Author: bharati

  • रश्मिका मंदाना-विजय देवरकोंडा की शादी का प्राइमल थीम: सादगी, परंपरा और प्रकृति का संगम

    रश्मिका मंदाना-विजय देवरकोंडा की शादी का प्राइमल थीम: सादगी, परंपरा और प्रकृति का संगम


    नई दिल्ली । उदयपुर की अरावली पहाड़ियों के बीच बसी मेमेंटोस बाय आईटीसी एकाया में इस समय एक बेहद खास उत्सव का माहौल है। फिल्म और टीवी की दुनिया के चर्चित पावर कपल, रश्मिका मंदाना और विजय देवरकोंडा, अब कुछ ही पलों में सात फेरे लेकर एक दूसरे के जीवन में हमेशा के लिए शामिल होने वाले हैं। पिछले कुछ दिनों से चल रहे शाही समारोह की झलकियां सोशल मीडिया पर छाई हुई हैं, लेकिन अब उनकी शादी का थीम भी सामने आया है, जो बाकी सितारों की शादियों से बिल्कुल अलग और बेहद खास है।

    रश्मिका और विजय की शादी का थीम प्राइमल यानी मूल और आदिम पर आधारित है। इस थीम का मकसद है जड़ों की ओर लौटना और शादी की हर रस्म को उसी सादगी, पवित्रता और भावनात्मक गहराई के साथ निभाना, जैसे दशकों पहले विवाह होते थे। इस थीम में दिखावे से ज्यादा महत्व परंपराओं, रीति रिवाजों और रिश्तों की गहन भावनाओं को दिया गया है। सजावट में प्राकृतिक रंगों, मिट्टी, लकड़ी, फूलों और पारंपरिक प्रतीकों का इस्तेमाल किया जाएगा। शादी का हर पल जीवन की मूल ऊर्जा, प्रकृति और पंचतत्व के साक्षी में संपन्न होगा।

    इस प्राइमल थीम के जरिए यह जोड़ा अपनी नई जिंदगी की शुरुआत सादगी और आध्यात्मिकता के साथ करना चाहता है। यह केवल एक शादी नहीं, बल्कि रिश्तों के वास्तविक अर्थ का उत्सव होगा, जहां विश्वास और संस्कार ही सबसे महत्वपूर्ण होंगे।

    संगीत समारोह में भी ट्रेडिशन को प्राथमिकता दी गई। विजय की मां माधवी देवरकोंडा ने इस मौके पर भावनाओं से भरा एक अनोखा पल साझा किया। उन्होंने रश्मिका को पारंपरिक चूड़ियां भेंट कीं, जो सिर्फ आभूषण नहीं, बल्कि रश्मिका का देवरकोंडा परिवार में स्वागत और खानदान की विरासत का प्रतीक हैं। यह पल दर्शाता है कि यह रिश्ता केवल दो सितारों का मिलन नहीं, बल्कि दो परिवारों के बीच भावनात्मक जुड़ाव का भी प्रतीक है।

    पिछले कुछ दिनों में आयोजित विरोश प्रीमियर लीग, पूल पार्टी और हल्दी की रस्में सोशल मीडिया पर छाई रहीं। संगीत समारोह ने न केवल नाच गाने और रंग बिरंगी सजावट का जश्न पेश किया, बल्कि परिवार और परंपरा की गहराई को भी उजागर किया। रश्मिका और विजय की यह शादी दिखावे से परे, सादगी, प्राकृतिक सौंदर्य और पुरातन भारतीय संस्कृति के संगम का उदाहरण बन रही है।

    उदयपुर की शांत पहाड़ियों में सजाई गई यह शादी दर्शकों को याद दिलाती है कि वास्तविक खुशी और उत्सव केवल बाहरी चमक दमक में नहीं, बल्कि रिश्तों, संस्कारों और प्रकृति के गहरे जुड़ाव में छिपी होती है। रश्मिका और विजय का यह प्राइमल थीम, उनकी नई यात्रा की शुरुआत को स्थायी, भावपूर्ण और यादगार बनाने का संकल्प है। 

