Author: bharati

  • राजनाथ सिंह वियतनाम दौरे पर, रक्षा सहयोग को नई दिशा; भारत-वियतनाम रिश्तों में बढ़ी रणनीतिक गहराई

    राजनाथ सिंह वियतनाम दौरे पर, रक्षा सहयोग को नई दिशा; भारत-वियतनाम रिश्तों में बढ़ी रणनीतिक गहराई

    नई दिल्ली। रक्षा मंत्री Rajnath Singh के वियतनाम दौरे ने भारत-वियतनाम संबंधों को एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में ला दिया है। दोनों देशों ने रक्षा सहयोग, समुद्री सुरक्षा और इंडो-पैसिफिक स्थिरता पर अपनी रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई है।
    हनोई/नई दिल्ली। भारत और वियतनाम के बीच रणनीतिक संबंधों को नई मजबूती देने के उद्देश्य से रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अपने वियतनाम दौरे के दौरान वहां के शीर्ष नेतृत्व से अहम बातचीत की। इस बैठक में रक्षा सहयोग, सुरक्षा साझेदारी और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। दोनों देशों ने इस बात पर सहमति जताई कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति और संतुलन बनाए रखने में भारत और वियतनाम की साझेदारी बेहद अहम भूमिका निभा सकती है।

    राजनाथ सिंह ने इस दौरान भारत की ओर से वियतनाम के साथ रक्षा सहयोग को और गहरा करने की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच साझेदारी केवल रक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आपसी विश्वास, तकनीकी सहयोग और सामरिक समझ पर आधारित एक व्यापक संबंध है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से भी शुभकामनाएं वियतनाम नेतृत्व को दीं।

    इसी बीच भारत के ऐतिहासिक विदेश नीति दृष्टिकोण की चर्चा भी एक बार फिर सामने आई है। कहा जाता है कि भारत के पहले प्रधानमंत्री Jawaharlal Nehru ने 1960 के दशक में अमेरिका के वियतनाम युद्ध में गहराई से शामिल होने पर सावधानी बरतने की सलाह दी थी। हालांकि ऐतिहासिक दस्तावेजों में उनके विचार सीधे और औपचारिक रूप में स्पष्ट रूप से दर्ज नहीं हैं, लेकिन कई समकालीन लेखों और स्मृतियों में उनके इस रुख का उल्लेख मिलता है कि वियतनाम में सैन्य हस्तक्षेप से बचना चाहिए।

    आगे चलकर वियतनाम युद्ध ने वैश्विक राजनीति पर गहरा असर डाला, जिसमें भारी जनहानि और लंबे संघर्ष के बाद अंततः अमेरिका को पीछे हटना पड़ा। युद्ध के बाद वियतनाम एकीकृत राष्ट्र के रूप में उभरा।

    भारत और वियतनाम के संबंध केवल रणनीतिक ही नहीं बल्कि ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रूप से भी गहरे हैं। 1959 में तत्कालीन राष्ट्रपति Rajendra Prasad ने हो ची मिन्ह को बोधि वृक्ष भेंट किया था, जो आज भी दोनों देशों की मित्रता का प्रतीक माना जाता है। यह प्रतीक समय-समय पर भारत-वियतनाम रिश्तों की मजबूती को दर्शाता रहा है।

  • पाकिस्तान का नया दावा फिर बेनकाब: “फतह-1 से उड़ाए भारत के एयरबेस”, जिनका अस्तित्व ही नहीं!

    पाकिस्तान का नया दावा फिर बेनकाब: “फतह-1 से उड़ाए भारत के एयरबेस”, जिनका अस्तित्व ही नहीं!



