Author: bharati

  • नवी मुंबई एयरपोर्ट नाम विवाद पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, CJI बोले- विरोध करें लेकिन आम लोगों को परेशानी न हो

    नवी मुंबई एयरपोर्ट नाम विवाद पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, CJI बोले- विरोध करें लेकिन आम लोगों को परेशानी न हो

    नई दिल्ली । नवी मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट के नामकरण को लेकर चल रहा विवाद अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया, जहां मंगलवार को इस मामले पर अहम सुनवाई हुई। अदालत ने एयरपोर्ट का नाम बदलने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करने से इनकार करते हुए साफ कहा कि यह नीति निर्माण से जुड़ा विषय है और इसमें न्यायपालिका हस्तक्षेप नहीं कर सकती। सुनवाई के दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने विरोध प्रदर्शनों को लेकर भी महत्वपूर्ण टिप्पणी की, जो अब राजनीतिक और सामाजिक चर्चा का विषय बन गई है।

    मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि लोकतंत्र में हर नागरिक को शांतिपूर्ण तरीके से विरोध करने का अधिकार है, लेकिन किसी भी प्रदर्शन के कारण आम लोगों के जीवन में बाधा नहीं आनी चाहिए। उन्होंने विशेष रूप से युवाओं से अपील करते हुए कहा कि विरोध दर्ज कराने के नाम पर सड़कें जाम करना, कानून व्यवस्था प्रभावित करना या लोगों के लिए परेशानी खड़ी करना उचित नहीं है। अदालत की यह टिप्पणी उस समय आई जब एयरपोर्ट के नामकरण को लेकर लगातार विरोध प्रदर्शन किए जा रहे हैं।

    यह मामला नवी मुंबई एयरपोर्ट का नाम बदलकर एक क्षेत्रीय नेता के नाम पर रखने की मांग से जुड़ा था। याचिकाकर्ता ने केंद्र सरकार से राज्य सरकार के प्रस्ताव पर जल्द निर्णय लेने की मांग की थी। हालांकि सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय पीठ ने स्पष्ट किया कि नामकरण जैसे फैसले सरकार के अधिकार क्षेत्र में आते हैं और अदालत ऐसे मामलों में हस्तक्षेप नहीं कर सकती।

    सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने यह भी कहा कि विरोध करने वाले लोगों को कानून के दायरे में रहकर अपनी बात रखनी चाहिए। उन्होंने इस बात पर चिंता जताई कि कुछ प्रदर्शन अब आम जनता के लिए परेशानी का कारण बनने लगे हैं। अदालत ने कहा कि लोकतांत्रिक अधिकारों का सम्मान जरूरी है, लेकिन उसके साथ जिम्मेदारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।

    इसी बीच मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत हाल के कुछ बयानों को लेकर भी चर्चा में रहे। उन्होंने हाल ही में स्पष्ट किया था कि उनके कुछ पुराने बयान संदर्भ से हटाकर प्रस्तुत किए गए थे। उनका कहना था कि उनका उद्देश्य किसी वर्ग या युवाओं का अपमान करना नहीं था, बल्कि उन लोगों की ओर ध्यान दिलाना था जो गलत तरीकों से विभिन्न पेशों में प्रवेश करने की कोशिश करते हैं।

    नवी मुंबई एयरपोर्ट विवाद पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी ने यह साफ कर दिया है कि अदालत नीति निर्माण के मामलों में सीमित दखल ही देती है। साथ ही अदालत ने यह भी संदेश दिया कि विरोध लोकतंत्र का अहम हिस्सा है, लेकिन उसका तरीका ऐसा होना चाहिए जिससे आम नागरिकों को कठिनाई का सामना न करना पड़े।

  • जिला अस्पताल पर उठे सवाल: मासूम की मौत के बाद परिजनों का हंगामा

    जिला अस्पताल पर उठे सवाल: मासूम की मौत के बाद परिजनों का हंगामा

    मध्य प्रदेश।  अशोकनगर  जिले के महुअन गांव में एक दर्दनाक हादसे ने पूरे गांव को गमगीन कर दिया। पलंग से गिरकर घायल हुए छह माह के मासूम आदर्श चंदेल की मंगलवार सुबह इलाज के दौरान मौत हो गई। मासूम की मौत के बाद जिला अस्पताल परिसर में चीख-पुकार मच गई और परिजनों ने डॉक्टरों पर इलाज में लापरवाही बरतने के गंभीर आरोप लगाए।

