Author: bharati

  • शिवपुरी में देर रात हमला: भैंस चुराने आए आरोपियों ने सरपंच को बनाया निशाना

    शिवपुरी में देर रात हमला: भैंस चुराने आए आरोपियों ने सरपंच को बनाया निशाना


    शिवपुरी। जिले के नरवर थाना क्षेत्र में सोमवार देर रात भैंस चोरी रोकने की कोशिश करना चार लोगों को भारी पड़ गया। हथियारबंद बदमाशों ने ग्राम बीलौनी के सरपंच सहित चार लोगों पर हमला कर बेरहमी से मारपीट की और मोबाइल, सोने की चेन व अंगूठी लूटकर फरार हो गए। घटना के बाद इलाके में दहशत का माहौल है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

    जानकारी के अनुसार, ग्राम बीलौनी के सरपंच बालकिशन जाटव अपने साथियों मुकेश जाटव, राजकुमार जाटव और कार चालक जगभान बघेल के साथ सोमवार रात एक शादी समारोह से लौट रहे थे। रात करीब 1 बजे जब उनकी कार नरवर गैस गोदाम के पास पहुंची, तब उन्होंने कुछ संदिग्ध लोगों को भैंसों को एक लोडिंग वाहन में चढ़ाते देखा। शक होने पर उन्होंने वाहन रोककर पूछताछ की।

    सरपंच बालकिशन जाटव के मुताबिक, जब उन्होंने भैंसों के बारे में सवाल किया तो वहां मौजूद लोगों ने गाली-गलौज शुरू कर दी। इसी दौरान चालक जगभान बघेल ने भैंस चोरी की आशंका जताई। आरोप है कि यह सुनते ही एक बदमाश ने अपने साथियों से कहा, “पकड़ लो और गोली मार दो।” इसके बाद करीब 10 हथियारबंद बदमाशों ने चारों को घेर लिया।

    पीड़ितों का कहना है कि बदमाशों के पास लाठी, डंडे, सरिए और अवैध कट्टे थे। उन्होंने चारों लोगों के साथ जमकर मारपीट की। हमले में सरपंच बालकिशन जाटव की पीठ में गंभीर चोट आई, जबकि मुकेश जाटव की आंख, हाथ, पीठ और जांघ में चोटें आई हैं। राजकुमार जाटव और जगभान बघेल को भी शरीर के कई हिस्सों में चोट लगी। घटना के बाद सभी घायलों को नरवर अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज किया गया।

    मारपीट के दौरान बदमाशों ने चारों लोगों के मोबाइल फोन, सोने की चेन और अंगूठी भी छीन ली। हालांकि हंगामा बढ़ता देख आरोपी भैंसों को मौके पर छोड़कर वाहन सहित फरार हो गए। पुलिस अब फरार आरोपियों की तलाश में जुटी हुई है।

    इधर, धवा की बावड़ी क्षेत्र निवासी जवाहर रावत की 9 भैंसें चोरी होने का मामला भी सामने आया है। बताया जा रहा है कि भैंस चोरी की यह पूरी वारदात आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों में कैद हुई है। फुटेज में कुछ संदिग्ध लोग भैंसों को वाहन में ले जाते दिखाई दे रहे हैं। पुलिस सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आरोपियों की पहचान करने में जुटी है।

    पुलिस का कहना है कि घटना गंभीर है और सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए जांच की जा रही है। इलाके में लगातार बढ़ रही पशु चोरी की घटनाओं से ग्रामीणों में भी नाराजगी है। ग्रामीणों ने पुलिस गश्त बढ़ाने और आरोपियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।

  • औरत ही औरत की दुश्मन टिप्पणी से गरमाया विवाद, ट्विशा शर्मा केस में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप

    औरत ही औरत की दुश्मन टिप्पणी से गरमाया विवाद, ट्विशा शर्मा केस में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप

    भोपाल से जुड़े मॉडल ट्विशा शर्मा मौत मामले ने अब एक नया राजनीतिक और सामाजिक मोड़ ले लिया है, जहां इस संवेदनशील प्रकरण पर बयानबाजी तेज हो गई है। मामले को लेकर सार्वजनिक मंचों पर उठी टिप्पणियों ने विवाद को और गहरा कर दिया है और विभिन्न पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है।

    इस पूरे मामले में सबसे ताजा प्रतिक्रिया शिवसेना (यूबीटी) की सांसद Priyanka Chaturvedi की ओर से आई है, जिन्होंने ट्विशा शर्मा की सास और रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह के बयान पर कड़ी आपत्ति जताई है। प्रियंका चतुर्वेदी ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यदि “औरत ही औरत की दुश्मन होती है” का कोई चेहरा होता, तो वह इस मामले में सामने आए बयान से जुड़ा हो सकता है। उनके इस बयान ने राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है।