    नई दिल्ली। पाकिस्तान की सेना एक बार फिर अपने दावों को लेकर सवालों के घेरे में आ गई है। हाल ही में पाकिस्तानी सेना के एक अधिकारी ने दावा किया कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान उनकी फतह-1 मिसाइलों ने भारत के दो सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया था, लेकिन जिन एयरबेसों का नाम लिया गया, वे वास्तव में अस्तित्व में ही नहीं हैं।

    पाकिस्तानी अधिकारी कैप्टन मुनीब जमाल ने एक इंटरव्यू में दावा किया कि फतह-1 मिसाइलों ने “राजौरी एयरबेस” और “मामून एयरबेस” को सफलतापूर्वक तबाह कर दिया। हालांकि हकीकत यह है कि राजौरी में कोई वायुसेना एयरबेस मौजूद नहीं है और मामून केवल पठानकोट के पास एक सैन्य कैंटोनमेंट क्षेत्र है, न कि कोई एयरबेस।

    भारत-पाकिस्तान के बीच “ऑपरेशन सिंदूर” को लेकर पहले से ही तनाव और दावे-प्रतिदावे जारी हैं। इसी बीच पाकिस्तान का यह नया बयान एक बार फिर उसके दावों की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर रहा है। भारत की ओर से पहले भी कई बार ऐसे हमलों को नाकाम किए जाने की पुष्टि की जा चुकी है।

    सोशल मीडिया पर भी पाकिस्तानी दावे को लेकर जमकर मजाक उड़ाया जा रहा है, जहां यूजर्स “काल्पनिक एयरबेस” का उल्लेख कर इस बयान को हास्यास्पद बता रहे हैं।

  • असीम मुनीर का भारत पर बिना नाम हमला, बोले- आतंकवाद, दुष्प्रचार और बाहरी ताकतें पाकिस्तान की तरक्की नहीं रोक सकतीं

    असीम मुनीर का भारत पर बिना नाम हमला, बोले- आतंकवाद, दुष्प्रचार और बाहरी ताकतें पाकिस्तान की तरक्की नहीं रोक सकतीं


    नई दिल्ली। पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर ने बलूचिस्तान की धरती से एक बार फिर भारत का नाम लिए बिना कड़ा बयान दिया है। अपने संबोधन में उन्होंने बाहरी ताकतों पर पाकिस्तान में आतंकवाद फैलाने और दुष्प्रचार चलाने का आरोप लगाया और कहा कि ऐसी कोशिशें देश की तरक्की और स्थिरता को रोक नहीं सकतीं।

    मुनीर ने कमांड एंड स्टाफ कॉलेज, क्वेटा में अधिकारियों और सैनिकों को संबोधित करते हुए कहा कि पाकिस्तान का “निश्चित उदय” किसी भी प्रकार के प्रॉक्सी वॉर, गलत सूचना अभियान या आतंकवाद से प्रभावित नहीं होगा। उन्होंने दावा किया कि पाकिस्तानी सेना और जनता मिलकर देश से आतंकवाद का पूरी तरह सफाया करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

    अपने भाषण में उन्होंने बलूचिस्तान में तैनात सैन्य अधिकारियों की ट्रेनिंग और पेशेवर क्षमता की भी सराहना की। मुनीर ने कहा कि आधुनिक युद्ध तेजी से बदल रहा है और ऐसे में सेना को मल्टी-डोमेन ऑपरेशन, नई तकनीक और तीनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल पर लगातार काम करना होगा।

    उन्होंने जवानों को संबोधित करते हुए कहा कि बदलते सुरक्षा हालात में निरंतर प्रशिक्षण और उच्च स्तर की परिचालन तैयारी बेहद जरूरी है, ताकि किसी भी चुनौती का प्रभावी जवाब दिया जा सके।

    मुनीर ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ “शत्रु ताकतें” पाकिस्तान के खिलाफ फर्जी खबरों और दुष्प्रचार के जरिए देश को अस्थिर करने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन सेना और जनता की एकता के आगे ये प्रयास सफल नहीं होंगे।

    बलूचिस्तान में स्थायी शांति और विकास पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि क्षेत्र की प्रगति सुरक्षा, समावेशी विकास और बेहतर शासन पर निर्भर करती है।

  • UIDAI का बड़ा फैसला: अब आधार अपडेट कराने पर नहीं लगेगा कोई शुल्क, बढ़ी अंतिम तारीख

