Author: bharati

  • 27 फरवरी को आमलकी/रंगभरी एकादशी: जानें व्रत, पूजा और शुभ मुहूर्त..

    27 फरवरी को आमलकी/रंगभरी एकादशी: जानें व्रत, पूजा और शुभ मुहूर्त..


    नई दिल्ली। फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि इस साल 27 फरवरी को पड़ रही है। इसे आमलकी एकादशी या रंगभरी एकादशी भी कहा जाता है। इस दिन का धार्मिक महत्व विशेष है क्योंकि मान्यता है कि नारायण के साथ-साथ महादेव से भी इसका गहरा संबंध है।

    आमलकी एकादशी का व्रत भक्ति भाव से रखने पर सभी पाप नष्ट होते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा आती है। आंवले के वृक्ष में नारायण का निवास माना जाता है, इसलिए इस दिन आंवले की पूजा करना अत्यंत फलदायी है। भक्त इस दिन उपवास रखकर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की भी आराधना करते हैं।

    रंगभरी एकादशी का संबंध शिव और पार्वती से भी है। धार्मिक मान्यता है कि विवाह के बाद भगवान शिव पहली बार माता पार्वती के साथ काशी आए थे और माता पार्वती का गौना इसी दिन हुआ था। यही कारण है कि इस दिन से रंगों के पर्व होली का जश्न भी शुरू माना जाता है।

    दृक पंचांग के अनुसार, 27 फरवरी की एकादशी तिथि रात 10:32 बजे तक रहेगी, इसके बाद द्वादशी शुरू होगी। नक्षत्र की स्थिति के अनुसार आर्द्रा नक्षत्र सुबह 10:48 बजे तक रहेगा, उसके बाद पुनर्वसु नक्षत्र शुरू होगा। योग आयुष्मान शाम 7:44 बजे तक रहेगा। करण वणिज सुबह 11:31 बजे तक रहेगा और उसके बाद विष्टि करण रहेगा।

    शुभ योगों की बात करें तो सर्वार्थ सिद्धि योग सुबह 10:48 बजे से अगले दिन 6:47 बजे तक रहेगा, वहीं रवि योग सुबह 6:48 बजे से 10:48 बजे तक रहेगा। सूर्योदय शुक्रवार को 6:48 बजे और सूर्यास्त 6:20 बजे होगा।

    शुभ मुहूर्त इस प्रकार हैं: ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5:09 बजे से 5:59 बजे तक, अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:11 बजे से 12:57 बजे तक, विजय मुहूर्त दोपहर 2:29 बजे से 3:15 बजे तक और गोधूलि मुहूर्त शाम 6:17 बजे से 6:42 बजे तक रहेगा।

    अशुभ समय में राहुकाल सुबह 11:08 बजे से 12:34 बजे तक, यमगण्ड दोपहर 3:27 बजे से 4:53 बजे तक, गुलिक काल सुबह 8:15 बजे से 9:41 बजे तक और दुर्मुहूर्त सुबह 9:07 बजे से 9:53 बजे तक रहेगा। भद्रा दोपहर 11:31 बजे से रात 10:32 बजे तक रहेगी।इस प्रकार 27 फरवरी की आमलकी या रंगभरी एकादशी धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से विशेष महत्व रखती है और इस दिन के शुभ मुहूर्त और व्रत पालन से जीवन में समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

  • होली पर 3 मार्च को चंद्र ग्रहण और भद्रा काल का साया, जानें होलिका दहन का सही मुहूर्त

    होली पर 3 मार्च को चंद्र ग्रहण और भद्रा काल का साया, जानें होलिका दहन का सही मुहूर्त


    नई दिल्ली । इस साल फाल्गुन पूर्णिमा के दिन यानी 3 मार्च 2026 को भारत में पूर्ण चंद्र ग्रहण लगने वाला है। ज्योतिष के अनुसार चंद्र ग्रहण और इसका सूतक काल शुभ कार्यों पर प्रभाव डालते हैं जिससे होलिका दहन की तारीख पर भी भ्रम पैदा हो गया है। इस साल चंद्र ग्रहण की शुरुआत दोपहर 3:20 बजे होगी और शाम 6:46 बजे समाप्त होगी। ग्रहण का सूतक काल इससे लगभग 9 घंटे पहले सुबह 6:20 बजे से प्रारंभ हो जाएगा। इस दौरान मंदिरों के कपाट बंद रहेंगे पूजा-पाठ नहीं किया जाएगा और बुजुर्गों बीमारों और गर्भवती महिलाओं को छोड़कर भोजन भी वर्जित माना जाएगा। इस दिन भारत में ब्लड मून भी दिखाई देगा जो इसे और भी विशेष बना देगा।