  • तेजस्वी की नई वेब सीरीज़ के प्रमोशन में करण कुंद्रा का अनोखा सरप्राइज

    तेजस्वी की नई वेब सीरीज़ के प्रमोशन में करण कुंद्रा का अनोखा सरप्राइज


    नई दिल्ली। मुंबई। टीवी और डिजिटल इंडस्ट्री के चर्चित कपल करण कुंद्रा और तेजस्वी प्रकाश एक बार फिर सुर्खियों में हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो ने फैंस की उत्सुकता बढ़ा दी। इस वीडियो में करण कुंद्रा अपने सीने पर तेजस्वी का चेहरा वाला टैटू दिखाते नजर आए। वीडियो को देखने के बाद फैंस ने इसे कपल के गहरे संबंध और प्यार के इज़हार के तौर पर देखा, लेकिन बाद में करण ने स्पष्ट किया कि यह स्थायी टैटू नहीं बल्कि तेजस्वी की नई ओटीटी सीरीज़ के प्रमोशनल स्टंट का हिस्सा है।

    यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया जब तेजस्वी अपनी पहली वेब सीरीज़ के जरिए डिजिटल प्लेटफॉर्म पर कदम रख रही हैं। मीडिया से बातचीत के दौरान करण ने बताया कि यह सरप्राइज उनके लिए था और उन्होंने शो की थीम और किरदार से प्रेरित होकर यह लुक अपनाया। उन्होंने फैंस से यह भी कहा कि अस्थायी टैटू शो की कहानी और विज़ुअल एलिमेंट से जुड़ा है, और इसे रोमांटिक सरप्राइज के रूप में देखा जाना चाहिए।

    करण और तेजस्वी की जोड़ी की कहानी रियलिटी शो बिग बॉस 15 के दौरान शुरू हुई। इसके बाद उनका रिश्ता सार्वजनिक हुआ और तब से दोनों अक्सर मीडिया और सोशल मीडिया पर चर्चा में बने रहते हैं। हालिया वायरल वीडियो ने उनके फैंस में उत्साह बढ़ा दिया और कुछ लोगों ने इसे कपल के कमिटमेंट के रूप में देखा, जबकि कुछ ने इसे प्रमोशन की रणनीति के रूप में माना।

    तेजस्वी ने एक इवेंट में प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि करण का यह कदम उनके काम के प्रति समर्थन का संकेत है। वहीं करण ने मीडिया से बातचीत में स्पष्ट किया कि यह टैटू स्थायी नहीं है और इसका मकसद केवल सीरीज़ के प्रचार को बढ़ावा देना है। फैंस का उत्साह और वायरल वीडियो की प्रतिक्रिया इस बात का प्रमाण है कि दर्शक इस प्रमोशनल अंदाज को पसंद कर रहे हैं।

    तेजस्वी की नई सीरीज़ ‘साइको सैया’ एक रोमांटिक थ्रिलर है, जिसमें वह प्रमुख भूमिका निभा रही हैं। यह प्रोजेक्ट उनके करियर में महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इससे वह ओटीटी दर्शकों तक अपनी पहुंच बना रही हैं। शो Amazon MX Player पर स्ट्रीम हो रहा है और दर्शकों की निगाहें अब इसकी रिलीज और प्रदर्शन पर टिकी हैं।

    मनोरंजन उद्योग के जानकारों के अनुसार डिजिटल रिलीज़ से पहले कलाकारों द्वारा किए गए रचनात्मक प्रमोशनल स्टंट दर्शकों का ध्यान खींचने का प्रभावी माध्यम बनते जा रहे हैं। इस मामले में भी वायरल वीडियो ने सीरीज़ की दृश्यता बढ़ाई और फैंस की उत्सुकता को चरम पर पहुंचाया।

    फिलहाल दोनों कलाकार अपने-अपने प्रोजेक्ट्स में व्यस्त हैं। सूत्रों के अनुसार यह कपल अपने निजी जीवन को लेकर गंभीर है और भविष्य की योजनाओं पर विचार कर रहा है। फैंस की नजर अब सीरीज़ के प्रदर्शन और कपल की अगली सार्वजनिक उपस्थिति पर टिकी है।

  • गुरुवार का दिन: व्रत, पूजा और दान से जीवन में सुख और समृद्धि पाएं

    गुरुवार का दिन: व्रत, पूजा और दान से जीवन में सुख और समृद्धि पाएं


    नई दिल्ली। गुरुवार को धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व प्राप्त है। इसे श्रद्धा संयम और गुरु तत्व के सम्मान का दिन माना जाता है। आस्था और सेवा भाव के साथ किए गए छोटे-छोटे उपाय भी जीवन में स्थिरता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं। पंचांग और धर्मग्रंथों के अनुसार गुरुवार भगवान विष्णु और देवगुरु बृहस्पति की उपासना का अनुकूल दिन है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक पूजा करने से ज्ञान, समृद्धि और वैवाहिक सुख की प्राप्ति होती है।