    यह विवाद तब और बढ़ गया जब गिरिबाला सिंह द्वारा मीडिया से बातचीत में दिए गए बयान सार्वजनिक हुए। उन्होंने दावा किया कि ट्विशा शर्मा गर्भावस्था से जुड़ी स्थिति के कारण मानसिक तनाव में थीं और मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी की प्रक्रिया शुरू करने के बाद वह अपने फैसले को लेकर असमंजस में थीं। उन्होंने यह भी कहा कि परिवार ने स्थिति को संभालने की कोशिश की थी, लेकिन परिस्थितियां जटिल थीं। उनके इन बयानों के बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं।

    प्रियंका चतुर्वेदी ने इन टिप्पणियों पर आपत्ति जताते हुए कहा कि किसी ऐसे व्यक्ति के बारे में सार्वजनिक रूप से बयान देना, जो अब इस दुनिया में नहीं है, उचित नहीं माना जा सकता। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि ऐसे मामलों में संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के साथ बयान दिए जाने चाहिए, ताकि पीड़ित पक्ष की छवि पर अनावश्यक प्रभाव न पड़े। उनके अनुसार, एक पूर्व न्यायिक पद पर रह चुकी व्यक्ति से अधिक संतुलित बयान की अपेक्षा की जाती है।

    इस बीच मामले को लेकर विभिन्न स्तरों पर चर्चा तेज हो गई है, और लोग इस बात पर भी बहस कर रहे हैं कि व्यक्तिगत मामलों को सार्वजनिक मंचों पर किस हद तक लाया जाना चाहिए। यह घटना न केवल एक कानूनी और पारिवारिक विवाद बन गई है, बल्कि अब सामाजिक संवेदनशीलता और सार्वजनिक संवाद के स्तर पर भी चर्चा का विषय बन चुकी है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में बयानबाजी से स्थिति और अधिक जटिल हो सकती है, खासकर तब जब मामला पहले से ही न्यायिक या जांच प्रक्रिया के दायरे में हो। सार्वजनिक बयानों का प्रभाव न केवल कानूनी प्रक्रिया पर पड़ सकता है, बल्कि संबंधित परिवारों और व्यक्तियों की सामाजिक छवि पर भी असर डाल सकता है।

    फिलहाल इस मामले में दोनों पक्षों की ओर से अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं, जिससे स्थिति और अधिक उलझती दिख रही है। राजनीतिक प्रतिक्रिया के जुड़ने के बाद यह मुद्दा अब केवल एक निजी विवाद न रहकर व्यापक सामाजिक और राजनीतिक बहस का हिस्सा बन चुका है।

  • NTA भंग करने की मांग तेज: शिवपुरी में छात्रों और युवाओं का विरोध प्रदर्शन

    NTA भंग करने की मांग तेज: शिवपुरी में छात्रों और युवाओं का विरोध प्रदर्शन


    शिवपुरी। नीट यूजी परीक्षा में कथित पेपर लीक, भर्ती परीक्षाओं में भ्रष्टाचार और बढ़ती बेरोजगारी के विरोध में मंगलवार को शिवपुरी में युवाओं का गुस्सा सड़कों पर दिखाई दिया। मूवमेंट अगेंस्ट अनएम्प्लॉयमेंट (एमएयू) की जिला इकाई ने जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन करते हुए केंद्र और राज्य सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) को भंग करने, पेपर लीक मामलों की न्यायिक जांच कराने और प्रदेश में समाप्त किए जा रहे 1.20 लाख सरकारी पदों को बहाल करने की मांग की।

    प्रदर्शन में शामिल युवाओं और संगठन पदाधिकारियों ने कहा कि नीट यूजी जैसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा का प्रश्न पत्र लीक होना देश की शिक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। उनका आरोप था कि लगातार हो रहे पेपर लीक से मेहनती और मेधावी छात्रों का भविष्य अंधकार में जा रहा है। संगठन का कहना है कि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की कमी के कारण छात्रों और अभिभावकों में अविश्वास और मानसिक तनाव लगातार बढ़ रहा है।

    एमएयू कार्यकर्ताओं ने मांग उठाई कि नीट सहित सभी भर्ती और प्रवेश परीक्षाओं में हुए पेपर लीक मामलों की उच्च स्तरीय न्यायिक जांच कराई जाए। साथ ही इसमें शामिल अधिकारियों, एजेंसियों और अन्य दोषियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि केवल जांच की घोषणा पर्याप्त नहीं है, बल्कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए मजबूत और स्थायी व्यवस्था बनाना जरूरी है।