    जानकारी के मुताबिक, महुअन गांव निवासी विकास चंदेल का छह माह का बेटा आदर्श रविवार शाम घर में पलंग पर खेल रहा था। उसी दौरान उसकी मां रवि चंदेल घर से बाहर पानी भरने चली गई थीं। घर लौटने पर उन्होंने देखा कि मासूम पलंग से नीचे फर्श पर गिरा पड़ा है। बच्चे के सिर और शरीर में गंभीर चोटें आई थीं। परिवार के लोग तुरंत उसे इलाज के लिए ईसागढ़ के एक निजी क्लिनिक लेकर पहुंचे, जहां प्राथमिक उपचार किया गया।

    परिजनों का कहना है कि सोमवार शाम तक बच्चे की हालत में कोई सुधार नहीं हुआ, बल्कि उसकी तबीयत लगातार बिगड़ती गई। इसके बाद उसे तत्काल जिला अस्पताल रेफर किया गया। अस्पताल में भर्ती कराने के बाद परिवार को उम्मीद थी कि मासूम की हालत में सुधार होगा, लेकिन मंगलवार सुबह इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया।

    बच्चे की मौत के बाद अस्पताल परिसर में मातम का माहौल बन गया। परिजनों ने आरोप लगाया कि डॉक्टरों ने समय पर सही उपचार नहीं किया और बार-बार पूछने के बावजूद बच्चे की हालत के बारे में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई। परिवार का कहना है कि यदि समय रहते बेहतर इलाज मिलता, तो शायद मासूम की जान बचाई जा सकती थी।

    मासूम आदर्श की मौत के बाद पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराकर परिजनों को सौंप दिया। घटना के बाद गांव में भी शोक की लहर फैल गई। पड़ोसियों और रिश्तेदारों का कहना है कि परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।

    यह हादसा एक बार फिर छोटे बच्चों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि छोटे बच्चों को कभी भी पलंग या ऊंची जगह पर अकेला नहीं छोड़ना चाहिए, क्योंकि थोड़ी सी लापरवाही भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है।

    फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। वहीं, परिजन जिला अस्पताल के डॉक्टरों की भूमिका की जांच कर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

  • 93 साल के हुए पहाड़ों के जादूगर रस्किन बॉन्ड, देहरादून में सादगी से मनाया जन्मदिन, मसूरी ने महसूस की कमी

    93 साल के हुए पहाड़ों के जादूगर रस्किन बॉन्ड, देहरादून में सादगी से मनाया जन्मदिन, मसूरी ने महसूस की कमी



    नई दिल्ली। पहाड़ों की रानी मसूरी को अपनी कहानियों और शब्दों से दुनिया भर में पहचान दिलाने वाले विश्वप्रसिद्ध लेखक Ruskin Bond मंगलवार को 93 वर्ष के हो गए। इस खास मौके पर उनका जन्मदिन बेहद सादगी के साथ देहरादून स्थित आवास पर परिवार के बीच मनाया गया। हालांकि इस बार स्वास्थ्य कारणों से वह मसूरी नहीं पहुंच सके, जिससे उनके हजारों प्रशंसकों में मायूसी देखने को मिली।

    रस्किन बॉन्ड का नाम आते ही लोगों के मन में मसूरी की धुंध भरी वादियां, देवदार के जंगल, बारिश की बूंदें और पहाड़ी जीवन की सादगी जीवंत हो उठती है। उन्होंने अपनी लेखनी से सिर्फ कहानियां नहीं लिखीं, बल्कि पहाड़ों की आत्मा को शब्दों में ढालकर दुनिया के सामने पेश किया। यही वजह है कि आज भी बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक उनकी रचनाओं को बेहद पसंद करते हैं।

    पिछले कुछ समय से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के कारण डॉक्टरों की सलाह पर उन्हें मसूरी से देहरादून शिफ्ट किया गया है। परिवार के मुताबिक उनका स्वास्थ्य फिलहाल स्थिर है और वह लगातार चिकित्सकीय निगरानी में हैं। उनके बेटे राकेश बॉन्ड ने बताया कि इस बार जन्मदिन घर पर ही बेहद सादगी से मनाया गया।