    धार्मिक मान्यता के अनुसार गुरुवार को पीले रंग का विशेष महत्व है। पीले रंग को गुरु का प्रतीक माना गया है। इसलिए व्रत पूजा और दान में पीले पदार्थों का प्रयोग शुभ माना जाता है। प्रातः स्नान के बाद पीले वस्त्र धारण करना चाहिए और भगवान विष्णु के समक्ष दीप प्रज्वलित करना चाहिए। इसके बाद तुलसी की माला से 11 या 21 बार “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” या “ॐ बृं बृहस्पतये नमः” मंत्र का जाप करने से गुरु कृपा प्राप्त होती है। पूजा के बाद चने की दाल गुड़ या पीले फलों का भोग अर्पित करना लाभकारी माना गया है।

    गुरुवार को केले के वृक्ष की पूजा भी अत्यंत फलदायी मानी गई है। पूजा विधि में वृक्ष के नीचे जल अर्पित करें हल्दी का तिलक लगाएं और दीपक जलाकर समृद्धि की कामना करें। धार्मिक परंपरा अनुसार गुरुवार को हल्दी चने की दाल पीले फल या बेसन से बने प्रसाद का दान करना शुभ फल देता है। श्रद्धालु सुख समृद्धि और पारिवारिक शांति के लिए गुरुवार व्रत रखते हैं और सत्यनारायण कथा का श्रवण करते हैं।

    गुरुवार के दिन माथे पर हल्दी या केसर का तिलक लगाना गुरु कृपा का प्रतीक माना गया है। संयमित व्यवहार और सकारात्मक संकल्प इस दिन की आध्यात्मिक साधना को पूर्णता देते हैं। इस दिन किए गए कर्म और पूजा के प्रभाव से जीवन में मानसिक संतुलन और स्थिरता आती है।

    हालांकि परंपराओं में गुरुवार को कुछ कार्यों से बचने की सलाह भी दी गई है। सिर धोना या बाल कटवाना, हल्दी या धन उधार देना, घर में पोछा लगाना या पीली वस्तुओं का अपमान करना वर्जित कार्य माने गए हैं। इन बातों का पालन करने से गुरुवार की पूजा और व्रत का पूर्ण लाभ मिलता है।

    धार्मिक दृष्टि से गुरुवार का दिन साधना ध्यान और पूजा के लिए विशेष फलदायी है। यह दिन जीवन में समृद्धि सुख और ज्ञान के मार्ग खोलता है। गुरु और भगवान विष्णु की कृपा पाने के लिए नियमित पूजा व मंत्र जाप अत्यंत आवश्यक है। छोटे उपाय जैसे पीले वस्त्र, केले के वृक्ष की पूजा और दान-पुण्य जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और आशीर्वाद लाते हैं।इस प्रकार गुरुवार केवल सप्ताह का एक दिन नहीं है बल्कि जीवन में स्थिरता और आध्यात्मिक उन्नति का संदेश देता है। श्रद्धा संयम और सेवा भाव के माध्यम से इस दिन की पूजा करना हर व्यक्ति के लिए लाभकारी और फलदायी है।

  • मध्यप्रदेश में सुशासन के संदेश: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने समय पर उपस्थिति सुनिश्चित करने के दिए सख्त निर्देश

    मध्यप्रदेश में सुशासन के संदेश: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने समय पर उपस्थिति सुनिश्चित करने के दिए सख्त निर्देश


    भोपाल । मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जनहित में सरकारी कामों में देरी रोकने और सुशासन को सशक्त करने के लिए सख्त निर्देश जारी किए हैं। 26 फरवरी को उन्होंने राजधानी भोपाल के वल्लभ भवन सहित अन्य सरकारी कार्यालयों में अधिकारियों और कर्मचारियों की समय पर उपस्थिति सुनिश्चित करने पर जोर दिया। उनका स्पष्ट संदेश है कि जनता से जुड़े कार्यों में लेटलतीफी और लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निर्देश दिए हैं कि सभी अधिकारी और कर्मचारी सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक अनिवार्य रूप से कार्यालय में मौजूद रहें। वल्लभ भवन, विंध्याचल भवन, सतपुड़ा भवन और अन्य सरकारी कार्यालयों में आने-जाने का समय, उपस्थिति और अनधिकृत अनुपस्थिति पर निगरानी रखी जाएगी। सामान्य प्रशासन विभाग ने मुख्यमंत्री के आदेश पर विशेष टीमों का गठन किया है, जो विभिन्न कार्यालयों में जाकर उपस्थिति की जांच करेंगी और सरकारी कार्यों में देरी को रोकने का काम करेंगी।