    UIDAI का बड़ा फैसला: अब आधार अपडेट कराने पर नहीं लगेगा कोई शुल्क, बढ़ी अंतिम तारीख

    नई दिल्ली । देशभर के करोड़ों आधार धारकों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण ने आधार से जुड़े दस्तावेजों को ऑनलाइन अपडेट करने की मुफ्त सुविधा की समय सीमा को बढ़ा दिया है। अब लोग जून 2027 तक बिना किसी शुल्क के अपने आधार में नाम, पता और अन्य जरूरी दस्तावेज ऑनलाइन अपडेट कर सकेंगे। इस फैसले के बाद उन लोगों को विशेष राहत मिलेगी जो आधार केंद्रों पर लंबी कतारों और अतिरिक्त शुल्क से बचना चाहते हैं।

    प्राधिकरण के अनुसार, लोगों की बढ़ती डिजिटल भागीदारी और ऑनलाइन अपडेट सेवा को मिल रही सकारात्मक प्रतिक्रिया को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है। बड़ी संख्या में लोग अब डिजिटल माध्यम से अपने पहचान और पते से जुड़े दस्तावेज अपडेट कर रहे हैं, जिससे प्रक्रिया पहले के मुकाबले अधिक आसान और तेज हो गई है। यही कारण है कि इस सुविधा को आगे भी जारी रखने का फैसला लिया गया ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इसका लाभ उठा सकें।

    यह सुविधा खास तौर पर उन लोगों के लिए फायदेमंद मानी जा रही है जिनके आधार में पुराना पता, गलत नाम या अन्य जानकारियां दर्ज हैं। ऑनलाइन प्रक्रिया के जरिए अब उपयोगकर्ता घर बैठे दस्तावेज अपलोड कर अपने विवरण अपडेट कर सकते हैं। इसके लिए केवल आधार नंबर और ओटीपी आधारित सत्यापन की जरूरत होती है। इसके बाद पहचान और पते से जुड़े आवश्यक दस्तावेजों की स्कैन कॉपी अपलोड करके आवेदन जमा किया जा सकता है।

    आधार केंद्रों पर दस्तावेज अपडेट कराने के लिए आमतौर पर शुल्क देना पड़ता है, लेकिन ऑनलाइन सेवा के तहत यह प्रक्रिया पूरी तरह मुफ्त रखी गई है। इससे डिजिटल सेवाओं को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ लोगों का समय और पैसा दोनों बच रहे हैं। माना जा रहा है कि आने वाले समय में और अधिक लोग इस सुविधा का इस्तेमाल करेंगे, जिससे आधार रिकॉर्ड अधिक सटीक और अपडेटेड बनाए रखने में मदद मिलेगी।

    विशेषज्ञों का मानना है कि आधार अब केवल पहचान पत्र तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि बैंकिंग, सरकारी योजनाओं, मोबाइल सेवाओं और कई जरूरी कामों में इसकी अहम भूमिका है। ऐसे में आधार की जानकारी सही और अपडेटेड होना बेहद जरूरी हो गया है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए ऑनलाइन अपडेट प्रक्रिया को लगातार सरल और सुलभ बनाया जा रहा है।

    इस फैसले के बाद लोगों के लिए यह अच्छा अवसर माना जा रहा है कि वे समय रहते अपने आधार की जानकारी को अपडेट कर लें। डिजिटल माध्यम से होने वाली यह प्रक्रिया न केवल सुविधाजनक है, बल्कि इससे सरकारी सेवाओं तक पहुंच भी अधिक आसान और पारदर्शी बन रही है।

  • 20 मई को देशभर में दवा दुकानों की हड़ताल, ई-फार्मेसी नियमों के खिलाफ केमिस्टों का बड़ा विरोध

    20 मई को देशभर में दवा दुकानों की हड़ताल, ई-फार्मेसी नियमों के खिलाफ केमिस्टों का बड़ा विरोध