    फाल्गुन पूर्णिमा तिथि और स्नान-दान

    पंचांग के अनुसार फाल्गुन पूर्णिमा की तिथि 2 मार्च की शाम 5:15 बजे से शुरू होकर 3 मार्च दोपहर 4:33 बजे तक रहेगी। स्नान-दान के लिए पूर्णिमा तिथि 3 मार्च को मानी जाएगी जबकि पूर्णिमा व्रत 2 मार्च को रखना उचित होगा।

    होलिका दहन और भद्रा काल

    धर्म-शास्त्र के अनुसार होलिका दहन के लिए तीन चीजें जरूरी हैं: पूर्णिमा तिथि रात्रि काल और भद्रा मुक्त समय। इस साल अगर 3 मार्च को पूर्णिमा मानें तो चंद्र ग्रहण और उसके सूतक काल के कारण होलिका दहन नहीं किया जा सकता। वहीं 2 मार्च को रात में होलिका दहन करने पर भद्रा काल खेल बिगाड़ रहा है। भद्रा काल 2 मार्च की शाम 5:15 बजे से 3 मार्च की तड़के 4:46 बजे तक रहेगा।

    उत्तम मुहूर्त
    शास्त्रों के अनुसार इस स्थिति में होलिका दहन मध्य रात्रि से पूर्व कर लेना ही सर्वोत्तम माना गया है। इस साल 2 मार्च की रात 12:50 बजे से 2:38 बजे तक का समय सबसे शुभ मुहूर्त रहेगा। इसके बाद 3 मार्च या 4 मार्च को होली खेलना या धुलैंडी मनाना उचित होगा। Disclaimer यह खबर केवल जागरूक करने के उद्देश्‍य से लिखी गई है। हमने इसको लिखने में सामान्य जानकारियों की मदद ली है। हम इसकी पुष्टि नहीं करते है।
  • पीएम मोदी का इजरायल दौरा, नेतन्याहू बोले-भारत-इजरायल पर फिल्म बने तो हिट होगी

    पीएम मोदी का इजरायल दौरा, नेतन्याहू बोले-भारत-इजरायल पर फिल्म बने तो हिट होगी


    नई दिल्ली से रिपोर्ट: प्रधानमंत्री Narendra Modi इजरायल के दो दिवसीय दौरे पर हैं। स्वागत के दौरान इजरायली प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने गर्मजोशी से उन्हें अभिवादन किया और कहा कि अगर भारत-इजरायल भाईचारे पर कोई बॉलीवुड फिल्म बने तो वह जबरदस्त हिट साबित होगी।

    यह बयान दोनों देशों के मजबूत द्विपक्षीय संबंध और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को उजागर करता है। इजरायल में बॉलीवुड की लोकप्रियता को देखते हुए नेतन्याहू ने 2018 में भारत दौरे के दौरान भी इस जुड़ाव पर जोर दिया था।

    पीएम मोदी की यह यात्रा उनके 2017 के ऐतिहासिक दौरे के बाद दूसरी है। इस दौरे के दौरान दोनों नेता सुरक्षा, अर्थव्यवस्था, प्रौद्योगिकी और सांस्कृतिक सहयोग पर चर्चा कर रहे हैं।

    भारत और इजरायल के बीच फिल्म सह-निर्माण समझौता 2018 में हुआ था, जब नेतन्याहू भारत आए थे। इस समझौते को प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मंजूरी दी थी। समझौते के तहत सह-निर्मित फिल्मों को दोनों देशों में राष्ट्रीय उत्पादन का दर्जा मिला है, जिससे अंतरराष्ट्रीय फंडिंग, पटकथा लेखन, प्रतिभा और वितरण में सहयोग संभव हुआ।

    भारत सरकार के विदेश मंत्रालय के अनुसार, इस समझौते से दोनों देशों के रचनात्मक, तकनीकी, वित्तीय और मार्केटिंग संसाधनों का साझा उपयोग किया जा सकता है। सह-निर्मित फिल्में दोनों देशों के फिल्म समारोहों में घरेलू फिल्म की तरह भाग ले सकती हैं और निर्माण तथा पोस्ट-प्रोडक्शन में प्रोत्साहन भी मिलता है।