    डॉ. यादव ने यह भी स्पष्ट किया कि जनता से जुड़े कार्यों और कल्याणकारी योजनाओं में किसी भी प्रकार की लापरवाही या विलंब स्वीकार्य नहीं होगा। समय पर कार्य निष्पादन सुनिश्चित न करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी। उनका कहना है कि सरकार की प्राथमिकता जनता की सुविधा और पारदर्शी प्रशासन है, इसलिए सभी अधिकारी और कर्मचारी पूरी जिम्मेदारी और समयबद्धता के साथ अपने कर्तव्यों का पालन करें।

    मुख्यमंत्री के निर्देश से स्पष्ट संदेश गया है कि सरकारी कार्यों में जवाबदेही और सुचारू संचालन के लिए अब कोई कोताही नहीं बर्दाश्त की जाएगी। इससे न केवल प्रशासनिक कार्यों में तेजी आएगी, बल्कि आम नागरिकों को योजनाओं और सेवाओं का लाभ समय पर मिलेगा।

  • आज का पंचांग 26 फरवरी 2026, फाल्गुन शुक्ल दशमी: प्रीति योग और शुभ मुहूर्त से दिन बने विशेष

    आज का पंचांग 26 फरवरी 2026, फाल्गुन शुक्ल दशमी: प्रीति योग और शुभ मुहूर्त से दिन बने विशेष


    नई दिल्ली। आज 26 फरवरी 2026 गुरुवार को फाल्गुन मास की शुक्ल पक्ष दशमी तिथि के साथ दिन की शुरुआत हुई। धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार यह दिन आध्यात्मिक साधना, ज्ञानार्जन, दान-पुण्य और शुभ कार्यों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। पंचांग के अनुसार दशमी तिथि रात्रि 12 बजकर 33 मिनट तक प्रभावी रहेगी और ग्रहों की स्थिति मानव जीवन के बौद्धिक और सामाजिक पक्ष को सुदृढ़ करने में सहायक होगी।

    खगोलीय दृष्टि से आज सूर्य मंगल बुध शुक्र और राहु कुंभ राशि में स्थित हैं जबकि चंद्रमा मिथुन राशि के मृगशिरा नक्षत्र में विराजमान हैं। मृगशिरा नक्षत्र ज्ञान, खोज और मानसिक शांति का प्रतीक माना जाता है। इस नक्षत्र के देवता सोम माने जाते हैं जो अमृत और चंद्र ऊर्जा के प्रतिनिधि हैं। इसलिए आज का दिन ध्यान, जप, साधना और नए विचारों पर मनन के लिए विशेष रूप से फलदायी रहेगा।

    ज्योतिषाचार्यों के अनुसार आज रात्रि 10 बजकर 33 मिनट तक प्रीति योग रहेगा। धार्मिक दृष्टि से यह योग आपसी सद्भाव, संबंधों में मधुरता और रुके हुए कार्यों की सिद्धि का संकेत देता है। इसी प्रकार अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 11 मिनट से 12 बजकर 57 मिनट तक रहेगा जिसे दिन का सर्वश्रेष्ठ शुभ काल माना जाता है। वहीं अमृत काल रात्रि 1 बजकर 23 मिनट से 2 बजकर 53 मिनट तक रहेगा जो साधना और आध्यात्मिक चिंतन के लिए बेहद अनुकूल समय है।

    हालांकि पंचांग में कुछ अशुभ काल भी बताए गए हैं। राहुकाल दोपहर 2 बजे से 3 बजकर 27 मिनट तक रहेगा और इस अवधि में नए कार्य, यात्रा या महत्वपूर्ण निर्णय से बचने की परंपरा रही है। इसके अतिरिक्त गुलिकाल और यमगण्ड भी दिन के अलग-अलग समय में प्रभावी रहेंगे जिनमें सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।

    सूर्योदय प्रातः 6 बजकर 49 मिनट और सूर्यास्त सायं 6 बजकर 19 मिनट पर होगा। चंद्रोदय दोपहर 12 बजकर 54 मिनट पर तथा चंद्रास्त अगले दिन प्रातः 3 बजकर 46 मिनट पर होगा। धार्मिक दृष्टि से यह समय क्रम दैनिक पूजा, व्रत और आध्यात्मिक अनुशासन के निर्धारण में महत्वपूर्ण माना जाता है।