    नई दिल्ली ।
    देशभर में 20 मई को दवा दुकानों की हड़ताल होने जा रही है, जिसके चलते कई राज्यों में दवाओं की उपलब्धता प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स द्वारा घोषित इस राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शन का मुख्य कारण ई-फार्मेसी और इंस्टेंट मेडिसिन डिलीवरी प्लेटफॉर्म से जुड़ा विवाद बताया जा रहा है। संगठन का कहना है कि ऑनलाइन दवा बिक्री से जुड़े मौजूदा नियम स्पष्ट नहीं हैं और इसी का फायदा उठाकर कई प्लेटफॉर्म बिना पर्याप्त निगरानी के काम कर रहे हैं।

    केमिस्ट संगठनों का आरोप है that ऑनलाइन फार्मेसी कंपनियां प्रिस्क्रिप्शन की सही जांच के बिना दवाएं उपलब्ध करा रही हैं, जिससे मरीजों की सुरक्षा को खतरा पैदा हो सकता है। उनका कहना है कि कई मामलों में बिना उचित सत्यापन के दवाओं की बिक्री हो रही है और इससे दवा वितरण प्रणाली की विश्वसनीयता प्रभावित हो रही है।

    इस विरोध का केंद्र दो प्रमुख नोटिफिकेशन GSR 220(E) और GSR 817(E) हैं, जिन्हें लेकर संगठन लगातार सरकार से पुनर्विचार की मांग कर रहा है। केमिस्ट संगठनों के अनुसार, इन प्रावधानों ने ऑनलाइन फार्मेसी कंपनियों को एक ऐसे कानूनी ढांचे में काम करने की अनुमति दी है, जहां स्पष्ट जवाबदेही और निगरानी व्यवस्था का अभाव है।

    संगठन का कहना है कि GSR 817(E) कई वर्षों पहले एक मसौदा नियम के रूप में सामने आया था, जिसमें ई-फार्मेसी संचालन के लिए पंजीकरण, प्रिस्क्रिप्शन सत्यापन और दवा वितरण से जुड़े दिशा-निर्देश प्रस्तावित किए गए थे। हालांकि इसे पूरी तरह लागू नहीं किया गया और न ही औपचारिक रूप से वापस लिया गया। इसी वजह से ऑनलाइन फार्मेसी क्षेत्र में अब तक स्पष्ट कानूनी स्थिति नहीं बन पाई है।

    दूसरी ओर GSR 220(E) को महामारी के दौरान आपातकालीन व्यवस्था के रूप में लागू किया गया था ताकि दवाओं की होम डिलीवरी संभव हो सके। लेकिन अब पारंपरिक केमिस्ट संगठनों का आरोप है कि कई ऑनलाइन कंपनियां इसी व्यवस्था का इस्तेमाल स्थायी मॉडल की तरह कर रही हैं, जबकि इसके लिए अलग और स्पष्ट नियामक ढांचा मौजूद नहीं है।

    केमिस्ट संगठनों ने यह भी कहा है कि बड़ी ई-फार्मेसी कंपनियां भारी छूट और आक्रामक मूल्य निर्धारण के जरिए बाजार में असमान प्रतिस्पर्धा पैदा कर रही हैं। उनका तर्क है कि छोटे और पारंपरिक मेडिकल स्टोर इतने बड़े डिस्काउंट देने की स्थिति में नहीं होते, जिससे उनका कारोबार प्रभावित हो रहा है।

    हालांकि स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि ऑनलाइन फार्मेसी आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं का हिस्सा बन चुकी हैं और उन्हें पूरी तरह रोकने के बजाय मजबूत नियमन की आवश्यकता है। उनका कहना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म मरीजों तक दवाएं जल्दी पहुंचाने में मददगार हो सकते हैं, लेकिन इसके लिए सुरक्षा और सत्यापन के सख्त नियम जरूरी हैं।