    यह समझौता कलाकारों और तकनीकी कर्मियों के बीच रोजगार सृजन में सहायक साबित हो रहा है। इससे कला-संस्कृति का आदान-प्रदान बढ़ा है और दोनों देशों के लोगों के बीच सद्भावना मजबूत हुई है।

    2018 में भारत यात्रा के दौरान ‘शालोम बॉलीवुड’ कार्यक्रम में नेतन्याहू ने Amitabh Bachchan और Imtiaz Ali समेत अन्य सितारों से मुलाकात की थी। उन्होंने इजरायल में बॉलीवुड फिल्मों के लिए न्योता भी दिया था और वादा किया कि वहां बॉलीवुड फिल्में बढ़ेंगी।

    सुरक्षा, कृषि, ऊर्जा, विज्ञान और फार्मास्युटिकल्स के क्षेत्र में सहयोग के साथ-साथ फिल्म उद्योग में यह समझौता भारत-इजरायल संबंधों को नई ऊँचाई पर ले जा रहा है। दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं और सांस्कृतिक, तकनीकी तथा आर्थिक सहयोग में भी विस्तार हुआ है।

  • 4 राज्यों में 5 राज्यसभा सीट जीत सकती है कांग्रेस, इन उम्मीदवारों को मिल सकता है मौका

    4 राज्यों में 5 राज्यसभा सीट जीत सकती है कांग्रेस, इन उम्मीदवारों को मिल सकता है मौका


    नई दिल्ली। दस राज्यों में होने वाले राज्यसभा चुनावों में 37 सीटों के लिए दावेदारी तेज हो गई है। सबसे ज्यादा चुनौती कांग्रेस के सामने है क्योंकि उसके पास सीटें कम और दावेदार अधिक हैं। पार्टी को इस चुनाव में कुल पांच से छह सीटों की उम्मीद है। सूत्रों के अनुसार कांग्रेस को छत्तीसगढ़ हिमाचल प्रदेश हरियाणा और तेलंगाना में कुल पांच सीटें मिल सकती हैं। इसके अलावा सहयोगी दलों के साथ तालमेल के जरिए तमिलनाडु में भी एक सीट पर दावेदारी संभव है।

    राज्यवार स्थिति

    छत्तीसगढ़: सत्ता से बाहर होने के कारण कांग्रेस को यहां दो की बजाय केवल एक सीट मिल सकती है। आदिवासी नेता फूलो देवी नेताम को मौका मिलने की संभावना है। हालांकि पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और टीएस सिंहदेव भी इस सीट के दावेदार हैं। हिमाचल प्रदेश: पार्टी सत्ता में होने के कारण यहां एक सीट जीतने की स्थिति में है। पिछली बार क्रॉस वोटिंग के कारण हार हुई थी। इस बार पार्टी स्थानीय नेता प्रतिभा सिंह को मैदान में उतार सकती है।

    हरियाणा: पार्टी को एक सीट मिलने की संभावना है। उम्मीदवार चयन में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा की अहम भूमिका रहेगी। इसके लिए पूर्व सांसद राजबब्बर और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष उदयभान पर विचार चल रहा है। तेलंगाना: कांग्रेस सत्ता में है और यहां दो सीटें जीतने की संभावना है। इसके तहत उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार बी सुदर्शन रेड्डी के लिए वादा पूरा किया जा सकता है। इसके साथ अभिषेक मनु सिंघवी को दोबारा राज्यसभा भेजने पर विचार है।

    तमिलनाडु: कांग्रेस ने डीएमके के साथ एक सीट पर चर्चा की है। सकारात्मक संकेत मिलने पर यहां भी पार्टी एक प्रत्याशी घोषित कर सकती है। असम: पार्टी अकेले कोई सीट जीतने में सक्षम नहीं है। एआईयूडीएफ का समर्थन मिलने पर एक सीट मिल सकती है लेकिन विधानसभा चुनाव के मद्देनजर कांग्रेस अभी सावधानी बरत रही है।  कुल मिलाकर कांग्रेस के लिए इस बार का राज्यसभा चुनाव संतुलन बनाने और सहयोगियों के साथ तालमेल साधने की चुनौती लेकर आया है।

  • NCERT किताब विवाद: सुप्रीम कोर्ट में न्यायपालिका पर अध्याय पर गुस्सा, सीजेआई सूर्यकांत ने डायरेक्टर को नोटिस जारी किया