    धर्माचार्यों का मत है कि आज का दिन आत्मसंयम, ज्ञानार्जन और ईश्वर स्मरण के लिए विशेष फलदायी है। ग्रहों की स्थिति मानसिक संतुलन विवेकपूर्ण निर्णय और सामाजिक मेल-जोल के संकेत देती है। श्रद्धालुओं को आज प्रार्थना दान और सकारात्मक संकल्प के माध्यम से जीवन में शांति और समृद्धि की कामना करनी चाहिए।

    इस प्रकार आज का दिन आस्था, विवेक और सद्भाव के समन्वय का संदेश देता है। कर्म श्रद्धा और संयम जीवन को संतुलित दिशा प्रदान करते हैं। ध्यान साधना और ज्ञानार्जन के लिए अनुकूल यह दिन प्रत्येक व्यक्ति को अपने कार्यों और जीवन के प्रति जागरूक और सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने की प्रेरणा देता है।

  • इंदौर भागीरथपुरा जल कांड: 35 मौतों की जांच के लिए आयोग गठित, नागरिकों से मांगे साक्ष्य

    इंदौर भागीरथपुरा जल कांड: 35 मौतों की जांच के लिए आयोग गठित, नागरिकों से मांगे साक्ष्य


    इंदौर। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में कथित रूप से दूषित पानी से हुई 35 मौतों के मामले में स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए आयोग गठित करने का आदेश दिया। अदालत के निर्देश पर अब औपचारिक रूप से जांच प्रक्रिया शुरू हो गई है।

    पूर्व जस्टिस सुनील कुमार गुप्ता की अध्यक्षता में एकल सदस्यीय आयोग का गठन किया गया है। आयोग को घटना की पूरी सच्चाई उजागर करने का जिम्मा सौंपा गया है। इसमें पानी की गुणवत्ता प्रशासनिक लापरवाही जिम्मेदारी तय करना और शिकायतों पर समय रहते कार्रवाई हुई या नहीं सभी पहलुओं की गहन जांच शामिल है। आयोग यह भी देखेगा कि किन विभागों और अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध रही।

    आयोग ने भागीरथपुरा क्षेत्र के नागरिकों से अपील की है कि वे अपने पास मौजूद साक्ष्य मेडिकल रिपोर्ट पानी की जांच से जुड़े दस्तावेज शिकायत पत्र या अन्य प्रमाण 28 फरवरी तक आयोग के समक्ष प्रस्तुत करें। आयोग ने स्पष्ट किया है कि सभी दस्तावेज और प्रमाण समय पर जमा करना अनिवार्य होगा ताकि जांच निष्पक्ष और तथ्य आधारित हो।

    इस मामले ने नगर निगम और संबंधित विभागों की जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय नागरिक लंबे समय से पानी की गुणवत्ता को लेकर शिकायत करते रहे हैं। आयोग की जांच से यह स्पष्ट होगा कि दूषित पानी की आपूर्ति क्यों हुई चेतावनी संकेतों को अनदेखा किया गया या नहीं और कौन-कौन जिम्मेदार है। जांच रिपोर्ट के आने के बाद ही आगे की कार्रवाई तय होगी चाहे वह प्रशासनिक हो या आपराधिक। फिलहाल क्षेत्र के नागरिक आयोग की जांच प्रक्रिया पर नजर बनाए हुए हैं जिसे इस मामले में सच्चाई सामने लाने का अहम माध्यम माना जा रहा है।

  • वीर सावरकर की प्रेरक जीवन-गाथा, सिनेमा में दिखाई गई वीरता..

    वीर सावरकर की प्रेरक जीवन-गाथा, सिनेमा में दिखाई गई वीरता..


    नई दिल्ली। मुंबई। जब भी भारतीय स्वतंत्रता संग्राम और क्रांतिकारियों की बात होती है, तो Vinayak Damodar Savarkar का नाम सम्मान के साथ लिया जाता है। उनके अदम्य साहस, देशभक्ति और संघर्ष की कहानी न केवल इतिहास की किताबों में बल्कि सिनेमा में भी जीवंत दिखाई गई है। उनकी पुण्यतिथि के अवसर पर उनके जीवन और संघर्ष को दर्शाती कुछ प्रमुख फिल्मों पर नजर डालना जरूरी है, जो सत्य और वीरता की गाथा पेश करती हैं।