    हर साल उनके जन्मदिन पर मसूरी के माल रोड स्थित प्रसिद्ध बुक स्टोर में खास आयोजन होता था। देशभर से साहित्य प्रेमी सिर्फ उनकी एक झलक पाने, किताबों पर ऑटोग्राफ लेने और उनसे मिलने मसूरी पहुंचते थे। रस्किन बॉन्ड भी अपने प्रशंसकों से बेहद आत्मीयता से मिलते और खासकर बच्चों के साथ समय बिताना पसंद करते थे। लेकिन इस बार उनके मसूरी नहीं आने से पर्यटकों और स्थानीय लोगों ने उनकी कमी महसूस की।

    सोशल मीडिया पर भी दिनभर उन्हें जन्मदिन की शुभकामनाएं देने का सिलसिला चलता रहा। साहित्य प्रेमियों ने उनके अच्छे स्वास्थ्य और लंबी उम्र की कामना की।

    19 मई 1934 को Kasauli में जन्मे रस्किन बॉन्ड का बचपन पहाड़ों के बीच बीता। उन्होंने शिमला और देहरादून में शिक्षा प्राप्त की और कम उम्र में ही लेखन शुरू कर दिया था। उनकी कहानियों में प्रकृति, अकेलापन, दोस्ती, मासूमियत और इंसानी रिश्तों की गहराई साफ दिखाई देती है।

    उनकी चर्चित रचनाओं में The Blue Umbrella, Time Stops at Shamli, A Flight of Pigeons और “दिल्ली इज़ नॉट फार” जैसी किताबें शामिल हैं। उनकी कई कहानियों पर फिल्में और टीवी सीरीज भी बन चुकी हैं, जिन्होंने नई पीढ़ी तक उनकी लेखनी को पहुंचाया।

    स्थानीय लोगों का कहना है कि रस्किन बॉन्ड केवल लेखक नहीं, बल्कि मसूरी की सांस्कृतिक पहचान हैं। उनकी वजह से दुनिया भर के लोग मसूरी को करीब से जान पाए। साहित्य प्रेमियों का मानना है कि उनकी कहानियां आने वाली पीढ़ियों को भी प्रकृति, संवेदनशीलता और इंसानी रिश्तों की अहमियत सिखाती रहेंगी।

  • ओस्लो में पीएम मोदी से सवाल पूछकर घिरीं नॉर्वे की पत्रकार, राहुल गांधी ने भी साधा निशाना

    ओस्लो में पीएम मोदी से सवाल पूछकर घिरीं नॉर्वे की पत्रकार, राहुल गांधी ने भी साधा निशाना



    नई दिल्ली। ओस्लो में भारत-नॉर्डिक समिट के दौरान नॉर्वे की पत्रकार हेले लिंग ने पीएम नरेंद्र मोदी से प्रेस सवालों पर तीखा सवाल किया, जिसके बाद विवाद खड़ा हो गया।ओस्लो में भारत-नॉर्डिक समिट के दौरान नॉर्वे की पत्रकार हेले लिंग ने पीएम नरेंद्र मोदी से प्रेस सवालों पर तीखा सवाल किया, जिसके बाद विवाद खड़ा हो गया।

    नॉर्वे की राजधानी ओस्लो में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गहर स्टोरे की संयुक्त प्रेस इंटरैक्शन के दौरान पत्रकार हेले लिंग ने पीएम मोदी से सवाल पूछते हुए प्रेस से दूरी बनाने पर तीखी टिप्पणी की। बाद में उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि प्रधानमंत्री ने उनका सवाल नहीं लिया और उन्होंने प्रेस स्वतंत्रता के संदर्भ में नॉर्वे और भारत की रैंकिंग का भी जिक्र किया।

    विवाद बढ़ने पर हेले लिंग ने अपने ऊपर लगे आरोपों का जवाब दिया और कहा कि वह किसी भी तरह की “विदेशी जासूस” नहीं हैं। उनका कहना था कि पत्रकारिता का काम सत्ता से सवाल पूछना है और पहले से तैयार जवाबों को मान लेना नहीं।

    इसी बीच भारतीय विदेश मंत्रालय की प्रेस ब्रीफिंग में भी इसी मुद्दे पर सवाल उठे। भारतीय राजनयिक सिबी जॉर्ज ने भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था और मीडिया परिदृश्य का बचाव करते हुए कहा कि भारत दुनिया की आबादी का बड़ा हिस्सा है, लेकिन उसके बारे में बाहरी समझ अक्सर सीमित होती है; उन्होंने यह भी कहा कि अकेले दिल्ली में ही करीब 200 टीवी चैनल चल रहे हैं।