    संगठन ने मेडिकल प्रवेश प्रक्रिया में भी बदलाव की मांग करते हुए कहा कि छात्रों को 12वीं कक्षा की मेरिट के आधार पर मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश दिया जाना चाहिए। इसके अलावा, परीक्षा संचालन की जिम्मेदारी सरकार के सीधे नियंत्रण में होनी चाहिए और एनटीए जैसी एजेंसी को समाप्त किया जाना चाहिए।

    ज्ञापन में बेरोजगारी का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि मध्य प्रदेश में लाखों सरकारी पद खाली होने के बावजूद स्थायी भर्तियां नहीं की जा रही हैं। उन्होंने प्रदेश में समाप्त किए जा रहे 1.20 लाख सरकारी पदों को बहाल कर सभी विभागों में नियमित भर्ती प्रक्रिया शुरू करने की मांग की। युवाओं का कहना था कि अस्थायी नियुक्तियों और आउटसोर्स व्यवस्था से रोजगार की स्थिरता खत्म हो रही है।

    प्रदर्शनकारियों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री Dharmendra Pradhan से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देने की मांग भी की। वहीं स्थानीय छात्रों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए शिवपुरी जिले में नीट परीक्षा केंद्र स्थापित करने की मांग रखी गई, ताकि विद्यार्थियों को दूसरे शहरों में जाकर परीक्षा देने की परेशानी न उठानी पड़े।

    एमएयू ने चेतावनी दी कि यदि सरकार जल्द ठोस कदम नहीं उठाती, तो आने वाले दिनों में आंदोलन और तेज किया जाएगा।

  • भारत-पाक बयानबाज़ी तेज: पाकिस्तान की गीदड़भभकी, आर्मी चीफ ने ऑपरेशन को बताया रणनीतिक शक्ति का उदाहरण

    भारत-पाक बयानबाज़ी तेज: पाकिस्तान की गीदड़भभकी, आर्मी चीफ ने ऑपरेशन को बताया रणनीतिक शक्ति का उदाहरण


    नई दिल्ली । भारत और पाकिस्तान के बीच एक बार फिर बयानबाज़ी का तनाव तेज हो गया है, जिसमें दोनों देशों की ओर से तीखी टिप्पणियां सामने आई हैं। हाल ही में पाकिस्तान के रक्षा मंत्री की ओर से दिए गए बयान ने माहौल को और अधिक गर्म कर दिया, जिसमें भारत के खिलाफ कड़ी भाषा का इस्तेमाल करते हुए चेतावनी दी गई। इस बयान को क्षेत्रीय राजनीति में बढ़ते तनाव के रूप में देखा जा रहा है, जहां दोनों देशों के बीच शब्दों की जंग एक बार फिर सुर्खियों में आ गई है।

    पाकिस्तान की ओर से दिए गए बयान में भारत की नीतियों और सैन्य रुख पर सवाल उठाए गए और कड़े शब्दों में प्रतिक्रिया दी गई। इस दौरान यह भी दावा किया गया कि पिछले तनावपूर्ण हालात में पाकिस्तान ने भारत को जवाब दिया था और अपनी स्थिति मजबूत दिखाई थी। साथ ही भारत की विदेश नीति और पड़ोसी देशों के साथ उसके संबंधों पर भी टिप्पणी की गई, जिससे कूटनीतिक स्तर पर चर्चा और बढ़ गई है।

    इसके जवाब में भारत की ओर से सैन्य और रणनीतिक नेतृत्व ने अपने दृष्टिकोण को मजबूती से सामने रखा है। भारतीय सेना प्रमुख ने हालिया संदर्भों में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का उल्लेख करते हुए इसे आधुनिक रणनीति का एक उदाहरण बताया, जिसमें सैन्य कार्रवाई के साथ-साथ सूचना प्रबंधन, कूटनीतिक संकेत और आर्थिक दबाव जैसे कई पहलुओं का संतुलित उपयोग किया गया। इस दृष्टिकोण को उन्होंने ‘स्मार्ट पावर’ की अवधारणा से जोड़ा, जो यह दर्शाता है कि आज की सुरक्षा रणनीति केवल सैन्य बल पर निर्भर नहीं रहती, बल्कि बहुआयामी होती है।

    भारतीय सैन्य नेतृत्व का कहना है कि इस तरह की रणनीतियां न केवल सुरक्षा चुनौतियों का प्रभावी जवाब देती हैं, बल्कि यह भी सुनिश्चित करती हैं कि राष्ट्रीय हितों की रक्षा व्यापक स्तर पर हो सके। यह दृष्टिकोण आधुनिक युद्ध और कूटनीति के बदलते स्वरूप को दर्शाता है, जहां निर्णय केवल मैदान तक सीमित नहीं रहते बल्कि सूचना और अंतरराष्ट्रीय संदेश भी उतने ही महत्वपूर्ण हो जाते हैं।