    वीर सावरकर पर हिंदी और मराठी दोनों भाषाओं में कई फिल्में बनाई गई हैं। इनमें क्षेत्रीय सिनेमा की विशेषता और स्थानीय प्रभाव भी देखने को मिलता है। सबसे पहले रणदीप हुड्डा की फिल्म स्वातंत्र्य वीर सावरकर का नाम आता है। इस फिल्म के लिए रणदीप ने अपनी पूरी मेहनत के साथ-साथ घर तक बेच दिया था। उन्होंने सावरकर का किरदार निभाया और उसमें जीवन का हर भाव भर दिया। फिल्म का बॉक्स ऑफिस कलेक्शन औसत रहा, लेकिन सावरकर के संघर्ष और देशभक्ति की भावना को प्रभावशाली ढंग से दर्शाया।

    इसके बाद प्रियदर्शन की कालापानी भी शुरुआती फिल्मों में शामिल है, जिसमें स्वतंत्रता सेनानी और उनके संघर्ष का उल्लेख है। यह फिल्म उन क्रांतिकारियों की कहानी दिखाती है जिन्हें ब्रिटिश राज ने अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में कैद किया था। फिल्म में अनु कपूर ने सावरकर का किरदार निभाया। 1996 में रिलीज हुई यह फिल्म अपने समय की क्लासिक फिल्मों में गिनी जाती है और दर्शकों को इतिहास की कठोर सच्चाई से अवगत कराती है।

    साल 2001 में आई फिल्म वीर सावरकर भी यादगार रही। इसके गुजराती संस्करण को भी दर्शकों ने खूब सराहा। फिल्म का निर्माण Sudhir Phadke ने सावरकर दर्शन प्रतिष्ठान के तहत किया, जबकि शैलेंद्र गौर ने सावरकर का किरदार निभाया। निर्देशन Ved Rahi ने किया। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार फिल्म के निर्माण के लिए चंदा इकट्ठा किया गया था और लोगों को सावरकर के साहस और प्रयासों से जागरूक किया गया।

    2015 में रिलीज हुई मराठी फिल्म व्हाट अबाउट सावरकर? भी खास नजर आई। यह फिल्म सीधे सावरकर की जीवनी पर आधारित नहीं थी, लेकिन उनके सम्मान और देशभक्ति की जंग को प्रभावशाली ढंग से पेश करती है। फिल्म में अभिमान मराठे की कहानी दिखाई गई है, जो वीर सावरकर का अपमान करने वाले भ्रष्ट मंत्री के खिलाफ आवाज उठाता है। संघर्ष में उसके मित्र भी उसका साथ देते हैं। इस तरह फिल्म सावरकर को सम्मान दिलाने की जंग को दर्शाती है और युवाओं में राष्ट्रभक्ति की भावना जगाती है।

    ये फिल्में सिर्फ सिनेमा की कृतियाँ नहीं हैं। ये स्वतंत्रता संग्राम, वीर सावरकर की प्रेरक जीवन-गाथा और देशभक्ति की मिसाल पेश करती हैं। उनके संघर्ष, त्याग और साहस को दर्शाती ये फिल्में आज भी प्रत्येक राष्ट्रप्रेमी को प्रेरित करती हैं और हमें यह याद दिलाती हैं कि देश के लिए समर्पण और वीरता का मतलब क्या होता है।

  • इंदौर में नर्सिंग छात्राओं के लिए संकट: 300 छात्राओं को हॉस्टल खाली करने के मौखिक आदेश, वैकल्पिक व्यवस्था नहीं

    इंदौर में नर्सिंग छात्राओं के लिए संकट: 300 छात्राओं को हॉस्टल खाली करने के मौखिक आदेश, वैकल्पिक व्यवस्था नहीं

    इंदौर। शहर के महात्मा गांधी मेमोरियल मेडिकल कॉलेज एमजीएम से जुड़े नर्सिंग कॉलेज की लगभग 300 छात्राओं के लिए अचानक संकट खड़ा हो गया है। कॉलेज प्रबंधन ने मौखिक आदेश जारी कर सभी छात्राओं को हॉस्टल खाली करने के लिए कहा है। यह आदेश बीएससी नर्सिंग की प्रथम से तृतीय वर्ष की छात्राओं को प्रभावित कर रहा है। छात्राओं का कहना है कि परीक्षा और क्लिनिकल ट्रेनिंग के बीच यह अचानक कदम उनके लिए मानसिक और आर्थिक दबाव का कारण बन गया है।