    अब इस पूरे मामले में राजनीति भी जुड़ गई है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर वीडियो साझा करते हुए पीएम मोदी पर निशाना साधा और लिखा कि “nothing to hide, nothing to fear” यानी छिपाने को कुछ नहीं हो तो डरने की जरूरत नहीं होती। उन्होंने यह भी कहा कि जब दुनिया एक “compromised PM” को कुछ सवालों से घबराकर पीछे हटते देखती है, तो भारत की छवि पर असर पड़ता है।

    यह पूरा विवाद अब प्रेस स्वतंत्रता, विदेश नीति और भारत की सार्वजनिक छवि को लेकर नई बहस छेड़ रहा है। एक तरफ नॉर्वेजियन पत्रकार अपने सवाल को पत्रकारिता का हिस्सा बता रही हैं, तो दूसरी तरफ भारतीय पक्ष इसे भारत की लोकतांत्रिक संस्थाओं के गलत आकलन से जोड़ रहा है।

  • 10 अरब डॉलर के निवेश से अमेरिका में नई आर्थिक हलचल, अदाणी ग्रुप को मिली बड़ी कानूनी राहत के बाद बढ़ा भरोसा

    10 अरब डॉलर के निवेश से अमेरिका में नई आर्थिक हलचल, अदाणी ग्रुप को मिली बड़ी कानूनी राहत के बाद बढ़ा भरोसा

     नई दिल्ली । Adani Group के अमेरिका में प्रस्तावित 10 अरब डॉलर के निवेश को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई है। भारतीय-अमेरिकी समुदाय के कई प्रमुख नेताओं और व्यापारिक विशेषज्ञों ने इसे भारत और अमेरिका के आर्थिक संबंधों के लिए एक बड़ा मोड़ बताया है। उनका मानना है कि यह निवेश केवल व्यापारिक विस्तार नहीं बल्कि वैश्विक स्तर पर भारत की आर्थिक ताकत और कॉर्पोरेट प्रभाव का बड़ा संकेत है।

    भारतीय-अमेरिकी समुदाय के वरिष्ठ नेता और पूर्व सलाहकार Ajay Bhutoria ने इस निवेश को अमेरिका के इन्फ्रास्ट्रक्चर और टेक्नोलॉजी सेक्टर के लिए गेम चेंजर बताया है। उनके अनुसार यह कदम अमेरिका में रोजगार बढ़ाने, ऊर्जा ढांचे को मजबूत करने और नई तकनीकों के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि इस निवेश से दोनों देशों के बीच रणनीतिक और आर्थिक साझेदारी को नई दिशा मिलेगी।

    हाल के घटनाक्रमों में अदाणी समूह को कानूनी मोर्चे पर भी राहत मिलने की खबरों ने निवेशकों और उद्योग जगत के बीच सकारात्मक माहौल बनाया है। इसे कंपनी के लिए बड़ी कानूनी जीत माना जा रहा है, जिससे वैश्विक स्तर पर उसकी विश्वसनीयता और मजबूत होने की संभावना जताई जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि बड़े अंतरराष्ट्रीय निवेशों के लिए कानूनी स्पष्टता बेहद महत्वपूर्ण होती है और इस घटनाक्रम से निवेश माहौल को मजबूती मिल सकती है।

    अमेरिका में यह प्रस्तावित निवेश कई क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर असर डाल सकता है। माना जा रहा है कि इससे हजारों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे। निर्माण, ऊर्जा, लॉजिस्टिक्स और टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में नई परियोजनाओं को गति मिलने की उम्मीद है। विशेष रूप से स्वच्छ ऊर्जा और आधुनिक इन्फ्रास्ट्रक्चर से जुड़े क्षेत्रों में इस निवेश को भविष्य की जरूरतों के लिहाज से अहम माना जा रहा है।

    विशेषज्ञों के अनुसार वर्तमान समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा सेंटर के तेजी से विस्तार के कारण अमेरिका में ऊर्जा की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में बड़े पैमाने पर ऊर्जा और इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश की जरूरत महसूस की जा रही है। इस संदर्भ में अदाणी समूह की विशेषज्ञता को महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि कंपनी पहले से ही ऊर्जा और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में बड़े प्रोजेक्ट्स संचालित कर चुकी है।