    इस पूरे घटनाक्रम में दोनों देशों की ओर से दिए गए बयानों ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि क्षेत्रीय संबंधों में स्थिरता अभी भी एक चुनौती बनी हुई है। जहां एक ओर तीखे शब्दों का आदान-प्रदान जारी है, वहीं दूसरी ओर रणनीतिक और सैन्य स्तर पर अपने-अपने दृष्टिकोण को मजबूत करने की कोशिश भी दिखाई दे रही है। इस स्थिति ने दक्षिण एशिया की भू-राजनीति को फिर से चर्चा के केंद्र में ला दिया है, जहां हर बयान और हर प्रतिक्रिया का व्यापक प्रभाव देखने को मिलता है।

  • कोलकाता में बड़ा मामला: फरार आरोपी सोना पप्पू ईडी दफ्तर पहुंचा, लंबी पूछताछ के बाद गिरफ्तार

    कोलकाता में बड़ा मामला: फरार आरोपी सोना पप्पू ईडी दफ्तर पहुंचा, लंबी पूछताछ के बाद गिरफ्तार


    नई दिल्ली । कोलकाता में प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई के तहत एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है, जहां पिछले तीन महीनों से फरार चल रहा बिस्वजीत पोद्दार उर्फ सोना पप्पू अचानक सॉल्ट लेक स्थित ईडी कार्यालय पहुंच गया। उसके इस अचानक कदम ने जांच एजेंसियों को भी हैरान कर दिया, क्योंकि लंबे समय से वह लगातार फरार चल रहा था और कई बार समन जारी होने के बावजूद पेश नहीं हुआ था।

    सूत्रों के अनुसार, सोमवार सुबह सोना पप्पू ईडी कार्यालय पहुंचा और अंदर प्रवेश करते समय उसने खुद को व्यवसायी बताते हुए कहा कि वह कोई अपराधी नहीं है। हालांकि इसके बाद शुरू हुई पूछताछ कई घंटों तक चली, जिसमें जांच अधिकारियों ने उससे विभिन्न मामलों को लेकर सवाल-जवाब किए। करीब नौ घंटे से अधिक चली इस लंबी पूछताछ के बाद उसे औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया गया।

    जांच एजेंसियों का कहना है कि सोना पप्पू पर जबरन वसूली, जमीन हड़पने और अवैध वित्तीय लेनदेन से जुड़े गंभीर आरोप हैं। उसके खिलाफ कई एफआईआर दर्ज होने की बात भी सामने आई है, जिनमें प्रॉपर्टी कारोबार से जुड़े लोगों को धमकाकर पैसे वसूलने और संपत्ति पर अवैध कब्जे जैसे आरोप शामिल हैं।

    इस मामले में यह भी जानकारी सामने आई है कि हाल के महीनों में पुलिस और ईडी की संयुक्त कार्रवाई के दौरान उसके कई ठिकानों पर छापेमारी की गई थी, जहां से कथित तौर पर बड़ी मात्रा में नकदी, संपत्ति से जुड़े दस्तावेज और अन्य संदिग्ध सामग्री बरामद की गई थी। इसके बाद से ही वह लगातार फरार चल रहा था और उसकी तलाश तेज कर दी गई थी।

    जांच से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि फरारी के दौरान भी सोना पप्पू सोशल मीडिया के जरिए अपनी मौजूदगी का संकेत देता रहा और खुद को निर्दोष बताने की कोशिश करता रहा। हालांकि जांच एजेंसियों के पास मौजूद साक्ष्यों के आधार पर उसके खिलाफ कार्रवाई आगे बढ़ती रही।

    ईडी सूत्रों के अनुसार, आरोपी के खिलाफ यह भी संदेह है कि वह कोलकाता के विभिन्न इलाकों में सक्रिय कई नेटवर्क और सिंडिकेट्स के जरिए अवैध गतिविधियों को संचालित करता था। इन नेटवर्क्स के जरिए कथित रूप से वसूली और संपत्ति से जुड़े मामलों को नियंत्रित किया जाता था, जिससे कई लोगों पर दबाव बनाए जाने की बात सामने आई है।

    फिलहाल गिरफ्तारी के बाद उसे मंगलवार को अदालत में पेश किए जाने की तैयारी है, जहां आगे की कानूनी प्रक्रिया तय की जाएगी। इस पूरे घटनाक्रम ने कोलकाता में प्रॉपर्टी और वित्तीय अपराधों से जुड़े नेटवर्क पर एक बार फिर ध्यान केंद्रित कर दिया है और जांच एजेंसियां अब मामले की गहराई से जांच में जुट गई हैं।