    NCERT किताब विवाद: सुप्रीम कोर्ट में न्यायपालिका पर अध्याय पर गुस्सा, सीजेआई सूर्यकांत ने डायरेक्टर को नोटिस जारी किया


    नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट में नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग NCERT की कक्षा 8 की किताब में न्यायपालिका पर जोड़ दिए गए अध्याय के विवाद पर सुनवाई गुरुवार को जारी रही। इस मामले में सीजेआई D.Y. Chandrachud / Surya Kant की बेंच के सामने एसजी Tushar Mehta ने बिना शर्त माफी मांगी।

    सुप्रीम कोर्ट ने इस विवादित अध्याय को “कैलकुलेटेड मूव” बताते हुए कहा कि इससे भारतीय न्यायपालिका की प्रतिष्ठा पर गंभीर चोट लगी है। सीजेआई सूर्यकांत ने टिप्पणी की, आज न्यायपालिका लहूलुहान है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि इसे ऐसे ही छोड़ दिया गया तो आम जनता और युवाओं के मन में न्यायपालिका की पवित्रता प्रभावित होगी।

    तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि किताब की 32 प्रतियां बाजार में चली गई थीं, जिन्हें वापस लिया जा रहा है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि पूरे अध्याय की टीम दोबारा समीक्षा करेगी। सीजेआई ने कहा कि यह मामूली मामला नहीं है, बल्कि न्यायपालिका की संस्थागत स्थिति को चुनौती देने वाला कदम है।

    सुप्रीम कोर्ट ने NCERT के डायरेक्टर को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया। अदालत ने कहा कि यह स्पष्ट नहीं कि क्या यह सोची-समझी चाल थी या संयोग, लेकिन न्यायपालिका पर भ्रष्टाचार का चित्रण संवैधानिक रूप से अनुचित है। जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने डिजिटल युग में हजारों प्रतियों के प्रसार को ध्यान में रखते हुए जांच की आवश्यकता बताई।

    सुनवाई के दौरान सीजेआई सूर्यकांत ने संविधान निर्माताओं की मेहनत का उल्लेख किया और कहा कि तीनों स्तंभों की स्वायत्तता सुनिश्चित करने में गहरी सजगता बरती गई थी। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इस तरह की सामग्री युवाओं तक पहुंचती रही तो न्यायिक पद की पवित्रता खतरे में पड़ जाएगी।

    सीनियर एडवोकेट विकास सिंह ने कहा कि पूरे तंत्र की व्यापक समस्याओं का कोई जिक्र नहीं था, केवल एक व्यक्ति को चुन लिया गया। वहीं कपिल सिब्बल ने पूछा कि राजनेताओं और नौकरशाही का क्या जिक्र है। न्यायपालिका की प्रतिष्ठा को सुरक्षित रखने और पाठ्यपुस्तक में सुधार के लिए सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट रूप से NCERT पर गहन समीक्षा और जवाब देने का निर्देश दिया।

    इस सुनवाई में यह भी तय किया गया कि भविष्य में इस तरह की गलतियों से बचने के लिए जिम्मेदार व्यक्तियों की जवाबदेही सुनिश्चित की जाएगी। SC ने कहा कि कार्रवाई सिर्फ पब्लिक रिप्रेसेंटेशन के लिए नहीं बल्कि न्यायपालिका की प्रतिष्ठा और संस्थागत मूल्य के लिए भी जरूरी है।

  • सुप्रीम कोर्ट ने माना रूह अफजा को फ्रूट ड्रिंक, टैक्स विवाद खत्म, जाने क्‍या दिया फैसला?

    सुप्रीम कोर्ट ने माना रूह अफजा को फ्रूट ड्रिंक, टैक्स विवाद खत्म, जाने क्‍या दिया फैसला?


    नई दिल्ली। भारत में गर्मियों का लोकप्रिय पेय रूह अफ़जा अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद स्पष्ट रूप से फ्रूट ड्रिंक के रूप में मान्यता प्राप्त कर चुका है। लंबे समय से चल रही टैक्स विवाद में बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि रूह अफ़जा को सिर्फ इसलिए उच्च टैक्स वाले ब्रैकेट में नहीं रखा जा सकता क्योंकि इसे शरबत के रूप में बेचा जाता है।