    यह निवेश भारत-अमेरिका संबंधों के राजनीतिक और आर्थिक दृष्टिकोण को भी प्रभावित कर सकता है। लंबे समय से विदेशी निवेश और रोजगार को लेकर चल रही बहस के बीच इस पहल को सकारात्मक संकेत के रूप में देखा जा रहा है। भारतीय कंपनियों की बढ़ती वैश्विक भागीदारी यह दर्शाती है कि भारत अब केवल बाजार नहीं बल्कि दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में निवेश करने वाली ताकत के रूप में भी उभर रहा है।

    विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह निवेश योजना पूरी तरह लागू होती है तो आने वाले वर्षों में यह दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग का एक ऐतिहासिक उदाहरण बन सकती है। इससे न केवल व्यापारिक संबंध मजबूत होंगे बल्कि तकनीकी और रणनीतिक साझेदारी को भी नया विस्तार मिलेगा। कुल मिलाकर यह घटनाक्रम वैश्विक निवेश जगत में भारत की बढ़ती भूमिका को और अधिक मजबूत करने वाला माना जा रहा है।

  • अशोकनगर में बिजली कटौती पर फूटा गुस्सा: विधायक संग पावर हाउस पहुंचे ग्रामीण

    अशोकनगर में बिजली कटौती पर फूटा गुस्सा: विधायक संग पावर हाउस पहुंचे ग्रामीण


    मध्य प्रदेश। भीषण गर्मी के बीच Ashoknagar जिले में अघोषित बिजली कटौती को लेकर ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। मंगलवार को कई गांवों के लोग कोलवा रोड स्थित पावर हाउस पहुंचे और बिजली विभाग के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में स्थानीय विधायक Hari Babu Rai भी शामिल हुए।

    ग्रामीणों ने बताया कि रात के समय अचानक बिजली काट दी जाती है, जिससे गर्मी में छोटे बच्चों और बुजुर्गों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है। लोगों का कहना है कि लगातार बिजली जाने से बच्चों की तबीयत खराब हो रही है।

    विधायक हरी बाबू राय ने कहा कि पूरे क्षेत्र में रात के समय लगातार बिजली कटौती की जा रही है। विभाग से पूछने पर “भोपाल से लोड सेटिंग” का हवाला दिया जाता है। उन्होंने कहा कि गर्मी के मौसम में बिजली कटौती से लोगों की परेशानी बढ़ गई है और अस्पतालों में मरीजों की संख्या भी बढ़ रही है।

    ग्रामीणों ने ट्रांसफार्मर खराब होने के बाद समय पर बदलाव नहीं होने और बिजली बिलों में अनियमितता की शिकायत भी की। उनका कहना है कि महीनों तक ट्रांसफार्मर नहीं बदले जाते, जबकि बिल एक साथ आने से भुगतान करना मुश्किल हो जाता है।

    विधायक ने कहा कि वे इस मुद्दे को लेकर संबंधित अधिकारियों को पत्र लिखेंगे और अघोषित बिजली कटौती बंद करने की मांग करेंगे।

  • बैंकिंग सेक्टर में करियर बनाने वालों के लिए बड़ा मौका, SBI में 7,150 पदों पर वैकेंसी

    बैंकिंग सेक्टर में करियर बनाने वालों के लिए बड़ा मौका, SBI में 7,150 पदों पर वैकेंसी

    नई दिल्ली । देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक भारतीय स्टेट बैंक ने युवाओं के लिए रोजगार का बड़ा अवसर पेश किया है। बैंक की ओर से अप्रेंटिस के 7,150 पदों पर भर्ती के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। बैंकिंग सेक्टर में करियर बनाने की इच्छा रखने वाले युवाओं के लिए यह एक महत्वपूर्ण मौका माना जा रहा है। बड़ी संख्या में निकली इस भर्ती ने नौकरी की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के बीच उत्साह बढ़ा दिया है।

    एसबीआई की इस भर्ती प्रक्रिया के तहत देशभर के विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में नियुक्तियां की जाएंगी। उम्मीदवारों का चयन क्षेत्रीय भाषा और संबंधित राज्य के आधार पर किया जाएगा। आवेदन प्रक्रिया ऑनलाइन माध्यम से शुरू हो चुकी है और इच्छुक उम्मीदवार निर्धारित अंतिम तिथि तक अपना आवेदन जमा कर सकते हैं।