  • पार्सल से 455 ग्राम अफीम बरामद: पूछताछ होते ही भाग निकला युवक

    पार्सल से 455 ग्राम अफीम बरामद: पूछताछ होते ही भाग निकला युवक

    मंदसौर। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मादक पदार्थों की तस्करी के लिए अब तस्कर नए-नए तरीके अपना रहे हैं। मंदसौर में ऐसा ही एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां चॉकलेट और कैंडी के रैपर में अफीम छिपाकर कनाडा भेजने की कोशिश की जा रही थी। सेंट्रल ब्यूरो ऑफ नारकोटिक्स (CBN) ने नई आबादी पोस्ट ऑफिस से 455 ग्राम अवैध अफीम बरामद की है। मामले में एनडीपीएस एक्ट के तहत कार्रवाई करते हुए जांच शुरू कर दी गई है।

    जानकारी के अनुसार, सोमवार शाम करीब 4 बजे एक युवक नई आबादी स्थित पोस्ट ऑफिस पहुंचा और कनाडा के ओंटारियो में इंटरनेशनल पार्सल भेजने की प्रक्रिया शुरू की। करीब दो किलो वजन के इस पार्सल को लेकर युवक ने दावा किया कि उसमें केवल चॉकलेट और कैंडी आइटम हैं। लेकिन उसकी गतिविधियां पोस्ट ऑफिस कर्मचारियों को संदिग्ध लगीं।

    पोस्टल असिस्टेंट ने जब पार्सल में रखी सामग्री को लेकर युवक से विस्तार से पूछताछ की, तो वह घबराने लगा। कर्मचारियों ने उससे और जानकारी मांगी तो वह अचानक पार्सल काउंटर पर ही छोड़कर मौके से फरार हो गया। युवक के इस व्यवहार से कर्मचारियों का शक और गहरा गया, जिसके बाद तुरंत सेंट्रल ब्यूरो ऑफ नारकोटिक्स को सूचना दी गई।

    सूचना मिलते ही सीबीएन मंदसौर सेल की टीम मौके पर पहुंची और पार्सल की जांच शुरू की। करीब दो घंटे तक चली जांच में पार्सल के अंदर ‘लव पैन’ नाम की कैंडी के दो बॉक्स मिले। जब टीम ने कैंडी और चॉकलेट के रैपर खोले तो उनमें छिपाए गए 25 छोटे पाउच बरामद हुए। इन पाउचों में कुल 455 ग्राम अफीम भरी हुई थी। बाकी रैपरों में सामान्य कैंडी रखी गई थी, ताकि जांच एजेंसियों को भ्रमित किया जा सके।

    सीबीएन अधिकारियों के मुताबिक, तस्करों ने ड्रग्स को छिपाने के लिए बेहद शातिर तरीका अपनाया था। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि यह पार्सल नीमच क्षेत्र से कनाडा भेजा जाना था। एजेंसियों को आशंका है कि इसके पीछे अंतरराष्ट्रीय ड्रग नेटवर्क सक्रिय हो सकता है।

    पोस्ट ऑफिस परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों में संदिग्ध युवक की तस्वीर कैद हो गई है। अब जांच एजेंसियां फुटेज के आधार पर उसकी पहचान और गिरफ्तारी की कोशिश कर रही हैं। सीबीएन का कहना है कि एंटी ड्रग ऑपरेशन के तहत पहले से विशेष सूचना मिलने के बाद निगरानी बढ़ाई गई थी।

    पोस्टल असिस्टेंट प्रदीप मेहरा ने बताया कि युवक की घबराहट और संदिग्ध गतिविधियों के चलते उन्हें शक हुआ था। पूछताछ बढ़ाने पर वह सामान छोड़कर भाग गया, जिसके बाद तुरंत नारकोटिक्स टीम को बुलाया गया। फिलहाल जब्त अफीम को कब्जे में लेकर मामले की गहन जांच की जा रही है।

  • 15,000 करोड़ का बोझ बढ़ा! सुप्रीम कोर्ट ने रेलवे को माना सामान्य बिजली उपभोक्ता, क्रॉस-सब्सिडी सरचार्ज अनिवार्य

    15,000 करोड़ का बोझ बढ़ा! सुप्रीम कोर्ट ने रेलवे को माना सामान्य बिजली उपभोक्ता, क्रॉस-सब्सिडी सरचार्ज अनिवार्य