    जस्टिस बीवी नागरत्ना और आर महादेवन की बेंच ने सुनवाई के दौरान यह स्पष्ट किया कि रूह अफ़जा फलों से बनाया जाता है और इसे केवल पानी में मिलाकर पीया जाता है। इसलिए इसे टैक्स कानून के तहत फ्रूट ड्रिंक माना जाएगा।

    विवाद की जड़

    यह मामला हमदर्द वक्फ लैबोरेटरीज की अपील पर सुना गया। सवाल यह था कि रूह अफ़जा, जिसमें केवल 10% फ्रूट जूस होता है और जिसे इनवर्ट शुगर सिरप व हर्बल डिस्टिलेट के साथ मिलाया जाता है, कानूनी रूप से फ्रूट ड्रिंक कहलाया जा सकता है या नहीं।

    इलाहाबाद हाईकोर्ट और टैक्स अधिकारियों के 2018 के फैसलों को सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिया। इन फैसलों में रूह अफ़जा को उत्तर प्रदेश वैल्यू एडेड टैक्स एक्ट के तहत 12.5% टैक्सेबल अनक्लासिफाइड आइटम के रूप में देखा गया था।

    सुप्रीम कोर्ट का आदेश

    सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि रूह अफ़जा UPVAT एक्ट की शेड्यूल II पार्ट A की एंट्री 103 के तहत फ्रूट ड्रिंक/प्रोसेस्ड फ्रूट प्रोडक्ट के रूप में आएगा। इस श्रेणी पर 1 जनवरी 2008 से 31 मार्च 2012 तक 4% रियायती VAT दर लागू होती थी।

    मामले में अधिकारियों ने फूड सेफ्टी रेगुलेशन का हवाला देते हुए कहा था कि फ्रूट सिरप में कम से कम 25% फ्रूट जूस होना चाहिए। चूंकि रूह अफ़जा में केवल 10% जूस होता है, इसलिए इसे नॉन-फ्रूट सिरप बताया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि फूड सेफ्टी कानून टैक्सिंग कानून की व्याख्या को नियंत्रित नहीं कर सकता।

  • एमपी में गर्मी का असर शुरू, 28 जिलों में तापमान 30°C पार, 2 मार्च से करवट लेगा मौसम

    एमपी में गर्मी का असर शुरू, 28 जिलों में तापमान 30°C पार, 2 मार्च से करवट लेगा मौसम


    भोपाल। मध्य प्रदेश में ओले और बारिश का दौर थमने के बाद बुधवार को गर्मी का असर बढ़ गया। भोपाल इंदौर उज्जैन ग्वालियर जबलपुर समेत प्रदेश के 28 जिलों में दिन का तापमान 30 डिग्री सेल्सियस के पार पहुँच गया। मौसम विभाग के अनुसार 2 मार्च से नया सिस्टम सक्रिय होगा जिससे कुछ जिलों में बारिश की संभावना बनी है।

    फरवरी में मौसम ने चार बार मिजाज बदला। महीने की शुरुआत में प्रदेश में दो बार ओले बारिश और आंधी आई थी जिससे फसलों को नुकसान हुआ। प्रभावित फसलों का सर्वे भी कराया गया था। तीसरी बार 18 फरवरी को प्रदेश में बारिश हुई 19-21 फरवरी तक इसका असर जारी रहा। चौथी बार 23-24 फरवरी को भी ओले-बारिश का दौर देखने को मिला।

    बुधवार को अधिकांश जिलों में दिन गर्म रहा कुछ जगहों पर बादल छाए रहे। मौसम विभाग ने बताया कि भोपाल इंदौर जबलपुर उज्जैन ग्वालियर बैतूल दतिया धार गुना नर्मदापुरम खंडवा खरगोन रतलाम श्योपुर शाजापुर राजगढ़ दमोह खजुराहो मंडला नरसिंहपुर नौगांव सागर सतना सिवनी सीधी टीकमगढ़ उमरिया में अधिकतम तापमान 30 डिग्री या उससे अधिक रहा। निमाड़ी खरगोन और खंडवा में पारा 34 डिग्री के पार पहुँच गया जबकि उज्जैन में 33.5 डिग्री दर्ज किया गया।

    रात का तापमान भी बढ़ा है। कटनी के करौंदी में न्यूनतम तापमान 9.1 डिग्री और शहडोल के कल्याणपुर में 9.5 डिग्री दर्ज किया गया। भोपाल में 13.8 इंदौर में 14.2 ग्वालियर में 14.8 उज्जैन में 16.5 और जबलपुर में 14.5 डिग्री रहा। नर्मदापुरम में सबसे ज्यादा 18.2 डिग्री दर्ज किया गया। धार सिवनी नरसिंहपुर रतलाम और गुना में रात का तापमान 16 डिग्री से अधिक रहा।