    इस भर्ती के लिए आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों के पास किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय या संस्थान से किसी भी विषय में स्नातक की डिग्री होना जरूरी है। बैंक की ओर से जारी जानकारी के अनुसार चयनित उम्मीदवारों को एक वर्ष की अप्रेंटिसशिप ट्रेनिंग दी जाएगी, जिसके दौरान उन्हें हर महीने स्टाइपेंड भी प्रदान किया जाएगा।

    आयु सीमा की बात करें तो आवेदन करने वाले उम्मीदवारों की न्यूनतम उम्र 20 वर्ष और अधिकतम उम्र 28 वर्ष निर्धारित की गई है। आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को सरकारी नियमों के अनुसार अधिकतम आयु सीमा में छूट भी दी जाएगी। इससे बड़ी संख्या में युवा इस भर्ती प्रक्रिया का लाभ उठा सकेंगे।

    चयन प्रक्रिया को कई चरणों में पूरा किया जाएगा। उम्मीदवारों को सबसे पहले ऑनलाइन लिखित परीक्षा देनी होगी। इसके बाद स्थानीय भाषा की परीक्षा, मेडिकल टेस्ट और मेरिट सूची के आधार पर अंतिम चयन किया जाएगा। माना जा रहा है कि लिखित परीक्षा जुलाई महीने में आयोजित की जा सकती है।

    आवेदन शुल्क भी श्रेणी के अनुसार तय किया गया है। सामान्य, ओबीसी और ईडब्ल्यूएस वर्ग के उम्मीदवारों को निर्धारित शुल्क जमा करना होगा, जबकि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और दिव्यांग वर्ग के उम्मीदवारों को शुल्क में छूट दी गई है। आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन रखी गई है ताकि देशभर के उम्मीदवार आसानी से इसमें हिस्सा ले सकें।

    भर्ती प्रक्रिया के लिए उम्मीदवारों को सबसे पहले अप्रेंटिस पोर्टल पर पंजीकरण करना होगा। इसके बाद बैंक की आधिकारिक प्रक्रिया के अनुसार आवेदन फॉर्म भरना होगा। फॉर्म भरते समय सभी जरूरी दस्तावेज सही तरीके से अपलोड करना अनिवार्य होगा।

    बैंकिंग सेक्टर में स्थिर और बेहतर करियर की तलाश कर रहे युवाओं के लिए यह भर्ती एक बड़ा अवसर मानी जा रही है। बड़ी संख्या में पद होने के कारण उम्मीदवारों के पास चयन का अच्छा मौका रहेगा। ऐसे में योग्य अभ्यर्थियों को समय रहते आवेदन प्रक्रिया पूरी करने की सलाह दी जा रही है।

  • शादी में जाने के लिए गाड़ी मांगने पर हुआ विवाद, बेटे ने ले ली पिता की जान

    शादी में जाने के लिए गाड़ी मांगने पर हुआ विवाद, बेटे ने ले ली पिता की जान


    गुना। गुना जिले के म्याना थाना क्षेत्र में पिता की हत्या के सनसनीखेज मामले में आरोपी बेटे को कोर्ट से राहत नहीं मिली है। बाइक की चाबी मांगने को लेकर हुए विवाद में अपने ही पिता की गैंती मारकर हत्या करने वाले आरोपी विकास जाटव की जमानत याचिका अदालत ने खारिज कर दी है। आरोपी फिलहाल न्यायिक हिरासत में जेल में बंद है।

    यह दिल दहला देने वाली घटना 24 अप्रैल को सगोरिया गांव में हुई थी। जानकारी के मुताबिक मृतक रमेश जाटव (40) पेशे से मकान निर्माण का ठेका लेने का काम करते थे। परिवार में उनके दो बेटे और एक बेटी हैं। घटना वाले दिन शाम करीब 6 बजे रमेश अपने छोटे बेटे विवेक के साथ उमरी गांव में एक शादी समारोह में शामिल होने जाने की तैयारी कर रहे थे।

    घर से निकलने से पहले रमेश ने अपने बड़े बेटे विकास जाटव से बाइक की चाबी मांगी और उसे घर पर रुकने के लिए कहा। इसी बात को लेकर दोनों के बीच विवाद शुरू हो गया। छोटे बेटे विवेक ने पुलिस को बताया कि विकास ने चाबी देने से इनकार करते हुए कहा कि उसने एक दिन पहले ही बाइक में पेट्रोल भरवाया है और पहले वह पेट्रोल निकाल लेगा, उसके बाद ही चाबी देगा।