    नई दिल्ली । भारतीय ऊर्जा और परिवहन क्षेत्र से जुड़ा एक बड़ा फैसला सामने आया है, जिसमें देश की सर्वोच्च अदालत ने Indian Railways को बिजली कानून के तहत कोई विशेष दर्जा देने से इनकार कर दिया है। इस निर्णय के बाद रेलवे को अब सामान्य उपभोक्ता की तरह बिजली खरीद पर सभी लागू सरचार्ज चुकाने होंगे, जिससे उस पर करीब 15,000 करोड़ रुपये तक का अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ने की संभावना जताई जा रही है।

    यह मामला लंबे समय से कानूनी विवाद में था, जिसमें रेलवे यह दावा करता रहा था कि वह एक ‘डीम्ड डिस्ट्रीब्यूशन लाइसेंसी’ है और उसे बिजली वितरण से जुड़े अतिरिक्त शुल्क से छूट मिलनी चाहिए। रेलवे की दलील थी कि उसके पास अपना मजबूत बिजली ढांचा और नेटवर्क मौजूद है, जिसके आधार पर वह ग्रिड से सीधे बिजली खरीदता है और उसका उपयोग अपने संचालन में करता है। हालांकि अदालत ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया और स्पष्ट किया कि कानून के अनुसार डिस्ट्रीब्यूशन लाइसेंसी वही माना जा सकता है, जो बिजली को आगे किसी तीसरे पक्ष को आपूर्ति करता हो।

    अदालत ने अपने फैसले में यह भी कहा कि रेलवे का पूरा बिजली ढांचा उसके आंतरिक उपयोग के लिए है, जिसमें ट्रेनों, सिग्नल सिस्टम और स्टेशनों का संचालन शामिल है। इसे किसी सार्वजनिक वितरण प्रणाली के रूप में नहीं देखा जा सकता। इसी आधार पर रेलवे को सामान्य औद्योगिक उपभोक्ता माना गया है, जिसके कारण अब उसे क्रॉस-सब्सिडी सरचार्ज और अतिरिक्त शुल्क देना अनिवार्य होगा।

    इस फैसले का सीधा असर रेलवे की वित्तीय योजनाओं पर पड़ सकता है। पिछले कई वर्षों से रेलवे ओपन एक्सेस के जरिए सस्ती बिजली खरीदकर बड़े पैमाने पर बचत करने की कोशिश कर रहा था। इस रणनीति के तहत हजारों करोड़ रुपये की बचत का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन अब नए आदेश के बाद यह पूरी योजना प्रभावित हो सकती है। अनुमान है कि राज्यों के हिसाब से यह सरचार्ज प्रति यूनिट काफी अधिक होगा, जिससे कुल मिलाकर भारी देनदारी बन सकती है।

    ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि इस निर्णय से राज्य बिजली वितरण कंपनियों को राहत मिलेगी, क्योंकि अब बड़े उपभोक्ताओं से मिलने वाला सरचार्ज उन्हें वित्तीय स्थिरता प्रदान करेगा। वहीं रेलवे के लिए यह एक नई चुनौती है, क्योंकि वह पहले ही इलेक्ट्रिफिकेशन और इंफ्रास्ट्रक्चर पर बड़े पैमाने पर निवेश कर चुका है।

    यह भी माना जा रहा है कि आने वाले समय में रेलवे को अपनी बिजली खरीद रणनीति में बदलाव करना पड़ सकता है। डीजल से इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन की ओर बढ़ने के साथ जिस बचत की उम्मीद की जा रही थी, वह अब इस अतिरिक्त लागत के कारण कम हो सकती है। इससे रेलवे के परिचालन खर्च और बजट प्रबंधन पर सीधा असर पड़ने की संभावना है।

    कुल मिलाकर यह फैसला ऊर्जा और परिवहन क्षेत्र के बीच वित्तीय संतुलन को नए तरीके से परिभाषित करता है। एक ओर जहां राज्यों की बिजली कंपनियों को राहत मिली है, वहीं दूसरी ओर देश के सबसे बड़े उपभोक्ता के लिए यह निर्णय एक बड़ा आर्थिक झटका साबित हो सकता है।

  • यौन उत्पीड़न पीड़ित बच्चों के लिए सहायक नियुक्त होंगे, 28 मई तक आवेदन

    यौन उत्पीड़न पीड़ित बच्चों के लिए सहायक नियुक्त होंगे, 28 मई तक आवेदन


    मंदसौर। लैंगिक अपराधों से पीड़ित बच्चों को संवेदनशील माहौल में कानूनी और मानसिक सहयोग उपलब्ध कराने के उद्देश्य से महिला एवं बाल विकास विभाग ने महत्वपूर्ण पहल शुरू की है। पॉक्सो एक्ट 2012 के तहत जिले में 7 सहायक व्यक्तियों यानी “सपोर्ट पर्सन” की नियुक्ति के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। विभाग ने इच्छुक और योग्य व्यक्तियों से 28 मई 2026 तक आवेदन आमंत्रित किए हैं।