    फिलहाल हड़ताल को लेकर कई राज्यों में तैयारियां शुरू हो चुकी हैं और यदि इसमें व्यापक भागीदारी होती है तो एक दिन के लिए दवाओं की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। ऐसे में नियमित दवाएं लेने वाले मरीजों को पहले से आवश्यक दवाएं खरीद लेने की सलाह दी जा रही है।

  • ममता हुई शर्मसार: दूसरी शादी में बेटी बनी रुकावट तो मां ने रची खौफनाक साजिश

    ममता हुई शर्मसार: दूसरी शादी में बेटी बनी रुकावट तो मां ने रची खौफनाक साजिश

    नई दिल्ली /Telangana के मेडचल-मलकाजगिरि जिले से सामने आई एक दर्दनाक घटना ने लोगों को झकझोर कर रख दिया है। यहां एक मां पर अपनी ही छह साल की बेटी की हत्या करने का आरोप लगा है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि महिला ने दूसरी शादी में आ रही बाधा को हटाने के लिए इस खौफनाक वारदात को अंजाम दिया। घटना के बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई और लोग इस अमानवीय कृत्य को लेकर स्तब्ध हैं।

    पुलिस के अनुसार आरोपी महिला अपनी बेटी के साथ अलग रह रही थी। उसकी पहली शादी टूट चुकी थी और बाद में वह एक अन्य व्यक्ति के संपर्क में आई। दोनों ने शादी करने का फैसला किया, लेकिन बच्ची की मौजूदगी को लेकर कथित तौर पर नए रिश्ते में परेशानी पैदा हो रही थी। बताया जा रहा है कि इसी वजह से महिला ने अपनी बेटी को रास्ते से हटाने की साजिश रची।

    जांच में सामने आया कि महिला ने रात के समय अपनी मासूम बेटी को पानी की प्लास्टिक टंकी में डुबो दिया। घटना के बाद बच्ची की मौत हो गई। मामले की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। शुरुआती पूछताछ और परिस्थितियों के आधार पर महिला को हिरासत में लिया गया, जिसके बाद उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।

    स्थानीय लोगों के मुताबिक यह घटना बेहद चौंकाने वाली है क्योंकि मां और बेटी लंबे समय से साथ रह रहे थे। आसपास के लोगों को कभी इस बात का अंदाजा नहीं था कि मामला इतना भयावह मोड़ ले सकता है। घटना के बाद इलाके में दुख और गुस्से का माहौल बना हुआ है।

    पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है। महिला के निजी संबंधों, पारिवारिक विवाद और अन्य परिस्थितियों को भी जांच में शामिल किया गया है। साथ ही यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि क्या इस घटना में किसी और की भी भूमिका थी।

    यह मामला एक बार फिर समाज में बढ़ते पारिवारिक तनाव और रिश्तों में पैदा हो रही जटिलताओं को उजागर करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि पारिवारिक विवाद और व्यक्तिगत फैसलों का असर कई बार मासूम बच्चों पर सबसे ज्यादा पड़ता है। इस तरह की घटनाएं समाज के लिए गंभीर चिंता का विषय बनती जा रही हैं।

    फिलहाल पुलिस मामले की विस्तृत जांच में जुटी हुई है और बच्ची की मौत से जुड़े सभी तथ्यों को खंगाला जा रहा है। इस दर्दनाक घटना ने लोगों को भावनात्मक रूप से झकझोर दिया है और हर कोई यही सवाल पूछ रहा है कि आखिर एक मां अपनी ही बेटी के साथ इतनी क्रूरता कैसे कर सकती है।

  • हैदराबाद में शर्मनाक वारदात: चाय के बहाने कार में घुमाया, फिर क्लासमेट को जबरन शराब पिलाकर बीटेक छात्र ने किया दुष्कर्म, आरोपी सलाखों के पीछे

    हैदराबाद में शर्मनाक वारदात: चाय के बहाने कार में घुमाया, फिर क्लासमेट को जबरन शराब पिलाकर बीटेक छात्र ने किया दुष्कर्म, आरोपी सलाखों के पीछे

