिया गया है। इसका मतलब है कि 1 मार्च 2026 तक सभी मैसेजिंग प्लेटफॉर्म को इस सिस्टम को लागू करना पड़ेगा। सरकार ने यह भी साफ किया है कि अलग-अलग डिवाइस पर लॉगिन किए गए Web या Desktop के लिए भी छह घंटे का ऑटो लॉग-आउट नियम भी लागू रहेगा। इसका यह मतलब है कि अगर आप कंप्यूटर या वेब पर WhatsApp चला रहे हैं, तो हर छह घंटे में आपको QR कोड से फिर से लॉगिन करना पड़ेगा।


    आम लोगों पर पड़ेगा ये असर

    अगर आपका नंबर एक्टिव है और वही SIM आपके फोन में लगी है, तो आपको ज्यादा चिंता करने की जरूरत नहीं है। आपका WhatsApp सामान्य तरीके से चलता रहेगा।लेकिन अगर आपने फोन से SIM निकाल दी या वहीं SIM दूसरे फोन में डाल दी तो आपका व्हट्सऐप टेम्पररी इनएक्टिव हो जाएगा। साथ ही आपका नंबर बंद हो गया (रिचार्ज न होने की वजह से) तो WhatsApp दोबारा वेरिफिकेशन मांग सकता है या बंद भी हो सकता है। दरअसल केंद्र सरकार का मानना है कि अगर हर अकाउंट एक एक्टिव SIM से जुड़ा होगा, तो फर्जी नंबर, स्कैम और साइबर अपराधों के खिलाफ लड़ाई और मजबूती से लड़ी जा सकती है।

  • क्वार्टर फाइनल की तरह होगा Ind vs WI मैच, बारिश में धुला तो जानिए किसे मिलेगा सेमीफाइनल का टिकट?

    क्वार्टर फाइनल की तरह होगा Ind vs WI मैच, बारिश में धुला तो जानिए किसे मिलेगा सेमीफाइनल का टिकट?


    नई दिल्ली।
    टी 20 विश्व कप 2026 (T20 World Cup 2026) में सुपर 8 के मुकाबले खेले जा रहे हैं। ग्रुप 1 के दो ही मैच बाकी हैं, जिनमें एक ही साउथ अफ्रीका वर्सेस जिम्बाब्वे (South Africa vs Zimbabwe) मैच, जबकि दूसरा है इंडिया वर्सेस वेस्टइंडीज (India vs West Indies) मैच। पहले मैच का असर सेमीफाइनल्स पर नहीं पड़ेगा, लेकिन दूसरा मैच एक तरह से वर्चुअल क्वार्टर फाइनल है। इंडिया वर्सेस वेस्टइंडीज सुपर 8 मैच में जो टीम जीत दर्ज करेगी, उसे सेमीफाइनल का टिकट मिल जाएगा। हालांकि, एक चिंता भारतीय फैंस को सता रही है कि क्या बारिश खेल बिगाड़ेगी? अगर बारिश में मैच धुला तो फिर कौन सी टीम सेमीफाइनल में जाएगी? इन्हीं सवालों का जवाब आपको इस स्टोरी में मिलने वाला है।

    इंडिया वर्सेस वेस्टइंडीज सुपर 8 का मुकाबला एक मार्च को होना है। शाम सात बजे से टूर्नामेंट का ये अहम मैच खेला जाएगा। टीम इंडिया और वेस्टइंडीज अपने दो-दो मैचों में से एक-एक मैच जीत चुकी हैं, जबकि दोनों को साउथ अफ्रीका से हार मिली है। अब सेमीफाइनल में पहुंचने के लिए नेट रन रेट को सुधारने की जरूरत न तो टीम इंडिया को है, न ही वेस्टइंडीज को, क्योंकि अब समीकरण सीधा और साफ है कि जो भी टीम इस मैच में जीतेगी, उसे सेमीफाइनल का टिकट मिल जाएगा। जीत कितनी भी बड़ी हो या फिर कितनी भी छोटी, सिर्फ जीत मायने रखेगी।

    अब दूसरा सवाल कि क्या इस मैच पर बारिश का साया है तो इसका जवाब है- नहीं। मैच के टाइम पर बीबीसी वेदर और एक्यूवेदर की रिपोर्ट पर भरोसा करें तो एक पर्सेंट भी बारिश का अनुमान नहीं है। अगर रिपोर्ट के आधार पर चलें तो मैच पूरा होगा, क्योंकि जब मैच शुरू होगा और जब मैच खत्म होने का समय होगा, तब तक बारिश होने का अनुमान है। ऐसे में फैंस को घबराने की जरूरत नहीं है।

    हालांकि, अगर कुदरत का निजाम आया और बारिश ने मैच में खलल डाला और बारिश के कारण मैच पूरा नहीं हुआ तो फिर टीम इंडिया के लिए यह अच्छा नहीं होगा। इसके पीछे की वजह है- नेट रन रेट, क्योंकि अगर बारिश के कारण इंडिया और वेस्टइंडीज को एक-एक पॉइंट मिला तो दोनों टीमों के 3-3 पॉइंट हो जाएंगे और फिर नेट रन रेट के आधार पर वेस्टइंडीज को सेमीफाइनल का टिकट मिल जाएगा, क्योंकि अभी नेट रन रेट वेस्टइंडीज का भारत से कहीं ज्यादा बेहतर है। टीम इंडिया का नेट रन रेट 2 मैचों के बाद 2 पॉइंट्स के साथ -0.100 है, जबकि वेस्टइंडीज का 2 पॉइंट्स के बाद नेट रन रेट +1.791 है।