    पिता रमेश ने बेटे की बात मानते हुए उससे कहा कि वह पेट्रोल निकाल ले और चाबी दे दे। इसके बाद विकास घर के अंदर गया, लेकिन चाबी लेकर लौटने के बजाय वह गैंती लेकर बाहर आया। आरोप है कि उसने अचानक अपने पिता के सिर पर गैंती से जोरदार हमला कर दिया। वार इतना गंभीर था कि रमेश मौके पर ही गिर पड़े और लहूलुहान हो गए।

    घटना के तुरंत बाद आरोपी बेटा मौके से फरार हो गया। परिजन गंभीर हालत में रमेश को लेकर म्याना अस्पताल के लिए निकले। रास्ते में उन्हें डायल-112 वाहन मिला, जिसके पुलिसकर्मियों की सलाह पर एंबुलेंस के जरिए रमेश को सीधे गुना जिला अस्पताल पहुंचाया गया। यहां इलाज के दौरान रात करीब 3 बजे उनकी मौत हो गई।

    पुलिस ने मामले में हत्या का प्रकरण दर्ज कर उसी दिन आरोपी विकास जाटव को गिरफ्तार कर लिया था। मामले की सुनवाई के दौरान आरोपी पक्ष की ओर से जमानत की मांग की गई, लेकिन कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जमानत याचिका खारिज कर दी।

    घटना के बाद गांव और परिवार में शोक का माहौल है। स्थानीय लोग भी इस बात से स्तब्ध हैं कि मामूली विवाद ने पिता-पुत्र के रिश्ते को खून से रंग दिया।

  • पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूरी को राष्ट्र ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि, नेताओं ने बताया जनसेवा का प्रतीक

    पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूरी को राष्ट्र ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि, नेताओं ने बताया जनसेवा का प्रतीक

    नई दिल्ली । उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ राजनेता मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूरी के निधन से देशभर में शोक की लहर फैल गई है। राजनीतिक और सामाजिक जीवन में अपनी सादगी, अनुशासन और ईमानदार छवि के लिए पहचाने जाने वाले खंडूरी के जाने को सार्वजनिक जीवन की बड़ी क्षति माना जा रहा है। उनके निधन पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु सहित देश के कई वरिष्ठ नेताओं ने गहरी संवेदनाएं व्यक्त करते हुए उन्हें राष्ट्रसेवा और सुशासन का प्रतीक बताया।

    राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने शोक व्यक्त करते हुए कहा कि भुवन चंद्र खंडूरी ने अपने पूरे सार्वजनिक जीवन में ईमानदारी, पारदर्शिता और विकास की राजनीति का आदर्श प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि सेना में उत्कृष्ट सेवाएं देने के बाद उन्होंने राजनीति में भी जनहित और सुशासन को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। राष्ट्रपति ने उनके योगदान को देश और विशेष रूप से उत्तराखंड के विकास के लिए अविस्मरणीय बताया।

    देश के कई वरिष्ठ नेताओं ने भी खंडूरी के निधन को अपूरणीय क्षति करार दिया। नेताओं ने कहा कि उन्होंने अपने लंबे राजनीतिक और सामाजिक जीवन में अनुशासन और राष्ट्रहित को हमेशा सर्वोपरि रखा। उनकी साफ-सुथरी छवि और जनसेवा के प्रति समर्पण उन्हें अन्य नेताओं से अलग पहचान दिलाता था। उत्तराखंड में उनके कार्यकाल को सुशासन और विकास के लिए आज भी याद किया जाता है।

    भुवन चंद्र खंडूरी केवल एक राजनेता ही नहीं, बल्कि एक पूर्व सैनिक भी थे जिन्होंने तीन दशकों से अधिक समय तक भारतीय सेना में अपनी सेवाएं दीं। सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद उन्होंने राजनीति में कदम रखा और सार्वजनिक जीवन में भी उसी अनुशासन और ईमानदारी को बनाए रखा। उनके नेतृत्व में कई विकास कार्यों को गति मिली और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास किए गए।