    नई दिल्ली /हैदराबाद: महानगर के शैक्षणिक हलकों को झकझोर देने वाली एक बेहद संवेदनशील और गंभीर घटना में पुलिस ने एक तकनीकी संस्थान के छात्र को अपनी ही सहपाठी के साथ कथित तौर पर दुष्कर्म करने के आरोप में गिरफ्तार किया है। पीड़ित युवती और आरोपी दोनों ही क्षेत्र के एक प्रतिष्ठित कॉलेज से बीटेक की पढ़ाई कर रहे हैं और एक ही कक्षा में होने के कारण दोनों के बीच सामान्य जान-पहचान थी। इसी परिचय का फायदा उठाकर आरोपी ने इस घिनौनी वारदात को अंजाम दिया। पुलिस प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए त्वरित कार्रवाई की और पीड़िता को न्याय दिलाने के लिए कानूनी प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाया है।

    घटनाक्रम के अनुसार, यह पूरी वारदात बीते सप्ताह की रात को घटित हुई थी। आरोपी छात्र पीड़िता को उसके घर के पास से महज चाय पीने और साथ घूमने के बहाने अपनी कार में बिठाकर ले गया था। वह काफी देर तक युवती को कार में इधर-उधर घुमाता रहा, जिससे पीड़िता को उसकी वास्तविक और दुर्भावनापूर्ण मंशा का जरा भी अंदाजा नहीं हुआ। वापसी के दौरान आरोपी ने बीच रास्ते में गाड़ी रोककर शराब खरीदी। इसके बाद उसने कार के भीतर ही खुद भी शराब का सेवन किया और युवती को भी जबरन अत्यधिक मात्रा में शराब पीने पर मजबूर कर दिया। युवती के विरोध को दरकिनार करते हुए उसे पूरी तरह नशे की हालत में ला दिया गया।

    जब पीड़िता अत्यधिक नशे के कारण खुद को संभालने की स्थिति में नहीं रही, तब आरोपी उसे इब्राहिमपटनम इलाके में स्थित एक सुनसान कमरे पर लेकर गया। वहां उसने युवती की बेबसी का फायदा उठाते हुए उसके साथ जबरन दुष्कर्म की वारदात को अंजाम दिया। होश में आने और घटना की भयावहता को समझने के बाद, बीस वर्षीय पीड़िता ने हिम्मत दिखाई और सीधे स्थानीय पुलिस थाने पहुंचकर अपने साथ हुई इस बर्बरता की लिखित शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने पीड़िता की मानसिक और शारीरिक स्थिति को समझते हुए तुरंत उसकी शिकायत के आधार पर संबंधित कानूनी धाराओं के तहत मामला पंजीकृत कर लिया।

    मामला दर्ज होते ही स्थानीय पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया और वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर एक विशेष टीम का गठन कर आरोपी की तलाश शुरू कर दी गई। पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए आरोपी छात्र को चौबीस घंटे के भीतर धर दबोचा। शुरुआती पूछताछ और प्राथमिक जांच के बाद आरोपी को स्थानीय अदालत के समक्ष पेश किया गया, जहां से विद्वान न्यायाधीश ने उसे न्यायिक हिरासत के तहत जेल भेजने का आदेश जारी कर दिया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि कानून के तहत सख्त से सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है और मामले से जुड़े तमाम वैज्ञानिक व परिस्थितिजन्य साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं ताकि आरोपी को कड़ी सजा मिल सके।

  • ब्रिटिश कपल ने भारत के स्ट्रीट फूड को लेकर तोड़ा मिथक, बोले- डराया गया था लेकिन अनुभव शानदार रहा

    ब्रिटिश कपल ने भारत के स्ट्रीट फूड को लेकर तोड़ा मिथक, बोले- डराया गया था लेकिन अनुभव शानदार रहा