    24 और 25 फरवरी को साइक्लोनिक सकुर्लेशन और ट्रफ की वजह से 20 से अधिक जिलों में तेज आंधी और बारिश आई थी कुछ जिलों में ओले भी गिरे। इस दौरान गेहूं और चने की फसलों पर असर पड़ा। मौसम विभाग ने बताया कि गुरुवार को मौसम साफ रहेगा और बारिश का कोई अलर्ट नहीं है। मौसम विभाग के अनुसार 2 मार्च से पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र में नया वेस्टर्न डिस्टरबेंस सक्रिय होगा जिसका असर प्रदेश में भी दिखाई दे सकता है।

  • सेमीफाइनल की राह मुश्किल लेकिन नामुमकिन नहीं, ऐसे पहुंच सकता है पाकिस्तान टी20 वर्ल्ड कप 2026 के अंतिम चार में

    सेमीफाइनल की राह मुश्किल लेकिन नामुमकिन नहीं, ऐसे पहुंच सकता है पाकिस्तान टी20 वर्ल्ड कप 2026 के अंतिम चार में


    नई दिल्ली । टी20 वर्ल्ड कप 2026 के सुपर-8 चरण में मुकाबला बेहद रोमांचक मोड़ पर पहुंच चुका है और ग्रुप-2 में समीकरण हर मैच के साथ बदल रहे हैं। न्यूजीलैंड राष्ट्रीय क्रिकेट टीम ने अपने दूसरे सुपर-8 मुकाबले में श्रीलंका राष्ट्रीय क्रिकेट टीम को 61 रनों से हराकर न सिर्फ उन्हें टूर्नामेंट से बाहर कर दिया बल्कि सेमीफाइनल की अपनी दावेदारी भी मजबूत कर ली। इस जीत के साथ कीवी टीम 3 अंकों के साथ अंक तालिका में दूसरे स्थान पर पहुंच गई है। वहीं पाकिस्तान राष्ट्रीय क्रिकेट टीम अब भी दौड़ में है लेकिन उसकी किस्मत अब पूरी तरह दूसरों के नतीजों पर निर्भर हो चुकी है।

    न्यूजीलैंड और पाकिस्तान के बीच पहला सुपर-8 मुकाबला बारिश की वजह से रद्द हो गया था जिससे दोनों टीमों को एक-एक अंक मिला। इसके बाद न्यूजीलैंड ने श्रीलंका को हराकर खुद को बेहतर स्थिति में पहुंचा दिया। अब पाकिस्तान के सामने साफ समीकरण है उसे अपना आखिरी मैच हर हाल में जीतना ही होगा और वह भी बड़े अंतर से।

    पाकिस्तान का अगला मुकाबला 28 फरवरी को श्रीलंका से है। सेमीफाइनल की उम्मीद जिंदा रखने के लिए इस मैच में जीत अनिवार्य है। लेकिन उससे पहले 27 फरवरी को न्यूजीलैंड का सामना पहले ही सेमीफाइनल में पहुंच चुकी इंग्लैंड क्रिकेट टीम से होगा। अगर न्यूजीलैंड यह मुकाबला जीत जाती है तो पाकिस्तान बिना खेले ही टूर्नामेंट से बाहर हो जाएगा। ऐसे में पाकिस्तान की पहली उम्मीद इंग्लैंड की जीत पर टिकी है।

    मान लीजिए इंग्लैंड न्यूजीलैंड को हरा देता है तब भी पाकिस्तान का काम आसान नहीं होगा। उस स्थिति में न्यूजीलैंड और पाकिस्तान दोनों के 3-3 अंक हो सकते हैं और फैसला नेट रन रेट से होगा। फिलहाल न्यूजीलैंड का नेट रन रेट +3.050 है जबकि पाकिस्तान का -0.461। यह बड़ा अंतर है जिसे पाटने के लिए पाकिस्तान को श्रीलंका के खिलाफ बड़ी जीत दर्ज करनी होगी।

    समीकरणों के अनुसार अगर इंग्लैंड न्यूजीलैंड को 15 रन से हराता है तो पाकिस्तान को श्रीलंका के खिलाफ कम से कम 55 रन से जीत हासिल करनी होगी। वहीं अगर इंग्लैंड सिर्फ 1 रन से जीतता है तो पाकिस्तान को 69 रन से जीत दर्ज करनी पड़ेगी। यानी इंग्लैंड की जीत जितनी छोटी होगी पाकिस्तान पर उतना ही ज्यादा दबाव बढ़ेगा।