    राजनीतिक जीवन में उनकी छवि एक सादगीपूर्ण और कर्मठ नेता की रही। उन्होंने हमेशा साफ राजनीति और जनहित को प्राथमिकता दी। यही वजह रही कि अलग-अलग राजनीतिक विचारधाराओं से जुड़े लोग भी उनके व्यक्तित्व और कार्यशैली का सम्मान करते थे। उनके निधन के बाद देशभर से श्रद्धांजलियों का सिलसिला लगातार जारी है।

    उत्तराखंड की राजनीति में भुवन चंद्र खंडूरी का नाम एक ऐसे नेता के रूप में याद किया जाएगा जिन्होंने विकास, पारदर्शिता और जनकल्याण को अपनी राजनीति का आधार बनाया। उनका जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बना रहेगा और सार्वजनिक जीवन में उनकी सादगी तथा ईमानदारी हमेशा उदाहरण के रूप में याद की जाएगी।

  • शिवपुरी में देर रात हमला: भैंस चुराने आए आरोपियों ने सरपंच को बनाया निशाना

    शिवपुरी में देर रात हमला: भैंस चुराने आए आरोपियों ने सरपंच को बनाया निशाना


    शिवपुरी। जिले के नरवर थाना क्षेत्र में सोमवार देर रात भैंस चोरी रोकने की कोशिश करना चार लोगों को भारी पड़ गया। हथियारबंद बदमाशों ने ग्राम बीलौनी के सरपंच सहित चार लोगों पर हमला कर बेरहमी से मारपीट की और मोबाइल, सोने की चेन व अंगूठी लूटकर फरार हो गए। घटना के बाद इलाके में दहशत का माहौल है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

    जानकारी के अनुसार, ग्राम बीलौनी के सरपंच बालकिशन जाटव अपने साथियों मुकेश जाटव, राजकुमार जाटव और कार चालक जगभान बघेल के साथ सोमवार रात एक शादी समारोह से लौट रहे थे। रात करीब 1 बजे जब उनकी कार नरवर गैस गोदाम के पास पहुंची, तब उन्होंने कुछ संदिग्ध लोगों को भैंसों को एक लोडिंग वाहन में चढ़ाते देखा। शक होने पर उन्होंने वाहन रोककर पूछताछ की।

    सरपंच बालकिशन जाटव के मुताबिक, जब उन्होंने भैंसों के बारे में सवाल किया तो वहां मौजूद लोगों ने गाली-गलौज शुरू कर दी। इसी दौरान चालक जगभान बघेल ने भैंस चोरी की आशंका जताई। आरोप है कि यह सुनते ही एक बदमाश ने अपने साथियों से कहा, “पकड़ लो और गोली मार दो।” इसके बाद करीब 10 हथियारबंद बदमाशों ने चारों को घेर लिया।

    पीड़ितों का कहना है कि बदमाशों के पास लाठी, डंडे, सरिए और अवैध कट्टे थे। उन्होंने चारों लोगों के साथ जमकर मारपीट की। हमले में सरपंच बालकिशन जाटव की पीठ में गंभीर चोट आई, जबकि मुकेश जाटव की आंख, हाथ, पीठ और जांघ में चोटें आई हैं। राजकुमार जाटव और जगभान बघेल को भी शरीर के कई हिस्सों में चोट लगी। घटना के बाद सभी घायलों को नरवर अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज किया गया।

    मारपीट के दौरान बदमाशों ने चारों लोगों के मोबाइल फोन, सोने की चेन और अंगूठी भी छीन ली। हालांकि हंगामा बढ़ता देख आरोपी भैंसों को मौके पर छोड़कर वाहन सहित फरार हो गए। पुलिस अब फरार आरोपियों की तलाश में जुटी हुई है।

    इधर, धवा की बावड़ी क्षेत्र निवासी जवाहर रावत की 9 भैंसें चोरी होने का मामला भी सामने आया है। बताया जा रहा है कि भैंस चोरी की यह पूरी वारदात आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों में कैद हुई है। फुटेज में कुछ संदिग्ध लोग भैंसों को वाहन में ले जाते दिखाई दे रहे हैं। पुलिस सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आरोपियों की पहचान करने में जुटी है।

    पुलिस का कहना है कि घटना गंभीर है और सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए जांच की जा रही है। इलाके में लगातार बढ़ रही पशु चोरी की घटनाओं से ग्रामीणों में भी नाराजगी है। ग्रामीणों ने पुलिस गश्त बढ़ाने और आरोपियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।