    जिला कार्यक्रम अधिकारी एवं जिला बाल संरक्षण अधिकारी बी.एल. बिश्नोई ने बताया कि पॉक्सो एक्ट की धारा 39 के अंतर्गत इन सहायक व्यक्तियों का चयन किया जाएगा। इनका मुख्य उद्देश्य यौन उत्पीड़न का शिकार हुए बच्चों को सुरक्षित, भरोसेमंद और संवेदनशील वातावरण उपलब्ध कराना होगा, ताकि वे मानसिक दबाव और भय से बाहर निकलकर न्यायिक प्रक्रिया का सामना कर सकें।

    विभाग के अनुसार, कई मामलों में बच्चे और उनके परिवार कानूनी प्रक्रियाओं, पुलिस कार्रवाई और न्यायालयीन कार्यवाही को लेकर असहज महसूस करते हैं। ऐसे में सपोर्ट पर्सन बच्चों के साथ हर चरण में सहयोग करेंगे। ये सहायक व्यक्ति पीड़ित बच्चों के बयान दर्ज कराने से लेकर कोर्ट में पेशी, मानसिक परामर्श, पुनर्वास और शासकीय योजनाओं का लाभ दिलाने तक की प्रक्रिया में मार्गदर्शन देंगे।

    साथ ही बच्चों और उनके परिजनों को यह भी समझाया जाएगा कि वे किस तरह कानूनी अधिकारों का उपयोग कर सकते हैं और किसी भी प्रकार के सामाजिक दबाव या डर से कैसे बाहर निकल सकते हैं। विभाग का मानना है कि इस पहल से पीड़ित बच्चों को न्याय दिलाने की प्रक्रिया अधिक आसान और मानवीय बन सकेगी।

    महिला एवं बाल विकास विभाग ने स्पष्ट किया है कि आवेदन स्वयं उपस्थित होकर, पंजीकृत डाक, स्पीड पोस्ट या कोरियर के माध्यम से जिला कार्यालय में जमा किए जा सकते हैं। आवेदन की अंतिम तिथि 28 मई 2026 निर्धारित की गई है। विभाग ने पात्रता, चयन प्रक्रिया और अन्य दिशा-निर्देशों की विस्तृत जानकारी अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध कराई है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि पॉक्सो जैसे संवेदनशील मामलों में प्रशिक्षित और संवेदनशील सपोर्ट पर्सन की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। इससे पीड़ित बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ता है और वे न्यायिक प्रक्रिया में अधिक सहजता से भाग ले पाते हैं। विभाग की यह पहल जिले में बाल संरक्षण व्यवस्था को और मजबूत करने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है।

  • बंगाल की सियासत में बड़ा उलटफेर, फाल्टा सीट पर TMC उम्मीदवार जहांगीर खान ने चुनाव लड़ने से किया इनकार

    बंगाल की सियासत में बड़ा उलटफेर, फाल्टा सीट पर TMC उम्मीदवार जहांगीर खान ने चुनाव लड़ने से किया इनकार


    नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल की राजनीति में फाल्टा विधानसभा सीट को लेकर बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है, जिसने सत्ताधारी दल तृणमूल कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। मतदान से ठीक पहले पार्टी के उम्मीदवार जहांगीर खान ने चुनावी मैदान से हटने का फैसला कर सभी को चौंका दिया है। इस अचानक हुए घटनाक्रम ने न केवल पार्टी के भीतर हलचल पैदा कर दी है, बल्कि पूरे राजनीतिक माहौल में भी चर्चाओं का दौर तेज कर दिया है।

    फाल्टा सीट पर पहले हुए मतदान के दौरान कथित अनियमितताओं और धांधली के आरोप सामने आए थे, जिसके बाद चुनाव प्रक्रिया को रद्द कर दोबारा मतदान कराने का निर्णय लिया गया था। दोबारा मतदान की तारीख तय होने के बाद सभी दलों ने अपनी तैयारियां तेज कर दी थीं, लेकिन अंतिम समय में TMC उम्मीदवार का पीछे हटना एक अप्रत्याशित राजनीतिक मोड़ माना जा रहा है।

    जहांगीर खान अपने प्रचार अभियान के दौरान अपने अलग अंदाज और बयानों को लेकर काफी चर्चा में रहे थे। उनके वायरल प्रचार स्टाइल और आत्मविश्वास भरे बयानों ने उन्हें सुर्खियों में ला दिया था। लेकिन चुनाव से महज कुछ दिन पहले उनके मैदान छोड़ने के फैसले ने सभी राजनीतिक समीकरणों को बदल दिया है और विपक्ष को भी इस पर सवाल उठाने का मौका मिल गया है।