    सलमान आगा की अगुवाई वाली पाकिस्तान टीम के लिए यह चुनौती कठिन जरूर है लेकिन असंभव नहीं। टीम को न सिर्फ शानदार बल्लेबाजी और गेंदबाजी करनी होगी बल्कि मैच की रणनीति भी नेट रन रेट को ध्यान में रखकर बनानी होगी। अब नजरें इंग्लैंड बनाम न्यूजीलैंड मुकाबले पर टिकी हैं

  • 425 करोड़ के बजट के साथ ‘लव एंड वॉर’ बनी भंसाली की सबसे महंगी फिल्म, स्टार्स की फीस अलग

    425 करोड़ के बजट के साथ ‘लव एंड वॉर’ बनी भंसाली की सबसे महंगी फिल्म, स्टार्स की फीस अलग


    नई दिल्ली । हिंदी सिनेमा के भव्य फिल्मकार संजय लीला भंसाली की बहुप्रतीक्षित फिल्म लव एंड वॉर लगातार सुर्खियों में बनी हुई है। जैसे-जैसे फिल्म से जुड़े अपडेट सामने आ रहे हैं वैसे-वैसे इसकी भव्यता और पैमाना और भी बड़ा होता जा रहा है। ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक इस फिल्म का बजट अब 400 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर चुका है और यह करीब 425 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। खास बात यह है कि इस भारी-भरकम बजट में फिल्म के तीनों लीड सितारों की फीस शामिल नहीं है।

    फिल्म में आलिया भट्ट रणबीर कपूर और विकी कौशल मुख्य भूमिकाओं में नजर आने वाले हैं। इन तीनों सितारों की मौजूदगी ने फिल्म को पहले ही चर्चा का केंद्र बना दिया था लेकिन अब इसका बढ़ता बजट इसे इंडस्ट्री की सबसे महंगी फिल्मों की कतार में खड़ा कर रहा है। बताया जा रहा है कि शुरुआत में फिल्म को लगभग 350 करोड़ रुपये में पूरा करने की योजना थी मगर बार-बार प्रोडक्शन शेड्यूल बढ़ने विशाल सेट्स और तकनीकी स्तर पर बड़े पैमाने पर काम होने के कारण लागत तेजी से बढ़ती चली गई।

    भंसाली अपनी परफेक्शन के लिए मशहूर हैं। वे तब तक संतुष्ट नहीं होते जब तक हर फ्रेम उनके विजन के अनुरूप न हो। यही कारण है कि फिल्म की शूटिंग अवधि भी बढ़ा दी गई। पहले इसे 120 दिनों में पूरा करने का लक्ष्य था लेकिन अब यह शेड्यूल बढ़कर लगभग 175 दिनों का हो गया है। इसमें भव्य डांस सीक्वेंस बड़े एरियल एक्शन सीन और भारी-भरकम विजुअल इफेक्ट्स शामिल हैं। हाई-एंड वीएफएक्स पर काम होने के कारण पोस्ट-प्रोडक्शन में भी अधिक समय लग रहा है जिससे रिलीज में देरी हो रही है।

    दिलचस्प पहलू यह है कि फिल्म के बजट में तीनों सितारों की पारंपरिक फीस शामिल नहीं है। रिपोर्ट्स के अनुसार रणबीर आलिया और विकी ने प्रॉफिट शेयरिंग मॉडल अपनाया है। यानी वे फिल्म की कमाई से हिस्सा लेंगे। इससे शुरुआती लागत का बड़ा हिस्सा सीधे प्रोडक्शन वैल्यू पर खर्च किया गया है।

    हालांकि मेकर्स ने रिलीज से पहले ही अच्छी रिकवरी कर ली है। फिल्म के डिजिटल राइट्स Netflix को लगभग 130 करोड़ रुपये में बेचे गए हैं जबकि सैटेलाइट राइट्स से करीब 80 करोड़ रुपये हासिल हुए हैं। इस तरह लगभग 200 करोड़ रुपये पहले ही सुरक्षित कर लिए गए हैं जिससे प्रोजेक्ट को वित्तीय मजबूती मिली है।