    हॉस्टल खाली करने का आदेश सिर्फ छात्राओं तक सीमित नहीं है। महाराजा यशवंतराव अस्पताल एमवायएच प्रबंधन ने कॉलेज प्राचार्य को भी शासकीय क्वार्टर खाली करने का नोटिस भेजा है। अस्पताल परिसर में बने स्टाफ क्वार्टर में रहने वाले लगभग 20 परिवार भी इस कार्रवाई से प्रभावित होंगे। प्रशासन का कहना है कि परिसर में नए भवन निर्माण की योजना है और वर्तमान हॉस्टल एवं क्वार्टर निर्माण कार्य के लिए बाधा बन रहे हैं।

    हालांकि, छात्राओं का आरोप है कि कॉलेज प्रबंधन ने अभी तक कोई वैकल्पिक आवास व्यवस्था नहीं की है। छात्राओं का कहना है कि वे आर्थिक रूप से इतनी सक्षम नहीं हैं कि निजी हॉस्टल या किराए के मकान में रहकर पढ़ाई जारी रख सकें। इस बीच प्रशासनिक संवेदनशीलता और छात्र कल्याण पर सवाल उठ रहे हैं।

    छात्राओं ने लिखित आदेश और पुनर्वास की मांग की है। उनका कहना है कि बिना वैकल्पिक व्यवस्था के हॉस्टल खाली करना उचित नहीं है। यदि जल्द समाधान नहीं निकला, तो यह मामला सामाजिक और प्रशासनिक विवाद का रूप ले सकता है।

    स्थिति गंभीर होने के बावजूद प्रशासन की ओर से कोई तात्कालिक कदम नहीं उठाया गया है। छात्राएं चिंता में हैं कि उनका शैक्षणिक वर्ष प्रभावित हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि छात्राओं और स्टाफ परिवारों के हितों को देखते हुए तत्काल वैकल्पिक व्यवस्था करनी चाहिए।

    इस पूरे घटनाक्रम से यह स्पष्ट हो रहा है कि नए निर्माण कार्य की आवश्यकता तो हो सकती है, लेकिन उससे जुड़े प्रशासनिक निर्णयों में छात्र और कर्मचारी कल्याण को प्राथमिकता देना अनिवार्य है। फिलहाल कॉलेज और अस्पताल प्रबंधन पर दबाव बढ़ता जा रहा है, ताकि छात्राओं और प्रभावित परिवारों के लिए सुरक्षित और सुविधाजनक विकल्प सुनिश्चित किया जा सके।

  • PM मोदी के इजरायल दौरे पर PM नेतन्याहू ने भारतीय लुक में किया डिनर होस्ट, सबको किया चौंका

    PM मोदी के इजरायल दौरे पर PM नेतन्याहू ने भारतीय लुक में किया डिनर होस्ट, सबको किया चौंका


    नई दिल्ली। भारत के प्रधानमंत्री Narendra Modi इस समय दो दिवसीय दौरे पर इजरायल में हैं। इजरायली प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu और उनकी पत्नी Sara Netanyahu ने पीएम मोदी का गर्मजोशी से स्वागत किया। इस दौरान नेतन्याहू ने मोदी के लिए रात्रि भोज भी होस्ट किया जिसमें उन्होंने पारंपरिक भारतीय परिधान पहनकर सभी को चौंका दिया।

    नेतन्याहू ने खुद इस पल की जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा की और लिखा हमारे संयुक्त रात्रिभोज से पहले मैंने अपने मित्र प्रधानमंत्री मोदी को पारंपरिक भारतीय परिधान पहनकर चौंका दिया।

    इससे पहले एयरपोर्ट पर नेतन्याहू और उनकी पत्नी ने पीएम मोदी का स्वागत किया। इस दौरान सारा नेतन्याहू और पीएम मोदी के सैफरन रंग के कपड़े मैच करने पर सभी ने ठहाके लगाए और मुस्कुराते हुए इस पल का आनंद लिया।

    प्रधानमंत्री मोदी ने इजरायली संसद को संबोधित किया और ऐसा करने वाले वे पहले भारतीय प्रधानमंत्री बने। संसद में मोदी के भाषण के दौरान सांसद खड़े होकर उनका अभिवादन किया और स्पीकर ने हिंदी में उनका स्वागत किया।