    नई दिल्ली। इंडियन स्ट्रीट फूड को लेकर फैली नकारात्मक धारणाओं पर ब्रिटेन के ट्रैवल कपल Hazel Lindsey और Martin Bailey ने बड़ा बयान दिया है। कपल का कहना है कि भारत आने से पहले उन्हें लगातार चेतावनियां दी गई थीं कि सड़क किनारे खाना खाने से बीमार पड़ सकते हैं, लेकिन उनका अनुभव इसके बिल्कुल उलट रहा।

    कपल ने बताया कि उन्होंने दिल्ली से लेकर केरल तक अलग-अलग जगहों पर स्ट्रीट फूड का स्वाद लिया और हर जगह उन्हें बेहतरीन अनुभव मिला। उनके मुताबिक, भारतीय स्ट्रीट फूड ही देश की असली संस्कृति और “सोल” को दिखाता है, जिसे किसी फाइव स्टार होटल में महसूस नहीं किया जा सकता।

    Hazel Lindsey ने कहा कि शुरुआत में मसालेदार खाना थोड़ा चुनौतीपूर्ण जरूर था, लेकिन बाद में उन्होंने इसका पूरा आनंद लिया। कपल ने यह भी बताया कि पूरे ट्रिप के दौरान उन्हें किसी तरह की बड़ी स्वास्थ्य समस्या का सामना नहीं करना पड़ा।

    वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने भी भारत के स्ट्रीट फूड की तारीफ की और इसे दुनिया के बेहतरीन फूड कल्चर में से एक बताया।

  • नवी मुंबई एयरपोर्ट नाम विवाद पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, CJI बोले- विरोध करें लेकिन आम लोगों को परेशानी न हो

    नवी मुंबई एयरपोर्ट नाम विवाद पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, CJI बोले- विरोध करें लेकिन आम लोगों को परेशानी न हो

    नई दिल्ली । नवी मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट के नामकरण को लेकर चल रहा विवाद अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया, जहां मंगलवार को इस मामले पर अहम सुनवाई हुई। अदालत ने एयरपोर्ट का नाम बदलने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करने से इनकार करते हुए साफ कहा कि यह नीति निर्माण से जुड़ा विषय है और इसमें न्यायपालिका हस्तक्षेप नहीं कर सकती। सुनवाई के दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने विरोध प्रदर्शनों को लेकर भी महत्वपूर्ण टिप्पणी की, जो अब राजनीतिक और सामाजिक चर्चा का विषय बन गई है।

    मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि लोकतंत्र में हर नागरिक को शांतिपूर्ण तरीके से विरोध करने का अधिकार है, लेकिन किसी भी प्रदर्शन के कारण आम लोगों के जीवन में बाधा नहीं आनी चाहिए। उन्होंने विशेष रूप से युवाओं से अपील करते हुए कहा कि विरोध दर्ज कराने के नाम पर सड़कें जाम करना, कानून व्यवस्था प्रभावित करना या लोगों के लिए परेशानी खड़ी करना उचित नहीं है। अदालत की यह टिप्पणी उस समय आई जब एयरपोर्ट के नामकरण को लेकर लगातार विरोध प्रदर्शन किए जा रहे हैं।

    यह मामला नवी मुंबई एयरपोर्ट का नाम बदलकर एक क्षेत्रीय नेता के नाम पर रखने की मांग से जुड़ा था। याचिकाकर्ता ने केंद्र सरकार से राज्य सरकार के प्रस्ताव पर जल्द निर्णय लेने की मांग की थी। हालांकि सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय पीठ ने स्पष्ट किया कि नामकरण जैसे फैसले सरकार के अधिकार क्षेत्र में आते हैं और अदालत ऐसे मामलों में हस्तक्षेप नहीं कर सकती।

    सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने यह भी कहा कि विरोध करने वाले लोगों को कानून के दायरे में रहकर अपनी बात रखनी चाहिए। उन्होंने इस बात पर चिंता जताई कि कुछ प्रदर्शन अब आम जनता के लिए परेशानी का कारण बनने लगे हैं। अदालत ने कहा कि लोकतांत्रिक अधिकारों का सम्मान जरूरी है, लेकिन उसके साथ जिम्मेदारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।