    इस पूरे घटनाक्रम के बाद राजनीतिक हलकों में तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। कुछ इसे व्यक्तिगत कारणों से लिया गया फैसला बता रहे हैं, तो कुछ का मानना है कि राजनीतिक और कानूनी दबाव ने इस स्थिति को जन्म दिया है। हालांकि आधिकारिक तौर पर उम्मीदवार की ओर से अपना नाम वापस लेने की पुष्टि की गई है, लेकिन इसके पीछे की पूरी वजह अभी स्पष्ट नहीं हो सकी है।

    इस बीच यह भी चर्चा में है कि फाल्टा सीट पर पहले चरण के मतदान के दौरान कई बूथों पर अनियमितताओं की शिकायतें सामने आई थीं, जिसके बाद चुनाव आयोग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच कराई और फिर दोबारा मतदान का आदेश दिया। इसी पृष्ठभूमि में यह नया घटनाक्रम राजनीतिक महत्व और बढ़ा देता है।

    कुल मिलाकर फाल्टा विधानसभा सीट पर यह घटनाक्रम पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नया मोड़ लेकर आया है। मतदान से ठीक पहले उम्मीदवार का हटना न केवल सत्ताधारी दल के लिए चुनौती बन गया है, बल्कि आने वाले दिनों में इस सीट के राजनीतिक समीकरणों को भी पूरी तरह बदल सकता है।

  • ऐतिहासिक स्थल पर नियमों को लेकर हंगामा, बादामी में पर्यटक महिला और स्टाफ के बीच गरमाया मामला

    ऐतिहासिक स्थल पर नियमों को लेकर हंगामा, बादामी में पर्यटक महिला और स्टाफ के बीच गरमाया मामला


    नई दिल्ली । कर्नाटक के बागलकोट जिले स्थित ऐतिहासिक बादामी क्षेत्र एक बार फिर सुर्खियों में है, लेकिन इस बार वजह इसकी प्राचीन विरासत नहीं बल्कि वहां सामने आया एक विवाद है। मेनाबसिदी स्मारक परिसर में चप्पल पहनकर प्रवेश को लेकर एक पर्यटक महिला और पुरातत्व विभाग की कर्मचारी के बीच तीखी बहस हो गई, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। यह घटना उस समय हुई जब धार्मिक और ऐतिहासिक स्थल की मर्यादा और नियमों को लेकर दोनों पक्षों के बीच असहमति बढ़ गई और मामला गरमाता चला गया।

    प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, पर्यटक महिला ने परिसर में चप्पल पहनकर प्रवेश और अंदर मौजूद कुछ लोगों के व्यवहार पर आपत्ति जताई। उसका कहना था कि ऐसे पवित्र और ऐतिहासिक स्थानों पर नियमों का पालन सभी को करना चाहिए। इसी दौरान मौके पर मौजूद एक कर्मचारी से उसकी बहस शुरू हो गई, जो धीरे-धीरे काफी तीखी हो गई। वीडियो में दोनों के बीच शब्दों का आदान-प्रदान स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है, जिसमें स्थिति नियंत्रण से बाहर जाती नजर आती है।

    इसी दौरान एक अन्य युवती को भी परिसर के भीतर चप्पल पहनकर बैठा देखा गया, जिससे वहां मौजूद कुछ श्रद्धालुओं और पर्यटकों में नाराजगी और बढ़ गई। इस घटना ने पूरे माहौल को और अधिक तनावपूर्ण बना दिया। आरोप यह भी लगाए गए कि संबंधित कर्मचारी का व्यवहार कुछ लोगों को अनुचित लगा, जिससे विवाद और गहरा गया।

    यह पूरा मामला बादामी के उस क्षेत्र से जुड़ा है, जो अपने प्राचीन चालुक्य कालीन मंदिरों और गुफाओं के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है। हर साल यहां बड़ी संख्या में देश-विदेश से पर्यटक इन ऐतिहासिक धरोहरों को देखने आते हैं। ऐसे में इस तरह के विवाद ने स्थानीय प्रशासन और नियमों के पालन को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    सोशल मीडिया पर वायरल हुए इस वीडियो को लेकर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ लोग मानते हैं कि धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों की गरिमा बनाए रखने के लिए नियमों का सख्ती से पालन जरूरी है, जबकि कुछ अन्य लोगों का कहना है कि कर्मचारियों को पर्यटकों के साथ अधिक संयम और सम्मानजनक व्यवहार करना चाहिए।

    फिलहाल इस पूरे मामले पर संबंधित विभाग की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन वीडियो के वायरल होने के बाद यह घटना चर्चा का विषय बन गई है और प्रशासनिक स्तर पर जांच की मांग भी उठने लगी है।