    संसद में संबोधन के दौरान पीएम नेतन्याहू ने कहा नरेंद्र मेरे प्यारे दोस्त मैं आपके यहां आने से बहुत-बहुत खुश हूं। आप मेरे भाई से कम नहीं हैं। पिछली बार हमने मेडिटेरेनियन कोस्ट पर समय बिताया था और तब से हमारे सहयोग और समझ ने नए आयाम हासिल किए हैं।इस दौरे के दौरान दोनों नेताओं ने सुरक्षा व्यापार और सांस्कृतिक सहयोग को और मजबूत करने पर चर्चा की साथ ही यह रंगीन और दोस्ताना पल भारत-इजरायल संबंधों में एक यादगार क्षण बन गया।

  • महाकाल के दरबार में भारतीय क्रिकेटर: कर्ण शर्मा और सिद्धार्थ कौल ने की भस्म आरती, कहा मिलती है सकारात्मक ऊर्जा

    महाकाल के दरबार में भारतीय क्रिकेटर: कर्ण शर्मा और सिद्धार्थ कौल ने की भस्म आरती, कहा मिलती है सकारात्मक ऊर्जा


    उज्जैन । धर्मनगरी उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में इन दिनों श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। आम भक्तों के साथ साथ देश विदेश की चर्चित हस्तियां भी बाबा महाकाल के दरबार में हाजिरी लगाने पहुंच रही हैं। इसी क्रम में भारतीय क्रिकेट टीम के खिलाड़ी कर्ण शर्मा और सिद्धार्थ कौल मंगलवार तड़के महाकाल मंदिर पहुंचे जहां उन्होंने भगवान महाकालेश्वर की प्रातःकालीन भस्म आरती में शामिल होकर पूजा अर्चना की और आशीर्वाद प्राप्त किया।

    सुबह ब्रह्ममुहूर्त में होने वाली विश्व प्रसिद्ध भस्म आरती के दौरान दोनों क्रिकेटरों ने पूरे विधि विधान से दर्शन किए। मंदिर के गर्भगृह में स्थापित ज्योतिर्लिंग के समक्ष उन्होंने ध्यान लगाया और नंदी महाराज के कान में अपनी मनोकामना भी कही। भस्म आरती के आध्यात्मिक वातावरण और मंत्रोच्चार के बीच दोनों खिलाड़ी श्रद्धा में लीन दिखाई दिए।

    भस्म आरती के उपरांत मंदिर समिति की ओर से दोनों खिलाड़ियों का पारंपरिक रूप से सम्मान किया गया। उन्हें प्रसाद और स्मृति चिन्ह भेंट किए गए। मंदिर परिसर में मौजूद श्रद्धालुओं ने भी क्रिकेटरों की एक झलक पाने के लिए उत्साह दिखाया हालांकि दर्शन व्यवस्था सुचारू रूप से संचालित होती रही।

    इस अवसर पर कर्ण शर्मा ने कहा कि बाबा महाकाल की कृपा से उन्हें बार बार उज्जैन आने का अवसर मिलता है। उन्होंने कहा जब भी बाबा बुलाते हैं मैं दर्शन के लिए जरूर आता हूं। यहां आकर मन को शांति मिलती है और मंदिर की व्यवस्थाएं भी अत्यंत सुव्यवस्थित हैं। उन्होंने भस्म आरती को अद्भुत आध्यात्मिक अनुभव बताते हुए कहा कि इस आरती में शामिल होना किसी भी श्रद्धालु के लिए विशेष सौभाग्य की बात है।

    वहीं सिद्धार्थ कौल ने भी बाबा महाकाल के प्रति अपनी आस्था व्यक्त की। उन्होंने कहा कि महाकाल के दर्शन से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। भस्म आरती के दौरान जो आध्यात्मिक वातावरण बनता है वह मन और आत्मा को एक अलग शक्ति देता है। मेरा मानना है कि हर व्यक्ति को जीवन में कम से कम एक बार बाबा महाकाल की भस्म आरती में जरूर शामिल होना चाहिए कौल ने कहा।

    उल्लेखनीय है कि महाकाल मंदिर देश के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है और यहां प्रतिदिन तड़के होने वाली भस्म आरती विश्व प्रसिद्ध है। देश विदेश से श्रद्धालु इस अनूठी आरती के दर्शन के लिए उज्जैन पहुंचते हैं। क्रिकेटरों की इस आध्यात्मिक यात्रा ने एक बार फिर यह साबित किया कि खेल जगत की हस्तियां भी अपनी आस्था से गहराई से जुड़ी हैं और महत्वपूर्ण अवसरों पर ईश्वर का आशीर्वाद लेना नहीं भूलतीं।