    इसी बीच मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत हाल के कुछ बयानों को लेकर भी चर्चा में रहे। उन्होंने हाल ही में स्पष्ट किया था कि उनके कुछ पुराने बयान संदर्भ से हटाकर प्रस्तुत किए गए थे। उनका कहना था कि उनका उद्देश्य किसी वर्ग या युवाओं का अपमान करना नहीं था, बल्कि उन लोगों की ओर ध्यान दिलाना था जो गलत तरीकों से विभिन्न पेशों में प्रवेश करने की कोशिश करते हैं।

    नवी मुंबई एयरपोर्ट विवाद पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी ने यह साफ कर दिया है कि अदालत नीति निर्माण के मामलों में सीमित दखल ही देती है। साथ ही अदालत ने यह भी संदेश दिया कि विरोध लोकतंत्र का अहम हिस्सा है, लेकिन उसका तरीका ऐसा होना चाहिए जिससे आम नागरिकों को कठिनाई का सामना न करना पड़े।

  • जिला अस्पताल पर उठे सवाल: मासूम की मौत के बाद परिजनों का हंगामा

    जिला अस्पताल पर उठे सवाल: मासूम की मौत के बाद परिजनों का हंगामा

    मध्य प्रदेश।  अशोकनगर  जिले के महुअन गांव में एक दर्दनाक हादसे ने पूरे गांव को गमगीन कर दिया। पलंग से गिरकर घायल हुए छह माह के मासूम आदर्श चंदेल की मंगलवार सुबह इलाज के दौरान मौत हो गई। मासूम की मौत के बाद जिला अस्पताल परिसर में चीख-पुकार मच गई और परिजनों ने डॉक्टरों पर इलाज में लापरवाही बरतने के गंभीर आरोप लगाए।

    जानकारी के मुताबिक, महुअन गांव निवासी विकास चंदेल का छह माह का बेटा आदर्श रविवार शाम घर में पलंग पर खेल रहा था। उसी दौरान उसकी मां रवि चंदेल घर से बाहर पानी भरने चली गई थीं। घर लौटने पर उन्होंने देखा कि मासूम पलंग से नीचे फर्श पर गिरा पड़ा है। बच्चे के सिर और शरीर में गंभीर चोटें आई थीं। परिवार के लोग तुरंत उसे इलाज के लिए ईसागढ़ के एक निजी क्लिनिक लेकर पहुंचे, जहां प्राथमिक उपचार किया गया।

    परिजनों का कहना है कि सोमवार शाम तक बच्चे की हालत में कोई सुधार नहीं हुआ, बल्कि उसकी तबीयत लगातार बिगड़ती गई। इसके बाद उसे तत्काल जिला अस्पताल रेफर किया गया। अस्पताल में भर्ती कराने के बाद परिवार को उम्मीद थी कि मासूम की हालत में सुधार होगा, लेकिन मंगलवार सुबह इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया।

    बच्चे की मौत के बाद अस्पताल परिसर में मातम का माहौल बन गया। परिजनों ने आरोप लगाया कि डॉक्टरों ने समय पर सही उपचार नहीं किया और बार-बार पूछने के बावजूद बच्चे की हालत के बारे में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई। परिवार का कहना है कि यदि समय रहते बेहतर इलाज मिलता, तो शायद मासूम की जान बचाई जा सकती थी।

    मासूम आदर्श की मौत के बाद पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराकर परिजनों को सौंप दिया। घटना के बाद गांव में भी शोक की लहर फैल गई। पड़ोसियों और रिश्तेदारों का कहना है कि परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।

    यह हादसा एक बार फिर छोटे बच्चों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि छोटे बच्चों को कभी भी पलंग या ऊंची जगह पर अकेला नहीं छोड़ना चाहिए, क्योंकि थोड़ी सी लापरवाही भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है।

    फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। वहीं, परिजन जिला अस्पताल के डॉक्टरों की भूमिका की जांच कर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।