    रिलीज डेट को लेकर अभी आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है लेकिन खबरों के मुताबिक फिल्म 2026 में सिनेमाघरों में दस्तक दे सकती है। रणबीर कपूर के व्यस्त रिलीज शेड्यूल को भी देरी की एक वजह माना जा रहा है क्योंकि उनकी बड़ी फिल्म रामायण पार्ट 1 भी इसी वर्ष दिवाली पर रिलीज होने वाली है।

    लव एंड वॉर की एक और खास बात यह है कि रणबीर और विकी इससे पहले संजू में साथ नजर आ चुके हैं जबकि आलिया और विकी राज़ी में साथ काम कर चुके हैं। रणबीर और आलिया की जोड़ी ब्रह्मास्त्र पार्ट 1: शिवा में दर्शकों को पसंद आई थी। अब पहली बार ये तीनों सितारे एक साथ बड़े पर्दे पर दिखाई देंगे जिससे उम्मीदें और भी बढ़ गई हैं।

  • इजरायल में पीएम मोदी को रिसीव करने भगवा ड्रेस पहनकर गईं नेतन्याहू की पत्नी

    इजरायल में पीएम मोदी को रिसीव करने भगवा ड्रेस पहनकर गईं नेतन्याहू की पत्नी

    तेलअवीव। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस समय इजरायल दौरे पर हैं। इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू अपनी पत्नी सारा नेतन्याहू के साथ उन्हें रिसीव करने पहुंचे। इस दौरान एक बेहद दिलचस्प नजारा देखने को मिला। असल में नेतन्याहू की पत्नी भी भगवा ड्रेस पहनकर आई हुई थीं।
    वह पीएम मोदी से हाथ मिलाकर उनका स्वागत कर रही थीं। इसी दौरान नेतन्याहू ने अपनी पत्नी सारा के ड्रेस के कलर की तरफ पीएम मोदी का ध्यान दिलाया। साथ ही पीएम मोदी की सदरी के पॉकेट पर लगे कपड़े के रंग की तरफ भी इशारा किया। यह देखते ही पीएम मोदी भी खुश हो गए और हंसते हुए बोले-दोनों का रंग भगवा ही है।

    इजरायल की दूसरी यात्रा
    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी दो दिन की इजरायल यात्रा पर बुधवार को तेल अवीव के बेन गुरियन हवाई अड्डे पहुंचे। यहां पर प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अपनी पत्नी सारा नेतन्याहू के साथ उनका गर्मजोशी से स्वागत किया।

    हवाई अड्डे पर पीएम मोदी का पारंपरिक स्वागत किया गया। उनके पहुंचने पर नेतन्याहू ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहाकि इजरायल में आपका स्वागत है , मेरे प्रिय मित्र नरेन्द्र मोदी। बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इजरायल की यह दूसरी यात्रा है। इससे पहले वह 2017 में इजरायल गए थे।

    इजरायली संसद को भी करेंगे संबोधित
    प्रधानमंत्री का दो दिन की यात्रा के दौरान नेतन्याहू के साथ द्विपक्षीय वार्ता के अलावा इजरायली संसद नेसेट को भी संबोधित करने का कार्यक्रम है। वह भारतीय समुदाय के लोगों से भी बात करेंगे। उनका इजरायल के राष्ट्रपति आइजैक हर्जोग से भी शिष्टाचार भेंट करेंगे।
    इससे पहले पीएम मोदी ने सुबह रवाना होने से पहले कहा था कि उनकी इजरायल यात्रा से दोनों देशों के बीच संबंध और मजबूत होंगे। साथ ही साझा विजन से दोनों देशों का भविष्य खुशहाल होगा।

    उन्होंने कहाकि भारत और इजरायल के बीच मजबूत और कई तरह की रणनीतिक साझेदारी है, जिसमें हाल के सालों में ज़बरदस्त बढ़ोतरी और तेजी देखी गई है।

    पीएम मोदी ने कहाकि मैं प्रधानमंत्री नेतन्याहू के साथ अपनी बातचीत का इंतज़ार कर रहा हूं। इसका मकसद विज्ञान और प्रौद्योगिकी, नवाचार, कृषि, जल प्रबंधन, प्रौद्योगिकी, रक्षा और सुरक्षा, व्यापार तथा निवेश के साथ ही लोगों के बीच संबंधों सहित अलग-अलग क्षेत्रों में हमारे सहयोग को और मजबूत करना है। हम आपसी फायदे क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी अपने विचार साझा करेंगे।